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इस बार दशहरे पर रिकॉर्ड बनेगा: कोटा में खड़ा होगा दुनिया का सबसे ऊंचा रावण, रिमोट से होगा दहन

कोटा कोटा में इस बार दशहरे पर 215 फीट ऊंचा रावण तैयार किया जा रहा है. इसे बनाने वालों का दावा है कि यह दुनिया का सबसे ऊंचा रावण होगा. रावण का पुतला 12 टन यानी 12 हजार किलो वजनी है. खास बात यह है कि इसे खड़ा करने में केवल 3 घंटे का समय लगेगा और दहन पहली बार रिमोट से किया जाएगा. रावण के पतले में 9500 किलो लोहे का इस्तेमाल हुआ है. पुतले का सिर 25 फीट का है जबकि बाकी 9 सिर 3×6 फीट के बनाए गए हैं. रावण का चेहरा फाइबर से तैयार किया गया है जिसका वजन करीब 300 किलो है. पुतले का मुकुट 60 फीट ऊंचा होगा और इसमें मल्टीकलर LED लाइट्स लगाई जाएंगी. तलवार 50 फीट लंबी और जूतियां 40 फीट की बनाई गई हैं. कुंभकर्ण और मेघनाद भी खास रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के 60-60 फीट ऊंचे पुतले भी बनाए जा रहे हैं. इनका वजन 1-1 हजार किलो है और चेहरे 10-10 फीट के फाइबर से तैयार किए गए हैं. 3 घंटे में होगा खड़ा, पहली बार रिमोट से दहन विशाल पुतले को खड़ा करने के लिए 6 फीट गहरा और 25 फीट चौड़ा पक्का फाउंडेशन बनाया गया है. दो क्रेन, जेसीबी और 100 से ज्यादा लोगों की मदद से रावण को खड़ा किया जाएगा. इस बार दहन रिमोट सेंसर से होगा. पुतले में 20 सेंसर लगाए गए हैं. जैसे ही बटन दबेगा, आतिशबाजी शुरू होगी और मुकुट से लेकर शरीर तक पुतला जलता जाएगा. कलाकार का जुनून और रिकॉर्ड रावण बनाने वाले कलाकार तेजेंद्र चौहान पिछले 39 साल से इस काम में लगे हैं. अब तक उन्होंने 7 रिकॉर्ड बनाए हैं जिनमें 5 लिम्का बुक और 2 वर्ल्ड रिकॉर्ड इंडिया में दर्ज हैं. बड़े रावण बनाने के शौक में उन्होंने साढ़े 12 एकड़ जमीन भी बेच दी.  

अंतिम चरण में साँईखेड़ा जल-प्रदाय परियोजना, 40 हजार से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ

भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्प़नी द्वारा एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से नरसिंहपुर जिले के साँईखेडा, सालीचौका और चिचली कस्बों में समूह जल‑प्रदाय परियोजना का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुँच चुका है। परियोजना से 40 हजार से अधिक नागरिक प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। परियोजना पर 52 करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं। परियोजना के अंतर्गत नर्मदा नदी से जल संग्रहण कर 6.5 एमएलडी क्षमता का जल शोधन संयंत्र स्थापित किया गया है। परियोजना से हर घर को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से व्यापक वितरण नेटवर्क स्थापित किया गया है।साँईखेडा में 33 किलोमीटर, सालीचौका में 41 किलोमीटर और चिचली में 40 किलोमीटर लंबी पाइप-लाइन बिछाई गई है। जल संग्रहण की व्यवस्था को मजबूत करने के लिये साँईखेडा और चिचली में दो‑दो नए ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं, जो मौजूदा टैंकों के साथ मिलकर आपूर्ति नेटवर्क की स्थिरता में सहयोग कर रहे हैं।परियोजना में प्रस्तावित 7 हजार 396 घरेलू कनेक्शनों में से अब तक 6 हजार 348 कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। क्षेत्र में शीघ्र ही परियोजना का प्रायोगिक परीक्षण भी प्रारंभ किया जायेगा।  

लाड़ली बहना योजना: इंतजार खत्म! आज आएगी 28वीं किस्त

भोपाल  मध्य प्रदेश की लाडली बहनों के लिए सितंबर महीने की खुशखबरी आ गई है। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त का पैसा कब आएगा, इसकी तारीख के बारे में जानकारी मिल गई है। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव इस बार झाबुआ जिले से लाडली बहना योजना का पैसा 1.26 करोड़ महिलाओं के खाते में ट्रांसफर करेंगे। झाबुआ जिले में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की तैयारियां हुई पूरी । सीएम के आगमन के लिए झाबुआ में तैयारियां पूरी । हेलीपैड और कार्यक्रम स्थल का निर्माण हुआ पूर्ण  । सूत्रों से जानकारी म‍िली है क‍ि मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त का पैसा 12 सितंबर यानी आज शुक्रवार को लाडली बहना योजना का बड़ा कार्यक्रम होगा। झाबुआ कलेक्‍टर ऑफ‍िस ने भी फेसबुक पोस्‍ट में 12 स‍ितंंबर की ही जानकारी दी है। कहा जा रहा था कि पैसा 13 सितंबर को ट्रांसफर होगा। हालांक‍ि अभी तक सरकार की ओर से कार्यक्रम को लेकर आध‍िकार‍िक ऐलान नहीं क‍िया गया है। इस बार आएंगे कितने पैसे पिछले महीने अगस्त में लाडली बहनों को रक्षाबंधन के शगुन के रूप में 250 रुपये अलग से मिले थे और उनके खाते में 1500 रुपये आए थे। लेकिन इस महीने 28वीं किस्त के रूप में पहले की तरह 1250 रुपये मिलेंगे। महिलाओं के खाते में पैसा भेजने के लिए सरकार को हर महीने करीब 1550 करोड़ रुपये खर्च करने होते हैं। कब से मिलेंगे 1500 रुपये लाडली बहना योजना के लिए 1500 रुपये कब से मिलने शुरू होंगे? इस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले ही अपडेट दे चुके हैं। महिलाओं का 1500 रुपये का इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है। सीएम मोहन यादव के मुताबिक भाई दूज से 1500 रुपये हर महीने मिलना शुरू हो जाएंगे। इस बार भाई दूज अगले ही महीने 23 अक्टूबर को है। इस बात की पूरी संभावना है कि लाडली बहना योजना की 29वीं किस्त के रूप में महिलाओं को 1500 रुपये मिलना शुरू हो जाए। लाडली बहना योजना की 27वीं किस्त पिछले महीने 7 अगस्त को ही मिल गई थी। रक्षाबंधन के मौके पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1.26 करोड़ महिलाओं के खाते में 1250 रुपये की किस्त और 250 रुपये रक्षाबंधन का शगुन एक साथ भेज दिया था। लाड़ली बहना योजना के तहत हर महीने 1,500 रुपये कब से मिलेंगे? पहले ही सीएम मोहन यादव ऐलान कर चुके हैं कि लाडली बहनों को मिलने वाली राशि को हर महीने बढ़ाया जाएगा। 2028 तक लाभार्थियों के खाते में 3000 रुपये आने शुरू हो जाएंगे। उन्होंने हाल ही में कहा था कि लाड़ली बहनों के खाते में अक्टूबर से हर महीने 1500 रुपये आने शुरू हो जाएंगे। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के बारे में पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Scheme) शुरू की गई थी। इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था। जून 2023 को इस योजना की पहली किस्त जारी की गई थी। सरकार ने 2023 रक्षाबंधन में इस राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था। तभी से अभी तक लाड़ली बहना योजना के तहत 1250 रुपए महीना मिल रहे हैं। सरकार ने अब इस योजना की राशि को बढ़ाने का निर्णय लिया है। किन्हें मिलेगा लाड़ली बहना योजना का फायदा? – 1 जनवरी 1963 के बाद लेकिन 1 जनवरी 2000 तक जन्मी प्रदेश की समस्त विवाहित महिलाएं लाड़ली बहना योजना में 2023 में आवेदन के लिए पात्र मानी जाती है। किन्हें नहीं मिलेगा लाड़ली बहना योजना का फायदा? – महिलांए या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते है। – अगर ज्वाइंट फैमिली है और 5 एकड़ से अधिक भूमि है। फटाफट चेक कर लें अपना नाम आपके खाते में 1250 रुपये आएंगे या नहीं, इसका पता आप आज ही लगा सकती हैं। इसके लिए लाडली बहना योजना के पोर्टल पर जाएं और 'आवेदन एवं भुगतान की स्थिति' पर क्लिक करें। यहां अपने रजिस्ट्रेशन नंबर या समग्र आईडी और ओटीपी से अपना नाम चेक कर सकती हैं।  

PWD ने धार के लिए भेजा प्रस्ताव: 8 स्थाई हेलीपैड से बढ़ेगी सुविधा

धार  एमपी के धार जिले में पर्यटन और तीर्थ स्थल को बढ़ावा देने के लिए शासन द्वारा कई प्रयास किए जा रहे हैं। अब इसमें एक कदम और आगे बढ़ाते हुए हवाई सफर की सौगात शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए जिले में आठ स्थानों पर स्थाई हेलीपैड बनाने की योजना पर काम चल रहा है। सबकुछ ठीक रहा है, तो जिल के प्रमुख स्थान हेलीपैड जैसी सुविधा से जुड़ जाएंगे। जहां आने वाले समय में आमजन हेलीकॉप्टर उड़ान भरते देखे जा सकते हैं। सरकार द्वारा वीआईपी कल्चर को फोकस करते हुए दिशा में काम शुरू कर दिया है। पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा जिले के प्रमुख जगह पर स्थाई हेलीपैड बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार के विमानन विभाग को भेजा है, जहां से स्वीकृति मिलने के बाद स्थाई तौर पर हेलीपैड बनाने का काम शुरू किया जाएगा। अभी इसी प्रकार की सुविधा केवल धार जिला मुख्यालय और पीथमपुर में है। धार में पुलिस लाइन में पक्का हेलीपैड बना है। हवाई सुविधा से सीधे कनेक्ट होगा धार आजादी के बाद से धार जिला विकास के मामले में पड़ोसी जिलों से पिछड़ा हुआ है। आवागमन के रूप में सडक़ परिवहन और संसाधन कम रहे। हालांकि अब इंदौर-दाहोद रेलवे परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। निकट भविष्य में धार में रेल सेवा भी शुरु हो जाएगी। ऐसे ही वीआईपी सुविधा के दृष्टि से हवाई सफर की सौगात मिल सकती है। अभी ये आ रही परेशानी राजनेता, वीआईपी और अन्य बड़े मेहमानों के आने पर हवाई सेवा की सुविधा नहीं है। इंदौर हवाई अड्डे पर उतरने के बाद टैक्सी या फिर प्राइवेट वाहन से पर्यटक और मेहमानों को मांडू और मोहनखेड़ा पहुंचना पड़ता है। इसी प्रकार चुनाव अथवा किसी राजनेता के दौरा कार्यक्रम के समय अस्थाई हेलीपैड तैयार करना होता है। इसमें बार-बार पैसा खर्च होता है। इसलिए सरकार की मंशा है कि जिले में कुछ चुंनिदा जगह पर स्थाई हेलीपैड तैयार किया जाए। मांडू, अमझेरा और मोहनखेड़ा तीर्थ स्थल शामिल ऐतिहासिक पर्यटन स्थल मांडू, अमझेरा सहित जैन तीर्थस्थल मोहनखेड़ा में स्थाई हेलीपैड तैयार करने की योजना है। इसके अलावा कुक्षी, गंधवानी, मनावर, धरमपुरी और बदनावर में स्थाई हेलीपैड बनाने की योजना है। जिसका प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी विभाग ने तैयार किया है। बदनावर को छोडक़र अन्य सभी स्थानों पर जगह का चयन हो चुका है। पीडब्ल्यूडी द्वारा दो प्रकार के स्थाई हेलीपैड बनाए जाते हैं। इसमें एक सीमेंट कांक्रीट और दूसरा डामरी-गिट्टी से बनता है। जिले में बनने वाले आठों हेलीपैड डामर से बनाएं जाएंगे। प्रस्ताव भेजा है… विभाग द्वारा आठ स्थानों पर स्थाई हेलीपैड बनाने के लिए जगह चयनित कर प्रस्ताव बनाया है। इसे भारत सरकार के विमानन विभाग को भेजा गया है, जहां से स्वीकृति और बजट सेशन होने पर काम शुरू किया जाएगा।- बबीता सोनगर, ईई पीडब्ल्यूडी विभाग धार पूरे साल पहुंचते हैं सैलानी मांडू: ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में विख्यात। जहां पूरे साल देशी-विदेशी पर्यटक व सैलानी आते हैं। एक साल में तकरीबन चार लाख से अधिक पर्यटक आते हैं, जिससे स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी चलती है। मोहनखेड़ा: जैन श्वेतांबर ट्रस्ट की पेढ़ी और प्रमुख जैन तीर्थस्थल। गुरुपूर्णिमा पर भव्य आयोजन। जनसंतों व अनुयायियों की साधना स्थली, जहां पूरे साल देशभर से समाज के लोग पहुंचते हैं। अमझेरा: अमका-झमका माता मंदिर। द्वापर में इसी जगह से भगवान श्रीकृष्ण रुक्मिणी हरण कर ले गए थे। धार्मिक मान्यता है कि रुक्मिणी हरण के लिए जो रथ इस्तेमाल हुआ था, वह आज भी मंदिर के पास स्थापित है। मुयमंत्री डॉ. मोहन यादव अमझेरा को धार्मिक स्थल घोषित कर चुके हैं।

एमपी में ट्रैफिक सुविधा के लिए बड़ा कदम, 4-लेन बायपास 3000 करोड़ में बनेगा

भोपाल  राजधानी भोपाल में पश्चिमी बायपास प्रोजेक्ट के लिए नए सिरे से भू-अर्जन शुरू किया जा रहा है। कलेक्टर ने प्रोजेक्ट के लिए तय 155 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण करने के लिए हुजूर एसडीएम की अध्यक्षता में टीम बनाई है। इसमें तहसीलदार, वार्ड पार्षद, सरपंच- सदस्य समेत संबंधित ग्राम के पटवारी व राजस्व निरीक्षक को शामिल किया है। अगले छह माह में इन्हें भू- अर्जन की प्रक्रिया पूरी करना होगी। 35.60 किमी लंबा पश्चिमी बायपास रतनपुर सड़क स्थित 11 मील जोड़ से रोड का काम शुरू होगा जो फंदा कला तक चार लेन बनेगा। सरकार ने प्रोजेक्ट के लिए करीब 3000 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। यहां की इतनी जमीन लेंगे तब बनेगा बायपास     15.9929 हेक्टेयर जमीन भानपुर केकडिया     14.0685 हेक्टेयर जमीन समसगढ़     10.2719 हेक्टेयर जमीन समसपुरा     2.0694 हेक्टेयर जमीन सरवर     17.8365 हेक्टेयर जमीन झागरिया खुर्द     12.8594 हेक्टेयर जमीन मूंडला     13.5931 हेक्टेयर जमीन नरेला     4.5198 हेक्टेयर जमीन टीलाखेड़ी     8.2897 हेक्टेयर जमीन जाटखेड़ी     7.0626 हेक्टेयर जमीन खोकरिया     4.0910 हेक्टेयर जमीन हताईखेड़ी     7.5226 हेक्टेयर जमीन दूबड़ी     7.4606 हेक्टेयर जमीन पिपलिया धाकड़ 9163 हेक्टेयर जमीन फंदा खुर्द 14.1189 हेक्टेयर जमीन फंदा कलां 155.731 हेक्टेयर कुल अर्जित क्षेत्र है इसलिए जरूरी पूरा बायपास बायपास एक तरह से शहर की सीमा को तय करता है और जिन वाहनों को शहर में नहीं आना होता है वह बायपास से बाहर निकल जाते हैं। छह माह में प्रक्रिया पूरी नए सिरे से भू अर्जन करने हमने टीम तय कर दी है। आगामी छह माह में प्रक्रिया पूरी की जाएगी। बायपास जल्द बने इसके लिए जल्द से जल्द काम पूरा किया जाएगा।-कौशलेंद्र विक्रमसिंह, कलेक्टर

सीएम डॉ. यादव करेंगे गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट का शुभारंभ, लक्ज़री कैंपिंग और हवाई रोमांच का केंद्र बनेगा

लक्ज़री कैंपिंग से हवाई एडवेंचर का मिलेगा रोमांचक अनुभव भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार 12 सितम्बर को मंदसौर में गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट के चौथे संस्करण का शुभारंभ करेंगे। यह रिट्रीट लल्लूजी एंड संस द्वारा मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के सहयोग से विकसित किया गया है, जो लक्ज़री कैंपिंग, एडवेंचर टूरिज्म और सांस्कृतिक गतिविधियों का अनूठा संगम है। गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट के दौरान पर्यटक टेंट सिटी में हॉट-एयर बलूनिंग, पैरामोटरिंग, जेट स्कीइंग, कायाकिंग और मोटर बोटिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे। हिंगलाजगढ़ किले की हेरिटेज ट्रेल, गांधीसागर अभयारण्य में वन्यजीव सफारी और ग्रामीण जीवन के अनुभव भी पर्यटकों के आकर्षण का हिस्सा रहेंगे। इस रिट्रीट में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता पर विशेष ध्यान दिया गया है। लगभग 2,500 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित बटरफ्लाई गार्डन में 4,000 से अधिक पोषक एवं पराग प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। यहां पहले से ही 40 से अधिक तितली प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं। यह केंद्र शिक्षा एवं इंटरप्रिटेशन स्थल के रूप में पर्यटकों को तितलियों के जीवन चक्र की जानकारी प्रदान करेगा। इसके अलावा इस सीज़न में रॉक आर्ट इंटरप्रिटेशन ज़ोन, जो चतुर्भुज नाला की प्राचीन शैलचित्र कला से प्रेरित है, तथा बायोडायवर्सिटी वॉक जैसी गतिविधियां भी शामिल की गई हैं। पर्यटक इस रिट्रीट में गाइडेड बटरफ्लाई गार्डन टूर, नेचर वॉक, बर्ड वॉचिंग, वाटर स्पोर्ट्स (स्पीड बोट, बनाना राइड, जेट स्की, कयाकिंग) और हवाई एडवेंचर (हॉट एयर बैलूनिंग व पैरामोटरिंग) जैसी शानदार गतिविधियों का अनुभव लेकर प्रकृति के और करीब आ सकेंगे।  

राजनीतिक सियासत: लालू ने तेजस्वी की ताकत बढ़ाने के लिए किया सक्रिय प्रयास, कांग्रेस देरी में

पटना राजद की चुनावी रणनीति का निर्धारण और तेजस्वी यादव को संवाद की सीख देकर एक समय निश्चिंत हो चुके लालू प्रसाद की सक्रियता दोबारा बढ़ गई है। स्वास्थ्य इसकी अनुमति नहीं देता, फिर भी वे दौड़-धूप कर रहे। एकमात्र उद्देश्य तेजस्वी को सत्तासीन करना है। लालू मान चुके हैं कि उनके हस्तक्षेप के बिना न सीटों पर समझौता संभव है और ना ही मुख्यमंत्री के चेहरे का निर्धारण। कांग्रेस आज आनाकानी कर रही, तो कल को कन्नी भी काट सकती है। चिंता महागठबंधन में पीछे धकियाने जाने की भी है। सामाजिक समीकरण का विस्तार किए बिना राजद को सत्ता मिलने से रही, जबकि परंपरागत जनाधार (मुसलमान-यादव) पर ही हिस्सेदार खड़े हो गए हैं, इसलिए लालू ने अपनी रणनीति का रुख दोतरफा कर दिया है। आक्रामक बयानों से वे कोर वोटरों को साधने का उपक्रम कर रहे, तो फील्ड में सक्रियता से विरोधियों के साथ महागठबंधन के घटक दलों को हर दांव-पेच से निपटने की चुनौती दे रहे। एनडीए, विशेषकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पर उनके बोल बेहद तीखे होते जा रहे। नीतीश सरकार के 20 वर्षों के शासन को वे "दो पीढ़ियों को बर्बाद करने वाला" करार चुके हैं। एक्स पर लिख चुके हैं, "ऐ मोदी जी, विक्ट्री चाहिए बिहार से और फैक्ट्री दीजिएगा गुजरात में! यह गुजराती फार्मूला बिहार में नहीं चलेगा!" क्षेत्रीय अस्मिता को उभारने वाला यह बयान वस्तुत: जनाधार के विस्तार की आकांक्षा है। लालू सपरिवार गयाजी पहुंच थे। अपने हाथों कोई षट्कर्म नहीं किया, क्योंकि गयाजी में वे पहले ही पिंडदान कर चुके हैं, फिर भी विष्णुपद मंदिर पहुंचे। उनकी यह पहल सीतामढ़ी में जानकी मंदिर पहुंचे राहुल गांधी से उत्प्रेरित मानी जा रही, जो धुव्रीकरण की आशंका को निर्मूल करने के उद्देश्य से रही। मुसलमानों के हिमायती राजद के लिए ध्रुवीकरण की स्थिति कभी लाभप्रद नहीं रहती, इसलिए लालू ने तेजस्वी को इससे बचते हुए ''खैनी में चूना रगड़ देने'' वाले बयान को बारंबार दोहराने की सीख दी। यह बयान वस्तुत: अगड़ों पर आक्षेप और कोर वोटरों को साधने का उपक्रम रहा। बहरहाल, लालू की रणनीति युवा-महिला वोटरों को लुभाने और एनडीए के वोट-बैंक में सेंधमारी के साथ तेजस्वी की छवि को एक प्रगतिशील नेता के रूप में स्थापित करने की है। माई-बहिन मान योजना और शत प्रतिशत डोमिसाइल के वादे के साथ महागठबंधन में नए सहयोगियों (झामुमो और रालोजपा) को जोड़ने से इसका आभास होता है। सारे निर्णय लालू के रहे। हालांकि, परिवार के भीतर मतभेद, महागठबंधन में अंतर्द्वंद्व और कानूनी चुनौतियां उनकी इच्छाओं पर तुषारापात कर रहीं। इसके बावजूद वे तेजस्वी को मुख्यमंत्री का चेहरा बता रहे, क्योंकि इसके लिए अभी कोई दूसरा दमदार आवाज नहीं। पांच फरवरी को नालंदा में लालू ने तेजस्वी को ही महागठबंधन में मुख्यमंत्री का चेहरा बताया था। उसके बाद मोतिहारी में कहा कि "तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनने से कोई माई का लाल नहीं रोक सकता।" इस उद्घाेष के बावजूद कांग्रेस पेच फंसाए है। ऐसे में लालू इत्मीनान से नहीं बैठ सकते। मोतिहारी में वे पूर्व विधायक यमुना यादव के निधन पर शोक जताने गए। पुराने नेताओं के स्वजनों का दु:ख साझा करने के लिए ऐसे ही वैशाली और आरा भी जा चुके हैं। इस स्तर पर लालू की सक्रियता पिछले वर्षों में नहीं रही। हालांकि, उनकी अति-सक्रियता राजद की संभावना के प्रतिकूल भी पड़ जाती है। तब जंगलराज की पुनर्वापसी की आशंका जताते विरोधी कुछ अधिक आक्रामक हो जाते हैं।  

एआई की जांच में सामने आई यूपी मतदाता सूची की त्रुटियां, डुप्लीकेट वोटर्स का सत्यापन तेज

ज्ञानपुर  चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआइआर) के विरोध चल ही रहा है कि यूपी में भी मतदाता सूची में तमाम गड़बड़ियां सामने आने लगी है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचस्थानीय मतदाता सूची की आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) से जांच कराई तो प्रदेश के हर जिले में डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम सामने आए। भदोही जिले में 10.93 लाख मतदाताओं में से 2.34 लाख मतदाता ऐसे मिले हैं जिनका मतदाता सूची में एक ही नाम दो स्थानों पर है। इन मतदाताओं का 29 सितंबर तक सत्यापन होना है। इसके लिए 701 बूथ लेबल आफिसर (बीएलओ) गांव-गांव वहां की मतदाता सूची से मतदाताओं का सत्यापन कर रहे हैं।   निर्वाचन आयोग ने इस कार्यक्रम को संशोधन, विलोपन और परिवर्धन का नाम दिया है। डुप्लीकेट मतदाता का नाम एक स्थान से कटेगा वहीं नाम में कोई गलती है तो वह संशोधन होगा। जबकि मृतक, शादी शुदा लड़कियों का नाम विलोपन यानि काटा जाएगा। जबकि एक जनवरी 2025 को 18 साल आयु पूर्ण करने वालों का नाम सूची में जोड़ा जाएगा। 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव को निष्पक्ष के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य शुरू कर दिया है। आयोग ने एआइ की जांच में भदोही जिले के दो लाख 34 हजार 333 ऐसे मतदाताओं को पकड़ा है जिनके नाम दो स्थानों पर है। वर्तमान में जिले की 546 ग्राम पंचायतों में 10.93 लाख मतदाता हैं।   सत्यापन के दौरान एआइ की सूची ठीक निकली तो यह नाम कट जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग की सूची के मुताबिक औराई में सबसे अधिक 58452 और अभोली में सबसे कम 18781 डुप्लीकेट मतदाता हैं। जिले की 546 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान का अगले वर्ष चुनाव होना है। इसमें जिला पंचायत के 26 जिला पंचायत सदस्य, छह ब्लाकों के 835 क्षेत्र पंचायत सदस्य और नौ हजार ग्राम पंचायत सदस्य हैं। बोले अध‍िकारी राज्य निर्वाचन आयोग से जिलों को भेजी गई सूची में दो लाख 34 हजार 333 डुप्लीकेट मतदाता मिले हैं। इनका बीएलओ के माध्यम से सत्यापन कराया कराया जा रहा है। सूची गलत मिली तो दो जगह से एक नाम हटाया जाएगा। – डीएस शुक्ल, उप निर्वाचन अधिकारी, पंचस्थानीय।   

दत्तक पुत्र की भांति वृद्धजनों को अडाप्ट करने पर फोकस किया जाए : मंत्री कुशवाह

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दिए सुझाव भोपाल  सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह गुरूवार को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित सामाजिक कल्याण एवं सुरक्षा क्षेत्र पर मंत्री समूह की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में शामिल हुए। बैठक केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। मंत्री श्री कुशवाह ने ईज ऑफ डुइंग बिजनेस, ईज ऑफ लिविंग को बेहतर बनाने तथा नागरिकों और उद्यमों पर अनुपालन बोझ कम करने के लिए दत्तक पुत्र की भांति वृद्धजनों को अडॉप्ट करने, पैरेंटल केयर लीव लिए जाने तथा सशुल्क वृद्धाश्रमों को पीपीपी मोड पर विकसित करने के सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से समाज कल्याण के क्षेत्र में बेहतर कार्य हो सकेगा। मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि वृद्धजनों को समाज की मुख्य धारा में बनाए रखने की जरूरत है, जो वृद्धजन शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हैं, उनको क्षमता के अनुसार रचनात्मक कार्यों से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सभी वृद्धाश्रमों, नशा मुक्ति केंद्र, डीआरसी भिक्षु गृह आदि के संचालन के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिव प्रोसीजर बनाया जाना चाहिए। सभी जरूरतमंदों के लिए एक हेल्पलाइन विकसित किए जाने, ट्रांसजेण्डर व्यक्तियों को 50 वर्ष की आयु के बाद वृद्धजनों का दर्जा दिए जाने तथा केन्द्र में ओबीसी एवं एससी विभाग पृथक पृथक बनाए जाने का सुझाव भी दिया। केंद्रीय मंत्री श्री वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को आगे बढ़ाने के लिये सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय समाज के वंचित वर्गों के विकास के लिए एक रोड मैप पर कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में सभी प्रदेशों के सामाजिक न्याय विभागों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया और न्यूनतम सरकार अधिकतम शासन के अनुरूप संस्थाओं को सुदृढ़ बनाना, केंद्र, राज्य, नगर निगम सुधारों की पहचान करना और मौजूदा कानून में आवश्यक संशोधन पर भी विचार किया जा रहा है। इसी कड़ी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुझाव आमंत्रित किए गये है।

कलेक्टर्स व्यवस्थित ढंग से करायें खाद का वितरण : कृषि मंत्री कंषाना

प्रदेश में गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष खाद की अधिक उपलब्धता भोपाल  किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि प्रदेश के सभी जिलों में खाद की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने सभी जिला कलेक्टर्स को अपने जिले में खाद का वितरण व्यवस्थित ढंग से कराने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक खाद उपलब्ध होगी। प्रदेश में गत वर्ष 01 अप्रैल से 9 सितम्बर 2024 तक 15.83 लाख मीट्रिक टन यूरिया का विक्रय हुआ था जिसके विरुद्ध इस वर्ष 9 सितंबर 2025 तक 18.34 लाख मीट्रिक टन की कुल उपलब्धता थी, जिसमें से 16.19 लाख मीट्रिक टन का विक्रय किया जा चुका है। प्रदेश में 2.15 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। प्रदेश में गत वर्ष 01 अप्रैल से 9 सितम्बर 2024 तक 9.39 लाख मीट्रिक टन डी.ए.पी + एन.पी.के. का विक्रय हुआ था जिसके विरुद्ध इस वर्ष 9 सितंबर तक 13.96 लाख मीट्रिक टन की कुल उपलब्धता थी, जिसमें से 9.71 लाख मीट्रिक टन का विक्रय किया जा चुका है एवं 4.25 लाख मीट्रिक टन डी.ए.पी. + एन.पी.के. प्रदेश में उपलब्ध है। प्रदेश के लिए प्रतिदिन लगभग 7 से 8 रैक विभिन्न जिलों के लिए आ रही हैं।