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26 टन गोमांस की पुष्टि, हिंदूवादी संगठनों का प्रदर्शन: भोपाल में स्लाटर हाउस सील

भोपाल  राजधानी भोपाल में गोकशी के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं. बीते 8 महीने में ऐसी 14 घटनाएं सामने आ चुकी हैं. जिसमें या तो गोवंशो को मार दिया गया या फिर हिंदूवादी संगठनों के समय पर पहुंचने की वजह से उन्हें बचा लिया गया. लेकिन अब नगर निगम भोपाल के अत्याधुनिक स्लाटर हाउस से गोमांस की सप्लाई का मामला सामने आया है. सरकार द्वारा पीपीपी मोड पर चलाए जा रहे इस स्लाटर हाउस में गोकशी की जानकारी मिलते ही नगर निगम भोपाल के अधिकारियों की नींद उड़ गई है. इधर जिला प्रशासन ने गोमांस की पुष्टि होने के बाद स्लाटर हाउस को सील कर दिया है. विरोध में हिंदू संगठनों ने कमिश्नर कार्यालय का घेराव कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है. एसी वैन में पकड़ा गया था 26 टन गोमांस 17 दिसंबर की रात भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय के सामने हिंदू संगठनों ने मांस से भरा एक ट्रक पकड़ा था. कार्यकर्ताओं का आरोप था कि इस ट्रक में जो मांस का परिवहन हो रहा था, वह गोमांस है. इसकी सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस और अन्य अधिकारी पहुंच गए थे. पुलिस ने सबसे पहले ड्रायवर नवेद को गिरफ्तार किया था. इसके बाद इस मांस को लैब में टेस्टिंग के लिए राज्य पशु चिकित्सालय जहांगीराबाद भेजा गया था. अब इसकी लैब रिपोर्ट आ गई है. जिसमें स्पष्ट हो गया है कि 26 टन मांस जो पुलिस ने जब्त किया था, वह गोमांस ही है. क्यूआर कोड और स्पेशल बाक्स में पैक था मांस पुलिस ने 17 दिसंबर की रात उत्तरप्रदेश के रजिस्ट्रेशन नंबर वाले जिस ट्रक को पकड़ा था, जब इसकी तलाशी ली गई तो इसमें पैकेटों में भरा गोमांस मिला था. इनमें बकायदा क्यूआर कोड और स्पेशल टैग भी लगे हुए थे. ट्रक का वजन कराने के बाद इसमें करीब 26 टन गोमांस होने की जानकारी सामने आई थी. अब लैब में जांच के बाद यह भी स्पष्ट हो गया है कि यह गोमांस ही था. संस्कृति बचाओ मंच और हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि "भोपाल नगर निगम के स्लाटर हाउस से गोमांस की सप्लाई की जा रही थी. भोपाल से गोमांस दूसरे प्रदेशों और फिर विदेशों में भेजने की जानकारी भी मिली है." स्लाटर हाउस सील, कानूनी कार्रवाई की तैयारी इस मामले में शहर वृत्त के एसडीएम दीपक पांडे ने बताया कि "गोमांस की पुष्टि होने के बाद स्लाटर हाउस को सील कर दिया गया. स्लॉटर हाउस के लाइसेंस की शर्तों की भी जांच की जा रही है. नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लाइसेंस निरस्त करने और संबंधित संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. वहीं पुलिस की ओर से भी पशु क्रूरता अधिनियम और अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है." हिंदू संगठनों ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय का किया घेराव जांच रिपोर्ट में 26 टन गोमांस की पुष्टि होने के बाद हिंदू संगठनों में जबरदस्त आक्रोश है. विरोध में बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद ने गुरुवार को पुलिस कमिशनर कार्यलय का घेराव कर जमकर नारेबाजी की. विश्व हिंदू परिषद कार्यकर्ता जीतेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि गोमाता के सम्मान में सभी हिंदू संगठनों ने सामूहिक रूप से प्रदर्शन किया है. संगठनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग की है. बजरंग दल नेताओं ने कहा कि पिछले दिनों जहांगीराबाद इलाके में जो 26 टन मांस पकड़ा गया था, वह गोमांस ही था. इसकी पुष्टि हो गई है. यह भी स्पष्ट हुआ है कि नगर निगम के इसी स्लाटर हाउस में गोवंश की हत्याएं होती थीं. नेताओं का आरोप है कि नगर निगम, प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत के बना यह संभव नहीं है. ऐसे में मामले की जांच हो और सभी पर एफआईआर दर्ज होना चाहिए." यह है मामला हिंदू संगठनों ने 17 दिसंबर की रात पुलिस मुख्यालय (PHQ) के ठीक सामने एक संदिग्ध कंटेनर को रोका था। यूपी रजिस्ट्रेशन नंबर वाले इस ट्रक में 26 टन मांस लदा था। सामने आया कि यह मांस कहीं और से नहीं, बल्कि भोपाल नगर निगम के अत्याधुनिक स्लॉटर हाउस से ही लोड होकर निकला था। भड़के हिंदू संगठन विहिप के प्रांत सह मंत्री जितेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि बजरंग दल ने जो 26 टन मांस पकड़ा था, उसके गोमांस होने की पुष्टि हो गई है। इसे नगर निगम द्वारा संचालित स्लॉटर हाउस में ही काटा गया था। इस अपराध के लिए नगर निगम प्रशासन जिम्मेदार है। निगमायुक्त और महापौर पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। संस्कृति बचाओ मंच और हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने इसे 'आस्था पर कड़ा प्रहार' बताया है। दूसरे राज्यों को भेज रहा था गोमांस गोमांस तस्करी के मामले में जहांगीराबाद पुलिस ने स्लॉटर हाउस लाइवस्टाक के संचालक असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा और कंटेनर संचालक शोएब को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपित जिंसी स्थित लाइवस्टाक स्लाटर हाउस से दूसरे राज्यों तक गोमांस पहुंचा रहे थे। ये तीन किरदार, जिन पर इसे रोकने की जिम्मेदारी नगर निगम का वेटनरी डाक्टर जिम्मेदारी: स्लॉटर हाउस में जाकर वहां कट रहे पशुओं और मानकों की जांच करनी चाहिए थी, लेकिन अपनी जिम्मेदारी को सही तरीके से नहीं निभाया। हर्षित तिवारी, अपर आयुक्त, वेटनरी शाखा जिम्मेदारी : वेटनरी शाखा के पास स्लॉटर हाउस की गतिविधियों की निगरानी का जिम्मा है। इन्हें वहां से सप्लाई होने वाले मांस के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए थी। संस्कृति जैन, निगमायुक्त जिम्मेदारी: स्लॉटर हाउस नगर निगम द्वारा पीपीपी मोड पर संचालित किया जा रहा है। ऐसे में नगर निगम का समय-समय पर होने वाले निरीक्षण और वहां की गतिविधियों की रिपोर्ट लेनी चाहिए थी, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया। भोपाल में बीते 8 महीने में गोवंश को लेकर हुई घटनाएं     1. थाना निशातपुरा में 8 मई 2025 को सब्जी मंडी करोंद में गोमाता के अवशेष मिले.     2. 16 मई व 27 जून 2025 को पलाशी रोड शिव मंदिर और हाउसिंग बोर्ड चौकी के पास गोकशी/अवशेष मिले.     3. थाना सूखी सेवनिया में एक कार से 4 गौवंश का मांस पकड़ा गया.   … Read more

मंत्री विजयवर्गीय का क्षेत्र अपराध में नंबर वन, बाणगंगा में 1749 मामले दर्ज

इंदौर  इंदौर शहर में साल 2025 अपराध के आंकड़ों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां लसूड़िया थाना अपराध के मामलों में दूसरे नंबर पर रहता था, वहीं अब उसे पीछे छोड़ते हुए चंदननगर थाना दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। शहर में सबसे अधिक अपराध दर्ज करने वाला थाना बाणगंगा पहले की तरह नंबर वन बना हुआ है, जबकि लसूड़िया तीसरे स्थान पर खिसक गया है। 33 हजार से अधिक केस, अपराध में इजाफा बीते एक साल में शहरभर में 33 हजार से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में करीब पांच हजार अधिक है, जो शहर में बढ़ते अपराध की ओर इशारा करती है। हत्या, हत्या के प्रयास और बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। बाणगंगा सबसे आगे, चंदननगर दूसरे नंबर पर आंकड़ों के अनुसार बाणगंगा थाना में सबसे अधिक 1749 केस दर्ज हुए हैं। इसके बाद चंदननगर थाना में 1663 मामले सामने आए। तीसरे स्थान पर लसूड़िया थाना रहा, जहां 1640 केस दर्ज किए गए। चौथे नंबर पर भंवरकुआं थाना रहा, जहां 1370 अपराध दर्ज हुए। इन थानों में दर्ज हुए 30 प्रतिशत मामले इसके अलावा विजयनगर थाना में 1020 और खजराना थाना में 1041 केस दर्ज हुए। शहर के कुल अपराधों में से करीब 30 प्रतिशत मामले इन पांच से छह थानों में ही दर्ज हुए हैं। नए थानों के प्रस्ताव अब भी कागजों में अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस ने कुछ साल पहले तीन नए थानों के गठन का प्रस्ताव भेजा था। इसके तहत बाणगंगा थाना क्षेत्र से सुपर कॉरिडोर थाना, लसूड़िया से महालक्ष्मीनगर थाना और भंवरकुआं से पालदा थाना बनाने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा गया था, लेकिन यह योजना अब तक कागजों में ही सीमित है। हाल ही में चंदननगर थाना अपराध में दूसरे स्थान पर आने के बाद पुलिस कमिश्नर ने यहां भी नया थाना बनाने का प्रस्ताव तैयार करने की बात कही है। दो टीआई का प्रयोग भी बेअसर अपराध पर नियंत्रण के लिए पुलिस ने हाल ही में लसूड़िया और विजयनगर थानों में दो टीआई का प्रयोग शुरू किया है। यहां दो महिला टीआई को टू आईसी के रूप में पदस्थ किया गया है, लेकिन इसके बावजूद अपराधों में कोई खास कमी नहीं आई है। अन्य थानों में भी यह प्रयोग लागू करने की तैयारी है। सराफा थाना सबसे सुरक्षित शहर में सबसे कम अपराध वाले थानों में सराफा थाना शामिल है। यहां इस साल केवल 155 केस दर्ज हुए हैं। इसके अलावा छत्रीपुरा, सदर बाजार और पंढरीनाथ जैसे संवेदनशील थानों में भी अपराध की संख्या कम रही है। वहीं एमजी रोड, कोतवाली और छोटी ग्वालटोली जैसे व्यापारिक क्षेत्रों वाले थानों में भी अपेक्षाकृत कम अपराध दर्ज हुए हैं। 

मध्य प्रदेश की डिफेंस सिटी: जहां बनती है सेना के लिए व्हीकल्स, तोप, बम और गोले

जबलपुर  मध्य प्रदेश में स्थित जबलपुर को देश की प्रमुख डिफेंस सिटी के रूप में जाना जाता है. यह शहर भारतीय सेना की सामरिक जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता है. जबलपुर में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी चार बड़ी फैक्ट्रियां स्थापित हैं. जहां आर्मी के वाहनों के साथ-साथ तोप, बम, गोले और आधुनिक बंदूकें तैयार की जाती हैं. यहां बनने वाले हथियार और उपकरण देश की थलसेना की ताकत को मजबूत करते हैं. डिफेंस इंडस्ट्री की मौजूदगी के कारण जबलपुर न सिर्फ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहां हजारों लोगों को रोजगार भी मिलता है. यही वजह है कि जबलपुर को भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता का एक मजबूत केंद्र माना जाता है।. भारत का एक इकलौता शहर जो ज्वालामुखी की गोद में है. चौंकिए नहीं! ऐसा इसलिए क्योंकि, इस शहर में एक या दो नहीं, बल्कि चार डिफेंस की फैक्ट्रियां हैं. यहां भारतीय सेना के अस्त्र-शस्त्र के साथ ही तोप, बारूद, कलपुर्जे से लेकर आर्मी व्हीकल तैयार किए जाते हैं.  अंग्रेजों के शासनकाल की यह फैक्ट्रियां बरसों पुरानी हैं. अंग्रेजों ने इन फैक्ट्री का निर्माण किया था. भारतीय सेना इन फैक्ट्रियों की बदौलत स्वदेशी हथियार बनाकर दुश्मनों के दांत खट्टे कर रही है. इन फैक्ट्री की ताकत इतनी है कि यह शहर की फैक्ट्रियां ही पाकिस्तान जैसे देश को आसानी से तबाह कर सकती हैं. जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री में सारंग और धनुष जैसी तोपों का उत्पादन किया जाता है. इतना ही नहीं, लाइट फील्ड गन भी फैक्ट्री में बनाई जाती है. इस फैक्ट्री में गन के कलपुर्जे भी बनाए जाते हैं. यह फैक्ट्री 1904 की है, जिसकी शुरुआत अंग्रेजों ने की थी. सारंग तोप जो 32 किलोमीटर दूर तक हमला करने की क्षमता रखती है. जबलपुर की ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया 1942 में स्थापित की गई थी, जिन्हें अंग्रेजों ने बनाया था. ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया के बने बम से भारत-पाकिस्तान 1965 की लड़ाई हो या फिर बांग्लादेश सहित चीन की लड़ाई, हर जगह जबलपुर की फैक्ट्री के गोला-बारूद का इस्तेमाल हुआ. इतना ही नहीं, एयर स्ट्राइक में भी जो बम आतंकी अड्डों पर गिराए गए, वह खमरिया में ही बने थे. जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री, इंडियन आर्मी के हर व्हीकल को तैयार करती है. इसमें हैवी वाहन, स्टालिन, रसोई टैंकर, जनरेटर, बस, ट्रक जैसे व्हीकल शामिल है, जो भारतीय सेना को ताकत देते हैं. इतना ही नहीं lmv जैसे व्हीकल भी तैयार किए जाते हैं, जो मुश्किल रास्तों में भी दुश्मनों के छक्के छुड़ा देते हैं. यह व्हीकल बुलेट प्रूफ होते हैं. यह व्हीकल बुलेट प्रूफ होते हैं. ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया में गोला-बारूद जिन अस्त्र-शस्त्रों में भरे जाते हैं. यह कलपुर्जे जबलपुर की जीआईएफ फैक्ट्री में बनाए जाते हैं.जबलपुर शहर में सेंट्रल ऑर्डिनेंस डिपो, COD फैक्ट्री भी है जो भारतीय सेना के लिए गोला-बारूद और हथियारों के भंडारण करने का काम करती है. देशभर में ऑर्डिनेंस की 12 फैक्ट्रियां हैं, जिसमें से चार फैक्ट्रियां सिर्फ जबलपुर में ही हैं. इसलिए इसे डिफेंस सिटी के नाम से भी जाना जाता है.

इंदौर में ई-रिक्शा सेवा सात सेक्टर में शुरू होगी, व्यवस्था के बाद एक महीने का ट्रायल

इंदौर यातायात व्यवस्था बिगाड़ने वाले ई-रिक्शा पर अब लगाम कसी जा रही है। शहर को सात सेक्टरों में बांटकर हर ई-रिक्शा के लिए सीमित क्षेत्र, तय मार्ग और रंग आधारित पहचान लागू की जाएगी। ई-रिक्शा के व्यवस्थित, सुरक्षित एवं सुगम संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बुधवार को पलासिया स्थित पुलिस कंट्रोल रूम में बैठक हुई। पुलिस उपायुक्त यातायात आनंद कलादगी ने चालकों से कहा कि आप नए प्रयोग में सहयोग करें। कोई समस्या या आर्थिक नुकसान होता है तो हम बदलाव के लिए तैयार हैं। सेक्टरों को बढ़ा दिया जाएगा। इस व्यवस्था में करीब 30 दिन लगेंगे। फिर एक महीने तक ट्रायल होगा। भविष्य में जरूरत पड़ने पर सेक्टर व्यवस्था में जरूरी सुधार या बदलाव किया जा सकेगा। विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे, ‘पहले आएं, पहले पाएं’ नीति के तहत पंजीयन आगामी दो दिनों में ई-रिक्शा सेक्टर वितरण के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इसमें यातायात थाना पूर्व (एमटीएच कंपाउंड), यातायात नियंत्रण कक्ष पश्चिम, महू नाका, एसीपी ट्रैफिक जोन-1 कार्यालय मल्हारगंज, डीसीपी ट्रैफिक कार्यालय, पलासिया और एसीपी ट्रैफिक जोन-2 आफिस पिपलियाहाना में ई-रिक्शा चालक अपने वाहन से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत कर सेक्टर पंजीयन करवा सकेंगे। पंजीयन के बाद चालकों को सेक्टर अनुसार सीरियल नंबर स्टीकर प्रदान किए जाएंगे। शिविर में चालकों को ‘पहले आएं, पहले पाएं’ नीति के तहत पंजीयन किया जाएगा। सेक्टर तय करने के लिए चार से पांच विकल्प होंगे, जिसमें से एक तय करना होगा। चालकों को उनके घर के पास के मार्ग को प्राथमिकता दी जाएगी। आगामी 15 दिन तक रजिस्ट्रेशन होगा। अगले 10 दिन स्टीकर व सेक्टर वितरण होगा। बैठक में एडिशनल डीसीपी नरेश कुमार अन्नोटिया, एडिशनल डीसीपी संतोष कुमार कौल, एसीपी हिंदूसिंह मुवेल, एसीपी सुप्रिया चौधरी सहित अन्य मौजूद थे। वहीं, इंदौर बैटरी रिक्शा चालक महासंघ पदाधिकारी व संस्थापक राजेश बिड़कर ने कहा कि कुछ कार्यकर्ता निर्णय से संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने 12 जनवरी को ई-रिक्शा बंद की घोषणा की। सुबह 11 बजे सभी गांधी हाल परिसर में एकत्र होकर विरोध करेंगे। इस तरह रहेगी व्यवस्था     ई-रिक्शा के लिए सात कलर कोड रहेंगे।     हर ई-रिक्शा के आगे-पीछे विशेष स्टीकर लगाए जाएंगे, जिन पर सेक्टर का नाम, ई-रिक्शा का सीरियल नंबर, वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित रहेगा।     सवारियों के लिए ई-रिक्शा की पहचान व निगरानी सरल हो सकेगी।     हर सेक्टर में 20 से 25 किमी का रूट मिल रहा है। स्टैंड भी तय होंगे। (जैसा कि बैठक में पुलिस उपायुक्त यातायात आनंद कलादगी ने बताया) 

प्रॉपर्टी रेट में 50-100% की वृद्धि, अब ‘सेक्टर’ तय करेंगे दाम, वार्ड नहीं

ग्वालियर ग्वालियर शहर के प्रॉपर्टी बाजार में अब कम या ज्यादा रेट दिखाकर स्टांप ड्यूटी बचाने का खेल बंद होने वाला है। पंजीयन विभाग वित्त वर्ष 2026-27 की नई गाइडलाइन के लिए 'सेक्टर फॉर्मूला' तैयार कर रहा है। इस नई व्यवस्था में शहर को अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर कीमतें तय की जाएंगी। इसके लिए एआइ आधारित 'पॉलिगॉन' का दायरा बढ़ाया जा रहा है, ताकि एक ही इलाके की सटी हुई जमीनों के दामों में जो बड़ा अंतर था, उसे खत्म किया जा सके। अभी स्थिति यह है कि दो सटकर लगी हुई लोकेशनों के सरकारी दाम में जमीन-आसमान का फर्क होता है। शातिर लोग इसी विसंगति का फायदा कर उठाकर ऊंचे रेट वाली जमीन को कम ने रेट वाली लोकेशन का हिस्सा बताकर रजिस्ट्री करा लेते थे। नए मॉडल में के एक सेक्टर या पॉलिगॉन के भीतर एक आने वाली सभी लोकेशनों पर समान रेट लागू होगा। नियम यह होगा कि उस इलाके की जिस लोकेशन की कीमत सबसे ज्यादा होगी, वही पूरे सेक्टर की दर मान ली जाएगी। इसका सीधा असर यह होगा कि जहां अब तक गाइडलाइन कम थी, वहां कीमतें रातों-रात 50 से 100 फीसदी तक बढ़ जाएंगी। संपदा-2: फेसलेस और पारदर्शी होगी रजिस्ट्री पंजीयन विभाग अब 'संपदा-2' सॉफ्टवेयर के जरिए पूरी प्रक्रिया को फेसलेस बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित इस सिस्टम में पक्षकार घर बैठे ही रजिस्ट्री से जुड़े काम निपटा सकेंगे। 9 जनवरी को भोपाल में होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में इस नए स्वरूप पर मुहर लग सकती है। अब तक गाइडलाइन वार्डवार बनती थी, जिसमें हर गली-मोहल्ले की अलग दर होती थी, जो स्टांप चोरी का सबसे बड़ा कारण था। अब एक पॉलिगॉन में 40 से 50 लोकेशन शामिल हो सकेंगी। वर्तमान में जिले में करीब 2400 पॉलिगॉन सक्रिय हैं। मुरार का उदाहरणः ऐसे बढ़ेंगे दाम नई व्यवस्था को इस तरह समझा जा सकता है- यदि मुरार गांव की गाइडलाइन 19 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर है और उससे सटी हुई 10 अन्य कॉलोनियों में रेट 8 से 15 हजार के बीच है, तो अब नया पॉलिगॉन बनते ही उन सभी 10 लोकेशनों का रेट भी बढ़कर सीधे 19 हजार रुपए हो जाएगा। इससे विसंगति खत्म होगी और विभाग का राजस्व बढ़ेगा। भविष्य का सेक्टर प्लान वार्ड सिस्टम आउटः विभाग धीरे-धीरे वार्डों के आधार पर रेट तय करने की परंपरा खत्म करेगा। 20 सेक्टरों में शहर: ग्वालियर के 66 वार्डों को लगभग 20 बड़े सेक्टरों में विभाजित किया जाएगा। समान गतिविधिः रिहायशी, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों को अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर एक समान दरें तय होंगी। चोरी पर अंकुशः पॉलिगॉन बदलकर कम स्टांप देने के पुराने केसों के बाद अब यह तकनीकी 'लूपहोल' पूरी तरह बंद होगा। सेक्टरों में विभाजित कर रहे हैं… गाइडलाइन को अब वार्डों के बजाय सेक्टरों में विभाजित किया जा रहा है। एक पॉलिगॉन में कई लोकेशनों को शामिल करने से स्टांप ड्यूटी चोरी की संभावना खत्म होगी। इससे पूरे क्षेत्र में एक समान दर लागू हो सकेगी और पारदर्शिता आएगी।- अशोक शर्मा, जिला पंजीयक, ग्वालियर

गुलाब प्रदर्शनी में “गमलों में गुलाब” प्रतियोगिता का द्वितीय चरण, 9 जनवरी को होगा आयोजन

गुलाब प्रदर्शनी में द्वितीय चरण की प्रतियोगिता "गमलों में गुलाब" 9 जनवरी को भोपाल  गुलाब उद्यान में आयोजित होने वाली 45वीं गुलाब प्रदर्शनी के द्वितीय इवेंट "गमलों में गुलाब" की प्रविष्टियाँ 9 जनवरी को प्रात: 8 से 10 बजे तक गुलाब उद्यान परिसर में ली जाएगी। आयुक्त उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण श्री अरविन्द दुबे ने बताया कि प्रतिवर्ष की भाँति गुलाब उद्यान परिसर में गुलाब प्रदर्शनी का आयोजन 9 से 11 जनवरी तक किया जा रहा है। गुलाब के प्रति आम लोगों के रूझान को देखते हुए गुलाब उत्पादकों के बीच स्वस्थ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है। इसमें गमले से लेकर बगिया तक गुलाब के फूलों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया जाना है। यह प्रतियोगिता प्रारंभ हो चुकी है। प्रतियोगिता का प्रथम चरण "बगिया में गुलाब" पूर्ण हो चुका है। द्वितीय चरण 9 जनवरी को घरों में गमलों में लगाये गये गुलाबों का प्रदर्शन गुलाब उद्यान में किया जायेगा। इसके लिये गुलाब उत्पादक सुबह 8 से 12 बजे तक गुलाब उद्यान में प्रविष्ठि कर सकते हैं। इसके बाद विशेषज्ञों द्वारा गमलों का मूल्यांकन कर अंक प्रदान किए जायेंगे। कट-फ्लावरों का प्रदर्शन गुलाब उद्यान परिसर में 10 जनवरी को किया जायेगा और 11 जनवरी को विजेताओं को पुरस्कार वितरित होंगे।  

उज्जैन में शिप्रा नदी के 200 मीटर के भीतर अवैध निर्माण तोड़े जाएंगे, आदेश जारी

उज्जैन मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में सिंहस्थ के मद्देनजर हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शिप्रा नदी के किनारे हो रहे निर्माणों पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगल पीठ ने स्पष्ट किया कि शिप्रा के दोनों ओर 200 मीटर के भीतर किए गए सभी निर्माण अवैध हैं और इन्हें हटाया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं। साथ ही पूर्व में जनहित याचिका में मांगी जानकारी को 21 जनवरी तक दाखिल करने को कहा। चेतावनी दी कि तय तिथि तक रिपोर्ट नहीं पेश हुई तो उज्जैन कलेक्टर व निगम आयुक्त को उपस्थित होना पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चंदेसरा ब्रिज से राजगढ़ तक केवल शासकीय निर्माण ही होंगे। वहीं शिप्रा के 200 मीटर में किसी नए निजी निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी और नियमों के उल्लंघन में हो रहे निर्माण तुरंत हटाए जाएंगे। ये है मामला उज्जैन के सत्यनारायण सोमानी द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह आदेश दिया गया। याचिका में आरोप है कि उज्जैन के मास्टर प्लान के विपरीत शिप्रा के 200 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण की अनुमति दी जा रही है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से इस पर जवाब मांगा था। बुधवार को सरकारी वकील की याचिका पर कोर्ट ने 21 जनवरी तक रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कब होगा सिंहस्थ उज्जैन में अगला सिंहस्थ मेला 27 मार्च से 27 मई 2028 तक आयोजित किया जाएगा, जो लगभग दो महीने तक चलेगा और इसमें शाही स्नान (Royal Bath) और पर्व स्नान (Festival Bath) होंगे, और मध्य प्रदेश सरकार इसे 'जीरो वेस्ट कुंभ' बनाने की तैयारी कर रही है, जिसमें घाटों का सुंदरीकरण और पुलों का निर्माण जैसे काम शामिल हैं। मुख्य जानकारी: अवधि: 27 मार्च से 27 मई 2028 (कुल 2 महीने) स्नान: इस दौरान 3 शाही स्नान और 7 पर्व स्नान होंगे। विशेषता: इसे देश का पहला 'जीरो वेस्ट कुंभ' बनाने का लक्ष्य है, जिसमें कई विकास कार्य किए जा रहे हैं। पिछला सिंहस्थ: पिछला सिंहस्थ 2016 में हुआ था, और अगला 2028 में है, जो हर 12 साल में आता है।

भोपाल मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के तहत 40 आरा मशीनें शिफ्ट की जाएंगी, योजना दो चरणों में तैयार

भोपाल  शहर के बीचों बीच भारत टाकीज से बोगदा पुल रोड पर स्थित आरा मशीनों की शिफ्टिंग दो चरणों में की जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा योजना बनाई जा रही है। पहले चरण में मेट्रो की राह में आ रहीं 40 आरा मशीनों को शिफ्ट किया जाएगा, इनके लिए परवलिया सड़क स्थित छोटा रातीबड़ में प्लाट का काम पूरा हो चुका है। बता दें कि मेट्रो ने आरा मशीन जल्द से जल्द शिफ्ट हो, इसके लिए छोटा रातीबड़ में सुविधा विकसित करने के लिए करीब छह करोड़ रुपये प्रशासन को दिए थे। इसके बाद से बिजली, पानी, सड़क आदि सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं। जानकारी के अनुसार फर्नीचर शोरूम एवं आरा मशीनों के संचालक एसडीएम शहर वृत्त दीपक पांडे से मिले थे, जहां उन्होंने अपनी मांग रखी थी कि सभी कारोबारियों को एक साथ परवलिया सड़क स्थित छोटा रातीबड़ में शिफ्ट किया जाए। संचालकों का कहना था कि अभी वहां एप्रोच रोड नहीं बनी है, जिससे वाहनों के आवागमन में दिक्कत तो होगी। साथ ही अभी सभी तरह की सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। इस पर एसडीएम ने बताया कि आरा मशीनों को शिफ्ट करने की योजना दो चरण में तैयार की जा रही है, पहले वह 40 मशीनें शिफ्ट होंगी, जो मेट्रो रेल लाइन के कार्य में बाधा बनी हुई हैं। इनको हटाने के लिए छोटा रातीबड़ में 40 प्लाट का काम पूरा हो चुका है, जिनके लिए मेट्रो प्रबंधन ने राशि भी दी है। इसके बाद दूसरे चरण में बची हुई 100 आरा मशीनों को शिफ्ट किया जाएगा। आग लगने के बाद तेज हुई प्रक्रिया पिछले दो महीने में आरा मशीनों में लगातार लगी बड़ी आग के बाद से शिफ्टिंग की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके लिए आरा मशीन संचालक भी प्रशासन से लगातार मांग कर रहे हैं, लेकिन छोटा रातीबड़ में काम की गति बहुत धीमी होने के कारण शिफ्टिंग का काम नहीं हो पा रहा है। हालांकि, आग की घटना के बाद से तेजी से विकास कार्य किए जा रहे हैं। ऐसे में उम्मीद है जल्द शिफ्टिंग हो सकेगी। कारोबारी कर रहे एक साथ शिफ्टिंग करने की मांग टिंबर मर्चेंट एंड आरा मशीन एसोसिएशन के अध्यक्ष बदर ए आलम ने बताया कि कारोबारियों की मांग है कि छोटा रातीबड़ में एक साथ सभी आरा मशीनों को शिफ्ट किया जाए, जिससे कि कारोबार की रफ्तार निरंतर बनी रहे। फिलहाल प्रशासन ने दो चरणों में शिफ्टिंग की बात कही है। पहले चरण का काम जल्द शुरू होगा     आरा मशीनों की शिफ्टिंग को लेकर दो चरणों में योजना तैयार की गई है। पहले चरण में मेट्रो कार्य के लिए 40 आरा मशीनों को शिफ्ट किया जाएगा, इसके बाद दूसरे चरण में शेष आरा मशीनों को हटाया जाएगा। पहले चरण का कार्य जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा। – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर  

MP में 30 लाख फर्जी राशन कार्ड रद्द, अमीरों ने भी गरीबों का राशन किया हड़प

भोपाल  मध्य प्रदेश में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर लोग यही कह रहे हैं MP अजब है, गजब है. सोचिए, जिन लोगों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल है, उन्हीं के लिए बनी मुफ्त राशन योजना का फायदा बड़े-बड़े प्राइवेट कंपनी डायरेक्टर और मोटी कमाई करने वाले लोग उठा रहे थे. ये चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ, जब सरकार ने राशन कार्ड धारकों की बड़े स्तर पर जांच करवाई. सरकार की जांच में निकले 30 लाख अपात्र शिकायतों के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS के लाभार्थियों का सत्यापन अभियान चलाया. इस करीब एक साल लंबी जांच में पता चला कि करीब 30 लाख ऐसे लोग मुफ्त राशन ले रहे थे, जो इसके हकदार ही नहीं थे. इसके बाद सभी अपात्र लोगों के राशन कार्ड रद्द कर दिए गए.  रिपोर्ट के मुताबिक, गलत तरीके से राशन ले रहे लोगों में 1500 तो ऐसे निकले जो निजी कंपनियों में डायरेक्टर जैसे ऊंचे पद पर हैं। इसके अलावा 38 हजार लोग इनकम टैक्स फाइल करने वाले थे जिनकी सालाना आमदनी 6 लाख रुपये से अधिक थी। 14 लाख नए लाभार्थी जुड़ेंगे खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से बड़े पैमाने पर कराए गए वेरिफिकेशन में करीब एक साल का समय लगा। बड़े पैमाने पर राशन कार्ड रद्द किए जाने का बड़ा फायदा उन 14 लाख योग्य लाभार्थियों को होगा जो इसमें शामिल होने का इंतजार कर रहे थे और कोटा खत्म हो जाने की वजह से उन्हें पीडीएस स्कीम का लाभ नहीं मिल रहा था। MP में 1.31 करोड़ के पास राशन कार्ड, वेटिंग में थे लोग अंत्योदय अन्न योजना (AAY) और प्रायोरिटी हाउसहोल्ड (PHH/BPL) के तहत मध्य प्रदेश में अभी 1.31 करोड़ राशन कार्ड वितरित हैं। 28 श्रेणी के लाभार्थियं को हर महीने मुफ्त राशन दिया जाता है। खाद्य आपूर्ति विभाग के कमिश्नर कर्मवारी शर्मा ने कहा, 'यह सत्यापन बहुत महत्वपूर्ण था। अयोग्य लोगों की मौजूदगी की वजह से बहुत से जरूरतमंद परिवार वेटिंग लिस्ट में थे और उन्हें मुफ्त राशन नहीं मिल पाता था।' कैसे पकड़े गए ऐसे लोग शर्मा ने बताया कि उनके विबाग ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ मिलकर पीडीएस डेटाबेसा का आईटीआर डेटा से मिलान किया। उन्होंने बताया, '38 हजार लाभार्थी ऐसे निकले जिन्होंने अपनी सालाना आय 6 लाख रुपये घोषित की थी और राशन भी ले रहे थे। सत्यापन के बाद ऐसे सभी नामों को निकाल दिया गया। डेटा को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी से भी क्रॉस चेक किया गया। 1500 ऐसे लोग मिले जो निजी कंपनियों में डायरेक्टर के पद पर थे लेकिन मुफ्त राशन का लाभ ले रहे थे। कंपनी डायरेक्टर और IT पेयर भी निकले लाभार्थी जांच में जो आंकड़े सामने आए, वो और भी हैरान करने वाले थे. करीब 1,500 प्राइवेट कंपनियों के डायरेक्टर और 38 हजार ऐसे लोग जो हर साल 6 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई दिखाकर इनकम टैक्स भरते हैं, वो भी गरीबों के लिए तय मुफ्त राशन ले रहे थे. यानी जिनके पास गाड़ी, मकान और पक्की कमाई थी, वो भी सरकारी राशन दुकानों से अनाज उठा रहे थे. कैसे पकड़े गए ये लोग खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने इस बार सख्त तरीका अपनाया. विभाग ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से डेटा मिलान किया और ITR फाइल करने वालों की जानकारी PDS डेटाबेस से जोड़ी गई. इसके अलावा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ के रिकॉर्ड भी खंगाले गए. इसके बाद फील्ड लेवल पर जांच कर यह तय किया गया कि कौन वाकई पात्र है और कौन गलत तरीके से फायदा उठा रहा है. गरीबों के लिए खुला रास्ता इस जांच का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि जिन जरूरतमंद परिवारों के नाम कोटा खत्म होने की वजह से सालों से वेटिंग लिस्ट में थे, अब उन्हें भी राशन कार्ड मिल गया. करीब 14 लाख नए पात्र परिवारों को खाद्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलना शुरू हो गया है. क्या बोले विभाग के अफसर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के आयुक्त करमवीर शर्मा का कहना है कि यह जांच बेहद जरूरी थी. अपात्र लोगों की वजह से असली जरूरतमंद वंचित रह जाते थे. उन्होंने साफ कहा कि अब मुफ्त राशन सिर्फ उन्हीं को मिलेगा, जो इसके सही मायनों में हकदार हैं.

625 किमी लंबा टूरिज्म कॉरिडोर: एमपी में पेंच से पन्ना तक जुड़ेगा प्रमुख टूरिस्ट प्लेस

 भोपाल  मध्यप्रदेश को देश का टाइगर स्टेट कहा जाता है, यहां सबसे अधिक बाघ हैं। प्रदेश में सर्वाधिक टाइगर रिजर्व भी हैं। अनेक नेशनल पार्क और अभयारण्य भी हैं। एमपी के इन सभी वन्यजीव पर्यटन स्थलों को अब एक कॉरिडोर से जोड़ा जा रहा है। इसे टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर नाम दिया गया है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश की भौगोलिक स्थिति के कारण टाइगर कॉरिडोर पड़ोसी राज्यों के लिए भी बड़ी सौगात साबित होगा। इसके अंतर्गत प्रदेश के प्रमुख टाइगर रिजर्व को आपस में जोड़ने वाली सड़कों को अपग्रेड किया जाएगा। टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर 625 किमी लंबा होगा जिससे सभी प्रमुख टूरिस्ट प्लेस जुडेंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दो दिन मध्यप्रदेश को अनेक राजमार्गों की सौगात दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में ग्वालियर, भिंड, श्योपुर सहित चंबल पूरे बेल्ट को अटल प्रगति पथ का लाभ मिलेगा। यह चंबल क्षेत्र को उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर को जोड़ेगा। करीब 12 हजार करोड़ का अटल प्रगति पथ एमपी से दिल्ली-एनसीआर का सफर घटाकर करीब 3 से 4 घंटे का कर देगा। भोपाल-जबलपुर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के रूप में बड़ी सौगात मिली मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश को भोपाल-जबलपुर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के रूप में बड़ी सौगात मिली है, जिसकी लागत 9716 करोड़ है। इसके अलावा भोपाल-इंदौर-प्रयागराज, जबलपुर-नागपुर और इंदौर-धुले-पुणे परियोजनाएं विकसित भारत@2047 के लक्ष्य हासिल करने में सहायक सिद्ध होंगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भविष्य में चारों दिशाओं में कई प्रकार के मार्गों को सुदृढ़ करते हुए निर्माण के संबंध में महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ है। टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर को 5 हजार करोड़ रुपए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने प्रदेश को टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर की भी सौगात दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि इसके अंतर्गत टाइगर रिजर्व पेंच से कान्हा, कान्हा से बांधवगढ़ और बांधवगढ़ से पन्ना को परस्पर जोड़ने वाली सड़कों की लम्बाई 625 किलोमीटर होगी। मार्गों के उन्नयन और विकास पर 5 हजार करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाएगी। विलुप्त हुए चीतों को अफ्रीका से लाकर श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में बसाया बता दें कि मध्यप्रदेश को वन्य प्राणियों से संबंधित भी कई सौगातें मिल रही हैं। देशभर में विलुप्त हुए चीतों को अफ्रीका से लाकर एमपी के श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में बसाया गया। इसके बाद से ही कूनो वन्यप्राणी प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।