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जनजातीय गौरव वर्ष के तहत विभिन्न गतिविधियों का हो रहा आयोजन

माडा क्षेत्र की ग्राम सभाओं में भगवान बिरसा मुंडा को दी गई पुष्पांजलि भगवान बिरसा मुंडा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को आत्मसात करने की ली शपथ जयपुर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में प्रदेशभर में भगवान बिरसा मुंडा जयंती के उपलक्ष्य में जनजातीय गौरव वर्ष के तहत विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के निर्देशानुसार गुरुवार को बस्सी पंचायत समिति में खिलौना बनाने की कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार एवं नवाचार से जोड़ना था। कार्यशाला में प्रशिक्षकों ने बड़ी तादाद प्रतिभागियों को खिलौने बनाने की बारीकियों से रूबरू करवाया। वहीं, कार्यक्रम के तहत माडा क्षेत्र की ग्राम पंचायतों की ग्राम सभा में विशेष संगोष्ठियों का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी तादाद में प्रतिभागियों ने भगवान बिरसा मुंडा को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए भगवान बिरसा मुंडा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को आत्मसात करने की शपथ ली। मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतिभा वर्मा ने बताया कि 1 से 15 नवम्बर 2025 तक भगवान बिरसा मुंडा जयंती के उपलक्ष्य में जनजातीय गौरव वर्ष के तहत विविध कार्यक्रमों की श्रृंखला प्रारम्भ हुई है। राज्य सरकार द्वारा यह आयोजन भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों, संघर्ष और योगदान को जन-जन तक पहुँचाने के साथ-साथ समाज के वंचित वर्गों को योजनाओं का लाभ पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आगामी कार्यक्रमों के तहत 7 नवम्बर को कृषकों की संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा जिसमें कृषि विभाग के अधिकारी विभागीय गतिविधियों योजनाओं एवं भगवान बिरसा मुण्डा की जीवनी पर प्रकाश डालेंगे। वहीं, 8 नवंबर को वन विभाग के माध्यम से वनोपज, वनधन, एफआरए एवं लसोड़ा के विषय में जानकारी प्रदान करने के लिए जागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन होगा साथ ही, राजीविका द्वारा संबंधित ब्लॉक में स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जाएगा। 9 नवंबर को टीएडी के आवासीय विद्यालयों एवं आश्रम छात्रावासों में भगवान बिरसा मुंडा पर आधारित भाषण, निबंध एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इसप्रकार 15 नवम्बर तक जनजातीय गौरव वर्ष के अंतर्गत विभिन्न जन जागरण, सांस्कृतिक एवं विकासपरक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती प्रतिभा वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास को जनसहभागिता का अभियान बना रही है। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर आरम्भ हुई यह श्रृंखला समाज के आदिवासी गौरव, स्वाभिमान और संस्कृति को सम्मान देने की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल है।

पुलिस अधिकारी के साथ बड़ा फ्रॉड! सबूत पेश, फिर भी कार्रवाई गायब

पंचकूला हरियाणा पुलिस के डीएसपी सुरेंद्र सिंह यादव के साथ 47 लाख रुपए की ठगी हुई थी। डीएसपी ने इस मामले की शिकायत 2024-25 के दौरान हरियाणा डीजीपी, पंचकूला डीसीपी और पंचकूला सेक्टर-14 थाना के एसएचओ को दी थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।   10 अक्तूबर को पंचकूला सेक्टर-1 पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित ग्रिवेंसेज कमेटी की मीटिंग में डीएसपी हरियाणा सरकार के मंत्री विपुल गोयल के समक्ष पेश हुए। मंत्री ने तुरंत मामला दर्ज करने का आदेश दिया। मंत्री के आदेश के 24 दिन बाद पंचकूला पुलिस ने 4 नवंबर को सेक्टर-14 पुलिस थाने में भरतपाल, आरती देवी, नायब सिंह, राजकुमार भाटिया, सुखविंदर कौर और कुलविंदर सिंह पुवाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 120-बी, 406 और 420 के तहत मामला दर्ज किया गया है। 2022-23 में डीएसपी सुरेंद्र सिंह यादव पंचकूला जोन 2 के डीएसपी थे। आरोपियों ने उन्हें सेक्टर 26 में 14 मरले का प्लॉट दिखाया और 2.35 करोड़ में डील तय हुई। डीएसपी ने आरोपियों के बैंक खाता में 53 लाख रुपए ट्रांसफर किए लेकिन आरोपियों ने प्लॉट का सौदा किसी और से कर लिया। पीड़ित हरियाणा पुलिस के डीएसपी ने कहा कि पंचकूला पुलिस ने कमजोर धारा के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने धारा 467, 468 और 471 धारा को उसमें नहीं जोड़ा है। वह पंचकूला पुलिस की कार्रवाई से नाखुश हैं और डीजीपी को शिकायत करने की तैयारी कर रहे हैं। 

शादी का नया ट्रेंड: बारात और शराब के बिना, सिर्फ सादगी और संस्कार के साथ विवाह

भोपाल  शादी-ब्याह में दिखावे, फिजूलखर्ची और शोर-शराबे से परेशान समाज को एक नया विकल्प मिल गया है. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के गायत्री शक्तिपीठ ने सादगी और संस्कार का संदेश देने के लिए संस्कारित विवाह अभियान शुरू किया है. इसमें न डीजे होगा, न बैंड-बाजा, न भव्य सजावट होगी. विवाह सिर्फ मंत्रोच्चार, अग्नि और सात फेरों यानी पूरी तरह वैदिक रीति से सम्पन्न होगा.  भोपाल के महाराणा प्रताप नगर (MP नगर) स्थित शक्तिपीठ के एक पैम्फलेट यानी पत्रक में विवाह को एक पवित्र संस्कार बताते हुए खर्चीली रीतियों और सामाजिक बुराइयों को सख्ती से वर्जित किया गया है. पैम्फलेट में साफ लिखा है, ''दहेज लेना व देना एक सामाजिक अपराध है.'' साथ ही मांस-मदिरा के सेवन को इस पवित्र संस्कार को अपवित्र न बनाने की अपील की गई है. कैसा होगा यह संस्कारित विवाह:-      विवाह पूरी तरह वैदिक विधि से संपन्न होगा      अधिकतम 15 से 20 मेहमानों की इजाजत होगी      प्रतीक स्वरूप 2 वरमाला और एक डिब्बा मिठाई का आदान-प्रदान किया जाएगा      डीजे, बैंड-बाजा या किसी भी तरह की भव्य सजावट की अनुमति नहीं होगी      बारात और भोजन की व्यवस्था यहां इजाजत नहीं है.  संस्कारों पर जोर और फिजूलखर्ची का विरोध गायत्री परिवार के प्रांतीय शक्तिपीठ समन्वयक राकेश कुमार गुप्ता ने बताया, ''यह पहल गायत्री परिवार की सात क्रांतियों (साधना, स्वास्थ्य, शिक्षा, नारी जागरण, नशा निवारण आदि) का हिस्सा है.'' गुप्ता ने बताया कि गायत्री परिवार हमेशा फिजूलखर्ची को कम करने के लिए लोगों को प्रेरित करता रहता है. इसमें मृत्युभोज का हम लोग विरोध करते हैं, शादी में दान दहेज का विरोध करते हैं और खर्चीली शादियों को कम करने के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं.  उन्होंने तर्क दिया कि विकृतियों और वृद्धाश्रमों के बढ़ने के पीछे मुख्य कारण संस्कारों की कमी है, जिसे इस वैदिक विधि से दूर किया जा रहा है. गृहस्थ जीवन एक तपोवन शक्तिपीठ ने अपने पैम्फलेट में गृहस्थ जीवन को एक आध्यात्मिक साधना के रूप में परिभाषित किया है: "गृहस्थ एक तपोवन है, इसमें संयम, सेवा और सहिष्णुता की साधना करनी पड़ती है." राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि वे शादी का वास्तविक संदर्भ समझाते हैं कि आगे परिवार कैसे चलेगा और वैदिक विधि से विवाह का बंधन कैसा होना चाहिए.  गायत्री परिवार के प्रांतीय शक्तिपीठ समन्वयक राकेश कुमार गुप्ता. देवउठनी एकादशी पर गायत्री मंदिर से विवाह करने वाले दंपति वैभव वर्मा और प्रिया शर्मा ने बताया, ''हमने 18 मेहमानों के सामने शादी की. मंदिर की रसीद कटवाने के बाद कुल खर्च करीब 1000 रुपए ही आया. न दहेज, न दिखावा. अब पैसों से बची रकम हम अपने गृहस्थी में लगाएंगे.  इसके अलावा, एक अन्य नवविवाहित जोड़े जय अरोड़ा और मधु पांडेय ने कहा,  हम दोनों एक साथ आईटी कंपनी में काम करते हैं. लंबे समय से एक दूसरे से प्रेम करते हैं.हमें अपने आर्थिक हालात देखे और मेट्रो सिटी में आगे के भविष्य को देखते हुए कम खर्च में विवाह बंधन में बंधने का फैसला लिया.   रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया गायत्री शक्तिपीठ में विवाह संस्कार कराने की प्रक्रिया भी सरल और पारदर्शी रखी गई है.  – विवाह के लिए आवश्यक सामग्री (जैसे अग्निकुंड, पंचमेवा, हल्दी, नारियल, पुष्पादि आदि) परिवारों को खुद लानी होगी. – कम से कम 15 दिन या एक महीने पहले रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है. – सबसे अहम शर्त यह है कि वर और वधू दोनों के माता-पिता की लिखित सहमति जरूरी है.  – गायत्री परिवार में सभी संस्कार निशुल्क कराए जाते हैं. विवाह कराने का यहां कोई शुल्क या फीस नहीं है. – सिर्फ पूजा के लिए उपयोग होने वाले सामान की व्यवस्था के लिए 2 हजार या 4 हजार रुपए का एक नॉमिनल अमाउंट लिया जाता है. – विवाह के लिए यह राशि 7000 हजार रुपए तय की गई है.  दीवारों से लेकर पोस्टरों पर संदेश ही संदेश  शक्तिपीठ के परिसर में दीवारों से लेकर बैनर पोस्टरों में समाज को सही दिशा देने वाले संदेश ही संदेश लिखे गए हैं. संदेश में समाज से खर्चीली शादियों को बंद कर सादगी भरी रीतियों को अपनाने का आह्वान किया है. मसलन,  'हम बदलेंगे, युग बदलेगा.' अमर रीतियों से बंधो, बंद करो खर्चीली शादी. सादगी भरी शादियां हमें सद्भाव और वैदिकता बताती हैं.' इसके साथ ही मोटे अक्षरों में समाज को कचोट देने वाला लिखा है- 'खर्चीली शादियां हमें दरिद्र और बेईमान बनाती हैं.' 

गहलोत ने हरमाड़ा हादसे के पीड़ितों का हाल जाना, बोले—सरकार कर रही है उपेक्षा

जयपुर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर के हरमाड़ा हादसे में घायल लोगों से एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। गहलोत ने आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार हादसों के बाद तब ही हरकत में आती है, जब लोग धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होते हैं। उन्होंने कहा कि हरमाड़ा में डंपर की टक्कर से 13 लोगों की मौत हो गई, लेकिन अब तक सरकार की ओर से किसी प्रकार का मुआवजा घोषित नहीं किया गया है, जो बेहद संवेदनहीनता है। गहलोत ने कहा कि चाहे जोधपुर का हादसा हो या जैसलमेर में बस में आग लगने की घटना, सरकार तब ही राहत देती है जब लोग मॉर्च्यूरी के बाहर विरोध दर्ज कराते हैं। उन्होंने मांग की कि हरमाड़ा हादसे के सभी पीड़ितों और मृतकों के परिवारों को तत्काल राहत राशि दी जाए। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना में गुजरात और बिहार के लोग भी घायल हुए हैं, इसलिए सरकार को बिना भेदभाव सहायता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान और जोधपुर हाईकोर्ट ने सड़क हादसों पर संज्ञान लिया है, जो खुद सरकार की विफलता को दर्शाता है। गहलोत ने सुझाव दिया कि सरकार को एक विशेष समिति गठित कर विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए, ताकि सड़क हादसों पर प्रभावी रोक लग सके। उन्होंने कहा कि कई जगह सड़कों पर स्पीड ब्रेकर नहीं हैं और कई स्थानों पर गलत तरीके से बने हैं, जिससे हादसे बढ़ रहे हैं। आज आरटीओ के पास गाड़ियों की गति मापने की मशीनें मौजूद हैं, फिर भी सड़क सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। लगातार हो रही मौतें सरकार की नाकामी को दर्शाती हैं। अस्पताल में गहलोत ने घायल गुजरात निवासी मनोज गोविंद व्यास से मुलाकात कर हालचाल जाना। मनोज ने बताया कि वे छह दोस्तों के साथ खाटूश्यामजी दर्शन के लिए आए थे। हादसे में उनके दो दोस्तों की मौत हो गई और चार घायल हैं। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद लूटपाट की भी घटना हुई, जिसमें उनका मोबाइल और पर्स चोरी हो गया। नीमकाथाना निवासी देशराज ने बताया कि हादसे में उनका ई-रिक्शा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घायल होने के बावजूद उन्होंने अन्य लोगों की मदद की। वहीं गोविंदपुरा कालवाड़ निवासी ज्ञानरंजन ने बताया कि उनके पिता अजय को गंभीर चोटें आई हैं और वे आईसीयू में भर्ती हैं। गहलोत ने कहा कि सरकार को ऐसे हादसों से सबक लेना चाहिए और पीड़ितों को जल्द से जल्द सहायता पहुंचानी चाहिए ताकि परिवारों को राहत मिल सके।

गुप्त सूचना पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 520 लीटर ताड़ी के साथ दो गिरफ्तार, FSL जांच जारी

गरियाबंद जिले में देवभोग पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 520 लीटर अवैध ताड़ी के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपी शिवा कुम्भम (25 वर्ष) और उसके पिता यादईया कुम्भम (50 वर्ष) को आबकारी अधिनियम के तहत न्यायालय में पेश किया गया, जहां उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी मात्रा में कथित छिंद रस, जिसे ताड़ी कहा जाता है जब्त किया गया है। थाना प्रभारी फैजुल हुदा शाह ने बताया कि तेलंगाना के नालगुंडा जिले के निवासी पिता-पुत्र इस क्षेत्र में लगातार ठिकाना बदलकर अवैध ताड़ी का कारोबार कर रहे थे। शिवा कुम्भम पहले भी 25 लीटर ताड़ी के साथ पकड़ा जा चुका है। जमानत मिलने के बाद वह कालाहांडी सीमा के खुटगांव के गौठान के पास अवैध बिक्री में जुटा हुआ था। पुलिस ने आरोपी से कुल 27,400 रुपये मूल्य का ताड़ी और नगद जब्त किया। जाँच के लिए एफएसएल भेजी जाएगी जब्त ताड़ी देवभोग क्षेत्र में ताड़ी का रहस्य वर्षों से चर्चा का विषय रहा है। पिछले कई सालों से इस क्षेत्र में सक्रिय ताड़ी कारोबारी रोजाना डेढ़ से 2 हजार लीटर ताड़ी की खपत कराते थे। अब पुलिस ने उच्च अधिकारियों की अनुमति लेकर जब्त ताड़ी का एफएसएल (Forensic Science Laboratory) परीक्षण कराने की तैयारी शुरू कर दी है। फर्जी ताड़ी के सेवन से हो रही मौतें ! पूर्व कारोबारी सूत्रों के अनुसार, आंध्र और तेलंगाना में तैयार मीठी पावडर को बसों के माध्यम से देवभोग लाया जाता है। 1 किलो पावडर से लगभग 170 लीटर नकली ताड़ी तैयार होती है, जिसे 50 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचा जाता है। इसमें नींद लाने वाली दवाओं (बेंजोडाइजिपम ग्रुप) का इस्तेमाल किया जाता है। औसतन 2,500 रुपये की लागत में 10,000 रुपये का ताड़ी उत्पाद तैयार होता है। सूत्रों ने बताया कि गांव में प्रभावशाली लोगों और आबकारी अधिकारियों को भी कमाई का 30 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता था। पिछले एक साल में देवभोग क्षेत्र में ताड़ी के सेवन से 10 से अधिक लोगों की मौत हुई है। मृतक फैटी लिवर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे। बीएमओ प्रकाश साहू ने बताया कि मीठी पावडर में सेकरीन और कैल्शियम की अधिकता वाले तत्व पाए जाते हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर अरविंद तिवारी ने चेताया कि नियमित सेवन से किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और फैटी लिवर और नेफ्रो जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कैसा बनाया जाता है असली छिंद रस ? जानकार बताते हैं कि असली छिंद रस छिंद और ताड़ पेड़ के तने को छेदकर प्राप्त किया जाता है। एक बड़े पेड़ से दिनभर में केवल 3 से 5 लीटर रस ही एकत्रित होता है। ताजा रस स्वास्थ्यवर्धक होता है और 3-5 घंटे के भीतर उसमें खमीर विकसित होकर प्राकृतिक मादकता लाता है। जबकि नकली ताड़ी में रासायनिक पावडर और दवाओं का प्रयोग तुरंत मादक बनाने के लिए किया जाता है। पिछले डेढ़ साल में की गई 16 बड़ी कार्रवाई पिछले डेढ़ साल में देवभोग थाना क्षेत्र में आबकारी विभाग और पुलिस ने मिलकर 16 बड़ी कार्रवाई की है। हालांकि पहले एफएसएल जांच कराने की प्रक्रिया जटिल होने के कारण लंबित रही, लेकिन अब पुलिस ने जप्त रस का परीक्षण कराने की पहल शुरू कर दी है। थाना प्रभारी फैजुल शाह ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देश पर अवैध पेय पदार्थ की बिक्री पर रोक और सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। थाना प्रभारी फैजुल शाह ने कहा कि जो लोग सीमा-वर्ती इलाकों का फायदा उठाकर अवैध बिक्री में शामिल होने की कोशिश करेंगे, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर आगे जप्त पेय पदार्थ की जांच और संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इंस्पायर अवॉर्ड मानक योजना में नवाचार की बौछार, 55 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों ने अपलोड किए आइडिया

इंस्पायर अवार्ड मानक योजना में 55 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने आइडिया अपलोड किये योजना के माध्यम से विद्यार्थियों में विज्ञान के अध्ययन एवं अनुसंधान को प्रोत्साहन भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों ने इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के अंतर्गत इस वर्ष शिक्षण सत्र 2025-26 में 55 हजार 247 विद्यार्थियों ने विज्ञान अनुसंधान एवं अध्ययन से जुड़े आइडिया केन्द्र सरकार के पोर्टल पर अपलोड कराये हैं। केन्द्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंस्पायर अवार्ड मानक योजना कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों में विज्ञान के अध्ययन एवं अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिये योजना शुरू की है। पिछले वर्ष 2672 विद्यार्थियों का अवार्ड के लिये चयन किया गया था। चयनित विद्यार्थियों के विचार को प्रोटोटाइप तैयार करने के लिये 10-10 हजार रूपये की राशि विद्यार्थी के बैंक खाते में हस्तांतरित की गई थी। पिछले 3 वर्षों से राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश प्रथम केन्द्र सरकार की इंस्पायर अवार्ड मानक योजना में मध्यप्रदेश शैक्षणिक सत्र 2019-20 से 2022-23 पिछले 3 वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान पर आ रहा है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की इस योजना में वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 की राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन नई दिल्ली में किया जाना प्रस्तावित है। योजना में सत्र 2022-23 में विदिशा जिले के गंजबासोदा की छात्रा कुमारी रूपाली लोधी ने श्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। उनके इस प्रदर्शन के कारण अंतर्राष्ट्रीय सकूरा एक्सचेंज प्रोग्राम में उन्होंने जापान में सहभागिता की थी। स्कूलों की भागीदारी इंस्पायर अवार्ड मानक योजना प्रदेश के विद्यार्थियों में किया गया एक एैसा निवेश है, जो विज्ञान के अध्ययन एवं अनुसंधान को विकसित करता है। योजना का उद्देश्य बच्चों में विज्ञान का बीज बोना, उसका पोषण करना, उन्हें प्रोत्साहित करना, रूचि बढ़ाना तथा वैज्ञानित दृष्टिकोण उत्पन्न करना है। इस योजना में प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय माध्यमिक हाई स्कूल, अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालय, केन्द्रीय विद्यालय (सेंट्रल स्कूल), नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल एवं केन्द्र सरकार के अन्य सीबीएसई विद्यालयों में कक्षा 6 से कक्षा 10 तक के नियमित विद्यार्थी पुरस्कार के लिये पात्र होते हैं। कार्यक्रम में देशभर के 5 लाख विद्यालयों के बच्चों प्रत्येक विद्यालय से कम से कम 2 सर्वश्रेष्ठ विचार के मान से लगभग 10 लाख नवाचारों को प्राप्त करने का कार्यक्रम रखा जाता है।  

पूर्वी रीजनल नक्सल मोर्चे का पत्र आया सामने, ब्यूरो के तेवर फिर तीखे

जगदलपुर लगातार नक्सलियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास के दौर के बीच, अब नक्सल संगठन के पूर्वी रीजनल ब्यूरो का नया बयान सामने आया है. यह ब्यूरो झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय बताया जाता है. ब्यूरो की ओर से जारी बयान में लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया गया है. बताया जा रहा है कि इस बयान के पीछे नक्सल नेता मिशिर बेसरा का नाम प्रमुखता से सामने आया है, जिसे इस रीजन का सबसे बड़ा नक्सली माना जाता है. बेसरा और उसके संगठन ने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना में लगातार हो रहे नक्सल आत्मसमर्पण की निंदा की है. बयान में कहा गया है कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी “संगठन के गद्दार” हैं और राज्य सरकार की नीति में फंस गए हैं. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह बयान नक्सलियों की घटती ताकत और संगठनात्मक हताशा का संकेत है. बस्तर से लेकर सीमाई राज्यों तक नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों की बढ़त ने अब संगठन की जमीनी पकड़ कमजोर कर दी है.

उदयपुर में परिचालक भर्ती परीक्षा शांतिपूर्ण सम्पन्न, आधे से कम परीक्षार्थी पहुंचे केंद्रों पर

उदयपुर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) द्वारा शनिवार को परिचालक (कंडक्टर) भर्ती परीक्षा का आयोजन प्रदेशभर में किया गया। कुल 500 पदों के लिए हुई इस परीक्षा में 1 लाख 12 हजार से अधिक अभ्यर्थी रजिस्टर्ड थे। इसके लिए राज्य के 14 जिलों में 370 परीक्षा केंद्र बनाए गए। उदयपुर जिले में परीक्षा एक ही पारी में सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित हुई, जिले में कुल 15 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जहां 5064 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें से 49.59 फीसदी उम्मीदवार ही परीक्षा देने पहुंचे। परीक्षा केंद्रों पर सुबह से ही अभ्यर्थियों की आवाजाही शुरू हो गई थी। प्रवेश सुबह 9 बजे से दिया गया और 10 बजे गेट बंद कर दिए गए। इसके बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। एग्जाम सेंटरों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रखी गई थी। पुलिसकर्मियों ने प्रवेश से पहले उम्मीदवारों के एडमिट कार्ड और पहचान पत्र की जांच की। कई केंद्रों पर परीक्षार्थियों के हाथों में बंधे धागे काट दिए गए, ताकि किसी तरह की नकल या तकनीकी मदद न ली जा सके। सभी अभ्यर्थियों की मेटल डिटेक्टर से स्कैनिंग की गई। मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, इयरफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण परीक्षा केंद्र के बाहर ही जमा करवाए गए। परीक्षा हॉल में सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी गई। बोर्ड ने इस बार अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए एडमिट कार्ड के साथ एक विशेष लिंक भी जारी किया है। इस लिंक को स्कैन कर उम्मीदवार आसानी से अपने परीक्षा केंद्र तक पहुंच सकते हैं। यह सुविधा पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पांच बड़े जिलों में शुरू की गई है। फिलहाल इसमें गूगल लोकेशन या मुख्य प्रवेश द्वार की फोटो उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसमें बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की दिशा सहित अन्य उपयोगी जानकारी दी गई है। कुल मिलाकर, सख्त सुरक्षा और तकनीकी सुविधा के बीच यह परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। अब अभ्यर्थियों को रिजल्ट और कट-ऑफ का इंतजार है, जो चयन बोर्ड द्वारा बाद में जारी किया जाएगा।

भर्ती घोटाला मामला: डबल बेंच का फैसला — 37 चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति पर अब कोई रोक नहीं

 बिलासपुर छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) 2021-22 भर्ती घोटाले से जुड़ा मामला अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज करते हुए उन 37 चयनित अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया है, जिनके खिलाफ अब तक सीबीआई (CBI) ने कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्ति (ज्वाइनिंग) दी जाए। यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच में हुई। इस दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी। सिंगल बेंच ने पहले ही इन 37 अभ्यर्थियों के पक्ष में आदेश दिया था, जिसके अनुसार जिन पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है या चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है, उन्हें ज्वाइनिंग दी जानी चाहिए। मामला CGPSC द्वारा 2021-22 में आयोजित विभिन्न सरकारी पदों की परीक्षा और चयन प्रक्रिया से जुड़ा है। चयन प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोप सामने आने के बाद सरकार ने इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी थी। जांच में कुछ उम्मीदवारों पर संदेह जताया गया और कुछ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, जबकि बाकी अभ्यर्थियों की ज्वाइनिंग पर रोक लगा दी गई थी। लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे 37 अभ्यर्थियों, जिनमें अमित कुमार समेत अन्य चयनित उम्मीदवार शामिल हैं, ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने दलील दी थी कि केवल जांच के नाम पर बिना चार्जशीट के उनकी नियुक्ति रोकना अनुचित है। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला देते हुए राज्य सरकार को ज्वाइनिंग देने का निर्देश दिया था। हालांकि, सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए डबल बेंच में अपील की। अब डबल बेंच ने भी सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखते हुए सरकार की याचिका खारिज कर दी है। डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा कि, “जब तक किसी अभ्यर्थी के खिलाफ आपराधिक चार्जशीट दाखिल नहीं होती, उसे नियुक्ति से वंचित रखना न्यायोचित नहीं है।” इस फैसले के बाद अब उन सभी 37 चयनित उम्मीदवारों के लिए राहत का रास्ता साफ हो गया है, जो लंबे समय से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे थे। इस निर्णय को न केवल अभ्यर्थियों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता और न्यायिक निष्पक्षता का उदाहरण भी पेश करता है। अब राज्य सरकार को हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, उन सभी उम्मीदवारों को जल्द ज्वाइनिंग देने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी, जिनके खिलाफ सीबीआई ने अब तक कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की है।

‘आन काल डॉक्टर’ सेवा लागू: ग्रामीण इलाकों में भी 24×7 मेडिकल सुविधा

फतेहाबाद  फतेहाबाद जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समिति ने अब 'आन काल डाक्टर सिस्टम' लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत निजी विशेषज्ञ चिकित्सक एनेस्थेटिस्ट, पीडियाट्रिशियन और गायनाकोलाजिस्ट को आपात स्थिति में सरकारी अस्पताल में बुलाया जाएगा। इन डाक्टर को प्रति केस के आधार पर भुगतान किया जाएगा। फतेहाबाद से शुरू हुआ यह प्रयोग पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन सकता है। ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे में जहां स्थायी विशेषज्ञों की नियुक्ति कठिन रही है, वहीं यह व्यवस्था सीमित संसाधनों में गुणवत्तापूर्ण सेवा सुनिश्चित करने का एक व्यावहारिक समाधान पेश करती है। हालांकि सरकारी अस्पतालों में प्राइवेट चिकित्सकों को बुलाना और उनकों भुगतान करना सरकार के दावों की कलई खोलता है। हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सेवा की हकीकत को बयां करता है।