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देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु, पटना साहिब में गुरु गोविंद सिंह प्रकाश पर्व का अंतिम आयोजन कल

पटना पटना सिटी स्थित तख्त हरमंदिर साहिब में सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के 359वें प्रकाश पर्व का दूसरा दिन श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पटना साहिब पहुंचे। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तख्त साहिब प्रबंधन, विभिन्न गुरुद्वारों और बिहार सरकार की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए हैं। बाल लीला गुरुद्वारा में आने वाले संगतों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। यहां 24 घंटे लंगर की निरंतर सेवा जारी है, जिसमें श्रद्धालुओं को बिना किसी भेदभाव के भोजन कराया जा रहा है। संगतों के ठहरने, स्नान और विश्राम की भी समुचित व्यवस्था की गई है। बाल लीला गुरुद्वारा प्रबंधन ने स्वयंसेवकों की तैनाती कर संगतों की हर संभव सहायता सुनिश्चित की है। कश्मीर सिंह भूरी वाले बाबा जी ने बताया कि गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व को लेकर देश-विदेश से आने वाली संगतों के लिए रहने, खाने और पीने की पूरी व्यवस्था की गई है। पटना के कंगन घाट पर विशाल लंगर हॉल की व्यवस्था की गई है, जहां हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन लंगर ग्रहण कर रहे हैं। प्रकाश पर्व के दूसरे दिन तख्त श्री हरमंदिर साहिब में कीर्तन-गुरबाणी का विशेष आयोजन किया गया। रागी जत्थों ने गुरु ग्रंथ साहिब की पावन बाणी का मधुर कीर्तन प्रस्तुत किया, जिससे वातावरण गुरु भक्ति से सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन, बलिदान और संदेशों को स्मरण करते हुए मत्था टेका। इसके साथ ही भव्य शोभा यात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संगतें शामिल हुईं। शोभा यात्रा में “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा। गतका प्रदर्शन, धार्मिक झांकियां और रागी जत्थों के कीर्तन ने शोभा यात्रा को विशेष आकर्षण प्रदान किया। तख्त हरमंदिर साहिब के महासचिव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि 27 दिसंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना साहिब गुरुद्वारा में शामिल होंगे। केंद्र और राज्य सरकार के सभी मंत्रियों को भी गुरुद्वारा की ओर से निमंत्रण भेजा गया है। इस वर्ष अमेरिका, कनाडा सहित विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु प्रकाश उत्सव में शामिल होने पहुंचे हैं। प्रबंधन कमेटी की ओर से उनके रहने, खाने और लंगर की विशेष व्यवस्था की गई है। प्रकाश पर्व के मद्देनज़र बिहार सरकार ने सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से गुरुपर्व में भाग ले सकें।

जालंधर नगर निगम का एक कौंसलर जल्द ही आम आदमी पार्टी में हो सकता है शामिल

जालंधर  जालंधर से जुड़ी बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जालंधर नगर निगम का एक कौंसलर जल्द ही आम आदमी पार्टी में शामिल हो सकता है। बताया जा रहा है कि संबंधित कौंसलर फिलहाल कांग्रेस पार्टी से जुड़ा हुआ है और आज ही पार्टी बदलने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक कौंसलर आज आम आदमी पार्टी शामिल हो सकता हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। 

हाड़ कंपा देने वाली ठंड: सर्द हवाओं से कांपा राजस्थान, सीकर और अलवर में दिखी बर्फ की परत

जयपुर उत्तर भारत से वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर समाप्त होते ही उत्तरी हवाएं एक बार फिर मैदानी इलाकों में सक्रिय हो गई हैं। इसके चलते राजस्थान में सर्दी ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। सीकर में गुरुवार को न्यूनतम तापमान 1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन में दूसरी बार 1 डिग्री तक पहुंचा है। सीकर और अलवर में सुबह खेतों में फसलों पर बर्फ और ओस की परत जमी नजर आई। अलवर में सूखी घास और लकड़ियों पर भी ओस जम गई। वहीं माउंट आबू में न्यूनतम तापमान 2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जहां गाड़ियों की छतों पर बर्फ की परत दिखाई दी। चार जिलों में कोल्ड वेव की चेतावनी मौसम केंद्र जयपुर ने अगले दो दिनों के लिए चूरू, झुंझुनूं, सीकर और नागौर जिलों में कोल्ड वेव की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में आगामी एक सप्ताह तक मौसम शुष्क रहेगा और सर्द हवाओं के कारण ठंड का असर बना रहेगा। कई शहरों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री से नीचे बीते 24 घंटों में फतेहपुर (सीकर) में न्यूनतम तापमान 2.6 डिग्री और नागौर में 3.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा लूणकरणसर में 5.4, चूरू में 5.8, झुंझुनूं और पाली में 6.8, करौली में 6.9, पिलानी में 7.2, दौसा में 8.1, अलवर में 8.6, बीकानेर और जैसलमेर में 8.8 तथा सिरोही में 9.3 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रहा। सीकर, फतेहपुर, चूरू और बीकानेर क्षेत्रों में सुबह-शाम सर्द हवाओं के कारण ठिठुरन बनी रही। सर्द हवा के प्रभाव से दिन के अधिकतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। 16 शहरों में दिन का तापमान 25 डिग्री से नीचे बुधवार को प्रदेश के सभी शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से कम रहा। सबसे ठंडा दिन सिरोही में दर्ज हुआ, जहां अधिकतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस रहा। जयपुर में 22.3, अलवर में 22, बारां में 22.6, करौली में 22.7, झुंझुनूं में 22.8, श्रीगंगानगर में 23.5, चूरू में 23.6, बीकानेर और दौसा में 23.8, कोटा में 23.3, अजमेर में 24.3, भीलवाड़ा में 24.4, नागौर में 24.4 और पाली में 24.9 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज हुआ। अगले एक सप्ताह रहेगा मौसम शुष्क मौसम केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि अगले दो दिनों तक सर्द हवाओं का प्रभाव अधिक रहेगा, जिससे तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट हो सकती है। इसके बाद भी अगले एक सप्ताह तक मौसम शुष्क बना रहेगा।

नाम बदलने के फैसले पर चूहड़ माजरा में विरोध, गांव की पंचायत में उठे कई सवाल

कैथल कैथल जिले के गांव चूहड़ माजरा बदले के मुद्दे पर विवाद खड़ा हो गया है। गांववासियों ने विरोध करते हुए कहा कि वे गांव की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान बदलने को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे। इसके विरोध में ग्रामीणों की एक पंचायत बुलाई गई, जिसमें बहुमत ने फैसले को गलत बताते हुए इसे वापस लेने की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना है कि यह गांव लगभग 600 साल पहले बाबा चूहड़साध ने बसाया था। तभी से इस गांव का नाम चूहड़ माजरा है। उनका तर्क है कि नाम बदलने पर गांव की भावनात्मक विरासत प्रभावित होगी और प्रशासनिक प्रक्रिया के चलते ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। दस्तावेज़ों, रिकॉर्ड और विदेश में बसे युवाओं के कागजों में बदलाव करवाने में समय और धन दोनों की बर्बादी होगी। बिना सलाह के नाम बदलने का आरोप गौरतलब है कि 23 दिसंबर को गांव में गुरु ब्रह्मानंद सरस्वती जयंती कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कुछ लोगों की अनुशंसा पर गांव का नाम बदलकर ‘ब्रह्मानंद माजरा’ करने की घोषणा की थी। इसी निर्णय के बाद से गांव में विरोध स्वरूप आवाज़ें उठने लगी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत या गांव के अधिकांश प्रतिनिधियों से बिना सलाह-मशविरा लिए यह प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया है।   ग्रामीणों की चेतावनी ग्रामीणों ने बताया कि करीब 90 प्रतिशत आबादी इस परिवर्तन के खिलाफ है। उनका कहना है कि गुरु ब्रह्मानंद का सम्मान सभी करते हैं, लेकिन किसी संत का सम्मान करने का अर्थ यह नहीं कि गांव की परंपरागत पहचान मिटा दी जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि यह प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया, तो वे उच्च अधिकारियों और मुख्यमंत्री से मिलकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। सरपंच ने जताई सहमति गांव की सरपंच कविता और उनके पति कुलदीप ने ग्रामीणों के पक्ष का समर्थन करते हुए कहा कि गांववासियों का सामूहिक निर्णय ही सर्वोपरि होगा। वे नाम परिवर्तन को रद्द करने की मुहिम में ग्रामीणों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे।

विदेश भेजने का सपना दिखाकर मेडिकल कॉलेज की छात्रा को फंसाया, IELTS सेंटर संचालक पर शिकंजा

फरीदकोट हालाबाद मुदकी जिला फिरोजपुर की निवासी एक लड़की ने आईईएलटीएस सेंटर के मालिक के खिलाफ ब्याज पर पैसे देने के बहाने कार में बिठा कर अश्लील  हरकतें करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। इसके बाद लड़की के बयान के आधार पर सिटी पुलिस कोतवाली में मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह फरीदकोट मेडिकल कॉलेज में बीएससी की पढ़ाई कर रही थी और अस्पताल में पढ़ाई शुरू करने से पहले वह आईईएलटीएस सेंटर में शिक्षिका के रूप में कार्यरत थी। वहीं उसकी और उसके परिवार की मुलाकात आईईएलटीएस सेंटर के मालिक गुरप्रीत सिंह से हुई, जो मोगा जिले के ढुड़ी का निवासी है। उसने अपने भाई का यूके वीजा दिलाने के लिए गुरप्रीत सिंह को 2 लाख रुपये दिए थे। वीज़ा न मिलने पर उसने शिकायतकर्ता द्वारा दी गई राशि लौटा दी, लेकिन ब्याज पर और अधिक धन देने के बहाने शिकायतकर्ता को अपनी कार में बैठाकर उसके साथ अभद्रता की, अश्लील हरकतें कीं और जान से मारने की धमकी भी दी इस संबंध में सहायक थानेदार अकालप्रीत सिंह ने बताया कि शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है, जिसकी गिरफ्तारी अभी बाकी है। आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 

कड़ाके की ठंड से यूपी कांपा, कोहरे-शीतलहर के बीच प्रशासन ने स्कूलों में छुट्टी का ऐलान

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड और भीषण शीतलहर का प्रकोप जारी है। गिरते तापमान और सुबह के समय छाने वाले घने कोहरे को देखते हुए प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाए हैं। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जिलाधिकारियों ने स्कूलों को बंद करने या उनके समय में बदलाव करने के निर्देश जारी किए हैं।   भीषण ठंड के कारण स्कूल बंद शीतलहर की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के कई प्रमुख जिलों में कक्षा 1 से 8वीं तक के स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ और आगरा जैसे जिलों में स्कूलों को अगले कुछ दिनों के लिए बंद रखने का निर्णय लिया गया है। कुछ जिलों में यह अवकाश फिलहाल दो से तीन दिनों के लिए है, लेकिन यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो इसे बढ़ाया भी जा सकता है। यह आदेश सरकारी, सहायता प्राप्त और सभी निजी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा। समय में हुआ बदलाव जिन जिलों में स्कूलों को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, वहां बच्चों को सुबह की ठिठुरन से बचाने के लिए समय में बदलाव किया गया है। अब अधिकांश स्कूल सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच संचालित किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सुबह के समय विजिबिलिटी बहुत कम होती है, जिससे स्कूली वाहनों के साथ दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इसलिए सुबह जल्दी स्कूल खोलने पर पाबंदी लगा दी गई है। मौसम विभाग का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में ठंड से राहत मिलने की उम्मीद कम है। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का सीधा असर यूपी के तापमान पर पड़ रहा है। पछुआ हवाओं के कारण 'कोल्ड डे' की स्थिति बनी हुई है। कोहरे के कारण सड़कों पर यातायात प्रभावित है और ट्रेनें भी देरी से चल रही हैं। प्रशासन ने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे बच्चों को ठंड से बचाकर रखें और केवल जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे सरकारी आदेशों का पालन करें। यदि कोई स्कूल इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों को यह भी कहा गया है कि वे ऑनलाइन क्लास के विकल्प पर विचार कर सकते हैं ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो।

भोपाल गुरुद्वारा में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वीर बाल दिवस पर शहादत को दी श्रद्धांजलि

भोपाल गुरु गोविंद सिंह जी के चारों साहिबजादों की महान शहादत को समर्पित “वीर बाल दिवस” के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के हमीदिया रोड स्थित गुरुद्वारा में माथा टेका और शबद कीर्तन श्रवण किया। इस दौरान उन्होंने साहिबजादों के जीवन, त्याग और अद्वितीय वीरता पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दशमेश पिता गुरु गोविंद सिंह महाराज जी के चारों साहिबजादों को नमन करते हुए कहा कि धर्म, सत्य और मानवता की रक्षा के लिए दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान युगों तक मानव समाज को प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने कहा कि साहिबजादों का त्याग केवल सिख समाज ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिए साहस, निष्ठा और धर्म रक्षा का अनुपम उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी और उनके परिवार की शहादत से जुड़े गौरवशाली इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए इसे शैक्षणिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि बच्चे और युवा अपने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मूल्यों को समझ सकें। उन्होंने 26 दिसंबर को शासकीय स्तर पर वीर बाल दिवस के रूप में मनाने और इससे जुड़े विषयों को शिक्षा प्रणाली से जोड़ने का उल्लेख किया। सीएम मोहन यादव ने गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए सरकारी भूमि और आवश्यक व्यवस्थागत सहयोग देने का आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने उज्जैन में गुरु नानक देव जी के आगमन से जुड़े स्थलों और परंपराओं को मान्यता और सम्मान देने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार गुरु साहिबानों की शहादत, बलिदान और मानवता के संदेश को संरक्षित और प्रचारित करने के लिए निरंतर कार्य करेगी। उन्होंने सनातन संस्कृति और सिख परंपरा के साझा मानवतावादी मूल्यों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए स्पष्ट किया कि गुरुजी के इतिहास, आयोजनों और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े सभी विषयों में प्रदेश सरकार पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी।  

राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने अस्पताल में मरीजों से मिलकर बिछाई चादर, किया हालचाल जाना

सतना  मध्य प्रदेश के सतना में कोदो की रोटी खाने से एक ही परिवार के 6 लोग बीमार हो गए थे. जिन्हें देखने राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी जिला अस्पताल पहुंची और मरीजों का हाल जाना. इस दौरान राज्य मंत्री ने देखा की मरीज के बिस्तर पर चादर सिमटी हुई थी. जिसे उन्होंने अपने हाथों से ठीक किया फिर खुद जमीन पर बैठ गई. फुटेज में राज्य मंत्री का मानवीय चेहरा नजर आ रहा है. उन्होंने सभी के समुचित इलाज के लिए अस्पताल के सिविल सर्जन को आवश्यक दिशा निर्देश दिए. कोदो की रोटी खाने से 6 लोग बीमार सतना जिले के सिंहपुर कस्बे के ग्राम खनगढ़ में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक ही परिवार के 6 लोग अचानक उल्टी-दस्त का शिकार हो गए. परिजन उन्हें तत्काल उपचार के लिए नागौद के सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे. जहां से उनकी हालत गंभीर होने पर उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला चिकित्सालय सतना रेफर कर दिया गया. बीमार हुए सदस्यों का नाम रामबेटू कोल (उम्र 45 वर्ष), फगुना कोल (65 वर्ष), चुनवदा कोल (उम्र 55 वर्ष), सुनीता कोल (उम्र 15 वर्ष), भंडारी कोल (उम्र 17 वर्ष) सहित एक मासूम कल्लू कोल (उम्र 8 वर्ष) है. बीमार लोगों से मिलने अस्पताल पहुंची प्रतिमा बागरी सभी पीड़ित परिवार को जिला चिकित्सालय में उपचार के लिए भर्ती कराया गया. खबर मिलने पर पीड़ित परिवार को देखने के लिए मध्य प्रदेश शासन की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी जिला अस्पताल पहुंची और सभी मरीजों का हाल जाना. इसके साथ ही जिला अस्पताल के सिविल सर्जन एवं डॉक्टर को मरीज के समुचित इलाज के लिए आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए है. इस दौरान राज्य मंत्री का अनोखा रूप सामने आया, जिसे देख हर किसी ने उनकी तारीफ की. राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने मरीज के बिस्तर पर अपने हाथों से चादर बिछाई. मरीज के परिजनों को भी राज्य मंत्री ने आश्वासन दिया कि आपको समुचित इलाज मिलेगा, चिंता की कोई बात नहीं. डॉक्टर इलाज कर रहे हैं सभी लोग जल्द ठीक हो जाएंगे. राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा कि, ''ग्राम खनगढ़ में कुछ लोगों ने कोदो की रोटी खा ली थी, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई थी. सभी को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया जहां उनका इलाज चल रहा है. डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए गए हैं.'' जिला चिकित्सालय सतना के सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह ने बताया कि, ''कोदो की रोटी खाने के बाद कुछ लोगों को बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया था. सभी का बेहतर से बेहतर इलाज किया जा रहा है. सभी मरीजों को जल्द डिस्चार्ज कर दिया जाएगा.''

31 जनवरी तक ही माओवादी समर्पण विकल्प, फरवरी से सख्त कार्रवाई, योजनाओं का लाभ बंद

रायपुर  माओवादी हिंसा उन्मूलन के लिए नए साल में सरकार और कड़ा रुख अपनाने जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार ने जनवरी, फरवरी और मार्च के लिए रणनीति तय की है। इसके तहत माओवादियों को 31 जनवरी 2026 तक ही समर्पण का विकल्प मिलेगा और वे पुनर्वास योजना का लाभ ले सकेंगे। माओवादी हिंसा उन्मूलन के लिए नए साल में बदलेगी रणनीति समर्पित मओवादियों को आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025 के तहत नकद प्रोत्साहन, प्रशिक्षण, नौकरी व स्वरोजगार के लिए सब्सिडी और आवास की सुविधा दी जा रही है। सुरक्षा तंत्र से जुड़े राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फरवरी से माओवादियों के लिए चल रही आत्मसमर्पण की नीति समाप्त कर दी जाएगी। इसके बाद सुरक्षा बलों द्वारा माओवादियों के ठिकानों में घुसकर उन्हें चारों ओर से घेरने और निर्णायक कार्रवाई करने की रणनीति पर अमल किया जाएगा। साझा रणनीति तय केंद्र और राज्य सरकार ने जनवरी, फरवरी और मार्च के लिए साझा रणनीति तय की है। जनवरी के बाद माओवादियों को उनकी मांद के भीतर ही घुसकर गोली का जवाब गोली से दिया जाएगा। मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश को माओवादी हिंसा से मुक्त करने के लिए नरेन्द्र मोदी, अमित शाह ने संकल्प लिया है। प्रदेश में विष्णु देव साय और विजय शर्मा इस मुहिम में निरंतर लगे हुए हैं। माओवादी अधिक संख्या में मुख्य धारा में लौटें, इसके लिए लगातार उन्हें आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अभी आत्मसमर्पित माओवादियों को आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025 के तहत नकद प्रोत्साहन, प्रशिक्षण, नौकरी व स्वरोजगार के लिए सब्सिडी और आवास की सुविधा दी जा रही है। कर्रेगुट्टा पहाड़ी में हुए आपरेशन की तर्ज पर बनी रणनीति सुरक्षा तंत्र से जुड़े राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक फरवरी से माओवादियों के लिए चल रही आत्मसमर्पण की नीति पर विराम लगाकर माओवादियों के खिलाफ लड़ाई तेज होगी। सुरक्षा बलों द्वारा माओवादियों के ठिकानों में घुसकर उन्हें चारों ओर से घेरने और निर्णायक कार्रवाई करने की रणनीति पर अमल किया जाएगा। सुरक्षा बलों ने माओवादियों के सबसे सुरक्षित गढ़ को ध्वस्त किया था बीजापुर जिले की कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर जिस तरह सुरक्षा बल के जवानों ने माओवादियों के सबसे सुरक्षित गढ़ को ध्वस्त किया था, ठीक उसी तरह अन्य ठिकानों को भी ध्वस्त किया जाएगा। इसके लिए राज्य से लगे पड़ोसी राज्यों से सुरक्षा बलों की मदद ली जाएगी। जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी बस्तर में उतारा जा सकता है। इस व्यापक अभियान को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहमति बन चुकी है। बता दें कि मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश को माओवादी हिंसा से मुक्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह ने संकल्प लिया है। 'छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं को नहीं मारना चाहते थे माओवादी' झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर माओवादी हमले को 12 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन हाल के दिनों में भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच बयानबाजी के बाद यह मामला सुर्खियों में है। 17 अक्टूबर को समर्पण करने वाले पूर्व माओवादी केंद्रीय समिति सदस्य रूपेश उर्फ सतीश ने दावा किया कि झीरम हमला किसी राजनीतिक साजिश के तहत सुनियोजित नहीं था। यह टीसीओसी (टैक्टिकल काउंटर आफेंसिव कैंपेन) के तहत पुलिस बल को निशाना बनाने की योजना थी, लेकिन दुर्भाग्यवश इसकी चपेट में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा आ गई। माओवादियों ने कवासी लखमा को छोड़ दिया गया था रूपेश ने बताया कि स्थानीय पहचान के कारण कवासी लखमा को छोड़ दिया गया था। लखमा वर्तमान में कांग्रेस से विधायक हैं। बता दें कि 25 मई 2013 को माओवादियों ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, नंद कुमारपटेल व विद्याचरण शुक्ल सहित 30 से अधिक लोगों की हत्या कर दी थी। उन्होंने कहा कि भाकपा (माओवादी) की पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति की बैठकों में इस हमले को संगठन की बड़ी रणनीतिक भूल के रूप में स्वीकार किया गया था। पार्टी ने इस संबंध में पत्र जारी कर सार्वजनिक रूप से अपनी गलती भी मानी थी।  माओवादी आंदोलन सीमित दायरे में सिमट गया रूपेश ने कहा कि माओवादी आंदोलन सीमित दायरे में सिमट गया और जनता का भरोसा धीरे-धीरे टूटता चला गया। बस्तर में ईसाई मिशनरियों द्वारा बड़े पैमाने पर मतांतरण के बावजूद माओवादियों की चुप्पी के सवाल परउन्होंने कहा कि इससे हमें नुकसान ही हुआ, क्योंकि लोग चर्च से जुड़ जाते हैं और संगठन में नहीं आते हैं। शव पर हथियार लेकर नृत्य करना था गलत कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा के शव पर हथियार लेकर नृत्य करने को लेकर रूपेश ने कहा कि मैं भी इसे व्यक्तिगत रूप से बहुत गलत मानता हूं। शीर्ष माओवादी देवजी के अब तक समर्पण नहीं करने पर कहा कि वह केंद्रीय पोलित ब्यूरो सदस्य है। वह मानता है कि संघर्ष को मरने नहीं देना है, भले ही हम मर जाएं।      

धर्मांतरण कानून पर कांग्रेस का सवाल: पूर्ण बहुमत के बाद भी BJP नाकाम, अराजक तत्वों को मिल रहा संरक्षण

रायपुर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने आज कानून व्यवस्था और सर्व समाज द्वारा किए गए बंद को लेकर जिला कांग्रेस भवन प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान रायपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष कुमार मेनन, ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय, पूर्व महापौर प्रमोद दुबे सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. प्रेस वार्ता में नेताओं ने राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए भाजपा और आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि जब बहुमत में नहीं थे तब धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने की बात करते थे. अब जब बहुमत में हैं तो धर्मांतरण को लेकर कानून क्यों नहीं बना रहे हैं ? भाजपा जानबूझकर कानून नहीं बना रही है, ताकि धर्मांतरण का मुद्दा जारी रहे. उन्होंने सरकार पर अशांति फैलाने वालों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि थाने में लोगों के साथ मारपीट हो रही. जो लोग बंद के नाम पर तोड़फोड़ कर रहे ,उन्हें सरकार का संरक्षण प्राप्त है. पूर्व महापौर प्रमोद दुबे ने भी राज्य की कानून व्यवस्था पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सर्व समाज के नाम पर बंद का आह्वान किया गया, लेकिन किसी समाज का मुखिया नजर नहीं आया. चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा बंद को समर्थन देने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि वह पिट्ठू की तरह काम कर रहा है. प्रमोद दुबे ने मॉल में हुई घटना की निंदा करते हुए पूछा कि “बंद कराने वाले कौन थे, भाजपा नेता और उनके साथ विश्व हिंदू परिषद के लोग !” उन्होंने कहा कि जब हर जगह भाजपा की सरकार है तो धर्मांतरण को लेकर स्पष्ट कानून क्यों नहीं बना पा रहे हैं. पूर्व महापौर प्रमोद दुबे ने आगे कहा कि कभी शांति का टापू कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में अराजकता का माहौल बन गया है. उन्होंने इसे पहला ऐसा बंद बताया, जिसमें कहीं भी ज्ञापन नहीं सौंपा गया. कांग्रेस ने सरकार से धर्मांतरण से जुड़े मामलों के आंकड़े सार्वजनिक करने और इस पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग दोहराई. साथ ही सवाल उठाया कि क्या अब समाज के लोग स्वतंत्र रूप से अपने त्योहार भी नहीं मना सकते. वहीं जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्री कुमार मेनन ने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित देश में जिस तरह की व्यवस्था देखने को मिल रही है, वह तालिबान शासन जैसी प्रतीत होती है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का अपने अनुषांगिक संगठनों पर कोई नियंत्रण नहीं है. कांकेर की घटना और उसके बाद क्रिसमस मनाने वाले लोगों के साथ किया गया व्यवहार शर्मनाक है. मेनन ने कहा कि छत्तीसगढ़ का मजदूर जब मजदूरी करने बाहर जाता है तो उसे मॉब लिंचिंग का शिकार बनाया जाता है, और इस पर भाजपा व आरएसएस के लोग चुप रहते हैं. उन्होंने भाजपा पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि दुर्ग में धर्मांतरण के आरोप में नन की गिरफ्तारी हुई, उसके बाद जो हुआ , तो यही बीजेपी के लोग छुड़ाने आए थे. अब फिर से यही सब हो रहा है.