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नकल पर नकेल: जीवाजी विश्वविद्यालय का बड़ा फैसला, प्रैक्टिकल परीक्षा की होगी अनिवार्य वीडियोग्राफी

ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में प्रायोगिक परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से अनियमितताओं और फर्जीवाड़े की शिकायतें सामने आ रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जीवाजी विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक अहम निर्णय लिया है। अब विश्वविद्यालय से संबद्ध अंचल के सभी महाविद्यालयों में प्रायोगिक परीक्षाएं सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में आयोजित की जाएंगी। नए निर्देशों के तहत प्रायोगिक परीक्षाओं के दौरान छात्रों की पूरी परीक्षा प्रक्रिया कैमरे में रिकॉर्ड की जाएगी। इतना ही नहीं, परीक्षकों की उपस्थिति, प्रश्न पूछने की प्रक्रिया और मूल्यांकन से जुड़ी प्रत्येक गतिविधि भी रिकॉर्डिंग के दायरे में रहेगी। विश्वविद्यालय अधिकारियों का कहना है कि इससे परीक्षा के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े और मनमानी पर प्रभावी रोक लग सकेगी।   उडनदस्ता भी करेगा वीडियोग्राफी परीक्षा अवधि में निरीक्षण के लिए जाने वाले उड़नदस्तों को भी अपनी पूरी कार्रवाई आवश्यकतानुसार कैमरे में रिकॉर्ड करनी होगी। उड़नदस्ता जब किसी परीक्षा केंद्र का निरीक्षण करेगा, उस दौरान की गई जांच, बातचीत और व्यवस्थाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निरीक्षण प्रक्रिया भी निष्पक्ष और पारदर्शी रहे। रिकार्डिंग नहीं तो अंक नहीं महत्वपूर्ण बात यह है कि अब छात्रों को दिए जाने वाले प्रायोगिक अंकों को भी सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग के आधार पर ही मान्यता दी जाएगी। यदि किसी परीक्षा या मूल्यांकन को लेकर विवाद उत्पन्न होता है, तो रिकॉर्डिंग को प्रमाण के रूप में उपयोग किया जाएगा। वहीं अगर किसी कालेज से वीडियो प्राप्त नहीं होती है तो उस कालेज के छात्रों के अंक अपड़ेट नहीं किए जाएंगे। जीवाजी विश्वविद्यालय प्रशासन इस व्यवस्था को अपने अधीनस्थ अंचल के 350 से अधिक शासकीय और अशासकीय महाविद्यालयों में लागू कर रहा है। कथन: ‘प्रायोगिक परीक्षाओं को लेकर कई बार गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं ऐसे में छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए वीडियो रिकार्डिंग अनिवार्य की जा रही है।’ -राजीव मिश्रा, कुलसचिव, जेयू

मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार कोई बिजली यूनिट लगातार 450 दिन से कर रही उत्पादन

भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) के अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई (ATPS) की 210 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 5 ने बड़ा कमाल दिखाते हुए लगातार 450 दिन बिजली उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया। चचाई की यूनिट नंबर 5 प्रदेश के इतिहास में ऐसी प्रथम विद्युत उत्पादन यूनिट है जो लगातार 450 दिनों से संचालित है। यह यूनिट 1 अक्टूबर 2024 से निरंतर रूप से विद्युत उत्पादन कर रही है। यूनिट ने गत माह अक्टूबर की 4 तारीख को लगातार 365 दिन (एक वर्ष) तक निर्बाध विद्युत उत्पादन करने का तमगा हासिल किया था। यूनिट 5 के निर्बाध संचालन से प्रदेश के विद्युत ग्रिड को स्थिरता मिली और घरेलू व औद्योगिक उपभोक्ताओं को सुचारु विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हुई। इस उपलब्धि से न केवल म.प्र. पावर जनरेशन कंपनी की साख मजबूत हुई बल्कि यह प्रदेश की अन्य ताप विद्युत इकाइयों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बनी है। ऊर्जा मंत्री ने ऐतिहासिक सफलता पर दी बधाई अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की यूनिट नंबर 5 की इस सफलता व उपलब्ध‍ि पर ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई व MPPGCL के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह हर्ष ने व्यक्त करते हुए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्ध‍ि अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई के यूनिट नंबर के ऑपरेशन व मेंटेनेंस अभियंताओं व कार्मिकों की लगन, मेहनत व समर्पण का सबसे बड़ा उदाहरण है। उच्च स्तर की दक्षता, विश्वसनीयता और तकनीकी उत्कृष्टता दर्शाते आंकड़े निरंतर संचालन की इस असाधारण अवधि के दौरान यूनिट नंबर 5 ने सराहनीय प्रदर्शन करते हुए 98.48% का प्लांट अवेलेबिलिटी फैक्टर (PAF), 94.91% का प्लांट लोड फैक्टर (PLF) प्राप्त किया है और 9.29% की सहायक विद्युत खपत (APC) बनाए रखी। ये परिचालन सूचकांक स्पष्ट रूप से इस अवधि के दौरान संयंत्र टीम द्वारा उच्च स्तर की दक्षता, विश्वसनीयता और तकनीकी उत्कृष्टता को बनाये रखा गया। चचाई के अभियंताओं व कार्मिकों ने दिखाया कमाल पावर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि सामूहिक प्रयास, अनुशासित कार्यशैली व उच्च तकनीकी दक्षता से अमरकंटक ताप विद्युत गृह की यूनिट नंबर 5 जैसे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। चुनौतीपूर्ण लक्ष्य लगातार एक वर्ष तक बिना रुकावट संचालन किसी भी ताप विद्युत इकाई के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसके लिए बॉयलर, टरबाइन, जनरेटर एवं सहायक प्रणालियों का सटीक रखरखाव, निरंतर निगरानी व तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान जरूरी होता है। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) की समर्पित टीम के निरंतर परिश्रम व तकनीकी विशेषज्ञता का परिणाम है।  

मध्यप्रदेश बना फिल्मियों का पसंदीदा डेस्टिनेशन, तीन साल में 200 से अधिक साउथ फिल्में शूट

 भोपाल  बदलते दौर में सिनेमा में कई बदलाव आए हैं। न केवल फिल्मों की समय अवधि कम हुई है, बल्कि बड़ी स्क्रीन से निकलकर सिनेमा ओटीटी (OTT) के रूप में दर्शकों के पास पहुंच गया है। फिल्मों की करिश्माई दुनिया के बजाय दर्शकों ने असल जिंदगी को चुना और पसंद किया। इन सबके बीच सिनेमा फिर भी एक चीज तलाश करता रहा, वह है वास्तविक सेट। फिल्म निर्माता-निर्देशकों की यह तलाश खत्म हुई मध्य प्रदेश में। यहां के नदी, पहाड़, जंगल, ऐतिहासिक स्थल और खासतौर पर सिनेमा फ्रेंडली लोग, सिनेमा को मध्य प्रदेश खींच लाए। अब छोटे कस्बों में भी फिल्मों की हो रही शूटिंग कुछ दशकों पहले जो फिल्में मध्य प्रदेश के बड़े शहरों जैसे भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर में शूट हुआ करती थीं, वो अब छोटे कस्बों जैसे महेश्वर, चंदेरी, ओरछा से होती हुई सीहोर जिले के महोदिया, बमुलिया और धमनखेड़ा, छिंदवाड़ा जिले के चिमटीपुर जैसे गांवों तक पहुंच गई हैं। नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर मप्र के इन गंतव्यों ने दक्षिण भारत की फिल्मों को सबसे ज्यादा आकर्षित किया है। इससे शूटिंग के दिन भी बढ़े हैं और सिनेमा पूरे प्रदेश में फैल गया है। तीन सालों में दो सौ से अधिक छोटे-बड़े प्रोजेक्ट शूट हुए शूटिंग हब बन चुके मध्य प्रदेश में पिछले तीन सालों (वर्ष 2023 से 2025) में दो सौ से अधिक छोटे-बड़े प्रोजेक्ट शूट हुए हैं, जिनमें 20 से भी ज्यादा साउथ की बड़े बजट की फिल्में हैं। राज्य ने अपनी विविध भौगोलिक स्थिति, ऐतिहासिक विरासत और फिल्म अनुकूल प्रशासनिक नीतियों के कारण दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग (तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम) को अपनी ओर आकर्षित किया है। सरकार की फिल्म पर्यटन नीति 2020 ने काम आसान किया मप्र सरकार की फिल्म पर्यटन नीति 2020 ने निर्माताओं का काम आसान किया। फरवरी 2025 में अनुमोदित नई फिल्म पर्यटन संवर्धन नीति ने वित्तीय प्रोत्साहनों की सीमा को बढ़ाकर दस करोड़ रुपये तक कर दिया है। इस नीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें दक्षिण भारतीय भाषाओं की फिल्मों के लिए दस प्रतिशत अतिरिक्त वित्तीय लाभ प्रस्तावित किया गया है। फिल्म क्रू के ठहरने पर 40 प्रतिशत की छूट वहीं सिगंल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को लोक सेवा गारंटी अधिनियम में शामिल किया है। यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि निर्माताओं को 15 कार्य दिवस के भीतर सभी आवश्यक अनमुतियां प्राप्त हो जाएं। इसके अतिरिक्त मप्र पर्यटन के होटल में फिल्म क्रू के ठहरने पर 40 प्रतिशत की सीधी छूट प्रदान की जाती है। यह प्रविधान दक्षिण भारतीय फिल्मों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि उनकी निर्माण इकाईयां बहुत बड़ी होती हैं, जिनमें तीन सौ से अधिक सदस्य शामिल होते हैं। पिछले तीन सालों में शूट हुए साउथ के प्रमुख प्रोजक्ट     पेन्नियन सेल्वन (1 और 2)     इंडियन- 2     तमिलरावणन     कन्नप्पा     अखंडा     नरकासुर     कल्लू कंपाउंडर     भार्गवी     गंन्स एंड गैंग     माई हीरो इन फिल्मों की शूटिंग जारी     भैरवी     टारगेट     ललिता     आणु बुलेट रा     मध्य प्रदेश एक प्रो-एक्टिव स्टेट है फिल्म के लिए। यहां आने वाले फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग खुद यह मानते हैं कि हम जो बोलते हैं, वह करके दिखाते भी हैं। मप्र सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सब्सिडी न केवल फिल्म की लागत कम करती है, बल्कि निर्माताओं को राज्य के अनछुए स्थानों पर शूटिंग करने के लिए प्रोत्साहित भी करती है। इससे राज्य के पर्यटन स्थलों को भी बढ़ावा मिल रहा है।     – डॉ. अभय अरविंद बेडेकर, अपर प्रबंध संचालक, मप्र पर्यटन बोर्ड।  

Bakri Palan Yojana: MP सरकार ने पेश की योजना, बकरी पालन से मिलेगी अच्छी आमदनी

भोपाल  बकरी पालन योजना: मध्य प्रदेश के गांवों में खेती के साथ-साथ पशुपालन हमेशा से कमाई का मजबूत जरिया रहा है. इनमें भी बकरी पालन सबसे आसान, कम खर्चीला और जल्दी मुनाफा देने वाला काम माना जाता है. यही वजह है कि आज प्रदेश के हजारों परिवार बकरी पालन से अच्छी आमदनी कर रहे हैं. अब राज्य सरकार की बकरी पालन योजना ने इस काम को और आसान बना दिया है. क्या है MP सरकार की बकरी पालन योजना? मध्य प्रदेश सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की इस योजना का मकसद छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है. योजना के तहत 10 मादा + 1 नर बकरी (10+1 यूनिट) लगाने पर सरकार वित्तीय सहायता देती है. इस यूनिट की कुल लागत करीब ₹77,000 से ₹77,456 तय की गई है. सामान्य वर्ग को 40% तक सब्सिडी SC/ST वर्ग को 60% तक सब्सिडी, बाकी राशि बैंक लोन से पूरी की जाती है. दो तरह की योजनाएं, किसानों को सीधा फायदा पशुपालन विभाग के अतिरिक्त उपसंचालक डॉ. जितेंद्र कुमार गुप्ता के मुताबिक सरकार दो अलग-अलग योजनाएं चला रही है. नर बकरी आपूर्ति योजना इस योजना का उद्देश्य प्रदेश में बकरी की नस्ल सुधार करना है. इसके तहत जमुनापारी, बारबरी और सिरोही जैसी उन्नत नस्लों के नर बकरे दिए जाते हैं, जिससे दूध और मांस उत्पादन बढ़ता है. बकरी इकाई स्थापना योजना इस योजना में 10 मादा और 1 नर बकरी की यूनिट पर सब्सिडी और बैंक लोन दोनों की सुविधा मिलती है. यह योजना खास तौर पर दूध और मांस उत्पादन बढ़ाने के लिए है. आवेदन कैसे करें? योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक व्यक्ति अपने नजदीकी पशुपालन एवं डेयरी विभाग या पशु चिकित्सा संस्था से संपर्क कर सकते हैं. आवेदन के बाद बैंक से लोन स्वीकृत होता है और सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर की जाती है. ग्राम सभा और जनपद पंचायत की स्वीकृति जरूरी होती है. कई मामलों में विभाग की ओर से ट्रेनिंग भी दी जाती है. क्यों फायदेमंद है बकरी पालन? विशेषज्ञों का मानना है कि बकरी पालन कम पूंजी में शुरू होने वाला ऐसा व्यवसाय है, जो नियमित आमदनी देता है. सरकार की इस योजना से गांव के किसान और युवा अब नौकरी के बजाय स्वरोजगार की राह पर तेजी से बढ़ रहे हैं.

इमिग्रेशन और कस्टम की सुविधा के बावजूद Raja Bhoj Airport पर इंटरनेशनल उड़ानें नहीं, घरेलू उड़ानें सीमित

भोपाल  राजा भोज एयरपोर्ट (Raja Bhoj Airport) पर इमिग्रेशन जांच पोस्ट की स्थापना के एक साल बाद भी किसी भी रूट पर इंटरनेशनल उड़ान (International flights) शुरू नहीं हो सकी है। हमारे एयरपोर्ट को कस्टम एयरपोर्ट का दर्जा भी मिल चुका है पर वर्ष 2025 में किसी भी एयरलाइंस कंपनी ने विदेशी रूट पर स्लॉट लेने में रुचि नहीं दिखाई है। एयरपोर्ट अथॉरिटी (Airport Authority) को उम्मीद है कि वर्ष 2026 में कम से कम एक इंटरनेशनल उड़ान जरूर शुरू होगी। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने करीब एक साल पहले ग्रीन एवं रेड चैनल तथा इमिग्रेशन ई-गेट की स्थापना की थी। इसका उपयोग इंटरनेशनल रूट से आने वाले यात्री कर सकते हैं। अभी तक इसका उपयोग हज यात्रा के समय हुआ है। भोपाल में नॉन शेड्यूल इंटरनेशनल उड़ानें आने लगी हैं पिछले कुछ समय से भोपाल में नॉन शेड्यूल इंटरनेशनल उड़ानें आने लगी हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के समय भी विदेशी उड़ानें आई थीं, तब इसका उपयोग हुआ, लेकिन नियमित उड़ान नहीं होने से इसका पूरा उपयोग नहीं हो रहा है। हाल ही में कस्टम एयरपोर्ट का दर्जा भी मिला है। इससे इंटरनेशनल उड़ानें शुरू होने की बाधाएं दूर हो चुकी हैं। सरकार ने इमिग्रेशन एयरपोर्ट बनाने संबंधी गजट नोटिफिकेशन पहले ही जारी कर दिया था। अब यहां अमला तैनात होना बाकी है। फिलहाल कस्टम अमला उसी समय आता है जब यहां कोई विदेशी उड़ान आती है। इंटरनेशनल विंग तैयार, उपयोग सीमित एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इंटरनेशनल विंग भी विकसित कर लिया गया है। आगमन क्षेत्र में पांच एवं प्रस्थान क्षेत्र में चार काउंटर बनाए गए हैं। इंटरनेशनल मापदंडों के अनुरूप यहां ग्रीन एवं रेड चैनल बनाए गए हैं। कस्टम काउंटर भी बनाए जा चुके हैं। इंटरनेशनल स्तर के एयरपोर्ट के लिए सुरक्षा में तैनात जवानों की संख्या बढ़ाना जरूरी है। अथॉरिटी इसके लिए जवानों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। इस विंग का उपयोग फिलहाल नॉन शेड्यूल इंटरनेशनल उड़ान के आवागमन के दौरान ही हो रहा है। तीन साल से दुबई उड़ान का इंतजार राजधानी में नया एकीकृत टर्मिनल बनने के बाद से इंटरनेशनल उड़ान की मांग की जा रही है। पिछले तीन साल से अथॉरिटी दुबई उड़ान शुरू करने के प्रयास कर कर रही है। इसके लिए जरूरी सुविधाएं जुटाई जा चुकी हैं। अब नए साल में उड़ान शुरू होने की उम्मीद की जा रही है। समिति की बैठकों में कई बार मुद्दा उठा हवाई अड्डा सलाहकार समिति की बैठक में भी इंटरनेशनल उड़ानें शुरू करने पर जोर दिया गया। समिति की बैठकों में कई बार यह मुद्दा उठा। सांसद आलोक शर्मा ने नागरिक उड्डयन मंत्री से मुलाकात कर घरेलू उड़ानों के साथ कम से कम एक दुबई-शारजाह उड़ान शुरू करने का आग्रह किया था, लेकिन वर्ष 2025 में भोपाल के हवाई यात्रियों को निराशा ही हाथ लगी। घरेलू ट्रैफिक बढ़ा पर उड़ानें सीमित भोपाल से घरेलू मोर्चे पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यात्री औसत पांच हजार से अधिक हो चुका है पर इस मान से उड़ानें कम हैं। इंदौर की अपेक्षा भोपाल में कम उड़ानें होने के कारण गोवा, पुणे एवं बेंगलुरु जैसे शहरों के लिए वाया इंदौर जाते हैं। पिछले साल से एयरपोर्ट 24 घंटे खुलने लगा है पर लेटनाइट उड़ान केवल एक है। वर्तमान में भोपाल से दिल्ली, मुंबई के अलावा, हैदराबाद, बेंगलुरु, पुणे, गोवा, रायपुर एवं अहमदाबाद के लिए सीधी उड़ान है। चैन्नई, सूरत, शिर्डी, जयपुर, देहरादून जैसे शहरों तक सीधी उड़ान की मांग लंबे से हो रही है पर उड़ानें शुरू नहीं हो पा रही हैं।     वर्ष 2026 में कम से एक इंटरनेशनल उड़ान शुरू हो सकती है। पिछले तीन साल में घरेलू उड़ानों की संख्या बढ़ी है। यात्री संख्या का लगातार नया रिकॉर्ड बन रहा है। नए साल में नए एयरलाइंस ऑपरेटर भी दस्तक देंगे। हमारे प्रयास जारी हैं।     – रामजी अवस्थी, एयरपोर्ट डॉयरेक्टर  

500 रुपए में घर पर बार खोलने का मौका, भोपाल में नए साल के लिए जारी होम बार लाइसेंस

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इस बार नए साल का स्वागत बेहद खास और 'नशे' की कानूनी अड़चनों से मुक्त होने जा रहा है। आबकारी विभाग ने शौकीनों के लिए एक शानदार सौगात पेश की है। इसकी मदद से मात्र 500 रुपये की मामूली फीस चुकाकर अपने घर को ही एक दिन के लिए वैध 'बार' में तब्दील कर सकते हैं। न्यू ईयर से पहले आबकारी की यह गाइडलाइन आई है। गाइडलाइन के बाद 31 दिसंबर की रात दोस्तों के साथ जाम छलकाने की प्लानिंग कर रहे लोगों के लिए यह राहत भरी खबर है। अब घर की छत या ड्राइंग रूम में होने वाली पार्टी पर पुलिस या आबकारी विभाग का छापा पड़ने का डर खत्म हो जाएगा। सहायक आबकारी आयुक्त वीरेंद्र सिंह धाकड़ द्वारा जारी यह नई गाइडलाइन न केवल निजी पार्टियों को कानूनी कवच दे रही है, बल्कि बड़े आयोजनों के लिए भी इसमें स्पष्ट रास्ते खोले गए हैं। इतनी आसान है लाइसेंस प्रक्रिया विभाग ने लाइसेंस लेने की पूरी प्रक्रिया को इतना आधुनिक और सरल बना दिया है। इससे आपको सरकारी दफ्तरों की धूल फांकने की कतई जरूरत नहीं पड़ेगी। बस अपने मोबाइल से 'Eaabkari' पोर्टल या ऐप पर जाइए। ओटीपी के जरिए लॉग-इन कीजिए और पलक झपकते ही आपका 'वन-डे लाइसेंस' आपके हाथ में होगा। इतनी कीमत पर मिलेगा लाइसेंस दरअसल, घर की निजी महफिल के लिए महज 500 रुपये का शुल्क है। वहीं, मैरिज गार्डन या सामुदायिक भवनों में होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए यह फीस 5 हजार रुपये है। इसके अलावा लॉजिंग सुविधा वाले होटलों के लिए 10 हजार रुपये निर्धारित की गई है। पार्टी के लिए अलग है नियम हालांकि, अगर आप इस जश्न को बड़े व्यावसायिक स्तर पर ले जाने की सोच रहे हैं, तो नियमों का दायरा थोड़ा बढ़ जाता है। यदि पार्टी में एंट्री टिकट के जरिए दी जा रही है, तो 500 लोगों की भीड़ तक आपको 25 हजार रुपये देने होंगे। वहीं, 5 हजार से ज्यादा की भीड़ होने पर 2 लाख रुपये तक का लाइसेंस शुल्क चुकाना होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिस स्थान के लिए अनुमति ली गई है, शराब का सेवन केवल वहीं तक सीमित रहना चाहिए। सामान्य तौर पर परिवहन के लिए बोतलों की संख्या सीमित है, लेकिन इस ऑनलाइन आवेदन में आप अपनी डिमांड के अनुसार स्टॉक की जानकारी पहले ही दे सकते हैं। भोपाल में करीब 350 से अधिक होटल और ढाबा संचालकों के साथ-साथ हजारों आम नागरिकों के लिए यह व्यवस्था नए साल के जश्न को और भी बेखौफ और यादगार बनाने वाली है।  

वीर बाल दिवस आज: प्रदेशभर के स्कूलों में आयोजित होंगे विशेष कार्यक्रम

प्रदेश के स्कूलों में आज 26 दिसम्बर को मनाया जायेगा वीर बाल दिवस स्कूलों में होंगी चित्रकला एवं लेखन प्रतियोगिताएँ मंत्री सिंह ने की प्रतियोगिता में बच्चों की अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रम का होगा सजीव प्रसारण भोपाल  प्रदेश के स्कूलों में 26 दिसम्बर को वीर बाल दिवस मनाया जायेगा। इसके लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किये हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने स्कूल के बच्चों से इस दिन होने वाली गतिविधियों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह द्वारा दिये गये सर्वोच्च बलिदान के संबंध में प्रतिवर्ष 26 दिसम्बर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है। यह दिवस भारत के भविष्य की नींव माने जाने वाले बच्चों को सम्मानित करने के लिये समर्पित एक राष्ट्रीय उत्सव है। इस पहल का उद्देश्य युवा प्रतिभाओं का पोषण करना, रचनात्मकता को बढ़ावा देना और उन्हें विकसित भारत के सपने में योगदान देने के लिये प्रेरित करना है। राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम का होगा सजीव प्रसारण वीर बाल दिवस का राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम 26 दिसम्बर, 2025 को दोपहर 12:30 बजे भारत मण्डपम नई दिल्ली में किया जा रहा है। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का सजीव प्रसारण (लाइव वेबकास्ट) http://pmindiawebcast.nic.in/ पर किया जायेगा। जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं कि इस लिंक की सूचना सभी सरकारी और प्रायवेट स्कूलों में दी जाये, जिससे स्कूल के विद्यार्थी इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देख सकें। जिला शिक्षा अधिकारियों को दिये गये निर्देश में कहा गया है कि इससे जुड़ी जानकारी dpividhya admin और ramsa admin Whats App Group पर भी साझा की गई है। वीर बाल दिवस पर होने वाली प्रतियोगिताएँ स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूलों में आयु समूह के अनुसार विभिन्न प्रतियोगिताएँ आयोजित करने का निर्णय लिया है। आयु वर्ग 3-6 वर्ष के लिये चित्रकारी, पेंटिंग, खेल गतिविधियाँ एवं कहानी सुनाना और आयु वर्ग 6-10 वर्ष के लिये चित्रकला, निबंध लेखन एवं कहानी सुनाना प्रमुख हैं। इसके लिये जो विषय तय किये गये हैं, उनमें मेरे सपनों का भारत, वह भारत जो मैं देखना चाहता हूँ, दूसरों की मदद करना मेरी महाशक्ति है, मेरी संस्कृति के रंग और मेरे आसपास के नायक, जिनमें शिक्षक, देखभालकर्ता और मित्र शामिल हैं। स्कूलों में आयु वर्ग 11-18 वर्ष के लिये निबंध, कविताएँ, वाद-विवाद और डिजिटल प्रतियोगिता शामिल हैं। इनके लिये जो विषय तय किये गये हैं, उनमें 'राष्ट्र निर्माण में बच्चों की भूमिका', 'विकसित भारत के लिये मेरा दृष्टिकोण', 'विकसित भारत बनाने में बच्चों की भूमिका', 'विकासशील भारत को आकार देने में बच्चों की भूमिका', 'साहस और करुणा, एक नायक क्या बनाता है', 'भारत के इतिहास में वीरता की कहानियाँ', 'डिजिटल इण्डिया में युवाओं के लिये अवसर', 'स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत', 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ', 'प्रत्येक बालिका को सशक्त बनाना' शामिल हैं। इसके अलावा आत्मनिर्भर भारत-नवाचार में युवाओं की अग्रणी भूमिका, 'वोकल फॉर लोकल', 'भारत की पारम्परिक शिल्प-कलाओं का उत्सव मनाना', 'स्किल इण्डिया मिशन' और 'अमृतकाल में कल के भारत निर्माण में युवाओं की भूमिका' को शामिल किया गया है। शिक्षकों को इन प्रतियोगिताओं मे  

MP सरकार का बड़ा कदम: 15 लाख कर्मचारियों को साल 2026 से आयुष्मान योजना जैसी स्वास्थ्य सुविधा

 भोपाल  प्रदेश सरकार राज्य के 15 लाख से अधिक कर्मचारियों को नए साल 2026 में आयुष्मान जैसी स्वास्थ्य सुविधा योजना देने की तैयारी कर रही है।प्रस्ताव बना लिया गया है। इसमें कर्मचारियों को हरियाणा और राजस्थान की तरह कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। कुछ राशि उनके वेतन से अंशदान के तौर पर काटी जाएगी, शेष राशि सरकार जमा कराएगी। कर्मचारी संगठनों के सुझाव पर बनाई योजना मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के नाम से प्रस्तावित यह योजना राज्य सरकार ने कर्मचारी संगठनों के सुझाव पर बनाई है। इसके लिए भी आयुष्मान भारत की तरह प्रदेश और प्रदेश के बाहर के निजी अस्पतालों से अनुबंध किया जाएगा। कर्मचारी संगठन लंबे समय से कैशलेस उपचार सुविधा की मांग कर रहे हैं, जो जल्द ही उन्हें मिल सकती है। 10 लाख रुपये तक फ्री इलाज का प्रस्ताव प्रस्तावित योजना में प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सेवानिवृत्त कर्मियों के परिवारों को सामान्य इलाज के लिए पांच लाख रुपये और गंभीर बीमारी होने पर दस लाख रुपये तक की निश्शुल्क चिकित्सा और ओपीडी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। वेतन और पेंशन से कितना देना होगा अंशदान इसमें कर्मचारियों के वेतन और पेंशन से 250 से 1000 रुपये तक मासिक अंशदान लिया जाएगा। शेष राशि सरकार मिलाएगी। बता दें कि सरकार ने फरवरी 2020 में प्रदेश के कर्मचारियों के लिए फ्री इलाज की घोषणा की थी। इसका आदेश भी जारी हुआ था, लेकिन योजना शुरू नहीं की जा सकी। उत्तराखंड सरकार इसी तरह की योजना संचालित कर रही है। इन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ स्थायी, अस्थायी, संविदा, शिक्षक संवर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, नगर सैनिक, कार्यभारित, राज्य की स्वशासी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, आशा एवं उषा कार्यकर्ता, आशा सुपरवाइजर और कोटवार और आउटसोर्स स्वास्थ्य सुविधा का लाभ ले पाएंगे। इन कर्मचारियों की संख्या 15 लाख से अधिक है। अभी खुद कराते हैं इलाज प्रदेश में अभी कर्मचारी और पेंशनर्स इलाज का सारा खर्च खुद उठाते हैं और बाद में विभाग के माध्यम से खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन करते हैं। यह प्रस्ताव कैबिनेट तक जाता है और सरकार बाद में केंद्रीय स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) की दरों के अनुसार भुगतान करती है, लेकिन कई बार गंभीर बीमारी पर अधिक व्यय होने के कारण पूरा खर्च कवर नहीं होता, जिसके चलते कर्मचारियों को स्वयं ही इलाज का खर्च वहन करना होता है।     हम तो लंबे समय से कर्मचारियों के स्वास्थ्य बीमा की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई। कई पेंशनर ऐसे हैं जो अपना जीवन यापन भी ठीक तरह से नहीं कर पाते, इलाज कराना तो बहुत दूर की बात है। सरकार को शीघ्र निर्णय लेकर इसे लागू करना होगा। सभी को स्वास्थ्य सुविधा मिलनी चाहिए।     -सुधीर नायक, मंत्रालय सेवा अधिकारी, कर्मचारी संघ  

अटल बिहारी वाजपेयी का सपना साकार: बुंदेलखंड में शुरू हुआ देश का पहला केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट

 छतरपुर  पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश की नदियों को जोड़ने का जो सपना देखा था, वह बुंदेलखंड की धरती पर देश की पहली नदी जोड़ो केन-बेतवा लिंक परियोजना के रूप में साकार हो रहा है। 44 हजार 605 करोड़ रुपये की इस परियोजना के पहले चरण में छतरपुर जिले में करीब 3700 करोड़ रुपये की लागत से ढोड़न बांध बनाया जा रहा है। एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अटलजी की जयंती पर खजुराहो में इस परियोजना का शिलान्यास किया था। हैदराबाद की नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। प्रस्तावित बांध 77 फीट ऊंचा और 2031 मीटर लंबा होगा। इसके बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 14 जिलों तक नहरों का जाल बिछाया जाएगा। बुंदेलखंड के लिए मील का पत्थर मानी जा रही इस परियोजना को पूरा करने के लिए आठ साल का समय तय किया गया है। छतरपुर और पन्ना जिलों के 14 गांव डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। भू-अर्जन का काम लगभग पूरा हो चुका है। अभी यह है स्थिति पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र से ढोड़न, पलकुआं सहित भरकुआं, कुपी, मैनारी, गहदरा, कटहरी बिलहटा, मझौली आदि गांवों के कई परिवार सरकार से मुआवजा मिलने के बाद बमीठा और छतरपुर में बस गए हैं। पहाड़ी क्षेत्र में अब निर्माण कार्य तेज हो गया है। बदहाल रास्तों पर सड़कें बना दी गई हैं और बांध का बेस तैयार किया जा रहा है। पन्ना-दमोह में रकबा बढ़ाने की रिपोर्ट हो रही तैयार परियोजना के तहत पन्ना और दमोह जिलों में सिंचाई रकबा बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए मैपिंग और डीपीआर तैयार की जा रही है। अभी करीब 90 हजार हेक्टेयर सिंचाई रकबा तय था, जिसे बढ़ाकर ढाई लाख हेक्टेयर करने की तैयारी है। केन और बेतवा नदियों को जोड़ने के लिए 218 किलोमीटर लंबी कैनाल बनाई जाएगी। इससे छोटी नहरों को जोड़ा जाएगा। माइनर नहरें पाइपलाइन के रूप में जमीन के अंदर बनाई जाएंगी। बांध में 2853 अरब लीटर जल का भंडारण किया जाएगा। मध्य प्रदेश की 44 लाख और उत्तर प्रदेश की 21 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा मिलेगी। 12 लाख 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर भूमि का मुआवजा दिया गया है। करीब 4800 परिवार डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। काम लगभग पूरा पार्थ जैसवाल, कलेक्टर, छतरपुर का कहना है कि "भू-अर्जन का काम लगभग पूरा हो गया है। ढोड़न बांध का काम तेजी से चल रहा है। जल्द ही परिवारों का विस्थापन कराया जाएगा। यह परियोजना पूरे बुंदेलखंड के लिए मील का पत्थर साबित होगी।"

बसामन मामा प्राकृतिक खेती प्रकल्प विंध्य के किसानों के लिए बनेगा मार्गदर्शक

प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 9 से बढ़ाकर किया जायेगा 20 प्रतिशत तक केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ की जा रही हैं वृहद स्तर पर प्रयोगशालाएं केंद्रीय मंत्री श्री शाह और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीवा में कृषक सम्मेलन को किया संबोधित भोपाल  केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के सार्वजनिक जीवन में शुचिता और पारदर्शिता का स्थान सर्वोपरि रहा है। उन्होंने कहा कि स्व. वाजपेयी ने सुशासन की स्थापना के लिये अपने कार्यों से नये आयाम स्थापित किये। उन्होंने जो कहा उसे धरातल साकार करके दिखाया। केन्द्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि भारतीय राजनीति में स्व. वाजपेयी का स्थान और योगदान दोनों ही अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी को रीवा से सदैव विशेष लगाव रहा। केन्द्रीय मंत्री श्री शाह रीवा में बसामन मामा गौ वन्य विहार अभयारण्य में प्राकृतिक खेती के प्रकल्प का शुभारंभ कर कृषक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बसामन मामा प्राकृतिक खेती प्रकल्प विंध्य के किसानों के लिये मार्गदर्शक बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संबोधित करते हुये कहा कि केन्द्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री श्री शाह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश के किसानों की आय को बढ़ाने के लिये राज्य सरकार द्वारा समन्वित तरीके से सतत समग्र प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दूध के उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक किया जायेगा। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री श्री शाह और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हितग्राहियों को हितलाभ एवं संकल्प पत्रों को वितरण किया। केंद्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि मध्यप्रदेश का रीवा क्षेत्र धीरे-धीरे विकसित क्षेत्र बन रहा है। आज एशिया का सबसे बड़ा सोलर प्लांट रीवा में है। रीवा से जबलपुर तक सड़कों के जाल सहित इंदौर और दिल्ली के लिये वायु सेवा का भी विस्तार हुआ है। अब रीवा एयरपोर्ट से इंदौर और दिल्ली के लिए 24 घंटे हवाई सेवा उपलब्ध है। रीवा में बसावन मामा गौवंश वन्य विहार के रूप में अनुकरणीय प्रकल्प तैयार किया गया है। यहां गोबर से बने खाद से प्राकृतिक खेती की जा रही है। एक एकड़ में सवा लाख रुपए की आय देने का यह प्रयोग छोटे किसानों को बड़ा लाभ प्रदान करेगा। किसान इस मॉडल को अपनाएंगे तो उनकी आय बढ़ेगी। राज्य सरकार प्रगतिशील किसानों को इस परंपरागत मॉडल से अवगत कराने के लिये उनका भ्रमण कराये। उन्होंने कहा कि एक देशी गाय से 21 एकड़ रकबे में प्राकृतिक खेती होती है। किसान ही अन्नदाता है। अन्नदाता को प्राकृतिक खेती के लिये प्रेरित करने के साथ ही प्रोत्साहित करने के समग्र प्रयास हम सबको समन्वित तरीके से करना है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि अनाज के उत्पादन में रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग के कारण कई तरह की बीमारियां बढ़ रही हैं। इससे बचाव के लिये जरूरी है कि हम सभी प्राकृतिक के संवर्धन में अपना योगदान दें। केंद्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाने से उत्पादन कम नहीं होता है। मैंने स्वयं अपने खेतों में प्राकृतिक खेती को अपनाया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय के अंतर्गत वृहद स्तर पर प्राकृतिक खेती की उपज के प्रमाणीकरण का कार्य किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिये प्राकृतिक खेती के माध्यम से उत्पादित उपज के सर्टिफिकेशन, पैकेजिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था की है। आगामी समय में देश में 400 से अधिक प्रयोगशालाएं किसान को प्राकृतिक खेती से संबंधित प्रमाण-पत्र प्रदान करेंगी। इन सभी प्रयासों से प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की आय डेढ़ गुना तक बढ़ जाएगी। दुनियाभर में प्राकृतिक खेती का बड़ा बाजार है। आर्गेनिक अनाज खाने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। भूमि परीक्षण से सर्टिफिकेशन, उपज का परीक्षण, बेहतर पैकेजिंग और मार्केटिंग किसानों को उपज का बेहतर मूल्य दिलाएंगी। हम किसानों की आय को बढ़ाने के लिए समुचित प्रयास प्राथमिकता से कर रहे हैं। निदर्शन फॉर्म आने वाले समय में प्राकृतिक खेती के लिए किसानों का मार्गदर्शन करेंगे। केंद्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि प्रकृति की अनेक प्रकार से सेवा हो सकती है। हमें बसावन मामा की स्मृति में पीपल के वृक्ष रोपित करने का संकल्प लेना चाहिए। दु्निया से चले जाने के बाद भी यह पीपल वृक्ष लोगों को ऑक्सीजन देता रहेगा। पीपल का वृक्ष लगाना पुण्य कार्य है, जिसमें स्वयं भगवान विष्णु का वास होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषकों से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिये बढ़-चढ़कर सहभागिता करने का आहवान किया। उन्होंने बताया कि बसावन मामा गौवंश वन्य विहार के भ्रमण के दौरान केंद्रीय मंत्री श्री शाह के द्वारा 35 साल पहले गुजरात में जैविक खेती संवर्धन के लिये जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय मंत्री श्री शाह के द्वारा 35 साल पहले शुरू किये गये कार्य को राज्य सरकार आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं रखेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह के मार्गदर्शन में सहकारिता के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाई जा रही है। प्रदेश के किसानों की आय को बढ़ाने के लिये उन्हें दुग्ध उत्पादन के लिये भी प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिये डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना से किसानों को लाभांवित किया जा रहा है। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड से एमओयू किया गया है। इससे किसानों को सीधे लाभ मिलेगा। राज्य सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए नस्ल सुधार जैसे अनेक कार्य भी कर रही है। राज्य सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए नस्ल सुधार जैसे अनेक कार्य भी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में दूध खरीद का आंकड़ा निरंतर बढ़ रहा है। साल भऱ में प्रति दुग्ध संघ दूध खरीदी में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। राज्य सरकार ने प्रदेश स्तर पर कुल दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि गौमाताओं के संरक्षण के लिए प्रति गाय आहार अनुदान को 20 से बढ़ाकर 40 रुपए किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अटलजी … Read more