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योगी सरकार का लक्ष्य, हर पात्र परिवार तक पहुंचे योजनाओं का लाभ

उत्तर प्रदेश में जीरो पॉवर्टी अभियान को मिशन मोड में किया जाए 15 नवंबर तक प्रथम चरण और द्वितीय चरण की योजनाओं के सत्यापन की प्रक्रिया 30 नवंबर तक हो पूरी योगी सरकार का लक्ष्य, हर पात्र परिवार तक पहुंचे योजनाओं का लाभ एक माह का विशेष अभियान चलाकर  सभी पात्र लाभार्थियों को किया जाएगा चिन्हित लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने उत्तर प्रदेश को गरीबी-मुक्त बनाने के अपने संकल्प की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। यूपी में “जीरो पॉवर्टी अभियान” को मिशन मोड में आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी पात्र परिवार को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।      मुख्यमंत्री का कहना है कि इस अभियान का प्रथम चरण सात प्राथमिकता वाली योजनाओं के पूर्ण आच्छादन पर केंद्रित होगा। इनमें राशन कार्ड, दिव्यांगजन पेंशन, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, पीएम किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) शामिल हैं।      सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 15 नवंबर तक प्रथम चरण की सभी योजनाओं का आच्छादन पूरा कर लिया जाए, जबकि द्वितीय चरण के अंतर्गत आने वाली योजनाओं के सत्यापन की प्रक्रिया 30 नवंबर तक हर हाल में पूरी हो जानी चाहिए।       उन्होंने यह भी कहा कि एक माह का विशेष अभियान चलाकर उन सभी पात्र लाभार्थियों को चिन्हित किया जाए, जो किसी कारणवश अभी तक इन प्राथमिकता वाली योजनाओं से वंचित हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि प्रत्येक पात्र परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना ही जीरो पॉवर्टी अभियान का मूल उद्देश्य है।       मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि चिन्हित परिवारों के प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवेदन सुनिश्चित किए जाएं और साथ ही यह भी देखा जाए कि सभी लाभार्थियों के पूरे परिवार का नाम राशन कार्ड में दर्ज हो।        यूपी सरकार की मंशा है कि इस विशेष अभियान के माध्यम से न केवल गरीब परिवारों को सामाजिक सुरक्षा मिले बल्कि उनकी बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति भी सुनिश्चित हो। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए और जिलों में अभियान की प्रभावी मॉनिटरिंग हो।

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला का भी हो रहा आधुनिकीकरण

गोरखपुर में विश्व स्तरीय विज्ञान पार्क बना रही योगी सरकार वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला का भी हो रहा आधुनिकीकरण नक्षत्रशाला परिसर में ही ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के नाम पर बन रहा प्रदेश का दूसरा विज्ञान पार्क 15.89 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा विज्ञान पार्क का निर्माण, 46.88 करोड़ रुपये से नक्षत्रशाला का कायाकल्प ऑडोटोरियम में होगा थ्री डी थिएटर, एक्टिविटी लैब और साइंस गैलरी भी होगी तारों की दुनिया की आभासी यात्रा करने के साथ खेल-खेल में विज्ञान सीखेंगे बच्चे गोरखपुर  योगी सरकार गोरखपुर में विश्व स्तरीय ज्ञान विज्ञान पार्क बनवा रही है। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला में ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के नाम पर बन रहे ज्ञान विज्ञान पार्क का निर्माण मार्च 2026 तक पूर्ण होना प्रस्तावित है। यह प्रदेश का दूसरा विज्ञान पार्क होगा। इसके निर्माण पर 15 करोड़ 89 लाख रुपये की लागत आएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशानिर्देश पर 46 करोड़ 88 लाख रुपये की लागत से वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला का आधुनिकीकरण भी कराया जा रहा है। नक्षत्रशाला के कायाकल्प और इसके कैम्पस में ज्ञान विज्ञान पार्क की स्थापना के निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अक्टूबर 2022 में नक्षत्रशाला का दौरा करने के दौरान दिए थे। तब सीएम ने यहां आकर आंशिक सूर्य ग्रहण का नजारा देखा था और नक्षत्रशाला को विश्व स्तरीय स्तर पर अत्याधुनिक बनाने की मंशा जताई थी। उनके निर्देश के बाद डीपीआर बनाकर 5 जुलाई 2024 से नक्षत्रशाला के आधुनिकीकरण और 5 मई 2025 से ज्ञान विज्ञान पार्क के निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ। विज्ञान पार्क का कार्य मार्च 2026 तथा नक्षत्रशाला के आधुनिकीकरण का कार्य दिसंबर 2026 तक पूरा किया जाना है।  नक्षत्रशाला के आधुनिकीकरण और इसके परिसर में ज्ञान विज्ञान पार्क की स्थापना से विद्यार्थी तारों की दुनिया की आभासी यात्रा कर सकेंगे। खेल-खेल में विज्ञान सीख सकेंगे, गूढ़ रहस्यों को समझ सकेंगे। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के प्रभारी डॉ. महादेव पांडेय के मुताबिक आधुनिकीकरण से नक्षत्रशाला को विश्व स्तरीय बनाया जा रहा है। विज्ञान से संबंधित कई विशिष्ट उपकरण मंगाए जा रहे हैं। थ्री डी प्रोजेक्टर लगाने के साथ ही एम्फी थिएटर बनाया जा रहा है। नक्षत्रशाला में स्पेशल साइंस गैलरी बनाई जा रही है। सबसे खास आकर्षण एक्टिविटी लैब होगी। इस लैब में विद्यार्थी कई प्रायोगिक गतिविधियों में शामिल होकर विज्ञान की बारीकियों को सीख सकेंगे।  विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने लिया निर्माणाधीन विज्ञान पार्क और नक्षत्रशाला का जायजा प्रदेश के के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  मंत्री अनिल कुमार ने बुधवार को वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के आधुनिकीकरण कार्य एवं निर्माणाधीन विज्ञान पार्क का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नक्षत्रशाला को आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक उपकरणों से सुसज्जित किया जाए। ताकि विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं आम जनमानस को विज्ञान एवं खगोल संबंधी जानकारी सहज रूप से उपलब्ध हो सके। उन्होंने विज्ञान पार्क के निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्माण एजेंसी को कार्य की गुणवत्ता एवं समयबद्धता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।  उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पार्क का निर्माण इस प्रकार किया जाए कि यह न केवल गोरखपुर, बल्कि पूरे पूर्वांचल क्षेत्र के लिए विज्ञान शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बन सके। उन्होंने कहा कि सीएम योगी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। नक्षत्रशाला एवं विज्ञान पार्क इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

युवा नेतृत्व, अनुशासन और नवाचार का संगम बनेगा 19वां राष्ट्रीय जम्बूरी

61 वर्षों बाद लखनऊ में फिर गूंजेगा राष्ट्रीय जम्बूरी का स्वर युवा नेतृत्व, अनुशासन और नवाचार का संगम बनेगा 19वां राष्ट्रीय जम्बूरी 300 एकड़ की टेंट सिटी में सजेगा स्मार्ट और हरित जम्बूरी मंच 32,000 स्काउट्स और 2,000 विदेशी प्रतिनिधि होंगे सहभागी रोबोटिक्स, डिजिटल स्ट्रीमिंग और तकनीक से परिपूर्ण होगा जम्बूरी स्काउट शिविर सांस्कृतिक संवाद और हरित ऊर्जा का प्रतीक बनेगा लखनऊ जम्बूरी 2025 लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक ऐतिहासिक अवसर की गवाह बनने जा रही है। 61 वर्षों के अंतराल के बाद भारत स्काउट्स और गाइड्स का 19वां राष्ट्रीय जम्बूरी 23 से 29 नवम्बर तक वृंदावन योजना स्थित रक्षा एक्सपो ग्राउंड में आयोजित होगा। यह आयोजन न केवल स्काउटिंग परंपरा का उत्सव है, बल्कि विकसित भारत के युवा नेतृत्व, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना का भी प्रतीक बनेगा। लगभग 300 एकड़ क्षेत्र में फैले इस आयोजन में 32,000 से अधिक प्रतिभागी सम्मिलित होंगे, जिनमें देशभर के स्काउट्स के साथ एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 2,000 प्रतिनिधि भी शामिल हैं। जम्बूरी स्थल पर 3,500 टेंट, 100 रसोई, 4 सेंट्रल किचन, और 30,000 सीटों वाला मुख्य एरीना स्टेडियम तैयार किया जा रहा है, जिसमें आधुनिक एलईडी स्क्रीन, डिजिटल कंट्रोल रूम और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आयोजन को राज्य की संस्कृति, परंपरा और नवाचार की झलक के रूप में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है कुछ समय पूर्व उन्होंने तैयारियों की समीक्षा कर अधिकारियों को निर्देश दिया था कि एक्सपो ग्राउंड में राज्यवार प्रदर्शनियों के साथ ग्लोबल विलेज, 75 वर्ष की स्काउटिंग प्रदर्शनी, एयर अग्निवीर, रोबोटिक्स, सोलर और आर्मी पवेलियन भी लगाए जाएं। जम्बूरी का यह संस्करण तकनीकी दृष्टि से भी ऐतिहासिक रहेगा। पहली बार डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग, आरएफआईडी (RFID)  आधारित स्मार्ट आईडी कार्ड, और व्हाट्सएप कम्युनिकेशन सिस्टम के माध्यम से प्रतिभागियों को रियल-टाइम सूचनाएं मिलेंगी। साथ ही दो दिवसीय ड्रोन शो में सैकड़ों ड्रोन मिलकर स्काउटिंग और युवा सशक्तीकरण की कहानी आकाश में चित्रित करेंगे। युवाओं में नवाचार और नेतृत्व कौशल को प्रोत्साहित करने हेतु आयोजन स्थल पर आईटी एवं एआई हब स्थापित किया जा रहा है। यहां डिजिटल लर्निंग, इनोवेशन, और लीडरशिप से जुड़े वर्कशॉप्स आयोजित होंगे। स्काउट्स को  शिक्षा, रोबोटिक्स, और साइंस एक्सपो के माध्यम से आधुनिक तकनीकों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। सुरक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता के उच्च मानकों को ध्यान में रखते हुए परिसर में 100 बेड का अस्पताल, 16 डिस्पेंसरी, फायर स्टेशन, सीसीटीवी निगरानी तंत्र, और ग्रीन एनर्जी सिस्टम की व्यवस्था की गई है। सम्पूर्ण आयोजन को प्लास्टिक-फ्री, कचरा पृथक्करण और कम्पोस्टिंग आधारित बनाया जा रहा है। लखनऊ जम्बूरी न केवल एक शिविर है, बल्कि यह भारत की युवा शक्ति, सांस्कृतिक विविधता, और सतत विकास के संकल्प का प्रतीक बनेगा। परंपरा, तकनीक और सेवा भावना के इस अद्भुत संगम से यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत सिद्ध होगा।

श्रीराम मंदिर निर्माण के पश्चात अविस्मणीय बनेगा ध्वजारोहण कार्यक्रम

लोकल टू ग्लोबल मिशन की सबसे बड़ी मिसाल बनेगा अयोध्या का ध्वजारोहण समारोह  श्रीराम मंदिर निर्माण के पश्चात अविस्मणीय बनेगा ध्वजारोहण कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीराम मंदिर के शिखर पर फहराएंगे भगवा ध्वज अयोध्या के लोकल उत्पादों को ग्लोबल बना रहे विदेशी पर्यटक  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या की अर्थव्यवस्था एक बार फिर रफ्तार पकड़ने वाली है। 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराएंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इसकी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है। पीएम मोदी के मार्गदर्शन व सीएम योगी के नेतृत्व में रामनगरी नव्यता, दिव्यता व भव्यता के साथ नई आभा बिखेर रहा है। राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में न सिर्फ समूचा भारत, बल्कि विदेशी पर्यटकों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। इससे पूरे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई मिल रही है। विदेशी पर्यटक अयोध्या के लोकल उत्पादों को ग्लोबल बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।  अर्थव्यवस्था को मिल रही है नई ऊंचाई अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के पहले से ही सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में हो रहे दीपोत्सव ने साल दर साल नया कीर्तिमान स्थापित किया और देश-विदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्या की तरफ आकर्षित किया। अब अयोध्या में होने वाले ध्वजारोहण में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे न केवल स्थानीय व्यापारियों के रोजगार में और वृद्धि होगी, बल्कि लघु उद्यमियों और हस्तशिल्पियों के व्यापार को भी गति मिलेगी। होटल और लॉज तेजी के साथ बुक हो रहे हैं। अयोध्या में पर्यटकों की संख्या बढ़ने से रेस्टोरेंट और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की आय में भी वृद्धि होनी है। पर्यटक हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योग के तहत बनने वाली मूर्तियों, बैग, कपड़े और सामानों की बड़ी तादाद में खरीदारी करते हैं। इससे स्थानीय छोटे और मझोले व्यावसायियों को भी बड़ा बाजार मिलता है।  बड़े आयोजनों के समय ट्रांसपोर्ट सेक्टर की भी कमाई में बड़ा उछाल आता है। लाखों की संख्या में तीर्थयात्रियों को भ्रमण करने के लिए ई-रिक्शा, ऑटो, बस, कार और टूरिस्ट बसों की आवश्यकता होती है। ऐसे में टूर-ट्रैवल्स व्यवसाय से जुड़े लोगों की आय में भी वृद्धि होती है।   उत्तर प्रदेश की आय में अयोध्या का बड़ा योगदान    राम मंदिर बनने के बाद अयोध्या ने अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं तो इसका श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जाता है, क्योंकि उनके अथक परिश्रम से ही यह संभव हो सका। अयोध्या का विकास सिर्फ सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना का प्रतीक ही नहीं, बल्कि विकास और समृद्धि का भी परिचायक है। राम मंदिर बनने के बाद 2024 में करीब 16.44 करोड़ तीर्थयात्रियों ने रामलला के दर्शन किए, जो अपने आप में रिकॉर्ड है। जनवरी-जून 2025 में अयोध्या में रिकॉर्डतोड़ 23.82 करोड़ से अधिक तीर्थयात्री आ चुके हैं। इसकी वजह से अयोध्या की अर्थव्यवस्था तेजी के साथ बढ़ रही है। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पर्यटकों की संख्या में 40%-50% की तेजी आई है।  स्थानीय हस्तशिल्पकारों की आय में वृद्धि अयोध्या विकास और समृद्धि के लिए देश में रोल मॉडल बन चुकी है। मंदिर पर्यटन के क्षेत्र में अयोध्या ने एक रिकॉर्ड बनाया है। बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के आने से स्थानीय हस्तशिल्पकारों को भी काफी रोजगार मिल रहा है। हथकरघा उद्योग भी फल-फूल रहा है। राम मंदिर निर्माण के बाद स्थानीय हस्तशिल्पकारों की संख्या में 25% से अधिक वृद्धि देखी गई है। इनकी आय भी कई गुना बढ़ गई है। पहले रोजाना इनकी आमदनी 200-300 रुपये थी, अब ये 1000 से 1500 रुपये कमा रहे हैं। विशेष दिनों में तो इनकी कमाई कई गुना बढ़ जाती है। इसी तरह दीपोत्सव के दौरान स्थानीय कारोबारियों के साथ ही निम्न आय वालों (कुम्हार, फूल, नाविक आदि) को भी बड़ी आय हुई। दीपोत्सव के दौरान लाखों पर्यटक अयोध्या आए थे। 90 फीसदी होटल बुक थे। रेस्टोरेंट, प्रसाद की दुकानों, फोटो और मूर्तिकारों ने बड़ा मुनाफा कमाया। अयोध्या में दीपोत्सव के दौरान 5 करोड़ से ज्यादा की आय दर्ज की गई।  तीर्थयात्रा से जुड़े उद्योगों को बड़ा मुनाफा अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद तीर्थयात्रा से जुड़े उ‌द्योगों का वार्षिक कारोबार दिनों दिन बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में केवल आर्थिक विकास ही नहीं हुआ, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिल रही है। उत्तर प्रदेश में मंदिर और उससे जुड़ी गतिविधियों ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में करीब ₹1.25 लाख करोड़ का योगदान किया है। आंकड़ों के मुताबिक 2023 में अयोध्या आने वाले पर्यटकों की संख्या 5.76 करोड़ थी, जो 2024 में बढ़कर 16.44 करोड़ तक पहुंच गई।   ODOP से  अयोध्या के उत्पाद विदेश पहुंचे ODOP के तहत अयोध्या के हथकरघा और अन्य उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं। अयोध्या में पीढ़ियों से पारंपरिक रूप से गुड़ बनाने की प्रक्रिया चली आ रही है । इस जनपद की कुल कृषि योग्य भूमि के 20 % भाग पर गन्ने की खेती होती है । यह जनपद गुड़ और इससे जुड़े अन्य उत्पाद यथा गज़क, लड्डू , चिक्की , गुड़ के लड्डू इत्यादि तैयार करता है । अयोध्या आने वाले पर्यटक गुड़ और उससे जुड़े उत्पाद भी खरीदकर अपने साथ ले जाते हैं। इससे गन्ना उत्पादकों और गुड़ कारोबारियों को भी लाभ हो रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे उत्सव का शुभारंभ, जनजातीय समाज को समर्पित होगा पूरा सप्ताह

धरती आबा बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती पर जनजाति भागीदारी उत्सव से गूंजेगा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे उत्सव का शुभारंभ, जनजातीय समाज को समर्पित होगा पूरा सप्ताह 13 से 18 नवम्बर तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान बनेगा जनजातीय संस्कृति का संगम स्थल देशभर की जनजातियों के लोकनृत्य, लोकगीत और शिल्पकला से सजेगा छह दिवसीय महोत्सव अरुणाचल प्रदेश बनेगा सह-आमंत्रित राज्य, पूर्वोत्तर भारत की झलक पेश करेगा विशेष मंडप 1090 चौराहे से निकलेगी भव्य सांस्कृतिक समागम शोभा यात्रा, जनजातीय रंगों से सजेगी राजधानी मुखौटा प्रदर्शनी, धरती आबा नाटक, माटी कला और जनजातीय व्यंजनों का ‘जेवनार’ बनेंगे उत्सव के आकर्षण शिल्प मेला से लेकर सांस्कृतिक संध्या तक, जनजातीय आत्मगौरव का होगा भव्य उत्सव जनजातीय समाज के उत्थान और आत्मनिर्भरता के लिए संकल्पबद्ध है योगी सरकार प्रधानमंत्री वन धन योजना से जनजातीय समुदायों को मिल रहा आजीविका सृजन का नया आधार प्रदेश के 517 जनजाति बाहुल्य ग्रामों में ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ से आया विकास का नया सवेरा वनाधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत बुक्सा, गोंड, बैगा, थारु और सहरिया जनजातियों को मिला आवास का अधिकार मुख्यमंत्री आवास योजना से अब वनवासी परिवारों के जीवन में आया स्थायित्व और सम्मान एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों और जयप्रकाश नारायण सर्वोदय छात्रावासों से जनजातीय बच्चों को मिल रही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा लखीमपुर-खीरी, बहराइच, सोनभद्र और ललितपुर में एकलव्य विद्यालय 09 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में जनजातीय छात्र-छात्राओं को मिल रही निःशुल्क शिक्षा, आवास, वस्त्र और पुस्तकें थारु, बुक्सा, भोटिया, जौनसारी और राजी समेत प्रदेश की जनजातियाँ बन रही हैं ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ की नई शक्ति बलरामपुर के इमिलिया कोडर में थारू जनजाति संग्रहालय स्थापित, मीरजापुर, सोनभद्र और महराजगंज में नए संग्रहालयों की स्थापना प्रक्रियाधीन लखनऊ  धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में राजधानी लखनऊ में गुरुवार से 'जनजाति भागीदारी उत्सव' का भव्य शुभारंभ होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस ऐतिहासिक आयोजन का उद्घाटन करेंगे। छह दिवसीय यह महोत्सव 13 से 18 नवंबर तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित होगा, जो देश की विविध जनजातीय संस्कृतियों का अद्वितीय संगम बनेगा। जनजातीय अस्मिता, कला, परंपरा और जीवन मूल्यों का यह उत्सव “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की भावना को नई ऊंचाई देगा। पूरे सप्ताह राजधानी लखनऊ जनजातीय रंगों से सजेगी। 1090 चौराहे से भव्य सांस्कृतिक शोभा यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें देशभर की जनजातियों के लोकनृत्य, पारंपरिक परिधान, मुखौटे और वाद्ययंत्र झांकियों के रूप में दिखाई देंगे। अरुणाचल प्रदेश इस आयोजन का सह-आमंत्रित राज्य होगा और पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत करेगा। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के प्रांगण में जनजातीय शिल्प मेला, लोकनृत्य-लोकगीत प्रस्तुतियां, मुखौटा प्रदर्शनी, धरती आबा नाटक और माटी कला प्रदर्शन विशेष आकर्षण रहेंगे। साथ ही, जनजातीय व्यंजनों का “जेवनार” (फूड फेस्ट) भी आगंतुकों को वनवासी समाज की परंपरागत स्वाद संस्कृति से परिचित कराएगा। सुबह 11 बजे से मेला और प्रदर्शनी खुलेंगे, जबकि प्रतिदिन शाम 5 से 9 बजे तक सांस्कृतिक संध्या में देश के 18 राज्यों के 600 से अधिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। बता दें कि बीते साढ़े 08 वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जे जनजातीय समाज के समग्र उत्थान को अपनी प्राथमिकता में रखा है। प्रधानमंत्री वन धन योजना के तहत राज्य के जनजातीय समुदायों को आजीविका सृजन का नया आधार मिला है। प्रदेश के 517 जनजाति बाहुल्य ग्रामों में संचालित धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान से विकास और सशक्तिकरण की नई दिशा मिली है। इसी तरह, वनाधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत बुक्सा, गोंड, बैगा, थारु और सहरिया जनजातियों को आवासीय अधिकार प्राप्त हुए हैं, जिससे मुख्यमंत्री आवास योजना के जरिए वनवासी परिवारों के जीवन में स्थायित्व और सम्मान का नया अध्याय जुड़ा है। शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार ने जनजातीय बालकों के भविष्य को मजबूत आधार दिया है। एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय और जयप्रकाश नारायण सर्वोदय छात्रावासों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की नई राह खुली है। लखीमपुर-खीरी, बहराइच, सोनभद्र और ललितपुर में एकलव्य विद्यालय संचालित हैं, जबकि नौ राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में जनजातीय छात्र-छात्राओं को निःशुल्क आवास, वस्त्र, पुस्तकें और शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य की थारु, बुक्सा, भोटिया, जौनसारी और राजी जनजातियाँ आज विकसित उत्तर प्रदेश की नई शक्ति बनकर उभर रही हैं। बलरामपुर के इमिलिया कोडर में थारू जनजाति संग्रहालय स्थापित किया गया है, जबकि मीरजापुर, सोनभद्र और महराजगंज में नए जनजातीय संग्रहालयों की स्थापना प्रक्रिया में है।

वेदांत केवल भारत के लिए नहीं बल्कि समस्त मानवता के लिए : पद्म आचार्य जोनास मसेट्टी

ब्राज़ील के पद्म जोनास मसेट्टी आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा आयोजित प्रेरणा संवाद में हुए शामिल वेदांत केवल भारत के लिए नहीं बल्कि समस्त मानवता के लिए : पद्म आचार्य जोनास मसेट्टी भारतीय संस्कृति जीवंत संस्कृति है : जोनास मसेट्टी अद्वैत के ज्ञान से ही भविष्य की दिशा बदली जा सकती है : स्वामी शुद्धिदानंद अद्वैत दर्शन मानवता के कल्याण का दर्शन है : स्वामी शुद्धिदानंद आईआईटी इंदौर में ‘भावी विश्व का दर्शन ’ विषय पर हुआ संवाद ब्राजील के जोनास ने जैसे ही. .. जय जय हे महिषासुरमर्दिनि… गाया तो तालियों से गूँज उठा सभागार भोपाल आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा उपनिषदों में निहित अद्वैत सिद्धांत को जन-जन तक पहुँचाने के लिये शंकर व्याख्यानमाला, एकात्म संवाद एवं प्रेरणा संवाद जैसे विविध प्रेरक कार्यक्रमों का नियमित आयोजन किया जाता है। इसी श्रृंखला में बुधवार को भारतीय प्रोधौगिकी संस्थान (IIT) इंदौर में प्रेरणा संवाद हुआ। इसमें ‘भावी विश्व का दर्शन’ विषय पर ब्राज़ील के पद्म आचार्य जोनास मसेट्टी और स्वामी शुद्धिदानंद (अध्यक्ष, अद्वैत आश्रम मायावती) ने संवाद किया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक, प्रोफेसर, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे। वेदांत और संस्कृति के माध्यम से विश्व को पुनः जोड़ना आवश्यक : जोनास आचार्य जोनास ने युवाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज की दुनिया में, विशेषकर पाश्चात्य समाज में, लोग धन और सुख की खोज में लगे हैं, पर आत्मिक मूल्य भूल गए हैं। हमारा उद्देश्य वेदांत के ज्ञान को पुनर्जीवित करना और उसे धर्म नहीं, बल्कि मानवता का सार्वभौमिक दर्शन बनाकर प्रस्तुत करना है, जो एक बेहतर व्यक्ति और एक बेहतर समाज का निर्माण करे। भारत अपने उत्सवों, कहानियों, संगीत और कला के माध्यम से संस्कार और अध्यात्म को जन-जन तक पहुँचा सकता है। कल्पना कीजिए, अगर बच्चे उपदेशों से नहीं, बल्कि एनिमेटेड कथाओं और नैतिक कहानियों से मूल्य सीखें, तो यह शिक्षा हृदय में बस जाएगी। वेदांत अलगाव नहीं, एकत्व का दर्शन है। कोई भी अन्य परंपरा इतनी स्पष्टता से यह नहीं कहती कि 'मानवता एक है', जैसा हमारे उपनिषद कहते हैं: “मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव।” यह भारत की आत्मा है, और यह केवल भारत के लिए नहीं ,समस्त मानवता के लिए है। हमें विश्व की सभी संस्कृतियों को इस दृष्टि से जोड़ना है। भारतीय संस्कृति एक जीवंत संस्कृति है। यह ज्ञान (साधना), करुणा और समझ की संस्कृति है। अद्वैत का विचार मानवता के लिए सौगात : स्वामी शुद्धिदानंद स्वामी शुद्धिदानंद ने कहा कि अद्वैत का विचार मानवता के लिए सौगात है। 1200 साल पहले जब लोग स्वार्थ की आंधी में लिप्त हो गए थे और मानव मानवता से विमुख हो गया था उस समय आचार्य शंकर का जन्म होता है और उन्होंने संस्कृति में पहले से मौजूद एकात्म के दर्शन से इस समस्या का समाधान किया। पिछले 200 वर्षों में मानवता विभिन्न विचारधाराओं के साथ प्रयोग कर रही है। उन सभी विचारधाराओं के केंद्र में अर्थ का अर्जन है, और जिन देशों में विचार का केंद्र है, वहां पर मनोवैज्ञानिक समस्या सर्वाधिक है। इस विश्वव्यापी समस्या के समाधान के रूप में भारत का अद्वैत दर्शन सामने आता है। एकात्म धाम प्रकल्प प्रेरक है संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए कोई दर्शन यदि खोजा जाए तो वो अद्वैत दर्शन है। वर्तमान का हिंदू धर्म प्राचीन काल का वैदिक धर्म है। वेद मनुष्य के बाहरी और आंतरिक कल्याण का उपदेश देते है। वेद का संदेश है कि हर आत्म में दिव्यता है और इस दिव्यता का अनुभव करके शक्ति, स्वतंत्रता और निर्भयता को मनुष्य ग्रहण कर सकता है। आत्म संयम के अभ्यास से हम मनुष्य में मौजूद दिव्यता का अनुभव कर सकते है। स्वामी विवेकानंद ने इस दर्शन को विश्व पटल पर प्रस्तुत किया। मध्यप्रदेश शासन के एकात्म धाम प्रकल्प से अन्य प्रदेश सरकारों को प्रेरणा लेनी चाहिए। हमें अपने स्वरूप का ज्ञान पाकर विश्व के कल्याण की कामना करनी चाहिए।इस अद्वैत के ज्ञान से ही भविष्य की दिशा बदली जा सकती है और मानवता के उद्धार के लिए कदम बढ़ाए जा सकते है सुप्रसिद्ध गायक राहुल आर. वेल्लाल आचार्य शंकर विरचित स्तोत्रों का किया गायन कार्यक्रम में कर्नाटक के सुप्रसिद्ध गायक राहुल आर. वेल्लाल आचार्य शंकर विरचित स्तोत्रों एवं भक्ति पदों का सुमधुर गायन किया। उन्होंने गणेश पँचरत्नम,शिव पंचाक्षर स्तोत्र, शिवाष्टकम्, भवानी अष्टक भज गोविन्दम,काल भैरवाष्टक का गान किया। राहुल के गायन से मंत्रमुग्ध हुए श्रोता राहुल आर. वेल्लाल कर्नाटक संगीत के विश्वप्रसिद्ध कलाकार हैं। उन्होंने मात्र चार वर्ष की आयु में संगीत की यात्रा प्रारंभ की। उन्होंने भारत और दस अन्य देशों में प्रस्तुति दी है। हाल ही में अमेरिका के 10 शहरों में उनके संगीत कार्यक्रमों को अभूतपूर्व सराहना मिली। पद्म जोनास मसेट्टी ने भी ब्राजील के लोकगीत के साथ शिव शम्भू -शिव शम्भू का गान किया। आचार्य जोनास मसेट्टी ब्राज़ील में वेदांत का कर रहे प्रचार पद्म आचार्य जोनास लोपेस मसेट्टी वेदांत के प्रतिष्ठित अध्येता एवं शिक्षक हैं। वे स्वामी दयानंद सरस्वती के शिष्य हैं और भारत के कोयंबटूर स्थित आर्ष विद्या गुरुकुलम् में उन्होंने वर्षों तक वेदांत का अध्ययन किया। अध्ययन के पश्चात उन्होंने ब्राज़ील के रियो डी जेनेरो स्थित पेट्रोपोलिस में विश्व विद्या गुरुकुलम् की स्थापना की, जहाँ से अब तक 2,50,000 से अधिक विद्यार्थियों को वेदांत का अध्ययन कराया जा चुका है। उन्होंने एक सफल मैकेनिकल इंजीनियर का पेशेवर जीवन त्यागकर स्वयं को वेदांत के प्रचार-प्रसार के लिये समर्पित किया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और वेदांत के सेतु-समान प्रवक्ता हैं। उनके योगदान की सराहना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में करते हुए उन्हें “अमेरिका में वैदिक संस्कृति के राजदूत” के रूप में संबोधित किया।  

नेशनल लोक अदालत 13 दिसंबर को—बिजली चोरी के मामलों के निपटारे का सुनहरा मौका

भोपाल  नेशनल लोक अदालत 13 दिसंबर 2025 (शनिवार) को आयोजित होगी। लोक अदालत में बिजली चोरी एवं अन्‍य अनियमितताओं के प्रकरण को समझौते के माध्यम से निराकृत किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर द्वारा विद्युत अधिनियम 2003 धारा 135 के अंतर्गत विद्युत चोरी के लंबित प्रकरणों एवं विशेष न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों के निराकरण के लिए विद्युत उपभोक्ताओं एवं उपयोगकर्ताओं से अपील की गई है कि वे अप्रिय कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए अदालत में समझौता करने के लिए संबंधित बिजली कार्यालय से संपर्क करें। विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि धारा 135 के अंतर्गत विद्युत चोरी के बनाए गए लंबित प्रकरण एवं अदालत में लंबित प्रकरणों का निराकरण के लिये निम्नदाब श्रेणी के समस्त घरेलू, समस्त कृषि, 5 किलोवॉट तक के गैर घरेलू एवं 10 अश्व शक्ति भार तक के औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्रकरणों में ही छूट दी जाएगी। प्रि-लिटिगेशन स्तर पर कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 30 प्रतिशत एवं आंकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात् प्रत्‍येक छः माही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।  लिटिगेशन स्तर पर कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 20 प्रतिशत एवं आंकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात् प्रत्येक छःमाही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। कंपनी ने कहा है कि नेशनल लोक अदालत में छूट कुछ नियम एवं शर्तों के तहत दी जाएगी जो आंकलित सिविल दायित्‍व राशि 10 लाख रूपये तक के प्रकरणों के लिए सीमित रहेगी। यह छूट मात्र नेशनल ‘‘लोक अदालत‘‘ 13 दिसंबर 2025 को समझौते करने के लिये ही लागू रहेगी। 

PF खाताधारकों के लिए खुशखबरी! EPFO ने दी 100% निकासी की मंजूरी, ऐसे करें क्लेम

पटना कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अपने सदस्यों के लिए भविष्य निधि (पीएफ) की आंशिक निकासी प्रक्रिया को और सरल एवं उदार बनाया है। संगठन ने पूर्व में लागू 13 अलग-अलग प्रावधानों को घटाकर अब तीन मुख्य आवश्यकताओं – शिक्षा, गृह कार्य एवं विशेष परिस्थितियों – में वर्गीकृत किया है। नई व्यवस्था के तहत सदस्य अब अपनी भविष्य निधि शेष राशि (नियोक्ता और कर्मचारी के अंशदान सहित) का 100 प्रतिशत तक उपयोग इन तीनों जरूरतों में कर सकेंगे। शिक्षा से संबंधित निकासी की सीमा को 3 से बढ़ाकर 10 बार, जबकि विवाह के लिए निकासी की सीमा को 3 से बढ़ाकर 5 बार तक कर दिया गया है। इन सभी प्रकार की निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि 12 माह निर्धारित की गई है। पहले विशेष परिस्थितियों जैसे प्राकृतिक आपदा, कंपनी बंद होने, तालाबंदी, महामारी या सतत बेरोजगारी की स्थिति में दावे के साथ कारण बताना आवश्यक था। अब कारण बताने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, जिससे दावों के निरस्त होने की संभावना कम होगी। संगठन ने यह भी प्रावधान किया है कि सदस्यों के खातों में कम से कम 25 प्रतिशत राशि भविष्य निधि के रूप में सुरक्षित रखी जाए। इसके साथ ही, सम्पूर्ण पीएफ निकासी के न्यूनतम अंतराल को 2 माह से बढ़ाकर 12 माह और पेंशन फंड की निकासी के अंतराल को 2 माह से बढ़ाकर 36 माह कर दिया गया है। पहले सदस्य 2 माह बाद पूरी पेंशन राशि निकाल लेते थे, जिससे नई नौकरी लगने पर सेवा की निरंतरता टूट जाती थी और वे पेंशन लाभ से वंचित रह जाते थे। नई नीति से अब निरंतर सेवा सुनिश्चित होगी और अधिक सदस्य पेंशन के पात्र बन सकेंगे। ईपीएफओ के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-1 हेमन्त कुमार ने बताया कि इस सुधार से निकासी प्रक्रिया पारदर्शी होगी, दावों का शत प्रतिशत निपटारा सुनिश्चित किया जा सकेगा और सदस्यों की शिकायतों में उल्लेखनीय कमी आएगी।  

बीमा कंपनियों पर सरकार की कार्रवाई! किसानों को 30 दिन में मिलेगा इंश्योरेंस भुगतान

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) से जुड़ी शिकायतों और विवादों को सुलझाने के लिए तीन नई समितियां गठित की हैं। ये समितियां न केवल बीमा विवादों के निपटारे पर काम करेंगी, बल्कि तकनीकी सहयोग प्रदान करने और वैज्ञानिक आधार पर प्राकृतिक व जैविक फसलों का मूल्य निर्धारण करने का भी दायित्व निभाएंगी। इन तीनों समितियों की अध्यक्षता कृषक एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव करेंगे। राज्य शिकायत निवारण समिति में कुल 10 सदस्य होंगे, जिनमें कृषि निदेशक, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, बैंकर्स समिति के संयोजक, नाबार्ड के मुख्य प्रबंधक, कृषि विभाग के उप जिला अटॉर्नी, संबंधित जिले के उपनिदेशक कृषि और बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि समिति द्वारा लिए गए निर्णयों को बीमा कंपनियों को 30 दिनों के भीतर लागू करना अनिवार्य होगा। यदि कोई कंपनी आदेशों का पालन नहीं करती, तो निर्णय की तिथि से प्रति दिन दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यह कदम किसानों की शिकायतों के त्वरित समाधान और फसल बीमा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले — भारत की ऋषि परंपरा हमारा गौरव, दद्दा जी से मिलना सौभाग्य की बात

भारत में प्राचीन काल से है ऋषि परंपरा, दद्दा जी से मिलना मेरा सौभाग्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री कटनी में दद्दा जी धाम में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में हुए शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत में प्राचीन ऋषि परंपरा रही है। दद्दा जी ने करोड़ों शिवलिंग निर्माण करवाए। उन्होंने कहा ‍कि दद्दा जी से मिलना मेरे जीवन का सौभाग्य रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सत्संग और भक्ति के माध्यम से समाज को संस्कार दिए। संस्कारों से लोगों के विकार दूर होते हैं और जीवन धन्य हो जाता है। शिव निराकार ब्रह्म हैं। महाकाल की कृपा हम सभी पर है। राज्य सरकार ने भगवान राम और कृष्ण से जुड़े सभी स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कटनी जिले के झिंझरी स्थित दद्दा जी धाम में आयोजित प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव एवं असंख्य पार्थिव शिवलिंग निर्माण महारुद्राभिषेक में ये बातें कहीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गृहस्थ संत पूज्य पंडित देवप्रभाकर शास्त्री दददा जी के समाधि स्थल पहुंच कर पुष्पांजलि अर्पित कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर कटनी जिला एवं प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं जन-कल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पवित्र गीता के विविध पक्षों से विश्व को परिचित कराने के लिए राज्य सरकार लाखों विद्यार्थियों के लिए गीता-ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित करवा रही है। उज्जैन में सिंहस्थ : 2028 के भव्य आयोजन के लिए तैयारियां की जा रही हैं। दद्दाजी का आशीर्वाद हम सभी के साथ है। कटनी के दद्दाजी धाम की प्रतिष्ठा दुनिया में पहुंचेगी। दुनिया सनातन संस्कृति और हमारी तरफ देख रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिरडी सहित अन्य तीर्थ स्थलों की तरह ही कटनी का दददा जी धाम भी भविष्य में देव स्थान के रूप में विख्यात होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान महाकाल और दद्दा जी के आर्शीवाद से हम उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ को भव्यता प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन संस्कृति का पवित्र अनुष्ठान चल रहा है। राज्य सरकार भी इस दिशा मे अनेक कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने इस पवित्र कार्य के लिए संत समाज से मार्गदर्शन करने का आग्रह किया। इसके पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंचासीन धर्माचार्यो और साधु-संतों का सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया। विजयराघवगढ़ विधायक  संजय सत्येन्द्र पाठक नें संबोधित करते हुए दददा जी के व्यक्तिव, कृतित्व व जीवन वृतांत पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि यह महोत्सव धर्म, अध्यात्म और भक्ति का अद्भुत संगम है। यहाँ विश्वकल्याण के लिये असंख्य पार्थिव शिवलिंग निर्माण, महारुद्राभिषेक एवं अमृतमयी कथा का आयोजन हो रहा है। प्रातःकाल शिव आराधना और संध्याकाल हरिकथा एवं भजन संध्या के माध्यम से दद्दा जी धाम में दिव्यता का आलोक व्याप्त है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह में प्रदेश के परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री और कटनी जिले के प्रभारी मंत्री  उदय प्रताप सिंह, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता सरंक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत, खजुराहो सांसद  विष्णुदत्त शर्मा, विधायक विजयराघवगढ़  संजय सत्येन्द्र पाठक, फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा सहित धर्माचार्य और सुप्रसिद्ध कथा वाचक पंडित मोहित मराल गोस्वामी, कथा वाचक पंडित इन्द्रेश उपाध्याय, पंडित अनिरूद्धाचार्य  महाराज सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा समाजसेवी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।