samacharsecretary.com

बजट सत्र से पहले देवनानी ने गहलोत और जूली को दिया खरा जवाब

जयपुर. राजस्थान विधानसभा के 28 जनवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र से पहले प्रश्न लगाने, मंत्रियों के जवाब और सदन की कार्यवाही से जुड़े नियमों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने रविवार को प्रेस वार्ता की। उन्होंने दावा किया है कि विधानसभा सचिवालय की ओर से अब जारी किए गए बुलेटिन में वही प्रावधान हैं, जो वर्ष 2020 में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी के कार्यकाल में जारी किए गए थे। देवनानी ने कहा कि इन नियमों के बारे में विस्तृत जानकारी वे सदन के भीतर ही देंगे। वासुदेव देवनानी ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विधानसभा से जारी होते आ रहे बुलेटिन को यदि वे पढ़ते, तो शायद इस तरह के बयान नहीं आते। उन्होंने कहा कि यह धारणा बनाई जा रही है कि ये नियम पहली बार लागू हुए हैं, जबकि ऐसा नहीं है। वर्ष 2020 में जारी बुलेटिन संख्या-20 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा बुलेटिन में कोई नया प्रावधान नहीं जोड़ा गया है। विस्तारित प्रश्न न हों और पांच साल से अधिक पुरानी जानकारी संभवतः नहीं मांगी जाए ये सभी नियम पहले से ही लागू हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि 2020 के बाद अब 2026 में ही इन नियमों पर आपत्ति क्यों जताई जा रही है, जबकि जूली उस समय की सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। 90 से 95 फीसदी सवालों के जवाब समय पर मिल रहे वासुदेव देवनानी ने कहा कि जवाबदेही बढ़ाने के लिए उनके कार्यकाल में लगातार मॉनिटरिंग की गई है, जिसका नतीजा यह है कि अब 90 से 95 फ़ीसदी सवालों के जवाब समय पर मिल रहे हैं जो पहले नहीं होता था। पिछली विधानसभा में पर्ची व्यवस्था बंद कर दी गई थी। जिसे उन्होंने अध्यक्ष बनने के बाद फिर शुरू किया। उनका मकसद लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना है न किसी पर पाबंदी लगाना है ‘तुच्छ’ शब्द पर भी सफाई विपक्ष की ओर से ‘तुच्छ’ शब्द पर जताई गई आपत्ति पर देवनानी ने कहा कि यह शब्द लोकसभा की व्यवस्था से लिया गया है। पिछले चार सत्रों में न तो इस पर कोई आपत्ति आई और न ही कोई चर्चा हुई। ऐसे में सवाल यह है कि क्या पहले बुलेटिन पढ़े ही नहीं गए या अब राजनीतिक आधार पर बयान दिए जा रहे हैं।

सीएम भजनलाल ने नमन कर कहा- ‘राष्ट्रधर्म की अद्वितीय मिसाल हैं महाराणा प्रताप’

जयपुर. महाराणा प्रताप मेवाड़ के शासक थे, साथ ही वे भारतीय इतिहास में शौर्य, स्वाभिमान और मातृभूमि प्रेम के प्रतीक भी हैं। आज 19 जनवरी को राजस्थान में महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि मनाई जा रही है। इस मौके पर सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि मेवाड़ मुकुट' वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की पुण्यतिथि पर शत-शत नमन! उनका जीवन स्वाभिमान, स्वतंत्रता और राष्ट्रधर्म की अद्वितीय मिसाल है। नई पीढ़ी प्रेरणा ले – अशोक गहलोत महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया अकाउंट X पर लिखा कि स्वाभिमान एवं अदम्य शौर्य के प्रतीक, मातृभूमि के गौरव के लिए संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले महान योद्धा महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन। उनके त्याग, साहस और देशभक्ति से नई पीढ़ी को प्रेरणा लेकर देश और समाज के लिए समर्पित भाव से आगे बढ़ना सीखना चाहिए। राष्ट्रभक्ति की जीवंत मिसाल – सचिन पायलट वहीं कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट ने सोशल मीडिया अकाउंट X पर लिखा कि शौर्य, साहस, स्वाभिमान एवं राष्ट्रभक्ति की जीवंत मिसाल, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन- गोविंद सिंह डोटासरा – कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा ने महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर सोशल मीडिया अकाउंट X पर लिखा कि हूं लड्यो घणो हूं सह्यो घणो, मेवाड़ी मान बचावण नै। हूं पाछ नहीं राखी रण में, बैर्यां री खात खिडावण में।। अपने अदम्य साहस, अटूट स्वाभिमान और अप्रतिम वीरता से राजस्थान के स्वर्णिम इतिहास को गौरव प्रदान करने वाले मेवाड़ रत्न, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। महाराणा प्रताप जी ने जीवन भर मातृभूमि की आन-बान-शान की रक्षा हेतु संघर्ष किया और विपरीत परिस्थितियों में भी कभी स्वाभिमान से समझौता नहीं किया। उनकी राष्ट्रभक्ति, पराक्रम और त्याग की अमर गाथाएं सदैव देशवासियों को प्रेरणा देती रहेंगी तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए शौर्य और आत्मसम्मान का मार्गदर्शन करती रहेंगी।

धीरेन्द्र शास्त्री का 100 बीघा में कथा पांडाल और भोजन-पार्किंग की निःशुल्क व्यवस्था

जयपुर. रीको औद्योगिक क्षेत्र फतेहपुर रामगंजमंडी में 23 से 25 जनवरी तक श्री राम कथा और श्री गोमाता महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। बागेश्वर धाम के आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री रामकथा का वाचन करेंगे। कथा के प्रारंभ में दोपहर 1 बजे रामगंजमंडी नगर के प्रमुख मार्गों से होकर कलश यात्रा निकाली जाएगी। कलश यात्रा में 21,000 से अधिक महिलाएं कलश लिए शामिल होंगी। शिक्षा मंत्री मदन दिलावार ने रविवार को प्रेसवार्ता में आयोजन की पूरी जानकारी दी। दिलावर ने बताया कि 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। इसके उपलक्ष्य में 22 को ही दीपोत्सव मनाया जाएगा। कलश यात्रा में शामिल 21,000 महिलाएं एक साथ दीप प्रज्वलित कर प्रभु श्री राम की आरती करेंगी। इसके बाद 23 से 25 जनवरी तक कथा होगी। दिलावर ने बताया कि कार्यक्रम में 8 से 10 लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान है। श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पार्किंग की नि:शुल्क व्यवस्था की जा रही है। आयोजन 500 बीघा भू-भाग पर होगा, जिसमें कथा के लिए 100 बीघा में पांडाल सजाया जा रहा है। भोजन, पार्किंग समेत अन्य सभी व्यवस्थाएं की जाएंगी। 5000 के करीब कार्यकर्ता व्यवस्थाएं संभालेंगे। ये रहेगा खास 1000 से अधिक पुलिस कर्मी सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे। सीसीटीवर कैमरों से भी होगी निगरानी। 30 समितियों का गठन व्यवस्था के लिए किया गया है। 5000 के करीब कार्यकर्ता संभालेंगे जिम्मेदारी निशुल्क पार्किंग की व्यवस्था रहेगी। 15 लाख लोगों के हिसाब से व्यवस्था करने के निर्देश 8 से 10 लाख लोगों के शामिल होने की है संभावना 10-10 डॉक्टरों की टीम रहेगी तैनात। जगह जगह पानी के स्टॉल लगेंगे। कथा स्थल पर सुरक्षा की दृष्टि से थाना भी खोला जाएगा। 500 पोर्टेबल शौचालय की रहेगी व्यवस्था। 20000 स्टील बर्तन के सेट का किया जाएगा उपयोग। पॉलिथिन मुक्त होगा पूरा कार्यक्रम निर्बाध बिजली की आपूर्ति के लिए 630 केवी के दो ट्रांसफार्मर लगाए जा रहे है।

देवनानी ने भारत रिन्यूएबल एक्सपो में दिए पीएम सूर्यघर पुरस्कार

जयपुर. राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि आज जब पूरा विश्व संसाधनों की कमी से जूझ रहा है ऐसे में हमारी संसाधनों को पूजने वाली संस्कृति बहुत महत्वपूर्ण है। आज ऊर्जा के स्त्रोत पेट्रोल, डीजल, कोयला, पानी, शुद्ध वायु निरन्तर कम होते जा रहे हैं। ऐसे में मानवता को बचाने के लिए ऊर्जा के नए स्त्रोत काम में लिए जा रहे हैं। उनमें से एक बहुत बड़ा स्त्रोत भगवान सूर्य की ऊर्जा का उपयोग भी है और सम्पूर्ण भारत में इसका विकास तीव्र गति से हो रहा है।  स्पीकर देवनानी रविवार को यहां वी.टी. रोड ग्राउण्ड मानसरोवर में भारत रिन्यूएबल एक्सपो 2026 के समापन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। श्री देवनानी ने पीएम सूर्यघर पुरस्कार प्रदान किए।  स्पीकर देवनानी ने कहा कि राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा प्रदेश होने के साथ खनिज सौर ऊर्जा की उपलब्धता वाला बड़ा प्रदेश है। सीमावर्ती जिले बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर, फलोदी इस क्षेत्र में कार्य करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। देवनानी ने कहा कि यह आयोजन केवल एक एक्सपो नहीं, बल्कि भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक मजबूत संकल्प और साझा प्रयास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि चिन्तन-मनन और विचार करें, पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, ऐसे समय में भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से अग्रसर है।  स्पीकर देवनानी ने कहा है कि राजस्थान को प्रकृति ने प्रचुर सूर्य प्रकाश और विशाल भू-भाग का वरदान दिया है। यही कारण है कि आज राजस्थान देश के अग्रणी सोलर और विंड एनर्जी उत्पादक राज्यों में शामिल है। थार के मरुस्थल से लेकर राज्य के विभिन्न अंचलों तक, सोलर पार्क, विंड फार्म और हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स न केवल ऊर्जा उत्पादन कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और विकास के नए अवसर भी सृजित कर रहे हैं। स्पीकर देवनानी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बनाई गई प्रगतिशील नीतियाँ, निवेश के अनुकूल वातावरण और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ने राजस्थान को रिन्यूएबल एनर्जी निवेश का एक प्रमुख केंद्र बना दिया है। ग्रीन हाइड्रोजन, बैट्री स्टोरेज और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में भी राजस्थान अपार संभावनाओं वाला राज्य है। समारोह में विधायक पुष्पेन्द्र सिंह राणावत सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

राम जलसेतु लिंक परियोजना में चम्बल नदी पर बन रहा 2 हजार 230 करोड़ की लागत से एक्वाडक्ट

जयपुर. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व और सतत् प्रयासों से प्रदेश की महत्वाकांक्षी राम जलसेतु लिंक परियोजना (संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना) मिशन मोड पर आगे बढ़ रही है। जल सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित होने वाली परियोजना के तहत चम्बल नदी पर 2.3 किलोमीटर लम्बाई में एक्वाडक्ट का निर्माण किया जा रहा है। यह जून, 2028 तक बनकर तैयार हो जाएगा। मुख्यमंत्री शर्मा के मार्गदर्शन में परियोजना से संबंधित कार्य तीव्र गति से किए जा रहे हैं। इसके प्रथम चरण के पैकेज-2 के अंतर्गत 2 हजार 330 करोड़ रूपए की लागत से एक्वाडक्ट बनाया जा रहा है। यह चम्बल एक्वाडक्ट एक छोर में कोटा जिले की दीगोद तहसील के पीपलदा समेल गांव और दूसरे छोर में बूंदी जिले की इंद्रगढ़ तहसील के गोहाटा गांव से जुड़ेगा। इसके माध्यम से कालीसिंध पर निर्मित नवनेरा बैराज से पानी पम्प हाउस से लिफ्ट कर मेज नदी में छोड़ा जाएगा। इसके बाद मैज बैराज से पम्प हाउस व फीडर के जरिए गलवा बांध तक और वहां से बीसलपुर और ईसरदा बांध में पहुंचाया जाएगा। इस एक्वाडक्ट के बनने से आमजन को आवागमन के लिए अतिरिक्त मार्ग भी उपलब्ध होगा। 2280 मीटर लम्बे एक्वाडक्ट की आंतरिक चौड़ाई 41.25 मीटर और ऊंचाई 7.7 मीटर प्रस्तावित है। मई, 2025 में कार्य शुभारंभ के बाद से ही तेजी से कार्य किया जा रहा है। निर्माण स्थल पर कैंप एवं बैचिंग प्लांट का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया गया है। एक्वाडक्ट हेतु प्रस्तावित 15 टेस्ट पाइल में से 8 टेस्ट पाइल का कार्य पूर्ण हो चुका है। कुल 5060 वर्किंग पाइल प्रस्तावित हैं, जिनमें से लगभग 860 पाइल का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। प्रतिदिन 15-20 पाइल का कार्य 12 रिग मशीनों की सहायता से किया जा रहा है। औसतन 500 क्यूबिक मीटर कंक्रीट कार्य प्रतिदिन किया जा रहा है। साइट पर लगातार शिफ्टों में कार्य जारी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ईआरसीपी को वृहद स्वरूप देते हुए राम जलसेतु लिंक परियोजना (संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना) (लगभग 90 हजार करोड़ रूपए) तैयार की गई है। परियोजना के प्रथम चरण में राज्य के 17 जिलों की लगभग 3 करोड़ 25 लाख आबादी को पेयजल सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही, सिंचाई एवं उद्योगों के लिए भी जल उपलब्ध होगा। इससे प्रदेश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को नई दिशा मिलेगी। उल्लेखनीय है कि वर्तमान राज्य सरकार केे गठन के तुरंत बाद मध्यप्रदेश सरकार से संवाद स्थापित कर सहमति प्राप्त की गई। जनवरी, 2024 में राम जलसेतु लिंक परियोजना (संशोधित पीकेसी योजना) का एमओयू किया। इसके बाद 17 दिसंबर, 2024 को जयपुर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में राजस्थान, मध्य प्रदेश एवं भारत सरकार के मध्य एमओए का आदान-प्रदान हुआ। यह मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की दूरदृष्टि, समन्वय क्षमता और जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में यह परियोजना प्रदेश के लिए जीवनदायिनी सिद्ध होगी और मुख्यमंत्री शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान जल आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से अग्रसर होगा।

कृषि मंत्री ने की सवाई माधोपुर में 150 करोड़ के अमरूद प्रोसेसिंग प्लान्ट की घोषणा की

जयपुर. सवाई माधोपुर का अमरूद आने वाले दिनों में क्षेत्र के किसानों के मीवन में मिठास और खुशहाली लाएगा। राज्य सरकार जिले में अमरूद का प्रोसेसिंग प्लान्ट लगवाएगी, जिससे देश-विदेश में इस फल और इससे बने उत्पादों की मांग बढ़ेगी और किसान की आय बढ़ेगी। देश में पहली बार आयोजित अमरूद महोत्सव इसी दिशा में प्रयासों का पहला कदम है। इसके सुखद परिणाम जल्द ही दिखने लगेंगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और  कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने सवाई माधोपुर के दशहरा मैदान में अमरूद महोत्सव का उद्घाटन किया और ये उद्गार व्यक्त किए। महोत्सव में बिरला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की किसानों की आमदनी बढ़ाने की सोच के अनुसार काम करते हुए राज्य सरकार कृषि उत्पादन बढ़ाने, बेहतर प्रसंस्करण और विपणन  के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इन्ही प्रयासों की कड़ी में देश में पहली बार अमरूद महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से किसानों, कृषि उत्पाद व्यापारियों और कृषि यंत्र एवं तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों को साझा मंच उपलब्ध कराया गया है ताकि वे अपने अनुभवों को साझा कर इस क्षेत्र को प्रगति के पथ पर अग्रसर कर सकें। अमरूद सस्ता और स्वास्थ्य-वर्धक, महोत्सव से इसकी जानकारी बढ़ेगी –  लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि अमरूद एक सस्ता फल है लेकिन बहुत अधिक स्वास्थ्य-वर्धक है। अमरूद महोत्सव जैसे आयोजन के जरिए लोगों को इस फल के स्वास्थ्य से जुड़े लाभों के बारे में जानकारी मिलेगी। इससे बनने वाले अचार, जूस, पल्प, मिठाई आदि भी इस मेले में प्रदर्शित किए गए है। उन्होंने कहा कि यहां अमरूद के लाभ, इसकी खेती की नई तकनीक और उन्नत किस्मों तथा प्रसंस्करण की विधियों की जानकारी का आदान— प्रदान हो रहा है। डॉ. किरोडी लाल  ने सवाई माधोपुर में अमरूद का प्रोसेसिंग प्लान्ट लगाने की घोषणा की है। जब किसी कृषि उत्पाद का संवर्धन होता है, तभी किसान की वास्तविक आय बढ़ती है। इस प्रकार यह आयोजन क्षेत्र के अमरूद के किसानों की जिन्दगी बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगा। सवाई माधोपुर का अमरूद यहीं पर खपने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की – कृषि मंत्री डॉ. मीणा ने बताया कि राज्य सरकार जल्द ही सवाई माधोपुर में 150 करोड़ रुपये की लागत से अमरूद प्रोसेसिंग प्लान्ट स्थापित करेगी। राजस्थान में कुल 14 हजार हैक्टेयर अमरूद के बगीचों में से 11 हजार हैक्टेयर अकेले इस जिले में हैं।  सवाई माधोपुर का अमरूद यहीं पर खपने की जिम्मेदारी श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में पूरी सरकार की है। डॉ. मीणा ने कहा कि राजस्थान में अमरूद किसानों की इस फल से आमदनी सालाना करीब 600-700 करोड़ रुपये है। सरकार का लक्ष्य किसानों की आमदनी को 1500-1600 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष करना है। सवाई माधोपुर के किसानों को अपना फल बेचने के लिए दिल्ली, बड़ौदा आदि जगहों पर नहीं जाना पड़े, इसलिए प्रोसेसिंग यूनिट की सख्त आवश्यकता है। प्रोसेसिंग प्लान्ट लगने से आस-पास के जिलों के साथ ही पड़ोसी प्रदेशों के अमरूद के किसानों को भी लाभ होगा। राज्य सरकार आने वाले समय में सवाई माधोपुर में 600 करोड़ रुपये की लागत के विकास कार्य करवाएगी । इससे जिले में सिंचाई के लिए भी अतिरिक्त पानी उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष मानसून के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों का काफी नुकसान हुआ। इससे बचाव के लिए सूरवाल बांध के पानी को बनास नदी में छोड़ने के लिए 110 करोड़ रुपये की लागत से एक चैनल बनाया जाएगा। किसान एक दूसरे से संवाद करें, योजनाओं का लाभ लें — डॉ. मीणा ने  महोत्सव में आए किसानों और अन्य प्रतिभागियों से इस आयोजन का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसान कृषि यंत्रों, बागवानी, उत्पादों के प्रसंस्करण से जुड़े उद्यमियों और वैज्ञानिकों आदि के साथ संवाद करें और यहां लगी लगभग 250 स्टॉल्स को देखकर एक दूसरे से उन्नत कृषि की तकनीकी और किस्मों के महत्व पर संवाद करें। उन्होंने राज्य तथा केन्द्र सरकार की कृषि एवं पशुपालन से जुड़ी योजनाओं, विशेषकर फसल बीमा और मंगला पशु बीमा योजना का लाभ लेने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की “पर ड्रॉप, मोर क्रॉप” योजना के जरिए राजस्थान में सिंचित क्षेत्र को 25 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य है। डूंगरी बांध से सवाई माधोपुर में सबसे अधिक सिंचाई क्षेत्र बढेगा- डॉ. किरोड़ी लाल ने कहा कि ईआरसीपी, जिसे अब संशोधित पीकेसी (पार्वती-कालीसिंध-चम्बल) योजना कहा जाता है, का सबसे अधिक लाभ सवाई माधोपुर जिले को होगा। योजना से 17 जिलों में पीने का पानी उपलब्ध होगा और सिंचाई क्षेत्र में 4.03 लाख हैक्टेयर की वृद्धि होगी। 15 प्रतिशत पानी उद्योगों के लिए भी उपलब्ध होगा। सवाई माधोपुर-करौली में सिंचित क्षेत्र बढ़कर 1.60 लाख हैक्टेयर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि डूंगरी बांध से केवल 9 गांव विस्थापित होंगे और उन गांवों की पूरी आबादी को सुव्यवस्थित घर, बिजली, पानी सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध होगी। डॉ. मीणा ने बताया कि डूंगरी बांध इस परियोजना का सबसे बड़ा बांध है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने इस योजना के लिए 90 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और कृषि मंत्री डॉ. मीणा ने विभिन्न स्टॉल पर अमरूदों की किस्मों, इससे बने उत्पादों और नई कृषि तकनीकों के बारे में किसानों, उद्यमियों तथा वैज्ञानिकों से जानकारी ली और उनके विशिष्टताओं पर चर्चा की। उद्घाटन कार्यक्रम में जिला कलक्टर काना राम, पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर,अतिरिक्त निदेशक कृषि देशराज ने भी महोत्सव के उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। स्थानीय पद दंगल कलाकारों ने अपने पारंपरिक अंदाज में सभी अतिथियों का संगीत— नृत्य से स्वागत किया।

शेखावाटी को सर्दी से राहत, मौसम करवट लेने को तैयार, बारिश के संकेत

सीकर शेखावाटी क्षेत्र में पिछले करीब दो सप्ताह से कड़ाके की सर्दी का दौर जारी है, लेकिन अब लोगों को इस तेज ठंड से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। प्रदेश में एक के बाद एक दो वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होने के कारण तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। शनिवार सुबह शेखावाटी के कई इलाकों में आसमान में बादल छाए रहे। इसके साथ ही न्यूनतम तापमान में भी मामूली बढ़ोतरी देखी गई। शेखावाटी के सबसे ठंडे इलाकों में शामिल फतेहपुर में शनिवार को न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वर्तमान में प्रदेश में एक कमजोर वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय है। इसके प्रभाव के चलते बारिश की संभावना बेहद कम है, हालांकि आगामी दो दिनों तक बादल छाए रह सकते हैं। मौसम विभाग के अनुसार, इस सिस्टम का असर खत्म होने के बाद 22 जनवरी से एक मजबूत वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा। इस मजबूत वेस्टर्न डिस्टरबेंस के प्रभाव से 22 से 25 जनवरी के बीच शेखावाटी क्षेत्र और जयपुर संभाग के कई इलाकों में तेज बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। बारिश के दौरान तापमान में खास उतार-चढ़ाव नहीं होगा, लेकिन सिस्टम के कमजोर पड़ते ही मौसम साफ होने लगेगा और उत्तरी हवाओं का असर बढ़ेगा। मौसम साफ होते ही एक बार फिर शेखावाटी में सर्दी का असर तेज हो सकता है और तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि मौजूदा वेस्टर्न डिस्टरबेंस कमजोर है, इसलिए इससे बारिश की संभावना कम है, लेकिन 22 से 25 जनवरी के बीच सक्रिय होने वाला वेस्टर्न डिस्टरबेंस प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश करा सकता है।  

जनजातीय छात्रों के सपनों को पंख: भजनलाल शर्मा सरकार में एकलव्य स्कूल बने शिक्षा की उम्मीद

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य के सुदूर जनजाति अंचलों में एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (ईएमआरएस) शिक्षा, समरसता और सामाजिक सुरक्षा के क्षितिज पर सूरज की तरह चमक रहे हैं। राज्य के 31 एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के बच्चे नीट, आईआईटी, जेईई जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, कंप्यूटर लैब, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसे नवाचार जनजातीय बालक-बालिकाओं के सपनों में नए रंग भर रहे हैं। ईएमआरएस में पढ़ रहे 11 हजार 619 अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्र-छात्राओं की प्रतिभा की रोशनी से जनजाति क्षेत्रों में हजारों घर-परिवार भी उम्मीदों से रोशन हैं। इनमें 6 हजार 710 बालक और 4 हजार 909 बालिकाएं शामिल हैं। अभावों में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर आशंकित माता-पिता की आंखों में नौनिहालों के सुनहरे भविष्य की चमक और चेहरे पर आत्मविश्वास की झलक साफ देखी जा सकती है। राज्य के ईएमआरएस में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की गारंटी का असर है कि सत्र 2024-25 में 9 हजार 999 बच्चों के मुकाबले शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 1 हजार 620 अधिक विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। प्रवेश परीक्षा में बैठने वाले बच्चों की संख्या भी साल दर साल बढ़ी है। शिक्षा के साथ आवास, भोजन और किताबें भी निःशुल्क राजस्थान स्टेट एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल सोसायटी द्वारा राज्य में संचालित सीबीएसई से संबद्ध 31 एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल विद्यालयों में से नवीनतम 31वां विद्यालय जमवारामगढ़ (जयपुर) में जून 2025 से प्रारंभ किया गया है। सभी ईएमआरएस विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक कक्षाएं संचालित होती हैं। कक्षा 11 एवं 12 में विज्ञान और कला संकाय उपलब्ध हैं। विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा, पाठ्यपुस्तकें, आवास, भोजन, पौष्टिक आहार, जूते-मौजे सहित दैनिक उपयोग की सामग्री उपलब्ध करवाई जाती है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एंड वर्चुअल रिएलिटी, इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर, ब्यूटी एंड वेलनेस, एग्रीकल्चर तथा ऑटोमोटिव स्किल लैब्स में इन विद्यालयों में संचालित की जा रही हैं। इन विद्यालयों में शिक्षा के साथ-साथ खेल-कूद और सह-शैक्षिक गतिविधियों पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में राज्य स्तरीय स्टेट स्पोर्ट्स मीट-2025 उदयपुर में से चयनित 154 विद्यार्थियों ने ओडिशा के राउरकेला में आयोजित नेशनल स्पोर्ट्स मीट-2025 में राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए 9 इवेंट्स में पदक अर्जित किए। वहीं, राज्य स्तरीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक फेस्ट-2025 उदयपुर में से चयनित 59 विद्यार्थियों ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक एवं साहित्यिक फेस्ट-2025 में भाग लिया। जेईई और नीट की तैयारी के लिए विशेष व्यवस्था एकलव्य विद्यालयों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ करियर मार्गदर्शन देकर भविष्य के लिए सही दिशा भी दिखाई जाती है। इन विद्यालयों में कक्षा 9 से 11 तक अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए इनेबल कार्यक्रम के अंतर्गत टाटा मोटर्स के सहयोग से आईआईटी-जेईई और नीट की तैयारी के लिए प्रतिदिन ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। दक्षणा कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित नेशनल लेवल परीक्षा में चयनित 12 विद्यार्थियों को भोपाल (मध्यप्रदेश) में आईआईटी, जेईई और नीट की विशेष कोचिंग दी जा रही है। ईएमआरएस बिहारीपुरा, जयपुर के छात्र मोहनलाल मीना, अनिकेश मीना और ईएमआरएस बरनाला, सवाईमाधोपुर की छात्रा राजकुमारी मीना ने नेशनल एलीजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट (नीट) परीक्षा में चयनित होकर राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों से एमबीबीएस कर रहे हैं। ईएमआरएस से एमबीबीएस तक का सफर सवाईमाधोपुर जिले में बामनवास तहसील के बरनाला के पास एक गांव की रहने वाली राजकुमारी मीना के किसान पिता का सपना था कि उनकी बेटी बड़ी होकर डॉक्टर बने। राजकुमारी ने बताया कि उनके गांव में बायोलॉजी नहीं थी। सरकारी स्कूल से दसवीं में 93 फीसदी से उत्तीर्ण होने के बाद ईएमआरएस प्रवेश परीक्षा दी और ईएमआरएस बरनाला में उनको प्रवेश मिल गया। आज वे गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, भावनगर में एमबीबीएस सैकंड ईयर की छात्रा हैं। राजकुमारी ने बताया कि हर कोई प्राइवेट स्कूल में नहीं पढ़ सकता और न ही महंगी कोचिंग कर सकता। एमबीबीएस के बाद वे एमडी मेडिसिन करना चाहती हैं। राजकुमारी का छोटा भाई भी ईएमआरएस में पढ़ रहा है। इसी तरह ईएमआरएस बिहारीपुरा, जयपुर के छात्र अनिकेश मीना पश्चिम बंगाल के चौबीस परगना जिले में डायमंड हार्बर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रहे हैं। अनिकेश ने बताया कि वे करौली के नादौती के पास एक गांव के रहने वाले हैं। पिताजी किसान हैं। ईएमआरएस में छठी कक्षा में प्रवेश लेने के बाद से उनकी जिंदगी बदल गई। ईएमआरएस की बदौलत ही उन्हें नीट परीक्षा में सफलता मिली। अनिकेश कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं। पिता गुजरात में हमाली करते हैं, बेटा पढ़ रहा डॉक्टरी जयपुर के बस्सी के पास के किशनपुरा गांव के रहने वाले मोहनलाल मीना के पिता गुजरात के सिद्धपुर में ईसबगोल की बोरियां उठाते हैं। मोहन ने बताया कि उन्होंने छठी कक्षा में ईएमआरएस में दाखिला लिया। ईएमआरएस में शिक्षकों ने ही उन्होंने बताया कि डॉक्टर कैसे बन सकते हैं। ईएमआरएस में रहकर ही नीट की तैयारी की और आज वे पंजाब के फरीदकोट में गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रहे हैं। मोहन एमबीबीएस के बाद जनरल फिजिशियन बनना चाहते हैं।

पलक्कड़ में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का अनोखा अंदाज: कुर्सी नहीं, जमीन पर बैठक

जयपुर सत्ता या शक्ति का वास्तविक अर्थ केवल पद, कुर्सी या औपचारिक प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं होता—यह बात केरल के पलक्कड़ में आयोजित तपस्या गोल्डन जुबली इंटरनेशनल म्यूजिक फेस्टिवल में उस समय स्पष्ट रूप से देखने को मिली, जब केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने परंपरागत औपचारिकताओं से अलग सादगी का मार्ग चुना।  अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त इस संगीत महोत्सव में, जहां आमतौर पर विशिष्ट अतिथियों के लिए मंच, विशेष आसन और कड़े प्रोटोकॉल की व्यवस्था होती है, वहीं मंत्री शेखावत ने इन सबसे दूरी बनाते हुए श्रोताओं के बीच जमीन पर बैठकर भारत के कालजयी भक्ति संगीत का रसास्वादन किया। उनके इस सहज और शांत व्यवहार ने न केवल उपस्थित श्रोताओं बल्कि कलाकारों का भी ध्यान आकर्षित किया।   महोत्सव में प्रस्तुत भक्ति संगीत भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की आत्मा को दर्शाता है—जहां सुर, साधना और समर्पण का संगम होता है। ऐसे वातावरण में मंत्री का जमीन पर बैठना केवल एक व्यक्तिगत चयन नहीं था, बल्कि यह एक गहरा सांस्कृतिक संदेश भी था। यह संकेत था कि संस्कृति को जीने के लिए पद या शक्ति की ऊंचाई आवश्यक नहीं, बल्कि विनम्रता और श्रद्धा ही उसका वास्तविक आधार है। गजेंद्र सिंह शेखावत का यह व्यवहार उस विचार को मजबूत करता है कि संस्कृति केवल मंच से प्रदर्शित करने की वस्तु नहीं, बल्कि उसे आत्मसात करने की प्रक्रिया है। बिना किसी चकाचौंध, बिना सुरक्षा घेरों और विशेष प्रोटोकॉल के, उन्होंने यह दिखाया कि नेतृत्व का वास्तविक स्वरूप सादगी, सम्मान और सहभागिता में निहित होता है। पलक्कड़ का यह दृश्य सोशल मीडिया और सांस्कृतिक हलकों में चर्चा का विषय बना, जहां कई लोगों ने इसे भारतीय परंपराओं के अनुरूप एक प्रेरक उदाहरण बताया। यह क्षण इस बात की याद दिलाता है कि जब जनप्रतिनिधि स्वयं संस्कृति के साथ समान स्तर पर जुड़ते हैं, तभी उसका संरक्षण और संवर्धन वास्तव में संभव होता है।  

अपराधियों पर प्रशासन का वार, कोटा में हिस्ट्रीशीटर आदिल मिर्जा का घर जमींदोज

कोटा कोटा के नामी हिस्ट्रीशीटर आदिल मिर्जा के घर आज बुलडोजर आ धमका। प्रशासन ने पहले ही उसके मकान को अवैध बताकर कुछ रोज पहले घर गिराने वाली नोटिस चिपका दी थी। आदिल का यह अवैध घर 225 गज में बना है जिसे अब गिराया जा रहा है। मौके पर भारपी पुलिस बल भी मौजूद रहा। हाल ही में अपने अपराध से खौफ पैदा करे चुके आदिल को पुलिस ने एनकाउंटर में पकड़ा था। इस कार्रवाई में उसके साथी भी चोटिल हुए थे।   कौन है आदिल मिर्जा? आदिल मिर्जा का यह घर कोटा के अमृतखेड़ी गांव में बना है। आलीशान घर पहले से अवैध घोषित है और बावड़ी श्रेणी की जमीन पर बना है। आदिल मिर्जा अपराध जगत में एक कुख्यात नाम है। इसके खिलाफ कुल 34 मामले दर्ज हैं। आदिल मूल रूप से सांगोद का निवासी है। नाबालिग होते ही अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले आदिल पर जानलेवा हमला करने, पुलिस पर फायरिंग, एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट, महामारी अधिनियम, दंगा, डकैती, चोरी, धार्मिक भावनाएं भड़काना और राज कार्य में बाधा डालने जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। सांगोद थाने में दर्ज इन मामलों के अलावा आदिल के खिलाफ मोडक, कनवास, नयापुरा और कैथूनीपोल थानों में भी केस दर्ज हैं। पहले ही बता दिया था होगी बुलडोजर वाली कार्रवाई आदिल और उसके तीन दोस्तों को बीते दिनों गिरफ्तार करने के बाद इस नामी हिस्ट्रीशीटर के संपत्तियों की जांच की गई जिसमें उसके इस अवैध मकान की बात सामने आई थी। सांगोद में प्रशासन ने अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। नगर पालिका की जमीन पर अवैध कब्जा सांगोद तहसीलदार जतिन दिनकर के अनुसार, अमृत खेड़ी गांव की एक जमीन, जो सरकारी रिकॉर्ड में 'बावड़ी' के नाम पर दर्ज है और नगर पालिका की संपत्ति है, उस पर अवैध रूप से मकान बनाया गया है। पुलिस और प्रशासन ने इस आलीशान घर पर नोटिस चिपका दिया था। आदिल को 3 दिन की मोहलत दी गई है कि वह खुद अपना अतिक्रमण हटा ले। अगर तय समय (नोटिस की मियाद) तक कब्जा नहीं हटाया गया, तो प्रशासन भारी पुलिस बल के साथ बुलडोजर चलाकर निर्माण को ध्वस्त कर देगा। पुलिस की जांच जारी थानाधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि अपराधी आदिल मिर्जा की सभी संपत्तियों की गहराई से जांच की जा रही है। इसी जांच के दौरान पता चला कि उसने सरकारी जमीन कब्जाकर अपना घर खड़ा किया है, जिस पर अब कानूनी कार्रवाई की तैयारी की गई है।