samacharsecretary.com

कच्चे घर से पक्के आशियाने तक: पीएम जनमन योजना से नंदबाई बैगा के जीवन में आई नई खुशियां

रायपुर कभी बारिश की बूंदों के बीच कच्चे घर में रात गुजारने को मजबूर गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले के ग्राम पंचायत धनौली के खर्रीपारा निवासी मती नंदबाई बैगा के जीवन में अब खुशियों की नई शुरुआत हुई है। पीएम जनमन योजना के तहत पक्का आवास मिलने से उनके परिवार को सुरक्षित और मजबूत छत मिली है। वर्षों से कच्चे मकान में रहने के दौरान बारिश, सीलन और पानी टपकने जैसी परेशानियों का सामना करने वाली नंदबाई बैगा अब अपने पक्के घर में परिवार के साथ सुकून और सुरक्षा के साथ जीवन बिता रही हैं। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के विशेष रूप से कमजोर एवं जनजातीय परिवारों तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने और उन्हें मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पीएम जनमन योजना इसी सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों को आवास सहित आवश्यक बुनियादी सुविधाओं से जोड़कर उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है। नंदबाई बैगा का परिवार इस प्रयास से आए सकारात्मक बदलाव का एक उदाहरण है। कच्चे घर में हर मौसम रहती थी चिंता नंदबाई बैगा बताती हैं कि पहले उनका घर कच्चा था। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था और घर में सीलन बनी रहती थी। बरसात के दौरान परिवार को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। घर की खराब स्थिति के कारण हर मौसम में परिवार के मन में चिंता बनी रहती थी। सुरक्षित और मजबूत घर का अभाव उनके दैनिक जीवन की परेशानियों को और बढ़ा देता था। पक्के आवास से मिली सुरक्षा और सुकून पीएम जनमन योजना के तहत पक्का आवास मिलने के बाद नंदबाई बैगा के परिवार की परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आया है। अब परिवार सुरक्षित और मजबूत घर में रह रहा है। बारिश के दिनों में न तो छत से पानी टपकने की चिंता है और न ही सीलन की परेशानी। पक्का आवास उनके लिए केवल एक भवन नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य की मजबूत नींव बन गया है। सरकार की योजनाओं से जीवन में आया व्यापक बदलाव नंदबाई बैगा को शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से उन्हें आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है। वहीं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन मिलने से खाना पकाने में सुविधा हुई है। इस तरह विभिन्न योजनाओं का लाभ एक साथ मिलने से उनके परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट दिखाई देता है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के विजन से जनजातीय परिवारों तक पहुंच रही सुविधाएं प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समुदायों के जीवन में बुनियादी सुविधाओं और बेहतर अवसरों की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। पक्का आवास, स्वच्छ ईंधन और आर्थिक सहायता जैसी सुविधाओं का लाभ मिलने से नंदबाई बैगा जैसे परिवारों के जीवन में बदलाव दिखाई दे रहा है। उनके लिए पक्का घर बदलती परिस्थितियों और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद का आधार बना है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण एवं जनजातीय परिवारों को आवास, आर्थिक सहायता, रसोई गैस सहित विभिन्न सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। नंदबाई बैगा का परिवार भी इन योजनाओं के समन्वित लाभ से बेहतर और सुरक्षित जीवन की ओर आगे बढ़ रहा है।

‘आंगन मिलन सेवा’ अभियान 26 सितंबर से 5 अक्टूबर तक

भोपाल  मध्यप्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल शासकीय सेवाओं के वितरण स्थल के रूप में नहीं, बल्कि सेवा, पोषण, सीखने, सहभागिता और सम्मान के जीवंत केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से प्रदेशव्यापी ‘आंगन मिलन सेवा’ अभियान आयोजित किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत 26 सितंबर से 5 अक्टूबर 2026 तक प्रदेश के सभी 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों पर तीन दिवसीय कार्यक्रमों का आयोजन होगा। महिला एवं बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया ने मंगलवार को मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के अधिकारियों को अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन, जनप्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता और व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। हर आंगनवाड़ी बने सेवा, पोषण और सम्मान का केंद्र मंत्री सु भूरिया ने कहा कि ‘आंगन मिलन सेवा’ को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए इसे समुदाय और आंगनवाड़ी के बीच मजबूत जुड़ाव का माध्यम बनाया जाए। अभियान का मूल उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, माताओं, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं तथा अन्य हितग्राहियों तक पोषण, स्वास्थ्य और कल्याण सेवाओं की नियमित एवं प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र पर ऐसा वातावरण निर्मित किया जाए, जिसमें सेवा के साथ सम्मान और जनभागीदारी भी दिखाई दे। माताओं-बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और संवाद पर विशेष फोकस अभियान के प्रथम दिवस बाल स्वास्थ्य और आनंदमयी गतिविधियों पर विशेष जोर रहेगा। आंगनवाड़ी केंद्रों पर वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, 3 से 6 वर्ष आयु के बच्चों की गतिविधियां, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के संदेशों का वाचन तथा डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन किया जाएगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और आशा कार्यकर्ता का सम्मान भी किया जाएगा। इसके साथ ही 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों की माताओं, गर्भवती एवं धात्री माताओं तथा महिला हितग्राहियों से संवाद होगा। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से स्वास्थ्य परीक्षण एवं आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। गर्भावस्था एवं प्रसवोत्तर देखभाल, संतुलित आहार, एनीमिया, स्तनपान और शिशु देखभाल जैसे विषयों पर पोषण संवाद आयोजित होंगे। बच्चों को फल एवं मिठाई का वितरण भी किया जाएगा। ‘मेरी कहानी, मेरी सफलता’ बताएगी योजनाओं के प्रभाव की कहानी अभियान के द्वितीय दिवस को ‘मेरी कहानी, मेरी सफलता’ की थीम पर लाभार्थी संवाद आयोजित किए जाएंगे। विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित महिलाओं और परिवारों के अनुभव सामने लाए जाएंगे। लाभार्थी माताओं को अपने जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को साझा करने का अवसर दिया जाएगा। साथ ही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना, लाड़ली बहना योजना, टेक होम राशन, गर्म पका भोजन, पोषण सेवाओं सहित महिला एवं बाल कल्याण की विभिन्न योजनाओं की जानकारी सरल एवं बोलचाल की भाषा में दी जाएगी। जनप्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश महिला एवं बाल विकास मंत्री सु भूरिया ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जनप्रतिनिधियों को सम्मानपूर्वक आमंत्रित कर उनकी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देशित किया कि जनप्रतिनिधिगण कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें और आंगनवाड़ी केंद्रों पर आयोजित गतिविधियों की शोभा बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, विभागीय अमले और समुदाय की सहभागिता से अभियान को व्यापक जन-अभियान का स्वरूप दिया जाए। सफलता की कहानियां बनेंगी अभियान की पहचान मंत्री सु भूरिया ने अभियान की प्रभावी रिपोर्टिंग और दस्तावेजीकरण पर विशेष जोर दिया। प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र पर कार्यक्रम के फोटो और वीडियो तैयार करने तथा कम से कम एक सफलता की कहानी पर वीडियो निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सफलता की कहानियों में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, लाड़ली लक्ष्मी एवं लाड़ली बहना योजना, पोषण सेवाओं, कुपोषण से सामान्य श्रेणी में आए बच्चों, पीएम जनमन एवं धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान क्षेत्र के हितग्राहियों, स्पॉन्सरशिप, पीएम केयर्स, मुख्यमंत्री बाल कोविड सेवा योजना तथा सुकन्या समृद्धि योजना से जुड़े अनुभवों को प्रमुखता दी जाएगी। ‘आशीर्वाद का दीया’ के बाद अब ‘आंगन मिलन सेवा’ में भी व्यापक जनभागीदारी का आह्वान मंत्री सु भूरिया ने कहा कि 17 सितंबर को आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय जनभागीदारी दर्ज की है। उन्होंने अधिकारियों-कर्मचारियों से आह्वान किया कि आगामी ‘आंगन मिलन सेवा’ अभियान में भी पूरे मनोयोग और टीम भावना के साथ कार्य करते हुए प्रदेश की जनभागीदारी को नई ऊंचाई दी जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी अभियान को अपनी जिम्मेदारी मानकर कार्य करे और यह सुनिश्चित करे कि हर आंगनवाड़ी केंद्र पर कार्यक्रम प्रभावी और गरिमापूर्ण ढंग से आयोजित हो। 9 और 10 अक्टूबर को ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ का विशेष आयोजन ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत प्रदेश में आगे भी जनभागीदारी आधारित गतिविधियां आयोजित होंगी। 9 एवं 10 अक्टूबर को ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, झाबुआ और आलीराजपुर में बड़े मैदानों पर मानव रंगोली का निर्माण किया जाएगा। इसमें व्यापक जनभागीदारी के साथ सेवा, राष्ट्रभाव और विकसित भारत के संकल्प को अभिव्यक्त किया जाएगा। प्रतिदिन होगी मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग अभियान के दौरान जिलों से प्रगति, प्रमुख उपलब्धियों तथा उच्च गुणवत्ता वाले फोटो एवं वीडियो सहित जानकारी प्रतिदिन शाम 4 बजे तक राज्य स्तर पर भेजी जाएगी। मैदानी अमला आवश्यकता के अनुसार लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तथा शिक्षा विभाग से समन्वय करेगा। कार्यक्रमों की गुणवत्ता, SOP के अनुपालन और दस्तावेजीकरण की जिला स्तर पर निगरानी की जाएगी।  

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान एवं फेन अभयारण्य के लिए निगरानी समिति गठित

भोपाल  भारत सरकार पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना अनुसार मण्डला जिले में स्थित कान्हा राष्ट्रीय उद्यान एवं फेन अभयारण्य को पारिस्थितिकी संवेदी जोन के रूप में अधिसूचित किया गया है। इस क्षेत्र की निगरानी के लिए राज्य शासन द्वारा निगरानी समिति (मॉनिटरिंग कमेटी) का गठन किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश अनुसार समिति में संभागीय आयुक्त जबलपुर को पदेन-अध्यक्ष बनाया गया है। जिला कलेक्टर मंडला और बालाघाट, उप संचालक कोर और बफर कान्हा टाइगर रिजर्व, नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सहायक संचालक मंडला, क्षेत्रीय अधिकारी, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जबलपुर, अधीक्षण अभियंता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मंडला और बालाघाट, जिला पंचायत मंडला और बालाघाट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, जैव विविधता विशेषज्ञ – श्री पी.एस. मसराम भा.व.से. (सेवानिवृत्त) मण्डला, डॉ. अनिरूध्द मजूमदार वैज्ञानिक राज्य वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर एवं अधीक्षण यंत्री लोक निर्माण विभाग सिवनी सदस्य होंगे। क्षेत्र निदेशक कान्हा टाइगर रिजर्व मंडला को सदस्य- सचिव नामित किया गया है। निगरानी समिति के दायित्व भारत सरकार पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना 12 मार्च 2021 के अनुसार होंगे।

मंत्री विश्वास सारंग ने वार्ड 36 एवं 37 में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

भोपाल  सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने मंगलवार को नरेला विधानसभा क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 36 एवं 37 में करोड़ों रुपये की लागत से होने वाले विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि नरेला विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों का क्रम निरंतर जारी है। मंत्री  सारंग ने कहा कि नरेला की जनता का विश्वास हमारी सबसे बड़ी ताकत है और इस विश्वास को विकास के माध्यम से निरंतर मजबूत करना हमारा संकल्प है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वार्ड, प्रत्येक कॉलोनी और प्रत्येक परिवार तक विकास की सुविधाएं पहुंचाना हमारी प्रतिबद्धता है। आगे उन्होंने कहा कि सड़क, नाली, अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूर्ण कराया जा रहा है, ताकि प्रत्येक वार्ड के नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सके। भूमिपूजन के दौरान मंडल अध्यक्ष  नितिन पाठक, पार्षद गीता माली, पार्षद विमलेश ठाकुर, कार्यकर्ता सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। चांदबड़ में बनेगा सामुदायिक भवन मंत्री  सारंग ने वार्ड क्रमांक 37 के चांदबड़ क्षेत्र में सामुदायिक भवन निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भवन क्षेत्र के नागरिकों के लिए सामाजिक एवं पारिवारिक आयोजनों के साथ-साथ विभिन्न सामुदायिक गतिविधियों के लिए उपयोगी साबित होगा। इससे क्षेत्रवासियों को अपने कार्यक्रमों के लिए बेहतर और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा। विभिन्न कॉलोनियों में सीसी सड़क एवं नाली निर्माण कार्य कार्यक्रम के दौरान मंत्री  सारंग ने वार्ड क्रमांक 36 एवं 37 के सौरभ कॉलोनी, शिव नगर, हिनोतिया, चांदबड़ सहित अन्य क्षेत्रों में सीसी सड़क एवं नाली निर्माण कार्यों का भी भूमिपूजन किया। इन कार्यों के पूर्ण होने से स्थानीय रहवासियों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलने के साथ जल निकासी की समस्या के निराकरण में भी सहायता मिलेगी। नरेला का हर वार्ड विकास की मुख्यधारा से जुड़े मंत्री  सारंग ने कहा कि नरेला विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक वार्ड में हर सुविधाओं को मजबूत करना हमारी प्राथमिकता है। विकास केवल बड़े प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है बल्कि प्रत्येक मोहल्ले की सड़क, नाली, स्वच्छता और नागरिक सुविधा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि नरेला का कोई भी क्षेत्र विकास से अछूता न रहे और प्रत्येक नागरिक को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों।  

स्टीम इंजन से होती थी पानी की सप्लाई, अब हेरिटेज बनेगी पटना की ऐतिहासिक जलमीनार

पटना  वीरचंद पटेल पथ पर मिलर हाईस्कूल के पास खड़ी ऐतिहासिक जलमीनार पटना की उस दौर की कहानी अपने भीतर समेटे है, जब शहर में पानी पहुंचाने के लिए स्टीम इंजन का सहारा लिया जाता था। वर्ष 1915 से 1918 के बीच बनी करीब 130 फीट ऊंची यह जलमीनार अब फिर चर्चा में है। नगर निगम इसे उसके मूल स्वरूप को बचाते हुए जीर्णोद्धार कर ऐतिहासिक धरोहर के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। 108 वर्ष पुरानी इस जलमीनार के जीर्णोद्धार और परिसर के सुंदरीकरण पर 3.38 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। परिसर में करीब 2,500 वर्गफीट क्षेत्र में आधुनिक कैफेटेरिया भी बनाया जाएगा। ऐति‍हासिक धरोहर के रूप में होगी विकसित इसमें बैठने की जगह, रसोई, काउंटर और अन्य जरूरी सुविधाएं होंगी। इससे विद्यार्थियों, लोगों और यहां आने वाले पर्यटकों को सुविधा मिलेगी। काम पूरा करने के लिए छह महीने की अवधि तय की गई है। यह जलमीनार पटना की पुरानी जलापूर्ति व्यवस्था की गवाह है। वर्ष 1915 से 1918 के बीच बनी इस मीनार में करीब एक लाख गैलन पानी संग्रहित किया जा सकता था खास बात यह है कि उस समय पानी को ऊपर चढ़ाने के लिए आधुनिक मोटर नहीं, बल्कि स्टीम इंजन का इस्तेमाल होता था। एएन कालेज के पास स्थित कुएं से स्टीम इंजन के जरिये पानी इस जलमीनार तक पहुंचाया जाता था। जैसे ही जलमीनार पूरी भर जाती थी, यहां से लाल सिग्नल दिखाया जाता था। यह संकेत एएन कालेज के पास लगे स्टीम इंजन तक पहुंचता था और इंजन बंद कर दिया जाता था। जलमीनार की यह व्यवस्था उस समय की तकनीकी समझ और इंजीनियरिंग का उदाहरण थी। फ्लोटिंग इंडिकेटर तकनीक से पानी का स्तर बढ़ने के साथ इंडिकेटर की स्थिति बदलती थी और जलमीनार के भरने का संकेत मिलता था। उस समय इससे जुड़ा जलापूर्ति नेटवर्क 200 से 250 किलोमीटर तक फैला हुआ था। पहले यह व्यवस्था बांकीपुर वाटर सप्लाई हेड वर्क्स के अंतर्गत थी। 1978 तक इस जलमीनार से होती थी जलापूर्ति इसके जरिये वर्तमान के नूतन राजधानी, पाटलिपुत्र और बांकीपुर अंचल के विभिन्न क्षेत्रों में पानी पहुंचाया जाता था। यानी आज जिन इलाकों में शहर का बड़ा हिस्सा बसा हुआ है, वहां दशकों पहले इसी व्यवस्था के जरिये घरों तक पानी पहुंचता था। सितंबर 1978 तक इससे जलापूर्ति होती रही। इसके बाद यह ऐतिहासिक ढांचा उपयोग से बाहर हो गया। लाल ईंटों से बनी इस जलमीनार की स्थापत्य शैली भी इसे खास बनाती है। गुंबददार संरचना वाली यह इमारत करीब एक सदी से अधिक समय से शहर के बदलते स्वरूप की गवाह रही है। जलमीनार के साथ पूरे परिसर का भी विकास किया जाएगा। करीब 14,400 वर्गफीट क्षेत्र में समग्र विकास की योजना है। सजावटी रोशनी से जलमीनार को आकर्षक रूप दिया जाएगा। जलीमनार परिसर में पहले दो जलापूर्ति केंद्र थे। एक जलापूर्ति केंद्र समेत करीब 60 प्रतिशत जमीन एमएलसी आवास के लिए चली गई। बचे जलापूर्ति केंद्र की क्षमता 120 अश्वशक्ति है, जो अभी चालू है। वर्तमान में परिसर तक पहुंचने में अवैध पार्किंग बड़ी समस्या है। जलमीनार की नींव सुरक्षित, पारंपरिक तकनीक से होगा जीर्णोद्धार जलमीनार की स्थिति का आकलन एनआइटी पटना के सिविल इंजीनियरिंग विभाग ने किया है। रिपोर्ट के अनुसार, जलमीनार में समग्र झुकाव, नींव में दरार या मिट्टी के अलग होने के संकेत नहीं मिले। हालांकि, कुछ स्थानों पर नमी, लिंटल में दरार और सीढ़ियों की खराब स्थिति जैसी समस्याएं मिली हैं। इनके सुधार को जीर्णोद्धार योजना में शामिल किया गया है। मूल निर्माण सामग्री के अनुकूल चूने आधारित और सांस लेने योग्य पारंपरिक सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। अनावश्यक बदलाव से बचते हुए मौजूदा संरचना को सुरक्षित रखने की योजना है। प्रस्ताव में जलमीनार की वास्तुकला को उभारने के लिए वार्म एलईडी लाइट लगाने की भी योजना है। इससे रात में भी इसकी पहचान बनी रहेगी। हेरिटेज गार्डन के मध्य होगी ऐतिहासिक जलमीनार योजना के तहत 10,880 वर्गफीट में हेरिटेज गार्डन विकसित किया जाएगा। इसके मध्य ऐतिहासिक जलमीनार रहेगी। चारों ओर पौधों की क्यारियां और हरियाली विकसित होगी। मुख्य प्रवेश द्वार से जलमीनार तक पैदल पथ बनाया जाएगा। दोनों ओर छायादार पेड़ लगाए जाएंगे। चारदीवारी पर प्राकृतिक पत्थर की क्लैडिंग और सजावटी लोहे की रेलिंग होगी। प्रवेश द्वार पर कलात्मक लोहे का गेट और खंभों पर सजावटी लाइटें लगाई जाएंगी। परिसर में वर्षा जल संचयन की भी व्यवस्था होगी।     14,400 वर्गफीट क्षेत्र का होगा विकास     2,500 वर्गफीट में बनेगा कैफेटेरिया     4,325 वर्गफीट में परिसर विकसित होगा     1,963.50 वर्गफीट क्षेत्र में है जलमीनार     5,600 वर्गफीट में बिछेगा पेवर ब्लाॅक  

विशेष बच्चों के लिए बना भरोसे का केंद्र, 10 साल से निःशुल्क मिल रहा विशेषज्ञ उपचार

रायपुर ‘जतन केंद्र’ ने बदली 27 हजार से ज्यादा बच्चों की जिंदगी विशेष आवश्यकता वाले बच्चों और उनके परिवारों के लिए जतन केंद्र उम्मीद और संबल का केंद्र बनकर उभरा है। रायगढ़ जिले में वर्ष 2016 को शुरू हुए इस केंद्र में अब तक 27,088 बच्चों का परीक्षण, मूल्यांकन और उपचार किया जा चुका है। वहीं अप्रैल से अगस्त 2026 तक 5,397 बच्चों को विभिन्न सेवाओं का लाभ मिला है। जतन की खासियत इसका बच्चों के अनुकूल माहौल है। केंद्र को प्ले स्कूल जैसे सहज और खुशनुमा वातावरण में तैयार किया गया है, ताकि बच्चे अस्पताल के डर या तनाव के बिना उपचार करा सकें। यहां आने वाले बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाती हैं। केंद्र में शिशु रोग विशेषज्ञ, दंत चिकित्सक, फिजियोथेरेपिस्ट, विशेष शिक्षक, स्पीच थेरेपिस्ट, ऑडियोलॉजिस्ट, ऑप्टोमेट्रिस्ट, नर्स, पैथोलॉजी, समाजसेवक और काउंसलर की सेवाएं पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध हैं। विकासात्मक देरी, देर से बोलने, सीखने में परेशानी और ऑटिज्म जैसे लक्षणों वाले बच्चों का नियमित आकलन और उपचार किया जा रहा है। मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बच्चों में सामने आ रही लर्निंग प्रॉब्लम के मामलों में भी विशेषज्ञ सेवाएं दी जा रही हैं। टंग-टाई के 285 बच्चों का निःशुल्क उपचार जतन के दंत चिकित्सा विभाग में टंग-टाई यानी जीभ के जुड़ाव की समस्या वाले बच्चों का फ्रेनेक्टमी पद्धति से निशुल्क उपचार किया जा रहा है। अब तक करीब 285 बच्चे इस सुविधा से लाभान्वित हो चुके हैं। इसके साथ ही बच्चों के दांत और मुंह से जुड़ी अन्य बीमारियों का भी इलाज किया जाता है। श्रवण जांच से फिजियोथेरेपी तक सुविधा श्रवण संबंधी परेशानी वाले बच्चों के लिए केंद्र में बीईआरए और पीटीए टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है। ये जांच दिव्यांगता प्रमाण पत्र और कॉक्लियर इंप्लांट की प्रक्रिया में भी उपयोगी होती हैं। वहीं फिजियोथेरेपी विभाग में शारीरिक रूप से बाधित बच्चों के उपचार और पुनर्वास पर काम किया जाता है, ताकि वे दैनिक गतिविधियां अधिक आसानी से कर सकें। समय पर उपचार से आसान हो रही बच्चों की राह स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित जतन डीईआईसी में सेवाओं के लगातार सुधार और विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। निःशुल्क विशेषज्ञ उपचार, बच्चों के अनुकूल वातावरण और समय पर हस्तक्षेप ने इस केंद्र को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के परिवारों के लिए भरोसे का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया है। पिछले 10 वर्षों में हजारों बच्चों तक पहुंची यह सेवा उनकी बेहतर सेहत, विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

दीपिका ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास, 11 गोल दागकर बनाया रिकॉर्ड

हिसार. एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। भारतीय महिला हाकी टीम में हिसार की दीपिका सहरावत ने जहां उज्बेकिस्तान के खिलाफ एक मैच में आठ गोल दागकर अपनी अलग पहचान बनाई, वहीं इंडोनेशिया के खिलाफ लगातार दूसरे मैच में तीन गोल कर हैट्रिक लगाई। दीपिका टूर्नामेंट में 11 गोल कर सबसे आगे चल रही है। वहीं दूसरी ओर भारतीय कबड्डी टीम ने सोमवार को अपने अभियान की शुरुआत बांग्लादेश को 42-21 से हराकर की। इस मुकाबले में हिसार के गांव भिवानी रोहिल्ला की मनीषा ने लेफ्ट कवर से डिफेंडर की भूमिका निभाई। वहीं हसनगढ़ की निकिता नैन भी भारतीय टीम का हिस्सा हैं। दीपिका ने आठ गोल कर तोड़ा अपना ही रिकार्ड  भारतीय महिला हाकी टीम ने उज्बेकिस्तान को 19-0 से हराया था। इस मुकाबले में दीपिका सहरावत ने अकेले आठ गोल दागे। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने अपना ही पिछला रिकार्ड पीछे छोड़ दिया।

स्वर्गीय माहेश्वरी का जीवन राष्ट्रसेवा और निर्भीक पत्रकारिता की प्रेरणा: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने भोपाल में स्वर्गीय  रामगोपाल माहेश्वरी जी के नाम पर मार्ग की नामपट्टिका का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वर्गीय  माहेश्वरी के राष्ट्र और पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि यह सभी के लिए गौरव और आनंद का क्षण है। कुछ व्यक्तित्व केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए होते हैं और उनके विचार एवं आदर्श आने वाली पीढ़ियों को दिशा देते हैं। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि स्वर्गीय  माहेश्वरी ने स्वतंत्रता से पहले प्रेस की स्थापना की। उस दौर में जब देश स्वतंत्रता आंदोलन के कठिन दौर से गुजर रहा था, उन्होंने राष्ट्र के प्रति समर्पित होकर निर्भीकता से पत्रकारिता को आगे बढ़ाया। भारत छोड़ो आंदोलन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनका जीवन राष्ट्रहित, सामाजिक सरोकार और पत्रकारिता के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के सजग प्रहरी है। यह आवश्यक है कि जनहित से जुड़े विषयों को प्रमुखता से सामने लाएं और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सजग एवं निर्भीक भूमिका निभाएं। स्वर्गीय  माहेश्वरी ने अपने कार्यों से पत्रकारिता के इसी दायित्व को मजबूत किया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि मार्ग का नाम स्वर्गीय  माहेश्वरी के नाम पर होना उनके योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इस मार्ग से गुजरने वाले लोग उनके नाम और योगदान से परिचित होंगे। जब-जब कोई व्यक्ति इस मार्ग से निकलेगा, स्वर्गीय  माहेश्वरी के आदर्शों और राष्ट्रसेवा के प्रति उनके समर्पण का स्मरण होगा। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि भारत की संस्कृति में ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना निहित है। भारत शांति, मानव कल्याण और विश्व बंधुत्व की भावना के साथ विश्व का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के निर्माण में पत्रकारिता सहित समाज के प्रत्येक क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है और ऐसे महान व्यक्तित्वों का स्मरण हमें राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में नवभारत के एमडी  सुमित माहेश्वरी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, मीडिया प्रतिनिधि एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से जशपुर में महुआ को मिल रहा नया स्वरूप, जशप्योर और जय जंगल के प्रयासों से जनजातीय परिवारों एवं महिला स्वसहायता समूहों के लिए आजीविका की नई संभावनाएं

रायपुर  कभी जंगलों में सहज रूप से मिलने वाली वन उपज और पारंपरिक उपयोग तक सीमित महुआ आज नए रूप, नई पहचान और नई संभावनाओं के साथ बाजार तक पहुंच रहा है। जशपुर में महुआ को केवल वन उपज के रूप में नहीं, बल्कि खाद्य नवाचार, मूल्य संवर्धन, अनुसंधान और जनजातीय आजीविका के अवसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में स्थानीय संसाधनों को आधुनिक बाजार से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों ने महुआ की पहचान को नई ऊंचाई दी है। इसी बदलाव की झलक रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में आयोजित 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में देखने को मिली, जहां जशप्योर और जय जंगल के स्टॉल पर जशपुर के महुआ आधारित उत्पादों ने आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया। 18 से 20 सितंबर तक आयोजित इस मेले में बड़ी संख्या में लोगों ने महुआ से तैयार विभिन्न खाद्य उत्पादों को देखा, उनके बारे में जानकारी ली और उनकी गुणवत्ता, स्वाद तथा आधुनिक पैकेजिंग की सराहना की। महुआ की बदली तस्वीर, पारंपरिक वन उपज से आधुनिक फूड प्रोडक्ट तक महुआ का नाम सुनते ही लंबे समय तक लोगों के मन में इसकी पारंपरिक उपयोगिता की ही तस्वीर उभरती रही। जशपुर में इसी धारणा को बदलते हुए महुआ को आधुनिक खाद्य उत्पादों के रूप में विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है। अब महुआ केवल जंगल से संग्रहित होने वाली वन उपज नहीं, बल्कि प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और मूल्य संवर्धन के जरिए बाजार में अपनी अलग पहचान बनाने वाला उत्पाद बन रहा है। इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर के हॉल नंबर-3 के स्टॉल नंबर 4 एवं 5 पर महुआ नेक्टर, महुआ नेक्टर गोल्ड, वन्यप्राश, महुआ एनर्जी पाचक, महुआ टी, महुआ आधारित कुकीज़, रागी-महुआ उत्पाद, महुआ लड्डू और फूड-ग्रेड महुआ फूल सहित अनेक उत्पाद प्रदर्शित किए गए। उत्पादों की विविधता के साथ उनकी आकर्षक पैकेजिंग और आधुनिक प्रस्तुति ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया कि जंगलों से मिलने वाला पारंपरिक महुआ आधुनिक खाद्य बाजार में इतने नए रूपों में भी अपनी जगह बना सकता है। कई आगंतुकों ने पहली बार महुआ को इतने विविध खाद्य स्वरूपों में देखा। उत्पादों की प्रस्तुति और स्वाद ने यह संदेश दिया कि यदि स्थानीय संसाधनों को उचित तकनीक, गुणवत्ता और बाजार की समझ के साथ जोड़ा जाए, तो ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की पारंपरिक उपज भी व्यापक बाजार तक पहुंच सकती है। जशप्योर बना स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन का माध्यम जशपुर की पहचान केवल अपने जंगलों और प्राकृतिक संपदा से नहीं, बल्कि यहां के लोगों के पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय संसाधनों से भी जुड़ी है। इसी स्थानीय ताकत को आर्थिक अवसरों में बदलने की दिशा में जशप्योर के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। जिला प्रशासन, स्थानीय समुदाय, महिला समूहों, उत्पादक संस्थाओं और तकनीकी संस्थानों के साझा प्रयासों से महुआ सहित स्थानीय वन उपज के संग्रहण, प्रसंस्करण, उत्पाद विकास और बाजार से जुड़ाव पर काम हो रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय संसाधनों को स्थानीय स्तर पर ही अधिक मूल्यवान बनाना और उनसे जुड़े परिवारों के लिए बेहतर आजीविका के अवसर तैयार करना है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में स्थानीय एवं जनजातीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन और उन्हें व्यापक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। जशपुर में महुआ को लेकर हो रहे प्रयास इसी सोच को जमीन पर साकार करते हुए दिखाई देते हैं। पेड़ से बाजार तक तैयार हो रही पूरी वैल्यू चेन महुआ की कहानी केवल उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे पेड़ से बाजार तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने का प्रयास है। स्वच्छ और फूड-ग्रेड संग्रहण से लेकर डिहाइड्रेशन, प्रसंस्करण, अनुसंधान, गुणवत्ता सुधार, उत्पाद विकास, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक प्रत्येक चरण को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। जिला प्रशासन जशपुर के सहयोग से संचालित Mahua Centre of Excellence और ‘Mahua Kosh’ में महुआ के खाद्य उपयोग, नए उत्पादों, फूड-ग्रेड कलेक्शन, डिहाइड्रेशन और प्रसंस्करण तकनीक सहित विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान एवं प्रयोग किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का व्यापक उद्देश्य महुआ की गुणवत्ता और बाजार मूल्य बढ़ाने के साथ इससे जुड़े जनजातीय परिवारों और महिला स्वसहायता समूहों के लिए आय के नए अवसर तैयार करना है। जब जंगल में संग्रहित होने वाली उपज को वैज्ञानिक तरीके से तैयार कर बाजार तक पहुंचाया जाता है, तो उसका लाभ केवल अंतिम उत्पाद तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी मूल्य श्रृंखला से जुड़े लोगों तक पहुंचने की संभावना बनती है। पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ रही नई पीढ़ी इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में जशप्योर एवं जय जंगल के स्टॉल का प्रतिनिधित्व जशपुर की अनेश्वरी भगत और गणपति बाई कर रही थीं। वे आगंतुकों को केवल उत्पादों की जानकारी ही नहीं दे रही थीं, बल्कि यह भी बता रही थीं कि महुआ का संग्रहण किस तरह किया जाता है, उसे फूड-ग्रेड बनाने के लिए किन प्रक्रियाओं को अपनाया गया है और किस प्रकार पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक फूड प्रोसेसिंग से जोड़ा जा रहा है। यह तस्वीर जशपुर में हो रहे बदलाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी है—जहां जंगल से जुड़ा पारंपरिक ज्ञान अब आधुनिक उत्पाद विकास और बाजार की जरूरतों के साथ जुड़ रहा है। अनुसंधान से पोषण की नई संभावनाओं की तलाश महुआ के खाद्य उपयोग के विस्तार के साथ इसके पोषण संबंधी पहलुओं पर भी अनुसंधान की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। जय जंगल के निदेशक समर्थ जैन ने बताया कि ग्राहकों से महुआ के सेवन के बाद आयरन और हीमोग्लोबिन से जुड़े सकारात्मक अनुभवों की बातें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन अनुभवों को वैज्ञानिक रूप से समझना जरूरी है और महुआ में आयरन की मात्रा के साथ शरीर में उसकी उपलब्धता एवं उपयोगिता का व्यवस्थित अध्ययन अगला महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यदि वैज्ञानिक अध्ययन इन अनुभवों के पीछे ठोस आधार स्थापित करते हैं, तो महुआ पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण वन उपज के रूप में नई संभावनाएं प्रस्तुत कर सकता है। उनका प्रयास जशपुर के जंगलों में उपलब्ध इस वन उपज को अनुसंधान, बेहतर प्रसंस्करण और नए उत्पादों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाना है। जशपुर के जंगलों से देश-दुनिया तक पहुंचने की राह 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में जशपुर के महुआ उत्पादों … Read more

हरपाल चीमा के नाम को लेकर सियासत तेज, संजय सिंह ने BJP-अकाली दल पर उठाए सवाल

चंडीगढ़. आम आदमी पार्टी ने पंजाब को बदनाम करने के लिए साजिश रच रही भाजपा, अकाली और कांग्रेस को लेकर बड़ा खुलासा किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने कहा कि जिस जग्गा सिंह को भाजपा अपना ‘‘भाई’’ बता रही है, वह नशा तस्कर है और उस पर एनडीपीएस समेत 9 केस दर्ज हैं, जबकि मोहन जीत सिंह पर भी 8 केस दर्ज हैं। विपक्ष दलों ने गुलजार सिंह पर भी दबाव बनाकर ‘‘आप’’ के खिलाफ बयान दिलवाया। ये लोग पंजाब को बदनाम करने के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं। आज जब भगवंत मान सरकार अभियान चलाकर अकाली दल, भाजपा और कांग्रेस की सरकारें में लाए गए नशे का खात्मा कर रही है तो इसे रोकने के लिए सभी एकजुट हो गए हैं। लेकिन आम आदमी पार्टी पंजाब को बदनाम करने की भाजपा, कांग्रेस और अकाली की साजिश को सफल नहीं होने देगी।