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₹15 करोड़ में बन रहा सिंधु कला केंद्र, AI-3D तकनीक से दिखेगी सिंध की विरासत

इंदौर   सिंध की प्राचीन संस्कृति, कला और ऐतिहासिक धरोहरों से आज की युवा पीढ़ी को रूबरू कराने के लिए इंदौर शहर में एक भव्य 'सिंधु कला केंद्र' का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। लगभग 10 हजार वर्गफीट के विशाल क्षेत्र में आकार ले रहे इस प्रोजेक्ट पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस कला केंद्र की सबसे बड़ी खूबी यह होगी कि यहां सिर्फ पुरानी चीजें ही नहीं रखी जाएंगी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए लोगों को उस पुराने दौर की जिंदगी का साक्षात अहसास कराया जाएगा। ऑडिटोरियम से लेकर सिंधी फूड जोन तक की सुविधा     सांसद एवं सिंधु हेरिटेज ट्रस्ट के अध्यक्ष शंकर लालवानी के मुताबिक, समाज के सहयोग से बन रहे इस प्रोजेक्ट को अगले 18 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परिसर में एक भव्य संग्रहालय के साथ-साथ 270 सीटों वाला एक सर्वसुविधायुक्त ऑडिटोरियम भी तैयार किया जाएगा। यहां सांस्कृतिक व सामाजिक कार्यक्रमों के साथ-साथ वर्कशॉप और प्रदर्शनियां भी आयोजित की जा सकेंगी। इसके अलावा, सिंधी व्यंजनों का लुत्फ उठाने के लिए एक खास 'सिंधी फूड जोन' भी बनाया जाएगा। आने वाले समय में यह केंद्र सभी समाज के लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। एआई और 3D तकनीक से जीवंत होगा सिंध का पुराना दौर     इस म्यूजियम को बेहद आधुनिक तरीके से डिजाइन किया जा रहा है। 3D और इमर्सिव तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पुराने सिंध क्षेत्र के रहन-सहन, व्यापार, पहनावे और संस्कृति को डिजिटल रूप में पर्दे पर उतारा जाएगा। इसका मकसद दर्शकों को सिर्फ किताबी जानकारी देना नहीं है। उन्हें उस युग में होने का जीवंत अनुभव कराना है। इस पूरे काम के लिए इतिहास में रुचि रखने वाले जानकारों की एक अलग टीम बनाई जा रही है, जो देशभर में मौजूद सिंध की प्राचीन वस्तुओं और जानकारियों को एक जगह इकट्ठा करेगी। सहेजे जा रहे 1800 साल पुराने दुर्लभ सिक्के और पुश्तैनी धरोहरें     प्रोजेक्ट के आर्किटेक्ट अर्जुन हबलानी ने बताया कि विभाजन से पहले के सिंध की यादों को संजोने के लिए वरिष्ठ नागरिकों और इतिहास प्रेमियों की मदद ली जा रही है। यहां तक कि पाकिस्तान में रह रहे सिंधी समुदाय के लोगों से भी संपर्क साधा जा रहा है।     लोगों ने स्वेच्छा से पुराने बर्तन, ताले, हाथ वाले पंखे और कई ऐतिहासिक वस्तुएं उपलब्ध कराई हैं। संग्रहालय का मुख्य आकर्षण सिंध क्षेत्र के राजाओं के 1700 से 1800 साल पुराने दुर्लभ सिक्के होंगे। इनमें चच वंश के राजा यशादित्य (लगभग 679-712 ईस्वी) के समय के वे सिक्के भी शामिल हैं, जिन पर मुकुट पहने हुए राजा और त्रिशूल की आकृति उकेरी गई है।  

अनंत चतुर्दशी चल समारोह पर पुलिस की पैनी नजर, 22 सेक्टर में बांटी सुरक्षा व्यवस्था

 इंदौर  अनंत चतुर्दशी के ऐतिहासिक झांकी चल समारोह को लेकर इंदौर पुलिस ने सुरक्षा का पूरा खाका तैयार कर लिया है। बुधवार को पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने अधिकारियों के साथ बैठक कर आपातकालीन इंतजामों की समीक्षा की। इस बार पुलिस व्यवस्था को छह संभाग, 12 जोन और 22 सेक्टर में बांटकर मैदान में उतारा जाएगा। प्रमुख स्थानों पर वाच टावर, ड्रोन, सीसीटीवी और फेस रिकग्निशन कैमरों से निगरानी होगी। चल समारोह के प्रमुख और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर वाच टावर बनाए जाएंगे। यहां पुलिसकर्मी सीसीटीवी और पीए सिस्टम के जरिए लगातार निगरानी करेंगे। प्रमुख मार्गों और संवेदनशील स्थानों की बहुमंजिला इमारतों पर भी पुलिस बल तैनात रहेगा। पुलिसकर्मी दूरबीन और कैमरों से नजर रखेंगे। ड्रोन यूनिट भी पूरे समारोह के दौरान सक्रिय रहेगी। ड्रोन से मिलने वाले फुटेज पर वाचर्स नजर रखेंगे और किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी संबंधित पुलिस टीम को तत्काल दी जाएगी। बदमाशों पर खास नजर पुलिस के अनुसार चिह्नित गुंडे-बदमाशों और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाए। किसी भी तरह का विवाद, उपद्रव या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। आयोजकों को झांकियों और अखाड़ों के सभी वाहनों की फिटनेस और मैकेनिकल जांच पहले कराने के निर्देश दिए गए हैं। विद्युत व्यवस्था का सुरक्षा प्रमाणपत्र भी लेना होगा। प्रत्येक वाहन के लिए वैध लाइसेंस वाले चालक के साथ स्पेयर ड्राइवर रखने को कहा गया है। चल समारोह में शामिल वाहन चालकों की ब्रीद एनालाइजर से जांच होगी। शराब या अन्य नशे के सेवन की पुष्टि होने पर चालक को वाहन चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई होगी।  

मुफ्त योजनाओं का दांव: पंजाब की राजनीति में गारंटियों का बढ़ता असर

चंडीगढ़  पंजाब में सियासी दलों की ओर से मुफ्त गारंटियों पर फिर दांव खेलने की तैयारी है। सूबे की सियासत में ये मुफ्त सुविधाएं अब महज लोकलुभावन घोषणाएं ही नहीं रहीं, बल्कि मतदाताओं तक असरदार पहुंच का एक बड़ा माध्यम बन चुकी हैं। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की सरकार जहां इसे अपनी सियासी ताकत का एक बड़ा आधार मानती है वहीं सत्ता परिवर्तन के बाद पार्टी इन सबके बंद होने का डर भी दिखा रही है।अपने लोक मिलनी कार्यक्रमों के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान अब खुलेआम इस तरह की आशंका मतदाताओं के समक्ष जता रहे हैं।  पुराना है सियासी दांव मुफ्त गारंटियों व सुविधाओं की बात करें तो यह सियासी दांव नया नहीं है। पंजाब में पिछले चार चुनावों का ट्रेंड देखें तो इस तरह की लोकलुभावन घोषणाएं पहले की जाती रही हैं। सभी प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार इस तरह के वादे किए और उन्हें इसका लाभ भी मिला। साल 2022 में पहली बार पंजाब की सत्ता पर काबिज हुई आम आदमी पार्टी की सरकार को तो इसका बंपर फायदा मिला था। लिहाजा, इस बार भी आप इस पर बड़ा दांव खेलने जा रही है। ऐसे में दूसरे दल भी विभिन्न वर्ग के मतदाताओं को साधने के लिए इस तरह की मुफ्त गारंटियों का सहारा लेने की तैयारी में हैं। उधर, राजनीतिक मामलों के जानकार मलकीत सिंह कहते हैं कि चुनावी चौसर पर इन मुफ्त गारंटियों के बूते मिली जीत सूबे की अर्थव्यवस्था को बहुत प्रभावित करती है। मुफ्त बंट रहे राजस्व के कारण राज्यों का राजकोषीय घाटा बढ़ता है। सड़कों, अस्पतालों, स्कूलों व नए रोजगार सृजन जैसे बुनियादी ढांचागत निवेश के लिए बजट की भारी कमी होती है।  सीएम की चेतावनी मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने चेतावनी देते हुए कहा कि पारंपरिक विरोधी पार्टियों की सत्ता में वापसी से पंजाब की कल्याणकारी योजनाएं खतरे में पड़ जाएंगी। मान ने कहा कि विरोधी धड़े यदि सत्ता में आ गए तो मुफ्त बिजली व महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजनाएं और 1000-1500 रुपये की सम्मान राशि बंद कर देंगे। साथ ही, निजी संस्थानों को बढ़ावा देने के लिए मोहल्ला क्लीनिकों और सरकारी स्कूलों को कमजोर किया जाएगा। लोक मिलनी कार्यक्रमों में इस तरह की आशंका जताते हुए सीएम दोबारा आप को मौका देने की अपील कर रहे हैं। गेमचेंजर बनीं इन घोषणाओं से पलटे समीकरण साल 2022 : आप सरकार – 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली, दो माह में 600 यूनिट तक बिलिंग चक्र में शून्य बिल की व्यवस्था है। – महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त सफर। – मावां-धीयां सत्कार योजना : महिलाओं को हर महीने 1000 व एससी महिलाओं को 1500 रुपये आर्थिक राशि मिलती है। – मुख्यमंत्री सेहत योजना : हर परिवार को सालाना 10 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा। आम आदमी क्लीनिक : क्लीनिकों में प्राथमिक इलाज, दवाओं और निर्धारित जांचें मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं। – मेरी रसोई राशन किट : करीब 40 लाख परिवारों को तिमाही मुफ्त किट में चीनी, चना दाल, सरसों तेल, हल्दी और नमक देने की योजना। – सरकारी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा और किसानों के लिए मुफ्त बिजली। किशोरियों के लिए मुफ्त सैनिटरी पैड। साल 2017 : कांग्रेस सरकार – किसानों के लिए मुफ्त बिजली और कर्ज माफी योजना। – अप्रैल 2021 से महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त सफर। – सरकारी स्कूलों की छात्राओं को मुफ्त साइकिल सुविधा। – आटा-दाल योजना में सब्सिडी वाला राशन। सामाजिक सुरक्षा पेंशन 2021 में 750 से बढ़ाकर 1,500 रुपये प्रतिमाह की गई। – आशीर्वाद योजना : आर्थिक रूप से कमजोर-एससी परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए सहायता राशि साल 2021 में 21 से बढ़ाकर 51 हजार की गई। साल 2007-2017 : शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार – आटा-दाल योजना, 2016-17 तक करीब 36.35 लाख परिवार योजना के दायरे में थे। – किसानों को मुफ्त बिजली, एससी, बीसी व बीपीएल परिवारों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली। – माई भागो विद्या योजना : सरकारी स्कूलों की छात्राओं को स्कूल आने-जाने के लिए मुफ्त साइकिलें दी जाती थीं। – मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन यात्रा : साल 2016 से विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए चयनित श्रद्धालुओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाती थी। – शगुन योजना : गरीब व एससी परिवारों की बेटियों की शादी के लिए आर्थिक सहायता योजना। 

सरकारी स्कूलों में 6,812 शिक्षकों की भर्ती की तैयारी, तीन परीक्षाओं की तारीख घोषित

शासकीय शालाओं में 6,812 शिक्षकीय पदों पर भर्ती की तैयारी शुरू, तीन परीक्षाओं की तिथियां घोषित सरकारी स्कूलों में 5,000 नियमित पद और स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में 1,812 संविदा पद भरे जाएंगे रायपुर  छत्तीसगढ़ के शासकीय और स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में कुल 6,812 शिक्षकीय पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। लोक शिक्षण संचालनालय से प्राप्त जानकारी अनुसार, शासकीय विद्यालयों में 5 हजार नियमित पदों पर सीधी भर्ती परीक्षा छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से आयोजित की जाएगी।नियमित भर्ती में सहायक शिक्षक के 2,292, सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) के 200, शिक्षक के 1,654 और व्याख्याता के 854 पद शामिल हैं। इनमें ई संवर्ग के 2,227 और टी संवर्ग के 2,773 पद हैं। घोषित कार्यक्रम के अनुसार सहायक शिक्षक की लिखित परीक्षा 11 अक्टूबर 2026, को आयोजित होगी इसी प्रकार शिक्षक की 25 अक्टूबर 2026 को और व्याख्याता की 29 नवंबर 2026 को होगी। सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) के पदों की परीक्षा तिथि अभी निर्धारित नहीं की गई है। सहायक शिक्षक और शिक्षक पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि व्याख्याता पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी । स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में 1,812 संविदा (शैक्षणिक) पदों पर पहली बार केंद्रीय कृत कंप्यूटर आधारित भर्ती परीक्षा आयोजित की जाएगी। इन पदों की भर्ती अधिसूचना सितंबर माह में जारी की जा रही है और ऑनलाइन आवेदन अक्टूबर माह से शुरू करने की तैयारी है।उल्लेखनीय है कि शासकीय एवं उत्कृष्ट विद्यालयों में छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से 6812 पदों की भर्तियाँ की जा रही हैं ।

गांवों के विकास की कार्ययोजना में ग्रामीणों की होगी भागीदारी, 2 अक्टूबर से शुरू होगी प्रक्रिया

2 अक्टूबर से ग्राम सभाओं में तैयार होगी विकसित ग्राम पंचायत योजना ग्रामीणों की भागीदारी से तय होगी गांवों के विकास की दिशा गांव की जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर बनेगी विकास की कार्ययोजना  अक्टूबर-नवंबर में बस्ती और वार्ड स्तर पर होगा ग्रामीणों से सीधा संवाद रायपुर,   प्रदेश के गांवों के समग्र एवं सुनियोजित विकास के लिए 2 अक्टूबर से ग्राम सभाओं के माध्यम से विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। इस पहल के अंतर्गत ग्रामीण स्वयं अपने गांव की जरूरतों, समस्याओं और विकास की प्राथमिकताओं को तय करने में भागीदारी निभाएंगे। ग्राम सभाओं में ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों, स्थानीय संसाधनों और विकास संबंधी आवश्यकताओं के आधार पर ग्राम पंचायतों की आगामी विकास कार्ययोजना तैयार की जाएगी।       विकसित ग्राम पंचायत योजना को वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की योजना तैयार करने का प्रमुख माध्यम बनाया गया है। इसके तहत गांवों में उपलब्ध संसाधनों, मौजूदा परिसंपत्तियों और विकास संबंधी कमियों का आकलन कर ग्रामीणों की सहभागिता से आवश्यक कार्यों की पहचान की जाएगी। ग्राम सभा से अनुमोदन प्राप्त होने के बाद योजनाओं को विकासखंड एवं जिला स्तर पर समेकित किया जाएगा। 2 अक्टूबर को ग्राम सभाओं में होगी योजना निर्माण की शुरुआत       प्रदेश की ग्राम पंचायतों में 2 अक्टूबर को आयोजित ग्राम सभाओं में विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करने की प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत की जाएगी। इस अवसर पर ग्रामीणों को ग्राम पंचायत से संबंधित आधारभूत आंकड़ों, मानचित्रों, अनुमेय कार्यों और योजना निर्माण की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।       ग्राम सभाओं में गांव की विकास संबंधी कमियों, जल बजट और ई-जल पोर्टल से प्राप्त अनुशंसित कार्यों की जानकारी भी साझा की जाएगी। इसके साथ ही गांवों में मौजूद ऐसी परिसंपत्तियों की पहचान की जाएगी, जो भौतिक रूप से उपलब्ध हैं, लेकिन अभी तक डिजिटल अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं।       ग्राम सभा में बस्ती, वार्ड और ग्राम स्तर पर सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन तथा सामुदायिक परामर्श की प्रक्रिया और समय-सीमा भी निर्धारित की जाएगी, ताकि योजना निर्माण में अधिक से अधिक ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। अक्टूबर-नवंबर में गांव-गांव पहुंचकर लिए जाएंगे ग्रामीणों के सुझाव      विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करने के लिए सितंबर माह में प्रारंभिक तैयारियां पूरी की जाएंगी। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण देने के साथ ही युक्तधारा पोर्टल पर उपलब्ध विभिन्न मानचित्र परतों के आधार पर ग्राम पंचायतों का आधारभूत डेटा तैयार किया जाएगा। इसके बाद अक्टूबर और नवंबर माह में बस्ती एवं वार्ड स्तर पर ग्रामीणों के साथ बैठकें आयोजित कर सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन किया जाएगा। इन बैठकों के माध्यम से ग्रामीणों से गांव की समस्याओं, आवश्यक सुविधाओं, उपलब्ध संसाधनों और प्रस्तावित विकास कार्यों के संबंध में सुझाव प्राप्त किए जाएंगे।       इस दौरान गांवों में मौजूद परिसंपत्तियों का स्थल सत्यापन भी किया जाएगा। डिजिटल अभिलेखों में दर्ज नहीं होने वाली परिसंपत्तियों को युक्तधारा पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर विकास संबंधी कमियों की पहचान कर प्रस्तावित कार्यों के संभावित स्थानों को डिजिटल मानचित्र पर चिह्नित किया जाएगा। दिसंबर में ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत होगी विकास योजना      दिसंबर माह में भूमि एवं क्षेत्र परिचय के आधार पर तैयार विकसित ग्राम पंचायत योजना का प्रारूप ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें प्रस्तावित विकास कार्यों, उनके संभावित स्थानों और संबंधित विवरण की जानकारी ग्रामीणों को दी जाएगी। ग्राम सभा में व्यक्तिगत लाभार्थियों से संबंधित प्रस्तावित कार्यों पर भी चर्चा की जाएगी। ग्रामीणों के सुझावों और आवश्यक विचार-विमर्श के आधार पर योजना में संशोधन कर उसे अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद ग्राम सभा द्वारा औपचारिक प्रस्ताव पारित कर विकसित ग्राम पंचायत योजना को अनुमोदित किया जाएगा। ग्राम सभा से अनुमोदित योजना को डिजिटल समेकन की आगामी प्रक्रिया के लिए विकासखंड स्तर पर भेजा जाएगा। 15 जनवरी तक विकासखंड और जिला स्तर पर होगा योजनाओं का समेकन        ग्राम पंचायतों से अनुमोदित योजनाएं प्राप्त होने के बाद 15 जनवरी तक विकासखंड एवं जिला स्तर पर समेकन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। विकासखंड स्तर पर विभिन्न ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं को एकीकृत करते हुए संबंधित क्रियान्वयन एजेंसियों और विभिन्न योजनाओं के अभिसरण से जुड़ी जानकारी शामिल की जाएगी। इसके बाद विकासखंड स्तर पर तैयार समेकित योजनाओं को जिला स्तर पर एकीकृत किया जाएगा। इस प्रक्रिया से ग्राम पंचायतों की स्थानीय आवश्यकताओं को विकासखंड और जिला स्तर की विकास कार्ययोजनाओं से जोड़ने में सहायता मिलेगी। जल सुरक्षा, आजीविका और ग्रामीण अधोसंरचना पर विशेष ध्यान        विकसित ग्राम पंचायत योजना के अंतर्गत गांवों की आवश्यकताओं के अनुरूप जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका से संबंधित अधोसंरचना और प्रतिकूल मौसमीय घटनाओं के प्रभाव को कम करने वाले कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाएगा। योजना निर्माण के दौरान गांवों में उपलब्ध प्राकृतिक एवं भौतिक संसाधनों का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही ग्रामीणों के सुझावों के आधार पर ऐसे कार्यों की पहचान की जाएगी, जिनसे स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके और गांवों के विकास को गति मिल सके। ग्राम सभा की सहमति से तय होंगे विकास कार्य        विकसित ग्राम पंचायत योजना की संपूर्ण प्रक्रिया में ग्राम सभा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ग्रामीणों की राय और स्थानीय प्राथमिकताओं के आधार पर प्रस्तावित विकास कार्यों में आवश्यकतानुसार नए कार्य शामिल किए जा सकेंगे तथा अनुपयुक्त कार्यों को हटाया जा सकेगा। प्रत्येक प्रस्तावित कार्य का स्थल सत्यापन करने के साथ ही समुदाय के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके बाद कार्यों को अंतिम अनुमोदन के लिए ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।       इस पहल का उद्देश्य ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं को ग्रामीणों की वास्तविक आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुरूप तैयार करना है। ग्राम सभा की सक्रिय भागीदारी से योजना निर्माण की प्रक्रिया को अधिक सहभागी एवं पारदर्शी बनाने के साथ ही गांवों के समग्र और सतत विकास को नई दिशा मिलेगी।

MP के कूनो में बढ़ेगा सफारी का रोमांच, 1 अक्टूबर से 16 चीते होंगे पर्यटकों के सामने

श्योपुर  मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में सफारी का रोमांच इस बार अपने चरम पर होने वाला है। 1 अक्टूबर से शुरू हो रहे नए पर्यटन सत्र में सैलानियों को एक बड़ा तोहफा मिलने जा रहा है। पिछले चार सालों में ऐसा पहली बार होगा जब अक्टूबर की शुरुआत में ही 16 चीते खुले जंगल में घूमते नजर आएंगे। चीतों के इस खुले दीदार से पार्क प्रबंधन को उम्मीद है कि इस बार पर्यटकों की संख्या पिछले साल के मुकाबले दोगुनी हो सकती है। 20 हजार सैलानियों के आने का अनुमान, कारोबारियों के खिले चेहरे पिछले सीजन में कूनो में चीतों का दीदार करने करीब 9,117 पर्यटक पहुंचे थे। लेकिन इस बार खुले जंगल में 16 चीतों की मौजूदगी को देखते हुए प्रबंधन ने करीब 20 हजार पर्यटकों के आने का अनुमान जताया है। सैलानियों की इस संभावित भीड़ से श्योपुर के स्थानीय होटल संचालकों, सफारी वाहनों और गाइडों समेत दर्जनों कारोबारों में जबरदस्त उछाल आने की उम्मीद है। सफारी बुकिंग हुई आसान, श्योपुर में खुलेगा चौथा काउंटर पर्यटकों की बढ़ती तादाद को देखते हुए सुविधाओं में भी इजाफा किया जा रहा है। अब तक सफारी की ऑफ़लाइन टिकट सिर्फ टिकटोली, अहेरा और पीपलवाड़ी (विजयपुर) गेट से ही मिलती थी। लेकिन 1 अक्टूबर से श्योपुर जिला मुख्यालय पर स्थित कूनो कार्यालय में भी चौथा बुकिंग काउंटर शुरू हो जाएगा। इस नई व्यवस्था से सैलानियों को सफारी बुकिंग के लिए सीधे पार्क के गेट तक भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। 50 करोड़ से बनेगी फोरलेन सड़क     पार्क के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में 'टिकटोली गेट' को खास तरीके से विकसित किया जा रहा है। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग यहां एक फैसिलिटेशन सेंटर तैयार कर रहा है, जहां पर्यटक आराम करने के साथ-साथ चीतों और श्योपुर की स्थानीय संस्कृति से जुड़ी रोचक जानकारियां ले सकेंगे। इसके अलावा, टिकटोली तक पहुंच को और आसान बनाने के लिए सेसईपुरा रोड को फोरलेन करने का प्लान है, जिसके लिए 50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। कूनो में 51 चीतों का कुनबा वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या 51 है। इन चीतों को देखने और सफारी का बेहतरीन अनुभव देने के लिए इस बार पार्क के अंदर गाड़ियों और गाइडों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है।

महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव एवं गुण्डाधूर सम्मान के लिए आवेदन 30 सितम्बर तक

महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव एवं गुण्डाधूर सम्मान के लिए आवेदन 30 सितम्बर तक उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सम्मान स्वरूप मिलेंगे 1 लाख नगद रायपुर. राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए राज्य के उत्कृष्ट खिलाड़ियों को प्रदान किए जाने वाले महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव सम्मान एवं गुण्डाधूर सम्मान के लिए खिलाड़ियों से अनुशंसाएं आमंत्रित की गई हैं। इच्छुक पात्र खिलाड़ी निर्धारित प्रारूप में 30 सितम्बर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन केवल खेल एवं युवा कल्याण विभाग की वेबसाइट http//sportsyw.cg.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। विभागीय वेबसाइट पर अपलोड किए गए आवेदन ही मान्य होंगे। निर्धारित प्रारूप एवं नियमों की जानकारी खेल विभाग के जिला स्तरीय कार्यालयों से भी प्राप्त की जा सकती है।        महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव सम्मान विशेष रूप से तीरंदाजी खेल के उत्कृष्ट खिलाड़ियों को दिया जाएगा। यह सम्मान वर्ष 2025-26 में तीरंदाजी की राष्ट्रीय चैंपियनशिप (सीनियर वर्ग) अथवा राष्ट्रीय खेलों में छत्तीसगढ़ की ओर से भाग लेते हुए स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक प्राप्त करने वाले अथवा अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों के लिए है। सम्मान के अंतर्गत 1 लाख रुपए नगद, अलंकरण फलक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। पुरुष एवं महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर सम्मिलित रूप से विचार किया जाएगा।        इसी प्रकार गुण्डाधूर सम्मान राज्य के उत्कृष्ट खिलाड़ियों या एक दल को प्रदान किया जाएगा। इसके अंतर्गत ऐसे खिलाड़ी पात्र होंगे, जिन्होंने वर्ष 2025-26 में ऐसे खेलों में, जिन्हें भारत सरकार के युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्तर के खेल अलंकरण के लिए विचार क्षेत्र में लिया जाता है, सीनियर वर्ग की राष्ट्रीय चौंपियनशिप या राष्ट्रीय खेलों में छत्तीसगढ़ की ओर से भाग लेते हुए स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक प्राप्त किया हो, या अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व किया हो। सम्मान के अंतर्गत 1 लाख रुपए नगद, अलंकरण फलक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।

अमरोहा के उत्पादों का दिखेगा जलवा, ढोलक से वुडन क्राफ्ट तक 6 हॉल में सजेगा बाजार

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो ग्रेटर नोएडा में गूंजेगी अमरोहा की ढोलक की थाप, 6 प्रमुख इकाइयों को मिला अंतरराष्ट्रीय मंच जीआई टैग वाद्य यंत्रों से लेकर टेक्सटाइल और वुडन क्राफ्ट का दिखेगा जलवा; 6 अलग-अलग हॉल में सजेंगे जिले के उत्पाद रूस, सिंगापुर, जापान सहित कई देश बने पार्टनर; 25 से 29 सितंबर तक सजेगा महामंच, वैश्विक बाजार में दस्तक देंगे स्थानीय हुनरमंद अमरोहा,  ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2026) के चौथे संस्करण में जनपद अमरोहा के पारंपरिक शिल्प, हथकरघा और स्थानीय स्वाद का डंका बजेगा। प्रदेश सरकार व इंडिया एक्सपोज़िशन मार्ट लिमिटेड (आईईएमएल) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हो रहे इस विशाल व्यापार मेले में अमरोहा से कुल 6 प्रमुख इकाइयों और उद्यमियों का चयन किया गया है। इस आयोजन में रूस, सिंगापुर, वियतनाम, ऑस्ट्रिया और जापान पार्टनर कंट्री (Partner Country) के रूप में भाग ले रहे हैं। जिले के विश्वविख्यात जीआई टैग प्राप्त वाद्य यंत्रों (ढोलक आदि) के साथ-साथ 'एक जिला एक व्यंजन' (ओडीओसी) के तहत मशहूर सेव, वुडन हैंडीक्राफ्ट, कंबल और हैंडलूम उत्पाद वैश्विक खरीदारों के आकर्षण का केंद्र बनेंगे। 1.5 लाख बी2बी बायर्स और 4.5 लाख से अधिक बी2सी आगंतुकों के बीच आयोजित हो रहे इस महामंच से अमरोहा के कुटीर उद्योगों को सीधे निर्यात आर्डर और वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ने का बड़ा आधार मिलेगा। ओडीओपी व जीआई टैग: हॉल नंबर 11 में गूंजेगी ढोलक की थाप अमरोहा की ऐतिहासिक पहचान उसके पारंपरिक संगीत वाद्य यंत्रों से है, जो जिले का मुख्य उत्पाद होने के साथ-साथ भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) से भी प्रमाणित है। ट्रेड शो के हॉल नंबर 11 में जीआई टैग श्रेणी के तहत 'मै० आर्टीजन वेलफेयर सोसाइटी' का स्टाल लगाया जा रहा है। यहां आम और शीशम की लकड़ी से तैयार हस्तनिर्मित ढोलक की पूरी रेंज सजेगी। 75 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों और विदेशी आयातकों के सामने जिले के इस पुश्तैनी हुनर को पेश करने से स्थानीय संगीत वाद्य निर्माताओं को सीधे अंतरराष्ट्रीय एक्सपोर्ट ऑर्डर मिलने की राह खुलेगी। ओडीओसी: हॉल नंबर 16 में जायके के दीवानों को लुभाएगा अमरोहा का मशहूर 'सेव' खानपान की स्थानीय विरासत को प्रमोट करने के लिए प्रदेश सरकार की 'एक जिला एक व्यंजन' (ओडीओसी) योजना के अंतर्गत अमरोहा के मशहूर नमकीन सेव को अंतरराष्ट्रीय मंच मिला है। इसके तहत हॉल नंबर 16 में जिले के प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान 'मै० फैमस स्वीट्स सेन्टर' (प्रोपराइटर: सारो फैजल) का स्टॉल सजेगा। बेसन और खास मसालों के मेल से बनने वाले अमरोहा के कुरकुरे व पारंपरिक सेव का स्वाद देश-विदेश के आगंतुकों को परोसा जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले पैकेज्ड नमकीन उत्पाद को बड़े रिटेल आउटलेट्स और ई-कॉमर्स नेटवर्क तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। हैंडलूम, वुडन क्राफ्ट और वूलन सेक्टर के इन हॉलों में सजेंगे स्टॉल हस्तशिल्प और वस्त्र उद्योग में अमरोहा के चार प्रमुख उत्पादक अलग-अलग हॉल में अपने उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे। ओडीओपी योजनांतर्गत टेक्सटाइल सेक्टर के तहत हॉल नंबर 09 में उद्यमी गुलफाम अहमद अपनी उच्च गुणवत्ता वाली कॉटन बेडशीट, दरी और चादरें प्रदर्शित करेंगे। वहीं एमएसएमई श्रेणी के तहत हॉल नंबर 10 में 'मै० अनीस हैण्डलूम एण्ड रेडीमेड गारमेन्टस' (प्रोपराइटर: अनीस अहमद) के स्टॉल पर बेडशीट व दरी हैंडलूम प्रोडक्ट्स के अलावा रेडीमेड गारमेंट्स प्रदर्शित किए जाएंगे। नक्काशीदार काष्ठ कला को बढ़ावा देने के लिए हॉल नंबर 14 में 'मै० एम०जी०ए० डिजाईन' द्वारा वुडेन हैंडीक्राफ्ट उत्पाद सजाए जाएंगे। आगामी शीत ऋतु को देखते हुए हॉल नंबर 15 में 'मै० प्रकाश वुलेन' द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले कंबलों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। अमरोहा के कारोबार को सीधे मिलेंगे ये बड़े फायदे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो अमरोहा की अर्थव्यवस्था के लिए बहुआयामी फायदे लेकर आ रहा है। 1,10,000 वर्ग मीटर में फैले इस महामंच पर जिले के उद्यमियों को बिना किसी बिचौलिए के सीधे कॉर्पोरेट घरानों, एक्सपोर्टर्स और विदेशी बायर्स से बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) मीटिंग्स का मौका मिलेगा। इससे न केवल वाद्य यंत्रों और काष्ठ कला के छोटे कारीगरों को सालभर के थोक काम मिलेंगे, बल्कि हथकरघा और नमकीन उद्योग में स्थानीय स्तर पर नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इसके अलावा 'यूपी निर्यात संवर्धन नीति 2025-30' और 'मार्केटिंग डेवलपमेंट असिस्टेंस स्कीम' (एमडीएएस) के जरिए जिले के उत्पादों को वैश्विक ब्रांडिंग का सीधा संबल मिलेगा। वैश्विक निर्यात से जुड़ेंगे अमरोहा के छोटे उद्यमी: उपायुक्त उद्योग जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केन्द्र, अमरोहा के उपायुक्त उद्योग अनूप कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो जनपद के पारंपरिक दस्तकारों और नए उद्यमियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार का द्वार खोलने वाला साबित होगा। उन्होंने जनपद के युवाओं, विद्यार्थियों, नवोन्मेषकों और भावी उद्यमियों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में आकर नए संपर्कों और नए बाजार को समझें तथा अपनी प्रतिभा व क्षमता के अनुरूप नए अवसर तलाशें। उन्होंने बताया कि आयोजन से संबंधित अधिकृत जानकारी, पंजीकरण व प्रचार सामग्री आधिकारिक वेबसाइट upinternationaltradeshow.com पर उपलब्ध है।

MP के 630 विद्यार्थी जाएंगे अहमदाबाद, विज्ञान केंद्र और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का करेंगे भ्रमण

मध्यप्रदेश के विद्यार्थी शैक्षणिक भ्रमण पर जाएंगे अहमदाबाद विज्ञान केंद्र, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सहित प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों का करेंगे भ्रमण मंत्री सिंह 27 सितंबर को भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से 630 सदस्यीय दल को हरी झंडी दिखाकर करेंगे रवाना भोपाल प्रदेश के विद्यार्थियों को शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ने तथा उनके ज्ञान और अनुभवों का विस्तार करने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के विद्यार्थियों को तीन दिवसीय अहमदाबाद का शैक्षणिक भ्रमण कराया जाएगा। 27 सितंबर को रानी कमलापति रेलवे स्टेशन भोपाल से 630 सदस्यीय दल रवाना होगा। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इस दल में प्रदेश के लगभग 520 विद्यार्थी, 104 शिक्षक और विभाग के 6 नियंत्रण अधिकारी शामिल होंगे। भ्रमण के दौरान विद्यार्थी विज्ञान केंद्र, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सहित प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों का अवलोकन करेंगे। यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक ज्ञान और नए अनुभवों से जोड़ने में सहायक होगा। उल्लेखनीय है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कक्षा 9वीं एवं 10वीं के विद्यार्थियों के लिए गणित एवं विज्ञान विषयों में ओलंपियाड परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें प्रदेश के लगभग 65 हजार विद्यार्थियों ने सहभागिता की थी। अब ओलंपियाड में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक्सपोजर विजिट का अवसर प्रदान किया जा रहा है। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को अहमदाबाद के प्रमुख शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक संस्थानों, विज्ञान केंद्र तथा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को देश की विविध उपलब्धियों, वैज्ञानिक गतिविधियों और शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणाली से परिचित कराना तथा उनके ज्ञान और अनुभवों को समृद्ध करना है। स्कूल शिक्षा विभाग की यह पहल विद्यार्थियों को कक्षा-कक्ष के अध्ययन से आगे बढ़कर प्रत्यक्ष अनुभवों के माध्यम से सीखने, नई संभावनाओं को समझने तथा अपने शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करने का अवसर प्रदान करेगी। प्रदेश के विद्यार्थियों को शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ने तथा उनके ज्ञान और अनुभवों का विस्तार करने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के विद्यार्थियों को तीन दिवसीय अहमदाबाद का शैक्षणिक भ्रमण कराया जाएगा। 27 सितंबर को रानी कमलापति रेलवे स्टेशन भोपाल से 630 सदस्यीय दल रवाना होगा। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इस दल में प्रदेश के लगभग 520 विद्यार्थी, 104 शिक्षक और विभाग के 6 नियंत्रण अधिकारी शामिल होंगे। भ्रमण के दौरान विद्यार्थी विज्ञान केंद्र, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सहित प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों का अवलोकन करेंगे। यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक ज्ञान और नए अनुभवों से जोड़ने में सहायक होगा। उल्लेखनीय है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कक्षा 9वीं एवं 10वीं के विद्यार्थियों के लिए गणित एवं विज्ञान विषयों में ओलंपियाड परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें प्रदेश के लगभग 65 हजार विद्यार्थियों ने सहभागिता की थी। अब ओलंपियाड में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक्सपोजर विजिट का अवसर प्रदान किया जा रहा है। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को अहमदाबाद के प्रमुख शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक संस्थानों, विज्ञान केंद्र तथा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को देश की विविध उपलब्धियों, वैज्ञानिक गतिविधियों और शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणाली से परिचित कराना तथा उनके ज्ञान और अनुभवों को समृद्ध करना है। स्कूल शिक्षा विभाग की यह पहल विद्यार्थियों को कक्षा-कक्ष के अध्ययन से आगे बढ़कर प्रत्यक्ष अनुभवों के माध्यम से सीखने, नई संभावनाओं को समझने तथा अपने शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करने का अवसर प्रदान करेगी।

मध्य प्रदेश को मिलेगी नई परिवहन सेवा, 25 सितंबर को मोहन यादव-गडकरी करेंगे लॉन्च

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी आज 25 सितंबर को बीएचईएल दशहरा मैदान भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत सावर्जनिक यात्री बसों के संचालन का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत शुरू होने वाली इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों के संचालन को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की दिशा में परिवहन विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। इसके अंतर्गत सड़कों पर दौड़ने वाली बसों का स्टेयरिंग एडवांस तकनीक से प्रशिक्षित ड्राइवरों के हाथों में होगा। इसके लिए बस चालकों को इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों की तकनीक, संचालन और सुरक्षा मानकों से परिचित कराने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे नई तकनीक वाली बसों का सुरक्षित और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। पैनिक बटन और जीपीएस से बढ़ेगी सुरक्षा मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में यात्रियों की सुरक्षा और बसों की निगरानी के लिए तकनीक का उपयोग किया जाएगा। बसों में पैनिक बटन और जीपीएस की सुविधा रहेगी। जीपीएस के माध्यम से बसों की लाइव लोकेशन की निगरानी की जा सकेगी। पैनिक बटन आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में काम करेगा। दो तरह की सेवा होंगी शुरू कार्यक्रम के दौरान 351 बसों को एक साथ हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसे दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसमें 120 इंटरसिटी बसें हैं। ये बसें दो या दो से अधिक शहरों के बीच आवागमन को सुगम और तीव्र बनाएंगी। 231 इंट्रासिटी बसें शहरों के भीतर नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ और सस्ती यात्रा सुविधा प्रदान करेंगी। 7 शहरों की 351 बसों को दिखाई जाएगी हरी झंडी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत प्रथम चरण में प्रदेश के 7 प्रमुख शहरों की बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसमें इदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल है। इंदौर में 145 बस, जिसमें 50 इंटरसिटी, 95 इंट्रासिटी, भोपाल के लिए 106 बसें, जिसमें 23 इंटरसिटी, 83 इंट्रासिटी, जबलपुर के लिए 67 बसें, जिसमें 14 इंटरसिटी, 53 इंट्रासिटी। रीवा की 18 इंटरसिटी बस, देवास की 10 इंटरसिटी बस, कटनी की 3 और भिंड की 2 इंटरसिटी बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। लगभग 15,000 सार्वजनिक बसें की जाएंगी संचालित मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत वर्ष 2031 तक 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़कर ग्रामीण कनेक्टिविटी को नई मजबूती दी जाएगी। प्रदेशभर में लगभग 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें संचालित की जाएंगी। इससे प्रतिदिन 30 लाख से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा प्रदान होगी। साथ ही 180 से अधिक आधुनिक बस स्टैंड्स, टर्मिनल्स और डिपो का कायाकल्प किया जाएगा। इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों का संचालन मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत प्रदेश में इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। इससे शहरों के बीच आवागमन के साथ ही शहरों के भीतर सार्वजनिक परिवहन की सुविधाएं बढ़ेंगी। सेवा का उद्देश्य प्रदेशवासियों को बेहतर कनेक्टिविटी के साथ सुगम, सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। इंटरसिटी बसें दो या दो से अधिक शहरों को जोड़ेंगी, जबकि इंट्रासिटी बसें शहरों के भीतर चलेंगी। साल-दर-साल बढ़ेगी बसों की संख्या, वर्ष 2031 तक 15 हजार बसों का लक्ष्य राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत अगले पांच वर्षों में सार्वजनिक परिवहन सेवा का विस्तार करते हुए बसों की संख्या 15 हजार तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए परिवहन विभाग द्वारा चरणबद्ध कार्य योजना भी तैयार की गई है। इसके अनुसार प्रतिवर्ष 2500 से तीन हजार नई बसें जोड़ी जाएंगी। सार्वजनिक परिवहन के दायरे का विस्तार होने के साथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में यात्रियों के लिए आवागमन के अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे। चालकों को दिया जाएगा प्रशिक्षण, नए ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर जल्द होंगे तैयार प्रदेश में वाहन चालकों को आधुनिक बसों की सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए इंदौर और छिंदवाड़ा में इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर स्थापित किए गए हैं, जहां वाहन चालकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश में 5 रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर भी जल्द तैयार हो जाएंगे। ये सेंटर भोपाल, बैतूल, छतरपुर, उज्जैन और ग्वालियर में स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा जिला स्तर पर 22 ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटर भी जल्द तैयार किए जाएंगे। इन प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से वाहन चालकों को आधुनिक तकनीक, सुरक्षा मानकों तथा इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों के संचालन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा।   इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर प्रदेश सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के उद्देश्य से स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा। इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम से की जाएगी निगरानी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत संचालित बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एण्ड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MPYPIL) एवं उसकी 7 सहायक कंपनियों में अत्याधुनिक कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन सेंटरों के माध्यम से बसों के संचालन, लोकेशन, समयबद्धता एवं अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही सार्वजनिक बसों में महिला और बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। निजी ऑपरेटरों की भी बढ़ेगी भागीदारी जन-निजी भागीदारी को गति देने के लिए पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएगी। इस मॉडल से निजी बस ऑपरेटरों को राजस्व रिसाव रोकने, नॉन-फेयर रेवेन्यू (जैसे विज्ञापन व कार्गो सेवाएं) बढ़ाने और आधुनिक डिपो व टर्मिनलों के उपयोग की सुविधाएं मिलेंगी साथ ही प्रशासन का पूर्ण सहयोग भी मिलेगा। परिवहन क्षेत्र में रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा प्रदेश में सुगम यात्री परिवहन सेवा शुरू होने से परिवहन क्षेत्र में रोजगार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यात्री परिवहन के विस्तार से प्रदेश में बस संचालन, वाहन निर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सेवाओं और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे परिवहन क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।