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पीएमएफएमई योजना से सुजय सिंह ने साकार किया आत्मनिर्भरता का सपना

अनूपपुर  सकारात्मक सोच, दृढ़ संकल्प और शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर व्यक्ति अपने सपनों को नई दिशा दे सकता है। अनूपपुर नगर के  सुजय सिंह ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना का लाभ लेकर अपने आटा चक्की इकाई व्यवसाय का सपना साकार किया है। आज वे स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ ही अन्य लोगों को रोजगार प्रदान कर रहे हैं।  सुजय सिंह की इच्छा थी कि वे स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें। उनका सपना आटा मिल स्थापित करने का था, लेकिन आर्थिक संसाधनों के अभाव में वे इस दिशा में आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग की पीएमएफएमई योजना की जानकारी मिली। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से संपर्क कर योजना के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण कर आटा चक्की मिल इकाई की स्थापना की। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत  सिंह को 6.86 लाख रुपये की परियोजना लागत वाली आटा चक्की मिल इकाई के लिए सहायता प्राप्त हुई, जिसमें 2.50 लाख रुपये की अनुदान राशि शामिल है। उन्होंने अगस्त 2025 में अपनी इकाई का संचालन प्रारंभ किया। व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासों का परिणाम रहा कि सितंबर 2026 तक उन्हें इकाई से प्रतिमाह लगभग 60 से 70 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त होने लगी।  सिंह ने अपनी इकाई में चार लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराया है। इस तरह वे अब स्वयं रोजगार प्राप्त करने वाले व्यक्ति से आगे बढ़कर दूसरों को रोजगार देने वाले उद्यमी बन गए हैं। उनके द्वारा ‘उर्मिका फूड’ नाम से अपने व्यवसाय का संचालन किया जा रहा है।  सुजय सिंह बताते हैं कि शासकीय योजनाएं आमजन को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनके अनुसार, यदि व्यक्ति को सही समय पर शासकीय योजना का सहयोग मिले और वह सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े, तो अपने सपनों को साकार किया जा सकता है। उन्होंने पीएमएफएमई योजना के माध्यम से स्वरोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने अन्य युवाओं एवं इच्छुक नागरिकों से अपील की कि वे शासकीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर पात्रतानुसार उनका लाभ उठाएं और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाएं।  सुजय सिंह की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से स्वरोजगार को बढ़ावा मिलने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं।

टाटानगर रेलवे स्टेशन को बड़ी सौगात, ₹383.78 करोड़ के वंदे भारत डिपो को मिली अंतिम मंजूरी

 जमशेदपुर लौहनगरी के टाटानगर रेलवे स्टेशन को देश के प्रमुख हाई-स्पीड रेल हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। रेलवे बोर्ड ने टाटानगर में 383.78 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक 'वंदे भारत कोच मेंटेनेंस डिपो' के निर्माण को अंतिम स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस संबंध में रेलवे बोर्ड के प्रोजेक्ट एंड डेवलपमेंट निदेशक सुमित कुमार ने आधिकारिक मंजूरी पत्र सांसद को प्रेषित कर दिया गया है। संसद सत्र के दौरान चार बार की थी रेल मंत्री से मुलाकात टाटानगर में वंदे भारत कोच डिपो की स्थापना के लिए सांसद बिद्युत बरण महतो लंबे समय से प्रयासरत थे। हाल ही में संपन्न संसद सत्र के दौरान उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, रेलवे बोर्ड के निदेशकों और वरीय अधिकारियों से लगभग चार बार मुलाकात कर इस मेगा प्रोजेक्ट की स्वीकृति का पुरजोर आग्रह किया था। दक्षिण पूर्व रेलवे (चक्रधरपुर मंडल) द्वारा भेजे गए तकनीकी प्रस्ताव की समीक्षा के बाद बोर्ड ने परियोजना पर अंतिम मुहर लगा दी। लोको कॉलोनी में बनेगा अत्याधुनिक हाईटेक यार्ड स्वीकृत योजना के तहत टाटानगर के पुराने कोचिंग डिपो का विस्तार करते हुए लोको कॉलोनी क्षेत्र में नया मेंटेनेंस यार्ड तैयार किया जाएगा। यह डिपो सेमी-हाई-स्पीड वंदे भारत चेयरकार व स्लीपर ट्रेनों के तकनीकी परीक्षण, नियमित रखरखाव और त्वरित वॉशिंग के लिए विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होगा। वर्तमान में टाटानगर से पटना और ब्रह्मपुर के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस संचालित हो रही है। आधुनिक मेंटेनेंस डिपो बनने से टाटानगर से नई दिल्ली, मुंबई, जयपुर और बेंगलुरु जैसे महत्वपूर्ण शहरों के लिए नई वंदे भारत ट्रेनों के परिचालन की बाधा पूरी तरह दूर हो जाएगी चार नए प्लेटफॉर्म और रोजगार के नए अवसर सांसद महतो ने बताया कि डिपो के साथ-साथ उन्होंने टाटानगर स्टेशन पर दबाव कम करने के लिए गति शक्ति योजना के तहत 482 करोड़ रुपये की लागत से चार अतिरिक्त रेलवे प्लेटफॉर्म और लूप लाइनों के निर्माण का प्रस्ताव भी रेलवे बोर्ड के समक्ष रखा है। योजना की स्वीकृति पर सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक और चक्रधरपुर मंडल के डीआरएम का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से चक्रधरपुर रेल मंडल में औद्योगिक व तकनीकी विकास को नई गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के बड़े अवसर सृजित होंगे।

दिल्ली से बिहार के लिए स्पेशल ट्रेनों का ऐलान, दरभंगा-भागलपुर-जोगबनी रूट पर मिलेगी सुविधा

लखनऊ दिवाली, छठ समेत अन्य त्योहारों पर भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे ने देश की राजधानी दिल्ली से बिहार के अलग-अलग शहरों के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने का ऐलान कर दिया है। नई दिल्ली से दरभंगा, आनंद विहार से जोगबनी (अररिया) के बीच फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। इसके अलावा, नई दिल्ली से दानापुर (पटना) के बीच चलने वाली स्पेशल ट्रेन के फेरे भी बढ़ा दिए गए हैं। साथ ही, आनंद विहार से भागलपुर के बीच भी रोजाना स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा की गई है। नई दिल्ली-दरभंगा स्पेशल नवंबर में रोजाना चलेगी जानकारी के अनुसार, नई दिल्ली और दरभंगा के बीच 10 नवंबर से रोजाना फेस्टिवल स्पेशल एक्सप्रेस चलाने का फैसला लिया गया है। ट्रेन नंबर 04098/04097 पूरी तरह आरक्षित होगी। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से यह ट्रेन सुबह 9.30 बजे खुलेगी और गाजियाबाद, गोरखपुर, नरकटियागंज, मोतिहारी होते हुए मुजफ्फरपुर सुबह 9 बजकर 5 मिनट पर पहुंचेगी। इसके बाद यहां से दरभंगा आएगी। वापसी में भी यही रूट रहेगा। आनंद विहार से जोगबनी के लिए स्पेशल ट्रेन दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल से जोगबनी (अररिया) के बीच विशेष ट्रेन चलाई जाएगी। ट्रेन नंबर 04008 आनंद विहार टर्मिनल से 10 अक्टूबर से 7 नवंबर तक हर शनिवार को खुलेगी। वहीं, गाड़ी संख्या 04007 जोगबनी स्टेशन से 11 अक्टूबर से 8 नवंबर तक हर रविवार को चलेगी। नई दिल्ली-दानापुर स्पेशल के आठ फेरे बढ़ाए गए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के नई दिल्ली स्टेशन से पटना के दानापुर स्टेशन के बीच चलने वाली सुपरफास्ट साप्ताहिक ट्रेन की अवधि का विस्तार कर दिया गया है। ट्रेन नंबर 04090 और 04089 नई दिल्ली और दानापुर के बीच 2 अक्टूबर से 21 अक्टूबर के बीच 8 ट्रिप करेगी। त्योहार पर पटना और आसपास के इलाकों में दिल्ली एनसीआर से आने वाले यात्रियों को इसकी सुविधा मिलेगी। आनंद विहार से भागलपुर स्पेशल ट्रेन 10 से रोजाना चलेगी दिल्ली के आनंद विहार से बिहार के भागलपुर से अगले महीने एक स्पेशल ट्रेन चलाएगी। इसकी शुरुआत 10 अक्टूबर से होगी और 26 नवंबर तक दोनों दिशाओं में 47-47 फेरे लगाएगी। इस ट्रेन का संचालन रोजाना किया जाएगा। दिल्ली-एनसीआर से त्योहार पर पूर्वी बिहार आने वाले लोगों को इससे सुविधा होगी। आनंद विहार-भागलपुर स्पेशल ट्रेन (04062/04061) गया, किऊल और जमालपुर के रास्ते होकर चलाई जाएगी। नई दिल्ली-हावड़ा स्पेशल नई दिल्ली से हावड़ा (पश्चिम बंगाल) के बीच स्पेशल ट्रेन (04052/04051) 2 अक्टूबर से 29 नवंबर के बीच चलाई जाएगी। यह साप्ताहिक ट्रेन होगी। नई दिल्ली से हर शुक्रवार और हावड़ा से हर शनिवार को खुलेगी। दोनों तरफ से यह कुल 9 फेरे करेगी।

अलवर की बिजली व्यवस्था बदलेगी, 80 नए सोलर प्लांट पूरे होने पर बढ़ेगा उत्पादन

अलवर  बिजली के लिए अब अलवर की नजर आसमान पर है। सूरज की किरणें आने वाले समय में जिले की बिजली व्यवस्था की नई ताकत बनने जा रही हैं। सौर ऊर्जा का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और निर्माणाधीन परियोजनाएं पूरी होने के बाद अलवर में 250 मेगावाट तक सौर बिजली उत्पादन होने की उम्मीद है। यह उत्पादन क्षमता सूरतगढ़ थर्मल पावर की एक इकाई के बराबर होगी। बता दें कि अभी जिले में सोलर प्लांटों से करीब 67 मेगावाट और रूफटॉप सोलर से करीब 29 मेगावाट बिजली मिल रही है। कुल 36 सोलर प्लांट चालू हैं, जबकि करीब 80 प्लांटों में काम जारी है। इनके पूरा होने के साथ सौर ऊर्जा का दायरा तेजी से बढ़ेगा और अलवर की बिजली व्यवस्था में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी मजबूत होगी। जमीन से छत तक बन रहे बिजली घर अलवर में सौर ऊर्जा का विस्तार अब सिर्फ बड़े प्लांटों तक सीमित नहीं है। खेतों और खाली जमीनों पर सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ घरों और संस्थानों की छतें भी छोटे बिजलीघरों में बदल रही हैं। जिले में अब तक करीब 6 हजार रूफटॉप सोलर लगाए जा चुके हैं। दिसंबर तक इनकी संख्या बढ़ाकर 13 हजार करने का लक्ष्य है। इससे उपभोक्ता दिन में अपनी जरूरत की बिजली का एक हिस्सा खुद पैदा कर सकेंगे। रूफटॉप सोलर का बढ़ता नेटवर्क बिजली व्यवस्था को विकेंद्रीकृत करने में भी मदद करेगा। दिन में सूरज संभालेगा बिजली का भार सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ने के साथ बिजली आपूर्ति का तरीका भी बदलने की तैयारी है। दिन में सूरज की रोशनी के साथ सौर बिजली का उत्पादन बढ़ेगा और इसी दौरान इसका अधिकतम उपयोग किया जाएगा। इससे दिन के समय बिजली की मांग का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा करने में मदद मिलेगी। सूरज ढलने के बाद सौर उत्पादन घटेगा, तो बिजली की जरूरत दूसरे स्रोतों से पूरी करनी होगी। इस तरह आने वाले समय में अलवर की बिजली व्यवस्था में दिन का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा के भरोसे हो सकता है। सोलर प्लांटों के प्रमुख फायदे     बिजली उत्पादन की लागत कम करने में मदद मिलती है।     ईंधन की जरूरत नहीं होती, इसलिए कोयला, डीजल या गैस पर निर्भरता घटती है।     प्रदूषण कम होता है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।     नवीकरणीय ऊर्जा होने से लंबे समय तक बिजली उत्पादन किया जा सकता है।     दिन के समय बिजली की मांग का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा किया जा सकता है।     बिजली व्यवस्था पर दबाव कम होता है और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दी जा सकती है।     बिजली आयात/खरीद पर निर्भरता घटाने में मदद मिलती है।     बड़े प्लांटों के साथ रूफटॉप सोलर से स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन बढ़ता है।     बिजली बिल में बचत की संभावना रहती है, खासकर रूफटॉप सोलर में।     सौर परियोजनाओं से निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।     खाली या कम उपयोग वाली जमीन पर बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन किया जा सकता है।     ऊर्जा के स्रोतों में विविधता आने से बिजली व्यवस्था अधिक मजबूत होती है। सोलर प्लांटों के प्रमुख नुकसान     शुरुआती निवेश अधिक होता है। जमीन, सोलर पैनल, इन्वर्टर और अन्य उपकरणों पर बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है।     बड़े क्षेत्रफल की जरूरत होती है। बड़े सोलर प्लांट के लिए काफी जमीन चाहिए, जिससे कृषि या अन्य उपयोग वाली जमीन पर दबाव पड़ सकता है।     मौसम पर निर्भरता रहती है। बादल, बारिश और धूल के कारण बिजली उत्पादन घट जाता है।     रात में उत्पादन नहीं होता, इसलिए रात की बिजली के लिए अन्य स्रोतों या ऊर्जा भंडारण की जरूरत रहती है।     बैटरी भंडारण महंगा है। सौर बिजली को बड़े स्तर पर संगृहीत करने के लिए बैटरी की लागत बढ़ जाती है।     पैनलों की सफाई जरूरी है। धूल और मिट्टी जमने से पैनलों की क्षमता कम हो सकती है, खासकर राजस्थान जैसे धूल वाले क्षेत्रों में।     रखरखाव की लागत रहती है। पैनल, इन्वर्टर, तार और अन्य उपकरणों की समय-समय पर देखरेख करनी पड़ती है।     पुराने सोलर पैनलों का निस्तारण चुनौती बन सकता है। बड़ी संख्या में पैनल खराब या पुराने होने पर इनके पुनर्चक्रण की व्यवस्था जरूरी होती है।     प्राकृतिक आवास पर असर पड़ सकता है, यदि बड़े प्लांट संवेदनशील या जैव विविधता वाले क्षेत्रों में लगाए जाएं।     बिजली ग्रिड पर दबाव पड़ सकता है। उत्पादन अचानक बढ़ने-घटने पर ग्रिड को संतुलित रखने के लिए बेहतर व्यवस्था जरूरी होती है। अलवर में सोलर प्लांटों से सभी लोगों को फायदा होगा। किसानों को दिन में बिजली मिलेगी। दिसंबर तक अधिकतर सोलर चालू हो जाएंगे। -जेपी बैरवा, एसई, बिजली निगम, अलवर  

खपरगंज में गणेशोत्सव प्रेम सद्भाव की मिसाल,57 वर्षों से चली आ रही शानदार परंपरा

बिलासपुर   खपरगंज गणेश उत्सव समिति का यह गणेश पंडाल खपरगंज चौक का है जहां की फिज़ा में कुछ दिन पहले नफरत का ज़हर  फैलाने की कोशिश की गई थी। पर यह अपना शहर है जहां प्रेम की अरपा धारा बहती है । खपरगंज के लोगों ने अपने चौक में पिछले 57 वर्षों से चली आ रही परंपरा बनाए रखी और पूरे जोश और एकता के साथ गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की गई । हर साल की तरह उस चौक के पूरे हिंदू, मुस्लिम और सभी समाज के भाई बहनों ने मिलकर त्यौहार की गरिमा और सौहार्द बनाए रखा । आज गणेश पंडाल के इस मंच पर नन्हे नन्हे बच्चों की प्रस्तुति हुई। रंग बिरंगी वेशभूषा में पहचान में नहीं आ रहा है कि कौन बच्चा हिंदू परिवार का है और कौन बच्चा मुस्लिम परिवार का है । यह है हमारी मजबूत एकता की मिसाल । वह एकता जो हमारे बुजुर्गों ने हमारे संस्कार में दी है । इस मंच से ही पैगाम सब तरफ पहुंच गया है कि कोई कितनी भी कोशिश कर ले हमारे लहू का रंग लाल है लाल ही रहेगा हमारे अंदर किसी के उकसाने से किसी के बहकाने से नफरत नहीं आ सकती।हमारे त्यौहार एक है।हमारा साथ एक है ।हमारे पड़ोसी एक है, हमारा शहर एक है ,हमारा देश एक है । सभी दुआ करिए , प्रार्थना करिए कि पूरे देश में हमारे शहर में हमारे मोहल्ले में हमारा आपस का प्यार हमारी एकता हमेशा बनी रहे ।इसे किसी की बुरी नजर ना लगे और जो लोग भटके हुए हैं उन्हें सही राह दिखे वह भी प्यार के साथ आपस में एक दूसरे से मिलकर रहे । जय हिंद ।

योगी सरकार की मुफ्त कोचिंग का कमाल, UPPSC-2025 में 74 अभ्यर्थियों ने हासिल की सफलता

योगी सरकार की मुफ्त कोचिंग ने गढ़ी सफलता की नई कहानी, यूपीपीएससी-2025 में 74 अभ्यर्थी सफल तीन विभागीय कोचिंग केंद्रों के अभ्यर्थियों ने मुख्य परीक्षा में लहराया परचम भागीदारी भवन के 35, अलीगंज के 18 और हापुड़ के 21 अभ्यर्थी हुए सफल 6 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले पात्र छात्रों को आवासीय कोचिंग के साथ कई सुविधाएं मुख्य परीक्षा के बाद इंटरव्यू की तैयारी के लिए भी समाज कल्याण विभाग कराएगा मॉक इंटरव्यू मंत्री असीम अरुण ने सफल अभ्यर्थियों को दीं शुभकामनाएं लखनऊ  आर्थिक संसाधनों की कमी प्रतिभाशाली युवाओं की राह में बाधा न बने, इसके लिए योगी सरकार की ओर से संचालित निःशुल्क प्रशिक्षण व्यवस्था प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ा सहारा बन रही है। समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्रों और भागीदारी भवन स्थित कोचिंग से निःशुल्क प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्राप्त करने वाले 74 अभ्यर्थियों ने यूपीपीएससी-2025 की मुख्य परीक्षा में सफलता हासिल की है। मुख्य परीक्षा में सफल सभी अभ्यर्थी अब चयन प्रक्रिया के अगले चरण साक्षात्कार में शामिल होंगे। मॉक इंटरव्यू की सुविधा भी की जाती है संचालित प्रदेश में समाज कल्याण विभाग की ओर से 8 आवासीय कोचिंग केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। अधिकतम 6 लाख रुपये वार्षिक आय सीमा वाले पात्र छात्रों को यहां आवासीय कोचिंग के साथ मेस, पुस्तकालय, इंटरनेट, टेस्ट सीरीज, नोट्स, मनोरंजन, खेलकूद और जिम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। मुख्य परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के लिए आगे मॉक इंटरव्यू की सुविधा भी संचालित की जाती है, ताकि वे साक्षात्कार के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें। मंत्री ने सफल अभ्यर्थियों को दीं शुभकामनाएं समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने सफल अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रतिभावान युवाओं को उनकी आर्थिक परिस्थितियों की परवाह किए बिना गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क प्रशिक्षण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। विभागीय केंद्रों से 74 अभ्यर्थियों की सफलता इसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है। राजकीय आईएएस/पीसीएस कोचिंग केंद्र के अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में सफल समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि भागीदारी भवन स्थित कोचिंग के 35, अलीगंज स्थित आदर्श परीक्षा केंद्र के 18 और हापुड़ स्थित राजकीय आईएएस/पीसीएस कोचिंग केंद्र के 21 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में सफल हुए हैं। तीनों केंद्रों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की सफलता को विभागीय निःशुल्क प्रशिक्षण व्यवस्था के प्रभावी परिणाम के तौर पर देखा जा रहा है।

पौधरोपण कर विद्यार्थियों को दें देखभाल की जिम्मेदारी-कलेक्टर

विद्यार्थियों के शिक्षा और पोषण पर दिया जाए विशेष ध्यान-कलेक्टर  पौधरोपण कर विद्यार्थियों को दें देखभाल की जिम्मेदारी-कलेक्टर  कलेक्टर ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए अच्छी शिक्षा ग्रहण करने दी सीख  कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने किया शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धनगवा (पूर्वी) कानिरीक्षण अनूपपुर  कलेक्टर रत्नाकर झा एवं पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराव ने आज मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत जनपद पंचायत जैतहरी के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धनगवां (पूर्वी) का निरीक्षण कर विद्यालय के शैक्षणिक एवं अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद कर अध्ययन-अध्यापन की स्थिति की जानकारी ली तथा उन्हें नियमित अध्ययन करते हुए बेहतर शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। कलेक्टर झा ने कक्षा 10वीं एवं कक्षा 6वीं के विद्यार्थियों से विभिन्न विषयों में अध्ययन को लेकर चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों के संबंध में जानकारी लेते हुए उनकी जिज्ञासाओं को समझा। इस दौरान उन्होंने विद्यालय की प्रयोगशाला का निरीक्षण कर प्रयोगात्मक गतिविधियों की जानकारी भी प्राप्त की। कलेक्टर ने विद्यालय परिसर का भ्रमण करते हुए पौधरोपण की स्थिति की जानकारी प्राचार्य मनोज खर्द से ली। प्राचार्य ने विद्यालय परिसर में पांच फलदार एवं पोषणयुक्त पौधों के रोपण की जानकारी दी। इस पर कलेक्टर ने विद्यालय में पदस्थ 13 शिक्षकों से 13 फलदार एवं पोषणयुक्त पौधे रोपित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक एक पौधे के रोपण के साथ उसकी देखभाल की जिम्मेदारी विद्यार्थियों को सौंपें, ताकि उनमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता एवं जिम्मेदारी की भावना विकसित हो। कलेक्टर झा ने विद्यालय के रसोई कक्ष का निरीक्षण कर मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता का भी जायजा लिया। उन्होंने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। विद्यार्थियों के बेहतर पोषण को ध्यान में रखते हुए उन्होंने विद्यालय परिसर में मुनगा, अमरूद, आंवला, आम सहित अन्य फलदार एवं पोषणयुक्त पौधों के रोपण के निर्देश दिए। कलेक्टर ने विद्यालय में नामांकित विद्यार्थियों की संख्या की भी जानकारी ली। प्राचार्य ने बताया कि कक्षा 10वीं से 12वीं तक विद्यालय में कुल 208 विद्यार्थी नामांकित हैं। कलेक्टर ने विद्यार्थियों की शिक्षा, पोषण, पर्यावरण जागरूकता एवं विद्यालय की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती अर्चना कुमारी, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग सुसरिता नायक सहित संबंधित अधिकारी एवं विद्यालय के शिक्षक उपस्थित रहे।

कटनी की फरार CSP नेहा पच्चीसिया की हाईकोर्ट में गुहार, FIR रद्द कराने और अग्रिम जमानत की मांग

जबलपुर  जमीन सौदेबाजी और पद के दुरुपयोग मामले को लेकर फरार चर्चित कटनी नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया का मामला हाईकोर्ट में है. नेहा पच्चीसिया ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त करने और अग्रिम जमानत की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है. जिसमें उन्होंने दो नाबालिग बच्चों की मां होने का हवाला दिया है. सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार के जवाब का इंतजार करने की बात कही है. साथ ही अगली सुनवाई 21 सितंबर को निर्धारित की है।  दो नाबालिग बच्चों की मां होने का दिया हवाला गुरुवार यानि 17 सितंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई को लेकर नेहा पच्चीसिया के अधिवक्ता प्रियंक अग्रवाल ने बताया कि "याचिकाकर्ता नेहा पच्चीसिया की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि उन्हें झूठे प्रकरण में फंसाया गया है. कोई साक्ष्य नहीं होने के बाद भी उन्हें आरोपी बनाया गया है. याचिका की सुनवाई के दौरान उनकी तरफ से आवेदन प्रस्तुत कर एफआईआर को रद्द करने और अग्रिम जमानत मांगी गई थी. आवेदन में कहा गया था कि वह दो नाबालिग बच्चों की मां हैं और उनकी देखभाल और पालन-पोषण की पूरी ज़िम्मेदारी उन्हीं पर है।  सरकार की तरफ से कहा गया देश से बाहर जा सकती हैं नेहा वहीं मामले में सरकार की तरफ से याचिका का विरोध जताया गया. सरकार की तरफ से कहा गया कि याचिकाकर्ता जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं. नेहा पच्चीसिया देश से बाहर जा सकती हैं, इसलिए उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करने की कार्रवाई की जा रही है. इस दौरान शिकायतकर्ता के अधिवक्ता के रूप मौजूद रहे अधिवक्ता ने बताया कि याचिकाकर्ता सहयोग न करने का दबाव बना रही है. उन्होंने बताया कि उनकी तरफ से हलफनामा पेश नहीं किया गया है. जिस पर एकलपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि भविष्य में न्यायालय के सामने पेश होते समय अधिक सावधानी बरते।  एकलपीठ ने बुधवार को आवेदन पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. कोर्ट ने गुरुवार को आदेश जारी किया. बता दें हाईकोर्ट जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने आवेदन पर सुनवाई की. जहां उन्होंने अपने आदेश में कहा है कि अंतरिम और अंतिम राहत की मांग पर विचार करने से पहले राज्य के जवाब का इंतजार करना सही होगा. एकलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 21 सितंबर को निर्धारित की है।  जमीन सौदेबाजी मामले में आरोपी हैं नेहा पच्चीसिया गौरतलब है कि कटनी सीएसपी नेहा पच्चीसिया सहित तीन आरोपियों के खिलाफ कुठला थाने में धोखाधडी सहित अन्य धाराओं में तहत प्रकरण दर्ज किया गया था. कटनी पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी पर 10-10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था. उन पर आरोप था कि कुठला थाना अंतर्गत हत्या के अपराध में निर्धारित समय अवधि में चालान पेश नहीं करने के कारण आरोपी को डिफॉल्ट जमानत का लाभ मिल गया था।  1 करोड़ की जमीन को 15-20 लाख में खरीदने का आरोप इसके एवज में उन्होंने आरोपियों की जमीन बहुत कम दर में अपने एजेंट के नाम पर खरीदी है. जमीन मारूफ अहमद हनफी के नाम पर खरीदी गई थी. जबकि उनके बैंक खाते में जमीन खरीदने से पहले महज कुछ हजार रुपए थे. उसके बैंक खाते में क्षितिज राज पात्रे ने राशि ट्रांसफर की थी. जिसके बाद 1 करोड़ रुपए की जमीन को महज 15 से 20 लाख रुपये में खरीदी गयी थी. विभागीय स्तर पर जांच के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. जिला न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत आवेदन खारिज किए जाने के कारण उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली थी। 

PSSOU के दो अहम MOU, शिक्षा और जनजातीय शोध को मिलेगा नया मंच

PSSOU के दो अहम MOU, शिक्षा और जनजातीय शोध को मिलेगा नया मंच रायपुर पण्डित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर ने शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MOU) किए हैं। विश्वविद्यालय ने *महर्षि प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बिलासपुर (MUMT) तथा जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र, नई दिल्ली के साथ समझौता किया है। इन समझौतों के जरिए अकादमिक गतिविधियों, संयुक्त शोध, प्रशिक्षण, नवाचार और जनजातीय विषयों पर अध्ययन को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने का आधार तैयार हुआ है।  अकादमिक गतिविधियों से लेकर डिजिटल शिक्षा तक सहयोग         महर्षि प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साथ हुए समझौते के तहत दोनों संस्थान अकादमिक, अनुसंधान, प्रशिक्षण, नवाचार, विस्तार और संस्थागत विकास के क्षेत्र में सहयोग करेंगे। संयुक्त संगोष्ठी, कार्यशाला, व्याख्यान और अकादमिक आयोजनों के साथ अंतर्विषयी अध्ययन तथा पाठ्यचर्या से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।  दोनों संस्थान MOOCs, मुक्त शैक्षिक संसाधन (OER), डिजिटल एवं स्व-अध्ययन सामग्री तथा तकनीक आधारित शिक्षण संसाधनों के विकास में भी सहयोग कर सकेंगे।  संयुक्त शोध और प्रकाशन को बढ़ावा         MOU के तहत संयुक्त अनुसंधान, सर्वेक्षण, क्षेत्र अध्ययन, प्रायोजित शोध, परामर्श और संयुक्त प्रकाशन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए अनुसंधान पद्धति, प्रशिक्षण, विशेषज्ञ व्याख्यान और संकाय विकास कार्यक्रमों के आयोजन की संभावनाएं भी रखी गई हैं।           विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, परियोजना कार्य, क्षेत्रीय अनुभव, शैक्षिक भ्रमण, कौशल विकास, करियर मार्गदर्शन और उद्यमिता से जुड़े अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी दोनों संस्थान मिलकर काम कर सकेंगे।  जनजातीय समाज से जुड़े विषयों पर विशेष फोकस         जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र, नई दिल्ली के साथ हुए MOU में जनजातीय मुद्दों और अनुसूचित जनजातियों से जुड़े विषयों पर संयुक्त अध्ययन एवं शोध को प्रमुखता दी गई है। सम्मेलन, संगोष्ठी, प्रकाशन और ज्ञान- साझाकरण जैसी गतिविधियों के माध्यम से जनजातीय विषयों पर अकादमिक विमर्श को आगे बढ़ाया जा सकेगा।           समझौते के तहत जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र रणनीति निर्माण, योजना और कार्य-रोडमैप तैयार करने में बौद्धिक सहयोग प्रदान करेगा। आवश्यकता के अनुसार केंद्र अपनी विशेषज्ञता और ज्ञान भी उपलब्ध करा सकेगा।  दो सदस्यीय संचालन समिति करेगी समन्वय         MOU के तहत प्रस्तावित गतिविधियों के समन्वय और निगरानी के लिए दोनों पक्षों से एक-एक प्रतिनिधि वाली दो सदस्यीय संचालन समिति गठित करने का प्रावधान किया गया है। बौद्धिक संपदा, स्वामित्व, प्रोत्साहन और ज्ञान-साझाकरण से जुड़े विषय संबंधित कार्य की प्रकृति के अनुसार आपसी सहमति से तय किए जाएंगे।  शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर        विश्वविद्यालय के अनुसार दोनों समझौतों का उद्देश्य विशेषज्ञता और संसाधनों के साझा उपयोग के साथ संस्थागत सहयोग को व्यावहारिक रूप देना है। इससे शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए अकादमिक एवं शोध के नए अवसर विकसित हो सकेंगे।         वहीं जनजातीय अनुसंधान से जुड़े समझौते के माध्यम से जनजातीय समाज, संस्कृति, परंपरा और समसामयिक विषयों पर अध्ययन को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।       इस अवसर पर PSSOU की ओर से कुलपति प्रो. वी. के. सारस्वत एवं कुलसचिव श्री चंद्रभूषण मिश्र उपस्थित रहे। MUMT की ओर से कुलपति प्रो. डॉ. नरेश कुमार तिवारी एवं कुलसचिव डॉ. विजय गरुडिक शामिल हुए।         जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र, नई दिल्ली की ओर से प्रदेश समन्वयक राजीव शर्मा एवं सामाजिक कार्यकर्ता वैभव सुरंगे उपस्थित रहे।

योगी सरकार के प्रयासों का असर! यूपी में बच्चों का नाटापन 8.2% घटा, बढ़ रही कद-काठी

राष्ट्रीय पोषण माह पर विशेष योगी सरकार के प्रयासों से यूपी के नौनिहालों की बढ़ रही कद-काठी प्रदेश के पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 8.2 प्रतिशत घटा   एनएफएचएस- 5 में ऐसे बच्चों का प्रतिशत 39.7 था, जो घटकर 31.5 प्रतिशत हो गया लखनऊ  योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश के नौनिहालों की सेहत और पोषण की तस्वीर में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगा है। प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन यानी उम्र के अनुपात में कम लंबाई की समस्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5) में जहां प्रदेश में ऐसे बच्चों का प्रतिशत 39.7 था, वहीं एनएफएचस-6 में यह घटकर 31.5 प्रतिशत रह गया है। यानी करीब चार वर्षों में नाटेपन के मामलों में 8.2 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई है। बच्चे की लंबाई में होने वाला सुधार एक दिन में नहीं आता : डॉ. पिंकी जोवल राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने बताया कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और विविध आबादी वाले राज्य में नाटेपन में कमी का उल्लेखनीय है क्योंकि बच्चे की लंबाई में होने वाला सुधार एक दिन में नहीं आता। यह लंबे समय तक बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवार की देखभाल का परिणाम होता है। एनएफएचएस-5 से एनएफएचएस-6 के बीच नाटेपन के आंकड़ों में आई गिरावट इसलिए प्रदेश के बच्चों के स्वास्थ्य की बदलती तस्वीर का महत्वपूर्ण संकेत है। अब चुनौती इस सुधार को और गति देने तथा यह सुनिश्चित करने की है कि हर बच्चे को जीवन के शुरुआती वर्षों में पर्याप्त पोषण और स्वस्थ विकास का अवसर मिले। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अभियान चलाकर गर्भवती महिलाओं को जागरुक करने के साथ उन्हे पोषण पोटली वितरित की जा रही है। सर्वेक्षण रिपोर्ट में 31.5 प्रतिशत का आंकड़ा यह भी बताता है कि अभी बड़ी संख्या में बच्चे इस समस्या से प्रभावित हैं इसलिए शुरुआती वर्षों में पोषण की निगरानी, गर्भवती महिलाओं के पोषण, छह माह तक केवल स्तनपान, समय पर पूरक आहार, संक्रमण की रोकथाम तथा बच्चों की नियमित वृद्धि निगरानी पर लगातार जोर देने की जरूरत है और इस पर फोकस काम किया जा रहा है।  बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन शारीरिक – मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शालिनी त्रिपाठी के अनुसार बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दो वर्ष की उम्र तक पर्याप्त पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर टीकाकरण, स्तनपान और उचित पूरक आहार पर ध्यान देने से कुपोषण की स्थिति को कम किया जा सकता है। इसी दिशा में आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य विभाग और समुदाय के स्तर पर चलाए जा रहे पोषण एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों की भूमिका महत्वपूर्ण है। सीएम योगी के निर्देश पर सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण-2.0 की गाइडलाइन के तहत संचालित हॉट कुक्ड मील योजना के जरिए 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को नियमित रूप से ताजा, गर्म और पौष्टिक पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। यूपी में करीब 1.45 लाख को-लोकेटेड और 0.44 लाख नॉन को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले लगभग 32.88 लाख बच्चे नियमित लाभान्वित हो रहे हैं। शुरुआती वर्षों में मिलने वाले पोषण की अहम भूमिका प्रोफेसर ने बताया कि नाटेपन को बच्चों में लंबे समय तक रहने वाले कुपोषण का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। यह केवल बच्चे की लंबाई तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे गर्भावस्था के दौरान मां का पोषण, जन्म के समय बच्चे की स्थिति, स्तनपान, छह माह बाद पूरक आहार, बार-बार होने वाले संक्रमण और शुरुआती वर्षों में मिलने वाले पोषण की अहम भूमिका होती है। ऐसे में आंकड़ों में आई गिरावट को बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में देखा जा सकता है। एनएफएचएस-5 में उत्तर प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 39.7 प्रतिशत दर्ज किया गया था। इसी सर्वे में 17.3 प्रतिशत बच्चे दुबलापन (वेस्टिंग) और 32.1 प्रतिशत बच्चे कम वजन की श्रेणी में थे। एनएफएचएस-6 के आंकड़े बताते हैं कि बच्चों के पोषण से जुड़े संकेतकों में देशभर में भी सुधार हुआ है। राष्ट्रीय स्तर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 35.5 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत हुआ है जबकि उत्तर प्रदेश में नाटापन 39.7 प्रतिशत से घटकर 31.5 प्रतिशत हुआ है।   प्रोफेसर शालिनी त्रिपाठी, केजीएमयू