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रेलवे ब्रिज कंस्ट्रक्शन के दौरान बड़ा हादसा, धार जिले में क्रेन पलटने से दो मजदूरों की मौत

पीथमपुर धार में औद्योगिक क्षेत्र पिथमपुर के सागौर में रेलवे ब्रिज निर्माण के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया जिसमें दो लोगों की मौत हो गई. दरअसल, यहां रेलवे ब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है. इसी दौरान ब्रिज निर्माण में लगी क्रेन पलटी खा गई और एक पिकअप वाहन पर जा गिरी. जिससे पिकअप में सवार दो लोगों की मौके पर मौत हो गई. पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने बताया कि जानकारी के अनुसार रेलवे निर्माण में लगी क्रेन अचानक पलटी खा गई और क्रेन रास्ते से गुजर रही पिकअप वाहन पर जा गिरी. इसमें दबकर दो लोगों की मौत हो गई.साथ ही क्रेन के नीचे अन्य लोगों के भी दबे होने की आशंका जताई जा रही है. घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन व बडी संख्या में पुलिस बल मौके पहुंची है और पिकअप में फंसे दोनों शवों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे है. बता दें कि कंस्ट्रक्शन साइट्स पर अक्सर मशीनों के चलते ऐसे बड़े हादसे हो जाते हैं. भारी भरकम मशीनों की जरा सी गलत हैंडलिंग का नतीजा हो जाता है कोई बड़ा हादसा जिसमें जनहानि भी हो जाती है.

गाड़ी पार्किंग की समस्या से छुटकारा: भोपाल में 18 माह में तैयार होगी नई हाइड्रोलिक पार्किंग

भोपाल  एमपी के भोपाल शहर में पहली हाइड्रोलिक पार्किंग बनने जा रही है। शहर के सबसे व्यस्त बाजारों में से एक बिट्टन मार्केट में अब पार्किंग की समस्या से जल्द ही निजात मिलने वाली है। नगर निगम यहां पीपीपी मॉडल पर एक अत्याधुनिक हाइड्रोलिक पार्किंग बनाने की तैयारी में है, जिसका अनुमानित प्रोजेक्ट मूल्य 15-20 करोड़ तक होगा। 15 हजार वर्ग मीटर में बनने वाली यह पार्किंग करीब रोज पहुंचने वाले 1.5 लाख ग्राहकों को परेशानियों से मुक्त करने का काम करेगी। यह पार्किंग सब्जी हाट क्षेत्र में विकसित की जाएगी। अभी है पार्किंग की समस्या बिट्टन मार्केट में सब्जी हाट, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और रोजमर्रा के सामान की खरीदारी के लिए भी शहरभर से लोग आते हैं। सामान्य दिनों में भी यह क्षेत्र वाहनों की पार्किंग से अटा रहता है, जिससे यहां अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है। यहां सप्ताह में तीन दिन सब्जी हाट लगता है, जिसमें भारी भीड़ होती है। लोगों को अक्सर अपने वाहन सड़क किनारे या दूर-दराज की कॉलोनियों में खड़े करने पड़ते हैं, जिससे चोरी और यातायात बाधित होने का खतरा बना रहता है। प्रोजेक्ट की समय-सीमा और तैयारी -ईओआई (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) जारी: अगले 15 दिन के भीतर। प्रारंभिक तौर पर दो कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई है। -फाइनल प्रोपोजल: ईओआइ के बाद 50 दिन के भीतर तय होने की संभावना। -डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट): 100 दिन के अंदर बनकर तैयार होगा। -अनुमति के लिए मंत्रालय को रिपोर्ट: अगले 4 माह में भेजी जाएगी। -पार्किंग निर्माण: अधिकारियों का अनुमान है कि 18 माह में नई हाइड्रोलिक पार्किंग बनकर तैयार हो जाएगी। क्या होती है हाइड्रोलिक पार्किंग हाइड्रोलिक पार्किंग एक आधुनिक तकनीक है, जिसे मल्टी-लेवल कार पार्किंग सिस्टम भी कहा जाता है। इस तकनीक में हाइड्रोलिक लिफ्टों का इस्तेमाल करके वाहनों को एक के ऊपर एक या कम जगह में अधिक ऊंचाई पर पार्क किया जाता है। पारंपरिक पार्किंग की तुलना में कई गुना ज्यादा वाहन खड़ा करने की क्षमता रखती है। यह परियोजना न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। सकती है। संस्कृति जैन, आयुक्त, निगम

परिजनों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई: छिंदवाड़ा में कफ सिरप पीने से बच्ची की मौत की आशंका

छिंदवाड़ा  छिंदवाड़ा जिले में जहरीले कफ सिरप का संकट गहराता जा रहा है। बिछुआ में कफ सिरप के सेवन के बाद एक 5 महीने की बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने बच्ची को सिरप पिलाने के बाद उसकी जान जाने का आरोप लगाते हुए बिछुआ थाने में शिकायत दर्ज कराई है। आयुर्वेदिक सिरप पर संदेह बच्ची का नाम रुही मिनोटे (पिता संदीप मिनोटे, निवासी बिछुआ वार्ड नंबर 12) बताया जा रहा है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र के किसी निजी मेडिकल स्टोर से कफ सिरप खरीदकर बच्ची को पिलाया था, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जिस कफ सिरप पर संदेह है, वह आयुर्वेदिक है। घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और संदेह के घेरे में आए सिरप का पंचनामा बनाने की कार्रवाई कर रही है। परिजन इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए बिछुआ थाने पहुंचे हैं। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।  

कृषि संकट: MP में बेमौसम बारिश से धान, सरसों, मटर और तिल की फसल प्रभावित

भोपाल  वर्तमान समय प्रदेश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि अपना कहर बरपा रही है। प्रदेश  में कहीं भारी बारिश तो कहीं ओलावृष्टि हो रही है, इसके चलते किसान अपनी फसलों को लेकर बहुत चिंतित है। तेज हवा, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की लाखों रूपये की फसल बर्बाद हो गयी है। वर्तमान समय में रबी फसलों की कटाई का दौर चल रहा है। किसानों के सामने इस समय बहुत बड़ा संकट यह है  बेमौसम बारिश ने राज्य के कई क्षेत्रों में किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है। आगर मालवा, ग्वालियर-चंबल व विंध्य महाकोशल से फसलों के नुकसान की खबरें हैं। खेत खलिहानों में रखी कटी फसल और खेतों में खड़ी फसल को खासा नुकसान पहुंचा है। खंडवा में इस बार मौसम (MP Rains) ने पहले सोयाबीन की फसल को प्रभावित किया और अब फसल भीगने से मक्का में अंकुरण शुरू हो गया है। सूखने के लिए रखी उपज भीगने से काली भी पड़ रही है। 50 से 60 प्रतिशत नुकसान हुआ है। चक्रवात (Cyclone Montha) की वजह से रतलाम जिले में पांचवें दिन बुधवार को भी मावठे का असर बना रहा। इससे मटर की फसल खराब हो रही है, वहीं ज्यादातर किसान खेतों में जलजमाव, अत्यधिक नमी के चलते रबी की तैयारी व बोवनी नहीं कर पा रहे हैं। बुरहानपुर जिले की खकनार तहसील के 20 से ज्यादा गांवों में मक्का, सोयाबीन, कपास फसल भीगी है। किसानों को फसल सुखाने का मौका नहीं मिल रहा है। आलीराजपुर में मक्का, सोयाबीन और उड़द की फसलों को नुकसान की आशंका जताई जा रही है। उज्जैन के नागदा, बड़नगर और खाचरौद में खेतों में पानी भर गया है। गेहूं और मटर की फसल प्रभावित हुई है। धार के बदनावर क्षेत्र में चार घंटे में 76 मिमी बारिश हुई है। इससे खेतों में जलभराव की स्थिति बनी। खुले में पड़ी सोयाबीन और मक्का की फसल भीग गई। तेज हवा से पपीता के पौधे टूटकर गिर गए। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश मटर के फूल और फलियों दोनों के लिए हानिकारक है। गुणवत्ता और उपज दोनों पर असर पड़ेगा। महाकोशल-विंध्य में भी नुकसान महाकोशल-विंध्य के जिलों में भी फसलों को असमय बारिश से नुकसान पहुंचा है। डिंडौरी जिले में बारिश होने से सोयाबीन की फसल अधिक प्रभावित हुई है। दाने काले पड़ गए हैं। पककर तैयार धान की फसल भी प्रभावित हो रही है। बारिश से सोयाबीन,उड़द की फसल पहले ही खराब हो चुकी है। खेत में कटकर रखी धान की फसल भीग गई है, जिसमें अंकुरण होने का अंदेशा बना हुआ है। अभी बारिश के आसार बने हुए हैं, जिससे धान सहित अन्य फसलों और सब्जियों को भारी नुकसान हो सकता है। अनूपपुर में खेतों में पानी भरने से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। हालांकि कृषि विभाग के अनुसार 15 प्रतिशत से कम क्षति हुई है, जिसे नुकसान के दायरे में नहीं माना जाएगा। जल्द ही सर्वे शुरू होगा। ग्वालियर चंबल अंचल में बारिश ने रबी फसलों पर बरसाया कहर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में खरीफ के समय बारिश से फसल बर्बादी की बाद अब रबी के मौसम में तीन दिन की बारिश ने खेतों में खड़ी धान, बाजरा, मटर, तिल, ज्वार आदि की फसलों में करीब 50 से 60 प्रतिशत नुकसान कर दिया है। सरसों की बुवाई हो चुकी है, खेतों में पानी भरने से फसल खराब हो गई है। ग्वालियर, दतिया, श्योपुर आदि जिलों में धान की फसल को अधिक नुकसान पहुंचा है। ग्वालियर जिले में ही एक लाख 10 हजार हेक्टेयर में धान की फसल है। अभी तक 15 प्रतिशत फसल ही कट सकी है। ऐसे में बारिश से धान की खड़ी फसल जमीन पर गिरने इसे सबसे अधिक नुकसान हो रहा है। खेतों में पानी भरने से धान की बालियां काली पड़ने और अंकुरण का खतरा बढ़ गया है। ग्वालियर, मुरैना, भिंड में बाजरा भी खेतों में पका हुआ खड़ा है। बारिश से बाली के दाने काले पड़ने की आशंका है। कई आलू व मटर जैसी फसलों के पौधे सड़ गए हैं। इन फसलों में 60 से 70 प्रतिशत तक नुकसान होने की आशंका जताई गई है। मुरैना में बाजरे की जो फसल में 50 प्रतिशत से अधिक के नुकसान की आशंका जताई गई है। दतिया में करीब पांच सौ से अधिक गांवों में धान की फसल खेतों में बिछ गई है। श्योपुर में धान की फसल में 30 से 50 फीसदी तक नुकसान हुआ है। सरसों पूरी तरह नष्ट हो गई     यदि बारिश के साथ-साथ हवा भी चलेगी तो यह नुकसान अधिक होगा। आलू, सरसों, मटर एवं चना तथा मसूर में भी नुकसान है। सरसों की जो 10 दिन के अंदर बोई गई थी वह पूरी तरह नष्ट हो गई है। बारिश से धान की चमक कम होगी और गिरने की वजह से उत्पादन कम हो जाएगा। – डॉ. शैलेंद्र सिंह कुशवाह, वरिष्ठ विज्ञानी कृषि विज्ञान केंद्र ग्वालियर।  

कैलाश कुमार तिवारी की किस्मत चमकी: कृष्णा कल्याणपुर पट्टी से दो हीरे बरामद

पन्ना  पन्ना टाइगर रिजर्व के एक गाइड कैलाश कुमार तिवारी की कहानी इन दिनों सुर्खियों में है. मॉनसून के दौरान जंगल के गेट बंद हुए, तो कैलाश ने खाली समय में अपनी किस्मत आजमाई और पन्ना के हीरा खनन क्षेत्र कृष्णा कल्याणपुर पटी में खदान लगा दी. नतीजा हैरान करने वाला रहा. उन्हें अपनी पहली ही कोशिश में दो चमचमाते हुए हीरे मिले. कैलाश तिवारी ने दोनों हीरे पन्ना के हीरा कार्यालय में जमा करा दिए हैं. हीरा अधिकारी रवि पटेल ने हीरों की क्वालिटी की पुष्टि की है. इनमें पहला हीरा 1.56 कैरेट और जेम्स क्वालिटी (Gems Quality) का है. यह सबसे महंगा और डिमांड वाला होता है. जबकि दूसरा हीरा 1.35 कैरेट का है. यह मेले किस्म (Melee Quality) का कम चमक वाला, लेकिन मूल्यवान होता है.  हीरा अधिकारी रवि पटेल ने बताया, "इन दोनों हीरों को आगामी नीलामी में इन्हें रखा जाएगा. जेम्स क्वालिटी के हीरे की हीरा बाजार में अच्छी डिमांड होती है." कैलाश तिवारी पन्ना टाइगर रिजर्व में पर्यटकों को जंगल सफारी कराते हैं. उन्होंने बताया कि हर साल 30 जून से मॉनसून के चलते पार्क बंद हो जाता है. खाली समय का सदुपयोग करने के लिए उन्होंने हीरा कार्यालय से बकायदा पट्टा लिया और किस्मत आजमाई. कड़ी मेहनत के बाद उन्हें मंगलवार, 28 अक्टूबर को ये बेशकीमती रत्न मिले.  कैलाश ने कहा कि वह बहुत खुश हैं कि उन्हें पहली ही बार में हीरे मिल गए. नीलामी से मिलने वाले पैसों से वह अपने बच्चों की अच्छी पढ़ाई-लिखाई कराएंगे.

स्ट्रॉन्ग मौसम प्रणाली का प्रभाव: 24 घंटे में MP के पूर्वी जिलों में 4.5 इंच तक बारिश का खतरा

भोपाल   अरब सागर में बने डिप्रेशन (अवदाब) और बंगाल की खाड़ी में सक्रिय डीप डिप्रेशन (गहरा अवदाब) के साथ देश के उत्तरी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवाती परिसंचरण) प्रभावी है। इन तीनों मौसमी प्रणालियों का संयुक्त असर अब मध्य प्रदेश में भी दिखाई दे रहा है। बुधवार को प्रदेश के कई जिलों में बारिश हुई, जबकि भोपाल, इंदौर और उज्जैन में तेज हवाओं के चलते दिन का तापमान सामान्य से नीचे चला गया। उज्जैन में दिन का अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। अरब सागर में उठे 'मोंथा' चक्रवात का प्रभाव भी प्रदेश के कई हिस्सों में देखने को मिल रहा है। हवा की रफ्तार बढ़ने से ठंडक में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गुरुवार को भी सिस्टम का असर रहेगा। खासकर पूर्वी और दक्षिणी हिस्से में सिस्टम स्ट्रॉन्ग होगा। 12 जिले- सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में अगले 24 घंटे में ढाई से साढ़े 4 इंच तक बारिश हो सकती है। वहीं, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, जबलपुर, कटनी और पन्ना में हल्की बारिश, गरज-चमक और आंधी का असर बना रहेगा। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भी हवा की रफ्तार आम दिनों की तुलना में अधिक रहेगी। पूर्वी और दक्षिणी जिलों में अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को भी सिस्टम का असर जारी रहेगा। खासकर पूर्वी और दक्षिणी मध्य प्रदेश में यह सिस्टम और अधिक सक्रिय रहेगा। अगले 24 घंटे में इन 12 जिलों-सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में 2.5 से 4.5 इंच तक बारिश की संभावना है। वहीं, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, जबलपुर, कटनी और पन्ना जिलों में हल्की बारिश के साथ गरज-चमक और आंधी का असर बना रहेगा। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भी हवाएं आम दिनों की तुलना में तेज गति से चलने की संभावना है। 2 नवंबर तक बना रहेगा बारिश का दौर हालांकि मध्य प्रदेश से मानसून की आधिकारिक विदाई हो चुकी है, लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि बारिश का सिलसिला अभी थमा नहीं है। 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक प्रदेश में बौछारें पड़ने की संभावना बनी रहेगी। 30 अक्टूबर को सबसे अधिक वर्षा गतिविधि रहने की उम्मीद है। इस बार कड़ाके की सर्दी के आसार मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, नवंबर से सर्दी का दौर शुरू होकर जनवरी के अंत तक चरम पर रहेगा। इस बार फरवरी तक ठंडक बनी रहने की संभावना जताई गई है। अनुमान है कि यह सर्दी 2010 के बाद की सबसे तीव्र ठंड साबित हो सकती है। सर्दियों के दौरान सामान्य से अधिक वर्षा भी देखने को मिल सकती है। 'मोंथा' तूफान का भी असर, हवा की रफ्तार बढ़ी, पारा लुढ़का इधर, तूफान 'मोंथा' का असर भी प्रदेश में देखने को मिल रहा है। कई शहरों में हवा की रफ्तार बढ़ गई है। इस वजह से ठंड का असर भी बढ़ा है। बुधवार को दिन के तापमान की बात करें तो 20 शहर ऐसे रहे, जहां पारा 26 डिग्री से नीचे रहा। भोपाल में 25.2 डिग्री, इंदौर में 25.1 डिग्री, उज्जैन में 23 डिग्री, जबलपुर में 28.8 और ग्वालियर में पारा 24.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, बैतूल में 26.5 डिग्री, दतिया-गुना में 25.6 डिग्री, धार में 24.9 डिग्री, पचमढ़ी में 24 डिग्री, रायसेन में 27.4 डिग्री, रतलाम में 24.6 डिग्री, श्योपुर में 24.4 डिग्री, शिवपुरी में 24 डिग्री रहा। पूर्वी हिस्से के छिंदवाड़ा, दमोह, खजुराहो, मंडला, नरसिंहपुर, नौगांव, रीवा, सागर, सतना, सीधी, टीकमगढ़, उमरिया और बालाघाट में पारा 28 डिग्री से कम दर्ज किया गया। इधर, रात के तापमान में भी गिरावट देखने को मिली है। आगे यह अलर्ट…2 नवंबर तक बारिश का दौर बता दें कि मध्य प्रदेश से मानसून की आधिकारिक विदाई हो चुकी है, लेकिन बारिश का दौर जारी है। 31 अक्टूबर, 1-2 नवंबर को भी प्रदेश में बारिश का दौर बना रहेगा। 30 अक्टूबर को बारिश की ज्यादा एक्टिविटी रहेगी। नवंबर-जनवरी में पड़ेगी कड़ाके की सर्दी मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश में नवंबर से कड़ाके की ठंड का दौर शुरू हो जाता है, जो जनवरी तक रहता है। लेकिन इस बार फरवरी तक ठंड का असर रहने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले सर्दियों के मौसम में 2010 के बाद सबसे भीषण ठंड का एहसास हो सकता है। सर्दियों के दौरान इस बार सामान्य से ज्यादा बारिश भी देखने को मिल सकती है। पूरे एमपी से विदा हो चुका मानसून मौसम विभाग के अनुसार, पूरे प्रदेश से मानसून विदा हो गया है। इस साल मानसून 3 महीने 28 दिन एक्टिव रहा। 16 जून को प्रदेश में मानसून की एंट्री हुई थी और 13 अक्टूबर को वापसी हुई। इस बार प्रदेश में मानसून की 'हैप्पी एंडिंग' रही। भोपाल, ग्वालियर समेत 30 जिलों में 'बहुत ज्यादा' बारिश दर्ज की गई। ओवरऑल सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला गुना है। जहां पूरे सीजन में 65.7 इंच पानी गिर गया, जबकि श्योपुर में 216.3% बारिश हुई। शाजापुर ऐसा जिला है, जहां सबसे कम 28.9 इंच (81.1%) ही बारिश हुई है। मानसूनी सीजन में मौसम विभाग ने प्रदेश में 106 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान जताया था, लेकिन 15 प्रतिशत पानी ज्यादा गिर गया। इंदौर, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर संभाग के 50 जिलों में बारिश का कोटा फुल रहा। वहीं, भोपाल, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग के 4 जिले- उज्जैन, शाजापुर, बैतूल और सीहोर में 81.1 से 98.6 प्रतिशत बारिश हुई। इन जिलों में कोटा पूरा नहीं हो पाया। इनमें से 3 जिले उज्जैन, सीहोर और बैतूल में आंकड़ा 94% से ज्यादा ही है। इस वजह से ये सामान्य बारिश के आसपास है, लेकिन शाजापुर 'बारिश की भारी कमी' की कैटेगरी में है। यहां कोटे का 81 प्रतिशत पानी ही गिरा।  

140 साल पुराने रणजीत हनुमान मंदिर में अन्नकूट का आयोजन, पूड़ी-भजियों से सजी प्रसादी

इंदौर  इंदौर के करीब 140 साल पुराने रणजीत हनुमान मंदिर में शुक्रवार को चलित अन्नकूट है। यहां 50 हजार भक्तों के लिए प्रसादी में पूड़ी, राम भाजी, नुक्ती, भजिए बनाए जा रहे हैं। अन्नकूट महोत्सव चलित स्वरूप में होगा यानी भक्त लाइन से आकर पैकेट में पूड़ी, सब्जी, नुक्ती बाँटी जयेगी।  चलित अन्नकूट महोत्सव का यह दूसरा साल है। दो साल पहले तक मंदिर के ही ग्राउंड में भक्तों को सुव्यवस्थित रूप से बैठाकर भोजन कराया जाता था।इसमें काफी समय लगता था और भक्तों को काफी इंतजार करना पड़ता था। इसे देखते हुए व्यवस्था में बदलाव किया गया।मंदिर के ग्राउंड में तैयार हो रही प्रसादी मंदिर परिसर में बने ग्राउंड में 4 से ज्यादा अस्थायी भट्टियां बनाई हैं। बुधवार को भट्टी पूजन करने के साथ ही नुक्ती बनाने का काम शुरू हो गया। गुरुवार रात 12 बजे तक ये भट्टियां चलती रहेगी। 8 क्विंटल बेसन से नुक्ती बनाई जा रही है। अलग-अलग भट्टियों पर तेल में बेसन से नुक्ती बनाई जा रही थी, जिसके बाद नुक्ती को चाशनी में डाला जा रहा था।बाद में इन नुक्ती को एक बड़े थाल में निकालकर मंदिर के अन्न क्षेत्र में रखा गया। इसके अलावा 8 क्विंटल बेसन से भजिए बनेंगे।गुरुवार को राम भाजी और पूड़ियां तलने का काम किया जाएगा। राम भाजी बनाने के लिए भक्त मंडल की महिला सदस्य भी इसमें अपनी भागीदारी देंगी। वे गुरुवार सुबह 9 बजे से ही मंदिर परिसर में सब्जी को धोने और काटने का काम करेगी। इसके लिए मंदिर के वॉट्सऐप ग्रुप पर भी मैसेज भेजा गया है।जिसमें लिखा है कि भोग में बनने वाली राम भाजी की सब्जी सुधारने में जो सेवा देना चाहते है वे सुबह 9 बजे मंदिर परिसर में आमंत्रित है। इसमें बड़ी संख्या में महिला सदस्य शामिल होंगी। मंदिर स्थापना से ही होता आया है अन्नकूट महोत्सव मंदिर के मुख्य पुजारी पं.दीपेश व्यास ने बताया कि मंदिर को करीब 140 साल हो चुके हैं। मंदिर की स्थापना के साथ ही अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया जाता आ रहा है और हनुमान जयंती के बाद आने वाले मंगलवार को इसमें भंडारे का आयोजन किया जाता है। मंदिर की परंपरानुसार बाबा की आरती होने के बाद शहर के 101 मंदिरों में यहां से प्रसाद भी भेजा जाएगा। 200 से 250 लोगों की टीम तैयार कर रही प्रसादी मंदिर में पिछले 12 सालों से प्रसादी तैयार करने वाले महेश गर्ग ने बताया कि मंदिर में काम करने के लिए 200 से 250 लोगों की टीम लगती है। बुधवार सुबह 8 बजे भट्टी पूजन हुआ जो गुरुवार रात 12 बजे तक जारी रहेगा। 50 हजार लोगों के लिए प्रसादी तैयार की जा रही है। भोजन प्रसादी तैयार करने में 100 से 150 लोग लगातार लगे रहते है। महोत्सव शुरू होने के बाद परोसगारी करने के लिए 100 लोगों की टीम बढ़ जाती है। इस प्रकार 200 से 250 लोगों की टीम इसमें लगती है जो भोजन तैयार करने से लेकर परोसगारी करने में लगती है। 600 से 700 भक्त मंडल के सदस्य संभालेंगे व्यवस्था पं.दीपेश व्यास ने बताया कि गुरुवार को अन्नकूट महोत्सव के लिए भक्त मंडल के 600 से 700 सदस्य अपनी सेवा देंगे। वे अलग-अलग व्यवस्थाओं को संभालेंगे। इसमें भक्तों की एंट्री से लेकर उनके बाहर निकलने तक पैकेट देने से लेकर प्रसादी परोसने तक की व्यवस्था भक्त मंडल के सदस्य संभालेंगे। इसके अलावा पुलिस प्रशासन की व्यवस्था भी यहां रहेगी। 100 से ज्यादा पुलिस बल भी यहां तैनात रहेगा जो व्यवस्थाओं को संभालेगा। इसके अलावा पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी मौजूद रहेंगे। ग्राउंड में बैठते थे भक्त, व्यवस्था में किया बदलाव पं.व्यास ने बताया कि मंदिर परिसर के ग्राउंड में 1700 से 1800 भक्त एक बार प्रसादी ग्रहण करने के लिए बैठते थे, इसके चलते ग्राउंड के बाहर भक्तों की भारी भीड़ जमा हो जाती थी और कई घंटे उन्हें इंतजार करना पड़ता था। कई बार धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन जाती थी। जिससे भक्तों का काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इसे देखते हुए पिछले साल ही व्यवस्था में बदलाव किया गया और चलित अन्नकूट की शुरुआत की गई। चलित अन्नकूट से भक्तों को प्रसादी के लिए ज्यादा समय नहीं लगेगा। 15 से 20 मिनट के अंदर ही भक्तों को प्रसादी आसानी से मिल सकेगी। अलग-अलग काउंटर पर भक्तों को पैकेट, पूड़ी-सब्जी, नुक्ती-भजिए की प्रसादी मिल जाएगी और वे प्रसादी लेकर ग्राउंड के बाहर जा सकेंगे।

निर्यात में नई उड़ान: मध्यप्रदेश बना आर्थिक प्रगति का अग्रदूत

निर्यात में नई उड़ान: मध्यप्रदेश बना आर्थिक प्रगति का अग्रदूत वैश्विक बाजार में मध्यप्रदेश की धमक: निर्यात में रिकॉर्ड सफलता भोपाल  मध्यप्रदेश ने निर्यात क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करते हुए अब तक का सर्वोच्च निर्यात 66,218 करोड़ रु. दर्ज किया है। Federation of Indian Export Organisations (FIEO) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 66,218 करोड़ रु. और आईटी कंपनियों (SEZs) का निर्यात 4,038 करोड़ रु. रहा। निरंतर औद्योगिक विकास और आर्थिक सशक्तिकरण के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश की राष्ट्रीय निर्यात रैंकिंग 15वें से बढ़कर 11वें स्थान पर पहुँची है। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि प्रदेश के अनेक निर्यातक अपने उत्पादों का निर्यात गुजरात और महाराष्ट्र के बंदरगाहों के माध्यम से करते हैं, जिससे उनके आँकड़े प्रायः अन्य राज्यों के खाते में दर्ज हो जाते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मौजदगी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा हाल ही में मध्यप्रदेश एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी का शुभारंभ किया। इस नीति के तहत निर्यातकों को प्रोत्साहन, वित्तीय सहायता और विभिन्न सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं, जिससे प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुँचाने में नई गति मिली है। प्रदेश सरकार और मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) द्वारा निर्यात वृद्धि के उद्देश्य से वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) एवं एक्सपोर्ट प्रमोशन विषयक कार्यशालाएँ और प्रदर्शनियाँ निरंतर आयोजित की जा रही हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य प्रदेश के कारीगरों, किसानों, उद्यमियों और MSME इकाइयों को अंतरराष्ट्रीय मानकों, निर्यात प्रक्रियाओं और वैश्विक अवसरों से जोड़ना है। इसी क्रम में 28 अक्टूबर को सागर में कृषि उपकरणों के निर्यात पर कार्यशाला हुई। अगर मालवा में 29 अक्टूबर को संतरा उत्पादों के प्रसंस्करण पर, 30 अक्टूबर को बैतूल में सागौन उत्पादों के वैश्विक बाजार पर, 31 अक्टूबर को इंदौर में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पर और 4 नवम्बर को श्योपुर में टमाटर प्रसंस्करण और निर्यात संभावनाओं पर आयोजित की जाएँगी। इन कार्यशालाओं में APEDA, उद्यानिकी विभाग, हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद, कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, ECGC, SBI, EXIM Bank, भारतीय डाक विभाग और प्रमुख ई-कॉमर्स मंचों के विशेषज्ञ भाग लेंगे। विशेषज्ञ ब्रांडिंग, पैकेजिंग, GI टैगिंग, गुणवत्ता परीक्षण, वित्तीय सहायता, बीमा, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल मार्केटिंग जैसे विषयों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन देंगे। मध्यप्रदेश की असली पहचान उसकी कृषि, परंपरा और हुनर में निहित है। प्रदेश जहाँ फलों, सब्जियों, मसालों, अनाज और वनोपज के उत्पादन में अग्रणी है, वहीं चंदेरी साड़ी, जरदोज़ी कढ़ाई, लकड़ी के खिलौने, गोंड चित्रकला, रत्न और कृषि आधारित उत्पाद प्रदेश की वैश्विक पहचान बन रहे हैं। मध्यप्रदेश स्थापना दिवस (1 नवम्बर 2025) पर एक भव्य प्रदर्शनी और लाइव डेमोंस्ट्रेशन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रदेश के विविध ODOP उत्पाद प्रदर्शित होंगे। कारीगर अपने उत्पादों का लाइव निर्माण कर आगंतुकों को प्रदेश की परंपरा, परिश्रम और कौशल से परिचित कराएँगे। यह आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि का जीवंत उदाहरण होगा। उज्जैन स्थित एकता मॉल इस पहल का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ देशभर के GI टैग और ODOP उत्पाद एक ही छत के नीचे प्रदर्शित और विक्रय किए जा रहे हैं। यह मॉल स्थानीय कारीगरों को मंच प्रदान करने के साथ उनके उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। "एक जिला – एक उत्पाद (ODOP)" केवल एक योजना नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की आत्मा, परंपरा और आर्थिक शक्ति का उत्सव है। यह पहल प्रदेश को एक सशक्त एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, जो हर जिले, हर गाँव और हर कारीगर की कहानी को वैश्विक मंच तक पहुँचा रही है।  

संविदा पंचायत कर्मियों का मानदेय अब समय पर: मंत्री पटेल ने दिए सख्त निर्देश

मंत्री  पटेल ने संविदा पंचायत कर्मियों के समय पर मानदेय भुगतान के दिए निर्देश पंचायत और ग्रामीण विकास की विभागीय समीक्षा बैठक हुई भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल ने मंत्रालय में पंचायत और ग्रामीण विकास की विभागीय समीक्षा बैठक ली।उन्होंने ग्राम पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, जनपद एवं जिला पंचायत भवनों के निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। कई जिलों में कार्य तीव्र गति से प्रगति पर हैं। जिन स्थानों पर पोर्टल पर अपडेट शेष हैं, वहां शीघ्र फील्ड निरीक्षण एवं पोर्टल अद्यतन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी भवनों की प्रगति समय-सीमा में पोर्टल पर अपलोड करें। मनरेगा अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मियों के मानदेय भुगतान की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि तकनीकी कारणों से भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हुई। मंत्री  पटेल ने निर्देश दिए कि संबंधित विभागों के समन्वय से आरबीआई स्तर की तकनीकी अड़चनें दूर कर एक सप्ताह के भीतर सभी लंबित भुगतान सुनिश्चित किए जाएं। मंत्री  पटेल ने ग्राम रोजगार सहायकों से संबंधित लंबित मामलों को शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी ब्लॉक स्तर पर लंबित वेतन एवं सेवा संबंधी मामलों की सूची तैयार कर 15 दिवस के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उप-यंत्रियों से संबंधित वेतन, नियमितीकरण एवं सेवा शर्तों के बिंदुओं पर चर्चा की गई। मंत्री  पटेल ने कहा कि EPF/NPS जैसे मुद्दों पर श्रम मंत्रालय एवं वित्त विभाग से स्पष्ट दिशा-निर्देश प्राप्त कर नीति स्तर पर आवश्यक सुधार शीघ्र किए जाएंगे। बैठक में मंत्री  पटेल ने कहा कि विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और गति लाना प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी पोर्टल अपडेट, भुगतान प्रक्रियाएं और मानव संसाधन से जुड़े मुद्दे समय-सीमा में करें, जिससे योजनाओं का लाभ समय पर ग्रामीणों तक पहुंचे। मंत्री  पटेल ने निर्देश दिए कि सभी जिलों में भवन निर्माण की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से पोर्टल पर अपडेट की जाएं। संविदा कर्मियों एवं रोजगार सहायकों के लंबित भुगतान शीघ्र निपटाए जाएं। उप-यंत्रियों के ज्ञापन बिंदुओं पर विभागीय समन्वय स्थापित कर नीति सुधार किया जाए। आगामी समीक्षा बैठक में प्रत्येक बिंदु की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। बैठक में अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मती दीपाली रस्तोगी, आयुक्त मनरेगा  अवि प्रसाद, संचालक पंचायत  छोटे सिंह एवं मिशन संचालक राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन मती हर्षिका सिंह और अधिकारी उपस्थित रहे।

मध्‍यप्रदेश पुलिस द्वारा राष्ट्रीय एकता दिवस 31 अक्टूबर को जिलों में ‘एकता दौड़

भोपाल लौह पुरुष एवं देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर 31 अक्टूबर 2025 को पूरे देश में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाएगा। इस उपलक्ष्य में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा राज्य के सभी जिलों और थाना स्तर पर सुबह 8 बजे “एकता दौड़ (Run for Unity)” का आयोजन किया जाएगा। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने सभी जिलों को निर्देश जारी किए हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता, अखंडता और समरसता का संदेश जन-जन तक पहुँचाना है। “एकता दौड़” में युवा, खिलाड़ी, नगर एवं ग्राम रक्षा समिति के सदस्य, विद्यालय और महाविद्यालयों के विद्यार्थी, एनसीसी एवं एनएसएस कैडेट्स, सृजन समूह की बालिकाएँ, अभिमन्यु सामुदायिक पुलिस के बालक, पुलिस कर्मी और विसबल वाहनियों के पुलिस कर्मी भाग लेंगे। दौड़ का मार्ग लगभग 3 किलोमीटर का होगा और निर्धारित रूट को नो-व्हीकल जोन घोषित किया जायेगा। पुलिस महानिदेशक ने निर्देश दिए हैं कि कार्यक्रम स्‍थल पर पानी, ग्लूकोज़, फर्स्ट एड बॉक्स तथा एम्बुलेंस जैसी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएं। प्रारंभिक और समापन स्थल पर राष्ट्रीय एकता दिवस से संबंधित पोस्टर, बैनर और हॉर्डिंग्स लगाए जाएं। पुलिस अधीक्षक मुख्यालय में रहकर कार्यक्रम में भाग लेंगे जबकि अन्य अधिकारी अपने-अपने थाना क्षेत्रों में उपस्थित रहेंगे। डीजीपी श्री मकवाणा ने उप पुलिस महानिरीक्षक एवं विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, पुलिस मुख्यालय, भोपाल श्री विनीत कपूर, (मो. नं. 9425150465) को प्रदेश स्तर पर कार्यक्रम का नोडल अधिकारी नियुक्‍त किया है। जिला स्तर पर नोडल अधिकारी संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक रहेंगे। डीजीपी श्री कैलाश मकवाणा ने कहा कि “Run for Unity” कोई प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता का संदेश फैलाने का जन-अभियान है। उन्‍होंने नागरिकों से आयोजन में अनुशासित और उत्साहपूर्ण सहभागिता करने की अपील की है।