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उदयपुर गैंगरेप मामला: चलती कार में वारदात, आईटी कंपनी के CEO समेत 3 की गिरफ्तारी

उदयपुर राजस्थान के उदयपुर में एक निजी आईटी कंपनी की मैनेजर के साथ कथित कॉर्पोरेट गैंगरेप मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इस सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए जिला पुलिस अधीक्षक योगेश गोयल ने बताया कि जांच की ज़िम्मेदारी एडिशनल एसपी माधुरी वर्मा को सौंपी गई है. एसपी गोयल के अनुसार, पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और एफआईआर के आधार पर कार्रवाई की गई. मेडिकल जांच में चोट के निशान पाए गए हैं, जिससे प्रथम दृष्टया गैंगरेप की पुष्टि होती दिखाई दे रही है. पुलिस को जांच में एक अहम सुराग भी हाथ लगा है. आरोपियों की कार में लगे डैशकैम के ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, जिसमें घटना के दौरान की आवाजें कैद होने की बात सामने आई है.  तीन आरोपी अरेस्ट पुलिस ने जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें आईटी कंपनी का सीईओ जितेश, उसकी सहकर्मी महिला एग्जीक्यूटिव हेड शिल्पा और उसका पति गौरव शामिल हैं. तीनों को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है. आरोपी सीईओ जितेश सिसौदिया आईआईटीयन है. पुलिस के मुताबिक, 20 दिसंबर को कंपनी के सीईओ की बर्थडे और न्यू ईयर पार्टी उदयपुर के शोभागपुरा इलाके के एक होटल में आयोजित की गई थी. पीड़िता रात करीब 9 बजे पार्टी में पहुंची थी, जो देर रात 1:30 बजे तक चली. पार्टी के बाद जब पीड़िता की तबीयत बिगड़ने लगी तो कुछ लोग उन्हें घर छोड़ने की बात कर रहे थे, लेकिन महिला एग्जीक्यूटिव हेड ने उन्हें आफ्टर पार्टी के लिए साथ चलने का प्रस्ताव दिया. गैंगरेप के बाद पीड़िता को घर छोड़ा गया इसके बाद रात करीब 1:45 बजे पीड़िता को कार में बैठाया गया, जिसमें पहले से सीईओ और महिला एग्जीक्यूटिव का पति मौजूद था. रास्ते में एक दुकान से स्मोकिंग सामग्री खरीदी गई और पीड़िता को भी स्मोक कराया गया, जिससे वह बेहोशी की हालत में चली गई. होश में आने पर पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके साथ छेड़छाड़ और सामूहिक बलात्कार किया गया. सुबह करीब 5 बजे पीड़िता को घर छोड़ा गया. होश आने पर उसे अपने कान की बाली, मोज़े और अंडरगारमेंट्स गायब मिले और निजी अंगों पर चोट के निशान थे. बाद में जब कार के डैशकैम की जांच की गई तो घटना से जुड़े अहम सबूत रिकॉर्डिंग में पाए गए.

झांसी मंडल में पहली बार एफपीओ के उत्पाद को मिला एगमार्क

योगी सरकार की कोशिशों से झांसी के एफपीओ को मिली सफलता, खाद्यान्न और मसालों को मिला एगमार्क झांसी मंडल में पहली बार एफपीओ के उत्पाद को मिला एगमार्क सरकार की योजनाओं से बुंदेलखंड में एग्रो बिजनेस का बढ़ रहा दायरा झांसी  प्रदेश सरकार बुंदेलखंड में एग्रो प्रोडक्शन और एग्रो बिजनेस को बढ़ावा देने की ओर निरंतर प्रयासरत है। योगी सरकार की मदद से झांसी के एक एफपीओ को दो श्रेणी के उत्पादों के लिए एगमार्क हासिल करने में सफलता मिली है। एगमार्क भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय द्वारा प्रदान किया जाता है। एगमार्क खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को सुनिश्चित करता है। झांसी के चिरगांव देहात स्थित श्री खाटू श्याम जी फॉर्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड को खाद्यान्न और मसालों के उत्पादों के लिए एगमार्क प्रदान किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार विभाग ने एफपीओ के आवेदन की प्रक्रिया में मदद की और विभाग के माध्यम से एगमार्क का आवेदन भारत सरकार के विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय को भेजा गया। निदेशालय से झांसी के एफपीओ को दो श्रेणियों के उत्पादों – खाद्यान्न और मसालों को एगमार्क प्रदान किया गया है। झांसी मंडल में पहली बार किसी एफपीओ के उत्पाद को एगमार्क प्रदान किया गया है। श्री खाटू श्याम जी फॉर्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की डायरेक्टर पूजा राजपूत ने बताया कि एफपीओ से अभी तक लगभग 300 किसान जुड़े हैं। वर्तमान समय में हल्दी, धनिया, मिर्ची और पोहा तैयार किया जा रहा है। आने वाले समय में अन्य उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे। मकसद है कि लोगों को गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो और किसानों की आमदनी में इजाफा हो। झांसी के ज्येष्ठ कृषि विपणन निरीक्षक प्रखर कुमार ने बताया कि एगमार्क से उत्पाद की गुणवत्ता प्रमाणित होती है। इस एगमार्क के उपयोग की निर्धारित प्रक्रिया होती है, जिससे उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।

रायपुर–भिलाई: सेवा और विकास के दो साल पूरे, विशेष कार्यक्रम में दिखी उपलब्धियों की झलक

रायपुर : सेवा और विकास के दो वर्ष पूर्ण होने पर भिलाई में विशेष कार्यक्रम का हुआ आयोजन रायपुर सेवा और विकास के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जनसंपर्क विभाग द्वारा नेहरू नगर पार्क, जोन क्रमांक 1 भिलाई में एक दिवसीय विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, युवाओं एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में रेडियो जॉकी (आरजे) अनिमेश जैन एवं उनकी टीम ने रोचक गतिविधियों का संचालन किया, जिससे पूरे आयोजन में उत्साह और जीवंतता बनी रही।  सेवा और विकास के दो वर्ष पूर्ण होने पर भिलाई में विशेष कार्यक्रम का हुआ आयोजन        मंच पर स्थानीय कलाकारों द्वारा नृत्य, गायन और कविता पाठ जैसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण शासकीय योजनाओं पर आधारित क्विज एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता रही। आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में  प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।         आयोजित प्रश्नोत्तरी में महतारी वंदन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कृषि से जुड़ी प्रमुख योजनाओं पर आधारित प्रश्न लोगों से पूछे गए एवं उन्हें पुरस्कार भी दिए गए। सुशासन तिहार के अवसर पर विभिन्न शासकीय योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि इन योजनाओं ने उनके जीवन में सकारात्मक और वास्तविक बदलाव लाए हैं।        इस कार्यक्रम का उद्देश्य आम जनता को सुशासन के महत्व से जोड़ना, शासन की योजनाओं की जानकारी देना तथा स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना रहा। प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को स्थानीय दुकानों एवं स्टॉल्स की ओर से डिस्काउंट वाउचर और कूपन भी प्रदान किए गए। आयोजन के माध्यम से जनसंपर्क विभाग ने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को सरल और मनोरंजक तरीके से आमजन तक पहुँचाने का सफल प्रयास किया।

नकल पर नकेल: जीवाजी विश्वविद्यालय का बड़ा फैसला, प्रैक्टिकल परीक्षा की होगी अनिवार्य वीडियोग्राफी

ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में प्रायोगिक परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से अनियमितताओं और फर्जीवाड़े की शिकायतें सामने आ रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जीवाजी विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक अहम निर्णय लिया है। अब विश्वविद्यालय से संबद्ध अंचल के सभी महाविद्यालयों में प्रायोगिक परीक्षाएं सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में आयोजित की जाएंगी। नए निर्देशों के तहत प्रायोगिक परीक्षाओं के दौरान छात्रों की पूरी परीक्षा प्रक्रिया कैमरे में रिकॉर्ड की जाएगी। इतना ही नहीं, परीक्षकों की उपस्थिति, प्रश्न पूछने की प्रक्रिया और मूल्यांकन से जुड़ी प्रत्येक गतिविधि भी रिकॉर्डिंग के दायरे में रहेगी। विश्वविद्यालय अधिकारियों का कहना है कि इससे परीक्षा के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े और मनमानी पर प्रभावी रोक लग सकेगी।   उडनदस्ता भी करेगा वीडियोग्राफी परीक्षा अवधि में निरीक्षण के लिए जाने वाले उड़नदस्तों को भी अपनी पूरी कार्रवाई आवश्यकतानुसार कैमरे में रिकॉर्ड करनी होगी। उड़नदस्ता जब किसी परीक्षा केंद्र का निरीक्षण करेगा, उस दौरान की गई जांच, बातचीत और व्यवस्थाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निरीक्षण प्रक्रिया भी निष्पक्ष और पारदर्शी रहे। रिकार्डिंग नहीं तो अंक नहीं महत्वपूर्ण बात यह है कि अब छात्रों को दिए जाने वाले प्रायोगिक अंकों को भी सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग के आधार पर ही मान्यता दी जाएगी। यदि किसी परीक्षा या मूल्यांकन को लेकर विवाद उत्पन्न होता है, तो रिकॉर्डिंग को प्रमाण के रूप में उपयोग किया जाएगा। वहीं अगर किसी कालेज से वीडियो प्राप्त नहीं होती है तो उस कालेज के छात्रों के अंक अपड़ेट नहीं किए जाएंगे। जीवाजी विश्वविद्यालय प्रशासन इस व्यवस्था को अपने अधीनस्थ अंचल के 350 से अधिक शासकीय और अशासकीय महाविद्यालयों में लागू कर रहा है। कथन: ‘प्रायोगिक परीक्षाओं को लेकर कई बार गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं ऐसे में छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए वीडियो रिकार्डिंग अनिवार्य की जा रही है।’ -राजीव मिश्रा, कुलसचिव, जेयू

मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार कोई बिजली यूनिट लगातार 450 दिन से कर रही उत्पादन

भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) के अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई (ATPS) की 210 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 5 ने बड़ा कमाल दिखाते हुए लगातार 450 दिन बिजली उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया। चचाई की यूनिट नंबर 5 प्रदेश के इतिहास में ऐसी प्रथम विद्युत उत्पादन यूनिट है जो लगातार 450 दिनों से संचालित है। यह यूनिट 1 अक्टूबर 2024 से निरंतर रूप से विद्युत उत्पादन कर रही है। यूनिट ने गत माह अक्टूबर की 4 तारीख को लगातार 365 दिन (एक वर्ष) तक निर्बाध विद्युत उत्पादन करने का तमगा हासिल किया था। यूनिट 5 के निर्बाध संचालन से प्रदेश के विद्युत ग्रिड को स्थिरता मिली और घरेलू व औद्योगिक उपभोक्ताओं को सुचारु विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हुई। इस उपलब्धि से न केवल म.प्र. पावर जनरेशन कंपनी की साख मजबूत हुई बल्कि यह प्रदेश की अन्य ताप विद्युत इकाइयों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बनी है। ऊर्जा मंत्री ने ऐतिहासिक सफलता पर दी बधाई अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की यूनिट नंबर 5 की इस सफलता व उपलब्ध‍ि पर ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई व MPPGCL के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह हर्ष ने व्यक्त करते हुए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्ध‍ि अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई के यूनिट नंबर के ऑपरेशन व मेंटेनेंस अभियंताओं व कार्मिकों की लगन, मेहनत व समर्पण का सबसे बड़ा उदाहरण है। उच्च स्तर की दक्षता, विश्वसनीयता और तकनीकी उत्कृष्टता दर्शाते आंकड़े निरंतर संचालन की इस असाधारण अवधि के दौरान यूनिट नंबर 5 ने सराहनीय प्रदर्शन करते हुए 98.48% का प्लांट अवेलेबिलिटी फैक्टर (PAF), 94.91% का प्लांट लोड फैक्टर (PLF) प्राप्त किया है और 9.29% की सहायक विद्युत खपत (APC) बनाए रखी। ये परिचालन सूचकांक स्पष्ट रूप से इस अवधि के दौरान संयंत्र टीम द्वारा उच्च स्तर की दक्षता, विश्वसनीयता और तकनीकी उत्कृष्टता को बनाये रखा गया। चचाई के अभियंताओं व कार्मिकों ने दिखाया कमाल पावर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि सामूहिक प्रयास, अनुशासित कार्यशैली व उच्च तकनीकी दक्षता से अमरकंटक ताप विद्युत गृह की यूनिट नंबर 5 जैसे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। चुनौतीपूर्ण लक्ष्य लगातार एक वर्ष तक बिना रुकावट संचालन किसी भी ताप विद्युत इकाई के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसके लिए बॉयलर, टरबाइन, जनरेटर एवं सहायक प्रणालियों का सटीक रखरखाव, निरंतर निगरानी व तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान जरूरी होता है। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) की समर्पित टीम के निरंतर परिश्रम व तकनीकी विशेषज्ञता का परिणाम है।  

ठंड से कांपा बिहार: घना कोहरा, कोल्ड वेव के बीच 29 दिसंबर तक ऑरेंज अलर्ट

पटना बिहार इस समय कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चपेट में है। मौसम विभाग ने शीतलहर और घने कोहरे को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और राज्य को 29 दिसंबर तक ठंड से राहत मिलने की संभावना नहीं है। पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बर्फबारी और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का सीधा असर बिहार के मैदानी जिलों में देखा जा रहा है। बर्फीली पछुआ हवाओं के कारण ठंड बढ़ गई है। हालात की गंभीरता को देखते हुए मौसम विभाग ने पूरे राज्य के लिए शीतलहर और घने कोहरे का ऑरेंज अलर्ट  जारी किया है, जो कम से कम अगले चार से पांच दिनों तक प्रभावी रहेगा। बिहार में कोल्ड डे जैसे हालात मौसम विभाग के अनुसार, 29 दिसंबर तक राज्य के कई हिस्सों में भीषण शीतलहर का दौर जारी रहने की संभावना है। बीते एक सप्ताह से बिहार में ‘कोल्ड-डे' जैसी स्थिति बनी हुई है। लगातार धूप नहीं निकलने के कारण दिन के तापमान में असामान्य गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे दिन में भी अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ रहा है। तापमान 10 डिग्री तक पहुंचा विशेषज्ञों का मानना है कि 30 दिसंबर के बाद ही मौसम में हल्का सुधार संभव है, उससे पहले राहत की उम्मीद कम है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में बिहार का औसत न्यूनतम तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजधानी पटना में न्यूनतम तापमान गिरकर 11 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि कई जिलों में दिन का तापमान भी 9 से 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। इसी कारण ‘शीत दिवस' की स्थिति लोगों के लिए अधिक परेशानी का कारण बन रही है।   29 दिसंबर तक शीत दिवस की स्थिति बने रहने की संभावना मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जब तक हवाओं की दिशा में बदलाव नहीं होता और पहाड़ी इलाकों से आने वाली बर्फीली हवाओं की तीव्रता कम नहीं होती, तब तक बिहार को इस कंपकंपाती ठंड से राहत मिलना मुश्किल है। विभाग ने बताया कि उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी का सीधा प्रभाव बिहार पर पड़ रहा है। 29 दिसंबर तक शीत दिवस की स्थिति बने रहने और न्यूनतम व अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे रहने का अनुमान है। इसके अलावा अगले चार से पांच दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में सुबह के समय मध्यम से घना कोहरा छाए रहने की संभावना है, जिससे दृश्यता काफी कम रह सकती है।

चुनावी नियम सख्त: दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवार होंगे अयोग्य

रांची झारखंड में आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग के अनुसार नगर निकाय चुनाव में दो से अधिक बच्चे वाले उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। प्रत्येक प्रत्याशी को नामांकन के समय शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा, जिसमें यह घोषणा करनी होगी कि निर्धारित कट-ऑफ तिथि तक उनके दो से अधिक बच्चे नहीं हैं। इस प्रावधान का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों को निर्देश जारी कर दिए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद ने बताया कि इस संबंध में नगर विकास विभाग द्वारा पूर्व में जारी पत्र को आधार मानते हुए जिलों को कारर्वाई करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नामांकन के दौरान शपथ पत्र की जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है। चुनावी तैयारियों की जानकारी देते हुए आयोग के सचिव ने बताया कि सभी जिलों में वाडरं के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इस संबंध में आयोग को लगातार रिपोर्ट प्राप्त हो रही हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही चुनाव की अद्यतन तैयारियों की समीक्षा के लिए सभी जिलों के उपायुक्त (डीसी) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर कोई कमी न रह जाए। इस बीच वाडर् आरक्षण को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद आयोग ने एक अहम स्पष्टीकरण भी जारी किया है। यदि किसी प्रत्याशी को आरक्षण के कारण अपने वाडर् से चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिल पा रहा है, तो उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है। वह नगर निकाय के किसी अन्य वाडर् से भी चुनाव लड़ सकता है, बशर्ते उस वाडर् में लागू आरक्षण नियमों का पालन किया जाए। प्रसाद ने बताया कि महापौर, नगर परिषद अध्यक्ष और वाडर् सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ने वाले सभी अभ्यर्थियों के लिए योग्यता संबंधी दिशा-निर्देश तय कर दिए गए हैं। इसके तहत प्रत्याशी का संबंधित नगर निकाय का मतदाता होना अनिवार्य होगा। हालांकि, नगर निकाय की मतदाता सूची में शामिल कोई भी व्यक्ति उस निकाय के किसी भी वाडर् से चुनाव लड़ सकता है, लेकिन आरक्षण नियमों का अनुपालन जरूरी होगा। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार नगर निकाय चुनाव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और लक्ष्य फरवरी महीने में शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराना है। आयोग ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा भी की जा सकती है।  

मध्यप्रदेश बना फिल्मियों का पसंदीदा डेस्टिनेशन, तीन साल में 200 से अधिक साउथ फिल्में शूट

 भोपाल  बदलते दौर में सिनेमा में कई बदलाव आए हैं। न केवल फिल्मों की समय अवधि कम हुई है, बल्कि बड़ी स्क्रीन से निकलकर सिनेमा ओटीटी (OTT) के रूप में दर्शकों के पास पहुंच गया है। फिल्मों की करिश्माई दुनिया के बजाय दर्शकों ने असल जिंदगी को चुना और पसंद किया। इन सबके बीच सिनेमा फिर भी एक चीज तलाश करता रहा, वह है वास्तविक सेट। फिल्म निर्माता-निर्देशकों की यह तलाश खत्म हुई मध्य प्रदेश में। यहां के नदी, पहाड़, जंगल, ऐतिहासिक स्थल और खासतौर पर सिनेमा फ्रेंडली लोग, सिनेमा को मध्य प्रदेश खींच लाए। अब छोटे कस्बों में भी फिल्मों की हो रही शूटिंग कुछ दशकों पहले जो फिल्में मध्य प्रदेश के बड़े शहरों जैसे भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर में शूट हुआ करती थीं, वो अब छोटे कस्बों जैसे महेश्वर, चंदेरी, ओरछा से होती हुई सीहोर जिले के महोदिया, बमुलिया और धमनखेड़ा, छिंदवाड़ा जिले के चिमटीपुर जैसे गांवों तक पहुंच गई हैं। नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर मप्र के इन गंतव्यों ने दक्षिण भारत की फिल्मों को सबसे ज्यादा आकर्षित किया है। इससे शूटिंग के दिन भी बढ़े हैं और सिनेमा पूरे प्रदेश में फैल गया है। तीन सालों में दो सौ से अधिक छोटे-बड़े प्रोजेक्ट शूट हुए शूटिंग हब बन चुके मध्य प्रदेश में पिछले तीन सालों (वर्ष 2023 से 2025) में दो सौ से अधिक छोटे-बड़े प्रोजेक्ट शूट हुए हैं, जिनमें 20 से भी ज्यादा साउथ की बड़े बजट की फिल्में हैं। राज्य ने अपनी विविध भौगोलिक स्थिति, ऐतिहासिक विरासत और फिल्म अनुकूल प्रशासनिक नीतियों के कारण दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग (तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम) को अपनी ओर आकर्षित किया है। सरकार की फिल्म पर्यटन नीति 2020 ने काम आसान किया मप्र सरकार की फिल्म पर्यटन नीति 2020 ने निर्माताओं का काम आसान किया। फरवरी 2025 में अनुमोदित नई फिल्म पर्यटन संवर्धन नीति ने वित्तीय प्रोत्साहनों की सीमा को बढ़ाकर दस करोड़ रुपये तक कर दिया है। इस नीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें दक्षिण भारतीय भाषाओं की फिल्मों के लिए दस प्रतिशत अतिरिक्त वित्तीय लाभ प्रस्तावित किया गया है। फिल्म क्रू के ठहरने पर 40 प्रतिशत की छूट वहीं सिगंल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को लोक सेवा गारंटी अधिनियम में शामिल किया है। यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि निर्माताओं को 15 कार्य दिवस के भीतर सभी आवश्यक अनमुतियां प्राप्त हो जाएं। इसके अतिरिक्त मप्र पर्यटन के होटल में फिल्म क्रू के ठहरने पर 40 प्रतिशत की सीधी छूट प्रदान की जाती है। यह प्रविधान दक्षिण भारतीय फिल्मों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि उनकी निर्माण इकाईयां बहुत बड़ी होती हैं, जिनमें तीन सौ से अधिक सदस्य शामिल होते हैं। पिछले तीन सालों में शूट हुए साउथ के प्रमुख प्रोजक्ट     पेन्नियन सेल्वन (1 और 2)     इंडियन- 2     तमिलरावणन     कन्नप्पा     अखंडा     नरकासुर     कल्लू कंपाउंडर     भार्गवी     गंन्स एंड गैंग     माई हीरो इन फिल्मों की शूटिंग जारी     भैरवी     टारगेट     ललिता     आणु बुलेट रा     मध्य प्रदेश एक प्रो-एक्टिव स्टेट है फिल्म के लिए। यहां आने वाले फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग खुद यह मानते हैं कि हम जो बोलते हैं, वह करके दिखाते भी हैं। मप्र सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सब्सिडी न केवल फिल्म की लागत कम करती है, बल्कि निर्माताओं को राज्य के अनछुए स्थानों पर शूटिंग करने के लिए प्रोत्साहित भी करती है। इससे राज्य के पर्यटन स्थलों को भी बढ़ावा मिल रहा है।     – डॉ. अभय अरविंद बेडेकर, अपर प्रबंध संचालक, मप्र पर्यटन बोर्ड।  

Bakri Palan Yojana: MP सरकार ने पेश की योजना, बकरी पालन से मिलेगी अच्छी आमदनी

भोपाल  बकरी पालन योजना: मध्य प्रदेश के गांवों में खेती के साथ-साथ पशुपालन हमेशा से कमाई का मजबूत जरिया रहा है. इनमें भी बकरी पालन सबसे आसान, कम खर्चीला और जल्दी मुनाफा देने वाला काम माना जाता है. यही वजह है कि आज प्रदेश के हजारों परिवार बकरी पालन से अच्छी आमदनी कर रहे हैं. अब राज्य सरकार की बकरी पालन योजना ने इस काम को और आसान बना दिया है. क्या है MP सरकार की बकरी पालन योजना? मध्य प्रदेश सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की इस योजना का मकसद छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है. योजना के तहत 10 मादा + 1 नर बकरी (10+1 यूनिट) लगाने पर सरकार वित्तीय सहायता देती है. इस यूनिट की कुल लागत करीब ₹77,000 से ₹77,456 तय की गई है. सामान्य वर्ग को 40% तक सब्सिडी SC/ST वर्ग को 60% तक सब्सिडी, बाकी राशि बैंक लोन से पूरी की जाती है. दो तरह की योजनाएं, किसानों को सीधा फायदा पशुपालन विभाग के अतिरिक्त उपसंचालक डॉ. जितेंद्र कुमार गुप्ता के मुताबिक सरकार दो अलग-अलग योजनाएं चला रही है. नर बकरी आपूर्ति योजना इस योजना का उद्देश्य प्रदेश में बकरी की नस्ल सुधार करना है. इसके तहत जमुनापारी, बारबरी और सिरोही जैसी उन्नत नस्लों के नर बकरे दिए जाते हैं, जिससे दूध और मांस उत्पादन बढ़ता है. बकरी इकाई स्थापना योजना इस योजना में 10 मादा और 1 नर बकरी की यूनिट पर सब्सिडी और बैंक लोन दोनों की सुविधा मिलती है. यह योजना खास तौर पर दूध और मांस उत्पादन बढ़ाने के लिए है. आवेदन कैसे करें? योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक व्यक्ति अपने नजदीकी पशुपालन एवं डेयरी विभाग या पशु चिकित्सा संस्था से संपर्क कर सकते हैं. आवेदन के बाद बैंक से लोन स्वीकृत होता है और सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर की जाती है. ग्राम सभा और जनपद पंचायत की स्वीकृति जरूरी होती है. कई मामलों में विभाग की ओर से ट्रेनिंग भी दी जाती है. क्यों फायदेमंद है बकरी पालन? विशेषज्ञों का मानना है कि बकरी पालन कम पूंजी में शुरू होने वाला ऐसा व्यवसाय है, जो नियमित आमदनी देता है. सरकार की इस योजना से गांव के किसान और युवा अब नौकरी के बजाय स्वरोजगार की राह पर तेजी से बढ़ रहे हैं.

इमिग्रेशन और कस्टम की सुविधा के बावजूद Raja Bhoj Airport पर इंटरनेशनल उड़ानें नहीं, घरेलू उड़ानें सीमित

भोपाल  राजा भोज एयरपोर्ट (Raja Bhoj Airport) पर इमिग्रेशन जांच पोस्ट की स्थापना के एक साल बाद भी किसी भी रूट पर इंटरनेशनल उड़ान (International flights) शुरू नहीं हो सकी है। हमारे एयरपोर्ट को कस्टम एयरपोर्ट का दर्जा भी मिल चुका है पर वर्ष 2025 में किसी भी एयरलाइंस कंपनी ने विदेशी रूट पर स्लॉट लेने में रुचि नहीं दिखाई है। एयरपोर्ट अथॉरिटी (Airport Authority) को उम्मीद है कि वर्ष 2026 में कम से कम एक इंटरनेशनल उड़ान जरूर शुरू होगी। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने करीब एक साल पहले ग्रीन एवं रेड चैनल तथा इमिग्रेशन ई-गेट की स्थापना की थी। इसका उपयोग इंटरनेशनल रूट से आने वाले यात्री कर सकते हैं। अभी तक इसका उपयोग हज यात्रा के समय हुआ है। भोपाल में नॉन शेड्यूल इंटरनेशनल उड़ानें आने लगी हैं पिछले कुछ समय से भोपाल में नॉन शेड्यूल इंटरनेशनल उड़ानें आने लगी हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के समय भी विदेशी उड़ानें आई थीं, तब इसका उपयोग हुआ, लेकिन नियमित उड़ान नहीं होने से इसका पूरा उपयोग नहीं हो रहा है। हाल ही में कस्टम एयरपोर्ट का दर्जा भी मिला है। इससे इंटरनेशनल उड़ानें शुरू होने की बाधाएं दूर हो चुकी हैं। सरकार ने इमिग्रेशन एयरपोर्ट बनाने संबंधी गजट नोटिफिकेशन पहले ही जारी कर दिया था। अब यहां अमला तैनात होना बाकी है। फिलहाल कस्टम अमला उसी समय आता है जब यहां कोई विदेशी उड़ान आती है। इंटरनेशनल विंग तैयार, उपयोग सीमित एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इंटरनेशनल विंग भी विकसित कर लिया गया है। आगमन क्षेत्र में पांच एवं प्रस्थान क्षेत्र में चार काउंटर बनाए गए हैं। इंटरनेशनल मापदंडों के अनुरूप यहां ग्रीन एवं रेड चैनल बनाए गए हैं। कस्टम काउंटर भी बनाए जा चुके हैं। इंटरनेशनल स्तर के एयरपोर्ट के लिए सुरक्षा में तैनात जवानों की संख्या बढ़ाना जरूरी है। अथॉरिटी इसके लिए जवानों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। इस विंग का उपयोग फिलहाल नॉन शेड्यूल इंटरनेशनल उड़ान के आवागमन के दौरान ही हो रहा है। तीन साल से दुबई उड़ान का इंतजार राजधानी में नया एकीकृत टर्मिनल बनने के बाद से इंटरनेशनल उड़ान की मांग की जा रही है। पिछले तीन साल से अथॉरिटी दुबई उड़ान शुरू करने के प्रयास कर कर रही है। इसके लिए जरूरी सुविधाएं जुटाई जा चुकी हैं। अब नए साल में उड़ान शुरू होने की उम्मीद की जा रही है। समिति की बैठकों में कई बार मुद्दा उठा हवाई अड्डा सलाहकार समिति की बैठक में भी इंटरनेशनल उड़ानें शुरू करने पर जोर दिया गया। समिति की बैठकों में कई बार यह मुद्दा उठा। सांसद आलोक शर्मा ने नागरिक उड्डयन मंत्री से मुलाकात कर घरेलू उड़ानों के साथ कम से कम एक दुबई-शारजाह उड़ान शुरू करने का आग्रह किया था, लेकिन वर्ष 2025 में भोपाल के हवाई यात्रियों को निराशा ही हाथ लगी। घरेलू ट्रैफिक बढ़ा पर उड़ानें सीमित भोपाल से घरेलू मोर्चे पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यात्री औसत पांच हजार से अधिक हो चुका है पर इस मान से उड़ानें कम हैं। इंदौर की अपेक्षा भोपाल में कम उड़ानें होने के कारण गोवा, पुणे एवं बेंगलुरु जैसे शहरों के लिए वाया इंदौर जाते हैं। पिछले साल से एयरपोर्ट 24 घंटे खुलने लगा है पर लेटनाइट उड़ान केवल एक है। वर्तमान में भोपाल से दिल्ली, मुंबई के अलावा, हैदराबाद, बेंगलुरु, पुणे, गोवा, रायपुर एवं अहमदाबाद के लिए सीधी उड़ान है। चैन्नई, सूरत, शिर्डी, जयपुर, देहरादून जैसे शहरों तक सीधी उड़ान की मांग लंबे से हो रही है पर उड़ानें शुरू नहीं हो पा रही हैं।     वर्ष 2026 में कम से एक इंटरनेशनल उड़ान शुरू हो सकती है। पिछले तीन साल में घरेलू उड़ानों की संख्या बढ़ी है। यात्री संख्या का लगातार नया रिकॉर्ड बन रहा है। नए साल में नए एयरलाइंस ऑपरेटर भी दस्तक देंगे। हमारे प्रयास जारी हैं।     – रामजी अवस्थी, एयरपोर्ट डॉयरेक्टर