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बारिश के चलते सब्ज़ियां हुई महंगी, महंगाई की मार से बिगड़ा रसोई का बजट

भोपाल   बीते कुछ दिनों तक लगातार हुई मूसलधार बारिश ने किसानों की सब्जी फसलों को भारी नुकसान हुआ है. खेतों में फूल-फल लगे हुए फसल लगभग नष्ट हो चुके हैं. जिससे किसानों के चेहरों पर मायूसी छा गयी है. खेतो में लगा टमाटर, मिर्च, बैंगन, भिंडी, कद्दू, पालक, बंधा गोभी की फसल बर्बाद हो गये हैं. मक्का व गरमा फसलों को पानी में डूबने से नुकसान हुआ है. पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं. धान के बिचड़े भी पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं. किसान छोटू मुंडा बताते हैं कि पिछले चार दिनों से लगातार हुई वर्षा से धान का बिचड़ा पानी में डूब गया है.  बारिश की शुरुआत के साथ ही शहर में सब्जी महंगी हो गई है, जो 10 दिन में ही दो से ढ़ाई गुना तक कीमत पहुंच गई है। इससे स्थिति यह है कि अब सिर्फ आलू व कद्दू ही सस्ते हैं और अन्य कोई भी सब्जी अब 60 से 80 रुपए किलो कीमत से कम नहीं मिल रही है। अचानक बढ़ी सब्जियों की कीमतें एमपी में आमजन की परेशानी बन गई हैं। जो टमाटर 10 दिन पहले तक 30 रुपए किलो बिक रहा था, अब 80 रुपए किलो कीमत पर पहुंच गया है। रेट बढक़र सीधे हो गए दोगुना भिंडी, लॉकी, पालक, करेला, गोभी और पालक की रेट बढक़र सीधे ही दोगुना हो गई है। वहीं बाजार में गिलकी, शिमला मिर्च और बरवटी 120 रुपए किलो बिक रही है। कहू की रेट भी तीन गुना बढ़ गई लेकिन यह अभी आमजन की पहुंच में है। हालांकि आलू व प्याज की कीमतों में पिछले 10 दिनों में कोई अंतर नहीं आया है। महंगी सब्जियों से ही काम चलाना होगा सब्जी दुकानदारों के मुताबिक जिले में सब्जियां(Vegetables Price Hike) बची नहीं है, बाहर से जिले में आ रही है। बारिश की वजह से बाहर से भी कम ही मिल पा रही हैं, इससे कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि सब्जी दुकानदारों का कहना है कि डेढ़-दो महीने बाद जिले में स्थानीय स्तर से हरी सब्जियों की आवक बढ़ जाएगी, इससे कीमतें घटने का अनुमान है, लेकिन स्थानीय सब्जियों की आवक होने तक लोगों को महंगी सब्जियों से ही काम चलाना होगा।  किसानों ने बताया कि बहुत मेहनत के बाद खेतों में फसल तैयार हुए थे. लेकिन फसलें बर्बाद हो गयी. किसानों ने सरकार से नुकसान की मुआवजा का मांग करते हुए कहा कि उनकी फसलों को बचाने के लिए उचित कदम उठाया जाये. बाजारों पर दिखा असर : लगातार वर्षा होने से खेतों से सब्जियों की तुड़ाई नहीं होने से मंडी खाली रहे. जिसके कारण किसान समेत सब्जी विक्रेताओं को काफी नुकसान हुआ. वहीं शनिवार को बुकबुका बाजार में सब्जी खरीदने आये ग्राहकों को मन मुताबिक सब्जी नहीं मिलने से निराश घर लौटना पड़ा. हालाकि कुछ सब्जियां जो बाजार में लाये गये थे, उनमें दाग लगा था. कम सब्जी आने से मूल्य में वृद्ध देखी गयी.

विक्रमोत्सव-2025 को मिला एशिया का WOW गोल्ड अवार्ड

उज्जैन  मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा आयोजित विक्रमोत्सव 2025 को वाउ अवार्ड एशिया 2025 (WOW Awards Asia 2025) द्वारा एशिया के शासकीय समारोह की विशेष श्रेणी (Special Event of the Year Government) में गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। WOW Awards Asia की टीम भोपाल आकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को यह अवार्ड प्रदान करेंगी। विगत वर्ष विक्रमोत्सव 2024 को एशिया का बिगेस्ट रिलीजियस अवार्ड मिल चुका है। न केवल मध्य प्रदेश बल्कि समस्त भारतवर्ष के लिए गौरव का विषय विक्रमोत्सव 2025 को यह सम्मान मिलने पर मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने इसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की संस्कृति और विरासत के प्रति उनके समर्पण का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि विक्रमोत्सव 2025 को प्राप्त यह सम्मान न केवल मध्य प्रदेश बल्कि समस्त भारतवर्ष के लिए गौरव का विषय है। विक्रमोत्सव एक आयोजन मात्र नहीं है बल्कि इन सबसे बढ़कर संस्कृति, विरासत और विकास का बेजोड़ संगम हैं। बीते 18 वर्षों से निरंतर विक्रमोत्सव का आयोजन किया जाता रहा है। विगम वर्षों में विक्रमोत्सव ने देश के सांस्कृतिक क्षेत्र में अपनी उत्सवधर्मी पहचान को बखूबी स्थापित किया है। इसमें ना केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भी शामिल है। विक्रमोत्सव 2025 को एशिया का वाउ गोल्ड अवार्ड उल्लेखनीय है कि WOW Awards Asia, वर्ष 2009 से लाइव इवेंट्स के क्षेत्र में उत्कृष्टता और नवाचार को प्रोत्साहित करने वाला एक प्रतिष्ठित मंच रहा है। यह आयोजन अनुभव आधारित विपणन, व्यापारिक बैठकों, प्रोत्साहन यात्राओं, सम्मेलनों, प्रदर्शनियों, सजीव मनोरंजन तथा विवाह उद्योग जैसे क्षेत्रों में कार्यरत संस्थाओं और आयोजनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्रदान करता है। इस वर्ष इसका 16वाँ संस्करण, 20 और 21 जून 2025 को मुंबई स्थित जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में भव्य रूप से आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश की प्रतिष्ठित संस्थाओं ने सहभागिता की। प्रधानमंत्री कर चुके है सराहना विगत दिनों माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने विक्रमोत्सव की सराहना करते हुए कहा कि उज्जैन के महान सम्राट विक्रमादित्य के गौरव और वैभव को जन-जन तक पहुँचाने का यह प्रयास सराहनीय है। उनका शासन काल जन-कल्याण, सुशासन और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के लिए जाना जाता है। मध्यप्रदेश के ऊर्जावान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में यह आयोजन निश्चित रूप से युवा पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़कर आत्मविश्वास और कर्तव्यनिष्ठा की भावना से परिपूर्ण नागरिक बनाने में सहायक सिद्ध होगा। विक्रमोत्सव 2025 में 300 से अधिक गतिविधियाँ हुई आयोजित विक्रमोत्सव 2025 अंतर्गत 300 से अधिक विभिन्न सांस्कृतिक एवं बहुआयामी गतिविधियाँ सम्पन्न हुई। इस महोत्सव में लाखों लोग भागीदार रहे जबकि सोशल मीडिया के माध्यम से करोड़ों लोग विक्रमोत्सव से जुड़े। विक्रमोत्सव की बहुआयामी गतिविधियों में मध्यप्रदेश के सभी प्रमुख शिवरात्रि मेलों का समारंभ, कलश यात्रा, विक्रम व्यापार मेला, संगीत, नृत्य, वादन, शिवोह्म, आदि-अनादि पर्व समारोह, विक्रम नाट्य समोराह, चित्र प्रदर्शनियाँ, संगोष्ठी, भारतीय इतिहास समागम, राष्ट्रीय विज्ञान समागम, वेद अंताक्षरी, कोटि सूर्योपासना, शिल्प कला कार्यशाला, प्रकाशन, विक्रम पंचांग, पौराणिक फिल्मों का अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, बोलियों एवं हिन्दी रचनाओं का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, 1000 ड्रोन्स की प्रस्तुति व ख्यात कलाकारों की प्रस्तुतियाँ शामिल है।  

भीष्म क्यूब्स से गोल्डन आवर में मिलेगी मदद, कोड इमरजेंसी एप से आम लोग भी बचा सकेंगे जान

भोपाल  अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल अब किसी भी आपात स्थिति या आपदा से निपटने के लिए और भी तैयार हो गया है। एम्स के ट्रामा एवं आपातकालीन चिकित्सा विभाग में भीष्म क्यूब्स का उद्घाटन और प्रदर्शन किया गया। ये भीष्म क्यूब्स दरअसल एक मोबाइल अस्पताल हैं, जिन्हें आपदा या मानवीय संकट के समय में तुरंत चिकित्सा पहुंचाने के लिए बनाया है। इन मोबाइल अस्पतालों को आपदा वाली जगह पर स्थापित किया जा सकता है। इनका फायदा यह है कि ये गोल्डन आवर (किसी दुर्घटना या गंभीर स्थिति के बाद का पहला महत्वपूर्ण घंटा), जिसमें इलाज मिलने पर जान बचने की संभावना ज्यादा होती है) में जरूरी चिकित्सा सेवाएं दे सकते हैं, जिससे जानें बचाई जा सकें। कार्यक्रम में एम्स के कार्यपालक निदेशक प्रो. डा. अजय सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कोड इमरजेंसी एप हर नागरिक के लिए जीवनरक्षक कार्यक्रम के दौरान एचएलएल टीम ने भीष्म क्यूब्स को स्थापित करके दिखाया और उनकी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। ट्रामा व आपातकालीन विभाग की अतिरिक्त प्रोफेसर डा. भूपेश्वरी पटेल ने एक जीवनरक्षक मोबाइल एप कोड इमरजेंसी का लाइव डेमो दिया। यह एप हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है। डाउनलोड होने के बाद बिना इंटरनेट के भी काम करता है। इसमें आडियो-विजुअल निर्देशों के जरिए किसी भी जगह पर सीपीआर देकर किसी व्यक्ति की जान बचाने की सुविधा दी गई है।

महाकाल मंदिर में 60 करोड़ का दान, दो साल में 12.32 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे, बना नंबर-1 धार्मिक केंद्र

उज्जैन  महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। महाकाल लोक बनने के बाद मंदिर में दर्शन के लिए रोजाना डेढ़ से दो लाख भक्त पहुंच रहे हैं। पहले यह संख्या 40 से 50 हजार होती थी।  मंदिर समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक के मुताबिक, महाकाल लोक के खुलने के बाद भक्त बड़ी संख्या में उज्जैन आ रहे हैं और खुलकर दान भी कर रहे हैं।वर्ष 2019-20 में मंदिर को करीब 15 करोड़ रुपए दान में मिले थे, जो 2023-24 में बढ़कर 59.91 करोड़ रुपए हो गए।2024-25 में अब तक 51.22 करोड़ रुपए का दान आ चुका है। यह राशि सिर्फ भेंट पेटियों में डाले गए दान की है। मंदिर की अन्य कमाई मिलाकर यह आय एक अरब रुपए से भी ज्यादा है। धार्मिक पर्यटन में भी रिकॉर्ड बढ़त महाकाल लोक खुलने के बाद उज्जैन में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी है।2023 में 5.28 करोड़ लोग उज्जैन आए थे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 7.32 करोड़ पहुंच गया है।यानि एक साल में 39% की बढ़ोतरी। पिछले दो वर्षों में 12 करोड़ 32 लाख से ज्यादा श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन को उज्जैन पहुंचे हैं। गुप्त दान में मिली चांदी की पालकी में सवार होकर निकलेंगे बाबा महाकाल श्रावण-भाद्रपद मास में इस बार उज्जैन राजाधिराज महाकाल चांदी की नई पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। मंदिर प्रशासन के अनुसार, करीब 10 साल बाद सवारी में नई पालकी को शामिल किया जा रहा है। नवंबर 2024 में छत्तीसगढ़ के एक भक्त ने गुप्तदान के रूप में मंदिर समिति को यह पालकी भेंट की थी। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रावण-भाद्रपद मास में महाकाल की सवारी निकलती है। इस बार 14 जुलाई को पहली और 18 अगस्त को श्रावण-भाद्रपद मास की राजसी सवारी निकलेगी। इसे लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिर समिति ने हर बार की तरह इस बार भी लोक निर्माण विभाग से पालकी का परीक्षण कराया है। यह है पालकी की खासियत चांदी की नई पालकी का वजन करीब 100 किलो है। लकड़ी से बनी पालकी पर 20 किलो चांदी का आवरण है। पालकी को उठाने के लिए स्टील के पाइप लगाए गए हैं। पालकी का ऊपरी हिस्सा भी स्टील के पाइप से बना है। वर्षों पहले सवारी में लकड़ी की पालकी का उपयोग होता था। ठोस लकड़ी से निर्मित पालकी का वजन डेढ़ क्विंटल से अधिक था। बाद में लकड़ी और स्टील के पाइप से बनी पालकी का उपयोग शुरू हुआ। इसका वजन करीब 130 किलो बताया जाता है। यह तीन फीट चौड़ी और पांच फीट लंबी है। पालकी को उठाने वाले हत्थे पर सिंहमुख की आकृति बनाई गई है। चांदी के आवरण पर सूर्य, स्वास्तिक, कमल पुष्प और दो शेरों की नक्काशी की गई है। भगवान महाकाल की पालकी उठाने के लिए 70 कहार सेवा देते हैं। श्रावण-भाद्रपद मास में निकलेगी छह सवारियां पहली सवारी 14 जुलाई को होगी। इसके बाद 21 जुलाई, 28 जुलाई, 4 अगस्त, 11 अगस्त और अंतिम राजसी सवारी 18 अगस्त को निकलेगी। मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था और सवारी की तैयारियां शुरू कर दी हैं।  

सीएम डॉ. मोहन यादव आज ग्वालियर दौरे पर, विकास कार्यों का भूमिपूजन करेंगे और अंबेडकर धाम का भूमि-पूजन करेंगे

ग्वालियर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 5 जुलाई को ग्वालियर दौरे पर रहेंगे। ग्वालियर में शनिवार (पांच जुलाई) को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर आ रहे हैं। सीएम भोपाल से और केन्द्रीय मंत्री सिंधिया दिल्ली से दोपहर 3 बजे ग्वालियर आएंगे।  इसके बाद, दोपहर 12.15 बजे सहकारी युवा संवाद कार्यक्रम में भाग लेंगे। वहीं 2.45 बजे सीएम ग्वालियर के लिए रवाना होंगे जहां वे विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण करेंगे। इन कार्यों में सड़क निर्माण और जलापूर्ति जैसी जरूरी प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। यह कार्यक्रम ग्वालियर के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह तथा सांसद भारत सिंह कुशवाह की उपस्थिति में होगा। कार्यक्रम को लेकर शुक्रवार को ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने तैयारियों का जायजा लिया और कमियां पूरी कराईं।ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि ग्वालियर बदल रहा है और निरंतर विकास के पथ पर चल रहा है। विकसित, समृद्ध होते ग्वालियर की इस प्रगति यात्रा में शनिवार को हजीरा थाने के पास बिरला नगर ग्वालियर में अंतरराज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी) नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, सांसद भारत सिंह कुशवाह की मौजूदगी में 281.81 करोड़ के विभिन्न कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन होगा। आईएसबीटी का शुभारंभ व सिविल अस्पताल को मिलेगा नया भवन मुख्यमंत्री डॉ. यादव लगभग 4.25 बजे गोले का मंदिर-मुरैना रोड पर नवनिर्मित आईएसबीटी (अंतरराज्यीय बस अड्डा) परिसर पहुंचेंगे और लगभग 281 करोड़ 71 लाख रुपए के विकास कार्यों के भूमिपूजन व लोकार्पण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि भाग लेंगे। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि इस दिन बदलते ग्वालियर को स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के रूप में सिविल अस्पताल बिरला नगर के 15 करोड़ की लागत से निर्मित नवीन भवन की सौगात मिल रही है। वहीं हमारे बच्चों के बेहतर शैक्षणिक विकास के लिए 20.12 करोड़ की लागत से निर्मित शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिक्षा नगर और 35.93 करोड़ की लागत से निर्मित सीएम राइज कन्या हायर सेकेण्डरी स्कूल किला गेट के भवन का उपहार मिलेगा। 112 करोड़ की लागत से बने विद्युत सब स्टेशन का होगा लोकार्पण ऊर्जा मंत्री ने बताया कि ग्वालियर में विद्युत वितरण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए 112 करोड़ की लागत से निर्मित 132 केव्ही जीआईएस विद्युत सब स्टेशन फूलबाग का लोकार्पण हो रहा है। इसके साथ ही ग्वालियर के हरित क्षितिज को नया गंतव्य देने के लिए 2.67 करोड़ की लागत से वेस्ट टू वंडर पार्क की शुरुआत हो रही है। बच्चों को खेलों के प्रति जागरूक बनाने के लिए 2.84 करोड़ की लागत से जेसी मिल हाई स्कूल के पीछे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का शुभारंभ, यातायात को सर्वसुलभ बनाने के लिए 77 करोड़ की लागत से निर्मित अंतरराज्यीय बस अड्डा का लोकार्पण और 16.15 करोड़ की लागत से बनने वाले 1000 बिस्तरीय अस्पताल को जेएएच अस्पताल से जोड़ने के लिए अंडर ब्रिज के भूमिपूजन के रूप में नई सौगातें मिल रही हैं। अंबेडकर धाम का भूमि-पूजन सीएम मोहन यादव ग्वालियर में जौरासी गांव में बनने वाले अंबेडकर धाम का भूमि-पूजन करेंगे। यह स्थल सामाजिक समरसता, न्याय और समानता के प्रतीक डॉ. अंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाएगा। अंबेडकर धाम की स्थापना से ग्वालियर में सामाजिक सद्भावना को प्रोत्साहन मिलेगा और यह डॉ. अंबेडकर के आदर्शों को जीवित रखेगा। सामाजिक समरसता के लिए कार्यक्रम इस अवसर पर सीएम विभिन्न गवर्नमेंट स्कीम्स के लाभार्थियों को लाभ वितरित करेंगे। साथ ही, वह सामाजिक समरसता की शपथ दिलाएंगे और इस क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले नागरिकों को सम्मानित करेंगे। यह कदम राज्य सरकार के सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने और समाज के हर वर्ग को समान अवसर देने के उद्देश्य से उठाया गया है। भगवान जगन्नाथ रथयात्रा वहीं, इन सभी के बाद सीएम शाम 7 बजे भगवान जगन्नाथ रथयात्रा कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह धार्मिक आयोजन ग्वालियर में बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेंगे। कार्यक्रम का समापन सीएम डॉ. मोहन यादव की यह यात्रा शाम 8:30 बजे भोपाल लौटने के साथ समाप्त होगी। इस दौरान किए गए विकास कार्यों के भूमिपूजन और धार्मिक आयोजनों से ग्वालियर के नागरिकों में एक नई ऊर्जा का संचार होगा। वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान यह रहेगी यातायात व्यवस्था     व्हीआईपी भ्रमण एवं भगवान जगन्नाथ महाप्रभु रथयात्रा के दौरान शहर में सभी प्रकार के भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।     व्हीआईपी भ्रमण के दौरान भिण्ड एवं मालनपुर की ओर से आने वाले सभी प्रकार के वाहन लक्ष्मणगढ़ पुल से बायपास होते हुए बेहटा चौकी, बड़ा गांव पुल, बड़ागांव चौराहा, आर्मी एरिया होते हुए शहर में प्रवेश करेंगे।     व्हीआईपी भ्रमण के दौरान मुरैना की ओर से आने वाले वाहन जो गोले का मंदिर होते हुए भिण्ड, डबरा, दतिया, शिवपुरी की ओर जाना चाहते हैं। वे निरावली तिराहा से बायपास होते हुए जा सकेंगे।     व्हीआईपी भ्रमण के दौरान दतिया, डबरा की ओर से आने वाले वाहन जो विक्की फैक्ट्री, नाका चन्द्रबदनी चौराहा, सिटी सेंटर, गोले का मंदिर चौराहा होते हुए भिण्ड एवं मुरैना की ओर जाना चाहते हैं। वे सिकरोदा तिराहा से डायवर्ड होकर बायपास होते हुए भिण्ड एवं मुरैना की ओर जा सकेंगे।     व्हीआईपी भ्रमण एवं भगवान जगन्नाथ महाप्रभु रथ यात्रा के दौरान शिवपुरी, गुना, अशोकनगर की ओर से आने वाले भारी वाहन बेला की बावड़ी, चिरवाई नाका होते हुए भिण्ड एवं मुरैना की ओर जाना चाहते हैं। वे नया गांव तिराहा से डायवर्ड होकर, सिकरोदा तिराहा से बायपास होते हुए भिण्ड एवं मुरैना की ओर जा सकेंगे।     व्हीआईपी भ्रमण एवं भगवान जगन्नाथ महाप्रभु रथ यात्रा के दौरान शिवपुरी, गुना, अशोकनगर की ओर से आने वाले छोटे वाहन बेला की बावड़ी, चिरवाई नाका, कैंसर पहाड़िया कट, गोल पहाड़िया होकर शहर में प्रवेश कर भिण्ड एवं मुरैना की ओर जाना चाहते हैं। वे बेला की बावड़ी से डायवर्ड होकर चिरवाई नाका, विक्की फैक्ट्री, सिकरोदा तिराहा से बायपास होते हुए जा सकेंगे।     व्हीआईपी भ्रमण के दौरान एयरपोर्ट, डीडी नगर, पानी की टंकी की ओर से आने वाले वाहन जो गोले का मंदिर होते हुए मुरार, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बाड़ा, लश्कर की ओर जाना चाहते हैं। वे पानी की टंकी … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- सामाजिक समरसता से सशक्त समाज और राष्ट्र का निर्माण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि समाज के सर्वांगीण विकास और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की सामाजिक समरसता की भावना के अनुसार सतत प्रयासरत है। उन्होंने कहा है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से प्रदेश के सामाजिक परिदृश्य में तेजी से सकारात्मक बदलाव आ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि विकास की मुख्यधारा में हर वर्ग को साथ लेकर चलने से ही सामाजिक एकता मजबूत होती है। सामाजिक समरसता ही वह भावना है जो कठिन परिस्थितियों में भी परस्पर सहयोग और मदद के लिए प्रेरित करती है। सशक्त समाज से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण होता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में ग्वालियर में शनिवार को ‘समरसता कार्यक्रम’ का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्वालियर के जौरासी गांव में बनने वाले अंबेडकर धाम का भूमि-पूजन करेंगे। यह स्थल सामाजिक समरसता, न्याय और समानता के प्रतीक डॉ. अंबेडकर के विचारों का जीवंत केंद्र बनेगा। मुख्यमंत्री इस अवसर पर विभिन्न शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरित करेंगे, सामाजिक समरसता की शपथ दिलाएंगे और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले नागरिकों को सम्मानित करेंगे। कार्यक्रम में सामाजिक एकता पर विषय विशेषज्ञ अपने विचार व्यक्त करेंगे। इस अवसर पर सहभोज का आयोजन भी किया गया है। दृढ़ सामाजिक समरसता के लिए संकल्पित सरकार राज्य सरकार ने भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों और योगदान को सम्मान देते हुए सामाजिक समरसता को सशक्त करने के लिए शिक्षा, रोजगार, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक न्याय को केंद्र में रखकर कई योजनाएं शुरू की हैं। डॉ. अंबेडकर के जीवन, विचारों और योगदान को सम्मान देते हुए अनुसूचित जाति वर्ग के सशक्तिकरण के लिए राज्य शासन की कई प्रभावी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। योजनाओं का उद्देश्य सामाजिक समरसता, आर्थिक उन्नयन, शैक्षिक प्रगति और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण करना है। डॉ. अंबेडकर से जुड़े पांच प्रमुख स्थलों — महू (जन्मस्थली), दिल्ली (महापरिनिर्वाण स्थल), नागपुर (दीक्षाभूमि), मुंबई (चैत्यभूमि) और लंदन (शिक्षा स्थल) — को मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना में शामिल किया गया है। महू स्थित डॉ. अंबेडकर की जन्मस्थली का समग्र विकास किया गया है, जिसमें स्मारक, संग्रहालय, पार्क, सभागार और स्वागत द्वार का निर्माण हुआ है। साथ इस “आस्था स्थल” और अंतरराष्ट्रीय शोध केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य चल रहा है।भोपाल स्थित डॉ. अंबेडकर स्मारक, पुस्तकालय और भवन का भी नवीनीकरण एवं विस्तार किया गया है। राज्य में वर्ष 2004 से संचालित डॉ. भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्याण योजना में अनुसूचित जाति वर्ग के बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण और ब्याज सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। हाल ही में डॉ. अंबेडकर कामधेनु योजना की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन और पशुपालकों को आर्थिक सहयोग प्रदान करना है। योजना के अंतर्गत 42 लाख तक के ऋण पर 33% तक की सब्सिडी दी जा रही है। डॉ. अंबेडकर उद्योग उदय योजना के माध्यम से एससी-एसटी उद्यमियों को एमएसएमई क्षेत्र में प्रोत्साहन और वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है। डॉ. भीमराव अंबेडकर मेधावी विद्यार्थी पुरस्कार योजना के अंतर्गत बोर्ड परीक्षाओं में श्रेष्ठ अंक प्राप्त करने वाले अनुसूचित जाति के छात्रों को 30 हजार रुपये तक का पुरस्कार दिया जाता है। डॉ. अंबेडकर छात्रवृत्ति योजना और अंबेडकर फेलोशिप के जरिए उच्च शिक्षा और अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन को बढ़ावा दिया जा रहा है। सीहोर और मुरैना में स्थापित डॉ. अंबेडकर तकनीकी शिक्षा संस्थानों में आवासीय प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति भी प्रदान की जा रही है। सागर जिले में डॉ. अंबेडकर वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना अप्रैल माह में की गई है। भोपाल में प्रदेश के सबसे लंबे फ्लाई-ओवर का नामकरण डॉ. अंबेडकर के नाम पर किया गया है। जून 2025 में अंबेडकर गौशाला विकास योजना को मंजूरी दी गई, जिसके तहत 5 हजार से अधिक पशुओं वाली गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। डॉ. अंबेडकर सामाजिक समरसता अभियान के तहत प्रदेशभर में पंचायत स्तर तक जनसंवाद, रैलियाँ, नाटक, प्रतियोगिताएं और संविधान जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। प्रदेश के कई बस स्टैंड, सड़कें, उद्यान, पुस्तकालय एवं महाविद्यालयों का नामकरण डॉ. अंबेडकर किया गया है। वर्ष 2016 में महू रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर अंबेडकर नगर स्टेशन किया गया। केन्द्र सरकार ने डॉ. अंबेडकर के विचारों, योगदान और आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। इनका उद्देश्य सामाजिक न्याय, शिक्षा, सशक्तिकरण और समावेशी विकास को मजबूती देना है। डॉ. अंबेडकर को वर्ष 1990 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया, जो उनके ऐतिहासिक योगदान का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान था। डॉ. अंबेडकर की स्मृति से जुड़े बड़ोदरा स्थित संकल्प भूमि ‘बनयान ट्री कैंपस’ और सतारा (महाराष्ट्र) स्थित प्रताप राव भोंसले हाई स्कूल को राष्ट्रीय महत्व के स्मारक घोषित किया गया है। यहां उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई थी। सामाजिक न्याय मंत्रालय ने देश के कई विश्वविद्यालयों में डॉ. अंबेडकर सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की गई है, जिनका उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रों को गुणवत्ता युक्त उच्च शिक्षा में सहायता प्रदान करना है। 

इजराइल के वैज्ञानिक पांढुर्णा और छिंदवाड़ा के किसानों को संतरे की खेती करने के तरीके बताएंगे

पांढुर्णा पांढुर्णा और छिंदवाड़ा के किसानों को इजरायली तकनीक से खेती करने के तरीके सिखाए जाएंगे ताकि किसान मालामाल हो सके. सौंसर के शासकीय संजय निकुंज कुडड्म में निर्माणाधीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सिट्रस यानी नींबू वर्गीय पौधों का उत्कृष्ट केन्द्र बन रहा है. यहां इजराइल के वैज्ञानिक किसानों को संतरे की खेती करने के तरीके बताएंगे. इजराइली एम्बेसी के विशेषज्ञ उरी रूबीस्टेन ने यहां का जायजा लिया. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से की चर्चा निर्माणाधीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सिट्रस में इजराइली एम्बेसी विशेषज्ञ उरी रूबीस्टेन ने निर्देश दिए कि सेन्टर पर रोपित होने वाले सभी पौधों का रोपण रिज बेड पद्धति से किया जाए. साथ ही पौधारोपण के पहले बेड पर वीड मैट बिछाने के बाद डबल ड्रिप लाइन स्थापित की जाए. जिन किसानों ने रिज बेड पद्धति से संतरा/मौसम्बी पौधों का रोपण किया है, उनकी जानकारी एकत्रित कर डाटाबेस तैयार करने की बात कही. किसानों को टिप्स देने के लिए मौजूद रहेगा टेक्निकल अमला, इजराइल से आएंगे वैज्ञानिक कृषि उपसंचालक जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया "सेंटर शुरू होने से पहले सेंटर एक्सपर्ट अमले की नियुक्ति स्थाई रूप से की जाएगी. जिसमें नर्सरी एक्सपर्ट, फार्म मैनेजर, प्लांट प्रोटेक्शन एक्सपर्ट, अर्चड मैनेजर, वॉटर एक्सपर्ट, तकनीकी प्रशिक्षण विशेषज्ञ व प्रोटेक्टेड फार्मिंग एक्सपर्ट होंगे. साथ ही समय-समय पर इजरायल के कृषि वैज्ञानिक किसानों को खेती करने के लिए यहां आकर टिप्स भी देंगे." क्या होती है रिड्जबेड पद्धति उपसंचालक कृषि जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया "खेतों में पर्याप्त नमी रखने के लिए रिज बेड विधि का उपयोग किया जाता है. इस तकनीक में बुवाई फैरो इरीगेटेड रिज बेड प्लांटर से की जाती है. इसमें प्रत्येक दो कतारों के बाद 25 से 30 सेमी चौड़ी और 15 से 20 सेमी गहरी नाली या कूड़ बनाई जाती है. जिससे फसल की कतारें उभरे हुए बेड पर आ जाती हैं. रबी के मौसम में यह नाली सिंचाई के काम आती है, जिससे नमी अधिक समय तक बनी रहती है. साथ ही मेढ़ से मेढ़ की पर्याप्त दूरी होने के कारण पौधों को सूर्य की किरणें अधिक मात्रा में मिलती हैं." डेमो प्लांट किया जाएगा विकसित वैज्ञानिक ने यहाँ पर एक डेमो प्लांट लगाने की सलाह दी है जिसमें सभी नए किस्मों के पौधों का रोपण रिज बेड पद्धति से किया जाएगा. पौधे तैयार करने के लिए लगने वाली रोपण सामग्री के रूप में कोकोपिट एवं परलाइट, गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट खाद का प्रयोग ना करके पौधारोपण के पहले पौधारोपण स्थल की मिट्टी का उपचार किया जाएगा. पौधों को मिट्टी जनित रोगों से बचाया जा सकेगा. रोपण से पहले प्राप्त होने वाले मातृ पौधों की किस्म की जाँच एवं पौधों पर किसी भी प्रकार के वायरस/ रोग न हो इस बात की पुष्टि करने के बाद किसानों को दिए जाएंगे. रूट स्टॉक से तैयार होते हैं संतरे के पौधे संतरे के पौधे तैयार करने की एक अलग तकनीक होती है जिसमें ज्यादा सहनशीलता वाले नींबू के तने को लिया जाता है. उसमें अच्छी उपज और वैरायटी वाले संतरे की स्वस्थ टहनी को काटकर ग्राफ्टिंग कर दी जाती है. करीब 60 दिनों तक ग्राफ्टिंग के बाद टहनी उसमें लग जाती है और ज्यादा उपज देने वाला संतरे का पौधा तैयार हो जाता है. फिर खेत में गहरे गड्ढे खोदकर इसे रोपित किया जाता है. इसे रूट स्टॉक से तैयार पौधा कहा जाता है. साढ़े 4 लाख टन उत्पादन विदेश में खपत कृषि उपसंचालक जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया "छिंदवाड़ा, पांढुर्ना, सौसर, बिछुआ और दूसरे ब्लॉक में करीब 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में उगाए जाते हैं. इस क्षेत्र में लगभग 4.5 लाख टन संतरे का उत्पादन होता है. देश के दूसरे राज्यों के अलावा नेपाल और बांग्लादेश में संतरे की सप्लाई की जाती है." इंडो इजराईल प्रोजेक्ट के तहत बन रहा है सेंटर 2022 में इजराइल एवं भारत के द्विपक्षीय संबंध को 30 साल पूरे होने पर दोनों देशों ने कृषि सहयोग एवं जल प्रबंधन को लेकर कई नवाचार किया था. इसी के तहत मार्च 2022 मे प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और इजराइल के काउंसिल जनरल के बीच हुई भेंट के बाद इजराइली कृषि व बागवानी विशेषज्ञ यायर ऐशेल ने पहली प्रदेश यात्रा की थी. जिसके चलते इजराईली दल के सामने 50 एकड़ में इंडो-इजराइल प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी. 

कोर्ट ने कहा कि बच्चों के लिए पति को भरण-पोषण राशि देनी ही होगी, भले ही पत्नी कमाती क्यों न हो

इंदौर अपने पति से विवाद के बाद बच्चों को लेकर अलग रहने वाली पत्नी ने भरण-पोषण की राशि के लिए कुटुंब न्यायालय में परिवाद लगाया. पत्नी ने फरियाद की कि पति से उसे भरण-पोषण की राशि नियम के अनुसार मिलनी चाहिए. क्योंकि बच्चे उसके पास हैं. उसने पति के साथ रहने की काफी कोशिश की लेकिन वह न तो मुझे और न ही बच्चों को साथ रखना चाहता है. दंपती के दो बच्चे हैं, 8 साल से विवाद मामले के अनुसार महिला ने अपने एडवोकेट रघुवीर सिंह रघुवंशी के माध्यम से पति संदीप से हर महीने भरण पोषण के रूप में एक तय रकम देने की मांग की. इसके लिए फैमिली कोर्ट में परिवाद लगाया गया. इसमें बताया गया "उसकी शादी संदीप से 11 मार्च 2012 में हुई थी. उसके दो बच्चे हैं. बेटी की उम्र 12 साल और बेटे की उम्र 10 साल है. शादी के बाद से ही छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद होने लगा. 2017 में विवाद इतना बढ़ गया कि पति ने उसकी पिटाई कर दी." पति ने बताया- पत्नी हर माह 20 हजार कमाती है महिला ने बताया "पिटाई के दौरान बीचबचाव करने आए बेटे को भी धक्का दे दिया गया. वह सीढ़ियों से गिर गया और उसके सिर पर भी चोट आई. लेकिन पति ने उसका इलाज न करवाते हुए उसे और दोनों बच्चों को घर से बाहर निकाल दिया. इसके बाद पति ने दूसरी शादी भी कर ली." कोर्ट में सुनवाई के दौरान पति की ओर से दलील दी गई "पत्नी ₹20 हजार प्रति माह कमाती है और वह बच्चों के साथ खुद का भी भरण पोषण कर सकती है." जब से पति-पत्नी अलग हुए, तभी से देनी होगी राशि पत्नी ने कोर्ट को बताया "उसका पति इंजीनियर है और हर महीने 75 हजार रुपए प्रति महीने कमाता है." कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आदेश दिया "पति हर महीने अपनी बड़ी बेटी को ₹15000 और बेटे को ₹7000 महीने की 10 तारीख को दे. ये राशि बच्चों की मां मां के पास जाएगी." कोर्ट ने ये भी कहा कि जिस दिन पति-पत्नी अलग हुए थे, उसी दिन से ये राशि देनी होगी. यदि पति ने बीच में कोई राशि पत्नी और बच्चों को दी है तो इसे समायोजित किया जा सकता है. 

प्रदेश के सभी विद्यालयों में 10 जुलाई गुरूवार को गुरू पूर्णिमा के मौके पर 2 दिवसीय उत्सव का आयोजन किया जायेगा

भोपाल  प्रदेश के सभी विद्यालयों में 10 जुलाई गुरूवार को गुरू पूर्णिमा के मौके पर 2 दिवसीय उत्सव का आयोजन किया जायेगा। यह आयोजन 9 और 10 जुलाई को होगा। इस संबंध में आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश जारी किये हैं। निर्देश में कहा गया है कि पहले दिन 9 जुलाई को विद्यालय में प्रार्थना सभा के बाद शिक्षकों द्वारा गुरू पूर्णिमा के महत्व और पारंपरिक गुरू-शिष्य संस्कृति के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी जायेगी। विद्यालय में प्राचीन काल में प्रचलित गुरूकुल व्यवस्था एवं उसका भारतीय संस्कृति में प्रभाव विषय पर बच्चों के बीच में निबंध लेखन प्रतियोगिता की जायेगी। विद्यालयों के प्राचार्यों से कहा गया है कि आयोजन के दौरान साधु-संतों, गुरूजनों, सेवानिवृत्त शिक्षकों, विद्यार्थियों और नागरिकों को आमंत्रित किया जाये। इन आयोजन में विद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों को भी आमंत्रित किया जा सकता है। पूर्व विद्यार्थी अपने शाला जीवन के अनुभव को विद्यार्थियों के बीच साझा करेंगे। उत्सव के दूसरे दिन 10 जुलाई को गुरू पूर्णिमा के दिन प्रदेश की शिक्षण संस्थाओं में वीणा वादिनी माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण कर गुरू वंदना की जायेगी। विद्यालयों में पदस्थ शिक्षकों और विद्यार्थियों द्वारा गुरू की महिमा पर केन्द्रित व्याख्यान होंगे। इसी के साथ इस दिन गुरूजनों एवं शिक्षकों का सम्मान भी किया जायेगा। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों में भारतीय मूल्यों संस्कृति आधारित शिक्षा के लिये कई उललेखनीय कदम उठाये गये हैं। उनमें से एक विद्यालयों में गुरू पूर्णिमा का आयोजन किया जाना भी एक है।  

ऑपरेशन सिंदूर के बाद जीसीएफ को नौ साल बाद एलएफजी के बड़े उत्पादन का यह लक्ष्य मिला

जबलपुर  मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित तोपगाड़ी निर्माणी (जीसीएफ) 18 लाइट फील्ड गन (एलएफजी) का निर्माण कर रही है, जिसे अब बढ़ाकर 36 करने का निर्णय लिया गया है। यह वृद्धि ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ती मांग के कारण हुई है। कुछ महीनों में पहली खेप में शामिल 18 एलएफजी का उत्पादन पूरा हो जाएगा। बड़े उत्पादन का लक्ष्य मिला जीसीएफ को नौ साल बाद एलएफजी के बड़े उत्पादन का यह लक्ष्य मिला है। इसके साथ ही, जीसीएफ बोफोर्स के अपग्रेड वर्जन धनुष तोप की मारक क्षमता को 45 से बढ़ाकर 52 कैलिबर बैरल करने की योजना बना रही है। धनुष तोप सेना की ताकत को और बढ़ाएगी बता दें कि धनुष तोप की 52 कैलिबर बैरल की मारक क्षमता के प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण पोखरण और बालासोर में किया गया है। परीक्षण में तोप ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भविष्य में 52 कैलिबर बैरल के साथ धनुष तोप सेना की ताकत को और बढ़ाएगी। जीसीएफ के अधिकारियों के अनुसार, परीक्षण के परिणामों के आधार पर तोप का उत्पादन शुरू होगा। लाइट फील्ड गन की विशेषताएं यह 105 मिमी की एक उन्नत फील्ड आर्टिलरी हथियार प्रणाली है, जो हल्केपन और ताकत का संयोजन करती है। इसे दो क्रू सदस्य, एक गनर और एक लोडर, संचालित करते हैं। इसकी पोर्टेबिलिटी इसे पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में अत्यधिक उपयोगी बनाती है। यह छह राउंड प्रति मिनट की तीव्रता से लक्ष्य भेदने में सक्षम है।