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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती पर उन्हें नमन किया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वतंत्रता सेनानी, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक, भारत रत्न, महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की जयंती पर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महामना मालवीय जी ने शिक्षा एवं समाज सुधार से प्रगति के नए युग का सपना देखा और अप्रतिम कृतित्व से साकार करने की नींव रखी। राष्ट्र सदैव महामना के प्रति कृतज्ञ रहेगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश के चहुँमुखी विकास की रखी सशक्त नींव : केन्द्रीय गृह मंत्री श्री शाह

संतुलित विकास के क्षेत्रीय निवेश सम्मेलनों की श्रंखला की शुरूआत को बताया दूरदर्शी भोपाल केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मप्र के संतुलित विकास के क्षेत्रीय निवेश सम्मेलनों की श्रंखला आयोजित करने की शुरूआत को दूरदर्शी बताया है। उन्होने कहा कि यह ऐसी शुरूआत श्री नरेन्द्र मोदी जी ने गुजरात के लिये की थी। ‘वाइब्रेंट गुजरात’ के नाम से इंडस्ट्रियल समिट आयोजित करने की एक वैज्ञानिक और व्यवस्थित शुरुआत उन्होंने की। इसमें राज्य की राजधानी में बड़े स्तर पर इंडस्ट्रियल समिट आयोजित होते थे और राज्य में व्यापक निवेश आता था। डॉ. यादव ने क्षेत्रीय इन्वेस्टमेंट समिट के माध्यम से मध्यप्रदेश के चहुँमुखी विकास की एक मजबूत नींव रखी है। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती परग्वालियर में ‘अभुदय : मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट’ में अपने संबोधन मेंकेन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने क्लस्टर इन्वेंस्टमेंट पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मैं डॉ. मोहन यादव को बधाई देना चाहता हूँ कि उन्होंने राज्य के संतुलित विकास के लिए ‘क्षेत्रीय निवेश कॉन्क्लेव’ की एक नई और दूरदर्शी शुरुआत की है। मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में कॉन्क्लेव आयोजित करने और निवेश के भूमिपूजन का जो सिलसिला उन्होंने शुरू किया है, वह आने वाले समय में राज्य के संतुलित विकास के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। आज जो 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है, वह देखने में भले ही छोटा लगे, लेकिन किसी एक क्षेत्र के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। किसी क्षेत्र की जनता के लिए यह निवेश अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यदि राज्य का संतुलित विकास नहीं होता, तो राज्य आगे नहीं बढ़ सकता, क्योंकि हर क्षेत्र में अपार संभावनाएँ छिपी होती हैं।जैसे मालवा, ग्वालियर और चंबल क्षेत्र में कपास लंबे समय से किसानों की प्रमुख फसल रही है, लेकिन उन्हें उसका उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। अब पीएम मित्र पार्क के आने से पारंपरिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ा है और कपास फिर से किसानों के लिए एक लाभकारी फसल बन गई है। मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी विशेषता उसका भौगोलिक लोकेशन है। यहाँ से पूरे देश के आधे हिस्से तक बहुत कम ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट में आपूर्ति संभव है। लेकिन इस भौगोलिक लाभ का शत-प्रतिशत उपयोग तभी संभव है, जब राज्य में सिमेट्रिक इंडस्ट्री विकसित की जाए। दक्षिण से जुड़े जिलों में उद्योग स्थापित हों, दिल्ली से जुड़े जिलों, जैसे ग्वालियर में उद्योग लगेंऔर पश्चिमी क्षेत्रों जैसे धार और झाबुआ में भी औद्योगिक विकास हो। तभी मध्यप्रदेश को अपने भौगोलिक लाभ का वास्तविक फायदा मिलेगा। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि इसी सोच के साथ यह आयोजन डॉ. मोहन यादव ने किया है। मैं उन्हें हृदय से बधाई देता हूँ कि उनकी क्षेत्रीय इन्वेस्टमेंट समिट ने मध्यप्रदेश के चहुँमुखी विकास की एक मजबूत नींव रखी है।  

अमित शाह ने गिनाईं उपलब्धियां: शिवराज ने हटाया बीमारू टैग, मोहन यादव दे रहे विकास को नई रफ्तार

 ग्वालियर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ग्वालियर की धरती से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व पर बड़ी मुहर लगा दी. 'अभ्युदय मध्य प्रदेश ग्रोथ समिट' के मंच से शाह ने न केवल पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के योगदान को सराहा, बल्कि सूबे के मौजूदा मुखिया मोहन यादव की कार्यशैली को अधिक ऊर्जावान बताया. अमित शाह ने कहा, ''किसी जमाने में दिग्विजय सिंह का शासन था, मध्य प्रदेश बीमारू राज्य बनकर रह गया था. शिवराज जी ने मध्य प्रदेश पर से बीमारू का टैग हटाया, वह भाजपा के लंबे समय तक रहने वाले मुख्यमंत्री बने. और अब मोहन यादव जी शिवराज जी से ज्यादा ऊर्जा के साथ इसको आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं.'' बता दें कि शिवराज सिंह चौहान (66) रिकॉर्ड 4 बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. 2023 के विधानसभा चुनावों में BJP को शानदार जीत दिलाने के बाद उन्होंने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया और विदिशा से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता. अब चौहान केंद्र की मोदी कैबिनेट में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री हैं.  अटल जी को श्रद्धांजलि भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर शाह ने उनके मजबूत नेतृत्व को याद किया. कहा, "अटल जी ही थे जिन्होंने दुनिया के दबाव के बावजूद यह सिद्धांत पेश किया कि परमाणु शक्ति का इस्तेमाल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है और उन्होंने भारत को एक परमाणु शक्ति बनाया. जब घुसपैठिए कारगिल में घुसे, तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के साथ बातचीत करने के लिए भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव था. अटल जी ने इसे बहुत मजजबूती से संभाला.'' 'घुसपैठियों को बाहर निकालने तक कोई बात नहीं' शाह ने कहा कि हमने शांति के लिए कोशिशें कीं, लेकिन हमें धोखा दिया गया. अब, जब तक हर एक घुसपैठिए को भारत से बाहर नहीं निकाल दिया जाता, तब तक पाकिस्तान से कोई बात नहीं होगी, और कारगिल में जीत अटल जी के दौर की मजबूत लीडरशिप का सबूत है… भारतीय जनता पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ताओं और देश की जनता की ओर से, मैं उन्हें दिल से श्रद्धांजलि देता हूं." ₹2 लाख करोड़ का निवेश, 1.93 लाख रोजगार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अटल जी की जन्मभूमि ग्वालियर में 'अभ्युदय मध्य प्रदेश ग्रोथ समिट' का उद्घाटन किया और 2 लाख करोड़ रुपए की औद्योगिक परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया. शाह ने इस मौके पर ग्वालियर मेले का भी उद्घाटन किया और अटल संग्रहालय में किए गए नवीनीकरण कार्य को लोगों को समर्पित किया. पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर आयोजित इस समिट में 25 हजार लाभार्थी और हजारों उद्यमी और निवेशकों ने भाग लिया. दावा है कि इन औद्योगिक परियोजनाओं से 1.93 लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे. इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राज्य विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और राज्य भाजपा प्रमुख हेमंत खंडेलवाल सहित अन्य लोग मौजूद थे. CM मोहन यादव ने इस मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने और देश को दुनिया की तीसरी सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है. उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार के अनुसार, ग्रोथ समिट मध्य प्रदेश के विकास मॉडल को एक नए और व्यापक दृष्टिकोण के साथ पेश करेगी. यह समिट सिर्फ निवेश प्रस्तावों और औद्योगिक घोषणाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एक एकीकृत दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है जिसमें उद्योग, शहरी विकास, पर्यटन, स्टार्टअप और रोजगार एक साथ आगे बढ़ते हैं.

ग्वालियर में निवेश का बड़ा दिन: अमित शाह ने ₹2 लाख करोड़ की औद्योगिक परियोजनाओं का भूमिपूजन-लोकार्पण किया

ग्वालियर  पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर ग्वालियर के मेला ग्राउंड में ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट निवेश से रोजगार’ का राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ने अटल जी की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यकम की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने करीब 2 लाख करोड़ रुपये की औद्योगिक परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया। इन परियोजनाओं से राज्य में लगभग 1.93 लाख रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना जताई गई है। समिट के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने ग्वालियर मेले का उद्घाटन किया और अटल संग्रहालय के नवीनीकरण कार्य को भी जनता को समर्पित किया। अधिकारियों के अनुसार समिट में करीब 25 हजार लाभार्थी तथा हजारों उद्यमी और निवेशक भाग ले रहे हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य में निवेश को बढ़ावा देना और औद्योगिक विकास को नई दिशा देना है।  अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एमपी ग्रोथ समिट में लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ग्वालियर व्यापार मेले और अटल म्यूजियम का शुभारंभ किया। इसके बाद मंच से 2 लाख करोड़ रुपए की औद्योगिक इकाइयों का भूमि पूजन और लोकार्पण भी किया। इसमें 1655 औद्योगिक इकाइयां है। इस मौके पर अमित शाह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को राजा साहब कहकर संबोधित किया। मंच से यह सुनकर पब्लिक ने खूब तालियां बजाई। आगे उन्होंने कहा कि ग्वालियर की धरती साधारण नहीं है। यही वह भूमि है जहां तानसेन का जन्म हुआ और ग्वालियर घराने के अनेक महान संगीतकारों ने अपनी साधना की। उन्होंने कहा कि इसी भूमि ने अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महान नेता को देश को दिया। यहीं से निकलकर अटल जी ने संघर्ष किया और आज पूरा देश उन्हें लाड़ करता है। शाह ने कहा कि मध्य प्रदेश में देश की सबसे बड़ी आदिवासी आबादी है। अटल जी से पहले आदिवासियों के लिए न तो कोई ठोस योजना थी और न ही कोई अलग विभाग, जिससे उनके विकास और उत्थान का कार्य हो सके। अटल बिहारी वाजपेयी ने आदिवासियों के कल्याण के लिए अलग आदिवासी विभाग का गठन किया और उनके अधिकारों को मजबूती दी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित कई वरिष्ठ मंत्री और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह ग्रोथ समिट भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर आयोजित की गई है। समारोह में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री एदल सिंह कंषाना, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग सहित अन्य कैबिनेट मंत्री मौजूद हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने और देश को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। राज्य सरकार के अनुसार यह ग्रोथ समिट केवल निवेश प्रस्तावों और औद्योगिक घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उद्योग, शहरी विकास, पर्यटन, एमएसएमई, स्टार्टअप और रोजगार को एक साथ आगे बढ़ाने का समग्र विजन प्रस्तुत किया गया है। समिट के माध्यम से मध्यप्रदेश के विकास मॉडल को एक नए और व्यापक दृष्टिकोण के साथ देश और दुनिया के सामने रखा जा रहा है। ग्रॉथ समिट में देश के प्रमुख उद्योगपति ग्रोथ समिट में देश के प्रतिष्ठित उद्योगपति और औद्योगिक संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें गोदरेज इंडस्ट्रीज, गौतम सोलर, हीडलबर्ग सीमेंट, एलएनजे भीलवाड़ा समूह, जेके टायर, टोरेंट पावर, मैकेन फूड, एलिक्सर इंडस्ट्रीज, ग्रीनको, जुपिटर वैगन्स, डाबर इंडिया, वर्धमान समूह, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड जैसे प्रमुख औद्योगिक समूह शामिल हैं। गृहमंत्री के कार्यक्रम के चलते शहर में 17 घंटे हाई अलर्ट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सुरक्षा के कारण शहर 17 घंटे हाई अलर्ट पर है। जिन स्थानों पर गृहमंत्री का कार्यक्रम है, वहां सुरक्षा के खास प्रबंध किए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा इतनी कड़ी है कि इन मार्गों पर कोई भी बिना अनुमति प्रवेश नहीं कर सकेगा।  

‘सुशासन दिवस’ पर मध्यप्रदेश पुलिस की अभिनव पहल

ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था से सायबर अपराध पर कसेगा शिकंजा ‘सुशासन दिवस’ पर मध्यप्रदेश पुलिस की अभिनव पहल डिजिटल युग में न्याय प्रक्रिया को मिली गति भोपाल पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिवस को ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाए जाने की परंपरा के अनुरूप, मध्यप्रदेश पुलिस ने सुशासन को सशक्त करने की दिशा में नवाचार के रूप में ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था प्रारंभ की है। यह व्यवस्था 01 लाख रुपये से अधिक की सायबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में लागू की गई है। ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सायबर सुरक्षित भारत’ विज़न के अनुरूप है, जिसका उल्लेख उन्होंने अक्टूबर 2024 में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में किया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देशभर में सायबर अपराध से निपटने के लिये ऐतिहासिक एवं तकनीक-आधारित कदम उठाए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा ई-जीरो एफआईआर प्रणाली के क्रियान्वयन से यह स्पष्ट होता है कि तकनीक के माध्यम से न्याय प्रक्रिया को तेज और आम नागरिकों के लिए अधिक सरल, सुलभ और प्रभावी बनाया जा सकता है। मध्यप्रदेश में लागू यह प्रणाली पुलिस को अपराधियों से एक कदम आगे रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। प्रदेश में बढ़ते सायबर अपराधों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तकनीक के दुरुपयोग से जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री का मानना है कि जिस प्रकार स्वच्छता को हमने अपनी संस्कृति बनाया है, उसी प्रकार सायबर स्वच्छता को भी जन-आंदोलन बनाना होगा। प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था का संचालन पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए. साई मनोहर के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पुलिस को अधिक तेज, तकनीक-सक्षम और नागरिक-केंद्रित बनाना है। सायबर वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी प्रहार सायबर वित्तीय धोखाधड़ी आज पुलिस के समक्ष एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। कई बार पीड़ित की जीवनभर की कमाई कुछ ही क्षणों में अपराधियों के हाथों में चली जाती है, जिससे वह स्वयं को असहाय महसूस करता है। इसी पीड़ा को समझते हुए गृह मंत्रालय द्वारा ‘ई-जीरो एफआईआर’ की अवधारणा लागू की गई है, ताकि तकनीक को अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी हथियार बनाया जा सके। कानूनी आधार : BNSS और डिजिटल परिवर्तन जुलाई 2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानून ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (बीएनएसएस) नागरिक-केंद्रित हैं। इनका मूल उद्देश्य ‘दंड नहीं, बल्कि न्याय’ पर फोकस रहना है। बीएनएसएस की धारा 173 के अंतर्गत ‘जीरो एफआईआर’ को कानूनी मान्यता प्रदान की गई है, जिससे नागरिक देश में कहीं से भी, किसी भी क्षेत्राधिकार में घटित अपराध के लिए, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ई-जीरो एफआईआर: एक क्रांतिकारी व्यवस्था ‘ई-जीरो एफआईआर’ सायबर वित्तीय धोखाधड़ी—विशेषकर ₹1 लाख से अधिक की हानि के मामलों में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को अत्यंत तेज बनाती है। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्राधिकार संबंधी बाधाओं को समाप्त कर जांच प्रक्रिया को तत्काल प्रारंभ करना है। यह प्रणाली तीन प्रमुख डिजिटल मंचों का एकीकरण करती है। नेशनल सायबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी), I4सी (भारतीय सायबर अपराध समन्वय केंद्र) और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस)। ई-जीरो एफआईआर पंजीकरण की 5-चरणीय प्रक्रिया शिकायत दर्ज करना – पीड़ित 1930 हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल पर शिकायत करता है। ₹1 लाख से अधिक की धोखाधड़ी होने पर डेटा सीधे भोपाल स्थित केंद्रीय सायबर पुलिस हब को भेजा जाता है। ऑटोमैटिक जनरेशन – सीसीटीएनएस सर्वर के माध्यम से शिकायत स्वतः ‘ई-जीरो एफआईआर’ में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ित को तुरंत ‘ई-जीरो एफआईआर’ नंबर उपलब्ध कराया दिया जाता है। समीक्षा एवं हस्तांतरण – राज्य स्तरीय सायबर पुलिस स्टेशन द्वारा समीक्षा कर प्रकरण संबंधित क्षेत्रीय पुलिस स्टेशन को भेजा जाता है। नियमित एफआईआर में परिवर्तन – शिकायतकर्ता को 3 दिन के अंदर नजदीकी सायबर पुलिस स्टेशन में ‘ई-जीरो एफआईआर’ को नियमित एफआईआर में परिवर्तित कराना होता है। सायबर अपराध में ‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व सायबर अपराध में धोखाधड़ी के बाद के पहले 2 घंटे को ‘गोल्डन ऑवर’ माना जाता है। यदि पीड़ित तुरंत 1930 पर संपर्क करता है, तो I4C एवं बैंकों के सहयोग से अपराधी के खाते में राशि पहुंचने से पहले ही उसे फ्रीज किया जा सकता है। ई-जीरो एफआईआर के माध्यम से आईपी लॉग, ट्रांजैक्शन आईडी जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य तत्काल और कानूनी रूप से सुरक्षित किए जाते हैं। ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था के प्रमुख लाभ ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था देश में कहीं से भी कहीं भी हुई सायबर या वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराती है। इससे क्षेत्राधिकार संबंधी बाधाओं से मुक्ति मिलती है, केस की स्थिति ऑनलाइन देखने की सुविधा मिलती है, शीघ्र एफआईआर से बैंकिंग चैनल सक्रिय, हो जाते हैं, राशि वापसी की संभावना अधिक हो जाती है साथ ही पोर्टल पर सीधे स्क्रीनशॉट और रसीदें अपलोड करने की सुविधा मिलने से आवश्यक दस्तावेज हमेशा उपलब्ध बने रहते हैं।  

51 कलश सिर पर लेकर चलीं महिलाएं, जमकर थिरकें श्रद्धालु

भोपाल  संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का राजधानी के हिनोतिया क्षेत्र में आज शुभारंभ हो गया। कथा से पूर्व कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें महिला श्रद्धालु51 कलश सिर पर लेकर चलीं। वहीं यात्रा में डीजे की धुन पर श्रद्धालु जमकर थिरके। इस दौरान मंत्री विश्वास सारंग भी यात्रा में शामिल हुए। इस सात दिवसीय आयोजन में व्यास पं. देवेंद्र चतुर्वेदी शास्त्री प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक कथा का वाचन करेंगे। आज शुक्रवार को शुकदेव जन्मकुंती एवं भीष्म स्तुति का प्रसंग कथा व्यास सुनाएंगे।

मोबाइल विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पत्नी की अपील नामंजूर, तलाक पर लगी मुहर

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में अपने एक फैसले में एक आदमी को उसकी पत्नी से दी गई तलाक को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता का मोबाइल तोड़ना स्वाभाविक प्रतीत होता है। कोई भी आदमी अपनी पत्नी को व्यभिचार जारी रखते देखना पसंद नहीं करेगा। इसलिए पति ने गुस्से में आकर पत्नी का प्रेमी से संपर्क तोड़ने के लिए उसका मोबाइल तोड़ दिया।   बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कथित व्यभिचार को दर्शाने वाली मोबाइल फोन की तस्वीरों के आधार पर दी गई तलाक को बरकरार रखा। कोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी के तहत प्रमाण पत्र पर जोर नहीं दिया। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को सबूत के रूप में स्वीकार्यता से संबंधित है। किसी इलेक्ट्रानिक उपकरण से प्राप्त साक्ष्य को वैध माने जाने के लिए धारा 65बी का प्रमाण पत्र पेश करना जरूरी है। हाई कोर्ट के जस्टिस विशाल धागत और जस्टिस बीपी शर्मा की पीठ ने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम वैवाहिक मामलों पर सख्ती से लागू नहीं होता है क्योंकि फैमिली कोर्ट को किसी भी प्रकार का साक्ष्य स्वीकार करने की अनुमति है। हाई कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट अधिनियम की धारा 14 के अनुसार, फैमिली कोर्ट किसी भी रिपोर्ट, बयान, दस्तावेज, सूचना या मामले को साक्ष्य के रूप में स्वीकार कर सकता है, जो उसके विचार से किसी विवाद से प्रभावी ढंग से निपटने में सहायक हो। चाहे वह भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के तहत प्रासंगिक या स्वीकार्य हो या न हो। भारतीय साक्ष्य अधिनियम वैवाहिक मामलों में सख्ती से लागू नहीं होता है और कोर्ट को सत्य का पता लगाने के लिए किसी भी रिपोर्ट, बयान, दस्तावेज को साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने का अधिकार दिया गया है। अतः कोर्ट को उक्त तस्वीरों पर भरोसा करते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले में कोई गलती नहीं दिखती है। तलाक के फैसले के खिलाफ अपील करने वाली पत्नी ने तर्क दिया था कि कथित तस्वीरें किसी दूसरे मोबाइल से ली गई थीं क्योंकि पति ने उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया था। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि पत्नी ने तस्वीरों में अपनी मौजूदगी से इनकार नहीं किया था, बल्कि सिर्फ इतना कहा था कि तस्वीरें फर्जी हैं। कोर्ट ने कहा कि केवल इतना कहा गया है कि ये तस्वीरें किसी चालबाजी का उपयोग करके बनाई गई हैं। इन फर्जी तस्वीरों को किसने और कैसे बनाया है, इसका जिक्र नहीं किया गया है। इन तस्वीरों को लेकर टकराव से बचने के लिए केवल एक सामान्य बयान दिया गया है। पत्नी की इस दलील पर कि प्राथमिक उपकरण (पहला मोबाइल) उपलब्ध नहीं था, कोर्ट ने कहा कि पति ने तस्वीरों को अपने फोन में ट्रांसफर करने के बाद गुस्से में आकर उसे तोड़ दिया था। कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता ने अपने बयान में कहा था कि तस्वीरें उसके मोबाइल से पति के मोबाइल में ट्रांसफर की गई थीं, जिसके बाद पति ने उसका मोबाइल तोड़ दिया। कोर्ट ने कहा कि पति का मोबाइल तोड़ना स्वाभाविक प्रतीत होता है। पति के मोबाइल फोन में पत्नी के व्यभिचार के सबूत थे। उसने वे तस्वीरें अपने मोबाइल में ट्रांसफर कर लीं। कोई भी आदमी अपनी पत्नी को व्यभिचार जारी रखते देखना पसंद नहीं करेगा। इसलिए पति ने गुस्से में आकर और पत्नी का प्रेमी से संपर्क तोड़ने के लिए उसका मोबाइल तोड़ दिया। रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों, पत्नी की स्वीकारोक्ति और तस्वीरें तैयार करने वाले व्यक्ति के साक्ष्यों पर विचार करते हुए कोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ पत्नी की अपील में कोई दम नहीं है। कोर्ट ने पत्नी द्वारा दायर अपील खारिज कर दी।  

ट्रांसको प्रीमियर क्रिकेट लीग 26 दिसम्बर से

ट्रांसको प्रीमियर क्रिकेट लीग 26 दिसम्बर से  जबलपुर  एम.पी. ट्रांसको (मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी) मुख्यालय, जबलपुर में अंतरविभागीय वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के अंतर्गत “ट्रांसको प्रीमियर क्रिकेट लीग–2025-26” का आयोजन 26 दिसम्बर 2025 से किया जा रहा है।प्रतियोगिता के संयोजक कार्यपालन अभियंता श्री इकबाल खान ने बताया कि टेनिस बॉल से खेली जाने वाली इस प्रतियोगिता के सभी लीग एवं फाइनल मुकाबले रामपुर स्थित पांडुताल खेल प्रांगण में आयोजित किए जाएंगे। इस क्रिकेट लीग में एम.पी. ट्रांसको की तीन महिला टीमें, वेंडर्स एवं आउटसोर्स की एक-एक टीम सहित कुल सात पुरुष टीमें भाग लेंगी। इसके अतिरिक्त, 40 वर्ष से अधिक आयु के वर्तमान कार्मिकों की सीनियर इलेवन, सेवानिवृत्त कार्मिकों की इलेवन तथा ट्रांसको परिवार की घरेलू महिला इलेवन की भी विशेष सहभागिता रहेगी। प्रतियोगिता का उद्घाटन एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक श्री सुनील तिवारी एवं मध्यप्रदेश विद्युत महिला मंडल की अध्यक्ष डॉ. अंजना तिवारी द्वारा दोपहर 12 बजे किया जाएगा। आज का पहला मुकाबला महिला टीम पावर स्मैसर्स विरुद्ध पावर एंजिल्स रहेगा.

मुख्यमंत्री पोषण मार्ट से आम जनता को सुविधा, किराना और जनरल स्टोर की तरह मिलेगा हर सामान: मंत्री राजपूत

भोपाल  मध्य प्रदेश में राशन की दुकानों पर किराना और जनरल स्टोर की तरह जरूरत की हर सामग्री मिलेगी। मप्र के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि मध्यप्रदेश में पहली बार राशन दुकानों को ‘मुख्यमंत्री पोषण मार्ट’ के रूप में विकसित करने की तैयारी।  अभी तक प्रदेश की राशन दुकानों में केवल गेहूं, चावल, शक्कर जैसी सीमित सामग्री ही उपलब्ध रहती है, लेकिन सरकार का उद्देश्य इस व्यवस्था को और व्यापक व उपयोगी बनाना है। राशन दुकान पर जरूरत का हर सामान मिले मंत्री ने बताया कि सरकार का विचार है कि राशन दुकानों पर किराने और जनरल स्टोर से जुड़ी आवश्यक वस्तुएं भी उपलब्ध कराई जाएं, ठीक उसी तरह जैसे विकसित देशों में कम्युनिटी स्टोर या सोशल स्टोर की व्यवस्था होती है। इससे हितग्राहियों को रोजमर्रा की जरूरत का सामान एक ही स्थान पर मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पोषण मार्ट के रूप में विकसित होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सबसे अधिक लाभ होगा। गांव-गांव में रहने वाले नागरिकों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए अलग-अलग दुकानों या दूर के बाजारों तक नहीं जाना पड़ेगा। राशन के साथ-साथ अन्य जरूरी वस्तुएं भी एक ही जगह मिलने से समय, पैसा और श्रम तीनों की बचत होगी। मंत्री के अनुसार, इस योजना से न केवल हितग्राहियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि राशन दुकानदारों की आय भी बढ़ेगी, जिससे पूरी सार्वजनिक वितरण प्रणाली अधिक मजबूत और टिकाऊ बन सकेगी। सरकार इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी कर रही है। भोपाल के होटल पलाश में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की उपलब्धियां बताईं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की उपलब्धि मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि बीते दो सालों में प्रदेश में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत बड़े पैमाने पर नि:शुल्क राशन का वितरण किया गया। इस अवधि में सरकार ने 22 हजार 800 करोड़ रुपए मूल्य का अनाज गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाया। मंत्री के अनुसार, योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र परिवार खाद्यान्न से वंचित न रहे। योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने के लिए तकनीक का सहारा लिया गया है, जिससे वितरण व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक सुचारु हुई है। मुख्यमंत्री अन्न जागरूकता सेवा अभियान राशन दुकानों में गड़बड़ियों को खत्म करने के उद्देश्य से सरकार ने मुख्यमंत्री अन्न जागरूकता सेवा अभियान शुरू किया है। मंत्री ने बताया कि इसके तहत एक विशेष मोबाइल एप तैयार किया गया है। इस एप के जरिए जैसे ही राशन की गाड़ी दुकान पर पहुंचेगी, उसकी सूचना एसएमएस के माध्यम से सीधे हितग्राहियों को मिल जाएगी। इससे हितग्राही समय पर दुकान पहुंचकर राशन ले सकेंगे। इस व्यवस्था में राशन वाहन की स्थिति हितग्राही, दुकानदार और वाहन सेवा प्रदाता तीनों को दिखाई देगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी। साल में दो साल ग्राम सभाओं में पढ़ी जाएगी राशन लेने वालों की लिस्ट मंत्री ने बताया कि विभाग ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ग्राम सभा स्तर पर राशन वितरण का सार्वजनिक वाचन शुरू किया है। इसमें यह जानकारी दी जाएगी कि गांव में कितने लोगों को राशन मिल रहा है, कितने लोग वंचित हैं और कितने पात्र लोगों के पास अभी पात्रता पर्ची नहीं है। इससे मौके पर ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी और शिकायतों का तुरंत समाधान संभव होगा। मंत्री ने इसे सामाजिक ऑडिट जैसा मॉडल बताया, जिससे ग्रामीण स्तर पर जवाबदेही तय होगी। ई-केवाईसी और फेस ऑथेंटिकेशन प्रदेश में राशन वितरण को व्यवस्थित करने के लिए बड़े स्तर पर ई-केवाईसी अभियान चलाया गया है। मंत्री के अनुसार अब तक 1 करोड़ 70 लाख से अधिक हितग्राहियों की ई-केवाईसी पूरी की जा चुकी है। इसके साथ ही ‘मेरा ई-केवाईसी ऐप’ के माध्यम से चेहरे के सत्यापन (फेस ऑथेंटिकेशन) की सुविधा दी गई है। 80 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों और दिव्यांगों को ई-केवाईसी से छूट दी गई है, ताकि वे तकनीकी कारणों से राशन से वंचित न हों। बुजुर्गों और दिव्यांगों को राशन लेने नॉमिनी की व्यवस्था कई बार अंगूठे का निशान काम न करने के कारण बुजुर्ग और दिव्यांग हितग्राही राशन नहीं ले पाते थे। इसे देखते हुए सरकार ने नॉमिनी व्यवस्था लागू की है। मंत्री ने बताया कि अब कोई भी वृद्ध या दिव्यांग व्यक्ति किसी एक व्यक्ति को नॉमिनी बना सकता है और उसी के माध्यम से उसे राशन मिलेगा। इस व्यवस्था का मकसद यह है कि कोई भी पात्र व्यक्ति तकनीकी कारणों से राशन से वंचित न रहे। 14 लाख नई राशन पात्रता पर्चियां मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि सरकार ने अब तक 14 लाख नई राशन पात्रता पर्चियां जारी की हैं और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। जो पात्र व्यक्ति अब तक योजना से छूट गए थे, वे अपनी केवाईसी पूरी कराकर राशन दुकान से पात्रता पर्ची प्राप्त कर सकते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि सभी पात्र परिवारों को खाद्य सुरक्षा के दायरे में लाया जाए। वन नेशन-वन राशन कार्ड से प्रवासियों को राहत मंत्री ने कहा कि वन नेशन–वन राशन कार्ड योजना प्रदेश और देश दोनों के लिए बड़ी उपलब्धि साबित हुई है। पहले मध्यप्रदेश के मजदूर जब बाहर काम करने जाते थे, तो उन्हें वहां राशन नहीं मिलता था और दूसरे राज्यों से आने वाले श्रमिक यहां राशन से वंचित रहते थे। अब स्थिति बदल गई है। मंत्री के अनुसार, हर महीने करीब 39 हजार परिवार दूसरे राज्यों से आकर मध्यप्रदेश में राशन ले रहे हैं, जबकि लगभग 5 हजार परिवार मध्यप्रदेश के होकर अन्य राज्यों में रहकर नि:शुल्क राशन प्राप्त कर रहे हैं। लाड़ली बहना योजना में गैस अनुदान मंत्री ने बताया कि लाड़ली बहना और उज्ज्वला योजना के तहत बीते दो सालों में 6 करोड़ 70 लाख गैस सिलेंडर रिफिल कराए गए हैं। इसके लिए 911 करोड़ रुपए का अनुदान राज्य सरकार ने दिया है। सरकार का वादा है कि लाड़ली बहनों को 450 रुपए में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा और शेष राशि सरकार अनुदान के रूप में वहन कर रही है। शहरी क्षेत्रों में पाइपलाइन गैस योजना प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में घर-घर पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंचाने का काम किया जा रहा है। मंत्री ने स्वीकार किया … Read more

ग्रीन कैंपस की ओर कदम: बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में IIT मॉडल पर शुरू हुए ई-रिक्शे

भोपाल  बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) परिसर को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। ग्रीन कैंपस अभियान के तहत विश्वविद्यालय को 5 ई-रिक्शे मिले हैं, जिनसे अब कैंपस के भीतर आवाजाही आसान, सस्ती और प्रदूषण मुक्त होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य बीयू परिसर को आईआईटी की तर्ज पर विकसित करना है, जहां हरित परिवहन को प्राथमिकता दी जाए। अब तक छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को परिसर के भीतर लंबी दूरी तय करने के लिए निजी वाहनों या ऑटो पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे न सिर्फ ईंधन की खपत बढ़ती थी, बल्कि प्रदूषण भी। ई-रिक्शा संचालन शुरू होने से कार्बन उत्सर्जन घटेगा और कैंपस में सुरक्षित व सुविधाजनक परिवहन विकल्प उपलब्ध होगा। एसबीआई का सहयोग, सीएसआर से मिली सौगात कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने बीयू को 5 ई-रिक्शे उपलब्ध कराए।  एसबीआई के महाप्रबंधक कुंदन ज्योति ने कुलगुरु प्रोफेसर एस.के. जैन को ई-रिक्शों की चाबियां सौंपीं। इस मौके पर कुल सचिव डॉ. अनिल शर्मा, डीजीएम साई कृष्णश्रीधर, फाइनेंस कंट्रोलर सगीरा सिद्दीकी और एसबीआई शाखा प्रबंधक पूजा गोयल भी मौजूद रहीं। साइकिल संस्कृति को भी मिलेगा बढ़ावा यह भी घोषणा की गई कि परिसर को और हरित बनाने के लिए विश्वविद्यालय को 15 साइकिलें दी जाएंगी। कुलगुरु प्रोफेसर एस.के. जैन ने बताया कि आने वाले समय में अलग–अलग विभागों में साइकिल उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि छात्र और कर्मचारी छोटी दूरी के लिए साइकिल का उपयोग कर सकें। ग्रीन कैंपस की ओर मजबूत कदम ई-रिक्शा और साइकिल के जरिए बीयू प्रशासन न केवल परिवहन व्यवस्था सुधार रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को भी बढ़ावा दे रहा है। यह पहल विश्वविद्यालय को आईआईटी जैसे आधुनिक, स्वच्छ और हरित शैक्षणिक परिसरों की कतार में खड़ा करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।