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पंजाब के छात्रों पर रुपये की गिरावट का असर, विदेश में पढ़ाई अब और महंगी

जालंधर  भारतीय रुपये के लगातार कमजोर होने और डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर (करीब 93 रुपये प्रति डॉलर) तक पहुंच गया है। इसका सीधा असर विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों, खासकर पंजाब के विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर पड़ रहा है।   पहले से ही महंगी विदेशी शिक्षा अब और अधिक बोझिल होती जा रही है, जिससे कई परिवार आर्थिक दबाव में आ गए हैं। रुपये की इस गिरावट ने न केवल कुल शिक्षा बजट को बढ़ाया है, बल्कि सालाना खर्च, लोन की अदायगी और अन्य छिपे हुए शुल्कों के रूप में भी अतिरिक्त बोझ डाल दिया है, जिससे विदेश में पढ़ाई का सपना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा महंगा हो गया है। विदेशी मुद्रा का कारोबार करने वाले हेमंत का कहना है कि रुपये में गिरावट के कारण विदेश में पढ़ाई का कुल बजट औसतन 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गया है। उदाहरण के तौर पर, जो कोर्स पहले लगभग 1.2 करोड़ रुपये में पूरा हो जाता था, अब उसी पर करीब 1.5 करोड़ रुपये तक खर्च आ रहा है। यह वृद्धि केवल मुद्रा विनिमय दर में बदलाव के कारण हुई है, जिससे अभिभावकों की पहले से बनाई गई वित्तीय योजनाएं प्रभावित हो रही हैं और उन्हें अतिरिक्त संसाधन जुटाने पड़ रहे हैं। डॉलर महंगा होने से छात्रों को हर साल अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ रही है। उदाहरण के लिए, 55,000 डॉलर सालाना फीस वाले कोर्स में छात्रों को सिर्फ एक्सचेंज रेट की वजह से करीब 4.11 रुपये लाख अधिक देने पड़ रहे हैं। यह अतिरिक्त खर्च पूरे कोर्स अवधि में लाखों रुपये तक पहुंच जाता है, जो मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका साबित हो रहा है। विदेशी एजुकेशन की माहिर परमजीत का कहना है कि मुद्रा विनिमय के दौरान लगने वाले छिपे हुए शुल्क (हिडन चार्जेज) भी छात्रों के लिए बड़ी समस्या बनकर उभरे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्ष 2024 में भारतीय छात्रों को पारदर्शिता की कमी और अतिरिक्त शुल्कों के कारण 1,700 रुपये करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ। इन शुल्कों में बैंक मार्जिन, ट्रांसफर फीस और एक्सचेंज रेट में अंतर जैसी चीजें शामिल हैं, जिनके बारे में अधिकतर छात्रों और अभिभावकों को पहले से स्पष्ट जानकारी नहीं होती। एजुकेशन लोन पर भी असर रुपये के कमजोर होने का असर एजुकेशन लोन पर भी पड़ रहा है। लोन की कुल लागत और उसकी अदायगी पर सालाना 3 से 5 प्रतिशत तक अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है, जिससे छात्रों के लिए पढ़ाई पूरी करने के बाद कर्ज चुकाना और मुश्किल हो सकता है। ब्याज के साथ-साथ मूलधन की राशि भी बढ़ने से कुल देनदारी पहले के मुकाबले काफी अधिक हो जाती है। पंजाब से विदेश जाने वाले छात्रों के रुझान में भी हाल के समय में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वर्ष 2023 में भारत से करीब 3.19 लाख छात्र कनाडा गए थे, जिनमें से लगभग 1.8 लाख यानी करीब 56 प्रतिशत अकेले पंजाब से थे। लेकिन 2024-25 में सख्त नियमों और बढ़ते खर्च के कारण पंजाब से कनाडा जाने वाले छात्रों के आवेदनों में करीब 50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि बढ़ती लागत और नीतिगत बदलावों ने छात्रों के फैसलों को सीधे प्रभावित किया है। अमेरिका के मामले में स्थिति कुछ अलग नजर आती है। 2024-25 शैक्षणिक वर्ष में अमेरिका में लगभग 3.63 लाख भारतीय छात्र नामांकित रहे, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। हालांकि, इसके बावजूद 2025 की पहली छमाही में भारतीय छात्रों को जारी किए जाने वाले एफ-1 वीजा में 44 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो भविष्य में वहां जाने वाले छात्रों की संख्या पर असर डाल सकती है। अमेरिका में पढ़ाई पर चार लाख का अतिरिक्त बोझ खर्च के स्तर पर देखा जाए तो अमेरिका में पढ़ाई की औसत वार्षिक लागत 25,000 डॉलर से 55,000 डॉलर के बीच है, जिसमें रुपये की गिरावट के कारण 4 लाख तक का सीधा अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। वहीं कनाडा में ग्रेजुएशन की औसत फीस 33,417 और पोस्ट ग्रेजुएशन की 16,321 डॉलर है, जबकि जीआईसी फंड बढ़कर 20,635 कनाडाई डॉलर यानी करीब 13 लाख रुपये हो गया है, जो छात्रों के लिए शुरुआती निवेश को और भारी बना देता है। विकल्प बदलने लगे छात्र एजुकेशन एक्सपर्ट पूजा सिंह का कहना है कि “रुपये की गिरावट ने विदेशी शिक्षा को मिडिल क्लास परिवारों की पहुंच से धीरे-धीरे दूर कर दिया है। कई छात्र अब अपने विकल्प बदल रहे हैं या अपनी पढ़ाई को टाल रहे हैं। आने वाले समय में छात्र सस्ते देशों की ओर रुख कर सकते हैं या भारत में ही बेहतर अवसर तलाशेंगे।” कुल मिलाकर, डॉलर की मजबूती और रुपये की कमजोरी ने पंजाब के छात्रों के विदेशी शिक्षा के सपनों पर गंभीर आर्थिक दबाव डाल दिया है। यदि यही स्थिति बनी रहती है, तो आने वाले समय में विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में और गिरावट देखने को मिल सकती है, और उच्च शिक्षा के लिए वैश्विक विकल्प चुनना पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।   

Jaipur Mega Stadium: दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रिकेट ग्राउंड निर्माणाधीन, गहलोत के तीखे आरोप

जयपुर. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्तमान भजनलाल सरकार के खिलाफ अपना हमला तेज कर दिया है। गहलोत ने अपनी चर्चित 'इंतज़ारशास्त्र' सीरीज के छठे अध्याय में जयपुर के चौंप में बन रहे विश्व के तीसरे सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम की बदहाली का मुद्दा उठाया है। एक वीडियो संदेश के साथ गहलोत ने आरोप लगाया है कि राजनीतिक द्वेष के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर का यह प्रोजेक्ट अब 'ठंडे बस्ते' में चला गया है। जो विश्व रिकॉर्ड बनना था, वो अब 'लापरवाही' का शिकार अशोक गहलोत ने अपनी पोस्ट में दर्द साझा करते हुए लिखा कि कांग्रेस सरकार ने राजस्थान को वैश्विक खेल मानचित्र पर लाने के लिए जयपुर के पास चौंप गांव में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बनाने की आधारशिला रखी थी। इस स्टेडियम का काम 2024 तक पूरा होना था, लेकिन गहलोत का दावा है कि 36 महीने बीत जाने के बाद भी यह प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है। गहलोत ने सवाल उठाया कि जनता के करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद खिलाड़ियों को अपनी ही धरती पर अंतरराष्ट्रीय मैच देखने और खेलने का मौका क्यों नहीं मिल रहा? RCA चुनाव और क्रिकेट की राजनीति पर कटाक्ष पूर्व मुख्यमंत्री ने केवल इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि खेल प्रशासन पर भी प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के चुनाव पिछले दो वर्षों से नहीं हो सके हैं। गहलोत के अनुसार, प्रशासनिक शून्यता और सरकार की अरुचि के कारण राजस्थान में क्रिकेट का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। खिलाड़ियों के सपनों से खिलवाड़ बंद करे सरकार' गहलोत ने एक वीडियो साझा किया है जिसमें स्टेडियम की वर्तमान स्थिति (कथित रूप से रुका हुआ काम) को दिखाया गया है। उन्होंने भजनलाल सरकार से मार्मिक अपील करते हुए कहा: "राजनीतिक द्वेष छोड़िए, खिलाड़ियों के भविष्य से खिलवाड़ बंद कीजिए!" क्या है 'इंतज़ारशास्त्र' सीरीज? पिछले कुछ हफ्तों से अशोक गहलोत सोशल मीडिया पर एक विशेष सीरीज चला रहे हैं जिसे उन्होंने 'इंतज़ारशास्त्र' नाम दिया है। उद्देश्य: इस सीरीज के माध्यम से वे उन प्रोजेक्ट्स को उजागर कर रहे हैं जो उनकी सरकार के समय शुरू हुए थे लेकिन वर्तमान सरकार के कार्यकाल में कथित तौर पर ठप्प पड़े हैं। खेल-विरोधी सोच बनाम विकास का दावा गहलोत का आरोप है कि भाजपा सरकार केवल नाम बदलने या पुराने प्रोजेक्ट्स को रोकने में लगी है। उन्होंने 'इंतज़ारशास्त्र' के शीर्षक में सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया— ''खेल-विरोधी सोच ने डुबोया राजस्थान का नाम!''। इस बयान ने राजस्थान के खेल हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या वाकई बजट या मंशा की कमी के कारण चौंप स्टेडियम का काम रुका है?

पहली बार पूरी तरह हाईटेक होगी जनगणना की प्रक्रिया और झालावाड़ की 12 तहसीलों सहित 1619 गांवों में शुरू होगा महाअभियान

झालावाड़ झालावाड़ जिले में करीब 15 साल बाद जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इस बार जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी और विशेष बात यह है कि पहली बार इसे पूरी तरह डिजिटल माध्यम से किया जाएगा। अब तक की जनगणनाएं ऑफलाइन होती रही हैं, लेकिन इस बार मोबाइल एप के जरिए घर-घर जाकर जानकारी एकत्रित की जाएगी।   4000 कार्मिक जुटेंगे, गांव और शहरी वार्ड दोनों कवर होंगे जिले के सांख्यिकी विभाग के अनुसार इस जनगणना में करीब 4000 प्रगणक (कर्मी) लगाए जाएंगे। ये कर्मी जिले के 1619 गांव और शहरी क्षेत्र के 240 वार्ड में घर-घर जाकर प्रत्येक परिवार का विस्तृत विवरण जुटाएंगे। जिले की 12 तहसीलों के गांवों और आठ नगर निकायों के वार्डों को इसमें शामिल किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी तहसीलदार और नगर निकायों के ईओ स्तर के अधिकारी करेंगे।   समय-सारिणी और प्रश्नों का दायरा तय जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी, जिसमें पहला चरण 1 मई से 15 जून तक और दूसरा चरण 1 मई से 15 मई तक चलेगा। पहले चरण में मकान की स्थिति, पानी, बिजली, नल, शौचालय, वेस्ट वाटर लाइन जैसी सुविधाओं के साथ परिवार के सदस्यों की संख्या सहित करीब 34 प्रश्नों की जानकारी मोबाइल एप के माध्यम से एकत्रित की जाएगी।   प्रशिक्षण की व्यापक तैयारी, अप्रैल में होगा आयोजन जनगणना से पहले प्रगणकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण का कार्य अप्रैल माह में किया जाएगा। मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण पहले जयपुर में आयोजित होगा, इसके बाद झालावाड़ के 56 फील्ड ट्रेनर को प्रशिक्षित किया जाएगा। ये प्रशिक्षित फील्ड ट्रेनर जिले के 4000 कर्मियों को जनगणना की बारीकियों से अवगत कराएंगे। 2001 और 2011 के आंकड़ों से मिलेगा तुलना का आधार विभाग के अनुसार जिले में 2001 की जनगणना में जनसंख्या 11 लाख 80 हजार 323 दर्ज की गई थी। वहीं 2011 में यह बढ़कर 14 लाख 11 हजार 129 हो गई थी, जिसमें 11 लाख 81 हजार 835 ग्रामीण और 2 लाख 29 हजार 291 शहरी आबादी शामिल थी। अब नई जनगणना से ताजा आंकड़े सामने आएंगे।   मोबाइल एप से आमजन भी कर सकेंगे सहयोग इस बार जनगणना के लिए एक मोबाइल एप लॉन्च किया जाएगा, जिसके माध्यम से प्रगणक डेटा एकत्रित करेंगे। आमजन भी इस एप के जरिए अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। हालांकि, एप के माध्यम से दी गई जानकारी का सत्यापन करने के लिए प्रगणक प्रत्येक परिवार तक पहुंचकर विवरण की पुष्टि करेंगे।

Naxalism Debate: संसद में 30 को होगी चर्चा, बस्तर में 96% इलाका नक्सल प्रभाव से आजाद

रायपुर/जगदलपुर. पांच दशकों से भी अधिक समय से बस्तर के सामाजिक ताने-बाने को नष्ट कर रहा नक्सलवाद आज समाप्ति की है. यह नराकात्मक विनाशकारी विचारधारा ने न केवल बस्तर के विकास को अवरुद्ध किया, बल्कि निर्दोष आदिवासियों की जान भी ली. लेकिन मजबूत राजनीतिक इरादे की बदौलत आज बस्तर का 96 प्रतिशत क्षेत्र नक्सली गतिविधियों से मुक्त हो चुका है. विषय पर 30 मार्च को लोकसभा में अहम चर्चा होगी. 1967 में जो चिंगारी बंगाल के नक्सलबाड़ी में फूटी थी, उसने आने वाले दशकों में बस्तर के जंगलों को आग में बदल दिया, इस आग ने हजारों जिंदगियां लीं, अनगिनत घर उजाड़े, और एक पूरे क्षेत्र को बदल कर रख दिया. लेकिन बस्तर ओलम्पिक 2024 के मंच से देश के गृहमंत्री अमित शाह ने एक ऐसा बयान दिया, जिसने इस कहानी को एक तय समयसीमा दे दी, उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा, यह पहली बार था जब इस लंबे संघर्ष के अंत की एक तारीख सामने आई, एक ऐसा वादा, जो सिर्फ शब्द नहीं बल्कि दशकों से चली आ रही इस लड़ाई का निष्कर्ष माना जा रहा है. अब जब 31 मार्च 2026 की तारीख जब करीब है, तो माहौल बदल चुका है. वो घोषणा सच्चाई में बदलती नजर आ रही है. इन 2 वर्षों में कुल 3000 नक्सली मुख्यधारा में जुड़ जाते हैं, 2000 नक्सली गिरफ्तार कर लिए जाते हैं, अभियान इतना तेज होता है कि 500 से अधिक नक्सली ढेर कर दिए जाते हैं, जिसमें नक्सलियों का महासचिव भी शामिल रहता है. कुल मिलाकर 5000 से अधिक नक्सली कम हो गए, हालांकि, नक्सल के इतिहास में 1987 से 2026 तक 1416 जवान शहीद हुए है. जबकि 1277 आईडी ब्लास्ट हुए, जिसमें 443 जवान शहीद और 915 जवान घायल हुए हैं. इसके अलावा 4580 आईडी बरामद की गई है. छत्तीसगढ़ सरकार के आंकड़ों के अनुसार, आज बस्तर संभाग के पांच जिलों में से दंंतेवाड़ा में अब महज एक नक्सली सक्रिय है, वहीं नारायणपुर में दो, सुकमा में 5, बीजापुर में 11 और कांकेर में गिनती के 19 नक्सली सक्रिय है. हालांकि, तय संकल्प में सशस्त्र नक्सलवाद का खत्मा तो हो गया है, लेकिन अभी भी सबसे बड़ा चुनौती जवानों के लिए जंगलों में बिछी बारूद है. समय के साथ यह भी खोजकर निकाल लिए जाएंगे, और नष्ट कर दिए जाएंगे. गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि अब हम बस्तर के प्रत्येक गांव को ODF की तरह IED फ्री गांव बनाएंगे. अब बस्तर की आग बुझ गई, और बस्तर के जंगल, जो कभी डर का दूसरा नाम थे, एक बार फिर अपनी असली पहचान, अपनी शांति, और अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाएंगे. अब बस्तर अपनी खूबसूरती के लिए पहचाने जाएगा. संसद में 30 मार्च को होगी चर्चा नक्सलमुक्त भारत के लिए निर्धारित मार्च 2026 की समय सीमा से पहले लोकसभा में नक्सलवाद उन्मूलन पर महत्वपूर्ण चर्चा होगी. लोकसभा की कार्यसूची के अनुसार, नक्सलवाद उन्मूलन के प्रयासों पर चर्चा के लिए 30 मार्च का समय आवंटित किया गया है. चर्चा की शुरुआत शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे करेंगे.

Hemant Soren in Assam: JMM का चुनावी बिगुल आज, सोरेन संभालेंगे कमान

रांची. असम विधानसभा चुनाव को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शुक्रवार शाम असम पहुंच गए, जहां वे 28 मार्च से पार्टी के चुनावी प्रचार अभियान की औपचारिक शुरुआत करेंगे। उनका पहला कार्यक्रम कोकराझार जिले के गोसाई गांव विधानसभा क्षेत्र में प्रस्तावित है, जहां वे एक बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे। झामुमो के लिए यह चुनाव महज विस्तार का प्रयास नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने की रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री अगले कुछ दिनों तक असम में ही रहेंगे और विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में लगातार सभाएं करेंगे। हेमंत सोरेन के नेतृत्व में अभियान को धार पार्टी अध्यक्ष के रूप में हेमंत सोरेन खुद पूरे चुनावी अभियान की कमान संभाल रहे हैं। झामुमो ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह असम में अपने दम पर चुनाव लड़ रही है और इसके लिए संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय किया गया है। पार्टी महासचिव विनोद पांडेय असम में लगातार कैंप कर रहे हैं और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। उनके नेतृत्व में स्थानीय समीकरणों और मुद्दों के आधार पर प्रचार की रूपरेखा तैयार की जा रही है। स्टार प्रचारकों की तैनाती, संगठन हुआ सक्रिय झामुमो ने अपने 20 स्टार प्रचारकों की सूची चुनाव आयोग को सौंप दी है। इसमें हेमंत सोरेन के अलावा डा. सरफराज अहमद, सुप्रियो भट्टाचार्य, जोबा मांझी, दीपक बिरुआ, चमरा लिंडा, कल्पना मुर्मू सोरेन, अभिषेक प्रसाद और डा. महुआ माजी जैसे प्रमुख नेता शामिल हैं। पार्टी के कई मंत्री और विधायक जैसे दीपक बिरुआ, चमरा लिंडा और आलोक सोरेन, एमटी राजा पहले ही असम पहुंचकर स्थानीय स्तर पर चुनावी गतिविधियों को गति दे रहे हैं। चुनिंदा क्षेत्रों पर फोकस, स्थानीय मुद्दों पर जोर झामुमो की रणनीति असम के चुनिंदा विधानसभा क्षेत्रों में अपने प्रभाव को मजबूत करने पर केंद्रित है। पार्टी स्थानीय सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को प्रमुखता देते हुए मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। हेमंत सोरेन की सभाएं झामुमो कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के साथ-साथ पार्टी को नए क्षेत्रों में पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

नैंसी ग्रेवाल हत्याकांड में नया मोड़, कनाडाई जांच एजेंसियों ने खालिस्तान समर्थकों पर शक जताया

चण्डीगढ़ पंजाबी मूल की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नैंसी ग्रेवाल की हत्या में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। कनाडाई जांच एजेंसियों ने पहली बार यह संकेत दिया है कि इस हत्याकांड के पीछे खालिस्तानी समर्थक तत्वों का हाथ हो सकता है।  पुलिस का मानना है कि नैंसी का सोशल मीडिया पर खालिस्तान समर्थकों का लगातार और तीखा विरोध ही इस हत्या का मुख्य कारण बन सकता है। पंजाब के लुधियाना-जालंधर क्षेत्र की 45 वर्षीय नैंसी की 3 मार्च को ओंटारियो के लासाले में एक क्लाइंट के घर के बाहर चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस इस वारदात को सुनियोजित टारगेट किलिंग मान रही है।  40 से अधिक बार मिल चुकी थी धमकियां परिवार के अनुसार, नैंसी को खालिस्तान विरोधी वीडियो पोस्ट करने के कारण 40 से अधिक बार जान से मारने की धमकियां मिल चुकी थीं। इस बारे में विंडसर पुलिस को सूचित किया गया था लेकिन सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाई। जांच में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। पुलिस ओंटारियो में नैंसी के घर पर हुए पिछले साल के पेट्रोल बम हमले की भी जांच कर रही है, और शक जताया जा रहा है कि यह दोनों घटनाएं एक ही समूह के कृत्य हो सकती हैं। जांच में निजी रंजिश का भी एंगल पुलिस अब इस मामले में खालिस्तानी कट्टरपंथी लिंक की जांच कर रही है। हालांकि अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है लेकिन जांच में निजी रंजिश और अलगाववादी एंगल दोनों पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है। सिख कल्चरल सोसाइटी विंडसर के पूर्व प्रधान हरजिंदर सिंह कंदोला ने जांच को निष्पक्ष और ठोस सबूतों के आधार पर करने की अपील की है, ताकि पूरे सिख समुदाय को बिना वजह बदनाम न किया जाए। नैंसी की मां और बहन ने आरोप लगाया है कि उनकी निडर आवाज को दबाने के लिए यह हत्या की गई। 

सरसों की खरीद पर सरकार की अग्निपरीक्षा, निजी मंडियों में ₹6900 तक मिल रहा भाव, किसानों का रुझान भांपना चुनौती

चंडीगढ़  प्रदेश में रबी-2026 की सरसों की खरीद शनिवार से होगी। सुबह 6 छह बजे से रात 8 बजे तक गेटपास बनेंगे। किसानों के मोबाइल नंबर पर गेटपास से संबंधित मैसेज मंडी में पहुंचने पर ही आएंगे। बायोमीटि्रक्स की प्रक्रिया अंदर एंट्री के बाद शुरू होगी। खरीद की शुरुआत के साथ ही हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड और खाद्य व नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की भी परीक्षा शुरू हो गई है।  सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 6200 रुपये तय हैं  रेवाड़ी में निजी व्यापारी 6900 रुपये में सरसों खरीद रहे हैं। नारनौल में अब तक 6841 क्विंटल की खरीद खुली बोली के तहत हो चुकी है। जींद में निजी व्यापारी 6500 रुपये में सरसों खरीद रहे हैं। झज्जर और बहादुरगढ़ के किसानों को 6500 रुपये प्रति क्विंटल रेट मिल रहा है। हिसार में भी 5800 से 6600 रुपये प्रति क्विंटल बाजार में सरसों का भाव होने से किसानों का मंडियों की तरफ कम रुझान है। कैथल और कलायत में फिलहाल निजी खरीद 6500 रुपये प्रति क्विंटल तक की जा रही है। जिलावार मंडियों में खरीद के इंतजाम रोहतक : सरसों की खरीद के लिए नमी जांच के लिए 20 मशीनों का इंतजाम किया है। 20 कर्मचारी तैनात रहेंगे। सोनीपत : मार्केट कमेटी के सचिव जितेंद्र सेन का कहना है कि सरसों की खरीद का अधिकारिक पत्र नहीं आया है। रेवाड़ी : सुपरवाइजर, डाटा इंट्री ऑपरेटर और चौकीदार की तैनाती की गई है। 8 नमी मापक यंत्र भी उपलब्ध हैं। नारनौल : सुपरवाइजर, डाटा इंट्री ऑपरेटर और चौकीदार की तैनाती की जा चुकी है। 8 नमी मापक यंत्र भी उपलब्ध हैं। जींद : किसानों की सरसों नमी की जांच कर खरीदी जाएगी। इसकी व्यवस्था की गई है। यमुनानगर : हैफेड ने 7000 क्विंटल खरीद का लक्ष्य रखा है। सीसीटीवी लग गए हैं। गेटपास का जिम्मा मंडी समिति संभालेगी। हिसार : जिले की 13 मंडियों में 54 कर्मचारी और नमी मापने के लिए 27 मशीन लगाई हैं। 11 लाख बैग मंगाए गए हैं। फतेहाबाद : फतेहाबाद, भट्टू, भूना की मंडियों में हैफेड व नैफेड खरीद करेगा। 200 नमी जांचने की मशीनों का इंतजाम किया है। सिरसा : सिरसा में 14 केंद्रों पर 200 नमी जांच की मशीनों की व्यवस्था की गई है। भिवानी : 10 मंडियों में खरीद होगी। भिवानी की चारा मंडी सहित ग्रामीण मंडियों में पर्याप्त शेड नहीं है। चरखरी दादरी : बाढड़ा, झोझूकलां में खरीद होगी। दादरी व बौंदकलां मंडी में हैंडलिंग एजेंट न होने से खरीद अभी नहीं होगी। 15 बायोमीटि्रक्स मशीन रहेंगी। अंबाला : शहजादपुर, नारायणगढ़, मुलना में गेटपास के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं, सत्यापन को लेकर परेशानी हो सकती है। करनाल : घराैंडा व इंद्री में खरीद होगी, देर रात तक व्यवस्थाएं बनाई जा रही थीं। कैथल : कैथल व कलायत मंडी में 80-90 प्रतिशत सरसों मंडियों में आ चुकी है। पानीपत : मंडी में रात 8 बजे के बाद नो एंट्री रहेगी। पानीपत, समालखा, इसराना, मतलौडा, बापौली समेत नौ मंडियों में खरीद होगी। कुरुक्षेत्र : हैफेड एक सोसाइटी के माध्यम से सरसों की खरीद करेगा। गेटपास मंडी के कर्मचारी बनाएंगे। किसान अपनी समस्याओं को लेकर टोल फ्री नंबर पर कर सकेंगे काॅल किसानों को गेटपास से लेकर बायोमीटि्रक्स, वाहन नंबरों की प्लेट की फोटोग्राफी आदि को लेकर कोई परेशानी होती है तो वह टोल फ्री नंबर 18001802060 पर कॉल कर सकते हैं। हरियाणा में सरसों और गेहूं की खरीद की प्रक्रिया को लेकर खुद मंडियों के दाैरे कर रहा हूं। बारदाने की कोई कमी नहीं रहेगी। किसी भी मंडी में टिनशेड के नीचे पुरानी फसल नहीं है। गेटपास से लेकर दूसरे सभी नियम-निर्देशों को लेकर किसानों को जागरूक किया गया है। फिर भी किसानों को कहीं तंग किया गया तो कार्रवाई की जाएगी। राजेश नागर, मंत्री, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले

बीमारी से जंग और भाई के अधूरे सपनों को पूरा करने का साहस लिए अरुणाचल की अनाई ने जीता स्वर्ण

बीमारी से जंग और भाई के अधूरे सपनों को पूरा करने का साहस लिए अरुणाचल की अनाई ने जीता यादगार केआईटीजी स्वर्ण रायपुर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के पहले संस्करण के लिए रायपुर रवाना होने से कुछ ही दिन पहले अरुणाचल प्रदेश की 21 वर्षीय वेटलिफ्टर अनाई वांगसु अस्पताल के बिस्तर पर थीं। उनकी पुरानी गैस्ट्रिक समस्या एक बार फिर उभर आई थी और ताकत लौटाने के लिए उन्हें इंट्रावेनस फ्लूइड्स पर रखा गया। ऐसे में उनके इन खेलों में भाग लेने पर ही सवाल खड़े हो गए थे।           अनाई के लिए यह संघर्ष नया नहीं है। 2019 से वह इस बीमारी से जूझ रही हैं, जो बिना किसी चेतावनी के उन्हें कमजोर, डिहाइड्रेटेड और थका हुआ बना देती है—एक ऐसे खेल में जहां ताकत और संतुलन सबसे अहम होते हैं।              लेकिन इस शारीरिक चुनौती के आगे हार मानने के बजाय अनाई ने वापसी की। अस्पताल से छुट्टी मिलने के अगले ही दिन वह फिर से प्रशिक्षण में जुट गईं, क्योंकि इस बार वह अपने करियर के ‘करीब आकर चूक जाने’ की कहानी को बदलना चाहती थीं।              अनाई ने यहां महिलाओं के 58 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीतने के बाद साई मीडिया से कहा,” मैंने पहले कांस्य और रजत पदक जीते थे और परिवार में सभी पूछते थे कि मैं स्वर्ण कब जीतूंगी। अब सब बहुत खुश हैं कि आखिरकार मैंने यह लक्ष्य हासिल कर लिया।”          इससे पहले अनाई ने यूथ नेशनल्स में दो कांस्य पदक जीते थे। इसके अलावा उन्होंने विभिन्न खेलो इंडिया प्रतियोगिताओं, जिसमें 2025 का खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (राजस्थान) भी शामिल है, में रजत पदक हासिल किए। लेकिन स्वर्ण हर बार उनसे थोड़ा दूर रह जाता था।             पिछले साल ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी नेशनल्स में वह केवल एक लिफ्ट से स्वर्ण चूक गई थीं, क्योंकि एक मिनट की समय सीमा समाप्त हो गई थी। उस पल की टीस आज भी उनके दिल में है। उन्होंने उस पाल को याद किया,” उस दिन मैं बहुत रोई थी। लगा जैसे मेरी सारी मेहनत बेकार हो गई।”          वांगचो जनजाति से ताल्लुक रखने वाली अनाई की वेटलिफ्टिंग यात्रा उनके बड़े भाई सिंचाड बांसु के सपनों से जुड़ी है, जो खुद राष्ट्रीय स्तर के वेटलिफ्टर रह चुके हैं और अब अरुणाचल प्रदेश पुलिस में कार्यरत हैं।            सिंचाड ही उन्हें पहली बार इटानगर के स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) केंद्र में ट्रायल्स के लिए लेकर गए थे। शुरुआत में अनाई की दिलचस्पी इस खेल में नहीं थी। वह बॉक्सर बनना चाहती थीं, खासकर मैरी कॉम की फिल्म से प्रेरित होकर। लेकिन उनके भाई ने उन्हें समझाया और वेटलिफ्टिंग पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया। जल्द ही अनाई को लखनऊ के एनसीओई में उन्नत प्रशिक्षण के लिए चयनित कर लिया गया।         हालांकि, कोविड-19 महामारी के दौरान उन्हें वापस अरुणाचल लौटना पड़ा, जहां पर्याप्त पोषण और संसाधनों की कमी ने उनकी गैस्ट्रिक समस्या को और बढ़ा दिया।          अनाई ने कहा,” मैं बहुत मेहनत करती हूं, लेकिन कभी-कभी मेरी सेहत अचानक खराब हो जाती है। समझ नहीं आता कि मेरा शरीर मेरा साथ क्यों नहीं देता।”          भारत के लिए खेलने का सपना रखने वाली अनाई ने यह भी जोड़ा कि यहां मिला स्वर्ण पदक उन्हें यह भरोसा देता है कि उनकी मेहनत बेकार नहीं जा रही है। —

वन विभाग की बड़ी कार्रवाई: बिलासपुर के रिसॉर्ट में हिरण शिकार का खुलासा, 4 आरोपी धराए

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के पर्यटन मंडल के रिसार्ट में हिरण का शिकार किया गया। वन विभाग की टीम ने रिसार्ट में छापेमारी कर हिरण के पके मीट बरामद किए है। मैनेजर समेत 4 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामला कोटा क्षेत्र के बेलगहना स्थित कुरदर के एथनिक रिसार्ट का है। दरअसल, वन विभाग को शुक्रवार को सूचना मिली थी कि, बेलगहना वन परिक्षेत्र के कुरदर स्थित प्राइवेट रिसार्ट में हिरण का शिकार कर उसके मांस को पकाया जा रहा है। अफसरों ने रिसार्ट में दबिश देकर तलाशी ली, तो किचन में कड़ाही पर मांस पकाया जा रहा था। पर्यटन मंडल का है रिसार्ट जांच में पता चला कि, एथनिक रिसार्ट पर्यटन मंडल संचालित करता है। जहां 8 से 10 कर्मचारी कार्यरत हैं। मैनेजर और कर्मचारियों के लिए हिरण का मीट बनाया जा रहा था। टीम ने कुक रामकुमार टोप्पो समेत रिसॉर्ट के मैनेजर रजनीश सिंह सहित रमेश यादव, संजय वर्मा को पकड़ा है। उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण कानून के उल्लंघन का केस दर्ज किया है। मैनेजर समेत कर्मचारियों ने कुक को बताया दोषी वन विभाग के अफसरों ने मैनेजर रजनीश सिंह के साथ कर्मचारियों से पूछताछ की, तब उन्होंने खुद का बचाव करते हुए कहा कि, उन्हें नहीं पता मांस किसका है। उन्होंने पूरा दोष कुक रामकुमार टोप्पो पर मढ़ दिया। जबकि, कुक रामकुमार ने कहा कि उसे इस बारे में कुछ जानकारी नहीं है। उसे गांव के जनक बैगा ने पत्ते में मांस लाकर दिया था। कुक रामकुमार टोप्पो, जिसे पूछताछ कर गिरफ्तार कर लिया गया। जांच के लिए जबलपुर लैब भेजा जाएगा मीट वन विभाग की टीम ने गिरफ्तार आरोपियों का बयान दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। अफसरों ने बताया कि, जब्त मांस को जांच के लिए जबलपुर लैब भेजा जाएगा, ताकि पुष्टि हो सके कि यह हिरण का ही मांस है या नहीं। हालांकि, वन विभाग की जांच में हिरण के बाकी अवशेषों का कुछ पता नहीं चल सका है। जंगल में बेधड़क हो रहा वन्य जीवों का शिकार कोटा-बेलगहना क्षेत्र में इससे पहले भी वन्य जीवों के शिकार हो चुके हैं। जंगल में करंट लगाकर बाघ-तेंदुआ के साथ ही जंगली सुअरों का भी शिकार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में कई प्राइवेट रिसार्ट भी हैं, जहां इसी तरह हिरण का शिकार कर मीट बनाया जाता है। लेकिन, वन विभाग के अफसरों ने अब तक प्राइवेट रिसार्ट में छापेमारी नहीं की है।

केयू के छात्रों ने तैयार की ऐतिहासिक स्मारक मूर्तियां, पीएम और सीएम को की गईं भेंट

कुरुक्षेत्र कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग ने भगवद गीता की शिक्षाओं से प्रेरित दो भव्य स्मारक मूर्तियां तैयार की हैं। इनमें से एक मूर्ति भगवान कृष्ण के विराट रूप को दर्शाती है, जबकि दूसरी मूर्ति उस ऐतिहासिक दृश्य को सजीव करती है, जिसमें भगवान कृष्ण रथ पर अर्जुन को गीता का उपदेश देते हुए दिखाई देते हैं। कलाकृतियां मिलकर गुरु-शिष्य के अटूट संबंध का प्रतीक बनती हैं दोनों कलाकृतियां मिलकर दिव्य ज्ञान, मार्गदर्शन और गुरु-शिष्य के अटूट संबंध का प्रतीक बनती हैं। विराट रूप की मूर्ति भगवान कृष्ण के उस विशाल और दिव्य स्वरूप को दर्शाती है, जिसे उन्होंने कुरुक्षेत्र के युद्ध के दौरान प्रकट किया था। यह मूर्ति इस विचार को भी उजागर करती है कि एक अदृश्य और शक्तिशाली शक्ति जीवन के संचालन और संरक्षण में निरंतर सक्रिय रहती है। दूसरी मूर्ति उस महत्वपूर्ण क्षण को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है, जब भगवान कृष्ण युद्धभूमि में भ्रमित अर्जुन को साहस, स्पष्टता और निडरता का संदेश देते हैं। यह दृश्य गीता के जीवन-दर्शन और कर्तव्य की भावना को दर्शाता है।  अध्यक्ष डॉ. गुरचरण सिंह ने कहा कार की परियोजनाएं छात्रों को प्रोत्साहित करती हैं ललित कला विभाग के अध्यक्ष डॉ. गुरचरण सिंह ने कहा कि इस प्रकार की परियोजनाएं छात्रों की रचनात्मकता को प्रोत्साहित करती हैं। ऐसे प्रोजेक्ट छात्रों को अपने कौशल को निखारने और भारतीय संस्कृति को गहराई से समझने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि इन मूर्तियों को भारत के प्रधानमंत्री और हरियाणा के मुख्यमंत्री सहित कई प्रमुख हस्तियों को भेंट किया जा चुका है, जो इनके सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है। सामूहिक प्रयास से साकार हुई परियोजना डॉ. गुरचरण सिंह ने बताया कि यह परियोजना मूर्तिकला अनुभाग के छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों के सामूहिक प्रयास से साकार हुई है। कई महीनों की योजना, डिजाइन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से इन मूर्तियों को जीवंत रूप दिया गया है। भविष्य में इन्हें विश्वविद्यालय के विभिन्न कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और प्रदर्शनियों में प्रदर्शित किया जाएगा। यह पहल न केवल कुरुक्षेत्र के आध्यात्मिक महत्व को उजागर करती है बल्कि कला शिक्षा के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।