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अरावली पर मंडराते खतरे पर सियासी पहल, विधायक भाटी ने पीएम से की नीति बदलने की मांग

बाड़मेर अरावली पर्वतशृंखला के संरक्षण को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट की हालिया व्याख्या के आधार पर अपनाई जा रही 100 मीटर ऊंचाई संबंधी प्रशासनिक नीति पर पुनर्विचार की मांग की है। विधायक ने इसे केवल कानूनी व्याख्या का विषय नहीं, बल्कि उत्तर भारत के पर्यावरणीय भविष्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न बताया है।   अरावली का ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व पत्र में विधायक भाटी ने उल्लेख किया कि अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक है, जिसकी आयु लगभग 2.5 अरब वर्ष मानी जाती है। लगभग 692 किलोमीटर लंबी यह पर्वतमाला राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से होकर गुजरती है, जिसमें करीब 80 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान में स्थित है और यह राज्य के 15 जिलों को आच्छादित करती है। उन्होंने अरावली को राजस्थान की लाइफलाइन बताते हुए इसे मरुस्थलीकरण के विरुद्ध प्राकृतिक सुरक्षा कवच बताया।   100 मीटर व्याख्या से संरक्षण पर खतरे की आशंका विधायक भाटी ने चिंता जताई कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को पहाड़ न मानने की प्रवृत्ति से अरावली का बड़ा हिस्सा कानूनी संरक्षण से बाहर हो सकता है। उन्होंने फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के आंकड़ों का हवाला देते हुए लिखा कि राजस्थान की 12,081 पहाड़ियों में से केवल 1,048 ही 100 मीटर से अधिक ऊंची हैं। इस स्थिति में नई व्याख्या लागू होने पर अरावली की लगभग 90 प्रतिशत पहाड़ियां संरक्षण से वंचित हो सकती हैं, जिससे खनन और अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों का खतरा बढ़ेगा।   जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन में भूमिका पत्र में अरावली की पारिस्थितिक भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई है। विधायक ने लिखा कि अरावली की चट्टानी संरचना वर्षा जल को रोककर भूमि में समाहित करने में सहायक है, जिससे प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष लगभग 20 लाख लीटर भूजल का पुनर्भरण होता है। उन्होंने आगाह किया कि अरावली के कमजोर होने से पश्चिमी राजस्थान में जल संकट स्थायी रूप ले सकता है। जैव विविधता और मानव जीवन से जुड़ाव विधायक भाटी ने यह भी रेखांकित किया कि अरावली केवल भू-आकृतिक संरचना नहीं है, बल्कि यह 300 से अधिक वन्य जीवों और पक्षियों का आवास है। यह लाखों पशुपालकों के लिए चारागाह, बनास, लूणी, साबरमती और बाणगंगा जैसी नदियों का उद्गम स्थल भी है। साथ ही अरावली मानसूनी हवाओं को रोकने, लू की तीव्रता कम करने और तापमान संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए इसे प्राकृतिक ग्रीन बैरियर बताया गया है।   नीतिगत विरोधाभास पर उठाए सवाल पत्र में राज्य सरकार की नीतियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। विधायक ने लिखा कि एक ओर बजट 2025-26 में 250 करोड़ रुपये की हरित अरावली विकास परियोजना की घोषणा की जाती है, वहीं दूसरी ओर ऐसी व्याख्याएं सामने आती हैं जो अरावली को कमजोर कर सकती हैं। इसे उन्होंने विकास और संरक्षण के बीच विरोधाभास बताया। प्रधानमंत्री से विधायक भाटी ने चार प्रमुख मांगें रखी हैं 1. अरावली पर्वतमाला की परिभाषा केवल ऊंचाई के आधार पर नहीं, बल्कि उसके पारिस्थितिक और भूवैज्ञानिक महत्व के आधार पर तय की जाए। 2. 100 मीटर ऊंचाई संबंधी व्याख्या पर पुनर्विचार कर अरावली की सभी पहाड़ियों को संरक्षण प्रदान किया जाए। 3. अरावली क्षेत्र में खनन और अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए। 4. ‘हरित अरावली विकास परियोजना’ को केवल घोषणाओं तक सीमित न रखते हुए जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।   प्रधानमंत्री से संरक्षण सुनिश्चित करने की अपील अपने पत्र के अंत में विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि अरावली पर्वतमाला की परिभाषा केवल ऊंचाई के आधार पर नहीं, बल्कि उसके पारिस्थितिक और भूवैज्ञानिक महत्व को ध्यान में रखकर तय की जाए। उन्होंने कहा कि अरावली पर हो रहा आक्रमण विकास नहीं, बल्कि विनाश की ओर ले जाने वाला कदम है और प्रकृति के साथ अन्याय का प्रभाव अंततः समाज पर ही पड़ता है।

स्टिंग ऑपरेशन पर बोले विधायक भाटी— निष्पक्ष जांच से ही सामने आएंगे तथ्य

बाड़मेर शिव विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने तीन विधायकों के स्टिंग ऑपरेशन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह मामला गंभीर है और इसकी निष्पक्ष व गहन जांच आवश्यक है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।   सदाचार समिति और फॉरेंसिक जांच की मांग रवींद्र सिंह भाटी ने कहा कि इस प्रकरण की जांच सदाचार समिति की बैठक में होनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोर दिया कि फॉरेंसिक जांच के माध्यम से तथ्यों की पुष्टि की जाए, जिससे किसी भी तरह की शंका की गुंजाइश न रहे।   विधायक निधि को बताया जनता का पैसा भाटी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विधायक निधि जनता का पैसा है, किसी व्यक्ति का निजी धन नहीं। जनता ने विधायकों को इस राशि की रखवाली के लिए चुना है और यह टैक्सपेयर्स की गाढ़ी कमाई है, जिसकी हर एक पाई जनता के हित में खर्च होनी चाहिए।   सिस्टम पर भरोसा, दोषियों को सजा की उम्मीद उन्होंने कहा कि उन्हें सिस्टम पर पूरा भरोसा है और जांच के बाद दोषियों को सजा मिलेगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि यदि कभी सिस्टम ही सिस्टम की भेंट चढ़ जाए, तो मीडिया और उनके जैसे विधायक सच्चाई को सामने लाने का काम करेंगे।   विधायक निधि को लेकर स्पष्ट रुख अमर उजाला के एक अन्य सवाल पर रवींद्र सिंह भाटी ने कहा कि यदि विधायकों को पैसा कमाना है तो वे व्यापार करें, इसमें कोई रोक नहीं है, लेकिन विधायक निधि से छेड़छाड़ करना जनता के साथ सीधा धोखा है। उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति ईमानदार और मेहनती होता है, उसे चुनाव जीतने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती। राजनीति में साफ-सुथरी छवि और जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी है। किसानों के धरने पर क्या बोले भाटी? किसानों के मुद्दे पर भी रविंद्र सिंह भाटी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कोई यों ही धरने पर नहीं बैठ जाता है। यूरिया मांग रहे हैं, उनका हक है। बिजली मांग रहे हैं, उनका हक है। पानी मांग रहे हैं, उनका हक है। वहीं, राज्य सरकार के दो साल की उपलब्धियों पर रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि विकास कहां है? आपको दिख जाए तो हमें भी बताएं।

किराए के मकान में चल रहा था धर्मांतरण का खेल, विदेशी नागरिकों सहित छह गिरफ्तार

श्रीगंगानगर राजस्थान के बॉर्डर एरिया श्रीकरणपुर में अवैध धर्मांतरण का बड़ा मामला सामने आया है। वार्ड नंबर 22 की लक्कड़ मंडी में श्री गुरुनानक दरबार गुरुद्वारे के पास एक किराए के नवनिर्मित मकान में गुपचुप तरीके से चर्च चलाया जा रहा था। यहां जर्मनी के दंपति सहित कुछ लोग पैसे और अन्य लालच देकर गरीबों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए भ्रमित कर रहे थे। गुरुवार देर रात विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंच गए और हंगामा शुरू हो गया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जर्मनी के स्वैन बॉज बेट जलेर और उनकी पत्नी संदरा, कर्नाटक के संतोष वर्गीसी, केरल के मैथ्यू, बलजिंदर सिंह खोसा और राजेश कंबोज उर्फ पोपी को हिरासत में ले लिया। देर रात तक चर्च के बाहर और थाने के सामने हिंदू व सिख संगठनों के सैकड़ों लोग जमा हो गए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। सीओ पुष्पेंद्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और लोगों से पूछताछ की। हिरासत में 6 लोग, विदेशी फंडिंग पर शक पुलिस के अनुसार, श्रीकरणपुर भारत-पाकिस्तान सीमा से सटा संवेदनशील क्षेत्र है। यहां विदेशी नागरिकों की आवाजाही पर सख्त प्रतिबंध हैं। जर्मन दंपति ने बिना अनुमति के यहां प्रवेश किया और गुप्त रूप से धर्मांतरण का कार्यक्रम चला रहे थे। इससे धार्मिक भावनाएं भड़कने का खतरा था। हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी है। विश्व हिंदू परिषद ने अवैध धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए थाने में परिवाद दिया। विरोध करने वालों में श्याम सिंह राजपुरोहित, चिराग, अशोक जोशी, गुंटूर गुंबर सहित कई कार्यकर्ता शामिल थे। हैरानी की बात यह है कि यह मकान जोगेंद्र सिंह पेटीवाले के परिवार का है, जो किराए पर दिया गया था। गली के लोगों को भी इसकी भनक नहीं थी। कुछ दिनों से संदिग्ध लोगों का आना-जाना बढ़ गया था, जिनमें विदेशी भी शामिल थे। सीआईडी के खुफिया विभाग को भी सूचना मिली और वे मौके पर पहुंचे। बॉर्डर एरिया में 3 महीने में 4 मामले राजस्थान में नए धर्मांतरण विरोधी कानून के बाद श्रीगंगानगर जिले में कई मामले सामने आ चुके हैं। पिछले तीन महीनों में बॉर्डर एरिया से ही चार मामले दर्ज हुए हैं। 16 सितंबर: अनूपगढ़ में पादरी पोलस बारजो, विनोद कुमार और उसके बेटे आर्यन पर केस। 6 अक्तूबर: हिंदूमलकोट में पादरी बग्गू सिंह और उसके बेटे अमनदीप पर मामला। 11 अक्तूबर: अनूपगढ़ में सास, पत्नी के बाई और दो पादरियों पर जबरन धर्मांतरण की कोशिश। अब श्रीकरणपुर में जर्मन दंपति वाला मामला। गरीब लोग बन रहे सॉफ्ट टारगेट विशेषज्ञों का मानना है कि ईसाई मिशनरियां एनजीओ के जरिए विदेशी फंडिंग से गरीबों को आर्थिक लालच देकर धर्म बदलवा रही हैं। बॉर्डर एरिया को इसलिए टारगेट किया जा रहा है ताकि भविष्य में इन लोगों से गोपनीय जानकारी जुटाई जा सके और भारत के खिलाफ इस्तेमाल हो। ऐसी गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। देर रात तक माहौल गर्म रहा। पुलिस पूछताछ के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।

अरावली की ढलान पर खनन को हरी झंडी! SC के फैसले से पर्यावरण पर मंडराया बड़ा खतरा

अरावली देश में पिछले कुछ वर्षों से खनन के जरिए पहाड़ों को काटने का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने पर्यावरण से जुड़े बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। 20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने खनन से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया, जिसके तहत 100 मीटर तक ऊंचाई वाले पहाड़ों पर खनन की अनुमति दी गई है। यह फैसला खासतौर पर राजस्थान और अरावली पर्वतमाला के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह फैसला पूरी तरह लागू हुआ, तो राजस्थान में रेगिस्तान का क्षेत्र बढ़ सकता है। अरावली पर्वतमाला पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला अरावली पर्वतमाला को राजस्थान की लाइफ लाइन कहा जाता है, लेकिन अब यह लाइफ लाइन खतरे में नजर आ रही है। पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि अरावली पर्वत का क्षेत्र तेजी से सिकुड़ रहा है। कोर्ट के अनुसार, अरावली का लगभग 90% हिस्सा अब 100 मीटर से कम ऊंचाई का रह गया है, 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्र को अब पर्वत नहीं, सिर्फ भूभाग माना जाएगा,  इसका सीधा मतलब यह है कि इन इलाकों में खनन के रास्ते खुल सकते हैं। क्या राजस्थान में बढ़ेगा रेगिस्तान? पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया कि अरावली पर्वतमाला अब पहले जैसी ऊंची नहीं रही। अरावली मरुस्थल के विस्तार को रोकने में प्राकृतिक दीवार का काम करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अरावली में खनन बढ़ा, तो: मरुस्थल का विस्तार तेजी से होगा, मानसून की हवाएं कमजोर पड़ेंगी, प्रदेश में बारिश कम होगी। अरावली की ऊंचाई घटने से मानसून सिस्टम भी प्रभावित हो रहा है, जिससे राजस्थान के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राजस्थान की पहचान है अरावली पर्वतमाला अरावली पर्वतमाला को दुनिया की सबसे पुरानी वलित पर्वतमालाओं में से एक माना जाता है। अरावली की कुल लंबाई: 692 किलोमीटर राजस्थान में हिस्सा: करीब 550 किलोमीटर सबसे ऊंची चोटी: गुरु शिखर (माउंट आबू) – ऊंचाई 1727 मीटर अरावली तीन राज्यों—दिल्ली, राजस्थान और गुजरात—से होकर गुजरती है। राजस्थान की अधिकांश नदियों का उद्गम भी अरावली पर्वतमाला से ही होता है, इसलिए इसे प्रदेश की लाइफ लाइन कहा जाता है। अरावली कमजोर होने से क्या होंगे नुकसान अगर अरावली पर्वतमाला का क्षरण इसी तरह जारी रहा, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं: राजस्थान में मरुस्थल का तेजी से विस्तार गर्म हवाओं का असर और बढ़ेगा बंगाल की खाड़ी से आने वाला मानसून कमजोर पड़ेगा भूकंप के झटकों का असर बढ़ सकता है अरावली से निकलने वाली नदियां सूख सकती हैं खेती और फसलों पर बुरा असर पड़ेगा प्रदेश की जलवायु और भौगोलिक संतुलन बिगड़ जाएगा बारिश का सिस्टम हो रहा है प्रभावित पर्यावरण विशेषज्ञ और राजस्थान विश्वविद्यालय की भूगोल विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर के अनुसार, अरावली की ऊंचाई कम होने से राजस्थान का वर्षा तंत्र बिगड़ रहा है। पहले मानसून की हवाएं अरावली से टकराकर पूर्वी राजस्थान में बारिश करती थीं, लेकिन अब अरावली कमजोर होने के कारण हवाएं पश्चिमी राजस्थान की ओर निकल जा रही हैं। इससे पूरे प्रदेश का वर्षा संतुलन गड़बड़ा रहा है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है। कैसे शुरू हुआ अरावली का क्षरण अरावली पर्वतमाला के क्षरण की शुरुआत 1990 के दशक में हुई। इसके मुख्य कारण बताए जा रहे हैं: तेजी से शहरीकरण दिल्ली और राजस्थान में बड़े निर्माण कार्य पत्थर और खनिजों के लिए अंधाधुंध खनन पेड़ों की कटाई स्थिति बिगड़ने पर 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने अरावली में अवैध खनन पर रोक लगाई थी, लेकिन अब नए फैसले के बाद एक बार फिर पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ गई है।  

उच्च शिक्षा को नई उड़ान, कोटा के IIIT में आ रहे AI और अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी कोर्स

कोटा शिक्षा नगरी के रूप में देशभर में पहचान बना चुके कोटा को अब उच्च शिक्षा और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नई उड़ान मिलने जा रही है. ट्रिपल आईटी कोटा (IIIT Kota) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सहित कई अत्याधुनिक और भविष्य उन्मुख पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है. इसे लेकर केंद्र सरकार स्तर पर गंभीर मंथन किया गया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच संसद भवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक में कोटा-बूंदी क्षेत्र में उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा के समग्र विकास पर विस्तृत चर्चा की गई. बैठक के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने एक विशेष समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं, जो एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि कोटा देश का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र है, जहां हर वर्ष लगभग डेढ़ लाख छात्र आईआईटी और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं. सड़क और रेल कनेक्टिविटी के साथ आने वाले समय में एयर कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी. ऐसे में ट्रिपल आईटी कोटा को और सशक्त बनाना समय की मांग है और इसे आईआईटी की तर्ज पर विकसित किया जाना चाहिए. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि आगामी 10 वर्षों में ट्रिपल आईटी कोटा में विद्यार्थियों की क्षमता 25 हजार तक बढ़ाने की योजना है. संस्थान में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी और नए, समसामयिक व रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे. बैठक में पीएमश्री विद्यालयों की संख्या बढ़ाने और राजस्थान के लिए शिक्षा बजट में केंद्रीय सहायता बढ़ाने जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ. ट्रिपल आईटी कोटा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन एनर्जी, वैश्विक रोजगार बाजार की मांग के अनुरूप फ्यूचरिस्टिक कोर्स, एआई सेंटर, पंप स्टोरेज और एटॉमिक स्टडीज जैसे विभाग शुरू करने का प्रस्ताव है. चंबल नदी क्षेत्र की प्राकृतिक समृद्धि और रावतभाटा में परमाणु ऊर्जा संयंत्र के चलते कोटा तकनीकी और ऊर्जा आधारित शिक्षा के लिए अनुकूल माना जा रहा है. इसके साथ ही लोकसभा अध्यक्ष ने कोटा-बूंदी क्षेत्र में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर भी जोर दिया. उन्होंने ‘नो योर कॉन्स्टिट्यूशन’ कार्यक्रम को स्कूलों में व्यापक रूप से लागू करने की बात कही, ताकि विद्यार्थी संविधान की मूल भावना और मूल्यों से परिचित हो सकें. बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, ट्रिपल आईटी कोटा के निदेशक सहित कई प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे.

किसानों पर ‘सेम’ की दोहरी मार, राजस्थान की 2 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित

जयपुर राजस्थान में सूखे से ज्यादा सेम की समस्या खेती को बर्बाद कर रही है।  मिट्टी की लवणता यानी ‘सेम’ की समस्या राजस्थान में तेजी से गंभीर रूप ले रही है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी कि राज्य में करीब 1 लाख 96 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि सेम से प्रभावित हो चुकी है। सबसे ज्यादा असर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में देखने को मिल रहा है, जहां हजारों हेक्टेयर उपजाऊ जमीन दलदली होकर खेती के लायक नहीं रह गई है। इससे किसानों की आजीविका पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने सांसद कुलदीप इंदोरा के एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI) द्वारा वैज्ञानिक अध्ययन कराया गया है। इस अध्ययन में सामने आया कि राजस्थान में 1,95,571 हेक्टेयर भूमि मिट्टी के लवणीकरण से प्रभावित है, जिसे आम भाषा में सेम कहा जाता है। क्यूं बढ़ रही है सेम की समस्या अध्ययन के अनुसार सेम की मुख्य वजहें प्राकृतिक जल निकास में रुकावट, अत्यधिक सिंचाई और भूजल स्तर का बढ़ना हैं। इन कारणों से मिट्टी में मौजूद लवण ऊपर की सतह पर आ जाते हैं, जिससे धीरे-धीरे खेत बंजर हो जाते हैं और फसल उत्पादन प्रभावित होता है। केंद्र सरकार ने माना कि उत्तर राजस्थान के नहर सिंचित क्षेत्रों में स्थिति लगातार बिगड़ रही है। ICAR की रिपोर्ट के मुताबिक अकेले श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में करीब 5,397 हेक्टेयर भूमि सेम से प्रभावित है, जिससे जलभराव, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और कृषि उत्पादकता में कमी आ रही है। ICAR ने सुझाए उपाय समस्या से निपटने के लिए ICAR ने अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों उपाय सुझाए हैं। अल्पकालिक उपायों में प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, सतही जल निकासी में सुधार, सिंचाई का बेहतर प्रबंधन, मिश्रित गुणवत्ता के पानी का उपयोग और नमक सहनशील फसलों को बढ़ावा देना शामिल है। वहीं दीर्घकालिक समाधान के तौर पर भूमिगत जल निकासी प्रणाली, गहरी जड़ों वाले वृक्षों के जरिए बायो-ड्रेनेज और नमक सहनशील पेड़ों के साथ कृषि वानिकी मॉडल अपनाने की सिफारिश की गई है। सरकार ने बताया कि इन तकनीकों को प्रशिक्षण, प्रदर्शन और जागरूकता अभियानों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके साथ ही मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना के तहत जारी किए जा रहे सॉयल हेल्थ कार्ड भी सेम प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को मिट्टी प्रबंधन में मदद कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो राजस्थान में उपजाऊ कृषि भूमि का नुकसान और बढ़ सकता है।

जोधपुर में तैनात होंगे AH-64E अपाचे, भारतीय सेना को मिली घातक शक्ति

जोधपुर भारत और अमेरिका के बीच तेजी से मजबूत होती मेजर डिफेंस पार्टनरशिप को एक और ठोस रूप देते हुए भारतीय सेना के लिए बोइंग निर्मित AH-64E अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर भारत पहुंच चुके हैं। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने आधिकारिक बयान में दी, जिसमें कहा गया कि यह डिलीवरी अमेरिकी राष्ट्रपति (POTUS) और भारत के प्रधानमंत्री (PMO India) के संयुक्त वक्तव्य में की गई प्रतिबद्धताओं को पूरा करती है। भारतीय सेना के सूत्रों के अनुसार, इन अत्याधुनिक अटैक हेलिकॉप्टरों का तकनीकी निरीक्षण, स्वीकृति परीक्षण और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद आने वाले कुछ दिनों में जोधपुर में तैनाती की जाएगी। अमेरिकी दूतावास का बयान: रणनीतिक भरोसे का संकेत अमेरिकी दूतावास ने अपने संदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि अपाचे हेलिकॉप्टरों का आगमन अमेरिका–भारत रक्षा साझेदारी की विश्वसनीयता और मजबूती को दर्शाता है। दूतावास के अनुसार, यह उपलब्धि अमेरिकी रक्षा सचिव और भारत के रक्षा मंत्रालय के बीच हुए समझौतों को भी पूरा करती है। बयान में यह भी रेखांकित किया गया कि यह सहयोग केवल हथियार आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें को-प्रोडक्शन, प्रशिक्षण, रखरखाव और उन्नत तकनीकी सहयोग जैसे महत्वपूर्ण आयाम भी शामिल हैं, जो दोनों देशों की क्षेत्रीय सुरक्षा की साझा दृष्टि को मजबूत करते हैं। AH-64E अपाचे: भारतीय सेना के लिए निर्णायक युद्ध शक्ति AH-64E अपाचे गार्जियन दुनिया के सबसे घातक और उन्नत अटैक हेलिकॉप्टरों में गिना जाता है। यह हेलिकॉप्टर एंटी-आर्मर ऑपरेशन, क्लोज एयर सपोर्ट, सटीक स्ट्राइक और आधुनिक नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है। अपाचे में अत्याधुनिक सेंसर, लॉन्गबो फायर-कंट्रोल रडार, हेलफायर मिसाइलें और भारी हथियार प्रणाली लगी होती है, जो इसे हर मौसम और हर भूभाग में प्रभावी बनाती हैं। रेगिस्तानी और उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में इसकी सिद्ध क्षमता इसे भारत के पश्चिमी मोर्चे के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती है। सेना विमानन कोर को मिली नई धार अपाचे हेलिकॉप्टरों की तैनाती भारतीय सेना के आर्मी एविएशन कॉर्प्स के लिए एक रणनीतिक बदलाव का संकेत है। पहली बार भारतीय सेना के पास अपने नियंत्रण में पूरी तरह समर्पित अटैक हेलिकॉप्टर होंगे, जिससे ज़मीनी सैनिकों के साथ समन्वय और युद्धक्षेत्र में प्रतिक्रिया क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। यह कदम भारतीय सेना की संयुक्त युद्धक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला माना जा रहा है। और ये भी पढ़े जोधपुर में तैनाती: पश्चिमी मोर्चे पर निर्णायक बढ़त अपाचे हेलिकॉप्टरों की प्रस्तावित तैनाती जोधपुर में की जा रही है, जो भारत के पश्चिमी सेक्टर का एक प्रमुख सैन्य केंद्र है। यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है और यहां से त्वरित प्रतिक्रिया अभियानों की आवश्यकता रहती है। अपाचे की रेगिस्तानी इलाकों में उत्कृष्ट प्रदर्शन क्षमता इसे इस क्षेत्र के लिए आदर्श बनाती है, जिससे भारतीय सेना की डिटरेंस और ऑफेंसिव क्षमता को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। परिपक्व होती भारत–अमेरिका रक्षा साझेदारी का प्रतीक अपाचे हेलिकॉप्टरों की यह डिलीवरी केवल एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि भारत–अमेरिका संबंधों में बढ़ते रणनीतिक विश्वास का प्रतीक है। पिछले वर्षों में भारत ने अमेरिका से कई उन्नत सैन्य प्लेटफॉर्म प्राप्त किए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग लगातार गहरा हुआ है। इस सहयोग ने पारंपरिक खरीदार-विक्रेता संबंधों से आगे बढ़कर रणनीतिक साझेदारी का स्वरूप ले लिया है। प्रशिक्षण, रखरखाव और दीर्घकालिक सहयोग अपाचे कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय सेना के पायलटों और तकनीकी कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ ही लॉजिस्टिक सपोर्ट, स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस फ्रेमवर्क भी स्थापित किया गया है, जिससे प्लेटफॉर्म की दीर्घकालिक परिचालन क्षमता सुनिश्चित हो सके। यह सहयोग भारतीय सेना की तकनीकी आत्मनिर्भरता और परिचालन दक्षता को भी मजबूती प्रदान करता है। क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव अपाचे हेलिकॉप्टरों का आगमन ऐसे समय हुआ है जब क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। इन हेलिकॉप्टरों से भारतीय सेना की त्वरित प्रतिक्रिया और सटीक प्रहार क्षमता को मजबूती मिलेगी, जो स्थिरता और शांति बनाए रखने में सहायक होगी। निरीक्षण और औपचारिक प्रक्रियाओं के पूरा होते ही अपाचे हेलिकॉप्टर जल्द ही पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाएंगे। यह न केवल भारतीय सेना की युद्धक क्षमता में वृद्धि करेगा, बल्कि भारत–अमेरिका रक्षा साझेदारी के भविष्य की दिशा भी स्पष्ट करता है।  

सऊदी अरब से एक माह बाद भारत पहुंचा रमेश मेघवाल का शव

बाड़मेर सऊदी अरब में काम करने गए बालोतरा जिले के युवक रमेश मेघवाल की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद शव को भारत लाने के लिए इंतजार कर रहे मृतक के परिवारजनों का इंतजार एक महीने बाद खत्म हुआ है। सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने बताया कि संसदीय क्षेत्र के बालोतरा जिले के सोहड़ा (गिड़ा) निवासी युवक स्व.रमेश कुमार मेघवाल 11 अक्तूबर 2025 को अपने दो साथियों हीराराम मेघवाल (सवाऊ मूलराज) एवं रोशन अली (जाजवा, गिड़ा) के साथ रोजगार हेतु अरब के दोहा (क़तर) गया था। दुर्भाग्यवश 17 नवंबर 2025 को उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। मृत्यु के पश्चात वहां की जटिल कानूनी प्रक्रिया, स्थानीय पुलिस कार्रवाई एवं मेडिकल पोस्टमार्टम की लंबी औपचारिकताओं के कारण पार्थिव शरीर को भारत लाने में अत्यधिक विलंब हुआ। उन्होंने बताया कि जैसे ही यह प्रकरण 18 नवंबर 2025 को मेरे संज्ञान में आया, मैंने तुरंत भारतीय दूतावास एवं विदेश मंत्रालय के संबंधित अधिकारियों से दूरभाष पर संपर्क कर आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ज्यादा देरी और जटिल प्रक्रियाओं के कारण 05 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर जी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर भारत सरकार के खर्चे पर पार्थिव शरीर शीघ्र भारत लाने, मामले की कानूनी जांच कराने एवं पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की मांग रखी। इस पर भारत सरकार एवं भारतीय दूतावास द्वारा प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करवाने का आश्वासन दिया गया। बेनीवाल ने बताया कि बुधवार देर रात्रि रमेश कुमार मेघवाल का पार्थिव शरीर दम्माम (सऊदी अरब) एयरपोर्ट से रात्रि 12:05 बजे रवाना होकर आज प्रातः 06:45 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा गया है। उन्होंने बताया कि दोपहर 12:35 बजे दिल्ली से प्रस्थान कर 01:25 बजे जयपुर एयरपोर्ट पहुंचने की व्यवस्था की गई है। जयपुर एयरपोर्ट पर आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं के पश्चात पार्थिव शरीर परिजनों को सुपुर्द किया जाएगा। जयपुर से सोहड़ा गाँव तक सड़क मार्ग से ले जाने हेतु एम्बुलेंस की समुचित व्यवस्था करवा दी गई है। बेनीवाल ने दिवगंत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की धैर्य एवं शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करते हुए पीड़ित एवं शोक संतप्त परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाए व्यक्त की।

भेडाणा गांव में आधी रात चौपाल: कलेक्टर टीना डाबी ने सीधे ग्रामीणों से जाना जमीनी हाल

बाड़मेर बाड़मेर जिले में रात्रि चौपाल एक बार फिर ग्रामीणों के लिए राहत की वजह बनी। बुधवार को सर्द रात में जिला कलेक्टर टीना डाबी स्वयं जिले की भेडाणा ग्राम पंचायत पहुंची और घंटों ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। सर्दी के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण चौपाल में एकत्र हुए। जहां उन्होंने अपनी समस्याओं को जिला कलेक्टर के सामने रखा। जिसे जिला कलेक्टर टीना डाबी ने गंभीरता से लेते हुए कई समस्याओं का मौके पर ही समाधान कर ग्रामीणों को त्वरित राहत प्रदान की। दरसअल बाड़मेर जिला कलेक्टर टीना डाबी ने बुधवार को भेडाणा ग्राम पंचायत में आयोजित रात्रि चौपाल के दौरान आमजन की परिवेदनाएं सुनी। इस दौरान कई समस्याओं का मौके पर निस्तारण करते हुए आमजन को राहत पहुंचाई गई। रात्रि चौपाल के दौरान जिला कलेक्टर टीना डाबी ने आमजन समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ व्यक्तिशः सुनते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को समयबद्ध त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए। इस दौरान जिला कलेक्टर टीना डाबी ने कहा कि समस्त विभागीय अधिकारी प्राप्त होने वाले प्रकरणों का त्वरित निराकरण करना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय अधिकारी प्रकरण निस्तारण के लिए विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित करने के साथ परिवादी से व्यक्तिगत संपर्क करते हुए एवरेज डिस्पोजल टाइम में सुधार करें। उन्होंने मौजूदा समय में निर्वाचन आयोग की ओर से चलाए जा रहे एसआईआर कार्यकम के तहत 1 जनवरी 2026 को पात्र व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची में जुड़वाने के बारे में अवगत कराया। रात्रि चौपाल में बिजली, पानी, अतिक्रमण, पेंशन समेत विभिन्न विभागों से संबंधित परिवाद प्राप्त हुए जिन पर जिला कलेक्टर ने संज्ञान लेते हुए उपखंड अधिकारी, तहसीलदार, विकास अधिकारी और संबंधित विभागों को आगामी सात दिवस में परिवारदों के निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने सभी परिवादियों को की गई कार्यवाही से अवगत कराते हुए गुणवत्तापूर्ण प्रकरण निस्तारित करने के निर्देश दिए। इस दौरान उपखंड अधिकारी केशव मीना समेत विभिन्न विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

चार राज्यों से गुजरते हुए राजस्थान–पुणे सुपरफास्ट ट्रेन शुरू, जानें रूट और स्टेशनों की पूरी जानकारी

जयपुर  क्रिसमस, नए साल और सर्दियों की छुट्टी के दौरान सफर करने वाले यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को कम करने के लिए मध्य रेलवे ने महाराष्ट्र के पुणे शहर से राजस्थान के सांगानेर के बीच एक विशेष ट्रेन पुणे – सांगानेर – पुणे साप्ताहिक सुपरफास्ट विशेष ट्रेन चलाने की घोषणा की है। यह साप्ताहिक ट्रेन 19 दिसंबर से प्रत्येक शुक्रवार को पुणे से और प्रत्येक शनिवार को सांगानेर से चलेगी और 2 जनवरी 2026 तक कुल छह ट्रिप (फेरे) लगाएगी। रास्ते में यह ट्रेन दोनों दिशाओं चार राज्यों (महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान) के 14 रेलवे स्टेशनों पर रुकेगी। इस स्पेशल वीकली ट्रेन में 4 AC-3 टियर, 8 स्लीपर क्लास, 4 सामान्य श्रेणी और 2 सेकेंड क्लास सह गार्ड ब्रेक समेत कुल 18 कोच होंगे। यह ट्रेन महाराष्ट्र में पुणे जंक्शन, कल्याण जंक्शन, भिवंडी रोड, वसई रोड, पालघर, गुजरात में वापी, वलसाड, सूरत, अंकलेश्वर जंक्शन, वडोदरा जंक्शन, मध्य प्रदेश में रतलाम और राजस्थान में भवानीमंडी, रामगंजमंडी, कोटा जंक्शन, सवाई माधोपुर और सांगानेर स्टेशनों पर स्टॉपेज लेगी। < ट्रेन का नाम- 01405 पुणे – सांगानेर साप्ताहिक विशेष ट्रेन (3 फेरे) कब चलेगी- 19 दिसंबर 2025 से 2 जनवरी 2026 तक प्रत्येक शुक्रवार को प्रस्थान का समय- पुणे से हर शुक्रवार सुबह 09.45 बजे चलेगी आगमन का समय- अगले दिन सुबह 06.45 बजे सांगानेर पहुंचेगी। < ट्रेन का नाम- 01406 सांगानेर-पुणे साप्ताहिक विशेष ट्रेन (3 फेरे) कब चलेगी- 20 दिसंबर 2025 से 3 जनवरी 2026 तक प्रत्येक शनिवार को प्रस्थान का समय- सांगानेर से हर शनिवार सुबह 11.35 बजे चलेगी आगमन का समय- अगले दिन सुबह 09.30 बजे पुणे पहुंचेगी। कौन-कौन से स्टेशनों पर स्टॉपेज: यह गाड़ी दोनों दिशाओं में पुणे जंक्शन, कल्याण जंक्शन, भिवंडी रोड, वसई रोड, पालघर, वापी, वलसाड, सूरत, अंकलेश्वर जंक्शन, वडोदरा जंक्शन, रतलाम जंक्शन, दूसरे दिन- भवानीमंडी, रामगंजमंडी, कोटा जंक्शन, सवाई माधोपुर और सांगानेर स्टेशनों पर रूकेगी। कितनी श्रेणी के डिब्बे होंगे: 4 एसी-3 टियर, 8 शयनयान श्रेणी, 4 सामान्य द्वितीय श्रेणी और 2 द्वितीय श्रेणी सह गार्ड ब्रेक वैन समेत कुल 18 कोच। इस स्पेशल ट्रेन के ठहराव, समय एवं संरचना के संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए यात्री कृपया www.enquiry.indianrail.gov.in पर जाकर अवलोकन कर सकते हैं।