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सीकर रोड पर जाम से फंसे VIP, लापरवाही पड़ गई भारी, पहली बार बड़े अधिकारियों पर गिरी गाज

जयपुर राजधानी जयपुर में 9 मार्च को आयोजित एक हाई-प्रोफाइल शादी समारोह अब पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। लाडनू से कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर के विवाह समारोह के दौरान सीकर रोड पर लगे कई किलोमीटर लंबे ट्रैफिक जाम को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में एक आईपीएस अधिकारी समेत कुल 6 पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार मानते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। बताया जा रहा है कि जयपुर पुलिस कमिश्नरेट की ओर से इस घटना को गंभीरता से लिया गया था और स्पेशल सीपी स्तर पर इसकी विस्तृत जांच करवाई गई। जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजे जाने के बाद विजिलेंस टीम ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। सूत्रों के मुताबिक, जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। शादी समारोह बना जाम की वजह जानकारी के अनुसार 9 मार्च को हरमाड़ा क्षेत्र में सीकर रोड स्थित एक रिसॉर्ट में विधायक मुकेश भाकर और आरजेएस अधिकारी कोमल मीणा का विवाह समारोह आयोजित हुआ था। इस समारोह में सत्ता और विपक्ष के कई बड़े नेता, वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट्स और पुलिस के आला अधिकारी शामिल हुए थे। इसी दौरान कार्यक्रम स्थल के आसपास वाहनों का दबाव अचानक बढ़ गया, जिससे सीकर रोड पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। हालात ऐसे हो गए कि कई किलोमीटर तक वाहन रेंगते नजर आए और आम लोगों के साथ-साथ कई वीआईपी मेहमान भी जाम में फंस गए। वायरलेस मैसेज के बावजूद नहीं खुला जाम सूत्रों के अनुसार, जाम की स्थिति को लेकर पुलिस कंट्रोल रूम और वायरलेस सेट पर लगातार संदेश प्रसारित किए जा रहे थे। बावजूद इसके, मौके पर ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू करने में काफी देरी हुई। कई वीआईपी को जाम से निकलने में लंबा समय लग गया, जिससे पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे और मामले की जांच के आदेश दिए गए। स्पेशल कमिश्नर ने सौंपी जांच रिपोर्ट मामले की जांच स्पेशल कमिश्नर ओमप्रकाश को सौंपी गई थी। उन्होंने मौके की परिस्थितियों, ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की भूमिका और ट्रैफिक मैनेजमेंट की स्थिति का आकलन करते हुए विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजी। रिपोर्ट में लापरवाही के बिंदुओं को चिन्हित किया गया, जिसके आधार पर विजिलेंस टीम ने कार्रवाई शुरू की है। इन अधिकारियों को माना गया जिम्मेदार पुलिस जांच में जिन अधिकारियों को प्राथमिक रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है, उनमें एसीपी चोमू आईपीएस उषा यादव, एसीपी ट्रैफिक किशोर सिंह भदोरिया, ट्रैफिक इंस्पेक्टर मंजू चौधरी, संपत राज, नवरत्न धौलिया और हरमाड़ा थाना अधिकारी उदय सिंह शामिल हैं। इन सभी अधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है और उनसे पूछा गया है कि ट्रैफिक प्रबंधन में चूक क्यों हुई। जांच के दौरान हुए तबादले गौरतलब है कि जांच प्रक्रिया के दौरान ही एसीपी चोमू उषा यादव का तबादला कर उन्हें हाड़ी रानी बटालियन में कमांडेंट नियुक्त किया गया है। इसके अलावा जयपुर के डीसीपी ट्रैफिक का भी ट्रांसफर किया जा चुका है। हालांकि इन तबादलों को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन इसे इस मामले से जोड़कर भी देखा जा रहा है। पहली बार उच्च अधिकारियों पर भी गिरी गाज सूत्रों के मुताबिक, यह पहला मामला है जब ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति के लिए केवल निचले स्तर के कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि उच्च अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। पुलिस मुख्यालय का यह कदम यह संकेत देता है कि अब ट्रैफिक प्रबंधन में किसी भी स्तर की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो। आगे क्या? अब सभी की नजर संबंधित अधिकारियों के जवाब पर टिकी हुई है। यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो विभागीय कार्रवाई के तहत चार्जशीट, सस्पेंशन या अन्य अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

‘कचुम्बर’ और ‘ढापा’ जैसे नामों से मिलेगी मुक्ति, राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलेगी नई पहचान

जयपुर राजस्थान में अब सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बच्चों की पहचान भी बदलेगी और वो भी सरकारी पहल के जरिए! जयपुर से आई इस खबर ने शिक्षा जगत के साथ-साथ आम लोगों में भी हलचल मचा दी है। क्या सरकार बच्चों के नाम तय करेगी? या ये एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत है? दरअसल, राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने एक ऐसे अभियान की घोषणा की है, जिसने चर्चा और जिज्ञासा दोनों को जन्म दे दिया है। इस अभियान का नाम है ‘सार्थक नाम अभियान’। सुनने में यह पहल सरल लगती है, लेकिन इसके पीछे की सोच और असर कहीं ज्यादा गहरा है। नाम पर क्यों उठी ये पहल? मंत्री दिलावर के अनुसार, राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में बच्चों के ऐसे नाम रख दिए जाते हैं जिनका कोई स्पष्ट अर्थ नहीं होता, या जो आगे चलकर बच्चे के लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकते हैं। जैसे ‘कचुम्बर’, ‘ढापा’ जैसे नाम। सरकार का मानना है कि ऐसे नाम बच्चों में हीन भावना पैदा कर सकते हैं और उनके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकते हैं। इसी सोच के साथ अब शिक्षा विभाग एक कदम आगे बढ़ते हुए ऐसे बच्चों के लिए “सार्थक और सम्मानजनक” नाम सुझाएगा। कैसे चलेगा ‘सार्थक नाम अभियान’? इस योजना के तहत शिक्षा विभाग 2,000 से 3,000 अर्थपूर्ण नामों की एक सूची तैयार करेगा। इसके बाद स्कूलों के माध्यम से उन बच्चों की पहचान की जाएगी जिनके नाम को “अर्थहीन या असहज” माना जाता है। फिर शुरू होगा असली प्रोसेस अधिकारियों और शिक्षकों द्वारा माता-पिता से संवाद। उन्हें समझाया जाएगा कि उनके बच्चे के लिए एक बेहतर, अर्थपूर्ण नाम क्यों जरूरी है। हालांकि, अंतिम फैसला माता-पिता का ही रहेगा। क्या ये बदलाव आसान होगा? यहीं से कहानी में आता है असली ट्विस्ट। नाम सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि परिवार, परंपरा और भावनाओं से जुड़ा होता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं क्या ग्रामीण परिवार अपने बच्चों के नाम बदलने के लिए तैयार होंगे? क्या यह पहल सामाजिक स्वीकृति हासिल कर पाएगी? सिर्फ नाम नहीं, शिक्षा व्यवस्था में भी बड़े बदलाव इस घोषणा के साथ ही शिक्षा मंत्री ने कई और बड़े ऐलान भी किए हर बच्चे का दाखिला सुनिश्चित: खानाबदोश (nomadic) समुदाय के बच्चों को बिना दस्तावेज के भी स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा। टॉपर्स का सम्मान 2026 बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने वाले छात्रों को उनके स्कूलों में सम्मानित किया जाएगा और उनकी उपलब्धियों को सोशल मीडिया व बैनर के जरिए प्रचारित किया जाएगा। एलुमनाई मीट की शुरुआत: इस साल से हर सरकारी स्कूल में वार्षिक एलुमनाई मीट होगी, ताकि पुराने छात्र स्कूल के विकास में योगदान दे सकें। प्रिंसिपल की जिम्मेदारी तय: सभी प्रिंसिपल्स को रोजाना क्लासरूम निरीक्षण का निर्देश दिया गया है। नशे पर सख्ती के संकेत: शिक्षा विभाग ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार करेगा जो तंबाकू, गुटखा या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। बदलाव की शुरुआत या नई बहस? ‘सार्थक नाम अभियान’ एक तरफ बच्चों के आत्मसम्मान को मजबूत करने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ यह समाज में एक नई बहस को भी जन्म दे रहा है क्या सरकार को व्यक्तिगत पहचान में दखल देना चाहिए? अब देखने वाली बात यह होगी कि यह अभियान जमीनी स्तर पर कितना सफल होता है और क्या वाकई बच्चों की पहचान को एक नई दिशा मिल पाती है या यह सिर्फ एक सरकारी पहल बनकर रह जाएगी। फिलहाल, राजस्थान में नाम को लेकर शुरू हुई यह नई कहानी आने वाले दिनों में बड़ा सामाजिक बदलाव भी ला सकती है।

बजट और सरकारी खर्च पर रहेगी पैनी नजर, जनलेखा और प्राक्कलन समितियों में पक्ष-विपक्ष के दिग्गजों को मिली जगह

जयपुर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने चार प्रमुख वित्तीय समितियों का गठन किया है। इनमें जनलेखा समिति, प्राक्कलन समिति ‘क’, प्राक्कलन समिति ‘ख’ और राजकीय उपक्रम समिति शामिल हैं। इन सभी समितियों का कार्यकाल 31 मार्च 2027 तक रहेगा। जनलेखा समिति में अनिता भदेल, अर्जुन लाल जीनगर, प्रमोद जैन “भाया”, डॉ. विश्वनाथ मेघवाल, अजय सिंह, रामकेश, चन्द्रभान सिंह चौहान, डॉ. सुरेश धाकड़, रफीक खान, रोहित बौहरा, गुरुवीर सिंह और गोपाल शर्मा को सदस्य बनाया गया है। प्राक्कलन समिति ‘क’ में प्रताप सिंह सिंघवी, शांति धारीवाल, समाराम, हरेंद्र मिर्धा, छोटूसिंह, अर्जुन लाल, जीवाराम चौधरी, सुरेश मोदी, अमित चाचाण, मनोज कुमार (सादुलपुर) और विश्वराज सिंह मेवाड़ को शामिल किया गया है। प्राक्कलन समिति ‘ख’ में पुष्पेंद्र सिंह, शंकरसिंह रावत, गोविंद सिंह डोटासरा, हमीर सिंह भायल, पब्बाराम विश्नोई, समरजीत सिंह, मनोज कुमार (सुजानगढ़), अमीन कागजी, डॉ. सुभाष गर्ग और अरुण चौधरी को सदस्य नियुक्त किया गया है। वहीं राजकीय उपक्रम समिति में डॉ. दयाराम परमार, श्रवण कुमार, संजीव कुमार, हरिमोहन शर्मा, रीटा चौधरी, यूनुस खान, गोपाल लाल शर्मा, शत्रुधन गौतम, गोरधन, ललित मीना, अनिल कुमार शर्मा और डॉ. शैलेश सिंह को सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है। इस समितियों के क्या काम होते हैं- 1. जनलेखा समिति (Public Accounts Committee – PAC)     सरकार के खर्च की जांच करती है     CAG (कैग) की रिपोर्टों की समीक्षा करती है     यह देखती है कि पैसा नियमों के अनुसार खर्च हुआ या नहीं     गड़बड़ी मिलने पर जवाबदेही तय करती है 2. प्राक्कलन समिति ‘क’ और ‘ख’ (Estimates Committees)     सरकारी विभागों के बजट (अनुमान) की जांच करती हैं     यह सुझाव देती हैं कि खर्च कैसे कम और प्रभावी हो सकता है     योजनाओं की उपयोगिता और कार्यक्षमता का मूल्यांकन करती हैं     सरकार को सुधार के लिए सिफारिशें देती हैं       3. राजकीय उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings)     सरकारी कंपनियों और उपक्रमों के कामकाज की समीक्षा करती है     उनके वित्तीय प्रदर्शन और प्रबंधन की जांच करती है     घाटे या अनियमितताओं पर सवाल उठाती है     सुधार और बेहतर संचालन के सुझाव देती है  

पिंकसिटी में शादियों की चकाचौंध से पायलटों को परेशानी, 5 किलोमीटर के दायरे में ‘नो लेजर जोन’ घोषित

जयपुर पिंकसिटी के आसमान में अब शादियों और पार्टियों वाली लेजर लाइटें विमानों की राह में रोड़ा नहीं बन पाएंगी। जयपुर कमिश्नरेट पुलिस ने हवाई सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। एयरपोर्ट के आसपास के 5 किलोमीटर के दायरे में अब लेजर लाइट या किसी भी तरह की तीव्र रोशनी का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। विमानों के लिए 'खतरा' बनी चकाचौंध जयपुर के एडिशनल पुलिस कमिश्नर डॉ. राजीव पचार ने बुधवार को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए। जांच में सामने आया कि एयरपोर्ट के पास स्थित मैरिज गार्डन, होटल और क्लबों में होने वाले आयोजनों में अक्सर बेहद पावरफुल लेजर लाइट्स का उपयोग किया जाता है। इन लाइट्स की रोशनी आसमान में कई किलोमीटर ऊपर और काफी दूर तक जाती है। जब कोई विमान लैंडिंग या टेक-ऑफ की प्रक्रिया में होता है, तो ये किरणें पायलट की आंखों में सीधे चकाचौंध पैदा करती हैं। इससे न केवल पायलट का ध्यान भटकता है, बल्कि विमान के संचालन में गंभीर तकनीकी परेशानी और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। 7 जून तक 'नो लेजर जोन' पुलिस प्रशासन ने इस प्रतिबंध को 7 जून तक प्रभावी रखने का निर्णय लिया है। आदेश के मुताबिक-     दायरे में कौन: सांगानेर एयरपोर्ट के चारों ओर 5 किलोमीटर का इलाका।     प्रभावित प्रतिष्ठान: इस दायरे में आने वाले लगभग 10 बड़े क्लब और होटल के साथ ही 20 से अधिक मैरिज गार्डन पर यह पाबंदी लागू होगी।     सख्ती: यदि कोई संचालक इन आदेशों की अवहेलना करते हुए लेजर लाइट का उपयोग करता पाया गया, तो उसके विरुद्ध पुलिस नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी शादियों के सीजन में प्रशासन का अलर्ट चूंकि अभी शादियों और समारोहों का सीजन चल रहा है, ऐसे में गार्डन संचालक और इवेंट मैनेजर अक्सर ग्राहकों को लुभाने के लिए भव्य लेजर शो का आयोजन करते हैं। पुलिस ने निर्देश दिए हैं कि सभी संचालक यह सुनिश्चित करें कि रोशनी केवल उनके परिसर के भीतर और जमीन की ओर रहे, आसमान की तरफ कोई भी बीम न छोड़ी जाए। एयरपोर्ट अथॉरिटी और पायलटों की ओर से बार-बार मिल रही शिकायतों के बाद पुलिस ने यह 'सुरक्षा कवच' तैयार किया है। अब परकोटा और आसपास के इलाकों में होने वाली पार्टियों की चकाचौंध विमानों की सुरक्षित उड़ान में खलल नहीं डाल सकेगी।  

प्राइवेट वेन्यू पर सरकारी इवेंट्स पर लगी रोक, फालतू खर्च कम करने के लिए मुख्य सचिव ने जारी किए निर्देश

जयपुर राजस्‍थान सरकार ने खर्च कम करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. अब सरकारी कार्यक्रम जैसे समारोह, प्रदर्शनी, सेमिनार वगैरह निजी जगहों पर नहीं किए जाएंगे. साफ शब्दों में कहें तो होटल या प्राइवेट हॉल में सरकारी इवेंट कराने पर रोक लगा दी गई है. प्राइवेट जगह पर आयोजन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी की मंजूरी जरूरी. कमेटी से मंजूरी लेनी पड़ेगी   हां, अगर कोई खास स्थिति हो, और निजी जगह पर कार्यक्रम करना बहुत जरूरी हो, तो इसके लिए पहले कमेटी से मंजूरी लेनी पड़ेगी. ये कमेटी मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में काम करेगी. बिना उनकी अनुमति के निजी स्थल पर आयोजन नहीं हो सकेगा. सरकारी भवनों में होंगे कार्यक्रम सरकार का कहना है कि इस फैसले से सरकारी सुविधाओं का सही इस्तेमाल होगा, और फालतू खर्च भी रुकेगा. इसको लेकर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सभी विभागों, निगमों और स्वायत्तशासी संस्थाओं को निर्देश जारी कर दिए हैं, अब उन्हें कहा गया है कि अपने कार्यक्रम सरकारी भवनों और कॉन्फ्रेंस हॉल में ही करें. सरकार ने तय कर रखी है जगह सरकारी कार्यक्रम के लिए सरकार ने कुछ जगहें भी तय कर रखी है, जैसे राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान, एचसीएम रीपा और दुर्गापुर का सियाम इन जगहों पर सरकारी कार्यक्रम किए जा सकते हैं.

रेलवे अपडेट, 23 से 25 मई तक जोधपुर रूट की 17 ट्रेनों के मार्ग बदले और कई गाड़ियां रेगुलेट

जोधपुर अगर आप आगामी 23 से 25 मई के बीच ट्रेन से सफर करने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल के मेड़ता रोड स्टेशन यार्ड में रेलवे अंडर ब्रिज निर्माण के चलते इस रूट पर रेल यातायात बड़े पैमाने पर प्रभावित रहने वाला है। जयपुर-जोधपुर एक्सप्रेस सहित कुल 4 ट्रेनें पूरी तरह रद्द रेलवे की ओर से मेड़ता रोड यार्ड की क्रॉसिंग संख्या 100 पर आरयूबी निर्माण के लिए विशेष ब्लॉक लिया जा रहा है। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने बताया कि इस तकनीकी कार्य के कारण जयपुर-जोधपुर एक्सप्रेस सहित कुल 4 ट्रेनों को पूरी तरह रद्द किया गया है, जबकि 17 अन्य ट्रेनों के रूट और समय में बदलाव किया गया है। इन 4 ट्रेनों पर गिरेगी गाज सफर पर निकलने से पहले इन ट्रेनों की तारीख नोट कर लें, क्योंकि ये पटरी पर नहीं उतरेंगी।     जोधपुर-हिसार एक्सप्रेस (14891): 24 मई को रद्द।     हिसार-जोधपुर एक्सप्रेस (14892): 25 मई को रद्द।     जयपुर-जोधपुर एक्सप्रेस (22977): 24 मई को रद्द।     जोधपुर-जयपुर एक्सप्रेस (22978): 24 मई को रद्द। इन ट्रेनों के बीच रास्ते थमेंगे पहिए कई ट्रेनें अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाएंगी और बीच के स्टेशनों से ही वापस लौट जाएंगी।     जोधपुर-दिल्ली सराय (22422) व जोधपुर-बठिंडा (14721): 24 मई को ये जोधपुर के बजाय डेगाना और बीकानेर से शुरू होंगी।     अबोहर-जोधपुर (14722) व दिल्ली सराय-जोधपुर (22421): 23 और 24 मई को ये ट्रेनें केवल बीकानेर और डेगाना तक ही आएंगी। बदले हुए रास्तों से दौड़ेंगी ये ट्रेनें ब्लॉक के कारण 8 ट्रेनों को डायवर्ट किया गया है। इनमें जोधपुर-भोपाल एक्सप्रेस, बाड़मेर-ऋषिकेश और दिल्ली-जैसलमेर जैसी प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं। ये ट्रेनें अब फुलेरा-अजमेर-मारवाड़ जंक्शन और लूनी के रास्ते चलाई जाएंगी। मार्ग परिवर्तन के कारण ये ट्रेनें अब पाली, अजमेर और फलौदी जैसे स्टेशनों पर भी रुकेंगी, जिससे उन क्षेत्रों के यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी, लेकिन सफर का समय बढ़ सकता है। यात्री ध्यान दें, रेगुलेट होंगी ये गाड़ियां निर्माण कार्य के दौरान ट्रैक क्लियरेंस न मिलने के कारण इंदौर-जोधपुर, जयपुर-जैसलमेर और कामाख्या-भगत की कोठी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों को मार्ग में 20 मिनट से लेकर 2 घंटे तक रोककर (रेगुलेट) चलाया जाएगा।  

LPG संकट, राजस्थान में छोटे सिलेंडर के लिए चुकाने होंगे 123 रुपये प्रति किलो और उपभोक्ताओं पर भारी बोझ

जयपुर राजस्थान में लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) की किल्लत के बीच तेल कंपनियों ने 5 किलोग्राम वाले छोटे सिलेंडर को आम लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध तो कर दिया है, लेकिन इसकी कीमत ने उपभोक्ताओं को बड़ा झटका दिया है। यह छोटा सिलेंडर अब प्रदेश में सबसे महंगा गैस विकल्प बनकर सामने आया है, जिसकी प्रति किलो दर घरेलू और कॉमर्शियल दोनों सिलेंडरों से अधिक है। छोटा सिलेंडर, भारी कीमत तेल कंपनियों के अनुसार 5 किलोग्राम वाले सिलेंडर की रिफिलिंग के लिए उपभोक्ताओं को 616 रुपए चुकाने पड़ रहे हैं। इस हिसाब से प्रति किलो LPG की कीमत करीब 123 रुपए बैठती है। यह दर न केवल घरेलू गैस सिलेंडर से लगभग दोगुनी है, बल्कि कॉमर्शियल सिलेंडर से भी अधिक है। घरेलू सिलेंडर से दोगुना महंगा वर्तमान में 14.2 किलोग्राम का घरेलू LPG सिलेंडर 916.50 रुपए में उपलब्ध है। इसके अनुसार प्रति किलो गैस की कीमत करीब 64.50 रुपए पड़ती है। तुलना करें तो 5KG सिलेंडर की गैस लगभग दोगुनी दर पर मिल रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। कॉमर्शियल सिलेंडर से भी आगे निकली कीमत औद्योगिक इकाइयों, होटलों और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाला 19 किलोग्राम का कॉमर्शियल सिलेंडर 2106 रुपए में मिल रहा है। इस हिसाब से इसकी प्रति किलो कीमत करीब 111 रुपए होती है। इसके मुकाबले 5KG सिलेंडर की गैस और भी महंगी साबित हो रही है। नया कनेक्शन आसान, लेकिन महंगा सौदा तेल कंपनियों ने 5 किलोग्राम सिलेंडर का नया कनेक्शन लेना बेहद आसान कर दिया है। केवल एक आईडी कार्ड के आधार पर 1490 रुपए में नया कनेक्शन दिया जा रहा है, जिसमें 5 किलो LPG से भरा सिलेंडर शामिल है। कंपनियों का दावा है कि यह सुविधा खासतौर पर मजदूरों और प्रवासी कामगारों को ध्यान में रखकर दी गई है, ताकि उन्हें गैस की कमी का सामना न करना पड़े। गैस की किल्लत और बदले नियम प्रदेश में LPG की कमी के चलते घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग पर 25 दिन का अंतराल तय कर दिया गया है। वहीं कॉमर्शियल सिलेंडरों की उपलब्धता भी प्रभावित है और कुल मांग का करीब 70 प्रतिशत ही सप्लाई हो पा रही है। अनलिमिटेड रिफिलिंग की सुविधा इसके उलट 5 किलोग्राम सिलेंडर की उपलब्धता पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों पर अनलिमिटेड कर दी गई है। उपभोक्ता जब चाहें, बिना किसी निर्धारित समय सीमा के, इस छोटे सिलेंडर को रिफिल करवा सकते हैं। राहत या मजबूरी? हालांकि कंपनियां इसे राहत के तौर पर पेश कर रही हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह सुविधा मजबूरी में महंगा विकल्प बनती जा रही है। खासकर वे लोग, जिन्हें तत्काल गैस की जरूरत होती है, उन्हें मजबूरन इस महंगे सिलेंडर का सहारा लेना पड़ रहा है। राजस्थान में LPG की कमी के बीच 5KG सिलेंडर ने आम लोगों को सुविधा तो दी है, लेकिन इसकी ऊंची कीमत ने इसे सबसे महंगा विकल्प बना दिया है। ऐसे में राहत और महंगाई के बीच उपभोक्ता असमंजस की स्थिति में नजर आ रहे हैं।

ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत, बाड़मेर रिफाइनरी के लोकार्पण की तारीख हुई तय

बाड़मेर  एक तरफ जहां वैश्विक स्तर पर ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण कच्चे तेल की सप्लाई और रिफाइनरियों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, वहीं राजस्थान अपने औद्योगिक इतिहास का सबसे सुनहरा पन्ना लिखने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 21 अप्रैल को बाड़मेर के पचपदरा में स्थित राजस्थान रिफाइनरी का लोकार्पण करेंगे। दुबई की तर्ज पर यहां क्रूड ऑयल स्टोरेज और रिफाइनिंग की क्षमता इसे उत्तर भारत का 'एनर्जी गेटवे' बना देगी। जब यहां उत्पादित पेट्रोल-डीजल और गैस राजस्थान के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और दिल्ली तक सप्लाई होगी, तो राजस्व का बड़ा हिस्सा बाड़मेर और आसपास के विकास पर खर्च होगा। 72 हजार करोड़ रुपये की लागत से बना प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस ऐतिहासिक घड़ी की पुष्टि करते हुए बताया कि पीएम मोदी 21 अप्रैल को इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। 72 हजार करोड़ रुपये की लागत से बना यह प्रोजेक्ट न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे उत्तर भारत के औद्योगिक परिदृश्य को बदलकर रख देगा। बाड़मेर-जैसलमेर में बनेगा 'इंडस्ट्रियल क्लस्टर' पचपदरा रिफाइनरी महज एक तेल शोधन इकाई नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी राजस्थान के लिए आर्थिक इंजन साबित होगी। सीएम ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के चालू होने से बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में एक विशाल इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित होगा।     सहायक उद्योग: पेट्रोकेमिकल्स पर आधारित सैकड़ों सहायक उद्योगों के लिए रास्ते खुलेंगे।     इंफ्रास्ट्रक्चर: क्षेत्र में सड़कों, लॉजिस्टिक्स हब और बिजली के बुनियादी ढांचे में भारी निवेश होगा।     रोजगार: स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे। वैश्विक युद्ध के बीच भारत की 'ऊर्जा सुरक्षा' दिलचस्प बात यह है कि यह लोकार्पण ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया युद्ध की आग में झुलस रहा है और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार अस्थिर है। ऐसे में पचपदरा रिफाइनरी का शुरू होना भारत की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह रिफाइनरी उच्च गुणवत्ता वाले BS-VI मानक के ईंधन का उत्पादन करेगी, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी। प्रोजेक्ट की खासियतें लागत: ₹72,000 करोड़ से अधिक। क्षमता: 9 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA)। साझेदारी: यह HPCL और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम है। उत्पाद: पेट्रोल-डीजल के अलावा पेट्रोकेमिकल उत्पादों जैसे पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीथीन का भी उत्पादन होगा। पीएम मोदी का पिछला राजस्थान दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा बेहद खास है। इससे पहले पीएम मोदी इसी साल 28 फरवरी को राजस्थान के अजमेर आए थे। अजमेर के कायड़ विश्रामस्थली में उन्होंने एक बड़ी सभा को संबोधित किया था, जहां उन्होंने प्रदेश के विकास और डबल इंजन सरकार की उपलब्धियों को गिनाया था। अब करीब दो महीने के भीतर ही वे पचपदरा रिफाइनरी के रूप में राजस्थान को एक बड़ी सौगात देने दोबारा मरूधरा की धरती पर कदम रखेंगे।  

सरिस्का टाइगर रिजर्व, बाघों की सुरक्षा के लिए बनेगा नया STR-2 प्रभाग और बढ़ेगा दायरा

जयपुर  राजस्थान की राजधानी जयपुर और इसके आसपास के जंगलों की तस्वीर अब बदलने वाली है। वन्यजीवों की सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने और प्रशासनिक कामकाज में तेजी लाने के लिए वन विभाग ने एक व्यापक पुनर्गठन योजना तैयार की है। इस मास्टरप्लान के तहत जयपुर के मशहूर वन्यजीव पर्यटन स्थलों को मिलाकर एक स्वतंत्र वन प्रभाग बनाने का प्रस्ताव है, जिससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि लेपर्ड और अन्य वन्यजीवों की निगरानी भी अधिक विशेषज्ञता के साथ हो सकेगी। झालाना और नाहरगढ़ का नया 'प्रशासनिक अवतार' प्रस्ताव के अनुसार, जयपुर के गौरव झालाना लेपर्ड रिजर्व, नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, नाहरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य और हाथी गांव को एक साथ जोड़कर एक स्वतंत्र वन प्रभाग बनाया जाएगा। इस प्रभाग की कमान भारतीय वन सेवा के एक समर्पित अधिकारी के हाथों में होगी। 200 वर्ग किलोमीटर से अधिक फैले इस क्षेत्र में वन्यजीव प्रबंधन, रेस्क्यू ऑपरेशन और पर्यटन प्रशासन की जिम्मेदारी इसी प्रभाग की होगी। झालाना और हाथी गांव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन के नक्शे पर आ चुके हैं। एक अलग प्रभाग होने से यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और लेपर्ड के आवास की सुरक्षा अधिक वैज्ञानिक तरीके से हो पाएगी। सरिस्का टाइगर रिजर्व का होगा विस्तार एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव सरिस्का टाइगर रिजर्व को लेकर है। बाघों की बढ़ती संख्या और उनके मूवमेंट को देखते हुए बीलवाड़ी, विराट नगर, थानागाजी और अजबगढ़ के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक नया STR-2 प्रभाग बनाने की तैयारी है। अधिकारियों के मुताबिक, सरिस्का के बाघ अक्सर इन क्षेत्रों में निकल आते हैं। इन्हें एक समर्पित यूनिट के तहत लाने से बाघों की ट्रैकिंग आसान होगी और यह क्षेत्र सरिस्का के लिए एक मजबूत 'बफर जोन' का काम करेगा। अवैध खनन पर लगेगी लगाम योजना के तहत दौसा, बांदीकुई, जमवारामगढ़ और रायसर रेंजों को जयपुर वन्यजीव प्रभाग से अलग कर एक नई प्रशासनिक इकाई बनाने का भी सुझाव है। इन क्षेत्रों में पहले अवैध खनन की शिकायतें आती रही हैं। नई इकाई बनने से वन विभाग की टीम अधिक केंद्रित होकर निगरानी कर सकेगी और त्वरित कार्रवाई संभव होगी। 12 से अधिक नई वन रेंज पुनर्गठन की इस लहर में नए प्रस्तावित जिलों में एक दर्जन से अधिक नई वन रेंज बनाने की भी परिकल्पना की गई है। प्रत्येक रेंज की जिम्मेदारी और कार्यक्षेत्र स्पष्ट रूप से परिभाषित होंगे। यह योजना काफी हद तक पूरी हो चुकी है और अब केवल औपचारिक सरकारी मंज़ूरी का इंतजार है।  

जयपुर मेट्रो, प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक बनेगा 41 KM लंबा कॉरिडोर और बनेंगे 36 नए स्टेशन

जयपुर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण (Phase-2) को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। जयपुर मेट्रों के दूसरे चरण में 13037.66 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह परियोजना उत्तर से दक्षिण जयपुर को आपस में जोड़ते हुए शहर की तस्वीर बदल देगी।जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण में प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर बनेगा। इस रूट पर कुल 36 स्टेशन बनाए जाएंगे, जो शहर के सबसे व्यस्त इलाकों को कवर करेंगे। इस परियोजना को केंद्र और राजस्थान सरकार के फिफटी-फिफटी भागीदारी वाले संयुक्त उद्यम के रूप में राजस्थान मेट्रो रेल निगम लिमिटेड (RMRCL) पूरा करेगी। जयपुर मेट्रो फेज-2 : इन इलाकों को कवर करेगा कैबिनेट के एक बयान के अनुसार, जयपुर मेट्रो फेज-2 में मेट्रो प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक दौड़ेगी। फेज-2 में बनने वाला कॉरिडोर सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र, वीकेआईए, जयपुर हवाई अड्डा, टोंक रोड, एसएमएस अस्पताल और स्टेडियम, अंबाबारी और विद्याधर नगर जैसे व्यस्त इलाकों को जोड़ेगा। यहां 36 स्टेशन बनेंगे। इसमें एयरपोर्ट के क्षेत्र में अंडरग्राउंड स्टेशन भी शामिल हैं। यहां इंटरचेंज की भी सुविधा होगी। इसे पहले से चल रहे फेज-1 मेट्रो से जोड़ा जाएगा। इससे पूरे शहर में एक एकीकृत और निरंतर मेट्रो नेटवर्क सुनिश्चित होगा। जयपुर मेट्रो पहले फेज में कहां से कहां तक चलती है? जयपुर में पहले चरण के तहत मेट्रो मानसरोवर से बड़ी चौपर तक, पूर्व-पश्चिम गलियारे पर 11.64 किमी की दूरी तय करती है। इसमें 11 स्टेशन हैं। यह प्रणाली जयपुर के महत्वपूर्ण आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को केंद्रीय व्यापारिक जिले से जोड़ती है, जो हेरिटेज वॉल सिटी का हिस्सा है। उत्तर-दक्षिण अक्ष पर नियोजित जयपुर मेट्रो का दूसरा चरण मौजूदा गलियारे का पूरक होगा और पूरे शहर में मेट्रो कनेक्टिविटी हो जाएगी। इससे शहर में लगने वाले ट्रैफिक जाम में काफी कमी आएगी। और शहरी में आवागमन में सुधार होगा। जयपुर मेट्रो में हर दिन लगभग 60 हजार यात्री करते हैं सफर वर्तमान में, जयपुर मेट्रो के पहले चरण में प्रतिदिन औसतन लगभग 60 हजार यात्री यात्रा करते हैं। जयपुर मेट्रो पहले चरण में 11.64 किमी के छोटा रूट पर दौड़ रही है। दूसरे चरण के चालू होने के साथ, मेट्रो नेटवर्क में यात्रियों की संख्या में कई गुना वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे जयपुर में सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी। मेट्रो का काम सितंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य कैबिनेट के बयान के अनुसार, मेट्रो रेल नीति, 2017 के अनुसार, केंद्र और राजस्थान सरकार से इक्विटी समर्थन, ऋण और बहुपक्षीय वित्तपोषण के माध्यम से वित्तपोषण की संरचना की गई है। परियोजना का वित्तपोषण मेट्रो रेल नीति-2017 के तहत केंद्र और राज्य सरकार की इक्विटी, ऋण और बहुपक्षीय फंडिंग के माध्यम से किया जाएगा। सरकार ने इसे सितंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।