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नौकरी के नाम पर जाल: झालावाड़ से मुंबई तक फैला सेक्स रैकेट नेटवर्क

झालावाड़ झालावाड़ पुलिस ने नाबालिग लड़कियों की खरीद-फरोख्त के सनसनीखेज मामले का खुलासा किया है. इन लड़कियों से वैश्यावृत्ति करवाने के लिए बाकायदा एंग्रीमेंट करवाया जाता था. परिजनों से स्टांप पर साइन लेने के बाद इन लड़कियों को धकेल दिया जाता था. लड़कियों के परिजन जब लड़की को बेचते थे तो उन्हें मामूली रकम मिलती थी. फिर दलाल के जरिए बिकने के बाद 35 लाख रुपये तक की कीमत वसूली जाती थी. यह पूरा रैकेट मुंबई तक चल रहा था. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक 10 लड़कियों को रैकेट से मुक्त करवाया है. वहीं, महिला समेत 5 दलालों को गिरफ्तार भी किया है. परिजनों ने भी साध रखी थी चुप्पी मामले की हकीकत तब पता चली जब मुंबई पुलिस ने ऐसे ही मामले में कार्रवाई की. प्रकरण के तार झालावाड़ से जुड़े और फिर पूरा मामला खुल गया. एक ही समुदाय की कई लड़कियों को शिकार बनाया गया. लेकिन सामाजिक कुरीतियों, झगड़ा प्रथा और प्रभावशाली दलालों के डर के कारण पूरा समुदाय चुप्पी साधे हुए था. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर ने स्पेशल जांच टीम गठित कर गोपनीय जांच शुरू की. बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर झांसा दलालों का गिरोह गरीब परिवारों की बच्चियों को नौकरी और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर खरीदता था. इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनकी उम्र बढ़ाई जाती और उन्हें मुंबई समेत अन्य शहरों में वैश्यावृत्ति के लिए भेज दिया जाता था. पुलिस ने जानकारी जुटाना शुरू किया. फिर बूंदी से आए 5 आरोपियों को डिटेन कर लिया. ‎अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय के तहत मुंबई से 4, बूंदी से 1 और टोंक से 1 अन्य लड़की को भी दस्तयाब किया गया. कुल 10 लड़कियों में 7 नाबालिग और एक बालिग बताई जा रही है. जबकि दो लड़कियों की उम्र के बारे में सही जानकारी सामने नहीं आई है. स्टांप में लिखी शर्त ऐसी की पढ़कर कांप उठेंगे स्टांप से खुलासा हुआ है कि लड़कियों की खरीद-फरोख्त से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा दलाल खुद हड़प लेते थे. इतना ही नहीं, अनुबंध में यह अमानवीय शर्त भी दर्ज थी कि केवल आत्महत्या की स्थिति में ही कर्ज माफ माना जाएगा. ‎झालावाड़ पुलिस की इस कार्रवाई को मानव तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है. फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश में जुटी हुई है.

रणथंभौर टाइगर रिजर्व: शावकों संग बाघिन रिद्धि का खूबसूरत वीडियो हुआ वायरल

 रणथंभौर राजस्थान के सबसे बड़े और मशहूर रणथंभौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) से एक बेहद ही मनमोहक वीडियो सामने आया है. इस वीडियो ने वन्यजीव प्रेमियों का दिल जीत लिया है. 'बाघों की नर्सरी' कहे जाने वाले इस रिजर्व में बाघिन टी-124 (RBT-124 Riddhi) अपने शावकों पर मां का प्यार लुटाती और उनकी नटखट अठखेलियों का आनंद लेती नजर आ रही है. वायरल वीडियो में क्या दिखा? 40 सेकंड के इस वीडियो में बाघिन रिद्धि जमीन पर आराम से लेटी हुई अपने दो शावकों को दूध पिलाती नजर आ रही है. तभी पीछे झाड़ियों में से एक और नन्हा शावक अठखेलियां करता हुआ निकलता है और सीधे अपनी मां के पेट पर आकर खड़ा हो जाता है. जब वह नटखट शावक नीचे उतरता है, तो बाघिन अपनी एक टांग हवा में उठाकर उसे भी दूध पीने का इशारा करती है. मां का इशारा पाते ही वह शावक भी अपने बाकी भाई-बहनों के साथ दूध पीने में मग्न हो जाता है. डीएफओ का अंदेशा हुआ सच इससे पहले रणथंभौर के नाल घाटी वन क्षेत्र में वन विभाग की नियमित गश्त के दौरान बाघिन रिद्धि को सिर्फ एक नन्हें शावक के साथ देखा गया था. तब उस शावक की उम्र करीब 2 से 3 महीने आंकी गई थी. रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह ने उस वक्त बताया था कि अभी बाघिन के साथ एक ही शावक नजर आया है, लेकिन संभवतया उसने और भी शावकों को जन्म दिया होगा. इस नए वायरल वीडियो ने वन विभाग के उस अंदेशे पर मुहर लगा दी है. शावकों को सुरक्षित और अठखेलियां करते देखना बाघ संरक्षण प्रयासों की एक बड़ी सफलता है. बाघिन रिद्धि और उसके शावकों को किसी तरह का व्यवधान न हो, इसके लिए वन विभाग द्वारा नाल घाटी क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरती जा रही है. वन विभाग की टीम लगातार इनकी निगरानी कर रही है ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. रणथंभौर में कुल कितने बाघ हैं? रणथंभौर में लगातार बढ़ती बाघों की संख्या वन प्रशासन और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक सुखद अहसास है. यहां के बाघों की वजह से न सिर्फ रणथंभौर बल्कि प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व भी आबाद हो रहे हैं. रणथंभौर में बाघों का वर्तमान कुनबा 77 तक पहुंच चुका है. इसमें 25 बाघ हैं, 23 बाघिन और 29 शावक हैं.

रिसर्च में खुलासा: भालू के पेट से गुजरकर बीज बन रहे ज्यादा मजबूत पौधे

अरावली जब हम भालू (Sloth Bear) के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में शहद चाटते या सुस्त पड़े जानवर की छवि आती है. लेकिन राजस्थान के सूखे और झीलों से घिरे अरावली के जंगलों (Aravalli Range) में ये भालू एक माली की तरह काम कर रहे हैं. हाल ही में आई एक साइंटिफिक रिसर्च से पता चला है कि भालू जो फल खाते हैं, उनके बीज जब भालू के पेट से होकर बाहर निकलते हैं, तो उनसे नए पौधे बहुत तेजी से उगते हैं. आसान शब्दों में कहें तो भालू अपनी इस आदत से अरावली के जंगलों को नया जीवन दे रहे हैं और पेड़-पौधों की आबादी बढ़ाने में मदद कर रहे हैं. यह रिसर्च किसने की है? इस दिलचस्प स्टडी का नाम Seasonal Diet And Seed Dispersal By Sloth Bears Melursus Ursinus in Western India है, जिसे जल्द ही इंटरनेशनल जर्नल Biotropica में पब्लिश किया जाना मंजूर कर लिया गया है. इस रिसर्च को तीन वैज्ञानिकों की टीम ने मिलकर पूरा किया है. इनमें रिसर्च स्कॉलर उत्कर्ष प्रजापति, इंडिपेंडेंट रिसर्चर डॉ. के.एस. गोपी सुंदर और उदयपुर की एक यूनिवर्सिटी के रिसर्चर विजय कुमार कोली शामिल हैं. उत्कर्ष ने अपनी पीएचडी की जरूरतों के तहत यह स्टडी की है. इन वैज्ञानिकों का कहना है कि अरावली जैसे सूखे और पतझड़ वाले जंगलों में बड़े सर्वाहारी (सब कुछ खाने वाले) जानवर पेड़-पौधों की पीढ़ियों को आगे बढ़ाने में कैसे मदद करते हैं, इस पर अतीत में बहुत कम जानकारी उपलब्ध थी. वैज्ञानिकों ने कैसे लगाया इस सच का पता? यह अहम स्टडी अरावली के अर्ध-शुष्क पतझड़ वाले जंगलों में की गई. वैज्ञानिकों ने भालू के खान-पान और बीजों को दूर-दूर तक फैलाने के तरीके को गहराई से समझने के लिए एक अनोखा रास्ता चुना. उन्होंने सर्दियों और गर्मियों के मौसम में भालू के मल (Scat) के सैंपल इकट्ठे किए और उनका एनालिसिस किया. इसके बाद उन्होंने भालू के मल से निकले बीजों और सीधे पौधों से तोड़े गए बीजों को अलग-अलग उगाकर उन पर एक्सपेरिमेंट किए. इस पूरी प्रक्रिया का मकसद यह जांचना था कि भालू के पेट से गुजरने के बाद कौन से बीज ज्यादा बेहतर अंकुरित होते हैं और किस पौधे के सीडलिंग्स ज्यादा समय तक जिंदा रहकर पेड़ बन पाते हैं. भालू के पेट से गुजरने के बाद बीजों में क्या बदलाव आया? इस रिसर्च में 6 अलग-अलग पौधों की प्रजातियों के बीज भालू के पेट से गुजरने के बाद भी पूरी तरह सुरक्षित और उगने लायक पाए गए. कुछ पौधों पर तो इसका असर बेहद चौंकाने वाला था. रिसर्च में देखा गया कि लैंटाना कैमारा नाम की एक विदेशी आक्रामक झाड़ी के बीज सिर्फ और सिर्फ तभी अंकुरित हुए, जब वे भालू के मल से होकर निकले थे. इसके विपरीत डोंकी बेरी (Grewia flavescens) के मामले में सीधे पेड़ से तोड़े गए बीज ज्यादा बेहतर तरीके से जिंदा रहे. वहीं, कोरोमंडल एबनी या तेंदू (Diospyros melanoxylon) के बीज जब भालू के पेट से होकर बाहर आए, तो उनसे उगे पौधे सामान्य बीजों के मुकाबले बहुत ज्यादा दिनों तक जिंदा रहे और मजबूत निकले. बाकी चार प्रजातियों के पौधों में भालू के मल से निकले बीज और सामान्य बीजों के उगने और जिंदा रहने की रफ्तार लगभग एक जैसी ही देखी गई. मौसम के हिसाब से बदल जाता है भालुओं का 'मेन्यू' रिसर्च से एक और दिलचस्प बात सामने आई कि अरावली के भालू मौसम के हिसाब से अपने खाने की थाली पूरी तरह बदल लेते हैं. इसे साइंस की भाषा में डाइट्री प्लास्टिसिटी कहते हैं. सर्दियों के मौसम के दौरान भालू जमकर फल खाते हैं और खास बात यह है कि वे अंधाधुंध हर तरह के फल नहीं खाते, बल्कि अपनी पसंद के चुनिंदा फल ही चुनते हैं. वहीं, गर्मियों में जब जंगलों में फल कम हो जाते हैं, तो भालू अपना मेन्यू बदलकर कीड़े-मकोड़े और दीमक खाने लगते हैं. हालांकि भालुओं का शरीर मुख्य रूप से चींटियां और दीमक खाने के लिए ही कुदरत ने बनाया है, लेकिन वे अपनी इस आदत में बदलाव कर लेते हैं और मौका मिलते ही फल खाने से पीछे नहीं हटते. अरावली के पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी है भालू? इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) ने भालू (Sloth Bear) को Vulnerable यानी खतरे की कगार पर खड़ी प्रजातियों की लिस्ट में रखा है. यह प्रजाति मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप में ही पाई जाती है. डॉ. के.एस. गोपी सुंदर ने आईएएनएस को बताया कि यह रिसर्च साबित करती है कि भालू चुनिंदा बीजों को फैलाने का बहुत बड़ा जरिया हैं. मौसम के हिसाब से बदलने वाली ऐसी जगहों पर, जहां पानी और संसाधनों की भारी कमी होती है, वहां भालुओं का यह लचीलापन पूरे जंगल की बनावट और हरियाली को तय करता है. इससे पहले भारत में हुए रिसर्च सिर्फ इस बात तक सीमित थे कि भालू क्या खाते हैं, लेकिन इस नई स्टडी ने पहली बार एक्सपेरिमेंट के जरिए यह साबित किया है कि भालू अरावली के इकोसिस्टम को जिंदा रखने और यहां की वनस्पति को संवारने में कितने बड़े और अहम मददगार हैं.

चंद्रेसल गांव में महंत देवानंद की हत्या, पुलिस ने कई एंगल से शुरू की जांच

कोटा कोटा जिले के चंद्रेसल (बोरखेड़ा) गांव में मठ के महंत देवानंद की हत्या कर दी गई. अज्ञात बदमाशों ने देर रात धारदार हथियार से महंत का मर्डर किया. जानकारी के अनुसार, वारदात को तब अंजाम दिया गया, जब महंत कक्ष में विश्राम कर रहे थे. तभी हमलावर मठ में घुस आए और उन पर ताबड़तोड़ हमला कर फरार हो गए. शोर सुनकर सेवादारों और ग्रामीण पहुंचे तो जो देखा उनकी आंखे फटी रह गई. महंत जमीन पर लहूलुहान हालत में थे. उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. रंजिश, संपत्ति विवाद या कुछ और वजह? देर रात को शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम और अन्य अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे. उन्होंने मामले की जानकारी ली. घटना की सूचना पर बोरखेड़ा थाना पुलिस, एफएसएल टीम और डॉग स्क्वायड मौके पर पहुंचे. पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाकर जांच शुरू कर दी है. हत्या के कारणों का अभी खुलासा नहीं हो पाया है. पुलिस रंजिश, संपत्ति विवाद और चोरी के एंगल सहित विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है. मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीमों का गठन किया गया है. घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है. एडिशनल एसपी सुभाष चंद्र मिश्रा ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि स्पेशल टीम पूरे मामले की जांच कर रही है और जल्द ही आरोपी गिरफ़्त में होंगे. इलाके में आक्रोश, बीजेपी नेता ने दिया रिएक्शन घटनाक्रम के बाद पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है. भाजपा के पूर्व देहात अध्यक्ष और चंद्रसल मठ के सदस्य मुकुट नगर ने मामले पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग करते हुए घटनाक्रम की निंदा की है.  उन्होंने बताया कि महंत करीब 4 साल से यहां रह रहे थे. उनकी किसी से कोई रंजिश नहीं थी.

राजस्थान हाईकोर्ट में आसाराम मामला: अंतरिम जमानत और जेल सुविधाओं पर सवाल

जोधपुर नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद आसाराम के स्वास्थ्य और उसे मिलने वाली सुविधाओं को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई. इस मामले में आज सुनवाई रही अधूरी कल फिर इस मामले की होगी सुनवाई होगी. अंतरिम जमानत पर लगाई थी रोक हाल ही में अदालत ने स्वास्थ्य कारणों के आधार पर दी गई उनकी अंतरिम जमानत को आगे बढ़ाने से इनकार करते हुए राहत समाप्त कर दी. करीब 2 साल से लगातार बढ़ाई जा रही अंतरिम जमानत पर अब रोक लगने के बाद आसाराम को फिर से न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा. राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता के अधिकारों और न्याय की भावना को प्रमुखता देते हुए कहा कि यौन अपराधों के मामलों में पीड़ित पक्ष की चिंताओं और उसके जीवन पर पड़े प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. अदालत ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में न्याय केवल आरोपी के अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़िता के सम्मान, सुरक्षा और न्याय की अपेक्षाओं की भी रक्षा की जानी चाहिए. अदालत के निर्देशों की पालना पर सवाल मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जानना चाहा है कि पूर्व में मुख्य न्यायाधीश द्वारा आसाराम के संबंध में दिए गए आदेशों का कितना पालन हुआ है. बता दें कि पूर्व में कोर्ट ने आसाराम को जेल में उनकी बीमारी के मद्देनजर उचित समय पर उपचार और दवाइयां मुहैया कराने के निर्देश दिए थे. साथ ही स्वास्थ्य स्थितियों को देखते हुए उन्हें घर से बना एक समय का भोजन उपलब्ध कराने की भी अनुमति दी गई थी. अब कोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि क्या प्रशासन इन निर्देशों का पूरी तरह पालन कर रहा है या नहीं. अस्पताल में भर्ती हुए आसाराम राज्य सरकार की ओर से कोर्ट से इन निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए कुछ समय की मांग की गई है. इस बीच खबर है कि मंगलवार शाम को जेल में अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद आसाराम को उपचार के लिए जोधपुर के आरोग्यं अस्पताल लाया गया. फिलहाल मामले की अगली सुनवाई गुरुवार (4 जून) होनी है, जिसमें सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी.

चित्तौड़गढ़: मेवाड़ विश्वविद्यालय में अनियमितताओं पर सरकार का सख्त कदम, एडमिशन बंद

जयपुर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित मेवाड़ विश्वविद्यालय के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. राज्य के उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय में चल रही गंभीर अनियमितताओं और फर्जी डिग्री जारी करने के आरोपों को देखते हुए सभी पाठ्यक्रमों में नए प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों की शिकायतें मिलने के बाद सरकार ने उदयपुर संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन किया था. इस समिति की रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं. विभाग ने इन तथ्यों को आधार बनाकर मेवाड़ विश्वविद्यालय चित्तौड़गढ़ अधिनियम-2009 की धारा 44(1) के तहत यूनिवर्सिटी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. एसओजी की कार्रवाई बनी आधार इस मामले में केवल विभाग ही नहीं बल्कि एसओजी (SOG) पुलिस भी सक्रिय है. विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों के विरुद्ध एसओजी द्वारा की गई गिरफ्तारियों का मामला विभाग के संज्ञान में आने के बाद यह कड़ा कदम उठाया गया है. उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. मुकेश कुमार शर्मा के हस्ताक्षरों से जारी इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि छात्रों के भविष्य, उच्च शिक्षा की साख और जनहित को सुरक्षित रखने के लिए यह निर्णय लेना अनिवार्य हो गया था. अगले आदेश तक प्रवेश प्रक्रिया ठप फिलहाल सरकार ने विश्वविद्यालय के सभी कोर्सों में नए छात्रों के दाखिले को अगले आदेशों तक पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है. प्रशासन ने शैक्षणिक व्यवस्था की गरिमा बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई की गई है. जब तक सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की जाती, तब तक विश्वविद्यालय में कोई भी नया छात्र प्रवेश नहीं ले पाएगा.

भरतपुर में रिश्तों की मिसाल: हरियाणवी सिंगर काजल चौधरी बनीं ‘कलयुग की श्रवण कुमार’

 जयपुर राजस्थान के जिले भरतपुर में  रिश्तों की एक ऐसी अनूठी मिसाल सामने आई है, जिसने हर आंख को नम कर दिया. हरियाणा की एक बहू अपनी 90 साल की सास को प्लास्टिक के टब में बिठाकर, उसे अपने सिर पर उठाए पैदल ही '84 कोस' की कठिन परिक्रमा करवा रही है.  जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायल होते ही हर कोई इस नजारे को देखकर भावुक हो गया.  कौन हैं टब में सांस को बिठाकर कंधो पर '84 कोस' की परिक्रमा करने वाली बहू? इस बहू का नाम काजल चौधरी है. जो हरियाणा के हताना गांव की रहने वाली हैं और पेशे से एक लोकप्रिय हरियाणवी लोक गायिका (सिंगर) हैं. काजल की 90 साल की सास चन्द्री देवी पिछले कई सालों से शारीरिक रूप से बेहद कमजोर और चलने-फिरने में लाचार हैं. चन्द्री देवी के मन में लंबे समय से ब्रज की प्रसिद्ध 84 कोस की परिक्रमा करने की इच्छा थी, लेकिन शारीरिक अक्षमता के कारण वह बेबस थीं. जब उनकी बहू काजल को इस बात का पता चला, तो उन्होंने अपनी सास के इस सपने को पूरा करने की कोशिश की.  टब में बैठी सास, सिर पर उठाए बहू हरियाणा के हताना गांव की हरियाणवी सिंगर काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीय सास चन्द्री देवी को बड़े प्लास्टिक के टब में बिठाकर सिर पर रखकर पैदल 84 कोस की परिक्रमा करवा रही हैं. गांव बनचारी से परिक्रमा शुरू कर सिंगर काजल ने जहां-जहां से गुजर रही थीं, लोग फूल-मालाओं से उनका स्वागत कर रहे थे. बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने पहुंच रहे हैं. 'सास ने बेटी की तरह पाला, अब फर्ज निभाने की बारी मेरी' काजल चौधरी ने बताया कि उनकी सास चलने-फिरने में असमर्थ हैं. बरसों से उनके मन में 84 कोस परिक्रमा करने की इच्छा थी. सास की यही इच्छा पूरी करने के लिए वह उन्हें भरतपुर की ब्रजभूमि लेकर आई है. काजल ने कहा कि सास ने उन्हें हमेशा बेटी जैसा प्यार दिया.आज जो कुछ भी है सास के आशीर्वाद से है. ऐसे में उनकी इच्छा पूरी करना मेरा फर्ज है. सिंगर काजल बनीं कलयुग की श्रवण कुमार ब्रजभूमि में सास-बहू के इस अद्भुत प्रेम की चर्चा हर जुबान पर है. लोग काजल को कलयुग की श्रवण कुमार बता रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि आज के समय में जब रिश्तों में दूरियां बढ़ रही हैं, काजल ने समाज को नई दिशा दिखाई है.

राजस्थान मौसम अपडेट: तेज हवाओं और बारिश से तापमान में 4 डिग्री तक गिरावट की संभावना

 जयपुर राजस्थान में पिछले एक हफ़्ते से हो रही भारी बारिश और ओले गिरने से तापमान में कमी आई है, वहीं भारी बारिश और तूफ़ान ने आम ज़िंदगी पर असर डाला है. लेकिन मौसम सुहावना होने से लोगों को चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली है. तापमान में आई गिरावट की वजह से मौसम विभाग ने जानकारी जारी की है कि आने वाले दिनों में यह राहत जारी रहेगी. मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य में एक और नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (Western Disturbance)   एक्टिव हुआ है. जिसके असर से 3-4 जून को बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, भरतपुर, अजमेर, उदयपुर और कोटा संभाग के कुछ हिस्सों में तेज आंधी तूफान और बारिश की गतिविधियां बढ़ने की काफी उम्मीद है. मंगलवार को जैसलमेर में चली थी धूल भरी आंधी इस बीच, मौसम विभाग ने पिछले 24 घंटों में यानी बुधवार सुबह तक पूर्वी राजस्थान की कुछ जगहों पर हल्की बारिश दर्ज की गई है. वहीं, पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर सहित कई इलाकों में कल ( मंगलवार) शाम तक हल्की बारिश के साथ धूल भरी आंधी चली. इस दौरान राज्य में सर्वाधिक वर्षा रामगढ़ (जैसलमेर) में 15.0 मिलीमीटर हुई जबकि सर्वाधिक अधिकतम तापमान 42.2 डिग्री सेल्सियस फलोदी में दर्ज किया गया. राजस्थान मौसम अपडेट 3 जून एक और नए मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से आज 3 जून को एक बार पुनः जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर संभाग के कुछ भागों में तेज मेघगर्जन तेज अंधड़ (60-70 Kmph), जयपुर, भरतपुर व कोटा संभाग के कुछ भागों में भी कहीं-कही आंधी बारिश होने की संभावना है। अगले 48 घंटे में 4 डिग्री तक गिरेगा पारा मौसम केंद्र द्वारा बुधवार दोपहर बाद के लिए आधिकारिक चेतावनी जारी करते हुए राज्य के पश्चिमी और उत्तरी जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है. जिसके तहत जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर और अजमेर संभाग में ऑरेज और सीकर, चुरू, झुंझुनूं और राजसमंद में येलो अलर्ट जारी किया गया है. वही इन भागों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूलभरी आंधी और झोंकेदार हवाएं चलने की भी चेतावनी जारी की गई है. इसके असर से अगले 24 से 48 घंटों के दौरान राज्य के बड़े हिस्से में तापमान में 3 से 4 डिग्री तक की कमी देखने को मिल सकती है. आंधी बारिश के प्रभाव से आगामी एक सप्ताह ज्यादातर भागों में अधिकतम तापमान 43 डिग्री से नीचे दर्ज होने व 'हीटवेव' से राहत बने रहने का अनुमान है, 5 जून से मौसम लौटेगा अपने पुराने रंग में  मौसम केंद्र द्वारा जारी आने वाले पांच दिनों के पूर्वानुमान के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि यह मौसमी तंत्र सिलसिलेवार तरीके से आगे बढ़ रहा है. 3 और 4 जून को  इस पश्चिमी विक्षोभ का असर अपने चरम पर रहेगा, जिससे पश्चिमी, उत्तरी और  दक्षिण-पूर्वी हिस्सों के कुछ इलाकों में अलर्ट की स्थिति बनी रहेगी. हालांकि, 5 जून से राज्य को इस  को आंधी तूफान और झमाझम बारिश से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.  इसके बाद पश्चिमी राजस्थान पूरी तरह से सामान्य होकर 'ग्रीन जोन' में तब्दील हो जाएगा और केवल कुछ उत्तरी व मध्य जिलों में ही आंशिक रूप से 'येलो अलर्ट' प्रभावी रहेगा.

चुनावी प्रक्रिया को लेकर बढ़ी हलचल, आयोग ने विभागों से मांगा जरूरी डेटा

जयपुर राजस्थान में पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनावों को लेकर एक बार फिर गतिविधियां तेज हो गई हैं. राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग से आरक्षण संबंधी नवीनतम आंकड़े उपलब्ध कराने को कहा है. आयोग का मानना है कि आवश्यक डेटा मिलते ही चुनावी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा. विभागों से मांगे आंकड़े राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार और संबंधित विभागों को पत्र लिखकर जरूरी आंकड़े मांगे हैं.  आयोग का कहना है कि पंचायत और निकाय चुनावों में आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी किए बिना चुनाव कार्यक्रम जारी करना संभव नहीं है. आयोग ने विभागों को स्पष्ट किया है कि डेटा उपलब्ध होते ही चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाया जाएगा. आयोग को कोर्ट में देना है जवाब उल्लेखनीय है कि चुनाव में देरी को लेकर आयोग को न्यायालय में भी जवाब देना पड़ा था.  15 अप्रैल को चुनाव नहीं कराए जाने के मामले में आयोग ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए आवश्यक आंकड़े उपलब्ध नहीं होने को प्रमुख कारण बताया था. राज्य सरकार की ओर से पहले ओबीसी आरक्षण से संबंधित आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया गया था, लेकिन निर्वाचन आयोग का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया शुरू करने के लिए अंतिम और प्रमाणित आंकड़ों की आवश्यकता है.  यही वजह है कि विभागों से एक बार फिर विस्तृत डेटा मांगा गया है. पंचायत और निकाय चुनाव लंबित राजस्थान में पंचायत राज और नगरीय निकायों के चुनाव काफी समय से लंबित हैं. ऐसे में आयोग के ताजा पत्राचार के बाद चुनावों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं.  अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार आयोग को मांगा गया डेटा कब तक उपलब्ध कराती है क्योंकि इसी पर चुनावी प्रक्रिया की दिशा तय होगी.

मुख्य सचिव से RPDA की अहम बैठक, वैट कटौती पर बनी सहमति की उम्मीद

 जयपुर राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (RPDA) की अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राज्य के मुख्य सचिव वी श्रीनिवास के साथ उनकी एक अहम बैठक हुई. एसोसिएशन ने इस वार्ता को बेहद सकारात्मक बताते हुए मुख्य सचिव का आभार व्यक्त किया है. इस बैठक में प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की निर्बाध आपूर्ति को सुनिश्चित करने से लेकर वैट कटौती जैसे गंभीर मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई और कई अहम फैसले लिए गए. बैठक के दौरान प्रदेश में ईंधन की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया. तेल कंपनी से सीधे होगी पंप में आपूर्ति मुख्य सचिव ने सभी ऑयल कंपनियों को सख्त हिदायत दी है कि किसी भी परिस्थिति में प्रदेश में संचालित पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए. यदि किसी क्षेत्र में कोई कमी पाई जाती है, तो उसे तुरंत दूर कर आपूर्ति को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि कंज्यूमर पंप अब सीधे ऑयल कंपनियों से ही ईंधन की आपूर्ति लेंगे. इसके लिए ऑयल कंपनियों को अपने स्तर पर ऐसे कंज्यूमर पंपों की एक सूची तैयार कर सरकार को सौंपने के लिए कहा गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन-कौन से पंप सीधे आपूर्ति ले रहे हैं. वहीं, नायरा कंपनी द्वारा प्रदेश में डीजल की आपूर्ति रोके जाने के मामले पर भी मुख्य सचिव ने कड़ा संज्ञान लिया और कंपनी को प्रदेश में शीघ्र ही डीजल आपूर्ति सुचारु करने के दिशा-निर्देश दिए. VAT कटौती पर क्या हुई बात इस वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित मुद्दा पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करने का रहा. आरपीडीए ने इस मांग को पूरी मजबूती के साथ सरकार के समक्ष रखा. एसोसिएशन ने अपने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए सरकार को यह भरोसा दिलाया कि वैट में कटौती करने से राज्य सरकार को राजस्व में किसी भी प्रकार की हानि नहीं होगी. उनका मुख्य तर्क यह था कि राज्य में वैट अधिक होने के कारण जो बिक्री पड़ोसी राज्यों में जा रही है, वह वैट कम होने से रुक जाएगी और अंततः राज्य में ईंधन की बिक्री में भारी इजाफा होगा. इसके फलस्वरूप महंगाई की मार झेल रहे किसानों और आम जनता को एक बहुत बड़ी राहत मिल सकेगी. इस विषय पर गहन विचार-विमर्श के बाद एसोसिएशन ने वैट कटौती को लेकर एक संयुक्त कमेटी बनाने का भी सुझाव दिया ताकि समय रहते कोई ठोस निर्णय लिया जा सके. एसोसिएशन की इन तमाम दलीलों और सुझावों पर मुख्य सचिव ने उन्हें अवगत कराया कि सरकार वैट कटौती के मुद्दे को लेकर पूरी तरह से गंभीर है और वर्तमान में इस पर अध्ययन करवा रही है. उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को स्पष्ट आश्वासन दिया है कि राज्य में वैट कटौती को लेकर सरकार का रुख बेहद सकारात्मक है और शीघ्र ही इस दिशा में अग्रिम व उचित कार्रवाई की जाएगी. यह जानकारी आरपीडीए के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह भाटी, उपाध्यक्ष प्रकाश गवालेरा और महासचिव शशांक कौरानी द्वारा जारी की गई.