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होलिका दहन, धूडेली और होली उत्सव के लिए निर्णय, ज्योतिष मठ संस्थान में संगोष्ठी का आयोजन

होलिका दहन, धूडेली, होली उत्सव, चल समारोह हेतु हुआ निर्णय ज्योतिष मठ संस्थान में संगोष्ठी संपन्न  भोपाल  इस वर्ष तारीख दो की रात्रि को भद्रा के पुच्छकाल में होलिका दहन किया जाएगा। इस दिन पूरी रात्रि भर पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी। लेकिन 3 तारीख को होलिका दहन का प्रश्न ही नहीं उठाता धर्म सिंधु निर्णय सिंधु आदि ग्रंथों के अनुसार प्रतिपदा तिथि को होलिका दहन नहीं करना चाहिए चाहे भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन क्यों ना करनी पड़े।होलिका दहन का कर्म काल रात्रि कालीन होता है अतः 3 तारीख को रात्रि में  पूर्णिमा तिथि नहीं रहेगी , ग्रहण का सूतक तथा ग्रहण की समाप्ति पश्चात रात्रि में प्रतिपदा तिथि आ जाएगी ।  अतः होलिका  दहन के कर्मकाल हेतु यह तिथि उपयुक्त नहीं है । ग्रहण रात्रि दूषित मानी जाती है जो होलिका दहन के लिए अशुभता देगी । यह जरूर है की 2 तारीख की रात्रि में होलिका दहन  पश्चात धुलेंडी  उत्सव प्रारंभ हो जाता है। परंतु इस वर्ष ग्रहण के सूतक काल की वजह से यह कार्य प्रभावित होगा, साथ ही होलिका दहन के दूसरे दिन होने वाला होली उत्सव,चल समारोह भी ग्रहण होने के कारण  4 तारीख को ही किया जाना चाहिए।   लगभग सभी पंचांगकर्ता एवं विद्वानों द्वारा यह जानकारी वेब संगोष्ठी कर प्रदान की गई।संगोष्ठी ज्योतिष मठ संस्थान द्वारा आयोजित की गई थी। संस्थान के संचालक ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम ने बताया की वेब संगोष्ठी में होली का दहन एवं होली उत्सव को लेकर सभी पंचांगकरो एवं अनेक विद्वानों के तर्क वितर्क हुए एवं सर्वसम्मति से तारीख दो की  रात्रि 2:00 बजे के बाद पुच्छकाल भाद्रा पश्चात पूरे भारत देश में होलिका दहन किया जाएगा। तथा पर्व उत्सव 4 तारीख को मनाया जाएगा अतः भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है ।

धार मुस्लिम समाज ने भोजशाला सर्वे को हाईकोर्ट में चुनौती देने की ठानी, याचिका दायर करने की योजना

धार  भोजशाला को लेकर एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर धार के मुस्लिम समाज ने एतराज जताया है। उन्होंने इस रिपोर्ट को चुनौती देने के लिए अलग से एक याचिका दायर करने की तैयारी की है। उनका कहना है कि सर्वे के यह निष्कर्ष गलत हैं, जिनमें यह कहा गया है कि कमल मौला मस्जिद का निर्माण एक प्राचीन हिंदू मंदिर के अवशेषों का उपयोग करके किया गया था।  मुस्लिम पक्ष ने 1903 के ब्रिटिश काल के एक एएसआई सर्वेक्षण का हवाला भी दिया है, जिसमें इस स्थल को कमल मौला मस्जिद के रूप में दर्ज किया गया था और इसे एक संरक्षित स्मारक घोषित किया गया था। उन्होंने कहा कि यह एक मस्जिद थी, यह एक मस्जिद है और वहां नमाज जारी रहेगी। उनके अनुसार, मस्जिद का निर्माण निजामुद्दीन औलिया के खलीफा कमाल मौलाना द्वारा किया गया था, जो इस्लाम के प्रचार के लिए 1295 में धार आए थे और उन्हें मालवा शासक महमूद खिलजी द्वारा भूमि प्रदान की गई थी। उस भूमि पर मदरसे और मस्जिदें स्थापित की गई थीं। इसके लिए राजा भोज के महल के अवशेषों का इस्तेमाल किया गया, क्योंकि भारी सामग्री का परिवहन कठिन था, इसलिए निर्माताओं ने पास के राजा भोज के महल के पत्थरों का उपयोग किया। उनका दावा है कि राजा भोज का महल चालुक्य-सोलंकी राजवंश के शासकों ने तोड़ा था और उन्हीं पत्थरों का इस्तेमाल यहां हुआ है। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर दावे, आपत्तियां व सुझाव देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी। हिंदू संगठनों का दावा- सर्वे में मिले मंदिर होने के प्रमाण हिंदू संगठनों ने बताया कि एएसआई द्वारा कोर्ट में पेश की गई सर्वे रिपोर्ट की प्रति दोनों पक्षों को दे दी गई है। रिपोर्ट के आधार पर दावा किया गया है कि परिसर में सर्वे के दौरान मिले स्तंभ, शिलालेख, मूर्तियां और अन्य अवशेष स्पष्ट रूप से हिंदू संस्कृति के प्रतीक हैं। संगठनों का कहना है कि जमीन के भीतर खुदाई में जो मूर्तियां और संरचनात्मक अवशेष मिले हैं, वे इस बात के ठोस प्रमाण हैं कि यहां प्राचीन काल में मंदिर स्थापित था। मुस्लिम पक्ष बोला- 1904 के सर्वे में तय हुआ था कि यह मस्जिद है दूसरी ओर, मुस्लिम समाज के सदर अब्दुल समद ने सर्वे रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि हम शुरू से ही इस सर्वे को लेकर ऑब्जेक्शन लेते आ रहे हैं। 1903 और 1904 में एएसआई के ही सर्वे में यह स्पष्ट रूप से तय किया गया था कि यह स्थान मस्जिद है और उसकी संरचना भी मस्जिद जैसी ही है। उन्होंने कहा कि अब नए सर्वे रिपोर्ट में कई तथ्य बदले हुए नजर आ रहे हैं। इन्हीं बदलावों को लेकर वे कोर्ट में 15 दिन के भीतर विधिवत अपनी आपत्तियां दर्ज कराएंगे। '2003 के बाद चीजें बदली गईं, रिपोर्ट में मस्जिद का भी जिक्र' सदर अब्दुल समद ने दावा किया कि 2003 के बाद से परिसर में कई चीजें बदली गई हैं, जिन्हें अब सर्वे के नाम पर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे शुरू से इसका विरोध करते आ रहे हैं और आगे भी करेंगे। समद ने यह भी दावा किया कि नई सर्वे रिपोर्ट में भी इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि यह स्थान मस्जिद है। 16 मार्च को होगी मामले की अगली सुनवाई हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को निर्धारित समय सीमा में अपने दावे, आपत्तियां और सुझाव पेश करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अब इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च 2026 को होगी। इस सुनवाई में सर्वे रिपोर्ट के प्रत्येक बिंदु पर विस्तृत बहस होने की संभावना है। भोजशाला मामले को लेकर धार सहित पूरे प्रदेश में चर्चाओं का दौर जारी है।

30 हजार आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मियों का भोपाल में प्रदर्शन, जेपी परिसर में जुटे कर्मचारी, न्याय यात्रा की तैयारी

भोपाल  मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे लगभग 30 हजार आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी भोपाल में प्रदर्शन कर रहे हैं। मप्र संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर बड़ी संख्या में कर्मचारी जेपी परिसर में पहुंच गए हैं और नारेबाजी कर रहे हैं। दोपहर एक बजे न्याय यात्रा शुरू होगी, जो मुख्यमंत्री निवास तक जाएगी। जहां 9 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा जाएगा। संघ ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदेशव्यापी हड़ताल आगे भी जारी रखेंगे। बुधवार से शुरू हुई हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं व्यापक रूप से प्रभावित हो सकती हैं। संघ के अनुसार मंगलवार रात को ही कई कर्मचारी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से भोपाल के लिए बस, ट्रेन व किराए के वाहन से निकल गए थे, जो दोपहर तक यहां पहुंचेंगे। पुलिस ने की अस्पताल परिसर में बैरिकेडिंग कर्मचारियों की न्याय यात्रा के मद्देनजर पुलिस ने जेपी अस्पताल परिसर के गेट पर बैरिकेडिंग कर कर्मचारियों को रोकने की तैयारी कर ली है। पुलिस उन्हें परिसर से बाहर नहीं निकलने देगी। उधर, कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें न्याय यात्रा निकालने की अनुमति दी गई है। समस्त स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह कौरव ने बताया कि 2 फरवरी से संविदा कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी है। विभाग के अधिकारी हमारी मांगों को अनदेखा कर रहे हैं। यही कारण है कि बीते दो दिन से हम काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जाता रहे थे। आज संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं से न्याय यात्रा निकाल कर राजधानी में अपना विरोध दर्ज कराएंगे। जिससे हमारी मांगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच सकें। उन्होंने बताया कि यह यात्रा मुख्यमंत्री निवास तक जाएगी। इसके लिए प्रदेशभर से कर्मचारी आए हैं, सभी एक तरह का सामूहिक अवकाश लेकर इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं। यदि आज भी हमारी मांगे नहीं मानी जाती हैं तो सभी संविदा कर्मचारी सामूहिक हड़ताल पर चले जाएंगे। 30 हजार कर्मचारी, पूरे प्रदेश में असर संघ के अनुसार प्रदेश के जिला अस्पताल, सिविल हॉस्पिटल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी स्वास्थ्य केंद्र, संजीवनी क्लिनिक और पोषण पुनर्वास केंद्रों सहित विभिन्न इकाइयों में 30 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। ये कर्मचारी रिपोर्टिंग कार्य, सफाई, सुरक्षा व्यवस्था, कुपोषित बच्चों की देखरेख और अन्य कई स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका निभाते हैं। संघ का कहना है कि यदि हड़ताल होती है तो अस्पतालों की व्यवस्थाएं प्रभावित होंगी और मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। रिक्त पदों पर समायोजन या नियमितीकरण की मांग कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत सेवाएं दे चुके आउटसोर्स कर्मचारियों को बिना शर्त तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर समायोजित कर नियमित किया जाए या संविदा में मर्ज किया जाए। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर ठोस नीति बनाकर स्थायी समाधान करने तथा न्यूनतम 21 हजार रुपये वेतन निर्धारित करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जा रही है। 9 सूत्रीय मांगों में क्या शामिल संघ द्वारा प्रस्तुत 9 सूत्रीय मांगों में श्रम विभाग की 1 अप्रैल 2024 से लागू वेतन वृद्धि का 11 माह का एरियर भुगतान, निजी आउटसोर्स एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर सीधे खातों में वेतन भुगतान, शासकीय अवकाश की सुविधा, नियमित भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण, स्वास्थ्य बीमा और ग्रेच्युटी का लाभ शामिल हैं। संघ का आरोप है कि दोहरी और दमनकारी नीति के कारण वर्षों से कर्मचारियों का शोषण हो रहा है, जबकि वे 12 से 14 घंटे तक कार्य कर अस्पतालों की रीढ़ बने हुए हैं। सामूहिक हड़ताल रहेगी जारी संघ ने बताया कि आंदोलन के चौथे चरण में 25 फरवरी 2026 से प्रदेशभर के कर्मचारी सामूहिक हड़ताल में शामिल रहेंगे। यदि मांग नहीं मानी गई तो यह हड़ताल जारी रहेगी। कोमल सिंह ने कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो हड़ताल की पूरी जिम्मेदारी शासन और विभाग की होगी। कई बार पत्र, ज्ञापन और प्रदर्शन के माध्यम से शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण कर्मचारियों में आक्रोश है। अब न्याय यात्रा के जरिए सीधे मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की जाएगी। कर्मचारियों का दावा है कि वे स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके भविष्य की सुरक्षा के बिना स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती संभव नहीं है।

वसुंधरा राजे सिंधिया ने महाकाल मंदिर में नंदी हाल से किए दर्शन, लिया आशीर्वाद

उज्जैन मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में आज यानी बुधवार को सुबह राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया दर्शन करने पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने नंदी हाल से भगवान महाकाल के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। उन्होंने मंदिर में दर्शन व्यवस्था की जमकर सराहना भी की। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन के बाद भगवान वीरभद्र और महाकालेश्वर ध्वज चल समारोह में निकलने वाले ध्वज का भी पूजन किया। नंदी हाल में नंदी का पूजन कर बाबा महाकाल को जल अर्पित किया। मंदिर प्रबंधन ने निभाई परंपरा मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल एवं सहायक प्रशासक प्रतीक द्विवेदी ने सिंधिया का स्वागत एवं सत्कार किया गया। वसुंधरा राजे सिंधिया ने कहा कि राजस्थान के लोग बड़ी संख्या में महाकाल मंदिर में आते हैं, भगवान महाकाल का हम सब पर आशीर्वाद रहा है। सुखी-दुख में हम भगवान शिव के पास आते हैं। महाकाल मंदिर में भक्तों को सुलभ दर्शन मिल रहे हैं। होली उत्सव पर ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं इधर, होली पर्व को लेकर इस वर्ष तिथियों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। चंद्रग्रहण के कारण 3 और 4 मार्च को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं, लेकिन महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन में होली उत्सव पर ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। मंदिर प्रशासन ने 2 और 3 मार्च को पारंपरिक रूप से होली मनाने का कार्यक्रम तय किया है। महाकाल को गुलाल अर्पित किया जाएगा महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि बाबा महाकाल के दरबार में ग्रहण का विशेष प्रभाव नहीं होता। ग्रहण काल में भी दर्शन व्यवस्था निरंतर जारी रहती है। उन्होंने बताया कि 2 मार्च की शाम को होली सजाई जाएगी और सांध्य आरती में बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित किया जाएगा। इसके बाद शाम 7 बजे विधिवत होलिका दहन किया जाएगा। 3 मार्च की सुबह होने वाली भस्म आरती में भी प्रतिदिन की तरह पूजन-अर्चन होगा, लेकिन विशेष रूप से बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित कर होली का पर्व मनाया जाएगा।   हर्बल गुलाल और शक्कर की माला चढ़ेगी विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में इस वर्ष भी परंपरानुसार 2 मार्च को संध्या आरती के बाद होलिका दहन किया जाएगा। मंदिर समिति के अनुसार, संध्या आरती में बाबा महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित किया जाएगा और शक्कर की माला चढ़ाई जाएगी। इसके बाद ओंकारेश्वर मंदिर के सामने विधिवत पूजन-अर्चन के साथ होलिका दहन किया जाएगा। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित व्यवस्था का पालन करते हुए दर्शन करें और पर्व को श्रद्धा व अनुशासन के साथ मनाएं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- म.प्र. को मिल रही है नई रेल सुविधाओं की निरंतर सौगात

म.प्र. को नई रेल और रेल सुविधाओं की मिल रही है निरंतर सौगात : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई ट्रेन भोपाल-धनबाद-चौपन एक्सप्रेस को दिखाई हरी झंडी फ्रेट कॉरिडोर में मध्यप्रदेश के लाभ और एलाइनमेंट पर चर्चा के लिये केन्द्रीय रेल मंत्री  वैष्णव आयेंगे भोपाल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश को नई रेलों और रेल सुविधाओं की निरंतर सौगात मिल रही है। प्रदेश की राजधानी भोपाल से ऊर्जा राजधानी सिंगरौली तक सप्ताह के सातों दिन सीधी रेल की सुविधा प्रारंभ हो रही है, जो मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों के यात्रियों के लिये भी महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार की शाम भोपाल के मुख्य रेलवे स्टेशन से भोपाल-धनबाद-चौपन एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना कर रहे थे। यह ट्रेन सप्ताह में 3 दिन सीधी-सिंगरौली तक, 3 दिन धनबाद तक और एक दिन चौपन तक जायेगी। इस ट्रेन का रूट बीना-सागर-मुड़वारा होकर रहेगा। प्रदेश में निरंतर बढ़ रही रेल सुविधाएं, नई रेल भविष्य के विकास का नया रास्ता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज ही प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय कैबिनेट जबलपुर-गोंदिया रेल लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दी गई है। इसके पहले मध्यप्रदेश को इंदौर-मनमाड रेल लाइन सहित सिंहस्थ के दृष्टिगत अनेक सौगातें मिली हैं। वंदे भारत और मेट्रो ट्रेन की स्पीड भी बढ़ रही है। मध्यप्रदेश में विदेशों की तरह आधुनिक रेल सुविधाएं विकसित हो रही हैं। रेल बजट में भी 24 गुना अधिक बजट मिला है। छह अमृत भारत स्टेशन कटनी साउथ, नर्मदापुरम ओरछा, सिवनी शाजापुर और धाम के पुनर्विकास का कार्य हो रहा है। प्रदेश के 80 स्टेशनों का कायाकल्प हो रहा है। करीब पौने तीन हजार करोड़ रूपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं का लाभ यात्रियों को दिया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव ने आज के दिन को भी यादगार बना दिया है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश के पिछड़े माने गये सीधी-सिंगरौली क्षेत्र को भोपाल से प्रतिदिन की रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिल रहा है। यह ट्रेन सातों दिन चलेगी, भले गंतव्य 3 हों। यह युक्ति और बुद्धि का खेल ही नहीं बल्कि भविष्य के विकास का नया रास्ता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई ट्रेन से राज्यों के पर्यटन विकास में सहयोग मिलेगा। मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा। धनबाद तक जाने वाली त्रि-साप्ताहिक ट्रेन 30 स्टेशनों को और चौपन तक जाने वाली साप्ताहिक ट्रेन 15 प्रमुख स्टेशनों को जोड़ेगी। व्यापार, खनन और उद्योग क्षेत्र को नई गति मिलेगी। रेल लाइन का दोहरीकरण विकास में होगा सहायक, महाकौशल क्षेत्र का महत्व बढ़ेगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यदि जबलपुर से गोंदिया रेल लाइन के दोहरीकरण के व्यापक फायदों की चर्चा करें तो पर्यटन, धार्मिक गतिविधियों और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दृष्टि से प्रभाव दिखाई देंगे। वन क्षेत्र जहां कभी नक्सलवाद का ग्रहण लगा था, वहां सुगम यातायात सुविधा से विकास को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक समय नक्सलवादियों ने निर्वाचित जनप्रतिनिधि की सरेआम हत्या कर लोकतंत्र को लजाया था। अनेक वर्ष ऐसी घटनाओं पर सभी मौन रहते थे। प्रधानमंत्री  मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की दृढ़ इच्छा शक्ति से दरिंदगों से निपटने का कार्य किया गया है। मध्यप्रदेश में केन्द्रीय सरकार द्वारा निर्धारित डेड लाइन के पहले नक्सली समाप्त किये गये। महाकौशल क्षेत्र का महत्व दिनोंदिन बढ़ता जायेगा। बहुप्रतिक्षित थी भोपाल से सीधी-सिंगरौली के लिये सीधी रेल सुविधा : केन्द्रीय रेल मंत्री  वैष्णव केन्द्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव ने कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात से भोपाल से सीधी-सिंगरौली क्षेत्र तक रेल सुविधा की मांग चल रही थी। मध्यप्रदेश में रेल सुविधाओं का विस्तार जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश में रेल सुविधाएं बढ़ाने के लिये निरंतर ध्यान आकर्षित करते हैं। आने वाले समय में मध्यप्रदेश की तीव्र औद्योगिक विकास में नई रेल सुविधाएं उपयोगी सिद्ध होंगी, जहां 18 हजार करोड़ रूपये से अधिक लागत की इंदौर-मनमाड रेल लाइन अर्थव्यवस्था बदलेगी, वहीं 5200 करोड़ लागत से जबलपुर-गोदिंया रेल लाइन का दोहरीकरण कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, धुआंधार जल प्रपात और अन्य स्थानों के पर्यटन महत्व में वृद्धि करेगा। नागरिकों को समृद्धि का भरपूर लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री  मोदी के विजन से फ्रेट कॉरिडोर का क्रियान्वयन  वैष्णव ने कहा कि दानकुनी-सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर 2 हजार किलोमीटर से अधिक लंबाई का रेल प्रोजेक्ट है जो पश्चिम बंगाल से गुजरात को जोड़ेगा। इस वर्ष के बजट के बाद इस पर तेजी से कार्य प्रारंभ हो गया है। देश का पश्चिम क्षेत्र भी मध्यप्रदेश से बेहतर कनेक्ट होगा, यह प्रधानमंत्री जी का विजन है। हजीरा सहित अन्य पोर्ट विकसित होंगे। नये पोर्ट भी बनेंगे। औद्योगिक प्रगति की दृष्टि से मध्यप्रदेश के उद्योगों को अधिक से अधिक लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश इस प्रोजेक्ट से लाभांवित होगा। आयात-निर्यात भी आसान होगा।  वैष्णव ने कहा कि मालगाड़ियों की गति बढ़ाने, मौजूदा लाइनों से भीड़ कम करने और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी लाने के उद्देश्य से क्रियान्वित किये जाने वाले इस प्रोजेक्ट के एलाइनमेंट पर वे मुख्यमंत्री डॉ. यादव से विस्तृत चर्चा के लिये मध्यप्रदेश आयेंगे। रेल मंत्री ने मध्यप्रदेश के लिये उपयोगी करीब 48 हजार करोड़ लागत की रेल परियोजनाओं की जानकारी भी दी। कार्यक्रम को भोपाल के सांसद  आलोक शर्मा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल, पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री मती कृष्णा गौर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री मती राधा सिंह, सांसद सीधी  राजेश मिश्रा, विधायक  कुंवर सिंह टेकाम,  शरद कोल,  विश्वमित्र पाठक, भोपाल के अनेक जनप्रतिनिधि और नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। प्रारंभ में भोपाल रेल मंडल, पश्चिम मध्य रेलवे के मंडल प्रबंधक  पंकज त्यागी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव और सभी अतिथियों का स्वागत किया।  

विद्युत सुरक्षा के लिए ग्रामीणजन सावधानियाँ बरतें, खतरे से बचें

विद्युत से सुरक्षा के लिये ग्रामीणजन सावधानियॉ जरूर बरतें भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने ग्रामीणजनों को आगाह किया है कि वे अपने खेत-खलिहानों में विद्युत से सुरक्षा के लिये सावधानियां जरूर बरतें। अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में असावधानीवश विद्युत से कई बार अप्रिय घटनाएं घट जाती हैं। यह दुर्घटनाएं कईं बार जान-माल का नुकसान भी कर देती हैं। इनसे बचने के लिए ग्रामीणजनों से सावधानी बरतने की अपील करते हुए कंपनी ने कहा है कि कभी भी विद्युत लाइनों, उपकरणों एवं खंभों से छेड़खानी न करें क्योंकि ऐसा करना विद्युत अधिनियम 2003 के अंतर्गत दण्डनीय अपराध है।  कंपनी ने कहा किजरा भी असावधानी या छेड़खानी से बड़े-बड़े खतरे पैदा हो सकते हैं। इसलिए ऐसी लाइनें जिनमें विद्युत शक्ति प्रवाहित होती है उन्हें आँधी तूफान या अन्य किसी कारण से टूटने वाले तारों को अकस्मात छूने का प्रयास न करें। इस दौरान जरूरी होगा कि लाइन टूटने की सूचना तत्काल निकटस्थ बिजली कंपनी के अधिकारी को अथवा विद्युत कर्मचारी को दें। संभव हो तो किसी आदमी को उस जगह अन्य यात्रियों को चेतावनी देने के लिये भी बिठा दें।  किसानों को सलाह है कि वे खेतों खलिहानों में ऊॅंची-ऊँची घास की गंजी, कटी फसल की ढेरियां, झोपड़ी, मकान अथवा तंबू आदि विद्युत लाइनों के नीचे अथवा अत्यंत समीप न बनायें। साथ ही विद्युत लाइनों के नीचे से अनाज, भूसे आदि की ऊँची भरी हुई गाड़ियॉं न निकालें, इससे आग लगने एवं जान जाने का खतरा है। कंपनी ने कहा कि बहुत से स्थानों पर बच्चे पतंग अथवा लंगर का खेल खेलते तरह-तरह के धागे और डोर विद्युत लाइनों में फंसा देते हैं। ऐसा करने से उन्हें रोकें। लाइनों में फंसी पतंग निकालने के लिए बच्चों को कभी भी खंभे पर न चढ़ने दें। इससे एक ओर जहां दुर्घटना को टाला जा सकेगा वहीं दूसरी ओर आप होने वाली आर्थिक हानि से भी बच सकेंगे।  

कृषक कल्याण 2026: पीएमएफएमई योजना ने प्रेमलता को गृहिणी से सफल उद्यमी बनाया

कृषक कल्याण वर्ष-2026: पीएमएफएमई योजना से प्रेमलता गृहिणी से बनी सफल उद्यमी भोपाल  कभी घर की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली नीमच जिले के ग्राम बमोरा की श्रीमती प्रेमलता पाटीदार आज एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना ने उनके सपनों को पंख देकर आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई है। श्रीमती प्रेमलता बताती हैं कि वे हमेशा कुछ अपना करना चाहती थीं, लेकिन संसाधनों की कमी और मार्गदर्शन के अभाव में आगे बढ़ना आसान नहीं था। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग के माध्यम से पीएमएफएमई योजना की जानकारी मिली। योजना के तहत उन्होंने 23.61 लाख रुपये की लागत से ‘बालाजी उद्योग’ नाम से खाद्य तेल प्रसंस्करण इकाई स्थापित की। उद्योग की स्थापना के लिए उन्होंने नीमच जिले में भारतीय स्टेट बैंक की जीरन शाखा से 20 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। शासन की ओर से उन्हें 8.26 लाख रुपये का अनुदान भी मिला, जिससे उनका आत्मविश्वास और मजबूत हुआ। श्रीमती प्रेमलता ने ‘गोपाल कृष्ण’ नाम के ब्रांड से कोकोनट ऑयल का पंजीयन कराया और अपने उत्पाद को बाजार में उतारा। गुणवत्तापूर्ण उत्पाद और निरंतर मेहनत के बल पर उनका व्यवसाय तेजी से आगे बढ़ा। आज उनका मासिक टर्नओवर लगभग 8 से 10 लाख रुपये है और वे प्रतिमाह 2 से 3 लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। सालाना लाभ लगभग 30 लाख रुपये से अधिक पहुंच चुका है। प्रेमलता की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। उन्होंने अपने उद्योग में 7 स्थानीय लोगों को रोजगार देकर गांव में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया है। वे कहती हैं, “सरकार की योजना ने मुझे हिम्मत दी, लेकिन सफलता मेहनत और विश्वास से मिली।” नीमच जिले में पीएमएफएमई योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। जिले में अब तक 210 हितग्राहियों को योजना से लाभान्वित किया गया है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 125 नए उद्योग स्थापित हुए हैं। इस उपलब्धि के साथ नीमच जिला प्रदेश और संभाग के अग्रणी जिलों में शामिल हो गया है। प्रेमलता पाटीदार की यह कहानी बताती है कि आत्म विश्वास के साथ सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग मिल जाये तो एक गृहिणी भी सफल उद्योगपति बन सकती है। यह कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण है।  

उज्जैन सिंहस्थ 2028 की चुनौतियों से निपटने के लिए पुलिस का नया ‘ब्रह्मास्त्र’, 4S मॉडल से होगी मदद

उज्जैन   सिंहस्थ 2028 को लेकर पुलिस की तैयारियां अभी से तेज हो गई हैं. उज्जैन के एक निजी होटल में डीजीपी कैलाश मकवाना की अध्यक्षता में मध्य प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों विशेष बैठक आयोजित हुई. इसमें 4S मॉडल के साथ रणनीति तैयार की गई. पुलिस का फोकस रोजाना लाखों तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुगम यातायात पर है. शिप्रा के घाटों तक आसान होगी पहुंच उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया "एक रिपोर्ट सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा रही है. जल्द ही पीटीएस और उज्जैन पुलिस फोर्स की ट्रेनिंग शुरू होगी. हम AI का उपयोग, गूगल ट्रैफिक मैनेजमेंट, ड्रोन, फेस रिकॉग्निशन, पार्किंग L1, L2, L3 स्तर की स्मार्ट पार्किंग सभी मूल विषयों पर लगातार चर्चा और नवाचार कर रहे हैं." इसके अलाावा "शिप्रा के घाटों तक श्रद्धलुओ का आसानी से आवागमन के लिए रणनीति बनाई जा रही है. उज्जैन के आसपास के जिलों से समन्वय बनाकर सड़क मार्ग, पार्किंग व अन्य पर विषयों पर चर्चा की जाएगी. श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए लगातार काम कर रहे हैं." क्या है 4s मॉडल, कैसे काम करता है एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया "अनुभव, संवेदनशीलता, समन्वय और भविष्य की रणनीति तैयार करना 4s मॉडल है, जिसमे sharing of experience, sensitization with the development, synergy in the team, strategy for the future है. सिंहस्थ के दौरान चुनौतियां, तैयारियां, भीड़ एवं यातायात प्रबंधन, बल और सामग्री प्रबंधन (लॉजिस्टिक्स) को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मंथन किया गया है." सेमिनार का उद्घाटन DG EOW उपेंद्र जैन द्वारा किया गया. उन्होंने अलग-अलग व्यवस्थाओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की आवश्यकता पर बल दिया. प्रयागराज कुंभ के अनुभवों पर चर्चा बैठक में प्रयागराज कुंभ के अनुभवों पर चर्चा हुई. बैठक में मध्यप्रदेश पुलिस के एडीजी, आईजी, डीआईजी और अलग-अलग जिलों के पुलिस अधीक्षक सहित कुल 52 वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए. सभी ने प्रयागराज कुंभ मॉडल को भी आगामी सिंहस्थ 2028 के लिए समझा. स्थानीय संसाधन और लोगों भूमिका भी इसमें अहम विषय है. बैठक में पैनल डिस्कशन आयोजित किए गए, जिनमें 2004 एवं 2016 के सिंहस्थ की चुनौतियों एवं व्यवस्था पर चर्चा की गई. वरिष्ठ पुलिस अफसरों ने अनुभव साझा किए मीटिंग में आईजी राकेश गुप्ता के साथ ही सेवानिवृत्त आईजी मनोहर वर्मा, सिवनी एसपी सुनील मेहता और इंदौर के एडिशनल सीपी राजेश सिंह ने अपने सुझाव रखे. इस दौरान टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई की डीन प्रो. मधुश्री शेखर द्वारा सॉफ्ट स्किल्स की आवश्यकता पर प्रेजेंटेशन दिया गया. 

कृषि उत्पादन में मध्यप्रदेश ने मारी बाजी, खाद्यान्न, दलहन और तिलहन में पहला स्थान

कृषि उत्पादन में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल मध्यप्रदेश खाद्यान्न, दलहन और तिलहन उत्पादन में है प्रदेश का अग्रणी स्थान भोपाल  मध्यप्रदेश एक कृषि- प्रधान राज्य है और कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था का मूल आधार हैं। कृषि क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान प्रदान करता है, साथ ही व्यापक स्तर पर रोजगार, खाद्य एवं पोषण तथा आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मध्यप्रदेश राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन में विशेष रूप से अनाज और दलहनों के उत्पादन में महत्वपूर्व योगदान प्रदान करता है। राज्य सरकार द्वारा कृषकों की आय को बढ़ाने एवं कृषकों के समग्र कल्याण के उद्देश्य से वर्ष 2026 को "किसान कल्याण वर्ष" के रूप में घोषित किया गया है। मध्यप्रदेश ने वर्ष 2024-25 में कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार राज्य खाद्यान्न, दलहन तथ तिलहन फसलों के उत्पादन में शीर्ष तीन राज्यों में शामिल रहा है। मध्यप्रदेश ने कुल खाद्यान्न उत्पादन में 46.63 मिलियन टन उत्पादन के साथ देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया, जो राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग 13.04 प्रतिशत है। राज्य कुल दलहन फसल उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर हैं। तिलहन फसलों के उत्पादन में देश में दूसरा स्थान हासिल किया। कुल खाद्यान्न उत्पादन में देश में दूसरा स्थान राज्य ने गेहूं उत्पादन में राज्य ने 24.51 मिलियन टन उत्पादन किया और लगभग 20.78 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में दूसरा स्थान हासिल किया। राज्य मक्का उत्पादन में भी अग्रणी रहा। 6.64 मिलियन टन उत्पादन के साथ मध्यप्रदेश का राष्ट्रीय हिस्सेदारी में लगभग 15.30 प्रतिशत योगदान रहा, जिससे यह देश का प्रमुख उत्पादक राज्य बना। मोटे अनाज (न्यूट्री/कोर्स सीरियल्स) के उत्पादन में भी राज्य ने 7.78 मिलियन टन उत्पादन करते हुए लगभग 12.17 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की और देश में तृतीय स्थान हासिल किया। कुल दलहन उत्पादन शीर्ष स्थान बरक़रार दलहन क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल दलहन उत्पादन में 5.24 मिलियन टन उत्पादन किया और 20.40 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में पहला स्थान प्राप्त किया। चना उत्पादन में राज्य 2.11 मिलियन टन उत्पादन और लगभग 19.01 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष तीन राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा। तिलहन फसलों के उत्पादन में देश में अग्रणी राज्य तिलहन क्षेत्र में भी राज्य की स्थिति मजबूत रही। कुल तिलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश ने 8.25 मिलियन टन उत्पादन करते हुए लगभग 19.19 प्रतिशत राष्ट्रीय हिस्सेदारी दर्ज की एवं देश से दूसरा स्थान हासिल किया। विशेष रूप से सोयाबीन उत्पादन में राज्य ने 5.38 मिलियन टन उत्पादन किया, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 35.27 प्रतिशत है और इसे देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में स्थापित करता है। राज्य में मूंगफली का उत्पादन 1.55 मिलियन टन रहा जो कि देश के कुल उत्पादन का 12.99 प्रतिशत रहा। मूंगफली उत्पादन में राज्य देश में तीसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश में केंद्र एवं राज्य सरकार की कृषि विकास योजनाओं रासायनिक उर्वरकों का वितरण, पौध संरक्षण कार्यक्रम, मांग आधारित कृषि के लिए फसलों का विविधीकरण, एक जिला-एक उत्पाद योजना, मध्यप्रदेश राज्य मिलेट मिशन, कृषि उत्पादक संगठनों का गठन एवं संवर्धन, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, भावांतर भुगतान, रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना आदि का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया। परिणामस्वरूप राज्य को कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की है। कुल उत्पादन में वृद्धि हुई है। कृषि आधारित नीतियों के परिणाम स्वरूप मध्यप्रदेश देश की कृषि अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण राज्य के रूप में स्थापित है।  

मध्य प्रदेश: सरकारी अस्पताल में पहली बार मोटापा क्लिनिक, मरीजों को मिलेगा फ्री इलाज

इंदौर   मध्य प्रदेश के आर्थिक शहर इंदौर के शासकीय एमवाय अस्पताल में सोमवार से बेरियेट्रिक (मोटापा) और मेटाबोलिक क्लिनिक की शुरुआत की गई। ये प्रदेश के सरकारी क्षेत्र में अपनी तरह की पहली सुविधा है, जिससे अब मोटापे के मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने क्लिनिक का शुभारंभ करते हुए कहा कि, मोटापा तेजी से गंभीर सामाजिक समस्या बनता जा रहा है। इसके कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य बीमारियां बढ़ रही हैं। बदलती जीवनशैली और गलत खान-पान इसकी बड़ी वजह हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र मरीजों का इलाज निशुल्क किया जाएगा। जहां निजी अस्पतालों में इस सर्जरी का खर्च 4 से 5 लाख रुपए तक आता है। वहीं, अब ये सुविधा एमवाय में मुफ्त उपलब्ध होगी। क्लिनिक में मरीजों की जांच, काउंसलिंग और जरूरत पड़ने पर सर्जरी की सुविधा एक ही स्थान पर मिलेगी। लोगों को बड़ी राहत शहर के खजराना में रहने 30 वर्षीय गुल अफशां के अनुसार, सर्जरी के बाद उनका वजन 120 किलोग्राम से घटकर डेढ़ महीने में 97 किलोग्राम हो गया है। इससे डायबिटीज में राहत मिली और अब वो पहले से अधिक स्वस्थ महसूस कर रही हैं। इसी तरह सुषमा भिलवारे का कहना है कि, उनका वजन 103 किलोग्राम से घटकर 70 किलोग्राम हो गया है, जिससे बीपी और अन्य समस्याओं में सुधार हुआ है।