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RJD में अंदरूनी कलह के संकेत? MLC टिकट विवाद के बीच रोहिणी आचार्य की पोस्ट चर्चा में

 पटना राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) द्वारा विधान परिषद चुनाव के लिए सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है. आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी और पार्टी नेता रोहिणी आचार्य ने इस फैसले पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर एक तीखी पोस्ट साझा की है. उनकी पोस्ट को पार्टी के भीतर असंतोष और आंतरिक मतभेदों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।  रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में किसी का नाम लिए बिना ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बनाए जाने पर नाराजगी जताई. उन्होंने लिखा कि गुटबाजी – भीतरघात – विश्वासघात , मक्कारी जिसकी फितरत , विरोधियों से जिसकी मिलीभगत, नजदीकियों की बात बता कर उगाही – वसूली करना जिसका धंधा, जो अपनी झूठी धौंस जताने के लिए पार्टी कार्यालय में पार्टी के कार्यकर्ताओं – पदाधिकारियों को सामने बिठा कर बहन – बेटियों के बारे में ओछी – अमर्यादित बातें करता है, उसको कैसे "उसके" ही द्वारा उम्मीदवार बना दिया गया।   रोहिणी की पोस्ट से चर्चाओं का दौर शुरू रोहिणी ने अपनी पोस्ट में यह भी सवाल उठाया कि क्या पार्टी में अब समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ताओं व नेताओं की कमी हो गई है. उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने और पार्टी को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी जिन लोगों को सौंपी गई है, वे ऐसे व्यक्तियों को आगे बढ़ा रहे हैं. जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है।  आरजेडी नेता की इस टिप्पणी को सीधे तौर पर सुनील कुमार सिंह की उम्मीदवारी से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि रोहिणी ने अपने पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे उसी फैसले के खिलाफ प्रतिक्रिया माना जा रहा है. उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब बिहार में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं और दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।  रोहिणी ने पार्टी के भविष्य को लेकर भी जताई चिंता रोहिणी आचार्य ने यह भी कहा कि पार्टी की स्थापना के समय से लेकर आज तक पार्टी के साथ मजबूती से खड़े एक नहीं अनेकों समर्पित, सम्मानित , जमीन से जुड़े कट्टर लालूवादी अल्पसंख्यक चेहरे हैं. यादव , दलित , पिछड़े व वंचित समाज से आने वाले वरिष्ठ व युवा लोग हैं , ऐसे लोगों की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय है और पार्टी हित में तो कतई नहीं है।  फिलहाल आरजेडी की ओर से रोहिणी आचार्य की टिप्पणी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन उनकी पोस्ट ने पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व से जुड़े सवालों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। 

HSSC की बड़ी उपलब्धि, दो साल में रिकॉर्ड भर्तियां और 13 हजार नई नौकरियों की तैयारी

चंडीगढ़  हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन हिम्मत सिंह ने अपने दो साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया है। आठ जून 2024 को पदभार संभालने के बाद से हिम्मत सिंह ने 46,951 युवाओं को नौकरी दिलाने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार को दिया है। इसके साथ ही, उन्होंने बताया कि आयोग की ओर से लगभग 13 हजार नई भर्तियों की तैयारियां भी चल रही हैं। हिम्मत सिंह ने कहा कि आठ जून 2024 वह दिन था, जब उन्होंने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष के पद की शपथ ली थी। यह शपथ एक नई जिम्मेदारी और नए विश्वास की थी। आयोग के अध्यक्ष के रूप में उन्हें कोई पूर्व अनुभव नहीं था, लेकिन उन्होंने कठिनाइयों का सामना करते हुए लक्ष्य को स्पष्ट रखा। मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को उनका हक दिलाना ही मुख्य उद्देश्य रहा है। चेयरमैन ने बताया कि दो वर्षों के कार्यकाल में आयोग ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से करीब 47 हजार अभ्यर्थियों के सपनों को साकार किया है। उन्होंने 'एक परिणाम-25 हजार सपने साकार' के मूल मंत्र के तहत 25 हजार अभ्यर्थियों का परिणाम जारी किया, जो आयोग के इतिहास में सबसे बड़ा परिणाम साबित हुआ। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी राज्य में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनने पर शपथ लेते ही 25 हजार अभ्यर्थियों का परिणाम जारी करने की घोषणा की थी, जो उन्होंने शपथ लेते ही पूरी की। हिम्मत सिंह के अनुसार अभ्यर्थियों का विश्वास आयोग के लिए प्रेरणादायक है। पिछले वर्ष संपन्न हुई सीईटी ग्रुप सी 2025 परीक्षा को हिम्मत सिंह ने इस यात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव बताया। लगभग 13.5 लाख अभ्यर्थियों वाली इस परीक्षा का आयोजन एक बड़ी चुनौती थी। उन्होंने कहा कि इस परीक्षा को पारदर्शिता और सुव्यवस्था के साथ संपन्न कराना कठिन था, लेकिन अभ्यर्थियों के उत्साह ने हमें संबल दिया। आयोग के अधिकारियों, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और अन्य सहयोगियों ने इस परीक्षा को एक उत्सव में बदल दिया। चेयरमैन के अनुसार सीईटी की परीक्षा में 92 प्रतिशत अभ्यर्थियों की भागीदारी ने पूरे देश को सकारात्मक संदेश दिया कि यदि नीयत साफ हो और सभी एक टीम की तरह कार्य करें, तो बड़ी परीक्षाएं भी सफलतापूर्वक संपन्न की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह उनके कार्यकाल के दो वर्षों का समापन नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने का एक और मजबूत पड़ाव है। उन्होंने कहा कि आयोग आगे भी नए विज्ञापनों और 13 हजार भर्तियों के माध्यम से युवाओं के सपनों को साकार करने के लिए प्रयासरत रहेगा।

एनएच-31/231 पर 143 किमी फोरलेन निर्माण तेज, कोसी-सीमांचल को मिलेगा बड़ा लाभ

भागलपुर  राष्ट्रीय राजमार्ग-31/231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड को फोरलेन में तब्दील करने की बहुप्रतीक्षित परियोजना अब तेजी से आगे बढ़ रही है। इस 3936 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को लेकर रविवार को बरौनी में पथ निर्माण मंत्री इं. कुमार शैलेंद्र ने एनएचएआई और पीआईयू-बेगूसराय के अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। यह परियोजना सीमांचल और कोसी क्षेत्र के विकास के लिए गेमचेंजर मानी जा रही है। हाल ही में केंद्र सरकार की कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद अब इस परियोजना के धरातल पर उतरने की प्रक्रिया तेज हो गई है। अधिकारियों ने बैठक में बताया कि परियोजना का अवार्ड अगस्त 2026 तक होने की संभावना है। लगभग 90 प्रतिशत भूमि पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है, जिससे निर्माण कार्य शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। ढाई वर्ष में पूरा होगा निर्माण कार्य परियोजना के तहत निर्माण कार्य की अवधि ढाई वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि इसके बाद 27.5 वर्षों तक रखरखाव का प्रावधान रहेगा। कुल 143.53 किलोमीटर लंबी इस फोरलेन सड़क को आधुनिक मानकों के अनुसार विकसित किया जाएगा। पूर्णिया में 6.73 किलोमीटर लंबा नया बाइपास भी बनाया जाएगा, जिससे शहर में ट्रैफिक दबाव कम होगा। इसके साथ ही सड़क पर एक इंटरचेंज, नौ फ्लाइओवर, 29 अंडरपास, तीन फुट ओवरब्रिज, 30 बस-बे और आठ ट्रक ले-बाय का निर्माण प्रस्तावित है। कोशी नदी पर बनेगा 1090 मीटर लंबा पुल परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में कुरसेला में कोशी नदी पर 1090 मीटर लंबा दो लेन का मेजर ब्रिज बनाया जाएगा। इसके अलावा चार अन्य बड़े पुल और छह छोटे पुल भी प्रस्तावित हैं। अधिकारियों के अनुसार यह संरचना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी और यातायात को सुगम बनाएगी। इससे लंबे समय से चली आ रही आवागमन की समस्याओं में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सर्विस रोड और आधुनिक डिजाइन स्पीड घनी आबादी वाले क्षेत्रों और प्रमुख जंक्शनों को ध्यान में रखते हुए परियोजना में 65 किलोमीटर सर्विस रोड और करीब 101 किलोमीटर स्लिप रोड का प्रावधान किया गया है। हाईवे को 100 किलोमीटर प्रति घंटा की डिजाइन स्पीड के अनुरूप तैयार किया जाएगा। सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीक और सुविधाओं का उपयोग किया जाएगा। इससे दुर्घटनाओं में कमी आने और यातायात संचालन में सुधार की उम्मीद है। सीमांचल-कोसी क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ पथ निर्माण मंत्री ने कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद खगड़िया से पूर्णिया की दूरी मात्र दो घंटे में तय की जा सकेगी। इससे खगड़िया, मानसी, महेशखूंट, पसराहा, नारायणपुर, बिहपुर, खरीक, नवगछिया, भागलपुर, कुरसेला, कटिहार और पूर्णिया जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार के समन्वय से इस परियोजना को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा कराया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

17 जिलों में अटल लाइब्रेरी का विस्तार, ग्रामीण युवाओं को मिलेगा डिजिटल और आधुनिक अध्ययन माहौल

 चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नया माहौल तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश के 17 जिलों में मंगलवार को एक साथ 350 नई अटल लाइब्रेरी शुरू की जाएंगी। करीब 44 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही यह योजना गांवों में अध्ययन संस्कृति को मजबूत करने और युवाओं को उनके घर के नजदीक बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है। हरियाणा सरकार की इस पहल की खास बात यह है कि लाइब्रेरी स्थापित करने के लिए नये भवनों के निर्माण पर खर्च नहीं किया गया है। इसकी बजाय ग्राम पंचायतों के उन भवनों और कमरों का चयन किया गया है जो लंबे समय से खाली पड़े थे या सीमित उपयोग में आ रहे थे। राज्य स्तर पर कराए गए सर्वेक्षण के आधार पर 600 से 1000 वर्ग फुट क्षेत्र वाले उपयुक्त स्थानों की पहचान की गई और उन्हें आधुनिक अध्ययन केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई। किताबों के साथ डिजिटल अध्ययन की भी सुविधा नई अटल लाइब्रेरी केवल पारंपरिक पुस्तकालय नहीं होंगी, बल्कि इन्हें बहुआयामी ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां स्कूली पाठ्यक्रम की पुस्तकों के अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी सामग्री, सामान्य ज्ञान, व्यक्तित्व विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, कौशल विकास तथा बच्चों के लिए विशेष साहित्य उपलब्ध कराया जाएगा इसके साथ-साथ डिजिटल संसाधनों और आनलाइन अध्ययन की सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी, ताकि ग्रामीण विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा प्रणाली और डिजिटल लर्निंग से जुड़ सकें। सरकार का लक्ष्य है कि गांवों के छात्र भी शहरों की तरह अध्ययन संसाधनों तक आसानी से पहुंच बना सकें। ग्रामीण युवाओं को मिलेगा प्रतिस्पर्धी माहौल योजना का प्रमुख उद्देश्य उन विद्यार्थियों और युवाओं तक बेहतर अवसर पहुंचाना है, जो आर्थिक या भौगोलिक कारणों से शहरों के कोचिंग संस्थानों और अध्ययन केंद्रों तक नहीं पहुंच पाते। हरियाणा सरकार का मानना है कि यदि गांवों में ही गुणवत्तापूर्ण अध्ययन वातावरण उपलब्ध कराया जाए तो प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों और रोजगारोन्मुखी शिक्षा में ग्रामीण युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी। अटल लाइब्रेरी के संचालन को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक गांव में ‘अटल लाइब्रेरी प्रबंधन समिति’ गठित की जाएगी। इस समिति में सरपंच, ग्राम सचिव, स्थानीय शिक्षित नागरिकों तथा युवा संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। समिति पुस्तकालय के संचालन, अनुशासन व्यवस्था, पुस्तकों के रखरखाव और करियर मार्गदर्शन जैसी गतिविधियों की निगरानी करेगी। पहले भी शुरू हो चुकी हैं सैकड़ों लाइब्रेरी यह पहल राज्य सरकार के पहले से चल रहे अटल लाइब्रेरी अभियान का विस्तार है। इससे पहले 25 दिसंबर 2025 को अटल सुशासन दिवस के अवसर पर 250 अटल लाइब्रेरी शुरू की गई थीं। इसके बाद विभिन्न जिलों में 268 और लाइब्रेरी संचालित की गईं। अब 350 नई लाइब्रेरी शुरू होने के बाद यह नेटवर्क और अधिक व्यापक हो जाएगा रेवाड़ी में सबसे अधिक 49 लाइब्रेरी इस चरण में जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे अधिक 49 अटल लाइब्रेरी रेवाड़ी जिले में शुरू की जाएंगी। इसके बाद करनाल में 45 और भिवानी में 36 नई लाइब्रेरी स्थापित होंगी। हरियाणा सरकार को उम्मीद है कि यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  

बिहार सरकार का बड़ा कदम: 216 पन्नों की किताब में सामने आएगी आर्थिक सर्वे की पूरी तस्वीर

पटना बिहार में जो जाति आधारित गणना और आर्थिक सर्वे हुआ था, उसके आंकड़ों को अब राज्य सरकार एक किताब की शक्ल देने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी पूरी तैयारी शुरू कर दी है। इस किताब में बिहार की हर एक जाति की कमाई कितनी है और उनके पास कितनी जमीन-जायदाद या संपत्ति है, इसका पूरा लेखा-जोखा सिलसिलेवार ढंग से छापा जाएगा। सरकार का मानना है कि इस किताब के आने से समाज की हर जाति की असली आर्थिक स्थिति और उनके विकास का पूरा सच सबके सामने आ सकेगा। इस काम को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए सरकार ने प्रकाशकों से हाथ मिलाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। 216 पन्नों की होगी यह स्पेशल किताब इस सरकारी योजना के मुताबिक, छपने वाली इस किताब में करीब 216 पन्ने होंगे। पहले चरण में सरकार इसकी 500 कॉपियां छपवाने जा रही है। सरकार इस काम को लेकर कितनी जल्दी में है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जिस भी प्रकाशक को इसका टेंडर या ऑर्डर मिलेगा, उसे सिर्फ 2 दिनों के भीतर किताब छापकर सरकार को सौंपनी होगी। किताब छापने वाले पब्लिशर के लिए सरकार ने एक साल का इनकम टैक्स रिटर्न और जीएसटी रजिस्ट्रेशन होना बिल्कुल अनिवार्य कर दिया है। नीति बनाने और रिसर्च करने में मिलेगी बड़ी मदद आपको बता दें कि बिहार सरकार ने 2 अक्तूबर 2023 को जातीय गणना के मुख्य आंकड़े जारी किए थे। इसके अनुसार बिहार की कुल आबादी 13.07 करोड़ से ज़्यादा है, जिसमें 12.53 करोड़ लोग बिहार में रहते हैं और करीब 53.72 लाख लोग राज्य से बाहर रहते हैं। पूरे राज्य में कुल 2.83 करोड़ से ज़्यादा परिवारों का सर्वे हुआ था, जिसमें पिछड़ा वर्ग की आबादी 27.13 प्रतिशत आई थी। जानकारों का कहना है कि इस आर्थिक सर्वे की किताब के आने से आगे चलकर सरकार को गरीबों के लिए नई योजनाएं और नीतियां बनाने में बहुत आसानी होगी, साथ ही पढ़ाई और रिसर्च करने वालों को भी सटीक डेटा मिल सकेगा।

झारखंड में ग्रामीण सड़क नेटवर्क होगा मजबूत, 600 किमी नई सड़क निर्माण की तैयारी

 रांची पूरे देश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फोर शुरू होने जा रही है. इसमें झारखंड को पहले चरण में करीब 600 करोड़ रुपये की सड़क योजना मिलने वाली है. इसकी तैयारी हो गयी है. झारखंड ने इसका प्रस्ताव भी भारत सरकार को भेज दिया है. वहीं एक बार केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक भी हो गयी है. अब दूसरी बैठक में झारखंड के लिए सड़क योजनाएं स्वीकृत हो जायेंगी. इस बार कुल 319 योजनाएं मिलने वाली है, जिसके तहत ग्रामीण इलाकों में करीब 600 किमी सड़क का निर्माण होगा. प्रति किमी एक करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है. केंद्र ने तय कर दी है प्राथमिकता भारत सरकार ने सड़क योजनाओं के लिए जो प्राथमिकता तय की है, उसके मुताबिक सबसे पहले अनुसूचित जनजाति व अनुसूचित जातियों के रहने वाले क्षेत्रों को चिह्नित किया जाना है. उनके क्षेत्रों में ही प्राथमिकता के आधार पर सड़कें बनेंगी. जिन क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के लोग 40 प्रतिशत रहते हैं, वहां प्राथमिकता दी जायेगी. वहीं जिन क्षेत्रों में अनुसूचित जाति के लोग 50 प्रतिशत रह रहे हैं, वहां भी सड़क योजनाएं लेनी है. शुरू में 1000 से अधिक आबादी वाले ऐसे क्षेत्रों को लेना है. इसके बाद 500 आबादी, फिर 250 की आबादी वाले गांवों को चिह्नित कर सड़कों का निर्माण कराना है. शिक्षण व स्वास्थ्य संस्थानों को भी जोड़ना लक्ष्य वहीं इस बार शिक्षण व स्वास्थ्य संस्थानों को जोड़ने का भी लक्ष्य रखा गया है. गांवों से इन जगहों को जोड़ा जायेगा, ताकि विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेजों तक पहुंचने में आसानी हो. वहीं मरीजों को लेकर अस्पताल जाने में सुविधा हो. इन सारे चीजों को देखते हुए इस बार सड़क योजनाओं का चयन किया जायेगा. उसके अनुरूप क्रियान्वयन भी किया जाना है.

जयपुर में छापेमारी से हड़कंप, बीज निगम निदेशक के घर और बस से करोड़ों रुपये मिले

जयपुर जयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की कार्रवाई में राजस्थान राज्य बीज निगम के निदेशक जुगल किशोर विश्नोई के घर से 1 करोड़ 59 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं, जबकि उनके भांजे स्वतंत्र विश्नोई से बस में तलाशी के दौरान लगभग 85 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई है. यह कार्रवाई राज्य सरकार की उस मंशा के अनुरूप बताई जा रही है, जिसके तहत प्रदेश के किसानों को गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित बीज उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार यह मामला खाद्य सुरक्षा और किसानों के हितों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है. राज्य सरकार ने हाल के दिनों में खराब और संदिग्ध बीजों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाते हुए कई गोदामों पर छापेमारी की, गोदामों को सील किया और ऐसे बीजों की बिक्री पर रोक लगाई. साथ ही संबंधित बीजों के नमूने लेकर प्रयोगशाला में परीक्षण की प्रक्रिया भी शुरू की गई. गजराज मूंगफली बीज मामले को दबाने के लिए दिए 1 करोड़ 20 लाख इसी क्रम में पिछले दिनों किरण कपाड़िया की कंपनी के गजराज ब्रांड मूंगफली बीज के मामले में भी कार्रवाई की गई थी. आरोप है कि कंपनी के गोदाम को सील किए जाने और बीजों की बिक्री पर रोक लगने के बाद बीजों को वापस गुजरात ले जाने और पूरे मामले को दबाने की व्यवस्था के लिए लगभग 1 करोड़ 20 लाख रुपये जुगल किशोर विश्नोई द्वारा प्राप्त किए गए, जबकि करीब 60 लाख रुपये गणपत नामक व्यक्ति द्वारा लिए गए. मामले की जांच जारी है और एसीबी पूरे प्रकरण से जुड़े वित्तीय लेन-देन तथा अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है. एसीबी को सूत्रों से सूचना प्राप्त हुई कि आज सुबह जुगल किशोर द्वारा अपने भांजे स्वतंत्र बिश्नोई के माध्यम से इस राशि में से 90 लाख रुपए गंगानगर भिजवा रहा है. जिस पर एसीबी टीम द्वारा संबंधित बस को लूणकरणसर में रुकवा कर तलाशी लेने पर 85 लाख रुपए राशि स्वतंत्र बिश्नोई से बरामद कर गिरफ्तार किया गया है. राजस्थान राज्यसभा चुनाव: बीजेपी के दोनों उम्मीदवारों ने किया नामांकन, शुभ मुहूर्त में दाखिल किया पर्चा जुगल किशोर विश्नोई के घर एवं बस से 2 करोड़ 44 लाख रुपए प्राप्त भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, राजस्थान द्वारा किसानों को वितरित किए जाने वाले बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और बीज वितरण व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के संबंध में कार्रवाई करते हुए जुगल किशोर बिश्नोई, प्रोपराइटर  किरण कापड़िया, गजराज ब्राण्ड (मूंगफली बीज), गणपत बिश्नोई, सुनील सेतीया और सतपाल, को डिटेन कर पूछताछ की जा रही है. वहीं स्वतंत्र बिश्नोई को लूणकरणसर में नकद राशि सहित गिरफ्तार किया गया है. एसीबी की टीम के द्वारा कार्रवाई करते हुए जुगल किशोर विश्नोई के घर एवं बस कि सर्च के दौरान कुल 2 करोड़ 44 लाख रुपए कि राशि अभी तक प्राप्त हुई है. जांच में गजराज ब्रांड के बीजों की बिक्री पर लगा दी गई थी रोक प्रारंभिक अनुसंधान में सामने आया है कि 27 मई 2026 को किरण कापड़िया के मूंगफली बीज गोदाम पर की गई कार्रवाई के दौरान अधिकारियों द्वारा बीजों के नमूने एकत्रित किए गए थे और गजराज ब्रांड के बीजों की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी. जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आए हैं कि उक्त कार्रवाई को प्रभावित करने, पूरे प्रकरण को दबाने और गोदाम में रखे कथित नकली बीजों को वापस गुजरात ले जाने की अनुमति दिलाने और इसमें सहायता करने के एवज में बड़ी मात्रा में रिश्वत राशि का लेन-देन किया गया. प्रयोगशाला में सैंपलों को पास कराने के लिए रिश्वत का इस्तेमाल अनुसंधान में यह भी जानकारी मिली है कि संबंधित कंपनी के व्यक्तियों ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को निष्प्रभावी करने के लिए विभिन्न अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों से संपर्क किया और अनुचित लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया. आरोप है कि प्रयोगशाला में भेजे गए सैंपलों को पास करवाने, बीजों की बिक्री दोबारा शुरू करवाने और अन्य प्रशासनिक राहत हासिल करने के लिए प्रभाव और धनबल का उपयोग करने की कोशिश की गई. मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है.

जमीन घोटाले में बढ़ीं हेमंत सोरेन की मुश्किलें, ED कोर्ट ने याचिका ठुकराई

 रांची  ईडी कोर्ट से बरियातू रोड स्थित 8.86 एकड़ जमीन घोटाला मामले में हेमंत सोरेन को राहत नहीं मिली है। ईडी के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका को खारिज कर दिया। तीन जून को सभी पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को अदालत ने 140 पेज में अपना निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया कि हेमंत सोरेन के खिलाफ प्रथम दृट्या मामला बनता है, इसलिए अब मुकदमा चलेगा। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि उपलब्ध सामाग्री से गंभीर संदेह पैदा होता है और यह पर्याप्त आधार है कि आरोपित के खिलाफ आरोप तय किए जाएं। कोर्ट ने हेमंत सोरेन इस दलील को खारिज कर दिया कि उनका इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। क्या है पूरा मामला? मामला रांची के बरियातू रोड स्थित 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि यह जमीन हेमंत सोरेन ने अवैध रूप से कब्जाई थी। आरोप है कि सोरेन ने 2010-11 में मूल कब्जाधारियों को जबरन बेदखल कर यह जमीन हड़प ली और बाद में भू-राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर इसे वैध दिखाने की कोशिश की। जांच में सामने आया कि तत्कालीन राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के पास से 17 मूल रजिस्टर और बड़ी संख्या में दस्तावेज बरामद हुए थे, जिनमें इसी जमीन का जिक्र था। ईडी के अनुसार, सोरेन के सहयोगी अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू के जरिए मुख्यमंत्री कार्यालय से इस जमीन की वेरिफिकेशन कराने के निर्देश दिए गए। हेमंत सोरेन की ओर से कहा गया था कि यह जमीन कथित अपराध से जुड़ी नहीं है। 2010-11 में कब्जे की बात है, जबकि आरोपित भानु प्रताप प्रसाद 2019 में ही रांची पोस्टिंग पर आया। इस जमीन पर कोई फर्जीवाड़ा पूरा नहीं हुआ। न तो रजिस्टर में सोरेन का नाम दर्ज किया गया और न ही कोई जाली दस्तावेज उनके नाम से बना। ईडी ने जिन गवाहों के बयानों का हवाला दिया, वे सुनी सुनाई बातों पर आधारित हैं। इसलिए प्रार्थी के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है। समय / वर्ष घटनाक्रम वर्ष 2024 बड़गाई अंचल की 8.46 एकड़ जमीन मामले में ईडी ने जांच तेज की और हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया था (बाद में उन्हें जमानत मिली)। 5 दिसंबर 2025 हेमंत सोरेन ने विशेष अदालत में डिस्चार्ज याचिका दाखिल कर खुद को निर्दोष बताया। 3 जून 2026 ईडी की विशेष अदालत में दोनों पक्षों (हेमंत सोरेन के वकील और ईडी) की ओर से लंबी बहस पूरी हुई। 8 जून 2026 विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में डिस्चार्ज याचिका पर फैसला। याचिका खारिज। बड़गाई जमीन घोटाला: जानिए 4 बड़ी बातें मुख्य आरोप: यह पूरा मामला रांची के बड़गाई अंचल स्थित 8.46 एकड़ जमीन के अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेज तैयार कर हेरफेर करने से जुड़ा है। ईडी इसे मनी लांड्रिंग का मामला मानकर जांच कर रही है। डिस्चार्ज याचिका क्या है: जब किसी आरोपी को लगता है कि जांच एजेंसी द्वारा दाखिल चार्जशीट में उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं और आरोप निराधार हैं, तो वह अदालत से केस से बरी करने (डिस्चार्ज) की गुहार लगाता है। हेमंत सोरेन का पक्ष: पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 5 दिसंबर को याचिका दायर कर खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया है और कहा है कि इस मामले से उनका कोई जुड़ाव नहीं है। अब तक की कार्रवाई: इस हाई-प्रोफाइल मामले में ईडी अब तक  18 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर चुकी है।  

श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी! कुरुक्षेत्र से सोमनाथ मंदिर तक शुरू हुई विशेष तीर्थ यात्रा ट्रेन

कुरुक्षेत्र. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन से भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर गुजरात के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को लेकर जाने वाली विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र से सोमनाथ महादेव के दर्शन के लिए विशेष ट्रेन को रवाना करना उनके लिए परम सौभाग्य की बात है। सोमनाथ मंदिर का इतिहास भारत की आस्था, धैर्य और स्वाभिमान का प्रतीक रहा है। उन्होंने बताया कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है, जो जनवरी 2027 तक चलेगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जबकि हरियाणा में पिहोवा स्थित अरुणाय संगमेश्वर महादेव मंदिर में राज्य स्तरीय आयोजन हुआ। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी श्रद्धालु आर्थिक अभाव के कारण तीर्थ यात्रा से वंचित न रहे। इसी सोच के तहत मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत पहले भी अयोध्या धाम, प्रयागराज और श्री हजूर साहिब नांदेड़ के लिए विशेष रेल एवं बस सेवाएं संचालित की जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने रेलवे विभाग तथा आयोजन से जुड़े अधिकारियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि श्रद्धालु भगवान सोमनाथ के समक्ष हरियाणा और देश की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली के लिए प्रार्थना करें। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

लीज खत्म होने से पहले टाटा स्टील की बड़ी तैयारी, नई खदानों और समझौतों पर जोर

जमशेदपुर  देश की सबसे पुरानी और प्रमुख इस्पात उत्पादक कंपनी टाटा स्टील ने 2030 के बाद कच्चे माल की आपूर्ति को लेकर एक नई और स्पष्ट रणनीति तैयार की है। झारखंड और ओडिशा में स्थित नोवामुंडी, जोड़ा ईस्ट और काटामाटी जैसी कंपनी की पुरानी खदानों की लीज 2030 में समाप्त हो रही है। इसे देखते हुए कंपनी ने लक्ष्य रखा है कि 2030 के बाद भी वह अपनी कुल जरूरत का कम से कम 50 प्रतिशत लौह अयस्क (आयरन ओर) खुद की (कैप्टिव) खदानों से ही जुटाएगी। यह कदम उत्पादन की लागत को नियंत्रित रखने और कच्चे माल की आपूर्ति के जोखिम को कम करने के लिए उठाया गया है। कंपनी के एमडी व सीईओ टीवी नरेंद्रन और कार्यकारी निदेशक व सीएफओ कौशिक चटर्जी ने वार्षिक रिपोर्ट में शेयरधारकों को बताया कि आपूर्ति शृंखला को बाधारहित रखने के लिए विविध दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। ऐतिहासिक रूप से 1907 से टाटा स्टील अपनी जरूरत का 100 प्रतिशत लौह अयस्क खुद की खदानों से ही निकालती आई है। स्टील अथोरिटी ऑफ इंडिया (सेल) के बाद टाटा स्टील अकेली ऐसी कंपनी है जिसे खदानों से यह लागत लाभ मिलता रहा है। इस साल टाटा स्टील ने 44 मिलियन मीट्रिक टन लौह अयस्क का उत्पादन किया है। वहीं, कंपनी ने अपनी खदानों से छह मिलियन मीट्रिक टन कच्चा कोयला निकालकर अपनी 25 प्रतिशत जरूरत पूरी की है। नीलामी की चुनौती और नई खदानें खान और खनिज अधिनियम के तहत पुरानी लीज खत्म होने पर खदानें ई-नीलामी के जरिए आवंटित होंगी। इस नीलामी में कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण अधिक प्रीमियम देना पड़ सकता है, जिससे लागत बढ़ने की आशंका है। इस संभावित असर को कम करने के लिए कंपनी अभी से तैयारी कर रही है। टाटा स्टील ने भविष्य के लिए गंधलपाड़ा और कलामंग वेस्ट जैसी नई खदानों का अधिग्रहण किया है। इसके अलावा, अपनी स्टील उत्पादन क्षमता को 2030 तक 40 मिलियन मीट्रिक टन तक ले जाने के लक्ष्य को देखते हुए, कंपनी ने सरकारी खनन कंपनियों एनएमडीसी और ओएमसी के साथ भी आपूर्ति समझौते किए हैं। अपने आपूर्ति तंत्र को और मजबूत करने के लिए टाटा स्टील ने महाराष्ट्र के गड़चिरोली में लायड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस करार के तहत दोनों कंपनियां मिलकर लौह अयस्क खनन, स्लरी पाइपलाइन इन्फ्रास्ट्रक्चर, पेलेटाइजेशन और नए ग्रीनफील्ड स्टील प्लांट लगाने की दिशा में काम करेंगी। कंपनी भविष्य में नीलाम होने वाली नई खदानों की लीज हासिल करने के लिए भी आक्रामक रूप से बोली लगाने की योजना बना रही है।