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छात्र को तंत्र क्रिया के आरोप में TC देने का मामला, आयोग ने लिया कड़ा संज्ञान

तंत्र क्रिया के आरोप में छात्र को टीसी, आयोग ने लिया कड़ा संज्ञान टीसी निरस्त करने का डॉ वर्णिका ने दिया त्वरित निर्देश  रायपुर प्रयास विद्यालय, रायपुर में कक्षा 9वीं के छात्र को विद्यालय से टीसी देकर बाहर किए जाने से संबंधित मामला छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के संज्ञान में आया। मामले को लेकर बच्चे के पालक की ओर से आवेदन में आरोप लगाया गया है कि छात्र को विद्यालय से निष्कासित करते हुए टीसी जारी की गई। साथ ही यह बात भी सामने आई है कि छात्र के तंत्र क्रिया में संलिप्त होने के कथित आरोप के चलते उसके विरुद्ध कार्रवाई की गई थी। हालांकि, तंत्र क्रिया में संलिप्तता संबंधी आरोप की कोई पुष्टि नहीं हुई है। प्राप्त आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि छात्र के पालक को समुचित जानकारी दिए बिना उसे कक्षा से बाहर कर टीसी प्रदान की गई, जिस पर पालक द्वारा विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उचित जांच एवं कार्रवाई की मांग की गई।  आवेदन का अवलोकन करने के पश्चात आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 13(1)(ज) एवं धारा 14 के तहत प्रकरण का संज्ञान लिया गया है। आयोग द्वारा सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, रायपुर को मामले की विस्तृत जांच कर तथ्यात्मक एवं लिखित प्रतिवेदन आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा द्वारा सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास से दूरभाष पर चर्चा कर मामले में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। आयोग ने छात्र की टीसी निरस्त कर उसकी पढ़ाई पुनः जारी रखने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी परिस्थिति में उसकी शिक्षा प्रभावित न हो। मामले की जांच के लिए प्रयास विद्यालय, रायपुर के प्राचार्य एवं अधीक्षक को आपातकालीन खंडपीठ में 21 सितंबर 2026 को दोपहर 02:00 बजे आयोग कार्यालय में उपस्थित होकर संबंधित दस्तावेजों एवं अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया गया है। आयोग अध्यक्ष डॉ वर्णिका शर्मा ने निर्देशित किया है कि प्रकरण के अंतिम निराकरण तक छात्र के शैक्षणिक हित ध्यान में रखते हुए उसकी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रखी जाए।

महाप्रबंधक उद्योग ने स्वरोजगार योजनाओं की दी जानकारी, उद्यमियों ने साझा किए अनुभव

शहडोल सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित उद्योग संवाद कार्यक्रम में कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने युवाओं से संवाद करते हुए उन्हें स्वरोजगार एवं उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवा अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप व्यवसाय का चयन कर शासकीय योजनाओं का लाभ उठाते हुए आत्मनिर्भर बन सकते हैं। उन्होंने युवाओं से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों एवं अवसरों का उपयोग कर रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम में महाप्रबंधक, जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र द्वारा युवाओं एवं उपस्थित लोगों को विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी दी गई। उन्होंने योजनाओं के अंतर्गत पात्रता, ऋण सुविधा, अनुदान एवं आवेदन प्रक्रिया के संबंध में जानकारी देते हुए युवाओं को योजनाओं का लाभ लेकर अपना व्यवसाय स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस दौरान फैब्रीकेशन का व्यवसाय करने वाले उद्यमी अरसद खान ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने एमएसएमई प्रोत्साहन योजना का लाभ लेकर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। उन्होंने योजना से प्राप्त लाभों एवं व्यवसाय के संचालन से जुड़ी जानकारी युवाओं के साथ साझा की तथा स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

जनजातीय महापुरुषों और बलिदानियों के जीवन पर फिल्में तैयार की जा रही हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह ने सनातन संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग किया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय महापुरुषों और बलिदानियों के जीवन पर फिल्में तैयार की जा रही हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी जनजातीय समुदाय के विकास के लिए समर्पित हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय महानायक अमर शहीद राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह बलिदान दिवस समारोह को किया संबोधित नमो-प्रेरणा कार्यक्रम का किया शुभारंभ जबलपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 1857 के स्वतंत्रता आंदोलन से पहले अपनी कलम और कविताओं के बल पर मध्यप्रदेश के जनजातीय महानायक अमर शहीद राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ने ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ अलख जगाई थी। अंग्रेजों के दमन के विरोध में उस समय में जो काम तलवार नहीं कर पाई, वह राजा शंकर शाह की लेखनी ने कर दिखाया। उनके लिखे गीतों ने जनता के बीच आजादी की ललक और अलख जगा कर नयी ऊर्जा का संचार किया। वे देश और धर्म को साथ लेकर चले। स्वभाषा-स्वधर्म-रचनात्मकता और साहित्य की साधना के प्रति राजा रघुनाथ शाह के समर्पण के कारण स्थानीय जन में उनके प्रति बहुत अधिक श्रद्धा थी। उनके बेटे कुंवर रघुनाथ शाह भी कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़े रहे। देखते ही देखते अंग्रेजी सरकार की जड़े हिल गईं। ब्रिटिश सैनिकों ने दोनों को बंदी बना लिया और उनके सामने महारानी की अधीनता स्वीकार करने और धर्म बदलने की शर्त रखी। लेकिन राजा शंकर शाह ने अंग्रेजों को मुंहतोड़ जवाब देकर पराधीनता स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने अंग्रेज अफसरों को बता दिया कि वे रानी दुर्गावती के वंशज हैं, भारतीय संस्कृति के जीवन मूल्यों और सनातन पर हमें गर्व है। राजा शंकर शाह की हिम्मत के आगे अंग्रेज अफसर डर गए, उन्हें तोप से बांध कर अन्यायपूर्वक बलिदान कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जबलपुर में जनजातीय महानायक राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कैंसर और नशामुक्ति के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए आरंभ हुआ अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कैंसर एवं नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से नमो प्रेरणा कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस पहल के तहत स्कूल एवं कॉलेजों में विद्यार्थियों को कैंसर से बचाव एवं जागरूकता के प्रति प्रेरित किया जाएगा। कैंसर मरीजों को समुचित उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण पहल है। विरासत से विकास की दिशा में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी व्यक्ति का शरीर साथ छोड़ता है, लेकिन उसके विचार सदैव जीवित रहते हैं। यही हमारे गौंडवाना के वीर शहीदों ने कर दिखाया। राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह ने सनातन संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग किया। उनका जीवन और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में विरासत से विकास की दिशा में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। राज्य सरकार प्रदेश के जनजातीय महानायकों के गौरवशाली इतिहास संरक्षित करने और इसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय समुदाय को विभिन्न योजनाओं का लाभ देकर स्वावलंबी बनाने के लिए जनजातीय कार्य विभाग की सराहना की। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय से सिकल सेल एनीमिया को जड़ से समाप्त करने के लिए प्रदेश स्तर पर स्क्रीनिंग और इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी जनजातीय समुदाय की पीड़ा को अच्छी तरह से समझते हैं, उन्होंने सिकल सेल उन्मूलन के लिए अभियान की शुरुआत की, जिसे राज्यपाल मंगुभाई पटेल की देखरेख में प्रदेश के विभिन्न जिलों में बेहतर तरीके से संचालित किया जा रहा है। जनजातीय समुदाय के गौरवशाली अतीत को सबके सामने लाना राज्य सरकार का दायित्व है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने जनजातीय महापुरुषों राजा भभूत सिंह, राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह जैसी विभूतियों के जीवन के प्रेरक प्रसंगों को पाठ्यक्रम में स्थान दिया है। प्रदेश की भावी पीढ़ियां उनके बलिदान और जीवन के प्रेरणादायी कार्यों से परिचित होंगी। राज्य सरकार रानी दुर्गावती लोक का निर्माण करेगी, निमाड़ के जनजातीय नायक क्रांतिसूर्य टंट्या मामा के नाम पर खरगोन में विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। बुंदेलखंड के सागर में भी रानी अवंती बाई लोधी के नाम पर विश्वविद्यालय की शुरुआत की गई है। जनजातीय समुदाय के गौरवशाली अतीत को सबके सामने लाना राज्य सरकार का दायित्व है। सरकार जनजातीय महापुरुषों और बलिदानियों के जीवन पर फिल्म तैयार करने सहित सभी योजना को प्रोत्साहित कर रही है। रानी दुर्गावती की जयंती पर 52 गढ़ों के वशंजों को राज्य सरकार सम्मानित करेगी लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह सहित प्रदेश के अनेक महापुरुषों की जीवन के प्रेरणादायी प्रसंगों को पाठ्यक्रम में शामिल कर सम्मान दिया है। हमारे जनजातीय वीरों ने अंग्रेजों से क्षमा-याचना नहीं की। आज हम सभी पवित्र भूमि जबलपुर में राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह की शहादत का स्मरण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय महापुरुषों से मिली प्रेरणा और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि जबलपुर वही पुण्यभूमि है, जहां अंग्रेजों ने राजा शंकरशाह और रघुनाथ शाह को जनता के सामने तोप के मुंह से बांधकर शहीद किया था। अंग्रेजों ने उन्हें माफी मांगने का अवसर दिया, लेकिन पिता-पुत्र ने क्षमा याचना करने से इनकार कर दिया और देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान देना स्वीकार किया। मंत्री सिंह ने कहा कि राजा शंकरशाह और रघुनाथ शाह रानी दुर्गावती की वंश परंपरा से जुड़े थे। उनके बलिदान से प्रेरणा लेकर प्रत्येक नागरिक को देश और प्रदेश के विकास में अपने हिस्से का योगदान देना चाहिए। जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि जनजातीय वीरों और महापुरुषों को देश की भावी पीढ़ी याद रखे, इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी जनजातीय छात्रावासों के नाम जनजातीय महानायकों के नाम पर रखे हैं। राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह के बलिदान और जीवन पर फिल्म तैयार की गई है। अब हमारी सरकार ने पाठ्यपुस्तकों में जनजातीय महापुरुषों के योगदान को शामिल किया है। मंत्री … Read more

मुख्यमंत्री आवास पर सीएम योगी के साथ बैठक में शामिल हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव

एनसीआर की हवा को शुद्ध बनाने के लिए यूपी में बड़ा प्लान मुख्यमंत्री आवास पर सीएम योगी के साथ बैठक में शामिल हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव देश के 130 शहरों के स्वच्छता सर्वे में लखनऊ ने हासिल किया है पहला स्थान, अन्य शहरों का प्रदर्शन भी रहा अच्छा: भूपेंद्र यादव विगत वर्षों में ‘एक पेड़ मां के नाम अभियान’ के तहत लक्ष्य से अधिक पौधरोपण पर केंद्रीय मंत्री ने सीएम योगी को दी बधाई ईवी पॉलिसी के अंतर्गत इलेक्ट्रिक बसों, व्हीकल पॉल्यूशन पर हुई चर्चा, डस्ट पॉल्यूशन को लेकर बनी विस्तृत कार्ययोजना बैठक में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स और कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशिंग मैनेजमेंट रूल को लेकर की गई चर्चा लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। इसमें उत्तर प्रदेश के एनसीआर से जुड़े नोएडा, हापुड़, गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर समेत आठ जिलों में वायु प्रदूषण की रोकथाम के उपायों और कार्ययोजना की समीक्षा की गई। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि वाहन प्रदूषण के तहत पुराने वाहनों, नई ईवी नीति, इलेक्ट्रिक बसों, प्रदूषण प्रमाणपत्र की अनिवार्यता और एग्रीगेटर वाहनों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। औद्योगिक प्रदूषण की समीक्षा में करीब 80 प्रतिशत उद्योगों में ओसीईएमएस (ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली) और एयर पॉल्यूशन डिवाइस लगाए जाने की जानकारी दी गई। शेष उद्योगों में भी इन्हें लागू करने की कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बैठक में धूल प्रदूषण पर मैकेनाइज्ड और डीप क्लीनिंग की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट तथा कंस्ट्रक्शन एंड डेमोलिशन वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विभिन्न विभागों और हितधारकों के साथ कंसल्टेशन कार्यक्रम चलाने पर भी सहमति बनी है। एनसीएपी के तहत देश के 130 शहरों के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ ने प्रथम स्थान हासिल किया है। आगरा समेत प्रदेश के अन्य शहरों का प्रदर्शन भी सराहनीय रहा है। केंद्रीय मंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत लक्ष्य से अधिक पौधरोपण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई दी। उन्होंने बताया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ बैठक हुई है। अब राजस्थान और पंजाब के मुख्यमंत्रियों के साथ भी बैठक कर प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को आगे बढ़ाया जाएगा। पराली प्रबंधन को लेकर राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ केंद्रीय कृषि मंत्रालय के स्तर पर भी समन्वय किया जा रहा है। एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण को लेकर पिछले दिसंबर से अब तक 30 से अधिक बैठकें हो चुकी हैं। 63 छोटे शहरों के स्थानीय निकायों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इस अभियान को सफल बनाने में जनता के सहयोग और मीडिया की जागरूकता की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इस बैठक में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अध्यक्ष राजेश वर्मा तथा उत्तर प्रदेश के विभिन्न विभागीय उच्चाधिकारी भी मौजूद रहे।

महिलाओं की यात्रा होगी सुरक्षित और आसान, ‘सारथी दीदी’ सेवा से 24×7 होगी मॉनिटरिंग

महिलाओं की यात्रा को सुरक्षित और आसान बनाएंगी "सारथी दीदी", 24×7 मॉनिटरिंग करेगी योगी सरकार अब शहर से लेकर गांव तक चलेंगी कैब, प्रदेशभर में बड़ी सुविधा देने की तैयारी महिला ड्राइवरों को ई-रिक्शा, दोपहिया और कैब चलाने का मिलेगा विशेष प्रशिक्षण महिला सुरक्षा के लिए प्रदेश में पहली बार शुरू होने जा रही अभिनव पहल  बदल रहा उत्तर प्रदेश : सफर को लेकर आपातकालीन सुरक्षा और कंट्रोल रूम से रखी जाएगी नजर पल पल की रहेगी अपडेट, पुलिस करेगी समन्वय, सुविधा के साथ बड़े पैमाने पर महिलाओं को मिलेगा रोजगार लखनऊ  बहनों और बेटियों की यात्रा को ‘सारथी दीदी’ के जरिए अधिक सुरक्षित और सहज बनाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर महिला यात्रियों के लिए महिला चालकों की विशेष सेवा के साथ यात्रा के दौरान सुरक्षा पर 24×7 निगरानी का तंत्र विकसित किया जा रहा है। इसमें आपात स्थिति में एसओएस बटन के जरिये सहायता लेने की सुविधा होगी और जरूरत पड़ने पर पुलिस के साथ तत्काल समन्वय किया जा सकेगा। यानी सफर केवल वाहन में बैठने से लेकर गंतव्य तक पहुंचने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी यात्रा मजबूत सुरक्षा के साथ आगे बढ़ेगी। योगी सरकार इस सेवा को भारत टैक्सी मॉडल के माध्यम से शहरों से गांवों तक ले जाने की तैयारी में है। इसके लिए प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को जोड़कर ग्रामीण स्तर पर राइड-हेलिंग और डिलीवरी सेवाओं के विस्तार की योजना है।  ‘सारथी दीदी’ का एक अहम पहलू महिला ड्राइवरों को परिवहन सेवा से जोड़ना है। इसके तहत महिलाओं को ई-रिक्शा, दोपहिया और कैब चलाने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे एक ओर महिला यात्रियों को महिला चालक का विकल्प मिलेगा, वहीं दूसरी ओर ड्राइविंग को महिलाओं के लिए रोजगार के नए क्षेत्र के रूप में विकसित करने का रास्ता भी खुलेगा। हर पल सुरक्षा की निगरानी महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए आपातकालीन एसओएस बटन, 24×7 मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम और पुलिस सहायता समन्वय को व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा। यात्रा के दौरान किसी तरह की आपात स्थिति सामने आने पर सहायता तंत्र सक्रिय करने का प्रावधान होगा। भारत टैक्सी के मौजूदा महिला-केंद्रित ‘सारथी दीदी’ योजना में एसओएस, लाइव लोकेशन ट्रैकिंग और 24×7 सहायता जैसी सुरक्षा सुविधाएं रहेंगी। इस व्यवस्था का सीधा लाभ उन परिवारों को विशेष रूप से होगा, जिनकी बेटियां पढ़ाई, नौकरी या अन्य काम से नियमित रूप से अकेले यात्रा करती हैं। महिला चालक का विकल्प मिलने और आपात स्थिति में सहायता तंत्र उपलब्ध होने से यात्रा के दौरान सुरक्षा संबंधी चिंता कम करने की दिशा में व्यवस्था तैयार की जा रही है। महिलाओं के लिए ड्राइविंग से रोजगार ‘सारथी दीदी’ को केवल महिला यात्रियों की सुविधा से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है। इसका दूसरा पक्ष महिलाओं को चालक के रूप में तैयार करना है। ई-रिक्शा, टू-व्हीलर और कैब चलाने के प्रशिक्षण से महिलाओं को बड़े पैमाने पर परिवहन क्षेत्र में आर्थिक गतिविधि से जोड़ा जा रहा है। इस मॉडल में महिला केवल यात्री नहीं होगी, बल्कि सेवा देने वाली चालक भी बन सकेगी। यानी एक तरफ सुरक्षित यात्रा का विकल्प और दूसरी तरफ महिलाओं के लिए आय का अवसर, दोनों पहलू एक साथ जुड़ते हैं। सहकारी नेटवर्क के जरिए शहर से गांव तक पहुंचेगी कैब योगी सरकार भारत टैक्सी मॉडल को शहरों तक सीमित रखने के बजाय गांवों तक ले जाने की तैयारी में है। इसके लिए प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को जोड़कर ग्रामीण स्तर पर राइड-हेलिंग और डिलीवरी सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन की उपलब्धता स्थानीय स्तर पर बढ़ेगी। गांव से बाजार, अस्पताल, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन या नजदीकी शहर तक आने-जाने के लिए डिजिटल माध्यम से वाहन सेवा उपलब्ध कराने की दिशा में सहकारी नेटवर्क का इस्तेमाल होगा। पैक्स से मोबिलिटी तक सहकारिता का विस्तार प्राथमिक कृषि ऋण समिति (पैक्स) का इस्तेमाल अब तक मुख्य रूप से ग्रामीण ऋण और कृषि से जुड़ी गतिविधियों में होता रहा है। इन्हें राइड-हेलिंग और डिलीवरी सेवाओं से जोड़कर सहकारिता का यह नेटवर्क ग्रामीण मोबिलिटी और डिजिटल सेवाओं तक विस्तार पा सकता है। इसका मतलब यह होगा कि गांव में मौजूद सहकारी ढांचा केवल कृषि जरूरतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्थानीय परिवहन और डिलीवरी जैसी सेवाओं के लिए भी आधार बनेगा। महिला सुरक्षा, डिजिटल परिवहन और ग्रामीण कनेक्टिविटी को एक साथ जोड़ने की कोशिश ‘सारथी दीदी’ के जरिए महिला यात्री और महिला चालक, दोनों को केंद्र में रखा गया है। महिला यात्रियों के लिए महिला चालक की सुविधा, एसओएस और निगरानी तंत्र सुरक्षा को मजबूत करते हैं, जबकि प्रशिक्षण से महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का रास्ता तैयार होगा। इस तरह प्रस्तावित मॉडल का दायरा केवल कैब सेवा बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसमें महिला सुरक्षा, महिला रोजगार, डिजिटल परिवहन और ग्रामीण कनेक्टिविटी को एक साथ जोड़ने की कोशिश है। शहरों से गांवों तक भारत टैक्सी मॉडल के विस्तार के साथ यह नेटवर्क शहर से लेकर ग्रामीण परिवहन तक के नए विकल्प के रूप में विकसित किए जाने की तैयारी है।

पीएमएफएमई योजना से सुजय सिंह ने साकार किया आत्मनिर्भरता का सपना

अनूपपुर  सकारात्मक सोच, दृढ़ संकल्प और शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर व्यक्ति अपने सपनों को नई दिशा दे सकता है। अनूपपुर नगर के  सुजय सिंह ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना का लाभ लेकर अपने आटा चक्की इकाई व्यवसाय का सपना साकार किया है। आज वे स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ ही अन्य लोगों को रोजगार प्रदान कर रहे हैं।  सुजय सिंह की इच्छा थी कि वे स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें। उनका सपना आटा मिल स्थापित करने का था, लेकिन आर्थिक संसाधनों के अभाव में वे इस दिशा में आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग की पीएमएफएमई योजना की जानकारी मिली। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से संपर्क कर योजना के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण कर आटा चक्की मिल इकाई की स्थापना की। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत  सिंह को 6.86 लाख रुपये की परियोजना लागत वाली आटा चक्की मिल इकाई के लिए सहायता प्राप्त हुई, जिसमें 2.50 लाख रुपये की अनुदान राशि शामिल है। उन्होंने अगस्त 2025 में अपनी इकाई का संचालन प्रारंभ किया। व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासों का परिणाम रहा कि सितंबर 2026 तक उन्हें इकाई से प्रतिमाह लगभग 60 से 70 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त होने लगी।  सिंह ने अपनी इकाई में चार लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराया है। इस तरह वे अब स्वयं रोजगार प्राप्त करने वाले व्यक्ति से आगे बढ़कर दूसरों को रोजगार देने वाले उद्यमी बन गए हैं। उनके द्वारा ‘उर्मिका फूड’ नाम से अपने व्यवसाय का संचालन किया जा रहा है।  सुजय सिंह बताते हैं कि शासकीय योजनाएं आमजन को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनके अनुसार, यदि व्यक्ति को सही समय पर शासकीय योजना का सहयोग मिले और वह सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े, तो अपने सपनों को साकार किया जा सकता है। उन्होंने पीएमएफएमई योजना के माध्यम से स्वरोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने अन्य युवाओं एवं इच्छुक नागरिकों से अपील की कि वे शासकीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर पात्रतानुसार उनका लाभ उठाएं और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाएं।  सुजय सिंह की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से स्वरोजगार को बढ़ावा मिलने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं।

टाटानगर रेलवे स्टेशन को बड़ी सौगात, ₹383.78 करोड़ के वंदे भारत डिपो को मिली अंतिम मंजूरी

 जमशेदपुर लौहनगरी के टाटानगर रेलवे स्टेशन को देश के प्रमुख हाई-स्पीड रेल हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। रेलवे बोर्ड ने टाटानगर में 383.78 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक 'वंदे भारत कोच मेंटेनेंस डिपो' के निर्माण को अंतिम स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस संबंध में रेलवे बोर्ड के प्रोजेक्ट एंड डेवलपमेंट निदेशक सुमित कुमार ने आधिकारिक मंजूरी पत्र सांसद को प्रेषित कर दिया गया है। संसद सत्र के दौरान चार बार की थी रेल मंत्री से मुलाकात टाटानगर में वंदे भारत कोच डिपो की स्थापना के लिए सांसद बिद्युत बरण महतो लंबे समय से प्रयासरत थे। हाल ही में संपन्न संसद सत्र के दौरान उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, रेलवे बोर्ड के निदेशकों और वरीय अधिकारियों से लगभग चार बार मुलाकात कर इस मेगा प्रोजेक्ट की स्वीकृति का पुरजोर आग्रह किया था। दक्षिण पूर्व रेलवे (चक्रधरपुर मंडल) द्वारा भेजे गए तकनीकी प्रस्ताव की समीक्षा के बाद बोर्ड ने परियोजना पर अंतिम मुहर लगा दी। लोको कॉलोनी में बनेगा अत्याधुनिक हाईटेक यार्ड स्वीकृत योजना के तहत टाटानगर के पुराने कोचिंग डिपो का विस्तार करते हुए लोको कॉलोनी क्षेत्र में नया मेंटेनेंस यार्ड तैयार किया जाएगा। यह डिपो सेमी-हाई-स्पीड वंदे भारत चेयरकार व स्लीपर ट्रेनों के तकनीकी परीक्षण, नियमित रखरखाव और त्वरित वॉशिंग के लिए विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होगा। वर्तमान में टाटानगर से पटना और ब्रह्मपुर के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस संचालित हो रही है। आधुनिक मेंटेनेंस डिपो बनने से टाटानगर से नई दिल्ली, मुंबई, जयपुर और बेंगलुरु जैसे महत्वपूर्ण शहरों के लिए नई वंदे भारत ट्रेनों के परिचालन की बाधा पूरी तरह दूर हो जाएगी चार नए प्लेटफॉर्म और रोजगार के नए अवसर सांसद महतो ने बताया कि डिपो के साथ-साथ उन्होंने टाटानगर स्टेशन पर दबाव कम करने के लिए गति शक्ति योजना के तहत 482 करोड़ रुपये की लागत से चार अतिरिक्त रेलवे प्लेटफॉर्म और लूप लाइनों के निर्माण का प्रस्ताव भी रेलवे बोर्ड के समक्ष रखा है। योजना की स्वीकृति पर सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक और चक्रधरपुर मंडल के डीआरएम का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से चक्रधरपुर रेल मंडल में औद्योगिक व तकनीकी विकास को नई गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के बड़े अवसर सृजित होंगे।

दिल्ली से बिहार के लिए स्पेशल ट्रेनों का ऐलान, दरभंगा-भागलपुर-जोगबनी रूट पर मिलेगी सुविधा

लखनऊ दिवाली, छठ समेत अन्य त्योहारों पर भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे ने देश की राजधानी दिल्ली से बिहार के अलग-अलग शहरों के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने का ऐलान कर दिया है। नई दिल्ली से दरभंगा, आनंद विहार से जोगबनी (अररिया) के बीच फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। इसके अलावा, नई दिल्ली से दानापुर (पटना) के बीच चलने वाली स्पेशल ट्रेन के फेरे भी बढ़ा दिए गए हैं। साथ ही, आनंद विहार से भागलपुर के बीच भी रोजाना स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा की गई है। नई दिल्ली-दरभंगा स्पेशल नवंबर में रोजाना चलेगी जानकारी के अनुसार, नई दिल्ली और दरभंगा के बीच 10 नवंबर से रोजाना फेस्टिवल स्पेशल एक्सप्रेस चलाने का फैसला लिया गया है। ट्रेन नंबर 04098/04097 पूरी तरह आरक्षित होगी। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से यह ट्रेन सुबह 9.30 बजे खुलेगी और गाजियाबाद, गोरखपुर, नरकटियागंज, मोतिहारी होते हुए मुजफ्फरपुर सुबह 9 बजकर 5 मिनट पर पहुंचेगी। इसके बाद यहां से दरभंगा आएगी। वापसी में भी यही रूट रहेगा। आनंद विहार से जोगबनी के लिए स्पेशल ट्रेन दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल से जोगबनी (अररिया) के बीच विशेष ट्रेन चलाई जाएगी। ट्रेन नंबर 04008 आनंद विहार टर्मिनल से 10 अक्टूबर से 7 नवंबर तक हर शनिवार को खुलेगी। वहीं, गाड़ी संख्या 04007 जोगबनी स्टेशन से 11 अक्टूबर से 8 नवंबर तक हर रविवार को चलेगी। नई दिल्ली-दानापुर स्पेशल के आठ फेरे बढ़ाए गए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के नई दिल्ली स्टेशन से पटना के दानापुर स्टेशन के बीच चलने वाली सुपरफास्ट साप्ताहिक ट्रेन की अवधि का विस्तार कर दिया गया है। ट्रेन नंबर 04090 और 04089 नई दिल्ली और दानापुर के बीच 2 अक्टूबर से 21 अक्टूबर के बीच 8 ट्रिप करेगी। त्योहार पर पटना और आसपास के इलाकों में दिल्ली एनसीआर से आने वाले यात्रियों को इसकी सुविधा मिलेगी। आनंद विहार से भागलपुर स्पेशल ट्रेन 10 से रोजाना चलेगी दिल्ली के आनंद विहार से बिहार के भागलपुर से अगले महीने एक स्पेशल ट्रेन चलाएगी। इसकी शुरुआत 10 अक्टूबर से होगी और 26 नवंबर तक दोनों दिशाओं में 47-47 फेरे लगाएगी। इस ट्रेन का संचालन रोजाना किया जाएगा। दिल्ली-एनसीआर से त्योहार पर पूर्वी बिहार आने वाले लोगों को इससे सुविधा होगी। आनंद विहार-भागलपुर स्पेशल ट्रेन (04062/04061) गया, किऊल और जमालपुर के रास्ते होकर चलाई जाएगी। नई दिल्ली-हावड़ा स्पेशल नई दिल्ली से हावड़ा (पश्चिम बंगाल) के बीच स्पेशल ट्रेन (04052/04051) 2 अक्टूबर से 29 नवंबर के बीच चलाई जाएगी। यह साप्ताहिक ट्रेन होगी। नई दिल्ली से हर शुक्रवार और हावड़ा से हर शनिवार को खुलेगी। दोनों तरफ से यह कुल 9 फेरे करेगी।

अलवर की बिजली व्यवस्था बदलेगी, 80 नए सोलर प्लांट पूरे होने पर बढ़ेगा उत्पादन

अलवर  बिजली के लिए अब अलवर की नजर आसमान पर है। सूरज की किरणें आने वाले समय में जिले की बिजली व्यवस्था की नई ताकत बनने जा रही हैं। सौर ऊर्जा का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और निर्माणाधीन परियोजनाएं पूरी होने के बाद अलवर में 250 मेगावाट तक सौर बिजली उत्पादन होने की उम्मीद है। यह उत्पादन क्षमता सूरतगढ़ थर्मल पावर की एक इकाई के बराबर होगी। बता दें कि अभी जिले में सोलर प्लांटों से करीब 67 मेगावाट और रूफटॉप सोलर से करीब 29 मेगावाट बिजली मिल रही है। कुल 36 सोलर प्लांट चालू हैं, जबकि करीब 80 प्लांटों में काम जारी है। इनके पूरा होने के साथ सौर ऊर्जा का दायरा तेजी से बढ़ेगा और अलवर की बिजली व्यवस्था में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी मजबूत होगी। जमीन से छत तक बन रहे बिजली घर अलवर में सौर ऊर्जा का विस्तार अब सिर्फ बड़े प्लांटों तक सीमित नहीं है। खेतों और खाली जमीनों पर सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ घरों और संस्थानों की छतें भी छोटे बिजलीघरों में बदल रही हैं। जिले में अब तक करीब 6 हजार रूफटॉप सोलर लगाए जा चुके हैं। दिसंबर तक इनकी संख्या बढ़ाकर 13 हजार करने का लक्ष्य है। इससे उपभोक्ता दिन में अपनी जरूरत की बिजली का एक हिस्सा खुद पैदा कर सकेंगे। रूफटॉप सोलर का बढ़ता नेटवर्क बिजली व्यवस्था को विकेंद्रीकृत करने में भी मदद करेगा। दिन में सूरज संभालेगा बिजली का भार सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ने के साथ बिजली आपूर्ति का तरीका भी बदलने की तैयारी है। दिन में सूरज की रोशनी के साथ सौर बिजली का उत्पादन बढ़ेगा और इसी दौरान इसका अधिकतम उपयोग किया जाएगा। इससे दिन के समय बिजली की मांग का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा करने में मदद मिलेगी। सूरज ढलने के बाद सौर उत्पादन घटेगा, तो बिजली की जरूरत दूसरे स्रोतों से पूरी करनी होगी। इस तरह आने वाले समय में अलवर की बिजली व्यवस्था में दिन का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा के भरोसे हो सकता है। सोलर प्लांटों के प्रमुख फायदे     बिजली उत्पादन की लागत कम करने में मदद मिलती है।     ईंधन की जरूरत नहीं होती, इसलिए कोयला, डीजल या गैस पर निर्भरता घटती है।     प्रदूषण कम होता है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।     नवीकरणीय ऊर्जा होने से लंबे समय तक बिजली उत्पादन किया जा सकता है।     दिन के समय बिजली की मांग का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा किया जा सकता है।     बिजली व्यवस्था पर दबाव कम होता है और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दी जा सकती है।     बिजली आयात/खरीद पर निर्भरता घटाने में मदद मिलती है।     बड़े प्लांटों के साथ रूफटॉप सोलर से स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन बढ़ता है।     बिजली बिल में बचत की संभावना रहती है, खासकर रूफटॉप सोलर में।     सौर परियोजनाओं से निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।     खाली या कम उपयोग वाली जमीन पर बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन किया जा सकता है।     ऊर्जा के स्रोतों में विविधता आने से बिजली व्यवस्था अधिक मजबूत होती है। सोलर प्लांटों के प्रमुख नुकसान     शुरुआती निवेश अधिक होता है। जमीन, सोलर पैनल, इन्वर्टर और अन्य उपकरणों पर बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है।     बड़े क्षेत्रफल की जरूरत होती है। बड़े सोलर प्लांट के लिए काफी जमीन चाहिए, जिससे कृषि या अन्य उपयोग वाली जमीन पर दबाव पड़ सकता है।     मौसम पर निर्भरता रहती है। बादल, बारिश और धूल के कारण बिजली उत्पादन घट जाता है।     रात में उत्पादन नहीं होता, इसलिए रात की बिजली के लिए अन्य स्रोतों या ऊर्जा भंडारण की जरूरत रहती है।     बैटरी भंडारण महंगा है। सौर बिजली को बड़े स्तर पर संगृहीत करने के लिए बैटरी की लागत बढ़ जाती है।     पैनलों की सफाई जरूरी है। धूल और मिट्टी जमने से पैनलों की क्षमता कम हो सकती है, खासकर राजस्थान जैसे धूल वाले क्षेत्रों में।     रखरखाव की लागत रहती है। पैनल, इन्वर्टर, तार और अन्य उपकरणों की समय-समय पर देखरेख करनी पड़ती है।     पुराने सोलर पैनलों का निस्तारण चुनौती बन सकता है। बड़ी संख्या में पैनल खराब या पुराने होने पर इनके पुनर्चक्रण की व्यवस्था जरूरी होती है।     प्राकृतिक आवास पर असर पड़ सकता है, यदि बड़े प्लांट संवेदनशील या जैव विविधता वाले क्षेत्रों में लगाए जाएं।     बिजली ग्रिड पर दबाव पड़ सकता है। उत्पादन अचानक बढ़ने-घटने पर ग्रिड को संतुलित रखने के लिए बेहतर व्यवस्था जरूरी होती है। अलवर में सोलर प्लांटों से सभी लोगों को फायदा होगा। किसानों को दिन में बिजली मिलेगी। दिसंबर तक अधिकतर सोलर चालू हो जाएंगे। -जेपी बैरवा, एसई, बिजली निगम, अलवर  

खपरगंज में गणेशोत्सव प्रेम सद्भाव की मिसाल,57 वर्षों से चली आ रही शानदार परंपरा

बिलासपुर   खपरगंज गणेश उत्सव समिति का यह गणेश पंडाल खपरगंज चौक का है जहां की फिज़ा में कुछ दिन पहले नफरत का ज़हर  फैलाने की कोशिश की गई थी। पर यह अपना शहर है जहां प्रेम की अरपा धारा बहती है । खपरगंज के लोगों ने अपने चौक में पिछले 57 वर्षों से चली आ रही परंपरा बनाए रखी और पूरे जोश और एकता के साथ गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की गई । हर साल की तरह उस चौक के पूरे हिंदू, मुस्लिम और सभी समाज के भाई बहनों ने मिलकर त्यौहार की गरिमा और सौहार्द बनाए रखा । आज गणेश पंडाल के इस मंच पर नन्हे नन्हे बच्चों की प्रस्तुति हुई। रंग बिरंगी वेशभूषा में पहचान में नहीं आ रहा है कि कौन बच्चा हिंदू परिवार का है और कौन बच्चा मुस्लिम परिवार का है । यह है हमारी मजबूत एकता की मिसाल । वह एकता जो हमारे बुजुर्गों ने हमारे संस्कार में दी है । इस मंच से ही पैगाम सब तरफ पहुंच गया है कि कोई कितनी भी कोशिश कर ले हमारे लहू का रंग लाल है लाल ही रहेगा हमारे अंदर किसी के उकसाने से किसी के बहकाने से नफरत नहीं आ सकती।हमारे त्यौहार एक है।हमारा साथ एक है ।हमारे पड़ोसी एक है, हमारा शहर एक है ,हमारा देश एक है । सभी दुआ करिए , प्रार्थना करिए कि पूरे देश में हमारे शहर में हमारे मोहल्ले में हमारा आपस का प्यार हमारी एकता हमेशा बनी रहे ।इसे किसी की बुरी नजर ना लगे और जो लोग भटके हुए हैं उन्हें सही राह दिखे वह भी प्यार के साथ आपस में एक दूसरे से मिलकर रहे । जय हिंद ।