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आचार संहिता प्रभावी: पटना में नहीं बजेगा डीजे, 16 नवंबर तक जश्न पर सख्त मनाही

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों से पहले पटना जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को काबू में रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। चुनाव आयोग के निर्देश पर पटना जिले में आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) को 16 नवंबर तक बढ़ा दिया गया है। इस दौरान किसी भी तरह के विजय जुलूस, राजनीतिक सभा, रैली या डीजे बजाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। जिला प्रशासन ने साफ कहा है कि मतगणना के दिन या उसके बाद किसी भी तरह की भीड़भाड़ या उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पटना जिले की 14 विधानसभा सीटों के लिए मतगणना 14 नवंबर को एएन कॉलेज में होगी। इसी को देखते हुए जिला दंडाधिकारी (DM) ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। आदेश में कहा गया है कि 16 नवंबर तक किसी भी राजनीतिक सभा, जुलूस, प्रदर्शन या धरने पर रोक रहेगी। साथ ही लाउडस्पीकर और साउंड सिस्टम के इस्तेमाल पर भी पाबंदी लागू की गई है। कानून व्यवस्था से समझौता नहीं होगा: डीएम पटना डीएम पटना ने सख्त लहजे में कहा कि, “कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जो भी व्यक्ति या पार्टी नियमों का उल्लंघन करेगी, उसके खिलाफ कार्रवाई तय है।” इसके साथ ही प्रशासन ने सभी उपमंडलीय अधिकारियों (SDO) और पुलिस अधिकारियों (SDPO) को कानून व्यवस्था पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया है। वहीं डिस्ट्रिक्ट कंट्रोल रूम (0612-2219810 / 2219234) को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है ताकि किसी भी घटना पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके

पराली जलाने पर सख्ती: फतेहाबाद में पुलिस के 4 कर्मचारी निलंबित, 23 के खिलाफ कार्रवाई शुरू

फतेहाबाद  पराली जलाने के मामलों को लेकर बीती सायं जिला प्रशासन के अफसरों की वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद बृहस्पतिवार को जिला प्रमुख एक्शन मोड में आ गए हैं। एक तरफ कृषि विभाग ने उपमंडल स्तर से ग्रामीण स्तर के 18 कर्मचारियों को नोटिस जारी किए हैं, जबकि एसपी सिद्धांत जैन ने 4 पुलिस कर्मचारियों को सस्पेंड तथा 23 पुलिस कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके अलावा जिले के तीनो उपमंडलों में नियुक्त एस डी एम ने अपने अपने उपमंडल में पराली जलाने की रोकथाम के लिए ड्यूटी पर लगे दर्जनों कर्मचारियों को नोटिस जारी किया है।

रेलवे अलर्ट: छत्तीसगढ़ में कई ट्रेनों के रूट में बदलाव, 3 रद्द और 2 प्रभावित — जारी हुई सूची

 बिलासपुर छत्तीसगढ़ में एक बार फिर रेल यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल अंतर्गत बिलासपुर–झारसुगुड़ा सेक्शन में चौथी रेल लाइन का निर्माण कार्य जारी है. इसके चलते सारागांव स्टेशन में नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य किया जाएगा, जिसकी वजह से 13 से 17 नवंबर तक कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा. रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है और प्रभावित ट्रेनों की सूची जारी की है. प्रभावित रहने वाली ट्रेनें:     68738/68737 बिलासपुर–रायगढ़–बिलासपुर मेमू पैसेंजर 14 से 17 नवंबर तक रद्द रहेगी.     68736 बिलासपुर–रायगढ़ मेमू पैसेंजर 13 से 16 नवंबर तक रद्द रहेगी.     68735 रायगढ़–बिलासपुर मेमू पैसेंजर 14 से 17 नवंबर तक रद्द रहेगी.     68861 गोंदिया–झारसुगुड़ा मेमू अब केवल बिलासपुर तक ही चलेगी.     68862 झारसुगुड़ा–गोंदिया मेमू का परिचालन बिलासपुर से शुरू होगा. रेलवे ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि यात्रा से पहले समय सारिणी और ट्रेन की स्थिति की पुष्टि अवश्य कर लें.

शीतलहर का कहर: राजस्थान के 9 शहर ठिठुरे, सिरोही में सबसे कम तापमान दर्ज

जयपुर राजस्थान में बर्फीली हवाओं के कारण सर्दी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों तक प्रदेश में ठंड का यही दौर जारी रहने की संभावना है। सीकर में पहले से चल रही शीतलहर का प्रभाव अब झुंझुनूं तक पहुंच गया है। दोनों जिलों में सुबह-शाम तेज ठंडी हवाएं चल रही हैं। मौसम विभाग ने सीकर और झुंझुनूं के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। नौ शहरों में तापमान सिंगल डिजिट में पिछले 24 घंटों के दौरान राजस्थान के 9 शहरों का न्यूनतम तापमान सिंगल डिजिट में दर्ज हुआ। सबसे अधिक ठंड सिरोही में रही, जहां का तापमान 7.5°C रिकॉर्ड किया गया। अन्य शहरों में तापमान इस प्रकार रहा : फतेहपुर (सीकर) – 8.8°C, नागौर – 8.7°C, सीकर – 8.3°C, अलवर – 9.2°C, वनस्थली (टोंक) – 9.4°C, चूरू – 9.5°C, बारां – 9.3°C व करौली में  9.6°C न्यूनतम तापमान रहा। सीकर और आस-पास के इलाकों में सुबह-शाम हल्की शीतलहर और घनी ठंड का असर महसूस किया गया। दिन में धूप से राहत सुबह और शाम की ठंड के बावजूद दिन में लोगों को तेज धूप से राहत मिल रही है। प्रदेश के अधिकांश शहरों में दिन का अधिकतम तापमान 28°C से 31°C के बीच दर्ज किया गया। बुधवार को सबसे अधिक तापमान 32.9°C बाड़मेर में रिकॉर्ड किया गया। राजस्थान के प्रमुख शहरों का तापमान अजमेर में अधिकतम 29.8 और न्यूनतम 12.2 डिग्री सेल्सियस, वनस्थली (टोंक) में 30.6 और 9.4, अलवर में 28.8 और 9.2, जयपुर में 29.2 और 13.6, पिलानी में 31.2 और 10.5, सीकर में 27.8 और 8.3, कोटा में 29.5 और 13.6, चित्तौड़गढ़ में 30.2 और 11.7, उदयपुर में 28.6 और 12.3, बाड़मेर में 32.9 और 17, जैसलमेर में 31.4 और 15, जोधपुर में 31 और 12.7, बीकानेर में 30.2 और 13.6, चूरू में 30.9 और 9.5, गंगानगर में 28.2 और 12.5, नागौर में 29.7 और 8.7, बारां में 29.1 और 9.3, हनुमानगढ़ में 27.7 और 12, जालौर में 30.9 और 11.6, सिरोही में 23.3 और 7.3, फतेहपुर में 29.1 और 8.8, करौली में 28.5 और 9.6, दौसा में 29.7 और 8.8, तापगढ़ में 27.8 और 13.4 तथा झुंझुनूं में 29.1 और 10.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान में और गिरावट होगी तथा रातें और अधिक ठंडी होंगी।

योगी सरकार के सक्रिय प्रयासों से अब किसान फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की ओर हो रहे अग्रसर

मुख्यमंत्री योगी के सख्त निर्देशों का असर, उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में आई उल्लेखनीय कमी योगी सरकार के सक्रिय प्रयासों से अब किसान फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की ओर हो रहे अग्रसर 20 प्रमुख जनपदों में पराली जलाने की घटनाओं में स्पष्ट कमी दर्ज की गई है एटा, कौशांबी, सीतापुर और उन्नाव जैसे जनपदों में सबसे कम पराली जलाने की घटनाएं लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों और सतत मॉनिटरिंग के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। राज्य सरकार के सक्रिय प्रयासों से अब किसान फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की ओर अग्रसर हो रहे हैं। कम हुई पराली जलाने की घटनाएं मथुरा, पीलीभीत, सहारनपुर, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, कौशांबी, एटा, हरदोई, जालौन, फतेहपुर, महराजगंज, कानपुर देहात, झांसी, मैनपुरी, बहराइच, इटावा, गोरखपुर, अलीगढ़, उन्नाव और सीतापुर जैसे कुल 20 जनपदों में पराली जलाने की घटनाओं में स्पष्ट कमी दर्ज की गई है। इसमें भी एटा, कौशांबी, सीतापुर और उन्नाव जैसे जनपदों में सबसे कम पराली जलाने की घटनाएं हुई हैं। यह स्थिति बताती है कि मुख्यमंत्री योगी के निर्देशों का जमीनी असर दिखाई देने लगा है। सेटेलाइट से की जा रही निगरानी सीएम योगी ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को निर्देशित किया था कि पराली जलाने की घटनाओं की सेटेलाइट से निगरानी की जाए। साथ ही किसानों को वैकल्पिक उपायों के प्रति जागरूक किया जाए। प्रशासन द्वारा किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों, कंपोस्टिंग तकनीक और बायो-डीकंपोजर के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जुर्माने और जिम्मेदारी की सख्त व्यवस्था राज्य सरकार ने पराली जलाने वालों के खिलाफ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शुल्क तय किया है। इसके अनुसार, दो एकड़ से कम क्षेत्र पर ₹2,500, दो से पांच एकड़ तक ₹5,000, पांच एकड़ से अधिक पर ₹15,000 क्षतिपूर्ति शुल्क लगेगा। साथ ही प्रत्येक 50 से 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जा रही है, जो अपने क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित करेंगे।

सीएम योगी का बड़ा बयान: यूपी में जनजातीय संरक्षण को मिलेगी नई रफ्तार

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार जनजातियों के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। पहले नौकरी में उनको उचित भागीदारी नहीं मिल पाती थी। उनके कोटे की पूरी सीटें नहीं भर पाती थीं। हमने पुलिस की 60244 भर्तियां की तो इसमें आरक्षित कोटे की सभी सीटें अनुसूचित जातियों और जनजातियों से ही भरी। यह दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं में उनको उचित भागीदारी मिल रही है। उनकी शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है।   उन्होंने कहा कि धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा का जीवन सबके लिए प्रेरणादायी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को पूरा देश जान सके, यह अवसर जनजातीय गौरव पखवाड़ा के माध्यम से पूरे देश को उपलब्ध कराया है। मुख्यमंत्री इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में जनजातीय भागीदारी महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। इस मौके पर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, समाज कल्याण विभाग के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण मौजूद रहे। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सोमवार को जनजातीय संस्कृति, परंपरा और गौरव के रंगों में सराबोर रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर में जनजाति भागीदारी उत्सव का शुभारंभ करते हुए न सिर्फ ढोलक की थाप से कार्यक्रम की शुरुआत की, बल्कि कहा कि जनजातीय समाज भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जिसने हजारों वर्षों तक प्रकृति और परंपरा के संतुलन को बनाए रखा। यह विशेष उत्सव भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है, जो 13 से 18 नवंबर 2025 तक चलेगा। इसमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनजातीय समूहों के लोक कलाकार, कारीगर, छात्र और प्रतिनिधि अपनी कला, संस्कृति और परंपरा का प्रदर्शन करेंगे।  

घाटशिला उपचुनाव का फैसला कल, जनता के जनादेश से तय होगी 13 उम्मीदवारों की किस्मत

घाटशिला घाटशिला विधानसभा उपचुनाव मंगलवार को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त मतदान के साथ सम्पन्न हुआ। शाम 5 बजे तक कुल 74.63 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। अब लोगों का कल का इंतजार है क्योंकि कल सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होगी और यह साफ हो जाएगा कि सीट किसके नाम जाएगी। 15 टेबल पर 20 राउंड में मतगणना की जायेगी सूत्रों के मुताबिक को-ऑपरेटिव कॉलेज में कुल 15 टेबल पर 20 राउंड में मतगणना की जायेगी। सर्विस वोट सुबह 8 बजे से पहले आने वाले मतों में शामिल किए जाएंगे। इसके चलते मतगणना केंद्र पर त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। प्रवेश केवल अधिकृत पासधारी व्यक्तियों को ही मिलेगा और संपूर्ण प्रक्रिया सीसीटीवी निगरानी में होगी। जिला निर्वाचन पदाधिकारी कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि मतगणना प्रक्रिया निर्वाचन की विश्वसनीयता का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। प्रत्येक कर्मी को आयोग के निर्देशों का हूबहू पालन करना होगा। निष्पक्षता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही नहीं हो। बता दें कि घाटशिला विधानसभा सीट पर कुल 73.88 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य के औसत से अधिक है। इस उपचुनाव में कुल 2,55,823 मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें महिलाओं की संख्या 1,30,921 और पुरुष मतदाता 1,24,899 रही। यानी इस बार महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान कर लोकतंत्र की मजबूती का संदेश दिया। इस उपचुनाव में 13 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनकी किस्मत अब EVM (Electronic Voting Machine) में कैद हो चुकी है। अब सभी की निगाहें मतगणना के दिन पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि घाटशिला की जनता ने किसे अपना जनप्रतिनिधि चुना है। मतगणना 14 नवंबर को होगी। झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के आकस्मिक निधन से खाली हुई इस सीट पर अब उनके बेटे सोमेश चंद्र सोरेन मैदान में हैं और भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन ताल ठोक रहे हैं। वैसे तो 13 प्रत्याशी घाटशिला विधानसभा उपचुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला फिलहाल सत्तारूढ़ झामुमो के सोमेश चंद्र सोरेन और भाजपा के बाबूलाल सोरेन के बीच बताया जा रहा है।  

प्रेग्नेंसी में मॉडल की हत्या: कस्टडी में कासिम ने बार-बार क्या कहा? आधार कार्ड और पहचान में था बड़ा खेल

भोपाल    भोपाल में मॉडल खुशबू अहिरवार की मौत के बाद परिवार सदमे में है. खुशबू की मौत के बाद सामने आई पुलिस जांच, परिजनों के गंभीर आरोप और आरोपी कासिम अहमद की गिरफ्तारी के बाद कई बातें सामने आई हैं. कासिम जब खुशबू से मिला था, तो राहुल बनकर मिला था. खुशबू को जब असलियत पता चली तो वह दूर रहने लगी. कासिम जेल गया और जब बाहर आया तो फिर खुशबू के संपर्क में आ गया. उसने खुशबू पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाला था. खुशबू के आधार कार्ड पर बुर्के वाली तस्वीर भी सामने आई है. दरअसल, 9 नवंबर की रात खुशबू अहिरवार की अचानक मौत हो गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि वह प्रेग्नेंट थी और उसकी फैलोपियन ट्यूब फटने से इंटर्नल ब्लीडिंग हुई, जिससे उसकी मौत हुई. हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं है कि खुशबू की ट्यूब फटने की वजह मेडिकल थी या किसी मारपीट का नतीजा. पुलिस ने इस दिशा में जांच शुरू कर दी है और मृतका का विसरा जांच के लिए भेजा गया है.  आधार कार्ड में अपडेट करवाई 'बुर्के वाली' फोटो, 'राहुल' बन कासिम ने खुशबू को फंसाया मॉडल खुशबू अहिरवार की संदिग्ध मौत के मामले में बुधवार को पुलिस ने उसके बॉयफ्रेंड कासिम अहमद को गिरफ्तार कर लिया है. हालांकि यह गिरफ्तारी मौत के मामले में नहीं, बल्कि खुशबू के साथ मारपीट करने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के गंभीर आरोपों के तहत की गई है. इस मामले में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कासिम ने खुशबू पर धर्म परिवर्तन का इतना दबाव बनाया कि उसने उसका आधार कार्ड भी अपडेट करवा दिया और उसमें खुशबू की बुर्के वाली फोटो लगवा दी थी.   झूठा नाम, मारपीट और धर्म परिवर्तन का दबाव खुशबू का अंतिम संस्कार करने के बाद उसके परिजनों ने पुलिस को दिए बयान में कासिम पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. आरोप है कि कासिम ने खुशबू से दोस्ती करते समय अपना नाम 'राहुल' बताया था. जब खुशबू को उसके मुस्लिम होने का पता चला तो वह उससे अलग होना चाहती थी. खुशबू की बहन तारा बाई के मुताबिक, साल 2022 में खुशबू कॉलेज की पढ़ाई के लिए भोपाल आई थी और भानपुर मल्टी में किराए के मकान में रहती थी. पढ़ाई के साथ वह मॉडलिंग करने लगी थी, ताकि अपने खर्च निकाल सके. इसी दौरान उसकी मुलाकात राहुल नाम के युवक से हुई, जो बाद में असल में कासिम अहमद निकला. जब खुशबू को उसकी असली पहचान पता चली, तो उसने उससे रिश्ता खत्म करना चाहा, लेकिन कासिम ने उस पर धर्म परिवर्तन और निकाह के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया. खुशबू के परिवार का दावा है कि जब उसने इनकार किया, तो कासिम ने उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज शुरू कर दी. खुशबू के परिजनों ने जो आरोप लगाए हैं, वे बेहद गंभीर हैं. कासिम ने खुशबू का आधार कार्ड फोटो बदलवा दिया, जिसमें उसे बुर्का पहने दिखाया गया है. परिजनों का आरोप है कि यह कदम कासिम ने जानबूझकर उठाया. पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इसमें किसने और कब बदलाव किया. खुशबू की बहन तारा ने पुलिस को बताया कि 8 नवंबर की रात 11 बजे खुशबू ने उसे फोन किया था. फोन पर उसने कहा कि कासिम मुझे जबरदस्ती उज्जैन ले जा रहा है अपनी मां से मिलाने, मैं नहीं जाना चाहती. इसके कुछ ही देर बाद फोन कट गया. अगले दिन रात 10 बजे खुशबू की बड़ी बहन प्रीति अहिरवार का फोन आया कि खुशबू की बस में मौत हो गई है. प्रीति के मुताबिक, उज्जैन से लौटते वक्त बस में ही खुशबू दम तोड़ चुकी थी. परिवार जब भोपाल पहुंचा तो खुशबू का शव हमीदिया अस्पताल में था. परिजनों की शिकायत के आधार पर भोपाल पुलिस ने कासिम को गिरफ्तार कर लियाहै. पुलिस ने उस पर कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है. इनमें धारा 296, 115(2), 351(2) (भारतीय न्याय संहिता – BNS), मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 की धारा 3/5, अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(5)(क) शामिल है. कासिम की गिरफ्तारी खुशबू की मौत के मामले में नहीं, बल्कि मारपीट, धोखा और धर्म परिवर्तन के दबाव के आरोपों में की गई है. कासिम ने आरोपों से किया इनकार पुलिस हिरासत में कासिम खुद को निर्दोष बता रहा है. वह पुलिस की कस्टडी में बोल रहा था कि मैंने खुशबू से मारपीट नहीं की, न दबाव बनाया. पुलिस हिरासत में कासिम ने मृतका खुशबू के परिजनों के सभी आरोपों से इनकार किया है. वहीं खुशबू के परिवार का कहना है कि कासिम ने उसे पीटा, था धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया. परिवार अब इस मामले में हत्या की जांच की मांग कर रहा है और इसे 'लव जिहाद' का मामला बता रहा है. वहीं, पुलिस का कहना है कि मौत के असली कारण का पता विसरा रिपोर्ट आने के बाद चलेगा. क्या खुशबू की मौत वाकई एक मेडिकल कॉम्प्लिकेशन थी या फिर उसके साथ कुछ और हुआ? क्या आधार कार्ड में फोटो बदलवाने की कहानी धर्म परिवर्तन की बड़ी साजिश का हिस्सा थी? इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं. कासिम गिरफ्तार, आरोपों से इनकार पुलिस हिरासत में कासिम बार-बार यही बोल रहा है कि उसने खुशबू के साथ कभी मारपीट नहीं की. हालांकि, परिजनों के गंभीर आरोपों के आधार पर पुलिस ने कासिम के खिलाफ बीएनएस की धारा 296 (धोखाधड़ी), 115(2), 351 (2), धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 की धारा 3/5 और एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)5(क) के तहत केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है.

उत्तर प्रदेश होगा साझीदार राज्य, 343 ओडीओपी स्टॉल एवं 2750 प्रतिभागी लेंगे भाग

भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 उत्तर प्रदेश की विश्व पटल पर नई आर्थिक उड़ान उत्तर प्रदेश होगा साझीदार राज्य, 343 ओडीओपी स्टॉल एवं 2750 प्रतिभागी लेंगे भाग  आगरा का पेठा, बनारसी हस्तशिल्प, भदोही की कार्पेट और मेरठ के खेल सामान जैसे राज्य के ओडीओपी उत्पादों को मिलेगा वैश्विक बाजार 150 से अधिक युवा स्टार्टअप्स और महिला उद्यमी अतंर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में करेंगे उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व उत्तर प्रदेश के ग्रामीण व स्थानीय उत्पादों को मिलेगा वैश्विक मंच, निर्यात को मिलेगा बढ़ावा  लखनऊ  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की थीम पर आधारित 44वें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले 2025 का आयोजन भारत मंडपम, नई दिल्ली में 14 से 27 नवंबर तक किया जा रहा है। इस वर्ष आयोजित किये जा रहे अतंर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के साथ "साझेदार राज्य" के रूप में भाग ले रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन और मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश 44वें अतंर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में अपनी “लोकल टू ग्लोबल” की आर्थिक रणनीति को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करेगा। जिसका मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश को एक वैश्विक व्यापर के केंद्र के तौर पर विकसित करना, साथ ही प्रदेश के स्थानीय उत्पादों की पहुंच वैश्विक बाजार तक स्थापित करना है। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा इस मेले को राज्य की 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ओडीओपी) योजना, युवा स्टार्टअप्स और बढ़ती हुई महिला उद्यमिता को प्रदर्शित करने के लिये भी की जाएगी।  भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 में उत्तर प्रदेश एक साझीदार राज्य के रूप में शामिल हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “लोकल टू ग्लोबल” की मुहीम को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने के उद्देश्य से राज्य के 2,750 से अधिक प्रदर्शक भागीदारी करेंगे। साथ ही इस मेले में 343 स्टॉल ओडीओपी योजना के अंतर्गत स्थापित किए जायेंगे। व्यापार मेले में राज्य की ओर से लगाये जा रहे ओडीओपी स्टॉल्स में आगरा का पेठा, बनारसी हस्तशिल्प, भदोही की कार्पेट, मेरठ के खेल सामान, कानपुर के चमड़े के उत्पाद, फिरोजाबाद के ग्लासवेयर और सहारनपुर की लकड़ी की कलाकृतियों जैसे उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। आधुनिक पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज के साथ पेश किए जा रहे ये उत्पाद अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में प्रवेश करने की क्षमता रखते हैं। मेले के दौरान विदेशी निवेशकों एवं प्रतिनिधिमंडलों के साथ ओडीओपी उत्पादकों की बी टू बी मीटिंगस का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे राज्य के स्थानीय उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा। यूपी सरकार विशेष तौर पर राज्य के युवा स्टार्टअप्स और महिला उद्यमियों को प्राथमिकता दे रही है। उत्तर प्रदेश से लगभग 150 से अधिक युवा स्टार्टअप्स और महिला उद्यमी भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला में अपनी नवोन्मेषी पहल पेश करने के लिये भेजे जाएगें। ये स्टार्टअप्स न केवल रोजगार सृजन कर रहे हैं, बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं। महिला उद्यमियों की भागीदारी न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी प्रतीक हैं, ये महिलाएं गांवों से निकलकर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रही हैं। मेले में उनके लिए विशेष वर्कशॉप्स और नेटवर्किंग सेशन आयोजित किये जाएंगे, जहां वे  निवेशकों और खरीदारों से प्रत्यक्ष जुड़ेंगी। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 के दौरान ओडीओपी उत्पादों के लिए विशेष 'ग्लोबल मार्केट एक्सेस' सेमिनार किए जाएगें साथ ही डिजिटल शोरूम भी निर्मित किये जाएगें , जो भविष्य में निर्यातकों को राज्य की ओर आकर्षित करेंगे। साथ ही ओडीओपी उत्पादों को लेकर विदेशी दूतावासों और व्यापार मंडलों के साथ समझौतों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 के माध्यम से उत्तर प्रदेश वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य में नई ऊंचाइयों को छूने की तैयारी कर रहा है, जहां राज्य के स्थानीय उत्पाद वैश्विक ब्रांड बनेंगे और राज्य की ग्रामीण इकाईयां वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनेंगी।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने चुना नया अध्यक्ष: रघुराज किशोर तिवारी को मिली कमान

 रीवा  अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष एजी कॉलेज रीवा के प्रोफसर रघुराज किशोर तिवारी को चुना गया है। यह पहला अवसर है जब विंध्य क्षेत्र से किसी को इस संगठन में राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जैसे ही नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की आधिकारिक घोषणा हुई, उनके आवास पर बधाई देने वाले बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कृषि विज्ञान में पीएचडी हासिल जिले के सेमरिया क्षेत्र के कपसा के रहने वाले रघुराज किशोर बीते कई वर्षों से विद्यार्थी परिषद सहित अन्य कई संगठनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। शहर के माडल स्कूल से पढ़ाई करने के दौरान ही वे वर्ष 1987 से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े। एक छात्र कार्यकर्ता के रूप में वे कृषि महाविद्यालय रीवा के छात्र संघ के निर्वाचित अध्यक्ष और महाकौशल प्रांत के प्रदेश सचिव भी रहे। कृषि महाविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद यहीं अध्यापन कार्य भी वह कई वर्षों से करा रहे हैं। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर से कृषि विज्ञान में पीएचडी भी हासिल की। रघुराज किशोर को मिले कई पुरस्कार एक शिक्षक के रूप में रघुराज किशोर को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा विश्वविद्यालय के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार (2014) से सम्मानित किया गया था। प्रतिष्ठित त्रिभुवन विश्वविद्यालय नेपाल द्वारा विशिष्ट वैज्ञानिक पुरस्कार (2016) में प्राप्त हुआ। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 125 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं, कृषि विज्ञान पर तीन पुस्तकें लिखी हैं, 50 से अधिक लघु शोध परियोजनाओं का मार्गदर्शन किया है और तीन डॉक्टरेट शोध प्रबंधों का पर्यवेक्षण किया है। प्रधान अन्वेषक के रूप में उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान फिलीपींस में आयोजित एक संयुक्त अनुसंधान परियोजना में अपने विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया। इससे पहल विद्यार्थी परिषद में वे महाकौशल प्रांत अध्यक्ष और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (2006-09) के रूप में कार्यरत रहे हैं। शिक्षा नीति समिति के सदस्य भी रहे डॉ. रघुराज किशोर तिवारी मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की कार्यान्वयन समिति के सदस्य के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नई शिक्षा नीति में पाठ्यक्रम की रूपरेखा तय करने में उनका बड़ा योगदान रहा है। देश में सबसे पहले नई शिक्षा नीति मध्यप्रदेश में लागू हुई, इसमें शिक्षा विशेषज्ञों की मेहनत अहम रही है। इस टीम में रघुराज किशोर तिवारी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्तमान में वे कृषि छात्र गतिविधियों के प्रमुख सलाहकार और राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद के विशेष आमंत्रित सदस्य हैं।