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रायपुर में निजी कंपनी के कर्मचारी ने 70 लाख का किया गबन

रायपुर. रायपुर। रांवाभाठा स्थित एक निजी कंपनी में कार्यरत कर्मचारी द्वारा साढ़े चार महीने में 70.41 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। खमतराई थाना पुलिस ने इस संबंध में आरोपी कर्मचारी के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, मेटल पार्क रोड स्थित रामा मोटू प्रालि में कार्यरत मुनीर अहमद (37) ने 21 मई से 25 अक्टूबर के बीच कंपनी के स्पेयर पार्ट्स इश्यू किए जाने का फर्जी रिकॉर्ड दर्शाकर करीब 70.41 लाख रुपये की राशि अपने खाते में ट्रांसफर कर ली। कंपनी संचालक केतन चौधरी (39) द्वारा स्टॉक वेरिफिकेशन और आय-व्यय की जांच कराए जाने पर इस धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद संचालक ने खमतराई थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में प्रकरण दर्ज कर लिया है और आरोपी कर्मचारी से पूछताछ सहित आगे की जांच की जा रही है।

सेना दिवस पर जयपुर में अर्जुन टैंक और धनुष तोप का शानदार प्रदर्शन

जयपुर  आज भारतीय सेना दिवस पर भव्य परेड का आयोजन किया गया, जहां भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और अनुशासन की झलक जयपुरवासियों को देखने को मिली. परेड में खासतौर पर भारतीय सेना के जवानों ने मार्च-पास्ट से लेकर आसमान में हेलीकॉप्टर की फ्लाई-पास्ट का भव्य प्रदर्शन किया, जिससे महला रोड पर पूरी तरह देशभक्ति का माहौल बना रहा. परेड के दौरान भारतीय सेना के भव्य हथियारों, जिनमें अर्जुन टैंक, के-9 वज्र, धनुष तोप, बीएमपी, सिलिका जैसे अत्याधुनिक हथियारों और बख्तरबंद वाहनों का प्रदर्शन किया गया. भारतीय सेना के भव्य हथियारों में शामिल उन स्वदेशी हथियारों पर ध्यान केंद्रित किया, जिन्हें भारतीय सेना की सबसे खास ताकत माना जाता है. ऐसे खास हथियारों को लेकर सेना की भव्य प्रदर्शनी में सेना के जवानों से बातचीत की गई. जवानों ने बताया कि भारतीय सेना के हथियारों में वैसे तो सभी हथियार बेहद खास हैं, लेकिन उनमें अर्जुन मार्क-1 टैंक और धनुष तोप विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, जो पूरी तरह भारत में बने हैं. अपनी खास खूबियों के चलते ये हथियार सेना के लिए सबसे महत्वपूर्ण हथियारों में से एक माने जाते हैं. अर्जुन मार्क-1 टैंक अपनी जबरदस्त फायर पावर, मजबूत कवच (आर्मर) से मिलने वाली सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के लिए जाना जाता है. वहीं धनुष तोप भारतीय सेना की स्वदेशी आर्टिलरी ताकत है, जिसमें डिजिटल कंट्रोल सिस्टम और ऑटोमैटिक गन लेइंग जैसी आधुनिक तकनीकों के चलते यह सेना के लिए बेहद खास मानी जाती है. जबरदस्त फायर पावर और मजबूत कवच के लिए फेमस है अर्जुन टैंक  भारतीय सेना के जवान बताते हैं कि अर्जुन मार्क-1 टैंक हाइड्रोलिक सिस्टम के कारण रेगिस्तान से लेकर सड़कों तक चलने में सक्षम है. अर्जुन मार्क-1 टैंक भारत का स्वदेशी मेन बैटल टैंक है, जिसे खासतौर पर भारतीय सेना के लिए तैयार किया गया है, जो युद्ध के समय सेना के लिए खासा मददगार साबित होता है. यह टैंक विशेष रूप से अपनी जबरदस्त फायर पावर, मजबूत कवच से मिलने वाली सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के लिए जाना जाता है. टैंक में ऐसा फायर कंट्रोल सिस्टम लगा है, जिसके चलते यह 70 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलते हुए भी दिन, रात या किसी भी मौसम में सटीक निशाना लगाने में सक्षम है. इसी टैंक का नया वर्जन अर्जुन मार्क-1A 72 नए फीचर्स और सुधारों के साथ सेना में शामिल किया गया है, जिससे इसकी परफॉर्मेंस और भरोसेमंद क्षमता पहले से बेहतर हुई है. जवान बताते हैं कि अगर इसकी बनावट और खासियत की बात करें तो अर्जुन टैंक को डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया है. इसमें 4 सैनिक बैठकर इसे संचालित करते हैं, इसकी लंबाई 10,640 मिमी और चौड़ाई 3,866 मिमी है, जबकि इसकी ऊंचाई 3,030 मिमी है. इसका वजन 62.5 टन है, जिसके चलते यह भारतीय सेना के सबसे भारी टैंकों के बेड़े में शामिल है. इसकी मुख्य तोप 120 मिमी की है, जो जबरदस्त फायर पावर प्रदान करती है. टैंक में खासतौर पर विमान-रोधी मशीन गन भी लगी है, जिसके चलते हवाई हमलों के समय भी टैंक से फायर किया जा सकता है, इस टैंक की मारक क्षमता 5 किलोमीटर तक है. भारतीय सेना की स्वदेशी आर्टिलरी ताकत है धनुष  सेना के जवान बताते हैं कि अर्जुन टैंक के अलावा भारतीय सेना के पास स्वदेशी आर्टिलरी ताकत के रूप में धनुष तोप भी है, जो डिजिटल कंट्रोल सिस्टम और ऑटोमैटिक गन लेइंग जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस है. जवान बताते हैं कि धनुष तोप मध्यम गन श्रेणी का हथियार है, जो कई किलोमीटर तक चलने में सक्षम है। इसका वजन 12.7 टन है. धनुष तोप खासतौर पर 30 डिग्री दाएं-बाएं और -3 डिग्री से 70 डिग्री तक ऊंचाई में फायर करने में सक्षम है. इसके अलावा धनुष तोप की मैन फायरिंग दर की बात करें तो यह 15 सेकंड में 3 राउंड और 60 मिनट में 60 राउंड की तीव्र गति से फायर करने में सक्षम है. धनुष में लगी तोप 155 मिमी/45 कैलिबर की है, जो 38 से 40 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम है.

16 जनवरी 2026: लाड़ली बहनों के खाते में आएगी योजना की अगली किस्त, जानें राशि और पात्रता

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना है। ​वर्तमान में योजना के तहत 1 करोड़ 26 लाख पात्र महिलाओं को 1,500 रुपए प्रति माह (18000 रु सालाना) दिए जा रहे हैं। दिसंबर 2025 तक योजना की 31 किस्तें जारी की जा चुकी हैं और अब जनवरी में 32वीं किस्त जारी होना है। मिली जानकारी के अनुसार, सीएम डॉ. मोहन यादव 16 जनवरी 2026 को पात्र महिलाओं के खाते में 32वीं किस्त के 1500-1500 रुपए माखन नगर, नर्मदापुरम से जारी करेंगे। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण राज्य के सभी जिलों में किया जाएगा। हालांकि अब तक महिला एवं बाल विकास विभाग या मोहन सरकार द्वारा इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ध्यान रहें जिन महिलाओं ने इस योजना के तहत रजिस्ट्रेशन करा रखा है और पात्रता की शर्तों को पूरा करती हैं, उन्हें अगली किस्त का लाभ मिलेगा। जिन महिलाओं ने ईकेवाईसी नहीं करवाई है, उनकी राशि अटक या रुक सकती है। कब शुरू हुई थी लाड़ली बहना योजना     मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लाड़ली बहना योजना मई 2023 में शुरू की गई थी। योजना के उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना, परिवार में उनके निर्णय अधिकार को मजबूत करना तथा स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सतत सुधार सुनिश्चित करना है।     10 जून 2023 को योजना की पहली किस्त जारी की गई थी। योजना की शुरुआत में 1000 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती थी, जिसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 1,250 रुपये किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः 250 रुपये की वृद्धि की गई।     इसके अतिरिक्त अगस्त 2023, 2024 व 2025 में रक्षाबंधन के मौके पर 250 रुपये की विशेष सहायता राशि भी बहनों को प्रदान की गई। वर्तमान में सामान्य हितग्राही महिलाओं को 1500 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रही महिलाओं को 900 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं।     योजना की शुरुआत (जून 2023) से लेकर दिसंबर 2025 तक लगभग 48,632 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में भेजी जा चुकी है। योजना में किसे मिलता है लाभ पात्रता:     मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी हो।     विवाहित महिला के साथ निर्धन, विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल हैं।     21 से 60 वर्ष तक की आयु की महिलाएं पात्रता के दायरे में आती हैं। अपात्र:     स्वयं/ परिवार की सम्मिलित रूप से स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख से अधिक हो या आयकरदाता हो।     ​जिनके पास संयुक्त रूप से 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि हो। ​जिनके परिवार के पास चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) हो।     स्वयं / परिवार का कोई भी सदस्य भारत सरकार अथवा राज्‍य सरकार के शासकीय विभाग/ उपक्रम/ मण्‍डल/ स्‍थानीय निकाय में नियमित/स्‍थाईकर्मी/     संविदाकर्मी के रूप में नियोजित हो अथवा सेवानिवृत्ति उपरांत पेंशन प्राप्त कर रहा हो। लाभार्थी सूची में ऐसे चेक करें अपना नाम     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।  

नितिन नवीन भाजपा आलाकमान का ‘संदेश’ लेकर दो दिन के दौरे पर आए पटना

पटना. पटना एयरपोर्ट पर गुरुवार को जो दृश्य दिखा, वह सिर्फ एक नेता का स्वागत नहीं था, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के भीतर बदले सियासी मिजाज और संगठनात्मक अनुशासन का सार्वजनिक प्रदर्शन भी था। बिहार मूल के युवा नेता और भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पटना आगमन पर जिस तरह दिग्गज नेताओं की कतार लगी, उसने साफ कर दिया कि अब संदेश ऊपर से आया है और उसका पालन जमीन पर दिख रहा है। दो दिवसीय दौरे पर पटना पहुंचे नितिन नवीन का एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत किया गया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, नीतीश कैबिनेट में भाजपा कोटे के कई मंत्री, वरिष्ठ पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। यह नजारा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि कुछ समय पहले तक ऐसा दृश्य देखने को नहीं मिलता था। दरअसल, नितिन नवीन के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद जब वे पहले पटना आए थे, तब कई बड़े भाजपा नेता एयरपोर्ट पर नजर नहीं आए थे। इस पर पार्टी आलाकमान ने नाराजगी जताते हुए साफ निर्देश दिया था कि नितिन नवीन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में हैं और उनके हर दौरे पर वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति अनिवार्य होगी। गुरुवार को पटना एयरपोर्ट पर दिखी एकजुटता को उसी निर्देश का सीधा असर माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने इस मौके पर कहा कि भाजपा में युवाओं को बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है और इसे लेकर कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है। उन्होंने कहा कि संगठन में अनुशासन और नेतृत्व के प्रति सम्मान ही भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है। उनके बयान को संगठनात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। नितिन नवीन का यह दौरा केवल औपचारिक नहीं है। मकर संक्रांति के अवसर पर वे शुक्रवार को पटना में पारंपरिक दही-चूड़ा भोज का आयोजन करेंगे। खास बात यह है कि हर साल वे इस भोज का आयोजन करते रहे हैं, लेकिन कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह पहला मकर संक्रांति कार्यक्रम है, जिसे सियासी रूप से काफी अहम माना जा रहा है। गौरतलब है कि अध्यक्ष चुने जाने से महज पांच दिन पहले नितिन नवीन अचानक पटना पहुंचे थे, जिसने पहले ही राजनीतिक हलकों में अटकलों को हवा दे दी थी। अब उनके स्वागत और आगामी भोज को संगठन में उनकी मजबूत होती स्थिति और आलाकमान के भरोसे के रूप में देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, नितिन नवीन का पटना आगमन भाजपा के भीतर नेतृत्व, अनुशासन और संदेश की राजनीति का स्पष्ट संकेत बनकर उभरा है- जहां अब स्वागत भी निर्देश के साथ होता है और संदेश भी पूरे दमखम के साथ जाता है।

झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष बने आदित्य साहू

रांची. भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड में संगठनात्मक नेतृत्व की कमान आदित्य साहू को सौंपकर स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी अब राज्य में अपेक्षाकृत युवा, ऊर्जावान और जमीनी नेतृत्व के सहारे अपनी राजनीतिक धार को तेज करना चाहती है। निचले स्तर से संगठन में काम करते हुए प्रदेश अध्यक्ष पद तक पहुंचे साहू का सफर भाजपा की कैडर आधारित राजनीति का उदाहरण है। उनका चयन केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि झारखंड में भाजपा की भविष्य की रणनीति का संकेत भी है। वहीं, इस चयन से ओबीसी समाज को भी साधने का प्रयास किया गया है। झारखंड भाजपा का नेतृत्व लंबे समय तक अपेक्षाकृत वरिष्ठ और अनुभव आधारित चेहरों के हाथ में रहा है। ऐसे नेतृत्व ने संगठन को स्थिरता तो दी, लेकिन बदले हुए सामाजिक–राजनीतिक समीकरणों के अनुरूप आक्रामक विस्तार की कमी भी महसूस की गई। इसके विपरीत आदित्य साहू का राजनीतिक विकास छात्र राजनीति, मंडल और जिला स्तर के संगठनात्मक कार्यों से होकर हुआ है। यह अनुभव उन्हें कार्यकर्ताओं की वास्तविक चुनौतियों और अपेक्षाओं को समझने में मदद करता है। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो साहू का नेतृत्व माडल अधिक सहभागी और संवाद आधारित प्रतीत होता है। कैडर आधारित ताकत पर फोकस आदित्य साहू बार-बार यह दोहराते रहे हैं कि भाजपा की असली ताकत उसका समर्पित कैडर है। गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों में भाजपा की सफलता का प्रमुख कारण मजबूत बूथ संरचना और प्रशिक्षित कार्यकर्ता माने जाते हैं। झारखंड में भाजपा संगठनात्मक रूप से मौजूद तो है, लेकिन कई क्षेत्रों में बूथ स्तर की सक्रियता कमजोर रही है। साहू की रणनीति अन्य राज्यों के सफल मॉडल से सीख लेते हुए झारखंड में कैडर को पुनः सक्रिय करने की है। साहू के नेतृत्व की सबसे अहम विशेषता युवा नेतृत्व को आगे लाने की मंशा है। पार्टी के भीतर लंबे समय से यह चर्चा रही है कि झारखंड जैसे युवा आबादी वाले राज्य में संगठन का चेहरा अपेक्षाकृत उम्रदराज दिखता है। तुलनात्मक रूप से देखें तो भाजपा ने हाल के वर्षों में कई राज्यों में युवा प्रदेश अध्यक्षों और युवा मोर्चा से निकले नेताओं को आगे बढ़ाया है। आदित्य साहू भी इसी प्रयोग को झारखंड में लागू करना चाहते हैं, ताकि पार्टी नए कलेवर के साथ अधिकाधिक प्रभावी बन सके। सामाजिक समीकरणों की समझ झारखंड की राजनीति आदिवासी, पिछड़ा, अल्पसंख्यक और शहरी–ग्रामीण विभाजन के जटिल सामाजिक ताने-बाने पर आधारित है। भाजपा पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि वह आदिवासी और स्थानीय मुद्दों को पर्याप्त संवेदनशीलता के साथ नहीं उठाती। साहू के सामने चुनौती है कि संगठन को सामाजिक रूप से अधिक समावेशी बनाया जाए। अन्य राज्यों की तुलना में झारखंड में क्षेत्रीय अस्मिता का सवाल अधिक प्रभावशाली है। यदि साहू इस पहलू को संगठनात्मक रणनीति में सही ढंग से शामिल कर पाते हैं तो भाजपा की स्वीकार्यता बढ़ सकती है। तुलनात्मक विश्लेषण करें तो जिन राज्यों में भाजपा ने संगठन को सरकार से ऊपर रखा, वहां पार्टी का आधार मजबूत हुआ। झारखंड में फिलहाल भाजपा सत्ता में नहीं है, इसलिए संगठन की भूमिका और भी अहम हो जाती है। साहू के सामने अवसर है कि वह विपक्ष में रहते हुए जन आंदोलनों, मुद्दा आधारित राजनीति और निरंतर जनसंपर्क के जरिए संगठन को सक्रिय रखें। चुनौतियां और संभावनाएं आदित्य साहू की राह आसान नहीं है। गुटबाजी, संसाधनों की कमी और सत्तारूढ़ गठबंधन की मजबूत पकड़ जैसी चुनौतियां उनके सामने हैं। लेकिन युवा टीम, स्पष्ट संगठनात्मक दृष्टि और कैडर आधारित कामकाज के जरिए वे इन चुनौतियों को अवसर में बदल सकते हैं। यदि वे अन्य राज्यों के सफल संगठनात्मक प्रयोगों को झारखंड की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालने में सफल होते हैं तो भाजपा फिर से राज्य में एक मजबूत और भरोसेमंद राजनीतिक विकल्प के रूप में उभर सकती है। आदित्य साहू के नेतृत्व की प्रमुख विशेषताएं     निचले स्तर से प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर, संगठन की जमीनी समझ     छात्र राजनीति और मंडल–जिला संगठन का व्यावहारिक अनुभव     कैडर आधारित राजनीति पर स्पष्ट फोकस     वरिष्ठता नहीं, सक्रियता और प्रदर्शन को प्राथमिकता पूर्व नेतृत्व बनाम नया नेतृत्व     पूर्व नेतृत्व में अनुभव आधारित, अपेक्षाकृत स्थिर संगठन     सीमित युवा भागीदारी     बूथ स्तर पर असमान सक्रियता आदित्य साहू का मॉडल     युवा और ऊर्जावान नेतृत्व     बूथ, मंडल और मीडिया प्रबंधन पर समान जोर     लगातार संवाद और फीडबैक आधारित संगठन संगठनात्मक रणनीति के प्रमुख बिंदु     बूथ स्तर पर कार्यकर्ता नेटवर्क को पुनर्जीवित करने की योजना     मंडल और जिला इकाइयों में युवाओं को नेतृत्व की जिम्मेदारी     प्रशिक्षण शिविरों और संगठनात्मक कार्यशालाओं पर जोर अन्य राज्यों से सीख     गुजरात, यूपी, एमपी में मजबूत कैडर माडल की सफलता     बंगाल में विपक्ष में रहते हुए संगठन विस्तार का उदाहरण     छत्तीसगढ़ में बूथ मैनेजमेंट और माइक्रो प्लानिंग का प्रभाव झारखंड की विशेष चुनौतियां     आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भरोसे की कमी     क्षेत्रीय अस्मिता और स्थानीय मुद्दों की अनदेखी का आरोप     सत्ता से बाहर होने के कारण सीमित संसाधन     संगठन के भीतर गुटीय संतुलन आदित्य साहू के सामने अवसर     युवा आबादी से सीधा जुड़ाव     संगठन को आंदोलनकारी स्वरूप देने की संभावना     सरकार बनाम संगठन की बहस में संगठन को केंद्र में लाने का मौका     भाजपा को मजबूत वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने का अवसर

चिराग के दही-चूड़ा भोज में चेतन के पास पहुंचे CM नीतीश

पटना. मकर संक्रांति के मौके पर बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा भोज सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि सियासी ताकत दिखाने का मंच बन गया। गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक के बाद एक कई दही-चूड़ा आयोजनों में शिरकत कर राजनीतिक संदेश दिए। कभी चिराग पासवान के ऑफिस पहुंचे, तो कभी बाहुबली आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद के घर जाकर उपस्थिति दर्ज कराई। चिराग पासवान के भोज में पहुंचे CM, किया अभिवादन केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के दही-चूड़ा भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी खास मानी जा रही है। यहां सीएम ने हाथ हिलाकर मौजूद लोगों और मीडिया का अभिवादन किया। इस मुलाकात को NDA के भीतर बढ़ती सहजता और तालमेल के रूप में देखा जा रहा है। भोज में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की अच्छी-खासी भीड़ रही। चेतन आनंद के घर पहुंचे नीतीश, पांच मिनट की मुलाकात भी मायनेदार इसके बाद मुख्यमंत्री जदयू विधायक चेतन आनंद के आवास पहुंचे, जहां वे करीब पांच मिनट रुके। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और PHED मंत्री संजय कुमार भी मौजूद थे। चेतन आनंद ने कहा कि व्यस्त शेड्यूल के बावजूद सीएम ने समय निकाला और आशीर्वाद दिया। उन्होंने बताया कि NDA के साथ-साथ विपक्षी नेताओं को भी आमंत्रण भेजा गया था। मंत्रिमंडल विस्तार पर चेतन आनंद की सधी हुई प्रतिक्रिया विधानसभा सत्र से पहले मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्री पद को लेकर पूछे गए सवाल पर चेतन आनंद ने सधा हुआ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे किसी तरह की अनर्गल इच्छा नहीं रखते और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय होगा। राजनीतिक गलियारों में इसे संतुलन साधने वाला बयान माना जा रहा है। आनंद मोहन की रिहाई से मजबूत हुई नजदीकी गौरतलब है कि चेतन आनंद के पिता आनंद मोहन की रिहाई में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अहम भूमिका रही थी। इसके बाद फ्लोर टेस्ट के दौरान चेतन आनंद ने RJD को झटका देते हुए नीतीश कुमार का साथ दिया था। तभी से आनंद मोहन परिवार और मुख्यमंत्री के रिश्ते और मजबूत माने जा रहे हैं। तेजप्रताप से रत्नेश सदा तक, 14 जनवरी का सियासी कैलेंडर 14 जनवरी को तेजप्रताप यादव के आवास पर हुए दही-चूड़ा भोज में लालू यादव, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, प्रभुनाथ यादव और चेतन आनंद की मौजूदगी ने अलग सियासी संकेत दिए। लालू यादव ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे तेजप्रताप से नाराज नहीं हैं। वहीं पूर्व मंत्री रत्नेश सदा के आवास पर भी दही-चूड़ा भोज हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री, राज्यपाल और NDA के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। दही-चूड़ा के बहाने दिखी गठबंधन की तस्वीर कुल मिलाकर, इस मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज सिर्फ खान-पान का आयोजन नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए गठबंधन की मजबूती, रिश्तों की गर्माहट और भविष्य की राजनीति के संकेत भी साफ तौर पर नजर आए। बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा एक बार फिर सियासी भाषा बोलता दिखा।

कल्याणपुर-बदलापारा कोल ब्लॉक में सर्वेक्षण और बॉउंड्रेशन हुआ: ऊर्जा मंत्री

चंडीगढ़. झारखंड के कल्याणपुर-बदलापारा कोल ब्लॉक को लेकर केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीजीसीएल) को शोकॉज नोटिस जारी किया था। नोटिस के माध्यम से कोल ब्लॉक से संबंधित कुछ प्रक्रियात्मक पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया था जिसका एचपीजीसीएल ने निर्धारित समय के भीतर विस्तृत जवाब भेज दिया है, साथ ही कोल ब्लॉक का आवंटन रद्द न करने की सिफारिश भी की गई है। एचपीजीसीएल पिछले डेढ़ वर्ष से इस कोल ब्लॉक के विकास कार्य में जुटा हुआ है। इस पर अब तक करीब 2.5 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। हरियाणा सरकार के अनुसार, इस कोल ब्लॉक में लगभग 102.35 मिलियन टन कोयले का भंडार होने का अनुमान है। यहां खनन की अनुमानित लागत करीब 1,501 रुपये प्रति टन आंकी गई है। 33 वर्ष की अवधि के लिए कुल अनुमानित संविदा मूल्य लगभग 15,364 करोड़ रुपये बताया गया है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बताया कि कोल ब्लॉक के विकास के लिए एचपीजीसीएल पहले ही माइन डेवलपर एंड ऑपरेटर (एमडीओ) की नियुक्ति कर चुका है। भूमि सर्वेक्षण एवं सीमा निर्धारण (बाउंड्री वर्क) का कार्य पूरा हो चुका है जबकि ड्रिलिंग का काम तेजी से प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त, अन्य विकासात्मक गतिविधियां भी स्वीकृत समय-सीमा के अनुसार शुरू कर दी गई हैं। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बताया कि हिसार के खेदड़ में स्थित राजीव गांधी थर्मल पावर प्लांट के विस्तार के तहत स्थापित की जा रही 800 मेगावाट की नई यूनिट के लिए केंद्र सरकार की शक्ति योजना के अंतर्गत कोल लिंकेज मंजूर कर दी गई है। इस यूनिट के चालू होने से प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि क्षेत्र और घरेलू उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि वर्तमान परियोजना कार्यक्रम के अनुसार वर्ष 2030 तक इस कोल ब्लॉक से यमुनानगर स्थित थर्मल पावर प्लांट को कोयले की आपूर्ति शुरू होने की संभावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोल ब्लॉक का आवंटन पूरी तरह सुरक्षित है और सभी विकास कार्य योजनानुसार जारी हैं। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय कोयला मंत्रालय की एक विशेष सर्वे एजेंसी द्वारा कोल ब्लॉक के आवंटन में हुई देरी के कारण हरियाणा सरकार की प्रक्रिया भी विलंब से शुरू हो सकी। इसके अलावा, झारखंड में हरियाणा को आवंटित यह कोल ब्लॉक नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थित है, जिससे कुछ गतिविधियों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

पंजाब हुआ महंगाई वाले टॉप पांच राज्यों की सूची से बाहर

चंडीगढ़. कर्ज के बोझ में डूबे और महंगाई की मार झेल रहे पंजाब के लिए नया साल अच्छी खबर लाया है। सूबा उन टॉप पांच राज्यों की सूची से बाहर हो गया है जो महंगाई की सबसे अधिक मार झेल रहे हैं। राज्य की महंगाई दर कम होकर 1.82 प्रतिशत तक पहुंच गई है। केंद्र सरकार का जीएसटी दरों में कटौती करना प्रदेश के लिए राहत लेकर आया है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में महंगाई दर में और गिरावट देखने को मिल सकती है क्योंकि जरूरी सामान की कीमतें में कमी आई है। लोगों की जेब पर बोझ भी कम हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2025 में सूबे की महंगाई दर 1.82 प्रतिशत तक दर्ज की गई है जबकि पिछले काफी महीनों से नवंबर 2025 तक पंजाब उन पांच राज्यों में शामिल था जहां महंगाई दर सबसे अधिक थी। राष्ट्रीय स्तर पर भी महंगाई दर 1.33 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं 9.49% महंगाई दर के साथ केरल टॉप पर है। दूसरे नंबर पर कर्नाटक की महंगाई दर 2.99%, आंध्र प्रदेश 2.71%, तमिलनाडु 2.67% और जम्मू एंड कश्मीर की 2.26% है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष 2026 में जीएसटी दरों में कटौती से पंजाब के जीएसटी राजस्व में 6.7 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है जिससे सरकार को 1786 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी का कुल राजस्व वर्ष में बढ़कर 28,507 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। प्रदेश पर कर्ज के बोझ के बीच यह अच्छे संकेत हैं। वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य पर अनुमानित कर्ज 3.82 लाख करोड़ था जो 2025-26 के बजट के अनुसार आगामी वित्तीय वर्ष के अंत तक 4.17 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में भी आई कमी इसी तरह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में भी कमी आई है। पंजाब में नवंबर 2025 के दौरान सीपीआई 190.8 दर्ज किया गया था, जो दिसंबर 2025 में कम होकर 190.4 हो गया है। अनुमान है और आगे सीपीआई में और कमी हो सकती है। सबसे अधिक सीपीआई केरल में 221.6 दर्ज किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर भी सीपीआई में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है। नवंबर में यह 197.9 था, जो दिसंबर में बढ़कर 198 हो गया है। सीपीआई एक तरह का पैमाना है, जिससे यह पता लगाया जाता है कि समय के साथ आम लोगों की तरफ से खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है। इसमें खाने-पीने का सामान, किराया, कपड़े, शिक्षा, इलाज, परिवहन, बिजली व पानी समेत अन्य सेवाएं शामिल होती हैं।

स्कॉर्पियो में आए बदमाशों ने शराब दुकान के कर्मचारी को किया किडनैप

रायपुर. तिल्दा के अंग्रेजी और देशी शराब की दुकान से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां अज्ञात बदमाशों ने अचानक दुकान में घुसकर पांच कर्मचारियों को अगवा कर लिया। इस घटना के दौरान एक कर्मचारी किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग निकला, जबकि चार कर्मचारियों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। जानकारी के मुताबिक, दुकान में काम कर रहे कर्मचारी अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। इसी दौरान कुछ अज्ञात व्यक्ति दुकान में घुस आए और कर्मचारियों के साथ बदसलूकी शुरू कर दी। इसके बाद बदमाशों ने उन्हें जबरदस्ती दुकान के अंदर से अगवा कर लिया। इस दौरान आसपास के अन्य लोग और दुकान में काम करने वाले कर्मचारी दहशत में आ गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और आसपास के क्षेत्र में छानबीन शुरू की। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले की प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और चार कर्मचारियों की तलाश के लिए टीमों को लगाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन अज्ञात बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया, उनकी पहचान और पकड़ने के लिए सीसीटीवी फुटेज और गवाहों से पूछताछ की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तिल्दा इलाके में पहले भी कभी-कभी ऐसी घटनाएं हुई हैं, लेकिन किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि शराब दुकान जैसी सार्वजनिक जगह पर कर्मचारियों का अगवा किया जाएगा। इसके चलते आसपास के व्यापारियों और कर्मचारियों में डर का माहौल बन गया है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी कर्मचारियों को सुरक्षित बरामद कर लिया जाएगा। पुलिस अधिकारी ने कहा कि अपराधियों को पकड़ने के लिए सभी संभावित ठिकानों और मार्गों पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की है कि अगर किसी को संदिग्ध गतिविधियों के बारे में जानकारी हो तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। इस मामले ने तिल्दा और आसपास के इलाके में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और भविष्य में इस तरह की वारदातों को रोकने के लिए विशेष निगरानी बढ़ाई जाएगी। वहीं, पुलिस जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बदमाशों ने कर्मचारियों को अगवा क्यों किया। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि यह घटना किसी पहले से योजना बद्ध अपराध का हिस्सा हो सकती है। पुलिस अभी तक इस मामले में किसी गिरफ्तारी की जानकारी नहीं दे सकी है, लेकिन पूरे इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है। पुलिस और प्रशासन ने स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील की है और कहा है कि जल्द ही चारों कर्मचारियों को सुरक्षित बरामद कर लिया जाएगा।

पानी का प्रदूषण: हाईकोर्ट ने कहा- नालों में सीवेज मिलना बंद हो, पॉल्युशन बोर्ड की रिपोर्ट में 99 मिलियन लीटर सीवेज का खुलासा

जबलपुर  मप्र हाईकोर्ट में मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रिपोर्ट पेश करके चौंकाने वाला खुलासा किया है। बोर्ड का कहना है कि जबलपुर के नालों का पानी जहरीला है। इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस जहरीले पानी से पैदा की जा रहीं सब्जियां कैसी होंगी? इस रिपोर्ट पर चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने  गहरी चिंता जताई है। बेंच ने अपना विस्तृत अंतरिम आदेश सुनाते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) की रिपोर्ट का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अगली सुनवाई 4 फरवरी को निर्धारित करके बेंच ने सरकार को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने कहा है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सरकार को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सुझावों पर तत्काल अमल किया जाए और इसकी रिपोर्ट पेश की जाए। मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को तय की गई है। लॉ स्टूडेंट के पत्र को माना याचिका जबलपुर के एक लॉ स्टूडेंट समर्थ सिंह बघेल ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र भेजकर जबलपुर में नाले के पानी से सब्जियां पैदा किए जाने को चुनौती दी है। हाईकोर्ट इस पत्र की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में कर रहा है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत मित्र के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ और राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा हाजिर हुए। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में गंभीर और चौंकाने वाले तथ्य पेश किए हैं। बोर्ड द्वारा 23 नवंबर 2025 को विभिन्न नालों, स्रोतों और खेतों से लिए गए पानी के नमूनों की जांच में साफ हुआ है कि यह पानी अत्यधिक दूषित है और इसमें बीओडी, टोटल कोलीफॉर्म व फीकल कोलीफॉर्म तय मानकों से कहीं अधिक पाए गए हैं। यह पानी न तो पीने योग्य है, न नहाने योग्य और न ही खेती के लिए सुरक्षित, इसके बावजूद इसका खुलेआम उपयोग हो रहा है। चेतावनी-गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि नालों का यह दूषित पानी किसी भी स्थिति में वॉटर पाइप लाइन में मिल गया, तो इससे गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है। हाईकोर्ट ने रिपोर्ट की गंभीरता को देखते हुए सरकार को निर्देश दिए हैं कि घरों से निकलने वाले सीवेज को सीधे नालों में जाने से तत्काल रोका जाए और नाले के पानी के किसी भी तरह के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाए। जहरीले पानी से खेती पर प्रतिबंध की मांग अपनी रिपोर्ट में PCB ने कहा है कि यह पानी पूरी तरह अनट्रीटेड सीवेज है, जिसमें फीकल कोलीफॉर्म जैसे घातक तत्व मौजूद हैं। ये तत्व मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं। ऐसे पानी से की जा रही खेती को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए, विशेषकर वे खेत जो शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे में हैं या नालों के गंदे पानी से सिंचाई कर रहे हैं। वापस घरों में पहुंच रहा जहरीला पानी PCB के अनुसार, जबलपुर शहर में प्रतिदिन लगभग 174 एमएलडी सीवेज उत्पन्न होता है, जबकि उपलब्ध 12 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स केवल 75.14 एमएलडी ही ट्रीट कर पा रहे हैं। वह भी कई बार आंशिक रूप से या रखरखाव के कारण बंद रहते हैं। नतीजतन, करीब 98.86 एमएलडी गंदा पानी रोज नालों और नदियों में जाकर वापस घरों में पहुंच रहा है। नवंबर में नालों से लिए थे सैंपल प्रदूषण बोर्ड की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट सिद्धार्थ सेठ ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश पर कृषि विभाग, स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की संयुक्त टीम ने 23 नवंबर 2025 को ओमती नाला, मोती नाला, खूनी नाला सहित अन्य प्रमुख नालों से पानी के सैंपल लेकर जांच की थी। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि पानी में बीओडी, टोटल कॉलीफॉर्म और फीकल कॉलीफॉर्म की मात्रा निर्धारित मानकों से कहीं अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार यह पानी पीने, नहाने, खेती या किसी भी अन्य उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है। नगर निगम पर लगा था 17.80 करोड़ का दंड मामले में यह भी सामने आया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जबलपुर नगर निगम पर 17.80 करोड़ रुपए का पर्यावरणीय दंड लगाया था। यह जुलाई 2020 से 31 मार्च 2025 के बीच घरों से सीधे नदियों और नालियों में सीवेज व प्रदूषित जल मिलाने के कारण लगाया गया था, लेकिन अब तक नगर निगम ने यह राशि जमा नहीं की है। दंड की वसूली की जिम्मेदारी जबलपुर जिला कलेक्टर की है, जिस पर हाईकोर्ट ने जवाब तलब किया है। 98.86 मिलियन लीटर दूषित पानी नालों में पहुंच रहा रिपोर्ट के अनुसार जबलपुर शहर में प्रतिदिन लगभग 174 मिलियन लीटर सीवेज उत्पन्न होता है। शहर में वर्तमान में 12 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं, जिनमें से केवल 75.14 मिलियन लीटर सीवेज का ही उपचार हो पा रहा है। ये ट्रीटमेंट प्लांट भी पूरी क्षमता से कार्यरत नहीं हैं। परिणामस्वरूप करीब 98.86 मिलियन लीटर अनुपचारित और दूषित पानी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नालों में पहुंच रहा है। सरकार व नगर निगम को नोटिस जबलपुर शहर में नालियों से गुजर रहीं पाइपलाइनों पर सवाल उठाने वाली एक अन्य जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने राज्य सरकार व नगर निगम को नोटिस जारी किए हैं। डेमोक्रेटिक लॉयर्स फोरम के अध्यक्ष ओपी यादव की ओर से दाखिल याचिका में राहत चाही गई है कि इन्दौर के भगीरथपुरा जैसे हालात जबलपुर में न बनें, इसके लिए नगर निगम को जरूरी निर्देश दिए जाएं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रविन्द्र कुमार गुप्ता का पक्ष सुनने के बाद बेंच ने नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।