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पंजाब में शराब ठेकेदारों को राहत, लाइसेंस फीस में 15% तक की कटौती

जालंधर/चंडीगढ़   पंजाब में आबकारी विभाग द्वारा ग्रुपों की नीलामी प्रक्रिया के बावजूद अभी भी 10 एक्साइज (आबकारी) ग्रुप अलॉट होने से रह गए हैं। महंगे रेट और कम मुनाफे के कारण ठेकेदार इन ग्रुपों को खरीदने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए आबकारी विभाग ने ठेकेदारों को आकर्षित करने के लिए लाइसेंस फीस में कुल 15 प्रतिशत तक की कटौती कर दी है, ताकि लंबित ग्रुपों को जल्द से जल्द अलॉट किया जा सके। आवेदन करने की सीमा तय ठेकेदारों ने बताया कि विभाग ने अब 4 अप्रैल को दोपहर 4 बजे तक ई-टैंडर के माध्यम से आवेदन करने की अंतिम समय सीमा तय की है। इसके तहत न्यू चंडीगढ़, भारतगढ़ (रोपड़), अमृतसर सिटी सैंटर, टांडा (होशियारपुर-2), दसूया (होशियारपुर-2), बी.एम.सी. चौक (जालंधर ईस्ट), फगवाड़ा-2, बस स्टैंड (पठानकोट) और फिरोजपुर कैंट सहित कई प्रमुख क्षेत्र अभी भी लंबित ग्रुपों में शामिल हैं, जिन्हें विभाग जल्द अलॉट करना चाहता है। ठेकेदारों का कहना है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है, जिसके चलते वे नए ग्रुप लेने से हिचकिचा रहे हैं।  उनका यह भी मानना है कि यदि अंग्रेजी शराब की बिक्री और वितरण पर सरकार का नियंत्रण बढ़ाया जाए, तो बाजार में चल रही अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा को खत्म किया जा सकता है और कारोबार में स्थिरता लाई जा सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि नीतियों में और सुधार किए जाएं, ताकि ठेकेदारों का भरोसा बहाल हो सके और आबकारी विभाग को भी राजस्व का नुकसान न उठाना पड़े।  …तो  राज्य के राजस्व पर पड़ सकता है नकारात्मक प्रभाव  फिलहाल विभाग द्वारा दी गई रियायतों के बावजूद यह देखना बाकी है कि 4 अप्रैल तक इन लंबित ग्रुपों के लिए कितने आवेदन आते हैं और स्थिति कितनी सुधरती है। इसके अलावा आबकारी विभाग के अधिकारियों का मानना है कि लाइसैंस फीस में की गई 15 प्रतिशत की कटौती से ठेकेदारों को कुछ राहत मिलेगी और ई-टैंडर प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। विभाग लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहा है और जरूरत पड़ने पर आगे और राहत देने पर भी विचार किया जा सकता है, ताकि सभी ग्रुप समय पर अलॉट हो सकें और सरकार के राजस्व लक्ष्य पूरे किए जा सकें।  विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इससे राज्य के राजस्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में सरकार के लिए जरूरी हो जाता है कि वह बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति बनाए।  

रांची जेल में प्रशांत बोस की मौत, अंतिम संस्कार को लेकर प्रशासन और परिजनों के बीच उलझा मामला

रांची एक करोड़ रुपये के इनामी रहे प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस (82 वर्ष) की मौत बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में तीन अप्रैल को हो गयी थी. इसके बाद प्रशांत बोस का शव रिम्स के मोर्चरी में पड़ा रहा. बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद उसकी पत्नी और माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य शीला मरांडी ने जेल प्रशासन के माध्यम से जिला प्रशासन को पत्र लिखकर कहा कि उसके पति का कोई अन्य परिजन नहीं है. इसलिए जिला प्रशासन ही अंतिम संस्कार की व्यवस्था करे. हालांकि शनिवार रात तक जिला प्रशासन के स्तर पर इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया जा सका था. जेल प्रशासन ने खड़े किए हाथ इससे पहले शनिवार को कोलकाता से प्रशांत बोस के कुछ परिजन बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा पहुंचे. परिजनों ने जेल प्रशासन के अधिकारियों को एक पत्र दिखाया, जो प्रशांत बोस के बड़े भाई का था. उस पत्र में लिखा था कि उनकी उम्र 84 वर्ष है और वे स्वयं आकर अपने भाई का शव ले जाने में असमर्थ हैं. इसलिए उन्होंने अन्य परिजनों को भेजा है. उनके भाई प्रशांत बोस का शव उन्हें सौंप दिया जाये ताकि वे अपने रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कर सकें. जेल प्रशासन ने उन्हें जिला प्रशासन के पास यह कहते हुए भेज दिया कि इस पर निर्णय लेना जेल प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में नहीं है. इसके बाद परिजनों ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से मिलकर शव सौंपने की मांग की. बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा के अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर ने बताया कि जेल में बंद उनकी पत्नी शीला मरांडी ने पत्र लिखकर कहा है कि प्रशासन स्वयं प्रशांत बोस का अंतिम संस्कार कर दे, क्योंकि उनका कोई परिजन नहीं है. दूसरी ओर, कोलकाता से उनके बड़े भाई का पत्र लेकर कुछ लोग आये थे, जिन्हें जिला प्रशासन से संपर्क करने के लिए कहा गया था. अब क्या होगा प्रशांत बोस की मृत्यु की सूचना एनएचआरसी और रांची के न्यायिक आयुक्त को भेज दी गयी है. न्यायिक आयुक्त स्तर पर मामले की जांच न्यायिक मजिस्ट्रेट से करायी जा सकती है. जिला प्रशासन जिस व्यक्ति को भी प्रशांत बोस का शव सौंपेगा, उसकी प्राप्ति रसीद जेल प्रशासन को देनी होगी, ताकि इसकी सूचना एनएचआरसी को दी जा सके. क्या है एनएचआरसी का दिशा-निर्देश एनएचआरसी के दिशानिर्देश के अनुसार मृत बंदी का अंतिम संस्कार 24 घंटे के भीतर कर दिया जाना चाहिए. परिजन द्वारा दावा किये जाने की स्थिति में प्रशासन अधिकतम 72 घंटे तक शव को मोर्चरी में रख सकता है. बंदी की मृत्यु पर अंतिम संस्कार के लिए कितनी राशि दी जायेगी, इसका स्पष्ट उल्लेख जेल मैनुअल में नहीं है. क्या कहना है डीसी का रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि प्रशांत बोस की मृत्यु शुक्रवार की सुबह हुई है. अंतिम संस्कार के लिए जिला प्रशासन से अनुरोध किया गया है. हम प्राप्त पत्र का परीक्षण कर रहे हैं और संबंधित पक्षों से मंतव्य भी लिया जा रहा है.

पर्यटन का ‘अनदेखा रत्न’ है झारखंड, आनंद महिंद्रा ने साझा की सारंडा के जंगलों और झरनों की मनमोहक झलक

रांची महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक दिलचस्प पोस्ट शेयर करते हुए झारखंड की प्राकृतिक खूबसूरती को लेकर अपनी सोच साझा की है. आइए जानते हैं उन्होंने क्या लिखा. पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित हिल स्टेशन : आनंद महिंद्रा आनंद महिंद्रा ने लिखा कि भारत में छुट्टियों की योजना बनाते समय आमतौर पर गोवा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान जैसे लोकप्रिय स्थानों का ही नाम सामने आता है. उन्होंने यह बताया की उनकी नजर @IndiaAesthetica द्वारा पोस्ट की गई मनमोहक तस्वीरों पर पड़ी. ये तस्वीर झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में स्थित मेघातुबुरु हिल स्टेशन की हैं, जिसे ऊंचाई के कारण “बादलों की पहाड़ी” के नाम से जाना जाता है. करीब 4,300 फीट की ऊंचाई पर बसा यह स्थान सरंडा वन के बीच स्थित है, जो 700 पहाड़ियों से घिरा हुआ है. यहां से सूर्यास्त का नजारा, जंगल के झरने और प्राकृतिक दृश्य काफी आकर्षक हैं और यह इलाका अभी भी काफी हद तक अछूता है.      झारखंड में और भी कई खास जगहें उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि झारखंड में पर्यटन सुविधाएं बहुत सीमित हैं – बहुत कम रिसॉर्ट और ज्यादातर गेस्टहाउस है. आनंद महिंद्रा ने झारखंड के बारे में और जानकारी जुटाई तो पता चला कि यहां नेतरहाट के प्रसिद्ध सूर्योदय, बेतला राष्ट्रीय उद्यान, देवघर का पवित्र ज्योतिर्लिंग, रांची के आसपास के जलप्रपात और प्राचीन सारंडा जंगल मौजूद हैं. फिर भी यह जगह अक्सर नजरअंदाज हो जाती है. झारखंड में समझदार यात्रियों के लिए बहुत कुछ है. बस अब तक इसका खुलकर प्रचार नहीं किया है.

मौत का बुलाव,नौकरी के लालच में रूसी सेना में जबरन भर्ती हुआ था हरियाणा का लाल, आखिरी कॉल में मांगी थी जान की भीख

फतेहाबाद हरियाणा के फतेहाबाद जिले के कुम्हारिया गांव में मातम छाया हुआ है। 23 साल के अंकित जांगड़ा की अस्थियां और अवशेष शनिवार को जब उसके गांव पहुंचे, तो न केवल एक परिवार का सपना टूटा, बल्कि उन सैकड़ों भारतीय युवाओं की सुरक्षा पर भी बड़ा सवालिया निशान लग गया जो बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाकर युद्ध की आग में फंस गए हैं। अंकित ने आखिरी बार कहा था, "हमें बचा लीजिए… हमारी जान किसी भी पल खतरे में पड़ सकती है।" 'द ट्रिब्यून' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 10 सितंबर 2025 को अंकित जांगड़ा ने अपनी जान की भीख मांगी थी। वह रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी इलाके में फंसा हुआ था। उस कॉल के 24 घंटे के भीतर उससे संपर्क टूट गया। महीनों के इंतजार और प्रार्थनाओं के बाद, शुक्रवार को उसके परिवार को वह खबर मिली जिससे वे सबसे ज्यादा डरते थे। अंकित अब इस दुनिया में नहीं रहा। कैसे शुरू हुआ यह 'मौत का सफर'? अंकित जांगड़ा फरवरी 2025 में स्टडी वीजा पर मॉस्को गया था। वहां उसने एक कॉलेज में लैंग्वेज कोर्स में दाखिला लिया और अपना खर्च चलाने के लिए एक रेस्टोरेंट में पार्ट-टाइम काम करना शुरू किया। अंकित और उसके दोस्त विजय पूनिया को एक महिला एजेंट ने ऊंचे वेतन वाली नौकरियों का लालच दिया। पढ़ाई और छोटी नौकरियों के बहाने गए इन युवाओं को धोखे से रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया। अंकित के साथ हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के लगभग 15 अन्य युवक भी थे। वापसी का रास्ता सिर्फ मौत अंकित ने अपनी आखिरी बातचीत में जो खुलासे किए, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले थे। उसने बताया कि उन्हें रूस से करीब 200-300 किमी दूर कब्जे वाले क्षेत्र सेलिडोव में रखा गया था। उन्हें 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद 20 लाख रुपये और 1.5-2 लाख रुपये मासिक वेतन का वादा किया गया था, लेकिन उन्हें कभी वहां से जाने नहीं दिया गया। ये युवा ब्रेड और जैम पर जिंदा थे। अंकित ने बताया था कि उनके समूह के 5 साथियों की पहले ही मौत हो चुकी थी। बंदूक की नोक पर भर्ती जब इन युवाओं ने वापस घर जाने की जिद की, तो रूसी अधिकारियों ने उन पर बंदूकें तान दीं। अधिकारियों का कहना था, "या तो यहां मरोगे या दुश्मन को मारोगे, वापस जाने का कोई रास्ता नहीं है।" परिवार की अंतहीन गुहार अंकित के बड़े भाई रघुवीर जांगड़ा और पूरे परिवार ने अपने बेटे को बचाने के लिए हर दरवाजा खटखटाया। परिवार ने दिल्ली और चंडीगढ़ के अधिकारियों, रूसी दूतावास, विदेश मंत्रालय (MEA) और रक्षा मंत्रालय से बार-बार गुहार लगाई। सिरसा सांसद कुमारी शैलजा और रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी विदेश मंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद, अंकित को जिंदा वापस नहीं लाया जा सका। अब परिवार की सबसे बड़ी चिंता अंकित के दोस्त विजय पूनिया को लेकर है, जिसका अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। रूस में जबरन भर्ती का पैटर्न अंकित की कहानी कोई इकलौती घटना नहीं है। पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां भारतीय युवाओं को हेल्पर या मल्टी-टास्किंग स्टाफ के नाम पर रूस बुलाया गया और फिर उन्हें अग्रिम मोर्चे पर लड़ने के लिए मजबूर किया गया। भारत में सक्रिय कई संदिग्ध एजेंट सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को निशाना बना रहे हैं। भारत सरकार ने रूस से कई बार अनुरोध किया है कि धोखे से भर्ती किए गए भारतीयों को कार्यमुक्त किया जाए, लेकिन युद्ध की भीषणता के बीच यह प्रक्रिया बेहद जटिल और धीमी साबित हो रही है। गांव में पसरा सन्नाटा शनिवार को जब अंकित का पार्थिव शरीर दिल्ली पहुंचा और फिर उसके गांव कुम्हारिया ले जाया गया, तो वहां का माहौल हृदयविदारक था। गांव वाले आक्रोशित हैं और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनके कई सवाल हैं। उस महिला एजेंट पर कार्रवाई कब होगी जिसने इन युवाओं को मौत के मुंह में धकेला? विजय पूनिया कहां है? क्या सरकार अन्य लापता युवाओं को सुरक्षित वापस लाने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी?

हरियाणा के पूर्व सीएम हुड्डा और AJL को क्लीन चिट, ईडी का मनी लॉन्ड्रिंग केस भी हुआ बंद

चंडीगढ़ पंचकूला की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को पंचकूला में एक भूखंड के दोबारा आवंटन से जुड़े धनशोधन मामले में आरोपमुक्त कर दिया। अदालत ने उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले को भी बंद कर दिया। यह आदेश पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के 25 फरवरी के एक फैसले के बाद आया है, जिसमें 2021 के उस आदेश को रद्द कर दिया गया था, जिसके तहत इस मामले में हुड्डा और अन्य लोगों पर आरोप तय किए गए थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुड्डा सुनवाई के दौरान खुद अदालत में पेश हुए। हुड्डा के वकील एस.पी.एस. परमार ने यहां पत्रकारों को बताया कि धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष न्यायाधीश राजीव गोयल ने ईडी की शिकायत को बंद कर दिया क्योंकि हुड्डा और 'नेशनल हेराल्ड' के प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को सीबीआई की जांच वाले मुख्य मामले में पहले ही आरोपमुक्त किया जा चुका था। उच्च न्यायालय ने पंचकूला में एक भूखंड के दोबारा आवंटन के संबंध में हुड्डा और एजेएल के खिलाफ लगाए गए आपराधिक आरोपों को रद्द कर दिया था। न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया की अध्यक्षता वाली उच्च न्यायालय की पीठ ने अप्रैल 2021 के विशेष सीबीआई अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपियों पर आरोप तय किए गए थे और उनकी आरोपमुक्त करने की याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि रिकॉर्ड पर रखे गए दस्तावेजों से याचिकाकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए कथित अपराधों के आवश्यक तत्व प्रथम दृष्टया भी साबित नहीं होते हैं। अदालत ने माना कि इस मामले में उनके खिलाफ आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं हैं। उच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया, ''मुकदमे को जारी रखना अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।'' यह मामला 1982 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) द्वारा एजेएल को पंचकूला के सेक्टर 6 में एक भूखंड के आवंटन से जुड़ा है। तय समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा न होने के कारण 1992 में इस प्लॉट को वापस ले लिया गया था। हुडा ने 1995 और 1996 में एजेएल की अपीलें खारिज कर दी थीं। साल 2005 में हुड्डा के हरियाणा के मुख्यमंत्री बनने के बाद, इस भूखंड को एजेएल को मूल दर पर दोबारा आवंटित कर दिया गया। हरियाणा में भाजपा के सत्ता में आने के बाद, 2016 में राज्य के सतर्कता ब्यूरो ने एक मामला दर्ज किया, जिसे बाद में सीबीआई ने अपने हाथ में ले लिया। आरोप लगाया गया था कि भूखंड के दोबारा आवंटन से सरकारी खजाने को आर्थिक नुकसान हुआ। अप्रैल 2021 में, विशेष सीबीआई अदालत ने हुड्डा और एजेएल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साज़िश) और 420 (धोखाधड़ी) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया। इसके बाद हुड्डा ने विशेष सीबीआई अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया। ईडी ने 2019 में इस मामले में अपना पहला आरोपपत्र दायर किया था।

गैर-हाजिर अध्यापकों पर नोटिस जारी, पंजाब सरकार की सख्त कार्रवाई की तैयारी

लुधियाना. नगर निगम के संयुक्त कमिश्नर-कम-सिटी सैंसस ऑफिसर ने जनगणना (सैंसस) के काम में लापरवाही बरतने के आरोप में 3 अध्यापकों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है। ये कर्मचारी 2 अप्रैल को रखी गई अनिवार्य फील्ड ट्रेनिंग से बिना किसी सूचना के गायब पाए गए थे। सैंसस ऑफिसर कार्यालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार जनगणना 2027 के पहले चरण (हाऊस-लिस्टिंग और हाऊसिंग सैंसस) के लिए इन कर्मचारियों की ड्यूटी बतौर 'फील्ड ट्रेनर' लगाई गई थी। इन्हें 2, 3 और 4 अप्रैल को माता रानी चौक के पास स्थित नगर निगम जोन-ए के मीटिंग हॉल में ट्रेनिंग के लिए उपस्थित होना था। ड्यूटी से गैर-हाजिर रहने पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए इनके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव रखा है। जिला शिक्षा अधिकारी (स) ने संबंधित स्कूलों को ये नोटिस तुरंत डिलीवर करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। स्टाफ की कमी और मल्टी-टास्किंग का बोझ इस कार्रवाई ने सरकारी स्कूलों की उस कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है जिससे विभाग आंखें मूंद कर बैठा है। जिले ही नहीं बल्कि पंजाब भर के सरकारी स्कूल पिछले लंबे समय से अध्यापकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। स्कूलों में पहले से ही स्टाफ कम है और जो अध्यापक तैनात हैं, उन पर काम का बोझ अपनी क्षमता से कई गुना ज्यादा है। एक तरफ जहां स्कूलों में नया सैशन शुरू हो चुका है और नए दाखिले की प्रक्रिया जोरों पर है, वहीं दूसरी ओर अध्यापकों को गैर-अकादमिक कामों में उलझाया जा रहा है। तिहरे दबाव के बीच काम कर रहे अध्यापक वर्तमान में अध्यापक दोहरे नहीं बल्कि तिहरे दबाव के बीच काम कर रहे हैं। बड़ी संख्या में अध्यापक बोर्ड परीक्षाओं की मार्किंग ड्यूटी पर लगे हुए हैं। दूसरी तरफ, विभाग द्वारा 'मिशन समर्थ' के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अध्यापकों पर अलग से दबाव बनाया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा रोजाना रिपोर्ट मांगी जाती है जिससे अध्यापकों का पूरा ध्यान केवल डेटा जुटाने में ही निकल जाता है। ऐसे में जनगणना जैसे कार्यों के लिए स्कूलों से अध्यापकों को खींचना शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक साबित हो रहा है। 

‘अपना पैनल’ का क्लीन स्वीप: बस्तर परिवहन संघ चुनाव में मिली बड़ी सफलता

बस्तर. बस्तर परिवहन संघ के चुनाव में इस बार ‘अपना पैनल’ ने पूरी ताकत दिखाते हुए सभी पदों पर जीत दर्ज कर एकतरफा बढ़त हासिल कर ली है, जिससे संघ की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अध्यक्ष पद पर प्रदीप पाठक ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को भारी मतों से हराकर स्पष्ट संदेश दिया कि इस बार मतदाताओं ने एकजुट होकर नेतृत्व बदलने का फैसला किया है। देर रात परिणाम घोषित होते ही संघ कार्यालय के बाहर जश्न का माहौल बन गया, जहां आतिशबाजी और मिठाईयों के साथ जीत का उत्सव देर तक चलता रहा। पूरे दिन चले मतदान के दौरान बीपीएस कार्यालय के बाहर गहमागहमी का माहौल रहा, जहां दोनों पैनलों के समर्थक वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए लगातार प्रयास करते नजर आए। सुबह धीमी शुरुआत के बाद दोपहर में मतदान ने रफ्तार पकड़ी और बड़ी संख्या में मतदाताओं, खासकर महिलाओं की भागीदारी ने चुनाव को और रोचक बना दिया। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस और ट्रैफिक टीम लगातार मुस्तैद रही, जिससे पूरे दिन मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। मतदान और मतगणना के हर राउंड में मुकाबला रोमांचक बना रहा, लेकिन अंततः ‘अपना पैनल’ ने बाजी मार ली। नई कार्यकारिणी ने साफ किया है कि उनका मुख्य लक्ष्य परिवहन व्यवसाय को नई दिशा देना और सदस्यों के लिए बेहतर अवसर तैयार करना होगा। प्रशासन के साथ तालमेल बनाकर काम करने और व्यवसाय को मजबूत करने के वादे के साथ अब नई टीम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

प्रीमियम शराब और बीयर पर पाबंदी, मध्य प्रदेश में बढ़ा शराब संकट

भोपाल. मध्य प्रदेश में बीयर का संकट बढ़ता जा रहा है। बीयर का सीमित स्टॉक होने की वजह से आबकारी विभाग ने अन्य राज्यों में बीयर के निर्यात पर रोक लगा दी है। शराब के प्रीमियम ब्रांड का स्टॉक भी सीमित है। इसके साथ ही प्रदेश में नई शराब दुकानों के संचालन के शुरुआती दिनों में ही सप्लाई और बिलिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ठेकेदारों का कहना है कि प्रीमियम ब्रांड्स के बिना दुकान चलाना लगभग असंभव है, लेकिन इन कंपनियों के लोकप्रिय ब्रांड्स की बिलिंग ही शुरू नहीं हो पाई है। ठेकेदारों का आरोप है कि आबकारी विभाग समय पर माल उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, जिसके कारण कई दुकानों में शुरुआती दिनों से ही बेचने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद नहीं है। ऐसे में ठेकेदारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दुकान में माल ही नहीं होगा, तो वे करोड़ों रुपये की आबकारी ड्यूटी कैसे जमा करेंगे। स्थिति यह है कि आठ से 10 दिन केवल स्टॉक उपलब्ध कराने में ही निकल सकते हैं। ग्रीष्म ऋतु में बीयर सीजन का पीक पीरियड होता है। यदि इस दौरान दुकानों पर बीयर और प्रीमियम ब्रांड्स उपलब्ध नहीं हुए, तो ठेकेदारों को शुरुआती चरण में ही भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। सूत्रों के मुताबिक, यही एक बड़ा कारण है कि कई स्थानों पर ठेके उठाने को लेकर उत्साह कम दिखाई दे रहा है। कारोबारियों का कहना है कि सप्लाई, बिलिंग और ब्रांड उपलब्धता जैसे बुनियादी मुद्दे ठेका आवंटन से पहले ही अंतिम रूप से तय कर लिए जाने चाहिए थे।

डिफाल्टरों के लिए राहत पैकेज: पंजाब में इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट ने ब्याज-पेनल्टी में छूट की घोषणा

लुधियाना. सरकार द्वारा इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के डिफाल्टरों को एक बार फिर राहत दी गई है, जिसके तहत उन्हें बकाया किस्तों व एन.सी.एफ. पर ब्याज-पेनल्टी की छूट मिलेगी। इस संबंध में लोकल बॉडीज विभाग द्वारा नोटिफिकेशन के मुताबिक पिछले साल अप्रैल में वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी जारी की गई थी, जिसमें एक महीने की एक्सटेंशन देने का फैसला किया है। इसकी पुष्टि चेयरमैन तरसेम भिंडर ने की है। उन्होंने बताया कि लोग बकाया किस्तों व एन.सी.एफ. पर ब्याज-पैनल्टी की छूट का लाभ लेने के लिए 30 अप्रैल तक अप्लाई कर सकते हैं। इन लोगों को इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट द्वारा 15 मई तक डिमांड नोटिस जारी किया जाएगा और डिफाल्टरों को एक महीने के भीतर बकाया राशि जमा करवानी होगी। इस तरह लागू की जाएगी वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी – नॉन कंस्ट्रक्शन फीस में 50 फीसदी तक मिलेगी छूट – 15 साल पुराने मामलों में प्रॉपर्टी की रिजर्व प्राइज के 5 फीसदी के हिसाब से तय होगा एन.सी.एफ. – आगे 2 साल के भीतर पूरा करना होगा निर्माण – सीनियर सिटीजन, महिलाओं, सैनिकों व उनके वारिसों को मिलेगी 25 फीसदी की अतिरिक्त छूट – गंभीर बीमारी से पीड़ित अलॉटियों व उनके वारिसों, सरकारी कर्मियों पर भी 2022 की गाइडलाइन के मुताबिक लागू होगा फैसला डेडलाइन खत्म होने पर की जाएगी प्रॉपर्टी जब्त करने की कार्रवाई  सरकार ने साफ कर दिया है कि यह पॉलिसी उस प्रॉपर्टी पर लागू नही होगी, जिसे पहले ही डिफाल्टर कैटेगरी में होने कारण जब्त कर लिया गया है। इसके अलावा जो लोग अब डेडलाइन खत्म होने पर बकाया किश्तें या एन.सी.एफ. जमा करवाने में नाकाम रहते हैं, उनकी प्रॉपर्टी जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी। 

अम्बिकापुर हवाई सेवा पर सांसद चिंतामणि का स्वागत, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री से भेंट

सरगुजा. सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज ने आज नई दिल्ली में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सौजन्य भेंट कर दरिमा-अम्बिकापुर से दिल्ली तक हवाई सेवा प्रारंभ करने तथा नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में हो रहे प्रभावी प्रयासों के लिए उनका अंबिकापुर में निर्मित मक्का की धानी से निर्मित पारंपरिक माला पहनाकर स्वागत किया एवं हृदय से आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर क्षेत्र के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करते हुए पर्यटन एवं आधारभूत विकास को गति देने, शासकीय संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना, बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा व्यवस्था तथा आदिवासी समाज के आश्रमों के विकास के संबंध में आग्रह रखा। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी को पूज्य पिताजी गहिरा गुरु जी द्वारा स्थापित संत समाज के पावन धाम में भी पधारने हेतु आमंत्रित किया ।प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में देश और क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिल रही है।