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अर्जुनराम मेघवाल का संदेश: भीतर की ऊर्जा को पहचानें और सही दिशा में लगाएं

भीतर की ऊर्जा को पहचानें और सही दिशा में लगाएं- अर्जुनराम मेघवाल   लाडनूं के जैविभा विश्वविद्यालय में भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल व अन्य विभिन्न उद्घाटन व लोकार्पण करते हुए। लाडनूं  भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्री तथा जैविभा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाएं। हर एक के अंदर ऊर्जा होती है, बस उस ऊर्जा के सही उपयोग की जरूरत है। वे यहां जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय में आयोजित उद्घाटन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों से सीखने पर जोर देते हुए विभिन्न आयुवर्ग में सीखने की स्थिति की जानकारी दी। मेघवाल ने बताया कि अपने घर से शुरू करके विश्वविद्यालय तक सीखते हुए ही पहुंचता है। उन्होंने मल्टी डिसीप्लेन विकसित करने और किसी भी खेल को अपना कर शरीर को स्वस्थ रखने, संगीत को अपना कर तनाव को कम करने तथा गणित को अपना कर दिमाग की एक्सराईज किए जाने की आवश्यकताएं बताईं। साथ ही केन्द्रीय मंत्री ने संस्कारों की जरूरत पर भी बल दिया और कहा कि किशोरावस्था की 12 से 17 साल की आयु में जो भी सीखा जाता है, वे सारे अच्छे या बुरे संस्कार उस पर जीवन भर हावी रहेते हैं। अगर अच्छे संस्कार ग्रहण किए गए तो जीवन भी वह अच्छा बना रहेगा और बुराई सीखने पर वह जीवन में बुराई की तरफ ही आकर्षित होता रहेगा। विश्वविद्यालय परिसर में आचार्य तुलसी की ऊर्जा का अनुभव केन्द्रीय मंत्री मेघवाल ने जैन विश्वभारती संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि यहां नैतिकता का पाठ पढाया जाता है। उन्होंने यहां पढने वाले हर विद्यार्थी को भाग्यशाली बताया ओर कहा कि आचार्य तुलसी की कल्पना शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण थी। इस परिसर में आज भी उनकी ऊर्जा महसूस की जा सकती है। इस अवसर पर उन्होंने विकसित भारत बनाने में युवाओं के योगदान को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इस दिशा में आप सभी का श्रम ही काम आएगा। उन्होंने 21वीं शताब्दी को एशिया की और विशेष रूप से भारत के नेतृत्व की शताब्दी बताया ओर देश की विशेषताओं को उल्लेखित किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विकसित भारत पर लिखी गई अपनी एक कविता ‘हम हैं भारत के लोग’ का गान भी करके सुनाया। विभिन्न उद्घाटन व लोकार्पण किए जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में कुलाधिपति केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री मेघवाल एवं कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने विभिन्न नवनिर्मित भवनों, नवीन अवसंरचनाओं एवं डिजीटल एप्लीकेशंस का उद्घाटन किया। विश्वविद्यालय के अन्तर्गत आचार्य महाप्रज्ञ प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र मेंनवनिर्मित डीलक्स ब्लाॅक के प्रथम तल, आवासीय क्वार्टर व व्यायामशाला, आचार्य महाश्रमण काॅलोनी में नवनिर्मित आवासीय क्वार्टर तथा सत्कार अतिथि गृह एवं केंटीन की नवीन अवसंरचना एवं लिफ्ट स्थापना का उद्घाटन किया। साथ ही डिजीटल प्लेटफार्म में मोबाईल कनेक्ट एप्लिकेशन, एल्यूम्नी नेटवर्क  पोर्टल एवं लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर उप कुलसचिव अभिनव सक्सेना ने केन्द्रीय मंत्री को सभी डिजीटल एप्लीकेशंस की विशेषताएं बताई। इस अवसर पर जैन विश्व भारती के उपखंड अधिकारी मीनू वर्मा, अध्यक्ष अमरचंद लूंकड़, आचार्यश्री महाश्रमण योगक्षेम वर्ष प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष प्रमोद बैद, प्रकाश बैद, टीकमचंद सेठिया, विश्वविद्यालय का समस्त स्टाफ एवं विद्यार्थीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव देबाशीष गोस्वामी ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. युवराज सिंह खंगारोत ने किया।

शीतलहर की चपेट में राजस्थान, कई इलाकों में तापमान 10 डिग्री से कम

जयपुर राजस्थान में शुक्रवार को 12 जिलों में शीतलहर को लेकर चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार 31 जनवरी से एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिसका असर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों- जयपुर, भरतपुर, बीकानेर और कोटा संभाग के जिलों में देखने को मिलेगा। इस दौरान बादल छाए रह सकते हैं और कुछ इलाकों में हल्की बारिश के साथ ओलावृष्टि की भी संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव 2 फरवरी तक बना रहेगा। गुरुवार को सीकर, जयपुर, फतेहपुर, भीलवाड़ा सहित कई शहरों में तापमान में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। हल्के बादल और धुंध के कारण दिन में धूप कमजोर रही, जिससे दिन के समय भी सर्दी का असर बना रहा। शेखावाटी क्षेत्र के सीकर समेत कई जिलों में गुरुवार सुबह घना कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता काफी कम हो गई। बीते 24 घंटों में सुबह तक मौसम साफ रहा, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा, पश्चिमी, उत्तरी और पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में धुंध और बादल छा गए। गुरुवार को श्रीगंगानगर, चूरू, बीकानेर, बारां, डूंगरपुर, नागौर, फतेहपुर, करौली, सिरोही, उदयपुर, कोटा, सीकर, पिलानी, जयपुर, अलवर, टोंक, भीलवाड़ा और अजमेर में दिन का अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। वहीं सबसे अधिक अधिकतम तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस बाड़मेर में रिकॉर्ड हुआ। प्रदेश में सुबह और शाम गलनभरी सर्दी का असर बना रहा। हल्की सर्द हवाओं के चलते कोटा, बाड़मेर, जोधपुर, फलोदी और प्रतापगढ़ को छोड़कर लगभग सभी जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। सबसे ठंडा जिला पाली रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश के शहरों का अधिकतम-न्यूनतम तापमान प्रदेश के प्रमुख शहरों में 29 जनवरी को दर्ज तापमान के अनुसार अजमेर में अधिकतम 21.6 और न्यूनतम 9.2 डिग्री सेल्सियस रहा। भीलवाड़ा में अधिकतम तापमान 20 और न्यूनतम 8.2 डिग्री दर्ज किया गया। अलवर में दिन का अधिकतम तापमान 19.5 और न्यूनतम 5.2 डिग्री रहा। जयपुर में अधिकतम 21.5 और न्यूनतम 8.5 डिग्री दर्ज हुआ। पिलानी में अधिकतम तापमान 21 और न्यूनतम 6 डिग्री रहा, जबकि सीकर में अधिकतम 19.5 और न्यूनतम 6 डिग्री दर्ज किया गया। कोटा में अधिकतम तापमान 20.2 और न्यूनतम 10 डिग्री रहा। चित्तौड़गढ़ में दिन का अधिकतम तापमान 23 और न्यूनतम 8.6 डिग्री दर्ज हुआ। उदयपुर में अधिकतम 19 और न्यूनतम 8 डिग्री रहा। बाड़मेर में प्रदेश का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 25.6 डिग्री और न्यूनतम 10.2 डिग्री दर्ज किया गया। जैसलमेर में अधिकतम 23 और न्यूनतम 8.9 डिग्री रहा, जबकि जोधपुर में अधिकतम तापमान 23.9 और न्यूनतम 10.3 डिग्री दर्ज हुआ। बीकानेर में अधिकतम 21 और न्यूनतम 9.6 डिग्री रहा। चूरू में दिन का अधिकतम तापमान 21.2 और न्यूनतम 7 डिग्री दर्ज किया गया। श्रीगंगानगर में अधिकतम 21.1 और न्यूनतम 7.3 डिग्री रहा। बारां में अधिकतम तापमान 19.5 और न्यूनतम 9.8 डिग्री दर्ज हुआ। जालोर में अधिकतम 24 और न्यूनतम 7.5 डिग्री रहा। सिरोही में अधिकतम तापमान 18.6 और न्यूनतम 4.7 डिग्री दर्ज किया गया। फतेहपुर में अधिकतम 21.1 और न्यूनतम 4.4 डिग्री रहा। करौली में अधिकतम 19 और न्यूनतम 8.6 डिग्री दर्ज हुआ। दौसा में अधिकतम तापमान 22.9 और न्यूनतम 6.3 डिग्री रहा। प्रतापगढ़ में अधिकतम 19.4 और न्यूनतम 10.3 डिग्री दर्ज किया गया। डूंगरपुर में अधिकतम 19.5 और न्यूनतम 5.7 डिग्री रहा। वहीं पाली प्रदेश का सबसे ठंडा जिला रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4.1 डिग्री और अधिकतम 21.1 डिग्री दर्ज किया गया।

भीलवाड़ा सड़क हादसा: कोहरे के कारण 6 गाड़ियां टकराईं, मावठ और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी

भीलवाड़ा/जयपुर   राजस्थान में कड़ाके की ठंड के साथ अब घना कोहरा जानलेवा साबित हो रहा है। शुक्रवार सुबह भीलवाड़ा जिले में नेशनल हाईवे-58 (भीलवाड़ा-उदयपुर हाईवे) पर कम विजिबिलिटी के कारण एक भीषण सड़क हादसा हो गया। यहाँ कोहरे के कारण एक के बाद एक 6 गाड़ियां आपस में टकरा गईं, जिसमें 3 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और 6 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे के बाद लगा 4 KM लंबा जाम सुबह करीब 8 बजे हुए इस एक्सीडेंट के बाद हाईवे पर चीख-पुकार मच गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि गाड़ियां पूरी तरह चकनाचूर हो गईं और कई लोग मलबे में फंस गए। हादसे के कारण हाईवे पर करीब 4 किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिसमें घायलों को लेने पहुंची एम्बुलेंस भी काफी देर तक फंसी रही। स्थानीय लोगों और पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद गाड़ियों में फंसे लोगों को बाहर निकाला। प्रदेश में कोहरे की स्थिति 27 जनवरी को हुई मावठ (बेमौसम बारिश) के बाद से ही राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में नमी और कोहरा छाया हुआ है। आज सुबह की स्थिति कुछ इस प्रकार रही: जयपुर-दिल्ली हाईवे: यहाँ दृश्यता (Visibility) मात्र 10 मीटर तक रह गई। प्रमुख जिले: सीकर, चूरू, अलवर और कोटा में भी घना कोहरा दर्ज किया गया। मौसम विभाग की चेतावनी: बारिश और ओले गिरने के आसार मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, राजस्थान के लोगों को अभी सर्दी से राहत मिलने वाली नहीं है। नया सिस्टम : 31 जनवरी से एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय होने जा रहा है। प्रभावित क्षेत्र : जयपुर, भरतपुर, बीकानेर और कोटा संभाग में बादल छाए रहेंगे। चेतावनी : 2 फरवरी तक प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की बारिश के साथ ओले (Hailstorm) गिरने की भी संभावना है। सावधानी : कोहरे के दौरान हाईवे पर वाहन चलाते समय 'फॉग लाइट्स' का प्रयोग करें और गति सीमा का विशेष ध्यान रखें।

दिल्ली की ओर कदम? राज्यसभा से राजेन्द्र राठौड़ और सतीश पूनिया की एंट्री की अटकलें

जयपुर. राजस्थान की राजनीति में इस वक्त राजेंद्र राठौड़ और सतीश पूनिया के भविष्य को लेकर जो अटकलें हैं, उन्हें जून 2026 में होने वाले राज्यसभा चुनाव एक तार्किक अंजाम दे सकते हैं। इस पूरी राजनीतिक बिसात को अगर एक मुकम्मल रिपोर्ट के रूप में देखें, तो तस्वीर काफी साफ नजर आती है। ​राजस्थान बीजेपी में इन दिनों जो सन्नाटा दिख रहा है, वह असल में 'तूफान से पहले की शांति' है। राजेंद्र राठौड़ और सतीश पूनिया जैसे कद्दावर नेताओं का फिलहाल पदविहीन होना कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। पार्टी आलाकमान इन दोनों चेहरों को किसी जल्दबाजी में नहीं, बल्कि सही समय पर सही जगह फिट करने के 'होल्डिंग पैटर्न' पर रखे हुए है। ​इस पूरी बिसात में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ जून 2026 में आने वाला है, जब राजस्थान से राज्यसभा की तीन सीटें (नीरज डांगी-कांग्रेस, राजेंद्र गहलोत-बीजेपी और रवनीत सिंह बिट्टू-बीजेपी) खाली हो रही हैं। विधानसभा में बीजेपी के पास 115 से ज्यादा विधायकों का मजबूत बहुमत है, जिसके चलते इन तीन में से दो सीटों पर बीजेपी की जीत पूरी तरह सुनिश्चित है। लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा यह भी है कि पार्टी अपनी घेराबंदी इस तरह कर सकती है कि तीसरी सीट पर भी कब्जा कर लिया जाए, जो कोई बड़ी हैरानी की बात नहीं होगी। ​यही वह मौका है जब राजेंद्र राठौड़ की 'दिल्ली रवानगी' को एक औपचारिक मुहर मिल सकती है। राठौड़ का विशाल संसदीय अनुभव और सदन की बारीकियों पर उनकी पकड़ उन्हें राज्यसभा के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार बनाती है। उन्हें राज्यसभा भेजकर पार्टी न केवल उनके कद का सम्मान करेगी, बल्कि दिल्ली में एक प्रखर वक्ता के रूप में उनका उपयोग भी कर पाएगी। इससे राज्य की आंतरिक राजनीति में भी एक संतुलन बना रहेगा। ​दूसरी ओर, सतीश पूनिया का भविष्य भी इसी बड़े बदलाव से जुड़ा है। हालांकि मदन राठौड़ अभी प्रदेशाध्यक्ष के रूप में मुख्यमंत्री के साथ बेहतर तालमेल बिठा रहे हैं, लेकिन पूनिया की संगठनात्मक क्षमता को दिल्ली नजरअंदाज नहीं कर सकती। पार्टी उन्हें राजस्थान के अध्यक्ष की कुर्सी पर दोबारा बैठाने के बजाय राष्ट्रीय महासचिव या किसी बड़े राज्य के प्रभारी जैसी 'नेशनल रोल' वाली भूमिका में देख रही है।  जून 2026 के समीकरणों में अगर पार्टी तीसरी सीट पर भी दांव खेलती है, तो पूनिया के लिए भी उच्च सदन के दरवाजे खुल सकते हैं, जिससे उन्हें एक 'राष्ट्रीय जाट चेहरे' के रूप में स्थापित किया जा सके। ​जमीन पर कार्यकर्ताओं के बीच संदेश साफ है कि बीजेपी अपने इन दोनों दिग्गजों को 'आउट' नहीं कर रही, बल्कि 2029 की बड़ी जंग के लिए तैयार कर रही है। जून 2026 का राज्यसभा चुनाव वह निर्णायक समय होगा जब इन दोनों नेताओं की 'होल्डिंग' खत्म होगी और वे एक नई और बड़ी भूमिका में नजर आएंगे। तब तक की यह खामोशी केवल उस रणनीति का हिस्सा है जिसे बिना किसी शोर-शराबे और बिना किसी 'ट्रेलर' के सीधे नामांकन के साथ दुनिया के सामने लाया जाएगा।

राजस्थान में ED ने ठगी की 15.97 करोड़ रुपए की संपत्ति की कुर्क

जयपुर. बहुचर्चित अपेक्षा समूह चिटफंड घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जयपुर आंचलिक कार्यालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत 15.97 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। कुर्क की गई संपत्तियों में कुल 37 अचल संपत्तियां और 1.50 करोड़ रुपए की एक चल संपत्ति शामिल है। कुर्क की गई 37 अचल संपत्तियां कृषि और आवासीय भूमि के रूप में हैं, जो बूंदी, बारां और कोटा जिलों में स्थित हैं। ये संपत्तियां मुरली मनोहर नामदेव, दुर्गाशंकर मेरोठा, अनिल कुमार, गिरिराज नायक, शोभा रानी सहित अन्य आरोपियों और उनसे जुड़े व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं। इसके अलावा समूह से संबंधित 1.50 करोड़ रुपए के बैंक खाते को भी कुर्क किया गया है। यह कार्रवाई 22 जनवरी को की गई। ये था पूरा मामला यह पूरा मामला वर्ष 2012 से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया कि अपेक्षा समूह ने वर्ष 2012 से 2020 के बीच निवेशकों को असाधारण और अव्यावहारिक लाभ का लालच देकर करीब 194.76 करोड़ रुपए की राशि एकत्र की। समूह का मुख्य संचालन कोटा से किया जा रहा था और इसकी गतिविधियां राजस्थान के कई जिलों तक फैली हुई थीं। पुलिस की ओर से मुरली मनोहर नामदेव और अन्य आरोपियों के खिलाफ विभिन्न थानों में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने इस प्रकरण में जांच शुरू की। ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने आपराधिक और दुर्भावनापूर्ण इरादे से ऐसी योजनाएं तैयार कीं, जिनका उद्देश्य केवल भोले-भाले और आर्थिक रूप से कमजोर निवेशकों को फंसाना था। निवेश पर भारी मुनाफे का कोई वैध आधार या वित्तीय तंत्र मौजूद नहीं था। लाभ देकर पुन: करवाया निवेश जांच में यह भी सामने आया कि शुरुआती वर्षों में निवेशकों को नाममात्र का लाभ देकर भरोसा बनाया गया। यह राशि या तो नए निवेशकों से जुटाए गए पैसों से दी जाती थी या पुराने निवेशकों को मिले लाभ को दोबारा निवेश कराने के लिए प्रेरित किया जाता था। इससे योजनाओं के सफल होने का भ्रम पैदा किया गया, लेकिन वास्तविकता में यह पूरी व्यवस्था अस्थिर थी और इसका विफल होना तय था। कोविड-19 महामारी के दौरान स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई, जब बड़ी संख्या में निवेशकों ने अपनी जमा राशि और लाभ लौटाने की मांग की। उस समय समूह इन मांगों को पूरा करने में असमर्थ रहा और योजनाएं पूरी तरह ध्वस्त हो गईं। इसके बाद निवेशकों ने ठगी की शिकायतें दर्ज करानी शुरू कीं। आरोपी हो चुके है गिरफ्तार पुलिस जांच में अब तक इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्य आरोपी मुरली मनोहर नामदेव को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा संजय कश्यप को हरियाणा से गिरफ्तार किया गया था, जिसके पास से लैपटॉप, बड़ी संख्या में चेक और नकद राशि बरामद हुई। अन्य सहयोगियों दुर्गा शंकर मेरोठा, अनिल कुमार और गिरिराज नायक की भूमिका भी जांच में सामने आई है। कोटा पुलिस ने इस मामले में 50 से अधिक मुकदमे दर्ज किए हैं और अब तक 2300 से ज्यादा पीड़ित सामने आ चुके हैं। मामले की फैक्ट फाइल जांच की शुरुआत : 2019 में, कोटा और बूंदी जिलों में। पहली कार्रवाई : मुरली मनोहर नामदेव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज। मामले का खुलासा : एसआइटी और कोटा पुलिस ने निवेशकों से शिकायत मिलने के बाद शुरू किया। इतने वर्षों तक हुई चालित : 2012 से 2020 तक – मुख्यालय: कोटा प्रभावित जिले: कोटा, बूंदी, बारां कुर्क की गई संपत्तियां: 37 अचल संपत्तियां (कृषि और आवासीय भूमि) चल संपत्ति: समूह का बैंक खाता 1.50 करोड़ रुपए के साथ निवेशकों की संख्या: 2300 से अधिक पीड़ित सामने आए पुलिस और ईडी की कार्रवाई – 12 कंपनियों का रिकॉर्ड रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) जयपुर से प्राप्त 20 बैंक खातों को सीज लैपटॉप और 250 चेक बरामद 50 से अधिक मुकदमे दर्ज जांच जारी : अन्य डायरेक्टर और निवेशकों के बैंक खाते व संपत्ति नेटवर्क की पड़ताल

राज्यपाल बागडे बोले- “एक भारत श्रेष्ठ भारत की आत्मा है कश्मीर”

जयपुर. राज्यपाल हरिभाऊ बागडे से गुरुवार को लोकभवन में भारत दर्शन के अंतर्गत कश्मीर के छात्र प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। राज्यपाल ने इस दौरान प्रतिनिधिमंडल से संवाद करते हुए कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत की आत्मा है कश्मीर। विविधता में एकता लिए भारत की संस्कृति प्रांतों की परम्पराओं, वहां के ऐतिहासिक स्थलों और प्रकृति से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि "भारत दर्शन" का अर्थ ही है, एक भारत श्रेष्ठ भारत से साकार होना। उन्होंने कश्मीर के इतिहास, संस्कृति और वहां की परम्पराओं को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह भारत की आत्मा है। हम सभी मां भारती के लिए सोच रखते हुए कार्य करें। दसवीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल, श्रीनगर के साथ आए इस "भारत दर्शन"  प्रतिनिधिमंडल में कश्मीर के श्रीनगर, पुलवामा, बारामुला, कुपवाड़ा आदि क्षेत्रों के विद्यार्थियों ने राज्यपाल बागडे से यात्रा और भारतीय संस्कृति को लेकर अपने अनुभव भी साझा किए। राज्यपाल ने सभी को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

राजस्थान में आबकारी नीति 2025-29 में बड़े बदलाव की तैयारी

जयपुर. राजस्थान में शराब को लेकर सरकार ने चुपचाप ऐसा फैसला कर दिया है, जो प्रदेश की कानून-व्यवस्था, सामाजिक ताने-बाने और अपराध नियंत्रण की नीति पर सीधा असर डाल सकता है। आबकारी एवं मद्य-संयम नीति 2025–29 में संशोधन करते हुए सरकार ने शराब दुकानों के खुलने और बंद होने का समय तय करने का अधिकार सीधे आबकारी आयुक्त को सौंप दिया गया है। यह बदलाव सोची-समझी रणनीति के तहत देर रात तक शराब बिक्री का रास्ता खोलने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। यह नया प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। आबकारी महकमा लंबे समय से शराब दुकानों का समय रात 8 बजे से बढ़ाकर रात 10 या 11 बजे तक बढ़ाने की पैरवी करता रहा है। अब जब समय निर्धारण का पूरा अधिकार उनके हाथ में है, तो सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार भविष्य में राजनीतिक जवाबदेही से बचते हुए अफसरों के जरिए शराब बिक्री का समय बढ़वाना चाहती है? जबकि पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने बढ़ते अपराध, महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को देखते हुए शराब दुकानों का समय रात 11 बजे से घटाकर रात 8 बजे कर दिया था। तब पुलिस और प्रशासन का तर्क था कि देर रात शराब बिक्री अपराधों को बढ़ावा देती है। अब उसी फैसले को अप्रत्यक्ष रूप से पलटने की जमीन तैयार की जा रही है। कुंभलगढ़-रणकपुर में बार लाइसेंस शुल्क तीन गुना कुंभलगढ़ और रणकपुर जैसे सीमित पर्यटक आवागमन वाले क्षेत्रों में बार लाइसेंस शुल्क तीन गुना बढ़ा दिया गया है। स्थानीय होटल व्यवसायियों का कहना है कि यहां पर्यटन साप्ताहिक और सीजनल है, ऐसे में इतनी अधिक फीस अव्यावहारिक है और इससे व्यवसाय प्रभावित होगा। पार्टी के लिए देना होगा ज्यादा शुल्क नीति में किया गया एक और बदलाव सीधे तौर पर आम परिवारों पर प्रहार माना जा रहा है। विभाग से रजिस्टर्ड स्थानों पर शादी, रिसेप्शन या अन्य सामाजिक आयोजनों में शराब परोसने के लिए लिए जाने वाले एक दिवसीय लाइसेंस की फीस को 12 हजार रुपए से बढ़ाकर 20 हजार रुपए प्रतिदिन कर दिया गया है। वहीं घर पर पार्टी के लिए भी अब लाइसेंस लेने पर ज्यादा शुल्क देना होगी। वार्षिक गारंटी राशि में 12.5 प्रतिशत वृद्धि नीति संशोधन का दूसरा बड़ा फैसला शराब दुकानों के नवीनीकरण से जुड़ा है। वर्ष 2025–26 की वार्षिक गारंटी राशि को 12.5 प्रतिशत बढ़ाकर वर्ष 2026–27 के लिए तय किया गया है। दुकान पूरे वर्ष चली हो या आंशिक अवधि के लिए, हर स्थिति में बढ़ी हुई गारंटी राशि लागू होगी। क्लस्टर सिस्टम में भी यही व्यवस्था रहेगी। सरकार भले ही इसे राजस्व बढ़ाने का कदम बता रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इसका बोझ अंततः आम उपभोक्ता पर पड़ेगा, क्योंकि कारोबारी बढ़ी हुई लागत की भरपाई शराब के दामों से करेंगे। अन्य प्रमुख प्रावधान देशी मदिरा और राजस्थान निर्मित मदिरा की न्यूनतम 3 प्रतिशत आपूर्ति एसेप्टिक ब्रिक पैक में अनिवार्य की गई है, जिसे भविष्य में 5 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकेगा। होटल, रेस्टोरेंट, क्लब बार में सूक्ष्म मदिरा निर्माण इकाई पर पहले दो माह 50 प्रतिशत आबकारी शुल्क में छूट। हेरिटेज व अन्य होटलों के लाइसेंस शुल्क का पुनर्निर्धारण क्षेत्रफल, कमरों की संख्या के आधार पर किया गया। अवसर विशेष लाइसेंस के दुरुपयोग पर लाइसेंस निरस्तीकरण और 50 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

राजस्थान विधानसभा के ऑनर किलिंग सहित 10 विधेयक राज्यपाल ने लौटाए

जयपुर. राज्यपाल ने 10 विधयेकों के कानूनी पहलुओं पर सवाल उठाते हुए उन्हें अलग-अलग कारणों से पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटा दिया है, जिनमें से नौ अशोक गहलोत सरकार के समय विधानसभा से पारित हुए और एक वसुंधरा राजे सरकार के पहले कार्यकाल में 2008 में पारित किया गया था। इसका खुलासा बुधवार को किया गया। विधानसभा में पेश जानकारी के अनुसार, ऑनर किलिंग संबंधी 2019 का विधेयक लौटाते हुए राज्यपाल की ओर से कहा है कि इसमें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 व दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), 1973 का संदर्भ है, जो अब अस्तित्व में नहीं है और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103 में ऑनर किलिंग के अपराध से निपटने के लिए पर्याप्त प्रावधान हैं। इन विधेयक को मिली मंजूरी विधानसभा के प्रमुख सचिव भारत भूषण शर्मा ने बुधवार को सदन में यह भी बताया कि पिछले विधानसभा सत्र में पारित राजस्थान भू-जल (संरक्षण और प्रबंध) प्राधिकरण विधेयक-2024, राजस्थान भू-राजस्व (संशोधन और विधिमान्यकरण) विधेयक-2025, राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण और विनियमन) विधेयक-2025, राजस्थान विनियोग विधेयक-2025, राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2025, राजस्थान माल और सेवा कर (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2025, राजस्थान मत्स्य क्षेत्र (संशोधन) विधेयक, 2025, राजस्थान आयुर्विज्ञान संस्थान, जयपुर विधेयक, 2025 और राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक, 2025 को राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है। सदन को दी दो अध्यादेशों की जानकारी खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने जहां सरकार की ओर से पिछले दिनों लाए गए राजस्थान दुकान और वाणिज्यिक अधिष्ठान (संशोधन) अध्यादेश, 2025 की जानकारी देने के लिए सदन में इसकी प्रति रखी। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने राजस्थान जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अध्यादेश, 2025 को सदन में रखा। उल्लेखनीय है कि इन दोनों अध्यादेशों के स्थान पर इसी सत्र में विधेयक लाए जाएंगे, अन्यथा ये अध्यादेश अस्तित्व खो देंगे। राज्यपाल पहले भी लौटाते रहे हैं विधेयक राज्यपाल पहले भी विधानसभा से पारित विधेयक लौटाते रहे हैं। विधेयकों को राज्यपाल उन परिस्थितियों में लौटा देता है, जब राज्य के विधेयक के प्रावधान केंद्रीय कानूनों के प्रावधानों के विपरीत हों। कानूनों को लेकर स्पष्ट प्रावधान है कि राज्य केवल राज्य सूची के विषयों पर ही कानून ला सकते हैं। समवर्ती सूची में केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, लेकिन केंद्रीय कानून ही प्राथमिकता के साथ मान्य होगा। राज्य का कोई कानून केंद्रीय प्रावधानों को नहीं पलट सकता। वसुंधरा राजे सरकार के समय पारित धर्म स्वातंत्रय विधेयक को तत्कालीन राज्यपाल प्रतिभा पाटिल ने लौटा दिया था। बाद में यह विधेयक नए सिरे से लाया गया, जिसे तत्कालीन राज्यपाल ने राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेज दिया गया और वहां वर्षों तक अटका रहा। गहलोत राज 9 विधेयक, जो लौटे हैं 0- राजस्थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक, 2019 : 5 अगस्त 2019 को पारित 0- राजस्थान सम्मान और परम्परा के नाम पर वैवाहिक संबंधों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक,2019 : 5 अगस्त 2019 को पारित 0- कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) (राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2020 : 2 नवंबर 2020 को पारित 0- कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार (राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2020 : 2 नवंबर 2020 को पारित 0- आवश्यक वस्तु (विशेष उपबंध और राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2020 : 2 नवंबर 2020 को पारित 0- व्यास विद्या पीठ विश्वविद्यालय, जोधपुर विधेयक, 2022 : 4 मार्च 2022 को पारित 0- सौरभ विश्वविद्यालय, हिण्डौन सिटी (करौली) विधेयक, 2022 : 22 मार्च 2022 को पारित 0- राजस्थान विद्युत (शुल्क) विधेयक, 2023 : 2 अगस्त 2023 को पारित 0- नाथद्वारा मंदिर (संशोधन) विधेयक, 2023 : 2 अगस्त 2023 को पारित

किन्नर समाज का बड़ा ऐलान: न्याय की मांग पूरी न हुई तो राजस्थान की सड़कें जाम

जयपुर  राजस्थान की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा हमेशा से आपसी भाईचारे, समरसता और विविधता के सम्मान की रही है। इसी परंपरा की रक्षा के लिए बुधवार को राजधानी जयपुर में सर्व किन्नर समाज ने एकजुट होकर आवाज़ बुलंद की। विवादित और भड़काऊ बयानबाज़ी के खिलाफ सर्व किन्नर समाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न केवल कड़ा विरोध दर्ज कराया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि नफरत और उकसावे की राजनीति का किन्नर समाज से कोई लेना-देना नहीं है। जयपुर में आयोजित इस प्रेस वार्ता में समाज के प्रतिनिधियों ने हाल ही में शिव शंकर सैनी उर्फ़ तनिषा द्वारा दिए गए विवादित बयानों को राजस्थान की गंगा-जमुनी तहज़ीब के खिलाफ बताया। समाज ने कहा कि ऐसे बयान न सिर्फ किन्नर समाज की छवि को धूमिल कर रहे हैं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने का भी प्रयास हैं, जो प्रदेश की शांति व्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सर्व किन्नर समाज ने स्पष्ट आरोप लगाया कि शिव शंकर सैनी उर्फ़ तनिषा कुछ असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार आपत्तिजनक और उकसाऊ बयान दे रहा है। “किन्नर जिहाद” जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर समाज ने तीखी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि पूरे किन्नर समाज को कटघरे में खड़ा करने की साजिश भी है। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि राजस्थान में किन्नर समाज सदियों से सभी धर्मों, जातियों और समुदायों के साथ सौहार्द के साथ रहता आया है। चाहे त्योहार हों, सामाजिक कार्यक्रम हों या आम जनजीवन—किन्नर समाज ने हमेशा प्रेम और आशीर्वाद की परंपरा को आगे बढ़ाया है। ऐसे में किसी एक व्यक्ति के बयान को पूरे समाज से जोड़ना पूरी तरह अनुचित और दुर्भावनापूर्ण है। प्रेस वार्ता में यह भी जानकारी दी गई कि शिव शंकर सैनी उर्फ़ तनिषा ने मार्च 2023 में लिंग परिवर्तन कराया था। इस संबंध में समाज की ओर से दस्तावेज़, प्रमाण पत्र, एफिडेविट और वीडियो साक्ष्य प्रेस के सामने प्रस्तुत किए गए। समाज ने सवाल उठाया कि यदि तनिषा स्वयं को “सनातनी किन्नर” बताता है, तो इसके ठोस और वैध प्रमाण सार्वजनिक किए जाएं, ताकि सच्चाई सामने आ सके। सर्व किन्नर समाज ने यह भी बताया कि “किन्नर जिहाद” प्रकरण को लेकर तनिषा के खिलाफ अब तक प्रदेश के अलग-अलग पांच पुलिस थानों में मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होना चिंता का विषय है। समाज का कहना है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई, तो ऐसे बयान प्रदेश में सामाजिक तनाव को बढ़ावा दे सकते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित समाज के प्रतिनिधियों ने राजस्थान सरकार और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किन्नर समाज किसी भी तरह की सांप्रदायिक राजनीति या उकसावे का हिस्सा नहीं बनेगा और प्रदेश में शांति, सौहार्द और भाईचारे की परंपरा को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। इस प्रेस वार्ता में सर्व किन्नर समाज से नूरी बाई बगरू, गोरीरेखा चांदपोल, काजोल बाई (किन्नर अखाड़ा, कोटा), सिमरन बाई शाहपुरा, राजकुमारी बाई मेड़ता सिटी, प्रीति बाई सांगानेर, अन्नू बाई चोमू, हिना बाई टोंक, सलोनी बाई अजमेर, हिना बाई करौली, पूनम नायक रतलाम, हलीमा झालावाड़ पाटन, मौसम बाई, विजया बाई, चकोरी बाई जयपुर, मंजू बाई सुमेरपुर, फयाज नायक तोड़ी मोड़, नूर शेखावत और रितिका सिंह सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे। प्रेस वार्ता के माध्यम से सर्व किन्नर समाज ने राजस्थान की जनता को यह संदेश दिया कि प्रदेश की असली ताकत उसकी सामाजिक एकता और भाईचारा है, और इसे तोड़ने की किसी भी कोशिश का डटकर विरोध किया जाएगा।

खड़े ट्रेलर में स्लीपर बस घुसने से 4 लोगों की दर्दनाक मौत

भरतपुर. राजस्थान के भरतपुर जिले में आगरा-जयपुर नेशनल हाईवे पर गुरुवार अलसुबह एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हो गया। सेवर थाना क्षेत्र में लुधावई पुलिया के पास कासगंज से जयपुर जा रही एक स्लीपर बस बीच हाईवे पर खड़े ट्रेलर में पीछे से जा घुसी। हादसा इतना भीषण था कि बस के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए। इस दर्दनाक दुर्घटना में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। ट्रेलर खराब था जो बीच हाईवे पर खड़ा था। ट्रेलर चालक ने कोई खराब का संकेत नहीं लगा रखा था। बस चालक को लगा ट्रेलर चल रहा है, इसी के चलते हादसा हुआ। मौके पर भरतपुर जिला कलेक्टर कमर चौधरी एसपी दिगंत आनन्द मौके पर पहुंचे। घायलों को भिजवाया अस्पताल सेवर थाना प्रभारी सतीश शर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। सभी घायलों को तत्काल जिला आरबीएम अस्पताल भिजवाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। वहीं, चारों मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए आरबीएम अस्पताल की मोर्चरी में रखवाए गए हैं। मृतकों के परिजनों को सूचित कर दिया गया है, उनके पहुंचने के बाद पोस्टमार्टम की कार्रवाई कराई जाएगी। मृतकों की हुई पहचान मृतकों की पहचान कान्हा (8 वर्ष) पुत्र रामवीर निवासी सतोवा मथुरा (उत्तर प्रदेश), गीता (38 वर्ष) पत्नी रामवीर निवासी सतोवा मथुरा (उत्तर प्रदेश), मुक्खन सिंह (28 वर्ष) पुत्र खेम सिंह निवासी कठूमर अलवर (राजस्थान) और मुस्लिम (40 वर्ष) पुत्र इस्माइल, निवासी कासगंज (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। रामवीर की पत्नी और बेटे की मौत इस हादसे की सबसे मार्मिक कहानी मथुरा के सतोवा निवासी रामवीर की है. रामवीर अपनी पत्नी गीता और 8 वर्षीय बेटे कान्हा के साथ खाटूश्याम जी के दर्शन के लिए जा रहे थे। रामवीर भगवान की मूर्तियों के लिए कागज की पगड़ियां बनाते हैं और हर महीने माल सप्लाई करने खाटूश्याम जी जाते थे। इस बार वो पत्नी और बेटे को भी साथ लेकर गए थे। हादसे में रामवीर की पत्नी और बेटे की मौत हो गई, जबकि रामवीर खुद गंभीर रूप से घायल हो गए। घने कोहरे के चलते हुए हादसा हादसा गुरुवार तड़के करीब 3 बजे हुआ। घना कोहरा हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है। टक्कर के बाद बस में फंसे यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को बस से बाहर निकाला गया और अस्पताल में भर्ती करवाया गया। फिलहाल, उनका इलाज चल रहा है।