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पीएम जनमन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, ज़मीनी चुनौतियों और आगामी रणनीति पर हुई विस्तारपूर्वक चर्चा

सहभागिता और संवेदनशीलता के साथ विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए करें कार्य: मंत्री रामविचार नेताम जनजातियों के संस्कृति, परंपरा और परिवेश के अनुरूप ग्रामीण शैली में हो पीएम आवास का निर्माण लक्ष्यों को पूर्ण करने प्राथमिकता के साथ योजना के क्रियान्वयन करने के दिए निर्देश  पीएम जनमन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, ज़मीनी चुनौतियों और आगामी रणनीति पर हुई विस्तारपूर्वक चर्चा रायपुर आदिम जाति और अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री रामविचार नेताम की अध्यक्षता में आज छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित मुख्य समिति कक्ष में प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनजातीय समुदायों तक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, ज़मीनी चुनौतियों और आगामी रणनीति पर विस्तार पूर्वक चर्चा हुई। आदिम जाति मंत्री नेताम ने बैठक में कहा कि सबकी सहभागिता और संवेदनशीलता के साथ विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए कार्य किया जाना सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जनजातियों के हित में अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। यह केन्द्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में से एक है। हमें पीएम जनमन योजना के लक्ष्यों को पूर्ण करने के लिए प्राथमिकता के साथ योजनाओं के क्रियान्वयन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जनजातीय उस घर में रचता-बसता है, इसलिए इस योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए बनने वाले पीएम आवास को उनकी संस्कृति, परंपरा और परिवेश के अनुरूप तैयार किया जाए। मंत्री नेताम ने कहा कि हमारी सरकार सभी वर्गों के हित में संवर्धन के लिए सुशासन की दिशा में कार्य कर रही है। सुशासन का उद्देश्य है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और बुनियादी सुविधाओं जैसी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। पीएम जनमन अभियान के माध्यम से दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों में परिवर्तन की नई लहर लाई जा रही है। ’सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ और सबका प्रयास की भावना के साथ हम जनजातीय अंचल को न्याय और विकास से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मंत्री नेताम ने कहा कि पीएम जनमन योजना के केवल सड़क, पुल, पुलिया मात्र बनाने का नहीं बल्कि यह एक मिशन है। उन वर्गों के साथ समन्वय और समर्पित होकर कार्य करने से ही शत प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त कर सकते है।  बैठक में अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में अबुझमाड़िया, बैगा, बिरहोर, कमार और पहाड़ी कोरवा इन पांच जनजाति समूहों को विशेष पिछड़ी जनजाति की श्रेणी के अंतर्गत रखा गया है। पीएम जनमन योजना के तहत इन विशेष पिछड़ी जनजातियों के प्रत्येक व्यक्ति और गांवों को सम्पूर्ण रूप से संतृप्त करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस योजना के लिए प्रदेश के 18 जिलों के 53 विकासखंड के 1541 ग्राम पंचायत चिन्हाकिंत है। इनमें विशेष पिछड़ी जनजातियों के 56 हजार 569 परिवारों में 2 लाख 12 हजार 688 की संख्या शामिल हैं। इनकी कुल बसाहटें 2 हजार 365 हैं। अधिकारियों  ने बताया कि योजना के तहत पिछड़ी जनजातियों के परिवारों के लिए 33 हजार 132 आवासों की स्वीकृति दी गई है। इनमें से 9 हजार 901 आवास पूर्ण कर लिए गए हैं। वहीं 14 हजार से अधिक आवास निर्माण के लिए तीसरी किस्त भी जारी की जा चुकी है, जल्द ही इन आवासों का निर्माण भी पूर्ण कर लिया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2023-24 में इन वर्गों के बसाहटों में पक्की एवं संपर्क सड़कें निर्माण के लिए 333 कार्य की स्वीकृति प्रदान की गई है। इनकी कुल लंबाई 1170 किलोमीटर है। इनमें 475 किलोमीटर लंबाई की सड़कें पूर्ण करा ली गई है। वही फेस-टू अंतर्गत 299 कार्य की स्वीकृति की दी गई है। इनकी लंबाई 856 किलोमीटर है। बैठक में बताया गया कि योजना के तहत 191 आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्वीकृति प्रदान कर संचालित की जा रही है। इसी प्रकार इन वर्गों की स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा हैं। योजना के तहत 1442 बसाहटों में से 989 ग्राम स्वास्थ्य केन्द्र द्वारा संतृप्त है। वहीं 317 ग्राम मोबाईल मेडिकल यूनिट संतृप्त है तथा 57 और मोबाईल मेडिकल यूनिट की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस प्रकार 1416  ग्राम भौतिक रूप संतृप्त है। शेष 26 पहुंच विहीन ग्रामों में बाइक मेडिकल यूनिट के लिए तैयारी की जा रही है। बैठक में मंत्री नेताम ने पिछड़ी जनजातियुक्त बसाहटों में विद्युत व्यवस्था, आश्रम-छात्रावासों के निर्माण, मोबाईल टॉवर की स्थापना, बहुउद्देशीय केन्द्रों का निर्माण, वन धन विकास केन्द्रों की स्थापना तथा व्यावसायिक एवं कौशल शिक्षा की प्रगति की भी समीक्षा की। बैठक में आदिम जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, आदिम जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग विकास विभाग के आयुक्त डॉ सारांश मित्तर, आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के संचालक जगदीश सोनकर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के संचालक तारन प्रकाश सिन्हा सहित सभी संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 

रायपुर से ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ की विशेष ट्रेन रवाना, रजत जयंती वर्ष में सांस्कृतिक चेतना को नई उड़ान

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेशवासियों की आस्था और श्रद्धा को मूर्त रूप देने हेतु प्रारंभ की गई ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ के अंतर्गत आज रायपुर रेलवे स्टेशन से रायपुर संभाग के 850 श्रद्धालु विशेष ट्रेन से अयोध्या धाम के दर्शन के लिए रवाना हुए। इस पवित्र यात्रा के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और उनकी यात्रा के मंगलमयी होने की कामना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रद्धालुओं को हमारे 'भांचा राम' — श्रीरामलला के निःशुल्क दर्शन कराने की यह पुण्य यात्रा अनवरत जारी है। यह यात्रा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की उस गारंटी को साकार कर रही है, जिसमें उन्होंने देश के प्रत्येक नागरिक को प्रभु श्रीराम के दर्शन का अवसर उपलब्ध कराने का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि “श्री रामलला दर्शन योजना” के अंतर्गत सरकार ने मार्च 2024 तक 20,000 श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम भेजने का लक्ष्य निर्धारित किया था, किंतु प्रदेशवासियों की अद्वितीय आस्था, उत्साह, और सरकार की प्रतिबद्धता के चलते यह संख्या 22,000 से अधिक हो चुकी है। इस यात्रा में श्रद्धालुओं को काशी विश्वनाथ धाम के दर्शन का सौभाग्य भी प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए ₹36 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। अब तक बीते डेढ़ वर्षों में 27 विशेष ट्रेनें छत्तीसगढ़ के विभिन्न संभागों से श्रद्धालुओं को लेकर अयोध्या धाम के लिए रवाना हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री रामलला तीर्थ दर्शन योजना केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश का हर नागरिक, विशेषकर बुज़ुर्ग एवं वंचित वर्ग, अपने जीवन में एक बार प्रभु श्रीराम के जन्मस्थान के दर्शन कर सके। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर प्रारंभ की गई ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ आज प्रदेशवासियों के जनजीवन से गहराई से जुड़ चुकी है। इसी कड़ी में वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली विशेष ट्रेन आज रायपुर रेलवे स्टेशन से अयोध्या धाम के लिए रवाना हुई। इस अवसर पर राजस्व, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने दोपहर 1:00 बजे हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया। ट्रेन के प्रस्थान के दौरान रायपुर रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म नंबर 7 जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। तीर्थयात्रियों और उनके परिजनों में विशेष उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। यात्रियों का पारंपरिक छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य एवं लोकवाद्य से स्वागत किया गया, वहीं IRCTC के प्रतिनिधियों द्वारा तिलक लगाकर अभिवादन किया गया। इस अवसर पर विधायकगण श्री पुरंदर मिश्रा, श्री मोतीलाल साहू, गुरु खुशवंत साहिब, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज, सचिव संस्कृति एवं पर्यटन डॉ. रोहित यादव, पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य, कलेक्टर रायपुर डॉ. गौरव सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं रेलवे व IRCTC के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि इस योजना की परिकल्पना मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा प्रदेशवासियों को जीवन में एक बार अयोध्या धाम के दर्शन का सौभाग्य प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। इसके लिए 23 फरवरी 2024 को छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल और IRCTC के मध्य एमओयू संपादित किया गया था। योजना की औपचारिक शुरुआत 5 मार्च 2024 को रायपुर से हुई थी, जब मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं पहली ट्रेन को रवाना किया था। इसके पश्चात बिलासपुर, सरगुजा और दुर्ग-बस्तर (संयुक्त) संभागों से भी विशेष ट्रेनों का संचालन हुआ। विगत वर्ष इस योजना के माध्यम से लगभग 22,100 श्रद्धालुओं ने अयोध्या धाम के दर्शन किए। योजना के अंतर्गत प्रत्येक संभाग से साप्ताहिक विशेष ट्रेनों का संचालन जारी रहेगा।

रायपुर: शिक्षा में सुधार की नई पहल, सीएम विष्णु देव साय की पहल पर ‘पालक-शिक्षक संवाद अभियान’ शुरू

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर राज्य के सभी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र के दौरान वर्ष में तीन बार पालक-शिक्षक बैठकों का आयोजन किया जाएगा। पहली बैठक अगस्त माह के प्रथम सप्ताह में आयोजित की जाएगी, जबकि द्वितीय एवं तृतीय बैठकें तिमाही और अर्धवार्षिक परीक्षाओं के 10 दिवस के भीतर संपन्न होंगी। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने सभी कलेक्टरों एवं जिला शिक्षा अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि प्रत्येक जिले में इन बैठकों के आयोजन हेतु कार्ययोजना तैयार की जाए और सुनिश्चित किया जाए कि सभी विद्यालयों में यह प्रक्रिया प्रभावी रूप से लागू हो। पालक-शिक्षक बैठकें न केवल शैक्षणिक संवाद का मंच होंगी, बल्कि वे बच्चों की संपूर्ण प्रगति पर सामूहिक दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर भी देंगी। इन बैठकों के माध्यम से पालकों को यह समझाने का प्रयास किया जाएगा कि घर में बच्चों की पढ़ाई के लिए कैसा वातावरण होना चाहिए, उनकी दिनचर्या कैसी हो, परीक्षा के तनाव से कैसे निपटना है, और संवाद की आदत कैसे विकसित करनी है। साथ ही, ‘बस्ता रहित शनिवार’ जैसी पहल पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा जिससे बच्चे मानसिक रूप से हल्का महसूस करें और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लें। बैठकों के दौरान पालकों को बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के उपायों पर भी जानकारी दी जाएगी। विशेष रूप से उन्हें यह समझाया जाएगा कि बच्चों को खुलकर बोलने के लिए अवसर प्रदान करना, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण में भागीदारी सुनिश्चित करना, और जाति, आय एवं निवास प्रमाण पत्र बनवाने हेतु आयोजित शिविरों में बच्चों को शामिल करना कितनी महत्वपूर्ण पहल है। इसके अतिरिक्त ‘न्योता भोजन’ जैसी सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए भी पालकों को प्रेरित किया जाएगा। इस पहल में डिजिटल शिक्षा को भी विशेष स्थान दिया गया है। बैठक के दौरान पालकों को दीक्षा ऐप, ई-जादुई पिटारा, डिजिटल लाइब्रेरी जैसे संसाधनों के बारे में बताया जाएगा, ताकि वे घर पर भी अपने बच्चों को तकनीक आधारित शिक्षण सामग्री से जोड़ सकें। इससे न केवल बच्चों की पढ़ाई में रोचकता बढ़ेगी, बल्कि पालक स्वयं भी शिक्षा के सक्रिय सहभागी बन सकेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगस्त के प्रथम सप्ताह में आयोजित होने वाली पहली पालक-शिक्षक बैठक को प्रत्येक स्कूल में भव्य, सुव्यवस्थित और संवाद-प्रधान रूप से संपन्न किया जाएगा। तदनुसार, तिमाही एवं अर्धवार्षिक परीक्षाओं के बाद होने वाली द्वितीय और तृतीय बैठकें भी सुनियोजित ढंग से कराई जाएंगी। इन बैठकों में बच्चों की अकादमिक प्रगति, पाठ्येतर गतिविधियों, स्वास्थ्य, और सामाजिक व्यवहार के संबंध में पालकों को अवगत कराते हुए, उनके व्यक्तित्व विकास पर चर्चा की जाएगी—ताकि स्कूल और परिवार मिलकर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में कार्य कर सकें।

पंचायतों को और सशक्त बनाने की दिशा में कदम, मंत्री पटेल ने की विभागीय समीक्षा

भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बड़वानी जिले के सेंधवा के नगरपालिका भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की विभागीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, जल गंगा संवर्धन अभियान, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छता अभियान, वाटर शेड, श्रम विभाग, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन, श्रमोदय विद्यालय, पोषण शक्ति अभियान, आजीविका मिशन सहित अन्य योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में जिला पंचायत सीईओ ने जलगंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत डगवेल रिचार्ज संरचनाएँ, कपिल धारा कूप निर्माण, मेढ़बंधान ,पशु शेड एवं बकरी शेड निर्माण आदि के संबंध में जानकारी दी। गोई एवं डेब नदियों के उद्गम स्थल पर भी वृक्षारोपण के कार्य की जानकारी दी। साथ ही आगामी दिनों में शुरू हो रहे एक बगिया माँ के नाम परियोजना के संबंध में भी बताया। मंत्री पटेल ने कहा कि यह परियोजना महिलाओं के रोजगार उन्मुखीकरण को लेकर प्रदेश सरकार की एक नवीन पहल है। जरूरी है कि सकारात्मक एवं जन उपयोगी परिणाम आये। बैठक के दौरान बताया गया कि 30 ट्राइबल हीलर को आयुष विभाग के माध्यम से आयुष वाटिका भी लगाई जा रही हैं। श्रम विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि कर्मकार मण्डल के श्रमिकों को बेहतर सूचनाएं प्राप्त हो। बैठक में सांसद गजेन्द्र सिंह पटेल, विधायक श्याम बरडे, जिला पंचायत अध्यक्ष बलवन्त सिंह पटेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

सीएम साय से मिले राजनांदगांव के नागरिक प्रतिनिधि, कहा- विकास कार्यों से बदली तस्वीर

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से  छत्तीसगढ़ विधानसभा के समिति कक्ष में राजनांदगांव जिले के नागरिकों के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ निरंतर जनहित में कार्य कर रही है।  प्रशासनिक कार्यप्रणाली में नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए सभी प्रक्रियाओं को चरणबद्ध रूप से ऑनलाइन किया जा रहा है, जिससे नागरिकों को सुगम, सरल और सुलभ सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि 24 अप्रैल को ‘राष्ट्रीय पंचायत दिवस’ के अवसर पर प्रदेश की चयनित ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्रों की शुरुआत की गई है। इन केंद्रों के माध्यम से अब ग्राम पंचायत स्तर पर ही बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह पहल ग्रामीणों को डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में प्रदेश की अन्य पंचायतों को भी इस सुविधा से जोड़ा जाएगा। राजनांदगांव से आए नागरिक प्रतिनिधिमंडल ने जिले में प्रयास विद्यालय, नालंदा परिसर, एवं अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति धन्यवाद एवं आभार प्रकट किया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राजनांदगांव जिले में बीते डेढ़ वर्षों के भीतर पेयजल विस्तार, सड़क निर्माण, और अन्य अधोसंरचनात्मक कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। 600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के विभिन्न निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनका प्रत्यक्ष लाभ शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को मिल रहा है। यह जनकल्याण और विकास की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।  मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार संतुलित, समावेशी और सतत विकास के सिद्धांतों पर कार्य करते हुए छत्तीसगढ़ को सतत विकास की  ओर अग्रसर करने के लिए कटिबद्ध है। इस अवसर पर पूर्व सांसद श्री प्रदीप गांधी, श्री कोमल राजपूत, त्रिस्तरीय पंचायत पदाधिकारीगण और राजनांदगांव जिले के गणमान्य नागरिकगण उपस्थित थे।

फ्री बिजली की सौगात: यूपी सरकार की नई योजना से इन लाभार्थियों को राहत

मेरठ योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश को अंडा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कुक्कुट विकास नीति 2022 को लागू किया है। इस नीति के तहत जनपद के युवाओं को व्यापारी बनाना भी उद्देश्य है। इसलिए सरकार मुर्गी फार्म बनाने के लिए पांच साल के लिए बिजली का कनेक्शन फ्री दे रही है, जिसका कोई बिल भी नहीं देना होगा। व्यापार में सरकार ही लोन कराकर देगी और सात प्रतिशत तक ब्याज भी सरकार ही देगी। मेरठ में इस व्यापार को करने के लिए तीन लोग अभी तक आगे आए है। जिन्होंने आवेदन कर दिया है। उनके लोन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 10 मुर्गी वाला फार्म बनाएंगे तो खर्च होंगे एक करोड़ पशु चिकित्साधिकारी डा. संदीप कुमार ने बताया कि इस नीति के तहत यदि कोई 10 हजार मुर्गी का फार्म बनाना चाहता है तो उसका लगभग 99.53 लाख रुपये खर्च होगा। जिसमें से लगभग 70 लाख का लोन हो जाएगा। व्यापारी, किसान, उद्यमी को केवल 30 लाख रुपये अपने से खर्च करने होंगे। 70 लाख रुपये का लोन सात प्रतिशत ब्याज तक होगा है तो पशुपालन विभाग इस ब्याज को भरेगा। यदि अधिक होता है तो खुद भरना होगा। 90 हजार मुर्गियों का फार्म बनाने तक है योजना पशु चिकित्साधिकारी डा. संदीप कुमार ने बताया कि 10 से लेकर 90 हजार मुर्गियों तक का फार्म बनाने के लिए यह योजना है। 10 हजार मुर्गियों पर एक करोड़ खर्च हो रहे हैं तो 20 हजार पर लगभग दो करोड़ खर्च होंगे। इसी तरह से 90 हजार मुर्गियों तक खर्च बढ़ जाएगा। 10 हजार मुर्गियों का फार्म बनाना चाहते हैं तो इसके लिए एक एकड़ जमीन का होना जरूरी है। पशुपालन विभाग में कर सकते हैं आवेदन जनपद के विकास भवन में स्थित पशुपालन विभाग के आफिस में पहुंचकर मुर्गी फार्म के लिए आवेदन कर सकते हैं। यहां पर पशु चिकित्साधिकारी इस योजना के बारे में पूरी जानकारी देंगे। खरीदी गई जमीन पर नहीं लगेगा स्टांप शुल्क पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि यदि किसी के पास जमीन नहीं है और वह जमीन खरीदना चाहता है तो इस पर स्टांप शुल्क नहीं लगेगा। इसके स्टांप शुल्क का खर्च पशुपालन विभाग ही उठाएगा।

जबलपुर में ध्वनि नियंत्रण के तहत कांवड़ यात्रा में DJ पर रोक, शांतिपूर्ण आयोजन पर ज़ोर

जबलपुर श्रावण मास के दूसरे सोमवार को निकलने वाली संस्कार कांवड़ यात्रा  को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। इस बार यात्रा के दौरान तेज आवाज में डीजे या साउंड सिस्टम का उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। यह निर्णय कलेक्टर दीपक सक्सेना की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिया गया, जिसमें आयोजन समिति और संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि साउंड सिस्टम केवल विधिवत अनुमति के साथ लगाए जाएं और ध्वनि प्रदूषण अधिनियम के तहत तय नियमों का पालन हो। किसी भी झांकी, मंच या शोभायात्रा में दो से अधिक साउंड बॉक्स का उपयोग नहीं किया जाएगा। साथ ही स्पीकर का आकार 12 इंच से अधिक नहीं होना चाहिए और आवाज़ की सीमा 50 डेसिबल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। चोंगे (हॉर्न स्पीकर) का उपयोग पूरी तरह वर्जित रहेगा और यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार का एनाउंसमेंट या विवादित गीत नहीं बजाए जा सकेंगे, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हों। यात्रा 21 जुलाई को सुबह 7 बजे ग्वारीघाट से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कैलाशधाम, मटामर में समाप्त होगी। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें और शांति पूर्ण व अनुशासित यात्रा सुनिश्चित करें।

अब ट्रेन छूटने से 8 घंटे पहले जारी होगा चार्ट, जबलपुर यात्रियों के लिए राहतभरी खबर

जबलपुर रेल यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर है। अब ट्रेन का आरक्षण चार्ट पहले से अधिक समय में तैयार होगा, जिससे यात्रियों को अपनी यात्रा को लेकर स्पष्टता मिलेगी। पश्चिम मध्य रेलवे (पमरे) ने रेलवे बोर्ड के नए निर्देश के बाद यह व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत अब ट्रेन छूटने से 8 घंटे पहले पहला रिजर्वेशन चार्ट तैयार किया जाएगा। इससे पहले यह चार्ट सिर्फ 4 घंटे पहले तैयार किया जाता था, जिससे कई बार वेटिंग और RAC (Reservation Against Cancellation) वाले यात्री कंफर्म टिकट की जानकारी देर से जान पाते थे। खासतौर पर दूर-दराज जिलों से आने वाले यात्रियों को दिक्कत होती थी कि उन्हें स्टेशन के लिए निकलना चाहिए या नहीं। अब इस असमंजस से उन्हें मुक्ति मिलेगी। किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा? मंडला, सिवनी, डिंडौरी, सिंगरौली और दमोह जैसे जिलों से जबलपुर स्टेशन आने वाले यात्रियों को इस फैसले से बड़ा लाभ होगा। पहले उन्हें ट्रेन छूटने से कुछ घंटे पहले ही यह पता चलता था कि उनका टिकट कन्फर्म हुआ है या नहीं। अब 8 घंटे पहले स्थिति स्पष्ट हो जाने से वे यात्रा की योजना बेहतर बना सकेंगे। इमरजेंसी कोटा (EQ) आवेदन प्रक्रिया भी होगी सरल ट्रेनों में मेडिकल या अन्य आपातकालीन स्थितियों के लिए आरक्षित सीटों (Emergency Quota) के लिए भी यात्रियों को अब एक दिन पहले आवेदन करना सुरक्षित होगा। यह बदलाव EQ सीटों की प्रोसेसिंग में पारदर्शिता और समय की बचत सुनिश्चित करेगा। ट्रेन प्रस्थान समय के अनुसार चार्टिंग नियम     सुबह 5 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलने वाली ट्रेनों के लिए पहला चार्ट पिछली रात 9 बजे तक बन जाएगा। दोपहर 2 बजे से रात 11:59 बजे तक की ट्रेनों के लिए चार्ट प्रस्थान से 8 घंटे पहले बनेगा। रात 12 बजे से सुबह 5 बजे तक की ट्रेनों के लिए भी 8 घंटे पहले ही चार्ट बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। रेलवे अधिकारियों की प्रतिक्रिया वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, जबलपुर रेल मंडल, शशांक गुप्ता ने बताया कि नई व्यवस्था यात्रियों के हित में है। इससे विशेषकर रिमोट क्षेत्रों के यात्रियों को यात्रा की स्पष्टता मिलेगी और उनकी योजना व्यवस्थित होगी।

आज से 19 जुलाई तक स्पेन प्रवास पर रहेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज से 19 जुलाई 2025 तक स्पेन के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में निवेश के माध्यम से औद्योगिक विकास और रोजगार सृजनकी दिशा में सतत् रूप से प्रयासरत् है। स्पेन प्रवास के दौरान वे मैड्रिड में आयोजित “इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश” बिजनेस फोरम को संबोधित करेंगे और उद्योग, पर्यटन, खेल, संस्कृति तथा फिल्म निर्माण से जुड़े विषयों पर उच्चस्तरीय बैठकों में भाग लेंगे। मुख्यमंत्री दुबई से रवाना होकर देर रात स्पेन की राजधानी मैड्रिड पहुंचेंगे। स्पेन प्रवास के प्रथम दिन 16 जुलाई की शुरूआत मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भारत के राजदूत श्री दिनेश के. पटनायक शिष्टाचार भेंट करेंगे। इसके बाद वे “इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश” बिजनेस फोरम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस सेशन में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पर्यटन, औद्योगिक नीति एवं निवेश, आईटी और अधोसंरचना सेक्टर पर प्रेजेन्टेशन होगा। बिजनेस फोरम की शुरुआत मध्यप्रदेश शासन के सचिव एवं मुख्यमंत्री के सचिव श्री इलैयाराजा टी. के स्वागत भाषण से होगी। स्पेन-इंडिया काउंसिल फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री जुआन इग्नासियो एंत्रेकानालेस भी फोरम को संबोधित करेंगे। नेचर बायोफूड्स के सीईओ श्री रोहन ग्रोवर द्वारा अनुभव साझा किये जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव फोरम में उपस्थिति उद्योगपतियों को मध्यप्रदेश में विभिन्न सेक्टर्स में निवेश के अवसरों पर विस्तृत जानकारी देंगे। नेटवर्किंग लंच में मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्पेन के प्रमुख उद्योगपतियों एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव खेल सेक्टर में विख्यात स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर डिज़ाइन एवं कंसल्टिंग फर्म ‘पॉपुलस’ के प्रजेंटेशन में भाग लेंगे। यह प्रजेंटेशन श्री जोर्ज बेटनकौर द्वारा दिया जाएगा। जिसमें मध्यप्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकास पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से बाद में स्पेन फिल्म आयोग के अध्यक्ष मुलाकात करेंगे, जिसमें मध्यप्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की फिल्म शूटिंग और सहयोग पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्राडो म्यूज़ियम का भ्रमण भी करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्पेन में बसे भारतीय व्यापार समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे और मैड्रिड में आयोजित विशेष रात्रि भोज में भाग लेंगे।  

शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में क्रांतिकारी पहल, अब सुदूर क्षेत्रों के बच्चे भी होंगे लाभांवित

रायपुर : कोरबा जिले में डीएमएफ से 52 करोड़ से अधिक की लागत से 481 आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण को मंजूरी बाल शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम, सुदूर क्षेत्रों में मिलेगा नया आयाम शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में क्रांतिकारी पहल, अब सुदूर क्षेत्रों के बच्चे भी होंगे लाभांवित रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बाल शिक्षा, पोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में कोरबा जिला प्रशासन ने जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) के प्रभावी उपयोग के तहत एक ऐतिहासिक पहल की है। कोरबा जिले में पहली बार 52 करोड़ 68 लाख 65 हजार रुपये की लागत से 481 नए आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गई है। यह कदम जिले के सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों में शिशु शिक्षा और पोषण सेवाओं को नई दिशा देगा। इस स्वीकृति के तहत कोरबा जिले के सभी विकासखंडों में आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण होगा। कोरबा विकासखंड में 56 भवनों के लिए 6 करोड़ 39 लाख 88 हजार, करतला में 78 भवनों के लिए 8 करोड़ 63 लाख 85 हजार, कटघोरा में 65 भवनों के लिए 7 करोड़ 56 लाख 16 हजार, पाली में 93 भवनों के लिए 10 करोड़ 17 लाख 6 हजार और पोड़ी उपरोड़ा में 189 भवनों के लिए 19 करोड़ 91 लाख 70 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन भवनों में बच्चों के लिए प्रारंभिक शिक्षा, पोषण आहार और स्वास्थ्य सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी, जिससे ग्रामीण और आदिवासी समुदायों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इसके अतिरिक्त, जिला प्रशासन ने पूर्व में भी डीएमएफ निधि से नगरीय क्षेत्रों में 96 आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण के लिए 12 करोड़ 40 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की थी, जिसमें कोरबा नगर पालिका निगम के 88 और बांकीमोंगरा नगर पालिका परिषद के 8 भवनों का निर्माण शामिल है। इन भवनों में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा, पोषण आहार और स्वास्थ्य सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे न केवल बालकों के समग्र विकास को बल मिलेगा, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी समुदायों को भी दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा। कोरबा जिले में प्रारंभिक बाल विकास के क्षेत्र में यह अब तक की सबसे बड़ी निवेश योजना मानी जा रही है। इससे न केवल शिक्षा और पोषण सेवाएं सुदृढ़ होंगी, बल्कि माताओं और बच्चों के लिए सुरक्षित, सुसज्जित और समर्पित केंद्रों का सृजन होगा।