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MP Transco ने व्हाट्सएप को कहा अलविदा, अब स्वदेशी ऐप ‘अराताई’ का सफल प्रयोग

भोपाल “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में कदम बढ़ाते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने भारत में निर्मित स्वदेशी मैसेजिंग ऐप अराताई का प्रयोग शुरू कर दिया है। ज़ोहो कॉर्प द्वारा विकसित यह ऐप विदेशी प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप का सुरक्षित और मजबूत विकल्प माना जा रहा है। एम.पी. ट्रांसको में सबसे पहले शहडोल डिवीजन के कार्यपालन अभियंता चंद्रभान कुशवाहा ने कार्यालयीन संवाद और फाइल शेयरिंग के लिए स्वदेशी अराताई का उपयोग प्रारंभ किया है। उन्होंने बताया कि “अराताई पूरी तरह भारत में विकसित सुरक्षित और विश्वसनीय प्लेटफॉर्म है, जिससे विभागीय संवाद को स्वदेशी तकनीक के माध्यम से सशक्त बनाया जा सकेगा।” इस ऐप में उच्च स्तरीय डेटा सुरक्षा, ग्रुप मैसेजिंग, मल्टी-डिवाइस सपोर्ट और तेज़ फ़ाइल शेयरिंग जैसी सुविधाएं हैं। इसका डेटा भारत के सर्वरों पर सुरक्षित रहता है। श्री कुशवाहा की पहल से शहडोल डिवीजन का संपूर्ण आंतरिक संचार अब अराताई के माध्यम से हो रहा है। एम.पी. ट्रांसको की यह पहल डिजिटल आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीकी समाधानों को प्रोत्साहित करने की दिशा में सराहनीय कदम है।  

भावांतर योजना से किसानों को मिले अधिकतम लाभ, पंजीयन केंद्र बढ़ाएं, प्रचार तेज़ करें : मंत्री सुश्री भूरिया

भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्राथमिकता वाली भावांतर भुगतान योजना की प्रगति की समीक्षा आज महिला एवं बाल विकास मंत्री और मंदसौर-नीमच जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई। बैठक में मंदसौर और नीमच जिलों के जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सुश्री भूरिया नेवीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को योजना का लाभ सुचारु रूप से और समय पर मिले, यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त करना है और सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि कोई भी पात्र किसान इससे वंचित न रहे। उन्होंने मंडियों एवं उपमंडियों में हेल्प डेस्क स्थापित करने, पर्याप्त मात्रा में पंजीयन केंद्र संचालित करने और प्रचार-प्रसार के माध्यम से योजना की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि मंदसौर जिले में अब तक 16,385 किसानों का पंजीयन हो चुका है और 256 पंजीयन केंद्रों के माध्यम से यह प्रक्रिया लगातार जारी है। इनमें से 68 केंद्र सहकारी समितियों में संचालित हैं। जिला प्रशासन ने खरीदी प्रक्रिया के लिए मंडियों में पेयजल, छांव, तकनीकी सहायता, रियल टाइम स्टॉक मॉनिटरिंग और मॉडल रेट निगरानी की प्रभावी व्यवस्था की है। पंजीयन कार्य 3 से 17 अक्टूबर तक चलेगा, जबकि खरीदी प्रक्रिया 24 अक्टूबर से 15 जनवरी 2026 तक प्रस्तावित है। नीमच जिले में भी योजना के अंतर्गत पंजीयन कार्य तेज़ी से चल रहा है। अब तक 7,000 से अधिक किसानों का पंजीयन हो चुका है और जिले में 71 पंजीयन केंद्र कार्यरत हैं। इनमें से 68 सहकारी समितियों में एवं 3 मार्केटिंग सोसायटी में संचालित हैं। मंडियों में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं और प्रचार के लिए पोस्टर, बैनर, पंपलेट के साथ कृषि गोष्ठियों का भी आयोजन किया जा रहा है। मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। भावांतर योजना के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाकर उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे प्रत्येक स्तर पर यह सुनिश्चित करें कि किसानों को कोई परेशानी न हो और योजना का लाभ उन्हें पारदर्शी एवं सरल प्रक्रिया के तहत प्राप्त हो।  

मेधावी प्रशिक्षणार्थियों की मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सौजन्य भेंट, ITI में चमकी प्रतिभा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सोमवार को मंत्रालय में मध्यप्रदेश के विभिन्न औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आईटीआई) के मेधावी प्रशिक्षणार्थियों ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने सभी होनहार प्रशिक्षणार्थियों को उनकी विशिष्ट उपलब्धियों के लिए बधाई देकर उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल, विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल सहित कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के अधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से बैतूल जिले की सुश्री त्रिशा तावड़े (ऑल इंडिया में केंद्रीय जोन की टॉपर), भोपाल जिले की सुश्री चंचल सैवारिक (ऑल इंडिया में ट्रेड कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (VI & OD) में महिला टॉपर), जबलपुर जिले की सुश्री पूजा जाटव (ऑल इंडिया में ट्रेड ड्रोन तकनीशियन में महिला टॉपर), उज्जैन जिले के श्री श्याश महेश्वरी (ऑल इंडिया में ट्रेड फैशन डिजा़इन एंड टेक्नोलॉजी में पुरुष टॉपर, बालाघाट जिले के श्री अमन गजभिये (ऑल इंडिया में ट्रेड मेसन बिल्डिंग कंस्ट्रक्टर में पुरुष टॉपर) जबलपुर जिले की सुश्री श्रुति विश्वकर्मा (ऑल इंडिया में ट्रेड मैकेनिक (ट्रैक्टर) में महिला टॉपर, बैतूल जिले के श्री अरविंद कुमरे (ऑल इंडिया में ट्रेड मैकेनिक कंप्यूटर हार्डवेयर में पुरुष टॉपर), बैतूल जिले की सुश्री निकिता तायवडे (ऑल इंडिया में ट्रेड मैकेनिक कंप्यूटर हार्डवेयर में महिला टॉपर), भोपाल जिले के श्री अभिजीत सिंह सिसोदिया (ऑल इंडिया में ट्रेड मिल्क एवं मिल्क प्रोडक्ट तकनीशियन में पुरुष टॉपर) एवं खरगोन जिले के श्री शिवम यादव (ऑल इंडिया में ट्रेड स्टेनोग्राफर एवं सेक्रेटेरियल असिस्टेंट (हिंदी) में पुरुष टॉपर) ने भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को राज्यमंत्री श्री टेटवाल ने इन प्रशिक्षणार्थियों की विशिष्ट उपलब्धियों से अवगत कराया। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 प्राप्त तीन शिक्षकों ने भी की भेंट मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सोमवार को मंत्रालय में ही राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 प्राप्त मध्यप्रदेश के तीन शिक्षकों ने भी सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी शिक्षकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।  

भारत मंडपम में चमका मध्यप्रदेश, गति शक्ति के मंच पर राज्य की तकनीकी पहल को मिली सराहना

डेटा और पारदर्शिता से गढ़ रहे हैं प्रदेश का भविष्य भोपाल भारत मंडपम में सोमवार को उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग द्वारा प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन में देशभर के मंत्रालयों, राज्यों, तकनीकी संस्थानों, विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की इस दूरदर्शी पहल की उपलब्धियों को साझा करना और इससे जुड़े नए तकनीकी नवाचारों को प्रदर्शित करना था। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 13 अक्टूबर 2021 को प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान की शुरुआत “एक भारत – एक योजना” के विजन के साथ की थी। इस योजना का उद्देश्य देश के सभी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना था जिससे योजना निर्माण, समन्वय और क्रियान्वयन में गति और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना भारत की विकास यात्रा का मजबूत इंजन बन चुकी है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक नीति नहीं बल्कि ‘Whole-of-Government Approach’ का जीवंत उदाहरण है, जहाँ सभी मंत्रालय और राज्य एक साझा लक्ष्य की दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं। श्री गोयल ने बताया कि अब तक इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से 13.59 लाख करोड़ रूपये की 293 बड़ी परियोजनाएँ मूल्यांकित की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि गति शक्ति योजना ने योजना और निष्पादन के बीच की दीवारें तोड़ दी हैं और भारत को विकास के नए युग में प्रवेश कराया है। उन्होंने विशेष रूप से मध्यप्रदेश सरकार और लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह की सराहना करते हुए कहा की “मध्यप्रदेश ने दिखाया है कि जब तकनीक, दृष्टि और निष्ठा एक साथ आती हैं तो विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ जाती है। श्री राकेश सिंह जी और उनकी टीम ने गति शक्ति के सिद्धांतों को जमीनी स्तर पर उतारकर एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत किया है, जिससे अन्य राज्य भी प्रेरणा ले सकते हैं।” राज्य मंत्री श्री जतिन प्रसाद ने कहा पीएम गतिशक्ति विकसित भारत 2047 की नीव रखने वाला एम महत्वपूर्ण कदम है। यह प्रधान मंत्री जी की दूर दृष्टि का ही परिणाम है की आज हम पीएम गतिशक्ति के चौथी वर्षगांठ मे इन उपलब्धियों को सेलिब्रेट कर रहें है।   गति शक्ति ने सड़क निर्माण को विज्ञान और तकनीक से जोड़ा : मंत्री श्री राकेश सिंह मध्यप्रदेश के लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की “गति शक्ति” योजना ने न केवल देश के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण को तेज किया है बल्कि राज्य सरकारों को भी तकनीक आधारित निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग ने भास्कराचार्य राष्ट्रीय संस्थान (BISAG–N) के सहयोग से गति शक्ति प्लेटफॉर्म को अपनी कार्यप्रणाली का हिस्सा बना लिया है। इससे विभाग में पारदर्शिता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जवाबदेही में अभूतपूर्व सुधार आया है। मंत्री श्री सिंह ने बताया कि विभाग ने “लोक निर्माण सर्वेक्षण मोबाइल ऐप” विकसित किया है, जिसके माध्यम से प्रत्येक पुल, सड़क और भवन की स्थिति ऑनलाइन दर्ज की जा रही है। अब इंजीनियरिंग टीमों से लेकर मुख्यालय तक, हर स्तर पर कार्य की स्थिति रियल टाइम में देखी जा सकती है। उन्होंने बताया कि विभाग ने अब तक राज्य की 95% सड़कों की GIS आधारित मैपिंग पूरी कर ली है। इस प्रक्रिया से सड़कों के वास्तविक नेटवर्क और स्थिति की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो गई है। मंत्री श्री सिंह ने कहा की गतिशक्ति प्लेटफॉर्म के माध्यम से राज्य में सात नए ग्रीनफील्ड एलाइनमेंट भी चिन्हित किए गए हैं, जिन पर डीपीआर निर्माण का कार्य जारी है। अब सड़कें केवल जनसंख्या या यातायात के आधार पर नहीं, बल्कि भूमि, पर्यावरणीय संतुलन और भौगोलिक विविधता को ध्यान में रखकर तय की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि गति शक्ति पोर्टल की मदद से अब बजट में दोहराव वाली सड़क परियोजनाओं की पहचान संभव हो पाई है। पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर बजट के लिए प्रस्तावित सड़कों को मार्क करके न सिर्फ ड्यूप्लकैशन को पहचान जा सकता है बल्कि सड़क परियोजनाओं की स्वीकृति मे भौगोलिक संतुलन भी बेहतर रूप मे स्थापित किया जा सकता है। मंत्री श्री सिंह ने बताया की लोक निर्माण विभाग की लोक परियोजना प्रबंधन प्रणाली (LPPP) और रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम (RAMS) को गति शक्ति पोर्टल से जोड़ा जा रहा है, जिससे किसी भी सड़क की निर्माण प्रगति और रखरखाव की स्थिति एक क्लिक पर देखी जा सकेगी। विभाग ने “लोकपथ मोबाइल ऐप” को भी गति शक्ति प्लेटफॉर्म से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की है, जिससे नागरिक सीधे अपनी शिकायतें दर्ज कर सकेंगे और उनका समाधान ऑनलाइन देख पाएंगे। इस ऐप से सड़क मरम्मत, गड्ढों की स्थिति और कार्य की प्रगति की जानकारी रियल टाइम में मिल सकेगी। अब विभाग में सड़क निर्माण की समयसीमा पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर तय की जाएगी। पीएम गतिशक्ति प्लेटफॉर्म पर तैयार हो रहे विशेष मॉड्यूल का उपयोग कर मिट्टी, मौसम, स्थलाकृति और ऐतिहासिक डेटा के विश्लेषण से यह तय किया जाएगा कि किस इलाके में कौन सा कार्य कितने समय में पूरा किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि विभाग ने अगस्त 2025 में 1632 इंजीनियरों को गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर प्रशिक्षित किया है जिससे वे एलाइनमेंट निर्धारण, डिजाइनिंग और डीपीआर सत्यापन जैसे तकनीकी कार्यों में दक्ष बन सकें। गुणवत्ता निगरानी में नया मॉडल — रैंडम इंस्पेक्शन से जवाबदेही बढ़ी मंत्री श्री सिंह ने बताया कि विभाग में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए रैंडम इंस्पेक्शन सिस्टम लागू किया गया है। हर माह की 5 और 20 तारीख को मुख्य अभियंताओं की टीमें जिलों में जाकर निरीक्षण करती हैं और निरीक्षण स्थलों का चयन रैंडम सॉफ्टवेयर से होता है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और गुणवत्ता नियंत्रण मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि गतिशक्ति पोर्टल की सहायता से अब इन निरीक्षणों और भी बेहतर और जवाबदेह बनाया जा रहा है। अपने संबोधन में श्री राकेश सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय मंत्री श्री पीयूष गोयल और राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन से मध्य प्रदेश आज गति शक्ति के क्षेत्र में “लीडर स्टेट” के रूप में अपनी … Read more

सरल, सहज और आत्मीय है,’यादों का सिलसिला’ : डीजीपी मकवाना

जीवन लौटकर नहीं आता, इसलिए संस्मरण मधुर होते हैं : एन के त्रिपाठी भोपाल  गत दिवस ,पुलिस ऑफ़िसर्स मेस में , पूर्व डीजीपी नरेंद्र कुमार ( एन के ) त्रिपाठी,  की पुस्तक ‘यादों का सिलसिला’ का विमोचन करते हुए पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना ने कहा कि यादों का सिलसिला किताब सरल सहज और आत्मीय है। इसमें कई संस्मरण में संवेदनाएं भी समाहित हैं। न्याय और प्रक्रिया का द्वंद भी देखने को मिलता है। पुलिस अधिकारियों को इसे जरूर पढ़ना चाहिए।  कार्यक्रम की अध्यक्षता माखन लाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी ने की एवं विशिष्ट अतिथि श्री मनोज श्रीवास्तव थे। इस अवसर पर अनेक पूर्व एवं वर्तमान पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम में चीफ इलेक्शन कमिश्नर एवं  वरिष्ठ चिंतक श्री मनोज श्रीवास्तव ने पुस्तक पर  टिप्प्णी करते हुए कहा कि यादों का सिलसिला पुस्तक यादों के प्रभाव को कम नहीं करती, इसमें जीवन भर की यादें ऑटो बायोग्राफी के रूप में हैं। इसमें प्रदेश का बदलता परिदृश्य भी समाहित किया गया है। माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि यादों का सिलसिला पुस्तक बड़े रोचक विवरण से भरी हुई है। इतनी अच्छी प्रस्तुति करना हर किसी के बस की बात नहीं। त्रिपाठी जी की तरह सभी अधिकारियों को अपने अनुभव को पुस्तक के रूप में संग्रहित करना चाहिए जो आने वाले लोगों को नसीहत बने।  मीडियावाला के प्रधान संपादक सुरेश तिवारी ने इस अवसर पर यादों का सिलसिला पुस्तक में समाहित साहित्य के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन रामजी श्रीवास्तव ,आभार प्रदर्शन महेंद्र जोशी एवं स्वागत अजय श्रीवास्तव नीलू ने किया l

लड़कियों ने मैदान में कदम रखा: अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर स्कूलों में लड़के-लड़कियों के संयुक्त क्रिकेट मैच का आयोजन

राजगढ़, अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर गर्ल राइजिंग और चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट (CINI) के संयुक्त आयोजन में राजगढ़ जिले के खिलचीपुर और जीरापुर में दो क्रिकेट प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें लड़के और लड़कियां दोनों भाग ले रहे हैं। कक्षा 8 के छात्रों के लिए आयोजित इन मैचों का उद्देश्य यह संदेश देना है कि क्रिकेट सिर्फ लड़कों का खेल नहीं, बल्कि टीमवर्क, नेतृत्व और समानता का प्रतीक है। दो वर्षों से चल रहे RISE कार्यक्रम पर आधारित यह अभियान जिला शिक्षा कार्यालय के सहयोग से राजगढ़ के 24 सरकारी स्कूलों में चलाया जा रहा है, जहाँ छात्र सामाजिक और भावनात्मक कौशल विकास, लैंगिक समानता, डिजिटल व वित्तीय साक्षरता तथा जलवायु जागरूकता जैसे मूल्य सीख रहे हैं। इन मैचों ने शिक्षा को कक्षा से बाहर ले जाकर लड़कियों और लड़कों को क्रिकेट के मैदान पर समान अवसर, सहानुभूति और सहयोग की भावना का अनुभव करने का अवसर प्रदान किया। इस कार्यक्रम को कॉमिक बुक ‘कुसुम की पारी’ से भी प्रेरणा मिली, जिसकी प्रतियाँ सभी छात्रों को उपलब्ध कराई गईं। इस कॉमिक में एक युवा लड़की कुसुम की कहानी है, जो बाधाओं और धारणाओं को तोड़कर क्रिकेट खिलाड़ी बनने के अपने सपने को पूरा करती है। “मुझे पहले लगता था कि क्रिकेट तो बस लड़के खेलते हैं। लेकिन जब मैं खुद मैदान में उतरी, तो समझ आया कि हम भी बहुत अच्छा खेल सकते हैं। अब तो मन करता है रोज़ प्रैक्टिस करूं!” — संजना मालवीय, कक्षा 8, मॉडल स्कूल, खिलचीपुर मैच समाप्त होने के पश्चात सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र, मेडल और ट्रॉफी प्रदान की गई। खिलचीपुर स्कूल के प्रिंसिपल रामचंद्र दांगी, सभी शिक्षक और एकीकृत बाल विकास परियोजना की सुपरवाइजर श्रीमती संतोष चौहान ने विद्यालय के छात्रों और उनके माता-पिता के साथ मिलकर बच्चों का स्वागत किया और उनका उत्साह बढ़ाया। श्रीमती संतोष चौहान ने कहा, “खेल आत्मविश्वास बढ़ाने, दृढ़ता विकसित करने और बच्चों में टीम भावना को प्रोत्साहित करने का एक सशक्त माध्यम है। जब लड़कियों को समान अवसर प्राप्त होते हैं, तो वे न केवल अपने कौशल को निखारती हैं, बल्कि शिक्षा में समानता को भी बढ़ावा देती हैं।” गर्ल राइजिंग की प्रतिनिधि शुभ्रा ने कहा, “बच्चे जब साथ खेलते हैं, तो वे केवल खेलना ही नहीं सीखते — वे जीवन जीने का तरीका भी सीखते हैं। वे लक्ष्य बनाना, समस्याओं का हल करना, एक-दूसरे का सम्मान करना तथा चुनौतियों से जूझकर आगे बढ़ना सीखते हैं। लड़कियों के लिए ऐसे अवसर बहुत मायने रखते हैं, क्योंकि ये उन्हें आत्मविश्वास देते हैं, सीमाएँ तोड़ने की ताकत देते हैं और यह एहसास कराते हैं कि खेल के मैदान पर उनका भी समान अधिकार है।” जब गर्ल राइजिंग और CINI ने क्रिकेट जैसे भारत के लोकप्रिय खेल को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के उत्सव से जोड़ा, तो उन्होंने यह संदेश दिया कि “लैंगिक समानता केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक अभ्यास है — जहाँ हर बच्चा, चाहे लड़की हो या लड़का, सपने देख सकता है, खेल सकता है और नेतृत्व कर सकता है।”

स्थापना दिवस पर फोकस रहेगा रोजगार और उद्योग पर, सीएम डॉ. यादव ने दी थीम की घोषणा

उद्योग और रोजगार वर्ष की थीम पर मनाया जाए प्रदेश का स्थापना दिवस : मुख्यमंत्री डॉ.यादव आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लिए हुए प्रयासों को प्रमुखता से करें प्रदर्शित एक नवम्बर को राज्य उत्सव के रूप में मनेगा स्थापना दिवस राजधानी के साथ संभाग और जिला स्तर पर भी हों भव्य कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 1 नवंबर मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह के संबंध में दिए निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 1 नवंबर मध्यप्रदेश स्थापना दिवस उद्योग एवं रोजगार वर्ष की थीम पर मनाया जाए। आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश को लेकर हुए नवाचारों और विशेष गतिविधियों का प्रभावी रूप से प्रस्तुतीकरण किया जाए। 'रोजगार के मंदिर हैं उद्योग' की थीम के साथ कौशल उन्नयन, तकनीकी शिक्षा, उद्यमशीलता के विकास सहित युवाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने वाली सभी गतिविधियों का स्थापना दिवस संबंधी कार्यक्रमों में प्रभावी और आकर्षक प्रस्तुतीकरण किया जाए। साथ ही प्रदेश में धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों से अर्थव्यवस्था में आई गतिशीलता पर भी प्रस्तुतीकरण हों। स्थापना दिवस पर बीते दो वर्षों में हुए नवाचारों को भी प्रदर्शित किया जाए। स्थापना दिवस को राज्य उत्सव के रूप में मनाया जाए। भोपाल में होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम के साथ सभी जिला और संभागीय मुख्यालयों पर भी भव्य कार्यक्रम आयोजित हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 1 नवंबर मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह के संबंध में मंत्रालय में सोमवार को हुई बैठक में यह निर्देश दिए। प्रसिद्ध पार्श्व गायक  जुबिन नौटियाल एक नवम्बर को देंगे प्रस्तुति बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश स्थापना दिवस 1 नवंबर को भोपाल में होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम में प्रसिद्ध पार्श्व गायक  जुबिन नौटियाल प्रस्तुति देंगे। लाल परेड ग्राउंड में होने वाले इस कार्यक्रम में कृष्ण के भक्ति पदों की प्रस्तुति के साथ ही विरासत से विकास की थीम पर ड्रोन-शो होगा। साथ ही आतिशबाजी भी होगी। मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर दो और तीन नवंबर को राज्य स्तरीय कार्यक्रम में लाल परेड ग्राउंड पर महानाट्य -सम्राट विक्रमादित्य की प्रस्तुति होगी। साथ ही दो एवं तीन नवम्बर को सुगम संगीत की प्रस्तुतियां भी होंगी। औद्योगिक विकास और अर्थव्यवस्था की उपलब्धियां भी होंगी प्रदर्शित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्थापना दिवस समारोह की गतिविधियों में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों के हितग्राहियों को भी शामिल किया जाए। उनके सम्मेलन और रैलियां आयोजित हों। साथ ही जिलों में प्रमुख उद्योगपतियों और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाले व्यक्तियों और समूहों की उपलब्धियों को भी शामिल किया जाए। प्रदेश के सभी अंचलों में समान रूप से गतिविधियां हों, हर जिला अपनी प्रगति और उपलब्धियों जिला स्तर पर प्रस्तुत करे। साथ ही स्व-सहायता समूह और आईटीआई, पॉलिटेक्निक सहित अन्य संस्थाओं द्वारा युवाओं, महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए किए गए प्रयासों, कृषक संगठनों द्वारा किसान कल्याण के लिए संचालित गतिविधियों के प्रदर्शन को भी समारोह का हिस्सा बनाया जाए। विभिन्न विषयों पर प्रदर्शनियों के साथ लगेगा देशज व्यंजनों का मेला बैठक में बताया गया कि स्थापना दिवस पर जननायकों के जीवन और अवदान पर भोपाल और जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इसके साथ 'एक जिला-एक उत्पाद', सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या, सम्राट विक्रमादित्य के सील और सिक्के, मंदिर स्थापत्य तथा भारतीय ऋषि परम्परा पर प्रदर्शनियों को आयोजन किया जाएगा। इसी क्रम में एक से 3 नवम्बर तक वन मेला, ड्रोन टैक वर्कशॉप और एक्सपो, मध्यप्रदेश की पारंपरिक कला प्रदर्शनी, प्रदेश में विरासत से विकास, प्रदेश की बावड़ियों, भोज और भोपाल आदि विषय पर प्रदर्शनी और देशज व्यंजनों का मेला भी आयोजित किया जाएगा। बैठक में मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव  संजय दुबे,  नीरज मंडलोई,  संजय शुक्ला,  शिवशेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव  राघवेंद्र सिंह और मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार  राम तिवारी उपस्थित थे।  

कमलनाथ सरकार क्यों गिराई? सिंधिया का बड़ा बयान, जनता के सामने खोले पुराने राज

शिवपुरी  केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने  लाड़ली बहना योजना महिला सम्मेलन में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। कमलनाथ की सरकार गिराने को लेकर उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में महिलाओं को बोझ समझा जाता था, उनके हित में कभी नहीं सोचा गया। अगर मैंने सरकार नहीं गिराई होती, तो आज मातृशक्ति को ये लाभ नहीं मिल पाता। सिंधिया ने यह बयान शिवपुरी जिले के पिछोर में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि आज मातृशक्ति देश का भविष्य बन गई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव तक महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रहे हैं। कार्यक्रम में मंच पर जब पुरुष जनप्रतिनिधि बैठे नजर आए, तो सिंधिया ने सभी को मंच से उतरने को कहा और महिलाओं को मंच पर बैठाया। उन्होंने निर्देश दिए कि जहां भी महिला जनप्रतिनिधि हों, वहीं कार्य करें — उनके पति या परिवार के अन्य सदस्य नहीं।  सिंधिया ने इस दौरान अपनी दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया की 106वीं जयंती पर उन्हें नमन किया और कहा कि उन्होंने नारी सशक्तिकरण का देशव्यापी आंदोलन चलाया था। इसके अलावा उन्होंने क्रांति देवी नाम की महिला का उदाहरण देते हुए कहा कि “उन्होंने मात्र ₹1000 के निवेश से लाखों की कमाई शुरू कर दी है, यही है सच्चा सशक्तिकरण।” इस कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, पिछोर विधायक प्रीतम लोधी, जिला पंचायत अध्यक्ष नेहा यादव और शिवपुरी विधायक देवेंद्र जैन सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। 

मोहन सरकार का दिवाली गिफ्ट संभव! मप्र में बढ़ सकता है डीए-डीआर, केंद्र से 3% पीछे

भोपाल  केंद्र सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों को 3% महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) बढ़ाने के फैसले के बाद मध्य प्रदेश के कर्मचारी भी सक्रिय हो गए हैं। प्रदेश के कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से दीपावली से पहले समान लाभ देने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि त्योहार के पहले बोनस और फेस्टिवल एडवांस में बढ़ोतरी की घोषणा की जाए, ताकि वे अपने परिवार के साथ खुशियां मना सकें। 3% डीए-डीआर और बोनस की मांग मध्यप्रदेश के कर्मचारियों ने दीपावली से पहले 3% महंगाई भत्ता और महंगाई राहत (डीए-डीआर) देने की मांग की है। साथ ही उन्होंने बोनस और फेस्टिवल एडवांस की राशि बढ़ाने की भी मांग की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि त्योहारी सीजन में खर्च बढ़ जाता है, इसलिए सरकार को समय रहते राहत प्रदान करनी चाहिए।तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा- दीपावली पर हर घर में खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार को बोनस के साथ 3% डीए और डीआर देना चाहिए। इससे प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारी और पेंशनर्स लाभान्वित होंगे। प्रदेश में मिल रहा 55% डीए, केंद्र में बढ़कर हुआ 58% वर्तमान में मध्यप्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारियों का डीए अब 3% बढ़कर 58% हो गया है। राज्य के कर्मचारियों का डीए जुलाई 2025 से ड्यू है, जिसे अभी तक नहीं बढ़ाया गया है। इससे प्रदेश के कर्मचारियों में नाराजगी है, क्योंकि उन्हें हमेशा केंद्र के बाद देरी से डीए वृद्धि मिलती है। 29 साल से बंद है बोनस कर्मचारी संगठनों ने याद दिलाया कि वर्ष 1996 से प्रदेश में बोनस बंद है। उस समय कर्मचारियों को 1079 रुपए तक बोनस के रूप में दिया जाता था। केंद्र सरकार और रेलवे आज भी अपने कर्मचारियों को दीपावली बोनस देती हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में यह सुविधा वर्षों से बंद है।कर्मचारी संगठनों ने कहा- सरकार कहती है कि राज्य कर्मचारियों को केंद्र के समान सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन बोनस न देना उनकी ‘कथनी और करनी’ में फर्क दिखाता है। 10 लाख कर्मचारी-पेंशनर्स होंगे प्रभावित तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि दीपावली के अवसर पर हर घर में खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार को कर्मचारियों को आर्थिक राहत देने के लिए बोनस के साथ 3% महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देना चाहिए। इससे प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा। राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने भी सरकार से दीपावली से पहले महंगाई भत्ते की किस्त जारी करने की मांग की है। प्रदेश के कर्मचारियों को मिल रहा 55% डीए वर्तमान में मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारी अब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद 58% डीए प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश के कर्मचारियों का जुलाई 2025 से डीए ड्यू है। 29 साल से बंद बोनस देने की मांग कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्ष 1996 से प्रदेश में बोनस बंद है, जबकि उस समय कर्मचारियों को 1079 रुपए तक बोनस के रूप में मिलता था। केंद्र और रेलवे आज भी अपने कर्मचारियों को दीपावली बोनस दे रहे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया है। यह फिर से शुरू किया जाना चाहिए। संगठनों ने कहा कि सरकार एक ओर दावा करती है कि कर्मचारियों को केंद्र के समान सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन बोनस न देना “कथनी और करनी में अंतर” दर्शाता है। कर्मचारी संगठनों ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव दीपावली से पहले कर्मचारियों को राहत देने का फैसला लेकर त्योहार की खुशियां दो गुनी करेंगे। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा कर्मचारियों को दीपावली के पहले 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिए जाने के बाद अब राज्य के कर्मचारी भी मोहन सरकार से महंगाई भत्ता बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहा है कि एमपी में काम कर रहे कर्मचारियों को केंद्र सरकार के बराबर महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देकर बोनस दिया जाए ताकि कर्मचारी त्यौहार खुशियों के साथ मना सकें। इसके साथ ही फेस्टिवल एडवांस भी बढ़ी हुई राशि के साथ देने की मांग की जा रही है। उधर माना जा रहा है कि जल्दी ही राज्य सरकार भी कर्मचारियों के लिए डीए देने का ऐलान कर सकती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जिस प्रकार से केंद्र एवं रेलवे द्वारा दीपावली के अवसर पर बोनस एवं 3% महंगाई भत्ता, महंगाई राहत एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों को प्रदान कर दी गई है उसी प्रकार मध्य प्रदेश सरकार भी दीपावली के त्योहार पर कर्मचारियों को आर्थिक रूप से खुशियां दे। प्रदेश में वर्ष 1996 से बोनस बंद है। वर्ष 1996 तक 1079 रुपए बोनस के रूप में कर्मचारियों को प्राप्त होते थे। वर्तमान में प्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा आज भी अपने कर्मचारियों को बोनस दिया जा रहा है वहीं मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को बोनस से वंचित कर दिया गया है। संगठनों के अनुसार एक तरफ प्रदेश सरकार द्वारा कहा जाता है कि केंद्र के समान कर्मचारियों को सभी सुविधाएं दी जाएंगी वहीं बोनस न देना कथनी और करनी में अंतर बताता है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि दीपावली के अवसर पर हर घर में खर्चा बढ़ जाता है। इसकी भरपाई के लिए सरकार को बोनस के साथ 3% महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देना चाहिए जिसका फायदा प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा। इसी तरह कर्मचारी नेता जितेंद्र सिंह ने भी सरकार से दिवाली के पहले महंगाई भत्ते की किस्त देने की मांग की है। जुलाई 2025 से 3% महंगाई भत्ता बढ़ाने पर इतना मिलेगा लाभ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी -1395 से 1620 तृतीय श्रेणी कर्मचारी -1755 से 4419 द्वितीय श्रेणी अधिकारी – 5049 से 6048 प्रथम श्रेणी अधिकारी -7191 से 12690 तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ने पर महीने का इतना हो जाएगा वेतन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वेतन मान – 55 %भत्ता – 58% भत्ता 15500-– 24025 24490 16100— 16985—25438 … Read more

भवन स्वीकृति के बदले रिश्वत मांग रहा था ASI, लोकायुक्त ने पकड़ा रंगे हाथ

शहडोल  जिले के धनपुरी नगरपालिका में सोमवार को लोकायुक्त रीवा टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) इंद्र बहादुर सिंह उर्फ आईबी सिंह को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। एएसआई 3 हजार रुपए की रिश्वत वार्ड नंबर 2 के निवासी योगेंद्र वर्मा से भवन निर्माण की स्वीकृति के लिए ले रहा था। लोकायुक्त की इस कार्रवाई से पूरे नगरपालिका परिसर में हड़कंप मच गया। भवन स्वीकृति के नाम पर मांगी थी 10 हजार की रिश्वत जानकारी के अनुसार, पीड़ित योगेंद्र वर्मा ने अपने घर के निर्माण के लिए नगरपालिका से अनुमति के लिए आवेदन किया था। इस दौरान एएसआई इंद्र बहादुर सिंह ने उससे 10 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की। काफी मोलभाव के बाद राशि 5 हजार रुपए तय हुई, जिसमें से 2 हजार रुपए पहले ही दिए जा चुके थे। शेष 3 हजार रुपए की दूसरी किस्त देने के समय ही लोकायुक्त ने जाल बिछाया और एएसआई को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। 15 सदस्यीय टीम ने दी दबिश लोकायुक्त रीवा की 15 सदस्यीय विशेष टीम ने शुक्रवार को धनपुरी नगरपालिका कार्यालय में दबिश दी। टीम ने मौके से रिश्वत की रकम बरामद की और आरोपी एएसआई को हिरासत में ले लिया। कार्रवाई के दौरान परिसर में मौजूद कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई, कई लोग कार्यालय से भाग निकले। नपा का स्थाई कर्मचारी भी शामिल सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले में एएसआई के साथ नगरपालिका का स्थायी कर्मचारी रज्जन चौधरी भी शामिल था। लोकायुक्त टीम ने दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल दोनों से पूछताछ जारी है ताकि रिश्वतखोरी के नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके। नगरपालिका में मचा हड़कंप लोकायुक्त की इस अचानक कार्रवाई से नगरपालिका में हड़कंप मच गया। कई कर्मचारी मौके से गायब हो गए, वहीं कुछ ने दस्तावेज़ों को छिपाने का प्रयास किया। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि धनपुरी नगरपालिका में लंबे समय से भ्रष्टाचार और मनमानी चल रही थी। लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी रिश्वत देनी पड़ती थी।