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पटना में दर्दनाक हादसा: ऑटो और हाइवा की टक्कर, 8 की मौत, 5 घायल

पटना पटना सिटी अनुमंडल के शाहजहांपुर थाना क्षेत्र के सिगरियामा के पास रविवार को बड़ा सड़क हादसा हो गया. यहां एक ऑटो और हाइवा ट्रक की आमने-सामने टक्कर में 8 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 7 महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं. ग्रामीण एसपी ने बताया कि हादसे में 5 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है. सभी लोग ऑटो से गंगा स्नान करने फतुहा जा रहे थे, तभी यह हादसा हो गया. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया. मरने वालों की पहचान की जा रही है. दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी को भी जब्त कर लिया गया है, जबकि ट्रक लेकर ड्राइवर भाग निकला। घटना पटना सिटी की है। दनियावां थाने की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर छानबीन की। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ऑटो के परखच्चे उड़ गए। दुर्घटना के शिकार लोग नालंदा जिले के रहने वाले बताए जाए रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हादसे में मरने वालों में 7 महिलाएं शामिल हैं। शाहजहांपुर के दनियावां हिलसा स्टेट हाइवे 4 पर सिगरियावा स्टेशन के पास ऑटो की ट्रक से टक्कर हो गई। सभी घायलों को इलाज के लिए पटना के पीएमसीएच भेजा गया। ये लोग नालंदा के रेरा मलामा गांव के निवासी हैं। एक ऑटो पर सवार होकर पटना आए हुए थे। जानकारी के मुताबिक उन्हें गंगा स्नान करना था और इसके लिए वे फतुहा जा रहे थे। हादसे के बाद घटनास्थल पर कोहराम मच गया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। हादसे की जांच की जा रही है। घटना के बाद ट्रक लेकर चालक फरार हो गया। पुलिस सीटीटीवी की मदद से पहचान और तलाश कर रही है। टक्कर की आवाज सुनकर आसपास के लोग घटना स्थल पर जुटे और घायलों की मदद की। बताया जा रहा है कि सात लोगों की मौत मौके पर ही हो गयी जबकि एक घायल ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।

रक्षा और एयरोस्पेस में मध्यप्रदेश की अगुवाई, मेक इन इंडिया को मिलेगा नया आयाम

भोपाल  मध्यप्रदेश रक्षा और एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने के लिए नई पहचान बना रहा है। अनुकूल औद्योगिक माहौल, मजबूत बुनियादी ढांचा और अग्रणी नीतियों के बल पर राज्य रक्षा उत्पादन और तकनीकी नवाचार का नया केंद्र बनता जा रहा है। इसी उद्देश्य से रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने और नए अवसरों पर चर्चा के लिए रक्षा इंडस्ट्री इंटरेक्शन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। रक्षा उत्पादन विभाग, भारत सरकार की संयुक्त सचिव डॉ. गरिमा भगत ने कहा कि मध्यप्रदेश में रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण का हब बनने की अपार संभावनाएं हैं। हमारा प्रयास है कि एमएसएमई और स्टार्टअप को मजबूत सहयोग देकर उन्हें राष्ट्रीय रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भागीदार बनाया जाए। उद्योग, अकादमिक संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच निरंतर सहयोग ही इस क्षेत्र में नवाचार को गति देगा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाएगा। संयुक्त सचिव डॉ. भगत ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम एमएसएमई को रक्षा पीएसयू और बड़े प्राइवेट सेक्टर से सीधे जोड़ते हैं जिससे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, जॉइंट वेंचर और महत्वपूर्ण प्रणालियों के सह-विकास के अवसर बढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि एसआरआईजन पोर्टल पर अब तक 39 हजार से अधिक प्रोडक्ट स्वदेशीकरण के लिए सूचीबद्ध हैं, जो निवेशकों और स्टार्टअप के लिए बड़े अवसर पैदा करते हैं। कार्यक्रम के दौरान जबलपुर के रक्षा उद्योग के मजबूत ईकोसिस्टम और वेंडर बेस पर विशेष चर्चा हुई। डॉ. गरिमा भगत ने बताया कि जबलपुर में 300 करोड़ रु. की लागत से एक मैन्युफैक्चरिंग, रिपेयर एंड ओवरहाल (एमआरओ) सुविधा स्थापित की जा रही है, जिससे स्थानीय उद्योगों के लिए बड़े अवसर तैयार होंगे। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी भौगोलिक स्थिति और अनुकूल औद्योगिक वातावरण के कारण रक्षा निर्माण में निवेश के लिए देश का सबसे स्वाभाविक और सर्वोत्तम स्थान है। राज्य में ऑटो क्लस्टर, ड्रोन टेक्नोलॉजी, तकनीकी वस्त्र और इलेक्ट्रॉनिक्स सैक्टर रक्षा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजी से विकसित हो रहे हैं। राज्य की एयरोस्पेस एंड डिफेंस पॉलिसी 2025 के अंतर्गत भूमि रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है, साथ ही पूंजीगत निवेश पर 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी और आरएंडडी, टेस्टिंग जैसी सुविधाओं पर आकर्षक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश अपनी प्रगतिशील नीतियों, सुदृढ़ औद्योगिक ढांचे और भारत सरकार के साथ मजबूत साझेदारी के माध्यम से रक्षा उत्पादन और नवाचार का अग्रणी केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आयुक्त एमएसएमई सुप्रीति मैथिल ने भी एमएसएमई में डिफेंस सैक्टर के संबंध में जानकारी साझा की। कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें रक्षा पीएसयू, निजी क्षेत्र की अग्रणी कंपनियां, एमएसएमई, स्टार्टअप, शिक्षाविद और शोध संस्थान शामिल थे। प्रतिभागियों में अदाणी डिफेंस, बीईएल, हिंदुस्तान शिपयार्ड, गन कैरिज फैक्ट्री, ऑर्डनेंस फैक्ट्रीज, फोर्स मोटर्स, एचईजी, जेबीएम, विनायक इंजीनियरिंग, सीआईपीईटी भोपाल, आईआईएसईआर भोपाल और सीएसआईआर-एएमपीआरआई जैसी अग्रणी इकाइयां शामिल रहीं। संवाद सत्र में उद्योग प्रतिनिधियों ने वाहनों, पुर्जों, प्रोटेक्टिव गियर, टेलीकॉम सिस्टम, एम्युनिशन और एडवांस मटेरियल्स के क्षेत्र में सहयोग के अवसरों पर बातचीत की।  

रोजाना सफर आसान बनेगा, अंबाला से चंडीगढ़ तक नई ट्रेन पर विचार

हरियाणा  हरियाणा के कर्मचारी, विद्यार्थी और कारोबारियों को अंबाला छावनी से चंडीगढ़ तक जल्द ही नई यात्री रेलगाड़ी का तोहफा मिल सकता है। प्रदेश के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने बताया कि इस रूट पर पैसेंजर ट्रेन चलाने के लिए ऑपरेशनल फिजिबिलिटी जांच शुरू कर दी गई है। अंबाला छावनी और चंडीगढ़ के बीच प्रतिदिन हजारों लोग नौकरी, पढ़ाई, इलाज और व्यापार के सिलसिले में सफर करते हैं। फिलहाल इनकी निर्भरता बस सेवाओं और निजी वाहनों पर है। इससे समय भी ज्यादा लगता है और जेब पर भी बोझ पड़ता है। नई रेल सेवा शुरू होने से यात्रियों को किफायती, सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा। सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी। अंबाला छावनी एक बड़ा सैन्य एवं औद्योगिक केंद्र है, जबकि चंडीगढ़ प्रशासनिक राजधानी है। दोनों शहरों को जोड़ने वाली सीधी रेल सेवा न केवल यात्रियों के लिए राहत साबित होगी बल्कि व्यापार और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार भी बढ़ाएगी। विज ने बताया कि पिछले माह उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर इस रूट पर पैसेंजर ट्रेन चलाने का आग्रह किया था।   रेल मंत्रालय ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए ऑपरेशनल फिज़िबिलिटी जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जांच पूरी होते ही अगली कार्रवाई शुरू होगी। मंत्री ने उम्मीद जताई कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी होगी और निकट भविष्य में हरियाणा के लोगों को नई रेल सेवा की सौगात मिलेगी।  

त्योहारों पर आसान सफर: रेलवे की सुविधा से मिलेगा कन्फर्म टिकट

लखनऊ  दिवाली और छठ पर्व पर यूपी-बिहार अगर आप जाना चाहते हैं और आप को कन्फर्म टिकट नहीं मिली रहा है तो आप चिंता न करें क्योंकि यात्रियों की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे Indian Railways 12 हजार से अधिक ट्रेन चलाने जा रहा है। ऐसे में आप को परेशान होने की जरूरत नहीं। इन 12 हजार ट्रेनों आप को जरूर ही कन्फर्म टिकट मिल सकता है। 12 हजार से अधिक विशेष ट्रेन चलाई जाएंगी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि दीपावली और छठ पर्व पर बिहार के यात्रियों की सुविधा के लिए 12 हजार से अधिक विशेष ट्रेन चलाई जाएंगी। वैष्णव ने बताया कि बिहार के नेताओं से यात्रियों की जरूरतों को लेकर चर्चा के बाद मंत्रालय ने न सिर्फ नयी ट्रेन चलाने की योजना बनाई है, बल्कि कई अन्य योजनाएं और आधारभूत बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भी तैयार की हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए चार नयी अमृत भारत ट्रेन शुरू की जाएगी वैष्णव के अनुसार, सामान्य श्रेणी के यात्रियों की सुविधा के लिए चार नयी अमृत भारत ट्रेन शुरू की जाएंगी, जो दिल्ली-गया, सहरसा-अमृतसर, छपरा-दिल्ली और मुजफ्फरपुर-हैदराबाद मार्गों पर चलेंगी। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, पूर्णिया और पटना के बीच बहुत जल्द एक वंदे भारत ट्रेन शुरू की जाएगी, जिससे समाज के सभी वर्गों को लाभ मिलेगा। रेल मंत्री ने बताया कि मंत्रालय ने बुद्ध से जुड़े स्थलों जैसे नालंदा और राजगीर तक पहुंच बढ़ाने के लिए बुद्ध सर्किट ट्रेन चलाने की योजना बनाई है। आवागमन किराये पर 20 प्रतिशत की छूट भी देगा रेलवे उन्होंने रेलवे बोर्ड की नयी प्रायोगिक योजना का भी जिक्र किया, जिसके तहत यदि यात्री 13 से 26 अक्टूबर 2025 के बीच प्रस्थान यात्रा करेंगे और 17 नवंबर से एक दिसंबर 2025 के बीच वापसी यात्रा करेंगे, तो उन्हें आवागमन किराये पर 20 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। वैष्णव ने पटना के लिए एक रिंग रेलवे परियोजना और राज्य के लिए कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की भी घोषणा की। इनमें पैदल पार पथ (फुट ओवर ब्रिज), पैदल भूमिगत पार पथ (फुट अंडरब्रिज), बक्सर-लखीसराय के बीच तीसरी और चौथी लाइन तथा सुल्तानगंज-देवघर रेल संपर्क जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। यूपी विहार जाने वाली ट्रेनों में 144 की वेटिंग  रेलवे की आईआरसीटीसी एप के अनुसार आगरा फोर्ट से गया की ओर चलने वाली सियालदह सुपरफास्ट एक्सप्रेस में 18 अक्टूबर के लिए कोई भी सीट उपलब्ध नहीं है। आगरा कैंट-कोलकाता ट्रेन में 18 अक्टूबर को वेटिंग 100 के पार है, स्लीपर कोच में 144 की वेटिंग है। आगरा कैंट से लखनऊ जाने वाली कोटा पटना एक्सप्रेस में 18 अक्टूबर के लिए वेटिंग की सीट भी उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही आगरा कैंट से जाने वाली मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस में भी 18 अक्टूबर के लिए कोई सीट उपलब्ध नहीं है। आगरा रेल मंडल की जनसंपर्क अधिकारी प्रशस्ति श्रीवास्तव का कहना है कि त्योहार पर रेलवे की ओर से कई स्पेशल ट्रेन चलाई जाएंगी। यात्रियों की सुविधा के लिए कई ट्रेन में कोच भी बढ़ाए जाएंगे।  

हड्डी जैसी संरचना से मचा हड़कंप, जैसलमेर में फिर उठे डायनासोर के सवाल

  जैसलमेर जैसलमेर के मेघा गांव के पास तालाब किनारे खुदाई के दौरान रहस्यमयी जीवाश्म मिले हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह जुरासिक काल के उड़ने वाले डायनासोर का हिस्सा हो सकता है। प्राथमिक जांच में यह संरचना रीढ़ की हड्डी जैसी प्रतीत हो रही है, जबकि इसका बड़ा हिस्सा 15 से 20 फीट जमीन के अंदर दबा हुआ है। भूजल वैज्ञानिक नारायण दास इणखिया ने दावा किया कि यह जैसलमेर के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा कंकाल है। उनका कहना है कि जियोलॉजिकल सर्वे की टीम इसकी जांच करेगी, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जीवाश्म किस प्रजाति का है और कितने वर्ष पुराना है। डॉ. इणखिया के अनुसार, यह अवशेष लाखों-करोड़ों साल पुराने हो सकते हैं। अगर यह अन्य जानवर की हड्डियां होतीं तो समय के साथ नष्ट हो जातीं। लेकिन इनके सुरक्षित रहने से यह माना जा रहा है कि यह जीवाश्म बनने की प्रक्रिया में जम चुके हैं। उनका अनुमान है कि यह करीब 20 फीट लंबे किसी उड़ने वाले डायनासोर का कंकाल हो सकता है। गौरतलब है कि जैसलमेर क्षेत्र प्राचीन भूगर्भीय इतिहास से जुड़ा है। करीब 25 करोड़ वर्ष पहले यह इलाका समुद्र का हिस्सा हुआ करता था, जहां डायनासोर भोजन की तलाश में आते थे। यही कारण है कि यहां समय-समय पर जीवाश्म और प्राचीन अवशेष मिलते रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2023 में डॉ. इणखिया को जेठवाई पहाड़ी पर मॉर्निंग वॉक के दौरान डायनासोर के अंडे का जीवाश्म मिला था। वहीं थईयात की पहाड़ियों में भी डायनासोर के पैरों के निशान और हड्डियां खोजी जा चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसलमेर में मिले ये नए अवशेष भारत की पुरातत्व और भूगर्भीय धरोहर को और समृद्ध करेंगे। वैज्ञानिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह सचमुच उड़ने वाले डायनासोर का कंकाल है या किसी अन्य प्राचीन जीव का अवशेष।  

अपेक्स बैंक की 61 वीं वार्षिक साधारण सभा सम्पन्न

अपेक्स बैंक की  61 वीं वार्षिक साधारण सभा सम्पन्न बैंक ने वित्तीय 2024-25 में रू.139.04 करोड़ का शुद्ध लाभ कमाया भोपाल  अपेक्स बैंक की 61 वीं वार्षिक साधारण सभा आज अपेक्स बैंक में समन्वय भवन के सभागार में म.प्र.शासन के प्रमुख सचिव, सहकारिता एवं अपेक्स बैंक के प्रशासक श्री डी.पी.आहूजा की अध्यक्षता में आयोजित हुई ।  बैठक के आरंभ में अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता ने बैंक के प्रशासक श्री डी.पी.आहूजा, आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक श्री मनोज पुष्प एवं बैंक के पूर्व प्रबंध संचालक श्री प्रदीप नीखरा का पुष्प-गुच्छ से स्वागत किया ।  श्री गुप्ता ने बैठक में प्रशासक महोदय के अभिभाषण का वाचन करते हुये बैंक की वित्तीय स्थिति से सभी सदस्यों को अवगत कराते हुए कहा कि समग्र प्रयासों एवं समयबद्ध कार्ययोजना के क्रियान्वयन के फलस्वरूप अपेक्स बैंक द्वारा इस वर्ष अब तक का  अधिकतम शुद्ध लाभ रू.139.04 करोड़ का अर्जित किया है।  इसलिये बैंक ने अब अपने अंशधारियों को 4 प्रतिशत की दर से लाभांश देने का भी निर्णय लिया है।   उन्होंने यह भी अवगत कराया कि वर्ष 2024-25 के आय-व्यय के साथ वर्ष 2025-26 के बजट को बैठक में अनुमोदित किया गया। इस वर्ष अपेक्स बैंक को अंकेक्षक ने ’’ए’’ ग्रेड प्रदान किया है तथा अपेक्स बैंक में इस वर्ष 23 सहायक प्रबंधक, 95 संवर्ग अधिकारियों की आईबीपीएस के माध्यम से भर्ती प्रक्रियाधीन है, जबकि 54 बैंकिंग सहायकों की भर्ती की गई है।  इसी प्रकार प्रदेश के 38 जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों में अधिकारी वर्ग के 326, बैंकिंग सहायक वर्ग के 1040 एवं समिति प्रबंधक वर्ग के 839 अर्थात् 2205 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया भी प्रक्रियाधीन है ।   उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश की त्रि-स्तरीय सहकारी साख संरचना को मजबूत, सशक्त एवं समृद्ध बनाने की दिशा में केन्द्र प्रायोजित पैक्स कम्प्यूटराईजेषन योजनान्तर्गत प्रदेश की 4536 पैक्स में हार्डवेयर इंस्टाल कर दिये गये हैं एवं 4534 पैक्स साफ्टवेयर पर आन बोर्ड हो चुकी हैं ।  पैक्स रियल टाईम साफ्टवेयर पर कार्य कर सकें, इसकी कार्यवाही प्रक्रियाधीन है, इससे पैक्स की कार्यप्रणाली और सेवाओं में पारदर्षिता आयी है और जनसामान्य में पैक्स के प्रति विश्वास बढ़ा है।  इसी प्रकार पैक्स सदस्यों को उनके खातों के संव्यवहारों की सूचना एस.एम.एस. के द्वारा भेजने वाला प्रथम राज्य मध्य-प्रदेश बन गया है। अन्त में प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता ने प्रदेश के मा.मुख्यमंत्री जी, सहकारिता मंत्री जी, कृषि उत्पादन आयुक्त, भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड, नेफेस्काॅब, सहकारिता, कृषि एवं खाद्य व नागरिक आपूर्ति विभाग के साथ उपस्थित प्रतिनिधियों, शीर्ष सहकारी संस्थाओं के प्रबंध संचालकों का आभार व्यक्त किया ।  बैठक का संचालन उप महाप्रबंधक श्री के.टी.सज्जन ने किया । बैठक में नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक श्रीमती सी.सरस्वती, अपेक्स बैंक के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारीगण श्रीमती अरूणा दुबे, श्री अरूण मिश्र, श्री अरविंद बौद्ध, शीर्ष सहकारी संस्थाओं के प्रबंध संचालक सर्वश्री रितुराज रंजन, महेन्द्र दीक्षित, श्री आर.एस. विश्वकर्मा, अपेक्स बैंक के प्रबंधक श्री करूण यादव, श्री विवेक मलिक, श्री समीर सक्सेना, श्री अजय देवड़ा,  आर.वह.एम.पिल्लई के साथ सभी शीर्ष सहकारी संस्थाओं/अपेक्स बैंक के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित हुए ।

खेल प्रशिक्षक से लेकर अधिकारी तक: बिहार सरकार ने खोले नौकरी के अवसर

पटना खेल में नौकरी के इंतजार में बैठे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी आ गई है। राज्य सरकार ने खेल विभाग में बंपर बहाली का रास्ता खोल दिया है। ऐसा पहली बार हो रहा है, जब नवगठित खेल विभाग में 824 पदों पर बहाली होने जा रही है। खेल प्रशिक्षक से लेकर क्रीड़ा सेवा संवर्ग में अधिकारी, खेल लिपिक और अन्य पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। खेल विभाग ने इन नियुक्तियों के लिए बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार कर्मचारी चयन आयोग और बिहार तकनीकी सेवा आयोग को सफरिश भेज दी है। जानिए किस पद के लिए कितनी बहालियाँ निकलेंगी खेल प्रशिक्षक (Sports Trainer): 379 पद खेल सेवा संवर्ग के अधिकारी: 33 पद निम्नवर्गीय लिपिक: 53 पद राजगीर खेल अकादमी: 81 पद (खेल प्रशिक्षक और लिपिक दोनों) बिहार राज्य खेल प्राधिकार, पटना: 301 पद खेल प्रशिक्षकों के 379 पद होगी सीधी बहाली खेल सेवा संवर्ग में होंगे 33 अधिकारी वह युवा जो खेल विभाग में नौकरी की आस लगाए लंबे समय से बैठे थे और खेल के प्रशिक्षक बनना हैं, अब उनकी लॉटरी लगने वाली है। खेल विभाग की ओर से बिहार खेल अधीनस्थ सेवा संवर्ग में 380 पद स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें से 379 पद अभी खाली हैं। इन सभी पदों पर बहाली के लिए खेल विभाग ने बीएसएससी को प्रस्ताव भेज दिया है। जल्द ही इन पर सीधी बहाली की जाएगी। बिहार खेल सेवा संवर्ग में भी 33 अधिकारियों के लिए 44 नए पदों का सृजन किया गया है। इनमें से 11 पद प्रोन्नति के लिए हैं, जबकि 33 पदों पर सीधी भर्ती होगी है। इन पदों पर नियुक्ति के लिए BPSC को अधियाचन भेज दिया गया है। लिपिकीय सेवा संवर्ग का गठन खेल विभाग में लिपिकीय सेवा संवर्ग का भी गठन कर दिया गया है। इसके लिए 80 पदों की स्वीकृति भी मिल गई है। इनमें से 53 रिक्त पद ऐसे हैं जिस पर जल्द बहाली होनी है। जिसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राजगीर खेल अकादमी में 81 पदों पर भर्ती निम्नवर्गीय लिपिक के 10 पद और विभिन्न खेलों के प्रशिक्षकों के 48 पद पूरी तरह खाली। वहीं, खेल प्राधिकार में भी 301 पदों पर नियुक्ति होनी है। प्रस्ताव को कार्यकारिणी समिति की मंजूरी मिल चुकी है और नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी कर दिया गया है। नियुक्ति प्रक्रिया की सिफारिश BTSC को भी सौंप दी गई है। युवाओं के लिए सुनहरा मौका इन बहालियों के साथ ही बिहार में खेलों के क्षेत्र में बड़ा बदलाव तय है। खेल प्रशिक्षकों की तैनाती से गांव-गांव और शहर-शहर में खेल प्रतिभाओं को निखरने का मौका मिलेगा। वहीं, खेल सेवा संवर्ग और प्राधिकार के अधिकारियों की नियुक्ति से खेल प्रशासन को नई गति मिलेगी। बिहार में यह अब तक का सबसे बड़ा खेल बहाली अभियान है, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार और राज्य को नई खेल पहचान मिलने वाली है।  खेल प्रेमियों और नौकरी के इच्छुक युवाओं के लिए यह खबर किसी बंपर खुशखबरी से कम नहीं।

पांच साल में यूपी का ऋण छह से बढ़कर नौ लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान, हर नागरिक पर 37,500 रुपए का कर्ज

लखनऊ उत्तर प्रदेश में जहां बुनियादी और औद्योगिक विकास में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, वहीं विभिन्न संस्थाओं से लिए उधार का बोझ भी बढ़ा है। चालू वित्त वर्ष में अब तक यूपी के प्रत्येक व्यक्ति पर करीब 37500 रुपये का ऋण है। पांच साल में यूपी पर उधार 6 लाख करोड़ से बढ़कर 9 लाख करोड़ होने का अनुमान है। राज्य वित्त आयोग के मुताबिक इसके बावजूद सरकार का राजस्व घाटा 2.97 फीसदी है जो आरबीआई की निर्धारित सीमा के अंदर है। यही वजह है कि पांच साल में बजट का आकार भी करीब दोगुना हो गया है। राज्य वित्त आयोग के मुताबिक राज्य के ऊपर उधार का बोझ विकास का संकेतक होता है, क्योंकि जितना ज्यादा खर्च बुनियादी ढांचे के विकास पर होता है उतना ही ऋण बढ़ता है। शर्त ये है कि ये खर्च पारदर्शी और प्रबंधन नीति के तहत किया जाए। यानी ऋण का आकार नहीं, बल्कि उसका उपयोग और पुनर्भुगतान की योजना ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। अत्यधिक ऋण से विकासशील अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है और ब्याज भुगतान में वृद्धि होती है। ऐसे में यूपी जैसे राज्य के लिए इसका संतुलन जरूरी है। वित्त आयोग के मुताबिक वर्ष 23-24 में राज्य सरकार पर कुल ऋण करीब 7.76 लाख करोड़ रुपये था जो वर्ष 25-26 में 9 लाख करोड़ रुपये के पार होने का अनुमान है। राजकोषीय घाटे की स्थिति बेहतर राजकोषीय घाटा वह स्थिति होती है, जब सरकार का कुल खर्च, उसकी कुल प्राप्तियों (ऋण को छोड़कर) से अधिक हो जाता है। यह घाटा इस बात का संकेत होता है कि सरकार को अपने खर्च पूरा करने के लिए कितनी उधारी की जरूरत पड़ी। दूसरे शब्दों में, राजकोषीय घाटा सरकार की वित्तीय जरूरतों और संसाधनों के बीच का अंतर दर्शाता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार कितना खर्च अपनी आय से नहीं, बल्कि उधारी से कर रही है। अगर यह घाटा लगातार अधिक बना रहता है, तो इससे सरकार पर ऋण और ब्याज का बोझ बढ़ता है। हालांकि, सीमित और नियंत्रित राजकोषीय घाटा हमेशा नकारात्मक नहीं होता। यदि सरकार इस उधारी का उपयोग सड़क, बिजली, जल, शिक्षा और स्वास्थ्य अवसंरचना आदि पर करती है तो इससे आर्थिक विकास होता है और राजस्व बढ़ता है। यूपी का वित्त वर्ष 2025-26 में अनुमानित राजकोषीय घाटा 91400 करोड़ है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 2.97% है। यह घाटा केंद्र सरकार के अधिनियम के तहत निर्धारित 3 फीसदी की सीमा के भीतर है। इससे स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है।  

इंदौर में मुख्यमंत्री को मिलेगी फिल्म स्टार्स जैसी सुविधा, मोहन यादव की नई रहन-सहन व्यवस्था

इंदौर   मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव अब फिल्म स्टार्स की तरह वैनिटी वैन में नजर आएंगे. दरअसल, क्लीन और ग्रीन शहर इंदौर में फिल्म स्टार्स की तरह सीएम के लिए वैनिटी वैन फैसिलिटी उपलब्ध होगी. दरअसल, इंदौर नगर निगम ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों के दौरान व्यक्तिगत चर्चा, आराम और प्रसाधन जैसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए एक अत्याधुनिक वैनिटी वैन बनाई है. मध्य प्रदेश के इंदौर में मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों के दौरान हर समय ये वैनिटी वैन उपलब्ध रहेगी. मोहन यादव का चलता फिरता घर इंदौर में नगर निगम द्वारा तैयार किया गया यह वीआईपी कक्ष किसी फाइव स्टार होटल के कमरे की तरह नजर आता है. इसे खास तौर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यक्रमों के लिए तैयार किया गया है, जिसमें वे कार्यक्रमों के दौरान बिना कहीं जाए आराम करने से लेकर प्रसाधन जा सकें. इस वैनिटी वैन में मीटिंग रूम भी तैयार किया गया है, जहां सीएम लोगों से चर्चा कर सकते हैं. प्रोटोकॉल ध्यान रखकर तैयार की गई लग्जरी वैनिटी वैन इंदौर नगर निगम द्वारा तैयार की गई ये वैनिटी वैन सर्वसुविधा युक्त, एयर कंडीशन्ड, लग्जरी और ईको फ्रेंडली है. इसमें लग्जरी फर्नीचर, बाथरूम के अलावा अन्य एमेनिटीज मौजूद हैं. वैनिटी वैन को लेकर इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया, '' प्रदेश के किसी नगर निगम में मुख्यमंत्री के लिए तैयार हुई यह पहले वैनिटी वैन है. प्रोटोकॉल के तहत हर बार मुख्यमंत्री के लिए जो टेंट रूम तैयार किया जाता है, उस पर एक बार का खर्च 5 लाख से भी ज्यादा आता है. ऐसी स्थिति में नगर निगम वर्कशॉप के प्रभारी मनीष पांडे को ख्याल आया कि हर बार मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान टेंट रूम बनाने से बेहतर है कि तमाम सुविधाओं के साथ एक वैनिटी वैन बना दी जाए. इस वैन को बनाने में 5 लाख रु खर्च आया है, लेकिन अब ये सीएम के हर दौरे में उपलब्ध रहेगी.'' इस वैनिटी वैन को मुख्यमंत्री के प्रोटोकॉल के तहत तैयार कराया गया है और इसे कहीं भी ले जाया जा सकता है. नगर निगम वर्कशॉप के प्रभारी मनीष पांडे के मुताबिक इंदौर के राजवाड़ा में कैबिनेट बैठक के बाद हाल ही में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में इसी वैनिटी वैन का उपयोग किया गया, जिसे आगे भी मुख्यमंत्री की जरूरत के लिए उपयोग में लाया जाएगा. फिल्म स्टार रखते हैं वैनिटी वैन दरअसल, वैनिटी वैन रखने का ट्रेंड फिल्म स्टार्स का है, जो अपनी शूटिंग साइट पर वैनिटी वैन में ही रहने, सजने संवरने और आराम के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं. इसी कॉन्सेप्ट पर आधारित यह वैनिटी वैन अब मुख्यमंत्री को भी फिल्म स्टार्स की तरह आराम और सुविधाएं देगी. बता दें कि इस वैनिटी वैन को महज 9 दिन में तैयार किया गया था और इसे सबसे पहले इंदौर में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान इस्तेमाल किया जा चुका है.

29 अगस्त को एमपी के प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों में बनेगी शाला प्रबंधन समितियां, दो साल का होगा कार्यकाल

भोपाल  मध्यप्रदेश के सभी शासकीय और अनुदान प्राप्त प्राथमिक, माध्यमिक और कक्षा 1 से 8 तक की संयुक्त शालाओं में 29 अगस्त को शाला प्रबंधन समितियों (एसएमसी) का गठन किया जाएगा। इसके लिए राज्य शिक्षा केंद्र ने सभी जिलों के कलेक्टरों को आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं। शाला प्रबंधन समितियां शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बनाई जाती हैं। इनका कार्यकाल दो साल का होता है। समितियों की जिम्मेदारी स्कूल में बच्चों के नामांकन, नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्कूल की सुविधाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास पर रहती है। हर समिति में 14 पालक प्रतिनिधि, प्रधान शिक्षक, वरिष्ठ महिला शिक्षिका और स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन बच्चों के पालकों में से होगा, जबकि प्रधान शिक्षक समिति के सदस्य सचिव रहेंगे। प्रदेश के करीब 83 हजार स्कूलों में एक ही दिन समितियों का गठन होगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के अभिभावकों से अपील की है कि वे 29 अगस्त को स्कूल पहुंचकर समितियों में सक्रिय रूप से जुड़ें और शालाओं के विकास कार्यों में सहयोग दें। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शासकीय एवं अनुदान प्राप्त स्कूलों में अध्ययनरत् विद्यार्थियों के पालकों एवं अभिभावकों से 29 अगस्त-2025 को स्कूल पहुंचकर, शाला प्रबंधन समिति से जुड़ने और शालाओं के विकास कार्यों में सहभागी बनने का आग्रह किया गया है।