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जयपुर में नई मेट्रो लाइन के लिए जमीन आवंटन को JDA ने दी मंजूरी

जयपुर. जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने जयपुर के लिए अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी है। प्रस्तावों में जयपुर में नई मेट्रो लाइन के लिए जमीन का आवंटन भी शामिल है। जेडीए की भूमि एवं संपत्ति निपटान समिति की बैठक आयोजित हुई। समिति ने जयपुर मेट्रो फेज-1सी के लिए 7700 वर्ग मीटर भूमि के उपयोग को मंजूरी दी। मेट्रो फेज-1सी के अलाइनमेंट के तहत वन विभाग की जमीन का उपयोग किया जाएगा।वन विभाग को बदले में जेडीए की समतुल्य भूमि आमेर तहसील के दौलतपुरा राजस्व गांव में (2.01 हेक्टेयर भूमि) आवंटित की जाएगी। इसके अलावा समिति ने चाकसू गांव में सरकारी प्राथमिक विद्यालय भवन के लिए 2000 वर्ग मीटर भूमि को भी मंजूरी दी है। जयपुर मेट्रो फेज-1सी के बारे में जानें जयपुर मेट्रो परियोजना के चरण 1-सी में मौजूदा 11.97 किलोमीटर लंबी पिंक लाइन (मानसरोवर से बड़ी चौपड़) का विस्तार बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर तक किया जाना है। गहलोत सरकार ने मेट्रो रूट का विस्तार करते हुए बड़ी चौपड़ से रामगंज चौपड़ होते हुए ट्रांसपोर्ट नगर तक का 2.85 किलोमीटर का रूट फाइनल किया था। 21 सितंबर 2023 को तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत ने इसका शिलान्यास किया था। काम भी शुरू हो गया था। 2.85 किमी के रूट में 2.26 किलोमीटर भूमिगत और शेष 0.59 किलोमीटर कॉरिडोर रूट प्रस्तावित है। इसमें रामगंज चौपड़ अंडरग्राउंड स्टेशन और ट्रांसपोर्ट नगर में एलिवेटेड स्टेशन बनना है। जयपुर में मेट्रो कब शुरू हुई जयपुर में पहली बार मेट्रो का संचालन 3 जून 2015 को मानसरोवर से चांदपोल (9.63 किमी) तक शुरू हुआ। 23 सितंबर 2020 को परकोटे में चांदपोल से दायरा बढ़कर छोटी चौपड़ होते हुए बड़ी चौपड़ ( 2.4 किलोमीटर) तक पहुंच गया। 21 सितंबर 2023 को बड़ी चौपड़ से रामगंज चौपड़ होते हुए ट्रांसपोर्ट नगर तक का शिलान्यास हुआ। अप्रेल 2027 तक यह काम पूरा होने का अनुमान है।

ब्यावर में माइनिंग टीम के ड्रोन तोड़कर महिला फोरमैन-इंजीनियर को पीटा

जयपुर/ब्यावर. जिले में माइन धारकों का सर्वे करने पहुंची खान विभाग की टीम को निवर्तमान सरपंच और ग्रामीणों ने घेरकर पीटा। सर्वे शुरू होते ही पूर्व सरपंच ने टीम के सदस्यों के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। वहीं पूर्व सरपंच ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ इंजीनियर और महिला फोरमैन से भी मारपीट की। टीम की गाड़ियों और ड्रोन भी पथराव में टूट गया। मिली सूचना के अनुसार मंगलवार दोपहर में जिले के अतीतमंड गांव में खान विभाग की एक टीम माइन धारकों का सर्वे करने पहुंची थी। मौके पर पूर्व सरपंच दुष्यंत सिंह समेत कुछ ग्रामीणों ने टीम की ओर से शुरू किए सर्वे का विरोध करना शुरू कर दिया। विभाग की टीम ने समझाइश भी की लेकिन पूर्व सरपंच ने सर्वे का विरोध करते हुए ग्रामीणों की मिलीभगत से सर्वे टीम को घेर लिय और मारपीट शुरू कर दी। सर्वे टीम की गाड़ियों पर पथराव सर्वे टीम जब घटनास्थल से बचकर कार से भागने लगी तो ग्रामीणों ने कार पर पथराव कर दिया। जोधपुर से गए इंजीनियर की गाड़ी भी टूट गई। घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हुआ है। वीडियो में पूर्व सरपंच और माइनिंग टीम के साथ झगड़ते और गालीगलौच करते हुए नजर आ रहे हैं। माइन धारकों का ड्रोन सर्वे करने पहुंची थी टीम सूचना मिलने पर साकेत नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात काबू में किए। थाना प्रभारी जितेंद्र फौजदार ने बताया- माइनिंग विभाग की टीम अतीतमंड गांव में माइन धारकों का ड्रोन सर्वे करने पहुंची थी। सर्वे शुरू होते ही निवर्तमान सरपंच दुष्यंत सिंह सहित कुछ लोगों ने गाली-गलौज और बदतमीजी शुरू कर दी। वरिष्ठ माइनिंग फोरमैन अनिता वीर चंदानी और इंजीनियर प्रितेश के साथ मारपीट की। प्रितेश के कान और कनपटी पर गंभीर चोटें आई हैं। पथराव कर दो वाहनों को किया क्षतिग्रस्त थानाधिकारी ने बताया कि हमलावरों ने पथराव कर सरकारी वाहन और जोधपुर से आए इंजीनियर प्रितेश की कार भी क्षतिग्रस्त कर दिया। पथराव शुरू होते ही टीम कार में बैठकर किसी तरह जान बचाकर भागी। पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले ही सभी हमलावर फरार हो चुके थे। पुलिस ने दोनों घायलों का मेडिकल परीक्षण कराया और मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ड्रोन सर्वे का कर रहे थे विरोध पुलिस की जांच में सामने आया है कि अवैध खनन से जुड़े लोग ड्रोन सर्वे नहीं होने देना चाहते थे। इसी कारण ग्रामीणों को उकसाकर इस वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस आसपास के ग्रामीणों से पूछताछ कर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। पुलिस ने निवर्तमान सरपंच को किया डिटेन पुलिस ने मारपीट के आरोपी निवर्तमान सरपंच दुष्यंत सिंह डिटेन किया है। इसके साथ ही अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस निगरानी बढ़ा दी गई है।

न‍िर्दलीय व‍िधायक ऋतु की ‘सीबीआई जांच’ वाली स्लोगन साड़ी बनी आकर्षण

जयपुर. राजस्‍थान व‍िधानसभा बजट सत्र आज से शुरू हो गया है। बयाना से निर्दलीय व‍िधायक ऋतु बनावत भी बजट सत्र में हिस्सा लेने के लिए व‍िधानसभा पहुंचीं। तो हर कोई उनको देखकर चौंक रहा था। ऋतु बनावत की साड़ी आकर्षण का केंद्र बन गई। हर कोई उस साड़ी की चर्चा करने लगा। जब लोगों ने साड़ी को ध्यान से देखा तो उन पर सरकार के खिलाफ कई रोचक लाइनें लिखी हुईं थी। एक लाइन थी कि विधायक निधि मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। राजस्‍थान व‍िधानसभा बजट सत्र में पहुंची बयाना से निर्दलीय व‍िधायक ऋतु बनावत ने कहा, भ्रष्टाचार का मुझ पर जो आरोप लगा, उसकी जांच सीबीआई से कराई जाए। अगर सीबीआई से जांच नहीं कराई जाती है तो हाईकोर्ट के सिटिंग जज इस प्रकरण की जांच करें। ऋतु बनावत पर व‍िधायक न‍िधि में भ्रष्‍टाचार के आरोप लगे हैं। सीबीआई जांच के बाद होगा इस मामले का सही खुलासा ऋतु बनावत ने कहा, जब सीबीआई से जांच होगी, तब ही इस मामले का सही खुलासा हो सकेगा। नहीं तो ब्लैकमेलिंग का यह खेल चलता रहेगा। मैं इस मामले को जनता के समक्ष रखना चाहती हूं। जनता भी जानती है कि किस तरह का खेल उनके जनप्रतिनिधियों के साथ किया जा रहा है। आज इसीलिए मैं यह कपड़े पहन कर आई हूं। जब तक मुझे न्याय नहीं मिलेगा, मैं यह मामला उठाती रहूंगी। मेरी छवि धूमिल करने का प्रयास ऋतु बनावत ने आगे कहा, मामले में कहीं कोई एग्रीमेंट साइन नहीं हुआ न कोई लेटर, न कोई पैसा दिया गया, लेकिन कुछ लोग लगातार मेरी छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं। 6 माह से पीछे लगा था ऋतु बनावत ने कहा, जो व्यक्ति मिलने आया था, उसने खुद कहा कि वह तो 6 माह से पीछे लगा था, जब वह मेरे पास आया और उसने वीडियो रिकॉर्डिंग की बात कही तो मैं यह जानना चाहती हूं कि वह कितने लोगों के पास गया? कितने लोगों की रिकॉर्डिंग थी और उस रिकॉर्डिंग में क्या था?

गूगल ने फ्रांसीसी दंपति को पाली के गाँव पहुंचाकर पूरी की ख्वाहिश

पाली. निवासी गिरार्ड और उनकी पत्नी शोलेज साल 1995 में राजस्थान के पाली जिले के सोड़ावास गांव में गए थे। सोड़ावास गांव की यादें वो दम्पति कभी भूला नहीं सके। उनका मन एक बार फिर सोड़ावास गांव आने को कर रहा था। पर अब वह उसका रास्ता व पता दोनों भूल गए थे। इस मौके पर गूगल ने उनकी मदद की। गिरार्ड की बेटी ने अपने पिता की इच्छा को पूरा करने का बीड़ा उठाया। उनकी बेटी ने गूगल की मदद से गांव को ढूंढ निकाला। बेटी पहले वर्ष 2025 में अपने पति के साथ राजस्थान के पाली जिले के सोड़ावास गांव आई। पता मिलने के बाद गिरार्ड को 4700 किमी दूर बसे इस सोड़ावास गांव की यादें बुलाने लगी। 15 जनवरी को गिरार्ड और उनकी पत्नी शोलेज सोड़ावास गांव आए, जहां एक बार फिर वो अपने गुजरे पलों को फिर से जी सके। गिरार्ड दंपति 30 वर्ष बाद दोबारा सोड़ावास पहुंचे। तो गांव की बदली तस्वीर देखकर वे चौंक गए। अब गांव में कच्चे घर की जगह पक्की इमारते और आधुनिक सुविधाएं थी। हालांकि समय के साथ विकास हुआ था, लेकिन गांव की संस्कृति और लोगों का अपनापन आज भी वैसा ही था जैसा 30 साल पहले, जिसने दंपति को भावुक कर दिया। चाय के लिए अपने घर आने का ग्रामीण ने दिया न्योता कहानी कुछ ऐसे शुरू हुई। साल 1995 में फ्रांस निवासी गिरार्ड और उनकी पत्नी शोलेज अपने तीन बच्चों के साथ भारत घूमने आए थे। उन्होंने एक रिक्शा खरीदी। पूरा परिवार इसी रिक्शे से राजस्थान भ्रमण करने लगा। रणकपुर दर्शन के बाद पाली लौटते समय उनका सफर सोड़ावास गांव से होकर गुजरा, जहां भोपाल सिंह नामक ग्रामीण ने उन सब को चाय के लिए अपने घर आने का न्योता दिया। अपना रिक्शा गांव को कर दिया गिफ्ट इस आग्रह को दंपति टाल नहीं सके और गांव पहुंचे। जहां ग्रामीणों ने उनका जमकर स्वागत किया। पूरा परिवार एक महीने तक सोड़ावास गांव में रुका। उन्होंने इस दौरान गांव की संस्कृति, परम्पराएं, खान-पान और जीवनशैली को बहुत करीब से देखा। जब जाने का वक्त आया तो उन्होंने अपना रिक्शा गांव को ही गिफ्ट कर दिया। उनके दिल में बसता है भारत-गिरार्ड मौजूदा वक्त में गिरार्ड 85 वर्ष तो उनकी पत्नी शोलेज 73 वर्ष की हैं। गिरार्ड कहते हैं कि भारत उनके दिल में बसता है। यहां की संस्कृति में सच्चा अपनापन झलकता है। गांव का शांत वातावरण मानसिक सुकून देता है। अब उनकी इच्छा है कि जीवन की शेष सांसें भी भारत में ही लें। गिरार्ड ने फ्रांस में बनवाया मंदिर सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि गिरार्ड ने सोड़ावास के मंदिर और लोगों की धार्मिक आस्था से प्रेरित होकर फ्रांस में एक मंदिर बनवाया है, जहां वे प्रतिदिन पूजा करते हैं। गिरार्ड पेशे से आर्टिस्ट हैं।

फिर करवट लेगा मौसम: जयपुर समेत 10 जिलों पर ऑरेंज अलर्ट, 12 जिलों में यलो चेतावनी

जयपुर राजस्थान में मौसम फिर करवट लेने वाला है। मौसम विभाग ने जयपुर समेत 10 जिलों में आज से तीन दिन तक कड़ाके की सर्दी के साथ बारिश और आंधी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, 12 जिलों के लिए यलो अलर्ट घोषित किया गया है। मंगलवार सुबह जयपुर के कई इलाकों में बूंदाबांदी देखने को मिली। मौसम विभाग के मुताबिक, आंधी-बारिश का यह दौर थमने के बाद अगले दो दिन घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। इसके बाद 31 जनवरी से 1 फरवरी के बीच एक नया वेदर सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिससे फिर बारिश हो सकती है। बादलों से गिरा तापमान सोमवार शाम से जयपुर और आसपास के जिलों में घने बादल छाए रहे। मंगलवार सुबह धूलभरी हवा और हल्की बारिश के चलते मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिला। मावठ की संभावना बढ़ने से महीने के आखिरी दिनों में तेज सर्दी लौटने की आशंका है, जिससे किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। सोमवार को बीकानेर, जयपुर और भरतपुर संभाग के कई जिलों में दोपहर बाद बादल छाए रहे। इससे ठंडी हवाएं कमजोर पड़ीं और लोगों को कड़ाके की सर्दी से कुछ राहत मिली। इस दौरान अधिकतम तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान 27.5 डिग्री सेल्सियस पाली में रिकॉर्ड किया गया। 28-29 जनवरी को कोहरा, 31 से फिर बारिश संभव मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार, 28 और 29 जनवरी को कई जिलों में घना कोहरा छा सकता है और ठंडी हवाएं चलने की संभावना है। वहीं, 31 जनवरी से एक नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय होगा, जिसके असर से 31 जनवरी और 1 फरवरी को प्रदेश के कुछ हिस्सों में बादल छाने और हल्की बारिश होने के आसार हैं। प्रदेश के प्रमुख शहरों का तापमान (26 जनवरी): अजमेर में अधिकतम तापमान 21.7 और न्यूनतम 6.4 रहा। भीलवाड़ा में अधिकतम 21.8 और न्यूनतम 7.5, जबकि अलवर में अधिकतम 21 और न्यूनतम 2.2 दर्ज किया गया। जयपुर का तापमान 20.6 और 6.7 रहा। पिलानी में अधिकतम 20 और न्यूनतम 3, सीकर में अधिकतम 21 और न्यूनतम 0.5, तथा कोटा में अधिकतम 21.5 और न्यूनतम 10.4 रहा। चित्तौड़गढ़ में पारा 25.6 और 9.4 के बीच रहा, उदयपुर में 23.7 और 8.9, बाड़मेर में 24.6 और 9.3, जबकि जैसलमेर में अधिकतम 19.5 और न्यूनतम 7 रहा। जोधपुर में तापमान 25.8 और 9.2, बीकानेर में 21.1 और 5, चूरू में 21.4 और 2.7, तथा गंगानगर में 20.1 और 6.5 दर्ज किया गया। नागौर में अधिकतम 22.1 और न्यूनतम 1.1, बारां में 22 और 8.5, जालौर में 26.2 और 8.7, सिरोही में 21.5 और 5, तथा फतेहपुर में अधिकतम 22.4 और न्यूनतम सबसे कम 0.1 रहा। करौली में तापमान 20.4 और 2.5, दौसा में 22.1 और 1.4, प्रतापगढ़ में 25.8 और 11.9, झुंझुनूं में 20.7 और 3.2, तथा पाली में अधिकतम तापमान सबसे ज्यादा 27.5 और न्यूनतम 3.6 रहा।

भयानक हादसा: एक्सप्रेसवे पर ट्रक ने 4 KM तक घसीटी कार, चार जिंदगियां खत्म

दौसा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ है। उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन कर नोएडा लौट रहे पांच दोस्तों की कार एक अज्ञात वाहन (संभवतः ट्रक) से टकरा गई। यह टक्कर इतनी भीषण थी कि कार में सवार 4 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टक्कर के बाद ट्रक कार को कई किलोमीटर तक सड़क पर घसीटता हुआ ले गया। दर्शन कर लौटते समय काल बन गई रफ्तार पुलिस के अनुसार हादसा एक्सप्रेसवे के चेनेज नंबर 194 (पापड़दा और नांगल राजावतान थाना क्षेत्र) के पास हुआ। कार (हरियाणा नंबर) में सवार सभी पांच लोग नोएडा के रहने वाले बताए जा रहे हैं। वे उज्जैन से दर्शन कर वापस अपने घर लौट रहे थे। तेज रफ्तार कार आगे चल रहे किसी अज्ञात भारी वाहन में पीछे से जा घुसी। टक्कर के बाद कार बुरी तरह पिचक गई और लोहे का गोला बन गई। इस हादसे में एकमात्र जीवित बचे युवक ने अस्पताल में पुलिस को जो बताया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। घायल युवक के मुताबिक टक्कर के बाद भी ट्रक चालक ने गाड़ी नहीं रोकी। वह कार को अपने साथ फंसाकर कई किलोमीटर तक तेज रफ्तार में घसीटता रहा। इसी दौरान कार के परखच्चे उड़ गए और अंदर सवार 4 लोगों की जान चली गई। पुलिस की कार्रवाई घटना की जानकारी मिलते ही पापड़दा और नांगल राजावतान पुलिस मौके पर पहुंची। कार में फंसे लोगों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। घायल युवक को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। मृतकों की अभी आधिकारिक पहचान नहीं हो पाई है लेकिन उनके पास मिले दस्तावेजों के आधार पर परिजनों को सूचित किया जा रहा है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवाया गया है।

जयपुर में राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026 का भव्यता पूर्ण आयोजन

जयपुर (राजस्थान)। देशभर में सामाजिक सेवा और उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित करने वाला प्रतिष्ठित  “राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026 (Rashtriya Gaurav Puraskar 2026)”  का आयोजन 26 जनवरी को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC), जयपुर में भव्य एवं गरिमामय रूप में आयोजित किया गया। इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मान समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से चयनित उन विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने शिक्षा, सामाजिक सेवा, स्वास्थ्य, प्रशासन, कला, संस्कृति, नवाचार और राष्ट्र निर्माण व मीडिया के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। आयोजक संस्था YSS India के अध्यक्ष श्री कमल चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार का उद्देश्य उन कर्मठ नागरिकों को सम्मान देना है, जो अपने कार्यों से समाज और देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हैं। यह मंच केवल सम्मान का नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच, सेवा और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सशक्त करने का माध्यम है। Yss के मीडिया प्रभारी जर्नलिस्ट डा. अखिल बंसल के अनुसार कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों में जस्टिस एन. के. जैन, आईपीएस अनिल जैन, ग्रुप कैप्टन रि.आर. सी. त्रिपाठी, रि. कैप्टन सुखराम यादव, सी. आई. हरेन्द्र सिंह राज. पुलिस, लै. क. शीतलकृष्ण गायकवाड, रि. आर्मी आफीसर सी. के. सक्सेना, रि. आ. आ. मुकेशकुमार, रि. आ. आ. बलवीर सिंह की उपस्थिति में राष्ट्रीय ध्वज सम्मान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, मीडिया कवरेज और भव्य मंच व्यवस्था की गई । सम्मानित प्रतिभागियों को सम्मान पत्र, ट्रॉफी, राष्ट्रीय पदक एवं आधिकारिक पहचान पत्र सम्माननीय अतिथियों द्वारा प्रदान किए गये। पिछले वर्षों की सफलता के बाद इस वर्ष कार्यक्रम का स्वरूप और भी व्यापक एवं प्रभावशाली बनाया गया जिससे राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक और रचनात्मक कार्यों को नई पहचान मिल सके। राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026 का आयोजन गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभक्ति, एकता और सामाजिक चेतना के संदेश को और अधिक मजबूत करेगा। अगला समारोह इसी भव्यता के साथ 15 अगस्त-26 को दिल्ली में आयोजित होगा।      राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार प्राप्त करने वालों में अथाई मीडिया इंटरनेशनल के डा. अखिल बंसल-जयपुर,सुरेन्द्र पाण्डया-जयपुर,शैलेन्द्र जैन-अलीगढ, डा. राजीव जैन-आगरा, डा. राजीव प्रचण्डिया-अलीगढ, सुरेन्द्र मिश्रा-भोपाल, अजित बंसल-जयपुर, पारस जैन 'पार्श्वमणि'- कोटा, मयंक जैन-अलीगढ, डा. रीना सिन्हा-मुम्बई तथा डा. मीना जैन-उदयपुर प्रमुख थीं।

रोपवे, पहाड़ियां और भक्ति का संगम: जयपुर का वैष्णो देवी मंदिर क्यों बन रहा है धार्मिक पर्यटन की पहचान

जयपुर राजस्थान की राजधानी जयपुर सिर्फ ऐतिहासिक किलों और महलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहर धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में भी तेजी से अपनी अलग पहचान बना रहा है। जयपुर के पूर्वी हिस्से में अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित वैष्णो देवी माता मंदिर आज न केवल आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि आसपास मौजूद खोले के हनुमान मंदिर और आधुनिक रोपवे सुविधा के चलते यह पूरा क्षेत्र एक समग्र धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है। पहाड़ियों में बसा वैष्णो देवी माता मंदिर जयपुर का वैष्णो देवी माता मंदिर जम्मू स्थित माता वैष्णो देवी धाम से प्रेरित माना जाता है। पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचते ही श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। यहां माता वैष्णो देवी के साथ-साथ अन्य देवी-देवताओं की गुफा रूपी प्रतिमाएं स्थापित हैं, जो श्रद्धालुओं को उत्तर भारत के प्रमुख तीर्थों की अनुभूति कराती हैं। नवरात्र, नववर्ष और विशेष धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। जयपुर के प्रसिद्ध खोले के हनुमान जी मंदिर परिसर में पहाड़ी की चोटी पर स्थित प्राचीन माता वैष्णो देवी मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी अपनी मनोकामनाएं लिए माता के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। रोपवे: श्रद्धा और सुविधा का आधुनिक संगम इस धार्मिक क्षेत्र की सबसे बड़ी खासियत है यहां संचालित रोपवे सेवा, जिसने पर्यटन के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। रोपवे के जरिए श्रद्धालु और पर्यटक कम समय में पहाड़ी तक पहुंच सकते हैं। जैसे-जैसे रोपवे ऊपर चढ़ता है, अरावली की हरियाली, घाटियां और जयपुर शहर का विहंगम दृश्य मन को मोह लेता है। यह सुविधा बुजुर्गों, बच्चों और दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों के लिए विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र बन गई है। यही कारण है कि रोपवे ने इस पूरे क्षेत्र को पारंपरिक तीर्थ से आगे बढ़ाकर एक आधुनिक पर्यटन स्थल का रूप दे दिया है। 45 मिनट की जगह 5 मिनट का समय श्री नरवर आश्रम सेवा समिति खोल के हनुमान जी प्रन्यास के महामंत्री बृजमोहन शर्मा के मुताबिक खोल के हनुमान जी मंदिर परिसर स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर में नवरात्रों के दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। रोपवे की शुरुआत होने से भक्तों और पर्यटकों को काफी सुविधा मिल रही है. श्रद्धालु सैकड़ों सीढ़ियां चढ़कर खोले के हनुमान जी मंदिर की पहाड़ियों पर बने माता वैष्णो देवी मंदिर के दर्शन करते हैं. सीढ़ियों से करीब 45 मिनट का समय लगता है, लेकिन अब रोपवे के जरिए केवल 5 मिनट में माता वैष्णो देवी मंदिर पहुंच सकते हैं। खोले के हनुमान: आस्था का प्राचीन केंद्र वैष्णो देवी माता मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित खोले के हनुमान मंदिर जयपुर के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक है। मान्यता है कि यहां स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी। हर मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु खोले के हनुमान के दर्शन के बाद वैष्णो देवी माता मंदिर तक की यात्रा करते हैं, जिससे यह पूरा इलाका एक धार्मिक परिक्रमा मार्ग जैसा अनुभव देता है। पर्यटन की नजर से बढ़ता आकर्षण बीते कुछ वर्षों में यह क्षेत्र केवल स्थानीय श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं रहा। देश के अन्य राज्यों और विदेशी पर्यटक भी अब जयपुर के इस धार्मिक सर्किट को अपनी यात्रा सूची में शामिल कर रहे हैं। मंदिर परिसर, पहाड़ी वातावरण, रोपवे की रोमांचक यात्रा और आसपास की प्राकृतिक सुंदरता इसे एक स्पिरिचुअल टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित कर रही है। सुबह की आरती से लेकर शाम की आराधना तक, यहां का माहौल पर्यटकों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है। जयपुर के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान खोले के हनुमान, वैष्णो देवी माता मंदिर और रोपवे—तीनों मिलकर जयपुर को एक नया धार्मिक पर्यटन चेहरा दे रहे हैं। आमेर किला, सिटी पैलेस और हवा महल देखने आने वाले पर्यटक अब इस क्षेत्र को भी अपनी यात्रा में शामिल कर रहे हैं। इससे न सिर्फ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि स्थानीय रोजगार और आसपास के इलाकों के विकास को भी गति मिल रही है। कुल मिलाकर, जयपुर का वैष्णो देवी माता मंदिर और खोले के हनुमान क्षेत्र आज आस्था, प्रकृति और आधुनिक सुविधाओं का ऐसा संगम बन चुका है, जो श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी बार-बार यहां आने के लिए प्रेरित करता है।

खेजड़ी संरक्षण की लड़ाई तेज हुई, बीकानेर में 2 फरवरी को होगा महापड़ाव

जोधपुर राजस्थान में खेजड़ी सहित अन्य हरे वृक्षों के संरक्षण को लेकर चल रहा ‘खेजड़ी बचाओ अभियान’ अब तेज़ी से जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। जोधपुर संभाग समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया गया है। मुकाम में आयोजित महापंचायत के निर्णय के अनुसार आगामी 2 फरवरी 2026 को बीकानेर जिला मुख्यालय पर विशाल महापड़ाव एवं आंदोलन आयोजित किया जाएगा।  अभियान के तहत साधु-संतों के सानिध्य में बाड़मेर, सांचौर, जालौर और जोधपुर सहित कई क्षेत्रों में व्यापक जनसंपर्क किया गया। पर्यावरण प्रेमियों, ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों से संवाद कर उन्हें आंदोलन से जोड़ा गया। इस दौरान खेजड़ी वृक्ष के पर्यावरणीय, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को लेकर लोगों में गहरी चिंता और जागरूकता देखने को मिली। बिश्नोई समाज के साथ-साथ अन्य पर्यावरण प्रेमी भी इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आए। मीडिया से बातचीत में आंदोलन संयोजक परसराम बिश्नोई ने सरकार को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों की ताकत को कमतर नहीं आंका जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि खेजड़ी और अन्य हरे वृक्षों की कटाई रोकने के लिए सख्त और प्रभावी कानून नहीं बनाए गए, तो आंदोलन और अधिक उग्र होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। परसराम बिश्नोई ने दो टूक कहा कि हरे पेड़ों की कटाई किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने खेजड़ी की रक्षा के लिए मां अमृता देवी के नेतृत्व में दिए गए 363 बलिदानों का स्मरण करते हुए कहा कि यह परंपरा आज भी समाज को संघर्ष और बलिदान की प्रेरणा देती है। अभियान के तहत बाड़मेर, सांचौर, भीनमाल और जोधपुर के कई गांवों में जनसंपर्क किया गया है। साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं से चर्चा कर आंदोलन को कानूनी मजबूती देने की रणनीति भी तैयार की गई है। आने वाले दिनों में यह अभियान फलोदी, नागौर, बीकानेर के साथ-साथ हरियाणा और पंजाब तक विस्तारित किया जाएगा। खेजड़ी बचाओ अभियान अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई बनता जा रहा है।  

इतिहास से रहस्य तक: तात्या टोपे ने जहां काटे 45 दिन, वही रकमगढ़ किला बना भूतिया कहानियों का केंद्र

जयपुर इतिहास से जुड़ा रकमगढ़ किला राजस्थान के राजसमंद जिले से करीब 10 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित रकमगढ़ किला एक छोटी पहाड़ी पर बना ऐतिहासिक किला है। यह किला आज खेड़ाना पंचायत क्षेत्र में आता है और इसका इतिहास एशिया की प्राचीनतम मीठे पानी की कृत्रिम झीलों में शामिल राजसमंद झील से भी जुड़ा हुआ है। आकार में भले ही यह किला छोटा हो, लेकिन इसका ऐतिहासिक महत्व बेहद बड़ा माना जाता है। आज़ादी की लड़ाई में रकमगढ़ की भूमिका जानकारी के अनुसार, इस किले का निर्माण कोठारिया रियासत के तत्कालीन राव साहब ने करवाया था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह किला उस समय चर्चा में आया, जब महान क्रांतिकारी तात्या टोपे ने यहां लगभग 45 दिनों तक अंग्रेजों से बचकर शरण ली थी। जैसे ही अंग्रेजों को इसकी भनक लगी, उन्होंने रकमगढ़ किले पर हमला कर दिया। उस समय तात्या टोपे ने कोठारिया राव जी से सहायता की गुहार लगाई, जिसके बाद कोठारिया किला और रकमगढ़ के बीच तोपों से जबरदस्त गोलाबारी हुई। आज भी किले की दीवारों पर उस संघर्ष के निशान देखे जा सकते हैं। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का आगमन कहते हैं कि जब झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को तात्या टोपे पर हुए हमले की जानकारी मिली, तो वह स्वयं उनकी सहायता के लिए रकमगढ़ किले तक पहुंचीं। अंग्रेजों को पीछे हटाने के बाद तात्या टोपे ने यह स्थान छोड़ दिया, लेकिन तब से यह किला उनकी वीरता, साहस और बलिदान की मूक गवाही देता हुआ आज भी खड़ा है। किले से जुड़ी रहस्यमय कथाएं इतिहास के साथ-साथ रकमगढ़ किला अपनी रहस्यमय कहानियों के लिए भी जाना जाता है। आबादी से दूर पहाड़ी पर स्थित होने के कारण आसपास के गांवों में यहां भूत-प्रेत होने की चर्चाएं लंबे समय से चलती आ रही हैं। ग्रामीणों का मानना है कि तात्या टोपे और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अपना सुरक्षित खजाना इसी किले की जमीन में दबाया था। इसी विश्वास के चलते कई लोगों ने वर्षों पहले किले के भीतर 5 से 10 फीट तक गहरे गड्ढे खोद डाले। काले सांप की लोककथा स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, किले के पास दो लोक देवताओं के मंदिर हैं और कहा जाता है कि एक बहुत बड़ा काला सांप उस खजाने की रखवाली करता है। मान्यता है कि उस सांप के सिर पर धार्मिक निशान मौजूद हैं। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जिन्हें सपने में माताजी के दर्शन होते हैं, वे किले से धन निकाल सकते हैं और उस सांप से उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचता। हालांकि, बीते समय में सांप के काटने से कुछ लोगों की मौत की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, जिससे इन कहानियों को और बल मिला। खंडहर में बदलती ऐतिहासिक धरोहर आज यह किला कोठारिया राजपरिवार की निजी संपत्ति माना जाता है। निजी स्वामित्व और वारिसों के कारण, पुरातत्व विभाग के अधीन होने के बावजूद इसकी देखरेख पर अब तक विशेष ध्यान नहीं दिया गया है। संरक्षण के अभाव में यह किला धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है, लेकिन इसकी जर्जर दीवारें आज भी स्वतंत्रता संग्राम, वीरता और इतिहास की अनकही कहानियां बयां करती हैं। रकमगढ़ किला केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि आज़ादी की लड़ाई, वीरता और लोककथाओं का जीवंत प्रतीक है। जहां एक ओर यह तात्या टोपे और झांसी की रानी के शौर्य की याद दिलाता है, वहीं दूसरी ओर रहस्य और किंवदंतियों के कारण लोगों के लिए कौतूहल का केंद्र बना हुआ है।