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अविलंब सुधारी जाये सड़के -चेंबर कलेक्टर से मिले चेंबर के पदाधिकारी

सतना सतना शहर की अधिकांश मुख्य सड़कों की हालत बहुत ही दयनीय हालत में है नगर निगम एवं स्मार्ट सिटी के अड़ियल रवैया की वजह से आम जनता एवं व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है व्यापार ठप्प होता जा रहा है खराब सड़कों की वजह से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं ऑटो रिक्शा पलट जाते हैं लोगों के हाथ पैर टूट रहे हैं टूटी हुई सड़कों से धूल उड़ती है लोग सांस की बीमारी से जूझ रहे हैं  विंध्य चेंबर के अध्यक्ष सतीश सुखेजा कनिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक अग्रवाल मंत्री हरिओम गुप्ता ने सतना कलेक्टर से मिलकर शहर की सड़कों की समस्याओं के बारे में अवगत कराया एक दिन पहले चेंबर के पदाधिकारी  सांसद गणेश सिंह से भी मिलकर शहर की समस्याओं के बारे में विस्तार से बताया था  पन्नीलाल चौक से सिटी कोतवाली तक संचालित सीवर लाइन निर्माण कार्य बहुत ही कछुआ चाल से चल रहा है जिससे आम जनता एवं व्यापारी परेशान हो रहे है गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध तरीके से कार्य नहीं हो पा रहे है मार्च में ही भगवान झूलेलाल जी की जयंती है और 27 मार्च को भगवान श्री राम की शोभायात्रा इसी मार्ग से निकालनी है  विंध्य व्यापार मेला के लिए मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा की गई 8 एकड़ जमीन की भी चेंबर पदाधिकारियों ने मांग की जिस पर कलेक्टर सतीश कुमार एस जी ने हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

भोजशाला से कमाल मौला मस्जिद तक: धार में हिंदू-मुस्लिम टकराव की जड़ क्या है?

धार मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला परिसर से जुड़ी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद एक बार फिर यह विवाद चर्चा में आ गया है। सैकड़ों सालों से हिंदू और मुसलमान इस पर अपना-अपना दावा पेश करते रहे हैं। इस बीच हाई कोर्ट में एएसआई ने जो रिपोर्ट पेश की है उसमें कहा गया है कि कमाल मौला मस्जिद को मंदिर के पुराने अवशेषों से बनाया गया है। आइए नजर डालते हैं भाजशाला परिसर के एक साल के पुराने इतिहास पर। 1034 ईस्वी में भोजशाला की स्थापना 1010 से 1055 तक मालवा क्षेत्र में राजा भोज का शासन था। इस दौरान उन्होंने 1034 में सरस्वती सदन की स्थापना की, जिसे भोजशाला भी कहा जाता है। यहां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित की गई थी। मुस्लिम शासकों का आगमन और कमाल मौला 1305-1531- इस कालखंड में अलाउद्दीन खिलजी और दिलावर खान गोरी ने महालकदेव और गोलादेव को हराकर धार पर कब्जा कर लिया। उन्होंने राजा भोज के समय बने कई मंदिरों और स्मारकों को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद यहां स्वतंत्र मालवा सत्नत की स्थापना की गई और भोजशाला के अधिकांश हिस्से को भी ध्वस्त कर दिया गया। यहीं 1459 में मौलना कमालुद्दीन का मकबरा भी बनाया गया जिन्हें कमाल मौला के नाम से भी जाना जाता है। कमाल मौला का वास्तविक नाम शेख कमल अल-दीन था। वह मालवा में 14वीं शताब्दी के प्रमुख सूफी संत थे। निजामुद्दीन औलिया के प्रमुख शिष्य रहे कमाल मौला का देहांत 1331 में हुआ था। कहा जाता है कि औलिया ने उन्हें मालवा क्षेत्र में धार और आसपास के इलाकों में इस्लाम के प्रचार के लिए भेजा गया था। कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के चेयरमैन अब्दुल समद कहते हैं कि कमाल मौला मकबरा मस्जिद और विवादित भोजशाला के करीब है। कैसे वाग्देवी की प्रतिमा पहुंच गई लंदन 1732- में धार पर मराठा शासकों का कब्जा हो गया। 1875 में भोजशाला के पास खुदाई के दौरान वाग्देवी की प्रतिमा मिली, जिसे 1880 में एक अंग्रेज अधिकारी लेकर लंदन चला गया। तब से वाग्देवी की प्रतिमा लंदन के एक म्यूजियम में है। फिर कैसे आई मौजूदा व्यवस्था 1909 में धार शासकों ने प्राचीन स्मारक कानून 1904 लागू किया और धार दरबार गैजेट जारी करते हुए इसे संरक्षित स्मारक घोषित किया। 1934 में धार के शासकों ने यहां से अवैध अतिक्रमण हटाते हुए भोजशाला का साईनबोर्ड लगाया। 1934 में तब के धार के दीवान के नादकर ने भोजशाला को कमाल मौलाना मस्जिद घोषित किया और मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी। हिंदू मुस्लिम टकराव और ASI के हवाले भोजशाला 1944 में मौलाना कमलुद्दीन का पहला उर्स हुआ और हिंदू-मुसलमानों के बीच इस स्थल को लेकर टकराव बढ़ गया। 1952 में हिंदुओं ने बसंत पंचमी पर भोज उत्सव का आयोजन किया। 1952 में एएसआई ने भोजशाला को संरक्षित घोषित किया। 1988 में भी मरम्मत के दौरान यहां एक मूर्ति मिली थी। 1997 में धार के कलेक्टर ने शुक्रवार को मुसलमानों को नमाज और बसंत पंचमी पर हिंदुओं को पूजा की अनुमति दी। अप्रैल 2003 में एएसआई ने हिंदुओं को फूल और अक्षत से हर मंगलवार को पूजा की अनुमति दी, जबकि मुसलमान शुक्रवार को नमाज अदा कर सकते हैं। जब शुक्रवार के दिन आई बसंत पंचमी 2006 में शुक्रवार के दिन बसंत पंचमी होने की वजह से कर्फ्यू लागू करना पड़ा। कड़ी सुरक्षा के बीच दोनों समुदायों ने अपने आयोजन किए। इसके बाद 2013 में भी जब ऐसा मौका आया तो कड़ी सुरक्षा और तनाव के बीच पूजा और नमाज हुई। हालांकि,तब लोगों ने आरोप लगाया कि आम लोगों को वहां नहीं जाने दिया गया और पुलिसकर्मियों ने ही परंपरा निभाई। 2016 में भी जब ऐसा मौका आया तो वहां दोनों समुदाय के लोग आपस में भिड़ गए थे। मार्च 2024 में सर्वेक्षण का आदेश मध्य प्रदेश की इंदौर बेंच ने मार्च 2024 में भोजशाला परिसर में सर्वे का आदेश दिया। इसे छह महीने सप्ताह में पूरा करना था। मार्च 2024 में एएसआई ने सर्वे की शुरुआत की जो 98 दिनों तक चला। 15 जुलाई 2024 को एएसआई ने 2189 पन्नों की सर्वे रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में पेश की। जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को एएसआई रिपोर्ट को खोलने और सभी पक्षों को देने को कहा। इके बाद हाई कोर्ट ने रिपोर्ट की समीक्षा शुरू की और सभी पक्षों को दो सप्ताह में अपनी आपत्तियां, विचार, सलाह, सिफारिश आदि दोनों को कहा है।

मध्य प्रदेश में गौशालाओं की देखरेख करेंगे ऑस्ट्रेलिया और दुबई की संस्थाएं, 3 माह में सड़कों पर गायें नहीं दिखेंगी

भोपाल मध्य प्रदेश में सड़कों पर घूम रहे गौवंश को स्थायी आसरा देने का वर्किंग प्लान और उसकी समय सीमा तय हो गई है. प्रदेश की मोहन सरकार में पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने विधानसभा में इसकी जानकारी दी है. विधानसभा में कांग्रेस नेता अजय सिंह और कैलाश कुशवाहा द्वारा प्रदेश में निराश्रित पशुओं का मुद्दा ध्यानाकर्षण में उठाया था. चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को सुझाव दिया कि गौपालकों को प्रति गौवंश 40 रुपए के हिसाब से राशि दी जानी चाहिए. मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि मध्य प्रदेश में गौशालाओं के संचालन के लिए दुबई और ऑस्ट्रेलिया की संस्थाएं भी आगे आई हैं. कामधेनु निवास के लिए 7 स्थानों पर जमीन चिन्हित पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने कहा कि "सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित गौवंश के लिए प्रदेश में स्वावलंबी गौशालाओं कामधेनु निवास के लिए प्रदेश में 29 स्थान चयनित कर लिए गए हैं. उधर 7 स्थानों पर राजस्व विभाग द्वारा पशुपालन विभाग को जमीन आवंटित कर दी गई है. इसके तहत जबलपुर में 461 एकड़, रायसेन में 320 एकड़, सागर में 411 एकड़, अशोकनगर में 293 एकड, खरगौन में 133 और रीवा में 135 एकड़ भूमि आवंटन सहित 7 स्थान पर काम चल रहा है." उन्होंने कहा कि "अगले 10 दिनों में गौशाला बनाने के लिए अनुबंध की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जाएगी. जल्द ही इनका भूमि पूजन किया जाएगा. मंत्री ने दावा किया कि देश में यह पहली योजना है, जिसमें निराश्रित गौवंश को रखा जाएगा. मंत्री ने कहा कि इनमें कई गौशालाएं ऐसी होंगी, जिसमें 20 हजार गौवंश को एक स्थान पर रखा जाएगा." दुबई, ऑस्ट्रेलिया की संस्था ने भी डाला टेंडर मंत्री लखन पटेल ने कहा कि "स्वावलंबी गौशालाओं के संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है. टेंडर प्रकिया में ऑस्ट्रेलिया और दुबई की भी 2 संस्थाओं द्वारा हिस्सा लिया जा रहा है. टेंडर प्रक्रिया अगले एक माह में पूरी कर ली जाएगी. गौशालाओं को पूरी तरह से तैयार होने में 2 साल का वक्त लेगा. इसके बाद एक भी गौवंश सड़क पर दिखाई नहीं देगा." मंत्री ने सफाई दी कि "गौशालाओं को पूरी तरह से बनने के पहले ही गौवंशों को इनमें पहुंचाना शुरू कर दिया जाएगा. बरसात के पहले सभी गौवंशों को इनमें पहुंचा दिया जाएगा. इसके लिए जरूरी सुविधाएं जल्द से जल्द की जाएंगी."     मंत्री को नेता प्रतिपक्ष का सुझाव आया पसंद ध्यानाकर्षण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि "आमतौर पर दूध देना बंद कर देने के बाद किसान ही गौवंश को छोड़ देता है. जब सरकार गौशालाओं को प्रति गाय के हिसाब से 40 रुपए प्रतिदिन की राशि दे रही है, तो सीधी किसानों को यह राशि क्यों नहीं दी जाती. एआई के दौर में ऐसे पशुपालकों की निगरानी भी की जा सकती है." जवाब में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सुझाव की तारीफ करते हुए कहा कि इस पर सरकार विचार करेगी.

मध्य प्रदेश में अब तक केवल बालाघाट का ‘चिन्नौर’ धान और रीवा का ‘सुंदरजा’ आम को मिला जीआइ टैग

भोपाल  मध्य प्रदेश के दो पारंपरिक कृषि उत्पादों बालाघाट के चिन्नौर धान और रीवा के सुंदरजा आम को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिल गया है. इससे इन उत्पादों की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है. विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित जवाब में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के माध्यम से इन दोनों उत्पादों का पंजीयन कराया गया. चिन्नौर धान के लिए 60 किसानों और सुंदरजा आम के लिए 20 किसानों का समिति में पंजीयन किया गया है। ‘किसी भी GI टैग को निरस्त नहीं किया गया’ मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में किसी भी उत्पाद का जीआई टैग निरस्त नहीं किया गया है. लुवाई धान, टर्री भरी धान और सातिया धान को भी जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया जारी है. वहीं चार अन्य उत्पादों बैंगनी अरहर, नागफनी कुटकी, सिताही कुटकी और महाकौशल क्षेत्रीय धान को जीआई रजिस्ट्री की वेबसाइट पर विज्ञापित किया जा चुका है। बासमती को लेकर कानूनी विवाद मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग दिलाने के प्रयास 2008 से जारी हैं. जीआई रजिस्ट्री चेन्नई ने पहले मध्यप्रदेश को बासमती के दायरे में शामिल नहीं किया था. बाद में प्रदेश सरकार की आपत्ति पर संशोधित आवेदन की प्रक्रिया चली. यह मामला मद्रास हाई कोर्ट तक पहुंचा, जहां 27 फरवरी 2020 को याचिका निरस्त कर दी गई थी. हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए मामले में आगे की सुनवाई का रास्ता साफ किया है. प्रदेश सरकार का कहना है कि बासमती को जीआई टैग दिलाने के लिए कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर प्रयास जारी रहेंगे, ताकि किसानों को इसका लाभ मिल सके। क्या होता है जीआइ टैग किसी भी रीजन का जो क्षेत्रीय उत्पाद होता है उससे उस क्षेत्र की पहचान होती है। उस उत्पाद की ख्याति जब देश-दुनिया में फैलती है तो उसे प्रमाणित करने के लिए एक प्रक्रिया होती है जिसे जीआइ टैग यानी जीओ ग्राफिकल इंडीकेटर कहते हैं। जिसे हिंदी में भौगोलिक संकेतक नाम से जाना जाता है। बालाघाट के 60, रीवा के 20 किसान पंजीकृत प्रदेश में उत्पादित बासमती धान के लिए चिन्नौर के लिए वर्ष 2008 से प्रयास किए जा रहे थे। जीआइ टैग प्राप्त बालाघाट चिन्नौर धान उत्पाद के लिए 60 किसानों का समिति में पंजीकरण किया गया है। रीवा सुंदरजा आम के लिए 20 किसानों का समिति में पंजीकरण कराया गया। 

वार्ड 12 बदखर में 72.84 लाख की लागत से तालाब सौंदर्यीकरण कार्य का भूमि पूजन

सतना नगर के वार्ड क्रमांक 12, बदखर में 72.84 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित तालाब सौंदर्यीकरण कार्य का विधिवत भूमि पूजन महापौर योगेश कुमार ताम्रकार द्वारा किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। महापौर ने कहा कि यह परियोजना न केवल क्षेत्र की सुंदरता बढ़ाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण को भी मजबूती प्रदान करेगी। तालाब को एक स्वच्छ, सुरक्षित एवं आकर्षक सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने बताया कि नगर के प्रत्येक वार्ड में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार कर विकास की रोशनी अंतिम पंक्ति तक पहुंचाना नगर निगम का लक्ष्य है। कार्यक्रम में नगर निगम अध्यक्ष राजेश चतुर्वेदी, सोहावल जनपद उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह बराज, वार्ड पार्षद माया देवी कोल, विशिष्ट अतिथि राकेश अग्निहोत्री, पिछड़ा वर्ग मोर्चा अध्यक्ष रामपाल यादव, पूर्व मंडल अध्यक्ष अरविन्द सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में वार्डवासी उपस्थित रहे।

खरगोन में अवैध शराब का जखीरा पकड़ा, 170 पेटी के साथ तस्करी का खुलासा

खरगोन जिले की पुलिस आपरेशन प्रहार के तहत नशे के अवैध कारोबार पर लगातार कार्रवाई कर रही है। बावजूद इसके नशे के तस्कर बाज नहीं आ रहे हैं। अब जिले की खलटाका पुलिस ने नेशनल हाइवे पर पिकअप वाहन से देशी-विदेशी शराब का अवैध परिवहन पकड़ा है। मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई में पुलिस ने पिकअप वाहन से 170 पेटियों में भरी 1980 लीटर अवैध शराब जब्त की है। पिकअप वाहन क्रमांक एमपी 11 जी 3398 में शराब का अवैध परिवहन कसरावद की ओर से सेंधवा ले जाने के लिए हो रहा था। पुलिस ने वाहन चालक को गिरफ्तार कर शराब की पेटियां और पिकअप वाहन जब्त किया है। जब्त शराब की की मत 5.07 लाख रुपए व पिकअप वाहन की कीमत 8 लाख रुपए बताई गई है। खलटाका चौकी प्रभारी मिथुन चौहान ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति पिकअप वाहन से कसरावद से सेंधवा की भारी मात्रा में अवैध शराब का परिवहन कर रहा है। इस बात की सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई। एसपी रविंद्र वर्मा के निर्देश पर बलकवाड़ा थाना प्रभारी सागर चौहान के नेतृत्व में टीम गठित की गई। इस पर भुसावल-चित्तौड़गढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्राम पानवा के समीप नाकेबंदी की गई। मुखबीर के बताए अनुसार पिकअप वाहन आई तो उसे घेराबंदी कर रोका गया। चेकिंग करने पर पाया कि पिकअप वाहन में शराब की पेटिंया भरी थी। वाहन चालक शराब परिवहन के संबंध में कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखा सका। वाहन चालक ने अपना नाम विकास पिता उपेंद्रसिंह चंद्रवंशी निवासी औरंगाबाद बिहार हालमुकाम धावलबेड़ी सेंधवा होना बताया। चेकिंग करने पर वाहन में 150 पेटी बीयर और 20 पेटी देशी प्लेन मदिरा की भरी पाई गई। आरोपित विकास को गिरफ्तार कर शराब की पेटियां व पिकअप वाहन जब्त किया गया। आरोपित के विरूद्ध आबकारी एक्ट में प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया है। चौकी प्रभारी चौहान ने बताया कि आरोपित से शराब कहां से लाई जा रही थी, कहां सप्लाय करना थी आदि नेटवर्क को लेकर पूछताछ की जाएगी।  

MP में प्रशिक्षु IPS अधिकारी को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी, पुलिस व्यवस्था में प्रशासनिक बदलाव के आदेश जारी

छतरपुर  छतरपुर  जिले की पुलिस व्यवस्था में एक अहम प्रशासनिक बदलाव किया गया है। छतरपुर में सेवाएं दे रहे प्रशिक्षु आईपीएस (IPS) अधिकारी लेखराज मीणा को अब ओरछा रोड थाना प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक अगम जैन ने आदेश जारी कर दिया है। यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जिले में विभिन्न गतिविधियों और कानून से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे मीणा जानकारी के मुताबिक, प्रशिक्षु आईपीएस लेखराज मीणा अब तक जिले में विभिन्न गतिविधियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। उनके कार्यशैली और अनुशासन को देखते हुए उन्हें महत्वपूर्ण थाना ओरछा रोड की कमान सौंपी गई है। ओरछा रोड थाना क्षेत्र शहर का संवेदनशील और व्यस्त इलाका माना जाता है, जहां कानून-व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहता है। ऐसे में एक युवा आईपीएस अधिकारी की तैनाती को विभाग ने सख्ती और बेहतर मॉनिटरिंग की दिशा में अहम कदम माना है। पुलिस अधीक्षक अगम जैन द्वारा आदेश जारी पुलिस अधीक्षक अगम जैन द्वारा जारी आदेश के बाद थाना स्तर पर पदभार ग्रहण करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही नए थाना प्रभारी क्षेत्र में भ्रमण कर आमजन से संवाद भी स्थापित करेंगे। युवा नेतृत्व से बढ़ी उम्मीदें.. शहर के सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने उम्मीद जताई है कि नए थाना प्रभारी अपराध नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और जनसुनवाई में तेजी लाएंगे। अब देखना होगा कि प्रशिक्षु आईपीएस लेखराज मीणा अपने कार्यकाल में ओरछा रोड थाना क्षेत्र में किस तरह की कार्यशैली और परिणाम प्रस्तुत करते हैं।

पुष्पराजगढ़ में आज मुख्यमंत्री कन्या विवाह सामूहिक विवाह समारोह का होगा आयोजन

राजेन्द्रग्राम  मध्यप्रदेश शासन के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के निर्देशों के पालन में कलेक्टर हर्षल पंचोली द्वारा जिले में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत सामूहिक विवाह कार्यक्रमों की तिथियां निर्धारित की गई हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के एमपीईबी ग्राउंड पुष्पराजगढ़ में सामूहिक विवाह का आयोजन किया जाएगा।    इस कार्यक्रम में नगरपालिका परिषद कोतमा तथा बिजुरी एवं नगर परिषद अमरकंटक सहित जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के ग्राम पंचायतों के वर-वधु सम्मिलित होंगे।

अभ्युदय जैन केस: हाईकोर्ट ने मां के खिलाफ एफआईआर की निरस्त, 360 दिन बाद अलका जैन को राहत

 ग्वालियर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने गुना के बहुचर्चित अभ्युदय जैन मृत्यु प्रकरण में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी मां अलका जैन के खिलाफ दर्ज एफआईआर और समस्त आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि केवल अनुमानों और संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति के विरुद्ध मुकदमा चलाना न्याय का उल्लंघन है। गौरतलब है कि 14 फरवरी 2025 को 14 वर्षीय अभ्युदय जैन का शव घर के बाथरूम में मिला था। घटना के बाद पुलिस ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर उसकी मां अलका जैन को संदेह के दायरे में लिया। 22 फरवरी को कोतवाली थाना में अपराध क्रमांक 115/2025 दर्ज किया गया और 8 मार्च को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। करीब 98 दिन न्यायिक हिरासत में रहने के बाद 17 जून को उन्हें जमानत मिली, लेकिन मामला अदालत में विचाराधीन रहा। इस बीच अभ्युदय के पिता अनुपम जैन ने पुलिस जांच पर असंतोष जताया। उनके आग्रह पर आईजी के निर्देश पर शिवपुरी डीएसपी अवनीत शर्मा के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया। एसआईटी ने भोपाल स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों से मेडिको-लीगल राय प्राप्त की। रिपोर्ट में मृत्यु का कारण फांसी पर लटकना बताया गया। इसके आधार पर एसआईटी ने 5 मई को अदालत में क्लोजर रिपोर्ट पेश कर अलका जैन को दोषमुक्त माना। हालांकि 9 मई 2025 को गुना की सीजेएम कोर्ट ने एसआईटी की रिपोर्ट खारिज कर दी और स्वयं संज्ञान लेते हुए हत्या तथा साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मुकदमा चलाने का आदेश दिया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए अलका जैन ने हाईकोर्ट का रुख किया। 9 फरवरी को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।  सुनाए गए निर्णय में हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत के निष्कर्ष अनुमानों और अटकलों पर आधारित थे, न कि ठोस और विधिसम्मत साक्ष्यों पर। अदालत ने माना कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में याचिकाकर्ता को दोषमुक्त किए जाने के बावजूद कार्यवाही जारी रखना विधि का दुरुपयोग होगा। न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 103 और 238 के तहत 9 मई 2025 के सीजेएम आदेश को रद्द करते हुए कोतवाली गुना में दर्ज अपराध से संबंधित सभी आगे की कार्यवाही समाप्त कर दी। करीब 360 दिनों तक हत्या के आरोपों और सामाजिक-मानसिक दबाव का सामना करने के बाद यह फैसला अलका जैन के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

उज्जैन के शिव मंदिर में 1.31 करोड़ के नोटों से सजावट, भगवान के मुकुट और माला भी नोटों से बनीं

उज्जैन  उज्जैन जिले के बुद्धेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि मेले के अवसर पर भगवान शिव का 1 करोड़ 31 लाख रुपए के नोटों से विशेष श्रृंगार किया गया है। मंदिर को नोटों की माला, मुकुट और लड़ियों से सजाया गया है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन गई है। मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि के बाद मेला आयोजित किया जाता है। इस बार मेला 14 फरवरी से शुरू हुआ है और 28 फरवरी को समापन होगा। नोटों से किया गया यह विशेष श्रृंगार 26 फरवरी तक रहेगा। सात कलाकारों ने तीन दिन में तैयार की सजावट मंदिर के पुजारी के अनुसार, नोटों की माला, मुकुट और लड़ियों को तैयार करने में सात कलाकारों की टीम को करीब तीन दिन का समय लगा।  पिछले सालों में भी नोटों से हुआ विशेष श्रृंगार मंदिर में पिछले चार वर्षों से नोटों से विशेष श्रृंगार की परंपरा जारी है। 2021 में 7 लाख, 2022 में 11 लाख, 2023 में 21 लाख और 2024 में 51 लाख रुपए के नोटों से श्रृंगार किया गया था। 2025 में 1 करोड़ 21 लाख और इस साल 1 करोड़ 31 लाख रुपए के नोटों से मंदिर सजाया गया है। दर्शन के लिए उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ भगवान महादेव के इस विशेष स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में नोटों से की गई सजावट इस समय सबसे बड़ा आकर्षण बनी हुई है। सात कलाकारों ने तीन दिन में तैयार की सजावट मंदिर के पुजारी के अनुसार, नोटों की माला, मुकुट और लड़ियों को तैयार करने में सात कलाकारों की टीम को करीब तीन दिन का समय लगा। कलाकारों ने नोटों से आकर्षक सजावट कर मंदिर को भव्य रूप दिया है। पिछले सालों में भी नोटों से हुआ विशेष श्रृंगार मंदिर में पिछले चार सालों से नोटों से विशेष श्रृंगार की परंपरा जारी है। 2021 में 7 लाख, 2022 में 11 लाख, 2023 में 21 लाख और 2024 में 51 लाख रुपए के नोटों से श्रृंगार किया गया था। 2025 में 1 करोड़ 21 लाख और इस साल 1 करोड़ 31 लाख रुपए के नोटों से मंदिर सजाया गया है। दर्शन के लिए उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ भगवान महादेव के इस विशेष स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में नोटों से की गई सजावट आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।