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स्वदेशी तकनीक का कमाल, एनएमएल के वैज्ञानिकों ने तैयार किया सोने का विशेष गोलाकार पाउडर

 जमशेदपुर झारखंड के लौहनगरी जमशेदपुर के नाम एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है. सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल ) ने देश में पहली बार 22 कैरेट सोने का गोलाकार पाउडर तैयार करने में सफलता पाई है. यह पाउडर विशेष रूप से एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग ( थ्री डी प्रिंटिंग) के लिए विकसित किया गया है. उक्त बातें सीएसआईआर-एनएमएल के वैज्ञानिक डॉ. के. गोपाला ने शनिवार को साझा की. वे बिष्टुपुर स्थित एसएनटीआई ऑडिटोरियम में इंजीनियर्स संस्था (भारत) जमशेदपुर लोकल सेंटर द्वारा आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. के. गोपाला ने कहा कि एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की सफलता पूरी तरह से कच्चे माल यानी मेटल पाउडर की गुणवत्ता पर टिकी होती है. एनएमएल की ‘विशेष गैस एटोमाइजर सुविधा’ का उपयोग कर तैयार किया गया 22 कैरेट सोने का यह पाउडर स्वदेशी तकनीक का बेहतरीन उदाहरण है. इससे भविष्य में आभूषण निर्माण और अन्य जटिल तकनीकी क्षेत्रों में थ्री डी प्रिंटिंग के प्रयोग को एक नयी दिशा मिलेगी. इससे पूर्व कच्चे माल के संश्लेषण से उन्नत उत्पाद विकास एवं विशेषता निर्धारण विषय पर आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि मनोस डे (ऑफिस हेड, टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स) और विशिष्ट अतिथि विनीत कुमार साह (चीफ लॉन्ग प्रोडक्ट्स, टाटा स्टील एवं चेयरमैन, आईईआई) ने दीप प्रज्ज्वलित कर संयुक्त रूप से किया. कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे प्रयोगशाला के नवाचारों को सीधे उद्योगों से जोड़कर भारत को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है. लैब के रिसर्च का उपयोग फैक्ट्रियों में हो: मनोस डे मुख्य अतिथि मनोस डे ने अपने संबोधन में कच्चे माल के विकास और उन्नत उत्पाद निर्माण के बीच समन्वय को जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि लैब में होने वाले शोध तभी सार्थक हैं. जब वे कारखानों तक पहुंचे. उन्होंने इंजीनियरिंग क्षेत्र में लागत और ऊर्जा की बचत पर विशेष जोर देते हुए युवाओं को नयी तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया. जटिल डिजाइनों के लिए थ्री डी प्रिंटिंग अनिवार्य: विनीत कुमार साह संस्थान के चेयरमैन विनीत कुमार साह ने स्वागत भाषण में कहा कि वर्तमान समय में सटीक फिनिशिंग और जटिल ढांचों के निर्माण के लिए एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की मांग बढ़ी है. इस तकनीक के माध्यम से ऐसी ग्रेडेड सामग्री तैयार की जा सकती है. जो पारंपरिक निर्माण विधियों से संभव नहीं थी. स्टील की आंतरिक संरचना पर शोध: डॉ. मोनालिसा मंडल एनआईटी जमशेदपुर की डॉ. मोनालिसा मंडल ने एसएस 420 मार्टेंसिटिक स्टील पर अपना शोध प्रस्तुत किया. उन्होंने बताया कि डीएमएलएस तकनीक से उत्पाद बनाते समय यदि मानकों को सही ढंग से नियंत्रित किया जाए, तो उत्पादों की मजबूती और उनकी सूक्ष्म संरचना को काफी बेहतर बनाया जा सकता है. बढ़ेगा जंग के प्रति प्रतिरोध: कौशल किशोर टाटा स्टील आरएंडडी के प्रिंसिपल रिसर्चर कौशल किशोर ने वायर आर्क एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग पर व्याख्यान दिया. उन्होंने 316 एल स्टेनलेस स्टील की सूक्ष्म संरचना में होने वाले बदलावों और उसके जंग प्रतिरोध पर पड़ने वाले प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी. उच्च तापमान तकनीक और सिरेमिक उत्पाद: डॉ. राम कृष्ण एनआईटी जमशेदपुर के डॉ. राम कृष्ण ने उच्च तापमान वाले वातावरण के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर चर्चा की. उन्होंने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सिरेमिक उत्पादों के विकास और उनके विशेषता निर्धारण की प्रक्रिया को समझाया. कार्यक्रम का संचालन जुस्को की सुकन्या दास ने किया. जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एस डी. भट्टाचार्जी ने किया. पूरे कार्यक्रम के सफल समन्वय में कृष्णेंदु शॉ की अहम भूमिका रही. संगोष्ठी के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए. विशेषज्ञों ने माना कि इस तरह के आयोजनों से इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के बीच एक प्रभावी साझा मंच तैयार होता है.

कलेक्टर का CEO पर अधिकार रद्द, हाईकोर्ट ने बहाली के आदेश दिए

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कलेक्टर की शक्तियों पर स्पष्ट सीमा तय करते हुए कहा है कि जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) का प्रभार बदलने का अधिकार कलेक्टर को नहीं है। अदालत ने इस मामले में कलेक्टर के आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता शुभा दामोदर मिश्रा को पुनः उनके पद पर बहाल करने के निर्देश दिए। इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश पार्थ प्रतिम साहू ने की। मामला बिलासपुर के निवासी शुभा दामोदर मिश्रा से जुड़ा है। उन्हें 18 जून 2025 को सचिव, आदिम जाति विकास विभाग, रायपुर द्वारा जनपद पंचायत गौरेला (जिला जीपीएम) में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के पद पर पदस्थ किया गया था। वे जून 2025 से इस पद पर कार्यरत थीं। इसी दौरान 11 मार्च 2026 को कलेक्टर, जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) ने आदेश जारी कर उन्हें CEO के प्रभार से हटाते हुए सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, गौरेला के कार्यालय में पदस्थ कर दिया। इस आदेश के खिलाफ शुभा मिश्रा ने अधिवक्ता अभिषेक पांडेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर में रिट याचिका दायर की। याचिका में तर्क दिया गया कि 11 अप्रैल 2025 को प्रमुख सचिव, आदिम जाति विकास विभाग द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, शासन द्वारा नियुक्त किसी भी जनपद पंचायत CEO को हटाने का अधिकार कलेक्टर को नहीं है। ऐसे मामलों में राज्य शासन की अनुमति आवश्यक होती है। मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए कलेक्टर द्वारा जारी आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही अदालत ने शुभा दामोदर मिश्रा को पुनः मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत गौरेला के पद पर पदस्थ करने के निर्देश दिए हैं।

स्कूली बच्चों को लू से बचाने के लिए बड़ा फैसला, सुबह 6:30 बजे से खुलेंगे बिहार के स्कूल, मिड-डे मील के नियमों में भी बदलाव

 पटना बिहार में बढ़ती गर्मी और लू को देखते हुए शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य के सभी सरकारी स्कूलों का समय बदल दिया गया है ताकि बच्चों को तेज धूप और गर्मी से बचाया जा सके. यह नई व्यवस्था 6 अप्रैल से लागू होकर 31 मई तक चलेगी. गर्मी की छुट्टियों से पहले तक स्कूल मॉर्निंग शिफ्ट में ही चलेंगे. नए टाइम टेबल के बारे में जानिए नए टाइम टेबल के अनुसार अब स्कूल सुबह 6:30 बजे खुलेंगे और दोपहर 12:30 बजे तक पढ़ाई होगी. दिन की शुरुआत प्रार्थना और अन्य गतिविधियों से होगी, जिसके बाद रेगुलर क्लासेज चलेंगी. सातवीं घंटी के बाद 12:20 बजे छात्रों की छुट्टी कर दी जाएगी. इसके बाद 10 मिनट तक शिक्षकों की बैठक होगी. इसमें दिनभर की समीक्षा और आगे की योजना बनाई जाएगी. क्या- क्या बदलाव हुआ गर्मी को ध्यान में रखते हुए मध्याह्न भोजन यानी मिड-डे मील की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है. जिन स्कूलों में बच्चों की संख्या ज्यादा है और सभी को एक साथ खाना खिलाना मुश्किल है, वहां दो हिस्सों में भोजन कराने की छूट दी गई है. कुछ बच्चे ब्रेक में खाना खाएंगे, जबकि बाकी बच्चे तीसरी या चौथी क्लास के दौरान भोजन कर सकेंगे. इस दौरान पढ़ाई का काम भी जारी रहेगा. जहां स्कूल दो शिफ्ट में चलते हैं, वहां स्थानीय हालात के हिसाब से समय तय करने का अधिकार जिला शिक्षा पदाधिकारी को दिया गया है. डीएम को भी जरूरत पड़ने पर स्कूल के समय में बदलाव करने की छूट दी गई है.

शराब की बोतलों ने मुरैना के नाले को घेर लिया, लोगों में मचा हड़कंप

मुरैना. मुरैना जिले के कैलारस थाने इलाके में आने वाले सेमई गांव के नाले में बड़ी संख्या में शराब की बोतलें देख गांव में खलबली मच गई। सूचना के बाद पुलिस ने नाले से सैकड़ों बोतलों को जब्त किया। पुलिस शराब की बोतलों की गणना कर रही है, अनुमान है कि 15 पेटी से ज्यादा शराब है। रविवार की सुबह खेतों की ओर जा रहे कुछ ग्रामीणों ने सेमई के नाले में देसी शराब की बोतले पानी में ऊपर देखीं। शराब की बोतल इतनी संख्या में थीं कि नाले का पूरा पानी बोतलों से पट गया था। सूचना के बाद कैलारस थाना प्रभारी सतेंद्र सिंह कुशवाह मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से पुलिस टीम ने पानी में उतराते हुए शराब की बातलों को जब्त किया। शराब की बोतलों पर आबकारी विभाग दर्ज ग्रामीणों में चर्चा थी कि यह नकली या जहरीली शराब हो सकती है, जिसे रात के अंधेरे में नाले में फेंका गया हो। कैलारस टीआई ने नकली या जहरीली शराब की संभावनाओं से इंकार करते हुए कहा, कि शराब की बोतलों पर आबकारी विभाग दर्ज है और शराब निर्माण 2025 मध्य में हुआ है। पुलिस का अनुमान है कि मार्च महीने में शराब ठेकेदार दुकानों पर बचे हुए स्टॉक को भी नाले में फेंक गए हों। यह भी आशंका है कल रात पूरे जिले में पुलिस का कांबिंग गश्त चली थी, तब शराब तस्कर पकड़े जाने के डर से शराब की पेटियों को नाले में फेंक गए होंगे। कैलारस टीआई कुशवाह के अनुसार बोतलों की गणना के बाद ही मात्रा का सटीक पता चलेगा। इसके अलावा जांच-पड़ताल कर रहे हैं कि शराब नाले में किसने इन्हें फेंका।

पंजाब में शराब ठेकेदारों को राहत, लाइसेंस फीस में 15% तक की कटौती

जालंधर/चंडीगढ़   पंजाब में आबकारी विभाग द्वारा ग्रुपों की नीलामी प्रक्रिया के बावजूद अभी भी 10 एक्साइज (आबकारी) ग्रुप अलॉट होने से रह गए हैं। महंगे रेट और कम मुनाफे के कारण ठेकेदार इन ग्रुपों को खरीदने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए आबकारी विभाग ने ठेकेदारों को आकर्षित करने के लिए लाइसेंस फीस में कुल 15 प्रतिशत तक की कटौती कर दी है, ताकि लंबित ग्रुपों को जल्द से जल्द अलॉट किया जा सके। आवेदन करने की सीमा तय ठेकेदारों ने बताया कि विभाग ने अब 4 अप्रैल को दोपहर 4 बजे तक ई-टैंडर के माध्यम से आवेदन करने की अंतिम समय सीमा तय की है। इसके तहत न्यू चंडीगढ़, भारतगढ़ (रोपड़), अमृतसर सिटी सैंटर, टांडा (होशियारपुर-2), दसूया (होशियारपुर-2), बी.एम.सी. चौक (जालंधर ईस्ट), फगवाड़ा-2, बस स्टैंड (पठानकोट) और फिरोजपुर कैंट सहित कई प्रमुख क्षेत्र अभी भी लंबित ग्रुपों में शामिल हैं, जिन्हें विभाग जल्द अलॉट करना चाहता है। ठेकेदारों का कहना है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है, जिसके चलते वे नए ग्रुप लेने से हिचकिचा रहे हैं।  उनका यह भी मानना है कि यदि अंग्रेजी शराब की बिक्री और वितरण पर सरकार का नियंत्रण बढ़ाया जाए, तो बाजार में चल रही अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा को खत्म किया जा सकता है और कारोबार में स्थिरता लाई जा सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि नीतियों में और सुधार किए जाएं, ताकि ठेकेदारों का भरोसा बहाल हो सके और आबकारी विभाग को भी राजस्व का नुकसान न उठाना पड़े।  …तो  राज्य के राजस्व पर पड़ सकता है नकारात्मक प्रभाव  फिलहाल विभाग द्वारा दी गई रियायतों के बावजूद यह देखना बाकी है कि 4 अप्रैल तक इन लंबित ग्रुपों के लिए कितने आवेदन आते हैं और स्थिति कितनी सुधरती है। इसके अलावा आबकारी विभाग के अधिकारियों का मानना है कि लाइसैंस फीस में की गई 15 प्रतिशत की कटौती से ठेकेदारों को कुछ राहत मिलेगी और ई-टैंडर प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। विभाग लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहा है और जरूरत पड़ने पर आगे और राहत देने पर भी विचार किया जा सकता है, ताकि सभी ग्रुप समय पर अलॉट हो सकें और सरकार के राजस्व लक्ष्य पूरे किए जा सकें।  विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इससे राज्य के राजस्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में सरकार के लिए जरूरी हो जाता है कि वह बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति बनाए।  

रांची जेल में प्रशांत बोस की मौत, अंतिम संस्कार को लेकर प्रशासन और परिजनों के बीच उलझा मामला

रांची एक करोड़ रुपये के इनामी रहे प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस (82 वर्ष) की मौत बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में तीन अप्रैल को हो गयी थी. इसके बाद प्रशांत बोस का शव रिम्स के मोर्चरी में पड़ा रहा. बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद उसकी पत्नी और माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य शीला मरांडी ने जेल प्रशासन के माध्यम से जिला प्रशासन को पत्र लिखकर कहा कि उसके पति का कोई अन्य परिजन नहीं है. इसलिए जिला प्रशासन ही अंतिम संस्कार की व्यवस्था करे. हालांकि शनिवार रात तक जिला प्रशासन के स्तर पर इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया जा सका था. जेल प्रशासन ने खड़े किए हाथ इससे पहले शनिवार को कोलकाता से प्रशांत बोस के कुछ परिजन बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा पहुंचे. परिजनों ने जेल प्रशासन के अधिकारियों को एक पत्र दिखाया, जो प्रशांत बोस के बड़े भाई का था. उस पत्र में लिखा था कि उनकी उम्र 84 वर्ष है और वे स्वयं आकर अपने भाई का शव ले जाने में असमर्थ हैं. इसलिए उन्होंने अन्य परिजनों को भेजा है. उनके भाई प्रशांत बोस का शव उन्हें सौंप दिया जाये ताकि वे अपने रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कर सकें. जेल प्रशासन ने उन्हें जिला प्रशासन के पास यह कहते हुए भेज दिया कि इस पर निर्णय लेना जेल प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में नहीं है. इसके बाद परिजनों ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से मिलकर शव सौंपने की मांग की. बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा के अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर ने बताया कि जेल में बंद उनकी पत्नी शीला मरांडी ने पत्र लिखकर कहा है कि प्रशासन स्वयं प्रशांत बोस का अंतिम संस्कार कर दे, क्योंकि उनका कोई परिजन नहीं है. दूसरी ओर, कोलकाता से उनके बड़े भाई का पत्र लेकर कुछ लोग आये थे, जिन्हें जिला प्रशासन से संपर्क करने के लिए कहा गया था. अब क्या होगा प्रशांत बोस की मृत्यु की सूचना एनएचआरसी और रांची के न्यायिक आयुक्त को भेज दी गयी है. न्यायिक आयुक्त स्तर पर मामले की जांच न्यायिक मजिस्ट्रेट से करायी जा सकती है. जिला प्रशासन जिस व्यक्ति को भी प्रशांत बोस का शव सौंपेगा, उसकी प्राप्ति रसीद जेल प्रशासन को देनी होगी, ताकि इसकी सूचना एनएचआरसी को दी जा सके. क्या है एनएचआरसी का दिशा-निर्देश एनएचआरसी के दिशानिर्देश के अनुसार मृत बंदी का अंतिम संस्कार 24 घंटे के भीतर कर दिया जाना चाहिए. परिजन द्वारा दावा किये जाने की स्थिति में प्रशासन अधिकतम 72 घंटे तक शव को मोर्चरी में रख सकता है. बंदी की मृत्यु पर अंतिम संस्कार के लिए कितनी राशि दी जायेगी, इसका स्पष्ट उल्लेख जेल मैनुअल में नहीं है. क्या कहना है डीसी का रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि प्रशांत बोस की मृत्यु शुक्रवार की सुबह हुई है. अंतिम संस्कार के लिए जिला प्रशासन से अनुरोध किया गया है. हम प्राप्त पत्र का परीक्षण कर रहे हैं और संबंधित पक्षों से मंतव्य भी लिया जा रहा है.

पर्यटन का ‘अनदेखा रत्न’ है झारखंड, आनंद महिंद्रा ने साझा की सारंडा के जंगलों और झरनों की मनमोहक झलक

रांची महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक दिलचस्प पोस्ट शेयर करते हुए झारखंड की प्राकृतिक खूबसूरती को लेकर अपनी सोच साझा की है. आइए जानते हैं उन्होंने क्या लिखा. पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित हिल स्टेशन : आनंद महिंद्रा आनंद महिंद्रा ने लिखा कि भारत में छुट्टियों की योजना बनाते समय आमतौर पर गोवा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान जैसे लोकप्रिय स्थानों का ही नाम सामने आता है. उन्होंने यह बताया की उनकी नजर @IndiaAesthetica द्वारा पोस्ट की गई मनमोहक तस्वीरों पर पड़ी. ये तस्वीर झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में स्थित मेघातुबुरु हिल स्टेशन की हैं, जिसे ऊंचाई के कारण “बादलों की पहाड़ी” के नाम से जाना जाता है. करीब 4,300 फीट की ऊंचाई पर बसा यह स्थान सरंडा वन के बीच स्थित है, जो 700 पहाड़ियों से घिरा हुआ है. यहां से सूर्यास्त का नजारा, जंगल के झरने और प्राकृतिक दृश्य काफी आकर्षक हैं और यह इलाका अभी भी काफी हद तक अछूता है.      झारखंड में और भी कई खास जगहें उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि झारखंड में पर्यटन सुविधाएं बहुत सीमित हैं – बहुत कम रिसॉर्ट और ज्यादातर गेस्टहाउस है. आनंद महिंद्रा ने झारखंड के बारे में और जानकारी जुटाई तो पता चला कि यहां नेतरहाट के प्रसिद्ध सूर्योदय, बेतला राष्ट्रीय उद्यान, देवघर का पवित्र ज्योतिर्लिंग, रांची के आसपास के जलप्रपात और प्राचीन सारंडा जंगल मौजूद हैं. फिर भी यह जगह अक्सर नजरअंदाज हो जाती है. झारखंड में समझदार यात्रियों के लिए बहुत कुछ है. बस अब तक इसका खुलकर प्रचार नहीं किया है.

मौत का बुलाव,नौकरी के लालच में रूसी सेना में जबरन भर्ती हुआ था हरियाणा का लाल, आखिरी कॉल में मांगी थी जान की भीख

फतेहाबाद हरियाणा के फतेहाबाद जिले के कुम्हारिया गांव में मातम छाया हुआ है। 23 साल के अंकित जांगड़ा की अस्थियां और अवशेष शनिवार को जब उसके गांव पहुंचे, तो न केवल एक परिवार का सपना टूटा, बल्कि उन सैकड़ों भारतीय युवाओं की सुरक्षा पर भी बड़ा सवालिया निशान लग गया जो बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाकर युद्ध की आग में फंस गए हैं। अंकित ने आखिरी बार कहा था, "हमें बचा लीजिए… हमारी जान किसी भी पल खतरे में पड़ सकती है।" 'द ट्रिब्यून' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 10 सितंबर 2025 को अंकित जांगड़ा ने अपनी जान की भीख मांगी थी। वह रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी इलाके में फंसा हुआ था। उस कॉल के 24 घंटे के भीतर उससे संपर्क टूट गया। महीनों के इंतजार और प्रार्थनाओं के बाद, शुक्रवार को उसके परिवार को वह खबर मिली जिससे वे सबसे ज्यादा डरते थे। अंकित अब इस दुनिया में नहीं रहा। कैसे शुरू हुआ यह 'मौत का सफर'? अंकित जांगड़ा फरवरी 2025 में स्टडी वीजा पर मॉस्को गया था। वहां उसने एक कॉलेज में लैंग्वेज कोर्स में दाखिला लिया और अपना खर्च चलाने के लिए एक रेस्टोरेंट में पार्ट-टाइम काम करना शुरू किया। अंकित और उसके दोस्त विजय पूनिया को एक महिला एजेंट ने ऊंचे वेतन वाली नौकरियों का लालच दिया। पढ़ाई और छोटी नौकरियों के बहाने गए इन युवाओं को धोखे से रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया। अंकित के साथ हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के लगभग 15 अन्य युवक भी थे। वापसी का रास्ता सिर्फ मौत अंकित ने अपनी आखिरी बातचीत में जो खुलासे किए, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले थे। उसने बताया कि उन्हें रूस से करीब 200-300 किमी दूर कब्जे वाले क्षेत्र सेलिडोव में रखा गया था। उन्हें 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद 20 लाख रुपये और 1.5-2 लाख रुपये मासिक वेतन का वादा किया गया था, लेकिन उन्हें कभी वहां से जाने नहीं दिया गया। ये युवा ब्रेड और जैम पर जिंदा थे। अंकित ने बताया था कि उनके समूह के 5 साथियों की पहले ही मौत हो चुकी थी। बंदूक की नोक पर भर्ती जब इन युवाओं ने वापस घर जाने की जिद की, तो रूसी अधिकारियों ने उन पर बंदूकें तान दीं। अधिकारियों का कहना था, "या तो यहां मरोगे या दुश्मन को मारोगे, वापस जाने का कोई रास्ता नहीं है।" परिवार की अंतहीन गुहार अंकित के बड़े भाई रघुवीर जांगड़ा और पूरे परिवार ने अपने बेटे को बचाने के लिए हर दरवाजा खटखटाया। परिवार ने दिल्ली और चंडीगढ़ के अधिकारियों, रूसी दूतावास, विदेश मंत्रालय (MEA) और रक्षा मंत्रालय से बार-बार गुहार लगाई। सिरसा सांसद कुमारी शैलजा और रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी विदेश मंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद, अंकित को जिंदा वापस नहीं लाया जा सका। अब परिवार की सबसे बड़ी चिंता अंकित के दोस्त विजय पूनिया को लेकर है, जिसका अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। रूस में जबरन भर्ती का पैटर्न अंकित की कहानी कोई इकलौती घटना नहीं है। पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां भारतीय युवाओं को हेल्पर या मल्टी-टास्किंग स्टाफ के नाम पर रूस बुलाया गया और फिर उन्हें अग्रिम मोर्चे पर लड़ने के लिए मजबूर किया गया। भारत में सक्रिय कई संदिग्ध एजेंट सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को निशाना बना रहे हैं। भारत सरकार ने रूस से कई बार अनुरोध किया है कि धोखे से भर्ती किए गए भारतीयों को कार्यमुक्त किया जाए, लेकिन युद्ध की भीषणता के बीच यह प्रक्रिया बेहद जटिल और धीमी साबित हो रही है। गांव में पसरा सन्नाटा शनिवार को जब अंकित का पार्थिव शरीर दिल्ली पहुंचा और फिर उसके गांव कुम्हारिया ले जाया गया, तो वहां का माहौल हृदयविदारक था। गांव वाले आक्रोशित हैं और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनके कई सवाल हैं। उस महिला एजेंट पर कार्रवाई कब होगी जिसने इन युवाओं को मौत के मुंह में धकेला? विजय पूनिया कहां है? क्या सरकार अन्य लापता युवाओं को सुरक्षित वापस लाने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी?

हरियाणा के पूर्व सीएम हुड्डा और AJL को क्लीन चिट, ईडी का मनी लॉन्ड्रिंग केस भी हुआ बंद

चंडीगढ़ पंचकूला की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को पंचकूला में एक भूखंड के दोबारा आवंटन से जुड़े धनशोधन मामले में आरोपमुक्त कर दिया। अदालत ने उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले को भी बंद कर दिया। यह आदेश पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के 25 फरवरी के एक फैसले के बाद आया है, जिसमें 2021 के उस आदेश को रद्द कर दिया गया था, जिसके तहत इस मामले में हुड्डा और अन्य लोगों पर आरोप तय किए गए थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुड्डा सुनवाई के दौरान खुद अदालत में पेश हुए। हुड्डा के वकील एस.पी.एस. परमार ने यहां पत्रकारों को बताया कि धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष न्यायाधीश राजीव गोयल ने ईडी की शिकायत को बंद कर दिया क्योंकि हुड्डा और 'नेशनल हेराल्ड' के प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को सीबीआई की जांच वाले मुख्य मामले में पहले ही आरोपमुक्त किया जा चुका था। उच्च न्यायालय ने पंचकूला में एक भूखंड के दोबारा आवंटन के संबंध में हुड्डा और एजेएल के खिलाफ लगाए गए आपराधिक आरोपों को रद्द कर दिया था। न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया की अध्यक्षता वाली उच्च न्यायालय की पीठ ने अप्रैल 2021 के विशेष सीबीआई अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपियों पर आरोप तय किए गए थे और उनकी आरोपमुक्त करने की याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि रिकॉर्ड पर रखे गए दस्तावेजों से याचिकाकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए कथित अपराधों के आवश्यक तत्व प्रथम दृष्टया भी साबित नहीं होते हैं। अदालत ने माना कि इस मामले में उनके खिलाफ आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं हैं। उच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया, ''मुकदमे को जारी रखना अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।'' यह मामला 1982 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) द्वारा एजेएल को पंचकूला के सेक्टर 6 में एक भूखंड के आवंटन से जुड़ा है। तय समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा न होने के कारण 1992 में इस प्लॉट को वापस ले लिया गया था। हुडा ने 1995 और 1996 में एजेएल की अपीलें खारिज कर दी थीं। साल 2005 में हुड्डा के हरियाणा के मुख्यमंत्री बनने के बाद, इस भूखंड को एजेएल को मूल दर पर दोबारा आवंटित कर दिया गया। हरियाणा में भाजपा के सत्ता में आने के बाद, 2016 में राज्य के सतर्कता ब्यूरो ने एक मामला दर्ज किया, जिसे बाद में सीबीआई ने अपने हाथ में ले लिया। आरोप लगाया गया था कि भूखंड के दोबारा आवंटन से सरकारी खजाने को आर्थिक नुकसान हुआ। अप्रैल 2021 में, विशेष सीबीआई अदालत ने हुड्डा और एजेएल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साज़िश) और 420 (धोखाधड़ी) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया। इसके बाद हुड्डा ने विशेष सीबीआई अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया। ईडी ने 2019 में इस मामले में अपना पहला आरोपपत्र दायर किया था।

गैर-हाजिर अध्यापकों पर नोटिस जारी, पंजाब सरकार की सख्त कार्रवाई की तैयारी

लुधियाना. नगर निगम के संयुक्त कमिश्नर-कम-सिटी सैंसस ऑफिसर ने जनगणना (सैंसस) के काम में लापरवाही बरतने के आरोप में 3 अध्यापकों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है। ये कर्मचारी 2 अप्रैल को रखी गई अनिवार्य फील्ड ट्रेनिंग से बिना किसी सूचना के गायब पाए गए थे। सैंसस ऑफिसर कार्यालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार जनगणना 2027 के पहले चरण (हाऊस-लिस्टिंग और हाऊसिंग सैंसस) के लिए इन कर्मचारियों की ड्यूटी बतौर 'फील्ड ट्रेनर' लगाई गई थी। इन्हें 2, 3 और 4 अप्रैल को माता रानी चौक के पास स्थित नगर निगम जोन-ए के मीटिंग हॉल में ट्रेनिंग के लिए उपस्थित होना था। ड्यूटी से गैर-हाजिर रहने पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए इनके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव रखा है। जिला शिक्षा अधिकारी (स) ने संबंधित स्कूलों को ये नोटिस तुरंत डिलीवर करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। स्टाफ की कमी और मल्टी-टास्किंग का बोझ इस कार्रवाई ने सरकारी स्कूलों की उस कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है जिससे विभाग आंखें मूंद कर बैठा है। जिले ही नहीं बल्कि पंजाब भर के सरकारी स्कूल पिछले लंबे समय से अध्यापकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। स्कूलों में पहले से ही स्टाफ कम है और जो अध्यापक तैनात हैं, उन पर काम का बोझ अपनी क्षमता से कई गुना ज्यादा है। एक तरफ जहां स्कूलों में नया सैशन शुरू हो चुका है और नए दाखिले की प्रक्रिया जोरों पर है, वहीं दूसरी ओर अध्यापकों को गैर-अकादमिक कामों में उलझाया जा रहा है। तिहरे दबाव के बीच काम कर रहे अध्यापक वर्तमान में अध्यापक दोहरे नहीं बल्कि तिहरे दबाव के बीच काम कर रहे हैं। बड़ी संख्या में अध्यापक बोर्ड परीक्षाओं की मार्किंग ड्यूटी पर लगे हुए हैं। दूसरी तरफ, विभाग द्वारा 'मिशन समर्थ' के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अध्यापकों पर अलग से दबाव बनाया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा रोजाना रिपोर्ट मांगी जाती है जिससे अध्यापकों का पूरा ध्यान केवल डेटा जुटाने में ही निकल जाता है। ऐसे में जनगणना जैसे कार्यों के लिए स्कूलों से अध्यापकों को खींचना शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक साबित हो रहा है।