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आतंकी खतरे पर सख्त हरियाणा सरकार, 150 अधिकारियों के साथ एंटी-टेररिस्ट सेल की होगी स्थापना

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को नए ढांचे और उच्च स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। फरीदाबाद की अल फला यूनिवर्सिटी में संदिग्ध गतिविधि और सामग्री मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे प्रदेश में सतर्कता बढ़ाई है। इसी क्रम में डीजीपी ओपी सिंह ने एंटी टेररिस्ट स्क्वाड अर्थात एटीएस के गठन का विस्तृत प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है। इसे हरियाणा की आतंकवाद-रोधी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव में एटीएस की आवश्यकता, यूनिट की संरचना, मानव संसाधन और संचालन प्रणाली का पूरा खाका शामिल है। सरकार अब यह तय करेगी कि एटीएस का ढांचा उत्तर प्रदेश की तर्ज पर ऑपरेशन आधारित हो या फिर एनसीआर की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए हरियाणा का अलग मॉडल तैयार किया जाए। अधिकारियों का मानना है कि दिल्ली की सीमा, औद्योगिक क्षेत्रों और संवेदनशील गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए हरियाणा-विशेष मॉडल अधिक प्रभावी साबित हो सकता है। इस विषय पर मुख्यमंत्री स्तर पर निर्णय जल्द होने की संभावना है।   अल फला यूनिवर्सिटी मामले के बाद हरियाणा पुलिस ने एनसीआर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है। प्रदेश के 150 थानों को विशेष निगरानी चक्र में शामिल किया गया है। प्रत्येक थाने से एक जवान को प्रतिदिन फील्ड रेकी, संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण और इंटेलिजेंस जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है। यह रिपोर्ट सीधे वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जा रही है।   प्रस्ताव के अनुसार एटीएस को केवल घटना के बाद कार्रवाई करने वाली यूनिट के रूप में नहीं, बल्कि पूर्व-निवारण आधारित एजेंसी के रूप में विकसित किया जाएगा। यूनिट का मुख्य फोकस प्रीवेंटिव इंटेलिजेंस, संदिग्ध गतिविधियों की शुरुआती पहचान और समय रहते कार्रवाई पर रहेगा। मौजूदा सुरक्षा ढांचा अधिकतर पोस्ट इंसीडेंट रिस्पॉन्स पर आधारित है, जिसे वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप उन्नत करने की जरूरत मानी गई है। एटीएस क्यों जरूरी पिछले महीनों में एनसीआर क्षेत्र में संवेदनशीलता बढ़ी है। सीमावर्ती दबाव, साइबर संदिग्ध गतिविधियां और हालिया घटनाओं ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा ढांचे को प्रीवेंटिव मोड में बदलना आवश्यक है। अल फला यूनिवर्सिटी मामले ने यह जरूरत और अधिक स्पष्ट कर दी है। डीजीप ओपी सिंह ने बताया कि एटीएस गठन का प्रस्ताव भेज दिया गया है और अंतिम निर्णय सरकार पर निर्भर करेगा। उनका कहना है कि एटीएस बनने से हरियाणा नई रणनीति और अधिक गति के साथ आतंकवाद-रोधी प्रयासों को लागू कर सकेगा ।

सीएम युवा उद्यमी योजना, रोजगार मेला व ओडीओपी योजना की बढ़ी विश्व स्तर पर प्रतिष्ठा

  ओडीओपी योजना के तहत यूपी के परंपरागत एवं स्थानीय शिल्प को आईआईटीएफ 2025 में मिल रही वैश्विक पहचान आईआईटीएफ 2025 में प्रदेश के युवाओं की भागीदारी बन रही युवाओं की रचनात्मकता और उद्यमशीलता के प्रदर्शन का मंच   लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश एक युवा केंद्रित विकास की लहर का साक्षी बन रहा है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण हमें भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 (आईआईटीएफ) में देखने को मिल रहा है। इस वर्ष आईआईटीएफ 2025 में यूपी की भागीदारी ने न केवल प्रदेश के युवाओं की रचनात्मकता और उद्यमशीलता को उजागर कर रही है, बल्कि योगी सरकार की युवा प्रतिभाओं को नवाचार एवं आत्मनिर्भरता के लिए प्रोत्साहित करने और विकास के अवसर सृजित करने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित कर रही है। सीएम योगी के विजन में प्रदेश में चलाए जा रहे रोजगार मेला, सीएम युवा कार्यक्रम और ओडीओपी योजना उत्तर प्रदेश के युवाओं को सशक्त बना रही हैं। जो न केवल राज्य के युवाओं को नौकरी के अवसर प्रदान करने, उनके कौशल का विकास करने और उनमें उद्यमिता व नवाचार को बढ़ावा दे रही है। जहां रोजगार मेले युवाओं को रोजगार से जोड़ते हैं, तो वहीं सीएम युवा कार्यक्रम का ध्येय उनके कौशल और क्षमताओं को मजबूती प्रदान करना है। सीएम युवा कार्यक्रम प्रदेश के युवाओं को कौशल, मार्गदर्शन और संसाधनों से लैस करता है ताकि वे अपने उद्यमों को शुरू कर सकें ताकि वे ऐसे उद्यम या व्यवसाय स्थापित कर सकें, जो दूसरों के लिए भी रोजगार सृजित कर सकें। सीएम योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना ओडीओपी, उन्हें उनके अपने ही जनपद में स्थानीय कौशलों को सफल व्यवसायों में बदलने में मदद करता है। सीएम योगी की इस योजना का अनुकरण वर्तमान में देश के अन्य राज्य भी कर रहे हैं। आईआईटीएफ में अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने वाले कई युवाओं ने साझा किया कि योगी सरकार की इन योजनाओं ने कैसे उनके स्टार्ट अप आइडिया, उनके परंपरागत व स्थानीय कौशलों को फलते-फूलते उद्यमों में बदलने में मदद की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सपना एक ऐसे भविष्य का है जहां उत्तर प्रदेश के युवा नौकरी तलाशने वाले न होकर नौकरी सृजित करने वाले बनें, जो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में नवाचार और आत्मनिर्भरता को गति दें, साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाएं। योगी सरकार की युवा-अनुकूल नीतियों ने राज्य के विकास को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कौशल उन्नयन से लेकर स्टार्टअप समर्थन तक राज्य प्रशासन ने एक ऐसा वातावरण तैयार किया है जो युवाओं को अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सशक्त बनाता है। राज्य सरकार की ये पहलें केवल व्यक्तियों की मदद ही नहीं कर रही हैं, बल्कि वे उत्तर प्रदेश के समग्र विकास के आधारभूत ढांचे को मजबूत भी कर रही हैं। जिसमें नई विचारधाराएं, तकनीकी नवाचार और ऊर्जावान भागीदारी मुख्यधारा में आ रही हैं। आईआईटीएफ और यूपीआईटीएस जैसे अंतरराष्ट्रीय व प्रतिष्ठित मंचों में राज्य के युवा उद्यमियों की बढ़ती उपस्थिति योगी सरकार की सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता का मजबूत प्रतिबिंब है। जिस तरह से राज्य के युवा आत्मविश्वास के साथ आगे आ रहे हैं, हैंडीक्राफ्ट से लेकर कृषि-आधारित उद्योगों तक विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार ला रहे हैं, उत्तर प्रदेश अवसरों और उद्यमिता का केंद्र बनकर उभर रहा है। योगी सरकार का युवाओं को सशक्त बनाने पर ध्यान एक मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी राज्य की राह प्रशस्त कर रहा है।

घेराव की तैयारी में तनाव: पुलिस ने कई युवा कांग्रेस नेताओं को लिया हिरासत में

जयपुर युवा कांग्रेस के मुख्यमंत्री आवास घेराव के दौरान बुधवार को पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच जमकर धक्का-मुक्की हो गई। युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें शहीद स्मारक पर बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। इससे नाराज कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए और मौके पर तनाव बढ़ गया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदयभानु चिब, प्रदेश अध्यक्ष अभिमन्यु पूनिया सहित कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बसों में भरकर ले जाया गया। युवा कांग्रेस ने वोट चोरी, खराब कानून व्यवस्था और फसल खराबे के मुआवजे सहित कई मुद्दों को उठाते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष अभिमन्यु पूनिया ने कृषि मंत्री किरोड़ी मीणा पर निशाना साधते हुए कहा कि “छापेमारी तो की जा रही है, लेकिन कार्रवाई कहीं नजर नहीं आती।” उन्होंने पूरे राजस्थान में SIR करवाने को अव्यवहारिक बताते हुए हाल ही में हुई BLO की आत्महत्या पर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। हालांकि इस बार पिछले प्रदर्शनों की तुलना में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ कम दिखाई दी। इसका असर प्रदर्शन की अवधि पर भी पड़ा। मुख्यमंत्री आवास कूच का कार्यक्रम महज 8 से 15 मिनट में ही समाप्त हो गया। पुलिस की सख्ती और कम जुटी भीड़ के कारण युवा कांग्रेस का यह घेराव अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाया।

MP अमृतपाल सिंह की रिहाई पर फैसला करीब, 1–19 दिसंबर के बीच मिल सकती है रिहाई की मंजूरी

चंडीगढ़ खडूर साहिब से लोकसभा सदस्य अमृतपाल सिंह ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में पैरोल की मांग करते हुए एक याचिका दाखिल की है। याचिका में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा 15 के तहत अस्थायी रिहाई की मांग करते हुए अमृतपाल सिंह ने कहा है कि उन्हें 1 से 19 दिसंबर तक चलने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में शामिल होना है। इसी लिए इस अवधि के दौरान उन्हें पैरोल देने की मांग की गई है, ताकि वह सांसद के रूप में अपने संसदीय कर्तव्यों का पालन कर सकें। फिलहाल यह याचिका हाई कोर्ट की रजिस्ट्री शाखा में जांच (स्क्रूटनी) के लिए पड़ी हुई है। स्क्रूटनी पूरी होने के बाद ही इसे अदालत के समक्ष सूचीबद्ध (लिस्ट) किया जाएगा।  

पत्नी का हंगामा! चौकी में ही चीटिंग करते ASI की कर दी धुनाई, वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलाया

सतना जिला अस्पताल परिसर में गुरुवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया जब एक महिला ने पुलिस चौकी के अंदर ही अपने एएसआई पति की जमकर पिटाई कर दी। आरोप है कि एएसआई अपनी कथित प्रेमिका और एक बच्चे के साथ पहुंचे थे, तभी पत्नी वहां पहुंच गई और उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। नागौद थाने में पदस्थ एएसआई रामायण सिंह जिला अस्पताल परिसर में एक महिला व छोटे बच्चे के साथ मौजूद थे। इसी दौरान उनकी पत्नी अनीता सिंह अचानक वहां पहुंच गईं। पति को दूसरी महिला के साथ देखकर वह भड़क उठीं और पहले चीख-चिल्लाकर आरोप लगाए, फिर चौकी के अंदर ही एएसआई पर हाथ उठा दिया। चौंकाने वाली बात यह रही कि चौकी में मौजूद पुलिसकर्मी पूरे घटनाक्रम को देखते रहे, लेकिन किसी ने भी बीच-बचाव की हिम्मत नहीं जुटाई। विवाद काफी देर तक चलता रहा और चौकी परिसर में लोगों की भीड़ लग गई।   6 महीने से घर नहीं आ रहे थे ASI रामायण सिंह पत्नी अनीता सिंह ने आरोप लगाया कि एएसआई रामायण सिंह 6 माह से घर नहीं आ रहे थे और न ही परिवार का खर्च वहन कर रहे थे। उन्होंने बताया कि पहले भी एक महिला के फोन आने पर पति जवाब देने से बचते थे। इस मामले की शिकायत उन्होंने एसपी से की थी, लेकिन बाद में परिवार बचाने की कोशिश में शिकायत वापस ले ली थी। एएसआई के बेटे प्रतीक ने बताया कि वह मां के साथ बाजार में था, तभी स्टेशन रोड पर पिता को एक महिला और बच्चे को कार में बैठाकर जाते देखा। पुलिस ने शुरू की जांच संदेह होने पर उनका पीछा किया, जिसके बाद असलियत जिला अस्पताल में सामने आई। वहीं, एएसआई के साथ दिखी महिला का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन वह घटनास्थल से गायब हो गई। पुलिस ने दोनों पक्षों को कोतवाली थाने भेजकर जांच शुरू कर दी है।

माघ मेले की तैयारी पर बड़ा ऐक्शन: प्रयागराज पहुंचेंगे सीएम योगी

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को प्रयागराज दौरे पर रहेंगे और माघ मेले की तैयारी को लेकर आई ट्रिपलसी सभागार में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे, तथा सभी अधिकारियों के साथ मेले को भव्य और दिव्य बनाने की चर्चा करेंगे। योगी शनिवार को एक विवाह समारोह में भी शामिल होने के लिए प्रयागराज पहुंचेंगे। इन कार्यक्रमों में शामिल होंगे सीएम  सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री आई ट्रिपल सी सभागार में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे। उसके उपरांत गंगा पूजन करने के बाद एक शादी समारोह में शामिल होने के बाद वह लखनऊ के लिए प्रयागराज से प्रस्थान करेंगे, जिसको लेकर प्रशासन तैयारी में लगा हुआ है। वहीं, सीएम योगी के दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई है। उनकी सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए है।  बैठक में करेंगे इन मुद्दों पर चर्चा  गौरतलब है कि अगले वर्ष लगने वाले माघ मेले को भव्य और दिव्य बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी प्रयागराज दौरे पर रहेंगे। साथ ही साथ 2024 और 2025 में महाकुंभ के तर्ज पर इस बार का माघ मेला रहेगा। योगी माघ मेले को लेकर पुलिस प्रशासन के साथ भी बैठक करेंगे और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए किस तरीके का इंतजाम किए गए हैं इस पर भी चर्चा कर सकते हैं।  

अगले 48 घंटे स्पर्श दर्शन पर रोक: काशी विश्वनाथ पहुंचे भक्तों के लिए अहम सूचना

काशी  काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में पत्थर (संगमरमर) बदलने का कार्य के चलते अगले दो दिनों तक स्पर्श दर्शन पर रोक जारी रहेगी। इसलिए मंदिर प्रशासन ने कार्य जारी रहने तक स्पर्श दर्शन पर रोक बढ़ा दिया है। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं से प्रशासन ने अनुरोध किया है कि वे असुविधा को देखते हुए सहयोग बनाए रखें।   जानकारी मुताबिक, मंदिर गर्भगृह के फर्श पर पुराने संगमरमर की जगह नया पत्थर लगाने का कार्य बुधवार को शुरू किया गया था। प्रारंभिक योजना के अनुसार, यह कार्य गुरुवार तक पूरा होना था, लेकिन श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या और पांचों पहर की आरती के दौरान अतिरिक्त भीड़ के कारण मजदूरों और तकनीकी कर्मचारियों का काम प्रभावित हुआ। इस वजह से काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने कार्य की अवधि बढ़ाकर शुक्रवार और शनिवार तक बढ़ाने का फैसला लिया। मंदिर के डिप्टी कलेक्टर शंभु शरण ने बताया कि संगमरमर परिवर्तन का यह कार्य मंदिर की समय-समय पर होने वाली नियमित रखरखाव प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि गर्भगृह में अत्यधिक भीड़ और संकुल वातावरण को देखते हुए सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक था। इसी कारण कार्य पूरा होने तक स्पर्श दर्शन को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है। मंदिर में आम दर्शन जारी रहेंगे उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि काशी मंदिर में आम दर्शन जारी रहेंगे और भक्त दूर से विश्वनाथ बाबा के दर्शन कर सकेंगे। केवल मंदिर गर्भगृह में प्रवेश और स्पर्श दर्शन ही प्रतिबंधित रहेंगे। मंदिर प्रशासन ने बताया कि संगमरमर बदलने का काम बेहद सावधानी से किया जा रहा है ताकि गर्भगृह की पवित्रता और संरचना सुरक्षित रहे। विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे भीड़भाड़ के समय धैर्य रखें और सुरक्षा व व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही कार्य पूरा होगा, स्पर्श दर्शन सामान्य रूप से शुरू कर दिए जाएंगे।  

मजीठिया के नज़दीकी पर कानूनी शिकंजा कसता, गिरफ्तारी वारंट जारी

पंजाब  पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। विशेष अदालत ने मजीठिया के साले गजपत सिंह ग्रेवाल की गिरफ्तारी के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दी गई रिपोर्ट और अदालत में दायर आवेदन के आधार पर की गई। विजिलेंस के मुताबिक जांच के दौरान ग्रेवाल की भूमिका संदिग्ध पाई गई और बाद में उनका नाम एफआईआर में जोड़ा गया। जांच अधिकारी इंस्पेक्टर इंदरपाल सिंह ने अदालत में बताया कि ग्रेवाल को कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन वे न तो जांच में पेश हुए और न ही किसी तरह का सहयोग किया। विजिलेंस का कहना है कि ग्रेवाल पर मजीठिया की कथित अवैध संपत्तियों को इकट्ठा करने और उन्हें छिपाने में मदद करने का आरोप है। रिकॉर्ड देखने और दलीलें सुनने के बाद विशेष जज नीतिका वर्मा ने गिरफ्तारी वारंट जारी करने की अनुमति दे दी। जारी किए गए वारंट 29 नवंबर 2025 को रिटर्नेबल होंगे। गौरतलब है कि बिक्रम मजीठिया पहले से आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस की जांच के दायरे में हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, मजीठिया ने लगभग 700 करोड़ रुपये की संपत्ति कथित तौर पर खड़ी की, जो कथित तौर पर 2013 के ड्रग नेटवर्क की कमाई को वैध दिखाकर बनाई गई थी।

इन्फ्रास्ट्रक्चर होगा हाई-टेक प्लानिंग से: हरियाणा सरकार ने लॉन्च किया ‘जिला मॉडल 2.0’

चंडीगढ़  प्रदेश की नायब सरकार ने जिला स्तर पर विकास को लेकर नया अध्याय खोल दिया है। अब तक विकास योजनाओं पर खर्च होने वाला बजट कई दिशाओं में बिखर जाता था, लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 से पूरी व्यवस्था बदलने वाली है। राज्य ने एक ‘जिला मॉडल 2.0’ तैयार किया है, जिसमें पहली बार अलग-अलग सेक्टरों के लिए तय प्रतिशत, स्पष्ट सीमाएं और कड़ी निगरानी की व्यवस्था लागू की जा रही है। यह बदलाव केवल पॉलिसी नहीं, बल्कि गांव और कस्बों की वास्तविक तस्वीर बदलने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने नई पॉलिसी में बजट का 60 प्रतिशत हिस्सा बुनियादी ढांचे पर खर्च करने का निर्णय लिया है। अब जिलों की योजना राशि का 60 प्रतिशत सिर्फ उन कार्यों में लगेगा जिनका जनता रोज उपयोग करती है। इनमें गलियां, नालियां, पेयजल लाइनों का विकास, सिंचाई ढांचा, सड़कें, पुल, स्वास्थ्य केंद्र, ऊर्जा से जुड़े प्रोजेक्ट और पशुधन व बागवानी योजनाएं शामिल हैं। सरकार का तर्क है कि जब तक बुनियादी ढांचा मजबूत नहीं होगा, बाकी विकास अधूरा ही रहेगा। लंबे समय से शिकायत थी कि जिलों में विकास कार्यों का चयन बिना ठोस ढांचे के होता रहा। कई बार पंचायतें अपनी पसंद से काम चुन लेती थीं, तो कई परियोजनाएं डीडीएमसी स्तर पर मंजूर हो जाती थीं, भले वे योजना के मूल उद्देश्य से बाहर हों। इसी वजह से कई जरूरी कार्य अधर में लटके और बजट का बिखराव बढ़ता गया। नई व्यवस्था में यह स्थिति बदल दी गई है। पहली बार सरकार ने स्पष्ट सूची जारी की है कि कौन से कार्य स्वीकार्य हैं और कौन से नहीं। अब किसी भी स्तर पर मनमानी मंजूरियों का रास्ता बंद होगा। सिर्फ जरूरत के हिसाब से मिलेगी मंजूरी सरकार के अनुसार, अब जिला योजनाओं का फोकस जरूरत पर रहेगा, न कि दबाव पर। जनप्रतिनिधियों के दबाव में भी काम नहीं होंगे, बल्कि जनता की वास्तविक जरूरतों के आधार पर निर्णय लिए जाएंगे। फंड का आवंटन इस तरह तय किया गया है कि हर जिला अपनी प्राथमिकता के अनुसार योजना चुने। पिछड़े इलाकों को पहले लाभ मिले। तात्कालिक और महत्वपूर्ण कार्यों को तुरंत स्वीकृति मिले, जबकि कम जरूरी योजनाएं बाद में आएं। सरकार का कहना है कि एक समान फार्मूला सभी जिलों पर लागू नहीं हो सकता, इसलिए हर जिले की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुसार सेक्टर-वार सीमा तय की गई है। शिक्षा, महिला और बाल विकास को तय हिस्सा नई योजना में तीन ऐसे क्षेत्र शामिल किए गए हैं जिन्हें पहले अपेक्षाकृत कम फंड मिलता था। इनमें सामुदायिक भवन, स्कूल–कॉलेज और आंगनवाड़ी व बाल पोषण से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं। नए नियम के अनुसार, इन्हें अब 10-10 प्रतिशत फंड तय रूप से मिलेगा। इससे उन इलाकों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से शिक्षा और सामुदायिक सुविधाओं की कमी झेल रहे थे। जिला योजना में निजी एजेंसियों की एंट्री बंद नीति का यह निर्णय सबसे प्रभावशाली माना जा रहा है। अब जिला योजना के तहत किसी भी प्रोजेक्ट में निजी एजेंसियां सीधे शामिल नहीं होंगी। सभी कार्य डीडीएमसी की निगरानी में सरकारी विभागों के माध्यम से ही होंगे। डीडीएमसी में मंत्री अध्यक्ष, उपायुक्त उपाध्यक्ष होते हैं, जबकि सांसद, विधायक, महापौर और जनप्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल होते हैं। सरकार का मानना है कि इससे जवाबदेही बढ़ेगी और निजी हितों की संभावनाएं खत्म होंगी। फाइल से फील्ड तक ट्रैकिंग मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के अनुसार, निगरानी की कमजोर कड़ी अब समाप्त की जा रही है। नया ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि हर प्रोजेक्ट की शुरुआत, स्वीकृति, लागत और प्रगति ऑनलाइन ट्रैक होगी। डीडीएमसी को नियमित रिपोर्ट देनी होगी। गलत मंजूरियों या लापरवाही पर जिम्मेदारी तय होगी। सरकार इसे ‘स्मार्ट निगरानी तंत्र’ बता रही है। जिला दर जिला बदलेगी तस्वीर पहली बार प्राथमिकता आधारित विकास योजनाओं को लागू किया जा रहा है। अब यह नहीं देखा जाएगा कि कौन किसकी परियोजना आगे बढ़ा रहा है, बल्कि यह देखा जाएगा कि जनता के लिए कौन सा काम जरूरी है। फंड का बिखराव रुकेगा और प्रभाव बढ़ेगा। बजट तय ढांचे में चलेगा, जिससे अधूरे काम रुकेंगे नहीं। गांव और कस्बों की बुनियाद मजबूत होगी और सड़क, पानी, नालियों, पुलों तथा स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं पहले से तेज़ी से सुधरेंगी। अब विकास का केंद्र वे इलाके होंगे जिन्हें लंबे समय से नज़रअंदाज किया जाता रहा।

महिला एवं बाल विकास विभाग पंजाब: 6100 से अधिक आंगनवाड़ी पदों पर सुनहरा मौका

चंडीगढ़  पंजाब सरकार की तरफ से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर के पदों पर बंपर भर्ती निकली है. सामाजिक सुरक्षा एवं महिला बाल विकास विभाग ने कुल 6116 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इसमें 1316 पद आंगनवाड़ी वर्कर (AWW) और 4794 पद आंगनवाड़ी हेल्पर (AWH) के लिए रखे गए हैं. ये सभी पद सिर्फ महिलाओं के लिए हैं और पंजाब के अलग-अलग जिलों के आंगनवाड़ी सेंटर्स में भरे जाएंगे. इस भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया 19 नवंबर 2025 से ही शुरू हो चुकी है. इच्छुक महिला उम्मीदवार 10 दिसंबर 2025 तक ऑफिशियल वेबसाइट sswcd.punjab.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं. आवेदन करने के लिए नीचे दिए स्टेप्स को फॉलो करें. कौन कर सकता है अप्लाई? उम्मीदवार महिला होनी चाहिए. 10वीं तक पंजाबी भाषा पास होना जरूरी है. इसमें अलग-अलग पदों के लिए योग्यता अलग है. अगर आपकी शिक्षा ज्यादा है, जैसे 12वीं, ग्रेजुएशन, BEd या ETT है, तो ये मेरिट में फायदा देगा क्योंकि चयन पूरी तरह मेरिट से होगा. कैसे होगा सेलेक्शन? इस भर्ती की सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी भी तरह की लिखित परीक्षा नहीं होगी और पूरा चयन सिर्फ मेरिट के आधार पर किया जाएगा. मेरिट तैयार करते समय 10+2 पास होने पर 30%, ग्रेजुएशन पर 30%, B.Ed या ETT पर 10% और इंटरव्यू में प्रदर्शन पर 30% वेटेज जोड़ा जाएगा. इन सब को जोड़कर फाइनल मेरिट तैयार की जाएगी. मेरिट में नाम आने के बाद कैंडिडेट्स को काउंसलिंग या इंटरव्यू के लिए ईमेल, कॉल या वेबसाइट के जरिए जानकारी दी जाएगी.