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निशातपुरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का स्टॉपेज जल्द, भोपाल में चौथे स्टेशन पर तैयारियां पूरी

भोपाल  भोपाल में लगभग 500 करोड़ की लागत से बने निशातपुरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के रुकने का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है. कुछ कागजी अनुमतियों मिलते ही यहां ट्रेनों का स्टॉपेज शुरू हो जाएगा. इस रेलवे स्टेशन पर सारी तैयारियां हो चुकी हैं. यात्री सुविधाओं को देखते हुए यहां एफओबी, लिफ्ट, यात्री प्रतीक्षालय, पेयजल व्यवस्था, प्लेटफॉर्म शेड जैसे काम पूरे हो चुके हैं. यात्रियों को दो साल से इंतजार निऱातपुरा रेलवे स्टेशन दो वर्ष पहले बनकर तैयार हो चुका था. तभी से निशातपुरा इलाके के लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही उन्हें भोपाल स्टेशन नहीं जाना पड़ेगा. यह स्टेशन सभी आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण होने के बावजूद रेलवे से विभिन्न प्रकार की अनुमतियां नहीं मिलने के कारण सूना पड़ा है. अब यहां का सन्नाटा खत्म होने वाला है. निशातपुरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के रुकने का इंतजार  निशातपुरा स्टेशन शुरू होने से इस इलाके के यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी. छोला, विश्वकर्मा नगर, नीलकंठ कॉलोनी, हनीफ कॉलोनी सहित कई घनी आबादी वाले क्षेत्र निशातपुरा के तहत आते हैं. इन इलाकों के लोगों को ट्रेन से यात्रा करने के लिए मजबूरी में दूर स्थित भोपाल रेलवे स्टेशन जाना पड़ता है. रेलवे स्टेशन चालू होने से व्यापार बढ़ेगा छोला के रहने वाले राजेंद्र राय का कहना है "निशातपुरा रेलवे स्टेशन के चालू हो जाने से हमें बहुत फायदा होगा. हमारा व्यापार बढ़ेगा." हरिनारायण चक्रवर्ती का कहना है "निशातपुरा रेलवे स्टेशन को बने 2 वर्ष से ज्यादा हो चुके हैं. यहां का काम बहुत धीरे चल रहा है. यदि यह स्टेशन चालू होता है तो हम लोगों को तो फायदा होगा." दो ट्रेनों के रुकने का नोटिफिकेशन मिला प्रभारी जनसंपर्क अधिकारी रेलवे भोपाल नवल अग्रवाल ने बताया "निशातपुरा रेलवे स्टेशन के लिए बोर्ड के नए नियमों के अनुसार नए स्टेशन की कैटेगरी अपडेट की गई है, जिसमें और सुविधाएं अपडेट की जा रही हैं. उम्मीद है कि जल्द ही स्टेशन शुरू किया जाएगा. स्टेशन पर सबसे पहले दो गाड़ियों के रुकने का नोटिफिकेशन आया है, जिसमें मालवा एक्सप्रेस और सोमनाथ एक्सप्रेस शामिल हैं."  रेलवे अधिकारियों के अनुसार अगर भोपाल स्टेशन पर समाप्त होने वाली कुछ ट्रेनों का टर्मिनेशन निशातपुरा तक बढ़ाया जाता है तो इंजन की दिशा बदलने की जरूरत खत्म हो जाएगी। अभी भोपाल स्टेशन पर इंजन की दिशा बदलने में 30 से 45 मिनट तक का समय लग जाता है, जिससे ट्रेनें लेट हो जाती हैं। निशातपुरा से ट्रेनों को सीधे इंदौर, उज्जैन और रतलाम की ओर रवाना करना आसान होगा। बता दें कि लगभग एक साल पहले निशातपुरा रेलवे स्टेशन बनकर तैयार हो चुका है। इसका औपचारिक उद्घाटन अब तक नहीं होने से इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। स्टेशन पर सभी सुविधाएं मौजूद रेलवे विभाग ने स्टेशन परिसर में प्लेटफार्म विस्तार के साथ टिकट घर, यात्री प्रतीक्षालय, पार्किंग, सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाएं दी हैं। अब फिर इन्हें दोबारा परीक्षण कर कार्य किया जा रहा है, जो अंतिम चरण में है।  

भोपाल में कर्मचारियों को मकर संक्रांति पर छुट्टी मिलने की संभावना, कलेक्टर ने भेजा शासन को प्रस्ताव

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर स्थानीय अवकाश घोषित किया जा सकता है। भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने इस संबंध में राज्य शासन को औपचारिक प्रस्ताव भेज दिया है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो करीब 40 हजार कर्मचारियों और अधिकारियों को अवकाश का लाभ मिलेगा। चार स्थानीय अवकाशों का प्रस्ताव शासन के पास कलेक्टर द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में मकर संक्रांति के साथ-साथ तीन अन्य महत्वपूर्ण तिथियों को भी शामिल किया गया है –  25 सितंबर: अनंत चतुर्दशी 19 अक्टूबर: महानवमी 3 दिसंबर: भोपाल गैस त्रासदी बरसी इन सभी अवसरों पर स्थानीय अवकाश घोषित करने की अनुशंसा की गई है। भोपाल को साल में मिलते हैं 4 स्थानीय अवकाश राजधानी भोपाल में हर साल कुल चार स्थानीय अवकाश घोषित किए जाते हैं। वर्ष 2025 में मकर संक्रांति, रंगपंचमी, गणेश चतुर्थी और भोपाल गैस त्रासदी बरसी पर अवकाश दिया गया था। हालांकि इस बार रंगपंचमी पर अवकाश का प्रस्ताव नहीं भेजा गया, जिससे कर्मचारियों में हल्की निराशा भी देखी जा रही है। लगातार वीकेंड का फायदा, कर्मचारियों में खुशी इस बार प्रस्तावित अवकाश वाले दिन खास माने जा रहे हैं –  मकर संक्रांति: बुधवार अनंत चतुर्दशी: शुक्रवार महानवमी: सोमवार गैस त्रासदी बरसी: गुरुवार इन तारीखों में शनिवार-रविवार की बाधा नहीं होगी, जिससे कर्मचारियों को छुट्टी का पूरा लाभ मिल सकेगा। अब सभी की नजरें राज्य शासन के फैसले पर टिकी हैं। मंजूरी मिलते ही भोपाल के हजारों कर्मचारियों के चेहरे खिल उठेंगे।

मोहन यादव सरकार ने लिया बड़ा फैसला, सरकारी नौकरियों के लिए दो बच्चों की शर्त को समाप्त करने की दिशा में कदम

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की शर्त हटाने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने विधि विभाग से सलाह के बाद इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट में अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस बदलाव से उन कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जो इस नियम के कारण नौकरी के लिए अपात्र हो गए थे या जिनकी सेवाएं समाप्त हो गई थीं। 2001 से लागू था नियम यह नियम 26 जनवरी, 2001 से लागू था, जिसके तहत तीसरा बच्चा होने पर सरकारी नौकरी नहीं मिलती थी और नौकरी में रहते हुए तीसरा बच्चा होने पर सेवा समाप्त कर दी जाती थी। यह नियम तब बनाया गया था जब प्रदेश में प्रजनन दर अधिक थी। हालांकि, सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) बुलेटिन 2023 के अनुसार, मध्य प्रदेश की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2.4 है, जो भारत की टीएफआर 1.9 से अधिक है। शहरी क्षेत्रों में यह दर 1.8 और ग्रामीण क्षेत्रों में 2.6 है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य पहले ही इस तरह के नियमों को संशोधित कर चुके हैं। इन कर्मचारियों को होगा लाभ इस नए नियम से स्कूल, उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और अन्य विभागों के कर्मचारियों को लाभ होगा। हालांकि, जिन कर्मचारियों पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है, उन्हें इस नए नियम से कोई राहत नहीं मिलेगी क्योंकि इसे पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा। परिवीक्षा अवधि में भी संशोधन इसके साथ ही, परिवीक्षा (प्रोबेशन) अवधि को लेकर भी नियमों में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। अब कर्मचारी परिवीक्षा अवधि पूरी होने के छह महीने के भीतर नियमित कर दिए जाएंगे, जिससे उनकी वार्षिक वेतनवृद्धि पर पड़ने वाले असर को रोका जा सकेगा। परिवीक्षा अवधि के नियम में भी सरकार संशोधन कर रही है। अब नियुक्ति के बाद दो या तीन साल की परिवीक्षा अवधि पूरी होने के छह महीने के भीतर कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा। अभी इसमें देरी होने से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान होता है, क्योंकि उनकी वार्षिक वेतनवृद्धि पर इसका असर पड़ता है। मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ लगातार इस बात को उठा रहा था कि परिवीक्षा अवधि समाप्त करने के लिए समितियों की बैठकें नियमित रूप से होनी चाहिए।

ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2: 10 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा, बाघों के शिकार पर होगी सख्त कार्रवाई

भोपाल  मध्य प्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान 56 बाघों की मौत के बाद वन विभाग ने शिकार और अवैध गतिविधियों पर सख्ती के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सभी टाइगर रिजर्व, वन मंडल और वन विकास मंडलों में 10 जनवरी से 15 फरवरी तक ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ चलाया जाएगा। इस विशेष अभियान के दौरान फील्ड स्तर पर सघन गश्त अनिवार्य होगी और शिकार की किसी भी घटना पर तत्काल सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े द्वारा इसको लेकर जारी निर्देश में कहा गया है कि हर वन मंडल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मंडल में एक उपवन मंडल स्तर का नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। यह अधिकारी हर सप्ताह वन मुख्यालय को जानकारी भेजेगा। ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप एक माह पांच दिन तक चलेगा। इस दौरान सभी वन मंडल इकाइयों में सघन गश्ती दिन और रात्रि में की जाएगी। सप्ताह में कम से कम तीन दिन परिक्षेत्र अधिकारी एवं अधीनस्थ अधिकारी गश्त करेंगे। साथ ही हफ्ते में दो दिन वन मंडल अधिकारी और उप वन मंडल अधिकारी वहीं एक दिन क्षेत्र संचालक और मुख्य वन संरक्षक गश्त करेंगे। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, ठंड के मौसम में शिकार की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं। फंदे और विद्युत करंट का उपयोग कर किए जाने वाले अवैध शिकार में बाघ, तेंदुआ, भालू और अन्य संरक्षित वन्य प्राणी भी फंस जाते हैं। बीते वर्ष बाघों की मौत के मामलों में शिकार की आशंका लगातार सामने आने के बाद विभाग ने विशेष निगरानी अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ पूरे प्रदेश में 10 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा। इसमें प्रदेश के 9 टाइगर रिजर्व, 63 सामान्य वन मंडल और 11 परियोजना मंडल शामिल होंगे। अभियान की अवधि में दिन और रात दोनों समय गश्त की जाएगी। वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक वन मंडल, टाइगर रिजर्व और वन विकास मंडल में उपवन मंडल स्तर का एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी हर सप्ताह वन मुख्यालय को रिपोर्ट भेजेगा। गश्त के दौरान सप्ताह में कम से कम तीन दिन परिक्षेत्र अधिकारी और अधीनस्थ अधिकारी क्षेत्र में रहेंगे। दो दिन वन मंडल अधिकारी और उपवन मंडल अधिकारी, जबकि एक दिन क्षेत्र संचालक और मुख्य वन संरक्षक द्वारा अनिवार्य निरीक्षण किया जाएगा। अभियान में प्रदेश के 9 डॉग स्क्वाड, 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वाड और एक राज्य स्तरीय रेस्क्यू स्क्वाड को सक्रिय रूप से लगाया जाएगा। संवेदनशील इलाकों, शिकारी और घुमक्कड़ समुदायों के डेरों, वन सीमा से सटे क्षेत्रों और विद्युत लाइनों के आसपास सघन सर्चिंग की जाएगी। मेटल डिटेक्टर उपकरणों का भी उपयोग किया जाएगा। यदि शिकार के फंदे में कोई वन्य प्राणी फंसा मिलता है, तो तत्काल रेस्क्यू कर उपचार की व्यवस्था और अपराध पंजीबद्ध करने के निर्देश हैं। वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2014 से 2025 के बीच फंदे और विद्युत करंट से शिकार के 933 मामले दर्ज हुए। इनमें 39 बाघ, 101 तेंदुए, 36 भालू और 17 राष्ट्रीय पक्षी मोर शामिल हैं। सिर्फ वर्ष 2025 में ही 56 बाघों की मौत दर्ज की गई, जिनमें से 36 मामलों में शिकार की आशंका जताई गई है। अभियान के दौरान रोजाना स्तर पर वन मंडल अधिकारी समीक्षा करेंगे, जबकि साप्ताहिक समीक्षा मुख्य वन संरक्षक और क्षेत्र संचालकों द्वारा की जाएगी। वन विभाग का कहना है कि ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ का उद्देश्य केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि शिकार की घटनाओं को रोकना और वन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। गश्त को लेकर जारी निर्देश     प्रदेश में वर्तमान में 9 डॉग स्क्वाड हैं। इसका भी प्रयोग इस दौरान किया जाएगा।     गश्त के दौरान संवेदनशील क्षेत्र एवं शिकारी व घुमक्कड़ समुदाय के डेरों की चेकिंग, सर्चिंग कार्यवाही की जाएगी।     सर्चिंग के दौरान निकटतम डॉग स्क्वाड को साथ रखा जाएगा और मेटल डिटेक्टर उपकरण भी उपयोग में लाए जाएंगे।     गश्त के दौरान वन राजस्व सीमा से लगे वन क्षेत्र और बागड़, फेंसिंग में सर्चिंग की जाएगी।     प्रदेश में वर्तमान में 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वाड एवं एक राज्य स्तरीय रेस्क्यू स्क्वाड काम कर रहा है, इसको भी उपयोग में लाया जाएगा। गश्त के दौरान शिकार के लिए प्रयुक्त फंदे में वन्य प्राणी फंसा पाए जाने की स्थिति में तत्काल निकटतम रेस्क्यू स्क्वाड की सहायता से वन्य प्राणी के उपचार की उचित व्यवस्था की जाएगी। अपराध पंजीबद्ध किया जाएगा। ऐसे मामले में अपराध में शामिल अपराधी का पता लगाकर तत्काल कार्यवाही की जाएगी।     वन भूमि या वन्य प्राणी क्षेत्र से जाने वाले विद्युत लाइन के नीचे और उसके आसपास गश्ती करने के लिए भी कहा गया है और आवश्यकता अनुसार विद्युत अमले को भी साथ रखने के लिए कहा गया है।     गश्त के दौरान शिकार के लिए लगाए गए फंदे में फैलाया गया विद्युत करंट, वायर वन भूमि या वन्य प्राणी क्षेत्र में पाए जाने पर प्रकरण में मिले साक्ष्य के आधार पर जब्त कर अपराध पंजीबद्ध किया जाएगा और अपराध में शामिल अपराधी का पता लगाकर कार्यवाही की जाएगी।     गांव और शहर में पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी निगरानी पंजी में भी दर्ज की जाएगी।     ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप के अंतर्गत वन मंडल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मंडल में की जा रही कार्यवाही की समीक्षा रोज वन मंडल अधिकारी करेंगे और हर सप्ताह संबंधित मुख्य वन संरक्षक, क्षेत्र संचालक, क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक के द्वारा भी इसकी समीक्षा की जाएगी। प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व, 11 परियोजना मंडल सभी मुख्य वन संरक्षक, वन संरक्षक, क्षेत्रीय क्षेत्र संचालक, संचालक टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक वन विकास निगम, वन मंडल अधिकारी तथा संभागीय प्रबंधक वन विकास निगम को जारी निर्देश में कहा गया है कि प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व 63 सामान्य वन मंडल और 11 परियोजना मंडल हैं। ऐसे इलाकों में शिकारी और मांस के शौकीन लोगों द्वारा शिकार के जो तरीके अपनाए जाते हैं उससे बाघ, तेंदुए, हाथी, भालू आदि भी शिकार हो जाते हैं। विभागीय पोर्टल में दर्ज शिकार के प्रकरणों का विश्लेषण करने पर पाया गया है कि वर्ष 2014 से 2025 तक फंदे एवं विद्युत लाइन में तार फंसाकर शिकार से संबंधित कुल 933 प्रकरण … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़ा ऐलान: अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना से चंबल क्षेत्र में तेज़ी से होगा विकास

अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना से चंबल क्षेत्र के विकास को मिलेगी गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परियोजना के संबंध में दिए दिशा-निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि क्षेत्रीय विकास में सड़कों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना से प्रदेश के चंबल क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। इस मार्ग से मुरैना, श्योपुर और भिंड जिले, राजस्थान से निकल रहे दिल्ली-वड़ोदरा एक्सप्रेस-वे और उत्तर प्रदेश के आगरा-लखनऊ हाईवे से जुड़ेंगे। इससे क्षेत्र की कोटा, मुंबई, कानपुर, लखनऊ, आगरा और दिल्ली से कनेक्टिविटी बढ़ेगी तथा यात्रा का समय कम होगा। परिणामस्वरूप क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार-व्यवसाय, पर्यटन और आवागमन को प्रोत्साहन मिलेगा। किसानों और क्षेत्रीय निवासियों की सहमति और संतुष्टि अनुसार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया कर परियोजना को जल्द से जल्द पूर्ण किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना की मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक में दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पेंच राष्ट्रीय उद्यान-कान्हा टाइगर रिजर्व-बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और पन्ना राष्ट्रीय उद्यान को जोड़ने वाले मार्ग को टाइगर टूरिज्म कॉरीडोर के रूप में विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 625 कि.मी. लंबे इस मार्ग से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशानुसार वाइल्ड लाइफ टूरिज्म को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी। बैठक में अटल एक्सप्रेस-वे के प्रस्तावित दो प्लान का तुलनात्मक प्रस्तुतिकरण किया गया। बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल और प्रमुख सचिव लोक निर्माण सुखबीर सिंह उपस्थित थे।  

ड्रोन-आधारित भू-स्थानिक इंटेलिजेंस से डिजिटल गवर्नेंस होगा पारदर्शी, सक्षम और फ्यूचर-रेडी

ड्रोन एवं जियोस्पेशियल इकोसिस्टम में मध्यप्रदेश बना अग्रणी राज्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ड्रोन-आधारित भू-स्थानिक इंटेलिजेंस से डिजिटल गवर्नेंस होगा पारदर्शी, सक्षम और फ्यूचर-रेडी प्रदेश में हुआ देश की राज्य स्तरीय ड्रोन डेटा रिपोज़िटरी का शुभारंभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देते हुए प्रदेश में देश की पहली राज्य-स्तरीय ड्रोन डेटा रिपोज़िटरी (डीडीआर) शुरू की गई है। इससे मध्यप्रदेश भारत के ड्रोन एवं भू-स्थानिक इकोसिस्टम में अग्रणी राज्य बन गया है। यह पहल प्रदेश में गवर्नेंस को पूर्णतः डिजिटल बनाने की राज्य सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह तकनीक शासन की प्रक्रियाओं को सुगम, सुदृढ़ और पारदर्शी बनाती है। विभागों के बीच ड्रोन-आधारित इंटेलिजेंस को संस्थागत रूप देकर प्रदेश एक अधिक कनेक्टेड, पारदर्शी और भविष्य के लिए तैयार प्रशासनिक ढांचे की ओर तेजी से अग्रसर है। डीडीआर का शुभारंभ ‘एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0’ के अवसर पर किया गया था। इसे राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022 तथा डीजीसीए के यूएएस नियम 2021 के अनुरूप विकसित किया गया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) द्वारा विकसित यह रिपोज़िटरी फ्यूचर-रेडी डिजिटल गवर्नेस की एक सुदृढ़ आधारशिला सिद्ध होगी। मध्यप्रदेश में ड्रोन तकनीक का प्रभावी एवं व्यापक उपयोग किया जा रहा है। प्रदेश में भूमि सर्वेक्षण, कृषि प्रबंधन, सिंचाई परियोजनाओं, खनन पट्टों की निगरानी, आधारभूत संरचना निर्माण, पर्यावरणीय मूल्यांकन, नगरीय नियोजन तथा आपदा प्रबंधन जैसे विविध क्षेत्रों में उच्च-रिज़ॉल्यूशन ड्रोन सर्वेक्षण किए जा रहे हैं।अब तक ड्रोन सर्वेक्षणों से प्राप्त डेटा विभिन्न विभागों में अलग-अलग संकलित होता रहा, जिससे कई स्थानों पर सर्वेक्षणों की पुनरावृत्ति,अपूर्ण डेटा एकत्र होने और कई महत्वपूर्ण इमेजरी व भू-स्थानिक जानकारियों को सुरक्षित रखने की चुनौती सामने आई। ड्रोन डेटा रिपोज़िटरीः एकीकृत, सुरक्षित और पारस्परिक रूप से सक्षम भू-स्थानिक प्लेटफॉर्म डीडीआर एक केंद्रीकृत, क्लाउड-आधारित, सुरक्षित और इंटर-ऑपरेबल डिजिटल अवसंरचना है। इससे भू-स्थानिक प्रशासन के भविष्य का आधार तैयार होता है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले ड्रोन डेटा संग्रहित किए जा रहे हैं। इस डेटाबेस में उच्च-रिज़ॉल्यूशन ऑर्थोमोज़ाइक, 3D टेरेन मॉडल, लिडार स्कैन, वीडियो इमेजरी, लिगेसी बेसलाइन डेटा और बहु-विभागीय सर्वेक्षण रिकॉर्ड शामिल किये जाते हैं। हर डेटा फ़ाइल को सटीक लैटिट्यूड-लाँगीट्यूड मेटाडाटा, सर्चेबल की-वर्ड, मानकीकृत तकनीकी फॉर्मेट और स्वचालित वर्गीकरण के साथ रिपोज़िटरी में संरक्षित किया जाता है। इस डेटा से सभी अधिकारी खोज, तुलना और विश्लेषण कर सकते हैं। डेटा दोहराव में कमी और दक्षता में वृद्धि प्रदेश में पहली बार सभी विभागों के ड्रोन सर्वे डेटा को एक ही प्लेटफॉर्म पर समेकित किया है। इसके परिणामस्वरूप ड्रोन सर्वेक्षणों के दोहराव में 30-50% तक कमी आई है। डेटा पारदर्शिता में वृद्धि, विभागीय सहयोग में सुधार,फील्ड-वेरिफिकेशन में सटीकता और निर्णय लेने की गति में अत्यधिक बढ़ोतरी संभव हुई है। अब विभाग स्थान, परियोजना, मेटाडाटा, विषय या उद्देश्य के आधार पर आसानी से आवश्यक भू- स्थानिक डेटा खोज सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित भू-स्थानिक विश्लेषण डीडीआर की तकनीकी संरचना अत्याधुनिक है। इससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग, लिगेसी डेटा की तुलनात्मक समीक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित भू-स्थानिक विश्लेषण, स्वचालित कैटलॉगिंग, टाइम-लैप्स परियोजना निगरानी, भविष्य-अनुमान मॉडलिंग और मल्टी-डिपार्टमेंट डेटा इंटीग्रेशन सुगम हुआ है। परिणामस्वरूप डेटा अधिग्रहण का समय सप्ताह से घटकर दिनों में आ गया है। योजनाओं का मूल्यांकन अधिक विश्वसनीय और नीति-निर्माण अधिक तथ्य परक, त्वरित और प्रभावी हुआ है। डीडीआर से व्यापक लाभ भू-अभिलेख एवं राजस्व विभाग में भूखंड सीमांकन में उच्च सटीकता, किरायेदारी एवं कब्जा सत्यापन, अतिक्रमण की पहचान और भूमि विवादों का त्वरित निराकरण संभव हुआ है। आधारभूत संरचना एवं निर्माण परियोजनाओं-सड़कों, पुलों, नहरों, सोलर पार्कस एवं सार्वजनिक निर्माण कार्यों की टाइम-लैप्स निगरानी होने लगी है और परियोजनाओं की प्रगति का वैज्ञानिक मूल्यांकन आसान हुआ है। नगरीय प्रशासन एवं शहरी नियोजन के क्षेत्र में उच्च-रिज़ॉल्यूशन 3D मॉडल आधारित ज़ोनिंग, जल, सीवर, परिवहन और उपयोगिता सेवाओं की कुशल योजना बनाने में डीडीआर का उपयोग प्रभावी सिद्ध हुआ है। आपदा प्रबंधन जैसे बाढ़, आग, भू-स्खलन के बाद त्वरित नुकसान आकलन और लिगेसी बेसलाइन डेटा के आधार पर राहत और पुनर्वास की रणनीति बनाना आसान हुआ है। कृषि, सिंचाई, वन एवं पर्यावरण विभाग डीडीआर का उपयोग फसल स्थिति विश्लेषण, कीट-प्रभाव पहचान, माइक्रो- सिंचाई आवश्यकताओं का निर्धारण, वन संरक्षण एवं अवैध कटाई की निगरानी और पर्यावरणीय प्रभाव के आकलन में डीडीआर का उपयोग किया जा रहा है। डीडीआर को राष्ट्रीय मॉडल बनाने की दिशा में कदम प्रदेश सरकार आगामी समय में इस ड्रोन डेटा रिपोज़िटरी को एक राष्ट्रीय रूप से सुलभ भू-स्थानिक ढांचे में विकसित करेगी।इसके लिए केंद्रीय मंत्रालयों, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय अनुसंधान संस्थानों, GIS विशेषज्ञों, स्टार्ट-अप्स और निजी उ‌द्योग सहयोगियों के साथ समन्वय बढ़ाने की योजना है। राज्य का लक्ष्य है कि डीडीआर अनावश्यक ड्रोन सर्वेक्षण को कम करे, अंतर्राज्यीय आपदा प्रबंधन सहयोग को मजबूत बनाए और उच्च-गुणवत्ता वाले भू-स्थानिक डेटा आधारित नीति-निर्माण को सक्षम करे। ड्रोन डेटा रिपोज़िटरी मध्यप्रदेश की डेटा-आधारित गवर्नेस यात्रा में एक परिवर्तनकारी कदम है, इसमें नवाचार, पारदर्शिता और भू-स्थानिक इंटेलिजेंस शासन का अभिन्न हिस्सा बन रहे हैं। एकीकृत और इंटरऑपरेबल प्लेटफॉर्म के माध्यम से डेटा डुप्लिकेशन समाप्त होगा। इससे स्मार्ट गवर्नेंस की मजबूत नींव स्थापित होगी।  

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुवाद पर चर्चा, रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग उठाई

जबलपुर : वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में  जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत जबलपुर पहुंचे. इस मौके पर संत रामभद्राचार्य महाराज ने मांग की है कि रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाना चाहिए. वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि रामायण एक ऐसा ग्रंथ है जिसे दुनिया के कई देशों में पढ़ा और सुना जाता है. यह हमें प्रेम का पाठ भी सिखाती है. राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित हो रामायण मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, '' रामायण एक ऐसा ग्रंथ है, जिसे दुनिया के कई देशों में पढ़ा और सुना जाता है. जकार्ता, इंडोनेशिया, थाईलैंड जैसे देशों के अलावा जापान जैसे देश में भी रामायण और रामायण के चित्रों को लेकर चर्चा होती है.'' मोहन यादव ने कहा कि भगवान राम के संबंध अपने शत्रुओं से भी मर्यादा के थे. इस मौके पर संत रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाना चाहिए. उन्होंने ने बताया कि गांधी जी का प्रसिद्ध भजन रघुपति राघव राजा राम के सभी शब्द रामचरितमानस से ही लिए गए हैं. जबलपुर के साथ दिल्ली में हो वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, '' वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस एक शानदार आयोजन है. इसमें भगवान राम के चरित्र को लेकर दुनिया भर में जो काम हो रहा है, उस पर चर्चा होती है लेकिन यह आयोजन केवल जबलपुर तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि इसे जबलपुर के बाहर भी किया जाना चाहिए.'' उन्होंने वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस के आयोजक अजय बिश्नोई और अखिलेश गुमास्ता से कहा कि इस आयोजन को अब दिल्ली में भी किया जाए. हिंदू धर्म ग्रंथों को ट्रांसलेट कर रहे अन्य देश कार्यक्रम में शामिल होने आए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को जबलपुर में गीता भवन का लोकार्पण भी किया. वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस की आयोजन समिति के सदस्य मध्य प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री अजय बिश्नोई ने कहा, '' वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का यह चौथा साल है और अब इसके प्रयासों का असर भी दिखने लगा है. दुनिया के कई देशों में रामायण पर शोध कार्य चल रहे हैं. कई देशों में रामायण और हिंदू धर्म के ग्रंथ ट्रांसलेट किए जा रहे हैं.'' इस कार्यक्रम की तस्वीरें मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर करते हुए लिखा, '' संस्कारधानी जबलपुर में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी के सान्निध्य में आयोजित चौथी वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में आज केंद्रीय मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत जी के साथ सहभागिता की. भगवान श्रीराम की पावन गाथाएं युगों-युगों तक मानवता को कर्तव्य, मर्यादा और लोककल्याण के मार्ग पर अग्रसर करने वाली दिव्य प्रेरणा हैं.''

मध्य प्रदेश में दूषित पानी की समस्या को लेकर नया कदम, मोहन यादव ने लागू की वाटर सीवर गाइडलाइन

इंदौर  भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के बाद राज्य सरकार ने सभी नगर निगम और नगर पालिका के लिए वाटर सीवर गाइडलाइन लागू करने का फैसला किया है, जिसके तहत शहरी क्षेत्र में पानी की आपूर्ति पाइपलाइन में रिसाव और पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी. सीएम मोहन यादव ने किया गाइडलाइन जारी इंदौर में बीते दिनों दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हो गई थी. जिसके बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश के नगर निगम और नगरीय निकायों के कार्यक्रम के दौरान एक गाइडलाइन जारी किया. केंद्रीय लोक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण अभियंत्रण संगठन (CPHEEO) द्वारा जारी जल आपूर्ति और उपचार नियमावली पर आधारित इस गाइडलाइन का अब शहरी और स्थानीय निकायों को पालन करना होगा. लापरवाही पर अधिकारियों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई अपर मुख्य सचिव नगरी प्रशासन संजय दुबे द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार, अब पाइपलाइन रिसाव की पहचान और जल वितरण प्रणाली को 7 दिनों में सर्वे कर चिन्हांकन किया जाएगा. इसके अलावा पुराने एवं बार-बार लीकेज होने वाली पाइपलाइन और नाली-सीवर के नीचे से गुजरने वाली पाइपलाइनों की पहचान कर 48 घंटे के भीतर मरम्‍मत करना जरूरी होगी. इसके साथ ही जल शोधन संयंत्र (WTP) तथा उच्‍च स्‍तरीय टंकियां की साफ-सफाई का 7 दिवस के अंदर निरीक्षण करना जरूरी होगा. वहीं सभी जल शोधन संयंत्रों, प्रमुख जल स्रोतों तथा उच्‍च स्‍तरीय टंकियों का तत्काल जल नमूना लेकर प्रशिक्षण कराया जाएगा. गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर सख्त एक्शन की चेतावनी वहीं प्लांट अथवा जलप्रपात क्षेत्र में संबंधित अधिकारियों से संपर्क के लिए सूचना पटल और सार्वजनिक बोर्ड प्रदर्शित करने होंगे. जिस पर सभी अधिकारियों के नाम और मोबाइल नंबर मौजूद रहेगा. इसके अलावा जल आपूर्ति से संबंधित शिकायतों को इमरजेंसी श्रेणी में रखा जाएगा. जिसका निराकरण 24 से 48 घंटे में किया जाएगा. इसके साथ ही सी.एम हेल्‍पलाईन में गंदा/दूषित पेयजल तथा सीवेज से संबंधित प्राप्‍त शिकायतों के निराकरण को सर्वोच्‍च प्राथमिकता दी जाएगी. इस मामले में नगरी प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि "इंदौर के अलावा प्रदेश भर में साफ-सुथरा पानी मुहैया कराया जा सके. इसके लिए गाइडलाइन तय की गई है. जिसका पालन सभी शहरी नगर निगम और नगर पालिका को करना होगा. गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही होगी." 

भोपाल में बनेगा निशातपुरा रेलवे ओवरब्रिज, 100 करोड़ की लागत से पुराने और नए शहर को जोड़ेगा, नवंबर तक होगा तैयार

भोपाल  भोपाल में निशातपुरा रेलवे ओवरब्रिज (ROB) इस साल नवंबर तक बनकर कम्प्लीट हो जाएगा। करीब 100 करोड़ रुपए से बनने वाला आरओबी नए और पुराने शहर को जोड़ेगा। करीब 9 लाख लोगों को फायदा मिल सकेगा। शनिवार को मंत्री विश्वास सारंग ने निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। मंत्री सारंग ने कहा कि यह देश का पहला ऐसा आरओबी होगा, जो एकसाथ 7 रेलवे ट्रैक के ऊपर से गुजरेगा। यह आरओबी भोपाल स्टेशन के प्लेटफार्म-1 से छोला खेड़ापति हनुमान मंदिर तक पहुंचेगा। निर्माण पूरा होने के बाद करीब 9 लाख लोगों को फायदा मिलेगा। पीडब्ल्यूडी, रेलवे, एफसीआई सहित संबंधित विभागों में समन्वय के लिए एक कमेटी बनाई गई है। ताकि, निर्माण कार्य में कोई अड़चन न आए और यह जल्दी बन जाए। रेलवे स्टेशन पर आना होगा आसान मंत्री सारंग ने बताया कि आरओबी के बनने के बाद करोंद, बैरसिया, बैरागढ़, विदिशा से आने वाले लोग आसानी से भोपाल रेलवे स्टेशन आ-जा सकेंगे। पुराने शहर से किसी को भेल इलाके में जाना होगा तो यह आरओबी काफी फायदेमंद रहेगा। अरेरा कॉलोनी, शाहपुरा समेत कई इलाकों से आना-जाना आसान हो जाएगा। भविष्य में यही आरओबी एयरपोर्ट तक आने-जाने के लिए भी उपयोग आ सकेगा। ब्रिज की डिजाइन देखी मंत्री सारंग ने शनिवार को निर्माण स्थल पर जाकर निरीक्षण किया और अफसरों से चर्चा की। साथ ही ब्रिज की डिजाइन भी देखी। महापौर मालती राय, वीरेंद्र पाठक समेत कई समर्थक भी मौजूद थे।

इंदौर नगर निगम में नया बदलाव: आईएएस क्षितिज सिंघल बने कमिश्नर, भागीरथपुरा कांड के बाद दिलीप यादव का स्थानांतरण

 इंदौर  इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से लोगों की मौत के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव ने निगम आयुक्त दिलीप यादव को हटा दिया है। इनकी जगह पर अब आईएएस क्षितिज सिंघल नए आयुक्त होंगे। वे वर्ष 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वर्तमान में सिंघल मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे। दिलीप यादव के साथ ही अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और निगम के जल कार्य विभाग में पिछले 12 सालों से जमे प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया था। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इंदौर में दूषित पेयजल से हुई दुखद घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की गई है। प्रदेश के अन्य स्थानों में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए समयबद्ध सुधारात्मक कार्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी 16 नगर निगमों के महापौर, आयुक्त, जिला कलेक्टर और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर पूरे प्रदेश की समीक्षा की गई है।