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उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पूर्व मंत्री मलैया का कुशल क्षेम जाना

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने बुधवार को पूर्व मंत्री श्री जयन्त मलैया के निवास पहुँचकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने श्री मलैया के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विभिन्न विषयों पर श्री मलैया से चर्चा भी की।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- सहकारी संस्थाएं किसानों को सशक्त बनाने के लिए सभी आवश्यक प्रयास करें

वर्ष 2026 को प्रदेश में कृषि एवं किसान वर्ष के रूप में मनाया जाएगा सहकारी समितियों का प्राथमिकता से किया जाए कंप्यूटराईजेशन पंचायत स्तर पर पैक्स स्थापित किए जाएं पैक्स के डिफॉल्टर किसानों को लाया जाएगा मुख्य धारा में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की सहकारिता विभाग की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को सशक्त बनाना और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाना सहकारी संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य है। आगामी वर्ष 2026 को प्रदेश में कृषि एवं किसान वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। अतः किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलवाने और फसल चक्र के अनुसार उन्हें सुगमता से सुविधाऐं उपलब्ध कराने के लिए सहकारिता विभाग कृषि विपणन सहकारी समितियां को मजबूत बनाने बनाने पर विशेष ध्यान दे। सहकारी समितियों का प्राथमिकता के आधार पर कंप्यूटराईजेशन किया जाए, ताकि किसानों को सुगमता और पारदर्शिता के साथ आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समिति के पदाधिकारियों के लिए प्रतिवर्ष संपत्ति का वार्षिक विवरण आवश्यक रूप से देने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंचायत स्तर पर पैक्स स्थापित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में सहकारिता विभाग की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग ने अपेक्स बैंक की 4 करोड़ 27 लाख 4 हजार 190 रुपए अंश पूंजी का लाभांश चेक भेंट किया। बैंक के प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता इस अवसर पर उपस्थित थे। बैठक में अल्पकालीन कृषि ऋण वितरण, खाद और बीज वितरण, कृषि उपज के समर्थन मूल्य पर उपार्जन, उचित मूल्य दुकानों के संचालन और सहकार से समृद्धि के अंतर्गत संचालित गतिविधियों के तहत पिछले 2 वर्ष में प्राप्त उपलब्धियों, नवाचारों का प्रस्तुतीकरण किया गया। बैठक में आगामी 3 वर्ष की कार्य योजना पर भी विचार विमर्श हुआ। विभाग की 2 वर्ष की उपलब्धियाँ     15 कमजोर जिला सहकारी बैंकों के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रत्येक जिला बैंक को 50-50 लाख रूपए की अंशपूंजी शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई।     मध्यप्रदेश एम-पैक्स के कम्प्यूटराईजेशन और ऑनलाईन ऑडिट में देश में सबसे आगे है।     कृषकों को उनके खातों के संबंध में जानकारी एस.एम.एस. से उपलब्ध कराई जा रही है।     पैक्स के सोसायटी मैनेजर के लिए कैडर व्यवस्था लागू।     राष्ट्रीयकृत बैंकों के मापदंड के अनुरूप सहकारी बैंकों में प्रबंधकों और बैंकिंग सहायकों की भर्ती तथा प्रशिक्षण की व्यवस्था।     पैक्स से बहुउद्देशीय गतिविधियों का संचालन आरंभ।     कुल 4460 कॉमन सर्विस सेंटर, 4518 प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केन्द्र, 63 जन औषधि केन्द्र, 59 जल कर वसूली केन्द्र, दो एग्री ड्रोन और 25 इफ्को आउटलेट की व्यवस्था।     अब तक पैक्स को 4060 तथा डेयरी समिति को एक माइक्रो एटीएम वितरित।     सहकारी कानूनों में जनसामान्य की सुविधा की दृष्टि से संशोधन किए गए हैं।     सहकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी से सहकारी समितियों को व्यवसाय के नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।     किसानों से पूसा बासमती धान क्रय करने के लिए किसानों का आर्थिक लाभ सुविधा सुनिश्चित करते हुए मैजिस्टिक प्रायवेट लिमिटेड से अनुबंध किया गया है।     पराली की समस्या के निराकरण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।     बीज संघ द्वारा बीज व्यवसाय को प्रोत्साहन देने के लिए एमपी चीता ब्रांड लांच किया गया है।     नवीन एम पैक्स, डेयरी सहकारी समिति और मत्स्य सहकारी समिति के तहत कुल 1,601 समितियों का गठन।     मध्यप्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में अभिनव पहल CPPP के तहत 19 एम.ओ.यू का निष्पादन।     कंपनियों से 10,000 से अधिक विस्थापित लोगों की 350 सहकारी समितियां गठित कराकर विस्थापितों को सुरक्षा गार्ड, माली, श्रमिक जैसे कार्यों के लिये रोजगार दिया गया। आगामी तीन वर्षों की कार्य योजना     पैक्स के डिफॉल्टर किसानों को मुख्य धारा में लाया जाएगा।     रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और नेशनल पैमेंट कार्पोरेशन ऑफ इंडिया से आवश्यक अनुमति प्राप्त कर ग्राहकों को क्यूआर कोड की सुविधा उपलब्ध कराना।     समस्त जिला बैंकों में इंटरनेट बैंकिंग (व्यू फैसिलिटी) की सुविधा।     सहकारी क्षेत्र में युवाओं और महिलाओं के कौशल विकास के लिए कौशल इको सिस्टम को विस्तार दिया जाएगा।     प्रमुख बिन्दु     किसानों को सशक्त बनाना और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाना सहकारी संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य।     वर्ष 2026 को प्रदेश में कृषि एवं किसान वर्ष के रूप में मनाया जाएगा।     किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलवाने और फसल चक्र के अनुसार उन्हें सुगमता से सुविधाऐं उपलब्ध कराने के लिए सहकारिता विभाग कृषि विपणन सहकारी समितियां को मजबूत बनाने बनाने पर विशेष ध्यान दे।     सहकारी समितियों का प्राथमिकता के आधार पर कंप्यूटराईजेशन किया जाए।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंचायत स्तर पर पैक्स स्थापित किए जाएं।     सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग ने अपेक्स बैंक की 4 करोड़ 27 लाख 4 हजार 190 रुपए अंश पूंजी का लाभांश चेक भेंट किया।  

बड़े तालाब पर चलेगी कश्मीर की शिकारा नाव: मुख्यमंत्री डॉ. यादव देंगे नई पर्यटन सुविधा की सौगात

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, झीलों की नगरी भोपाल के सौंदर्य में अभिवृद्धि करते हुए, गुरुवार 4 दिसम्बर को सुबह 9 बजे बड़े तालाब के बोट क्लब पर 20 नवीन 'शिकारा नाव' की सेवा का शुभारंभ करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में विधानसभा सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रहेंगी। प्रदेश में पर्यटन विकास के नए आयाम स्थापित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में पर्यटन सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। भोपाल के बड़े तालाब में कश्मीर की प्रसिद्ध डल झील की तर्ज पर शिकारे संचालित करने की यह अनूठी पहल की गई है। यह पहल न केवल प्रदेश के जल-पर्यटन को राष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान देगी, बल्कि पर्यटकों के लिए प्रकृति के सानिध्य में सुकून के कुछ पल बिताने का एक जरिया भी बनेगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में जल-पर्यटन (वॉटर टूरिज्म) को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुसार, प्रदेश में पहली बार इतने वृहद स्तर पर शिकारों का संचालन किया जा रहा है। विशेष रूप से पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, इन सभी 20 शिकारों का निर्माण प्रदूषण रहित आधुनिक तकनीक से किया गया है। इनका निर्माण 'फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीयूरिथेन' और उच्च गुणवत्ता वाली नॉन-रिएक्टिव सामग्री से हुआ है, जो जल के साथ किसी भी प्रकार की रासायनिक क्रिया नहीं करती। इससे बड़े तालाब की पारिस्थितिकी और जल की शुद्धता पूर्णतः सुरक्षित रहेगी। ये शिकारे अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था द्वारा निर्मित किए गए हैं, जिनके द्वारा निर्मित शिकारे पूर्व में केरल, बंगाल और असम में भी पर्यटकों द्वारा अत्यंत पसंद किए जा रहे हैं। भोपाल का बोट क्लब इन आकर्षक शिकारों के साथ पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार होगा। पर्यटक बर्ड वाचिंग, के साथ हैंडीक्रॉफ्ट प्रोडक्ट, स्थानीय व्यंजन, आर्गेनिक वेजिटेबल्स और फ्रूट्स और खरीद सकेंगे इन शिकारा बोट्स राइड के दौरान पर्यटक बर्ड वाचिंग भी कर सकेंगे इसके लिए शिकारे में दूरबीन की व्यवस्था भी की गई हैं साथ ही पर्यटक अन्य शिकारों में उपलब्ध आर्गेनिक वेजिटेबल्स और फ्रूटस और मध्यप्रदेश में निर्मित हस्तशिल्प के उत्पाद भी खरीद सकेंगे, वहीं राइड के दौरान पर्यटक स्थानीय व्यंजन का लुत्फ़ भी ले सकेंगे।  

साइबर ठगों की बड़ी साजिश नाकाम, बैतूल पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के झांसे से 64 वर्षीय बुजुर्ग को बचाया

पुलिस की त्वरित कार्रवाई से 73 लाख की ठगी टली भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम और जन–जागरूकता के लिए निरंतर विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी अभियान के तहत बैतूल पुलिस ने “डिजिटल अरेस्ट” जैसे खतरनाक साइबर जाल से एक रिटायर्ड बुजुर्ग को मुक्त कराते हुए उनकी 73 लाख रुपये की जीवनभर की जमा-पूंजी को बचाया। पुलिस की त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई से न केवल एक बड़ी ठगी रोकी गई, बल्कि साइबर अपराधियों की साजिश भी विफल हुई। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक श्री वीरेंद्र जैन के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती कमला जोशी, एसडीओपी सारणी सुश्री प्रियंका करचाम तथा थाना प्रभारी सारणी श्री जयपाल इनवाती के मार्गदर्शन में पाथाखेड़ा पुलिस टीम द्वारा की गई। पीड़ित चैतराम नरवरे, निवासी अशोका गार्डन, भोपाल (रिटायर्ड WCL कर्मचारी) को वीडियो कॉल के माध्यम से स्वयं को ईडी–सीबीआई अधिकारी बताने वाले ठगों ने झूठे मनी–लॉन्ड्रिंग आरोपों में फंसाकर भारी धनराशि देने का दवाब बनाया। ठगों ने उन्हें पाथाखेड़ा, सारणी बुलाकर होटल के कमरे में “डिजिटल अरेस्ट” रखा, परिवार से बात करने से रोका एवं बैंक में उनकी एफडी तुड़वाने का दबाव बनाया। पीड़ित अपनी एफडी तुड़वाकर ठगों को देने के लिए बैंक से RTGS फॉर्म तक लेकर आ गए थे। पीड़ित के परिजनों द्वारा लगातार संपर्क न हो पाने पर अनहोनी की आशंका के चलते परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पाथाखेड़ा पुलिस टीम ने तुरंत मोबाइल लोकेशन ट्रैक की, जो राजेश गेस्ट हाउस, बगडोना में मिली। पुलिस जब होटल पहुँची, तो पीड़ित चैतराम नरवरे मानसिक रूप से सदमे की स्थिति में थे और तीन दिनों से चल रहे घटनाक्रम पर विश्वास नहीं कर पा रहा थे। उन्होंने प्रारंभ में पुलिसकर्मियों का भी सहयोग नहीं किया और “डिजिटल अरेस्ट” को सच मान बैठे थे। पुलिस टीम ने धैर्यपूर्वक समझाइश देकर उनका भ्रम दूर किया तथा उन्हें सुरक्षित गेस्ट हाउस से बाहर निकालकर परिजनों से मिलवाया। समय पर की गई इस कार्रवाई से 73 लाख रुपये की ठगी टल गई। मध्यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई शब्द या प्रक्रिया भारतीय कानून में कहीं भी अस्तित्व में नहीं है। कोई भी जांच एजेंसी—चाहे वह पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य विभाग हो—वीडियो कॉल, व्हाट्सएप या सोशल मीडिया के माध्यम से किसी व्यक्ति को न तो गिरफ्तार कर सकती है और न ही धनराशि की मांग कर सकती है। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को पुलिस अधिकारी बताकर ऑनलाइन माध्यम से आपको डराने या धमकाने का प्रयास करता है, तो समझ लें कि यह साइबर ठगी है। कृपया ऐसी किसी भी कॉल पर विश्वास न करें, अपनी निजी/बैंकिंग जानकारी साझा न करें और तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) अथवा नजदीकी थाने को सूचना दें।  

स्कूल शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय कर गतिविधियों का करें संचालन

लाड़ली लक्ष्मी बेटियों के ड्राप आऊट पर रखें सख़्त निगरानी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की पूर्णत: ऑनलाइन पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया लागू करने में देश का पहला राज्य बना मध्यप्रदेश टेक होम राशन की फेस रिकग्निशन सिस्टम प्रक्रिया में मध्यप्रदेश प्रथम लाभ पहुँचाने में राष्ट्रीय स्तर पर मिली सराहना स्पॉन्सरशिप योजना में 20,243 बच्चों को लाभ, देश में दूसरा स्थान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की महिला बाल विकास विभाग की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि महिला एवं बाल विकास विभाग की गतिविधियां बच्चों और महिलाओं के पोषण व स्वस्थ सर्वांगीण विकास और महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित हैं। अधिक से अधिक लोगों तक विभाग की योजनाओं और कार्यक्रमों का सुगमता पूर्वक लाभ पहुंचाने के लिए सुशासन की भावना के अनुसार पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए गतिविधियों का संचालन किया जाए। कार्यक्रम क्रियान्वयन के अनुवीक्षण में आईटी का अधिक से अधिक उपयोग करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को बच्चों और महिलाओं के पोषण व स्वास्थ्य के लिए स्कूल शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग तथा महिलाओं की आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण के लिए कौशल उन्नयन व रोजगार की दृष्टि से तकनीकी शिक्षा तथा उद्योग विभाग से बेहतर समन्वय कर गतिविधियां संचालित करने के निर्देश महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में दिए। मंत्रालय में हुई बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों और नवाचारों का प्रेजेंटेशन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी वर्षों की कार्य योजना के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना प्रदेश की बेटियों के उज्ज्वल भविष्य से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। विभाग यह सुनिश्चित करे कि किसी भी चरण पर लाड़ली लक्ष्मी बेटियों का ड्रॉप आउट न हो। ड्रॉपआउट होने वाली बालिकाओं पर सख़्त निगरानी रखी जाए और तुरंत कारणों का निराकरण कर उन्हें योजना में पुनः जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि महिलाओं और बच्चों से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य पारदर्शिता, समयबद्धता और लाभार्थी-केंद्रित व्यवस्था को और मजबूत बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला स्तर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से समन्वय कर आंगनवाड़ियों की बाउण्ड्रीवॉल बनवाने के संबंध में निर्देश दिए। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने जिलों द्वारा किए जा रहे नवाचारों की प्रभावशीलता का अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन संस्थान से वैज्ञानिक आधार पर अध्ययन कराने और उनकी उपयुक्तता के आधार पर अन्य जिलों में क्रियान्वित करने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने जानकारी देते हुए कहा कि पीएम जनमन योजना अंतर्गत भवनों की डिज़ाइन एवं ऑनलाइन मॉनिटरिंग मॉड्यूल को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। इसी योजना में प्रदेश को सर्वाधिक 704 आंगनवाड़ी भवनों की स्वीकृति मिली है, जिनमें निर्माण प्रगति देश में सर्वोच्च है। कुपोषण निवारण में झाबुआ जिले के “मोटी आई” नवाचार को देश के सर्वोच्च सम्मान—प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया।  विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की पूर्णत: ऑनलाइन पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया लागू करने में मध्यप्रदेश, देश का पहला राज्य बना।     टेक होम राशन की एफआरएस प्रक्रिया में मध्यप्रदेश प्रथम। राष्ट्रीय स्तर पर हुई सराहना।     स्पॉन्सरशिप योजना में 20,243 बच्चों को लाभ। प्रदेश, देश में दूसरे स्थान पर रहा।     भवन निर्माण की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए अत्याधुनिक मॉड्यूल विकसित किया गया।     उपस्थिति के लिए 20 मीटर जियो-फेंसिंग व्यवस्था डिजिटल पारदर्शिता की मिसाल बनी।     प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं को 512 करोड़ रूपए से अधिक की सहायता उपलब्ध कराई गई।     लाड़ली बहना योजना में जनवरी 2024 से नवंबर 2025 तक 36 हजार 778 करोड़ रूपए का अंतरण कि किया गया।     1 लाख 72 हजार महिलाओं को महिला हेल्पलाइन से सहायता प्रदान की गई। वन स्टॉप सेन्टर्स द्वारा 52,095 महिलाओं को सुरक्षा उपलब्ध कराई गई।     बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के अंतर्गत 6,520 ड्राइविंग लाइसेंस और 8,637 बालिकाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं का प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया।     आंगनवाड़ी केंद्रों का बड़े पैमाने पर उन्नयन करते हुए 12 हजार 670 केंद्र ‘सक्षम आंगनवाड़ी’घोषित किए गए। जिलों में हुए नवाचार डिण्डौरी में संचालित रेवा प्रोजेक्ट के अंतर्गत्‍ बच्चों की स्वास्थ्य जाँच के साथ-साथ उन्हें पोषण किट और स्वच्छता किट उपलब्ध कराई जा रही है।     अशोकनगर में हृदय अभियान के अंतर्गत बच्चों को जनसहयोग से पोषण सामग्री वितरित की जा रही है और पोषण स्तर का निरंतर फॉलोअप किया जा रहा है।     देवास में किलकारी अभियान के अंतर्गत विभाग की गतिविधियों में निजी संस्थाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है।     नीमच में 'हमारी आंगनवाड़ी अभियान' में कुपोषित बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने, उनकी देखभाल और नियकित हेल्थ चेक अप में पोषण मित्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।     दतिया में मेरा बच्चा अभियान के अंतर्गत सक्षम व्यक्तियों को कुपोषित बच्चों को गोद लेने और उनका फॉलोअप करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। आगामी 3 वर्ष की कार्य योजना के अंतर्गत निम्न बिन्दुओं पर हुआ विचार-विमर्श      मध्यप्रदेश में सेंट्रल किचन से शहरी आंगनवाड़ियों में गर्म भोजन की व्यवस्था 2026 से लागू की जाएगी।     विजन 2047 अनुरूप शाला पूर्व शिक्षा की गुणवत्ता वृद्धि के लिए वर्क बुक और विकास कार्ड की व्यवस्था की जाएगी।     मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत 34 लाख से अधिक बालिकाओं को छात्रवृत्ति/प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाएगा।     आंगनवाड़ी भवन निर्माण के मेगा प्लान के अंतर्गत अगले तीन वर्षों में 9,000 नए भवन बनाए जाएंगे।     हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वुमन योजना के अंतर्गत जेंडर, सुरक्षा व कानूनी सहायता के संबंध में बड़े पैमाने जागरूकता गतिविधियों का संचालन किया जाएगा।     बेटो बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत शाला त्यागी बालिकाओं को स्कूल शिक्षा पूर्ण कराने, बालिकाओं के कौशल प्रशिक्षण, आत्मरक्षा व ड्राइविंग लायसेंस उपलब्ध कराने के लिए गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। प्रमुख बिन्दु     कार्यक्रम क्रियान्वयन के अनुवीक्षण में आईटी का अधिक से अधिक उपयोग … Read more

वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन को 50.60 करोड़ का शुद्ध लाभ, 32 प्रतिशत लाभांश का प्रस्ताव

मप्र वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉरपोरेशन की 21वीं साधारण सभा सम्पन्न, कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित भोपाल मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉरपोरेशन की 21वीं साधारण सभा कॉरपोरेशन के अध्यक्ष एवं प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरुण शमी, कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक श्री अनुराग वर्मा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। सभा में वर्ष 2023-24 की वित्तीय स्थिति, विभागीय उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। साधारण सभा में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में कॉरपोरेशन ने 50 करोड़ 60 लाख रुपए का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। अधिकारियों ने लाभ की अन्य संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया। अंशधारकों को 32 प्रतिशत लाभांश का प्रस्ताव खाद्य मंत्री श्री राजपूत की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई साधारण सभा में वर्ष 2023–24 के लिए अंशधारकों को 32 प्रतिशत की दर से कुल 2 करोड़ 57 लाख रुपए का लाभांश दिए जाने का प्रस्ताव रखा गया। प्रस्ताव को व्यापक समर्थन मिला और इसे अनुमोदन हेतु आगे बढ़ाया गया। वर्ष 2023–24 में कॉरपोरेशन की 300 शाखाएँ कार्यरत रहीं। इस अवधि में औसत 225.11 लाख मीट्रिक टन की भंडारण क्षमता का संचालन किया गया, जो प्रदेश में कृषि उपज के सुरक्षित एवं वैज्ञानिक भंडारण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 01 अप्रैल 2023 की स्थिति में कॉरपोरेशन पर किसी भी बैंक या वित्तीय संस्था का कोई बकाया ऋण नहीं था। वर्ष भर में भी किसी प्रकार का कर्ज नहीं लिया गया। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने इसे वित्तीय अनुशासन और सुशासन का परिणाम बताया। सुदृढ़ होगी प्रदेश की भंडारण क्षमता प्रदेश सरकार की वेयरहाउस इंफ्रास्ट्रक्चर फंड–नाबार्ड योजना के तहत वर्ष 2023–24 में कॉरपोरेशन को 59 करोड़ 65 लाख रुपए की राशि प्राप्त हुई। इस राशि का उपयोग प्रदेश में भंडारण ढांचे को सुदृढ़ बनाने में किया जा रहा है। सभा में बताया गया कि वर्ष 2023–24 में बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास हेतु निर्धारित बुंदेलखंड योजना के अंतर्गत कॉरपोरेशन को शासन से कोई राशि प्राप्त नहीं हुई। डिजिटलाइजेशन की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। प्रदेश शासन से एंड टू एंड कम्प्यूटराइजेशन स्कीम के तहत 1 करोड़ 48 लाख रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ, जिसके माध्यम से विभिन्न शाखाओं में आधुनिक कंप्यूटर और आईटी सुविधाओं की स्थापना की गई। खाद्य मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि पूर्ण कम्प्यूटराइजेशन से पारदर्शिता, गति और भंडारण प्रबंधन की दक्षता में वृद्धि होगी।  

चीता परियोजना के अभूतपूर्व परिणाम, चीतों की संख्या बढ़कर हुई 32

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस पर गुरुवार 4 दिसम्बर को श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में 3 चीतों, जिनमें मादा चीता 'वीरा' और उसके 10 माह के 2 शावकों को बड़े बाड़े से खुले जंगल में छोड़ेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव कूनो राष्ट्रीय उद्यान के वर्ष 2026 का कैलेण्डर तथा 'फील्ड मैन्युअल फॉर क्लीनिकल मैनेजमेंट ऑफ फ्री-रेंजिंग चीताज़ इन कूनो नेशनल पार्क' का विमोचन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नव-निर्मित सोवेनियर शॉप का लोकार्पण भी करेंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर 3 वर्ष पूर्व मध्यप्रदेश को चीता परियोजना की सौगात मिली थी। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 17 सितम्बर, 2022 को अपने जन्म-दिवस पर कूनो पालपुर में चीते छोड़कर प्रोजेक्ट की शुरूआत की थी। नामीबिया से 8 चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान लाया गया था। वर्तमान में कूनो पालपुर और गाँधी सागर अभयारण्य में चीतों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में प्रोजेक्ट चीता को "इनोवेटिव इनिशिएटिव्स अवॉर्ड'' से सम्मानित किया गया है। चीतों ने भारतीय वातावरण को आश्चर्यजनक रूप से पूरी तरह अपना लिया है। पिछले 3 वर्षों में 5 मादा चीता द्वारा 6 बार शावकों को जन्म देना इस परियोजना की सफलता और लचीलापन का परिचायक है। परिणाम स्वरूप चीते न केवल जीवित रहे, बल्कि चीतों ने सफलतापूर्वक अपना परिवार भी बढ़ाया है। अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस का मुख्य उद्देश्य चीतों की घटती आबादी, उनके आवास के नुकसान और शिकार जैसी समस्याओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने और उनके संरक्षण के लिये वैश्विक प्रयासों को बढ़ावा देना है। एपीसीसीएफ एवं निदेशक लॉयन प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश ने बताया कि चीता परिवार की सुरक्षा और प्राकृतिक परिवेश में सफल अनुकूलन सुनिश्चित करने के लिये उन्नत रेडियो-ट्रेकिंग प्रणाली और समर्पित फील्ड टीमों के माध्यम से सतत निगरानी की जायेगी। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम कूनो राष्ट्रीय उद्यान के परोंड वन क्षेत्र में आयोजित होगा, जो निर्धारित पर्यटन जोन है। इस क्षेत्र में चीता परिवार की मौजूदगी से ईको पर्यटन के नये अवसरों के साथ ही प्रोजेक्ट चीता के प्रति जन-सहभागिता और रुचि में और अधिक वृद्धि होने की अपेक्षा है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर की पैरा एथलीट पूजा को पुरस्कार मिलने पर दी बधाई

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस पर पैरा एथलीट को किया सम्मानित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर की प्रतिभाशाली पैरा एथलीट पूजा गर्ग को वर्ष 2025 के लिए 'श्रेष्ठ दिव्यांगजन' पुरस्कार से सम्मानित होने पर बधाई दी। उन्होंने एथलीट उज्ज्वल भविष्य के लिए कामना की है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर पैरा एथलीट पूजा गर्ग को नई दिल्ली में यह पुरस्कार प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर की बेटी सुश्री पूजा ने नाथुला दर्रे पर तिरंगा फहराने वाली विश्व की पहली महिला होने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। मध्यप्रदेश को उन पर गर्व है। राज्य सरकार खेलों और खिलाड़ियों को भरपूर प्रोत्साहन दे रही है।  

CM मोहन यादव की समीक्षा बैठक: आंगनवाड़ी भर्ती ऑनलाइन, पारदर्शिता और निगरानी पर जोर

भोपाल  . मध्य प्रदेश सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए 9,948 पदों पर भर्ती के आदेश दिए हैं। यह भर्ती मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों पर की जाएगी। सीएम ने इसके निर्देश महिला और बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिए थे। इस भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने कुपोषण को समाप्त करने के लिए तीन साल की कार्ययोजना बनाने का आदेश भी दिया है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की पूरी भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन मध्यप्रदेश आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की पूरी भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन पारदर्शी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है और टेक होम राशन की FRS प्रक्रिया में भी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना प्राप्त हुई है। स्पॉन्सरशिप योजना के तहत 20,243 बच्चों को लाभ मिला, झाबुआ के ‘मोटी आई’ नवाचार को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार और PM जनमन भवनों की डिज़ाइन व मॉनिटरिंग मॉड्यूल को भारत सरकार द्वारा विशेष सराहना मिली। आगामी तीन वर्षों की कार्य योजना भवन निर्माण की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए अत्याधुनिक मॉड्यूल और 20 मीटर जियो-फेंसिंग आधारित उपस्थिति व्यवस्था लागू की गई है। आगामी तीन वर्षों की कार्य योजना में शहरी आंगनवाड़ियों में सेंट्रल किचन से गर्म भोजन, शाला पूर्व शिक्षा में निवेश, लाड़ली लक्ष्मी योजना का विस्तार, 9,000 नए आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण और HEW के माध्यम से 1.47 लाख से अधिक जागरूकता गतिविधियाँ शामिल हैं। सामग्री टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में PMMVY में 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं को 512 करोड़ से अधिक सहायता, लाड़ली बहना योजना के तहत 36,778 करोड़ का अंतरण, महिला हेल्पलाइन और वन स्टॉप सेंटरों द्वारा 1.72 लाख महिलाओं को सहायता, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत पौधारोपण, ड्राइविंग लाइसेंस और प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण, आंगनवाड़ी केंद्रों का बड़े पैमाने पर उन्नयन और सामग्री टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने जैसे कई महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं, जिसमें गड़बड़ी होने पर वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश के शहरी आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए सेंट्रल किचन व्यवस्था की जाएगी जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों तक गर्म भोजन पहुंचेगा. यह नई व्यवस्था वर्ष 2026 तक लागू कर दी जाएगी. निपुण भारत के तहत शाला पूर्व शिक्षा में बड़ा निवेश किया जाएगा ताकि 2047 के विजन को पूरा किया जा सके. लाडली बहना योजना का विस्तार किया जाएगा, प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रावधान किया जाएगा. आगामी तीन वर्षों में आंगनबाड़ी के 9,000 भवन निर्मित किए जाएंगे.     टेक होम राशन की FRS प्रक्रिया में मध्यप्रदेश प्रथम—लाभ पहुँचाने में राष्ट्रीय स्तर पर सराहना     स्पॉन्सरशिप योजना में 20,243 बच्चों को लाभ—देश में दूसरा स्थान     झाबुआ के ‘मोटी आई' नवाचार को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार     PM JANMAN भवनों की डिज़ाइन व मॉनिटरिंग मॉड्यूल की भारत सरकार द्वारा विशेष सराहना     भवन निर्माण की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए अत्याधुनिक मॉड्यूल विकसित     डिजिटल पारदर्शिता की मिसाल: 20 मीटर जियो-फेंसिंग आधारित उपस्थिति व्यवस्था     3 वर्ष की भविष्य कार्ययोजना     मध्यप्रदेश में सेंट्रल किचन से शहरी आंगनवाड़ियों में गर्म भोजन—2026 से नई व्यवस्था लागू     2047 विज़न के अनुरूप शाला पूर्व शिक्षा पर बड़ा निवेश—निपुण भारत आधारित विकास कार्ड से गुणवत्ता सुधार     34 लाख बालिकाओं को छात्रवृत्ति/प्रोत्साहन—लाड़ली लक्ष्मी योजना का विस्तार     आंगनवाड़ी भवन निर्माण का मेगा प्लान—अगले तीन वर्षों में 9,000 नए भवन     HEW के माध्यम से 1.47 लाख से अधिक जागरूकता गतिविधियाँ—जेंडर, सुरक्षा व कानूनी सहायता में व्यापक प्रभाव समीक्षा बैठक में बताया गया कि महिला बाल विकास विभाग राज्य और केंद्र सरकार की योजना का लाभ आदि आबादी तक पहुंचा रहा है. 'प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना' में 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं को 512 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता दी गई है. लाडली बहना योजना के तहत जनवरी 2024-नवंबर 2025 में 36,778 करोड़ रुपए का अंतरण किया गया है.     PMMVY में 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं को ₹512 करोड़ से अधिक की सहायता     लाड़ली बहना योजना के तहत जनवरी 2024–नवंबर 2025 में ₹36,778 करोड़ का अंतरण     1.72 लाख महिलाओं को महिला हेल्पलाइन से सहायता—57 वन स्टॉप सेंटरों द्वारा 52,095 महिलाओं को सुरक्षा      बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ: 1.89 लाख पौधारोपण, 6,520 ड्राइविंग लाइसेंस, 8,637 बालिकाओं को प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण राज्य में स्थापित महिला हेल्पलाइन से 172000 महिलाओं को सहायता प्रदान की गई, वहीं वन स्टाफ सेंटर से 52000 महिलाओं को सुरक्षा मिली. इसके अतिरिक्त बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत 1.89 लाख पौधारोपण, 6,520 ड्राइविंग लाइसेंस, और 8,637 बालिकाओं को प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण दिया गया.

शिक्षक की मृत्यु के बाद बेटे की याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा—अनुकंपा नियुक्ति अनिवार्य नहीं

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम आदेश में कहा है "अनुकंपा नियुक्ति अधिकार नहीं है. मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करने अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जा सकती है. कर्मचारी की मृत्यु के 7 साल बाद परिजन अनुकंपा नियुक्ति की दावेदारी नहीं कर सकते." हाई कोर्ट जस्टिस दीपक खोत ने इस आदेश के साथ याचिका को खारिज कर दिया. बालिग होने के बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग आशुतोष साध ने याचिका में कहा "उसके पिता गवर्नमेंट मिडिल स्कूल ब्लॉक केसला तहसील इटारसी में असिस्टेंट टीचर थे. नौकरी के दौरान दिसम्बर 2008 में पिता की मौत हो गयी. उस समय वह नाबालिग था और उसकी उम्र महज 11 साल थी. वह सितंबर 2015 में बालिग हुआ था और साल 2016 में हायर सेकेंडरी एग्जाम पास किया." याचिकाकर्ता ने अप्रैल 2016 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए डीईओ को आवेदन दिया था, उसे सूचित किया गया कि उसके पिता आदिवासी कल्याण विभाग में पदस्थ थे. इसलिए वह सहायक आयुक्त आदिवासी कल्याण विभाग में आवेदन दें. याचिकाकर्ता के पास बीएड व डीएड की डिग्री नहीं इसके बाद आशुतोष साध ने सहायक आयुक्त के समक्ष आवेदन पेश किया. उसके आवेदन पर उच्च अधिकारी से मार्गदर्शन मांगा गया. विभाग की तरफ जारी पत्र के अनुसार उसने जुलाई 2019 में अपने दस्तावेज जमा कर दिये थे. विभाग ने नियुक्ति के लिए उसकी पसंद पूछी थी तो उसने शिक्षक कैडर बताया. विभाग ने जनवरी 2020 के पत्र जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि 3 दिन के अंदर सर्टिफिकेट जमा नहीं होने पर उसका आवेदन निरस्त कर दिया जायेगा. याचिकाकर्ता के पास बीएड तथा डीएड की डिग्री नहीं थी, जो टीचिंग कैडर के लिए आवश्यक है. याचिकाकर्ता ने काफी देर से दिया आवेदन याचिकाकर्ता ने ग्रेजुएशन की डिग्री के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने या बीएड की डिग्री के लिए दो साल का समय प्रदान करने के आग्रह किया. इसके बाद 3 सदस्यीय कमेटी ने उसके आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया कि साल 2014 की पॉलिसी के अनुसार बालिग होने के एक साल के अंदर अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन करना था. लगभग 11 माह बाद आवेदन किया. याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि उसने अज्ञानतावश अप्रैल 2016 में आवेदन किया था, जो निर्धारित समय सीमा के अंदर था. हाई कोर्ट ने आदेश सुनाकर आवेदन किया खारिज एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया "याचिकाकर्ता के पिता का निधन 2008 में हुआ था. उस समय 2008 की पॉलिसी प्रभावी थी. अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन की अधिकतम समय सीमा 7 साल थी. कमेटी ने पॉलिसी 2014 के तहत आवेदन खारिज किया है. अनुकंपा पॉलिसी 2008 के अनुसार भी आवेदन निर्धारित समय अवधि के बाद दायर किया गया." एकलपीठ ने इस आदेश के साथ आवेदन खारिज कर दिया.