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ऑनलाइन हाजिरी में ‘ऑन ड्यूटी’ का खेल पड़ा भारी, शिक्षा विभाग ने दी वेतन कटौती और सख्त कार्रवाई की चेतावनी

नवादा  जिले में ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति में बड़ी लापरवाही सामने आई है। इस मामले में जिला शिक्षा विभाग ने 386 शिक्षक-शिक्षिकाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिससे शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। डीपीओ स्थापना शिव कुमार वर्मा द्वारा जारी पत्र के अनुसार, 30 मार्च को कई शिक्षकों ने अटेंडेंस स्टेटस कॉलम में 'प्रेजेंट' और अटेंडेंस टाइप में 'मार्क ऑन ड्यूटी' दिखाया। हालांकि, 'मार्क ऑन ड्यूटी रीजन' कॉलम में या तो खाली छोड़ा गया था या 'डेपुटेशन' और 'ऑफिस वर्क' दर्ज किया गया था। कटेगा शिक्षकों का वेतन विभाग ने इसे विभागीय निर्देशों का उल्लंघन और मनमानी माना है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर सही उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होता है, तो 'काम नहीं तो वेतन नहीं' के सिद्धांत पर वेतन कटौती की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद शिक्षकों में काफी खलबली मच गई है। कारण बताओ नोटिस जारी शिक्षा विभाग को जैसे ही या जानकारी मिली उनके द्वारा तुरंत ही सभी लोगों को कारण बताओं नोटिस थमा दिया गया है। गुरुवार को नोटिस भेज कर लोगों को या कहा गया है कि तीन दिन के अंदर सभी लोग नोटिस का जवाब भी दे। इससे पूर्व भी शिक्षा विभाग में 500 से अधिक शिक्षकों पर कार्रवाई कर चुके थे और एक बार फिर से नवादा में शिक्षकों की गजब की कारनामा देखने को मिला है। शिक्षा विभाग अलर्ट ध्यान रहे कि हाल के दिनों में शिक्षकों की ओर से हाजिरी बनाने को लेकर कुछ छेड़छाड़ का मामला बांका में अंजाम दिया गया था। ऐसी ही एक घटना पूर्व में जमुई में हुई थी। उसके बाद शिक्षा विभाग ने इस पर त्वरित एक्शन लेते हुए शिक्षकों पर कार्रवाई की है। हालांकि, बिहार के अन्य स्कूलों में शिक्षक ऑनलाइन अपनी हाजिरी बना रहे हैं। उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हो रही है। हालांकि, इंटरनेट कनेक्शन कई स्कूलों में ठीक नहीं रहने की वजह से शिक्षक कभी छत पर जाकर और कभी पेड़ का सहारा लेकर हाजिरी बनाते हैं। वैसी स्थिति को भी शिक्षा विभाग को समझना होगा। ई- शिक्षाकोष से छेड़छाड़ के मामले को गंभीरता से लिया गया है। आशुतोष कुमार पांडेय

धानापुर के किसानों की मेहनत स्वाहा, अब प्रशासन से उचित मुआवजे की मांग

चंदौली. जिले के धानापुर थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक बड़ा अग्निकांड सामने आया, जिसमें 10 बीघा से अधिक गेहूं की खड़ी फसल जलकर पूरी तरह नष्ट हो गई. यह घटना पगही, विझवल और कुसुम्ही गांव के सिवान में स्थित हरदेव पीजी कॉलेज के पीछे हुई, जिससे क्षेत्र के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा. बता दें कि शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे अचानक आग लग गई और देखते ही देखते उसने विकराल रूप धारण कर लिया. तेज हवा के कारण आग तेजी से खेतों में फैलती चली गई. स्थानीय ग्रामीण और किसान तुरंत मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर आग बुझाने में जुट गए. सूचना मिलते ही धानापुर थाना प्रभारी त्रिवेणी लाल सेन पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. दमकल विभाग को भी सूचना दी गई, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया. इस हादसे में विझवल और पगही गांव के किसान रामलाल यादव, लालमन यादव, प्यारेलाल यादव, मुकेश सिंह यादव, नंदलाल राम और डॉ. कुमार राम सहित कई किसानों की फसल जलकर खाक हो गई. बताया जा रहा है कि कुल मिलाकर 10 बीघा से अधिक गेहूं की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है. घटना के बाद प्रभावित किसानों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. समाजसेवी केवट बाबूलाल बिंद ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल नुकसान का सर्वे कराकर किसानों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि वे इस संकट से उबर सकें.

दुर्ग बना जल संरक्षण का मॉडल

रायपुर दुर्ग बना जल संरक्षण का मॉडल दुर्ग जिले ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए प्रदेश ही नहीं, देश के लिए भी एक मिसाल पेश की है। कलेक्टर  अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में संचालित “मोर गांव मोर पानी महाभियान” अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत निर्मित आवासों में मात्र 15 दिनों के भीतर 32,058 रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का निर्माण कर जिले ने एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के नेतृत्व में यह अभियान सुनियोजित ढंग से आगे बढ़ाया गया। “एकेच गोठ, एकेच बानी, बूंद-बूंद बचाबो पानी 2.0” थीम के साथ 13 मार्च 2025 को इसकी शुरुआत हुई। अभियान के प्रथम चरण में प्रधानमंत्री आवास हितग्राहियों के घरों में मात्र दो घंटे के भीतर 1,764 सोक पिट का निर्माण कर गोल्डन बुक में नाम दर्ज कराया गया। यह उपलब्धि अपने आप में प्रशासनिक समन्वय और जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बनी। द्वितीय चरण में 08 दिसंबर को 12,418 सोक पिट का निर्माण किया गया, जिससे कुल 14,182 सोक पिट स्वप्रेरणा से तैयार हुए। इसके साथ ही “मोर गांव मोर पानी” अभियान के अंतर्गत 23,889 कंटूर ट्रेंच एवं वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच का निर्माण भी पूर्ण किया गया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से इन कार्यों में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की गई, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 32,058 जल संरक्षण संरचनाओं की एंट्री पोर्टल पर दर्ज की जा चुकी है। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने स्वयं आगे बढ़कर श्रमदान किया। यही कारण है कि यह पहल केवल एक सरकारी योजना तक सीमित न रहकर जन आंदोलन के रूप में स्थापित हो गई है। प्रत्येक प्रधानमंत्री आवास में निर्मित रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं न केवल वर्तमान जल आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही हैं, बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा भी सुनिश्चित कर रही हैं। अभियान के तहत विभिन्न प्रकार की जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इनमें कम लागत के 24 कार्य, 15 बोरवेल रिचार्ज, 03 चेकडैम, 5,875 कंटूर ट्रेंच, 07 गली प्लग, 03 नाला बंड, 18 ओपन वेल रिचार्ज (डगवेल), 07 परक्यूलेशन तालाब, 537 रिचार्ज पिट, 05 रिचार्ज शाफ्ट, 817 रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, 6,676 सोक पिट, 09 टैंक, 48 ग्राम तालाब तथा 18,014 वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच शामिल हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का संरक्षण कर भूजल स्तर में सुधार लाने के साथ-साथ स्थायी जल प्रबंधन को बढ़ावा मिल रहा है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों और गांवों में अधिक से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाकर इस महाभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं, ताकि “हर घर जल संचय” का लक्ष्य साकार हो सके।

जब हेल्पलाइन की दूसरी तरफ से गूंजी मुख्यमंत्री की आवाज, सीएम के निर्देश पर मिनटों में हुआ जनसमस्याओं का समाधान

जयपुर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को शासन सचिवालय में राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन 181 का अचानक दौरा कर सबको चौंका दिया। वह न सिर्फ व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे, बल्कि खुद हेल्पलाइन पर आए नागरिकों से सीधी बातचीत भी की और उनकी परेशानियां सुनीं। जब कॉल करने वालों को एहसास हुआ कि दूसरी तरफ खुद मुख्यमंत्री हैं, तो कई लोगों को आश्चर्य हुआ और उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। सीएम के निर्देश पर तुरंत हुआ काम इस मौके पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि हर शिकायत का निपटारा संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होना चाहिए। निरीक्षण के दौरान दो मामले सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। पहला मामला चूरू के एक नागरिक का था, जिन्हें 10 साल पुरानी मतदाता सूची उपलब्ध न होने के कारण मूल निवास प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहा था। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद विभाग ने तत्काल ई-मित्र के जरिए आवेदन को फिर से प्रक्रिया में लिया और तहसील कार्यालय ने प्रमाण पत्र जारी कर दिया। दूसरा मामला जयपुर की एक महिला का था, जिन्होंने एलपीजी सिलेंडर की देरी से डिलीवरी की शिकायत की थी। सिलिंडर की आपूर्ति सुनिश्तित मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रशासन ने तुरंत सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की, जिस पर महिला ने संतोष जताया। मुख्यमंत्री ने हेल्पलाइन के विभिन्न अनुभागों का बारीकी से अवलोकन किया और शिकायत निपटाने की प्रक्रिया, नागरिक संतुष्टि दर तथा अधिकारियों के निरीक्षण से जुड़ी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन पर तैनात कर्मियों की प्रदर्शन रिपोर्ट तैयार की जाए और नियमित रूप से उसकी निगरानी की जाए। समय पर दें शिकायतों का समाधान सीएम भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का मकसद महज शिकायत दर्ज करना नहीं, बल्कि उसका समयबद्ध और संतोषजनक समाधान देना है। उन्होंने हर विभाग को निर्देश दिए कि शिकायत निपटाने की गुणवत्ता में सुधार लाया जाए और नागरिकों की संतुष्टि दर लगातार बढ़ाई जाए।  

देशभर में बढ़ रही मांग, बेंगलुरु से कारगिल तक पहुंच रहा सुगंधित चावल

रायपुर लैलूंगा की पहचान बना ‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र का ‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल आज अपनी विशिष्ट सुगंध, स्वाद और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण एक अलग पहचान स्थापित कर चुका है। पारंपरिक रूप से उगाई जाने वाली यह धान की किस्म अब किसानों के लिए आय का मजबूत माध्यम बन रही है। प्रशासन और कृषि विभाग के सहयोग से इस उत्पाद को व्यवस्थित रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे यह स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। किसानों द्वारा अपनाई जा रही जैविक पद्धति और बेहतर विपणन व्यवस्था के कारण इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व और कृषि मंत्री  राम विचार नेताम के मार्गदर्शन में प्रदेश के किसानों का आय दुगुनी करने निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार किसानों को सशक्त बनाने में जनहितकारी नीति बनाने के साथ ही किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं इनमें कृषि उन्नति योजना, भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना जैसे योजना शामिल है। इससे प्रदेश के किसान आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं।  कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जंवाफूल धान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राकृतिक सुगंध और स्वाद है, जो लैलूंगा क्षेत्र की विशिष्ट जलवायु में ही पूर्ण रूप से विकसित हो पाती है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां-दिन में पर्याप्त गर्मी और रात में हल्की ठंडक, इस धान की गुणवत्ता को विशेष बनाती हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र में उत्पादित चावल का स्वाद और खुशबू अलग पहचान रखता है और उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है।  ‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल की मांग अब छत्तीसगढ़ से बाहर भी तेजी से बढ़ रही है। बेंगलुरु, चेन्नई, तेलंगाना, लद्दाख और कारगिल जैसे क्षेत्रों में इसकी अच्छी मांग है। वर्तमान में इसका बाजार मूल्य लगभग 150 रुपये प्रति किलो है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है। वहीं बीज भी किसानों को 70 रुपए प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे अधिक किसान इस फसल की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।    लैलूंगा के किसान चंद्रशेखर पटेल बताते हैं कि उनके परिवार में लंबे समय से जंवाफूल चावल की खेती की जा रही है, लेकिन अब इसकी मांग और पहचान में काफी वृद्धि हुई है। इस वर्ष उन्होंने 4 एकड़ में इसकी खेती की, जिसमें प्रति एकड़ लगभग 30,000 रुपए की लागत आई। वे बताते हैं कि उन्हें प्रति एकड़ 1 लाख रूपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है। उनका कहना है कि इस फसल से उन्हें स्थिर और संतोषजनक आय मिल रही है, जिससे वे भविष्य में इसकी खेती का रकबा और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। उनके उत्पाद की मांग राज्य के बाहर भी बढ़ रही है, जिससे उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध हो रहा है।  ग्राम खैरबहार के किसान भवानी पंडा बताते हैं कि वे वर्ष 2015 से खेती कर रहे हैं और धीरे-धीरे जंवाफूल चावल की खेती की ओर बढ़े हैं। वे पूरी तरह जैविक पद्धति से खेती करते हैं, जिसमें रासायनिक खाद या कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता। हरी खाद का उपयोग कर वे खेत की उर्वरता बनाए रखते हैं। भवानी पंडा बताते हैं कि जंवाफूल चावल की खेती से उन्हें पारंपरिक धान की तुलना में अधिक लाभ मिल रहा है। वर्तमान में वे 2 एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं और आने वाले समय में इसे 20 एकड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य रखे हुए हैं। जंवाफूल चावल की खेती पूरी तरह जैविक पद्धति से की जा रही है, जिससे इसकी गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनी रहती है। रासायनिक मुक्त उत्पादन के कारण यह चावल स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। यही वजह है कि उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों को इसका बेहतर मूल्य मिल रहा है।     प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा इस फसल को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही किसान समूहों और एफपीओ के माध्यम से उत्पादन और विपणन को संगठित किया जा रहा है। पिछले वर्ष लगभग 700 एकड़ में इसकी खेती की गई थी, वहीं इस वर्ष इसे बढ़ाकर 2000 एकड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे अधिक से अधिक किसान इस लाभकारी फसल से जुड़ सकें। 

भभुआ, सासाराम और रांची के लिए अब दिल्ली का सफर हुआ आसान, रेलवे ने शुरू की नई ट्रेन और जानें पूरा टाइम-टेबल

रांची भारतीय रेलवे ने बिहार और झारखंड के लोगों के लिए एक नई साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन चलाने का फैसला किया है. यह ट्रेन आनंद विहार से पुरुलिया तक जाएगी. यह ट्रेन दिल्ली और झारखंड के बीच सीधी कनेक्टिविटी देगी. इससे यात्रियों को काफी राहत मिलेगी. इस इलाके के लोगों को होगा फायदा इस ट्रेन का खास फायदा बिहार के शाहाबाद और मगध इलाके के लोगों को मिलेगा. भभुआ रोड, सासाराम और डेहरी-ऑन-सोन जैसे स्टेशनों से अब दिल्ली जाना आसान हो जाएगा. खासकर छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों के लिए यह ट्रेन एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आई है. टाइम और रूट के बारे में जानिये आनंद विहार से सुबह 5 बजे चलने वाली ट्रेन रात 10:40 बजे पुरुलिया पहुंचेगी. रास्ते में यह मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी कैंट, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, भभुआ रोड, सासाराम, डेहरी-ऑन-सोन, गढ़वा रोड, डालटोनगंज, रांची और मुरी स्टेशन पर रुकेगी. वापसी में यह ट्रेन पुरुलिया से शाम 5 बजे रवाना होगी और अगले दिन रात 11:10 बजे आनंद विहार पहुंचेगी. यानी यात्रियों को दोनों तरफ से सफर का अच्छा टाइमिंग मिल जाएगा. रेलवे ने इस ट्रेन को फिलहाल साप्ताहिक रखा है. ट्रेन संख्या 14022 हर गुरुवार को दिल्ली से चलेगी, जबकि 14021 हर शुक्रवार को पुरुलिया से वापसी करेगी. ट्रेन में क्या-क्या सुविधा इस ट्रेन में एसी, स्लीपर और जनरल कोच लगाए गए हैं. इससे हर वर्ग के लोग अपनी सुविधा और बजट के हिसाब से यात्रा कर पाएंगे. यह नई ट्रेन बिहार और झारखंड के यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है. इससे सफर आसान होगा, समय बचेगा और कंफर्म टिकट मिलने की संभावना भी बढ़ेगी.

युवाओं को सशक्त बना रहा सोशल मीडिया, सीएम डॉ. यादव का बयान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वाराणसी में शुक्रवार को सोशल मीडिया की मध्यप्रदेश टूरिज्म़ इनफ्लुएंसर मीट का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सोशल मीडिया वर्तमान समय में युवाओं की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई शिक्षा नीति से सनातन परंपरा के वैचारिक आधार को शिक्षा नीति में समाहित किया है। ऐसा करके युवाओं को सच्चे संस्कार के साथ विकास का अवसर दिया गया है। हमें विकास के साथ-साथ प्राचीन काल के गौरव और परंपराओं पर भी गर्व होना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के माध्यम से हम बाबा विश्वनाथ के धाम में उज्जैन और मध्यप्रदेश के प्राचीन गौरव की झलक दिखा रहे हैं। सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, वीरता और धर्म परायणता हम सबको प्रेरित और गौरवान्वित करती है। प्रधानमंत्री मोदी ने प्राचीन गौरव के साथ विकास को नया आयाम दिया है। वाराणसी में बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर और उज्जैन में महाकाल लोक के निर्माण ने धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयां दी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राज्यों के बीच में सद्भाव और विकास के साथ सहयोग बढ़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर से संवाद किया और उनके प्रश्नों के उत्तर भी दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश दो भाइयों की जोड़ी है। दोनों मिलकर विकास के नए प्रतिमान बनाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राज्यों के बीच सद्भाव और विकास के लिए सहयोग बढ़ा है। सिंहस्थ: 2028 में बनेंगे कीर्तिमान उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाला सिंहस्थ महाकुंभ अद्भुत होगा। इसमें श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किया जा रहा है। देश-विदेश से आने वाले सभी नागरिकों,पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या अप्रत्याशित रहेगी। इस दृष्टि से नए कीर्तिमान भी बनेंगे।  

छत्तीसगढ़ में लाखों श्रमिकों को राहत: DA और सैलरी दरों में वृद्धि, नई वेतन दरें की गई लागू

रायपुर  प्रदेश के लाखों श्रमिकों के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों के लिए नई परिवर्तनशील महंगाई भत्ता (DA Hike) और न्यूनतम वेतन दरों का निर्धारण कर दिया है। यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होकर 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेंगी। महंगाई भत्ते में वृद्धि लेबर ब्यूरो, शिमला से प्राप्त जुलाई 2025 से दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के आधार पर औद्योगिक सूचकांक में औसतन 11.28 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी आधार पर श्रमिकों के महंगाई भत्ते में 226 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, सूचकांक में 34 अंकों की वृद्धि के चलते कृषि श्रमिकों के भत्ते में 170 रुपये प्रतिमाह का इजाफा हुआ है। अगरबत्ती श्रमिकों को भी लाभ अगरबत्ती निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों के लिए भी दरों में वृद्धि की गई है। प्रति हजार अगरबत्ती निर्माण पर 8.53 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी निर्धारित की गई है, जिससे इस क्षेत्र के श्रमिकों को भी सीधा लाभ मिलेगा। श्रेणी और जोन के अनुसार वेतन सरकार द्वारा निर्धारित नई दरों के अनुसार अकुशल, अर्द्धकुशल, कुशल और उच्च कुशल श्रमिकों के लिए अलग-अलग वेतन तय किए गए हैं। जोन ‘अ’, ‘ब’ और ‘स’ के आधार पर मासिक वेतन 10,882 रुपये से लेकर 13,612 रुपये तक निर्धारित किया गया है। दैनिक वेतन और जानकारी दैनिक वेतन की बात करें तो यह श्रमिकों की श्रेणी और जोन के अनुसार 419 रुपये से 524 रुपये के बीच रहेगा। श्रमायुक्त हिमशिखर गुप्ता ने इन दरों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। अधिक जानकारी के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.shramevjayate.cg.gov.in या श्रमायुक्त कार्यालय, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर से संपर्क किया जा सकता है। इसी क्रम में अर्द्धकुशल श्रमिकों हेतु वेतन क्रमशः 12,052.00 रुपये (जोन अ), 11,792.00 रुपये (जोन ब) और 11,532.00 रुपये (जोन स) निर्धारित है। कुशल श्रमिकों को जोन 'अ' में 12,832.00 रुपये, 'ब' में 12,572.00 रुपये और 'स' में 12,312.00 रुपये प्राप्त होंगे, जबकि उच्च कुशल श्रमिकों के लिए यह दरें क्रमशः 13,612.00 रुपये, 13,352.00 रुपये और 13,092.00 रुपये प्रतिमाह होंगी।  दैनिक वेतन की बात करें तो यह श्रेणी और जोन के अनुसार 419 रुपये से लेकर 524 रुपये के मध्य देय होगा। विस्तृत जानकारी विभाग की वेबसाइट https://shramevjayate.cg.gov.in/ या श्रमायुक्त कार्यालय, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर से प्राप्त की जा सकती है 

छात्रों को झटका: 10वीं-12वीं फीस बढ़ी, बेस्ट ऑफ फाइव सिस्टम बंद

भोपाल मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नौवीं से 12वीं तक की नई प्रवेश नीति जारी कर दी है। इसके तहत 10वीं और 12वीं के परीक्षा फार्म 15 मई से भरे जाएंगे। इस बार मंडल ने 10वीं व 12वीं के परीक्षा शुल्क, नामांकन सहित फीस और अन्य शुल्कों में 25 फीसद से लेकर 80 फीसद तक की बढ़ोतरी की है, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। शुल्क बढ़ा नई व्यवस्था के अनुसार नियमित विद्यार्थियों को अब 1200 रुपये की जगह 1500 रुपये परीक्षा शुल्क देना होगा, जबकि स्वाध्यायी विद्यार्थियों के लिए शुल्क 1600 रुपये निर्धारित किया गया है। नौवीं कक्षा में नामांकन शुल्क भी 350 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा, 10 वर्ष पुरानी अंकसूची की प्रति प्राप्त करने का शुल्क 600 रुपये से बढ़ाकर एक हजार रुपये कर दिया गया है। वहीं डीएलएड परीक्षा शुल्क में भी वृद्धि की गई है। नियमित विद्यार्थियों को सभी विषयों के लिए सात हजार रुपये देने होंगे, जबकि दूसरे अवसर के लिए विषयों के अनुसार तीन हजार से सात हजार रुपये तक शुल्क तय किया गया है। वहीं, स्कूलों की संबद्धता फीस में भी इजाफा किया गया है। 10वीं के लिए सरकारी स्कूलों को 20 हजार और निजी स्कूलों को 22 हजार रुपये देने होंगे, जबकि 12वीं के लिए यह राशि क्रमशः 27 हजार और 30 हजार रुपये होगी। गलत प्रवेश पर प्राचार्य पर लगेगा जुर्माना नई नीति में नियमों को भी सख्त किया गया है। यदि किसी छात्र को गलत तरीके से प्रवेश दिया जाता है, तो संबंधित संस्था के प्राचार्य पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जाएगा। यह राशि छात्र से नहीं वसूली जाएगी। साथ ही गंभीर मामलों में संस्था की मान्यता समाप्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके अलावा, मंडल ने 10वीं कक्षा में वर्षों से लागू “बेस्ट ऑफ फाइव” प्रणाली को समाप्त कर दिया है। अब सभी विषयों के अंक अनिवार्य रूप से जोड़े जाएंगे। वहीं नौवीं में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 13 वर्ष तय की गई है। ऑनलाइन प्रक्रिया और डमी प्रवेश पत्र अनिवार्य प्रवेश नीति के अनुसार, कक्षा नौवीं का ऑनलाइन नामांकन 15 मई से 30 सितंबर तक किया जा सकेगा। वहीं 10वीं-12वीं के परीक्षा फार्म 15 मई से 15 सितंबर तक भरे जाएंगे। आवेदन पत्र में अपार आईडी नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। परीक्षा फार्म भरने के सात दिन बाद छात्रों को डमी प्रवेश पत्र जारी किया जाएगा। स्कूल प्राचार्यों को इसे डाउनलोड कर विद्यार्थियों और अभिभावकों से जानकारी का सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। समय सीमा में ही सुधारा यदि किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है, तो उसे निर्धारित समय सीमा में ही सुधारा जा सकेगा। मंडल ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी संस्था द्वारा समय पर घोषणा-पत्र अपलोड नहीं किया गया, तो विद्यार्थियों के प्रवेश पत्र जारी नहीं किए जाएंगे। साथ ही परीक्षा के बाद किसी भी प्रकार का संशोधन मान्य नहीं होगा।  

मध्यप्रदेश पुलिस की अवैध हथियारों की तस्‍करी के विरूद्ध सख्त कार्रवाई विगत तीन सप्ताह में 52 अवैध हथियार जब्त

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस अवैध हथियारों की तस्करी एवं अपराध नियंत्रण के विरुद्ध प्रदेशभर में लगातार सख्त और प्रभावी कार्रवाई कर रही है। इसी कार्यवाही के तहत विगत तीन सप्ताह के दौरान विभिन्न जिलों से 52 अवैध हथियार जब्त कर तस्‍करों को गिरफ्तार किया है। प्रमुख कार्यवाही इंदौर जिले के द्वारकापुरी थाना क्षेत्र से पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (टेलीग्राम एवं इंस्टाग्राम) के माध्यम से ग्राहकों से संपर्क स्थापित कर अवैध हथियारों की आपूर्ति करने वाले एक शातिर तस्कर को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से 06 देशी पिस्टल एवं 04 जिंदा कारतूस बरामद किए है। वहीं, इंदौर ग्रामीण के थाना मानपुर में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 04 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 10 पिस्टल जब्त की है। इस प्रकार इन दोनों कार्रवाइयों में पुलिस ने कुल 16 अवैध हथियार जप्‍त किये है। खरगोन जिले में थाना गोगावां पुलिस ने अंतर्राज्यीय हथियार तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए उत्तरप्रदेश एवं हरियाणा के आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 10 देशी पिस्टल एवं 05 देशी कट्टे (कुल 15 अवैध हथियार) तथा एक मोटरसाइकिल जब्त की। इसके अलावा थाना गोगावां एवं थाना भीकनगाँव पुलिस ने अलग-अलग कार्रवाई करते हुए 03 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 08 देशी पिस्टल एवं 02 मोटरसाइकिल जब्त की हैं। इस प्रकार खरगोन जिले में कुल 23 अवैध हथियार जब्त किए गए हैं। बड़वानी थाना निवाली में पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए एक अवैध हथियार तस्कर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 07 देशी पिस्टल की है। जबलपुर जिले में क्राइम ब्रांच एवं थाना पाटन पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए अवैध हथियारों के कारोबार में लिप्त 02 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 04 देशी पिस्टल, 08 कारतूस, 03 मोबाइल फोन एवं एक कार जब्त की है। आरोपियों के विरुद्ध आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई है। बुरहानपुर थाना खकनार में अंतर्राज्यीय अवैध हथियार तस्करों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करते हुए पंजाब के 02 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के कब्जे से 02 हस्तनिर्मित पिस्टल जब्त की हैं। इन सभी कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश पुलिस अवैध हथियारों की तस्करी के विरुद्ध सतत सतर्कता एवं दृढ़ता के साथ कार्य कर रही है। पुलिस की त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के चलते अपराधियों के विरुद्ध कठोर कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे प्रदेश में कानून-व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो रही है।