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डबरी से समृद्धि तकः धमतरी की महिलाओं ने मखाना खेती में देखी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह

धमतरी : धान से आगे सोच : मखाना खेती से बदलेगी धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर डबरी से समृद्धि तकः धमतरी की महिलाओं ने मखाना खेती में देखी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह 40 महिला किसान समूह ने मखाना प्रोसेसिंग एवं आधुनिक खेती तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया धमतरी कृषि विविधीकरण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में धमतरी जिले ने एक और ठोस कदम बढ़ाया है। विकासखंड नगरी के ग्राम सांकरा से 40 इच्छुक महिला किसान समूह का एक दल रायपुर जिले के विकासखंड आरंग अंतर्गत ग्राम लिंगाडीह पहुंचा, जहाँ उन्होंने मखाना प्रोसेसिंग एवं आधुनिक खेती तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस अध्ययन भ्रमण एवं प्रशिक्षण की संपूर्ण व्यवस्था जिला उद्यानिकी विभाग, धमतरी द्वारा की गई।  डबरी से समृद्धि तकः धमतरी की महिलाओं ने मखाना खेती में देखी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह ख़ास कर कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा मखाना खेती को बढ़ावा देने और किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी को लेकर रुचि ले रहे है। अब जल्द ही धान से आगे सोच से मखाना खेती से धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी।  छोटी-छोटी डबरी से समृद्धि तक धमतरी की महिलाओं को मखाना खेती में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह दिखायी दे रही है । शासकीय प्रयासों का प्रतिफल है कि मखाना खेती से धमतरी में आर्थिक सशक्तिकरण होगा ।          कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा के सतत प्रयासों से धमतरी जिले के ग्राम राखी, पीपरछेड़ी, दंडेसरा, राँकाडोह एवं सांकरा में लगभग 90 एकड़ क्षेत्र में डबरी चिन्हांकन कर मखाना खेती की शुरुआत हो चुकी है। महिला किसानों ने स्थानीय ओजस फार्म का भ्रमण करते हुए मखाना की खेती, कटाई, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी संपूर्ण श्रृंखला को नजदीक से समझा। फार्म प्रबंधक श्री संजय नामदेव ने किसानों को बताया कि मखाना की खेती के लिए जलभराव वाली डबरी, तालाब या जल संरचनाएं उपयुक्त होती हैं। उन्होंने तकनीकी पहलुओं, बीज चयन, उत्पादन लागत और बाजार संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी तथा यह भी बताया कि उचित प्रशिक्षण एवं सरकारी सहयोग से यह फसल किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।       इस अवसर पर श्री शिव साहू ने मखाना खेती के व्यावसायिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह फसल कम जोखिम वाली है और इससे स्थायी आय का मजबूत स्रोत विकसित किया जा सकता है। महिला किसानों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मखाना खेती से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का नया अवसर दिखाई दे रहा है।       बिहार के दरभंगा निवासी मखाना प्रोसेसिंग विशेषज्ञ श्री रोहित साहनी फोड़ी ने प्रसंस्करण की बारीकियां समझाते हुए बताया कि 1 किलो मखाना बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप तैयार होता है, जिसकी बाजार कीमत ₹700 से ₹1000 प्रति किलो तक होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसान स्वयं उत्पादन के साथ प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग करें, तो प्रति एकड़ लाभ में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।      इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रमुख वैज्ञानिक ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जानकारी देते हुए बताया कि प्रति एकड़ लगभग 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है और औसत उत्पादन 10 किं्वटल तक प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि छह माह की अवधि वाली इस फसल में कीट-व्याधि का प्रकोप नगण्य होता है तथा चोरी जैसी समस्याएं भी नहीं होतीं, जिससे यह किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प बनती है।      उप संचालक उद्यानिकी, धमतरी  डॉ.पूजा कश्यप साहू के मार्गदर्शन में ग्रामीण उद्यानिकी अधिकारी श्री चंद्रप्रकाश साहू एवं बीटीएम श्री पीताम्बर भुआर्य के साथ आए किसानों ने मखाना बोर्ड एवं राज्य शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। डॉ.पूजा ने बताया कि मखाना की खेती को प्रोत्साहन देने हेतु प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता एवं सब्सिडी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।         उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम व्यावसायिक मखाना उत्पादन आरंग विकासखंड के ग्राम लिंगाडीह में स्वर्गीय श्री कृष्ण कुमार चंद्राकर द्वारा प्रारंभ किया गया था, जहाँ राज्य का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र भी स्थापित हुआ।       आज मखाना उत्पादन छत्तीसगढ़ की नई कृषि पहचान बन रहा है। धमतरी की महिला किसानों का यह प्रयास न केवल कृषि नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन,प्रशिक्षण और प्रशासनिक संकल्प से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।

पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा: जीवन रक्षा की पहल, अब तक 118 नागरिकों को मिली सहायता

पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा : समय पर उपचार से जीवन रक्षा की प्रभावी पहल अब तक 118 नागरिक हो चुके हैं लाभान्वित भोपाल  पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा मध्य प्रदेश सरकार की संवेदनशील और दूरदर्शी स्वास्थ्य नीति का सशक्त उदाहरण है। गंभीर रूप से बीमार और आपातकालीन मरीजों को समय पर उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। विशेष रूप से उन परिस्थितियों में जहाँ हर मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को यह सुविधा निःशुल्क प्रदान कर सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि आर्थिक स्थिति उपचार में बाधा न बने। पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा राज्य की एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहल के रूप में स्थापित हो चुकी है। यह सेवा इस बात का सशक्त उदाहरण है कि आपात परिस्थितियों में समय पर उपलब्ध उन्नत चिकित्सा परिवहन कितने अनमोल जीवन बचा सकता है। नवजात से वरिष्ठ नागरिक तक, सभी के लिए जीवन रक्षक पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा के अंतर्गत भोपाल से पूरे प्रदेश के लिए 24 घंटे, सातों दिन आपातकालीन चिकित्सा परिवहन की सुविधा उपलब्ध है। यह व्यवस्था गंभीर रोगियों को कम से कम समय में उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही है। सेवा प्रारंभ होने के कुछ ही महीनों में बड़ी संख्या में गंभीर मरीजों को एयरलिफ्ट कर उपचार उपलब्ध कराया गया है। इनमें नवजात शिशु, वरिष्ठ नागरिक, सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीज, हार्ट अटैक एवं न्यूरोलॉजिकल आपात स्थितियां, अंग प्रत्यारोपण जैसे अति संवेदनशील मामले शामिल हैं। इन सभी परिस्थितियों में हर मिनट निर्णायक रहा, जहां एयर एम्बुलेंस ने जीवन रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उपयोगिता में निरंतर वृद्धि पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा की उपयोगिता में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025-26 में उपयोगिता में लगभग 22 प्रतिशत की वृद्धि पाई गई। फिक्स्ड विंग एयर एम्बुलेंस की औसत उपयोगिता में 30 प्रतिशत और हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस की उपयोगिता में 17 प्रतिशत वृद्धि हुई है। योजना प्रारंभ से अब तक कुल 118 लाभार्थियों को इस सेवा का सीधा लाभ प्राप्त हुआ है। संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया एयर एम्बुलेंस सेवा की उपयोगिता के विस्तार हेतु संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गयी है। संशोधित प्रस्ताव में स्वीकृति एवं पात्रता की प्रक्रिया को सरल किया गया है, आपातकालीन उपचार के अतिरिक्त अंगदान हेतु परिवहन, आपदा प्रबंधन, विशेष मेडिकल टीमों को सेवा में शामिल किया गया है। प्रशासनिक समन्वय और जन-जागरूकता सेवा के प्रभावी उपयोग हेतु मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षकों एवं जिला कलेक्टरों को राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकों एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नियमित दिशा-निर्देश प्रदान किए गए हैं। साथ ही, विभाग द्वारा आमजन में एयर एम्बुलेंस सुविधा के प्रति व्यापक जन-जागरूकता भी की गई है।  

नववर्ष 2026 के स्वागत में इंदौर के मंदिरों में धार्मिक धूम, खजराना गणेश मंदिर में 5 लाख भक्तों की उम्मीद

 इंदौर  नववर्ष का आगाज होने जा रहा है। इसे लेकर इंदौर शहर के प्रमुख मंदिरों में विशेष धार्मिक तैयारियां की जा रही हैं। श्रद्धालु नए साल का स्वागत प्रभु के दरबार में हाजिरी लगाकर करने की तैयारी कर रहे हैं। खजराना गणेश मंदिर में 5 लाख भक्तों की उम्मीद शहर के प्रमुख देवालय खजराना गणेश मंदिर में नववर्ष के अवसर पर करीब 5 लाख भक्तों के पहुंचने की संभावना है। इस बार नववर्ष की शुरुआत गुरुवार से हो रही है, जिसे भगवान विष्णु का दिन माना जाता है। इसी कारण वैष्णव भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। मंदिर के दर्शन समय और विशेष व्यवस्थाएं खजराना गणेश मंदिर में 31 दिसंबर की रात 11 बजे मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे। नववर्ष के दिन 1 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4 बजे मंदिर के पट खोल दिए जाएंगे, जो देर रात तक खुले रहेंगे। पंडित अशोक भट्ट के अनुसार 31 दिसंबर को बुधवार होने के कारण बड़ी संख्या में गणेश भक्त मंदिर पहुंचेंगे। भीड़ को देखते हुए दो दिनों के लिए अतिरिक्त रैलिंग लगाई जा रही है। वीआईपी दर्शन के लिए 100 रुपये की रसीद पर सुविधा उपलब्ध रहेगी। नववर्ष की सुबह भगवान गणेश का विशेष अभिषेक और अनुष्ठान किया जाएगा। फूलों की भव्य सजावट के साथ भगवान गणेश को परिवार सहित नवीन वस्त्र धारण कराए जाएंगे। अन्य मंदिरों में भी नववर्ष की विशेष तैयारियां शहर के वेंकटेश देवस्थान छत्रीबाग, अन्नपूर्णादेवी मंदिर, बिजासन माता मंदिर, भूतेश्वर महादेव मंदिर और वैष्णोधाम मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर भी नववर्ष को लेकर विशेष पूजन, जाप और परिक्रमा की तैयारियां की गई हैं। रणजीत हनुमान मंदिर में उमड़ेगा भक्तों का सैलाब ऐतिहासिक रणजीत हनुमान मंदिर में अंग्रेजी नववर्ष 2026 की पूर्व संध्या और सूर्योदय से पहले ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। नववर्ष के दिन अभिषेक के बाद सुबह साढ़े पांच बजे मंदिर के पट खोले जाएंगे, जबकि 31 दिसंबर की रात साढ़े ग्यारह बजे बंद होंगे। भक्तों द्वारा सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ किया जाएगा। ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि 20 से 25 मिनट में श्रद्धालु दर्शन कर सकें। नए साल का जश्न अब प्रभु के दरबार में समय के साथ नए साल को मनाने की परंपरा में बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां लोग होटल, रेस्टोरेंट और मनोरंजन स्थलों पर जाते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग धार्मिक स्थलों का रुख कर रहे हैं। बुजुर्गों के साथ-साथ युवा भी खजराना गणेश मंदिर, रणजीत हनुमान मंदिर, अन्नपूर्णादेवी मंदिर, बिजासन माता मंदिर, महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में दर्शन-पूजन कर रहे हैं। रामायण पाठ, सुंदरकांड और हनुमान चालीसा जैसे धार्मिक आयोजनों में युवाओं की भागीदारी भी बढ़ रही है। 

फर्जी प्रचार पर शिक्षा मंत्री का हमला, बोले– ‘शिक्षकों से कुत्तों की गिनती’ का कोई आदेश नहीं

नई दिल्ली  दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में प्रेस वार्ता कर आम आदमी पार्टी (आप) पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि 'आप' के नेता लगातार सोशल मीडिया के जरिए झूठ और अफवाहें फैलाकर दिल्ली के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रेस वार्ता में शिक्षा मंत्री ने कहा कि सोमवार को सोशल मीडिया पर एक संगठित अभियान चलाया गया, जिसमें यह झूठा दावा किया गया कि दिल्ली के शिक्षकों को लावारिस कुत्तों की गिनती के काम में लगाया गया है। यह दावा पूरी तरह निराधार और झूठा है। मंत्री ने आम आदमी पार्टी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर शिक्षकों को कुत्तों की गिनती में लगाने से जुड़ा कोई आदेश या सर्कुलर मौजूद है, तो उसे तुरंत सार्वजनिक किया जाए। ऐसा न कर पाने की स्थिति में आप नेताओं को दिल्ली की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। सूद ने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के तहसीलदारों और सब-रजिस्ट्रारों के निलंबन को लेकर भी झूठ फैलाकर प्रशासनिक अराजकता पैदा करने की कोशिश की। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 'आप' को भ्रष्टाचारियों से इतना लगाव क्यों है? शिक्षा मंत्री के मुताबिक, 'आप' सरकार के कार्यकाल में इन दफ्तरों में खुलेआम भ्रष्टाचार होता था, जबकि अब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। ऐसे में 'आप' का भ्रष्ट अधिकारियों के समर्थन में खड़ा होना उनकी मंशा पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने 25 दिसंबर के आसपास किए गए एक अन्य 'एक्स' पोस्ट का भी जिक्र किया, जिसमें यह दावा किया गया था कि दिल्ली सरकार ने स्कूलों में सांता क्लॉज बनकर आने वाले बच्चों पर कार्रवाई करने का आदेश दिया है। शिक्षा मंत्री ने इसे भी पूरी तरह झूठ बताते हुए कहा कि अगर आम आदमी पार्टी के पास ऐसा कोई आदेश है, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा। दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) से जुड़े मुद्दों पर भी मंत्री ने 'आप' पर जानबूझकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में ही डीएसएसएसबी के माध्यम से लगभग 16 हजार अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था। इसके बावजूद गलत जानकारी फैलाना आम आदमी पार्टी की प्रशासनिक अक्षमता और विफलता को दर्शाता है। सूद ने कहा कि दिल्ली की जनता ने चुनावों में आम आदमी पार्टी के तथाकथित शिक्षा मॉडल, शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री और तथाकथित भारत रत्न के दावेदारों को पूरी तरह नकार दिया। उन्होंने 'आप' की राजनीति को फ्रॉड, फर्जीवाड़े और झूठ पर आधारित बताते हुए कड़े शब्दों में निंदा की। शिक्षा मंत्री ने कहा कि चुनावी हार के 10 महीने बाद भी 'आप' अपनी पराजय स्वीकार नहीं कर पा रही है और पूरी तरह राजनीतिक जमीन खो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने न तो दिल्ली में शिक्षा के क्षेत्र में कोई ठोस काम किया और न ही प्रशासनिक स्तर पर विकास किया। पार्टी ने सिर्फ झूठ, शोर और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति की है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार जनहित से जुड़े काम कर रही है। इसी वजह से आम आदमी पार्टी बौखलाहट में सोशल मीडिया के जरिए झूठ और अफवाहें फैलाकर सरकार की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है, लेकिन दिल्ली की जनता सच्चाई समझती है और ऐसे प्रयासों को कभी सफल नहीं होने देगी।

विकसित भारत की परिकल्पना को एमएसएमई करेगा साकार : मंत्री काश्यप

विकास और सेवा के 2 वर्ष-पत्रकारों से रू-ब-रू हुए मंत्री श्री काश्यप भोपाल सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री चेतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 2047 में देश को विकसित भारत बनाने के संकल्प के दृष्टिगत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में अभ्युदय मध्यप्रदेश की परिकल्पना के तहत सर्वांगीण विकास में एमएसएमई विभाग निर्णायक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने मंगलवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में मीडिया से विकास और सेवा के 2 वर्ष पर संवाद करते हुए विभाग की दो वर्षों की उपलब्धियों तथा आगामी 3 वर्षों में किए जाने वाले कार्यों और विकसित भारत के संकल्प की जानकारी दी। मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप ने आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना की जानकारी देते हुए बताया कि एमएसएमई को 5 हजार करोड़ की प्रोत्साहन सहायता के साथ ही 30 नवीन निजी क्लस्टरों और 22 नवीन Common Facility Center (CFC) की स्वीकृति दी जाएगी। उन्होंने बताया कि 6 हजार से अधिक विकसित औद्योगिक भू-खंड उपलब्ध कराना, 100 औद्योगिक क्षेत्रों में CETP की स्थापना, औद्योगिक क्षेत्र विहीन 81 विधानसभा क्षेत्रों में औद्योगिक क्षेत्र का विकास, वर्तमान 6,000+ स्टार्टअप की संख्या को दोगुना यानि 12,000+ करना, 100 नवीन इन्क्युबेशन सेंटर की स्थापना, 1.5 लाख + स्व-सहायता समूहों का उद्यम पोर्टल अंतर्गत फार्मलाईजेशन, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर एवं उज्जैन में सब्सिडी युक्त प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर को-वर्किंग स्पेस की स्थापना, GI टैगिंग के लिए 20 विशिष्ट उत्पादों की पहचान कर उन्हें रजिस्टर कराना, स्वरोजगार योजना के माध्यम से 30 हजार उद्यमियों को लाभान्वित कराना और इंदौर और जबलपुर की टेस्टिंग लैब का उन्नयन किए जाने का लक्ष्य है। मंत्री श्री चेतन्य कुमार काश्यप ने बताया कि विकसित भारत@2047 के लिए1 करोड़ उद्यम पंजीकृत और एमएसएमई स्थापित करने का प्रयास किया जायेगा। एमएसएमई द्वारा 2 करोड़ रोजगार सृजन करना, एमएसएमई के माध्यम से ₹61,256 करोड़ का निवेश प्राप्त करना। 25 प्रतिशत महिला-नेतृत्व वाले एमएसएमई बनाना। 200+ एमएसएमई को एसएमई स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड करना जैसे कदम उठाए जाऐंगे। मंत्री श्री काश्यप ने बतया कि वर्तमान अधिसूचित 207 औद्योगिक क्षेत्रों को बढ़ाकर 1,000 करना। राज्य क्लस्टर योजना के अंतर्गत विकसित निजी क्लस्टरों की संख्या बढ़ाकर 150 करना। 10,000 हरित ऊर्जा वाले एमएसएमई की स्थापना। 50,000 से अधिक DPIIT मान्यता प्राप्त स्टार्टअप बनाना। 7,000 उत्पादन-आधारित स्टार्टअप स्थापित करना। स्व-रोजगार प्रदान करने का लक्ष्य: वित्तीय वर्ष 2046-47 में 3.90 लाख व्यक्ति और 1,00,000 जेडईडी प्रमाणित एमएसएमई स्थापित करने के लिए प्रयास करना शामिल है। एमएसएमई मंत्री श्री चेतन्य कुमार काश्यप ने बताया कि विभाग ने पिछले दिनों कई नवाचार किए हैं। औद्योगिक भू-खण्डों का आवंटन एवं प्रोत्साहन राशि के वितरण के लिए फेसलेस सरलीकृत ऑनलाइन प्रक्रिया विकसित की गयी। भू-खण्डों का आवंटन एवं सहायता/सुविधा की स्वीकृति के लिए प्रत्येक चरण की समय सीमा का निर्धारण किया और CFC के लिये भूमि आवंटन नियम में Amenities के रूप में भूमि प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। शार्क टैंक इंडिया टीम के साथ अगस्त 2025 में स्टार्टअप्स के लिए देश में पहला विशेष कार्यक्रम किया गया तथा प्रथम बार गोविंदपुरा में बहुमंजिला औद्योगिक परिसर का विकास किया जा रहा है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री चेतन्य कुमार काश्यप ने बताया कि प्रदेश में 21.63 लाख पंजीकृत MSME हैं, जिनमें 4.50 लाख विनिर्माण इकाइयां लगभग 36 लाख रोजगार सृजित करती हैं। स्टार्टअप ईकोसिस्टम में 6000+ DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप, 3,000+ महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप, 72 इनक्यूबेटर तथा ₹100 करोड़ रूपये का समर्पित फंड शामिल हैं। प्रदेश में 181 संचालित औद्योगिक क्षेत्रों में 4,000+ हेक्टेयर भूमि तथा 2,100 से अधिक हेक्टेयर अविकसित शासकीय भूमि रियायती दरों पर उपलब्ध है। विभाग द्वारा प्रदेश में शासकीय भूमि के साथ-साथ निजी क्षेत्र के सहयोग से औद्योगिक क्षेत्रों का निरंतर विकास करते हुए निवेशकों को भू-खण्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मंत्री श्री चेतन्य कुमार काश्यप ने बताया कि राज्य की केंद्रीय स्थिति, देश के 50 प्रतिशत बाजार तक सहज पहुंच, 8 हवाई अड्डे, 5 लाख किमी सड़क नेटवर्क तथा कांडला एवं JNPT बंदरगाहों की निकटता ने इसे भविष्य के लॉजिस्टिक्स व मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित किया है। 24×7 बिजली आपूर्ति, 1,000 MCM से अधिक जल आपूर्ति, राष्ट्रीय महत्व के शैक्षणिक संस्थान, ग्लोबल स्किल्स पार्क (भोपाल) एवं MSME टेक्नोलॉजी सेंटर कुशल कार्यबल सुनिश्चित करते हैं। मजबूत MSME आधार, तेज़ी से विस्तारित स्टार्टअप ईकोसिस्टम, उत्कृष्ट कनेक्टिविटी और उदार नीतिगत समर्थन के साथ मध्यप्रदेश दीर्घकालिक विकास की तलाश करने वाले उद्योगों के लिए भरोसेमंद औद्योगिक गंतव्य बन चुका है। मंत्री श्री चेतन्य कुमार काश्यप ने बताया कि विगत 2 वर्षों में कुल 4,865 इकाइयों को ऑनलाइन सिंगल क्लिक से 3,118.44 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई है। वर्ष 2019 से लंबित समस्त देयताओं का भुगतान सुनिश्चित किया गया है। औद्योगिक अधोसंरचना का विकास अंतर्गत्‍14 औद्योगिक क्षेत्रों (1,296 भूखंड) का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ है। 41 औद्योगिक क्षेत्र (3,353 भूखंड) विकासाधीन, 26 नवीन औद्योगिक क्षेत्रों (2,606 भूखंड) की स्वीकृति सहित औद्योगिक क्षेत्रों में उद्यमियों को 1,240 भू-खण्ड उपलब्ध कराए गए। 2019 से 2024 तक कुल 805 भूखंडों का आवंटन हुआ। उन्होंने बताया कि निजी भूमि पर स्वीकृत 30 औद्योगिक क्षेत्रों (1,423 भूखंड) में से 12 का विकासकार्य पूर्ण (583 भूखंड) पूर्ण हुआ है। 

एक छत के नीचे शिक्षा की सभी सुविधाएं: हरियाणा के 22 कॉलेजों को मिलेगा मॉडल संस्कृति दर्जा

चंडीगढ़  प्रदेश के उच्चतर शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश के 22 सरकारी कॉलेजों को जल्द ही मॉडल संस्कृति कॉलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। इनमें कैथल का डॉ. बीआर आंबेडकर गवर्नमेंट कॉलेज का नाम भी शामिल है। उच्चतर शिक्षा निदेशालय की ओर से इसकी आधिकारिक अनुमति दे दी गई है। इस निर्णय को प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।   इन कॉलेजों में न केवल पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं, नए कोर्स और प्रशिक्षित शिक्षकों का लाभ भी मिलेगा। मॉडल संस्कृति कॉलेजों की परिकल्पना का मुख्य उद्देश्य सरकारी कॉलेजों को निजी संस्थानों के समकक्ष बनाना है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के लिए बाहर न जाना पड़े। इन कॉलेजों में सु-प्रशिक्षित और ट्रेंड शिक्षकों द्वारा पढ़ाई करवाई जाएगी। साथ ही नई शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम लागू किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख और कौशल आधारित शिक्षा मिल सके।   इन कॉलेजों में कई नए विषय और कोर्स शुरू किए जाएंगे, जो वर्तमान समय की जरूरतों के अनुरूप होंगे। साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स के पारंपरिक विषयों के साथ-साथ स्किल डेवलपमेंट, आईटी, डेटा एनालिटिक्स, पर्यावरण अध्ययन, स्टार्टअप और उद्यमिता जैसे विषयों को भी शामिल किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ भविष्य के लिए तैयार किया जा सकेगा।   इन कॉलेजों को मॉडल संस्कृति बनने की मिली अनुमति     जिला                                        कॉलेज का नाम     कैथल                                       डॉ. बीआर आंबेडकर गवर्नमेंट कॉलेज, कैथल।     अंबाला                                     गवर्नमेंट पीजी कॉलेज, अंबाला कैंट।     भिवानी                                     गवर्नमेंट कॉलेज।     चरखी दादरी                             गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वूमेन, बाढ़रा।     फरीदाबाद                                पंडित जवाहरलाल नेहरू गवर्नमेंट कॉलेज।     फतेहाबाद                                गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वूमेन, बोडिया खेड़ा।     गुरुग्राम                                    द्रोणाचार्य गवर्नमेंट कॉलेज।     हिसार                                      गवर्नमेंट कॉलेज।     झज्जर                                      गवर्नमेंट कॉलेज।     जींद                                        गवर्नमेंट कॉलेज।     करनाल                                   पंडित चिरंजीलाल शर्मा गवर्नमेंट कॉलेज।     कुरुक्षेत्र                                   गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल।     नारनौल                                   गवर्नमेंट कॉलेज।     पलवल                                    गवर्नमेंट कॉलेज।     पंचकूला                                  गवर्नमेंट पीजी कॉलेज सेक्टर-1     पानीपत                                   गवर्नमेंट कॉलेज।     नूंह                                         गवर्नमेंट कॉलेज नगीना।     रेवाड़ी                                     गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वूमेन।     रोहतक                                   पंडित नेकीराम शर्मा गवर्नमेंट कॉलेज।     सिरसा                                    गवर्नमेंट नेशनल कॉलेज।     सोनीपत                                  गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वूमेन गोहाना।     यमुनानगर                               गवर्नमेंट कॉलेज छछरौली। अधिकारी के अनुसार डॉ. बीआर अंबेडकर गवर्नमेंट कॉलेज कैथल के प्रिंसिपल डॉ. मनोज भांभू ने बताया कि मॉडल संस्कृति कॉलेज बनने से कॉलेज में आधुनिक लैब खोली जाएगी। विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने के साथ ही नए कोर्स भी शामिल होंगे। कॉलेज को मॉडल संस्कृति बनने के बाद बाकी कॉलेज भी इसका अनुसरण करेंगे और इसके उपरांत उन बाकी कॉलेजों को भी मॉडल संस्कृति बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- दुग्ध उत्पादन तथा प्रोसेसिंग में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और रोजगार की अपार संभावनाएं

किसानों की आय बढ़ाने में दुग्ध उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका सांची ब्राण्ड का अधिक से अधिक विस्तार किया जाए पीपीपी मोड पर दुग्ध उत्पादन गतिविधियों का विस्तार हो मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मध्य हुए एग्रीमेंट के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक हुई भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के दुग्ध उत्पादन को औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का भी आधार बनाया जाए। दुग्ध उत्पादन तथा उसकी प्रोसेसिंग व मार्केटिंग में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। इसके साथ ही दुग्ध उत्पादन कृषकों की आय बढ़ाने में भी प्रभावी रूप से सहायक है। सभी जिलों में समन्वित रूप से गतिविधियों संचालित करते हुए सांची ब्राण्ड का अधिक से अधिक विस्तार किया जाए। सांची प्रोडेक्ट्स की ब्राण्डिंग में गोवंश और गोपाल को शामिल किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मध्य हुए एग्रीमेंट के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक में दिए। मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में हुई बैठक में वरिष्ठ विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव श्री मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विकास श्री उमाकांत उमराव तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के पदाधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने में दुग्ध उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों की दक्षता और क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से ग्राम स्तर तक गतिविधियां संचालित की जाएं। यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि दुग्ध संकलन व्यवस्था की मजबूत निगरानी हो। दूध खरीदी की कीमतें उत्पादकों के लिए लाभप्रद हों और खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित हो तथा दुग्ध उत्पादकों को उनका भुगतान नियमित रूप से समय-सीमा में प्राप्त हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पीपीपी मोड पर निजी भागीदारी और डेयरी सहकारी समितियों के समन्वय से दुग्ध उत्पादन गतिविधियों का विस्तार किया जाए। इससे सम्पूर्ण प्रदेश में उद्यमशीलता को प्रोत्साहन प्रदान करने, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में डेयरी टेक्नोलॉजी पर केन्द्रित प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम आरंभ किए जाएं। इससे डेयरी प्लांट संचालन में मदद मिलेगी और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात सांची ब्राण्ड के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है तथा सांची डेयरी शुरू करने की मांग कई स्थानों से आ रही है। दुग्ध उत्पादकों को दूध मूल्य के नियमित एवं समय पर भुगतान के लिए 10 दिन का रोस्टर तय किया गया है। दुग्ध संघों द्वारा दूध खरीदी मूल्यों में 2 रूपए 50 पैसे से 8 रूपए 50 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। अब तक 1241 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है तथा 635 निष्क्रिय दुग्ध समितियों को क्रियाशील बनाया गया है। सम्पूर्ण डेयरी वेल्यू चैन का डिजीटाईजेशन करने के लिए भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, बुंदेलखंड तथा जबलपुर दुग्ध संघों में सॉफ्टवेयर क्रियान्वित किया गया है। दुग्ध संकलन के लिए इंदौर दुग्ध संघ से मोबाइल ऐप की व्यवस्था लागू की गई है। जिससे दूध की मात्रा, गुणवत्ता और मूल्य की जानकारी तत्काल प्राप्त होती है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2029-30 तक 26 हजार गांवों तक डेयरी सहकारी कवरेज का विस्तार करने प्रतिदिन 52 लाख कि.ग्रा. दुग्ध संकलन करने, प्रतिदिन 35 लाख लीटर दुग्ध विक्रय और 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन प्रसंस्करण क्षमता का लक्ष्य लेकर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।  पिछले 2 वर्ष से बंद शिवपुरी डेयरी संयंत्र को प्रारंभ करने के लिए प्रक्रिया आरंभ की गई है। जबलपुर में स्थापित 10 मेट्रिक टन क्षमता के पनीर प्लांट को पुन: आरंभ करने के लिए 5 करोड़ रूपए का निवेश किया जाएगा। इंदौर में स्थापित 30 मेट्रिक टन क्षमता का दूध पाउडर संयंत्र प्रारंभ किया गया है। इसके माध्यम से 3 लाख लीटर दूध का प्रतिदिन प्रसंस्करण किया जा रहा है। ग्वालियर डेयरी संयंत्र के सुदृढ़ीकरण की प्रक्रिया भी आरंभ की गई है। बैठक में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के चेयरमेन श्री मीनेश शाह, कार्यकारी निर्देशक, श्री एस. रघुपति, महाप्रबंधक श्री जिगनेश शाह, एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के प्रबंध संचालक डॉ. संजय गोस्वामी, ग्रुप हेड श्री असीम निगम, ग्रुप हेड, डॉ. शुभंकर नंदा, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के संचालक डॉ. पी.एस. पटेल, तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

कांग्रेस में सख्ती का संकेत: सिद्धू दंपति पर राजा वड़िंग का कड़ा रुख, खत्म हुआ ‘पुराना अध्याय’

पंजाब  पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को लेकर बड़ा बयान दिया है। लुधियाना में मीडिया से बातचीत के दौरान राजा वड़िंग ने स्पष्ट कहा कि सिद्धू दंपती का चैप्टर अब पार्टी के लिए बंद हो चुका है और इस पर बार-बार चर्चा करने का कोई औचित्य नहीं है। राजा वड़िंग से जब यह सवाल किया गया कि डॉ. नवजोत कौर सिद्धू एक तरफ नवजोत सिद्धू को मुख्यमंत्री बनाने की बात कर रही हैं और दूसरी ओर भाजपा नेताओं से मुलाकात भी कर रही हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि किसी को भी किसी से मिलने से रोका नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जो विषय खत्म हो चुका है, उसे बार-बार उठाने की जरूरत नहीं है। कांग्रेस में सिद्धू दंपती की भूमिका पर उठे सवाल राजा वड़िंग के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या कांग्रेस पार्टी ने अब सिद्धू दंपती से दूरी बना ली है। हाल के दिनों में डॉ. नवजोत कौर सिद्धू द्वारा भाजपा नेताओं से मुलाकात और उनकी प्रशंसा ने भी इन अटकलों को हवा दी है। बताया जा रहा है कि विवादित बयानों के बाद नवजोत सिद्धू की पार्टी हाईकमान से मुलाकात नहीं हो पा रही है। वे दिल्ली जाकर वरिष्ठ नेताओं से मिलने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें समय नहीं मिल सका है। वहीं, डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने साफ किया है कि उनकी न तो हाईकमान से कोई मुलाकात हुई और न ही उन्हें बुलाया गया। 2021 से शुरू हुआ था विवाद सिद्धू दंपती और कांग्रेस के बीच तनातनी की शुरुआत 2021 में हुई थी, जब कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री चयन को लेकर पार्टी के भीतर खींचतान देखने को मिली। अंततः चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया, जिससे नवजोत सिद्धू नाराज हो गए। 2022 के विधानसभा चुनाव में सिद्धू ने प्रचार से दूरी बनाए रखी और कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वे सक्रिय राजनीति से लगभग अलग हो गए। 500 करोड़ वाले बयान से बढ़ी तल्खी हाल ही में डॉ. नवजोत कौर सिद्धू के “500 करोड़ में मुख्यमंत्री बनने” वाले बयान ने पार्टी को असहज कर दिया। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर टिकट बेचने जैसे आरोप लगाए, जिसके चलते पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया। रंधावा और आशू पर भी बोले वड़िंग सुखजिंदर सिंह रंधावा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राजा वड़िंग ने कहा कि मुख्यमंत्री बनाने का फैसला पार्टी सामूहिक रूप से और सोच-समझकर करती है। वहीं, पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू के बयान पर बिना नाम लिए वड़िंग ने कहा कि जो पार्टी अध्यक्ष के खिलाफ बोलता है, वह विरोधी की भूमिका निभाता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग की विभिन्न योजनाओं का सफल संचालन

'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' की दिशा में बड़ा कदम, खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने वर्ष 2025-26 में हासिल किये नये मुकाम खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग का लघु-कुटीर उद्योगों के प्रोत्साहन और स्वरोजगार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान     लखनऊ उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में अपनी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण और स्वरोजगार के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियां हासिल की हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने विभिन्न योजनाओं का सफल संचालन कर कौशल विकास और विपणन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। इस वर्ष विभाग ने अधिकांश योजनाओं में लक्ष्य से अधिक उपलब्धियां हासिल की, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन 'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 32,384 रोजगार का सृजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने एवं युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग की ओर से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में वर्ष 2025-26 में लक्ष्य से अधिक 2,994 ग्रामोद्योग इकाइयों की स्थापना हुई और 32,384 रोजगार का सृजन किया गया जबकि इस वर्ष का लक्ष्य 2,482 इकाइयों की स्थापना कर 27,302 रोजगार सृजित करने का ही था। इसी क्रम में  मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत भी प्रदेश में 94 नई इकाइयों की स्थापना की गई, जिसके माध्यम से 2,586 युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया। खादी एवं ग्रामोद्योग का यह प्रयास, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।  पं. दीनदयाल उपाध्याय खादी विपणन विकास सहायता योजना का सफल क्रियान्वयन  पं. दीनदयाल उपाध्याय खादी विपणन विकास सहायता योजना के तहत प्रदेश की 219 खादी ग्रामोद्योग संस्थाओं के 66,859 कारीगरों को लाभ पहुंचाया गया। वहीं सूती और ऊनी वस्त्रों के निर्माण को दिए जा रहे प्रोत्साहन के तहत 7,448 कम्बलों का उत्पादन हुआ है। विभाग की यह योजनाएं खादी उत्पादों के विपणन को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। पं. दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 1,092 ग्रामोद्योग इकाइयों को लाभान्वित किया गया जो ग्रामीण क्षेत्रों में लघु एवं कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन देने में सहायक सिद्ध हुई। निफ्ट के सहयोग से खादी वस्त्रों के शोध, डिजाइन और मानकीकरण में नवाचार खादी वस्त्रों को आधुनिक एवं युवाओं के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट), रायबरेली के सहयोग से खादी वस्त्रों की डिजाइनिंग, कटिंग, सिलाई और पैकेजिंग का प्रशिक्षण देने का अनुबंध किया गया है। इसके तहत पिछले साल 40 युवा कारीगरों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया था। इस वर्ष इस क्रम में विभाग ने 30 लाख रुपये का प्रावधान किया। विभाग की ओर से खादी उत्पाद के विकास, मानकीकरण एवं गुणवत्ता विनिश्चय अभियान के तहत 59 लाख रुपये की लागत से 245 व्यक्तियों को प्रशिक्षण एवं उपकरण वितरण किया गया। विभाग की कौशल सुधार प्रशिक्षण योजना के तहत 8,750 लाभार्थियों को विभिन्न ट्रेड्स में कौशल विकास का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।  मंडल व तहसील स्तर पर खादी उत्पादों की प्रदर्शनियों का आयोजन खादी और ग्रामोद्योग के उत्पादों के प्रचार-प्रसार और उनको जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने 755 लाख रुपये व्यय कर प्रदेश के 18 मंडलों में प्रदर्शनियां और 351 तहसीलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। इससे ग्रामीण उद्यमियों की न केवल नए बाजारों तक पहुंच बढ़ी है, उनकी आय में भी वृद्धि हुई है। साथ ही उत्कृष्ट कार्य, निर्यात और विपणन में अग्रणी लघु एवं कुटीर उद्यमियों एवं संस्थाओं को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया। खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग की ये उपलब्धियां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और सफल नीतियों का परिणाम हैं, जो उनके आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।

नववर्ष से पहले बिहार सरकार अलर्ट मोड में, मुख्य सचिव ने कानून-व्यवस्था को लेकर दिए अहम आदेश

पटना  बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने मंगलवार को अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि 31 दिसंबर एवं 01 जनवरी के (New Year 2026) दौरान कानून-व्यवस्था को पूरी सख्ती के साथ लागू करें। अमृत ने राज्य में आगामी नव वर्ष के अवसर पर विधि-व्यवस्था को सुद्दढ़ एवं शांतिपूर्ण बनाए रखने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि 31 दिसंबर एवं 1 जनवरी के दौरान कानून-व्यवस्था सख्ती के साथ लागू होन चाहिए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों एवं पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित दिया कि भीड़-भाड़ वाले स्थानों, सार्वजनिक स्थलों, बाजारों तथा प्रमुख चौराहों पर विशेष निगरानी रखी जाए। उन्होंने किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या विवाद की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। संवेदनशील स्थानों पर CCTV कैमरे लगाएं- मुख्य सचिव मुख्य सचिव अमृत ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के लिए सभी चिन्हित एवं संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जायें तथा पहले से लगे कैमरों की कार्यशीलता की नियमित जांच की जाए। उन्होंने शीतलहर एवं बढ़ती ठंड को ध्यान में रखते हुए जरूरतमंदों के लिए अलाव की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि सभी अस्पतालों का निरीक्षण किया जाए, जिससे वहां मरीजों के लिए कंबलों की कोई कमी न हो तथा चिकित्सा कर्मी समय पर उपस्थित रहें। इसके अतिरिक्त, पार्क, पिकनिक स्पॉट्स एवं उनके आसपास के क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी न रह जाए। डीजीपी ने दिए ये निर्देश बैठक में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने सभी जिलाधिकारियों एवं पुलिस अधीक्षकों को सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। डीजीपी ने कहा कि वर्ष के अंतिम दिन एवं नव वर्ष के अवसर पर युवाओं में शराब एवं नशीले पदार्थों की मांग रहती है, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना रहती है। इसे ध्यान में रखते हुए पुलिस को पूरी सतकर्ता के साथ कार्य करना होगा। जहां भी शराब या ड्रग्स से संबंधित सूचना प्राप्त हो, वहाँ नियमित रूप से छापेमारी की जाए और दोषियों के विरुद्ध सख्त कारर्वाई की जाए। डीजीपी ने यह भी निर्देश दिया कि तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल की तैनाती की जाए। वरीय अधिकारियों की यह जिम्मेदारी होगी कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों एवं पुलिसकर्मियों को सही ढंग से ब्रीफिंग एवं डी-ब्रीफिंग करें, ताकि सभी अपने कर्तव्यों को भली-भांति समझ सकें। उन्होंने गलियों, चौक-चौराहों एवं अन्य संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसरों पर बाइकर्स गैंग अधिक सक्रिय हो जाते हैं, इसलिए इन पर कड़ी नजर रखी जाए और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित कार्रवाई की जाए। इसके अतिरिक्त, ब्लॉक, जिला, विद्यालयों एवं अन्य संस्थानों में नशा मुक्ति अभियान चलाने के निर्देश दिए गए, ताकि आम जनता को जागरूक किया जा सके और वे पुलिस प्रशासन को सहयोग प्रदान करें। सीमावर्ती इलाकों में ड्रग्स एवं अवैध हथियारों के लेन-देन को रोकने के लिए सघन फ्रिस्किंग एवं चेकिंग अभियान चलाने तथा संदिग्ध व्यक्तियों से तत्काल पूछताछ करने के निर्देश भी दिए गए।