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एमपी में असम के गैंडे लाने की योजना, वन्यजीवों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया शुरू

भोपाल   जल्द ही असम राज्य के गैंडे मध्य प्रदेश के जंगलों या ज़ू में चहलकदमी करते नजर आएंगे। इस योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव  गुवाहाटी में राष्ट्रीय वस्त्र मंत्रियों के सम्मेलन में शामिल हुए । यहां असम के मुख्यमंत्री डॉक्टर हिमंत बिस्वा सरमा के साथ उनकी महत्वपूर्ण चर्चा वन्यजीवों के आदान-प्रदान को लेकर हुई  । मध्य प्रदेश और असम के बीच वन्यजीवों का आदान-प्रदान जल्द ही हकीकत बन जाएगा। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव  गुवाहाटी गए थे । राष्ट्रीय वस्त्र मंत्रियों के सम्मेलन के इतर वे असम के मुख्यमंत्री डॉक्टर हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात करेंगे और इस मुद्दे पर विस्तार से बातचीत करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, असम से गैंडों को मध्य प्रदेश लाने और मध्य प्रदेश में विलुप्त हो चुकी जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना पर फोकस रहेगा। बदले में मध्य प्रदेश से बाघ और मगरमच्छ असम को देने का विचार है। दोनों राज्यों ने इस संबंध में केंद्र सरकार को अपना प्रस्ताव भी भेज दिया है। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य इससे पहले भी दोनों राज्यों के बीच इस तरह की चर्चा हो चुकी है और अब ये दौरा इसे आगे बढ़ाने का बड़ा मौका है। वहीं, गुवाहाटी में आयोजित राष्ट्रीय वस्त्र सम्मेलन में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह भी मौजूद रहेंगे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य देश के वस्त्र उद्योग के समग्र विकास को गति देना है। यहां कपड़ा उद्योग में निवेश, रोजगार सृजन, नवाचार, कौशल विकास, आधुनिक मांग के अनुसार उत्पादन और राज्यों के बीच सहयोग पर विचार-विमर्श होगा। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव इस मंच पर मध्य प्रदेश की वस्त्र उद्योग नीति, उद्योग-अनुकूल माहौल, निवेश के अवसर और राज्य के उपलब्ध संसाधनों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करेंगे।

एमपी कर्मचारियों का वेतन बढ़ेगा, 3 हजार से लेकर 5 हजार तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव कैबिनेट में भेजा

भोपाल  एमपी के कर्मचारियों, अधिकारियों को जल्द ही बड़ी सौगात मिलेगी। उनके वेतन में 5 हजार तक की बढ़ोत्तरी होगी। प्रदेश के शिक्षा विभाग के अमले को यह लाभ मिलेगा। विभाग के टीचर्स के साथ सहायक संचालक स्तर के अधिकारियों तक के वेतन में इजाफा होगा। चतुर्थ समयमान-क्रमोन्नत वेतनमान (Fourth time-scale-based promotional pay scale) मिलने से उन्हें यह लाभ प्राप्त होगा। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया चौथे समयमान वेतनमान संबंधी प्रस्ताव अंतिम रूप से तैयार कर कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेज दिया है। शिक्षा विभाग में 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके टीचर्स व अन्य संवर्गों को इसका लाभ मिलेगा। अनुमान के मुताबिक विभाग के करीब सवा लाख कर्मचारियों को चौथे समय मान वेतनमान का लाभ मिलेगा। ये सभी टीचर्स, कर्मचारी, अधिकारी पिछले 3 साल से इसका इंतजार कर रहे हैं। कैबिनेट में मंजूरी के लिए भेज दिया स्कूल शिक्षा विभाग के उपसचिव कमल सिंह सोलंकी के अनुसार पात्र टीचर्स, हेड मास्टर, प्रिंसीपल व अन्य अधिकारियों को चौथा समयमान-क्रमोन्नत वेतनमान देने का प्रस्ताव है। इसे कैबिनेट में मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। शिक्षा विभाग के प्राइमरी, मिडिल व अन्य टीचर्स, लेक्चरर्स, प्रिंसीपल्स और सहायक संचालक स्तर के ऐसे अधिकारियों को चौथा समयमान वेतनमान मिलेगा जिनके विभाग में 35 साल पूरे हो चुके हैं। बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग में सीधी भर्ती के लेक्चरर्स और प्रिंसीपल्स को यह लाभ मिल चुका है लेकिन पदोन्नत होकर आए टीचर्स और अन्य अधिकारी इससे वंचित हैं। कम से कम 3 हजार रुपए और अधिकतम 5 हजार रुपए का लाभ मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौर बताते हैं कि चतुर्थ समयमान लागू होने से टीचर्स को हर महीने कम से कम 3 हजार रुपए और अधिकतम 5 हजार रुपए का लाभ होगा। शिक्षा विभाग के उपसचिव कमल सिंह सोलंकी के अनुसार चौथे समयमान वेतनमान से विभाग पर करीब 312 करोड़ रुपए का आर्थिक भार आएगा। कैबिनेट की अनुमति मिलते ही इसके आदेश जारी कर दिए जाएंगे। पात्र टीचर्स व अधिकारियों के वेतन में बढ़ोतरी शुरू हो जाएगी।

पीएमश्री योजना में प्रदेश के 799 विद्यालयों का किया है चयन

विद्यालय बनेंगे गुणवत्तापूर्ण एवं भविष्यगामी शिक्षा के केंद्र भोपाल विद्यार्थियों को बेहतर,आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी पीएमश्री (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश के 799 शासकीय विद्यालयों का चयन किया गया है। स्‍कूल शिक्षा विभाग द्वारा अब इन विद्यालयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के अनुरूप आदर्श, आधुनिक एवं समावेशी शैक्षणिक संस्थानों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इ‍ससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित, सुविधायुक्त एवं प्रेरणादायी अध्ययन वातावरण प्राप्त हो सके। पीएमश्री योजना से मध्यप्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, नवाचार और समावेशन का एक सशक्त मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। ये विद्यालय विद्यार्थियों को न केवल वर्तमान की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है, बल्कि उन्हें भविष्य के सक्षम नागरिक के रूप में विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। योजना के अंतर्गत प्रत्येक शैक्षणिक सत्र में विद्यालयों के ढांचागत उन्नयन के लि‍ए व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों एवं अन्य शैक्षणिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण से विद्यालयों का शैक्षणिक परिवेश निरंतर बेहतर हो रहा है। हरित विद्यालय संकल्पना के अंतर्गत सोलर पैनल की स्थापना, स्वच्छ पेयजल एवं स्वच्छता संबंधी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता भी बढ़ रही है। आईसीटी लैब, डिजिटल पुस्तकालय एवं नवाचार को दिया जा रहा है बढ़ावा स्टेम (एसटीईएम) शिक्षा एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में सभी उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक पीएमश्री विद्यालयों में आईसीटी लैब, इंटरैक्टिव पैनल तथा डिजिटल पुस्तकालय विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रदेश में 458 अटल टिंकरिंग लैब की स्थापना की जा रही है, जिससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार एवं तकनीकी दक्षता को बढ़ावा मिल रहा है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देते हुए पीएमश्री विद्यालयों में आउटडोर एवं इनडोर खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई है। योग, खेल एवं संगीत के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों की नियुक्ति की गई है। साथ ही गणित एवं विज्ञान सर्किल गतिविधियां, कैरियर मार्गदर्शन, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, समर कैंप तथा बालिकाओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। पीएमश्री विद्यालयों में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का हो रहा संचालन राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के प्रावधानों के अनुरूप विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा को प्रभावी रूप से लागू किया गया है। प्रदेश के 663 में से 650 उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक पीएमश्री विद्यालयों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इससे विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी कौशल प्राप्त हो रहे हैं और उनका भविष्य अधिक सुदृढ़ बन रहा है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीसीटीवी से निगरानी विद्यालय प्रशासन एवं नेतृत्व को सशक्त बनाने के उद्देश्य से पीएमश्री विद्यालयों के प्राचार्यों को आईआईएम इंदौर, आईआईएम रायपुर एवं टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़, मुंबई जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इसके साथ ही विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में सीसीटीवी निगरानी प्रणाली एवं अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों की बेहतर तैयारी के लिए अतिरिक्त कक्षाओं का भी संचालन किया जा रहा है।

राष्ट्रीय युवा दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे खेलो एमपी यूथ गेम्स का शुभारंभ

देश में पहली बार आधुनिक तकनीक से 4K वॉटर प्रोजेक्शन से होगा ऐतिहासिक इवेंट शुभारंभ समारोह में दिखेगी भोपाल के बड़े तालाब की भव्यता होगा आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम भोपाल खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने गुरुवार को बड़े तालाब स्थित वॉटर स्पोर्ट्स अकादमी पहुँचकर खेलो एमपी यूथ गेम्स की लॉन्चिंग तैयारियों का निरीक्षण किया। मंत्री श्री सारंग ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि कार्यक्रम में अधिक से अधिक खेल प्रेमियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए तथा सुरक्षा, तकनीकी एवं व्यवस्थागत सभी इंतजाम पूर्णतः पुख्ता हों। मंत्री श्री सारंग ने बताया कि स्वामी विवेकानंद की जयंती ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ 12 जनवरी को खेलो एमपी यूथ गेम्स का भव्य शुभारंभ किया जाएगा। यह शुभारंभ कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में शाम 6 बजे बड़े तालाब से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि देश में पहली बार लॉन्चिंग इवेंट के दौरान दर्शकों को 4K वॉटर प्रोजेक्शन देखने को मिलेगा। यह वॉटर प्रोजेक्शन दर्शकों को एक इमर्सिव और सिनेमाई अनुभव प्रदान करेगा, जो अब तक राज्य स्तर के किसी भी खेल आयोजन में देखने को नहीं मिला है। देश में पहली बार फ्लोटिंग स्टेज पर ऐतिहासिक लॉन्चिंग देश में पहली बार किसी राज्य स्तरीय यूथ स्पोर्ट्स इवेंट की लॉन्चिंग फ्लोटिंग स्टेज पर की जाएगी, जहाँ 4K वॉटर प्रोजेक्शन इस ऐतिहासिक समारोह का मुख्य आकर्षण होगा। भोपाल के बड़े तालाब की प्राकृतिक भव्यता के बीच जल-परदे पर अत्याधुनिक 4K तकनीक के माध्यम से खेलो एमपी यूथ गेम्स की थीम, लोगो, विज़ुअल स्टोरी और खेल भावना को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अत्याधुनिक प्रस्तुति के साथ हाई-क्वालिटी विजुअल डिस्प्ले, टॉर्च लाइटिंग के माध्यम से आकर्षक फायर वर्क तथा 20 फीट ऊँची ‘लार्जर दैन लाइफ’ जर्सी जैसे विशेष आकर्षण समारोह की भव्यता को बढ़ायेंगे। आधुनिक तकनीक और खेल संस्कृति के इस अद्वितीय संगम के माध्यम से यह शुभारंभ समारोह मध्यप्रदेश की नवाचार क्षमता, खेल प्रतिबद्धता और सांस्कृतिक गौरव को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेगा। लोगो, मैस्कॉट, एंथम और जर्सी का होगा अनावरण मंत्री श्री सारंग ने बताया कि शुभारंभ समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा खेलो एमपी यूथ गेम्स के लोगो, मैस्कॉट, एंथम एवं आधिकारिक जर्सी का भव्य लोकार्पण किया जाएगा। यह क्षण खेलो एमपी यूथ गेम्स की पहचान और भावना को सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगा। इस अवसर पर प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न खेल संघों के पदाधिकारी, प्रतिनिधि एवं वरिष्ठ खेल प्रशासक भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। शुभारंभ समारोह में दिखेगी भोपाल के तालाबों की भव्यता मंत्री श्री सारंग ने बताया कि खेलो एमपी यूथ गेम्स का शुभारंभ समारोह विशेष रूप से आकर्षक एवं यादगार बनाया गया है। इस अवसर पर ताल-तलैयों की नगरी भोपाल के ऐतिहासिक तालाबों की भव्यता दिखेगी। शुभारंभ समारोह के माध्यम से एमपी की पहचान केवल खेलों के राज्य के रूप में ही नहीं, बल्कि संस्कृति, सौंदर्य और युवाशक्ति के केंद्र के रूप में भी देश के सामने प्रस्तुत की जाएगी। यह आयोजन खिलाड़ियों, दर्शकों और आमजन के लिए प्रेरणादायी एवं उत्साहवर्धक अनुभव सिद्ध होगा। देश में पहली बार खेल विभाग और सभी खेल संघ मिलकर करेंगे आयोजन मंत्री श्री सारंग ने कहा कि यह देश में पहली बार हो रहा है, जब खेल विभाग के साथ सभी मान्यता प्राप्त खेल संघ मिलकर समन्वित रूप से यूथ गेम्स का आयोजन एवं संचालन कर रहे हैं। यह पहल खेल विभाग का एक ऐतिहासिक और नवाचारी कदम है। खेलो एमपी यूथ गेम्स केवल एक खेल आयोजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भविष्य की राज्य टीम चयन प्रक्रिया का सशक्त, व्यवस्थित और पारदर्शी मंच बनेगा। इस व्यवस्था के माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान प्रारंभिक स्तर पर ही हो सकेगी, जिससे उन्हें आगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचने का सशक्त अवसर प्राप्त होगा। 28 खेलों के लिये चरणबद्ध चयन प्रक्रिया खेलो एमपी यूथ गेम्स की चयन प्रक्रिया ब्लॉक स्तर से प्रारंभ की जाएगी। इसके अंतर्गत ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिताएँ 12 से 16 जनवरी 2026, जिला स्तरीय प्रतियोगिताएँ 16 से 20 जनवरी 2026, संभाग स्तरीय प्रतियोगिताएँ 21 से 25 जनवरी 2026 तथा राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएँ 28 से 31 जनवरी 2026 तक आयोजित की जाएँगी। यूथ गेम्स के अंतर्गत कुल 28 खेलों की प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएँगी। खेल संघों के साथ बेहतर एवं प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभाग द्वारा समन्वय अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार खेल आयोजन मंत्री श्री सारंग ने बताया कि प्रतियोगिताओं का आयोजन इस सिद्धांत पर किया जाएगा कि जिन खेलों की परंपरा एवं लोकप्रियता जिस क्षेत्र में है, वहीं संबंधित खेलों का आयोजन किया जाए। राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएँ भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, शिवपुरी, ग्वालियर, सागर एवं नर्मदापुरम में प्रस्तावित हैं। ब्लॉक स्तर से प्रारंभ होने वाली इस चयन प्रक्रिया में जिला स्तर पर प्रदेश के 313 विकासखंडों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। राज्य स्तर पर प्रदेश के 10 संभागों की टीमें प्रतियोगिताओं में भाग लेंगी। पहली बार पारंपरिक एवं लोकप्रिय खेलों को किया शामिल मंत्री श्री सारंग ने बताया कि यूथ गेम्स में पहली बार पारंपरिक एवं लोकप्रिय खेलों को विशेष स्थान दिया गया है। इस क्रम में पिट्टू और रस्साकशी जैसे पारंपरिक खेलों के साथ-साथ क्रिकेट और थ्रो बॉल को भी प्रतियोगिता में शामिल किया गया है।

जी राम जी योजना की प्रदेश में तैयारी पूर्ण रखें : मंत्री पटेल

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने की विभागीय योजनाओं की समीक्षा भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने आज विभागीय योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंन विकसित भारत-गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 के समयबद्ध क्रियान्वयन हेतु भारत सरकार से प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुरूप समस्त तैयारी यथा समय पूर्ण करने के निर्देश दिये। सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे प्रतिमाह फील्ड विजिट करते हुए योजनाओं की धरातल पर स्थिति देखें। जिलों द्वारा किए गए अच्छे नवाचार प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किए जायें। यदि कोई अनियमितता या गड़बड़ी प्रकाश में आती है तो उस पर तत्काल कार्यवाही हो। सभी जिलों की परफॉर्मेंस के आधार पर प्रतिमाह ग्रेडिंग की जाकर ग्रेडिंग लिस्ट जारी करने के निर्देश भी दिए ताकि अधिकारियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हो। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु तकनीकी अमला सतत निगरानी रखे। इस दौरान उन्होंने पंचायतराज, महात्मा गांधी नरेगा, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड, प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, म.प्र. ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह तथा श्रीमती दीपाली रस्तोगी, श्रीमती हर्षिका सिंह, श्री अवि प्रसाद, श्री दिनेश जैन, श्री छोटेसिंह एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025-26 में 2718 सामुदायिक भवन लागत राशि 654.7024 करोड़ रूपये के स्वीकृत किये जाकर प्रथम किश्त की राशि 293.8262 करोड़ रूपये जारी कर दी गई है। स्वीकृत सामुदायिक भवनो की वर्क आईडी पंचायत दर्पण 2.0 पोर्टल पर जनरेट की गई है। बैठक में मंत्री श्री पटेल ने मुख्यमंत्री वृन्दावन ग्राम योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी 208 ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में वृन्दावन ग्राम का चयन किया जा चुका है। प्रत्येक वृन्दावन ग्राम के लिए पाँच वर्षीय कार्य योजना तैयार करें। इसके लिए एक लाख रूपये प्रति वृन्दावन ग्राम के मान से राशि जिला पंचायत को अंतरित की जा चुकी है। कार्ययोजना तैयार होने पर निर्धारित प्राथमिकता एवं बजट उपलब्धता के आधार पर आगामी कार्यवाही की जाए। राष्ट्रीय ग्राम स्वराज योजनान्तर्गत 1 लाख 95 हजार 712 प्रतिभागियों को दिया गया प्रशिक्षण बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय ग्राम स्वराज योजनान्तर्गत वर्ष 2025-26 में कुल एक लाख 95 हजार 712 प्रतिभागियों का त्रिस्तरीय पंचायत राज प्रतिनिधि, कार्यकारी अमलो का प्रशिक्षण किया जा चुका है। एक्सपोजर विजिट के तहत 2 हजार 797 प्रतिभागियों का भ्रमण कराया जा चुका है। आरजीएसए योजनांतर्गत (PMU) मद अंतर्गत राज्य स्तर (SPRC, SPMU), जिला स्तर (DPMU, DPRC), जनपद स्तर (BPMU) पर 854 के लक्ष्य के विरूद्ध 766 मानव संसाधन पदस्थ किए जा चुके है। पेसा सपोर्ट अंतर्गत पेसा क्षेत्रो में जिला स्तर पर 20 जिला समन्वयक, विकासखंड स्तर पर 88 विकासखंड समन्वयक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर 4 हजार 839 पेसा मोबलाइजर्स नियुक्त किए जा चुके है इस मद में मानदेय के रूप में कुल 15.17 करोड़ राशि भुगतान की जा चुकी हैं। झाबुआ को मिली सराहना बैठक में मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि पेसा एक्ट के क्रियान्वयन में जनजातीय कल्याण विभाग से बेहतर समन्वय रखें। झाबुआ सहित अन्य वनांचलों में पेसा एक्ट के तहत अच्छा कार्य हो रहा है। अनेक ग्रामों में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता का वातावरण बना है और 3-D, दहेज, डी.जे. और दारू के खिलाफ जनजाति समाज में अलख जगी है। यह खुशी की बात है कि अनेक स्थानों पर अब चौथे-D धर्मांतरण के खिलाफ भी आवाज़ उठायी जा रही है। यह ग्रामीण जनजाति समाज में जागरूकता का परिचायक है और समाज में एक मिसाल है। माँ नर्मदा परिक्रमा पथ पर पौधारोपण के लिए 128 कार्य प्रारंभ बैठक में बताया गया कि एक बगिया माँ के नाम अंतर्गत 31 हजार 300 का लक्ष्य प्राप्त हुआ था। जिसमें 29 हजार 193 कार्य प्रगतिरत है। एक बगिया माँ के नाम परियोजना में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पाँच जिले खण्डवा, सिंगरौली, रायसेन, बड़वानी एवं बालाघाट है। उन्होंने बताया कि माँ नर्मदा परिक्रमा पथ पर पौधारोपण के लिए 138 कार्य स्वीकृत है, जिसमें से 128 कार्य प्रारंभ हो चुके है। अब तक कुल 38 हजार 920 पौधे रोपे गए है। पौधों की सुरक्षा हेतु तार फेंसिंग पंचायत राज संचालनालय से की जायेगी। बैठक में बताया गया कि दो गांव/पंचायत/मजरे-टोले को दोहरी संपर्कता एवं संदीपनी विद्यालय को संपर्कता उपलब्ध कराए जाने के लिए प्रदेश में "मुख्यमंत्री सुगम सम्पर्कता परियोजना" लागू की जा रही है। कार्य स्थल का चयन तथा डीपीआर तैयार करने हेतु आरआईएमएस पोर्टल विकसित किया गया है। प्रदेश में जी राम जी योजना अंतर्गत एक हजार करोड़ रूपये की नवीन सड़कों का निर्माण किया जायेगा। प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना अंतर्गत क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन बैठक में बताया गया कि खरीफ 2025 में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में 14 जिलों में प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना अंतर्गत क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन कार्य लिया गया है। इसके अंतर्गत 3 हजार 110 कृषको को चयनित कर लाभान्वित किया गया एवं सब्जी उत्पादन से प्रति कृषक 25 से 30 हजार अतिरिक्त आमदनी भी हुई। रबी 2025 में सभी 36 जिलों में क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन कार्य लिया गया है। सब्जी उत्पादन 9 हजार 157 कृषकों को चयनित किया जाकर सब्जी उत्पादन कार्य से जोड़ा गया है। क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन में सर्वोत्तम प्रगति वाले जिले जबलपुर, अशोकनगर, सागर, नरसिंहपुर एवं डिंडोरी है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रेशम उत्पादन की बारीकियों को जाना और बुनकरों से किया संवाद

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार को अपने असम प्रवास के दौरान गुवाहाटी के समीप स्थित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के केंद्र सुआलकुची का भ्रमण किया। मुख्यमंत्री ने 'सिल्क विलेज' के नाम से विख्यात सुआलकुची पहुँचकर रेशम उत्पादन की प्राचीन और पारंपरिक प्रक्रिया को बेहद करीब से देखा और इस कला की बारीकियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। बुनकरों के कौशल से अभिभूत हुए मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुआलकुची में बुनकरों के घरों और कार्यशालाओं का अवलोकन किया। उन्होंने देखा कि किस तरह यहाँ की समृद्ध विरासत को सहेजते हुए लगभग हर घर में हाथकरघों (हैंडलूम) के माध्यम से कलाकृतियाँ उकेरी जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुनकरों से सीधे संवाद कर उनके श्रम और शिल्प कौशल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यहाँ की पारंपरिक बुनाई तकनीक न केवल कला का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ रीढ़ भी है। 'पूर्व का मैनचेस्टर' है सुआलकुची उल्लेखनीय है कि गुवाहाटी से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित सुआलकुची को 'पूर्व का मैनचेस्टर' कहा जाता है। यह गाँव अपनी विशिष्ट रेशम बुनाई तकनीकों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहाँ मुख्य रूप से तीन प्रकार के रेशम मूगा (सुनहरा), पैट (हाथीदांत जैसा सफेद) और एरी (हल्का बेज) का उत्पादन किया जाता है, जो असम की मूल पहचान हैं। संग्रहालय और वस्त्र कला का अवलोकन भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'बस्त्रा उद्यान' और 'आमार सुआलकुची' संग्रहालय का भी दौरा किया। संग्रहालय में प्रदर्शित हाथकरघा गतिविधियों और इस शिल्प के क्रमिक विकास की प्रदर्शनी ने मुख्यमंत्री को विशेष रूप से प्रभावित किया। उन्होंने यहाँ तैयार होने वाले पारंपरिक परिधानों जैसे मेखला चादर, साड़ियाँ, कुर्ते और गमछे की निर्माण पद्धति को भी समझा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस भ्रमण का उद्देश्य अन्य राज्यों की श्रेष्ठ पारंपरिक कलाओं और कुटीर उद्योगों की कार्यप्रणाली को समझना और उनके अनुभवों से प्रदेश के शिल्प क्षेत्र को लाभान्वित करना है।  

पेसा एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये सरकार प्रतिबद्ध : मंत्री पटेल

भोपाल पंचायत, ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा है कि जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम स्वराज की अवधारणा को सशक्त बनाने के उद्देश्य से पेसा एक्ट (पंचायत विस्तार अनुसूचित क्षेत्र अधिनियम) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मंत्री श्री पटेल ने गत दिवस भोपाल में जन अभियान परिषद के पदाधिकारियों तथा प्रदेश के 20 पेसा जिलों से आए जिला समन्वयकों के साथ पेसा एक्ट के क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा की। बैठक में अधिनियम के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के दौरान आने वाली व्यावहारिक एवं प्रशासनिक कठिनाइयों पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने अधिकारियों को इन समस्याओं के त्वरित समाधान के लिये आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान किए। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि पेसा एक्ट का उद्देश्य अधिसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार सम्पन्न बनाना है, जिससे स्थानीय समुदाय अपनी परंपराओं, संसाधनों एवं विकास संबंधी निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभा सके। इसके लिए प्रशासनिक संवेदनशीलता, समन्वय और निरंतर प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है। मंत्री श्री पटेल ने निर्देश दिए कि आगामी फरवरी माह में पेसा विकासखंडों के सभी मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत, जिला समन्वयक एवं विकासखंड समन्वयकों का दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भोपाल में आयोजित किया जाए। इस प्रशिक्षण के माध्यम से पेसा एक्ट के प्रावधानों, प्रक्रियाओं एवं व्यावहारिक क्रियान्वयन को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।  

ग्रामीण क्षेत्रो में पेयजल व्यवस्था की होगी जाँच

मंत्री पटेल ने की जनकल्याणकारी योजनाओं की गहन समीक्षा, क्रियान्वयन के दिए निर्देश भोपाल पंचायत, ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने विभागीय राज्यमंत्री राधा सिंह एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विभाग द्वारा संचालित समस्त योजनाओं की गहन समीक्षा की। इस बैठक में उन्होंने निर्देश दिए कि सम्पूर्ण प्रदेश में पेयजल की गुणवत्ता जाँच का अभियान चलायें। यह अभियान 15 फ़रवरी तक पूर्ण होना चाहिए। बैठक में मंत्री श्री पटेल ने स्पष्ट किया कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता यह है कि सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध रूप से पहुँचे। योजनाओं का प्रभाव धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे। समीक्षा बैठक में मंत्री श्री पटेल ने विकसित भारत–गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 (जी राम जी) के समयबद्ध एवं प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल देते हुए निर्देश दिए कि भारत सरकार से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी प्रशासनिक, तकनीकी एवं कार्यात्मक तैयारियाँ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण की जाएँ, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसर सुदृढ़ हो सकें। मंत्री श्री पटेल ने अधिकारियों को प्रतिमाह अनिवार्य रूप से फील्ड विजिट कर योजनाओं की वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण करने के निर्देश दिए, जिससे जिलों में किए जा रहे अच्छे नवाचारों को प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जा सके। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी भी स्तर पर अनियमितता या गड़बड़ी पाए जाने पर तत्काल एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मंत्री श्री पटेल ने जिलों के कार्य निष्पादन के आधार पर मासिक ग्रेडिंग प्रणाली लागू कर ग्रेडिंग सूची जारी करने के निर्देश भी दिए, जिससे अधिकारियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित हो और कार्य निष्पादन की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो सके। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए निर्देश दिए कि 15 फरवरी तक जल स्रोतों की सैंपलिंग कर जांच कराई जाए तथा पुनः अप्रैल माह में अनिवार्य रूप से जल गुणवत्ता की समीक्षा की जाए। बैठक में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए मंत्री श्री पटेल ने कहा कि सभी कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करना अनिवार्य है और इसके लिए तकनीकी अमले द्वारा सतत निगरानी रखी जाए।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव सीधी जिले को देंगे विकास कार्यों की सौगात

बहरी में होगा लोकार्पण-शिलान्यास कार्यक्रम प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण एवं हितलाभ वितरण कार्यक्रम भी होगा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को सीधी जिले के बहरी में आयोजित विभिन्न विभागों के हितग्राहियों के प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम में 201 करोड़ 64 लाख रुपये के 209 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 68 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 179 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा 133 करोड़ 62 लाख रुपये लागत के 30 विकास कार्यों का शिलान्यास करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "एक बगिया मां के नाम'' योजना में 505 हितग्राहियों को 11 करोड़ 58 लाख रूपये की राशि से लाभान्वित करेंगे। विभिन्न विभागों के 179 कार्यों का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा बहरी में अनुसूचित जाति विभाग, आदिवासी विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, जनजातीय कार्य विभाग, जिला पंचायत वाटरशेड, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग एवं स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत कुल 179 विकास कार्यों का लोकार्पण किया जाएगा। इन कार्यों पर 68 करोड एक लाख 40 हजार रुपये की लागत व्यय की गई है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना एवं ग्रामीण विकास को मजबूती मिलेगी। 30 विकास कार्यों का होगा शिलान्यास मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग (प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना–वाटरशेड विकास), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पीआईयू विभाग तथा लोक निर्माण विभाग (भवन/सड़क संभाग) के अंतर्गत कुल 30 विकास कार्यों का शिलान्यास किया जाएगा। इन कार्यों पर कुल 133 करोड़ 62 लाख 67 हजार रुपये की लागत अनुमानित है। प्रशिक्षण एवं हितग्राही उन्मुखीकरण कार्यक्रम भी आयोजित बहरी में विभिन्न विभागों के हितग्राहियों का प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम भी आयोजित होगा। इससे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी हितग्राहियों तक सीधे पहुँचेगी और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी। कार्यक्रम में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कुटीर एवं ग्रामोद्योग तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री दिलीप जायसवाल, स्थानीय सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, विधायक सिंहावल श्री विश्वामित्र पाठक, विधायक सीधी श्रीमती रीती पाठक, विधायक धौहनी श्री कुंवर सिंह टेकाम, विधायक चुरहट श्री अजय सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मंजू रामजी सिंह, पूर्व विधायक चुरहट श्री शरदेन्दु तिवारी तथा वरिष्ठ समाजसेवी श्री देवकुमार सिंह चौहान विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा में कैंसर यूनिट और अन्य स्वास्थ्य अधोसंरचनाओं के निर्माण कार्यों का किया निरीक्षण

 भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने संजय गांधी चिकित्सालय परिसर में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों का जायजा लिया। कैंसर यूनिट का निरीक्षण करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि कैंसर यूनिट का शेष निर्माण कार्य तेजी से पूरा कराएं। कैंसर यूनिट का शुभारंभ होते ही रीवा में गंभीर कैंसर रोगियों को उपचार की सुविधा मिलने लगेगी। जिन रोगियों को कैंसर के उपचार के लिए अभी महानगरों की ओर जाना पड़ता है उन्हें रीवा में ही उपचार की सुविधा मिलेगी। कैंसर यूनिट के लिए आधुनिकतम लीनेक मशीन तथा अन्य चिकित्सा उपकरण खरीदे जा रहे हैं। भवन का निर्माण कार्य पूरा होते ही आधुनिकतम चिकित्सा उपकरण स्थापित कर दिए जाएंगे। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने सुपर स्पेशलिटी हास्टिपल के विस्तार के लिए किए जा रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल जटिल रोगों के उपचार का केन्द्र बन गया है। इसके विस्तार से बड़ी संख्या में रोगियों को उपचार की सुविधा मिलेगी। संजय गांधी हास्पिटल के विस्तार का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। रीवा को मेडिकल हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। निरीक्षण के समय मेडिकल कालेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. यत्नेश त्रिपाठी तथा निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।