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हाईकोर्ट ने निर्देश दिए, मानव-वन्यजीव संघर्ष की नीति पर सुप्रीम कोर्ट पालन की स्थिति रिपोर्ट पेश करनी होगी

जबलपुर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में बनाई जा रही नीति की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए राज्य शासन को चार सप्ताह का समय दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद जनहित याचिकाकर्ता के सुझावों पर विचार किया जाएगा।  हुई सुनवाई में किसानों द्वारा हाई-वोल्टेज तार लगाने से वन्य प्राणियों की मौतें होने का बिंदु भी रेखांकित हुआ। जनहित याचिकाकर्ता रायपुर निवासी नितिन संघवी की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि हाथियों को रेस्क्यू के नाम पर लंबे समय तक कैद में रखने का रवैया बेहद चिंताजनक है। मानव-वन्यजीव संघर्ष में फसलों और संपत्ति को भारी नुकसान हो रहा है, लेकिन इसकी भरपाई की प्रक्रिया बेहद धीमी है। मुआवजा पटवारी स्तर पर तय होता है और इसे सामान्य प्राकृतिक आपदा जैसा माना जाता है। राहत मिलने में काफी समय लगता है। आंकड़ों के अनुसार किसानों को सिर्फ 17 प्रतिशत तक ही मुआवजा मिल पाता है। फसल और संपत्ति के नुकसान का मामला वन विभाग संभाले। पटवारी के बजाय वन विभाग को जिम्मेदारी संभालनी चाहिए। मौत पर 10 लाख रुपये मुआवजा तय किया जाए सुप्रीम कोर्ट ने 17 नवंबर, 2025 को सभी राज्यों को टीएन गोदावर्मन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस में यह निर्देश दिए थे कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को उत्तर प्रदेश और केरल की तर्ज पर प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में रखा जाए। ऐसे मामलों में मौत पर 10 लाख रुपये मुआवजा तय किया जाए और छह महीने के भीतर विस्तृत नीति बनाई जाए। प्रदेश में बाघों की मौत का कारण करंट विगत सुनवाई में एक्सपर्ट कमेटी ने बताया था कि कान्हा में रखे गए जंगली हाथियों को 15 दिनों में छोड़ दिया जाएगा और उनकी ट्रैकिंग के लिए रेडियो कॉलर आईडी मंगवाई गई है। आज की सुनवाई में बताया गया कि दो हाथियों को कॉलर आईडी लगाकर जंगल में छोड़ दिया गया है। इसी देरी और परेशानियों के कारण किसान खेतों की सुरक्षा के लिए हाई टेंशन करंट वाले तार लगाने लगते हैं। इसके कारण प्रदेश में बड़ी संख्या में वन्य प्राणियों की मौत करंट लगने से हो रही है। याचिकाकर्ता ने कहा कि बाघों की मौत के मामलों में करंट एक बड़ा कारण है।  

वन विभाग ने स्पष्ट किया, वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षित, पदावनति की चिंता खत्म

भोपाल  मध्य प्रदेश के वन विभाग ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उच्चतर पद के प्रभार में पदस्थ वन कर्मचारियों और अधिकारियों को अब पदावनत (डिमोट) नहीं किया जाएगा। इस निर्णय से प्रदेश के वन कर्मचारियों में राहत और संतोष का माहौल है। जिला स्तर पर गलत कार्रवाई पर रोक वन मुख्यालय ने बताया कि 15 अक्टूबर 2025 को उच्चतर पद का प्रभार देने वाले आदेश को भले ही निरस्त कर दिया गया था, लेकिन किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को पदावनत करने का निर्देश कभी जारी नहीं हुआ था। उसके बावजूद कुछ जिला वन अधिकारियों ने आदेशों की गलत व्याख्या करते हुए उच्चतर पद पर कार्यरत कर्मचारियों को पदावनत करना शुरू कर दिया था, जिसे अब स्पष्ट रूप से नियम विरुद्ध माना गया है। नए आदेश में बताया कब होगी पदावनति मुख्यालय द्वारा जारी नए निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि केवल वही कर्मचारी या अधिकारी पदावनत माना जाएगा, जिसे भविष्य में पदोन्नति सेवा नियम 2025 लागू होने के बाद पदोन्नति समिति द्वारा अपात्र घोषित किया जाएगा। यानी, वर्तमान में जो कर्मचारी उच्चतर पद पर कार्य कर रहे हैं, उनका पद सुरक्षित रहेगा और उन्हें किसी तरह का डिमोशन नहीं दिया जाएगा। वन कर्मचारी मंच ने किया निर्णय का स्वागत मध्य प्रदेश वन कर्मचारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पांडे ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम वन कर्मचारियों और अधिकारियों के हित में है। उन्होंने इसे लंबे समय से चल रही असमंजस की स्थिति को दूर करने वाला निर्णय बताया।

वीजा मामले में पुलिस की चूक, अब शहर में रह रहे विदेशी नागरिकों की फाइलें खंगाली जाएंगी

इंदौर   इंदौर के एमआईजी इलाके के गायत्री नगर में रहने वाले केन्याई नागरिक रिचर्डसन का मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है। सुबह वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में जानकारी मिली, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने रिचर्डसन से पूछताछ शुरू कर दी।एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने माना कि इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस की ओर से गंभीर लापरवाही हुई है। अब शहर में रह रहे सभी विदेशी नागरिकों का रिकॉर्ड फिर से जांचा जा रहा है। वीजा 1996 में खत्म, एफआईआर दर्ज एडिशनल डीसीपी दंडोतिया ने बताया कि जांच में सामने आया है कि रिचर्डसन का पासपोर्ट वैध है। मगर, उसका वीजा 1996 में खत्म हो चुका था। इसके आधार पर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। कोर्ट की सख्ती के चलते उसे इंदौर छोड़ने की अनुमति नहीं मिली, इसलिए वह यहीं रहकर नियमित तौर पर अदालत में पेश होता रहा। शहर न छोडने की शर्त पर जमानत मिल गई उसने 'युगांडा भले ही चारों ओर से घिरा हुआ है, लेकिन हिंद महासागर भी हमारा है' जैसी बातें लिखी पोस्ट साझा की है। कुछ तस्वीरों पर खून-खराबा दिखाया गया है। पुलिस के अनुसार रिचर्ड 1991 से इंदौर में निवासरत है। 2018 में शिवशक्ति नगर में कन्हैयालाल गौर के मकान में रहता था। उस दौरान जांच में पता चला था कि वीजा 1998 तक था। उसे गिरफ्तार कर पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज जब्त कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से शहर न छोडने की शर्त पर जमानत मिल गई। वीजा 1996 में ही हुआ था समाप्त, FIR दर्ज एडिशनल डीसीपी दंडोतिया के अनुसार जांच में पाया गया कि रिचर्डसन का पासपोर्ट वैध है, लेकिन उसका वीजा वर्ष 1996 में खत्म हो चुका था। इसी आधार पर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। कोर्ट की सख्ती के चलते उसे इंदौर छोड़ने की अनुमति नहीं थी, इसलिए वह यहीं रहकर नियमित रूप से अदालत में पेश होता था। 2018 में हुई थी पहली कार्रवाई रिचर्डसन पर 2018 में पहली बार कार्रवाई की गई थी। तब यह सामने आया कि वह वीजा समाप्त होने के बाद भी वर्षों से इंदौर में रह रहा है। उसके खिलाफ फेमा एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था, जबकि उसके पूर्व मकान मालिक पर धारा 188 में केस बना। पुराने घर से निकलने के बाद वह गायत्री नगर में शेखर कुशवाहा के यहां किराए से रहने लगा। पुलिस की जांच में यह पुष्टि हुई कि शेखर ने नियम अनुसार उसकी जानकारी थाने में दी थी। पड़ोसी बोले-कोरोना काल में कई का इलाज किया रिचर्डसन पेशे से डॉक्टर हैं। जब पुलिस उसके घर पहुंची और इलाके में पूछताछ की तो कई पड़ोसियों ने बताया कि उसका स्वभाव अच्छा है और वह सभी से सौहार्दपूर्वक बात करता है। कोरोना काल में उसने कई लोगों को प्राथमिक उपचार भी दिया था। लोग इलाज के बदले उसे थोड़ी-बहुत आर्थिक मदद भी कर देते थे। उसके परिवारजन समय–समय पर केन्या से आर्थिक सहायता भेजते हैं। पासपोर्ट रिन्यू नहीं हो पाया रिचर्डसन ने दावा किया कि उसने पासपोर्ट रिन्यू कराने की कोशिश की, लेकिन जरूरी दस्तावेज अदालत में जमा होने के कारण आवेदन स्वीकार नहीं हुआ। कोर्ट में लंबित मामले के कारण नया वीजा और पासपोर्ट दोनों बनना संभव नहीं था। पासपोर्ट भी निरस्त, अब बनना मुश्किल सूत्रों के अनुसार भारतीय कानून के प्रावधानों के तहत रिचर्डसन का पासपोर्ट निरस्त हो चुका है। ऐसे में कोर्ट से दस्तावेज वापस मिलने के बावजूद वह भारत से नया पासपोर्ट या वीजा आवेदन नहीं कर सकता, क्योंकि वह भारतीय नागरिक नहीं है। पुलिस इस मामले में हुई अपनी पुरानी लापरवाही को लेकर कई तथ्य दबाने की कोशिश कर रही है। पासपोर्ट न्यायालय से सुपुर्दगी पर प्राप्त किए गए फिलहाल, जिला कोर्ट में मामला विचाराधीन है। 28 अप्रैल 2026 को सुनवाई होनी है। केनियन के वकील वाजिद खान ने बताया कि आरोपित द्वारा 2019 में जब्तशुदा पासपोर्ट न्यायालय से सुपुर्दगी पर प्राप्त किए गए हैं। वीजा और पासपोर्ट की अवधि बढ़ाने के प्रयास उसने किए हैं, लेकिन अवधि नहीं बढ़ सकी। वर्तमान में वह शेखर कुशवाह के घर में रह रहा है। थाने में सूचना दी गई है।

जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी…”—IAS अधिकारी संतोष वर्मा की आरक्षण पर दलीलें बनीं सुर्खियों में

भोपाल अनुसूचित जाति वर्ग के सरकारी कर्मचारियों के संगठन 'अजाक्स' के नए प्रांत प्रमुख चुने गए आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा एक बड़े विवाद में घिर गए हैं। आरोप है कि आरक्षण पर भाषण देते हुए उन्होंने ब्राह्मणों को लेकर विवादित टिप्पणी कर डाली। उनका बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें वह कह रहे हैं कि आरक्षण तब तक जारी रहे जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी उनके बेटे को दान ना कर दे या उससे संबंध ना बनाए। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा को वायरल वीडियो में मंच से कह रहे हैं, 'मैं तब तक यह नहीं मानूंगा कि एक परिवार में एक व्यक्ति को आरक्षण मिलना चाहिए जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान ना कर दे या उसका उससे संबंध नहीं बनाए। केवल आर्थिक आधार की बात है तो- जब तक यह रोटी-बेटी का व्यवहार ना होता तब तक हमको समाज के पिछड़ेपन, सामाजिक पिछड़ेपन के कारण आरक्षण की पात्रता मिलती रहेगी। आप खत्म कर दीजिए जाति- हमें नहीं चाहिए आरक्षण।' बताया जा रहा है कि संतोष वर्मा ने अनुसूचित जाति, जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) के प्रांतीय अधिवेशन में 23 नवंबर को यह टिप्पणी की थी। संतोष कुमार वर्मा मध्य प्रदेश काडर के 2012 के बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग में उप सचिव पद पर हैं। हाल ही में उन्हें अजाक्स का प्रांतीय प्रमुख भी चुना गया है। आईएएस संतोष कुमार वर्मा इससे पहले भी विवादों में रह चुके हैं। उन पर प्रमोशन पाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप लग चुके हैं। इस मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था और सस्पेंड हो गए थे। वर्मा पर एक महिला ने शादी का झांसा देकर ज्यादती का आरोप भी लगाया था। आईएएस अधिकारी के बयान से ब्राह्मण और सवर्ण संगठनों ने नाराजगी जाहिर की है और सरकार से कार्रवाई की मांग की है। ब्राह्मणसभा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र व्यास ने कहा कि यह तुच्छ सोच है। उन्होंने कहा कि इस तरह की मानसिकता वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

भारतीय महिला कबड्डी टीम की विश्व कप जीत पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जताई खुशी

महिला कबड्डी विश्व कप विजय पर CM डॉ. यादव ने भारतीय टीम को दी बधाई भारतीय महिला कबड्डी टीम की विश्व कप जीत पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जताई खुशी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिला कबड्डी विश्व कप जीतने पर भारतीय टीम को दी बधाई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय महिला कबड्डी टीम को कबड्डी विश्व कप : 2025 जीतने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह ऐतिहासिक विजय अनगिनत युवा बेटियों की शक्ति, साहस और संभावनाओं को नई उड़ान देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कबड्डी विश्व कप जीतकर देश को विश्व पटल पर गौरवान्वित करने वाली भारतीय महिला टीम की सभी खिलाड़ियों का हार्दिक अभिनंदन है। उल्लेखनीय है कि बंगला देश की राजधानी ढाका में हुई स्पर्धा के अंतिम मुकाबले में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने चीनी ताइपे को 35-28 से शिकस्त दी। पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा। भारत ने सेमीफाइनल में भी ईरान पर 33-21 से जीत दर्ज की। टूर्नामेंट में 11 देशों ने हिस्सा लिया था। यह निरंतर दूसरा अवसर है जब भारतीय टीम ने यह स्पर्धा जीत कर श्रेष्ठता सिद्ध की है। 

खैर नहीं अब अवैध कॉलोनियों का, 15 दिन में नोटिस जारी, कब्जा हटाने का आदेश CM मोहन यादव ने अफसरों को दिया

भोपाल   मध्यप्रदेश में सरकार अब नगरों के साथ ग्रामीण क्षेत्र में बन रही अवैध कॉलोनियों पर भी शिकंजा कसने जा रही है। नगरीय विकास विभाग अवैध कॉलोनियों का विकास रोकने के लिए संशोधित नियमों के ड्राफ्ट में इसका दायरा गांवों में भी बढ़ा रहा है। सरकार की मंशा के अनुरूप इसमें संशोधन कर रहा है। अब नया संशोधित कानून शहरों के साथ गांवों पर भी लागू होगा। इसके लिए राजस्व विभाग ने भी सहमति दे दी है। जल्द नियमों में संशोधन कर शासन को भेजा जाएगा। इस ड्राफ्ट में अवैध कॉलोनियों के विकास पर रोक लगाने के लिए सख्त प्रावधान किए जा रहे हैं। इसमें पार्षद से लेकर, बिल्डर, डेवलपर, भू-स्वामी, पुलिस और प्रशासन सभी की जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं। अवैध कॉलोनियां बनाने वालों पर जुर्माना भी 10 से बढ़ाकर 50 लाख किया जा रहा है। रोक लगाने के निर्देश दिए दरअसल, नगरीय विकास विभाग करीब डेढ़ साल से अवैध कॉलोनियों का विकास रोकने के लिए कानून में संशोधन का ड्राफ्ट बना रहा है। इस बीच कई बार अफसरों के बदलने से यह काम पूरा नहीं हो सका। इसी बीच कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अफसरों को अवैध कॉलोनियों पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने के निर्देश दिए। इसके बाद नगरीय विकास विभाग के एसीएस संजय दुबे ने संशोधित नियमों का विस्तार ग्रामीण क्षेत्र में भी करने के निर्देश दिए। बताते हैं, शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्र के अव्यवस्थित होने से शहरों पर प्रभाव पड़ रहा है। नए नियमों में यह सख्त प्रावधान -संशोधित बिल में पार्षद, सरपंच आदि की जिम्मेदारी तय की जा रही है। प्रावधान हैं, अवैध कॉलोनी की जानकारी मिलने पर तुरंत संबंधित निकाय अधिकारी को सूचना देनी होगी। अफसर को सूचना मिलने के 15 दिन में एफआइआर दर्ज करानी होगी। -अवैध कॉलोनी को नगरीय निकाय 15 दिन में जमीन को मूल स्वरूप में लाने के लिए नोटिस देगा। कॉलोनाइजर के ऐसा न करने पर निकाय अवैध कॉलोनी को ढहा कर जमीन कब्जे में लेगा। इसके बाद निकाय वहां विकास कार्य कराएगा। -अवैध कॉलोनियों का विकास रोकने कलेक्टर टास्क फोर्स बनाएंगे। यह हर सप्ताह क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट देगा। -अभी अवैध कॉलोनियां बनाने वालों को न्यूनतम 3 साल और अधिकतम 10 साल कैद की सजा का प्रावधान है। नए नियमों में इसे बढ़ाकर न्यूनतम 7 साल और अधिकतम 10 साल की सजा किया जा रहा है। -अवैध कॉलोनियों के खिलाफ हर कार्रवाई के लिए समय सीमा तय की जा रही है। अफसरों के कार्रवाई न करने पर शासन उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा। पटवारी से लेकर एसडीएम तक की जिम्मेदारी तय की जा रही गांवों में विस्तार के लिए राजस्व विभाग के साथ बैठक कर सहमति ले ली गई है। अब राजस्व विभाग के पटवारी, आरआइ, तहसीलदार, एसडीएम आदि की जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं। गांवों में अवैध कॉलोनियों का पता लगाने के लिए सर्वे किया जाएगा। यह संशोधित नियम वरिष्ठ सचिव समिति के पास भेजे जाएंगे। समिति की अनुमति मिलने के बाद यह कैबिनेट में पेश किए जाएंगे। ऐसे में यह संशोधन प्रस्ताव विधानसभा के शीतकालीन सत्र में आने की संभावना नहीं है। नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे का कहना है, नियमों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अगले साल नए नियम लागू हो सकते हैं। इसलिए पड़ी जरूरत अभी कई बड़े शहरों में मास्टर प्लान बरसों से अटके हैं। ऐसे में यहां प्लानिंग एरिया में ज्यादा वृद्धि नहीं हो सकी। नतीजा, शहरों से लगे गांवों में अवैध कॉलोनियां बनाने का सिलसिला चल रहा है। यहां निगरानी तंत्र भी विफल है। पंचायत की अनुमति लेकर कई स्थानों पर कॉलोनियां बन चुकी हैं। इस अनियोजित विकास का खामियाजा भविष्य में शहरों को भुगतना पड़ेगा।

वीडी शर्मा ने आम जनता से की अपील, कटनी में सांसद खेल महोत्सव में हिस्सा लें

कटनी  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए खजुराहो लोकसभा क्षेत्र में सांसद खेल महोत्सव–2025 का भव्य शुभारंभ 25 नवंबर को होगा। कटनी के दीनदयाल उपाध्याय खेल परिसर में दोपहर 1 बजे आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन करेंगे। स्थानीय सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा ने इस आयोजन की जानकारी देते हुए बताया कि यह महोत्सव युवाओं को खेल के माध्यम से अपनी प्रतिभा निखारने का एक बड़ा मंच प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य युवाओं में ऊर्जा, अनुशासन और सकारात्मकता का संचार करना है। उद्घाटन समारोह में जुटेंगे दिग्गज इस खेल महोत्सव के उद्घाटन समारोह में कई जानी-मानी हस्तियां भी मौजूद रहेंगी। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर केदार जाधव और पैरा ओलंपिक में देश का नाम रोशन करने वाले पद्मश्री सम्मानित तैराक सतेंद्र सिंह लोहिया विशेष अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इनके अलावा मध्य प्रदेश के प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह, क्षेत्र के सभी विधायक, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे। सांसद ने की सफल बनाने की अपील सांसद वी.डी. शर्मा ने क्षेत्रवासियों से इस आयोजन को सफल बनाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने सभी नागरिकों को कार्यक्रम में पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने के लिए आमंत्रित किया है।

बैतूल में बदले विवाह नियम, डीजे बैन और ट्रैफिक बाधा पर मैरिज हॉल की होगी सीलिंग

बैतूल   शादियों के सीजन में मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में विवाह और अन्य आयोजनों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के अनियंत्रित उपयोग पर प्रशासन ने कड़ाई शुरू कर दी है। प्रभारी कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अक्षत जैन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत नए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। इसके तहत शादियों में डीजे बजाना प्रतिबंधित रहेगा, जबकि रात 10 बजे के बाद किसी भी प्रकार के लाउडस्पीकर के उपयोग पर पाबंदी होगी। चल समारोह के दौरान यातायात बाधित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं मेरिज लॉन और हॉल संचालकों को पार्किंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट की उचित व्यवस्था करना अनिवार्य होगा। कार्यक्रम के दौरान ट्रैफिक जाम मिलने पर संबंधित हॉल या लॉन को तुरंत सील किया जाएगा। आदेश उल्लंघन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कारर्वाई होगी। प्रशासन ने नागरिकों से नियमों के पालन की अपील की है  

भारत का मान बढ़ाया! यामिनी ने एशियन जूडो चैंपियनशिप में कोरियाई प्रतिद्वंद्वी को पटखनी देकर स्वर्ण जीता

सागर  चाइना के हॉन्गकॉन्ग में आयोजित एशियन जूडो चैंपियनशिप में सागर की होनहार जूडो खिलाड़ी यामिनी मौर्य ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। यामिनी की इस उपलब्धि से न सिर्फ मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश का मान अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में कुल 18 देशों ने हिस्सा लिया था। यामिनी ने शानदार फॉर्म दिखाते हुए अपने चारों मुकाबले जीते। फाइनल में उन्होंने कड़े मुकाबले में कोरिया की खिलाड़ी को हराकर गोल्ड मेडल हासिल किया। हॉन्गकॉन्ग में आयोजित इस एशियन चैंपियनशिप में यामिनी मौर्य 57 किलोग्राम वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही थीं। दमदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने अपने शानदार खेल के दम पर स्वर्ण पदक देश की झोली में डाला। यामिनी की इस उपलब्धि से सागर जिले में खुशी का माहौल है। खेल जगत के साथ-साथ जिलेवासियों ने भी उनकी सफलता पर गर्व जताते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। स्वर्ण पदक विजेता यामिनी मौर्य सागर के सदर क्षेत्र की रहने वाली यामिनी ने अपनी स्कूली शिक्षा इमानुएल स्कूल से की है। उन्होंने डॉक्टर हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्व विद्यालय से ग्रेजुएशन किया है। यामिनी के पिता हरिओम मौर्य एक छोटे किसान हैं। बेटी की इस उपलब्धि पर पूरे परिवार में खुशी का आलम है।

दिसंबर में मिलेगी लाड़ली बहना योजना की अगली किस्त, राशि बढ़कर हुई 1500 रुपए

भोपाल      दिसंबर महीने में लाड़ली बहना योजना की 31वीं किस्त जारी की जाएगी। इसके तहत 1.26 करोड़ से अधिक लाड़ली बहनों को 1250 की जगह 1500 रूपए भेजे जाएंगे। चुंकी राज्य की मोहन सरकार ने नवंबर से किस्त में 250 रूपए का इजाफा कर दिया है। इससे पहले 12 नवंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिवनी से प्रदेश की 1.26 करोड़ से अधिक लाड़ली बहनों के खाते में 30वीं किस्त (1500 रूपए) के रूप में कुल 1857 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरित किए गए थे। इस योजना की शुरुआत जून 2023 में हुई थी, तब से अक्टूबर 2025 तक बैंक खातों में 44 हजार 917 करोड़ 92 लाख रू का अंतरण कर चुके हैं। जनवरी 2024 से अक्टूबर 2025 तक 34 हजार 921 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का अंतरण सिंगल क्लिक से किया है। 2023 में शुरू हुई थी लाड़ली बहना योजना     मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मई 2023 में लाड़ली बहना योजना शुरू की गई थी।लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसमें रक्षा बंधन पर अगस्त 2023, अगस्त 2024 और अगस्त 2025 में लाभार्थी महिलाओं को 250 रूपये की विशेष सहायता राशि तीन बार प्रदान की गई। 2023 अगस्त में राशि को 1000 से बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया । इसके बाद नवंबर 2025 में राशि में 250 की फिर वृद्धि की गई है और अब इस योजना के तहत 1500 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 18,000 रुपये मिलते हैं।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से नवंबर 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 30 किश्तों का अंतरण किया गया है। इस प्रकार योजना के आरंभ से अब तक 44,917.92 करोड़ रूपये की राशि का सीधा अंतरण लाभार्थी महिलाओं के खातों में किया जा चुका है।प्रदेश के सभी 52 जिलों में कुल 1,26,36,250 (एक करोड़ 26 लाख 36 हजार 250) महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। लाड़ली बहना योजना में ये अपात्र     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।     घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैं जिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।     जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष, संचालक या सदस्य हो।जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।     जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में है (स्थायी, संविदा या पेंशन पाने वाला)।जिनके परिवार के पास कुल 5 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन हो।जिनके परिवार के नाम पर कोई चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) रजिस्टर्ड हो। जानिए किस जिले में कितनी लाड़ली बहनें     लाड़ली बहना योजना में सबसे अधिक लाभार्थी इंदौर जिले में हैं, जहाँ 4 लाख 40 हजार 723 महिलाओं को योजना का लाभ मिला है। इसके बाद सागर में 4 लाख 19 हजार 903, रीवा में 4 लाख 3 हजार 182, छिंदवाड़ा में 3 लाख 90 हजार 311, धार में 3 लाख 82 हजार 417, जबलपुर 3 लाख 81 हजार 848 ,बालाघाट जिले में 3 लाख 47 हजार 816, उज्जैन में 3 लाख 40 हजार 203, मुरैना में 3 लाख 33 हजार 821 ,छतरपुर में 3 लाख 24 हजार 454, खरगोन में 3 लाख 13 हजार 741, भोपाल में 3 लाख 9 हजार 20 तथा ग्वालियर जिले में 3 लाख 5 हजार 969 महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है।     राजगढ़ में 2 लाख 95 हजार 459, शिवपुरी में 2 लाख 87 हजार 943, देवास में 2 लाख 85 हजार 496, विदिशा में 2 लाख 74 हजार 946, भिंड में 2 लाख 72 हजार 343, बेतूल में 2 लाख 71 हजार 474 ,सिवनी जिले में 2 लाख 68 हजार 187, मंदसौर में 2 लाख 62 हजार 827, रतलाम में 2 लाख 50 हजार 176, रायसेन में 2 लाख 46 हजार 390, दमोह में 2 लाख 45 हजार 143, सीहोर में 2 लाख 42 हजार 717, और कटनी में 2 लाख 41 हजार 302 बहनों को राशि का लाभ मिला है।     बड़वानी में 2 लाख 37 हजार 60, गुना में 2 लाख 28 हजार 604, खंडवा में 2 लाख 16 हजार 372, नर्मदापुरम में 2 लाख 9 हजार 837, सिद्धी में 2 लाख 9 हजार 706, टीकमगढ़ में 2 लाख 7 हजार 79, नरसिंहपुर में 2 लाख 8 हजार 734 ,सिंगरौली जिले में 1 लाख 97 हजार 4, मंडला में 1 लाख 95 हजार 153, झाबुआ में 1 लाख 92 हजार 511, शहडोल में 1 लाख 88 हजार 729, पन्ना में 1 लाख 82 हजार 220, शाजापुर में 1 लाख 73 हजार 900, नीमच में 1 लाख 57 हजार 658, तथा अशोक नगर में 1 लाख 55 हजार 387 महिलाएँ इस योजना से लाभान्वित हुई हैं।     दतिया में 1 लाख 44 हजार 239, अनूपपुर में 1 लाख 26 हजार 54, अलीराजपुर में 1 लाख 23 हजार 492, आगर मालवा में 1 लाख 17 हजार 255, उमरिया में 1 लाख 9 हजार 113, श्योपुर में 1 लाख 8 हजार 673, और हरदा जिले में 93 हजार 516 बहनों को योजना की राशि का लाभ मिला है। निवाड़ी जिले में 80 हजार 157 महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। लाभार्थी सूची में ऐसे चेक करें अपना नाम     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     … Read more