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जबलपुर-भोपाल-इंदौर कॉरिडोर में बनेगी इंडस्ट्रियल टाउनशिप, 2 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

भोपाल  जबलपुर से भोपाल और भोपाल से इंदौर कॉरिडोर (एक्सप्रेस-वे) बनाए जा रहे हैं। 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक के इस प्रोजेक्ट को सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन के तौर पर तैयार कर रही है। कॉरिडोर पर चार बड़े औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। इससे आने वाले समय में दो लाख से अधिक रोजगार सृजित होंगे। कॉरिडोर पर स्किल सिटी बनाई जाएगी इसके साथ इंडस्ट्रियल टाउनशिप भी बनाई जाएगी। प्रदेश के युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए इस कॉरिडोर पर स्किल सिटी बनाई जाएगी। यह जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक से पहले मंत्रियों को दी।  

निःशुल्क चिकित्सा शिविर में 458 मरीजों को मिला परामर्श, 100 औषधीय पौधों का किया गया रोपण

रायपुर सेवा संकल्प अभियान एवं 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर रायगढ़ जिले के शासकीय आयुर्वेद औषधालय बुनगा द्वारा ‘स्वस्थ कल के लिए आयुर्वेद’ थीम पर विभिन्न जनजागरूकता एवं स्वास्थ्य गतिविधियों का आयोजन किया गया।  आयोजन के तहत निःशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा शिविर, काढ़ा वितरण, नशामुक्ति शपथ एवं जागरूकता, स्वच्छता जागरूकता, मितानिन प्रशिक्षण, योग शिविर तथा औषधीय पौधारोपण जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं। छिछोर उमरिया, सिहा, ठाकुरपाली, गोतमा एवं स्कूल पारा बुनगा में लगाए गए चिकित्सा शिविरों में कुल 458 मरीजों को आयुर्वेद चिकित्सा परामर्श प्रदान कर निःशुल्क औषधियों का वितरण किया गया।   शिविरों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, वातरोग, ऋतुचर्या एवं योगाभ्यास सहित विभिन्न आयुर्वेदिक विषयों पर आधारित पाम्पलेट वितरित कर लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी गई। साथ ही आयुर्वेद और प्रकृति के समन्वय का संदेश देते हुए 100 औषधीय पौधों का रोपण किया गया तथा उनके संरक्षण का संकल्प लिया गया। गांव के सामुदायिक भवनों एवं चौक-चौराहों पर आयोजित इन गतिविधियों में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम में डॉ. जागृति पटेल, फार्मासिस्ट भोज मालाकार, वर्षा ठेठवार, योग प्रशिक्षक दुलामनी रजक, सरपंच एवं मितानिनों का सक्रिय योगदान रहा।

जल स्रोतों की स्वच्छता एवं संरक्षण के लिए ग्रामीणों ने लिया सामूहिक संकल्प, जनभागीदारी से जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान

रायपुर  कलेक्टर  विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन में गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले में संचालित सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण, स्वच्छता एवं जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आज जोगी डोंगरी जलाशय के आसपास विशेष स्वच्छता अभियान एवं जल स्रोत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं पंचायत विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उत्साहपूर्वक शामिल हुए। अभियान के दौरान जोगी डोंगरी जलाशय परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। इसमें जलाशय के आसपास बिखरे कचरे एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थों की साफ-सफाई की गई। स्वच्छता अभियान के माध्यम से जल स्रोतों को प्रदूषण से मुक्त रखने और उनके संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को जल स्रोतों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने, जल के अपव्यय को रोकने तथा उपलब्ध जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने के संबंध में जागरूक किया गया। जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ग्रामीणों से अपने गांव के तालाबों, जलाशयों, कुओं एवं अन्य पारंपरिक जल स्रोतों की नियमित साफ-सफाई और देखरेख में सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की गई। जल स्रोतों की स्वच्छता सभी की सामूहिक जिम्मेदारी कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि जल स्रोतों की स्वच्छता एवं संरक्षण केवल विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। ग्रामीणों को प्रेरित किया गया कि वे अपने आसपास के जल स्रोतों को स्वच्छ रखने के साथ ही जल के संरक्षण और सदुपयोग के लिए निरंतर प्रयास करें। ग्रामीणों ने लिया जल संरक्षण का संकल्प अभियान में ग्रामीणजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाते हुए जल स्रोतों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने, पानी की बर्बादी रोकने तथा जल संरक्षण के लिए अपने स्तर पर निरंतर प्रयास करने का सामूहिक संकल्प लिया। ग्रामीणों की सहभागिता ने जल संरक्षण के प्रति सामुदायिक जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया। कार्यक्रम के माध्यम से “जल है तो कल है” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाते हुए जल स्रोतों के संरक्षण, स्वच्छता और जल के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए व्यापक जनभागीदारी का आह्वान किया गया। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जल संरक्षण को जनभागीदारी से जनआंदोलन का स्वरूप देने का संदेश दिया गया।

किसानों के लिए बड़ा मौका: ग्वालियर-दतिया समेत 8 जिलों में शुगरकेन हाईटेक हब के आवेदन दोबारा शुरू

 ग्वालियर  अंचल में आधुनिक खेती और गन्ने की फसल के यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही महत्वाकांक्षी योजना को बड़ा झटका लगा है। मध्य प्रदेश कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय ने ग्वालियर और छिंदवाड़ा, दतिया, धार, बुरहानपुर, जबलपुर, नरसिंहपुर, नर्मदापुरम समेत प्रदेश के आठ जिलों में शुगरकेन हाईटेक हब स्थापित करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इस योजना में 1.70 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट पर 40 प्रतिशत यानि अधिकतम 52 लाख रुपये तक का भारी-भरकम शासकीय अनुदान दिया जा रहा है। इसके बावजूद, ग्वालियर और दतिया सहित सभी आठ चिह्नित जिलों से एक भी पात्र हितग्राही या किसान आगे नहीं आया। अब विभाग ने दोबारा से शुगरकेन हाइटेक हब के लिए आवेदन मांगे हैं। जून में मांगे थे आवेदन, लेकिन कोई नहीं आया सामने कृषि विभाग ने शुगरकेन हाइटेक हब के लिए जून महीने में आवेदन मांगे थे, लेकिन ग्वालियर ही नहीं प्रदेश कि चयनित जिलों में से एक भी हितग्राही ने आवेदन नहीं किया। ऐसे में अब एक बार फिर विभाग ने गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए योजना शुरू की है और आवेदन मांगे हैं। दतिया व ग्वालियर को इस योजना में इसलिए चयनित किया गया है, क्योंकि इन दोनों ही जिलों में गन्ने की खेती होती है।  

सेवा की कहानी: आयुष्मान कार्ड से शिशु खलखो को इलाज के खर्च की चिंता से मिली राहत

रायपुर सेवा संकल्प अभियान के तहत शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से आम नागरिकों के जीवन में आ रहे बदलाव की कहानियां सामने आ रही हैं। सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड की ग्राम पंचायत घोघरा निवासी श्रीमती शिशु खलखो के लिए आयुष्मान कार्ड स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ आर्थिक राहत का भी माध्यम बना है। पहले परिवार में किसी सदस्य के बीमार होने पर उपचार के खर्च की चिंता उनके घरेलू बजट पर असर डालती थी। अब आयुष्मान कार्ड बनने से पात्रता एवं योजना के प्रावधानों के अनुसार पांच लाख रुपये तक निःशुल्क उपचार की सुविधा का लाभ मिल सकेगा। श्रीमती शिशु खलखो ने बताया कि सुशासन तिहार के दौरान उनकी समस्या का समाधान हुआ और उनका आयुष्मान कार्ड बनाया गया। कार्ड मिलने के बाद बीमारी की स्थिति में उपचार पर होने वाले बड़े खर्च को लेकर उनकी चिंता पहले की तुलना में कम हुई है। सीमित आय वाले परिवार के लिए स्वास्थ्य संबंधी आकस्मिक खर्च कई बार घरेलू जरूरतों और बजट को प्रभावित करता था, लेकिन आयुष्मान कार्ड ने उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा का भरोसा दिया है। इलाज के खर्च से मिली राहत, परिवार को मिला भरोसा शिशु खलखो बताती हैं कि पहले परिवार में किसी के बीमार पड़ने पर इलाज के लिए बड़ी राशि जुटानी पड़ती थी। इससे घर के दूसरे जरूरी खर्च प्रभावित होते थे और आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था। अब आयुष्मान कार्ड उनके परिवार के लिए उपचार के समय आर्थिक सहारा बन गया है। आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को योजना के प्रावधानों के अनुसार उपचार की सुविधा मिलने से गंभीर बीमारी या आकस्मिक स्वास्थ्य जरूरत के समय परिवार पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करने में मदद मिलती है। शिशु खलखो के लिए यह कार्ड बीमारी के समय इलाज की सुविधा के साथ आर्थिक सुरक्षा का भरोसा भी लेकर आया है। जनकल्याणकारी योजनाओं से मजबूत हो रहा सामाजिक सुरक्षा का आधार सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से शासन की योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की कहानियां जन-जन तक पहुंचाई जा रही हैं। शिशु खलखो की कहानी बताती है कि जब जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद और पात्र परिवारों तक पहुंचता है, तो स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण आवश्यकता के समय उन्हें उपचार के साथ आर्थिक सुरक्षा का भी संबल मिलता है।

उपचारित जल के उपयोग पर जोर, निकायों को 50 किमी के दायरे में यूजर तलाशने के निर्देश

रायपुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से निकलने वाले उपचारित पानी के सदुपयोग के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग गंभीरता से पहल कर रही है। विभाग ने उपचारित जल के दोबारा उपयोग को बढ़ावा देने नगरीय निकायों को संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान और उनकी जल आवश्यकता के आकलन के निर्देश दिए हैं। इसके लिए एसटीपी से 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले थर्मल पावर प्लांट, उद्योग, रेलवे, शासकीय विभाग और अन्य संस्थानों से समन्वय करने को कहा गया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) ने राज्य के जिन 6 नगर निगमों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माणाधीन है, वहां के आयुक्तों को परिपत्र जारी कर इस दिशा में आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। इन निकायों को एसटीपी के उपचारित जल के संभावित उपयोगकर्ताओं की जानकारी जुटाने को कहा गया है। साथ ही संबंधित संस्थानों को कितनी मात्रा में उपचारित जल की आवश्यकता होगी, इसका भी आकलन करने को कहा गया है।  50 किमी के दायरे में तलाशेंगे उपयोगकर्ता उपचारित जल के पुन: उपयोग के लिए एसटीपी के आसपास के क्षेत्र को केंद्र में रखा गया है। निकायों को 50 किलोमीटर की परिधि में स्थित थर्मल पावर प्लांट, उद्योगों, रेलवे, शासकीय विभागों और अन्य संस्थानों से संपर्क कर उनकी जल आवश्यकता की जानकारी लेने के निर्देश दिए गए हैं। इससे एसटीपी से उपचारित जल उपलब्ध होने के बाद उसके उपयोग के लिए संभावित उपभोक्ताओं की पहचान पहले से की जा सकेगी। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत 6 नगर निगमों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माणाधीन हैं। बीरगांव में 55 एमएलडी, भिलाई-चरौदा में 13 एमएलडी, भिलाई में 150 एमएलडी, दुर्ग में 47 एमएलडी, अंबिकापुर में 32 एमएलडी और राजनांदगांव में 41 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जा रहा है। केंद्र सरकार और एनजीटी के निर्देशों के अनुरूप राज्य शासन की पहल सूडा ने दुर्ग, भिलाई, भिलाई-चरोदा, बीरगांव, अंबिकापुर और राजनांदगाव के निगम आयुक्तों को परिपत्र जारी कर बताया है कि भारत सरकार के ऊर्जा विभाग की टैरिफ पॉलिसी, 2016 के तहत एसटीपी के 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित थर्मल पावर प्लांटों में उपचारित जल के पुन: उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भी एसटीपी के उपचारित जल के पुन: उपयोग के लिए निर्देशित किया है। सूडा ने संबंधित निकायों को संभावित उपयोगकर्ताओं और उनकी जल आवश्यकता के संबंध में जानकारी 15 दिनों में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, जिससे कि एसटीपी का संचालन शुरू होने के बाद उपचारित जल का पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

पंजाब चुनाव 2027: AAP, BJP, अकाली दल और कांग्रेस ने कसी कमर

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी शुरुआती रणनीति जमीन पर उतार दी है। आम आदमी पार्टी सरकार के करीब साढ़े चार साल के कामकाज और विकास मॉडल को जनता तक पहुंचाने में जुटी है। भाजपा केंद्र और अन्य राज्यों में अपनी सरकारों के कामकाज को आधार बनाकर पंजाब में विकल्प पेश कर रही है।  शिरोमणि अकाली दल प्रकाश सिंह बादल की विरासत और अपने पारंपरिक पंथक आधार को मजबूत करने की कोशिश में है। कांग्रेस गुटबाजी से ऊपर उठकर एकजुटता का संदेश दे रही है। इस बीच दलों की यात्राओं, रैलियों और घर-घर संपर्क अभियानों का सिलसिला शुरू हो चुका है। आप : विकास मॉडल को घर-घर ले जाएगी वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा के अनुसार आप ने 2027 की तैयारी में सरकार के करीब साढ़े चार साल के रिपोर्ट कार्ड और विकास मॉडल को जनता तक पहुंचाने पर फोकस किया है। पार्टी ने 20 सितंबर से राज्यव्यापी घर-घर संपर्क अभियान शुरू किया है। इसमें 2.68 लाख से अधिक बूथ कमेटी सदस्य हर परिवार तक पहुंचने की योजना के तहत काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने धूरी से अभियान की शुरुआत की। भाजपा : ट्रैक रिकॉर्ड के सहारे दावेदारी भाजपा नेता सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने और सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं। प्रदेशाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के अनुसार पार्टी केंद्र और अन्य राज्यों की भाजपा सरकारों के कामकाज को जनता के सामने रख रही है। वह नक्सलवाद में कमी, उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई और आतंकवाद के खिलाफ केंद्र की नीति को भाजपा के ट्रैक रिकॉर्ड के उदाहरण के तौर पर गिनाते हैं। उनका कहना है कि पंजाब में नशे और गैंगस्टरवाद की समस्या का समाधान भी भाजपा की डबल सरकार कर सकती है। भाजपा की नशा मुक्त पंजाब यात्रा सभी 117 सीटों तक पहुंच रही है। शिअद : बड़े बादल की विरासत पर भरोसा शिरोमणि अकाली दल अपनी पारंपरिक सियासी जमीन मजबूत करने के लिए पांच बार मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल की विरासत को प्रमुखता से सामने रख रहा है। पार्टी उनके कार्यकाल में हुए विकास कार्यों और ग्रामीण क्षेत्रों से सीधे जुड़ाव को अपनी पहचान के तौर पर पेश कर रही है। शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की रैलियों में अकाली सरकारों के दौरान हुए विकास कार्यों का उल्लेख लगातार हो रहा है। पार्टी बड़े बादल की राजनीतिक विरासत के सहारे पुराने समर्थक वर्ग को फिर लामबंद करने के साथ अपनी क्षेत्रीय पहचान को भी चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस : एकजुटता के संदेश के साथ मैदान में कांग्रेस राहुल गांधी के नाम और एकजुटता के संदेश के सहारे चुनावी जमीन मजबूत करने में जुटी है। सचिन पायलट के पंजाब प्रभारी बनने के बाद पार्टी सामूहिक नेतृत्व का संदेश दे रही है। 15 सितंबर के प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा और पूर्व उपमुख्यमंत्री व सांसद सुखजिंदर रंधावा का एक मंच पर आना इसी रणनीति का हिस्सा रहा। पायलट ने चन्नी और वड़िंग के हाथ मिलवाकर कार्यकर्ताओं और पंजाबियों को संदेश दिया कि चुनाव राहुल गांधी के नेतृत्व और सामूहिक ताकत के साथ लड़ा जाएगा।   

चिप डिजाइन, ड्रोन तकनीक, जीसीसी, डेटा सेंटर और स्पेसटेक क्षेत्र में 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर हुई चर्चा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश देश में सूचना प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के एक सशक्त केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री  ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बेंगलुरु में उद्योगपतियों और प्रमुख निवेशकों से वन-टू-वन संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को आमंत्रित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योग-व्यापार के लिए अपार संभावनाएं, मजबूत अधोसंरचना, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन और उद्योग-हितैषी नीतियां मौजूद हैं। राज्य सरकार हर निवेशक को सुरक्षित वातावरण, सिंगल विंडो सिस्टम से त्वरित अनुमतियां और नीतिगत सहयोग देने के लिए पूरी तरह तत्पर है। बेंगलुरु के तकनीकी इको सिस्टम और मध्यप्रदेश के औद्योगिक आधार के समन्वय से प्रदेश में नवाचार और रोजगार के नए आयाम स्थापित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से कहा कि उद्योग की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं के अनुरूप मध्यप्रदेश में सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि वे स्वयं हर रोड शो में निवेशकों के साथ संवाद करते हैं और उनके साथ वरिष्ठ अधिकारी भी रहते हैं, ताकि निवेश से जुड़ी समस्याओं और आवश्यकताओं का तत्काल समाधान किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में पारदर्शी नीतियां लागू हैं और निवेशकों से जुड़े प्रत्येक मुद्दे का तत्परता से निराकरण किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को जरूरतों के अनुरूप सुविधाएं और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन संवाद में विशेष रूप से ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की विशेषताओं और संभावनाओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार टेलीकॉम उपकरणों के विनिर्माण के साथ-साथ इस क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की नीतियां भविष्योन्मुखी हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण समूहों के विस्तार के लिए वित्तीय एवं गैर-वित्तीय दोनों ही तरह के आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान करती हैं। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) की स्थापना के लिए थोलोन्स और सीजीआई से संवाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव से संवाद के दौरान आईटी एवं जीसीसी सेक्टर के दिग्गजों ने मध्यप्रदेश में अपनी इकाइयां स्थापित करने को लेकर गहरी रुचि दिखाई। थोलोन्स के चेयरमैन और सीईओ  अविनाश वशिष्ठ और सु अंकिता वशिष्ठ ने प्रदेश में 210 करोड़ रुपये के निवेश से जीसीसी यूनिट स्थापित करने के प्रस्ताव को अंतिम रूप देने पर चर्चा की। सीजीआई के वाइस प्रेसिडेंट  अतुल अगाशे ने मध्यप्रदेश में जीसीसी निवेश की संभावनाओं को देखते हुए प्रदेश में विस्तार की मंशा जताई। सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइनिंग का प्रमुख केंद्र बनेगा मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइनिंग के क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने विस्तृत चर्चा की। असेइक मावेन सिलिकॉन के संस्थापक एवं सीईओ  शिवकुमार पी.आर. ने प्रदेश में कुल 100 करोड़ रुपये के निवेश से 'चिप डिजाइन हाउस' स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, जिसके प्रथम चरण में 25 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। कोर-आईसी टेक्नोलॉजीज प्रायवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं सीईओ  पंकज गर्ग ने भी विभिन्न चरणों में कुल 100 करोड़ रुपये के निवेश से चिप डिजाइन सर्विसेज स्थापित करने पर सहमति जताई। डीपटेक फंडिंग, डेटा सेंटर, स्पेसटेक और सस्टेनेबिलिटी में नए निवेश प्रस्ताव प्रदेश में स्टार्टअप्स और नई तकनीकों को गति देने के लिए डीपटेक वेंचर कैपिटल फंड 'सीफंड' के  नरेंद्र भंडारी ने मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये की फंडिंग उपलब्ध कराने की योजना प्रस्तुत की। नाइनस्टार्स इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्रायवेट लिमिटेड के चेयरमैन एवं सीईओ  गोपाल कृष्णन ने मध्यप्रदेश में आधुनिक डेटा सेंटर स्थापित करने पर विमर्श किया। स्पेसटेक के क्षेत्र में गैलेक्सी के सह-संस्थापक  रक्षित भट्ट और सु पायल दवे ने अपनी सहभागिता को लेकर संवाद किया। इसके अलावा, मोबिलिटी एवं बाइक शेयरिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनी रैपिडो के सह-संस्थापक  पवन गुंटुपल्ली तथा पर्यावरण एवं सस्टेनेबिलिटी क्षेत्र में कार्य कर रही कंपनी डोनाउ कार्बन इंडिया के सीईओ व एमडी  वीरेंद्र चौधरी ने भी प्रदेश में अपनी योजनाओं को लेकर चर्चा की। ड्रोन विनिर्माण और रक्षा तकनीक को मिलेगी नई गति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की भविष्य की तकनीक को ध्यान में रखते हुए ड्रोन विनिर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ भी महत्वपूर्ण बैठक हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एयरबाउंड के संस्थापक  नमन पुष्प, आइडियाफोर्ज की हेड ऑफ मार्केटिंग सु कुथि अरमनमाडा, नॉटिकल विंग्स के हेड ऑफ बिजनेस डेवलपमेंट  रोहन फर्नांडीस, न्यूस्पेस एंड रिसर्च टेक्नोलॉजीज के हेड ऑफ बिजनेस  अश्विन शास्त्री और अनमैन्ड सिस्टम्स के संस्थापक एवं सीईओ  यशवंत रेड्डी ने प्रदेश में ड्रोन निर्माण और परीक्षण इकोसिस्टम विकसित करने के साथ-साथ निवेश के अवसरों पर विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को एयरबाउंड की ओर से प्रतिनिधियों ने ड्रोन भेंट किया। प्रमुख टेक एवं कंसल्टिंग कंपनियों के प्रतिनिधियों ने की भेंट मुख्यमंत्री डॉ. यादव से बैठक के दौरान एचपी एंटरप्राइजेज की ओर से जीसीसी क्षेत्र में कार्यरत  जयंत और सु तारा,  जेडस्केलर आईटी कंपनी की ओर से  निधि तथा क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई क्षेत्र में कार्यरत कंपनी की ओर से  अनुराग ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से फुजित्सु कंसल्टिंग इंडिया प्रा. लि. की ओर से  विशाल अगस्त्या, कंट्री लीडर, इंडिया एवं कंसल्टिंग लीड, ग्लोबल डिलीवरी यूनिट तथा इनफिनिटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से  नितिन मेहता, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर एवं कंट्री हेड ने भी भेंट की। प्रदेश के सभी अंचलों में संतुलित औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन का संकल्प मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार चुनिंदा शहरों तक सीमित न रहकर इंदौर, उज्जैन, भोपाल के साथ-साथ जबलपुर और ग्वालियर जैसे संभागों में भी औद्योगिक गतिविधियों को समान रूप से संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के छोटे-बड़े शहरों में भारी उद्योगों के साथ एमएसएमई और लघु-कुटीर उद्योगों की स्थापना पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर नागरिकों को सम्मानजनक रोजगार मिल सके। उपस्थित सभी प्रमुख निवेशकों ने मध्यप्रदेश की निवेश अनुकूल नीतियों, पारदर्शी कार्य प्रणाली और नेतृत्व की सक्रियता की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की निवेशकों के साथ वन-टू-वन मीटिंग में अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  एम. सेलवेंद्रन, प्रबंध संचालक एमपीआईडीसी  चंद्रमौली शुक्ला सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहें। 

निर्माण कार्य में लापरवाही और अपर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था पर जताई कड़ी नाराजगी, दिये पेनल्टी लगाने के निर्देश विभाग ने लगाई 20 लाख की पेनल्टी

भोपाल  लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने मंगलवार को विधायक  रामेश्वर शर्मा के साथ बैरागढ़ में निर्माणाधीन एलिवेटेड ब्रिज का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने पूरे निर्माणाधीन मार्ग का भ्रमण कर कार्य की भौतिक प्रगति, गुणवत्ता, सुरक्षा व्यवस्था, सर्विस रोड, तथा नागरिकों के आवागमन की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मंत्री  सिंह ने निर्माण कार्य की धीमी प्रगति और कार्यस्थल पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि निर्माण के दौरान नागरिकों की सुरक्षा और सुगम आवागमन सुनिश्चित करना विभाग तथा निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री  सिंह ने सभी कमियों और अव्यवस्थाओं को 3 दिवस में दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण एजेंसी द्वारा कार्य में बरती गई लापरवाही और विलंब के लिए अनुबंध की शर्तों के अनुसार पेनाल्टी लगाने को कहा। साथ ही बंद अथवा अव्यवस्थित स्ट्रीट लाइटों को चालू करने और निर्माण स्थल पर सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री  सिंह ने सर्विस रोड की खराब स्थिति को देखकर इसे शीघ्र दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्य ब्रिज का निर्माण पूरा होने तक सर्विस रोड ही नागरिकों के आवागमन का प्रमुख माध्यम है, इसलिए इसे सुरक्षित और सुगम बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मंत्री  सिंह ने सिविल अस्पताल के आसपास की अव्यवस्थाओं को तत्काल सुधारने तथा मरीजों, एम्बुलेंस और आम नागरिकों के निर्बाध एवं सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री  सिंह ने अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए कि ब्रिज का संपूर्ण निर्माण कार्य मार्च 2027 तक हर हाल में पूर्ण किया जाए। समय-सीमा में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्माण कार्य की माइक्रो प्लानिंग करने की भी निर्देश दिए, जिसमें पर्ट चार्ट के आधार पर एक्टिविटी प्लान बनाने और इसके आधार पर साप्ताहिक प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। मुख्य अभियंता निर्माण कार्य की प्रत्येक सप्ताह समीक्षा करेंगे। कार्य की प्रगति, गुणवत्ता और समयबद्धता से संबंधित विस्तृत प्रतिवेदन प्रत्येक 15 दिवस में मंत्री को प्रस्तुत किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान मंत्री  राकेश सिंह ने कहा कि संत हिरदाराम नगर का यह मुख्य मार्ग अत्यधिक यातायात घनत्व वाला क्षेत्र है। ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही से गंभीर दुर्घटना की संभावना हो सकती है। उन्होंने निर्माण एजेंसी को सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। मंत्री  सिंह ने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य के दौरान यातायात को निर्बाध बनाए रखने के लिए केवल उसी स्थान पर सेफ्टी बैरियर लगाए जाएं, जहां वास्तविक रूप से निर्माण कार्य चल रहा है। ऐसे स्थानों पर जहाँ निर्माण कार्य नहीं हो रहे है, वहां से अनावश्यक बैरियर तत्काल हटाए जाएं, ताकि यातायात सुचारु रूप से संचालित हो सके। उन्होंने निर्माण स्थल से मलबा एवं अन्य अपशिष्ट निर्माण सामग्री तत्काल हटाने के निर्देश भी दिए। मंत्री  सिंह ने कहा कि निर्माण कार्य के कारण स्थानीय व्यापारियों एवं रहवासियों को होने वाली समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण किया जाए तथा उनके आवागमन में अनावश्यक बाधा उत्पन्न न हो। ठेकेदार को निर्देशित किया गया कि यातायात के अत्यधिक दबाव को देखते हुए निर्बाध आवागमन के लिए अपने स्तर से भी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। मंत्री  सिंह ने ब्रिज पर वर्षा जल संचयन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि बड़ी अधोसंरचनात्मक परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए। मंत्री  सिंह ने कहा कि लोक निर्माण विभाग ‘लोक निर्माण से लोक-कल्याण’ के ध्येय के साथ कार्य कर रहा है। विभाग की कार्य पद्धति में बड़ा बदलाव आया है। अब प्रत्येक निर्माण कार्य में गुणवत्ता, समयबद्धता, जवाबदेही और जन-सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मंत्री  सिंह ने कहा कि अधोसंरचना निर्माण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हो और उसका लाभ नागरिकों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक रूप से मिले।  

LPG Cylinder: 1 अक्टूबर से बायोमेट्रिक अनिवार्य, बिहार के 55 लाख उपभोक्ताओं की बढ़ी चिंता

पटना  बिहार में घरेलू एलपीजी के करीब 15 फीसदी उपभोक्ताओं ने अब तक ई-केवाइसी और बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं करायी है. पेट्रोलियम कंपनियों की ओर से एक अक्टूबर से बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य किए जाने के बाद ऐसे उपभोक्ताओं को सब्सिडी वाले सिलिंडर को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. राज्य में 2.36 करोड़ से अधिक एलपीजी उपभोक्ता बिहार के 38 जिलों में तीन प्रमुख पेट्रोलियम कंपनियों के 2.36 करोड़ से अधिक घरेलू एलपीजी उपभोक्ता हैं. इनमें से करीब 55 लाख उपभोक्ताओं ने अब तक ई-केवाइसी नहीं करायी है. ऐसे में एक अक्टूबर की समय सीमा नजदीक आने के साथ बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को प्रमाणीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होगी. बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण नहीं कराने पर सब्सिडी को लेकर चिंता जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक ई-केवाइसी और बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण नहीं कराया है, उन्हें सब्सिडी वाले सिलिंडर की सुविधा मिलने में परेशानी होने की आशंका है. हालांकि, पेट्रोलियम कंपनियों ने ऐसे उपभोक्ताओं के लिए सिलिंडर की कीमत बढ़ाने को लेकर अब तक कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की है. मई से चलाया जा रहा जागरूकता अभियान पेट्रोलियम कंपनियों ने उपभोक्ताओं को बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण कराने के लिए मई से ही जागरूक करना शुरू कर दिया था. इसके बावजूद लाखों उपभोक्ताओं ने अब तक प्रक्रिया पूरी नहीं करायी है. कंपनियों की ओर से उपभोक्ताओं को समय रहते ई-केवाइसी और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण पूरा कराने के लिए कहा जा रहा है. एक अक्टूबर से लागू होगी अनिवार्यता घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए एक अक्टूबर से बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य किया गया है. ऐसे में जिन उपभोक्ताओं का प्रमाणीकरण अभी बाकी है, उनके लिए प्रक्रिया जल्द पूरी करना जरूरी होगा, ताकि सिलिंडर से जुड़ी सुविधाओं में किसी तरह की परेशानी न हो.