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यूपी सरकार का बड़ा फैसला, देशी शराब होगी महंगी; जानें नई दरें कब से लागू

लखनऊ  यूपी कैबिनेट ने प्रदेश की नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है. 1 अप्रैल से यूपी में देसी शराब के दाम बढ़ जाएंगे. देसी शराब के दाम में लगभग 5 रुपए बढ़ेंगे. 36% अल्कोहल वाली देसी शराब 165 से बढ़कर 173 रुपए की हो जाएगी. अन्य किस्म की शराब के दामों में कोई संशोधन नहीं हुआ. यूपी सरकार ने 2026-27 के लिए आबकारी को 71,278 करोड़ का राजस्व लक्ष्य दिया है. वहीं शहरी क्षेत्र में दुकानों का देसी शराब का कोटा घटेगा. शराब की फुटकर दुकानों का आवंटन ई-लॉटरी के माध्यम से होगा. अंग्रेजी शराब की फुटकर दुकानों की लाइसेंस फीस 7.5% बढ़ाई गई है. नोएडा, गाजियाबाद, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ में लो अल्कोहलिक स्ट्रैंथ बेवरेज बियर, वाइन और आरटीडी के बाहर लाइसेंस मिल सकेंगे. यूपी में निर्मित शराब और आबकारी के अन्य उत्पादों को विदेश में भी निर्यात होगा. इसके अलावा यूपी में एक अप्रैल से नई नीति लागू होने के बाद अंग्रेजी शराब 10 से 30 रुपये तक महंगी हो जाएगी. देशी शराब के यह दाम प्रति बोतल के हिसाब से बढ़े हैं, इसी आधार पर हाफ क्वॉर्टर और बच्चा की रेट में भी बढ़ोत्तरी हुई है. यानी कोटा 7.5 फीसदी बढ़ा है और 7.5 फीसदी ही लाइसेंस शुल्क भी बढ़ा है. 7.5 फीसदी की यही बढ़ोतरी अंग्रेजी शराब की तरह बीयर पर भी लागू होगी. एक अप्रैल से लागू होने वाली नई आबकारी नीति में कई नए प्रावधान किए गए है. कोटेदारों (अनुज्ञापी) को राहत देने वाली इस नीति में पहली बार देसी शराब में 100 एमएल का मिनिएचर ‘बच्चा’ उतारा गया. 42.8 डिग्री तीव्रता वाला यह ‘बच्चा’ बाजार में 50 रुपये का बिकेगा.  

वेटलैंड संरक्षण पर मंथन, राज्य प्राधिकरण की चौथी बैठक संपन्न

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य वेटलैण्ड प्राधिकरण की चतुर्थ बैठक आयोजित वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य वेटलैण्ड प्राधिकरण  केदार कश्यप की अध्यक्षता में प्राधिकरण की चतुर्थ बैठक का आयोजन अरण्य भवन,अटल नगर में किया गया। बैठक में मुख्य सचिव एवं प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विकासशील, अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ऋचा शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख वी. निवास राव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अरूण कुमार पाण्डेय, सचिव आवास एवं पर्यावरण विभाग, सदस्य सचिव तथा अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।            यह प्राधिकरण राज्य के आर्द्रभूमियों (Wetlands) के संरक्षण, प्रबंधन, उनके पारिस्थितिक स्वरूप को बनाए रखने और उन पर होने वाली गतिविधियों के नियमन के लिए उत्तरदायी है। यह प्राधिकरण गिधवा-परसदा और कोपरा जैसे जलाशयों के संरक्षण, प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा, और जिला स्तर पर बनी समितियों के माध्यम से प्रबंधन की निगरानी करता है।          बैठक में रामसर सचिवालय से प्राप्त कोपरा जलाशय के रामसर प्रमाणपत्र का विमोचन किया गया। इसके साथ ही कोपरा जलाशय तथा गिधवा-परसदा वेटलैण्ड काम्प्लेक्स के लोगों का भी अनावरण किया गया। बैठक में राज्य के वेटलैण्ड क्षेत्रों के संरक्षण, संवर्धन और विकास पर विस्तार से चर्चा की गई। यह भी निर्णय लिया गया कि विभिन्न विभागों के आपसी समन्वय से वेटलैण्ड क्षेत्रों के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को जागरूक किया जाएगा, ताकि प्राकृतिक जल स्रोतों और जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

‘नाम बदलकर श्रेय लूट रही सरकार’—मोहल्ला क्लीनिक विवाद पर सौरभ भारद्वाज के गंभीर आरोप

नई दिल्ली दिल्ली की राजनीति में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मोहल्ला क्लीनिकों और पुरानी डिस्पेंसरियों का नाम बदलकर ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ रख रही है और इसे नई उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली सरकार 370 आरोग्य मंदिर खोलने का दावा कर रही है, लेकिन मुख्यमंत्री को जनता को यह बताना चाहिए कि इनमें से कितने केंद्र नई इमारतों में संचालित हो रहे हैं और कितने पहले से चल रही स्वास्थ्य सुविधाओं में ही नाम बदलकर शुरू किए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इन 370 में से कितने पहले मोहल्ला क्लीनिक थे, कितने दिल्ली सरकार की डिस्पेंसरियां थीं और कितने एमसीडी की स्वास्थ्य इकाइयां थीं। आप नेता ने आरोप लगाया कि सरकार जमीन पर कोई नई स्वास्थ्य संरचना खड़ी करने के बजाय पूर्ववर्ती अरविंद केजरीवाल सरकार के दौरान शुरू किए गए मोहल्ला क्लीनिकों का नाम बदलकर वाहवाही लूटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि अधिकांश आरोग्य मंदिर उन्हीं भवनों में चल रहे हैं जहां पहले से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध थीं और वहां तैनात डॉक्टर, फार्मासिस्ट व अन्य स्टाफ भी वही हैं। सौरभ भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि सीएम रेखा गुप्ता ने मोहल्ला क्लीनिकों के स्टाफ से वादा किया था कि किसी की नौकरी नहीं जाएगी, लेकिन बाद में कई कर्मचारियों को हटाया गया। उन्होंने कहा कि इससे न केवल कर्मचारियों के परिवारों पर आर्थिक संकट आया है, बल्कि सरकार की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। आप नेता ने कहा कि दिल्ली की जनता सच्चाई जानती है और केवल नाम बदलने से स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति नहीं सुधरती। उन्होंने मुख्यमंत्री से पारदर्शिता बरतते हुए विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की, ताकि स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कितने नए आरोग्य मंदिर बनाए गए हैं और कितने पुराने ढांचे को ही नया नाम दिया गया है।

सरस्वती सायकल योजना: अब आसान हुई अदिति की शिक्षा की राह

रायपुर पढ़ाई छोड़ने का इरादा हुआ खत्म, अब रोज़ समय पर पहुंचती है स्कूल सरकार की सरस्वती सायकल योजना छात्राओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव की सशक्त मिसाल बन रही है। इसी योजना के अंतर्गत शासकीय कन्या स्कूल, मुंगेली की कक्षा नवमी की छात्रा अदिति कुर्रे को निःशुल्क सायकल प्रदान की गई, जिसने उसकी पढ़ाई की राह को आसान और सुरक्षित बना दिया। घर से स्कूल की दूरी अधिक होने के कारण अदिति कुर्रे को रोज़ाना आना-जाना कठिन हो गया था। समय की कमी, थकान और रास्ते की परेशानियों के चलते उनके मन में कई बार पढ़ाई छोड़ने का विचार भी आया। लेकिन सरस्वती सायकल योजना के तहत मिली सायकल ने उनकी मुश्किलों को दूर कर दिया।         अदिति कुर्रे ने बताया कि अब वह कम समय में, बिना थके और सुरक्षित तरीके से स्कूल पहुंच पा रही हैं। सायकल मिलने से न सिर्फ आने-जाने में सुविधा हुई है, बल्कि पढ़ाई के लिए समय भी बढ़ गया है। अब वह पूरे मन से विद्यालय जाती हैं और नियमित रूप से कक्षाओं में शामिल हो रही हैं। अदिति के परिवार ने भी इस योजना के लिए शासन का आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह सायकल केवल एक साधन नहीं, बल्कि उनकी बेटी के उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ाया गया मजबूत कदम है। जिला शिक्षा अधिकारी श्री एल.पी.डाहिरे ने बताया कि जिले के तीनों विकासखण्डों में शैक्षणिक सत्र 2025-26 अंतर्गत 05 हजार 274 सायकल वितरण का लक्ष्य रखा गया था। लक्ष्य के अनुरूप शतप्रतिशत सायकल वितरण कर छात्राओं को लाभान्वित किया जा चुका है।

अमरकंटकताप विद्युत गृह चचाई की यूनिट नंबर 5 नाट आउट 500 दिन

भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी की दो ताप विद्युत यूनिट ने शुक्रवार को बिना रूके लगातार विद्युत उत्पादन करने का नया रिकार्ड बनाया। अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई (ATPS)की 210 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 5 ने 500 दिन और सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी (STPS) की 250 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 10 ने 100 दिन बिना रूके लगातार विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अमरकंटक ताप विद्युत गृह की यूनिट नंबर 5 देश के सार्वजनिक क्षेत्र की तीसरी व स्टेट सेक्टर की प्रथम विद्युत यूनिट है जिसने लगातार 500 दिन विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया है। यह यूनिट 1 अक्टूबर 2024 से सतत् विद्युत उत्पादन कर रही है। सार्वजनिक क्षेत्र में एनटीपीसी की दो यूनिट क्रमश: 644 व 559 दिन तक संचालित रही हैं। पेशेवर रूख, प्रतिबद्धता और तकनीकी काबिलियत का उदाहरण है चचाई यूनिट ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि यह गर्व की बात है कि पावर जनरेटिंग कंपनी के इतिहास में किसी भी बिजली बनाने वाली यूनिट द्वारा हासिल किया गया लगातार चलने का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि बिना किसी बड़े आउटेज के इतने लंबे समय (500 दिन) तक बिना रुके विद्युत ऑपरेशन जारी रखना अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई के पेशेवर रूख, प्रतिबद्धता व तकनीकी काबिलियत का उदाहरण है। अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की यूनिट नंबर 5 हासिल किए उच्च मापदंड अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की यूनिट नंबर 5 ने 500 दिन बिना रूके शानदार प्रदर्शन में इंडेक्स प्लांट टीम द्वारा लगातार बनाई गई क्षमता, विश्वसनीयता और तकनीकी उत्कृष्टता के उच्च मापदंड स्पष्ट रूप से दिखते हैं। यूनिट नंबर 5 ने 98.64 फीसदी प्लांट अवेलेबिलिटी फेक्टर (पीएएफ), 95.30 फीसदी प्लांट लोड फेक्टर (पीएलएफ) व 9.28 प्रतिशत ऑक्जलरी कंजम्पशन हासिल किया है। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी की यूनिट नंबर 10 ने किया 100 दिन सतत् विद्युत उत्पादन सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी की 250 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 10 ने 100 दिन लगातार विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया। यह यूनिट 5 नवम्बर 2025 से लगातार विद्युत उत्पादन कर रही है। यूनिट ने इस दौरान 100.16 फीसदी प्लांट अवेलेबिलिटी फेक्टर (पीएएफ), 92.85 फीसदी प्लांट यूटिलाइजेशन फेक्टर (पीएलएफ) व 8.23 प्रतिशत ऑक्जलरी खपत को हासिल कर ऑपरेशनल विश्वसनीयता व दक्षता का प्रदर्शन किया। सारनी की यूनिट नंबर 10 इससे पूर्व इसी वित्तीय वर्ष में 200 दिन से अधिक तक लगातार विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बना चुकी है।  

झारखंड में बदली सदियों पुरानी रीति! 400 साल में पहली बार पंचायत की जगह पुलिस तक पहुंचा विवाद

गढ़वा झारखंड के गढ़वा जिले के भवनाथपुर प्रखंड का लरहरा गांव अपनी अनोखी परंपरा को लेकर चर्चा में है। यहां पिछले करीब 400 वर्षों से किसी भी विवाद का मामला थाने तक नहीं पहुंचा। गांव के लोग आज भी आपसी मामलों को पंचायत के जरिए ही सुलझाते हैं। पिछले 400 सालों से एक भी केस थाने में नहीं पहुंचा दरअसल, जिले के गढ़वा जिला अंतर्गत भवनाथपुर प्रखंड के लरहरा गांव में आज भी परंपरागत पंचायत व्यवस्था कायम है। इस गांव में कोरवा जनजाति के करीब 40 परिवार रहते हैं, जिन्हें आदिम जनजाति की श्रेणी में रखा जाता है। हाल ही में गांव में एक संवेदनशील मामला सामने आया। बताया जाता है कि गांव के एक चार बच्चों के पिता और चार बच्चों की मां को आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया। दोनों रिश्ते में चाची-भतीजा बताए जा रहे हैं। मामला सामाजिक मर्यादा से जुड़ा होने के कारण गांव में हलचल मच गई और तुरंत पंचायत बुलाई गई। पंचायत ने कड़ी चेतावनी और माफी के साथ मामला सुलझाया इसी दौरान महिला ने गांव वालों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत दर्ज करा दी। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई। थाने से बुलावा आने पर गांव के सभी लोग एकजुट होकर वहां पहुंचे। पुलिस पूछताछ में ग्रामीणों ने कहा कि पिछले 400 सालों से एक भी केस थाने में नहीं पहुंचा। यहां हर मामला पंचायत स्तर पर ही सुलझा गया है और आगे भी पंचायत स्तर पर ही सुलझाया जाएगा। आखिरकार पुलिस ने बिना हस्तक्षेप किए मामला पंचायत पर छोड़ दिया। पंचायत ने दोनों पक्षों को कड़ी चेतावनी और माफी के साथ मामला सुलझा दिया। गांव के बुजुर्ग रामपृत कोरबा, बिठल कोरबा, मुंद्रिका कोरबा, मणि कोरबा और सुरेंद्र कोरबा का कहना है कि उनके पूर्वजों के समय से ही गांव में यही नियम चला आ रहा है कि हर विवाद पंचायत में ही सुलझाया जाएगा। इससे गांव में आपसी भाईचारा बना रहता है। लरहरा गांव के लोगों का मुख्य पेशा जंगल से लकड़ी काटकर उसे भवनाथपुर बाजार में बेचना है। आधुनिक दौर में भी यह गांव अपनी परंपरा और सामाजिक व्यवस्था को कायम रखे हुए है।  

मैनपाट महोत्सव शुरू: 523 करोड़ की सौगात, कई निर्माण कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण

अंबिकापुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को तीन दिवसीय मैनपाट महोत्सव का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि दो वर्ष पहले मैनपाट महोत्सव में आना हुआ था, इस वर्ष महोत्सव में बड़ा परिवर्तन दिख रहा है। समारोह में भव्यता दिख रही है, मैनपाट महोत्सव को आने वाले हर वर्ष मनाया जाएगा। सभी से चर्चा कर आयोजन के लिए एक तिथि निर्धारित करेंगे। दो वर्ष पहले मैनपाट महोत्सव हेतु 50 लाख रुपये स्वीकृत किया गया था, आने वाले समय में समारोह की और भव्यता के लिए सरकार चिंता करेगी। सरगुजा की संस्कृति, अस्मिता को दिखाने का माध्यम यह समारोह है। आने वाले समय में यहां की संस्कृति से देश दुनिया परिचित होगी। बाहर से आने वाले एवं स्थानीय कलाकारों को भी मंच मिलेगा और अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों की विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने 523 करोड़ रुपये से अधिक के विकास व निर्माण कार्यों का भूमिपूजन तथा लोकार्पण किया। कार्यक्रम में सांसद मनोज तिवारी, संभागायुक्त नरेन्द्र दुग्गा, पुलिस महानिरीक्षक दीपक झा, कलेक्टर अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि व आमजन उपस्थित थे। पर्यटन क्षेत्र में विकास पथ पर अग्रसर है प्रदेश : राजेश पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में निरंतर विकास हो रहा है।   राज्य सरकार पर्यटन स्थलों के समग्र विकास, आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण और नई संभावनाओं के सृजन की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मैनपाट जैसे प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण स्थल पर पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। होम-स्टे, होटल व्यवसाय, स्थानीय हस्तशिल्प, परिवहन सेवाएं और खाद्य व्यवसाय से जुड़े लोगों की आय में वृद्धि हो रही है। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। समारोह को सीतापुर विधायक राम कुमार टोप्पो व लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने भी संबोधित किया। मैनपाट में पर्यटन विकास के लिए एक करोड़,सीतापुर में बनेगा नया बस स्टैंड मुख्यमंत्री ने मैनपाट में पर्यटन के विकास हेतु एक करोड़ रुपये की घोषणा की। उन्होंने सीतापुर में सर्व सुविधायुक्त नए बस स्टैंड के निर्माण किए जाने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने नगर पालिक निगम अंबिकापुर के आठ करोड़ के नवीन कार्यालय भवन का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का तिब्बती बंधुओं द्वारा तिब्बती संस्कृति पर आधारित ताशी शोपा नृत्य के साथ आत्मीय स्वागत किया ग    मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का अवलोकन किया तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से पात्र हितग्राहियों को हितग्राहीमूलक सामग्रियों का वितरण किया गया   इस अवसर पर सांसद व भोजपुरी गायक मनोज तिवारी के साथ स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।  

संगरूर सीमेंट प्लांट विवाद: सुप्रीम कोर्ट सख्त, पर्यावरण और लोगों की सुरक्षा पर उठाए सवाल

पंजाब पंजाब के संगरूर जिले में प्रस्तावित सीमेंट प्लांट को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं और किसानों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने श्री सीमेंट को दिए गए सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) को रद्द कर दिया है। जानकारी के अनुसार, संगरूर में सीमेंट प्लांट स्थापित करने को लेकर लंबे समय से स्थानीय किसानों और पर्यावरण प्रेमियों द्वारा विरोध किया जा रहा था। उनका कहना था कि इससे कृषि भूमि और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। मामला अदालत तक पहुंचने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कंपनी को दिया गया सीएलयू रद्द कर दिया। कोर्ट के इस फैसले को आंदोलन कर रहे किसानों और पर्यावरण संगठनों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल इस फैसले के बाद क्षेत्र में प्रस्तावित प्लांट की स्थापना पर रोक लग गई है। कोर्ट ने एनवायरनमेंट पर पड़ने वाले असर और CLU प्रोसेस में कमियों के आधार पर फैसला सुनाया, जिससे इलाके की खेती और एनवायरनमेंट को बड़ा नुकसान होने से बचाया जा सका। आपको बता दें कि, श्री सीमेंट संगरूर में एक बड़ा प्लांट लगाना चाहता था, जिसके खिलाफ स्थानीय किसानों और पर्यावरणविदों का लंबे समय से संघर्ष चल रहा था।

खुद को IAS बताकर मंत्रालय पहुंचा युवक, पूछताछ में फर्जीवाड़े का हुआ खुलासा

भोपाल मंत्रालय में शुक्रवार को एक व्यक्ति स्वयं को 2019 बैच का अधिकारी बताकर पहुंच गया। योगेंद्र सिंह चौहान नाम का यह व्यक्ति मूल रूप से इंदौर का रहने वाला है और स्वयं को अपर कलेक्टर बताकर कर सामान्य प्रशासन विभाग के उपसचिव अजय कटेसरिया के पास स्वयं का तबादला कराने के लिए पहुंचा था। बातचीत में संदेह हुआ तो उन्होंने सुरक्षाकर्मी बुला लिए। पूछताछ में यह बात सामने आई कि वह कोई आईएएस अधिकारी नहीं है। हालांकि, युवक की मानसिक स्थिति को देखते हुए उसके विरुद्ध कोई कानूनी कार्रवाई स्वजन को सौंप दिया। योगेंद्र सिंह चौहान स्वयं को आइएएस अधिकारी बताकर सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव के पास पहुंचा था। वह अपना तबादला करने की बात कर रहा था। इससे अजय कटेसरिया को संदेह हुआ। उन्होंने सिलेक्शन बैच पूछा तो वह 2019 बताने लगा। सिलेक्शन बैच वह होता है जिसमें व्यक्ति परीक्षा देता है। संवर्ग का बैच उसके एक साल बाद का होता है। उसे जब और पूछा गया तो बताया कि इंदौर में अपर कलेक्टर पदस्थ हूं लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग मुझे भूल गया है। जब पूछा कि आपका सुरक्षा कर्मी कहां है, तो कहने लगा कि कलेक्टर ने ले लिया है। इस पर संदेह पुख्ता हो गया और फिर उन्होंने मंत्रालय के सुरक्षाकर्मी बुलाकर उन्हें सौंप दिया। मंत्रालय के सुरक्षा अधिकारी अविनाश शर्मा ने पूछताछ की। उसे 2019 बैच की सूची दिखाई, जिसमें उसका नाम नहीं था। यह भी पढ़ें- बीएनएस में बदली धारा से खुला रास्ता, कोर्ट ने सुधरने के वादे पर लूट के आरोपियों का राजीनामा किया स्वीकार मानसिक अस्थिर है, हिदायत देकर छोड़ा सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि पूछताछ में ही यह लगा कि वह मानसिक तौर पर अस्थिर लगा। एकटक सुरक्षाकर्मियों को देखता रहा। चेहरे पर कोई चिंता नहीं। उसके पास फर्जी आईडी या अन्य कोई चीज नहीं मिली। स्वजन का नंबर लिया और फिर उन्हें मंत्रालय बुलाया। उन्होंने बताया कि इसका उपचार चल रहा है, जिसके बाद बिना कोई कार्रवाई किए स्वजन के हवाले इस हिदायत के साथ कर दिया कि जब तक उपचार चल रहा है, तब तक ऐसे कहीं जाने न दें।  

14 लड़कियों का ‘अश्लील फोटो’ ब्लैकमेल कांड विधानसभा में गूंजा

अजमेर. राजस्थान का चर्चित 'अजमेर ब्लैकमेल कांड' एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। दरअसल, विधानसभा के बजट सत्र के बीच गुरुवार को 1992 के अजमेर ब्लैकमेल कांड की पीड़िताओं के मुआवजे का मुद्दा गरमाया रहा। कोटा दक्षिण से भाजपा विधायक संदीप शर्मा ने सरकार से पूछा कि आखिर न्यायालय के आदेश के बावजूद पीड़िताओं के खातों में 'पीड़ित प्रतिकर राशि' क्यों नहीं पहुंची? सरकार की ओर से जो जवाब आया, उसने इस मामले की पेचीदगी और पीड़िताओं के सामाजिक डर को एक बार फिर उजागर कर दिया। 17 में से सिर्फ 2 तक पहुंची मदद विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, माननीय न्यायालय ने 20 अगस्त 2024 को एक ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए इस कांड की 17 पीड़िताओं को प्रत्येक को 7-7 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने का निर्देश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को दिया था। हैरान करने वाला आंकड़ा: आदेश के महीनों बाद भी अब तक केवल 2 पीड़िताओं को ही कुल 14 लाख रुपये का भुगतान हो पाया है। बाकी का क्या हुआ? शेष 14 पीड़िताओं को मिलने वाली 98 लाख रुपये की राशि अभी भी सरकारी फाइलों में कैद है। एक पीड़िता का निधन हो चुका है। "इच्छा जाहिर नहीं की": सामाजिक डर या प्रशासन की विफलता? सरकार ने सदन में जो तर्क दिया, वह काफी चौंकाने वाला है। उत्तर में बताया गया कि प्रशासन ने पीड़िताओं से संपर्क करने के प्रयास किए, लेकिन कई पीड़िताओं या उनके परिजनों ने मुआवजा राशि प्राप्त करने की 'इच्छा जाहिर नहीं की' है। विशेषज्ञों का मानना है कि 32 साल बीत जाने के बाद कई पीड़िताएं अब अपनी नई पहचान के साथ समाज में रह रही हैं। वे मुआवजा लेने के लिए सामने आकर अपनी पहचान उजागर होने से डर रही हैं। यह 'खामोशी' उस गहरे मानसिक आघात का प्रतीक है जो अजमेर कांड ने इन मासूमों को दिया था। 1992 का वो 'काला अध्याय' जिसने अजमेर को रुला दिया था जो लोग नहीं जानते, उनके लिए बता दें कि 1992 में अजमेर में रसूखदार लोगों के एक गिरोह ने स्कूल और कॉलेज जाने वाली दर्जनों लड़कियों को नशीला पदार्थ खिलाकर या डरा-धमका कर उनके अश्लील फोटो खींचे थे। आरोप था कि इन फोटो के आधार पर लड़कियों का सालों तक यौन शोषण और ब्लैकमेल किया गया। यह आजाद भारत के सबसे बड़े और घिनौने सेक्स स्कैंडल्स में से एक माना जाता है, जिसकी गूँज संसद तक सुनाई दी थी। विधायक संदीप शर्मा की मांग: "घर जाकर दें हक" विधायक संदीप शर्मा ने सरकार के जवाब पर असंतोष जाहिर करते हुए एक मानवीय सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन को केवल औपचारिक पत्राचार नहीं करना चाहिए, बल्कि पीड़िताओं की निजता का ध्यान रखते हुए उनके घर जाकर संपर्क करना चाहिए। शर्मा ने मांग की कि सरकार ऐसी व्यवस्था करे जिससे पीड़िताओं की पहचान गुप्त रहे और उनका हक (7 लाख रुपये की राशि) सीधे उनके खातों में जमा हो जाए। अगले 3 साल तक जारी रहेंगे प्रयास सरकार ने आश्वासन दिया है कि आगामी 3 साल तक शेष पीड़िताओं को मुआवजा दिलाने के निरंतर प्रयास किए जाएंगे। यदि इस अवधि के बाद भी कोई पीड़िता सामने आती है, तो नियमानुसार उसे भुगतान किया जाएगा। वर्तमान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए गए हैं कि वे संवेदनशीलता के साथ इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं।