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मतदाता मैपिंग में गलती, सिंगरौली में BLO को फौरन निलंबित करने का आदेश!

सिंगरौली  मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में चुनावी तैयारियों की गंभीरता पर फिर एक बार रोक-टोक हुई है। कलेक्टर व जिला निर्वाचन अधिकारी चन्द्रशेखर शुक्ला ने मतदान केंद्र क्रमांक 291 (विन्दुल) के बीएलओ राम लल्लू सिंह को निलंबित कर दिया है। राम लल्लू सिंह वर्तमान में उस ही केंद्र पर सहायक अध्यापक के पद पर तैनात थे, लेकिन निर्वाचन सूची में मतदाताओं की मैपिंग में अनदेखी पाए जाने के बाद उन पर कार्रवाई की गई। कलेक्टर कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार राम लल्लू सिंह को पहले कारण‑बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसका सही समय पर उत्तर नहीं मिला। इसलिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम, 1966 के तहत उन्हें निलंबित किया गया है। निलंबन के दौरान उन्हें विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में रिपोर्ट करना अनिवार्य रहेगा; इसी अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। कलेक्टर चन्द्रशेखर शुक्ला ने स्पष्ट कहा कि निर्वाचन कार्य में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कार्रवाई सिर्फ एक कर्मचारी तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी जिम्मेदारियों के प्रति सभी कर्मचारियों के लिए चेतावनी है — अपना कर्तव्य पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाना होगा। 

जिंदल स्टील ने अंगुल में देश के सबसे बड़े ब्लास्ट फर्नेस में से एक का कमीशन किया, 12 एमटीपीए क्षमता की ओर अग्रसर

जिंदल स्टील ने अपने एकीकृत स्टील प्लांट, अंगुल में देश के सबसे बड़े ब्लास्ट फर्नेस में से एक का कमीशन किया, जिससे हॉट मेटल क्षमता 4 एमटीपीए से बढ़कर 9 एमटीपीए हो गई। नया फर्नेस अंगुल, ओडिशा को सबसे बड़े एकल-स्थान स्टील प्लांट के रूप में स्थापित करता है और इसे जिंदल स्टील की भविष्य की विकास रणनीति का केंद्रबिंदु बनाता है। रायपुर  जिंदल स्टील ने भारत के स्टील उद्योग में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने 5 एमटीपीए क्षमता वाले ब्लास्ट फर्नेस को चालू किया है। यह सफलता भगवती सुभद्रिका ब्लास्ट फर्नेस – II के कमीशनिंग से हासिल हुई। इस “ब्लो-इन” समारोह का नेतृत्व जिंदल स्टील के चेयरमैन श्री नवीन जिंदल ने किया। इसके साथ ही अंगुल देश का सबसे बड़ा एकल-स्थान स्टील प्लांट बन गया है। भगवती सुभद्रिका ब्लास्ट फर्नेस, जिसकी उपयोगी क्षमता 5,499 वर्गमीटर है, दुनिया के सबसे बड़े और उन्नत फर्नेस में से एक है। यह जिंदल स्टील की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें कंपनी पैमाने, अत्याधुनिक ऑटोमेशन, मजबूत सुरक्षा डिज़ाइन और बेहतर स्थिरता को जोड़कर उद्योग में नए मानक स्थापित कर रही है। श्री नवीन जिंदल, चेयरमैन, जिंदल स्टील ने कहा, “अंगुल में भगवती सुभद्रिका ब्लास्ट फर्नेस का कमीशन होना जिंदल स्टील और भारत के लिए गर्व का क्षण है। अंगुल की क्षमता को 12 एमटीपीए तक दोगुना करके हम अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धा को और मजबूत कर रहे हैं तथा आत्मनिर्भर भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहरा रहे हैं। ओडिशा की संस्कृति में जड़े हुए और अत्याधुनिक तकनीक से संचालित यह फर्नेस हमारी उस दृष्टि का प्रतीक है, जिसमें परंपरा और नवाचार का संगम है।” यह उपलब्धि जिंदल स्टील की दीर्घकालिक विकास योजनाओं को नई गति प्रदान करती है। अब अंगुल कंपनी के भविष्य के विस्तार का केंद्रीय केंद्र होगा। प्रस्तावित परियोजनाओं में पारादीप में एक समर्पित पोर्ट, स्लरी पाइपलाइन और कोल पाइप कन्वेयर (सप्लाई चेन दक्षता बढ़ाने के लिए), श्रीभूमि पावर प्लांट और नए कोक ओवन संयंत्र शामिल हैं। इन सभी परियोजनाओं के माध्यम से अंगुल को जिंदल स्टील की वैश्विक विकास रणनीति की धुरी के रूप में विकसित किया जाएगा। जिंदल स्टील के बारे में जिंदल स्टील भारत के प्रमुख एकीकृत स्टील उत्पादकों में से एक है, जो अपने पैमाने, दक्षता और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता के लिए प्रसिद्ध है। कंपनी माइन-टू-मेटल मॉडल पर कार्य करती है और अपने खनिज संसाधनों, उन्नत विनिर्माण क्षमताओं और वैश्विक वितरण नेटवर्क का लाभ उठाकर उच्च-प्रदर्शन स्टील समाधान प्रदान करती है। 12 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश के साथ, जिंदल स्टील अंगुल, रायगढ़ और पतरातू में अत्याधुनिक सुविधाएं संचालित करती है तथा भारत और अफ्रीका में अपनी रणनीतिक गतिविधियां बनाए रखती है। इसका विविध और भविष्य-उन्मुख उत्पाद पोर्टफोलियो बुनियादी ढांचा, निर्माण और विनिर्माण जैसे कोर क्षेत्रों को सशक्त बनाता है, जो स्ट्रेंथ और सस्टेनेबिलिटी के साथ प्रगति को गति देता है।

राज्यपाल पटेल ने राज्यमंत्री श्रीमती गौर को दी जन्म दिन की बधाई

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल से सौजन्य भेंट के लिए पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर शुक्रवार को राजभवन पहुंची। उनके जन्म दिवस अवसर पर राजभवन आगमन के प्रसंग में राज्यपाल  पटेल ने पुष्पगुच्छ भेंट कर श्रीमती गौर को जन्म दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी। राज्यपाल मंगुभाई पटेल की शुभकामनाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए, श्रीमती गौर ने भी उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट कर धन्यवाद ज्ञापित किया।  

मंत्री गोविंद राजपूत के निर्वाचन पर याचिका, जबलपुर कोर्ट ने चुनाव आयोग को दिया समय

जबलपुर  प्रदेश सरकार में मंत्री गोविंद राजपूत के द्वारा अपने नामांकन के आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किये जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की तरफ से दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 9 अक्तूबर को निर्धारित की है। सागर निवासी किसान राज कुमार सिंह की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि प्रदेश सरकार के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने साल 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में नामांकन के दौरान सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किये थे। जो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन है और उनका निर्वाचन शून्य घोषित किया जाना चाहिए। इस संबंध में याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग के समक्ष साक्ष्यों के साथ याचिका प्रस्तुत की थी। याचिकाकर्ता ने बताया कि चुनाव आयोग ने उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की। जिस कारण उक्त याचिका दायर की गई है। याचिका में राहत चाही गई थी कि शिकायत पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश चुनाव आयोग को जारी किये जाएं। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता ने 8 सितम्बर को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका के साथ प्रस्तुत हलफनामा एक दिन पूर्व 7 सितंबर का है। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देशित किया है कि वह सही तारीख के साथ हलफनामा प्रस्तुत करें।  

रामलीला का वैश्विक जलवा: 51 करोड़ ऑनलाइन दर्शक, 40 देशों में 26 भाषाओं में प्रसारण

अयोध्या रामकथा पार्क में फिल्मी कलाकारों से सजी रामलीला ने ऑनलाइन प्लेटफार्म पर इस बार दर्शकों का अद्भुत रिकॉर्ड रच दिया है। परंपरा और तकनीक का ऐसा संगम हुआ कि महज तीन दिनों के भीतर 51 करोड़ लोगों ने ऑनलाइन रामलीला देखी। रामलीला का दूरदर्शन के साथ ऑनलाइन प्लेटफार्म पर लाइव प्रसारण किया जा रहा है। फिल्मी कलाकारों की जीवंत अदाकारी ने लोगों को इतना मोह लिया कि रामकथा के इस प्रसारण को देश-दुनिया में खूब देखा जा रहा है। रामलीला का ऑनलाइन प्रसारण 40 देशों में 26 भाषाओं में किया जा रहा है। फिल्मी रामलीला समिति के अध्यक्ष सुभाष मलिक ने बताया कि अयोध्या में फिल्मी कलाकारों की रामलीला 2020 में शुरू हुई थी। ऑनलाइन प्लेटफार्म पर हर साल दर्शकों की संख्या बढ़ती गई। पिछले साल 41 करोड़ ने ऑनलाइन रामलीला देखकर रिकॉर्ड बनाया था। इस वर्ष तीन दिनों में ही पिछले साल का रिकॉर्ड टूट गया।

सामूहिक दुष्कर्म का खुलासा: आदिवासी युवती पर हमला करने वाले तीन आरोपी हिरासत में

कवर्धा आदिवासी युवती से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में कवर्धा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 36 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार युवक कवर्धा के ही रहने वाले आदतन अपराधी हैं. इस मामले में पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह छवाई आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विस्तृत जानकारी देंगे. पूरा मामला 24 सितंबर रात का है, अपने परिचित के घर ठहरी पीड़िता रात करीबन दो बजे किसी विवाद के बाद घर से निकलकर बस स्टैंड की ओर चली गई. इसी दौरान बाइक सवार तीन युवक उसे बहला-फुसलाकर सुनसान इलाके (अटल आवास के पीछे) ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म को अंजाम दिया. घटना के बाद आरोपियों ने किसी न न बताने की धमकी देकर पीड़िता को बस स्टैंड के पास छोड़ दिया था. पीड़िता ने साहस दिखाते हुए महिला थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर पीड़िता को जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई. इधर पुलिस जांच में जुटी हुई थी, उधर घटना से आक्रोशित आदिवासी समाज सड़क पर उतर आया. कलेक्टर कार्यालय का घेराव करते हुए आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की. जनाक्रोश और लगातार विरोध-प्रदर्शनों के बीच पुलिस ने जांच में तेजी लाते हुए कई टीमों को आरोपियों की तलाश में लगाया. इसके साथ आरोपियों की पहचान या गिरफ्तारी में मदद करने वाले को 10,000 रुपए का इनाम देने की घोषणा करते हुए जनता से भी आरोपियों की पहचान या जानकारी होने पर पुलिस से साझा करने की अपील की थी. आखिरकार 36 घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को पकड़ने में कामयाबी पाई है. बताया जा रहा है कि तीनों आरोपी अटल आवास में रहने वाला हैं, जो मौके की नजाकत को देखते हुए फरार होने के फिराक में थे, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने उन्हें धरदबोचा.

MIG-21 का आखिरी सलाम: ग्वालियर से जुड़ी यादें और 2004 में US एयरफोर्स को दिखाया दम

ग्वालियर  भारतीय वायुसेना का जंगी लड़ाकू विमान मिग-21 ग्वालियर एयरबेस के आसमान से लेकर जमीन तक जांबाजी का साक्षी रहा है। देश के सबसे महत्वपूर्ण एयरबेस में शामिल ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन पर मिग-21 बाइसन वर्ष 2004 में भारतीय वायुसेना और यूएस एयरफोर्स के संयुक्त कोप इंडिया अभ्यास में शामिल रहा। 62 वर्ष के गौरवशाली इतिहास के साथ आज भारतीय वायुसेना से विदाई लेने वाले इस लड़ाकू विमान का ग्वालियर से गहरा नाता रहा है। ग्वालियर में 2022 के बाद से मिग-21 की गूंज सुनाई नहीं दी। ग्वालियर एयरबेस के जांबाज अधिकारियों ने मिग-21 में उड़ान भरकर देश को गौरवान्वित किया है। ग्वालियर एयरबेस पर मिग-21 ने लंबे समय तक उड़ान भरी साथ ही युद्धों से लेकर विभिन्न वायुसेना के आयोजनों में भी सहभागिता की है। एयरबेस पर तैनात रहे अफसरों ने मिग-21 के जरिए कौशल भी दिखाया है। बता दें कि यह विमान 1963 में पहली बार भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। आखिरी बार मिग-21 ने प्रयागराज में कुंभ मेले में एयरशो में भाग लिया था। मिग-21 की अधिकतम गति लगभग 2,200 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह 17,500 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। हवा से हवा में मार करने वाली और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें लगाई जाती थीं। विमान का डिजाइन छोटा पर शक्तिशाली था, जो तेज हमलों व हवाई युद्ध के लिए आदर्श माना गया। 2004 में ग्वालियर में हुआ था कोप इंडिया अभ्यास ग्वालियर में कोप इंडिया अभ्यास के दौरान मिग-21 बाइसन ने अपनी युद्ध क्षमता का बखूबी प्रदर्शन किया। इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों को संयुक्त राज्य वायुसेना के एफ-15 जैसे विमानों के खिलाफ खड़ा किया गया था। घने विद्युत चुंबकीय माहौल में अच्छे प्रदर्शन के कारण इसे अमेरिकी फोर्स की भी सराहना मिली। इस पूरे अभ्यास में बाइसन अपनी धैर्यता व क्षमता के कारण नेतृत्व की भूमिका में रहा। देश में अहम है ग्वालियर एयरबेस ग्वालियर का महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन 1942 में बना था और अब तक हुए युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है। वर्ष 1965, 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में इसी एयरफोर्स स्टेशन से लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी थी। ये स्टेशन देश का एकमात्र एयरबेस है, जहां फाइटर प्लेन में हवा में ईंधन भरा जा सकता है। अगर युद्ध के दौरान उड़ान के वक्त किसी फाइटर प्लेन को ईंधन की जरूरत पड़ी तो इस एयरबेस पर तुरंत दूसरा जेट प्लेन हवा में जाकर ही उसे रिफ्यूल कर सकता है।

शूर्पणखा पुतला दहन में सोनम रघुवंशी का नाम और चेहरा जोड़ा, इंदौर में लोगों का फूटा गुस्सा

इंदौर  इंदौर के महालक्ष्मी नगर मेला ग्राउंड में दशहरे के अवसर पर आयोजित होने वाले शूर्पणखा पुतला दहन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. रघुवंशी समाज ने इस आयोजन का जोरदार विरोध करते हुए बुधवार को विजयनगर थाने और जिला कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा. रघुवंशी समाज का आरोप है कि आयोजन में शूर्पणखा के पुतले पर सोनम रघुवंशी का नाम और चेहरा दर्शाना न केवल गलत है, बल्कि पूरे समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कदम है. नाम और चेहरे के इस्तेमाल का विरोध समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बुराई का प्रतीक दर्शाने के लिए किसी व्यक्ति विशेष या जाति का नाम जोड़ना समाज विरोधी है. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इस आयोजन से सोनम रघुवंशी का नाम नहीं हटाया गया, तो कार्यक्रम पूरी तरह से निरस्त किया जाए, अन्यथा समाज व्यापक आंदोलन करेगा. जिला अध्यक्ष पिंकी रघुवंशी ने कहा कि इस तरह का आयोजन महिला समाज का अपमान है और यह न केवल अवैधानिक बल्कि समाज विरोधी भी है. उनका कहना था कि जिन महिलाओं को इस आयोजन में शूर्पनखा के चेहरे के रूप में दर्शाया जा रहा है, वो केवल आरोपी हैं और उनके प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन हैं. ऐसे में दोष सिद्ध किए बिना उनका नाम इस प्रकार से जोड़ना गलत है. रघुवंशी समाज को बदनाम करने की साजिश: प्रदर्शनकारी वहीं, राष्ट्रीय अध्यक्ष उमाशंकर रघुवंशी ने आरोप लगाया कि संस्था जानबूझकर केवल 11 हिंदू महिलाओं को निशाना बना रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब अपराध पुरुष और महिलाएं दोनों करते हैं, तो केवल महिलाओं को क्यों चुना जा रहा है. उनके अनुसार, अखबारों और सोशल मीडिया पर इस आयोजन का प्रचार कर समाज और अन्य समुदायों की छवि धूमिल की जा रही है. सोनम रघुवंशी के भाई गोविंद रघुवंशी ने भी इसे परिवार और समाज की प्रतिष्ठा पर हमला करार दिया. उन्होंने कहा कि यह आयोजन पूरी तरह से समाज की भावनाओं को आहत करने वाला है और इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए. फिलहाल, जिला प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है. रघुवंशी समाज के बढ़ते विरोध को देखते हुए यह आयोजन रद्द होगा या संशोधित, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं.  

गरबा में शामिल होने के लिए गोमूत्र अनिवार्य? भोपाल में उठे नए धार्मिक सवाल

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी  भोपाल के गरबा आयोजनों में गैर-हिंदुओं की एंट्री रोकने के लिए एक नया फॉर्मूला अपनाया है. यहां प्रवेश द्वार पर पहले तिलक लगाकर 'जय श्री राम' का जयकारा लगवाया जा रहा है। इसके बाद आम के पत्तों से गंगाजल का आचमन कराया जाता है और तांबे के लोटे से गोमूत्र का छिड़काव किया जाता है। भोपाल के अवधपुरी इलाके में श्री कृष्ण सेवा समिति गरबा मंडल के आयोजकों का मानना है कि गैर-हिंदू गोमूत्र और गंगाजल का आचमन नहीं करेंगे, जिससे उनकी एंट्री रुक जाएगी. आधार कार्ड, तिलक और कलावा की जांच के बाद ही यह प्रक्रिया पूरी की जा रही है. गरबा पंडाल में बिना गंगाजल और गोमूत्र के प्रवेश की अनुमति नहीं है.  गरबा देखने आए लोगों ने गंगाजल और गोमूत्र को पवित्र बताते हुए इसकी सराहना की. हिंदू संगठनों की इस नई गाइडलाइन ने गरबा आयोजन को धार्मिक रंग दिया है. आयोजकों का कहना है कि यह फॉर्मूला धार्मिक शुद्धता बनाए रखने के लिए अपनाया गया है.  इस मामले में भोपाल सांसद आलोक शर्मा का कहना है कि कुछ लोग हिंदू प्रतीकों जैसे कलावा और तिलक का इस्तेमाल कर गरबा में प्रवेश लेकर हिंदू महिलाओं को लुभाने की कोशिश कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी हरकत बर्दाश्त नहीं करेगी और नवरात्रि केवल हिंदुओं और सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए है. बता दें कि 22 सितंबर से शुरू हुई नवरात्रि में देवी दुर्गा और उनकी विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है. गरबा गुजरात का जीवंत नृत्य रूप है, जो इस दौरान बड़े पैमाने पर आयोजित होता है.

दो महीने की देरी के बाद MP में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता पर फैसला जल्द

 भोपाल मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर प्रारंभ हो जाएगी। इसके पहले एक-दो दिन के भीतर नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता जारी करने की तैयारी है। लगभग दो सौ कॉलेजों को मान्यता मिलने के आसार हैं। इनमें 20 हजार से अधिक सीटें हो सकती हैं। इंडियन नर्सिंग काउंसिल द्वारा निर्धारित कैलेंडर के अनुसार 30 सितंबर तक कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो जानी थी, पर निरीक्षण में देरी के चलते अभी तक मान्यता ही जारी नहीं हो पाई है। निर्धारित तारीख के बाद प्रवेश के लिए राज्य सरकार को विशेष अनुमति लेनी होगी। मप्र नर्सिंग काउंसिल के कैलेंडर के अनुसार 14 जुलाई तक कालेजों का निरीक्षण पूरा हो जाना था। इसके बाद मान्यता जारी होनी थी। नए और पुराने मिलाकर 172 कॉलेजों ने मान्यता के लिए आवेदन किया था, जिनका निरीक्षण होना था। प्रदेश भर में नर्सिंग फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पहली बार निरीक्षण कराने की जिम्मेदारी कलेक्टरों को दी गई थी, पर उन्होंने रुचि नहीं ली। स्वास्थ्य आयुक्त के बार-बार पत्र लिखने के बाद अब जाकर निरीक्षण पूरा हो पाया है। अब इस रिपोर्ट के आधार पर मान्यता जारी की जाएगी। फर्जीवाड़े के चलते मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण दो वर्ष से नए कॉलेज नहीं खुले थे। इस वर्ष कुछ नए कॉलेजों को भी मान्यता मिलेगी। इन 172 कॉलेजों के अतिरिक्त सीबीआई ने जिन कॉलेजों को अपनी जांच रिपोर्ट में उपयुक्त बताया था, उन्हें बिना निरीक्षण ही नवीनीकरण की मान्यता मिल जाएगी। देरी से विद्यार्थियों को यह नुकसान बीएससी नर्सिंग और डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए कर्मचारी चयन मंडल से प्रवेश परीक्षा आयोजित होने के बाद परीक्षा परिणाम जारी किए जा चुके हैं। अभ्यर्थी लगभग दो माह से काउंसलिंग प्रारंभ होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। राजस्थान में सहित अन्य राज्यों में या तो पूरी हो गई है या अंतिम चरण में है। ऐसे में मध्य प्रदेश के जिन अभ्यर्थियों को यहां के कॉलेजों में प्रवेश नहीं मिल पाएगा वे दूसरे राज्यों में भी प्रवेश नहीं ले पाएंगे। दूसरा नुकसान यह है कि प्रवेश में देरी होने से विद्यार्थियों का पूरा सत्र देर हो जाएगा। जल्द काउंसलिंग शुरू कराने की तैयारी     नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए जल्दी ही काउंसलिंग शुरू कराने की तैयारी है। एक-दो दिनों में कॉलेजों की मान्यता जारी हो जाएगी। – मनोज सरयाम, संचालक (नर्सिंग), लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग।