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मौत के मुंह से लौटा कुनाल: 115 दिन की लड़ाई, जहरीले सीरप ने उजाड़ दी जिंदगी

छिंदवाड़ा जहरीले कफ सीरप ‘कोल्ड्रिफ’ के जानलेवा कहर के बीच जाटाछापर निवासी पांच वर्षीय कुनाल यदुवंशी की कहानी एक चमत्कार से कम नहीं है। अब तक इस सीरप से 25 बच्चों की जान जा चुकी है, लेकिन कुनाल उन तीन खुशनसीब बच्चों में से एक है, जो मौत को मात देकर 115 दिनों के संघर्ष के बाद घर लौटा है। हालांकि, इस लंबी लड़ाई ने मासूम और उसके परिवार को गहरे जख्म दिए हैं, जिनका असर आज भी साफ नजर आ रहा है। गलत इलाज और किडनियों पर प्रहार कुनाल के संघर्ष की शुरुआत बीते 24 अगस्त को हुई थी, जब उसे सामान्य बुखार आने पर स्वजन स्थानीय डॉक्टर प्रवीण सोनी के पास ले गए थे। डॉक्टर द्वारा दी गई दवा और ‘कोल्ड्रिफ’ सीरप पीने के बाद कुनाल की हालत सुधरने के बजाय तेजी से बिगड़ने लगी। गहन जांच के बाद यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि जहरीले सीरप के साइड इफेक्ट के कारण बच्चे की दोनों किडनियां पूरी तरह काम करना बंद कर चुकी हैं। 115 दिनों का संघर्ष और डायलिसिस का दर्द हालात गंभीर होने पर कुनाल को 30 अगस्त को नागपुर रेफर किया गया। पिता टिक्कू यदुवंशी उसे लेकर एम्स समेत नागपुर के विभिन्न अस्पतालों के चक्कर काटते रहे। इस दौरान मासूम कुनाल को करीब डेढ़ महीने तक रोजाना डायलिसिस के असहनीय दर्द से गुजरना पड़ा। डॉक्टरों के अनुसार, सीरप का जहर इतना घातक था कि बचने की उम्मीद बेहद कम थी, लेकिन परिवार की दुआओं और कड़े चिकित्सकीय प्रबंधन के चलते 115 दिनों बाद सोमवार रात उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई। घर वापसी पर लाचारी और दवाओं का दुष्प्रभाव कुनाल घर तो लौट आया है, लेकिन उसकी मुस्कान अब भी गायब है। जहरीले सीरप के दुष्प्रभाव के कारण उसकी आंखों का पानी सूख गया है, जिससे फिलहाल उसे दिखाई नहीं दे रहा है। इसके अलावा उसे चलने-फिरने में भी भारी परेशानी हो रही है। स्वजन की आंखों में खुशी और गम के मिले-जुले आंसू हैं; उन्हें उम्मीद है कि जिस हौसले से कुनाल ने मौत को हराया है, वह जल्द ही पूरी तरह स्वस्थ होकर चलने भी लगेगा। मुआवजे की मांग और दोषियों को फांसी की सजा कुनाल के पिता टिक्कू यदुवंशी ने इस लापरवाही के खिलाफ सरकार से कड़ा रुख अपनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इलाज में करीब साढ़े आठ लाख रुपये खर्च हुए हैं, जिसमें से आधी सहायता मिल पाई है। पिता ने मांग की है कि सरकार सभी प्रभावित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दे और मासूमों की जान से खेलने वाले दोषियों को फांसी की सजा दी जाए। इस बीच सांसद विवेक बंटी साहू ने कुनाल के स्वस्थ होने पर खुशी जाहिर करते हुए आश्वासन दिया है कि सरकार बच्चों के इलाज का पूरा खर्च वहन कर रही है।

MP में SIR विवाद: भाजपा प्रवक्ता हितेष वाजपेयी का वोटर लिस्ट से नाम गायब, सियासी हलचल तेज

भोपाल मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए चुनाव आयोग द्वारा किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) में 42 लाख से अधिक नाम सूची से हटाए गए हैं। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डा.हितेष वाजपेयी ने स्थान परिवर्तन के लिए निर्धारित फार्म आठ आनलाइन जमा किया पर उनका नाम प्रारूप सूची से हटा दिया गया। बूथ लेवल आफिसर (बीएलओ) ने उन्हें अनुपस्थित श्रेणी की सूची में डाल दिया। इसी तरह प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता मिथुन अहिरवार का गणना पत्रक जमा हुआ। बीएलओ ने पावती भी दी पर उनका नाम भी सूची में नहीं आया। अब कहा जा रहा है कि फार्म छह भर दें, नाम सूची में जुड़ जाएगा। ऐसे एक-दो नहीं बल्कि कई प्रकरण सामने आ रहे हैं। उधर, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि 27 अक्टूबर 2025 को सूची फ्रीज कर दी गई थी।  प्रारूप मतदाता सूची में 5.31 करोड़ मतदाताओं के नाम आए और 42 लाख से अधिक नाम मृत, अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्ट होने के कारण हटाए गए। जो नाम हटाए, उनमें कुछ को लेकर आपत्ति सामने आ रही है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हितेष वाजपेयी ने बताया कि उन्होंने आवास परिवर्तित किया है और नियमानुसार फार्म आठ ऑनलाइन भरकर सूचना चुनाव आयोग को दी। एसआइआर के प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल एजेंट ने संपर्क नहीं किया। जब चर्चा की तो बताया कि कि आप सूची में दर्ज स्थान पर नहीं पाए गए इसलिए आपका गणना पत्रक अनुपस्थित की श्रेणी में दर्ज कर दिया है। आप नाम जुड़वाने के लिए फार्म छह भर दीजिए। जबकि, वह फर्म आठ भर चुके हैं यानी स्थान परिवर्तन की प्रक्रिया कर चुके हैं इसलिए उन्हें नए स्थान पर गणना पत्रक मिलना चाहिए था। इसी तरह कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता मिथुन अहिरवार ने बताया कि वह आनंद नगर से अवधपुरी शिफ्ट हुए हैं। वहां बूथ लेवल आफिसर ने गणना पत्रक दिए। हमनें 2003 के एसआइआर की जानकारी के साथ उसे भर दिया। इसकी पावती भी बीएलओ ने दी लेकिन जब प्रारूप सूची देखी तो उसमें नाम ही नहीं है। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री संजय कामले का कहना है कि हमारे बूथ पर भी कुछ ऐसे नाम सूची में शामिल हैं, जो स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं। अब हम आपत्ति कर रहे हैं लेकिन सवाल यह है कि जब 22 लाख से अधिक मतदाता स्थायी रूप से स्थानांतरित की श्रेणी में रखे गए हैं तो फिर ये नाम शामिल कैसे हुए। संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आरपीएस जादौन का कहना है कि एसआइआर का काम पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ है। बूथ लेवल आफिसरों ने मतदाताओं से संपर्क भी किया। दो बार अवधि बढ़ी, तब और सघनता से जो मतदाता नहीं मिले, उनका पता करने का प्रयास किया गया। आनलाइन फार्मों के बारे में निराकरण दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा। निर्धारित प्रक्रिया अनुसार यदि फार्म होंगे तो निश्चित ही अंतिम सूची में नाम आएंगे।

ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था से सायबर अपराध पर कसेगा शिकंजा

‘सुशासन दिवस’ पर मध्यप्रदेश पुलिस की अभिनव पहल डिजिटल युग में न्याय प्रक्रिया को मिली गति भोपाल  पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिवस को ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाए जाने की परंपरा के अनुरूप, मध्यप्रदेश पुलिस ने सुशासन को सशक्त करने की दिशा में नवाचार के रूप में ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था प्रारंभ की है। यह व्यवस्था 01 लाख रुपये से अधिक की सायबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में लागू की गई है। ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सायबर सुरक्षित भारत’ विज़न के अनुरूप है, जिसका उल्लेख उन्होंने अक्टूबर 2024 में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में किया था। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देशभर में सायबर अपराध से निपटने के लिये ऐतिहासिक एवं तकनीक-आधारित कदम उठाए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा ई-जीरो एफआईआर प्रणाली के क्रियान्वयन से यह स्पष्ट होता है कि तकनीक के माध्यम से न्याय प्रक्रिया को तेज और आम नागरिकों के लिए अधिक सरल, सुलभ और प्रभावी बनाया जा सकता है। मध्यप्रदेश में लागू यह प्रणाली पुलिस को अपराधियों से एक कदम आगे रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। प्रदेश में बढ़ते सायबर अपराधों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तकनीक के दुरुपयोग से जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री का मानना है कि जिस प्रकार स्वच्छता को हमने अपनी संस्कृति बनाया है, उसी प्रकार सायबर स्वच्छता को भी जन-आंदोलन बनाना होगा। प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था का संचालन पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री ए. साई मनोहर के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पुलिस को अधिक तेज, तकनीक-सक्षम और नागरिक-केंद्रित बनाना है। सायबर वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी प्रहार सायबर वित्तीय धोखाधड़ी आज पुलिस के समक्ष एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। कई बार पीड़ित की जीवनभर की कमाई कुछ ही क्षणों में अपराधियों के हाथों में चली जाती है, जिससे वह स्वयं को असहाय महसूस करता है। इसी पीड़ा को समझते हुए गृह मंत्रालय द्वारा ‘ई-जीरो एफआईआर’ की अवधारणा लागू की गई है, ताकि तकनीक को अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी हथियार बनाया जा सके। कानूनी आधार : BNSS और डिजिटल परिवर्तन जुलाई 2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानून ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (बीएनएसएस) नागरिक-केंद्रित हैं। इनका मूल उद्देश्य ‘दंड नहीं, बल्कि न्याय’ पर फोकस रहना है। बीएनएसएस की धारा 173 के अंतर्गत ‘जीरो एफआईआर’ को कानूनी मान्यता प्रदान की गई है, जिससे नागरिक देश में कहीं से भी, किसी भी क्षेत्राधिकार में घटित अपराध के लिए, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ई-जीरो एफआईआर: एक क्रांतिकारी व्यवस्था ‘ई-जीरो एफआईआर’ सायबर वित्तीय धोखाधड़ी—विशेषकर ₹1 लाख से अधिक की हानि के मामलों में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को अत्यंत तेज बनाती है। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्राधिकार संबंधी बाधाओं को समाप्त कर जांच प्रक्रिया को तत्काल प्रारंभ करना है। यह प्रणाली तीन प्रमुख डिजिटल मंचों का एकीकरण करती है। नेशनल सायबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी), I4सी (भारतीय सायबर अपराध समन्वय केंद्र) और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस)। ई-जीरो एफआईआर पंजीकरण की 5-चरणीय प्रक्रिया शिकायत दर्ज करना – पीड़ित 1930 हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल पर शिकायत करता है। ₹1 लाख से अधिक की धोखाधड़ी होने पर डेटा सीधे भोपाल स्थित केंद्रीय सायबर पुलिस हब को भेजा जाता है। ऑटोमैटिक जनरेशन – सीसीटीएनएस सर्वर के माध्यम से शिकायत स्वतः ‘ई-जीरो एफआईआर’ में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ित को तुरंत ‘ई-जीरो एफआईआर’ नंबर उपलब्ध कराया दिया जाता है। समीक्षा एवं हस्तांतरण – राज्य स्तरीय सायबर पुलिस स्टेशन द्वारा समीक्षा कर प्रकरण संबंधित क्षेत्रीय पुलिस स्टेशन को भेजा जाता है। नियमित एफआईआर में परिवर्तन – शिकायतकर्ता को 3 दिन के अंदर नजदीकी सायबर पुलिस स्टेशन में ‘ई-जीरो एफआईआर’ को नियमित एफआईआर में परिवर्तित कराना होता है। सायबर अपराध में ‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व सायबर अपराध में धोखाधड़ी के बाद के पहले 2 घंटे को ‘गोल्डन ऑवर’ माना जाता है। यदि पीड़ित तुरंत 1930 पर संपर्क करता है, तो I4C एवं बैंकों के सहयोग से अपराधी के खाते में राशि पहुंचने से पहले ही उसे फ्रीज किया जा सकता है। ई-जीरो एफआईआर के माध्यम से आईपी लॉग, ट्रांजैक्शन आईडी जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य तत्काल और कानूनी रूप से सुरक्षित किए जाते हैं। ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था के प्रमुख लाभ ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था देश में कहीं से भी कहीं भी हुई सायबर या वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराती है। इससे क्षेत्राधिकार संबंधी बाधाओं से मुक्ति मिलती है, केस की स्थिति ऑनलाइन देखने की सुविधा मिलती है, शीघ्र एफआईआर से बैंकिंग चैनल सक्रिय, हो जाते हैं, राशि वापसी की संभावना अधिक हो जाती है साथ ही पोर्टल पर सीधे स्क्रीनशॉट और रसीदें अपलोड करने की सुविधा मिलने से आवश्यक दस्तावेज हमेशा उपलब्ध बने रहते हैं।  

निर्यात एवं एक जिला-एक उत्पाद पर हुई कार्यशाला

भोपाल  ग्वालियर में आयोजित हुई "मध्यप्रदेश अभ्युदय ग्रोथ समिट" में निर्यात को प्रोत्साहित करने, राज्य के उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने तथा “एक जिला-एक उत्पाद” योजना पर कार्यशाला हुई। कार्यशाला में सरकार, निर्यात प्रोत्साहन परिषदों, वित्तीय संस्थानों, उद्योग जगत तथा एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यशाला में पद्मश्री डॉ. मिलिंद कांबले संस्थापक चेयरमैन डीआईसीसीआई ने सामाजिक रूप से समावेशी उद्यमिता, स्टार्ट-अप्स एवं एमएसएमई के सशक्तिकरण तथा निर्यात से रोजगार सृजन की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने ओडीओपी पहल को स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रभावी माध्यम बताया। एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक श्री चन्द्रमौली शुक्ला ने मध्यप्रदेश को एक उभरते हुए औद्योगिक और निर्यात हब के रूप में स्थापित करने के लिये राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों, बुनियादी ढांचे के विकास तथा निवेश अनुकूल नीतियों पर प्रकाश डाला। महानिदेशक एसईपीसी डॉ. अभय सिन्हा ने “वैश्विक बाजार में मध्यप्रदेश की स्थिति” विषय पर अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने राज्य के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों, अंतर्राष्ट्रीय मांग, गुणवत्ता मानकों तथा बाजार विस्तार की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यशाला में अतिरिक्त महानिदेशक एफआईईओ श्री सुविद शाह ने मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की उपयोगिता, टैरिफ जोखिमों को कम करने तथा निर्यातकों को मिलने वाले लाभों की व्यावहारिक जानकारी साझा की। इंजीनियरिंग क्षेत्र में निर्यात की संभावनाओं पर अतिरिक्त कार्यकारी निदेशक ईईपीसी इंडिया श्री रजत श्रीवास्तव ने राज्य की औद्योगिक क्षमताओं, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी और तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता पर जोर दिया। एक्सिस बैंक के श्री आनंद सिंह, उप महाप्रबंधक एवं क्षेत्रीय प्रमुख ने निर्यात वित्त पोषण, क्रेडिट सहायता, जोखिम प्रबंधन तथा बैंक की विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। क्षेत्र-विशेष सत्रों में श्री तिलक खिंदर, प्रबंध निदेशक, रतन ब्रदर्स समूह ने मध्य प्रदेश से खेल सामग्री एवं एक्सेसरीज़ के निर्यात की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। समिट में श्री आशीष जायसवाल, स्पाइसेज़ बोर्ड ने मसालों के उत्पादन, गुणवत्ता प्रमाणन, ब्रांडिंग और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में निर्यात के अवसरों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। कार्यशाला में ओडीओपी उत्पादों के माध्यम से स्थानीय कारीगरों, किसानों, एमएसएमई इकाइयों और उद्यमियों को निर्यात से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया। समिट में निर्यात से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा हुई।  

केंद्रीय गृह मंत्री शाह एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेश से रोजगार-अटल संकल्प विषय पर लगी प्रदर्शनी का किया अवलोकन

भोपाल  मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरा ग्वालियर में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर “अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट” स्थल पर “निवेश से रोजगार-अटल संकल्प” विषय पर प्रदर्शनी लगाई गई। समिट के मुख्य अतिथि केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। समिट में केन्द्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमरऔर वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेश अध्यक्षश्री हेमन्त खंडेलवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण भी उनके साथ थे। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की राष्ट्रप्रेम को समर्पित जीवन यात्रा प्रदर्शित यह प्रदर्शनी स्व. वाजपेयी अटल जी की राष्ट्र प्रेम को समर्पित जीवन यात्रा और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान को अत्यंत जीवंत रूप में प्रस्तुत कर रही थी। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की कविताओं, ओजस्वी भाषणों और उनकी राजनीतिक यात्रा के माध्यम से उनकी दूरदर्शिता, एकात्म मानववाद की विचारधारा तथा भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के उनके संकल्प को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया।इसमें पोखरण परमाणु परीक्षण और गोल्डन क्वाड्रिलेटरल जैसी ऐतिहासिक उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया गया। साथ ही देश की मजबूती व विकास में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की भूमिका को रेखांकित कर रहे थे। औद्योगिक प्रगति को भी दर्शाया प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति और आर्थिक विकास को भी प्रदर्शित किया गया। इसमें राज्य की प्रमुख औद्योगिक परियोजनाओं जैसे सिंगाजी थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट, मालनपुर भिंड की इलेक्जर पीवीसी प्लाइवुड इकाई, पीथमपुर ऑटो हब और भोपाल फूड पार्क भी प्रदर्शित किये गये है। इसके साथ ही ड्रोन टेक्नोलॉजी और एग्रीटेक जैसे क्षेत्रों में कार्यरत सफल स्टार्ट-अप्स की कहानियों के माध्यम से नवाचार, उद्यमशीलता और युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों को भी प्रदर्शित किया गया। वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट भी किये गए प्रदर्शित प्रदर्शनी में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना ओडीओपी में मंदसौर की अफीम, मैहर का हस्तशिल्प, छिंदवाड़ा का टिंकीरा चावल जैसे उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। साथ ही जीआई टैग प्राप्त उत्पादों में विदिशा का लहसुनिया लाल चना, बालाघाट का काकड़ हाट चावल, मुरैना की सरसों से बने स्थानीय उत्पाद एवं मुरैना की जीआई टैग गजक तथा दतिया का प्रसिद्ध जीआई टैग बेलमेटल वर्क शामिल किया गया। समिट की प्रदर्शनी निवेशमें रोजगार से जोड़ने के अटल संकल्प को सशक्त रूप में प्रस्तुत किया गया।औद्योगिक विकास, नवाचार और स्थानीय उत्पादों के संवर्धन से सतत और समावेशी विकास की दिशा में निरंतर अग्रसरहोते मध्यप्रदेश को प्रदर्शित किया गया है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती पर उन्हें नमन किया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वतंत्रता सेनानी, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक, भारत रत्न, महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की जयंती पर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महामना मालवीय जी ने शिक्षा एवं समाज सुधार से प्रगति के नए युग का सपना देखा और अप्रतिम कृतित्व से साकार करने की नींव रखी। राष्ट्र सदैव महामना के प्रति कृतज्ञ रहेगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश के चहुँमुखी विकास की रखी सशक्त नींव : केन्द्रीय गृह मंत्री श्री शाह

संतुलित विकास के क्षेत्रीय निवेश सम्मेलनों की श्रंखला की शुरूआत को बताया दूरदर्शी भोपाल केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मप्र के संतुलित विकास के क्षेत्रीय निवेश सम्मेलनों की श्रंखला आयोजित करने की शुरूआत को दूरदर्शी बताया है। उन्होने कहा कि यह ऐसी शुरूआत श्री नरेन्द्र मोदी जी ने गुजरात के लिये की थी। ‘वाइब्रेंट गुजरात’ के नाम से इंडस्ट्रियल समिट आयोजित करने की एक वैज्ञानिक और व्यवस्थित शुरुआत उन्होंने की। इसमें राज्य की राजधानी में बड़े स्तर पर इंडस्ट्रियल समिट आयोजित होते थे और राज्य में व्यापक निवेश आता था। डॉ. यादव ने क्षेत्रीय इन्वेस्टमेंट समिट के माध्यम से मध्यप्रदेश के चहुँमुखी विकास की एक मजबूत नींव रखी है। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती परग्वालियर में ‘अभुदय : मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट’ में अपने संबोधन मेंकेन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने क्लस्टर इन्वेंस्टमेंट पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मैं डॉ. मोहन यादव को बधाई देना चाहता हूँ कि उन्होंने राज्य के संतुलित विकास के लिए ‘क्षेत्रीय निवेश कॉन्क्लेव’ की एक नई और दूरदर्शी शुरुआत की है। मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में कॉन्क्लेव आयोजित करने और निवेश के भूमिपूजन का जो सिलसिला उन्होंने शुरू किया है, वह आने वाले समय में राज्य के संतुलित विकास के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। आज जो 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है, वह देखने में भले ही छोटा लगे, लेकिन किसी एक क्षेत्र के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। किसी क्षेत्र की जनता के लिए यह निवेश अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यदि राज्य का संतुलित विकास नहीं होता, तो राज्य आगे नहीं बढ़ सकता, क्योंकि हर क्षेत्र में अपार संभावनाएँ छिपी होती हैं।जैसे मालवा, ग्वालियर और चंबल क्षेत्र में कपास लंबे समय से किसानों की प्रमुख फसल रही है, लेकिन उन्हें उसका उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। अब पीएम मित्र पार्क के आने से पारंपरिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ा है और कपास फिर से किसानों के लिए एक लाभकारी फसल बन गई है। मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी विशेषता उसका भौगोलिक लोकेशन है। यहाँ से पूरे देश के आधे हिस्से तक बहुत कम ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट में आपूर्ति संभव है। लेकिन इस भौगोलिक लाभ का शत-प्रतिशत उपयोग तभी संभव है, जब राज्य में सिमेट्रिक इंडस्ट्री विकसित की जाए। दक्षिण से जुड़े जिलों में उद्योग स्थापित हों, दिल्ली से जुड़े जिलों, जैसे ग्वालियर में उद्योग लगेंऔर पश्चिमी क्षेत्रों जैसे धार और झाबुआ में भी औद्योगिक विकास हो। तभी मध्यप्रदेश को अपने भौगोलिक लाभ का वास्तविक फायदा मिलेगा। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि इसी सोच के साथ यह आयोजन डॉ. मोहन यादव ने किया है। मैं उन्हें हृदय से बधाई देता हूँ कि उनकी क्षेत्रीय इन्वेस्टमेंट समिट ने मध्यप्रदेश के चहुँमुखी विकास की एक मजबूत नींव रखी है।  

अमित शाह ने गिनाईं उपलब्धियां: शिवराज ने हटाया बीमारू टैग, मोहन यादव दे रहे विकास को नई रफ्तार

 ग्वालियर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ग्वालियर की धरती से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व पर बड़ी मुहर लगा दी. 'अभ्युदय मध्य प्रदेश ग्रोथ समिट' के मंच से शाह ने न केवल पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के योगदान को सराहा, बल्कि सूबे के मौजूदा मुखिया मोहन यादव की कार्यशैली को अधिक ऊर्जावान बताया. अमित शाह ने कहा, ''किसी जमाने में दिग्विजय सिंह का शासन था, मध्य प्रदेश बीमारू राज्य बनकर रह गया था. शिवराज जी ने मध्य प्रदेश पर से बीमारू का टैग हटाया, वह भाजपा के लंबे समय तक रहने वाले मुख्यमंत्री बने. और अब मोहन यादव जी शिवराज जी से ज्यादा ऊर्जा के साथ इसको आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं.'' बता दें कि शिवराज सिंह चौहान (66) रिकॉर्ड 4 बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. 2023 के विधानसभा चुनावों में BJP को शानदार जीत दिलाने के बाद उन्होंने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया और विदिशा से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता. अब चौहान केंद्र की मोदी कैबिनेट में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री हैं.  अटल जी को श्रद्धांजलि भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर शाह ने उनके मजबूत नेतृत्व को याद किया. कहा, "अटल जी ही थे जिन्होंने दुनिया के दबाव के बावजूद यह सिद्धांत पेश किया कि परमाणु शक्ति का इस्तेमाल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है और उन्होंने भारत को एक परमाणु शक्ति बनाया. जब घुसपैठिए कारगिल में घुसे, तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के साथ बातचीत करने के लिए भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव था. अटल जी ने इसे बहुत मजजबूती से संभाला.'' 'घुसपैठियों को बाहर निकालने तक कोई बात नहीं' शाह ने कहा कि हमने शांति के लिए कोशिशें कीं, लेकिन हमें धोखा दिया गया. अब, जब तक हर एक घुसपैठिए को भारत से बाहर नहीं निकाल दिया जाता, तब तक पाकिस्तान से कोई बात नहीं होगी, और कारगिल में जीत अटल जी के दौर की मजबूत लीडरशिप का सबूत है… भारतीय जनता पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ताओं और देश की जनता की ओर से, मैं उन्हें दिल से श्रद्धांजलि देता हूं." ₹2 लाख करोड़ का निवेश, 1.93 लाख रोजगार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अटल जी की जन्मभूमि ग्वालियर में 'अभ्युदय मध्य प्रदेश ग्रोथ समिट' का उद्घाटन किया और 2 लाख करोड़ रुपए की औद्योगिक परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया. शाह ने इस मौके पर ग्वालियर मेले का भी उद्घाटन किया और अटल संग्रहालय में किए गए नवीनीकरण कार्य को लोगों को समर्पित किया. पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर आयोजित इस समिट में 25 हजार लाभार्थी और हजारों उद्यमी और निवेशकों ने भाग लिया. दावा है कि इन औद्योगिक परियोजनाओं से 1.93 लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे. इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राज्य विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और राज्य भाजपा प्रमुख हेमंत खंडेलवाल सहित अन्य लोग मौजूद थे. CM मोहन यादव ने इस मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने और देश को दुनिया की तीसरी सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है. उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार के अनुसार, ग्रोथ समिट मध्य प्रदेश के विकास मॉडल को एक नए और व्यापक दृष्टिकोण के साथ पेश करेगी. यह समिट सिर्फ निवेश प्रस्तावों और औद्योगिक घोषणाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एक एकीकृत दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है जिसमें उद्योग, शहरी विकास, पर्यटन, स्टार्टअप और रोजगार एक साथ आगे बढ़ते हैं.

ग्वालियर में निवेश का बड़ा दिन: अमित शाह ने ₹2 लाख करोड़ की औद्योगिक परियोजनाओं का भूमिपूजन-लोकार्पण किया

ग्वालियर  पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर ग्वालियर के मेला ग्राउंड में ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट निवेश से रोजगार’ का राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ने अटल जी की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यकम की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने करीब 2 लाख करोड़ रुपये की औद्योगिक परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया। इन परियोजनाओं से राज्य में लगभग 1.93 लाख रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना जताई गई है। समिट के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने ग्वालियर मेले का उद्घाटन किया और अटल संग्रहालय के नवीनीकरण कार्य को भी जनता को समर्पित किया। अधिकारियों के अनुसार समिट में करीब 25 हजार लाभार्थी तथा हजारों उद्यमी और निवेशक भाग ले रहे हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य में निवेश को बढ़ावा देना और औद्योगिक विकास को नई दिशा देना है।  अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एमपी ग्रोथ समिट में लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ग्वालियर व्यापार मेले और अटल म्यूजियम का शुभारंभ किया। इसके बाद मंच से 2 लाख करोड़ रुपए की औद्योगिक इकाइयों का भूमि पूजन और लोकार्पण भी किया। इसमें 1655 औद्योगिक इकाइयां है। इस मौके पर अमित शाह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को राजा साहब कहकर संबोधित किया। मंच से यह सुनकर पब्लिक ने खूब तालियां बजाई। आगे उन्होंने कहा कि ग्वालियर की धरती साधारण नहीं है। यही वह भूमि है जहां तानसेन का जन्म हुआ और ग्वालियर घराने के अनेक महान संगीतकारों ने अपनी साधना की। उन्होंने कहा कि इसी भूमि ने अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महान नेता को देश को दिया। यहीं से निकलकर अटल जी ने संघर्ष किया और आज पूरा देश उन्हें लाड़ करता है। शाह ने कहा कि मध्य प्रदेश में देश की सबसे बड़ी आदिवासी आबादी है। अटल जी से पहले आदिवासियों के लिए न तो कोई ठोस योजना थी और न ही कोई अलग विभाग, जिससे उनके विकास और उत्थान का कार्य हो सके। अटल बिहारी वाजपेयी ने आदिवासियों के कल्याण के लिए अलग आदिवासी विभाग का गठन किया और उनके अधिकारों को मजबूती दी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित कई वरिष्ठ मंत्री और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह ग्रोथ समिट भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर आयोजित की गई है। समारोह में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री एदल सिंह कंषाना, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग सहित अन्य कैबिनेट मंत्री मौजूद हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने और देश को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। राज्य सरकार के अनुसार यह ग्रोथ समिट केवल निवेश प्रस्तावों और औद्योगिक घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उद्योग, शहरी विकास, पर्यटन, एमएसएमई, स्टार्टअप और रोजगार को एक साथ आगे बढ़ाने का समग्र विजन प्रस्तुत किया गया है। समिट के माध्यम से मध्यप्रदेश के विकास मॉडल को एक नए और व्यापक दृष्टिकोण के साथ देश और दुनिया के सामने रखा जा रहा है। ग्रॉथ समिट में देश के प्रमुख उद्योगपति ग्रोथ समिट में देश के प्रतिष्ठित उद्योगपति और औद्योगिक संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें गोदरेज इंडस्ट्रीज, गौतम सोलर, हीडलबर्ग सीमेंट, एलएनजे भीलवाड़ा समूह, जेके टायर, टोरेंट पावर, मैकेन फूड, एलिक्सर इंडस्ट्रीज, ग्रीनको, जुपिटर वैगन्स, डाबर इंडिया, वर्धमान समूह, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड जैसे प्रमुख औद्योगिक समूह शामिल हैं। गृहमंत्री के कार्यक्रम के चलते शहर में 17 घंटे हाई अलर्ट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सुरक्षा के कारण शहर 17 घंटे हाई अलर्ट पर है। जिन स्थानों पर गृहमंत्री का कार्यक्रम है, वहां सुरक्षा के खास प्रबंध किए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा इतनी कड़ी है कि इन मार्गों पर कोई भी बिना अनुमति प्रवेश नहीं कर सकेगा।  

‘सुशासन दिवस’ पर मध्यप्रदेश पुलिस की अभिनव पहल

ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था से सायबर अपराध पर कसेगा शिकंजा ‘सुशासन दिवस’ पर मध्यप्रदेश पुलिस की अभिनव पहल डिजिटल युग में न्याय प्रक्रिया को मिली गति भोपाल पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिवस को ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाए जाने की परंपरा के अनुरूप, मध्यप्रदेश पुलिस ने सुशासन को सशक्त करने की दिशा में नवाचार के रूप में ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था प्रारंभ की है। यह व्यवस्था 01 लाख रुपये से अधिक की सायबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में लागू की गई है। ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सायबर सुरक्षित भारत’ विज़न के अनुरूप है, जिसका उल्लेख उन्होंने अक्टूबर 2024 में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में किया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देशभर में सायबर अपराध से निपटने के लिये ऐतिहासिक एवं तकनीक-आधारित कदम उठाए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा ई-जीरो एफआईआर प्रणाली के क्रियान्वयन से यह स्पष्ट होता है कि तकनीक के माध्यम से न्याय प्रक्रिया को तेज और आम नागरिकों के लिए अधिक सरल, सुलभ और प्रभावी बनाया जा सकता है। मध्यप्रदेश में लागू यह प्रणाली पुलिस को अपराधियों से एक कदम आगे रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। प्रदेश में बढ़ते सायबर अपराधों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तकनीक के दुरुपयोग से जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री का मानना है कि जिस प्रकार स्वच्छता को हमने अपनी संस्कृति बनाया है, उसी प्रकार सायबर स्वच्छता को भी जन-आंदोलन बनाना होगा। प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था का संचालन पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए. साई मनोहर के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पुलिस को अधिक तेज, तकनीक-सक्षम और नागरिक-केंद्रित बनाना है। सायबर वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी प्रहार सायबर वित्तीय धोखाधड़ी आज पुलिस के समक्ष एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। कई बार पीड़ित की जीवनभर की कमाई कुछ ही क्षणों में अपराधियों के हाथों में चली जाती है, जिससे वह स्वयं को असहाय महसूस करता है। इसी पीड़ा को समझते हुए गृह मंत्रालय द्वारा ‘ई-जीरो एफआईआर’ की अवधारणा लागू की गई है, ताकि तकनीक को अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी हथियार बनाया जा सके। कानूनी आधार : BNSS और डिजिटल परिवर्तन जुलाई 2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानून ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (बीएनएसएस) नागरिक-केंद्रित हैं। इनका मूल उद्देश्य ‘दंड नहीं, बल्कि न्याय’ पर फोकस रहना है। बीएनएसएस की धारा 173 के अंतर्गत ‘जीरो एफआईआर’ को कानूनी मान्यता प्रदान की गई है, जिससे नागरिक देश में कहीं से भी, किसी भी क्षेत्राधिकार में घटित अपराध के लिए, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ई-जीरो एफआईआर: एक क्रांतिकारी व्यवस्था ‘ई-जीरो एफआईआर’ सायबर वित्तीय धोखाधड़ी—विशेषकर ₹1 लाख से अधिक की हानि के मामलों में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को अत्यंत तेज बनाती है। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्राधिकार संबंधी बाधाओं को समाप्त कर जांच प्रक्रिया को तत्काल प्रारंभ करना है। यह प्रणाली तीन प्रमुख डिजिटल मंचों का एकीकरण करती है। नेशनल सायबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी), I4सी (भारतीय सायबर अपराध समन्वय केंद्र) और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस)। ई-जीरो एफआईआर पंजीकरण की 5-चरणीय प्रक्रिया शिकायत दर्ज करना – पीड़ित 1930 हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल पर शिकायत करता है। ₹1 लाख से अधिक की धोखाधड़ी होने पर डेटा सीधे भोपाल स्थित केंद्रीय सायबर पुलिस हब को भेजा जाता है। ऑटोमैटिक जनरेशन – सीसीटीएनएस सर्वर के माध्यम से शिकायत स्वतः ‘ई-जीरो एफआईआर’ में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ित को तुरंत ‘ई-जीरो एफआईआर’ नंबर उपलब्ध कराया दिया जाता है। समीक्षा एवं हस्तांतरण – राज्य स्तरीय सायबर पुलिस स्टेशन द्वारा समीक्षा कर प्रकरण संबंधित क्षेत्रीय पुलिस स्टेशन को भेजा जाता है। नियमित एफआईआर में परिवर्तन – शिकायतकर्ता को 3 दिन के अंदर नजदीकी सायबर पुलिस स्टेशन में ‘ई-जीरो एफआईआर’ को नियमित एफआईआर में परिवर्तित कराना होता है। सायबर अपराध में ‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व सायबर अपराध में धोखाधड़ी के बाद के पहले 2 घंटे को ‘गोल्डन ऑवर’ माना जाता है। यदि पीड़ित तुरंत 1930 पर संपर्क करता है, तो I4C एवं बैंकों के सहयोग से अपराधी के खाते में राशि पहुंचने से पहले ही उसे फ्रीज किया जा सकता है। ई-जीरो एफआईआर के माध्यम से आईपी लॉग, ट्रांजैक्शन आईडी जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य तत्काल और कानूनी रूप से सुरक्षित किए जाते हैं। ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था के प्रमुख लाभ ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था देश में कहीं से भी कहीं भी हुई सायबर या वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराती है। इससे क्षेत्राधिकार संबंधी बाधाओं से मुक्ति मिलती है, केस की स्थिति ऑनलाइन देखने की सुविधा मिलती है, शीघ्र एफआईआर से बैंकिंग चैनल सक्रिय, हो जाते हैं, राशि वापसी की संभावना अधिक हो जाती है साथ ही पोर्टल पर सीधे स्क्रीनशॉट और रसीदें अपलोड करने की सुविधा मिलने से आवश्यक दस्तावेज हमेशा उपलब्ध बने रहते हैं।