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भोपाल पुलिस के लिए नया नियम: मौके पर जाने से पहले पहनना होगा बॉडी कैमरा

भोपाल  बहुचर्चित डीएसपी के साले उदित गायकी की मौत के बाद पुलिस प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। राजधानी भोपाल के साथी थानों में तैनात पुलिस जवान के हर कदम और कार्रवाई पर कैमरे की नजर होगी। रात में किसी भी तरह की सूचना पर इस कैमरा को पहनकर ही घटना स्थल पर जाना अनिवार्य है। पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र ने बताया कि शहर के गश्ती जवानों को बॉडी कैमरा(Bhopal Police) और रिकॉर्डिंग डिवाइस से लैस करने का आदेश जारी किया है। इसके लिए 200 कैमरों का ऑर्डर दिया जा चुका है। कंट्रोल रूम से सीधे होगी कंट्रोलिंग पुलिस कमिश्नर ने बताया कि शुरुआत में यह कैमरे रात में गश्त करने वाली टीमों को दिए जाएंगे। जवानों की वर्दी की जेब और कंधे पर कैमरा लगाया जाएगा, जो वीडियो और ऑडियो की रिकॉर्डिंग करेगा। किसी भी घटना, कार्रवाई के दौरान कैमरा ऑटोमेटिक चालू रहेगा। जिसकी कंट्रोलिंग कंट्रोल रूम से रहेगा। अब पुलिसिंग कार्रवाई में पारदर्शी रहें। पुलिस पर नहीं उठेंगे सवाल पुलिस प्रशासन ने यह कदम इसलिए उठाया कि पुलिसिंग में पारदर्शिता लाना है। उदित की मौत के बाद पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवालों पर अब पुलिस पर लोगों के भरोसे को और मजबूत करेगा। गश्त के दौरान होने वाली कार्रवाई कैमरे में रेकॉर्ड होगी। इससे घटना या शिकायत के मामले में फुटेज साक्ष्य के रूप में काम करेगा। यह शहर के सभी थानों और विशेष इकाइयों में लागू करेंगे, साथ ही पुलिसकर्मियों को कैमरा ऑपरेट करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। नई व्यवस्था लागू की जाएगी इससे जवानों की कार्यप्रणाली में अनुशासन बढ़ेगा और जनता के साथ व्यवहार में भी सुधार आएगा। हर बात रेकॉर्ड होगी तो झूठे आरोप की बात नहीं रहेगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भोपाल चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा। यह सिस्टम से पुलिस की कार्रवाई में पारदर्शिता रहेगी।- हरिनारायण चारी मिश्र, पुलिस कमिश्नर

पुलिस कमिश्नर ने दी चेतावनी: ये काम न किया तो थानेदारों के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी

वाराणसी  मिशन शक्ति 5.0 अभियान के अंतर्गत, बालिकाओं को सशक्त बनाने और उनमें आत्मविश्वास पैदा करने के उद्देश्य से सरकार की ओर से तरह-तरह की पहल की जा रही है। इसी के चलते प्रदेश के जिलों में बच्चियों और महिलाओं को सशक्त करने के तरह-तरह के मौके दिए जा रहे हैं। वहीं महिला सुरक्षा, सम्मान और सशक्तीकरण के उद्देश्य से चलाए जा रहे मिशन शक्ति 5.0 अभियान में सभी थानों के थानेदारों के योगदान का भी विश्लेषण किया जा रहा। वाराणसी पुसिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने महिला अपराध की रोकथाम, पीड़ितों को न्याय व सहायता, जागरूकता कार्यक्रमों के प्रभाव और भविष्य की रणनीतिक योजनाओं पर जोर दिया है। मंशा है कि शोहदों पर पुलिस मौके पर ही ऐसी कड़ी कार्रवाई करे, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश जाए।  वहीं वाराणसी पुसिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने हिदायत दी है कि अगर महिला सुरक्षा, सम्मान और मिशन शक्ति अभियान में थानेदारों का शत प्रतिशत योगदान नहीं रहा तो उन्हें अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ सकती है। यही नहीं, विभागीय कार्रवाई तक भी हो सकती है। मोहित अग्रवाल ने यह हिदायत तीन जोन काशी, गोमती और वरुणा के थानेदारों को दी है।  मिशन शक्ति 5.0 के अभियान और उपलब्धियों की समीक्षा में थानेदारों की रुचि और भागीदारी नहीं लेने की रिपोर्ट पुलिस आयुक्त के पास पहुंची थी। अभियान के दौरान सभी थानेदारों का अंतिम रिपोर्ट कार्ड पुलिस आयुक्त के पास भेजा जाएगा। जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, बेहतर काम करने वाले थानेदारों को मंच से सम्मानित भी किया जाएगा।

हरियाणा में बढ़ीं जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र की फीस, जानें नए दाम

चंडीगढ़  प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के जन्म मृत्यु प्रमाणपत्र सहित अन्य सेवाओं के दरों में सर्च चार्ज के नाम पर दो से तीन गुना तक फीस बढ़ाई गई है। इसके लिए हरियाणा सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के लिए गजट नोटिफिकेशन भी जारी किया है जिसमें बढ़ी हुई फीस का जिक्र है। अब सरकार 60 रुपये सर्च चार्ज के नाम से वसूल रही है जो पहले नहीं लग रहे थे। इसके साथ 50 रुपये सर्टिफिकेट चार्ज लगाया गया है। आवेदक सीएससी से प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करवाते हैं तो इसके 30 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। इस प्रकार अब 140 रुपये में प्रमाणित प्रति मिलेगी जो पहले 55 से 85 रुपये तक निकल जाती थी।   अगर आवेदक अस्पताल से जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र लेते हैं तो एक साल के बच्चे तक मुफ्त दिया जाता है। एक साल तक बच्चे का नाम मुफ्त अंकित किया जा सकता है। एक साल से अधिक उम्र के बच्चे के लिए 50 रुपये प्रमाणपत्र शुल्क और 50 रुपये सर्चिंग फीस देनी होगी यानी एक साल से अधिक उम्र के बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र और मृत्यु प्रमाण के लिए प्रति कॉपी 100 रुपये देने होंगे। पहले यह राशि 25 से 50 रुपये तक थी।  गांव, गलियों में खुले जन सुविधा केंद्रों (सीएससी) से प्रमाणपत्र पाने के लिए 30 रुपये अतिरिक्त सीएससी चार्ज रहेगा। यानी एक साल तक के बच्चे के लिए 80 रुपये और एक साल से अधिक आयु के बच्चे के लिए 140 रुपये अदा करने होंगे। इसके लिए पहले 55 रुपये और 85 रुपये लगते थे।स्वास्थ्य विभाग की ओर से जन्म प्रमाणपत्र, मृत्यु प्रमाणपत्र, जन्म प्रमाणपत्र में नाम लिखवाने और बने हुए प्रमाणपत्र में गलतियां ठीक करवाने के लिए आमजन को अक्सर यह प्रक्रिया पूरी करवानी पड़ती है।  

तमिलनाडु सरकार के रवैये से धीमी पड़ी जांच? कोल्ड्रिफ कांड में SIT की रफ्तार थमी

 छिंदवाड़ा  जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सीरप के सेवन से 24 बच्चों की मौत के मामले में 10 अक्टूबर को गठित विशेष एसआईटी टीम लगातार जांच कर रही है। लेकिन जांच की रफ्तार धीमी है। इस जांच में दवा निर्माता कंपनी की फैक्ट्री वाले राज्य तमिलनाडु की सरकार के असहयोग पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। छिंदवाड़ा के सांसद बंटी विवेक साहू ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि तमिलनाडु सरकार जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रही है। जानकारी के अनुसार, इस असहयोग के चलते एसआईटी द्वारा तमिलनाडु के फूड सेफ्टी एंड ड्रग डिपार्टमेंट को नोटिस जारी किया गया है। इस नोटिस में श्रीसन फार्मा (दवा निर्माता कंपनी) के रिकॉर्ड, ऑडिट और कॉम्प्लायंस की जानकारी मांगी गई है। एसआईटी यह पता लगाना चाहती है कि बच्चों की मौत का मामला सामने आने से पहले तमिलनाडु के ड्रग कंट्रोल अधिकारियों ने कब और किस तरह के निरीक्षण किए थे। हालांकि अधिकारियों ने नोटिस जारी करने की पुष्टि नहीं की है। दूषित बैच बाजार में आने से पहले पता लगा लेना चाहिए था मध्य प्रदेश पुलिस और सरकार का मानना है कि यह त्रासदी तमिलनाडु स्थित दवा फैक्ट्री हुई लापरवाही के कारण हुई है और वहां के अधिकारियों को दवा दूषित बैच बाजार में आने से पहले ही इसका पता लगा लेना चाहिए था। मध्य प्रदेश पुलिस की एसआईटी टीम ने तमिलनाडु से श्रीसन फार्मा के मालिक जी. रंगनाथन और महिला लैब तकनीशियन के. महेश्वरी को गिरफ्तार किया है। जांच दल अब नियामक ढांचे के भीतर व्यक्तिगत जवाबदेही पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, खासकर इस बात की जांच कर रहा है कि क्या तमिलनाडु के ड्रग कंट्रोल अधिकारियों ने केवल कागजी कार्रवाई पर निरीक्षण किया था, न कि भौतिक सत्यापन पर।

गौ-शालाओं और पशुपालकों को आयोजन में बनायें सहभागी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गोवर्धन पर्व संबंधी बैठक में दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में 21 अक्टूबर को गोवर्धन पर्व लोक अनुष्ठान और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार मनाया जाए। आयोजन में गौशालाओं तथा पशुपालकों को विशेष रूप से सहभागी बनाया जाए। साथ ही गोवर्धन पर्व पर पशुपालन तथा दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में विशेष उपलब्धियां दर्ज करने और नवाचार करने वाले उद्यमियों को सम्मानित भी किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ.यादव गोवर्धन पर्व आयोजन के संबंध में सोमवार को मंत्रालय में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि प्रदेश की गौ-शालाओं में गोवर्धन पर्व का सामुदायिक आयोजन होगा। गोवर्धन पर्व का मुख्य आयोजन रवीन्द्र भवन भोपाल में किया जाएगा, जिसमें गोवर्धन पूजन, परिक्रमा, अन्नकूट भोग मुख्य होगा। इस अवसर पर पशुचारक समुदायों की कला, बरेदी और ठाट्या नृत्य आदि का प्रस्तुतीकरण होगा। कार्यक्रम में जैविक उत्पादक, दुग्ध उत्पाद, गोबर आधारित शिल्प के स्टॉल लगाए जाएंगे, साथ ही पशुपालन, कृषि, सहकारिता विभाग की योजनाओं की जानकारी देने के लिए विशेष व्यवस्था होगी। इसके साथ ही ग्रामीण आजीविका के लिए दुग्ध उत्पादन और वृंदावन ग्राम योजना के विस्तार के लिए भी गतिविधियों का संचालन होगा। गोवर्धन पर्व पर सभी जिलों में गतिविधियां संचालित की जाएंगी। आंगनवाड़ी केंद्रों में पंचगव्य उत्पाद जैसे घी, दूध, पनीर और दही से बनी सामग्री का वितरण किया जाएगा।  

Diwali के बाद MP में सोयाबीन किसानों की खुशी, भावांतर योजना के तहत मिलेगा सही मूल्य

इंदौर सोयाबीन उत्पाद किसानों के लिए सरकार ने भावांतर योजना शुरू की है। इसके लिए 17 अक्टूबर तक पंजीयन कराए गए और अब दीपावली बाद 84 दिन भावांतर योजना में सोयाबीन की खरीदी होगी। 24 अक्टूबर से प्रदेश की सभी मंडियों में भावांतर येाजना में सोयाबीन बचे सकेंगे। योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए मंडियों में प्रशासन द्वारा सभी सुविधाएं जुटाई जा रही है। 15 जनवरी तक होगी सोयाबीन की खरीदी इंदौर जिले में भी अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है, जो खरीदी से लेकर निगरानी और भुगतान तक की व्यवस्था देखेगी। इंदौर संभाग में भावांतर योजना में सोयाबीन बचने के लिए एक लाख 45 हजाार 188 किसानों ने पंजीयन कराया है। किसान 15 जनवरी तक भावांतर योजना में मंडियों में सोयाबीन बेच सकेंगे और अंतर की राशि का भुगतान सरकार द्वारा किसानों के पंजीकृत खातों में किया जाएगा। संभाग में पंजीयन के लिए 432 केंद्र बनाए गए थे। संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने विगत दिनों बैठक लेकर सभी जिलों के सोयाबीन की खरीदी को सुविधाजन बनाने के निर्देश जारी किए है। इंदौर की मंडियों में भी निगरानी के लिए विशेष व्यस्था की गई है।   सर्वाधिक पंजीयन इंदौर और धार जिले में हुए कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार संभाग में सर्वाधिक पंजीयन इंदौर और धार जिले में हुए है। सोयाबीन बोवनी के कुल रकबे की अपेक्षा इंदौर में 50.91 और धार में 35.74 प्रतिशत पंजीयन हुए है। जिले- किसान- रकबा- प्रतिशत इंदौर- 46,061 – 1,22,809 – 50.91 धार – 37,940 – 1,06,464 – 35.74 खंडवा – 20,001 – 46,652 – 24.75 बड़वानी – 13,455 – 15,592 – 75.18 खरगोन – 13,364 – 24,799 – 27.83 झाबुआ – 10,478 – 13,578 – 18.73 बुरहानपुर – 2,534 – 4,411 – 40.10 आलीराजपुर – 1,355 – 1,215 – 3.10

नीतीश कुमार का चुनावी दांव: सोशल इंजीनियरिंग से एक तीर, कई निशाने

पटना. बिहार की राजनीति में अगर किसी नेता को सोशल इंजीनियरिंग का मास्टर कहा जाता है, तो वह हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. सुशासन बाबू के नाम से मशहूर नीतीश कुमार ने अपने पूरे राजनीतिक करियर में समाज के हर वर्ग को जोड़ने और संतुलन साधने की रणनीति पर काम किया है. यही कारण है कि चाहे सरकार बनानी हो, मंत्रिमंडल का गठन करना हो या चुनाव में उम्मीदवारों का चयन- हर बार उन्होंने सामाजिक, जाति और क्षेत्रीय समीकरणों का ध्यान रखते हुए फैसला लिया है. इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद समाजवादी राजनीति में कदम रखने वाले नीतीश कुमार ने हमेशा विकास के साथ सामाजिक न्याय की बात की है. नीतीश कुमार ने सत्ता में रहते हुए योजनाओं, नीतियों और टिकट बंटवारे में सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता दी है. इस बार भी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए जेडीयू की उम्मीदवार सूची इस परंपरा को आगे बढ़ाती दिख रही है. टिकट बंटवारे में दिखा सामाजिक संतुलन बिहार चुनाव को लेकर जेडीयू ने अपनी 101 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है, जिसमें हर समाज और वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया गया है. पार्टी ने पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सवर्ण और महिलाओं सभी को टिकट देकर समावेशी राजनीति का संदेश दिया है. जेडीयू उम्मीदवारों की लिस्ट में सोशल इंजीनियरिंग की झलक     पिछड़ा वर्ग (OBC) से 37 उम्मीदवार     अति पिछड़ा वर्ग (EBC) से 22 उम्मीदवार     सवर्ण समाज से 22 उम्मीदवार     अनुसूचित जाति (SC) से 15 उम्मीदवार     अनुसूचित जनजाति (ST) से 2 उम्मीदवार शामिल हैं.     इसके साथ ही पार्टी ने 13 महिलाओं को भी टिकट देकर महिला सशक्तिकरण का मजबूत संदेश दिया है.     पहली लिस्ट में ‘लव-कुश समीकरण’, दूसरी में ‘पिछड़ा-समाज पर फोकस’ जेडीयू की पहली लिस्ट में जहां लव-कुश समीकरण (कुशवाहा और यादव समुदाय) को प्राथमिकता दी गई थी, वहीं दूसरी लिस्ट में पिछड़ा समाज को प्रमुखता दी गई है. नीतीश कुमार की रणनीति साफ दिख रही है वे चाहते हैं कि हर जाति और वर्ग को प्रतिनिधित्व मिले, जिससे जेडीयू का सामाजिक आधार और व्यापक हो. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेडीयू का यह कदम न केवल महागठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने की कोशिश है, बल्कि उन वर्गों को भी साधने की रणनीति है जो पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी और आरजेडी के साथ झुक गए थे. जेडीयू की लिस्ट में जातीय समीकरण के गणित को समझें नीतीश कुमार की सोशल इंजीनियरिंग का इतिहास नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी ताकत रही है उनकी सोशल इंजीनियरिंग. जब 2005 में उन्होंने पहली बार बिहार की सत्ता संभाली, तब से उन्होंने “विकास और सामाजिक न्याय” के संतुलन पर काम किया. इन सभी योजनाओं ने नीतीश कुमार को सिर्फ विकास पुरुष नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन साधने वाले नेता के रूप में स्थापित किया.     सात निश्चय योजना     मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना     आरक्षण में बढ़ोतरी     महिलाओं को 35 प्रतिशत नौकरी आरक्षण     अति पिछड़ा आयोग का गठन महिलाओं को प्राथमिकता ‘सशक्त बिहार’ का संदेश जेडीयू ने अपनी इस लिस्ट में 13 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है. इससे पार्टी ने यह स्पष्ट किया है कि नीतीश कुमार महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर हमेशा गंभीर रहते हैं. पंचायत चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले से लेकर सरकारी नौकरियों में आरक्षण तक, उन्होंने महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में कई ठोस कदम उठाए हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जेडीयू की यह रणनीति महिला वोट बैंक को मजबूत करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है. अति पिछड़े और दलित समाज को भी बड़ा प्रतिनिधित्व जेडीयू की लिस्ट में अति पिछड़ा समाज (EBC) से 22 और अनुसूचित जाति (SC) से 15 उम्मीदवार शामिल किए गए हैं. नीतीश कुमार की राजनीति की जड़ें इन्हीं तबकों में हैं. उन्होंने हमेशा इन वर्गों को राजनीतिक और सामाजिक रूप से सशक्त करने पर ध्यान दिया है. जेडीयू नेताओं का कहना है कि जेडीयू हमेशा से सबका साथ, सबका विकास की नीति पर चलती है. हमारी कोशिश यही रहती है कि कोई भी समाज खुद को अलग या उपेक्षित महसूस न करे.” नीतीश कुमार ने इन 3 नेताओं से भी लिया फीडबैक वहीं जेडीयू सूत्रों का कहना है कि नीतीश कुमार ने सीट शेयरिंग में सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला का इस्तेमाल करने के लिए इस बार जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं ललन सिंह, संजय झा और विजय चौधरी से भी बड़ी चर्चा की है. जेडीयू सूत्रों का कहना है कि इन तीनों नेताओं ने उम्मीदवारों के चयन को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रत्याशियों और सीटों से जुड़े फीडबैक और कई अहम जानकारियां दी. हालांकि बिहार चुनाव 2025 में नीतीश कुमार की यह सोशल इंजीनियरिंग कितनी कारगर साबित होगी, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि सुशासन बाबू ने अपने पुराने फार्मूले पर एक बार फिर से भरोसा जताया है.  

धान खरीद में रफ्तार तेज, हरियाणा के किसानों को मिला 5932 करोड़ का लाभ

चंडीगढ़  हरियाणा में धान की सरकारी खरीद 22 सितंबर से चालू है। इस बीच खरीद सीजन 2025-26 के दौरान, हरियाणा सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर जल्द भुगतान सुनिश्चित करते हुए किसानों के बैंक खातों में सीधे 5,932.47 करोड़ रुपये दिए हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए राज्य की सभी अनाज मंडियों में धान की खरीद सुचारू रूप से जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रवक्ता ने कहा कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए, राज्य की सभी अनाज मंडियों में धान की खरीद सुचारू रूप से की जा रही है. उन्होंने बताया कि हाफेड, वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन, खाद्य और आपूर्ति विभाग खरीद कार्यों में सक्रिय रूप से साथ दे रहे हैं। किसानों को अपनी उपज बेचते समय किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, यह सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।उन्होंने बताया कि धान की खरीद केवल 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसानों से ही की जा रही है. वहीं, अब तक 2,02,812 रजिस्टर्ड किसान अपनी उपज खरीद एजेंसियों को बेच चुके हैं।   उन्होंने आगे जानकारी देते हुए बताया कि अब तक हरियाणा की मंडियों में कुल 38.92 लाख टन धान की आवक हो चुकी है. इसमें से 35.34 लाख टन की खरीद हो चुकी है और 27.11 लाख टन भंडारण और प्रसंस्करण के लिए उठा लिया गया है. उन्होंने दोहराया कि खरीद भारत सरकार द्वारा अधिसूचित 2,389 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी पर की जा रही है और इस दर में कोई कटौती नहीं की जा रही है। सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी उपज को केंद्र द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुरूप उचित रूप से सुखाने के बाद ही लाएं, जिसमें अधिकतम 17 फीसदी नमी की मात्रा भी शामिल है। प्रवक्ता ने कहा कि किसानों से अनुरोध किया गया है कि वे अपना धान पर्याप्त रूप से सुखाकर लाएं ताकि उन्हें उनकी उपज का समय पर और उचित भुगतान मिल सके। उन्होंने कहा कि सभी खरीद एजेंसियों ने सुचारू खरीद के लिए मंडियों में पर्याप्त व्यवस्था की है और भीड़ भाड़ से बचने के लिए उठान की गति तेज कर दी गई है।

स्कूलों में जल्द शुरू होगी AI एजुकेशन, जानें शिक्षा मंत्रालय की योजना

नई दिल्ली  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की धमक अब दुनिया भर में महसूस की जा रही है-और भारत भी इससे अछूता नहीं रहना चाहता। लंबे समय से स्कूल शिक्षा में AI को शामिल करने की मांग उठ रही थी, जिसे लेकर अब केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय देशभर के स्कूलों में कक्षा 3 से AI एजुकेशन लागू करने की रूपरेखा तैयार कर रहा है। माना जा रहा है कि ये बदलाव शैक्षणिक सत्र 2025-26 से नजर आने लगेंगे। सभी विषयों के छात्रों के लिए होगी AI शिक्षा मंत्रालय की योजना के तहत AI एजुकेशन केवल तकनीकी या विज्ञान के छात्रों तक सीमित नहीं रहेगी। कक्षा 3 से ऊपर की सभी कक्षाओं के छात्रों को AI की मूल समझ दी जाएगी। यानी हर विषय के विद्यार्थी को इसका हिस्सा बनना होगा। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि AI एजुकेशन को अनिवार्य बनाया जाएगा या वैकल्पिक रखा जाएगा। स्कूल शिक्षा सचिव ने दी अहम जानकारी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि आने वाले दो से तीन वर्षों में छात्रों और शिक्षकों को AI तकनीक से जोड़ने के लिए तेजी से कदम उठाने होंगे। उन्होंने बताया कि देशभर के एक करोड़ से अधिक शिक्षकों को AI शिक्षा से प्रशिक्षित करना बड़ी चुनौती होगी। इस दिशा में एक पायलट प्रोजेक्ट पहले से चल रहा है, जिसके तहत शिक्षकों को पाठ योजनाएं तैयार करने में AI टूल्स का इस्तेमाल सिखाया जा रहा है। लक्ष्य है- शिक्षक और शिक्षार्थी, दोनों को डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करना। फिलहाल 9वीं से 12वीं तक वैकल्पिक विषय के रूप में इस समय AI एजुकेशन केवल CBSE स्कूलों में शामिल है। देशभर के 18,000 से अधिक CBSE स्कूलों में कक्षा 6 के बाद 15 घंटे का AI स्किल मॉड्यूल उपलब्ध है। वहीं कक्षा 9 से 12 तक AI एक वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ाया जा रहा है।   खत्म हो जाएंगी नौकरियां नीति आयोग की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, AI के बढ़ते उपयोग से करीब 20 लाख पारंपरिक नौकरियां समाप्त हो सकती हैं। लेकिन, अगर देश में सही AI इकोसिस्टम तैयार हो जाए, तो करीब 80 लाख नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं। यानी, आने वाला समय सिर्फ पढ़ाई ही नहीं- रोज़गार की दिशा भी बदलने वाला है।  

UP सरकारी विभाग में होने जा रही भर्ती, खाली पदों की संख्या जानकर रह जाएंगे हैरान

फर्रुखाबाद स्वास्थ्य विभाग ने रिक्त चल रहे 44 पदों को चिह्नित कर लिया है। अब इन पदों पर कोरोना वारियर्स की भर्ती कर तैनाती की जाएगी। विभाग ने दीपावली के बाद भर्ती करेगा। इस बार एक फार्मासिस्ट, डेंटल असिस्टेंड और वार्ड ब्वाय के पद भरे जाएंगे। कई बार कोरोना वारियर्स हंगामा कर समायोजन की मांग कर चुके हैं। 163 कोरोना वारियर्स की हुई थी भर्ती कोरोना काल में शासन के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग ने जनपद स्तर पर 163 कोरोना वारियर्स की भर्ती की थी। समय से मानदेय न मिलने पर 50 स्वास्थ्य कर्मचारी नौकरी छोड़कर चले गए थे। उसके बाद 31 जुलाई 2024 को शेष रह गए 113 कोरोना वारियर्स की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। शासन के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग ने 113 कोरोना वारियर्स में 16 कर्मचारियों का समायोजन कर दिया था। उसके बाद 97 कर्मचारियों में 38 स्टाफ नर्स काे भी भर्ती कर उनकी तैनाती कर दी गई थी। अब 59 कोरोना वारियर्स में 44 की भर्ती किए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। इनमें अधिकांश कर्मचारी चतुर्थश्रेणी के हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अवनींद्र कुमार ने बताया कि 44 पदों को चिह्नित किया गया है। दीपावली के बाद कोरोना वारियर्स का समायोजन कर उनकी तैनाती कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि यह भर्ती विभिन्न कार्यक्रम व योजना के तहत की जाएगी।