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इंदौर में हुई मौतों के मामले में CM मोहन यादव की कड़ी प्रतिक्रिया, ‘सीवर पानी वाले बैक्टीरिया’ की जांच जारी

इंदौर  देश के सबसे साफ और स्‍वच्‍छ शहर इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई. शौचालय मिश्रित पानी पीने के कारण बीमार पड़े लोगों में से 200 अभी भी अस्‍पताल में भर्ती हैं, जबकि 32 आईसीयू में हैं. मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर के नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को पद से हटा दिया और अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया को निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई इंदौर के भगीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई त्रासदी के मामले में सरकार की पहली बड़ी कार्रवाई है. इस घटना में 29 दिसंबर से लोग बीमार पड़ने लगे थे. स्‍थानीय लोगों ने इसके खिलाफ स्‍थानीय प्रशासन से शिकायत भी की थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई न होने से कई परिवार उजड़ गए. इंदौर के भगिरथपुरा क्षेत्र में पानी की सप्लाई दूषित होने के कारण डायरिया और पेट से जुड़ी बीमारियां तेजी से फैलीं. सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक इस बीमारी से चार लोगों की मौत हुई है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना को गंभीर लापरवाही मानते हुए इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को हटाने का आदेश दिया. साथ ही अतिरिक्त नगर आयुक्त रोहित सिसोनिया और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रभारी अधीक्षण अभियंता संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ कहा कि ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. दूसरी तरफ, इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सरकार ने हाई कोर्ट में 40 पन्नों की स्‍टेटस रिपोर्ट पेश की है. सरकार ने अदालत को बताया कि हालात अब नियंत्रण में हैं और नए मामलों में कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं हो रही . साथ ही मिनट-टू-मिनट निगरानी की व्यवस्था लागू की गई है.  जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी – CM मोहन यादव   मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से पैदा हुए संकट को लेकर अधिकारियों की लापरवाही की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि राज्य सरकार दूषित पेयजल के कारण इंदौर के भागीरथपुरा में हुई घटना में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि इस संबंध में कड़े फैसले लिए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने बताया कि इस घटना के बाद दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के प्रभारी अधीक्षण अभियंता संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है. इसके साथ ही इंदौर नगर निगम के आयुक्त दिलीप कुमार यादव को हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं. इंदौर में हुई मौतों के पीछे 'सीवर पानी वाले' बैक्टीरिया, अब तक क्या पता चला इंदौर में एक ऐसी त्रासदी सामने आई है जो दिल दहला देने वाली है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल ने कहर बरपाया है, जहां सीवर जैसी गंदगी वाले बैक्टीरिया पानी में घुस गए। इस पानी को पीने से कम से कम 10 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 200 से ज्यादा मरीज अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। हजारों लोग उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं। पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। सब कुछ शुरू हुआ 25 दिसंबर से, जब लोगों ने पानी में अजीब सी बदबू और गंदगी की शिकायत की। लेकिन सुनवाई नहीं हुई। जांच में पता चला कि मुख्य पेयजल पाइपलाइन में लीकेज था, और ऊपर बने एक शौचालय का गंदा पानी सीधे सप्लाई में मिल गया। लैब रिपोर्ट्स ने कन्फर्म किया कि पानी में वो बैक्टीरिया मिले जो आमतौर पर सीवर और मानव अपशिष्ट में पाए जाते हैं। महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि शुरुआती टेस्ट में असामान्य बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है, लेकिन पूरी कल्चर रिपोर्ट का इंतजार है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, 'पिछले कई हफ्तों से समस्या थी, लेकिन 25 दिसंबर को हालात बिगड़ गए। पानी पीते ही पेट में आग सी लगती थी।' इंदौर जल त्रासदी मौतों का बढ़ता आंकड़ा और मरीजों की तादाद आधिकारिक तौर पर मौतें 4 बताई जा रही हैं, लेकिन मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने खुद माना कि उन्हें 10 मौतों की जानकारी है। स्थानीय लोग तो 14 तक का दावा कर रहे हैं। अब तक 2456 से ज्यादा लोग उल्टी-दस्त के शिकार हुए, 162 से अधिक अस्पताल में भर्ती। कई मरीज ICU में हैं, और इलाका लगभग खाली हो चुका है। परिवार वाले अपनों का इलाज कराने अस्पतालों में डेरा डाले हुए हैं। सरकार पर उठे सवाल, NHRC और हाईकोर्ट की सख्ती लोगों की शिकायतों को नजरअंदाज करने का खामियाजा अब भुगतना पड़ रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वत: संज्ञान लिया और मध्यप्रदेश सरकार को नोटिस थमा दिया। दो हफ्ते में पूरी रिपोर्ट मांगी गई है। आयोग ने कहा, 'निवासियों ने कई दिनों से गंदे पानी की शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।' इंदौर बेंच ऑफ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भी सरकार से घटना की पूरी डिटेल्स मांगी हैं। कोर्ट ने साफ पानी की सप्लाई और मरीजों का इलाज सुनिश्चित करने के आदेश दिए। सीएम की मदद और कार्रवाई मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हर मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये की सहायता और सभी मरीजों का मुफ्त इलाज घोषित किया। लीकेज ठीक करने, पाइपलाइन साफ करने और नई लाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा है। कुछ अधिकारियों को सस्पेंड भी किया गया है। दूषित पानी पीने से बीमार पड़े लोगों का क्‍या है हाल सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, अब तक कुल 294 मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया. इनमें से 93 मरीजों का सफल इलाज कर उन्हें छुट्टी दे दी गई है. बाकी 200 मरीजों में से 32 अभी भी आईसीयू में भर्ती हैं. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सभी मरीजों को जरूरी इलाज दिया जा रहा है. जमीनी स्तर पर जिला प्रशासन, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं. इन टीमों का उद्देश्य नए मरीजों की पहचान करना और बीमारी को फैलने से रोकना है. लोगों को ओआरएस के पैकेट और जिंक की गोलियां मुफ्त बांटी जा रही हैं ताकि लक्षण … Read more

RSS प्रमुख मोहन भागवत बोले: संघ और भाजपा को जोड़कर देखना गलत, हिंदुत्व को मनोवृत्ति बताया

भोपाल  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने  भोपाल में आयोजित संघ के शताब्दी वर्ष के तहत ‘प्रबुद्ध जन सम्मेलन’ को संबोधित किया. इस दौरान भागवत ने संघ की विचारधारा,और भविष्य के लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से सामने रखा. रवींद्र भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने हिंदुत्व, भाषा, संगठन विस्तार और संघ-भाजपा संबंधों को लेकर कई बड़ी बातें कहीं. उन्होंने कहा कि संघ को केवल भाजपा या विश्व हिंदू परिषद के  नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए भागवत ने कहा कि संघ किसी राजनीतिक दल का रिमोट कंट्रोल नहीं है, बल्कि समाज निर्माण का संगठन है. संघ की स्थापना हिंदुओं को शांतिपूर्ण तरीके से संगठित करने के लिए हुई थी. उन्होंने कहा कि हिंदू कोई जाति नहीं, बल्कि एक मनोवृत्ति है, जो सभी पंथों और संप्रदायों का सम्मान करती है. अभी भी कई इलाकों तक नहीं पहुंच पाया संघ- भागवत संघ के संगठनात्मक विस्तार पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में संघ से करीब 60 लाख स्वयंसेवक जुड़े हैं, जबकि देश में अपने आप को हिंदू मानने वालों की संख्या लगभग 100 करोड़ है. उन्होंने चिंता जताई कि शहरी क्षेत्रों की करीब 10 हजार बस्तियों और कई अन्य इलाकों तक संघ अभी पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है. भागवत ने कहा, 'ऐसी बस्तियों तक पहुंचना बहुत जरूरी हैं. संघ की शाखाओं में जो संस्कार मिलते हैं, वही समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। पहले यह व्यवस्था मजबूत थी, अब उसे फिर से सशक्त करने की जरूरी है.' उन्होंने कहा कि साधु-संतों से लेकर देश-विदेश के कई संगठन संघ के साथ जुड़े हुए हैं. अमेरिका और अफ्रीका जैसे देशों से लोग संघ की कार्यपद्धति को समझने आते हैं और पूछते हैं कि संघ अपने युवाओं को इस तरह कैसे तैयार करता है. और उन्हे भी इसकी ट्रेनिंग देने के लिए कहते है. भाषा के मुद्दे पर मोहन भागवत ने तीन भाषाएं सीखने पर जोर दिया- राज्य की भाषा, देश की भाषा और दुनिया की भाषा. उन्होंने कहा कि चीन से यह सीखना चाहिए कि एक बड़ा राष्ट्र कैसे संगठित किया जाता है. समाज को जोड़ना है संघ का काम मोहन भागवत ने हिंदुत्व को 'जाति' नहीं बल्कि एक 'मनोवृत्ति' बताया. उन्होंने कहा कि हिंदू, हिंदवी और भारत, तीनों एक ही हैं और  जो सनातन काल से चला आ रहा है और आज भी उतना ही प्रासंगिक है. संघ और उसके अनुषांगिक संगठनों को लेकर फैली भ्रांतियों पर उन्होंने कहा, 'अगर कोई भाजपा, विहिप या विद्या भारती को देखकर संघ को समझने की कोशिश करेगा, तो वह संघ के मूल विचार को कभी नहीं समझ पाएगा.' उन्होंने साफ कहा कि संघ का काम समाज को जोड़ना, संस्कार देना और उत्तम जीवन मूल्यों का निर्माण करना है, न कि किसी एक संगठन या दल तक सीमित रहना.

योगी आदित्यनाथ की अपील: अधिकारी फील्ड पर उतरें, श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो

लखनऊ  मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने  आगामी पर्व-त्योहारों एवं माघ मेला के दृष्टिगत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित जनपदों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय सुरक्षा एवं व्यवस्थागत समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा एवं सुचारू आयोजन राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। * मुख्यमंत्री ने प्रयागराज, वाराणसी, अयोध्या, चित्रकूट, हापुड़ (गढ़मुक्तेश्वर), मथुरा-वृंदावन, फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर सहित माघ मेला से जुड़े सभी प्रमुख जनपदों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं के आवागमन, घाटों व मंदिर परिसरों की स्वच्छता, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम, कंट्रोल रूम, भीड़ प्रबंधन एवं मेला क्षेत्र में प्रवेश-निकास की सुगम व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी स्थिति में अराजकता को बढ़ावा न मिले और सभी श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में स्नान एवं पूजा कर सकें। * मुख्यमंत्री ने प्रयागराज में पौष पूर्णिमा पर अनुमानित 15 से 25 लाख श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष रूप से सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों, मेडिकल स्टाफ, एम्बुलेंस, स्वच्छ शौचालय, पेयजल एवं महिला सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। घाटों पर गोताखोरों की पर्याप्त तैनाती रहे ताकि किसी भी आपात स्थिति से तत्काल निपटा जा सके। * महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि मेला क्षेत्रों एवं सार्वजनिक स्थलों पर संदिग्ध एवं अराजक तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। किसी भी महिला श्रद्धालु को असुविधा या भय का सामना न करना पड़े, यह प्रशासन सुनिश्चित करे। * नगर विकास एवं पंचायती राज विभाग को निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जनपदों में स्वच्छता अभियान को तीव्र किया जाए, विशेष रूप से मलिन बस्तियों में व्यापक साफ-सफाई एवं शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे संक्रामक रोगों की संभावना को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। * भीषण शीतलहर को देखते हुए मुख्यमंत्री ने रैन बसेरों की पर्याप्त व्यवस्था, अलाव जलाने, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड एवं सार्वजनिक स्थलों पर प्रकाश व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी व्यक्ति खुले आसमान के नीचे सोने के लिए विवश न हो। पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए और जरूरतमंदों को रैन बसेरों तक पहुँचाया जाए। * मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सभी वरिष्ठ अधिकारी आज रात्रि में ही मेला स्थल का निरीक्षण कर लें तथा अधीनस्थ अधिकारियो और कर्मचरियों को समस्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए जाने हेतु निर्देश दे दें। नदी में तेज बहाव तथा गहराई की दशा में बैरिकेडिंग लगाकर सुरक्षा सुनिश्चित कर ली जाए। कोई भी नाविक श्रद्धालुओं से मनमाना शुल्क न लें। * इस कड़ी में उन्होंने तीर्थ स्थानों व अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर नाव परिचालन को लेकर मनमर्जी किराया वसूलने तथा होटलों द्वारा मनमानी किए जाने को लेकर सख्त निर्देश जारी किया कि ऐसा कोई भी कार्य नहीं होनी चाहिए इस बात को वरिष्ठ अधिकारी फील्ड पर उतर कर सुनिश्चित करें। * मुख्यमंत्री ने संगठनों के नाम पर अराजकता फैलाने, गुंडागर्दी करने अथवा प्रशासन पर दबाव बनाने वाले तत्वों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और आम नागरिक को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। * मुख्यमंत्री जी ने प्रदेश के सभी जनपदों को बाढ़ बचाव की योजना के विषय में कार्य करने का निर्देश देते हुए अगले 10 दिनों में इसको लेकर विस्तृत कार्ययोजना के निर्माण का निर्देश दिया। उन्होंने इस विषय में मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव के माध्यम से सूचित करने का निर्देश भी दिया। * भूमि कब्जा करने वाले माफिया एवं असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन की भूमि एवं संपत्ति की सुरक्षा राज्य सरकार की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी। * मुख्यमंत्री ने जनसुनवाई व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि जिला स्तर पर नियमित जनसुनवाई आयोजित कर शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण किया जाए। इसमें लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। * बैठक में मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए कि जिला मुख्यालयों, सर्किट हाउस, तहसील एवं ब्लॉक मुख्यालयों के समीप स्थायी हेलीपैड के लिए भूमि चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, जिससे भविष्य में अस्थायी व्यवस्थाओं पर निर्भरता न रहे। * साथ ही, सड़कों पर लगने वाले जाम की समस्या पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने अवैध टैक्सी स्टैंड, बस स्टैंड एवं वेंडरों को हटाकर निर्धारित स्थलों पर व्यवस्थित करने के निर्देश दिए, जिससे यातायात सुचारू हो और आमजन को जाम से राहत मिले। * मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ युद्धस्तर पर कार्य करें और यह सुनिश्चित करें कि पर्व-त्योहारों एवं माघ मेला के दौरान प्रदेश में शांति, सुरक्षा एवं सुव्यवस्था का वातावरण बना रहे।

इंदौर में गंदा पानी पीने से कई मौते

इंदौर में गंदा पानी पीने से कई मौते  इंदौर  मौतो के जिम्मेदारो, शर्म करो डूब मरो कितने नालायक हो किसे दोष दे कर्मचारी अधिकारी नेता पार्षद मेयर विधायक मंत्री सरकार या अपने भाग्य को ….  7 साल से स्वच्छ इंदौर रहने वाले इंदौर की जनता वाकय में बहुत महान है बहुत सहनशील है और सत्ता पार्टी पर लगातार लंबे समय से अति विश्वास रखा।  अनेक बार चिल्लाते आए इंदौर नगर निगम सैकड़ो हजारों की भ्रष्टाचारियों का अड्डा बन गया लापरवाही का अड्डा बन गया पर जनता ने एक बार भी विरोध नहीं किया, क्या मिला मौत भी ढंग से नसीब नहीं हुई गंदा पानी पी के मौत मिली।  इंदौर के नागरिक होने के नाते मैं आप सबसे अनुरोध करता हूं कि आप इन सब लोगों को जगाए इनका विरोध करें इनकी ड्यूटी याद दिलाए इनके नागरिक कर्तव्य याद दिलाए और जो इन्हे नशा चढ़ा है उसे उतारे। बोलकर लिखकर आपस में चर्चा में हर जगह इन लोगों की लापरवाही और भ्रष्टाचार की बातें करें और विरोध प्रकट करें जिम्मेदारों को कड़ी सजा मिले ताकि भविष्य में घटना फिर ना हो। अशोक मेहता, इंदौर (लेखक पत्रकार पर्यावरणविद्)  अपील – मृत आत्माओं के लिए कृपया अपने मत अनुसार शांति पाठ करें।

MP में कड़ाके की ठंड और घना कोहरा, ट्रेनें 7 घंटे लेट; शीतलहर के चलते इंदौर, भोपाल-ग्वालियर में बारिश का अनुमान

भोपाल  मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड और घना कोहरा प्रदेश के कई जिलों में प्रभावित है। भोपाल, सीहोर, रायसेन, शाजापुर और धार में सुबह 9 बजे तक भी घना कोहरा छाया रहा। सीहोर में विजिबिलिटी मात्र 20 मीटर रह गई। मौसम विभाग के अनुसार अगले 2-3 दिन तक कोहरा जारी रहेगा और इसके बाद तेज सर्दी का दौर शुरू होगा। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि दिसंबर में प्रदेश में कहीं भी बारिश नहीं हुई और मौसम साफ रहा। जनवरी में भी शीतलहर और कोल्ड डे जैसी परिस्थितियाँ बनी रहेंगी। आज सुबह से भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम, ग्वालियर, रतलाम, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सीधी, धार, गुना, रायसेन, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर, देवास, दमोह, मंडला, सागर, सतना, श्योपुर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, खजुराहो समेत कई जिलों में कोहरा छाया रहा। शीतलहर भी चल रही है। कई शहरों में रात का पारा गिरा मध्य प्रदेश में कई शहरों में रात के तापमान में गिरावट तो अधिकांश में बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है। ग्वालियर में पारा 7.7 डिग्री पर आ गया। भोपाल में यह 11 डिग्री रहा। इंदौर में 12.6 डिग्री, उज्जैन में 13.3 डिग्री और जबलपुर में 12.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सबसे ठंडा पचमढ़ी रहा। यहां न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री रहा। शिवपुरी में 6 डिग्री, दतिया में 6.6 डिग्री, राजगढ़ में 8.2 डिग्री, मंडला में 8.9 डिग्री और रतलाम में 9.8 डिग्री दर्ज किया गया। बाकी शहरों में तापमान 10 डिग्री से अधिक पहुंच गया। दिन में भी रात जैसी ठंड, कोल्ड डे की स्थिति इस सर्दी के सीजन में पहली बार प्रदेश के कई हिस्सों में दिन का तापमान रात जैसा महसूस हुआ। शुक्रवार को दतिया में अधिकतम तापमान 16.8 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि ग्वालियर, गुना और नौगांव में यह 17 डिग्री के आसपास रहा। टीकमगढ़, खजुराहो, श्योपुर, पचमढ़ी, रतलाम, रीवा, सतना, उज्जैन, दमोह और भोपाल समेत कई जिलों में दिनभर सर्द हवाओं के कारण कोल्ड डे जैसे हालात बने रहे। अगले दो दिन का अलर्ट 4 जनवरी को ग्वालियर, चंबल, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के कई जिलों में घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है।5 जनवरी को भी ग्वालियर, चंबल, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में कोहरे का असर ज्यादा रहने की संभावना है। कोहरे की मार, ट्रेनों की रफ्तार थमी गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात को पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा। वहीं, घने कोहरे की वजह से भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर रूट की कई ट्रेनें 1 से 2 घंटे तक देरी से चलीं। दिल्ली से आने वाली मालवा, शताब्दी, सचखंड एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों पर कोहरे का सीधा असर पड़ा। खजुराहो में दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई। भोपाल, ग्वालियर, दतिया, उज्जैन, इंदौर, रीवा, सागर, सतना, दमोह, रायसेन, राजगढ़, गुना, नर्मदापुरम, मंडला और सिवनी सहित कई जिलों में विजिबिलिटी बेहद कम रही। रात के तापमान में बढ़ोतरी, फिर भी ठंड कायम प्रदेश के ज्यादातर बड़े शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन में रातें अपेक्षाकृत कम सर्द रहीं। हालांकि पचमढ़ी, शिवपुरी, टीकमगढ़, राजगढ़, रीवा और नौगांव ऐसे इलाके रहे, जहां पारा 10 डिग्री से नीचे बना रहा। जनवरी में भी शीतलहर के लंबे दौर के आसार सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि इस बार दिसंबर में प्रदेश में कहीं भी बारिश नहीं हुई, जिससे मौसम लगातार शुष्क बना रहा। भोपाल, इंदौर समेत कई जिलों में 15 से 16 दिन तक कोल्ड वेव चली। यही स्थिति जनवरी में भी बने रहने की संभावना है। मौसम विभाग का अनुमान है कि जनवरी में 15 से 20 दिन तक शीतलहर चल सकती है और कड़ाके की ठंड का असली असर महीने के दूसरे सप्ताह से दिखाई देगा, जो अंत तक जारी रह सकता है। क्यों बढ़ेगी ठंड? मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, पहाड़ी राज्यों में हो रही बर्फबारी और पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता का असर मध्यप्रदेश तक पहुंचेगा। इसके चलते सुबह घना कोहरा, दिन में सर्द हवाएं और आगे चलकर शीतलहर का प्रकोप बढ़ेगा। शुक्रवार को जेट स्ट्रीम की रफ्तार 213 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई, जिससे दिन में भी ठंड का असर महसूस हुआ।  मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 3 दिन तक घना कोहरा छाया रहेगा। फिर तेज सर्दी का दौर आएगा। इससे पहले शुक्रवार को आधे प्रदेश में कहीं घना तो कहीं मध्यम कोहरा छाया रहा। वहीं, 15 शहरों में दिन का तापमान 24 डिग्री से नीचे रहा। जनवरी में कोल्ड वेव, बारिश के आसार सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया, इस बार दिसंबर में प्रदेश में कहीं भी बारिश नहीं हुई। मौसम साफ रहा। भोपाल, इंदौर समेत कई जिलों में 15 से 16 दिन तक कोल्ड वेव यानी, शीतलहर चली। ऐसा ही मौसम जनवरी में भी बना रहेगा। साल के पहले ही दिन ग्वालियर में हल्की बारिश हुई। भोपाल और इंदौर में भी बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग की माने तो जनवरी में 15 से 20 दिन तक शीतलहर चल सकती है। कड़ाके की ठंड का दौर दूसरे सप्ताह में शुरू होगा, जो आखिरी तक बना रहेगा। प्रमुख जिलों का तापमान विवरण शहर अधिकतम तापमान (°C) न्यूनतम तापमान (°C) बेतूल 26.2 12.5 भोपाल 23.8 11.0 दतिया 16.8 6.6 धार 24.0 11.4 गुना 17.0 10.2 ग्वालियर 17.4 7.7 इंदौर 24.2 12.6 पचमढ़ी 20.2 5.6 रायसेन 26.6 12.2 मंदला 27.0 8.9 छिंदवाड़ा 26.6 12.0 सागर 24.5 10.9 रीवा 21.8 10.0 श्योपुर 19.4 11.0 टीकमगढ़ 18.0 10.8 नोट: तापमान डेटा मौसम विभाग के अवलोकन पर आधारित है। मुख्य शहरों का मौसम और विजिबिलिटी सीहोर: सीजन का सबसे घना कोहरा, विजिबिलिटी सिर्फ 20 मीटर। भोपाल और इंदौर: कोहरे के कारण ट्रेनें लेट, सुबह तक शीतलहर जारी। पचमढ़ी: न्यूनतम तापमान 5.6°C, मौसम साफ लेकिन ठंड कड़ी। धार और मांडू: न्यूनतम 8-11°C, घना कोहरा और ओस के कारण रोड फिसलन। सड़कों और नेशनल हाईवे पर कोहरे के कारण वाहन धीमी गति से चल रहे हैं। उमरिया, बड़वानी, रायसेन और छतरपुर सहित कई जिलों में सुबह कोहरे का प्रभाव देखा गया। रेल और सड़क यातायात प्रभावित भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, दतिया और अन्य जिलों में ट्रेनें लेट रही। मालवा एक्सप्रेस, शताब्दी और अन्य इंटरसिटी ट्रेनें कोहरे के कारण 1-2 घंटे तक देरी से चलीं। … Read more

भोपाल में अवैध कॉलोनियों का अधिग्रहण होगा, बचे प्लाटों को बेचा जाएगा

 भोपाल  भोपाल जिले में अब तक अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई कर उन्हें रोकने के प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन इनमें कोई खास सफलता नहीं मिल सकी। ऐसे में अब प्रशासन ने अवैध कॉलोनियों का अधिग्रहण करने की योजना बनाई है। जिसके तहत नए साल में जिला प्रशासन, नगर निगम और जिला पंचायत द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई अवैध कॉलोनियों का अधिग्रहण किया जाएगा, इसके बाद इनमें बचे हुए प्लाटों को बेचा जाएगा। इन प्लाटों से जो भी धन प्रशासन को प्राप्त होगा, उसी से कॉलोनियों में सड़क, बिजली, पानी, सीवेज आदि की व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी। इससे लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। बता दें कि जिले की हुजूर, कोलार तहसील में हर साल 100 से अधिक अवैध कॉलोनियों का विकास हो रहा है, लेकिन इनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है। शहर में हुजूर, कोलार और बैरसिया तहसील क्षेत्र के अंतर्गत पिछले छह से आठ साल में तेजी से बसाहट हो रही है। यहां लोग कॉलोनियों में अपने बजट के अनुसार प्लाट खरीदकर उनमें मकान बनाकर रह रहे हैं। इन अवैध कॉलोनियों के कॉलोनाइजर लोगों को बिजली, पानी, सड़क, सीवेज, पार्क आदि की सुविधाओं का दावा कर प्लाट बेचकर मोटी रकम वसूल कर लेते हैं, लेकिन बाद में ऐसी कोई भी सुविधा लोगों को नहीं मिलती है। इससे परेशान होकर रहवासी एसडीएम, तहसील और कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगाना शुरू कर देते हैं। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए कलेक्टर ने अवैध कालोनियों को अधिग्रहित कर विकास कार्य करने की योजना बनाई है। निरंतर शिकायतों के कारण लिया फैसला कलेक्ट्रेट में लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि भूमाफिया सस्ती कृषि भूमि खरीदकर खेतों में मुरम डालकर प्लाट काट रहे हैं और कालोनी बताकर बेच रहे हैं। कई जगह न सड़क है, न नाली, न बिजली-पानी, फिर भी प्लाट टीएंडसीपी से स्वीकृत कालोनियों के बराबर दामों पर बेचे जा रहे हैं। इससे आम लोग भविष्य में बुनियादी सुविधाओं और रजिस्ट्री जैसी समस्याओं में फंस सकते हैं। ऐसे में अवैध कालोनी काटने वालों पर कार्रवाई और लोगों को सुविधा देने अधिग्रहण का फैसला लिया गया है। नौ अवैध कॉलोनियों को नोटिस किए जारी अधिकारियों ने बताया कि जिन कालोनियों में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित किया जा रहा है। अब तक नौ अवैध कॉलोनियों के खिलाफ नोटिस जारी किए गए हैं, प्लाटिंग रोकी गई है और संबंधित बिल्डरों के खिलाफ वैधानिक प्रक्रिया शुरू की गई है। आने वाले दिनों में अभियान और तेज किया जाएगा। इन क्षेत्रों को किया चिह्नित अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई की शुरुआत मुबारकपुर, सेवनिया ओंकारा, पिपलिया बेरखेड़ी, कुराना, थुआखेड़ा, सुरैया नगर, छावनी पठार, कान्हासैया, सिंकदराबाद, शोभापुर, जहेज, कोलुआखुर्द, नरेला वाज्याफ्त, बंगरसिया, अरेड़ी, इब्राहिमपुरा, परेवाखेड़ा, हज्जामपुरा ईंटखेड़ी सड़क, जगदीशपुर, अरवलिया, चौपड़ा कलां, बांसिया, गोलखेड़ी, इमलिया, मालीखेड़ी, दामखेड़ा, कोलुआ सहित आदि को चिह्नित किया गया है। 100 से ज्यादा अवैध कॉलोनियों की लिस्ट तैयार हुजूर तहसील में आने वाली 100 से अधिक अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार की जा चुकी है। जब तक अवैध कॉलोनियों को लेकर शासन स्तर से नए नियम लागू नहीं होते हैं, तब तक प्रशासन पुराने प्रविधानों के तहत कार्रवाई करेगा। इसी के चलते इन 100 अवैध कॉलोनियों में प्लाट बेचने वाले कॉलोनाइजर व भूमि स्वामी पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके बाद शहरी क्षेत्र में नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्र में जिला पंचायत व प्रशासन द्वारा अधिग्रहण किया जाएगा। इन कॉलोनियों में शेष रह गए प्लाटों को बेचकर आने वाले रुपये से सड़क, नाली, बिजली आदि सुविधाएं विकसित की जाएंगी। प्लाट बेचने वालों पर होगी कार्रवाई     अवैध कॉलोनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करने की योजना तैयार की गई है। इसके तहत 100 से अधिक कॉलोनियों को चिह्नित किया गया है, इनमें प्लाट बेचने वालों पर कार्रवाई होगी। इसके अलावा शहरी क्षेत्र में नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत व एसडीएम स्तर पर अवैध कॉलोनियों का अधिग्रहण शुरू होगा, जिससे इनमें बचे प्लाटों को बेचकर आने वाले धन से मूलभूत सुविधाओं का कार्य करवाया जा सके। – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर  

आरजीपीवी में गड़बड़ियों के बाद कुलपति पद के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू, राजभवन ने किया ऐलान

भोपाल  राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में लंबे समय से चल रहे विवादों और गड़बड़ियों के आरोपों के बाद अब नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। राजभवन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार कुलपति पद के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 10 फरवरी 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। दरअसल, आरजीपीवी हाल के वर्षों में लगातार विवादों में रहा है। विश्वविद्यालय के प्रशासन, वित्तीय लेनदेन और शैक्षणिक प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इन्हीं आरोपों के बीच हाल ही में कुलपति ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद से विश्वविद्यालय का प्रशासन अस्थायी व्यवस्था के सहारे संचालित हो रहा है। मूल्यांकन प्रक्रिया और प्रशासनिक फैसलों आपत्तियां आई थीं सामने दरअसल, कुलपति के खिलाफ विश्वविद्यालय की आंतरिक कार्यप्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया और प्रशासनिक फैसलों को लेकर गंभीर आपत्तियां सामने आई थीं। छात्र संगठनों ने इन मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया था। बढ़ते दबाव और विवाद की स्थिति को देखते हुए कुलपति ने पद छोड़ना उचित समझा। इसके बाद उच्च स्तर पर यह निर्णय लिया गया कि नए कुलपति की नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की जाए। सरकार और राजभवन दोनों ही बेहद सतर्क गौरतलब है कि आरजीपीवी प्रदेश का सबसे बड़ा तकनीकी विश्वविद्यालय है, जिससे सैकड़ों इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थान जुड़े हुए हैं। ऐसे में कुलपति की नियुक्ति को लेकर सरकार और राजभवन दोनों ही बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि नए कुलपति के सामने विश्वविद्यालय की छवि सुधारने, प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने और शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूत करने की बड़ी चुनौती होगी। चार वर्ष का होगा कुलपति का कार्यकाल राजभवन की अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि कुलपति की नियुक्ति राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अधिनियम 1998 के तहत गठित चयन समिति की अनुशंसा पर राज्यपाल द्वारा की जाएगी। नियुक्त कुलपति का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से चार वर्ष का होगा।अधिसूचना के मुताबिक कुलपति विश्वविद्यालय का सर्वोच्च शैक्षणिक और प्रशासनिक अधिकारी होगा। ऐसे में अभ्यर्थी से उच्च कोटि की शैक्षणिक योग्यता, मजबूत प्रशासनिक अनुभव, सत्यनिष्ठा, नैतिकता और संस्थागत प्रतिबद्धता की अपेक्षा की गई है। साथ ही, अभ्यर्थी का प्रौद्योगिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिष्ठित और ख्यातिप्राप्त होना अनिवार्य बताया गया है। आवेदन प्रक्रिया दो चरणों में होगी पूरी आवेदन के साथ उम्मीदवार को अपने शैक्षणिक, प्रशासनिक और शोध करियर का विस्तृत विवरण देना होगा। इसके अलावा यह घोषणा भी अनिवार्य होगी कि अभ्यर्थी के विरुद्ध लोकायुक्त, आर्थिक अपराध शाखा या किसी अन्य एजेंसी में किसी प्रकार की जांच या आपराधिक मामला लंबित नहीं है। वर्तमान में सेवा में कार्यरत अभ्यर्थियों को अपने नियुक्तिकर्ता से यह प्रमाण पत्र भी देना होगा कि उनके खिलाफ कोई विभागीय जांच लंबित नहीं है। आवेदन प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा, जबकि दूसरे चरण में ऑनलाइन आवेदन की प्रति, जीवनवृत्त और सभी आवश्यक दस्तावेज पंजीकृत या स्पीड पोस्ट के माध्यम से राजभवन भेजने होंगे। बिना ऑनलाइन आवेदन के प्राप्त किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किए जाने की बात अधिसूचना में साफ तौर पर कही गई है।  

ग्वालियर में 315 करोड़ से बनेंगी 10 नई सड़कें, मास्टर प्लान में अतिक्रमण पर होगी सख्त कार्रवाई

ग्वालियर  ग्वालियर शहर की यातायात व्यवस्था को नई रफ्तार देने और बदहाल सड़कों के दाग को धोने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने मास्टर प्लान तैयार किया है। 315 करोड़ रुपए की लागत से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में 10 नई सड़को का निर्माण (New roads construction) किया जाएगा। इन सड़को के बनने से न केवल शहर का 'ट्रैफिक मैप' बदल जाएगा, बल्कि वर्षों से धूल और गड्‌ढों की मार झेल रहे हजारों राहगीरों को बड़ी राहत मिलेगी। विभाग का लक्ष्य इन परियोजनाओं को सत्र 2026-27 तक पूर्ण करने का है। एक विधानसभा क्षेत्र दूसरे से जुड़ेगा खास बात यह है कि ये 10 सड़कें सिर्फ कनेक्टिविटी का जरिया नहीं है, बल्कि ये एक विधानसभा क्षेत्र को दूसरी विधानसभा से जोड़ने वाली कड़ी साबित होंगी। वर्तमान में इनमें से अधिकांश सड़कों की हालत बेहद खस्ता है, जिससे आवागमन जोखिम भरा बना हुआ है। पीडब्ल्यूडी अफसरों के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कुछ मुख्य मार्गों पर वर्क ऑर्डर के साथ काम भी शुरू कर दिया गया है। ग्रामीण विस को बड़ी सौगात: 30 गांव सीधे जुड़ेंगे शहर से इन परियोजनाओं में सबसे महत्वपूर्ण ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की दो बड़ी सड़कें हैं (जड़ेरूआ से बहादुरपुर और खुरैरी से गुहीसर)। करीब 130 करोड़ की लागत से बनने वाली ये सड़कें क्षेत्र के 30 से अधिक गांवों को सीधे ग्वालियर मुख्य शहर की सड़कों से जोड़ देंगी। इससे किसानों और ग्रामीणों को मंडी व अस्पताल पहुंचने में लगने वाला समय आधा रह जाएगा। सावधान, मास्टर प्लान के आड़े आए तो चलेगा पीला पंजा सड़क निर्माण के साथ ही विभाग ने अतिक्रमणकारियों के खिलाफ भी सख्त रुख अपना लिया है। पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने स्पष्ट किया है कि ये सभी सड़कें 'मास्टर प्लान के मानकों के अनुरूप चौड़ी बनाई जाएंगी। निर्माण में बाधा बनने वाले मकान, दुकान या अन्य संपत्तियों को सर्वे के बाद हटाया जाएगा। इसके लिए नगर निगम के साथ मिलकर जल्द ही नोटिस जारी करने की तैयारी है। अवैध संपत्तियों को हटाया जाएगा पीडब्ल्यूडी कार्यपालन यंत्री देवेंद्र भदौरिया ने कहा शहर और ग्रामीण सड़कों के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं। कुछ स्थानों पर काम शुरू भी हो चुका है। ये सड़कें मास्टर प्लान के तहत बनाई जा रही हैं, ताकि भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके। सड़क निर्माण के दायरे में आने वाली बाधाओं और अवैध संपत्तियों को हटाया जाएगा।  

इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद सागर कलेक्टर ने किया सख्त कदम, हर महीने ‘नो लीकेज’ सर्टिफिकेट अनिवार्य

 सागर  इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से हुई जनहानि की घटना को गंभीरता से लेते हुए सागर कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी संदीप जी.आर. ने जिले की पेयजल व्यवस्था को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पेयजल आपूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर महीने देना होगा 'नो लीकेज' सर्टिफिकेट कलेक्टर ने नगर निगम आयुक्त, परियोजना प्रबंधक (MPUDC) और सभी मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने क्षेत्रों में पाइपलाइनों का सघन निरीक्षण करें। अब से प्रत्येक निकाय को माह के प्रथम सप्ताह में यह प्रमाण-पत्र अनिवार्य रूप से जमा करना होगा कि उनके क्षेत्र में कोई भी पाइपलाइन क्षतिग्रस्त नहीं है और पेयजल पूरी तरह शुद्ध है। प्रमुख निर्देश क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों को तुरंत सुधारा जाए, ताकि गंदे पानी का मिश्रण न हो। मरम्मत के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से सुरक्षित पेयजल पहुंचाया जाए। सप्लाई होने वाले पानी के नियमित नमूने लेकर लैब में जांच कराई जाए। दूषित पानी की शिकायत मिलते ही अधिकारी उसे गंभीरता से लें और तत्काल मौके पर सुधार सुनिश्चित करें। जनहानि रोकने के लिए एहतियात कलेक्टर संदीप जी.आर. ने कहा कि समाचार माध्यमों से संज्ञान में आया है कि दूषित जल से नागरिकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जिले में ऐसी स्थिति निर्मित न हो, इसके लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है। उन्होंने आमजन से भी अपील की है कि जल स्रोतों के पास स्वच्छता बनाए रखें और किसी भी लीकेज की सूचना तुरंत विभाग को दें। 

भीमबैटका में तैयार होगा भारत का पहला रॉक आर्ट म्यूज़ियम, 30,000 साल पुरानी कहानियों की होंगी प्रतिकृतियां

भोपाल  यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट भीमबेटका में बनी 30 हजार साल पुरानी शैल-कलाएं अब पर्यटकों के लिए और अधिक सुलभ होने जा रही हैं। राज्य पर्यटन निगम यहां देश का पहला अस्थायी 'रॉक आर्ट ईको पार्क द्ब्रयूजियम' विकसित करेगा। 1.12 हेक्टेयर क्षेत्र में बनने वाले इस संग्रहालय का उद्देश्य भीमबेटका के सातों पहाडिय़ों में फैले सभी 750 से अधिक शैल चित्रों का अनुभव पर्यटकों को एक ही स्थान पर कराना है। इसकी अनुमानित लागत 19 करोड़ रुपए है और इसे वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस द्ब्रयूजियम में पारंपरिक भवन या हॉल नहीं बनेंगे, बल्कि अस्थायी सामग्री से भीमबेटका के मूल परिवेश जैसा ही ईको पार्क विकसित होगा, जहां पर्यटक डिजिटली इन्हें देख सकेंगे। डिजिटल होगी जानकारी प्राचीन कलाओं का डिजिटली प्रजेंटेशन म्यूजियम में शैल चित्रों की विशेषताओं, महॠव और अध्ययन स्रोतों की जानकारी डिजिटल माध्यम से मिलेगी। प्रत्येक शैल चित्र की रोचक और सटीक सूचना, फोटो, लिखित विवरण, ऑडियोवीडियो, पुरातत्वविदों की कमेंट्री और प्रमाणित रिसर्च पेपर उपलह्ध होंगे। एआइ से इसे जीवंत व रचनात्मक बनाया जाएगा, ताकि पर्यटकों को अद्भुत अनुभव मिले। देख सकेंगे 10 किमी में फैले शैलाश्रय भीमबेटका में शैल चित्रों के कई क्लस्टर हैं, जो लगभग 10 किमी के दायरे में फैले हुए हैं। यहां सात पहाडिय़ों में 750 से अधिक शैलाश्रय मौजूद हैं। इनमें से वर्तमान में केवल एक ही क्लस्टर पर्यटकों के लिए खुला है, जिसमें 'ऑडिटोरियम गुफा' और 'चिडिय़ाघर रॉक' जैसे प्रसिद्ध 15 शैलाश्रय शामिल हैं। दूर-दराज के और दुर्लभ जंगली क्षेत्रों में स्थित बाकी क्लस्टरों (जैसे जावरा, विनयका, भोंरावली और लाखा जुआर) तक पर्यटक पहुंच नहीं पाते। यह नया म्यूजियम इन सभी अनदेखे शैल चित्रों की रेप्लिका (हूबहू नकल) को उनके मूल स्वरूप में प्रदर्शित करेगा, जिससे पर्यटक एक ही स्थान पर पूरे भीमबेटका का अनुभव कर पाएंगे। यह डिजाइन न केवल पर्यावरण के प्रति संवेदनशील है, बल्कि पर्यटकों को प्राचीन गुफाओं के वास्तविक अनुभव के करीब भी ले जाएगा। अनदेखे शैलचित्र देख सकेंगे टूरिस्ट इस म्यूजियम से टूरिस्ट अनदेखे शैलचित्र भी देख सकेंगे। स्वीकृति मिल चुकी है। जल्द कार्य शुरू होंगे। – डॉ. इलैया राजा टी, एमडी, एमपी टूरिज्म