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दिसंबर की दस्तक के साथ झारखंड में ठंड तेज, तीन दिन बाद चलेगी शीतलहर

रांची झारखंड में दिसंबर की शुरुआत होते ही कड़ाके की ठंड ने लोगों की रफ्तार पकड़ ली है। रांची, पलामू, लोहरदगा, खूंटी और लातेहार जैसे जिलों में बर्फीली हवाएं हड्डियां जमा रही हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आज न्यूनतम तापमान 10-13 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा, जबकि अधिकतम 24-27 डिग्री तक पहुंचा। इन इलाकों में ठंड का असर सबसे ज्यादा पड़ा जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां में न्यूनतम पारा 16 डिग्री तक दर्ज हुआ, लेकिन ठंडी हवाओं ने सुबह-शाम कंपकंपी बढ़ा दी। रांची के मैक्लुस्कीगंज और कांके में पारा 5 डिग्री तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से रातें और ज्यादा ठंडी होंगी। पिछले 24 घंटे में चाईबासा का अधिकतम तापमान 29.8 डिग्री रहा, जबकि गुमला का न्यूनतम तापमान 8.3 डिग्री दर्ज किया गया। दिन में हल्की गर्माहट महसूस हुई, लेकिन हवा की ठंडक ने स्वेटर पहनना लोगों की मजबूर कर दिया है। रांची, कोडरमा, गढ़वा, लातेहार, गुमला और पलामू में न्यूनतम तापमान 10-11 डिग्री पर अटका रहा, जिससे इन इलाकों में ठंड का असर सबसे ज्यादा पड़ा। हिमालयी प्रभाव से राज्य में शुष्क मौसम बना हुआ है, कोई बारिश की संभावना नहीं। सुबह-शाम गर्म कपड़े, ग्लव्स और मफलर पहनें मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 4 और 5 दिसंबर को कई जिलों में शीतलहर जैसी स्थिति बन सकती है। जिन जगहों पर पारा 4 से 5 डिग्री तक पहुंचेगा, वहां पाला पड़ने की आशंका भी है। सुबह घना कोहरा और धुंध छाएगी, द्दश्यता बेहद कम हो जाएगी। न्यूनतम तापमान 4-8 डिग्री तक गिर सकता है, तेज बर्फीली हवाएं चलेंगी। रांची सहित कई जिलों में अगले चार दिनों तक ठंड और कोहरे का दौर रहेगा। किसानों को फसलों को पाला और ठंड से बचाने की सलाह दी गई है। विभाग ने कहा कि मौसम शुष्क रहेगा, लेकिन ठंड बढ़ने से नुकसान हो सकता है। आम लोगों से अपील है कि सुबह-शाम गर्म कपड़े, ग्लव्स और मफलर पहनें। वाहन चालकों को कोहरे में सावधानी बरतने को कहा गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सर्दी-जुकाम से बचाव के लिए गर्म भोजन करने की आवश्यकता बताया है।  

छत्तीसगढ़ में 49 हजार राशन कार्ड रद्द होने की तैयारी, जल्द कराएं e-KYC नहीं तो बंद होगा मुफ्त राशन

रायपुर छत्तीसगढ़ में राशनकार्ड धारकों को बड़ा झटका लग सकता है. राज्य की सरकार इनके राशनकार्ड निरस्त कर सकती है. इसकी वजह है इन कार्ड का e-KYC नहीं होना. सत्यापन नहीं होने की वजह से ही राशनकार्ड कैंसिल किये जाने की आशंका जाहिर की जा रही है. अगर आपके अपने राशन कार्ड का e-KYC नहीं कराया है, तो आपका कार्ड रद्द हो सकता है. इस जिले में 49 हजार राशन कार्ड होंगे रद्द मिली जानकारी के अनुसार, सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में प्रचलित कुल 222996 राशनकार्डों में कुल 674767 हितग्राही है. जिला खाद्य कार्यालय से प्राप्त जानकारी अनुसार इसमें से कुल 49 हजार हितग्राहियों का e-KYC किया जाना शेष है. इस संबंध में समस्त शासकीय उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से ईकेवायसी किया जाना है. e-KYC के लिए 5 दिसंबर तक दिया समय अतः जिले के समस्त राशनकार्ड हितग्राहियों से अनुरोध है कि अपने नजदीकी शासकीय उचित मूल्य दुकान से सम्पर्क कर अपना E-KYC अनिवार्य रूप से करावें. 05 दिसम्बर 2025 तक जिन राशनकार्ड हितग्राहियों का E-KYC नहीं होने से राशनकार्ड निरस्त होने की संभावना बनी हुई है. e-KYC की जरूरी क्यों? राज्य सरकार ने e-KYC अनिवार्य करने का निर्णय पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी राशनकार्ड रोकने के उद्देश्य से लिया है। अधिकारियों का कहना है कि e-KYC न केवल लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करता है, बल्कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार और योजना लाभों की सही डिलीवरी सुनिश्चित करता है. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर e-KYC न कराने पर राशन वितरण बाधित हो सकता है और लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में समस्या आ सकती है. इसलिए अधिकारियों ने सभी हितग्राहियों से तत्काल दस्तावेज अपडेट करने का अनुरोध किया है.

सर्दी ने पकड़ी रफ्तार: अमृतसर में तापमान गिरेगा, जानें अगले 10 दिनों का मौसम ट्रेंड

अमृतसर गुरु नगरी में दिसंबर की दस्तक के साथ ही ठंड अपना असर दिखाने लगी है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार आने वाले 7 से 10 दिनों में तापमान में और गिरावट दर्ज होगी। दिन का अधिकतम तापमान जहां 20-22 डिग्री सैल्सियस के आस-पास रहेगा, वहीं रात का पारा 6-7 डिग्री तक लुढ़कने की संभावना है। रात व सुबह की ठिठुरन आम दिनों की तुलना में और तेज महसूस होगी। शहर में अधिकतम तापमान लगभग 23 डिग्री व न्यूनतम 6 डिग्री दर्ज हुआ। दिन यहां धूप भी निकलती रही, वहीं हलके काले बादल छाये रहे व ठंडी हवाएं चलती रहीं। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, रातें लगातार ठंडी होती जाएंगी और दिसंबर की शुरुआत में गर्म कपड़ों की जरूरत बढ़ जाएगी। आसमान ज्यादातर साफ रहने की उम्मीद है, हालांकि हल्की धुंध और सर्द हवाएं सुबह-शाम चल सकती हैं। बदलते मौसम के चलते चिकित्सा विशेषज्ञों ने बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। सुबह-शाम बाहर निकलते समय गर्म कपड़ों का उपयोग करना जरूरी बताया गया है। धूप के समय तापमान थोड़ा राहत देता है, लेकिन सूरज ढलते ही ठंड फिर अपना जोर दिखा देती है। बदलते मौसम में रखें खुद का ख्याल आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान में और गिरावट हो सकती है। दिसंबर की शुरुआत अमृतसर के लिए इस बार सामान्य से ज्यादा ठंडी रहने वाली है। जिससे बदलते मौसम में खुद का ध्यान रखे सुबह-शाम गर्म कपड़े पहनें, धूप निकलने पर थोड़ी देर धूप सेकें, रात में बच्चों और बुजुर्गों को विशेष ध्यान रखें,सर्द हवाओं से बचने के लिए टोपी, मफलर और जैकेट का प्रयोग करें।  

शहरों की विकास योजनाएं फोकस में: 11 दिसंबर को सरकार लेगी बड़ा रिव्यू

चंडीगढ़  हरियाणा के शहरों की विकास योजनाओं, सफाई व्यवस्था और अधूरी पड़ी परियोजनाओं को लेकर राज्य सरकार अब पूरी तरह सख्त हो गई है। इसी क्रम में 11 दिसंबर को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा निवास में एक बड़ी समीक्षा बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में राज्य के सभी नगर निगमों एवं नगर परिषदों को अपनी-अपनी प्रगति रिपोर्ट लेकर उपस्थित होना अनिवार्य किया गया है। इस बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रधान सचिव तथा शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण कुमार गुप्ता करेंगे। बैठक को लेकर पहले ही निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि अब केवल कागज़ी प्रगति नहीं, बल्कि जमीन पर हुए कार्यों की स्थिति बतानी होगी। जारी निर्देशों में स्पष्ट कहा गया है कि सभी संबंधित विभाग और अधिकारी अपनी शाखाओं से संबंधित प्रस्तुति 10 दिसंबर सुबह 11 बजे तक जमा करें। निर्धारित समय में रिपोर्ट न देने पर विभागीय रिकॉर्ड में ‘प्रस्तुति उपलब्ध नहीं’ लिख दिया जाएगा। इसका मकसद वर्षों से चल रही ढिलाई पर पूर्ण विराम लगाना है। बैठक में कई महत्वपूर्ण और पुराने लंबित मुद्दों पर सीधे समीक्षा होगी और विभागीय जवाब मांगा जाएगा। स्मार्ट रोड योजना के तहत सभी शहरों में सड़कों की पहचान और कार्य प्रगति पर बैठक में विस्तार से चर्चा होगी। इन मुद्दों पर ली जाएगी रिपोर्ट     स्वामित्व योजना के लंबित मामलों का निपटारा     सफाई व्यवस्था, कचरा निस्तारण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन     अवैध विज्ञापनों पर नियंत्रण और नई व्यवस्था     नगर निगमों की संपत्तियों का उपयोग, किराया वसूली और राजस्व प्रबंधन     आवारा पशुओं पर नियंत्रण और जल निकासी व्यवस्था     स्ट्रॉम वाटर ड्रेनेज सिस्टम और गंदे पानी की निकासी     शहरों में पुस्तकालय, सामुदायिक भवनों और सार्वजनिक स्थलों का विकास     निगमों में फील्ड विजिट अनिवार्य करना ताकि जमीनी हकीकत का पता लगे     नगर निकायों में तैनात मशीनों और कर्मचारियों की कमी, निगरानी व्यवस्था, नागरिक शिकायतों की स्थिति और पारदर्शी टैगिंग प्रणाली पर भी सवाल उठेंगे। स्वच्छता और प्रदूषण पर विशेष निगरानी हरियाणा स्वच्छता अभियान 2025 के तहत शहरों को साफ-सुथरा बनाने की योजना बैठक का प्रमुख मुद्दा होगा। गार्बेज वल्नरेबल पॉइंट्स हटाने, कचरा संग्रहण वाहनों की संख्या, ठोस कचरा प्रबंधन इकाइयों और गंदगी से जुड़े नागरिक शिकायतों पर विभाग की कार्रवाई पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। इसी तरह वायु प्रदूषण को लेकर एनसीआर क्षेत्र में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) लागू करने, एंटी धुंध तोपों की व्यवस्था, पानी का छिड़काव और ईंधन से चलने वाले वाहनों पर नियंत्रण की दिशा में भी कार्यवाही रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अधिकारियों का फील्ड विजिट अनिवार्य सरकार की ओर से निकायों को जारी किए गए मीटिंग नोटिस के अनुसार, अधिकारियों को केवल दफ्तर में बैठकर फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं करने, बल्कि नियमित फील्ड विज़िट करने का आदेश दिया गया है। यह भी कहा गया है कि रिपोर्ट में यह साफ लिखा जाए कि कब कौन-सा क्षेत्र निरीक्षण किया गया और मौके पर क्या स्थिति मिली। अब सीधे कार्रवाई की तैयारी नोटिसों की भाषा और एजेंडा दोनों यह संदेश दे रहे हैं कि अब पुरानी प्रणाली नहीं चलेगी। बैठक के बाद काम में देरी, योजनाओं को अधर में छोड़ने और बार-बार एक जैसे बहाने देने वाले अधिकारी सीधे जवाबदेही के दायरे में आएंगे। हरियाणा सरकार की ओर से यह साफ संकेत है अब विकास योजनाओं की गति धीमी नहीं रहने दी जाएगी। जो काम करेगा, वही सिस्टम में टिकेगा। जिस पर लापरवाही सिद्ध होगी, उस पर कार्रवाई तय है।

राशन कार्ड रद्द होने का खतरा: सांरगढ़-बिलाईगढ़ में सिर्फ 4 दिन बचे, तुरंत करें आवश्यक कार्रवाई

सारंगढ़-बिलाईगढ़ छत्तीसगढ़ के सांरगढ़-बिलाईगढ़ जिला वासियों के लिए एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। 5 दिसंबर तक ई-केवायसी नहीं कराने वालों का राशन कार्ड रद्द होने की संभावना जताई जा रही है। जहां सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत जिले में प्रचलित कुल 222996 राशनकार्डों में कुल 674767 हितग्राही है। जिला खाद्य कार्यालय से प्राप्त जानकारी अनुसार इसमें से कुल 49 हजार हितग्राहियों का ई-केवायसी किया जाना शेष है। इस संबंध में समस्त शासकीय उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से ई-केवायसी किया जाना है। अतः जिले के समस्त राशन कार्ड हितग्राहियों से अनुरोध है कि अपने नजदीकी शासकीय उचित मूल्य दुकान से सम्पर्क कर अपना ई-केवायसी अनिवार्य रूप से करावें। 05 दिसम्बर 2025 तक जिन राशन कार्ड हितग्राहियों का ई-केवायसी नहीं होने से राशन कार्ड निरस्त होने की संभावना बनी हुई है।  

दत्तात्रेय होसबाले का वक्तव्य: हिन्दुत्व को बताया भारत की आत्मा, धर्मांतरण पर कानून की मांग

इंदौर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने 'हिन्दुत्व' को "भारत की आत्मा" बताया और कहा कि कहा कि हिंदुत्व के मुख्य विचारों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है.इंदौर में आरएसएस के शताब्दी संपर्क कार्यक्रम 'प्रमुख जन गोष्ठी' को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जागरूकता, सामाजिक समरसता और कानूनों के सख्त प्रवर्तन के माध्यम से धार्मिक धर्मांतरण की जांच की जा सकती है. होसबाले ने जोर देकर कहा, "हिन्दुत्व भारत की आत्मा है." उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू विचार वह है जहां यह कहा जाता है कि ईश्वर को इस या उस मार्ग से प्राप्त किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि इसी समाज के कारण यह भूमि एक हिंदू राष्ट्र है, जहां संस्कृति की अभिव्यक्ति विविध है लेकिन मूल एक है. धर्मांतरण के लिए सख्त कानून जरूरी धर्मांतरण पर एक सवाल का जवाब देते हुए होसबाले ने कहा, "धर्म जागरण, सेवा कार्य, सामाजिक समरसता, संतों के दौरे और कानूनों के सख्त प्रवर्तन से धार्मिक धर्मांतरण पर रोक लगाई जा सकती है." उन्होंने समझाया कि भारतीय संस्कृति में 'धर्म' की अवधारणा केवल अंग्रेजी शब्द 'Religion' तक सीमित नहीं है, इसे व्यापक अर्थों में समझा जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "ट्रैफिक नियम सबके लिए समान हैं. वाहन 'Religion' है और ट्रैफिक नियमों का पालन करना 'Dharma' है. रिलीजन बदला जा सकता है, लेकिन धर्म नहीं."  उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि धर्म बदलने के पीछे की मंशा गलत है, तो ऐसे कृत्यों को रोकने और सतर्क रहने की आवश्यकता है. वरिष्ठ RSS पदाधिकारी ने यह भी कहा कि सेक्युलरिज्म की अवधारणा पर अडिग रहने के कारण कुछ लोग खुद को हिंदू बताने से हिचकने लगे हैं. उन्होंने जोर दिया कि हिन्दुत्व के मूल विचारों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है.

एयरपोर्ट के लिए उज्जैन में शुरू होगा भूमि अधिग्रहण, AAI और सरकार के बीच MOU के बाद प्रोजेक्ट आगे बढ़ा

उज्जैन   उज्जैन एयरपोर्ट को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य शासन और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के बीच एमओयू के बाद जमीन अधिग्रहण की कवायद शुरु होगी। प्रयास है कि सिंहस्थ से पहले एयरपोर्ट का शुभारंभ हो जाए ताकि महापर्व के दौरान श्रद्धालु और पर्यटकों को हवाई मार्ग से भी सीधे उज्जैन पहुंचने की सुविधा मिल सके। दताना हवाई पट्टी के एयरपोर्ट में विकसित होने के बाद यहां से एटीआर-72 हवाई जहाज उड़ान भर सकेंगे। साथ ही नाइट लैडिंग की सुविधा भी उपलब्ध हो जाएगी। 241 एकड़ जमीन की जरूरत अभी देवास रोड ग्राम दताना में हवाई पट्टी है। जो चार्टड प्लेन की उड़ान के ही उपयोग में आती है। इसे विस्तारित करते हुए यहां एयरपोर्ट बनाया जाएगा। इसके लिए मौके पर करीब 241 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। भू-अर्जन को लेकर प्रशासन ने सर्वे पूरा कर शासन को रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। सर्वे अनुसार भू-अजर्न में करीब 180 किसान व भवन स्वामी प्रभावित होंगे। मुआवजा सहित विकास पर करीब 475 करोड़ रुपए खर्च होने का आंकलन है। सर्वे और एमओयू होने के बाद अब एयरपोर्ट के लिए अगला कदम भू-अर्जन की कार्रवाई का रहेगा। सक्षम स्वीकृति मिलने के बाद संभावना है कि दिसंबर में भू-अर्जन की कार्रवाई शुरू हो जाएगी। कलेक्टर रौशनकुमार सिंह ने बताया, एयरपोर्ट निर्माण को लेकर आवश्यक कार्रवाई प्रचलित है। 950 मीटर का रनवे होगा 1800 मीटर दताना-मताना हवाई पट्टी पर अभी करीब 950 मीटर का रन-वे है। एयरपोर्ट के लिए इसका विस्तार लगभग दोगुना करते हुए इसे 1800 मीटर का बनाया जाएगा। बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंहस्थ-२८ को अब तक का सबसे भव्य व सुविधायुक्त आयोजित करने का लक्ष्य रखा है। सीएम की मौजूदगी में हुआ MOU उज्जैन में एयरपोर्ट को लेकर मप्र शासन और एयरपोट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआइ) के मध्य कुछ सप्ताह पूर्व ही मप्र स्थापना दिवस के अवसर पर भोपाल में एमओयू साइन किया गया है। ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ कार्यक्रम में एमओयू मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू की उपस्थिति में हुआ। हवाई यात्रा के लिए अभी इंदौर एयरपोर्ट का सहारा लेना पड़ता है। सिंहस्थ से पूर्व उज्जैन में एयरपोर्ट बनने से यात्री इंदौर की जगह सीधे उज्जैन पहुंच सकेंगे। सिंहस्थ बाद भी यह उपयोगी साबित होगा। यहां छोटे विमान (एटीआर) उतर व उड़ान भर सकेंगे। अभी नाइट लैंडिंग सुविधा नहीं है। एयरपोर्ट बनने से रात में भी हवाई मार्ग से उज्जैन आना-जाना संभव होगा।

भोपाल वेस्टर्न बायपास के नए अलाइनमेंट को मिली मंजूरी, 36 किमी सड़क के लिए 6000 पेड़ होंगे कटेंगे

भोपाल  भोपाल और सागर में पेड़ों की कटाई को लेकर पिछले दिनों मप्र हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की थी। अधिकारियों ने जब कोर्ट को बताया कि भोपाल में 244 पेड़ों में से 112 को रिलोकेट किया गया है और इसकी तस्वीरें कोर्ट के सामने पेश की गईं तो कोर्ट इन्हें देखकर भड़क गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे ट्रांसप्लांटेशन से पेड़ नहीं बचते, मर जाते हैं। कोर्ट की यह टिप्पणी इस समय इसलिए मायने रखती है, क्योंकि भोपाल में वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट को सरकार ने मंजूरी दे दी है। करीब 36 किमी लंबे इस बायपास के निर्माण के लिए 6 हजार से ज्यादा पेड़ों को काटा या शिफ्ट किया जाएगा। हालांकि, विभागीय सूत्रों का कहना है कि कम से कम पर्यावरणीय नुकसान को देखते हुए बायपास के नए अलाइनमेंट को मंजूरी दी गई है। वहीं भोपाल के अमझरा गांव में 90 हेक्टेयर जमीन वन विभाग को दी गई है। पर्यावरण के जानकारों का कहना है कि 6 हजार पेड़ों को काटने के बाद जो नुकसान होगा, उसकी भरपाई इतनी जल्दी नहीं हो सकेगी। बहरहाल, वेस्टर्न बायपास के 4 हजार रुपए करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार ने 2981 करोड़ रुपए की प्रशासकीय मंजूरी भी जारी की है। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर बनने वाली यह सड़क न केवल भोपाल को ट्रैफिक जाम से निजात दिलाएगी, बल्कि इंदौर, जबलपुर और नर्मदापुरम के बीच एक हाई-स्पीड कॉरिडोर भी बनेगा.। पहले जानिए क्यों बदला वेस्टर्न बायपास का अलाइनमेंट पहले यह बायपास मंडीदीप के पास इकायाकलां से शुरू होकर फंदा तक बनना था, लेकिन अब यह 11 मील स्थित प्रतापपुर से शुरू होकर फंदा कलां तक जाएगा। नए रूट में वन क्षेत्र 6.1 किमी से घटकर 5.45 किमी रह गया है। सड़क विकास निगम के अधिकारियों का तर्क है कि रातापानी टाइगर रिजर्व के बफर जोन और समसगढ़ स्थित पुराने शिव मंदिर को बचाने के लिए रूट में बदलाव किया गया है। हालांकि, इस बदलाव के पीछे की कहानी कुछ और ही बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, पुराने रूट पर कई नेताओं, अधिकारियों और रसूखदारों की जमीनें आ रही थीं, जिन्हें बचाने के लिए अलाइनमेंट बदला गया। पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने इस मामले की शिकायत सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रोजेक्ट को जानबूझकर प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए बदला गया है। सड़क के लिए कटेंगे 6463 पेड़ भोपाल वेस्टर्न बायपास का निर्माण पर्यावरण के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 416.25 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है, जिसमें लगभग 45 हेक्टेयर वन भूमि भी शामिल है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस भूमि पर मौजूद 6463 पेड़ों को या तो काटा जाएगा या फिर उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। वन विभाग ने पेड़ों की कटाई की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी है। इसके तहत क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए भोपाल के अमझरा गांव में 90 हेक्टेयर भूमि वन विभाग को उपलब्ध कराई गई है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि हजारों पुराने और घने पेड़ों के कटने से होने वाले पारिस्थितिक नुकसान की भरपाई महज नए पौधे लगाकर नहीं की जा सकती। यह बायपास कोलार और हुजूर तहसील के उन इलाकों से गुजरेगा, जो अपनी हरियाली के लिए जाने जाते हैं। बाघों के मूवमेंट के लिए 1.5 किमी लंबे पुल बनेंगे चूंकि नया रूट भी रातापानी टाइगर रिजर्व के बफर जोन के करीब से गुजर रहा है, इसलिए वन्यजीवों, विशेषकर बाघों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।     वाय-डक्ट का निर्माण: बाघों और अन्य वन्यजीवों के सुरक्षित मूवमेंट के लिए 6 अलग-अलग स्थानों पर कुल 1480 मीटर लंबे वाय-डक्ट (ऊंचे पुल) बनाए जाएंगे। इससे जानवर नीचे से बिना किसी बाधा के आवाजाही कर सकेंगे और ट्रैफिक ऊपर से गुजरता रहेगा।     साउंड प्रूफ फेंसिंग: पूरे बायपास को साउंड प्रूफ बनाया जाएगा। सड़क के दोनों ओर 10 मीटर ऊंची फेंसिंग की जाएगी, ताकि वाहनों के शोर से वन्यजीव परेशान न हों और वे सड़क पर न आ सकें। अब जानिए बायपास के फायदे पर्यावरणीय चिंताओं के बावजूद इस बायपास के बनने से भोपाल और आसपास के क्षेत्र को 4 बड़े फायदे होंगे…     समय और ईंधन की बचत: इंदौर जाने वाले वाहनों को अब शहर के अंदर से नहीं गुजरना पड़ेगा, जिससे उनकी दूरी 21 किलोमीटर कम हो जाएगी। डेढ़ घंटे का सफर महज 30 मिनट में पूरा होगा।     हाई-स्पीड कनेक्टिविटी: यह बायपास निर्माणाधीन इंदौर-भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड 6-लेन हाईवे से जुड़ेगा, जिससे माल ढुलाई और आना-जाना आसान होगा।     शहर को जाम से मुक्ति: भारी वाहन शहर के बाहर से ही निकल जाएंगे, जिससे भोपाल वासियों को ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी।     एयरपोर्ट तक सीधी पहुंच: जबलपुर, मंडीदीप और नर्मदापुरम से आने वाले वाहन बिना शहर में प्रवेश किए सीधे एयरपोर्ट पहुंच सकेंगे। जनवरी से शुरू होगी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया राज्य सरकार से सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद अब अगले महीने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में प्रोजेक्ट को अंतिम मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद नए साल में जनवरी से ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस प्रोजेक्ट के लिए 23 गांवों की जमीनें अधिगृहीत की जाएंगी।

ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से इंदौर-उज्जैन की यात्रा होगी आसान और तेज, 48.10 किमी का ब्लू प्रिंट तैयार

इंदौर  सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए इंदौर और उज्जैन के बीच सफर को आसान बनाया जा रहा है। अब एमपीआरडीसी एक नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर तैयार करने जा रहा है। पितृ पर्वत से शुरू होकर चिंतामन गणेश मंदिर के पास सिंहस्थ बायपास तक जाने वाला यह नया हाईवे 48.10 किमी लंबा होगा। निर्माण को लेकर टेंडर खुल गया है। लुधियाना की कंपनी सीगल इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स प्रालि ने सबसे कम बोली लगाई। अधिकारियों के मुताबिक सालभर के भीतर सड़क का काम शुरू किया जाएगा। इन दिनों जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से इंदौर से उज्जैन की यह दूरी महज तीस मिनट में तय की जा सकेगी। हाईवे को एक्सेस कंट्रोल्ड फोरलेन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसकी चौड़ाई 60 मीटर होगी। प्रोजेक्ट पर करीब 2000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। 1089 करोड़ रुपये निर्माण पर और बाकी राशि भूमि अधिग्रहण पर किसानों को दी जाएगी। इंदौर और उज्जैन जिलों में 175 हेक्टेयर से अधिक जमीन लेना है। अकेले इंदौर जिले में ही 650 किसानों की जमीन से सड़क निकाली जाएगी। हातोद और सांवेर तहसील के किसान प्रभावित होंगे। अधिकारियों के मुताबिक अगले कुछ दिनों में जमीन को लेकर सर्वे किया जाएगा। गाइडलाइन पर मुआवजा दिया जाएगा। प्रोजेक्ट हाइब्रिड एन्युटी मोड पर विकसित होगा और कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले वर्ष से निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। एटीएमएस और सीसीटीवी भी पूरे मार्ग पर एटीएमएस सिस्टम और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इससे मार्ग की लगातार निगरानी रखी जा सकेगी। यह व्यवस्था विशेष रूप से सिंहस्थ मेले और वीआईपी मूवमेंट के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन को काफी सुगम बनाएगी। इसके साथ ही मौजूदा इंदौर-उज्जैन रोड पर वाहनों का दबाव कम होगा, जिससे यात्रियों को बेहतर और तेज यात्रा अनुभव मिलेगा। चार स्थानों से होंगी एंट्री ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का ब्लू प्रिंट तैयार हो चुका है। हाईवे को जोड़ने के लिए चार स्थानों से वाहनों की एंट्री रखी जाएगी, जिसमें इंदौर और उज्जैन के अलावा वेस्टर्न बायपास क्रासिंग और उज्जैन-बदनावर रोड क्रासिंग भी शामिल है। सड़क जंबूड़ी हप्सी, हातोद, कांकरिया बोर्डिया, पोटलोद, मगरखेड़ी, लिंबा पीपल्या समेत कई गांवों से होकर निकलेगा, जबकि हाईवे पर टोल व्यवस्था मौजूदा स्टेट हाईवे की तरह होगी। इसमें इंदौर और उज्जैन दोनों ओर से अलग-अलग टोल प्वाइंट तय किए जाएंगे। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी     प्रोजेक्ट को लेकर टेंडर निकाले गए हैं। कागजी प्रक्रिया पूरी होने में थोड़ा समय लगेगा। अभी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। सालभर में निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। – गगन भाबर, डिविजनल मैनेजर, एमपीआरडीसी  

थार रेगिस्तान में खुला सोने का खजाना, बाड़मेर करेगा चीन का खेल खत्म; देश की टेक्नोलॉजी और डिफेंस को बड़ा बल

बाड़मेर  पश्चिम राजस्थान का बाड़मेर अब सिर्फ थार नहीं बल्कि दुनिया की नई ‘ऊर्जा राजधानी’ बनकर उभर रहा है. सिवाना की धरती में नियोबियम जैसे रेयर अर्थ खनिजों का ऐसा खजाना मिला है, जिसका घनत्व दुनिया के औसत से 100 गुना ज्यादा बताया जा रहा है. इलेक्ट्रिक कार, रॉकेट साइंस, हाई-टेक डिफेंस सिस्टम और परमाणु ऊर्जा में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ की खोज की जा रही है. चीन जिस रेयर अर्थ मेटल पर दुनिया को सालों से बांधे बैठा है, अब वही धागा बाड़मेर के हाथ में है. सिवाना की चट्टानों में नियोबियम का ऐसा विशाल भंडार मिला है, जिसे भू वैज्ञानिक ‘भविष्य की तकनीक की रीढ़’ मानते हैं. इलेक्ट्रिक कारों से लेकर मिसाइल, रॉकेट और परमाणु ऊर्जा तक हाई-टेक उद्योग में इस्तेमाल होने वाली यह धातु अब चीन के बजाय भारत की धरती से निकलेगी. 100 गुना अधिक घनत्व वाले रेयर अर्थ का खुलासा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की शुरुआती रिपोर्टों ने सिवाना की चट्टानों में नियोबियम और अन्य रेयर अर्थ तत्वों के उच्च घनत्व का खुलासा हुआ है. सिवाना की पहाड़ियों में मिले रेयर अर्थ दुनिया के औसत घनत्व से 100 गुना तक अधिक पाया गया है. अब बाड़मेर न सिर्फ चीन की बढ़त तोड़ देगा बल्कि वैश्विक तकनीकी बाज़ार में भारत को नई ताकत भी देगा. इसके लिए सिवाना के भाटीखेड़ा में एक ब्लॉक का ऑक्शन भी किया जा रहा है. सिवाना में यहां है रेयर अर्थ का भंडार सिवाना के कमठाई, दांता, लंगेरा, राखी, थापन, भाटीखेड़ा, फूलन व डण्डाली में रेयर अर्थ के बड़े भण्डार मिले है. सिवाना के चारों तरफ एक गड्ढेनुमा रचना है, जिसमें ग्रेनाइट और रॉयलाइट व एल्केलाइन आग्नेय चट्टानें हैं. इसे सिवाना रिंग्स कॉम्पलेक्स और मालानी रॉक्स के नाम से भी जाना जाता है. रेगिस्तान में मिले हैं यह रेयर अर्थ बाड़मेर के सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में गैलेनियम, रूबीडियम, इप्रीयम, थोरियम, यूरेनियम, सीरियम, टिलूरियम, यूरेनियम सहित करीब 15 प्रकार के खनिज हैं जो भू-वैज्ञानिकों के मुताबिक लेंथोनोइट ग्रुप के हैं. इसका उपयोग सुपर कंडक्टर, हाई प्लग्स, मैग्नेट, इलेक्ट्रॉनिक पॉलिसिंग, ऑयल रिफाइनरी में केटिलिस्ट, हाईब्रिड कार कंपोनेंट एवं बैटरी के लिए किया जाता है.  कैंसर दवा, बैटरी, लेजर, एरोस्पेस के लिए भी यह उपयोगी है. चीन को मात देंने के लिए मौजूद है रेयर अर्थ के भंडार सिवाना की पहाड़ियों में करीब 900 अरब से अधिक का खजाना छुपा हुआ है. इससे करीब 6 हजार मेट्रिक टन उत्पादन का अनुमान लगाया जा रहा है. बाड़मेर के वरिष्ठ भू वैज्ञानिक सी.पी. दाधीच के मुताबिक सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में भाटीखेड़ा ब्लॉक को ऑक्शन किया जाएगा. यहां चीन को मात देने के लिए विशाल रेयर अर्थ के भंडार मौजूद है.