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30 से ज्यादा नाम सामने आए, फिर भी कार्रवाई सीमित; धान घोटाले में कई आरोपी अब भी फरार

यमुनानगर 70 करोड़ रुपये के धान घोटाले के खुलासे के बाद 237 दिन बीत चुके हैं, पर जांच अभी भी धीमी गति से चल रही है। पांच थाना प्रभारियों की एसआइटी गठित होने के बावजूद कार्रवाई तीन आरोपितों की गिरफ्तारी तक सीमित है। जांच के दौरान 30 से ज्यादा अधिकारी, कर्मचारी व अन्य लोगों के नाम सामने आ चुके हैं, पर अभी भी कई आरोपित पकड़ से बाहर हैं। घोटाले के मुख्य आरोपित छछरौली निवासी राइस मिलर संदीप सिंगला को फिलहाल जमानत नहीं मिली है। मामले की सुनवाई 27 जुलाई को होगी। गिरफ्तारी नहीं होने से जांच टीम पर भी सवाल उठने लगे हैं। संदीप सिंगला को दो दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था। उसे तीन चरणों में 18 दिन तक एसआइटी ने रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। पूछताछ में सामने आया था कि उसके नियंत्रण में सात राइस मिलें हैं, जिनमें पांच पुरानी व दो नई हैं। पुलिस ने संदीप सिंगला व रीतिका सिंगला के खिलाफ तीन थानों में केस दर्ज किए थे। पावर आफ अटार्नी संदीप के नाम होने के कारण रितिका को राहत मिल गई थी। पूछताछ में 30 से ज्यादा अधिकारी व कर्मचारियों के नाम सामने आए थे। जांच प्रभावित न हो। इसलिए पुलिस ने नाम सार्वजनिक नहीं किए। नाम होने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं हो पा रही है। महानिदेशक की जांच में घोटाले का खुलासा जांच में सामने आई गड़बड़ियों के बाद मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण, मंडी गेट पास, मिल आवंटन, स्टाक सत्यापन व सरकारी रिकार्ड की जांच की थी। आरोप है कि नियमों के विपरीत कम धान की खरीद दिखाकर स्टाक में हेराफेरी की गई और सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। 13 नवंबर को खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक एवं उपभोक्ता मामले विभाग के महानिदेशक अंशज सिंह की जांच में घोटाले का खुलासा हुआ था। जांच में धान के स्टाक और रिकार्ड में भारी अनियमितताएं सामने आने के बाद विशेष जांच दल का गठन किया गया था। इसमें पांच थाना प्रभारी शामिल किए गए थे, पर इसके बाद भी जांच की रफ्तार तेज नहीं हो सकी। मामले में अब तक तीन गिरफ्तारियां जांच में फर्जी गेट पास व दस्तावेजों के माध्यम से स्टाक में हेराफेरी कर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने की बात सामने आई थी। जांच के दौरान 30 से अधिक अधिकारी और कर्मचारियों के नाम सामने आए थे, लेकिन पुलिस ने इनके नाम सार्वजनिक नहीं किए। अब तक मामले में तीन ही गिरफ्तारियां हुई हैं। संदीप सिंगला के अलावा एसआइटी द्वारा हैफेड के सीनियर मैनेजर शैलेंद्र कुमार व परचेज मैनेजर अनिल कुमार को गिरफ्तार किया था। बर्खास्तगी के आगे नहीं बढ़ा जांच दायरा प्रशासनिक स्तर पर इंस्पेक्टर मनोज यादव, सविता, विनोद कुमार व एएफएसओ देवेंद्र कुमार को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। बावजूद इसके जांच अभी उन्हीं बिंदुओं तक सीमित है। कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं। प्रतापनगर में एक ही परिसर में चार लाइसेंस जारी होने के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि नियमानुसार एक स्थान पर एक लाइसेंस दिया जा सकता है, जबकि वहां एक से अधिक लाइसेंस संचालित पाए गए। अदालत ने हैफेड व खाद्य आपूर्ति विभाग को तीन माह में एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए थे, पर समय सीमा बीत चुकी है। कोर्ट ने कहा था कि जिम्मेदारी तय किए बिना केवल औपचारिक रिपोर्ट पर्याप्त नहीं होगी। रणजीतपुर में एक ही स्थान पर दो राइस मिल चल रही थी। हैफेड व खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से मिल में धान भेजा गया था। घोटाले के बाद बचे धान पर दोनों विभागों ने अपना दावा किया था। बाद में कोर्ट के आदेश पर दोनों विभागों को 50-50 प्रतिशत धान उठाने की अनुमति दी थी। हैफेड ने अपना हिस्सा उठा लिया, पर डीएफएससी की ओर से धान उठाने में देरी की। जिस कारण काफी धान खराब भी हुआ। वहीं जगाधरी डीएसपी राजीव मिगलानी का कहना है कि इस मामले में जांच जारी है, इसमें अभी कुछ नया सामने नहीं आया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई निश्चित तौर पर होगी।

हाईकोर्ट ने खारिज की HCS परीक्षा परिणाम चुनौती, कहा- HPSC की चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी

चंडीगढ़. हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) प्रारंभिक परीक्षा-2026 की उत्तर कुंजी और परिणाम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अदालतें शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों में विशेषज्ञों की राय का स्थान नहीं ले सकतीं। जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा कि जब तक उत्तर कुंजी में त्रुटि प्रत्यक्ष, स्पष्ट और संदेह से परे साबित न हो, तब तक न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी प्रश्न के उत्तर को लेकर यदि संदेह या अस्पष्टता हो तो उसका लाभ परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था को दिया जाना चाहिए, न कि अभ्यर्थी को। हाईकोर्ट एचसीएस (कार्यकारी शाखा) एवं संबद्ध सेवाओं की भर्ती प्रक्रिया से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। याचिकाकर्ताओं ने 26 अप्रैल को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम और अंतिम उत्तर कुंजी को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने क्या पाया? उनका कहना था कि सामान्य अध्ययन और सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट (सीसैट) के कई प्रश्नों के उत्तर गलत हैं तथा प्रमाणिक स्रोतों के विपरीत हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि परीक्षा के बाद हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) ने 28 अप्रैल को अस्थायी उत्तर कुंजी वेबसाइट पर अपलोड कर अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगी थीं। प्राप्त आपत्तियों को विषय विशेषज्ञों के पास भेजा गया, जिनकी राय के आधार पर कुछ उत्तरों में संशोधन किया गया और 2 मई को संशोधित उत्तर कुंजी जारी की गई। इसके बाद 4 मई को परिणाम घोषित किया गया।हाईकोर्ट ने आयोग को निर्देश देकर यह भी जानकारी मांगी थी कि कुल कितनी आपत्तियां प्राप्त हुईं और उन्हें निपटाने में कितना समय लगा। इसके साथ ही विशेषज्ञ समिति के सदस्यों की टिप्पणियां भी तलब की गई थीं। आयोग ने जवाब में बताया कि अदालत के निर्देश के बाद विवादित प्रश्नों पर विशेषज्ञों से दोबारा राय ली गई, लेकिन उन्होंने अंतिम उत्तर कुंजी में किसी अतिरिक्त बदलाव की आवश्यकता नहीं बताई।याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि अंतिम उत्तर कुंजी तैयार करने से पहले उन्हें अन्य अभ्यर्थियों की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देने का अवसर नहीं दिया गया। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि ऐसा कोई नियम, विनियमन या विज्ञापन की शर्त नहीं है जो आयोग को ऐसी प्रक्रिया अपनाने के लिए बाध्य करती हो। जस्टिस बंसल ने अपने फैसले में विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर कुंजी को चुनौती देने वाले अभ्यर्थी पर यह साबित करने का दायित्व होता है कि त्रुटि इतनी स्पष्ट है कि उसके लिए किसी अनुमान या विस्तृत तर्क की आवश्यकता न पड़े। अदालत ने कहा कि रिकार्ड से यह साबित नहीं होता कि विशेषज्ञों द्वारा स्वीकार किए गए उत्तर प्रत्यक्ष रूप से गलत हैं। इसलिए विशेषज्ञों की राय को प्रतिस्थापित करने का कोई आधार नहीं बनता। फैसले में अदालत ने यह भी कहा कि यदि हर आपत्ति पर पुन आपत्ति और फिर पुनर्विचार की अनुमति दी जाए तो भर्ती प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं हो सकेगी। चूंकि यह केवल प्रारंभिक परीक्षा थी और मुख्य परीक्षा इसी माह के अंत में प्रस्तावित है, इसलिए कुछ असफल अभ्यर्थियों की मांग पर पूरी चयन प्रक्रिया रोकना सार्वजनिक हित और सफल उम्मीदवारों दोनों के लिए नुकसानदेह होगा। इसी आधार पर सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं।

CBI का शिकंजा कसा! IDFC बैंक फ्रॉड केस में वरिष्ठ IAS अधिकारी के आवास पर रेड

 पंचकूला IDFC बैंक के FD घोटाले मामले में वरिष्ठ IAS अधिकारी के आवास पर रेड जारी है। सीबीआई कि तरफ से मामले में चार्जशीट पेश की जा चुकी है। CBI अग्रिम कार्रवाई को अंजाम दे रही है। मामले में मनी ट्रेल व IAS अधिकारीयों कि भूमिका की जांच हो रही है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हुए 657 करोड़ रुपये के फंड गबन मामले में शुक्रवार को दो अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की थी। यह मामले हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) से जुड़े हैं। सीबीआई ने हरियाणा सरकार के फंड के दुरुपयोग से संबंधित चार्जशीट पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में दाखिल की। इस मामले में चंडीगढ़ के रियल एस्टेट इन्वेस्टर विक्रम वधवा और सावन ज्वेलर्स के मालिक राजन सिंह कदोदिया आरोपित बनाया गया, जिन्हें अपराध से अर्जित धन का लाभार्थी बताया गया। पहले सीबीआई 15 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है इससे पहले सीबीआई 15 आरोपितों और कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें तीन सरकारी कर्मचारी, छह बैंक अधिकारी, दो कंपनियां और चार निजी व्यक्ति शामिल हैं। वहीं, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े मामले में सीबीआई ने चंडीगढ़ की विशेष अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल की है। इसमें सात आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें पांच बैंक अधिकारी, सीएससीएल का एक अधिकारी और एक निजी व्यक्ति शामिल है। जांच के दौरान पाया गया कि 250 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सावन ज्वेलर्स के द्वारा रिभव ऋषि, अभय कुमार, अभिषेक सिंगला, स्वाति सिंगला व अन्य आरोपितों की विभिन्न कंपनियों से प्राप्त की है। इन कंपनियों/फर्मों में पैसा सरकारी खातों से गैर कानूनी तरीके से ट्रांसफर किए गए थे। प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया? प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि सावन ज्वेलर्स के मालिक राजन के द्वारा मुख्य आरोपितों के लिए कैश कन्वर्जन का काम किया गया व इसके लिए भारी कमीशन प्राप्त किया। आरोपित द्वारा इन फर्मों/कंपनियों के नाम सोने के आइटम्स बेचे हुए दिखाए गए। आरोपित राजन ने इस मामले में धोखाधड़ी की शुरुआत से ही षड्यंत्र रचने में अहम भूमिका निभाई तथा पूर्व योजना के तहत अपराध को अंजाम देने में सक्रिय योगदान दिया। जांच में यह भी सामने आया था कि सावन ज्वेलर्स को अनधिकृत तरीके से पैसा तीन फर्मों से मिला है। वहीं विक्रम वधवा ने हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ निगम के साथ साथ चंडीगढ़-पंचकूला के दो निजी स्कूलों के बैंक खातों से भी करोड़ों का गबन किया। ईडी के अनुसार सरकारी फंड की हेराफेरी से जुड़े इस मामले में विक्रम वाधवा के निजी खाते में 70 करोड़ रुपये से अधिक की रकम पहुंची थी, जिसे बाद में अलग-अलग कंपनियों और संपत्तियों में लगाया गया। उस पर रिभव ऋषि, अभय कुमार, बैंक अधिकारियों व कुछ सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर सरकारी धन की हेराफेरी का आरोप है। वाधवा ने अवैध रकम को छिपाने, अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने और उसे वैध दिखाने में अहम भूमिका निभाई। गबन की रकम को कई शेल कंपनियों के जरिए घुमाया। कौनसी कंपनियों के नाम? इनमें कैपको फिनटेक सर्विसेज, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, आरएस ट्रेडर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों के नाम हैं। एजेंसी के अनुसार इनके खातों में सरकारी विभागों से पैसे ट्रांसफर किए गए। गौरतलब है कि सीबीआई ने हरियाणा सरकार के आठ विभागों से जुड़े मामले को राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से अपने हाथ में लिया था। वहीं चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और क्रेस्ट चंडीगढ़ से जुड़े दो मामलों की जांच आर्थिक अपराध थाना, चंडीगढ़ से सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच एजेंसी के मुताबिक हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में करीब 504 करोड़ रुपये तथा चंडीगढ़ प्रशासन से जुड़े मामले में 153 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सीबीआई ने कहा कि मामलों की जांच जारी है और आने वाले समय में और भी चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं।  

1 जुलाई तक आवेदन, सर्च कमेटी करेगी हरियाणा आयोग के नए पदों पर चयन

 चंडीगढ़  हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग में मुख्य आयुक्त के साथ ही आयुक्त के एक पद पर नियुक्ति की जाएगी। पहली जुलाई तक आवेदन किए जा सकते हैं। पात्र उम्मीदवारों के नामों पर विचार के लिए प्रदेश सरकार ने सर्च कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी वैधानिक समिति को अपनी सिफारिशें भेजेगी। पिछले महीने आयोग के मुख्य आयुक्त पद से सेवानिवृत्त हुए रिटायर्ड आइएएस टीसी गुप्ता के बाद मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी यह जिम्मेदारी अतिरिक्त कार्यभार के रूप में संभाल रहे हैं।मुख्य सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार आयोग में एक मुख्य आयुक्त तथा चार आयुक्त नियुक्त किए जा सकते हैं। मुख्य आयुक्त पद के लिए हरियाणा के मुख्य सचिव अथवा केंद्र सरकार के सचिव स्तर एवं समकक्ष पद पर कार्यरत या सेवानिवृत्त अधिकारी पात्र हैं। आयुक्त का रिक्त पद हरियाणा सरकार के ऐसे सेवानिवृत्त अधिकारियों में से भरा जाएगा, जिन्होंने प्रशासनिक सचिव अथवा राज्य सेवा में समकक्ष पद एवं दर्जा धारण किया हो। हरियाणा काडर के अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी भी इस पद के लिए पात्र होंगे। चयनित अभ्यर्थी पदभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि अथवा 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो भी पहले हो, पद पर कार्य करेंगे। इस पद पर पुनर्नियुक्ति का प्रविधान नहीं है। वेतन, भत्ते एवं सेवा शर्तें हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम 2014 तथा 28 जून 2019 को किए गए संशोधनों के अनुसार लागू होंगी। पात्र एवं इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित प्रारूप में अपने आवेदन सामान्य प्रशासन विभाग के आयुक्त एवं सचिव के कार्यालय में पहली जुलाई तक जमा करवा सकते हैं। केंद्र अथवा राज्य सरकार में कार्यरत अधिकारियों को अपने आवेदन उचित माध्यम से भेजने होंगे।

हरियाणा के 5 जिलों को NCR से बाहर करने की अटकलों पर विराम, CM सैनी ने रखा रोडमैप

चंडीगढ़. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) की 42वीं अहम बैठक नई दिल्ली में संपन्न हुई। केंद्रीय विद्युत, आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के भविष्य के विकास और ढांचागत योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सीएम सैनी ने दी जानकारी हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी इस महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने अहम जानकारियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि बैठक में लिए गए एक बड़े फैसले के तहत अब दिल्ली एनसीआर (NCR) का दायरे में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। यानी पांच राज्य एनसीआर से बाहर नहीं जाएंगे। सीएम सैनी ने स्पष्ट किया कि आज की बैठक के निर्णयों के तहत, हरियाणा के एनसीआर (NCR) क्षेत्र में फिलहाल कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। वायु प्रदूषण से जुड़ी पाबंदियों को किया जाएगा विभाजित हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा एनसीआर क्षेत्र के हरियाणा से जुड़े जिलों में कई बदलाव नहीं हुआ है। इसे लेकर चर्चा जरूरी की गई है। वायु प्रदूषण से जुड़ी पाबंदियों को विभाजित किया जाएगा। अरावली संरक्षण पर और जोर देते हुए परिवहन सेवाओं को अत्याधुनिक बनाने पर जोर दिया जाएगा। बी-6 वाहनों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। मेट्रो तथा नमो भारत के विस्तार पर भविष्य में बढ़ती आबादी को देखते हुए जोर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में शामिल होने के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। बैठक केंद्रीय शहरी विकास एवं आवासन मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में हुई। सीएम ने रेखा गुप्ता को किया सम्मानित बैठक के दौरान सौहार्दपूर्ण माहौल देखने को मिला। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बैठक की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को सम्मानित किया और उनका आभार जताया। बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की उपस्थिति भी बेहद महत्वपूर्ण रही, जहाँ उन्होंने दिल्ली और आस-पास के क्षेत्रों के विकास को लेकर अपने सुझाव रखे।

हरियाणा राजनीति में बढ़ी नजदीकियां, सीएम आवास पर बिश्नोई परिवार के साथ डिनर

 पंचकूला हरियाणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और दिग्गज नेता कुलदीप बिश्नोई के परिवार के बीच नजदीकियां बढ़ती दिख रही हैं। सोमवार रात को बिश्नोई परिवार ने मुख्यमंत्री आवास पर सीएम सैनी के साथ डिनर किया। खास बात यह है कि पिछले महज 15 दिनों के भीतर दोनों पक्षों के बीच यह तीसरी बड़ी मुलाकात है। इस मुलाकात की तस्वीरें खुद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने सोशल मीडिया (X) अकाउंट पर शेयर की हैं। मुख्यमंत्री आवास पर जुटे दोनों परिवार यह अनौपचारिक बैठक चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर हुई। सीएम नायब सिंह सैनी और उनकी पत्नी सुमन सैनी ने बिश्नोई परिवार का स्वागत किया। डिनर के इस मौके पर भाजपा के वरिष्ठ नेता कुलदीप बिश्नोई, उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई और उनके बेटे व भाजपा विधायक भव्य बिश्नोई मौजूद रहे। इसके अलावा विधायक रणधीर पनहार (पिराह) भी अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे थे। किस बात से नाराज थे बिश्नोई भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता कुलदीप बिश्नोई मुख्य रूप से राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा द्वारा उनके पिता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजन लाल पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के कारण नाराज थे। सीएम सैनी ने की तारीफ मुख्यमंत्री ने कहा कि चौधरी भजनलाल की कार्यशैली हमेशा जनहित और विकास केंद्रित रही। चौधरी भजनलाल हमारे लिए बहुत सम्मानित हैं। हम सब उनका बहुत सम्मान करते हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान को बीजेपी की ओर से बिश्नोई समाज को सकारात्मक संदेश देने के तौर पर देखा जा रहा है। रेखा शर्मा ने जताया खेद इसी कड़ी में सांसद रेखा शर्मा ने भी अपने बयान पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि उनका वक्तव्य किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी नहीं था, बल्कि एक राजनीतिक व्यवस्था के संदर्भ में दिया गया था वापस कांग्रेस ज्वाइन करने की कयासें चार साल पहले बीजेपी में शामिल हुए स्व. भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई भाजपा से अलग राजनीति करने के विभिन्न विकल्पों पर विचार करने लगे थे। हिसार व भिवानी से सांसद रह चुके कुलदीप बिश्नोई ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि भाजपा अपनी पार्टी की राज्यसभा सदस्य रेखा शर्मा से माफी नहीं मंगवाती तो उनके पास राजनीति करने के तीन बड़े विकल्प मौजूद हैं। बता दें कि कुलदीप बिश्नोई राहुल गांधी के भी खास माने जाते थे।  

हरियाणा की 66 ऐतिहासिक धरोहरें होंगी पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित

 पंचकूला हरियाणा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को बढ़ाव देकर पर्यटन स्थल बनाने पर जोर दे रही नायब सरकार को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड (एनसीआरपीबी) की ओर से आर्थिक बल मिलने वाला है। मंगलवार को नई दिल्ली में हुई एनसीआरपीबी की बैठक में दक्षिण हरियाणा को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की योजना पर जोर दिया गया है। दक्षिण हरियाणा जिलों में 66 ऐतिहासिक तथा महत्वपूर्ण जगहों पर उन्हें पर्यटक स्थल कें रूप में विकसित करने पर चर्चा की गई। इनमें महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, पलवल व अन्य जिलों की ऐतिहासिक धरोहर शामिल हैं। इनमें से कई को हरियाणा सरकार ने विकसित करने की योजना बना रखी थी। एनसीआरपीबी की ओर से मदद मिलने पर योजना बेहतर तरीके से सिरे चढ़ने की उम्मीद लगाई जा रही है। इन क्षेत्रों को किया जाएगा विकसित महेंद्रगढ़ जिले से नारनौल स्थित बीरबल का छत्ता, चोर गुबंद, इस्लामपुरा किला, जल महल, मिर्जा अलीजान का तख्त व बावड़ी, पीर तुर्कमान का मकबरा, शाह कुलीखान का मकबरा, शोभा सागर, इब्राहम खान शूरी का मकबरा, शाह निजाम का मकबरा, शाह विलायत का मकबरा, त्रिपोलिया दरवाजा शामिल है। पलवल जिले का बाबा उदासनाथ मंदिर, दौजी मंदिर, पंचायत मंदिर, पांडव वन, रेवाड़ी से बाग वाला तालाब, बड़ा तालाब, भगवती भक्ति आश्रम, बावल का किला, घंटेश्वर मंदिर, द रेड मास्क(लाल नकाब), तुर्कियावास मकबरा शामिल है। इनमें से कई को विकसित भी किया जा रहा है। फरीदाबाद में हरियाणा के सबसे पुराने अरावली गोल्फ कोर्स को हरियाणा सरकार ने इस साल के बजट में भी विश्वस्तरीय रिक्रिएशन एवं स्पोर्टस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई थी। इसे एनसीआरपीबी ने भी रीजनल प्लान 2041 में शामिल किया है। जिमखाना क्लब से मुगल ब्रिज तक… इसके अलावा आनंदपुर बांध, जिमखाना क्लब, मुगल ब्रिज, नाहर सिंह क्रिकेट स्टेडियम, नाहर सिंह पैलेस, राजहंस कन्वेंशन सेंटर, रोज गार्डन, सूरजकुंड को पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जाना है। गुरुग्राम के अरण्य ग्रीन फार्म, अराइज फार्म, बादशाहपुर फोर्ट, घोस अली शाह की बावड़ी, बेगम समरू पैलेस, काउन सराय और डीएलएफ गोल्फ एंड कंट्री क्लब को पर्यटन के लिए विकसित किया जाएगा। वहीं, गोल्ड ग्रीन्स गोल्फ एंड रिजाेर्ट, गोल्डन टर्टल फार्म विलेज, आइटीसी क्लासिक गोल्फ रिजाेर्ट, जान हाल, कर्मा लेकलैंड गोल्फ कोर्स, किंगडम आफ ड्रिम्स, मानेसर गोल्फ कोर्स, अलावर्दी खान की मास्क एंड सराय, शीतला माता मंदिर, शीश महल को शामिल किया गया है। इसी तरह सुलतानपुर बर्ड सेंच्यूरी, तारूधान गोल्फ कोर्स, टेरी गोल्फ कोर्स, द गोल्फ रिट्रीट फार्म भी पर्यटन हब के रूप में विकसित किए जाने वाले स्थानों में शामिल किया गया है।

एनसीआर में नहीं होगा बदलाव, चार नए ग्रीनफील्ड शहर बनेंगे: सीएम सैनी

पंचकूला हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के दायरे में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, हरियाणा के पांच जिला एनसीआर क्षेत्र में ही रहेंगे। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का रीजनल प्लान-2041 पर चर्चा हुई। इसमें एनसीआर के भविष्य के विकास, शहरी नियोजन, पर्यावरण संरक्षण, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और सस्टेनेबल ग्रोथ से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर बात हुई है। मुख्यमंत्री मंगलवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता एनसीआर प्लानिंग बोर्ड (एनसीआरपीबी )की बैठक में शामिल होने के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने बताया कि रीजनल प्लान-2041 को अंतिम रूप देने के लिए केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों (हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान एवं दिल्ली) के वरिष्ठ अधिकारियों की एक सब-कमेटी गठित की गई है। यह सब-कमेटी 15 अगस्त, 2026 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट बोर्ड को सौंपेगी। आत्मनिर्भर शहरी केंद्र के रूप में विकसित होंगे जिसके बाद अगली बैठक दिसंबर 2026 में गुरुग्राम में आहोगी। आज की बैठक में आरआरटीएस (रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम) के साथ-साथ चार नए ग्रीनफील्ड शहर विकसित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बोर्ड के सभी सदस्य राज्य एक-एक नए ग्रीन फील्ड शहर की विकास योजना भेजेंगे। नमो सिटी के नाम से विकसित होने वाले यह शहर आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और आत्मनिर्भर शहरी केंद्र के रूप में विकसित किए जाएंगे। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र का संतुलित और सशक्त विकास मुख्यमंत्री ने कहा इन निर्णयों से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र का संतुलित और सशक्त विकास सुनिश्चित होगा। हरियाणा सरकार एनसीआर के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और ग्रीनफील्ड शहरों तथा आरआरटीएस परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाएगी। बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री एके शर्मा, तथा राजस्थान के कैबिनेट मंत्री झाबर सिंह खर्रा शामिल हुए। इनके अलावा हरियाणा के मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्रीनिवास कातिकिथाला, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर सहित एनसीआर क्षेत्र से संबंधित राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कांग्रेस संगठन में अनुशासन पर जोर, अनुमति के बिना कार्यक्रमों पर लगी रोक

चंडीगढ़. हरियाणा कांग्रेस में संगठनात्मक अनुशासन और राजनीतिक स्वतंत्रता को लेकर चल रहा विवाद फिर सुर्खियों में आ गया है। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एचपीसीसी) अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने पार्टी नेताओं व पदाधिकारियों को चेतावनी पत्र जारी कर प्रदेश प्रभारी बीके हरिप्रसाद के पूर्व के निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन करने को कहा है। इस नए पत्र के बाद कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी और संगठन बनाम जनप्रतिनिधि की खींचतान तेज होने की संभावना बढ़ गई है। कांग्रेस कार्यालय से लेनी होगी अनुमति राव नरेंद्र सिंह ने सोमवार को पत्र जारी कर याद दिलाया कि प्रदेश में किसी भी धरना, प्रदर्शन, रैली, अनशन या अन्य राजनीतिक कार्यक्रम के आयोजन से पहले प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके साथ ही कार्यक्रमों में लगाए जाने वाले बैनर, पोस्टर और प्रचार सामग्री में नेताओं के चित्र भी संगठनात्मक वरिष्ठता और प्रोटोकॉल के अनुसार ही लगाने होंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्यक्रम के आयोजन से पहले उसकी सूचना जिलाध्यक्षों के माध्यम से प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में भेजनी होगी। जानकारों का मानना है कि राव नरेंद्र सिंह के इस नए पत्र के बाद अंदरूनी खींचतान को नया मुद्दा मिल सकता है।

हरियाणा में मेयर टीम अधूरी, चुनाव के एक साल बाद भी नहीं भरी गईं अहम कुर्सियां

अंबाला. प्रदेश के नगर निगमों में अजीब तस्वीर दिखाई दे रही है। शहरों को मेयर मिल चुके हैं, सदन बन चुके हैं, पार्षद शपथ ले चुके हैं, लेकिन सत्ता की दो अहम कुर्सियां सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर की अब भी खाली हैं। मार्च 2025 में हुए नगर निगम चुनावों के बाद गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, रोहतक, करनाल, पानीपत और यमुनानगर में मेयरों ने कामकाज संभाल लिया। मई 2026 में अंबाला, सोनीपत और पंचकूला में भी नए सदन अस्तित्व में आ गए। लेकिन प्रदेश के अधिकांश नगर निगमों में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुनने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। मार्च 2025 में मानेसर नगर निगम का भी चुनाव हुआ था केवल यहीं पर सीनियर और डिप्टी मेयर का चुनाव हो सका है। नगर निगम कानून आज भी उस दौर की कहानी कहता है जब मेयर का चुनाव पार्षद किया करते थे। अब मेयर सीधे जनता चुनती है, लेकिन कानून की कई धाराओं में आज भी पार्षदों द्वारा मेयर चुनने का जिक्र दर्ज है। नगर निगम की राजनीति में सीनियर डिप्टी मेयर का पद केवल सम्मान का विषय नहीं होता। इसे अक्सर भविष्य की राजनीति का लांचिंग पैड माना जाता है। पंचकूला का नाम शायद इसलिए भी याद रखा जाएगा क्योंकि वहां 2021 से 2026 तक का पूरा कार्यकाल निकल गया है। अंबाला में हाई कोर्ट की लेनी पड़ी थी शरण अंबाला में 2013 में निगम बनने के बाद मेयर के साथ-साथ निर्धारित समय के भीतर सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव भी हो गया था। दूसरे कार्यकाल में मामला इतना लंबा खिंचा कि चुनाव कराने के लिए तत्कालीन छह पार्षदों जिनमें जसबीर सिंह, फकीर चंद, राजेश मेहता, अमनदीप कौर, राजेश सिंगला इत्यादि को हाई कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी। दिसंबर 2020 में चुनाव हुए, जनवरी 2021 में शपथ ग्रहण हुआ, लेकिन सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर के चुनाव आठ दिसंबर 2022 में जाकर हुए। लगभग दो साल तक दोनों कुर्सियां खाली रहीं। इस साल अंबाला में 13 मई को चुनाव परिणाम आए, 28 मई को शपथ ग्रहण होने के बावजूद अगली प्रक्रिया का इंतजार जारी है।