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नागौर में ड्रग्स नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई, काली कमाई से बना घर जब्त

 नागौर राजस्थान के नागौर में नशा तस्करों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है. यहां एक आरोपी की अवैध कमाई से बने आलीशान मकान को सीज कर दिया गया. आरोपी ने इस प्रॉपर्टी को अपनी लिव-इन पार्टनर के नाम पर कर रखा था. नागौर के शारदापुरम इलाके में बना करीब 50 लाख रुपये का घर बनाया था. सुरपालिया थाना क्षेत्र के जानवा गांव का रहने वाला बहादुर सिंह उर्फ समीर लंबे समय से पुलिस की रडार पर था. आरोप है कि वह स्मैक (हेरोइन) की सप्लाई के धंधे में लिप्त था. इस अवैध कारोबार से मोटी रकम कमा रहा था. धीरे-धीरे काली कमाई से आलीशान मकान ले लिया. जांच की गई तो पुलिस को पता चला कि यह मकान बहादुर सिंह के नाम पर नहीं, बल्कि उसकी लिव-इन पार्टनर के नाम पर रजिस्टर्ड है. पुलिस ने इस मामले की गहराई से जांच शुरू की. पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए तो सामने आया कि बहादुर सिंह के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत दो मामले पहले से दर्ज हैं. ये मामले करीब छह साल पुराने थे और इनमें से एक बीकानेर के पांचू थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ था. इन मामलों में पुलिस पहले ही चालान पेश कर चुकी थी, लेकिन असली कहानी अब सामने आ रही थी- काली कमाई की. जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी ने तस्करी के धंधे से शारदापुरम इलाके में मकान तैयार कराया था. कुछ रिपोर्ट्स में इसकी अनुमानित कीमत एक करोड़ से ज्यादा भी बताई जा रही है. कार्रवाई से बचने के लिए बहादुर सिंह ने यह संपत्ति अपनी लिव-इन पार्टनर के नाम रजिस्टर्ड करवा रखी थी. वह जांच एजेंसियों को भ्रमित करना चाहता था. पुलिस ने इस मामले में मजबूत साक्ष्य जुटाए और दिल्ली स्थित सक्षम प्राधिकरण के सामने पेश किए. प्राधिकरण से मंजूरी मिलने के बाद सुरपालिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मकान को सीज कर दिया. सुरपालिया थानाधिकारी सुमन कुलहरी ने बताया कि जांच में स्पष्ट रूप से सामने आया है कि यह मकान नशे के कारोबार से अर्जित धन से ही बनाया गया था. आरोपी की पहचान छिपाने की कोशिश नाकाम हो गई. पुलिस द्वारा मकान पर नोटिस चस्पा करने के कुछ ही देर बाद आरोपी ने नोटिस हटाने की कोशिश की. पुलिस ने इस हरकत को गंभीरता से लिया है और आगे की जांच शुरू कर दी है. नागौर एसपी रोशन मीणा ने कहा कि जिले में नशा तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है. अवैध कमाई से बनी प्रॉपर्टी को चिह्नित कर सीज किया जा रहा है. बीते 15 दिनों में चार संपत्तियां सीज की जा चुकी हैं, जबकि कुल पांच मकानों पर कार्रवाई हो चुकी है. पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन संकल्प के तहत यह अभियान और तेज होगा.

दिल दहला देने वाला मंजर: वृंदावन हादसे में जान गंवाने वाले लुधियाना के पांच लोगों का सामूहिक अंतिम संस्कार

लुधियाना. शुक्रवार दोपहर वृंदावन में दर्शन के लिए गए जगराओं जत्थे की नाव के केशी घाट और यमुना नदी में पलटने से हुई दस मौतों में से पांच मृतक जगराओं के ही रहने वाले थे। शुक्रवार देर रात वहां पोस्टमार्टम करवाने के बाद, प्रशासन ने सुरक्षा के लिए पायलट वाहनों के साथ अलग-अलग एंबुलेंस में मृतकों के शव जगराओं भेजे। जगराओं बस अड्डा चौक में मौजूद सैकड़ों शहरवासियों की उपस्थिति में शवों को उनके घरों तक पहुंचाया गया। इनमें मधुर बहल और उनकी मां कविता बहल, चाचा चरणजीत बहल और चाची पिंकी बहल, साथ ही ईशान कटारिया शामिल थे। हजारों शहरवासी उनके घरों पर पहुंचे और पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। दोपहर में, शहर के श्मशान घाट में अलग-अलग समय पर उन सभी का अंतिम संस्कार किया गया। जहां बड़ी संखया में शहरवासी मौजूद थे। मुखयमंत्री ने किया दुख साझा मुखयमंत्री भगवंत मान इस बड़े दुखद हादसे के पीड़ितो के परिवारों का दुख साझा करने के लिए विशेष रूप से जगराओं पहुँचे। वह ईशान कटारिया के घर गए और उनके माता-पिता के साथ अपना दुख साझा किया। उसके बाद, वह चरणजीत बहल के घर पहुंचे और उनके बेटे तथा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अपना दुख साझा किया। इसके बाद, वह उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए शहर के श्मशान घाट भी पहुंचे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार इस हादसे के पीडि़तों के परिवारों के साथ खड़ी है। इस हादसे में अभी भी 4 सदस्य लापता हैं, जिनकी तलाश की जा रही है, और कुछ का इलाज चल रहा है। यह पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद, सरकार पीडि़त परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि यदि परिवार जगराओं में मृतकों की याद में किसी भी प्रकार का स्मारक या पुस्तकालय बनाने का निर्णय लेता है, तो सरकार उसे पूरा करेगी। इसके अलावा, मुखयमंत्री ने कहा कि भविष्य में ऐसी दर्दनाक दुर्घटनाओं को रोकने के लिए वे उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के संपर्क में हैं। सरकार से वहां श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करने को कहा गया है; यदि पंजाब सरकार की ओर से किसी भी सहयोग की आवश्यकता होती है, तो सरकार वह सहयोग भी प्रदान करेगी। ईशान को सिहरा बांधकर दी गई अंतिम विदाई वृंदावन दुर्घटना में जान गंवाने वाले युवक ईशान कटारिया के परिवार में बेहद भावुक और हृदयविदारक माहौल था। जब अंतिम विदाई का समय आया तो ईशान कटारिया को सिहरा बांधकर विदाई दी गई। ईशान कटारिया के पिता, राजू कटारिया ने बताया कि ईशान उनका इकलौता बेटा था। पूरे परिवार का उससे बहुत गहरा लगाव था। ईशान ने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली थी और वह नौकरी के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। इसके साथ ही, परिवार उसकी शादी की तैयारियां भी कर रहा था, लेकिन शायद ईश्वर को यह मंजूर नहीं था और उन्होंने इतनी कम उम्र में ही उसे हमसे छीन लिया। कविता को लाल चुनरी ओढ किया विदा इस हादसे में मधुर बहल और उनकी माकविता बहल की भी मौत हो गई। अंतिम विदाई समय मधुर बहल को सिहरा बांधा गया और उसकी मां कविका बहल को लाल चुनरी ओढ कर अंतिम विदाई दी गई। जब एक ही घर से मां बेटे की एक साथ अर्थी निकली तो हकाारों मौजूद लोगों की आंखे नम होने से नहीं रह्वह सकी। पिता का भावुक पोस्ट जगराओं का एक और युवक, ऋषभ शर्मा भी उन श्रद्धालुओं में शामिल है, जो वृंदावन यात्रा पर गए श्रद्धालुओं की नाव यमुना नदी में पलटने के बाद से अब भी लापता हैं। अभी तक उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। उसके पिता, उमेश शर्मा ने वृंदावन से सोशल मीडिया पर एक अत्यंत भावुक पोस्ट साझा करते हुए, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से एक मार्मिक अपील की है। इस पोस्ट में उन्होंने कहा है कि उन्हें कोई गोताखोर नहीं मिल पाया है। अभी तक कोई भी उनके बेटे के बारे में कोई जानकारी हासिल नहीं है। उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि वे उनके बेटे ऋषभ को ढूंढकर उन्हें सौंप दें।

तोखन साहू का बड़ा बयान: हिंसा से शांति की ओर बढ़ा असम, गौरेला में कही अहम बात

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही. केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू अपने गौरेला प्रवास के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने असम की राजनीति, हालिया चुनाव और राज्य में हुए विकास कार्यों को लेकर बड़ा बयान दिया। केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने कहा कि असम में मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षों में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने पुराने दौर को याद करते हुए कहा कि एक समय था जब असम बम, बारूद और हिंसा की घटनाओं के लिए जाना जाता था, लेकिन आज राज्य में शांति, समृद्धि और विकास का माहौल है। उन्होंने आगे कहा कि डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा की लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि जनता उनके काम से संतुष्ट है। मंत्री के मुताबिक, असम की जनता ने उन्हें तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाने के लिए भारी संख्या में मतदान किया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा मुख्यमंत्री पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए तोखन साहू ने कहा कि केवल राजनीतिक आरोप लगाने से कुछ सिद्ध नहीं होता। उन्होंने विश्वास जताया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) इस बार भी भारी बहुमत के साथ सरकार बनाएगा और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पिछली बार से अधिक सीटें जीतने में सफल रहेगी। गौरतलब है कि इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र से जुड़ी रेलवे समस्याओं को लेकर केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन भी सौंपा, जिस पर उन्होंने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। साथ ही पेंड्रारोड रेलवे स्टेशन में यात्री सुविधाओं के विस्तार एवं नवीन रेल परियोजनाओं की स्वीकृति हेतु मांग पत्र स्थानीय रेल सलाहकार समिति द्वारा सौंपा गया। पेंड्रारोड रेलवे स्टेशन में यात्री सुविधाओं के लिए प्रमुख मांगें एवं सुझाव: 1– नवीन रेल लाइन का निर्माण (कनेक्टिविटी) पेंड्रारोड-अमरकंटक-डिंडोरी-जबलपुर एवं पेंड्रारोड-अमरकंटक-मंडला-सिवनी नई रेल लाइन के निर्माण की मांग की गई है। यह मार्ग मध्य भारत के आदिवासी अंचल के लिए जीवनरेखा साबित होगा। इससे अमरकंटक, सतपुड़ा पर्वतमाला, कान्हा एवं पेंच राष्ट्रीय उद्यान तथा अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिजर्व को सीधा रेल संपर्क मिलेगा, जिससे पर्यटन और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा। 2 – फुट ओवरब्रिज (FOB) का निर्माण: स्टेशन के दोनों ओर बढ़ती आबादी को देखते हुए सुरक्षित आवागमन और प्लेटफार्मों के बीच सुगम संपर्क के लिए आधुनिक फुट ओवरब्रिज निर्माण की मांग की गई है। 3 – प्रमुख ट्रेनों का ठहराव (Stoppage) जबलपुर-संतरागाछी-जबलपुर एक्सप्रेस तथा रानी कमलापति-संतरागाछी-रानी कमलापति एक्सप्रेस का पेंड्रारोड स्टेशन पर ठहराव सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया है। 4 – नई मेमू (MEMU) ट्रेन का संचालन क्षेत्रीय व्यापारियों, कर्मचारियों और आम जनता की सुविधा के लिए संध्या काल में पेंड्रारोड से बिलासपुर के बीच नई मेमू लोकल ट्रेन चलाने की मांग की गई है। 5 – रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण गौरेला-गोरखपुर-कटनी मार्ग पर रेलवे फाटक के पास बढ़ते यातायात और जाम की समस्या को देखते हुए रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के शीघ्र निर्माण की मांग की गई है। इन सभी मांगों को लेकर केंद्रीय राज्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर जल्द ही समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

भूमि सेवाओं में बड़ा बदलाव: इंदौर में पटवारी हुए डिजिटल, आसान होगी हर प्रक्रिया

इंदौर. इंदौर में प्रशासनिक कामकाज को और अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। एलआरएम के अंतर्गत जिले के सभी पटवारियों को विभिन्न शासकीय ऑनलाइन पोर्टलों के उपयोग का व्यापक प्रशिक्षण दिया गया। इस पहल का उद्देश्य राजस्व अमले को डिजिटल रूप से सक्षम बनाकर आमजन को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना है। ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग कर पटवारी एक क्लिक पर जमीन से जुड़े कार्य समय सीमा में पूरे कर सकेंगे। जिले के पटवारियों को आरसीएमएस, वेबजीआएस 2.0, फार्मर रजिस्ट्रेशन, डिजास्टर वार्निंग सिस्टम, सीएम हेल्पलाइन, पीएम किसान, साइबर तहसील, ई-आफिस, लोक सेवा गारंटी, एमपी ट्रेजरी, डीजी लाकर सहित अनेक महत्वपूर्ण पोर्टलों की जानकारी और प्रशिक्षण दिया गया। तहसीलों के पटवारी भी होंगे शामिल कलेक्टर शिवम वर्मा की उपस्थिति में आयोजित इस प्रशिक्षण में विशेषज्ञों ने न केवल तकनीकी पहलुओं को समझाया, बल्कि डेटा एंट्री, ऑनलाइन सेवा संचालन और शिकायतों के त्वरित निराकरण के व्यावहारिक तरीके भी बताए। तीन चरणों में आयोजित होने वाले प्रशिक्षण के पहले चरण में महू, राऊ, जूनी इंदौर और खुड़ैल के पटवारियों को प्रशिक्षित किया गया। आगामी चरणों में अन्य तहसीलों के पटवारी शामिल होंगे। मॉनीटरिंग का तंत्र मजबूत कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि अब हर कार्य ऑनलाइन माध्यमों से तय समय-सीमा में और गुणवत्ता के साथ पूरा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानीटरिंग के लिए प्रभावी तंत्र मौजूद हैं, इसलिए लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि छोटी त्रुटियों को सुधारा जा सकता है, लेकिन किसी भी प्रकार की अनियमितता पर सख्त कार्रवाई तय है। उन्होंने पटवारियों से अपने क्षेत्र की पूरी जानकारी रखने, हर आवेदक के काम को प्राथमिकता देने और टीम भावना से कार्य करने की बात कही। राजस्व अभियान की प्रगति गूगल शीट पर होगी दर्ज राजस्व संबंधी समस्याओं और प्रकरणों के त्वरित निराकरण एवं राजस्व अभिलेखों को अद्यतन करने के उद्देश्य से सम्पूर्ण जिले में चलाए जा रहे विशेष राजस्व अभियान की अवधि को 25 अप्रैल तक बढ़ाया गया है। पूर्व में राजस्व अभियान 30 मार्च तक होना था। राजस्व अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें कलेक्टर शिवम वर्मा ने समस्त राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया है कि राजस्व अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाना सुनिश्चित करें। राजस्व अभियान की प्रगति की प्रतिदिन समीक्षा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा अपने-अपने क्षेत्रांतर्गत करें। प्रतिदिन की प्रगति गूगल शीट में दर्ज की जाएगी।

भारतीय मूल के अरविंदर का जलवा: Cricket Canada के प्रधान चुने गए, जीत दर्ज

फिरोजपुर. दुनियाभर में बसे पंजाबियों के लिए गर्व का क्षण तब बना, जब फिरोजपुर के गांव कोठा अंबरहर के रहने वाले अरविंदर सिंह खोसा ने क्रिकेट कनाडा के प्रधान पद का चुनाव जीत लिया। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी का माहौल है और लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं। इस संबंध में जानकारी देते हुए उनके पूर्व शारीरिक शिक्षा अध्यापक और राज्य व राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गुरनाम सिद्धू गामा ने बताया कि अरविंदर सिंह खोसा बचपन से ही खेलों में रुचि रखते थे। उनके पिता स्वर्गीय निशान सिंह खोसा और चाचा सुखवंत सिंह खोसा की प्रेरणा से उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू किया। अरविंदर सिंह खोसा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा डाल चंद सीनियर सेकेंडरी स्कूल से प्राप्त की, जबकि उच्च शिक्षा गुरु नानक कॉलेज से पूरी की। उनके खेलने के अंदाज के कारण उनके साथी उन्हें ‘अफरीदी’ कहकर बुलाते थे। अदालत से मिली सफलता कनाडा से फोन पर बातचीत करते हुए अरविंदर खोसा ने बताया कि वहां क्रिकेट संस्था के चुनाव लंबे समय से नहीं हो पा रहे थे। इन चुनावों को करवाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दबाव था। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत के आदेश के बाद शुक्रवार को चुनाव कराए गए, जिसमें 10 में से 8 राज्यों ने उनके पक्ष में मतदान किया। इस तरह उन्होंने बड़ी बढ़त के साथ जीत हासिल की। क्रिकेट के विकास के लिए करेंगे मेहनत अरविंदर खोसा ने कहा कि वह इस जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाएंगे और कनाडा में क्रिकेट के विकास के लिए पूरी मेहनत करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में वहां क्रिकेट को नई दिशा मिलेगी। उनकी इस सफलता पर पूर्व विधायक कुलबीर सिंह जीरा, गुरनाम सिद्धू, सुखजिंदर सिंह कुलगढ़ी, गुरभेज सिंह, लखविंदर सिंह, अभिनेता हरिंदर भुल्लर सहित कई प्रमुख लोगों ने उन्हें बधाई दी। लोगों का कहना है कि अरविंदर खोसा ने पंजाब और देश का नाम ऊंचा किया है।

परीक्षा से पहले ही परीक्षा खत्म! पूर्णिया यूनिवर्सिटी की लापरवाही से हंगामा

पूर्णिया बिहार का पूर्णिया विश्वविद्यालय हाल में ही एक शोध छात्रा के साथ एक विभागाध्यक्ष की तस्वीर और वीडियो वायरल होने के बाद अब स्नातक प्रथम खण्ड की परीक्षा को लेकर सुर्खियों में है. पूर्णियां विश्वविद्यालय इस मामले में देश का संभवतः पहला विश्वविद्यालय होगा, जहां एक परीक्षा के लिए तीन अलग अलग एडमिट-कार्ड जारी किए गए हैं और उससे भी बड़ी हैरानी की बात यह है कि निर्धारित तारीख से एक दिन पहले ही परीक्षा हो गई. परीक्षा से वंचित हजारों छात्र-छात्रों का परीक्षा केंद्र और विश्वविद्यालय परिसर में आक्रोश देखने को मिला है. हालांकि, विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक इस लापरवाही का पूरा ठीकरा समर्थ पोर्टल पर फोड़ रहे हैं. एक ही परीक्षा का तीन-तीन कार्ड दरअसल, पूर्णिया विश्वविद्यालय स्नातक में प्रथम वर्ष की परीक्षा 30 मार्च से शुरू हुई है. जो 15 अप्रैल तक चलेगी. इसी बीच एक हैरानी की बात सामने आई कि परीक्षा शुरू होने से पहले तकनीकी त्रुटियों की वजह से दो बार परीक्षार्थियों को एडमिट कार्ड जारी किया गया. दूसरी बार वाले एडमिट कार्ड से 30 मार्च और 04 अप्रैल को परीक्षा भी सम्पन्न हुई. इसके बाद फिर विश्वविद्यालय ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए तीसरा एडमिट कार्ड जारी किया और परीक्षा तिथि में भी परिवर्तन किया. इस एडमिट कार्ड के अनुसार, 08 अप्रैल और 10 अप्रैल को होने वाली परीक्षा को विस्तारित करते हुए क्रमशः 09 और 11 अप्रैल कर दिया गया. 11 अप्रैल की सुबह की पाली की परीक्षा देने जब सैकड़ों परीक्षार्थी जिला मुख्यालय स्थित आर केके कॉलेज केंद्र पहुंचे तो उन्हें परीक्षा केंद्र में यह कहकर प्रवेश करने से रोक दिया कि इन विषयों की परीक्षा 10 अप्रैल को ही पूरी हो चुकी है. इसके बाद सैकड़ों परीक्षार्थी आक्रोशित हो गए और उन्होंने सहरसा-पूर्णिया मार्ग को जामकर नारेबाजी किया. परीक्षार्थी इमराना खातून ने बताया कि 08 तारीख से आ रहे हैं, फर्स्ट सिटींग में परीक्षा थी, कैंसल हो गया. फिर बोला कि 09 तारीख को होगा, वह भी कैंसल हो गया. फिर 11 तारीख बताया गया, लेकिन आज भी नही हो रहा है. हमलोगों को धक्का मारकर बाहर कर दिया गया. समर्थ पोर्टल की गड़बड़ी से हुई छात्रों को परेशानी परीक्षा नियंत्रक प्रो अमरकांत सिंह ने बताया कि समर्थ पोर्टल द्वारा पहली बार फॉर्म भराया गया. तकनीकी त्रुटियों की वजह से बच्चों को परेशानी हुई. उनकी परेशानियों को देखते हुए विश्वविद्यालय अपनी जिम्मेदारी लेता है. छुटे हुए बच्चों की परीक्षा फिर से ली जाएगी. आगे की परीक्षा स्थगित की जाती है. परीक्षा नियंत्रक प्रो अमरकांत सिंह कहते हैं कि भारत सरकार के समर्थ पोर्टल द्वारा पहली बार परीक्षा फॉर्म भराया गया है और तकनीकी त्रुटि के कारण विश्वविद्यालय के बच्चों को परेशानी हुई है. उनकी परेशानी को देखते हुए विश्वविद्यालय अपनी जिम्मेदारी लेता है. परीक्षार्थियों को कोई असुविधा नही हो, इसलिए उक्त विषय की परीक्षा फिर से ली जाएगी और आगे की परीक्षा को स्थगित कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि समर्थ पोर्टल ने बताया है कि जो त्रुटि है, उसको दूर कर लिया गया है. छात्र नेता पीयूष पुजारा विश्वविद्यालय की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि ऐसा लगता है कि परीक्षा विभाग और विश्वविद्यालय खेल बनकर रह गया है उन्हें पता ही नही है कि उनका मैनेजमेंट क्या है और बार-बार एडमिट कार्ड निकलना पड़ता है. परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि इसकी नैतिक जिम्मेवारी परीक्षा विभाग लेती है और आगे की परीक्षा स्थगित की जाती है.इसका मतलब तो यह हुआ कि परीक्षा विभाग और पूर्णियां विश्वविद्यालय खेल बनकर रह गया है और उन्हें पता ही नही है कि उनका मैनेजमेंट क्या है ,बार-बार एडमिट कार्ड बदलना पड़ता है.  

Census 2026: छत्तीसगढ़ में एक मई से शुरू होगा सर्वे, पहले गिने जाएंगे घर

रायपुर. भारत सरकार द्वारा आयोजित जनगणना 2027 के अंतर्गत प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (House Listing & Housing Census) का कार्य छत्तीसगढ़ में 01 मई से 30 मई 2026 तक 30 दिनों की अवधि में संचालित किया जाएगा। यह चरण जनगणना प्रक्रिया का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, जिसके माध्यम से प्रत्येक आवासीय एवं गैर-आवासीय भवन, मकान की स्थिति, उपयोग एवं उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्रित की जाएगी। डिजिटल इंडिया के अंतर्गत इस बार आम जनता की सुविधा के लिए स्व-गणना (Self-Enumeration) का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है। इच्छुक नागरिक 16 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 के मध्य निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपने परिवार एवं मकान से संबंधित जानकारी दर्ज कर सकते हैं। स्व-गणना करने वाले परिवारों को एक स्व-गणना आईडी (Self-Enumeration ID) प्रदान की जाएगी, जिसे सुरक्षित रखना आवश्यक होगा तथा प्रगणक के आने पर प्रगणकों को देना होगा। आपके द्वारा भरी जानकारी की पुष्टि के बाद प्रगणक उसे सब्मिट कर देगा। इन बिंदुओं पर एकत्रित की जाएगी जानकारी प्रत्येक भवन एवं मकान की संख्या, स्थिति एवं प्रकार, मकान का उपयोग, (आवासीय/व्यावसायिक/अन्य), निर्माण की प्रकृति (कच्चा/पक्का/अर्ध-पक्का), परिवारों की संख्या एवं उनके आवासीय विवरण, उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं, जैसे- पेयजल की उपलब्धता, शौचालय की सुविधा, विद्युत कनेक्शन, रसोई गैस/ईंधन का प्रकार, इंटरनेट/संचार सुविधाएं यह जानकारी देश की सामाजिक-आर्थिक योजनाओं, शहरी एवं ग्रामीण विकास, आवास योजनाओं, जल एवं स्वच्छता कार्यक्रमों तथा बुनियादी ढांचे के विकास हेतु अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। प्रगणक निर्धारित अवधि के दौरान प्रत्येक घर पर जाकर जानकारी एकत्रित करेंगे। प्रगणक अधिकृत पहचान पत्र के साथ जाएंगे, जिसकी पुष्टि नागरिकों द्वारा की जा सकती है। नागरिकों से अनुरोध है कि वे प्रगणकों को सही एवं पूर्ण जानकारी प्रदान करें। स्व-गणना कर चुके परिवारों को अपनी (Self-Enumeration ID) प्रगणक को बतानी होगी। पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी सभी जानकारी जनगणना के दौरान एकत्रित की गई सभी जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। इस जानकारी का उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों एवं नीतिगत निर्णयों के लिए किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति विशेष की जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। जनगणना कार्य में सक्रिय सहयोग प्रदान करें। निर्धारित समयावधि में स्व-गणना का लाभ उठाएं। केवल अधिकृत गणनाकर्मियों को ही जानकारी प्रदान करें। सटीक एवं सत्य जानकारी देना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। निगरानी के लिए जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर खुलेंगे नियंत्रण कक्ष जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाएंगे। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाएगा। शिकायत निवारण के लिए हेल्पलाइन/ऑनलाइन प्रणाली उपलब्ध होगी। जनगणना कार्य निदेशालय छत्तीसगढ़ के निदेशक ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें। आपकी सटीक एवं पूर्ण जानकारी देश की विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगी। जनगणना से प्राप्त आंकड़े देश की आर्थिक, सामाजिक एवं बुनियादी विकास योजनाओं की आधारशिला होते हैं। यह प्रक्रिया सरकार को सटीक नीति निर्माण, संसाधन आवंटन एवं भविष्य की योजनाओं के निर्धारण में सहायता प्रदान करती है।जनगणना देश की सबसे व्यापक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जो सरकार को जनसंख्या, आवास एवं बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का आंकलन करने में सहायता प्रदान करती है। इससे प्राप्त आंकड़ों के आधार पर भविष्य की योजनाएं अधिक प्रभावी एवं समावेशी बनाई जाती है।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा बयान: FIR के बाद समझौता करना न्यायिक सिस्टम के साथ खिलवाड़

जबलपुर. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम आदेश में कहा कि किसी के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराना और फिर बाद में समझौता कर लेना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। ऐसे मामलों में सख्ती से निपटना बेहद जरूरी है। कोर्ट ने यह भी माना कि इस तरह की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है, जो कानून के दुरुपयोग की ओर इशारा करती है। इस मत के साथ जस्टिस संदीप एन भट्ट की सिंगल बेंच ने जबलपुर के उद्योगपति महेश केमतानी पर 50 हजार रु का जुर्माना लगा दिया। यह राशि एक हफ्ते में हाई कोर्ट बार एसोसिएशन में जमा करनी होगी। जबलपुर के महानद्दा स्थित शुभ मोटर्स के महेश केमतानी ने संदीप कुमार मिश्रा, नेहा विश्वकर्मा और नसीम खान उर्फ मुस्कान पर करीब 97 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए मदन महल थाने में एफआइआर दर्ज कराई थी। 12 लाख रुपये बरामद हुए थे जांच के दौरान संदीप मिश्रा को गिरफ्तार किया गया था। उससे करीब 12 लाख रु बरामद हुए थे। आरोपी संदीप मिश्रा ने इसी मामले में जमानत के लिए यह अर्जी लगाई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि आरोपी का शिकायतकर्ता से समझौता हो चुका है। राज्य सरकार की ओर से अर्जी का विरोध किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी और महेश केमतानी पर 50 हजार रुपए जुर्माना लगाते हुए आरोपी संदीप मिश्रा की जमानत अर्जी मंजूर कर ली।

‘पैसे डबल’ का झांसा देकर चलाते थे नकली नोट, पुलिस ने गिरोह का किया खुलासा

 बस्ती यूपी के बस्ती जिले में पुलिस ने फर्जी नोट चलाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. संयुक्त अभियान में थाना वाल्टरगंज पुलिस, स्वॉट टीम और सर्विलांस टीम की अहम भूमिका रही. गिरफ्तार अभियुक्तों में मुस्तफा, नबीउल्लाह, नबीउल्लाह उस्मानी, हबीबुर्रहमान और मणिकांत चौधरी शामिल हैं. पुलिस ने इनके पास से कुल 420000 रुपये के नकली नोट बरामद किए हैं. जिनमें 500 रुपये के पांच बंडल, 200 रुपये के पांच बंडल और 100 रुपये के सात बंडल शामिल हैं. इसके अलावा एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन और तीन मोटरसाइकिल भी बरामद की गई है. पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी संगठित तरीके से नकली नोटों का नेटवर्क चला रहे थे और विभिन्न क्षेत्रों में इन्हें खपाने का काम करते थे. गिरफ्तार आरोपियों में मणिकांत चौधरी रूपनदेही नेपाल का निवासी है. जबकि मुस्तफा और नबीउल्लाह जनपद बलरामपुर, नबीउल्लाह उस्मानी जनपद महाराजगंज और हबीबुर्रहमान जनपद संतकबीर नगर का रहने वाला है. पूरे मामले का खुलासा अपर पुलिस अधीक्षक श्यामकांत ने प्रेसवार्ता कर बताया कि पांच लोग की गिरफ्तारी की गई है. जिसमें उनके पास से 4 लाख बीस हजार के फर्जी नोट रिकवर किए गए हैं. जिनमें 500 की पांच गड्डियां,200 की पांच गड्डियां और 100 की सात गड्डियां शामिल हैं. आरोपियों के पास से तीन बाइक भी बरामद की गई है. ये गिरफ्तारी बक्साई पुल के पास से की गई है. आरोपियों द्वारा ग्रुप बनाकर जनपद बस्ती, संत कबीर नगर, सिद्धार्थ नगर, अयोध्या, अंबेडकर नगर में घूमा जाता था. ऐसे में यहां के ग्रामीण बैंक को टारगेट किया जाता था. आरोपी बैंक से बुजुर्गों को पैसे निकालते समय लालच देते थे. आरोपी कहते थे कि हम आपके रुपए डबल कर देंगे. जिसके चलते कुछ लोग उनकी बातों पर विश्वास भी कर लेते थे और इस तरह ये लोग अपनी नकली नोट खपा देते थे.

नक्सल प्रभावित बीजापुर में विकास का मॉडल: 5 लाख मानव दिवस, रोजगार-राशन-आवास से बदली जिंदगी

रायपुर लंबे समय तक नक्सल प्रभाव के कारण विकास से अछूते रहे बीजापुर जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में अब बदलाव की बयार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। नियद नेल्लानार योजना और मनरेगा के संयुक्त प्रयासों से उन गांवों तक विकास की पहुंच बनी है, जहां दशकों तक नक्सल प्रभाव के कारण बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई थीं। अब इन क्षेत्रों में रोजगार, आवास, पेयजल, शिक्षा और आजीविका के अवसरों का विस्तार हो रहा है, जिससे लोगों के जीवन में ठोस परिवर्तन दिखाई दे रहा है। बीजापुर जिले में नियद नेल्लानार योजना के तहत 42 सुरक्षा कैम्पों के माध्यम से 67 ग्राम पंचायतों के 224 गांवों को शामिल किया गया है। इस पहल में मनरेगा की सक्रिय भागीदारी से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आधारभूत ढांचे के निर्माण को गति मिली है, जिससे ग्रामीणों को अपने ही गांव में काम और अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। 16 हजार से अधिक परिवारों को रोजगार का सहारा इन ग्रामों में अब तक 16,671 जॉब कार्ड पंजीकृत किए गए हैं, जिनमें से 7,271 नए जॉब कार्ड बनाए गए हैं। इससे हजारों परिवारों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें 966 आत्मसमर्पित नक्सली, 178 घायल पीड़ित परिवार और 477 मृतक नक्सल पीड़ित परिवारों के जॉब कार्ड बनाकर उन्हें मनरेगा योजना से जोड़ा गया है, जिससे उन्हें स्थायी आजीविका का आधार मिल रहा है। पहली बार दिखा विकास का व्यापक असर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत नियद नेल्लानार क्षेत्रों में 1,744 विकास कार्य कराए गए हैं, जिनके माध्यम से 5 लाख से अधिक मानव दिवस सृजित हुए हैं। इन कार्यों के जरिए न केवल स्थानीय स्तर पर ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिला है, बल्कि पलायन में भी कमी आई है और ग्रामीणों का शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। आजीविका डबरी बन रही आय का सशक्त जरिया नियद नेल्लानार क्षेत्र में 372 आजीविका डबरी की स्वीकृति देकर ग्रामीणों को आजीविकामूलक गतिविधियों से जोड़ने की पहल की गई है। जनपद पंचायत भैरमगढ़ के नियद नेल्लानार अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलनार, जहां कभी नक्सली दहशत के कारण ग्रामीण गांव छोड़कर विस्थापित होने पर मजबूर थे, अब पुनः जीवन की मुख्यधारा में लौट आया है। नियद नेल्लानार योजना में शामिल होने के बाद ग्रामीण अपने गांव लौट आए हैं। उनके आजीविका संवर्धन के लिए महात्मा गांधी नरेगा योजनांतर्गत वर्ष 2025-26 में हितग्राही श्री सहदेव कोरसा, श्री लखु और श्री सुदरू कोरसा की आजीविका डबरी पूर्ण हो चुकी हैं। इन डबरियों में मत्स्य पालन एवं हॉर्टिकल्चर विभाग से अभिसरण के माध्यम से मछली पालन एवं सब्जी उत्पादन का कार्य प्रस्तावित है। 2977 परिवारों को मिला पक्का आवास नियद नेल्लानार क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत आवास निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। इस योजना के तहत कुल 2,977 हितग्राहियों को आवास स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से अब तक 690 हितग्राहियों के पक्के आवास बनकर तैयार हो चुके हैं। इन आवासों में अब परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। गांव-गांव में बदलाव की सजीव तस्वीर जनपद पंचायत बीजापुर के नियद नेल्लानार अंतर्गत ग्राम दुगाली में मनरेगा से निर्मित कुआं अब 100 से अधिक ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा बन गया है। दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण जहां बोरिंग संभव नहीं थी, वहां यह कुआं स्थायी समाधान बनकर उभरा है। इससे ग्रामीणों को सुलभ पेयजल के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिला है। ग्राम पालनार में, जहां पहले प्रशासन की पहुंच नहीं थी, आज पंचायत भवन, आंगनबाड़ी और गौठान निर्माण कार्य जारी हैं, जिसमें वर्तमान में 200 से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं। कावड़गांव में 50 वर्षों के भय और अलगाव के बाद अब 100 प्रतिशत ग्रामीण श्रमिकों को जॉब कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। साथ ही इस गांव में सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल और मोबाइल टॉवर जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच चुकी हैं। सावनार (तोड़का पंचायत) में 9.35 लाख रुपए की लागत से बने आंगनबाड़ी भवन से 40–45 बच्चों को नियमित शिक्षा और पोषण मिल रहा है। पुसुकोण्टा (उसूर) में 11.69 लाख रुपए की लागत से निर्मित आंगनबाड़ी भवन ने बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया है। धरमारम और तोड़का क्षेत्र में उचित मूल्य दुकानों के निर्माण से अब ग्रामीणों को गांव में ही राशन मिल रहा है। ग्राम बांगोली में, जहां पहले 18 किलोमीटर दूर जाकर राशन लाना पड़ता था, अब 524 परिवारों को गांव में ही यह सुविधा उपलब्ध हो रही है। युवाओं का कौशल विकास और आत्मनिर्भरता पुनर्वासित आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से राजमिस्त्री प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिससे वे निर्माण कार्यों में रोजगार प्राप्त कर रहे हैं और अपने जीवन को नई दिशा दे रहे हैं। नियद नेल्लानार योजना और मनरेगा के प्रभावी अभिसरण से बीजापुर के अंदरूनी गांवों में अब विकास ने गति पकड़ ली है। रोजगार, बुनियादी ढांचे और शासन के प्रति बढ़ते विश्वास के साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी व्यापक और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जो विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में एक मजबूत कदम है। बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से बस्तर में समृद्धि की नई राह : मुख्यमंत्री श्री साय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर के जिन गांवों तक कभी विकास की पहुंच नहीं थी, वहां आज नियद नेल्लानार योजना और प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं के माध्यम से नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार हुआ है। हमारी सरकार का स्पष्ट विश्वास है कि जब विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तब ही स्थायी शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इन क्षेत्रों में रोजगार सृजन, सुरक्षित आवास, पेयजल, शिक्षा और आजीविका के अवसरों के विस्तार से न केवल लोगों का जीवन स्तर बेहतर हुआ है, बल्कि शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि संवेदनशील नीतियों, समन्वित प्रयासों और जनभागीदारी से सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव संभव है – और हम इस बदलाव को और गति देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।