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काटजू अस्पताल में खुला हाईटेक गायनेकोलॉजी सेंटर, मेनोपॉज से इन्फर्टिलिटी तक की सुविधाएं एक छत के नीचे

भोपाल  राजधानी भोपाल में महिलाओं के इलाज को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 23 मार्च सोमवार से काटजू अस्पताल में शुरू हो रहा स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर न सिर्फ प्रदेश का पहला ऐसा सरकारी सेंटर होगा, बल्कि यहां बांझपन से लेकर सर्वाइकल कैंसर तक की आधुनिक जांच और इलाज एक ही जगह पर उपलब्ध होगा।  प्रदेश का पहला, सुविधाओं में बड़ा कदम यह मध्यप्रदेश का पहला सरकारी प्रिवेंटिव गायनी ऑन्कोलॉजी एंड इन्फर्टिलिटी सेंटर होगा। इससे पहले ऐसी सुविधाएं सीमित थीं और महंगे निजी अस्पतालों तक ही सिमटी थीं। इस सेंटर का उद्घाटन 23 मार्च को उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल और राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल द्वारा किया जाएगा। अब भटकना नहीं पड़ेगा, एक ही जगह मिलेगा पूरा इलाज डॉ. कैलाशनाथ काटजू शासकीय अस्पताल की नोडल अधिकारी डॉ. रचना दुबे ने बताया कि शुरू हो रहे इस अत्याधुनिक सेंटर में महिलाओं से जुड़ी लगभग हर बड़ी समस्या का समाधान होगा। इन्फर्टिलिटी (नि:संतानता), पीसीओएस, सर्वाइकल कैंसर, मोटापा, मेनोपॉज, हार्मोनल असंतुलन और अनियमित पीरियड्स जैसी बीमारियों के लिए अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर लगाने की जरूरत खत्म हो जाएगी। करीब तीन करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक और हाईटेक मशीनें अस्पताल में पहुंच चुकी हैं और उनके इंस्टालेशन का काम लगभग पूरा हो गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस सेंटर को नवरात्र के दौरान शुरू किए जाने की तैयारी है। इस सेंटर के शुरू होने से मेनोपॉज, निसंतानता, पीसीओएस, मोटापा, अनियमित मासिक धर्म और सर्वाइकल कैंसर जैसी महिलाओं से जुड़ी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज एक ही स्थान पर उपलब्ध होगा। अभी तक इन बीमारियों के इलाज के लिए महिलाओं को अलग-अलग अस्पतालों और विशेषज्ञों के पास जाना पड़ता था, लेकिन अब जांच से लेकर उपचार तक की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिल सकेंगी। किशोरियों से महिलाओं तक 100 से अधिक रोगों का इलाज इस नए सेंटर में किशोरियों से लेकर वयस्क महिलाओं तक की स्वास्थ्य समस्याओं के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। यहां महिलाओं से जुड़े 100 से अधिक रोगों की जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, सेंटर के लिए ग्राउंड फ्लोर और ऊपरी मंजिलों में स्थान तय कर दिया गया है। यहां प्रजनन स्वास्थ्य से लेकर गर्भाशय कैंसर तक की बीमारियों के इलाज की व्यवस्था होगी। कैंसर की शुरुआती पकड़, जान बचाने की तैयारी सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए वीआईए तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे बीमारी को शुरुआती स्तर पर ही पकड़कर समय रहते इलाज शुरू किया जा सकेगा, जिससे महिलाओं की जान बचाने में मदद मिलेगी। इस सरकारी सेंटर में बांझपन का इलाज 40 हजार से 80 हजार रुपए के बीच हो सकेगा। वहीं, निजी अस्पतालों में यही इलाज 2.5 से 3 लाख रुपए तक पहुंच जाता है। यानी आम लोगों को यहां 3 से 4 गुना तक सस्ता इलाज मिलेगा। हाईटेक मशीनें और आधुनिक इलाज की सुविधा करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस सेंटर को आधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है। यहां आईयूआई जैसी एडवांस फर्टिलिटी ट्रीटमेंट सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मरीजों को काउंसलिंग से लेकर ट्रीटमेंट तक हर स्टेज पर मदद करेगी।  आधुनिक मशीनों से होगा इलाज     केगेल चेयर- पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों को मजबूत करने वाली मशीन है। जिन महिलाओं को बच्चेदानी या पेल्विक मांसपेशियों के ढीले होने की समस्या होती है, उनमें बिना सर्जरी के उपचार संभव हो सकेगा।     कोलपोस्कोप- मशीन के जरिए गर्भाशय ग्रीवा, योनि और संबंधित अंगों की गहन जांच की जाएगी।     लेजर मशीन- इसके माध्यम से सिस्ट, मेनोपॉज से जुड़ी समस्याएं और यूरीन लीक जैसी बीमारियों का इलाज आसान हो जाएगा। रोगों की रोकथाम पर रहेगा विशेष फोकस विशेषज्ञों के अनुसार, यह सेंटर केवल इलाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं में रोगों की रोकथाम और शुरुआती पहचान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खराब जीवनशैली और बदलती जीवनशैली के कारण महिलाओं में कई स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसकी शुरुआत अक्सर पीसीओएस जैसी बीमारी से होती है। किशोरियों में बढ़ रही पीसीओएस की समस्या विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान समय में हर चार में से एक किशोरी में पीसीओएस के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। वहीं अस्पतालों में आने वाली महिलाओं में भी लगभग आधी महिलाएं इसी समस्या से प्रभावित होती हैं। ऐसे में इस सेंटर के माध्यम से समय पर जांच और उपचार की सुविधा मिलने से महिलाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। शिक्षा कार्यक्रम भी चलेंगे सेंटर की इंचार्ज डॉ. रचना दुबे के अनुसार इस सेंटर की तैयारी पिछले कई महीनों से की जा रही है और उम्मीद है कि यह क्लीनिक जल्द ही शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि यहां केवल जांच और इलाज ही नहीं होगा, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।

विधेयक पारित होने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, ‘यह प्रदेशवासियों के लिए वरदान साबित होगा

धर्म स्वातंत्र्य, छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल एवं छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 का पारित होना प्रदेशवासियों के लिए साबित होगा वरदान – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के पारित होने से धर्मांतरण पर लगेगी रोक,अवैध धर्मांतरण के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई विभिन्न वर्गो के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में विधायक पुरंदर मिश्र के नेतृत्व में विभिन्न वर्गो के प्रतिनिधियों ने सौजन्य मुलाकात की और बजट सत्र में धर्म स्वातंत्र्य, छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल एवं छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 के पारित होने पर उनका सम्मान कर आभार जताया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026,छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल  विधेयक 2026 एवं छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 का विधानसभा में पारित होना पूरे प्रदेशवासियों के लिए वरदान साबित होगा। इनमें धर्म स्वातंत्र्य विधेयक हमारी महान परंपराओं और मूल्यों को सुरक्षित रखने का एक स्पष्ट संकल्प है। इसी तरह अन्य दो विधेयक भी पारदर्शिता के साथ भर्ती के लिए अहम साबित होंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सनातन धर्मावलंबी लंबे समय से धर्मांतरण के खिलाफ  सख्त कानून बनाने की मांग कर रहे थे। इस मांग के अनुरूप हमने छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित किया है। उन्होंने कहा कि पहले भी इस संबंध में कानून बना था पर यह कानून उतना प्रभावी नहीं था, जिस कारण अवैध धर्मांतरण कराने वाले लोग बच जाते थे। प्रदेश में धर्मांतरण के कारण कुछ क्षेत्रों में सामाजिक तानाबाना भी बिगड़ रहा था, जिससे प्रदेश की छवि धूमिल हो रही थी। इस बिल के माध्यम से अवैध धर्मांतरण पर अंकुश लगाया जाएगा।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को पारित कर पूर्व राज्यसभा सांसद एवं केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय जूदेव जी को श्रद्धांजलि अर्पित की है, जिन्होंने धर्मांतरण के खिलाफ प्रखर मुहिम छेड़ कर "घर वापसी" अभियान चलाया था। इसी तरह हमारी सरकार की पहल पर  प्रदेश के लाखों युवाओं की आवाज को सुनते हुए सरल एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया हेतु छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक पारित किया गया है। इसी तरह परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने एवं नकल जैसे प्रकरणों पर अंकुश लगाने  छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 पारित किया गया है। यह दोनों  सर्वसम्मति से पारित किया गया। मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर सभी प्रदेशवासियों को चैत्र नवरात्र पर्व की शुभकामनाएं एवं बधाई दी। इस अवसर पर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्र ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, अखिलेश सोनी,  रमेश ठाकुर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक  उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को किया नमन

भारत के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है बलिदानियों का त्याग: मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को किया नमन  सीएम ने किया पोस्ट- इनके साहस, समर्पण और राष्ट्रप्रेम की भावना सदियों तक देती रहेगी 'राष्ट्र सर्वोपरि' की प्रेरणा लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलिदान दिवस पर महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु को नमन किया। मुख्यमंत्री ने इनके साहस, समर्पण और राष्ट्रप्रेम को प्रेरक बताया।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर लिखा कि क्रांति की ज्योति प्रज्ज्वलित करने वाले अमर बलिदानी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का त्याग भारत के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। उनके साहस, समर्पण और राष्ट्रप्रेम की भावना सदियों तक हमें 'राष्ट्र सर्वोपरि' की प्रेरणा देती रहेगी। आज बलिदान दिवस पर वीर हुतात्माओं को विनम्र श्रद्धांजलि।

एसडीएम का गंभीर आरोप: डीसी पर तंग करने का आरोप, चीफ सेक्रेटरी से जांच और ट्रांसफर की मांग

बाघापुराना  पंजाब के बाघापुराना के एडीएम ने मोगा के डीसी पर ही मानसिक रूप से परेशान करने और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। उनकी तरफ से इस बारे में एक चिट्ठी चीफ सेक्रेटरी को लिखी गई है। इसमें उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने। एक महीने की छुट्टी और मोगा जिले से तबादले की भी मांग की है। दूसरी तरफ, इस मामले को विपक्ष भी उठा रहा है। हालांकि डीसी सेतिया ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये आरोप बेबुनियाद हैं। वहीं, पता चला है कि इस मामले में कोर्ट में मामला पहुंचने वाला है। चिट़ठी सुबह तीन बजे लिखी है एसडीएम भवपदीप सिंह वालिया ने सुबह तीन बजे चिट्‌ठी लिखी है।अपनी चिट्ठी में कहा है कि उन्हें बार-बार बैठकों के लिए बुलाया गया और लगातार फोन कॉल्स के जरिए संपर्क किया गया, जिससे दबाव और डर का माहौल बना। देर रात और अवकाश के दिनों में भी उन्हें कॉल किए जाते रहे, जिससे मानसिक तनाव और बढ़ गया। इसके अलावा, उन्होंने व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर धमकियां मिलने, विभागीय कार्रवाई, जांच और एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दिए जाने का भी जिक्र किया है। एसडीएम के अनुसार, इन सबका उद्देश्य किसी विशेष उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव परिणाम घोषित करवाने का दबाव बनाना हो सकता है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांतों के खिलाफ है। सारे मामले की निष्पक्ष जांच हो घटनाओं की पूरी श्रृंखला और संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों के आचरण की निष्पक्ष और न्यायसंगत जांच कराई जाए। तुरंत हस्तक्षेप किया जाए ताकि किसी भी प्रकार का अनुचित दबाव, उत्पीड़न और धमकी तुरंत रोकी जा सके। इस अवधि के दौरान झेले गए अत्यधिक मानसिक तनाव और आघात को देखते हुए मुझे एक महीने की छुट्टी प्रदान करने पर विचार किया जाए। मुझे मोगा से किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, ताकि निष्पक्ष वातावरण सुनिश्चित हो सके और किसी भी अनुचित प्रभाव से बचा जा सके।

बेबी रानी मौर्य का बयान: यूपी में महिला सशक्तिकरण अब नारा नहीं, जमीनी हकीकत है

नव निर्माण के 9 वर्ष  यूपी में महिला सशक्तिकरण अब नारा नहीं, जमीनी हकीकत है: बेबी रानी मौर्य महिला अपराधों में भारी कमी, यूपी-112 का रिस्पांस टाइम घटकर हुआ मात्र 6 मिनट 18 लाख से अधिक महिलाएं बनीं 'लखपति दीदी', नाइट शिफ्ट से खुले रोजगार के द्वार मातृ-शिशु मृत्यु दर और कुपोषण में आई भारी गिरावट, 60 लाख माताओं को मिला लाभ कन्या सुमंगला से 26 लाख बेटियों को लाभ, 5.20 लाख का हुआ मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह आगरा  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के सफल 9 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आज आगरा में महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने अपने विभाग की 9 साल की उपलब्धियों का विस्तृत ब्योरा पेश करते हुए कहा कि योगी सरकार ने महिलाओं और बच्चों के विकास को केवल कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रखा है। अब यह सुरक्षा, सम्मान, पोषण, शिक्षा, स्वावलंबन और सामाजिक न्याय का एक व्यापक मॉडल बन चुका है। कैबिनेट मंत्री ने जोर देकर कहा कि यूपी में महिला सशक्तिकरण अब सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक जमीनी हकीकत बन गया है। अब प्रदेश की महिलाएं केवल नौकरी नहीं ढूंढ रहीं, बल्कि नए अवसर पैदा कर रही हैं। बेटी के जन्म से लेकर स्वावलंबन तक की मजबूत व्यवस्था कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने बताया कि योगी सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर उसके शिक्षित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर होने तक की पूरी व्यवस्था खड़ी की है। कन्या सुमंगला योजना के तहत अब तक 26.81 लाख बेटियों को लाभान्वित किया गया है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड व सामान्य) के माध्यम से 1 लाख 5 हजार से अधिक बेसहारा बच्चों को संरक्षण दिया गया। वहीं मिशन वात्सल्य के तहत 1 लाख से अधिक बच्चों को उनके बिछड़े परिवारों से मिलाया गया है। यह साबित करता है कि सरकार बच्चों को सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि भविष्य के नागरिक के रूप में देखती है। मातृ स्वास्थ्य और पोषण के मोर्चे पर अभूतपूर्व सुधार उन्होंने बताया कि पोषण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगी सरकार के काम के परिणाम अब स्पष्ट नजर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से 60 लाख माताएं लाभान्वित हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसव पर ₹1400 और शहरी क्षेत्रों में ₹1000 की सहायता दी जा रही है। संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 84 प्रतिशत के पार पहुंच गया है। प्रदेश में 0 से 5 वर्ष के बच्चों में स्टंटिंग (ठिगनापन) की दर में 6.6% और अंडरवेट दर में 7.5% का सुधार हुआ है। 2 करोड़ 12 लाख बच्चों और महिलाओं को अनुपूरक पुष्टाहार मिल रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों में 'संभव अभियान' के तहत तकनीक (पोषण ट्रैकर) का इस्तेमाल कर कुपोषण के खिलाफ युद्ध स्तर पर काम हो रहा है। महिला सुरक्षा: अपराधों में भारी कमी और सख्त कानून व्यवस्था कैबिनेट मंत्री ने कहा कि महिला सुरक्षा को लेकर योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के नतीजे सामने हैं। 2016 में यूपी-112 का जो रिस्पॉन्स टाइम 1 घंटा 5 मिनट था, वह 2025 में घटकर मात्र 06 मिनट 41 सेकंड रह गया है। प्रदेश के हर थाने में मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं और महिला अपराधों के ग्राफ में भारी गिरावट आई है। बलात्कार की घटनाओं में 33.92%, अपहरण में 17.03% और घरेलू हिंसा में 9.54% की कमी दर्ज की गई है। यूपी पुलिस में महिलाओं के लिए 20% पद आरक्षित किए गए हैं, जिसके फलस्वरूप आज 44,000 से अधिक महिलाएं पुलिस बल का हिस्सा हैं। 3 नई महिला P.A.C. बटालियन का गठन और हर जिले में एंटी रोमियो स्क्वायड की तैनाती की गई है। लखपति दीदी से लेकर महिला उद्यमी तक कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने स्पष्ट किया कि असली सशक्तिकरण आर्थिक आत्मनिर्भरता से ही आता है। यूपी में 1 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी हैं। 'लखपति दीदी योजना' के तहत 18.55 लाख से अधिक महिलाएं लखपति की श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। 39,885 बीसी सखियों ने ₹42,711 करोड़ का लेनदेन कर ₹116 करोड़ का लाभांश कमाया है। वहीं 15,409 विद्युत सखियों ने करोड़ों का बिल कलेक्शन कर कमीशन अर्जित किया है। औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं को नाइट शिफ्ट (रात की पाली) में काम करने की अनुमति दी गई है। 2017 में जहां महिला श्रम बल भागीदारी सिर्फ 13% थी, वह अब बढ़कर 36% हो गई है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को मिला सम्मान प्रेस वार्ता के अंत में मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि योगी सरकार ने जमीनी स्तर पर काम करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं का मानदेय अप्रैल 2026 से बढ़ाने का निर्णय किया है। इसके अलावा उन्हें जीवन ज्योति और सुरक्षा बीमा योजनाओं से भी जोड़ा गया है। 1.90 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को अब प्री- स्कूल के रूप में अपग्रेड किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 5.20 लाख बेटियों के हाथ पीले कराए गए हैं। योगी सरकार की स्पष्ट नीयत, पारदर्शी नीतियों और ईमानदार क्रियान्वयन ने यूपी में आधी आबादी की तस्वीर बदल दी है। "सुरक्षित नारी, सक्षम नारी, स्वावलंबी नारी" – यही आज के नए और समृद्ध उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारशिला है।

आदिवासियों के उत्थान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है हमारी सरकार – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

आदिवासियों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कसडोल में कंवर समाज सामुदयिक भवन तथा पलारी में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 50-50 लाख रुपए की घोषणा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गोंडवाना आदर्श सामूहिक विवाह कार्यक्रम में हुए शामिल  रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बलौदाबाजार भाटापारा जिले के ग्राम ओड़ान में बावनगढ़ आदिवासी ध्रुव गोंड़ समाज तुरतुरिया माता महासभा लवन के तत्वावधान में आयोजित गोंड़वाना आदर्श सामूहिक विवाह समारोह मे शामिल हुए। इस मौके पर साय ने सामूहिक विवाह कार्यक्रम में पारम्परिक गोंडी रीति-रिवाज से दाम्पत्य सूत्र में बंधे 28 नवविवाहित जोड़ों क़ो आशीर्वाद व सुखमय दाम्पत्य जीवन की बधाई एवं शुभकामनायें दी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समाज के पदाधिकारियों की मांग पर कसडोल नगर में कंवर समाज सामुदयिक भवन व नगर पंचायत पलारी में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 50-50 लाख रुपए और ग्राम ओड़ान में बड़ादेव ठाना में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 25 लाख रुपए की घोषणा की। साथ ही ग्राम ओड़ान के शनिमंदिर से बड़ादेव ठाना तक सीसी रोड निर्माण हेतु स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री साय ने कहा हमारी सरकार आदिवासी समाज के उत्थान के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। गोंडवाना संस्कृति के मानने वाले हमारे सभी आदिवासी भाई प्रकृति के पुजारी हैं। आप लोगों ने जल,जंगल और जमीन की सुरक्षा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जनजातियों को आगे बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के लिए इस साल हम लोगों ने 200 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसी तरह जनजातीय समुदाय के समग्र विकास की दिशा में प्रधानमंत्री जनमन योजना मील का पत्थर साबित हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी कला और संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए हमारी सरकार निरंतर काम कर रही है। हम लोगों ने आदिवासी परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सम्मान निधि प्रारम्भ किया है, जिसके माध्यम से बैगा, गुनिया और सिरहा को हर साल पांच हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे आदिवासी भाइयों का आय का एक बड़ा स्रोत वनोपज और तेंदूपत्ता संग्रहण है। हम लोगों ने तेंदूपत्ता संग्रहण का दाम 4 हजार रूपये से बढ़ाकर 5500 रूपये प्रति मानक बोरा किया है। जंगल जाने, वनोपज का संग्रहण करने वाले आदिवासी भाई- बहनों के पैरों में कांटे न चुभे, इसका भी इंतजाम हमारी सरकार ने फिर से किया है। इस साल चरण पादुका वितरण भी किया जाएगा। तेन्दूपत्ता संग्राहकों को चरण पादुका प्रदान करने के लिए बजट में 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सामूहिक विवाह बहुत ही अच्छी पहल हैं। इस तरह के आयोजन से न केवल समाज संगठित होता है, बल्कि फिजूलखर्ची पर भी रोक लगती है। उन्होंने कहा कि अभी 10 मार्च को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के माध्यम से 6 हजार से अधिक जोड़ों का सामूहिक विवाह पूरे प्रदेश में संपन्न हुआ जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल किया गया है। इस अवसर पर जांजगीर-चांपा सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, विधायक संदीप साहु सहित अन्य गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बदली जिंदगी की दिशा, आत्मनिर्भर बनकर समाज में पाया सम्मान

संघर्ष से समृद्धि तक : बैंक से ऋण मिला तो सुनीता के कारोबार ने भरी उड़ान  स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बदली जिंदगी की दिशा, आत्मनिर्भर बनकर समाज में पाया सम्मान योगी सरकार की नीतियों से मिला लाभ, खड़ा किया सफल व्यवसाय, 4 अन्य लोगों को भी दिया रोजगार लखनऊ  अमेठी जनपद के संग्रामपुर विकासखण्ड की ग्राम पंचायत उत्तरगांव पुरवा डिहवा की रहने वाली 41 वर्षीय सुनीता देवी का जीवन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने से पहले बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा था। पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। उनके पति मुरलीधर दूसरे शहर में सिलाई का काम करते थे, लेकिन रहने-खाने का खर्च निकालने के बाद परिवार के लिए बहुत कम पैसा बच पाता था। परिवार के पास न तो खेती थी और न ही स्थायी आय का कोई साधन। घर के नाम पर केवल एक छोटी-सी कच्ची कोठरी थी, जिसमें पूरे परिवार का गुजारा करना बेहद कठिन था। कभी काम मिलता तो कुछ आय हो जाती थी, और कभी-कभी वह भी नहीं। ऐसे में भविष्य अंधकारमय लगने लगा था, लेकिन सुनीता देवी ने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना। स्वयं सहायता समूह के साथ मिली नई दिशा सुनीता देवी ने गांव में संचालित सहारा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन की नई शुरुआत की। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं मिली बल्कि सही मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ। उन्होंने समूह से 10,000 रुपये का पहला ऋण लेकर अपने घर पर ही सिलाई मशीन से कपड़े बनाने का काम शुरू किया और तैयार कपड़ों को गांव-गांव फेरी लगाकर बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी और आय बढ़ने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा। कुछ समय बाद उन्होंने समूह से 50,000 रुपये का ऋण और लिया और अमेठी में किराये पर एक कमरा लिया। उसके बाद किराये पर “शिवम स्पोर्ट्स” के नाम से एक दुकान खोली। इसमें वह ट्रैक सूट, टी-शर्ट आदि की सिलाई कर बेचते हैं। बाद में उन्होंने अमेठी में अपनी खुद की दुकान खोल ली। योगी सरकार की मदद से बदली तकदीर, ऋण से व्यवसाय को मिली ताकत  समय के साथ सुनीता देवी ने लगातार मेहनत की और अगस्त 2025 में ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक से उन्हें सीसीएल के तहत 3 लाख का ऋण मिला। इस पूंजी का उपयोग करके उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया। उनकी दुकान “शिवम स्पोर्ट्स” की आज अमेठी क्षेत्र में एक पहचान बन चुकी है। विशेष रूप से सर्दियों के मौसम में ट्रैक सूट और स्पोर्ट्स वियर की मांग बढ़ने से उनकी आय दोगुनी तक हो जाती है। आज उनकी मासिक आय लगभग 90,000 रुपये से अधिक हो चुकी है। इतना ही नहीं, उन्होंने खुद की दुकान और पक्का घर भी बनवा लिया है। उनके बच्चों की पढ़ाई भी इसी वजह से पूरी हो पाई है। जो ऋण उन्हें बैंक से मिला है उसे चुकाने के लिए वह हर महीने किस्त बैंक में जमा करतीं हैं। सुनीता ने 4 लोगों को भी रोजगार भी दिया है। कारखाना और दुकान चलाने में उनके पति और बेटा सहयोग करते हैं। आत्मनिर्भरता से समाज में मिला सम्मान आज सुनीता देवी अपने गांव में एक सशक्त महिला की पहचान बना चुकीं हैं। जो कभी आर्थिक तंगी से जूझ रहीं थीं, वह आज अपने परिश्रम से न केवल अपने परिवार को समृद्ध बना चुकीं हैं बल्कि दूसरों को भी रोजगार और प्रेरणा दे रहीं है। सुनीता मानतीं हैं कि स्वयं सहायता समूह और योगी सरकार ने उनके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव किया है, जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। आज गांव की कई महिलाएं उनसे प्रेरित होकर समूह से जुड़ रही हैं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। सुनीता की कहानी यह संदेश देती है कि जब आत्मविश्वास के साथ-साथ सरकार का सहयोग मिल जाए, तो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी से बड़ी कठिनाई को हल किया जा सकता है। उन्होंने अपने व्यवसाय को और बढ़ाने के लिए जमीन भी ले ली है। यदि उन्हें सरकार से और ऋण मिलेगा तो वह जल्द ही अमेठी में दूसरी दुकान शुरू करेंगी।

लाभार्थी से लीडर बनीं प्रदेश की महिलाएं, सशक्तिकरण की नई मिसाल

लाभार्थी से लीडर की भूमिका में पहुंचीं प्रदेश की महिलाएं नारी शक्ति के दम पर बदली यूपी की तस्वीर लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के नौ वर्षों का कार्यकाल महिला सशक्तीकरण के समग्र व प्रभावशाली रूप में सामने आया है। सुरक्षा, सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता, इन चार स्तंभों पर खड़ी नीतियों ने नारी शक्ति को प्रदेश के विकास की मुख्यधारा में ला खड़ा किया। मिशन शक्ति, स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के जरिए आज उत्तर प्रदेश की महिलाएं ‘लाभार्थी’ से ‘लीडर’ की भूमिका में पहुंच चुकी हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत उत्तर प्रदेश में आर्थिक मोर्चे पर भी महिलाओं की भागीदारी अभूतपूर्व रूप से बढ़ी है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 9.43 लाख स्वयं सहायता समूहों से 1.06 करोड़ से अधिक महिलाओं को जोड़ा गया है। यही महिलाएं आज गांव-गांव में आर्थिक गतिविधियों की नई धुरी बन रही हैं। इसके अलावा, लखपति दीदी योजना के तहत 35 लाख महिलाओं की पहचान की गई, जिनमें से 18.55 लाख महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। यह अपने आप में ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत है। राशन वितरण की जिम्मेदारी संभाल रहीं महिलाएं सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाते हुए 2,682 उचित मूल्य की दुकानों का आवंटन स्वयं सहायता समूहों को सौंपा गया है। समूहों से जुड़ी महिलाएं ड्राई राशन वितरण की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इससे पारदर्शिता के साथ-साथ महिलाओं की आय में भी वृद्धि हुई है। बीसी सखी मॉडल लागू होने से ग्रामीण बैंकिंग में अभूतपूर्व वृद्धि वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में बीसी सखी मॉडल ने प्रदेश को नई पहचान दिलाई है। इन महिलाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय लेनदेन कर 120 करोड़ रुपये का कमीशन अर्जित किया है। यह आंकड़ा जल्द ही 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की ओर अग्रसर है, जिससे बीसी सखियों की आय में भी खासी बढ़ोतरी होगी। ग्रामीण बैंकिंग में यह तेजी पहली बार देखने को मिली है, जिसमें प्रयागराज, बरेली और शाहजहांपुर जैसे जिले अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। महिलाओं की आय और सामाजिक स्थिति दोनों में सुधार इसके साथ ही दुग्ध व्यवसाय में भी महिलाओं ने नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। प्रदेश की 3.5 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों का अंग बनकर दुग्ध व्यवसाय़ से आत्मनिर्भर बनी हैं और उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र में देश में अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। ग्रामीण आजीविका मिशन ने इस बदलाव को मजबूत आधार प्रदान किया है, जिससे महिलाओं की आय और सामाजिक स्थिति दोनों में सुधार हुआ है। योगी सरकार के प्रयासों का असर जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखता है। प्रदेश में जहां एक ओर 26.81 लाख निराश्रित महिलाओं को पेंशन के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा मिली, वहीं 26.81 लाख बेटियां मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से लाभान्वित होकर शिक्षा व सशक्त भविष्य की ओर बढ़ रही हैं। 60 लाख से अधिक माताओं को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ मिला है, जबकि 1.05 लाख बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत सहायता मिली है। मिशन वात्सल्य के जरिए एक लाख से अधिक बच्चों को उनके परिवारों से जोड़कर सामाजिक पुनर्वास सुनिश्चित किया गया है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 5.20 लाख से अधिक बेटियों के विवाह संपन्न कराए गए, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली। यह पूरा तंत्र इस बात का प्रमाण है कि योगी सरकार ने महिला सशक्तीकरण को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा के व्यापक दायरे में रखा है। नारी शक्ति ही ‘नव निर्माण’ की सबसे बड़ी ताकत योगी सरकार के इस दिशा में तमाम प्रयासों का संयुक्त प्रभाव यह है कि उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण अब किसी एक योजना तक सीमित नहीं, बल्कि एक व्यापक आंदोलन का रूप ले चुका है। सुरक्षा से लेकर स्वरोजगार, तक हर स्तर पर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दी है। नौ वर्षों में सरकारी नीतियों/कार्यक्रमों, तकनीक और प्रभावी क्रियान्वयन ने महिलाओं के लिए ईज ऑफ लिविंग को मजबूती दी है। आज नारी शक्ति ही ‘नव निर्माण’ के इस दौर की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है और यही विकसित उत्तर प्रदेश की नींव है।

अब सफर होगा आसान और ग्रीन: 100 ई-बसें सड़कों पर, यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

ग्वालियर ग्वालियर शहर में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में बड़ी तैयारी चल रही है। केंद्र सरकार की पीएम-ई बस सेवा के तहत ग्वालियर को मिलने वाली 100 इलेक्ट्रिक बसें डिपो का काम पूरा होते ही सड़कों पर दौड़ेंगी। इन बसों को इंटेलिजेंट ट्रांजिट मैनेजमेंट सिस्टम (आइटीएमएस) और पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (पीआईएस) से लैस किया जाएगा, जिससे उनकी हर गतिविधि स्मार्ट सिटी के कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से लाइव मॉनिटर की जा सकेगी। निगम के अधिकारियों ने धार के पीथमपुर में तैयार हो रही बसों का निरीक्षण भी कर लिया है। हालांकि जलालपुर आइएसबीटी और रमौआ डिपो पर सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्य देरी से शुरू होने के कारण परियोजना में कुछ विलंब हो सकता है। ऐसे में अब ई-बसों के मई-जून 2026 तक शहर में शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। बसों का संचालन अब नगर निगम की जगह राज्य सरकार की होल्डिंग कंपनी के माध्यम से किया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। केंद्र सरकार करेगी सिस्टम का टेंडर बसों में लगाए जाने वाले आइटीएमएस और पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम के लिए टेंडर और कंपनी का चयन केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा। बसों में स्पीकर सिस्टम भी होगा, जिससे किसी भी आपात स्थिति में कंट्रोल रूम से ड्राइवर और कंडक्टर को सीधे निर्देश दिए जा सकेंगे।   ऐसे चलेगी ई-बस सेवा पीएम-ई बस सेवा के तहत शहर में कुल 100 बसें चलाई जाएंगी। पहले चरण में 60 बसें और दूसरे चरण में 40 बसें आएंगी। सभी बसें 9 मीटर लंबी मिडी इलेक्ट्रिक बसें होंगी। इनका संचालन जलालपुर आइएसबीटी और रमौआ डिपो से होगा और यहीं बनाए जा रहे चार्जिंग स्टेशन से बसों को चार्ज किया जाएगा। 10 रूट किए गए फाइनल शहर में बस संचालन के लिए 10 रूट तय किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने इन रूटों का निरीक्षण कर नागरिकों से सुझाव भी लिए हैं। बसें आते ही इन्हीं रूटों पर संचालन शुरू किया जाएगा। 15.50 करोड़ से बन रहे डिपो और चार्जिंग स्टेशन ई-बस सेवा के संचालन और रखरखाव के लिए रमौआ और आइएसबीटी डिपो पर करीब 15.50 करोड़ रुपए से सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्य कराए जा रहे हैं। इसमें रमौआ डिपो पर सिविल व आंतरिक इलेक्ट्रिकल कार्य 4.29 करोड़, चार्जिंग के लिए एचटी कनेक्शन 7.31 करोड़, आइएसबीटी में सिविल व आंतरिक इलेक्ट्रिकल कार्य 1.16 करोड़ और बाहरी इलेक्ट्रिकल कनेक्शन के लिए 2.73 करोड़ रुपए शामिल हैं। 58.14 रुपए प्रति किलोमीटर का भुगतान बस संचालन के लिए एजेंसी को नगर निगम 58.14 रुपए प्रति किलोमीटर का भुगतान करेगा। इसमें केंद्र सरकार 22 रुपए प्रति किलोमीटर देगी, जबकि शेष 36.14 रुपए नगर निगम को वहन करना होगा। निगम को उम्मीद है कि बसों से होने वाले कलेक्शन से इस खर्च की भरपाई हो जाएगी। बसों में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं पीएम-ई बसें पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल होंगी। इनमें सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन, डिजिटल डिस्प्ले और पैसेंजर सूचना प्रणाली जैसी सुविधाएं होंगी। बस जिस स्थान से गुजरेगी, उस क्षेत्र की जानकारी डिस्प्ले स्क्रीन पर दिखाई देगी। ये बसें एक बार चार्ज होने पर लगभग 180 किलोमीटर तक चल सकेंगी। नोडल अधिकारी मुनीष सिकरवार के अनुसार पीथमपुर में बसों का निरीक्षण किया जा चुका है और बसें तैयार हैं। रमौआ और आइएसबीटी में चार्जिंग स्टेशन का कार्य पूरा होते ही संभावित रूप से मई-जून तक बसें ग्वालियर में आ सकती हैं। पहले चरण में 60 बसें आएंगी।

खेल अनुशासन, समन्वय और जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने का माध्यम है – मुख्यमंत्री

देश के प्रतिभावान खिलाड़ियों का उत्तर प्रदेश की धरती पर आगमन हम सबके लिए सम्मान का विषय – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खेल अनुशासन, समन्वय और जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने का माध्यम है – मुख्यमंत्री हमारी सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में स्पोर्ट्स कॉलेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना हो – मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ ने लिएंडर पेस को ‘मेंटॉर ऑफ द इयर’ और मिताली राज को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से किया सम्मानित उत्तर प्रदेश को मिला ‘स्टेट ऑफ द इयर’ का पुरस्कार, राज्य में विकसित हो रहे खेल ढांचे और नीतियों के लिए मिला सम्मान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित स्पोर्ट्स अवार्ड समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि खिलाड़ियों के इस सम्मान समारोह में शामिल होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है और इससे भी अधिक प्रसन्नता इस बात की है कि इस सम्मान समारोह का आयोजन प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस सम्मान समारोह के कारण देश के इन प्रतिभावान खिलाड़ियों का उत्तर प्रदेश की धरती पर आगमन हुआ है। यह हम सबके लिए सम्मान का विषय तो है ही, साथ ही यह प्रदेश की नई पीढ़ी को खेल के क्षेत्र में अचीवमेंट्स हासिल करने के लिए प्रेरणा प्रदान करेगा। स्पोर्ट्स अवार्ड समारोह का आयोजन एक निजी मीडिया समूह ने किया था, जिसमें देशभर के दिग्गज खिलाड़ियों और खेल हस्तियों को उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि खेल केवल जीत-हार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, समन्वय और जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने का माध्यम है। खेल भावना व्यक्ति को मजबूत बनाती है, विपरीत परिस्थितियों का सामना करने का साहस देती है और नई पीढ़ी को सही दिशा प्रदान करती है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार ने उत्तर प्रदेश में खेलों के विकास के लिए कई सार्थक प्रयास किए हैं।  उन्होंने बताया कि 2017 के बाद से हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू किए गए खेलो इंडिया और फिट इंडिया मूवमेंट जैसी पहल को मुहिम की तरह आगे बढ़ाया। यही नहीं, वर्तमान में हमारी सरकार प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में एक खेल मैदान, हर ब्लॉक में एक मिनी स्टेडियम और हर जिले में एक स्टेडियम विकसित कर रही है। वाराणसी में बीसीसीआई के एक इंटरनेशनल स्टेडियम का निर्माण हुआ है, गोरखपुर में भी इंटरनेशनल स्टेडियम का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही पिछले वर्ष मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय की शुरुआत की गई है। साथ ही हमारी सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में स्पोर्ट्स कॉलेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाए, जहां हमारे खेल क्षेत्र के दिग्गज खिलाड़ियों और अनुभवी प्रशिक्षकों के माध्यम से स्थानीय युवकों को राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धाओं के लिए ट्रेनिंग दी जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों को सम्मान और जॉब सिक्योरिटी देने के लिए हमारी सरकार ने खेल पॉलिसी में बदलाव लाकर खिलाड़ियों को राज्य में सरकारी नौकरियां देने की नीति लागू की है, जिससे वे निश्चिंत होकर अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर सकें। उन्होंने कहा कि मुझे बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि हमारी सरकार ने 500 से अधिक प्रतिभावान खिलाड़ियों को विभिन्न पदों पर सरकारी नौकरी प्रदान की है। इनमें से कई वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं। समारोह के अंत में मुख्यमंत्री ने देशभर से आए खिलाड़ियों का स्वागत और अभिनंदन करते हुए कार्यक्रम के आयोजन के लिए मीडिया समूह और आयोजक टीम को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन खिलाड़ियों को सम्मान देने के साथ-साथ युवाओं को प्रेरित करने का मंच प्रदान करते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव और भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी. टी. उषा सहित कार्यक्रम में शामिल हुई खेल जगत की हस्तियों के स्वागत से हुई। इस अवसर पर देश के प्रतिभावान खिलाड़ियों को खेल क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान और उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। इस क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टेनिस जगत में देश का नाम रोशन करने वाले लिएंडर पेस को ‘मेंटॉर ऑफ द इयर’ के पुरस्कार से सम्मानित किया। वहीं, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया, जबकि हॉकी के दिग्गज पी. आर. श्रीजेश को भी उनके योगदान के लिए सराहा गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश को राज्य में विकसित हो रहे खेल ढांचे और नीतियों के लिए ‘स्टेट ऑफ द इयर’ का पुरस्कार प्रदान किया गया। समारोह में ‘टीम ऑफ द इयर’ का पुरस्कार भारत की महिला दृष्टिबाधित क्रिकेट टीम को दिया गया, जबकि ‘फेडरेशन ऑफ द इयर’ का पुरस्कार भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को मिला। समारोह में बताया गया कि इस वर्ष मीडिया समूह की ओर से खेल की 45 श्रेणियों में 100 से अधिक प्रतिभावान खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया है, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और लगन से देश का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतिस्पर्धाओं में ऊंचा किया है। कार्यक्रम में फुटबॉल के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बाइचुंग भूटिया, बीसीसीआई के वाइस प्रेसिडेंट राजीव शुक्ला,  क्रिकेटर कुलदीप यादव, महिला क्रिकेट खिलाड़ी हरमनप्रीत कौर, दीप्ति शर्मा, हरलीन देवल आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।