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जश्न से पहले सख्ती: भोपाल में ‘सीक्रेट’ शराब ठिकानों पर पुलिस की दबिश, 36 लोग पकड़े गए

भोपाल नए साल की आहट के साथ ही राजधानी के गलियारों में सजी ''अवैध महफिलों'' पर पुलिस ने काल बनकर दस्तक दी है। पिपलानी , गोविंदपुरा, मिसरोद और निशातपुरा पुलिस ने एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए शहर के उन गुप्त ठिकानों पर छापा मारा, जहां बिना लाइसेंस के जाम छलकाए जा रहे थे। पुलिस की इस 72 घंटे की ''क्लीनिंग ड्राइव'' ने उन संचालकों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है, जो नए साल के जश्न के नाम पर अवैध शराब का कारोबार फैलाने की फिराक में थे। जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई महज औचक निरीक्षण नहीं थी। पुलिस को लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे कि रिहायशी और सुनसान इलाकों में गुपचुप तरीके से पार्टी आयोजित की जा रही हैं। दबिश के दौरान मौके का मंजर हैरान करने वाला था।   नए साल को लेकर आला अधिकारियों के निर्देश के बाद पुलिस पिछले 72 घंटे से रात के समय सार्वजनिक स्थानों पर खड़े होकर शराब पीते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है। पुलिस ने जब कार्रवाई की , तब अलग ही नजर देखने को मिला। शराब पीने वाले को ना नियमों का खौफ था और न ही प्रशासन की अनुमति। पुलिस ने घेराबंदी कर 100 से अधिक लोगों को रंगे हाथों शराब पीते पकड़ा, जिनमें से 36 लोगों को गिरफ्तार कर जेल की राह दिखाई गई। ''मास्टरमाइंड'' संचालकों पर सीधी कार्रवाई पुलिस ने केवल शराब पीने वालों पर ही नहीं, बल्कि इस अवैध खेल के असली खिलाड़ियों पर शिकंजा कसा है। अवैध रूप से पार्टी आयोजित करने वाले 3 मुख्य संचालकों को चिन्हित कर उनके खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत सख्त मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का मानना है कि इन गिरफ्तारियों से अवैध सप्लाई की चेन टूट जाएगी। हालांकि यह कार्रवाई सिर्फ नए साल आने के पहले की बताई जा रही है। 72 घंटे से यह थाना क्षेत्र कर रहे कार्रवाई पिछले 72 घंटों से गोविंदपुरा , पिपलानी, अवधपुरी,मिसरोद थाना क्षेत्र जोन 2 में डीसीपी विवेक राज के निर्देश पर लगातार कार्रवाई हो रही है। यह अभी तक सौ से ज्यादा लोग सावजर्निक स्थानों पर शराब पीते पकड़े जा चुके हैं, जबकि शहर के जोन 4 के निशातपुरा में कार्रवाई हो रही है। लेकिन जोन 1 टीटीनगर, कमला नगर, रातीबड़, हबीबगंज, शाहपुरा पुलिस ने लोग ज्यादा शराब की दुकानें यह थाने कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। ऐसा ही हाल जोन 3 के मंगलवार, हनुमानगंज , टीलाजमापुरा और गौतम नगर में है, जहां रात के समय शराब पीने वालों कोई कार्रवाई नजर नहीं आ रही है, इससे ऐसा ही हो सकता है कि लोग पिपलानी , गोविंदपुरा की तरह सार्वजानिक स्थानों पर शराब नहीं पी रहे हैं या पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है।

MP में शिक्षा का नया मॉडल: 4500 बाल वाटिकाएं, एलईडी-स्मार्ट टीवी से बदलेगी पढ़ाई

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार सत्र 2026-27 में प्रदेश के लगभग 4500 प्राथमिक विद्यालयों में 'बाल वाटिका' (प्री-प्राइमरी कक्षाएं) शुरू करने जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तीन से छह वर्ष के बच्चों को औपचारिक स्कूली शिक्षा से पहले खेल-खेल में सीखने का माहौल प्रदान करना है। इन वाटिकाओं में बच्चों के लिए रंग-बिरंगे क्लासरूम, खिलौने और विशेष रूप से तैयार किया गया पाठ्यक्रम होगा। यह निजी प्ले स्कूल की तर्ज पर सांदीपनि विद्यालय खुलेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने मप्र के स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सरकारी स्कूलों में अधिक से अधिक संख्या में बाल वाटिकाएं शुरू करने का सुझाव दिया था। अगले सत्र में स्कूल शिक्षा विभाग इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर रहा है। बता दें, कि शासन की ओर से करीब 24 हजार आंगनबाड़ियों को प्ले स्कूल के रूप में विकसित किए जाने की तैयारी है। प्रदेश में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा को मजबूती प्रदान करने और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए यह पहल की जा रही है। बाल वाटिकाओं को बनाया जाएगा आकर्षक अब तक सरकारी स्कूलों में सीधे पहली कक्षा से पढ़ाई शुरू होती थी, जिससे निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूल के बच्चे पिछड़ जाते थे। अब बाल वाटिकाओं के माध्यम से तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को स्कूलों से जोड़ा जाएगा। इन वाटिकाओं में बच्चों के बैठने के लिए आकर्षक फर्नीचर, खिलौने और रंगीन दीवारें होंगी। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इन स्कूलों का चयन उन परिसरों में किया गया है, जहां पहले से प्रायमरी स्कूल संचालित हैं, ताकि बच्चों को एक ही परिसर में निरंतरता मिल सके। खेल और गतिविधियों से होगी पढ़ाई बाल वाटिकाओं में बच्चों पर पढ़ाई का बोझ नहीं होगा। यहां बच्चों को एनसीईआरटी द्वारा तैयार विशेष पाठ्यक्रम 'विद्या प्रवेश' के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। इन कक्षाओं में एलईडी स्मार्ट टेलीविजन लगाए जा रहे हैं। इनका उपयोग बच्चों को हिंदी व अंग्रेजी वर्णमाला, गिनती और पूर्व प्राथमिक शिक्षा गतिविधियों के विजुअल टूल्स के माध्यम से सीखाया जाएगा। इसके अलावा पेंटिंग, मिट्टी के खिलौने बनाना, कविताएं और कहानी सुनाने के माध्यम से बच्चों को सिखाया जाएगा। शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा प्राथमिक शिक्षकों को विशेष तौर पर छोटे बच्चों को खेल-खेल में उन्हें आधुनिक तरीकों से सिखाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। अतिथि शिक्षकों को भी रखा जाएगा। निजी प्ले स्कूल की तर्ज पर खुलेंगे निजी स्कूलों में नर्सरी और केजी की महंगी फीस के कारण बच्चे गुणवत्तापूर्ण शुरुआती शिक्षा से वंचित रह जाते थे। बाल वाटिकाएं इस अंतर को खत्म करेंगी। इस योजना से न केवल सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ेगी, बल्कि बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में भी कमी आने की उम्मीद है। 200 सांदीपनि विद्यालय बनेंगे डॉ. अरुण सिंह, अपर संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र का कहना है कि "प्रदेश के 200 हाई व हायर सेकंडरी स्कूलों को सर्वसुविधायुक्त बनाकर सांदीपनि विद्यालय भी खुलेंगे, ताकि विद्यार्थी सर्वसुविधायुक्त भवन में पढ़ाई कर सकेंगे। सत्र 2026-27 से प्रदेश के 4500 सरकारी स्कूलों में प्री-प्रायमरी कक्षाएं शुरू की जाएंगी। इन कक्षाओं में बच्चों का सर्वसुवगीण विकास होगा।"

जंगल में नए साल का रोमांच, एमपी के टाइगर रिज़र्व में 10 दिनों तक पर्यटकों की रिकॉर्ड भीड़

उमरिया पुराने साल की विदाई और नए साल के स्वागत को जश्न से यादगार बनाने के लिए प्रदेश के टाइगर रिजर्वों में पर्यटक पहुंचने लगे हैं। न सिर्फ देसी बल्कि विदेशी पर्यटकों ने भी होटलों में अपनी मौजूदगी दर्ज करानी शुरू कर दी है। कुछ लोग तो बिना सफारी बुक कराए ही आ गए हैं और उनका उद्देश्य सफारी करना है भी नहीं है। वह सिर्फ नए वर्ष के जश्न को यादगार बनाना चाहते हैं, इसलिए होटल में होने वाले कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। साठ हजार से ज्यादा पर्यटक मनाएंगे जश्न छह पुराने टाइगर रिजर्व में अगले पांच दिनों के अंदर सिर्फ कोर जोन में 17 हजार 640 पर्यटक बाघों का दीदार करेंगे, जबकि इससे ज्यादा संख्या में पर्यटक बफर जोन में प्रवेश करेंगे। लगभग इतने ही पर्यटक बिना सफारी किए रिसोर्ट में जश्न मनाएंगे। पांच दिनों में बांधवगढ़ के कोर जोन में 4410, कान्हा में 5340, संजय धुबरी में 600, पन्ना में 2550, पेंच में 2970, सतपुड़ा में 1740 पर्यटक बाघ का दीदार करेंगे।   लुभा रहा है आदिवासी डांस रिसोर्ट मैनेजर विजय पनवार ने बताया कि नव वर्ष के स्वागत के लिए पहुंचे पर्यटकों की वजह से उल्लास का माहौल है। कान्हा और बांधवगढ़ में आदिवासी लोक कला की थीम पर पर्यटकों को आकर्षित किया जा रहा है। कान्हा में डिंडौरी के कई आदिवासी नर्तक दल अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं, जबकि बांधवगढ़ में उमरिया के साथ अनूपपुर जिले के नर्तक दल समा बांध रहे हैं। पेंच के रिसोर्ट में सेलिब्रेशन के लिए सेलिब्रिटी को बुलाया जा रहा है। टाइगर रिजर्वों की स्थिति बांधवगढ़ – सुबह कोर में 75, बफर में 60 टिकट, शाम को कोर में 72, बफर में 60 टिकट ही उपलब्ध हैं। कान्हा – सुबह कोर 100, बफर अनलिमिटेड, शाम कोर 78, बफर अनलिमिटेड टिकट की व्यवस्था। पन्ना – सुबह कोर 50, बफर अनलिमिटेड, शाम कोर 35, बफर अनलिमिटेड टिकट। पेंच – सुबह कोर 50 बफर अनलिमिटेड, शाम कोर 49, बफर अनलिमिटेड। सीधी – कोर में कुल 20 टिकट प्रतिदिन है, जबकि बफर के लिए अनलिमिटेड। सतपुड़ा – कोर में 30, बफर में 28 टिकट ही उपलब्ध हैं, यहां पचमढ़ी के लिए अनलिमिटेड। दो जनवरी तक बुकिंग फुल संजय टाइगर रिजर्व साल के अंतिम दिनों में पर्यटकों से फुल है। गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष दिसंबर माह में पर्यटकों की संख्या 75 प्रतिशत अधिक है। दो जनवरी तक ऑनलाइन बुकिंग फुल हो चुकी है। टाइगर रिजर्व में माह दिसंबर मे 475 बुकिंग हुई है। जिसमें 31 दिसंबर तक की एडवांस बुकिंग शामिल हैं, जबकि पिछले वर्ष 300 बुकिंग हुई थी। गत वर्ष दिसंबर माह में एक हजार पर्यटक आए थे, इस वर्ष 1800 पर्यटक आ चुके हैं। रिसोर्ट मैनेजर के मुताबिक प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में प्रतिदिन के हिसाब से टिकटों की संख्या निर्धारित है। जबकि विशेष अवसरों पर यह संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।

पटना साहिब में गुरु गोविंद सिंह का 359वां प्रकाश पर्व, CM नीतीश कुमार ने की अरदास

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को दशमेश पिता श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के 359वें प्रकाश पर्व पर तख्त श्रीहरिमंदिर जी परिसर, पटना साहिब में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। राज्य के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की मुख्यमंत्री ने तख्त श्रीहरिमंदिर जी, पटना साहिब में मत्था टेका और राज्य के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से आये जत्थेदारों, हरिमंदिर जी प्रबंधक कमिटी के सदस्यों द्वारा मुख्यमंत्री को तलवार, अंगवस्त्र, सरोपा एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर स्वागत किया गया। इसके पश्चात् मुख्यमंत्री ने गुरुद्वारा बाल लीला मैणी संगत जाकर वहां भी मत्था टेका और राज्य के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर जल संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी, विधायक रत्नेश कुशवाहा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह, पटना प्रमण्डल के आयुक्त अनिमेष परासर, पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम, पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा, अन्य गणमान्य व्यक्ति, वरीय अधिकारीगण, गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी के सदस्यगण, सिख संगत, सेवादार एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित थे।

बड़वानी में पतंग उड़ाने पर हिंसा, दो समुदाय आमने-सामने, 50 से अधिक पर केस

राजपुर/बड़वानी बड़वानी जिले के राजपुर में पतंग को लेकर हुए विवाद के बाद शनिवार रात्रि दो पक्षों में पथराव के बाद अतिररिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा है। पुलिस अधीक्षक जगदीश डाबर ने बताया कि शनिवार शाम पतंग उड़ा रहे दो समुदाय के बच्चों के बीच विवाद हो गया। मारपीट के चलते एक पक्ष की शिकायत पर दूसरे पक्ष के तीन लोगों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर एक को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस फोर्स को राजपुर में तैनात किया गया पुलिस अधीक्षक जगदीश डाबर ने बताया कि रात में एक पक्ष दूसरे पक्ष के मोहल्ले में घुस गया और उसने जमकर पथराव कर दिया। दूसरे पक्ष ने भी प्रतिक्रिया स्वरूप पथराव किया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। उन्होंने बताया कि घटना के चलते विभिन्न थानों की पुलिस फोर्स को राजपुर में तैनात किया गया। उन्होंने बताया कि घटना के चलते कुछ लोग घायल हुए हैं और तीन वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। पथराव की घटना के चलते वहां आयोजित किए जा रहे मेले में भी भगदड़ मच गई, हालांकि किसी जान माल के नुकसान की सूचना नहीं है।   50 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज बड़वानी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धीरज बब्बर ने बताया कि दोनों पक्षों की शिकायत पर करीब 50 लोगों के विरुद्ध मारपीट, पथराव और बलवा की धाराओं के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर राजपुर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रखा गया है। पथराव की घटना में कोई भी घायल नहीं हुआ है। स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। राजपुर के थाना प्रभारी विक्रम सिंह बामनिया ने बताया कि रविवार को भी पुलिस द्वारा निगरानी की गई। फिलहाल स्थिति सामान्य व शांतिपूर्ण है।

बिहार भूमि पोर्टल पर बड़ा बदलाव: पारिवारिक जमीन का दाखिल-खारिज होगा एक साथ

पटना  बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शनिवार को कहा कि पारिवारिक भूमि बंटवारे की प्रक्रिया को सरल, आसान और विवाद मुक्त बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बंटवारा दाखिल-खारिज की नई व्यवस्था आज से बिहार भूमि पोर्टल पर लागू कर दी गई है। अधिकारियों को व्यवस्था में सुधार के निर्देश सिन्हा ने आज आवासीय कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि बंटवारा दाखिल-खारिज की नई व्यवस्था राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के बिहार भूमि पोर्टल पर लागू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि इससे अब एक ही आवेदन के माध्यम से परिवार के सभी हिस्सेदारों के नाम उनके हिस्से की भूमि पर जमाबंदी कायम हो सकेगी। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि पूर्व की व्यवस्था में पारिवारिक बंटवारे के बाद प्रत्येक हिस्सेदार को अपने हिस्से की जमीन के लिए अलग-अलग दाखिल-खारिज कराना पड़ता था, जिससे लोगों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने विभागीय अधिकारियों को व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा कि निर्देशों के आलोक में प्रधान सचिव सी. के. अनिल के नेतृत्व में विभागीय टीम ने अल्प समय में नई व्यवस्था विकसित की, जिसे अब बिहार भूमि पोटर्ल की दाखिल-खारिज सेवा के अंतर्गत लागू कर दिया गया है। इससे आम रैयतों को काफी सहूलियत मिलेगी। जमीन की जमाबंदी अपने नाम से अवश्य कराएं उपमुख्यमंत्री ने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने पूर्वजों की भूमि का विधिवत बंटवारा कर डिजिटल माध्यम से अपने हिस्से की जमीन की जमाबंदी अपने नाम से अवश्य कराएं।उन्होंने विशेष रूप से उन लोगों से आग्रह किया, जिनके यहां अब तक मौखिक बंटवारा के आधार पर जमीन पर कब्जा और उपयोग हो रहा है, वे इस नई सुविधा का लाभ उठाकर मौखिक बंटवारे को अपने सरकारी दस्तावेजों में दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि मौखिक बंटवारा आगे चलकर पारिवारिक भूमि विवाद का कारण बनता है और ऐसे मामलों में लोग कई सरकारी योजनाओं एवं सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। सिन्हा ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत उत्तराधिकार-सह-बंटवारा की सुविधा भी उपलब्ध है, जिसके अंतर्गत पूर्वज की मृत्यु के बाद उनकी भूमि का बंटवारा करते हुए सभी उत्तराधिकारियों के नाम उनके हिस्से की जमीन पर अलग-अलग जमाबंदी एक साथ की जा सकेगी। राजस्व महाअभियान के दौरान मिले 46 लाख से अधिक आवेदन विजय सिन्हा ने कहा कि इसी वर्ष अगस्त-सितंबर में चलाए गए राजस्व महा-अभियान के दौरान 46 लाख से अधिक आवेदन मिले हैं। उनमें से 40 लाख से अधिक आवेदन बंटवारा एवं उत्तराधिकार नामांतरण से अधिक थे। इन आवेदनों को 31 दिसंबर तक अपलोड कर लिया जाएगा तथा जनवरी से मार्च के बीच पुन: पंचायतों में ही शिविर लगाकर सभी आवेदनों का निष्पादन सुनिश्चित किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि लोगों को भूमि से संबंधित परेशानियों से निजात दिलाने के उद्देश्य से ही भूमि सुधार जनकल्याण संवाद की शुरुआत की गई है। इस संवाद के माध्यम आमलोगों की परेशानियों को जिलों में जाकर समझने और समय सीमा में लोगों की समस्या का समाधान करना सरकार का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि यह पहल भूमि प्रशासन को पारदर्शी, सरल और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

HIV मामले में सतना में हाई वोल्टेज ड्रामा, जांच के दौरान अधिकारियों से तीखी बहस

सतना रविवार को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने के मामले में मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो व जिला प्रशासनिक अधिकारियों की बहस हो गई, जिसके बाद मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रिंयक कानूनगो ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जिला प्रशासन द्वारा मामले को दबाने के गंभीर आरोप लगाने का पोस्ट वायरल कर दिया। दरअसल मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो शहर के सिटी एसडीएम व प्रभारी सीएमएचओ पर इसलिए भडक़ उठे, क्योंकि एचआईवी कांड के पीडि़त अपने स्वजनों के साथ सुबह सात बजे सर्किट हाऊस में मौजूद नहीं दिखे। लिहाजा मानवाधिकार आयोग के सदस्य सिटी एसडीएम व सीएमएचओ के ऊपर बरस पड़े और कहा उन्हें यहां स्वयं जाकर नहीं ला सकते थे। जबकि उन्हें सीएमएचओ डॉक्टर मनोज शुक्ला द्वारा यह बताया भी गया कि पीडि़त के स्वजनों ग्रामीण इलाकों में निवासरत होने की वजह से सुबह सात बजे सर्किट हाऊस आने से इंकार करते हुए दस बजे के बाद आने को तैयार थे। बावजूद इसके प्रियंका कानूनगो कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे।   रात नौ बजे मैसेज के जरिए बताई मिलने की इच्छा जिला प्रशासनिक अधिकारियों की मानें तो विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मिलित होने की यात्रा पर निकले मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने अपने कटनी प्रवास के दौरान करीब रात नौ बजे सिटी एसडीएम को मैसेज के जरिए यह बताया कि उन्हें सर्किट हाऊस पर सुबह सात बजे एचआईवी ब्लड चढ़ाने वाले मामले में पीडि़तों से मुलाकात करनी है। लेकिन जब सुबह पीडि़त सर्किट हाऊस पर नहीं मिले तो वह प्रशासनिक अधिकारियों पर भडक़ उठें, जिस पर सिटी एसडीएम द्वारा बताया गया कि परिवार सुबह आने में असमर्थता बता रहे थे, लिहाजा उनके घर जाकर मिला जा सकता है। प्रियंक कानूनगो को सुबह आठ बजे दीनदयाल शोध संस्थान में आयोजित मानवाधिकार पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में सम्मिलित होने जाना था इसलिए मामले को दबाने के आरोप लगाते हुए मानवाधिकार आयोग के सदस्य चित्रकूट के लिए रवाना हो गए। मिलने का नहीं था कोई प्रोग्राम प्रियंक कानूनगो का HIV पीड़ितों से मिलने जाने का कोई प्रोग्राम नहीं था और न ऐसा कोई कार्यक्रम जारी था। लिहाज अब यह बात होने लगी है कि क्या वह पीड़ित बच्चों के परिजन ऐसे मिलने नहीं जा सकते थे। वास्तविकता में मानवाधिकार आयोग की टीम पीड़ितों के बयान लेने 29 को आ रही है। प्रमुख सवाल -क्या इस प्रकार उन्हें सार्वजनिक रुप से सर्किट हाऊस बुलाना उनकी पहचान उजागर करने जैसा नहीं? -क्या बिना पूर्व सूचना के पीडि़त को इस प्रकार बयान के लिए बुलाया जा सकता है? -बिना जांच टीम में शामिल बिना ऑफिशियल मानवधिकार आयोग के सदस्य इस प्रकार पीडि़तों के बयान दर्ज कर सकते है? हमे रात में यह सूचना मिलाी की उन्हें सुबह सात बजे पीडितों व उनके स्वजनों से मिलना है, लेकिन पीडितों के स्वजन इतना सुबह मिलने को तैयार नहीं थे। हालंकि उनके अधिकारिक यात्रा कार्यक्रम में इस बात का उल्लेख नहीं था- राहुल सिलाढिया, सिटी एसडीएम।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 3.77 लाख सोयाबीन उत्पादक किसानों को अंतरित की 810 करोड़ रुपए भावांतर राशि

प्रदेश के हर युवा को रोजगार दिलाएगी सरकार विकास का कारवां यूं हीं चलता रहेगा – हमने जो कहा, वो करके भी दिखाया जावरा में बनेगा आऊटडोर-इनडोर स्टेडियम, वन स्टॉप सेंटर भी बनाया जाएगा जावरा में हेरिटेज भवन निर्माण और स्कूल मरम्मत के लिए दिए जाएंगे 2-2 करोड़ रुपए ग्राम शुजापुर और पिपलौदा में बनेगा बालिका छात्रावास 145 करोड़ की लागत वाले 33 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन जावरा में हुआ सोयाबीन भावांतर राशि अंतरण का राज्य स्तरीय सम्मेलन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भावांतर, केवल एक योजना नहीं किसानों के प्रति सरकार का श्रद्धाभाव है। भावांतर की राशि किसानों के अधिकार की राशि है। यह राशि किसानों की समृद्धि के प्रति सरकार के संकल्प का प्रतीक है। किसानों के कल्याण के लिए हम कभी भी पीछे नहीं रहेंगे। नए वर्ष 2026 को हमने अन्नदाताओं के कल्याण को ही समर्पित किया है। अगले वर्ष हम कृषि उत्सव मनाएंगे। किसान भाइयों की समृद्धि का उल्लास मनाएंगे। आधुनिक तरीके से खेती, कृषि विस्तार सेवाएं और नई-नई तकनीकों को हम गांव-गांव तक पहुंचाएंगे, जिससे किसान भाई अपनी खेती-किसानी को और बेहतर बनाने के लिए सही समय पर सही निर्णय ले सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने प्रदेश की जनता से जो वादा किया, वह पूरा करके भी दिखाया है। प्रदेश के विकास का यह कारवां कभी रूकेगा नहीं। हम विकास के प्रकाश से किसी को भी वंचित नहीं रहने देंगे। प्रदेश की प्रगति में सबकी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहनों को अभी 1500 रुपए दिए जा रहे हैं, इस राशि को 3 हजार रूपये तक बढ़ाया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के हर जरूरतमंद और हुनरमंद युवा को हमारी सरकार रोजगार उपलब्ध कराएगी। प्रदेश के 32 लाख से अधिक किसानों को सरकार सोलर पम्प उपलब्ध कराएगी। सोलर पंप की कुल लागत पर हम किसानों को 90 प्रतिशत तक अनुदान भी देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को रतलाम जिले के जावरा में सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत किसानों को भावांतर राशि वितरण के लिए आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 3.77 लाख से अधिक सोयाबीन उत्पादक किसानों को 810 करोड़ रुपए की भावांतर राशि बैंकखातों में सिंगल क्लिक से अंतरित की। इसमें रतलाम जिले के 12 हजार 386 किसान भी शामिल हैं, जिनके खातों में 20.74 करोड़ रुपए सिंगल क्लिक से भेजे गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज की भावांतर राशि को मिलाकर हमारी सरकार अबतक प्रदेश के 6.25 लाख से अधिक सोयाबीन उत्पादक किसानों को करीब 1300 करोड़ रुपए की भावांतर राशि का भुगतान कर चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने करीब 145 करोड़ रुपए से अधिक लागत वाले 33 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन कर रतलाम जिलेवासियों को भी नये साल की अग्रिम सौगातें दीं। इसमें 18 करोड़ रुपए से अधिक लागत के 12 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा 127 करोड़ रुपए से अधिक लागत के 21 विकास कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह सभी विकास कार्य रतलाम जिले को सुंदर, स्वच्छ और नागरिक सुविधाओं के मामले में अव्वल बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मालवा के गांधी के नाम से प्रसिद्ध डॉ. लक्ष्मीनारायण पाण्डेय की जीवनी पर केन्द्रित पुस्तिका का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर लगी कृषि विकास प्रदर्शनी का अवलोकन किया और सम्मेलन में आए किसानों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत-अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनप्रतिनिधियों की मांग पर जावरा नगर में एक आधुनिक आऊटडोर-इनडोर स्टेडियम बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि निराश्रित महिलाओं के अल्प आश्रय के लिए जावरा में वन स्टॉप सेंटर बनाया जाएगा। जावरा में हेरिटेज भवन के निर्माण और एक बेहद पुराने जीर्ण-शीर्ण स्कूल की सम्पूर्ण मरम्मत के लिए मुख्यमंत्री ने इन दोनों कार्यों के लिए 2-2 करोड़ रुपए देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी बेटियां भी पढ़ाई-लिखाई में किसी से पीछे नहीं रहेंगी। उन्होंने रतलाम जिले के ग्राम शुजापुर और ग्राम पिपलौदा में एक-एक नवीन बालिका छात्रावास भवन बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पार्वती-कालीसिंध-चंबल राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना का लाभ रतलाम जिले को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय परियोजना से राजस्थान के 15 जिले और मध्यप्रदेश के मालवा और चंबल अंचल के 15 जिले (30 से अधिक जिले) कृषि सिंचाई की स्थायी सुविधा से लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश में पशुपालन और दुग्ध पालन में भी वृहद स्तर पर वृद्धि करने की ओर तेजी से अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मालवा क्षेत्र में करीब 5 हजार करोड़ रुपए लागत से एक नया आधुनिक फोर-लेन हाई-वे बनने जा रहा है। यह हाई-वे रतलाम जिले की सीमा से भी गुजरेगा। इस हाई-वे के निर्माण के लिए किसानों की सभी मांगे मानी जाएंगी। आवश्यकता हुई तो, भूमि अधिग्रहण के लिए मुआवजा राशि भी बढ़ा दी जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि जावरा के डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे एक ऐसा व्यक्तित्व है जिनके कृतित्व से क्षेत्र आलोकिक हुआ है। डॉ. पांडे ने अपने परिश्रम से जन सेवा की मिसाल कायम की है। मुझे प्रसन्नता है कि मुझे उनका सानिध्य मिला है और उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला है। डॉ. लक्ष्मी नारायण पांडे के चरित्र को हमें अंगीकार करना चाहिए उनका व्यक्तित्व बहुआयामी रहा है। मध्यप्रदेश शासन की जनहित कार्य नीतियों का जिक्र करते हुए श्री तोमर ने कहा कि आज प्रदेश के लाखों किसान भावांतर जैसी योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार सफलतापूर्वक सर्वाहारा वर्ग के लिए कार्य कर रही है। किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीड है। जहां-जहां फसलों को नुकसान हुआ प्रदेश सरकार द्वारा वहां किसानों को राहत राशि प्रदान की गई है। कृषि मंत्री एंदल सिंह कंषाना ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभिनव रूप से जनकल्याणकारी कार्यों की शुरुआत की है। किसान के हित में कार्य करने वाले मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषक हित में सदैव अग्रणी रहे हैं। कंषाना ने प्रदेश के किसानों की ओर से … Read more

पंजाब सरकार की नई आबकारी नीति पर मंथन तेज, राजस्व और नियमों में होंगे अहम संशोधन

जालंधर/चंडीगढ पंजाब के आबकारी आयुक्त जतिंदर जोरवाल ने आज जालंधर, कपूरथला, होशियारपुर और गुरदासपुर जिलों के शराब ठेकेदारों के साथ एक अहम बैठक की। बैठक के दौरान ठेकेदारों ने आगामी आबकारी नीति 2026-27 को लेकर अपनी प्रमुख मांगें आबकारी विभाग एवं राज्य सरकार के समक्ष रखीं। ठेकेदारों ने मांग की कि नई आबकारी नीति बनाते समय उनके हितों को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने कहा कि पंजाब में अंग्रेजी शराब की ओपन कोटा व्यवस्था समाप्त की जानी चाहिए, क्योंकि इससे बाजार में आपूर्ति अत्यधिक बढ़ जाती है, जिससे ठेकेदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से देसी शराब का कोटा नियंत्रित रहता है उसी तरह से अंग्रेजी शराब का कोटा भी नियंत्रित रहना चाहिए। शराब की अत्याधिक आपूर्ति वैसे भी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि शराब की ज्यादा सप्लाई होने से शराब की कीमतों को लेकर भी उतार-चढ़ाव बना रहता है। बाजार में शराब के दामों में भी गिरावट बनी रहती है क्योंकि प्रत्येक ठेकेदार न्यूनतम कीमत पर इसे बेचने का प्रयास करता है। इसके साथ ही ठेकेदारों ने सरकार से वर्तमान शराब ठेकेदारों को नवीनीकरण (रिन्यूअल) का विकल्प देने की भी मांग की, ताकि कारोबार में स्थिरता बनी रहे और अनावश्यक प्रतिस्पर्धा से बचा जा सके। बैठक में यह भी मांग उठाई गई कि नई आबकारी नीति तैयार करते समय छोटे-छोटे ग्रुप बनाए जाएं, जिससे छोटे शराब ठेकेदार भी इस कारोबार में प्रवेश कर सकें। ठेकेदारों का कहना था कि वर्तमान में 50-50 करोड़ रुपए तक के बड़े ग्रुप ही इस कारोबार में सक्रिय हैं, जिसके चलते छोटे ठेकेदारों के लिए व्यापार में उतरना लगभग असंभव हो गया है। उन्होंने बताया कि 2024-25 में राज्य में 236 ग्रुप होते थे जो 2025-26 में कम होकर 207 रह गए। इससे पता चलता है कि ग्रुपों का आकार बढ़ा दिया गया। ठेकेदारों ने आबकारी आयुक्त को बताया कि इस समय शराब के कारोबार में आपसी प्रतिस्पर्धा काफी अधिक हो चुकी है। चालू वर्ष के दौरान ठेकेदारों ने बड़ी मुश्किल से अपना अस्तित्व बचाया है और वह मार्जन पर काम कर रहे हैं। ठेकेदारों ने कहा कि छोटे ठेकेदार अगर बाजार में प्रवेश करते हैं तो सरकार का राजस्व भी इससे बढ़ेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि अधिकांश ठेकेदारों के ठेकों को पुन: नवीकृत कर देना चाहिए और शेष बचने वाले ठेकों को लाटरी के जरिए ड्रॉ निकाल देने चाहिए।   ठेकेदारों ने कहा कि अतिरिक्त आई.एम.एफ.एल. कोटा केवल निर्धारित स्लैब के अनुसार जारी होना चाहिए। प्रत्येक सलैब तभी जारी हो जब उसको लागू अतिरिक्त लाइसैंस फीस जमा की जाए। उन्होंने आशंका जाहिर की कि अगर नीति में संशोधन न किया गया तो खुदरा शराब व्यापार के टूटने, रोजगार में कमी और राजस्व में गिरावट आने का खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि घटते मार्जन और अतिरिक्त स्टाक के कारण कई लाइसैंस धारक समय पर मासिक लाइसैंस फीस जमा नहीं कर पा रहे हैं। आबकारी आयुक्त जतिंदर जोरवाल ने ठेकेदारों की मांगों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि नई आबकारी नीति बनाते समय सभी पक्षों के सुझावों पर विचार किया जाएगा। पंजाब सरकार द्वारा आने वाले दिनों में अन्य जिलों में भी शराब ठेकेदारों के साथ ऐसी ही बैठकें की जाएंगी। आमतौर पर जनवरी के अंत या फरवरी के शुरू में पंजाब सरकार द्वारा अपनी नई आबकारी नीति को कैबिनेट में मंजूरी दी जाती है।

डिजिटल सिस्टम पर बड़ा सवाल: ग्वालियर में छात्रों के आंकड़ों में 67 हजार का अंतर, 34 हजार नाम गायब

ग्वालियर सरकार एक ओर डिजिटल इंडिया और पेपरलेस वर्किंग का दावा कर रही है, वहीं ग्वालियर जिले के शिक्षा विभाग में पोर्टलों के आंकड़ों में भारी विसंगति देखने को मिली है। यूडाइस पोर्टल और एजुकेशन पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के बीच 67 हजार छात्रों का बड़ा अंतर मिला है। तकनीकी रूप से इन दोनों पोर्टलों पर बच्चों का नामांकन एक समान होना चाहिए, लेकिन मैदानी स्तर पर बरती गई लापरवाही ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। ड्रॉप बॉक्स में कैद 34 हजार छात्रों का भविष्य 67 हजार छात्रों के इस अंतर में सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा 34 हजार 'लापता' बच्चों का है। दरअसल, ये बच्चे लापता नहीं हैं, बल्कि तकनीकी रूप से एजुकेशन पोर्टल के 'ड्रॉप बॉक्स' में पड़े हुए हैं। नियमानुसार, जब कोई छात्र एक स्कूल छोड़कर दूसरे स्कूल में जाता है, तो नए स्कूल को उसे ड्रॉप बॉक्स से 'इंपोर्ट' कर अपने पोर्टल पर दिखाना होता है। लेकिन ग्वालियर के स्कूलों ने इन 34 हजार बच्चों को सिस्टम में स्वीकार (Accept) ही नहीं किया। नतीजा यह है कि ये छात्र पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं और इनका शैक्षणिक रिकॉर्ड अधर में लटका हुआ है।   पोर्टल की इस अव्यवस्था का सीधा असर गरीब और जरूरतमंद छात्रों की आर्थिक सहायता पर पड़ रहा है। जिले के स्कूलों में 48 हजार छात्रों की छात्रवृत्ति प्रोफाइल अब तक अपडेट नहीं की गई है। प्रोफाइल अपडेट न होने और तकनीकी त्रुटियों के कारण इन छात्रों की छात्रवृत्ति लटक गई है। शैक्षणिक सत्र बीतने को है, लेकिन संकुल और स्कूल स्तर पर प्राचार्यों की सुस्ती ने हजारों विद्यार्थियों को उनके हक की राशि से वंचित कर रखा है। लापरवाही की मुख्य वजह विभागीय सूत्रों के अनुसार, जनपद शिक्षा केंद्रों और स्कूलों में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटरों और जिम्मेदार अधिकारियों ने डेटा फीडिंग को गंभीरता से नहीं लिया। यूडाइस पोर्टल पर भरी गई जानकारी को एजुकेशन पोर्टल से मैच नहीं किया गया। यह विसंगति जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की हालिया समीक्षा बैठक में खुलकर सामने आई, जिसमें बीआरसी (BRC) डबरा और बीआरसी शहर क्रमांक-2 की कार्यप्रणाली पर सबसे ज्यादा सवाल उठे। डीईओ की सख्त चेतावनी मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि: ड्रॉप बॉक्स में लंबित सभी 34 हजार बच्चों को तत्काल संबंधित स्कूल पोर्टल पर इंपोर्ट किया जाए।     67 हजार छात्रों के डेटा गैप को शून्य (Zero) पर लाया जाए।     छात्रवृत्ति प्रोफाइल को लॉक करने और स्वीकृत करने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर पूरी की जाए। सभी बीईओ, बीआरसी सहित संकुल प्राचार्यों को पोर्टल के अंतर को जल्द से जल्द ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं। हमारा लक्ष्य है कि डेटा विसंगति दूर हो और जो बच्चे ड्रॉप बॉक्स में हैं, वे भी पोर्टल पर अपडेट हो जाएं। – हरिओम चतुर्वेदी, जिला शिक्षा अधिकारी, ग्वालियर