samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय लाल बहादुर शास्त्री का किया स्मरण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'जय जवान-जय किसान' के उद्घोषक, महान राष्ट्रभक्त, शुचिता, सरलता व दृढ़ता के प्रतिमान, 'भारत रत्न' से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शास्त्री जी ने अपने कार्यों से जो मूल्य एवं आदर्श स्थापित किए हैं, वे हर पीढ़ी को देश और समाज की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे। उनके कुशल और बुलंद नेतृत्व को देश सदा याद रखेगा।  

विभागीय कार्यों की प्रगति पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों संग की विस्तृत चर्चा

शासकीय कामकाज में बढ़ी पारदर्शिता: बेहतर परफ़ॉर्म करने वाले अधिकारियों की हुई सराहना, अधिकारियों को स्व-मूल्यांकन कर सुधार करने के निर्देश पूंजीगत व्यय और शासकीय कामकाज के क्रियान्वयन की व्यापक समीक्षा जेम पोर्टल से होने वाली शासकीय खरीदी में अनियमितता पर होगी कड़ी कार्रवाई मंत्रालय में उप सचिव स्तर से वरिष्ठ अधिकारियों के लिए 01 दिसंबर से लागू होगी बायोमैट्रिक अटेंडेंस गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्यों में लाएँ तेजी, सुगम आवागमन के लिए सड़कों के सुधार और रखरखाव पर ज़ोर रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में  विभागीय सचिवों और विभागाध्यक्षों की मैराथन बैठक ली। उन्होंने विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अधिकारियों को विभागीय समन्वय और टीम भावना के साथ कार्य करने हेतु प्रेरित किया। मुख्यमंत्री साय ने उच्च स्तरीय बैठक में पूंजीगत व्यय में तेजी, शासकीय कामकाज में पारदर्शिता, आमजनों की समस्याओं का त्वरित निराकरण तथा गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्यों को समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों की सराहना की और अधिकारियों को स्व-मूल्यांकन कर सुधार लाने के लिए कहा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ई-ऑफिस प्रणाली से शासन के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ी है और इससे सुशासन का संकल्प साकार हो रहा है। उन्होंने प्रसन्नता जताई कि लगभग सभी विभागों में ई-ऑफिस प्रणाली लागू हो चुकी है। शेष विभाग दिसंबर 2025 तक इसे अनिवार्य रूप से लागू करें। मुख्यमंत्री ने सुगम आवागमन के लिए सड़कों के सुधार और रखरखाव पर विशेष बल दिया। साथ ही, जेम पोर्टल से होने वाली शासकीय खरीदी में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूंजीगत व्यय से राज्य की आधारभूत संरचना मज़बूत होती है और दीर्घकालिक विकास की नींव पड़ती है। उन्होंने कम पूंजीगत व्यय वाले विभागों को कार्यों में गति लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के रजत जयंती वर्ष को “अटल निर्माण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। इस वर्ष के बजट में पिछले वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक प्रावधान किया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बजट में प्रावधानित कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति समय पर दी जाए, स्वीकृत कार्यों के टेंडर शीघ्र जारी हों और बिना विलंब कार्य प्रारंभ हो। उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय के सभी कार्य जनता के हित से सीधे जुड़े हैं, इसलिए इन्हें समय पर पूरा करना आवश्यक है। जिन विभागों का व्यय पिछले वर्ष की तुलना में कम है, वे इसके कारणों की पहचान कर तत्काल सुधार करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि बरसात अब समाप्ति की ओर है, ऐसे में आगामी दो महीनों का सदुपयोग करते हुए निर्माण कार्यों से संबंधित सभी औपचारिकताएँ शीघ्र पूरी करें। जनता की समस्याओं को धैर्य से सुनें अधिकारी मुख्यमंत्री श्री साय ने विभागीय सचिवों से कहा कि आप सभी जनता की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनें और उनका निराकरण करें। उन्होंने कहा कि सतत मॉनिटरिंग और नियमित प्रवास से विकास की गति बढ़ती है। प्रभारी सचिव अपने-अपने प्रभार वाले जिलों का हर दो माह में दौरा कर योजनाओं के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा करें। मंत्रालय के कामकाज में कसावट के लिए बायोमैट्रिक अटेंडेंस मुख्यमंत्री श्री साय ने मंत्रालय के कामकाज में कसावट लाने के उद्देश्य से 1 दिसंबर से बायोमैट्रिक अटेंडेंस प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी समय पर कार्यालय पहुँचें और अपने अधीनस्थों को भी समयपालन के लिए प्रेरित करें। मुख्य सचिव श्री विकास शील ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि 1 दिसंबर से मंत्रालय में उप सचिव स्तर से वरिष्ठ अधिकारियों तक के लिए बायोमैट्रिक अटेंडेंस प्रणाली लागू होगी। इस अवसर पर मुख्य सचिव विकास शील, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित सभी विभागीय सचिव और विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।

हिरासत में मौत से हड़कंप: डूंगरपुर में पुलिस पर कार्रवाई, धरना प्रदर्शन जारी

बांसवाड़ा/डूंगरपुर बांसवाड़ा के समीपवर्ती डूंगरपुर जिले के दोवड़ा थाना क्षेत्र में चोरी के आरोप में गिरफ्तार किए गए देवसोमनाथ निवासी दिलीप अहारी की पूछताछ के दौरान तबीयत बिगड़ गई थी। जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उसे उदयपुर के महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय रेफर किया गया, जहां मंगलवार दोपहर उसने दम तोड़ दिया। इस घटना को लेकर अब बवाल मचा हुआ है।  धरने पर बैठे परिजन और ग्रामीण युवक की मौत के बाद परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण पहले दोवड़ा थाने और फिर कलेक्ट्री के बाहर धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि पुलिस की पिटाई से दिलीप की मौत हुई है। मृतक के परिवार और ग्रामीणों ने एक करोड़ रुपये का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और दोवड़ा थाने में तैनात सभी पुलिसकर्मियों को बर्खास्त करने की मांग की है। मंत्री, सांसद और विधायक पहुंचे, वार्ता विफल घटना के बाद मंगलवार शाम को जनजाति विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी, सांसद मन्नालाल रावत, विधायक गणेश घोघरा, उमेश डामोर, अनुतोष रोत सहित आदिवासी समाज के प्रतिनिधि प्रशासन के साथ बातचीत में शामिल हुए। देर रात तक कलेक्टर अंकित कुमार सिंह और एसपी मनीष कुमार ने वार्ता की, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। बुधवार शाम तक भी ग्रामीण कलेक्ट्री परिसर में डटे रहे।   पांच पुलिसकर्मी निलंबित मामले की गंभीरता को देखते हुए डूंगरपुर पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने कार्रवाई की है। दोवड़ा थानाधिकारी तेजकरण सिंह, सहायक पुलिस निरीक्षक वल्लभराम, हेड कांस्टेबल सुरेश कुमार, कांस्टेबल पुष्पेंद्र सिंह और माधव सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन के बाद इनका मुख्यालय डूंगरपुर रिजर्व पुलिस लाइन में कर दिया गया है।

भीलवाड़ा में टी. राजा की हुंकार, कहा – मोदी की योजनाओं का करूंगा प्रसार

भीलवाड़ा भीलवाड़ा का बुधवार (1 अक्टूबर) को वातावरण धार्मिक जोश और उत्साह से सराबोर रहा। अवसर था दुर्गा शक्ति अखाड़े के 9वें स्थापना दिवस का, जो हरी सेवा उदासीन आश्रम परिसर में बड़े हर्षोल्लास से मनाया गया। इस मौके पर तेलंगाना से विधायक टी राजा सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। बालिकाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्होंने कहा कि “आने वाला समय भारत के लिए संघर्ष और युद्ध का समय है। इसलिए हर सनातनी बालिका को दुर्गा या काली बनना है, लेकिन कभी भी बुरखे वाली नहीं बनना।” उन्होंने आगे कहा कि धर्म की रक्षा के लिए शास्त्र और शस्त्र दोनों का ज्ञान जरूरी है। राजस्थान में बने धर्मांतरण विरोधी कानून के लिए उन्होंने राज्य सरकार को धन्यवाद दिया और इसे और प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि इसके लिए अलग विभाग और टास्क फोर्स बनाकर कंट्रोल रूम स्थापित करना चाहिए, ताकि धर्मांतरण की सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई हो सके। सुबह 4000 से अधिक बालिकाएं घोष की गूंज के साथ पथ संचलन करती हुई माली समाज के नोहरे से रवाना हुईं। यह संचलन बड़ा मंदिर, सूचना केंद्र होते हुए हरि सेवा आश्रम पहुंचा। पूरे मार्ग में विभिन्न हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर बालिकाओं का स्वागत किया। धर्मसभा का शुभारंभ महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन, महंत बाबू गिरी, महंत प्रकाश दास, संत मयाराम, संत गोविंद राम, ब्रह्मचारी इंद्रदेव, सिद्धार्थ, मिहिर, पंडित धर्मेश, सत्यनारायण और मोनू शर्मा द्वारा राम दरबार के समक्ष दीप प्रज्वलन व शस्त्र पूजन के साथ हुआ। स्वामी हंसराम ने बालिकाओं को धर्म रक्षा हेतु एकजुट होकर कार्य करने की प्रेरणा दी। सभा में बोलते हुए टी राजा सिंह ने कहा कि “भारत के सामने आने वाला समय संघर्ष और युद्ध का है। जिस तरह औरंगजेब के समय मंदिरों में पूजा संभव नहीं थी, उसी प्रकार धर्म पर संकट कभी भी आ सकता है। इसलिए सनातन समाज को सतर्क रहकर धर्म की रक्षा के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने चेताया कि धर्मांतरण के नाम पर आज भी बेटियों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में राजस्थान को भी यूपी की तर्ज पर कठोर कार्रवाई करनी होगी। पत्रकारों से वार्ता के दौरान राजनीतिक सवालों पर उन्होंने कहा कि वे नरेंद्र मोदी, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के कार्यों से प्रभावित होकर राजनीति में आए थे, लेकिन अब चुनाव लड़ने में उनकी रुचि नहीं है। विधायक के रूप में उनका कार्यकाल शेष 3 साल का है, जिसके बाद वे राजनीति छोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा, “जिस प्रकार हनुमान जी भगवान श्रीराम के प्रचारक थे, उसी तरह मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रचारक के रूप में उनके धर्महित और राष्ट्रहित के कार्यों का प्रचार करता रहूंगा।” लद्दाख में हालिया हिंसा को लेकर उन्होंने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि कांग्रेस समर्थित लोग हथियारों और पत्थरों के साथ तोड़फोड़ कर रहे थे। यह एक बड़ा षड्यंत्र था, जो विफल हो गया। उन्होंने कहा कि भारत की शांति और प्रगति कुछ लोगों को रास नहीं आ रही और यही लोग दंगे-फसाद की साजिशें कर रहे हैं। धर्मसभा के दौरान दुर्गा शक्ति अखाड़े की विभिन्न शाखाओं की बालिकाओं ने तलवार और अखाड़ा प्रदर्शन कर अपनी दक्षता का परिचय दिया। इस अवसर पर 5100 बालिकाओं को कटार दीक्षा दी गई और सभी को सामूहिक भोज कराया गया।

शास्त्रीय संगीत का सितारा गया: पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन, पीएम मोदी ने जताया सम्मान

मीरजापुर प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्रा अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनका सुबह 4.15 बजे मीरजापुर में बेटी नम्रता मिश्रा के यहां निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनका अंतिम संस्कार बनारस में होगा। पंडित जी को तीन सप्ताह पहले शनिवार के दिन माइनर अटैक आया था। उसके बाद उनको बीएचयू के इमरजेंसी डिपार्टमेंट में भर्ती कराया था। जहां डॉक्टरों ने जानकारी दी थी कि उनके चेस्ट में इंफेक्शन व खून की कमी है। तीन सप्ताह चले इलाज के बाद उनको छुट्टी दे दी थी। उनकी बेटी ने उनको फिर मीरजापुर के रामकृष्ण सेवा मिशन चिकित्सालय में भर्ती कराया था।   बॉलीवुड में दिया था योगदान पंडित जी शास्त्रीय संगीत के विद्वान थे। उनके पारंपरिक शैली में गाए सोहर काफी मशहूर हुए थे। उनको आज भी यूट्यूब पर सुना जा सकता है। इसके अलावा उन्होंने बॉलीवुड में गायन किया था। उन्होंने गाने जरूर कम गाए, लेकिन फिर भी अपनी छाप जरूर छोड़ी। साल 2011 में उन्होंने प्रकाश झा की फिल्म आरक्षण में 'सांस अलबेली' और 'कौन सी डोर' जैसे गाने गाए। उन्होंने साल 2020 में 'वैष्णव जन तो तेहि कहिए' एल्बम के लिए आवाज दी थी। पीएम मोदी के बने थे प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनकी मौत पर शोक जताते हुए कहा कि सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। वे जीवनपर्यंत भारतीय कला और संस्कृति की समृद्धि के लिए समर्पित रहे। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही भारतीय परंपरा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने में भी अपना अमूल्य योगदान दिया। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे सदैव उनका स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त होता रहा। साल 2014 में वे वाराणसी सीट से मेरे प्रस्तावक भी रहे थे। शोक की इस घड़ी में मैं उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करता हूं। ओम शांति!

केंद्र को चैलेंज: पंजाब सरकार ने SDRF डेटा को बताया भ्रामक, 20 हजार करोड़ की मांग बनी मुद्दा

पंजाब पंजाब विधान सभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बाढ़ राहत के मुद्दे पर केंद्र सरकार के रवैये को लेकर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य अपने हक की मांग कर रहा है, भीख नहीं। मान ने विधानसभा में पिछले 25 वर्षों के SDRF (राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष) के पूरे आंकड़े सदन के समक्ष रखते हुए केंद्र के दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र द्वारा SDRF में ₹12,000 करोड़ पड़े होने का दावा पूरी तरह से भ्रामक और तथ्यहीन है। मुख्यमंत्री ने विस्तार से बताया कि अकाली-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस की सरकारों के कार्यकाल सहित पिछले 25 सालों में राज्य को SDRF के तहत कुल मिलाकर केवल ₹6,190 करोड़ ही प्राप्त हुए है। इसमें से अधिकांश राशि पहले ही विभिन्न आपदाओं – बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं में खर्च हो चुकी है। वर्तमान में SDRF खाते में केवल लगभग ₹1,200 करोड़ ही शेष बचे है, जो इस विनाशकारी बाढ़ से निपटने के लिए नाकाफी है। 2025 अगस्त में आई भयंकर बाढ़ ने पंजाब के लगभग 1,400 गांवों को अपनी चपेट में ले लिया और चार लाख से अधिक लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए। राज्य के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में व्यापक तबाही हुई, जिसमें हजारों एकड़ खड़ी फसलें नष्ट हो गई। गेहूं, सरसों और अन्य रबी फसलों का भारी नुकसान हुआ। किसान संगठनों के अनुसार, लगभग 75,000 किसान परिवार पूरी तरह से बर्बाद हो गए है और उन्हें तत्काल राहत की सख्त ज़रूरत है। राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रारंभिक आकलन के अनुसार, बाढ़ से हुए कुल नुकसान का अनुमान ₹13,800 करोड़ है। इसमें कृषि क्षति, बुनियादी ढांचे को नुकसान, सड़कों और पुलों की क्षति, बिजली और पानी की आपूर्ति व्यवस्था को हुए नुकसान को शामिल किया गया है। हालांकि, राज्य सरकार का मानना है कि वास्तविक नुकसान इससे कहीं अधिक हो सकता है क्योंकि कई दूरदराज के इलाकों में अभी भी सर्वेक्षण का काम चल रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने केंद्र से ₹20,000 करोड़ के विशेष राहत पैकेज की मांग की है। केंद्र सरकार ने अब तक केवल ₹1,600 करोड़ की राशि स्वीकृत की है, जिसे राज्य सरकार और विपक्षी दलों ने “समुंद्र में बूंद” करार दिया है। केंद्र की ओर से यह भी सुझाव दिया गया कि राज्य SDRF में पड़े ₹12,000 करोड़ के फंड का उपयोग करे। इस पर मुख्यमंत्री मान ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह दावा “फ़िज़ूल कल्पना” और “अंकों की बाज़ीगरी” से ज़्यादा कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि SDRF का पूरा हिसाब-किताब पारदर्शी तरीके से जनता के सामने रख दिया गया है और कोई भी इसे जांच सकता है। विधानसभा में अपने भाषण में मुख्यमंत्री मान ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “हम केंद्र से भीख नहीं मांग रहे, बल्कि अपने हक की मांग कर रहे हैं। GST के तहत राज्य का ₹50,000 करोड़ से अधिक रुका हुआ है, ग्रामीण विकास योजनाओं के लिए ₹8,000 करोड़ से अधिक अटका पड़ा है। ऐसे में आपदा के समय राज्य को उचित मदद न देना और भ्रामक आंकड़े पेश करना दुर्भाग्यपूर्ण है।” उन्होंने केंद्र से अपील की कि आपदा प्रबंधन जैसे संवेदनशील मामले में राजनीति को बीच में न लाया जाए और संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन किया जाए। राज्य सरकार ने अपने स्तर पर राहत कार्यों में कोई कमी नहीं छोड़ी है। प्रभावित किसानों को तत्काल सहायता देने के लिए राज्य के संसाधनों से ही शुरुआती मदद दी जा रही है। मुख्यमंत्री राहत कोष से भी सहायता राशि वितरित की जा रही है। हालांकि, राज्य के सीमित संसाधनों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि बिना केंद्र की पर्याप्त मदद के इस विशाल आपदा से निपटना संभव नहीं होगा। पंजाब सरकार ने केंद्र से एक बार फिर अपील की है कि वे तत्काल ₹20,000 करोड़ के राहत पैकेज को मंजूरी दें ताकि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जा सके।

रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और दुर्ग में पीपीपी मॉडल पर बनेंगे सर्वसुविधायुक्त वृद्धाश्रम : मुख्यमंत्री साय

पुनर्वास उपकरणों की रिपेयरिंग के लिए रायपुर में शुरू होगा सर्विस सेंटर अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर रायपुर में राज्य स्तरीय आयोजन बुजुर्गों की विशेष देखभाल के लिए राज्य में सियान गुड़ी रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि वृद्धजन हमारे मार्गदर्शक और अमूल्य संस्कृति के वाहक हैं। वृद्धजनों की देखभाल सरकार और समाज दोनों की साझी जिम्मेदारी है। केंद्र और राज्य सरकार वरिष्ठ नागरिकों के पेंशन, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानपूर्ण जीवन के लिए समर्पित योजनाओं को लगातार मजबूत बना रही है। मुख्यमंत्री आज राजधानी रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में स्थित कृषि मंडपम में अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के राज्य स्तरीय आयोजन को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में वृद्धजनों को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। इस मौके पर उन्होंने बुजुर्गों की विशेष देखभाल के लिए राज्य में सियान गुड़ी, प्रदेश के चार बड़े शहरों रायपुर, बिलासपुर कोरबा और दुर्ग में पीपीपी मॉडल पर सर्वसुविधायुक्त वृद्धाश्रम बनाने और दिव्यांगजनों के सहायक उपकरणों के रिपेयरिंग के लिए राजधानी रायपुर में सर्विस सेंटर बनाने की घोषणा की। श्री साय ने नशामुक्त भारत अभियान के अंतर्गत राज्यभर में जागरूकता हेतु 25 नशामुक्ति रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी लोकगीत एवं नृत्य प्रस्तुति दी गई और स्वास्थ्य जांच शिविर का भी आयोजन किया गया।   मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वृद्धजन दिवस हमें अपने दायित्वों को याद दिलाने का अवसर है। मेरे गुरु ने मुझे सिखाया है कि माता-पिता की सेवा ही ईश्वर की पूजा है। मैंने अपने गुरु के संस्कार और आदर्शों का हमेशा पालन किया है। श्री साय ने कहा कि हम सभी को यह सच्चाई नहीं भूलनी चाहिए कि आज हमारे बुजुर्ग जिस अवस्था में है, कल हम सभी उसी अवस्था में होंगे। मुख्यमंत्री श्री साय और अतिथियों ने जनता से अपील की कि वे वृद्धजनों का सम्मान करें और उन्हें सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने में सहयोग करें, ताकि उनका जीवन और अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और खुशहाल बन सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बुजुर्गों के लिए संचालित पेंशन योजनाओं में 14 लाख से बुजुर्ग लाभान्वित हो रहे हैं। आयुष्मान भारत और शहीद वीर नारायण सिंह स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत अब तक 8 लाख से अधिक बुजुर्गों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा दी गई है। मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना और श्री रामलला दर्शन योजना से 50 हजार से अधिक बुजुर्ग लाभान्वित हुए हैं। समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रदेश के 35 वृद्धाश्रमों में 1049 वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल की जा रही है तथा 6 जिलों में प्रशामक देखरेख गृह संचालित हैं। विभागीय हेल्पलाइन के माध्यम से अब तक 54 हजार से अधिक वरिष्ठजनों की समस्याओं का समाधान किया गया है। इस अवसर पर मंत्री टंकराम वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक राजेश मूणत, मोतीलाल साहू, इन्द्र कुमार साहू, अनुज शर्मा, छत्तीसगढ़ निःशक्तजन वित्त विकास निगम अध्यक्ष लोकेश कावड़िया सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। पर्यटन साथी पहल : जिला प्रशासन रायपुर और इज माय ट्रिप के बीच एमओयू कार्यक्रम में पर्यटन साथी पहल के लिए ईज़ माई ट्रिप और जिला प्रशासन के मध्य एमओयू हुआ। मुख्यमंत्री ने इस विशेष पहल के लिए जिला प्रशासन की टीम को बधाई दी और कहा कि युवाओं के लिए रोजगार नए अवसर खुलेंगे और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन साथी पहल के तहत युवाओं को आईटीआई सड्डू में टूर गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रति बैच 50 युवाओं को शामिल किया जाएगा और प्रशिक्षण तीन महीने में पूरा होगा।

86.97 लाख छात्रों ने पाई वन नेशन-वन स्टूडेंट की सुविधा, प्रदेश में रिकॉर्ड अपडेट

भोपाल  प्रदेश में वन नेशन-वन स्टूडेंट योजना में अब तक 86 लाख 97 हजार अपार आईडी (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक एकाउंट रजिस्ट्री) बनायी जा चुकी हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने संबंधित एजेंसी को लक्षित छात्रों की अपार आईडी तैयार करने के निर्देश दिये हैं। केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिये अपार आईडी बनाने के निर्देश दिये हैं। इस पहल से प्रत्येक विद्यार्थी को एक लाइफ टाइम अपार आईडी मिलेगी। इस व्यवस्था से विद्यार्थियों, स्कूलों और सरकारों के लिये पूर्व प्राथमिक शिक्षा से उच्च शिक्षा तक शैक्षणिक प्रगति को ट्रेक करना आसान होगा। यदि विद्यार्थी स्कूल बदलता है, चाहे राज्य के भीतर या अन्य राज्य में, उसका सारा डेटा सिर्फ अपार आईडी साझा करने से उसके नये स्कूल में स्थानांतरित हो जायेगा। छात्रों को दस्तावेज या स्थानांतरण प्रमाण-पत्र प्रदान करने की आवश्यकता नहीं होगी। प्रदेश में नर्सरी से कक्षा-12 तक एक करोड़ 33 लाख 85 हजार विद्यार्थियों के अपार आईडी शिविर लगाये जा रहे हैं। वर्तमान में मध्यप्रदेश में कुल 65.2 प्रतिशत अपार आईडी बन चुकी हैं, जो राष्ट्रीय औसत 56 प्रतिशत से बेहतर स्थिति में हैं।  

किसानों के लिए खुशखबरी: यूपी के इस जिले में बन रहा 80 एकड़ का इंडस्ट्रियल पार्क

सीतापुर सेमरी कताई मिल की 80 एकड़ जमीन पर औद्योगिक पार्क विकसित किया जाएगा। इसके लिए शासन की ओर से उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) को जमीन हंस्तानांतरित कर दी गई है।  यूपीसीडा की ओर से जमीन का सर्वे करके लेआउट तैयार किया जा रहा है। औद्योगिक पार्क बनने से सीतापुर, बहराइच और बाराबंकी के किसानों को भी फायदा मिलेगा। सेमरी में उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल्स संघ लिमिटेड की सूत मिल वर्ष 1985 में चली थी। इस मिल का धागा जिले के दरी उद्योग के साथ ही विभिन्न प्रांतों में बुनकरी में उपयोग किया जाता है। आपूर्ति बांग्लादेश तक होती थी। वर्ष 2001 में सेमरी सूत मिल बंद हो गई। मिल की मशीनों को भी बेच दिया गया। इसके बाद इसे दोबारा संचालित किए जाने की कवायद कई बार की गई। बावजूद इसके मिल को दोबारा नहीं चलाया जा सका। सरकार ने मिल की करीब 80 एकड़ जमीन पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का फैसला किया है। इसके लिए जमीन उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) को दे दी गई है। यूपीसीडा के अभियंताओं ने जमीन का सर्वे कर लिया है। लेआउट बनाने का काम चल रहा है। बताया जा रहा है कि सूत मिल की जमीन पर आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा। लगेंगी 100 से अधिक इकाइयां सेमरी औद्योगिक क्षेत्र में 100 से अधिक औद्योगिक इकाइयां लगाए जाने की संभावना है। जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त संजय सिंह ने बताया कि सेमरी औद्योगिक क्षेत्र में एग्रीबेस औद्योगिक इकाइयों की अधिकता रहेगी। इनमें 20 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगारी मिलेगा। इसके अलावा सीतापुर, बहराइच और बाराबंकी के किसानों को भी फायदा मिलेगा। परिवहन में नहीं आएगी समस्या महमूदाबाद का सेमरी यातायात के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सेमरी चौराहे से लखनऊ के साथ ही बाराबंकी और बहराइच को मार्ग जाते हैं। वहीं, एक मार्ग सदरपुर की तरफ जाता है। इसके चल ते यहां स्थापित होने वाली इकाइयों तक कच्चा माल पहुंचाने और उत्पादों को बाहर भेजने में आसानी रहेगी।  

दशहरे पर मंदसौर में होने वाला है अनूठा रीति-रिवाज, रावण का वध पहले माफी लेकर!

नई दिल्ली मंदसौर जिले में दशहरे पर प्राचीनकाल से अनूठी परंपराएं चली आ रही हैं। देश के अधिकांश भागों में रावण के पुतले का दहन किया जाता है, लेकिन शहर के खानपुरा क्षेत्र में रावण को जमाई राजा का मान-सम्मान देकर सुबह ढोल-ढमाके के साथ पूजा की जाएगी। शाम को माफी मांगकर प्रतीकात्मक वध किया जाएगा। इधर, जिले के ग्राम धमनार में भी रावण की प्रतिमा के सामने राम-रावण की सेना के बीच वाकयुद्ध होगा। दोनों तरफ से एक-दूसरे पर जलते हुए टोपले फेंके जाएंगे। राम की सेना में शामिल युवक रावण तक पहुंचकर नाक पर मुक्का मारकर दंभ का अंत करेंगे। मंदसौर में घनी बस्ती वाले क्षेत्र खानपुरा में लगभग 500 साल पुरानी रावण प्रतिमा को नामदेव छीपा समाज रावण बाबा मानकर पूजा-अर्चना करता आ रहा है। मंदोदरी का मायका मंदसौर- प्रचलित मान्यता प्रचलित मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका मंदसौर में नामदेव समाज में ही था। इसके चलते खानपुरा क्षेत्र में रावण को जमाई राजा मानकर पूजते हैं। दशहरे पर सुबह नामदेव छीपा समाज के महिला-पुरुष खानपुरा स्थित श्री बड़ा लक्ष्मीनारायण मंदिर से ढोल के साथ रावण प्रतिमा स्थल पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगे। लोग रावण बाबा से पूरे क्षेत्र को बीमारी व महामारी से दूर रखने के लिए प्रार्थना करेंगे। पैर में लच्छा भी बांधेंगे। शाम को गोधुलि वेला में रावण प्रतिमा की पूजा-अर्चना कर माफी मांगकर गले में पटाखे की लड़ जलाकर प्रतीकात्मक वध करेंगे। बुजुर्ग महिलाएं आज भी रावण की प्रतिमा के सामने से निकलते समय निकालती हैं घूंघट रावण को जमाई राजा मानने की मान्यता के कारण ही नामदेव समाज सहित कुछ अन्य समाज की बुजुर्ग महिलाएं आज भी रावण की प्रतिमा के सामने से निकलते समय घूंघट निकालती हैं। इतिहासकार मंदोदरी के मंदसौर के रिश्ते के किसी भी तरह के साक्ष्य होने की बात से इन्कार करते रहे हैं पर रावण की प्रतिमा मंदसौर में क्यों बनी, इसके पीछे कोई उचित कारण नहीं बता पाते हैं। बुजुर्ग मंदोदरी से शहर के रिश्ते का सबसे बड़ा प्रमाण देते हुए उलटा प्रश्न खड़ा करते हैं कि इस शहर का नाम मंदसौर क्यों हुआ? मंदोदरी के रिश्ते के कारण ही यहां का नाम मंदसौर है। हालांकि कहीं भी उल्लेख नहीं होने के कारण धार्मिक क्षेत्रों से जुड़े लोग व इतिहासकार इसे नहीं मानते हैं।