samacharsecretary.com

कटनी की फरार CSP नेहा पच्चीसिया की हाईकोर्ट में गुहार, FIR रद्द कराने और अग्रिम जमानत की मांग

जबलपुर  जमीन सौदेबाजी और पद के दुरुपयोग मामले को लेकर फरार चर्चित कटनी नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया का मामला हाईकोर्ट में है. नेहा पच्चीसिया ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त करने और अग्रिम जमानत की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है. जिसमें उन्होंने दो नाबालिग बच्चों की मां होने का हवाला दिया है. सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार के जवाब का इंतजार करने की बात कही है. साथ ही अगली सुनवाई 21 सितंबर को निर्धारित की है।  दो नाबालिग बच्चों की मां होने का दिया हवाला गुरुवार यानि 17 सितंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई को लेकर नेहा पच्चीसिया के अधिवक्ता प्रियंक अग्रवाल ने बताया कि "याचिकाकर्ता नेहा पच्चीसिया की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि उन्हें झूठे प्रकरण में फंसाया गया है. कोई साक्ष्य नहीं होने के बाद भी उन्हें आरोपी बनाया गया है. याचिका की सुनवाई के दौरान उनकी तरफ से आवेदन प्रस्तुत कर एफआईआर को रद्द करने और अग्रिम जमानत मांगी गई थी. आवेदन में कहा गया था कि वह दो नाबालिग बच्चों की मां हैं और उनकी देखभाल और पालन-पोषण की पूरी ज़िम्मेदारी उन्हीं पर है।  सरकार की तरफ से कहा गया देश से बाहर जा सकती हैं नेहा वहीं मामले में सरकार की तरफ से याचिका का विरोध जताया गया. सरकार की तरफ से कहा गया कि याचिकाकर्ता जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं. नेहा पच्चीसिया देश से बाहर जा सकती हैं, इसलिए उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करने की कार्रवाई की जा रही है. इस दौरान शिकायतकर्ता के अधिवक्ता के रूप मौजूद रहे अधिवक्ता ने बताया कि याचिकाकर्ता सहयोग न करने का दबाव बना रही है. उन्होंने बताया कि उनकी तरफ से हलफनामा पेश नहीं किया गया है. जिस पर एकलपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि भविष्य में न्यायालय के सामने पेश होते समय अधिक सावधानी बरते।  एकलपीठ ने बुधवार को आवेदन पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. कोर्ट ने गुरुवार को आदेश जारी किया. बता दें हाईकोर्ट जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने आवेदन पर सुनवाई की. जहां उन्होंने अपने आदेश में कहा है कि अंतरिम और अंतिम राहत की मांग पर विचार करने से पहले राज्य के जवाब का इंतजार करना सही होगा. एकलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 21 सितंबर को निर्धारित की है।  जमीन सौदेबाजी मामले में आरोपी हैं नेहा पच्चीसिया गौरतलब है कि कटनी सीएसपी नेहा पच्चीसिया सहित तीन आरोपियों के खिलाफ कुठला थाने में धोखाधडी सहित अन्य धाराओं में तहत प्रकरण दर्ज किया गया था. कटनी पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी पर 10-10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था. उन पर आरोप था कि कुठला थाना अंतर्गत हत्या के अपराध में निर्धारित समय अवधि में चालान पेश नहीं करने के कारण आरोपी को डिफॉल्ट जमानत का लाभ मिल गया था।  1 करोड़ की जमीन को 15-20 लाख में खरीदने का आरोप इसके एवज में उन्होंने आरोपियों की जमीन बहुत कम दर में अपने एजेंट के नाम पर खरीदी है. जमीन मारूफ अहमद हनफी के नाम पर खरीदी गई थी. जबकि उनके बैंक खाते में जमीन खरीदने से पहले महज कुछ हजार रुपए थे. उसके बैंक खाते में क्षितिज राज पात्रे ने राशि ट्रांसफर की थी. जिसके बाद 1 करोड़ रुपए की जमीन को महज 15 से 20 लाख रुपये में खरीदी गयी थी. विभागीय स्तर पर जांच के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. जिला न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत आवेदन खारिज किए जाने के कारण उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली थी। 

PSSOU के दो अहम MOU, शिक्षा और जनजातीय शोध को मिलेगा नया मंच

PSSOU के दो अहम MOU, शिक्षा और जनजातीय शोध को मिलेगा नया मंच रायपुर पण्डित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर ने शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MOU) किए हैं। विश्वविद्यालय ने *महर्षि प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बिलासपुर (MUMT) तथा जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र, नई दिल्ली के साथ समझौता किया है। इन समझौतों के जरिए अकादमिक गतिविधियों, संयुक्त शोध, प्रशिक्षण, नवाचार और जनजातीय विषयों पर अध्ययन को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने का आधार तैयार हुआ है।  अकादमिक गतिविधियों से लेकर डिजिटल शिक्षा तक सहयोग         महर्षि प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साथ हुए समझौते के तहत दोनों संस्थान अकादमिक, अनुसंधान, प्रशिक्षण, नवाचार, विस्तार और संस्थागत विकास के क्षेत्र में सहयोग करेंगे। संयुक्त संगोष्ठी, कार्यशाला, व्याख्यान और अकादमिक आयोजनों के साथ अंतर्विषयी अध्ययन तथा पाठ्यचर्या से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।  दोनों संस्थान MOOCs, मुक्त शैक्षिक संसाधन (OER), डिजिटल एवं स्व-अध्ययन सामग्री तथा तकनीक आधारित शिक्षण संसाधनों के विकास में भी सहयोग कर सकेंगे।  संयुक्त शोध और प्रकाशन को बढ़ावा         MOU के तहत संयुक्त अनुसंधान, सर्वेक्षण, क्षेत्र अध्ययन, प्रायोजित शोध, परामर्श और संयुक्त प्रकाशन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए अनुसंधान पद्धति, प्रशिक्षण, विशेषज्ञ व्याख्यान और संकाय विकास कार्यक्रमों के आयोजन की संभावनाएं भी रखी गई हैं।           विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, परियोजना कार्य, क्षेत्रीय अनुभव, शैक्षिक भ्रमण, कौशल विकास, करियर मार्गदर्शन और उद्यमिता से जुड़े अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी दोनों संस्थान मिलकर काम कर सकेंगे।  जनजातीय समाज से जुड़े विषयों पर विशेष फोकस         जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र, नई दिल्ली के साथ हुए MOU में जनजातीय मुद्दों और अनुसूचित जनजातियों से जुड़े विषयों पर संयुक्त अध्ययन एवं शोध को प्रमुखता दी गई है। सम्मेलन, संगोष्ठी, प्रकाशन और ज्ञान- साझाकरण जैसी गतिविधियों के माध्यम से जनजातीय विषयों पर अकादमिक विमर्श को आगे बढ़ाया जा सकेगा।           समझौते के तहत जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र रणनीति निर्माण, योजना और कार्य-रोडमैप तैयार करने में बौद्धिक सहयोग प्रदान करेगा। आवश्यकता के अनुसार केंद्र अपनी विशेषज्ञता और ज्ञान भी उपलब्ध करा सकेगा।  दो सदस्यीय संचालन समिति करेगी समन्वय         MOU के तहत प्रस्तावित गतिविधियों के समन्वय और निगरानी के लिए दोनों पक्षों से एक-एक प्रतिनिधि वाली दो सदस्यीय संचालन समिति गठित करने का प्रावधान किया गया है। बौद्धिक संपदा, स्वामित्व, प्रोत्साहन और ज्ञान-साझाकरण से जुड़े विषय संबंधित कार्य की प्रकृति के अनुसार आपसी सहमति से तय किए जाएंगे।  शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर        विश्वविद्यालय के अनुसार दोनों समझौतों का उद्देश्य विशेषज्ञता और संसाधनों के साझा उपयोग के साथ संस्थागत सहयोग को व्यावहारिक रूप देना है। इससे शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए अकादमिक एवं शोध के नए अवसर विकसित हो सकेंगे।         वहीं जनजातीय अनुसंधान से जुड़े समझौते के माध्यम से जनजातीय समाज, संस्कृति, परंपरा और समसामयिक विषयों पर अध्ययन को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।       इस अवसर पर PSSOU की ओर से कुलपति प्रो. वी. के. सारस्वत एवं कुलसचिव श्री चंद्रभूषण मिश्र उपस्थित रहे। MUMT की ओर से कुलपति प्रो. डॉ. नरेश कुमार तिवारी एवं कुलसचिव डॉ. विजय गरुडिक शामिल हुए।         जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र, नई दिल्ली की ओर से प्रदेश समन्वयक राजीव शर्मा एवं सामाजिक कार्यकर्ता वैभव सुरंगे उपस्थित रहे।

योगी सरकार के प्रयासों का असर! यूपी में बच्चों का नाटापन 8.2% घटा, बढ़ रही कद-काठी

राष्ट्रीय पोषण माह पर विशेष योगी सरकार के प्रयासों से यूपी के नौनिहालों की बढ़ रही कद-काठी प्रदेश के पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 8.2 प्रतिशत घटा   एनएफएचएस- 5 में ऐसे बच्चों का प्रतिशत 39.7 था, जो घटकर 31.5 प्रतिशत हो गया लखनऊ  योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश के नौनिहालों की सेहत और पोषण की तस्वीर में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगा है। प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन यानी उम्र के अनुपात में कम लंबाई की समस्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5) में जहां प्रदेश में ऐसे बच्चों का प्रतिशत 39.7 था, वहीं एनएफएचस-6 में यह घटकर 31.5 प्रतिशत रह गया है। यानी करीब चार वर्षों में नाटेपन के मामलों में 8.2 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई है। बच्चे की लंबाई में होने वाला सुधार एक दिन में नहीं आता : डॉ. पिंकी जोवल राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने बताया कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और विविध आबादी वाले राज्य में नाटेपन में कमी का उल्लेखनीय है क्योंकि बच्चे की लंबाई में होने वाला सुधार एक दिन में नहीं आता। यह लंबे समय तक बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवार की देखभाल का परिणाम होता है। एनएफएचएस-5 से एनएफएचएस-6 के बीच नाटेपन के आंकड़ों में आई गिरावट इसलिए प्रदेश के बच्चों के स्वास्थ्य की बदलती तस्वीर का महत्वपूर्ण संकेत है। अब चुनौती इस सुधार को और गति देने तथा यह सुनिश्चित करने की है कि हर बच्चे को जीवन के शुरुआती वर्षों में पर्याप्त पोषण और स्वस्थ विकास का अवसर मिले। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अभियान चलाकर गर्भवती महिलाओं को जागरुक करने के साथ उन्हे पोषण पोटली वितरित की जा रही है। सर्वेक्षण रिपोर्ट में 31.5 प्रतिशत का आंकड़ा यह भी बताता है कि अभी बड़ी संख्या में बच्चे इस समस्या से प्रभावित हैं इसलिए शुरुआती वर्षों में पोषण की निगरानी, गर्भवती महिलाओं के पोषण, छह माह तक केवल स्तनपान, समय पर पूरक आहार, संक्रमण की रोकथाम तथा बच्चों की नियमित वृद्धि निगरानी पर लगातार जोर देने की जरूरत है और इस पर फोकस काम किया जा रहा है।  बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन शारीरिक – मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शालिनी त्रिपाठी के अनुसार बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दो वर्ष की उम्र तक पर्याप्त पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर टीकाकरण, स्तनपान और उचित पूरक आहार पर ध्यान देने से कुपोषण की स्थिति को कम किया जा सकता है। इसी दिशा में आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य विभाग और समुदाय के स्तर पर चलाए जा रहे पोषण एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों की भूमिका महत्वपूर्ण है। सीएम योगी के निर्देश पर सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण-2.0 की गाइडलाइन के तहत संचालित हॉट कुक्ड मील योजना के जरिए 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को नियमित रूप से ताजा, गर्म और पौष्टिक पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। यूपी में करीब 1.45 लाख को-लोकेटेड और 0.44 लाख नॉन को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले लगभग 32.88 लाख बच्चे नियमित लाभान्वित हो रहे हैं। शुरुआती वर्षों में मिलने वाले पोषण की अहम भूमिका प्रोफेसर ने बताया कि नाटेपन को बच्चों में लंबे समय तक रहने वाले कुपोषण का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। यह केवल बच्चे की लंबाई तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे गर्भावस्था के दौरान मां का पोषण, जन्म के समय बच्चे की स्थिति, स्तनपान, छह माह बाद पूरक आहार, बार-बार होने वाले संक्रमण और शुरुआती वर्षों में मिलने वाले पोषण की अहम भूमिका होती है। ऐसे में आंकड़ों में आई गिरावट को बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में देखा जा सकता है। एनएफएचएस-5 में उत्तर प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 39.7 प्रतिशत दर्ज किया गया था। इसी सर्वे में 17.3 प्रतिशत बच्चे दुबलापन (वेस्टिंग) और 32.1 प्रतिशत बच्चे कम वजन की श्रेणी में थे। एनएफएचएस-6 के आंकड़े बताते हैं कि बच्चों के पोषण से जुड़े संकेतकों में देशभर में भी सुधार हुआ है। राष्ट्रीय स्तर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 35.5 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत हुआ है जबकि उत्तर प्रदेश में नाटापन 39.7 प्रतिशत से घटकर 31.5 प्रतिशत हुआ है।   प्रोफेसर शालिनी त्रिपाठी, केजीएमयू

मध्यप्रदेश में मानसून का आखिरी दौर, 21 सितंबर से झमाझम बारिश के आसार; 3 जिलों में अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून अब अपने अंतिम दौर में है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में इसकी विदाई का सिलसिला शुरू होने का अनुमान है। हालांकि, इससे पहले प्रदेश में बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, 21 सितंबर तक कई इलाकों में बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है। मौसम के आगामी सात दिनों के पूर्वानुमान के अनुसार 18 से 21 सितंबर तक प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बनी रहने की संभावना है। 22 सितंबर से बारिश में कुछ कमी आ सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून की वापसी सबसे पहले पश्चिमी राजस्थान से शुरू होने के संकेत हैं, जबकि मध्य प्रदेश में इसकी सक्रियता सितंबर के आखिरी सप्ताह तक बनी रह सकती है। कम बारिश वाले जिलों को मिल सकती है राहत मानसून के बचे हुए दिनों में होने वाली बारिश से प्रदेश के उन जिलों में स्थिति सुधर सकती है, जहां इस सीजन अब तक सामान्य से कम पानी गिरा है। फिलहाल प्रदेश के 18 जिलों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं। वहीं, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे है। आलीराजपुर में सामान्य बारिश की तुलना में करीब आधा पानी ही दर्ज हुआ है। दूसरी ओर निवाड़ी में सामान्य से 54% ज्यादा बारिश हो चुकी है। भोपाल-सीहोर और देवास में झमाझम बारिश गुरुवार दोपहर भोपाल, सीहोर और देवास में बारिश का तेज दौर देखने को मिला। भोपाल-इंदौर रोड पर सोनकच्छ में कुछ समय के लिए इतनी तेज बारिश और अंधेरा छाया कि वाहन चालकों को दिन में ही हेडलाइट जलानी पड़ी। ग्वालियर में भी दिनभर की उमस के बाद शाम को मौसम बदला। शहर में झमाझम बारिश होने से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली। अरब सागर में बना कम दबाव का क्षेत्र मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, फिलहाल सौराष्ट्र और उससे लगे उत्तर-पूर्वी अरब सागर के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला है। इसके अलावा मानसून ट्रफ भी इसी कम दबाव वाले क्षेत्र से होकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल होते हुए बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है। इन मौसम प्रणालियों के कारण मध्य भारत में नमी और बारिश की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। 19 सितंबर के बाद बन सकता है नया सिस्टम मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक, 18 से 19 सितंबर के दौरान मध्य प्रदेश में अलग-अलग चरणों में बारिश हो सकती है। इसके बाद 19 सितंबर की शाम के आसपास एक नई मौसम प्रणाली बनने के संकेत हैं। उत्तर थाईलैंड के ऊपर बना ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण 18 सितंबर की शाम तक उत्तर अंडमान सागर के आसपास पहुंच सकता है। इसके प्रभाव से 19 सितंबर के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। यह सिस्टम आगे दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ सकता है। इसके असर से मध्य प्रदेश के मौसम में एक बार फिर बदलाव देखने को मिल सकता है। मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य विदाई आमतौर पर 2 अक्टूबर के आसपास होती है। हालांकि, इस साल मानसून के जाने से पहले सितंबर के आखिरी हफ्ते में राज्य में बारिश का एक और दौर शुरू होने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल के अनुसार, 18 सितंबर की शाम तक बंगाल की खाड़ी में एक चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है। इसके प्रभाव से 19 सितंबर की शाम तक एक कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है। यदि यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए मजबूत होता है, तो 21 सितंबर से राज्य में भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक औसतन 33.1 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य बारिश का 88.7 प्रतिशत है। राज्य में आमतौर पर मानसून के दौरान औसतन 37.3 इंच बारिश होती है। वर्तमान में राज्य में सामान्य से लगभग 7 प्रतिशत कम बारिश हुई है, लेकिन नए सिस्टम के सक्रिय होने से इस कमी में सुधार हो सकता है। MP में अब तक 33.1 इंच बारिश मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में अब तक 842.1 मिलीमीटर यानी करीब 33.1 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। यह मानसूनी कोटे का 88.9% है। इस अवधि में सामान्य बारिश 905.3 मिलीमीटर यानी करीब 35.6 इंच होनी चाहिए थी। इस हिसाब से प्रदेश में अभी करीब 2.5 इंच बारिश कम है। ओवरऑल प्रदेश में बारिश सामान्य से 7% कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में यह कमी करीब 2% और पश्चिमी हिस्से में 11% दर्ज की गई है।

संगीत विश्वविद्यालय में आज मनाया जाएगा विष्णुद्वय जयंती समारोह, छात्रों से संवाद करेंगे गायक साधु तिवारी

ग्वालियर  राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में शनिवार को  सुबह 1२ बजे से विष्णुद्वय जयंती मनाई जाएगी। विश्वविद्यालय के तानसेन सभागार में आयोजित होने वाला इस संगीतमय कार्यक्रम  के मुख्य अतिथि संजय देवले होंगे। इसमें आमंत्रित कलाकार के रूप में मुंबई से सुप्रसिद्ध मराठी गायिका शरयू दाते और उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष प्रो जयंत खोत रहेंगे। कार्यक्रम में ही  हाल ही में चर्चित फिल्म हनुमान अंश में अपनी आवाज़ से विश्वविख्यात हुए गायक कलाकार साधु तिवारी भी छात्र छात्राओं से संवाद करेंगे।कार्यक्रम में संयोजक डॉ पारुल दीक्षितऔर कुलसचिव डॉ आशुतोष खरे मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो स्मिता सहस्त्रबुद्धे करेंगी।

मेरठ में पहली बार एयर शो का रोमांच, सूर्य किरण टीम दिखाएगी खतरनाक हवाई करतब 20 सितंबर

मेरठ क्रांतिधरा के इतिहास में पहली बार अपने मेरठ शहर का आसमान भारतीय वायुसेना के शौर्य और पराक्रम का गवाह बनने जा रहा है। 19 और 20 सितंबर को परतापुर क्षेत्र के मोहिउद्दीनपुर स्थित न्यू इंटीग्रेटेड टाउनशिप में भारतीय वायुसेना की विश्व प्रसिद्ध ‘सूर्य किरण एरोबैटिक टीम’ (एसकेएटी)) अपने साहसिक करतब दिखाएगी। राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने विकास भवन में मीडिया से बातचीत में जानकारी दी कि उन्होंने 13 मई को मेरठ में इस एयर शो के आयोजन का प्रस्ताव भेजा था, जिसे आठ सितंबर को आधिकारिक मंजूरी मिली। मेरठ में इस तरह एयर शो का यह पहला आयोजन है। उन्होंने बताया कि 19 और 20 सितंबर दोनों दिन एयर शो का आयोजन होगा, जिसमें 20 सितंबर को मुख्य आयोजन होगा। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ मुख्य अतिथि होंगे। डीएम डॉ.वीके सिंह ने बताया कि न्यू इंटीग्रेटेड टाउनशिप में होने वाले एयर शो के लिए दर्शकों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए व्यापक तैयारियां की गई हैं। सीडीओ नूपुर गोयल ने जानकारी दी। लोकेशन ये एयर शो परतापुर क्षेत्र के मोहिउद्दीनपुर स्थित न्यू इंटीग्रेटेड टाउनशिप में होगा। गूगल मैप्स पर VJR7+WH2 कोड से लोकेशन मिलेगा। समय एयर शो 19 और 20 सितंबर को सुबह 9.45 से 11.30 बजे तक होगा। रजिस्ट्रेशन ये एयर शो सभी के लिए है। इसके लिए टिकट या रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होगी। 21 तक 18.5 किमी क्षेत्र नो फ्लाइंग जोन सूर्यकिरण के एयर शो को लेकर डीएम ने 18 से 21 सितंबर तक मोहिउद्दीनपुर के 10 नॉटिकल मील अर्थात साढ़े 18 किमी क्षेत्र को रेड जोन और नो फ्लाइंग जोन घोषित कर दिया है। इस अधिसूचित अस्थाई रेड जोन के भीतर किसी भी निजी या अनधिकृत व्यक्ति/संस्था द्वारा ड्रोन, रिमोट संचालित विमान, हॉट एयर बैलून या किसी अन्य प्रकार के मानवरहित हवाई जहाज (यूएवी) को उड़ाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। बैरल रोल और डीएनए मैनूवर से रोमांच एयर शो में हॉक एमके-132 विमान लूप, बैरल रोल, उल्टी उड़ान और डीएनए मैनूवर समेत कई एरोबैटिक फॉर्मेशन का प्रदर्शन करेंगे। बेहद कम अंतर पर विमानों की सटीक टाइमिंग और एक-दूसरे के साथ सामंजस्यपूर्ण उड़ान दर्शकों के लिए खास आकर्षण होगी। आसमान में केसरिया, सफेद और हरे रंग की धुएं की लकीरें भी नजर आएंगी। हॉक विमानों में नासिक स्थित वायुसेना के बेस रिपेयर डिपो में विकसित स्वदेशी स्मोक पॉड्स का इस्तेमाल किया जाएगा। इनके जरिए विमानों के पीछे तिरंगे के रंगों की छटा दिखाई देगी। मेरठ से है सीधा जुड़ाव एयर शो में स्क्वाड्रन लीडर अमन गोयल, राहुल सिंह और शरद गोयल की मौजूदगी मेरठ के लिए खास होगी। तीनों सूर्य किरण एरोबैटिक टीम का हिस्सा हैं। इससे मेरठ में होने वाले प्रदर्शन का स्थानीय जुड़ाव भी खास हो गया है।

झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC-JSSC CGL अधिसूचना पर रोक रखी बरकरार, अगली सुनवाई 7 अक्टूबर

रांची झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल परीक्षाओं के विज्ञापन को रद्द करने के राज्य सरकार की अधिष्टा को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में प्रार्थियों व राज्य सरकार का पक्ष सुना पक्ष सुनने के बाद अदालत ने अधिसूचना पर रोक को अगले आदेश तक बरकरार रखा. सिर्फ अधिसूचना से नौकरी नहीं छिन सकती: हाईकोर्ट अदालत ने कहा कि सिर्फ एक अधिसूचना से सरकार विभिन्न विभागों में नियुक्त हो चुके अभ्यार्थियों को बिना नेचुरल जस्टिस का पालन किये सेवा से नहीं हटा सकती. अदालत ने एसआईटी जांच के मामले में नोडल अधिकारी बनाया है. वहीं नियुक्त अभ्यर्थियों की किसी तरह की परेशानियों के समाधान की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी रिटायर जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को दी गई है. अदालत ने कहा है कि अगर एसआईटी किसी अभ्यर्थी को अनावश्यक परेशान करती है, तो वे जस्टिस गौतम चौधरी के पास अपनी शिकायत कर सकते हैं. मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को 11:30 बजे से होगी. अगली सुनवाई 7 अक्टूबर अदालत ने सभी पक्षों की सहमति से मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की. राज्य सरकार की ओर से मामले में शपथ पत्र दायर किया गया जिस पर प्रति उत्तर दायर करने के लिए प्रार्थियों की ओर से समय देने का आग्रह किया गया, जिसे अदालत में स्वीकार कर लिया. दोनों पक्षों ने अदालत में रखा अपना पक्ष राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट की वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा व महाधिवक्ता रोहित राय ने पक्ष रखा, जबकि प्रार्थियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री पटवालिया, पूर्व महाधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स एवं अन्य ने पैरवी की. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी आकाश गौरव एवं अन्य, निरोज खेस एवं अन्य की ओर से अलग-अलग याचिका दायर कर राज्य सरकार की योजना को चुनौती दी गई है.

किशाऊ बांध परियोजना से बदलेगी बिजनौर की सिंचाई व्यवस्था, किसानों को मिलेगा अतिरिक्त पानी

बिजनौर  केंद्र सरकार की पहल के बाद छह राज्यों में किशाऊ बांध परियोजना में सहमति बनी है। इस परियोजना के अंतर्गत जिले को भी पानी मिलने की बात कही जा रही है। इससे पहले शारदा-यमुना-साबरमती लिंक नहर के लिए भी जिले में सर्वे हो चुका है। अभी तक जिले में किसानों की फसलों की सिंचाई पूर्वी मध्य गंगा नहर, पीली बांध जलाशय और रामगंगा बांध कालागढ़ से की जाती है। किशाऊ बांध परियोजना से पानी मिलने से किसानों को और अधिक लाभ होगा। फसलों की सिंचाई के लिए किसान नलकूपों के अलावा नहरों के पानी का भी प्रयोग करते हैं। गंगा पर बने बैराज से मध्य गंगा नहर फेज वन व टू निकलती हैं, लेकिन इनका पानी जिले के किसानों को नहीं मिलता है। यहां पूर्वी मध्य गंगा नगर सिंचाई प्रणाली से फसलों को पानी दिया जाता है। पीली बांध जलाशय व रामगंगा बांध कालागढ़ से भी फसलों को पानी दिया जाता है। केंद्र सरकार की योजना यमुना से भी क्षेत्र को जोड़ने की है। पांच जिलों को फायदा 380 किलोमीटर लंबी बहुप्रतीक्षित शारदा-यमुना-साबरमती लिंक नहर परियोजना के लिए भी जिले में सर्वे किया गया है। उत्तराखंड के टनकपुर से बिजनौर, हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, शामली में इस नहर परियोजना का निर्माण कराया जा सकता है। इस परियोजना में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित टोंस नदी पर बांध बनाया जाएगा। बिजली बनाने के साथ ही इसका प्रयोग किसानों को सिंचाई के लिए पानी देने में किया जाएगा। जिले को भी इस बांध परियोजना में पानी मिलने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता है तो जिले में भूमि भी अधिग्रहित की जाएगी। यहां होगा लाभ जिले में वर्षों से कोई नई नहर परियोजना नहीं आई है। यहां नूरपुर व जलीलपुर क्षेत्र में भूगर्भ जल का स्तर बाकी ब्लाक से नीचे है। हालांकि जलीलपुर क्षेत्र में बरसात में बाढ़ के हालात होते हैं, लेकिन ये बड़े हिस्से में नहीं होता है। इस क्षेत्र के किसानों के लिए किशाऊ बांध परियोजना का पानी बहुत काम आएगा।  

भोपाल के फर्जी IAS केस में बड़ा मोड़, पीड़िता से रिश्वत मांगने का आरोप; ASI और हवलदार पर कार्रवाई

भोपाल भोपाल में फर्जी IAS तृप्ति सिंह से जुड़ी कहानी में अब एक ऐसा मोड़ आया है, जिसने पुलिस की जांच पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. कहानी शुरू हुई थी एक ऐसी महिला से, जिस पर फर्जी IAS बनकर लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने के आरोप हैं. उसके खिलाफ तीन FIR दर्ज होने की बात पुलिस ने कही है. कई लोग शिकायत लेकर थाने पहुंचे. लेकिन इसी जांच के दौरान एक शिकायत ऐसी आई, जिसमें आरोप सीधे पुलिसकर्मियों पर लग गए।  आरोप था कि जिन पुलिसवालों से पीड़ित इंसाफ की उम्मीद लेकर थाने पहुंच रहे थे, उन्हीं में से कुछ ने उनसे पैसे मांगने शुरू कर दिए. इसके बाद बागसेवनिया थाने में तैनात ASI मनोज शर्मा और हवलदार सुनील राठौर को लाइन अटैच कर दिया गया।  इस कहानी में ख्याति नाम की युवती की शिकायत अहम है, जो बैतूल की रहने वाली है. ख्याति ने फर्जी IAS तृप्ति सिंह के खिलाफ नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की शिकायत की थी. शिकायत की जांच बागसेवनिया थाने में चल रही थी. ख्याति का आरोप है कि जांच के दौरान ASI मनोज शर्मा ने उससे रुपये मांगे।  अब यहां कहानी थोड़ा पेचीदा हो जाती है. ख्याति के मुताबिक, जब उसने पैसे देने से इनकार किया तो उसे ही मामले में आरोपी बनाने की धमकी दी गई. पुलिस की जांच में यह भी सामने आया था कि तृप्ति सिंह के बैंक खाते से ख्याति के खाते में कुछ रकम ट्रांसफर हुई थी. आरोप है कि इसी लेनदेन को आधार बनाकर ख्याति पर कार्रवाई का दबाव बनाया गया।  हालांकि, रिश्वत मांगने के इन आरोपों की जांच अभी होनी है. अभी संबंधित पुलिसकर्मियों का पक्ष इस मामले में सामने नहीं आया है. मामला सामने आने के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायत पहुंची. एसीपी रजनीश कश्यप ने बताया कि ASI मनोज शर्मा और हवलदार सुनील राठौर के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं. आरोप था कि तृप्ति सिंह से जुड़े मामले में शिकायतकर्ताओं से पैसे मांगे जा रहे थे और उन्हें डराया जा रहा था।  शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल थाने से हटाकर लाइन अटैच कर दिया गया. फिलहाल शिकायत सामने आई, वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची और उसके बाद दोनों पुलिसकर्मियों पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गई है।  भोपाल में तृप्ति के खिलाफ दर्ज हो चुकीं तीन एफआईआर इस कहानी का दूसरा सिरा फर्जी IAS तृप्ति सिंह से जुड़ा है. पुलिस के मुताबिक, बागसेवनिया थाने में तृप्ति सिंह के खिलाफ तीन FIR दर्ज हो चुकी हैं. मामले में कई शिकायतकर्ता भी सामने आए हैं. ख्याति की शिकायत के आधार पर भी तृप्ति सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. यानी एक तरफ पुलिस तृप्ति सिंह के खिलाफ कथित ठगी के मामलों की जांच कर रही थी, दूसरी तरफ उसी जांच से जुड़े पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतें आने लगीं. मामला यहीं से और उलझ गया।  आरोप ये है कि तृप्ति सिंह के खिलाफ शिकायत लेकर थाने पहुंची ख्याति से ही जांच के दौरान पैसे मांगे गए. जब उसने पैसे देने से इनकार किया तो कथित तौर पर उसे आरोपी बनाने की धमकी दी गई. ख्याति की शिकायत और दूसरी शिकायतों के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने दोनों पुलिसकर्मियों को थाने से हटा दिया. लेकिन आरोपों की सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद ही साफ होगा. फिलहाल तृप्ति सिंह से जुड़े मामलों की जांच जारी है. वहीं ASI मनोज शर्मा और हवलदार सुनील राठौर पर लगे आरोपों की भी जांच हो रही है. जांच के निष्कर्ष के बाद ही साफ होगा कि शिकायतों में लगाए गए आरोप कितने सही हैं। 

प्रदेश के 3.80 लाख युवाओं ने कराया ऑनलाइन पंजीयन, 6 लाख का लक्ष्य; मंत्री सारंग ने बताया सरकार का विजन

विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग-2027 प्रदेश के 3.80 लाख युवाओं ने किया ऑनलाइन पंजीयन; 6 लाख पंजीयन का लक्ष्य पीएम मोदी के नेतृत्व में देश के युवाओं मिल रहें नए अवसर : मंत्री सारंग भोपाल खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग-2027 (15 से 29 वर्ष) युवाओं को नेतृत्व, नवाचार और राष्ट्र निर्माण की एक संरचित, योग्यता-आधारित यात्रा में भाग लेने का एक राष्ट्रव्यापी अवसर है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य उन युवाओं की पहचान करना, उन्हें प्रोत्साहित करना और राष्ट्रीय मंच प्रदान करना है, जो 2047 तक विकसित भारत में योगदान देना चाहते हैं। मंत्री सारंग ने बताया कि प्रदेश के 3.80 लाख युवाओं ने माय भारत पोर्टल में ऑनलाइन पंजीयन किया है और सरकार ने 6 लाख युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। मंत्री सारंग ने कहा कि इस वर्ष मध्यप्रदेश के लिए ट्राइबल लीडरशिप, नेचुरल रिसोर्सेस और इन्क्लूसिव डेवलपमेंट थीम निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के युवाओं को नए अवसर मिल रहे हैं। विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग युवा प्रतिभा को निखारने का सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रदेश के युवा बड़ी संख्या में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। अंतिम चरण में चयनित युवा 10-12 जनवरी 2027 को प्रधानमंत्री मोदी के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। प्रतियोगिता की महत्वपूर्ण तिथियां मंत्री सारंग ने बताया कि 17 अगस्त-30 सितंबर तक विकसित भारत क्विज, 5-19 अक्टूबर तक विकसित भारत निबंध प्रतियोगिता, 10-16 नवंबर जिला चैंपियनशिप, 17 नवंबर–7 दिसंबर राज्य स्तरीय और 10-12 जनवरी, 2027 राष्ट्रीय स्तर, नई दिल्ली इन दिनांकों में निर्धारित कार्यक्रम चरणबद्ध तरीकों से किए जाएंगे। विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग युवा प्रतिभा को निखारने का सशक्त मंच मंत्री सारंग ने बताया कि विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग युवा प्रतिभा को निखारने का एक सशक्त मंच है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बढ़ चढ़ कर मध्यप्रदेश के युवा प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं। यह कार्यक्रम देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवाओं को आपस में संवाद करने, विभिन्न संस्कृतियों को समझने तथा भारत की विविधता का सम्मान एवं उत्सव मनाने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं की नेतृत्व क्षमता एवं विविध प्रतिभाओं को प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराना, जिसमें लोकगीत, लोकनृत्य, चित्रकला, भाषण, कविता लेखन आदि क्षेत्र शामिल हैं। क्विज़ से लेकर चैंपियन तक विकसित भारत चैलेंज 5 चरणों वाले मार्ग का अनुसरण करेगा। पहले चरण में (विकसित भारत प्रश्नोत्तरी): डिजिटल क्विज प्रतियोगिता MY Bharat पोर्टल आयोजित की जा रही है। दूसरे चरण में (निबंध लेखन और मूल्यांकन) डिजिटल क्विज प्रतियोगिता में चयनित प्रतिभागी शामिल होंगे। फिर भारत सरकार द्वारा प्राप्त विषयों का निबंध का मूल्यांकन राज्य स्तर पर किया जाएगा। तीसरे चरण में (जिला स्तर पर पीपीटी प्रतियोगिता और मूल्यांकन) निबंध प्रतियोगिता में चयनित प्रतिभागी जिला स्तर पर निर्धारित विषयों में पीपीटी प्रस्तुतीकरण देंगे। फिर जिला स्तर पर मूल्यांकन एवं चयन होगा। चौथे चरण में (राज्य स्तर पर पीपीटी प्रतियोगिता और मूल्यांकन) जिला स्तर पर चयनित प्रतिभागी राज्य स्तर पर निर्धारित विषयों में पीपीटी प्रस्तुतीकरण देंगे। फिर राज्य स्तर पर मूल्यांकन एवं चयन होगा। और अंतिव व पांचवें चरण में (राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता) भारत मंडपम, नई दिल्ली: राज्य स्तर पर चयनित युवा माननीय प्रधानमंत्री के समक्ष राष्ट्रीय युवा महोत्सव में सहभागिता करेंगे। युवा प्रतिभा, नेतृत्व और नवाचार को प्रदर्शित करने वाली 6 श्रेणियां VBYLD-2027 (विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग) 6 प्रमुख श्रेणियों के माध्यम से युवाओं के लिए कई अवसर उपलब्ध कराएगा। विकसित भारत चैलेंज (यह प्रमुख मंच है जो युवाओं को प्रश्नोत्तरी, निबंध प्रतियोगिता और प्रस्तुति-आधारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से 2047 तक विकसित भारत के लिए अभिनव विचारों और समाधानों को व्यक्त करने में सक्षम बनाता है), सांस्कृतिक प्रतियोगिता (लोकनृत्य, लोकगीत, चित्रकला, भाषण कला और कविता लेखन प्रतियोगिताएं, जो युवाओं को भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करेंगी), भारत के लिए डिजाइन (वास्तविक दुनिया की विकासात्मक चुनौतियों के लिए समाधान विकसित करने पर केंद्रित एक राष्ट्रीय डिजाइन प्रतियोगिता), हैकिंग फॉर सोशल कॉज (एक टेक्नोलॉजी-आधारित नवाचार चुनौती जो सामाजिक और विकासात्मक चुनौतियों के लिए स्केलेबल डिजिटल समाधान आमंत्रित करती है), युवा उद्यमी चुनौती (VBYLD 2027 के लिए एक नया ट्रैक, जो युवा उद्यमियों को राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप स्टार्टअप पिच और व्यावसायिक योजनाएं प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित करता है) और युवा संसद (इसे VBYLD 2027 में एकीकृत किया गया है, जिसके राष्ट्रीय फाइनलिस्ट राष्ट्रीय VBYLD में भाग लेंगे) शामिल हैं।